Date: 2015-12-07Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
प्रदेश में रूग्ण औद्योगिक कम्पनीज (विशेष उपबन्ध्) अधिनियम, 1985 के तहत मा0 बी0आई0एफ0आर0 सन्दर्भित प्रकरणों पर राज्य् सरकार की ''एकमुश्त पुनर्वासन नीति'' का कार्यान्व्यन।
**कार्यकारी सारांश**
यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश में बीमार औद्योगिक कंपनियों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 के तहत बीआईएफआर को संदर्भित मामलों पर राज्य सरकार की 'एकमुश्त पुनर्वासन नीति' के कार्यान्वयन से संबंधित है। इस नीति का उद्देश्य बीआईएफआर में पंजीकृत बीमार औद्योगिक इकाइयों के पुनर्वास की सुविधा प्रदान करना है, जिससे निष्क्रिय परिसंपत्तियों को पुनर्जीवित किया जा सके, नए पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके, रोजगार सृजित किया जा सके और राज्य सरकार के बकाया की वसूली को सक्षम किया जा सके। इसके तहत, नीति का लक्ष्य वर्ष 1989 और 1991 में जारी मौजूदा सरकारी आदेशों को प्रतिस्थापित करना है, और इसके लिए 7 दिसंबर, 2015 से प्रभावी रूप से विभिन्न पात्र इकाइयों के लिए एक नया ढांचा स्थापित करना है।
**मुख्य बातें**
* **पात्रता:**
* इकाई को पिछले 25 वर्षों में कम से कम 10 वर्षों के लिए वाणिज्यिक उत्पादन करना चाहिए।
* इस नीति के प्रभावी होने से पहले इकाई को बीआईएफआर के साथ पंजीकृत होना चाहिए और बीमार घोषित किया जाना चाहिए, और इसे पिछली योजनाओं के तहत पुनर्वासित नहीं किया गया हो।
* **आवश्यकताएं:**
* शासनादेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर आवेदन करें।
* पुनर्वासन के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी के स्रोत इंगित करें।
* राज्य के बकाया का 5% या 2 करोड़ रुपये (जो भी अधिक हो) की धरोहर राशि अग्रिम के रूप में जमा करें।
* **मौलिक शर्तें:**
* यदि पुनर्वासन पैकेज के नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो पैकेज रद्द कर दिया जाएगा और धरोहर राशि जब्त कर ली जाएगी।
* इकाई को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी देय राशि का भुगतान करना चाहिए।
* बीआईएफआर द्वारा पुनरुद्धार पैकेज के अनुमोदन से पहले, राज्य सरकार राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सुविधाएँ देना शुरू कर देगी। पुनर्वास इकाई को अन्य संस्थाओं से आवश्यक रियायतें और अनुमतियाँ प्राप्त करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
* इस नीति के तहत सुविधाएं प्रदान करने की अवधि उस तारीख से शुरू होगी, जिस तारीख से पुनर्वासन पैकेज के लिए सरकारी आदेश जारी किया जाएगा।
* **रियायतें:**
* बिक्री कर, मूल्य वर्धित कर (वैट), केंद्रीय बिक्री कर, उत्पाद शुल्क, मंडी शुल्क और बिजली बकाया सहित पुराने बकाया का 10 समान वार्षिक किश्तों में भुगतान करने की अनुमति है, जिसमें 2 साल की मोहलत भी शामिल है।
* मूल बकाया पर कोई ब्याज, अधिभार या शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
* इकाई के बंद होने की अवधि के दौरान न्यूनतम माँग शुल्क सहित ऊर्जा विभाग द्वारा लगाए गए ब्याज, अधिभार और शुल्क माफ किए जा सकते हैं।
