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Date: 2023-12-20 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में आवंटित औद्योगिक एवं आई0टी0/ आई0टी0ई0एस0 भूखण्डों की क्रियाशीलता के सम्बन्ध में।

Issued by औद्योगिक विकास विभाग · औद्योगिक विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

**कार्यकारी सारांश:** यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में आवंटित औद्योगिक और आईटी/आईटीईएस भूमि के क्रियान्वयन से संबंधित है। यह 03 जून, 2022 को अधिसूचित उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976 की धारा-7 में संशोधन के माध्यम से प्रावधानों में संशोधन करता है और 31 दिसंबर, 2024 तक आवंटन के स्वत: निरस्तीकरण की समय सीमा बढ़ाता है ताकि औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा सके। **मुख्य बातें / मुख्य सामग्री:** *संशोधित प्रावधान* * जहां 28.07.2020 से पहले किसी औद्योगिक इकाई या आईटी/आईटीईएस इकाई की स्थापना के लिए भूमि आवंटित की गई है, और प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार 28.07.2020 तक उपयोग नहीं किया गया है, और 28.07.2020 तक पट्टा विलेख के निष्पादन की तारीख से आठ साल या आवंटित अवधि समाप्त हो गई है, प्राधिकरण ऐसे आवंटिती को 31.12.2022 तक कम से कम तीन महीने पहले सूचित कर सकता है कि वह आवंटित उद्देश्य के लिए भूमि का उपयोग करे, और आवंटिती विफलता के परिणामों के प्रति सचेत रहे। * अगर आवंटिती 31.12.2022 तक भूमि का उपयोग करने में विफल रहता है, तो आवंटन और पट्टा विलेख 31.12.2022 को स्वतः रद्द हो जाएंगे, और भूमि प्राधिकरण के पास निहित हो जाएगी। *स्पष्टीकरण:* * संशोधन से कोई भी आवंटी/इकाई आठ साल की अवधि पूरी करने का दावा करने का हकदार नहीं होगा। उपयोग के लिए नियत अवधि आवंटन की शर्तों और प्राधिकरण की नीति के अनुसार शासित होगी। * आवंटन और पट्टा विलेख के निरस्तीकरण पर, प्राधिकरण की नीति के अनुसार आवंटिती द्वारा जमा की गई प्रतिसंदाय की जाएगी। *स्वचालित निरस्तीकरण:* * ऐसे औद्योगिक भूखंड और आईटी/आईटीईएस भूखंड, जिनके लीज विलेख निष्पादित होने के बाद 28.07.2020 से अधिक 08 वर्ष की अवधि बीत चुकी है या लीज विलेख में नियत अवधि बीत जाने के बाद भी आवंटित भूखंड पर यूनिट फंक्शनल या मिनिमम कम्प्लीशन नहीं किया गया है, के लिए 31.12.2022 आवंटन के स्वतः निरस्तीकरण मानते हुए भूखण्ड अथॉरिटी में निहित किए जाने के प्राविधान हैं। *समय सीमा विस्तार:* * प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने तथा रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देने के लिए 31.12.2024 तक विस्तार। **प्रभाव विश्लेषण:** **हितधारक:** औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा, यूपीसीडा, गीडा, सीडा) *प्रभाव:* औद्योगिक भूमि का उपयोग और आवंटन प्रावधों का प्रबंधन। *आवश्यक कार्रवाई:* संशोधित प्रावधनों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना और हितधारकों को समय सीमा के बारे में सूचित करना। **हितधारक:** भूमि प्राप्त करने वाले औद्योगिक इकाइयाँ और आईटी/आईटीईएस इकाइयाँ। *प्रभाव:* पट्टे पर दी गई भूमि के लिए समय सीमा का पालन और आवंटन और पट्टा विलेख के संभावित निरस्तीकरण से बचना। *आवश्यक कार्रवाई:* भूमि का उपयोग सुनिश्चित करना और प्राधिकरण की नीतियों का पालन करना।

