Date: 2022-10-14Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
लघु तथा मध्यम उद्यमों की परिभाषा के परिवर्तन के सापेक्ष उ0प्र0 अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2017 में प्रस्तावों के प्रसंस्करण एजेन्सी के निर्धारण के संबंध में।
ज़रूर, यहां बताए गए प्रारूप का उपयोग करके नीति पाठ का सारांश दिया गया है:
**कार्यकारी सारांश:**
यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की परिभाषाओं में बदलाव के संदर्भ में उत्तर प्रदेश अवसंरचना और औद्योगिक निवेश नीति-2017 के तहत औद्योगिक निवेश प्रस्तावों के प्रसंस्करण के लिए एजेंसियों को निर्दिष्ट करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य नीति के कार्यान्वयन में एकरूपता सुनिश्चित करना है। 14 अक्टूबर, 2022 को जारी, यह पत्र मौजूदा दिशानिर्देशों को स्पष्ट करता है और नोडल एजेंसियों के लिए कार्रवाई प्रदान करता है।
**मुख्य बातें / मुख्य सामग्री:**
* **MSME परिभाषा अद्यतन:**
* यह पत्र भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी, MSME की परिभाषा के परिवर्तन को स्वीकार करता है।
* उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के कार्यान्वयन के लिए नियामक ढांचे के भीतर इन अद्यतनों पर विचार किया जाना चाहिए।
* **पूंजी निवेश परिभाषाएँ:**
* नीति पूंजी निवेश को औद्योगिक इकाइयों को वर्गीकृत करने और प्रोत्साहन और लाभों की पात्रता निर्धारित करने के लिए एक प्रमुख मानदंड के रूप में परिभाषित करती है।
* नए पूंजी निवेश (विस्तार और विविधीकरण सहित) मौजूदा मानदंडों को पूरा करना चाहिए, और केवल नई निवेशित राशि को ही गणना में शामिल किया जाना चाहिए।
* **कार्रवाई योग्य आइटम:**
* नोडल एजेंसियों (पीकप, मंडल आयुक्त और जिला उद्योग केंद्र सहित) को यह सुनिश्चित करना होगा कि जारी किए गए निर्देश स्पष्ट रूप से समझे जाएं और उनका पालन किया जाए।
* जिन मामलों में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया गया है, उन्हें उसी श्रेणी में माना जाना चाहिए।
* जिन मामलों में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाना बाकी है, उन्हें एमएसएमई की परिभाषा के अनुसार संसाधित किया जाना चाहिए, जैसा कि भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 1 जून, 2020 में दिया गया है।
**प्रभाव विश्लेषण**
**हितधारक:** पिकप (नोडल एजेंसी), समस्त मण्डल आयुक्त, उपायुक्त उद्योग और जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र
* **प्रभाव:** उपरोक्त हितधारक MSME की संशोधित परिभाषाओं और उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के तहत निवेश प्रस्तावों से संबंधित दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
* **आवश्यक कार्रवाई:** इन हितधारकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नीति को लागू करते समय निर्देशों का स्पष्ट रूप से समझा और पालन किया जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कार्रवाई भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 01.06.2020 में परिभाषित श्रेणियों के अनुसार हो, लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने से संबंधित सभी मामलों पर संसाधित किया जाना चाहिए।
Key Entities Referenced
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017: उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006: भारत सरकार का एक अधिनियम जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 01.07.2020: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को बदलती है।
औद्योगिक विकास अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश शासन: उत्तर प्रदेश सरकार का वह विभाग जो औद्योगिक विकास से संबंधित मामलों को देखता है।
पिकप: नोडल एजेंसी और समस्त मण्डल आयुक्त, एवं उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र।
UCA-43/2022/2533/77-6-2022-5(WaA)/20i72.a.-0
प्रेषक,
अरविन्द कुमार,
अपर मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
|. प्रबन्ध निदेशक,
पिकप, पिकप भवन गोमतीनगर, लखनऊ।
2. आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग,
उद्योग निदेशालय, कानपुर |
3. समस्त मण्डलायुक्त, उ0प्र0।
4. समस्त जिला उपायुक्त,
उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र, उ0प्र0|
औद्योगिक विकास अनुभाग-6 लखनऊ : दिनांक i4 अक्टूबर, 2022
विषय: त्रघु तथा मध्यम उद्यमों की परिभाषा के परिवर्तन के सापेक्ष उ0प्र0
अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश aAlfa-20i7 में प्रस्तावों के प्रसंस्करण
एजेन्सी के निर्धारण के संबंध मैं।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के संबंध में अवगत कराना है कि भारत सरकार की
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना,
जो दिनांक 04.07.2020 से प्रभावी है, के परिप्रेक्ष्य में शासन के पत्र संख्या-
4070/77-6-2020-5(VA)/20I72.7.-0 दिनांक (8.42.2020(0fa संलग्न)
द्वारा जारी निर्देश का अवलोकन करने का कष्ट करें।
2. इस संबंध में अवगत कराना है कि उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार
प्रोत्साहन aATA-207 की क्रियान्वयन नियमावली के प्रस्तर-2.3 द्वारा लघु एवं
मध्यम औद्योगिक उपक्रमों, वृहद औद्योगिक उपक्रमों एवं मेगा औद्योगिक
उपक्रमों में पूँजीगत निवेश को परिभाषित किया गया है। नीति के अधीन किसी
आवेदक औद्योगिक उपक्रम की श्रेणी के निर्धारण, सुविधाओं की प्रतिपूर्ति की
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |मात्रा, सीमा एवं अवधि के निर्धारण हेतु पूँजीगत निवेश को ही मानदण्ड माना
गया है। उदाहरणार्थ, नियमावत्री के WAL-2.0.l मैं लघु एवं मध्यम उद्यम
हेतु निवेश सीमा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, की
धारा-7 से लिंक किया गया है एवं प्रस्तर- 2.0.2 cant उक्त निवेश सीमा से
अधिक निवेश वृहद श्रेणी में मान्य किया गया है। तदनुसार यद्यपि भारत
सरकार दूवारा जारी गजट अधिसूचना में निवेश के अलावा टर्नओवर जैसे
मानदण्ड का उल्लेख किया गया है, Wed यह नियमावलत्नी के अन्तर्गत लघु एवं
मध्यम औद्योगिक उपक्रमों अथवा वृहद औद्योगिक उपक्रमों की श्रेणी के
निर्धारण हेतु प्रासंगिक नहीं है। इसके अलावा, किसी आवेदक इकाई द्वारा
प्रस्तावित अथवा किया गया नया पूंजीगत निवेश, चाहे नई इकाई की स्थापना
हेतु अथवा विस्तारीकरण/विविधीकरण के अन्तर्गत नियमावत्री के WEAL-2.3
मैं उल्लिखित मानदण्ड के अनुरूप किया गया हो, ही उक्त आवेदक की श्रेणी के
वर्गीकरण हेतु मान्य होगा। यह भी स्पष्ट है कि किसी इकाई aN उसके
अवस्थान A किये गये नए निवेश को ही गणना मैं सम्मिलित किया जाना
होगा। इकाई के अवस्थान पर पूर्व स्थापित इकाई, अथवा आवेदक दूवारा Arar
कार्यरत इकाईयों के निवेश को, आवेदक औद्योगिक उपक्रम की श्रेणी के
निर्धारण हेतु आगणन मैं सम्मिलित नहीं किया जायेगा।
3... अतः इस संबंध मैं मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि शासनादेश
संख्या-4070/77-6-2020-05(एम)/।7टी.सी.-0 दिनांक 78.42.2020 द्वारा
औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन aAlfa-20I7 में प्रस्तावों के प्रसंस्करण
एजेन्सी के निर्धारण के सम्बन्ध में जारी निर्देशों को स्पष्ट करते हुए नोडल
संस्था पिकप एवं समस्त मण्डल आयुक्त, एवं उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग
Ud उद्यम प्रोत्साहन केन्द्रों दवारा निम्नानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की
जाएगीः:-
“अ. ऐसे प्रकरण, जिनको तत्समय लागू परीक्षण परिभाषा के अनुसार लेटर
ऑफ कम्फर्ट जारी किया जा चुका है, उनको उसी श्रेणी का मानते हुए कार्यवाही
की जाए।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |gq. ऐसे प्रकरण, जिनमें लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाना लम्वित है,
उनमें भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 0.06.2020 में मध्यम उद्यम हेतु
संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में निवेश की निर्धारित सीमा से Hest
राशि के सभी प्रस्ताव औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-207 की
क्रियान्वयन नियमावली के प्रस्तर-2.3.] “पूँजीगत निवेश” एवं weae-2.0.4
“पात्र औद्योगिक उपक्रम” A उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार मध्यम
औद्योगिक उपक्रम की श्रेणी मैं संबंधित उपायुक्त, उद्योग, जिला उद्योग एवं
उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र दूवारा प्रसंस्करित किए जाएंगे।”
भवदीय,
अरविन्द कुमार
अपर मुख्य सचिव।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |qeM:-40}0/77-6-2020-05(tH)7A0aI0-0
प्रेषक, ं
रजनी कान्त पाण्डेय,
अनु सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन
सेवा में,
प्रबन्ध निदेशक,
पिकप,
पिकप भवन, गोमतीनगर, TEAS |
औद्योगिक विकास अनुभाग-6 लखनऊ : दिनांक! & दिसम्बर, 2020
विषय:-लघु तथा मध्यम उद्यमों की परिभाषा में परिवर्तन के सापेक्ष उत्तर प्रदेश अवस्थापना एवं
औद्योगिक नीति-207 में प्रस्तावों के प्रसंस्करण एजेन्सी के निर्धारण के संबंध में ।
महोदय, |
उपर्युक्त विषयक पिकप के पत्रांक /एम.एस.एम.ई .डी.एक्ट/580, दिनांक 79.08.2020
का कृपया संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें। उक्त पत्र द्वारा भारत सरकार की सूक्ष्म,लघु और .
मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 0। जून,2020 को जारी अधिसूचना, जो दिनांक 07.
07.2020 से प्रभावी हैं, के द्वारा सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम विकास अधिनियम 2006 की धारा 7
के अन्तर्गत लघु तथा मध्यम उद्यमों के मानदण्डों को अधिसूचित किये जाने के उपरान्त मार्गदर्शन
उपलब्ध कराने अनुरोध किया गया है।
2... इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि प्रश्नगत प्रकरण में भारत सरकार
की नई अधिसूचना के परिप्रेक्ष्य में निम्नानुसार कार्यवाही किया जाना समीचीन होगा-
7. ऐसे प्रकरण, जिनको तत्समय लागू परीक्षण परिभाषा के अनुसार लेटर आफ कम्फर्ट जारी
किया जा चुका है, उनको उसी श्रेणी का मानते हुए कार्यवाही की जाए।
2. ऐसे प्रकरण, जिनमें लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाना लम्बित है, उनमें भारत सरकार
की अधिसूचना दिनांक 07.06.2020 के अनुसार परिभाषित श्रेणियों के अनुरूप कार्यवाही
की जाए।
भवदीय,
ML
( रजनी ara पाण्डेय )
अनु सचिव |