* इस नीति के तहत पुनर्वासन आदेश जारी होने से पहले और बाद की अवधि के लिए इकाई को कच्चे माल की खरीद पर वैट और केंद्रीय बिक्री कर (जीएसटी पर राज्य के हिस्से) में 85% तक की वापसी मिल सकती है, बशर्ते इकाई पहले इन देय राशि का भुगतान करे।
* यदि इकाई विस्तार या विविधीकरण करती है, तो नए उद्यमों से जुड़े वैट और केंद्रीय बिक्री कर (जीएसटी पर राज्य के हिस्से) देय राशि के लिए भी वही सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
* **नई इकाइयों की स्थापना:**
* यदि प्रमोटर वर्तमान से अलग उत्पाद के साथ एक ही परिसर या यूपी में कहीं और नई इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखते हैं, तो इकाई को पुनर्वासन पैकेज के हिस्से के रूप में माना जा सकता है यदि प्रस्तावित इकाई बीमार कंपनी के नाम पर है।
* नई इकाई स्थापित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।
* नई इकाई को स्टाम्प ड्यूटी और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में छूट सहित औद्योगिक निवेश नीति, 2012 के तहत अन्य सभी लाभ भी प्राप्त होंगे।
* **अन्य प्रावधान:**
* श्रम संबंधी मुद्दों में राज्य सरकार आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।
* आवश्यकता पड़ने पर रुग्ण इकाई के उद्यमियों के उत्तराधिकारियों को बिना किसी हस्तांतरण शुल्क के पट्टे का हस्तांतरण और नवीनीकरण की सुविधा दी जाएगी।
* यदि रुग्ण इकाई के पास कोई सरप्लस भूमि उपलब्ध है तो इकाई के अनुरोध पर पुनर्वासन में मदद मिलने के औचित्य पर, राज्य सरकार पूर्व अनुमति से सरप्लस भूमि की बिक्री की अनुमति दे सकती है।
* **समिति और एजेंसी:**
* एक राज्य-स्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करते हैं, का गठन इस नीति को लागू करने के लिए किया गया है।
* पिकप नोडल एजेंसी होगी जो रुग्ण इकाईयों को पुनर्वासन पैकेज को तैयार कराने में सहायता प्रदान करेगी। इसके लिए रुग्ण इकाई द्वारा पिकप को रू0 10.00 लाख पुनर्वासन शुल्क के रूप में आवेदन पत्र के साथ देना होगा।
**प्रभाव विश्लेषण**
**प्रमुख हितधारक:** उत्तर प्रदेश सरकार
* **प्रभाव:** पुरानी रुग्ण इकाइयों को पुनर्जीवित करना, राजस्व उत्पन्न करना और राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** इस नीति के क्रियान्वयन के लिए एजेंसियों और विभागों को निर्देश जारी करना।
**प्रमुख हितधारक:** रुग्ण औद्योगिक इकाइयां
* **प्रभाव:** एकमुश्त पुनर्वासन नीति के तहत दी जाने वाली रियायतों और सुविधाओं से इकाई के पुनर्वास का अवसर प्राप्त करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** नीति के तहत पात्र होने, आवश्यक दस्तावेज जमा करने और पुनर्वासन पैकेज के नियमों का पालन करने के लिए आवेदन करें।
**प्रमुख हितधारक:** रुग्ण इकाइयों के प्रमोटर/मालिक
* **प्रभाव:** अपनी रुग्ण इकाइयों को पुनर्जीवित करके राज्य सरकार के सहयोग से अपने व्यवसाय को पुनर्जीवित करने का अवसर।
* **आवश्यक कार्रवाई:** पुनर्वासन के लिए आवेदन करना, आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना, राज्य सरकार के साथ सहयोग करना और यह सुनिश्चित करना कि इकाई पैकेज की शर्तों के अनुसार काम करे।