Key Entities Referenced

उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976: एक राज्य कानून जो औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को नियंत्रित करता है, विशेष रूप से धारा 7 जिसमें संशोधन किया गया है। औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा/ग्रेटर नोएडा/यीडा/यूपीसीडा/गीडा/सीडा): औद्योगिक विकास के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण, विशेष रूप से भूमि आवंटन और उपयोग से संबंधित मामले। आई०टी०/आई०टी०ई०एस० भूखण्ड: सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं की इकाइयों की स्थापना के लिए आवंटित भूखंड। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन: औद्योगिक विकास के लिए जिम्मेदार विभाग।
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संख्या-7 Tuc, /20203/7779/77-4-23-39UaA/20 मनोज कुमार सिंह, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा/ग्रेटर नोएडा/यीडा/यूपीसीडा/गीडा/सीडा | औद्योगिक विकास अलुभाग-4 लखनऊ: ats: 20 दिसम्बर, 2023 विषय-औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में आवंटित औद्योगिक एवं आईए0टी0/ आई0टी0ई0एस0 भूखण्डों भूखण्डों की क्रियाशीलता के सम्बन्ध में। महोदय, शासन की अधिसूचना ULAT-300/79-Ta-I-2022--ch-3-2022, दिनांक 03 जून, 2022 के द्वारा उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास afeieaa-i976 की धारा-7 में संशोधन करते हुए निम्नलिखित प्राविधान किए गए:- 2- उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 976 की धारा-7 में परन्तुक के स्थान पर निम्नलिखित Wer रख दिया जायेगा, अर्थात्‌:- Wed यह कि, (क) जहाँ कोई भूमि किसी औद्योगिक इकाई और/अथवा किसी सूचना प्रौद्योगिकी/सूचना प्रौयोगिकी समर्थकृत सेवा इकाइयों (आईए0टी0/ आई0एटी0इ0एस0) की स्थापना हेतु दिनांक 28.07.2020 के पूर्व vee पर आवंटित की गई है ; तथा (ख) उक्त भूमि. का. उपयोग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानदंडों के. अनुसार (क्रियाशील/न्यूनतम अधिभोग) दिनांक 28.07.2020 तक न किया गया हो ; तथा (ग) पट्टा facta का निष्पादन किये जाने के दिनांक से आठ वर्ष की अवधि अथवा आवंटन की निबंधन और शर्तों के अनुसार ऐसे उपयोग के लिए नियत अवधि, जो भी अधिक हो दिनांक 28.07.2020 तक व्यतीत हो चुकी हो ; तथा (a) प्राधिकरण द्वारा ऐसे आवंटी को दिनांक 37.2.2022 के कम से कम तीन माह पूर्व उक्त भूमि का उपयोग दिनांक 3.2.2022 तक उस प्रयोजन के लिए जिसके लिए वह आवंटित की गई हो, करने के लिए नोटिस दी जा चुकी हो, तथा आवंटी को ऐसा करने से विफल सम्बन्धी यथा उल्लिखित परिणामों से अवगत करा दिया गया हो ; तथा (S.) उक्त आवंटी द्वारा दिनांक 34.2.2022 तक भूमि का उपयोग न किया जाय ; 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |तो उक्त आवंटन तथा पट्टा विलेख दिनांक 34.:2.2022 को स्वतः रद्द हुआ माना जाएगा तथा उक्त भूमि प्राधिकरण में निहित हो जाएगी”, Weg यह और कि राज्य सरकार किसी सामान्य अथवा विशेष आदेश से उक्त परन्तुक में उल्लिखित ऐसे Ten तथा faa किये जाने के दिनांक को विनिधान प्रोत्साहन तथा रोजगार सृजन के हित में बढ़ा सकती है। स्पष्टीकरण - i:- पूर्वक्त संशोधन से कोई आवंटी/इकाई, न्यूनतम आठ वर्ष की अवधि पूरा करने हेतु दावा करने का हकदार नहीं होगा। ऐसे उपयोग हेतु नियत अवधि आवंटन की निबंधनों और शर्तों तथा सम्बन्धित प्राधिकरण की नीति से शासित होंगी जिसमें समय वृद्धि और अन्य हितों तथा प्रभारी की उपयोज्यता सम्मिलित है। स्पष्टीकरण - 2:- आवंटन तथा पट्टा विलेख के ऐसे रदकरण तथा भूमि को प्राधिकरण मैं निहित किये जाने पर आवंटी द्वारा जमा की गयी धनराशि का प्रतिसंदाय संबंधित प्राधिकरण की नीति के अनुसार किया जाएगा। “' 2 उपरोक्त अधिसूचना के द्वारा ऐसे औद्योगिक भूखण्ड एवं आई.टी./आई.टी.ई.एस. के भूखण्ड जिनके लीज डीड निष्पादित होने के उपरान्त दिनांक 28.07.2020 को 08 वर्ष से अधिक अवधि व्यतीत हो चुकी है अथवा लीज Se में नियत अवधि व्यतीत होने के उपरान्त भी आवंटित भूखण्ड पर यूनिट फंक्शनल अथवा मिनिमम कम्प्लीशन नहीं किया गया है, के लिए दिनांक 34.2.2022 आवंटन के स्वतः निरस्तीकरण मानते हुए भूखण्ड अथॉरिटी में निहित किए जाने के प्राविधान हैं। 3. .... उपरोक्त अधिसूचना के प्राविधानों मैं प्रदत्त की गयी शक्तियों/अधिकारों का प्रयोग करते हुए आवंटन स्वतः निरस्त माने जाने तथा भूखण्ड को प्राधिकरण में निहित किए जाने की तिथि को सम्यक्‌ विचारोपरान्त प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने तथा रोजगार सृजन के प्रोत्साहन के दृष्टिगत दिनांक 3.42.2024 तक बढ़ाया जाता है। भवदीय, (मनोज कुमार सिंह) अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त। I- Be शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |

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