**प्रमुख हितधारक:** औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर)
* **प्रभाव:** पुनर्वासन प्रस्तावों का मूल्यांकन करना और अनुमोदन करना और राज्य सरकार के प्रयासों के साथ समन्वय करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** इस नीति के आलोक में राज्य सरकार के साथ मिलकर पुनर्वासन प्रस्तावों की समीक्षा और अनुमोदन करें।
**प्रमुख हितधारक:** बैंक और वित्तीय संस्थान
* **प्रभाव:** ऋण के पुनर्गठन, नई क्रेडिट लाइनों और अन्य वित्तीय सहायता के माध्यम से पुनर्वासन प्रयासों का समर्थन करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** व्यवहार्य पुनर्वासन योजनाओं का मूल्यांकन करना और बीमार इकाइयों का समर्थन करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करना।
**प्रमुख हितधारक:** मजदूर
* **प्रभाव:** रोजगार बनाए रखने और अपने पुनर्जीवित होने की संभावना को बढ़ाना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** पुनर्वासन प्रक्रिया में सहयोग करें और नौकरियों को बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और कौशल वृद्धि में भाग लें।
Key Entities Referenced
रुग्ण औद्योगिक कम्पनीज (विशेष उपबन्ध) अधिनियम, 1985: उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश) राज्य में लागू रुग्ण औद्योगिक इकाइयों के पुनर्वासन से संबंधित एक कानून।
बी0आई0एफ0आर0 (औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड): रुग्ण औद्योगिक इकाइयों से संबंधित मामलों को देखने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संस्था।
"एकमुश्त पुनर्वासन नीति": बी0आई0एफ0आर0 द्वारा संदर्भित मामलों में राज्य सरकार द्वारा कार्यान्वित एकमुश्त निपटान योजना।
पिकप (उत्तर प्रदेश प्रादेशिक औद्योगिक और निवेश निगम): राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नोडल एजेंसी रुग्ण औद्योगिक इकाइयों को पुनर्वास पैकेज तैयार करने में सहायता करती है और पुनर्वास पैकेज को लागू भी करती है।
औद्योगिक निवेश नीति, 2012: यह नीति रुग्ण इकाइयों को वह सभी सुविधाएँ प्रदान करती है जो औद्योगिक निवेश नीति, 2012 के अंतर्गत अनुमन्य हैं।
संख्या- 2/ 2045/ 70/ 77--205- i0(3TseH3IR)/ 09टीसी
प्रेषक,
आलोक रंजन,
मुख्य सचिव,
उ0प्र0 शासन।
सेवा मैं,
समस्त प्रमुख सचिव/ सचिव,
उ0प्र0 शासन।
औद्योगिक विकास अलुभाग- लखनऊ, दिनांक, 07 दिसम्बर, 2045
विषय :- प्रदेश में wor औद्योगिक कम्पनीज (विशेष उपबन्ध) अधिनियम, 985 के तहत ao
बी0आई0एफ0आर0 Peak प्रकरणों पर राज्य सरकार की "एकमुश्त पुनर्वासन नीति" का
कार्यान्वयन।
महोदय,
उपरोक्त विषय पर मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि भारत सरकार द्वारा BUT औद्योगिक
कम्पनियां (विशेष उपबन्ध) अधिनियम (सीका), 985 के अन्तर्गत औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड
(बी0आई0एफ0आर0) द्वारा गैर लघु क्षेत्र की रूगण औद्योगिक इकाईयों के प्रकरणों में रियायतें/ सुविधाएं दिए
जाने हेतु वर्ष i989 में "पालिसी पैरामीटर्स" निर्धारित किए गये थे, जो उद्योग अनुभाग-4 (वर्तमान में
औद्योगिक विकास विक्षाग) के शासनादेश संख्या- 720/ 8-4-89, दिनांक 29-04-4989 एवं शासनादेश
संख्या- 920/ 8-4-24(faa)/ 87, दिनांक 26-03-99 में निहित हैं।
कालान्तर में प्रदेश सरकार द्वारा उपरोक्त शासनादेशों द्वारा उदघोषित पुनर्वासन नीति के अन्तर्गत
रूगण इकाईयों के पुनर्वासन होने में पर्याप्त सफलता नहीं मिल पायी है। वर्ष 993 से बी0आई0एफ0आर0
में पंजीकृत लगभग 99 रूग्ण इकाईयों में से केवल i2 इकाईयों की पुनर्वासन योजना जारी हो सकी है।
पूर्व मैं पुनर्वासन पैकेज दिए जाने के पश्चात भी कतिपय wor इकाईयों पूर्ण रूप से पुनर्वासित नहीं हो
सकी हैं।
तब से अब तक बदले हुए आर्थिक परिवेश में तथा प्रतिस्फर्धात्मक परिद्दश्य में प्रदेश सरकार द्वारा
समय-समय पर घोषित औद्योगिक निवेश नीति में नये निवेश को तमाम सुविधायें अनुमन्य की गई हैं।
ऐसी तमाम सुविधाओं को रूगण इकाईयों को भी सुलभ कराते हुए WU इकाईयों के पुनर्वासन के लिए नये
पॉलिसी पैरामीटर्स बनाया जाना आवश्यक हो गया है। इससे जहाँ एक ओर प्रदेश में बन्द पड़ी WT
इकाईयों को पुन: चालू करने का एक अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नये पूंजी निवेश को प्रोत्साहन
मिलेगा, रोजगार सृजित होगा, राज्य सरकार के पुराने देयों की वसूली सम्भव हो सकेगी, भविष्य में राज्यसरकार के आय के Wa बढने की सम्भावना होगी एवं प्रदेश मैं निष्प्रयोज्य परिसम्पत्तियों को ya:
क्रियाशील बताया जा सकेगा।
2- उपरोक्त के आलोक A शासन द्वारा सम्यक विचारोपरान्त वर्तमान में शासनादेश संख्या- 720/ 8-
4-89, दिनांक 29-04-989 एवं शासनादेश संख्या- 920/ (8-4-24(TA)/ 87, दिनांक 26-03-99 को
अवक्रमित करते हुए, प्रदेश में wor औद्योगिक कम्पनीज (विशेष उपबन्ध) अधिनियम, 985 के तहत
बी0आई0एफ0आर0 Aaa प्रकरणों पर राज्य सरकार की "एकमुश्त पुनर्वासन नीति" निम्न शर्तों के
अधीन लागू किये जाने का निर्णय लिया गया है :-
क-.... रूगण इकाई पुनर्वासन हेतु अहँता :
() इकाई विगत 25 वर्षों में कम से कम 0 वर्ष तक वाणिज्यिक उत्पादन करने की स्थिति
में रही हो।
इस नीति के प्रभावी होने से पहले सम्बन्धित औद्योगिक इकाई बी0आई0एफ0आर0 में
पंजीकृत हो और बी0आई0एफ0आर0 द्वारा उसे Wo घोषित किया जा चुका हो और
सम्बन्धित इकाई वर्तमान नीति में तथा पूर्व मैं दी गई अन्य सुविधाओं/ yada पैकेज
के अन्तर्गत पुनर्वासित नहीं हो सकी हो।
ख- मौलिक शर्ते :
() रूगण इकाई को इस नीति सम्बन्धी शासनादेश जारी होने की तिथि से एक aw की
अवधि A आवेदन करना अनिवार्य होगा। शासनादेश जारी होने की तिथि तक जो
इकाईयां बी0आई0एफ0आर0 में पंजीकृत हो चुकी हैं और रूगण घोषित हो चुकी हैं, केवल
उन्हें ही इस नई पुनर्वासन नीति का लाभ दिया जायेगा।
रूगण इकाई को पुनर्वासित किये जाने हेतु जो कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होगी,
उसका स्रोत इकाई को आवेदन करते समय इंगित करना होगा।
सम्बन्धित रूग्ण इकाई के द्वारा राज्य के बकाया देयों का 5 प्रतिशत अथवा BO 2.00
करोड की धरोहर धनराशि, जो भी अधिक हो अग्रिम के रूप A जमा करना होगा। जिसे
शासन द्वारा नामित की गयी नोडल Vales द्वारा सावधिक जमा (एफ0डी0आर0) के रूप
मैं किसी भी राष्ट्रीकृत बैंक के लिए निवेशित किया जायेगा।
यदि इस नीति के अन्तर्गत पुनर्वासन पैकेज के नियम एवं शर्तों मैं किसी प्रकार की चूक
इकाई द्वारा की जाती है, तो इस नीति के तहत अनुमोदित पुनर्वासन पैकेज को निरस्त
कर दिया जायेगा तथा उपरोक्त अग्रिम राशि जब्त कर ली जायेगी।यदि BUT इकाई द्वारा पुनर्वासन पैकेज के अनुसार निर्धारित समयावधि में पुराने तथा
वर्तमान मैं सृजित होने वाले सभी देयों का समय पर भुगतान कर दिया जाता है तो
उपरोक्त पुनर्वासन अवधि समाप्त होने पर उक्त इकाई द्वारा जमा की गयी धरोहर
धनराशि, SA पर निवेश से अर्जित ब्याज सहित वापस कर दी जायेगी।
राज्य सरकार की इस नई नीति के अन्तर्गत वे सुविधाएं जो कि राज्य सरकार के
अधिकार क्षेत्र में आती हैं, को देने के लिए बी0आई0एफ0आर0 द्वारा पुनर्वासन
पैकेज/ संशोधित पुनर्वासन पैकेज के अनुमोदन के पूर्व राज्य सरकार उपलब्ध कराना
आरम्भ कर देगी, जिससे कि yada मैं और अधिक विलम्ब न हो, परन्तु राज्य
सरकार के. अतिरिक्त अन्य सम्बन्धित संस्थाओं द्वारा. दिए aa ait
रियायतें/ अनुतोषा/ अनुमति की यदि आवश्यकता है, तो उसको प्राप्त करने की जिम्मेदारी
रूग्ण इकाई की होगी।
इस नीति के अन्तर्गत जिस अवधि के लिये विभिन्न सुविधाएं दी जायेंगीं, उसकी गणना
उस तिथि से की जायेगी, जिस तिथि से सम्बन्धित इकाई के बारे में पुनर्वासन पैकेज का
शासनादेश निर्गत किया जायेगा।
ग- ..... पुनर्वासन हेतु अनुमन्य की जाने वाली Raa स°ुविधाएं
|
बी |
() रूगण इकाईयों को प्रदेश सरकार के समस्त पुराने मूल बकाया देय जैसे बिक्री कर, de,
केन्द्रीय व्यापार कर, व्यापार कर, राज्य आबकारी राजस्व (यथा लाइसेंस फीस, बेसिक
लाइसेंस फीस/ प्रतिफल फीस इत्यादि), मण्डी शुल्क, विदुत देयताएं इत्यादि, जिसमें पूर्व
में आस्थगित राशि भी सम्मिलित होगी एवं वैट/ व्यापार कर से सम्बन्धित ब्याज मुक्त
ऋण जो प्रदेश की वित्तीय संस्थाओं पिकप/ यू0पी0एफ0सी0 द्वारा धारा-4(क)/ धारा-38,
व्यापार कर अधिनियम के तहत देय हो, का भुगतान इस नीति के अन्तर्गत WU इकाई
को सुविधाएं एवं रियायतें शासनादेश जारी करने की तिथि से अगले i0 समान वार्षिक
किश्तों में 02 वर्षों के मोरेटोरियम के पश्चात भुगतान करने की सुविधा प्रदान की
जायेगी। इस बकाया राशि एवं ऋण पर सक्षम स्तर के अनुमोदन से इस नीति के
अन्तर्गत पुनर्वासन पैकेज आदेश जारी होने से पूर्व की अवधि एवं बाद की अवधि अर्थात
02 वर्ष मोरेटोरियम तथा i0 वार्षिक किश्तों के भुगतान की अवधि के समस्त पुराने मूल
बकाया cal आस्थगित भुगतान पर कोई ब्याज, सरचार्ज एवं अधिभार नहीं लगाया
जायेगा। पूर्व में लगाये गये ब्याज, Wat एवं अधिभार को माफ किया जायेगा।
वाणिज्य कर विभाग की देयताओं के सन्दर्भ में स्पष्ट किया जाता है कि पूर्व में लगाये
गये ब्याज, सरचार्ज एवं अधिभार को माफ करने के लिए विभाग के सक्षम अधिकारी
द्वारा आदेश प्रदान किया जायेगा।रूगण इकाई को पूर्व में यदि कोई पुनर्वासन पैकेज या संशोधित पुनर्वासन पैकेज राज्य
सरकार द्वारा दिया गया हो और इकाई इन पैकेज के अनुसार राज्य के विभिन्न
विभाग/ संस्था/ उपक्रम के देयों का भुगतान समय पर नहीं कर पाई हो और इन पुराने
eat के डिफाल्ट पर यदि किसी भी fas संस्था द्वारा कोई ब्याज या अधिकार या
सरचार्ज इत्यादि लगाया हो, तो उसे भी सम्बन्धित Ko इकाई से नहीं लिया जायेगा।
वाणिज्य कर विभाग की देयताओं के सन्दर्भ में स्पष्ट किया जाता है कि पूर्व में लगाये
गये ब्याज, सरचार्ज एवं अधिभार को माफ करने के लिए विभाग के सक्षम अधिकारी
द्वारा आदेश प्रदान किया जायेगा।
ऊर्जा विभाग द्वारा यदि विद्युत देयताओं पर कोई ब्याज, सरचार्ज एवं अधिभार लगाया
गया है, तो उसे माफ करने के सम्बन्ध में ऊर्जा विभाग, उत्तर प्रदेश faga नियामक
आयोग को एक प्रस्ताव भेजेगा, जिससे कि पूर्व में लगाये गये ब्याज, Was एवं
अधिभार को माफ किया जा सके। रूगण इकाई द्वारा देय वियुत बिल, इकाई के उत्पादन
के बन्द होने तथा विद्युत विच्छेदन की अवधि A लगाये गये मिनिमम Saws चार्जेज
शासनादेश जारी करने की तिथि से अगले i0 समान afte किश्तों A 02 वर्षों के
मोरेटोरियम के पश्चात भुगतान करना होगा तथा इस भुगतान की अवधि में आस्थगित
भुगतान पर कोई ब्याज, सरचार्ज एवं अधिभार नहीं लगाया जायेगा। ऊर्जा विभाग इस
सम्बन्ध में भी आवश्यकतानुसार उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से अनुमति प्राप्त
करेगा। पुनर्वासन के बाद वर्तमान विद्युत देयों का भुगतान पुनर्वासित इकाई द्वारा
नियमित रूप से किया जायेगा।
रूगण इकाई को इस एकमुश्त पुनर्वासन नीति के अन्तर्गत अगले i0 वर्षों तक प्रत्येक
वित्तीय वर्ष में de एवं केन्द्रीय बिक्री कर (जी0एस0टी0 लागू होने पर राज्य सरकार के
अंश का) के रूप में जमा की गयी धनराशि का 85 प्रतिशत धनराशि प्रतिवर्ष एकमुश्त
राशि के रूप में अगले वित्तीय वर्ष में वापस कर दी जायेगी, परन्तु पहले इकाई को इन
देयों का भुगतान नियमानुसार सम्बन्धित विभाग को करना होगा। यह 85 प्रतिशत
धनराशि वापसी की सुविधा इकाई को कच्चे माल की खरीद पर दिये गये de wd
केन्द्रीय बिक्री कर (जी0एस0टी0 लागू होने पर राज्य सरकार के अंश का) की धनराशि
पर भी दी जायेगी।
यदि रूग्ण इकाई पुनर्वासन हेतु वर्तमान इकाई में कोई विस्तारीकरण/ विविधीकरण करती
है, तो विस्तारीकरण/ विविधीकरण इकाई से सम्बन्धित de एवं केन्द्रीय बिक्री कर
(जी0एस0टी0 लागू होने पर राज्य सरकार के अंश का) देयों के बारे A भी उपरोक्त
सुविधाएं प्रदान की जायेंगीं।रूगण इकाई के पुनर्वासन को और कारगर करने के लिए यदि प्र्वतकों द्वारा नई इकाई की
उसी परिसर में अथवा उत्त्तर प्रदेश में अन्यत्र कहीं स्थापना का प्रस्ताव किया जाता है,
भले ही उसका उत्पाद वर्तमान इकाई से भिन्न क्यों न हो, उस दशा मैं इसे पुनर्वासन
पैकेज के अंश के रूप में तभी स्वीकार किया जायेगा, जबकि यह प्रस्तावित इकाई भी
रूगण कम्पनी के नाम से ही हो और इसे पुनर्वासन पैकेज का हिस्सा बनाया जाये। ऐसी
स्थापित की जाने वाली इकाई की स्थापना हेतु राज्य सरकार द्वारा पूरा सहयोग प्रदान
किया जायेगा तथा यदि किसी प्रकार के कोई लाइसेंस/ अनुमति आदि की आवश्यकता है
तो वह सरकार द्वारा प्रदान की जायेगी, aad नई प्रस्तावित इकाई कोई ऐसी नहीं होनी
चाहिए जो कि किसी प्रकार से विधि व्यवस्था के ded प्रतिबन्धित हो।
पुनर्वासन पैकेज के तहत उपरोक्तानुसार स्थापित की जाने वाली नई इकाई को भी अगले
0 वर्षों तक प्रत्येक वित्तीय वर्ष में de एवं केन्द्रीय बिक्री कर (जी0एस0टी0 लागू होने
पर राज्य सरकार के अंश का) एवं राज्य आबकारी राजस्व के रूप में जमा की गयी
धनराशि का 85 प्रतिशत प्रतिवर्ष एकमुश्त राशि के रूप में अगले वित्तीय वर्ष में वापस
कर दी जायेगी। Wed पहले इकाई को इन देयों का भुगतान नियमानुसार सम्बन्धित
विभाग को करना होगा। यह 85 प्रतिशत धनराशि वापसी की सुविधा इकाई को कच्चे
माल की खरीद पर दिये गये de एवं केन्द्रीय बिक्री कर (जी0एस0टी0 लागू होने पर
राज्य सरकार के अंश का) एवं राज्य आबकारी राजस्व की धनराशि पर भी दी जायेगी।
यदि रूगण इकाई पुनर्वासन नीति के अन्तर्गत विविधीकरण या विस्तारीकरण या नई
इकाई के स्थापना के लिए कोई नई प्लाण्ट एण्ड मशीनरी खरीदती है और उस पर किसी
वित्तीय संस्था से ऋण प्राप्त करती है, तो उस पर भुगतान की गई ब्याज की दर पर 5
प्रतिशत की दर से उस वित्तीय वर्ष में भुगतान किए गए ब्याज की वास्तवित धनराशि
अथवा अधिकतम BO 50.00 लाख, जो भी कम हो, प्रतिवर्ष अधिकतम 5 वर्ष तक दी
जायेगी।
Yad पैकेज के अन्तर्गत स्थापित की जाने वाली नई एवं WU इकाई
(विविधीकरण/ विस्तारीकरण सहित) को बाकी अन्य वह सभी सुविधाएं भी प्रदान की
जायेंगीं, जो औद्योगिक निवेश नीति, 20i2 के अन्तर्गत अनुमन्य हैं, यथा स्टाम्प इयूटी,
इलेक्ट्रिसिटी इयूटी में छूट इत्यादि।
उपरोक्तानुसार पुनर्वासन पैकेज के रूप में रूगण इकाई को पुनर्वासन हेतु वित्तीय रूप में
प्रदान की गई सकल रिफण्ड की धनराशि किसी भी दशा में इकाई द्वारा de एवं केन्द्रीय
बिक्री कर (जी0एस0टी0 ल्लागू होने पर राज्य सरकार के अंश का) एवं राज्य आबकारीराजस्व (यथा लाइसेंस फीस, बेसिक लाइसेंस फीस/ प्रतिफल फीस इत्यादि) के रूप में
जमा किए गये समस्त सरकारी cal के (00 प्रतिशत से अधिक अनुमन्य नहीं होगी।
(() - रूगण इकाई की श्रमिक समस्याओं के सम्बन्ध में राज्य सरकार यथा-आवश्यक सहायता
प्रदान करते हुये श्रमिक समस्याओं के समाधान करने हेतु तथा श्रम अभिनवीकरण के
कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु तत्समय प्रचलित नीति/ कार्यक्रमों की व्यवस्था के अनुसार
राज्य सरकार द्वारा सहायता उपलब्ध कराई जायेगी।
(2) ae ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो eu इकाई के saat के
उत्तराधिकारियों को लीज डीड बगैर हस्तान्तरण Yow के हस्तान्तरित की जायेगी और
लीज डीड के नवीनीकरण की शर्त के अनुसार सुविधा दी जायेगी।
((3) रूगण इकाई के पास यदि अपनी सरप्लस भूमि उपलब्ध है तो इकाई के अनुरोध पर यह
औचित्य स्थापित होने पर कि इससे पुनर्वासन में मदद मिलेगी, राज्य सरकार की
पूर्वानुमति से सरप्लस भूमि की बिक्री अनुमन्य की जा सकेगी। ऐसी भूमि का भू-उपयोग
परिवर्तन उक्त क्षेत्र के लिए महायोजना/ जोनल प्लान A प्राविधानित आवासीय/
वाणिज्यिक/ मिश्रित आदि के रूप में तत्समय प्रचलित विधि/ उपविधि/ नियम/ उपनियम/
कार्यकारी आदेश की व्यवस्थानुसार किया जा सकेगा। भू-उपयोग परिवर्तन कराने हेतु
निर्धारित शुल्क का भुगतान भी किया जाना आवश्यक होगा। सरप्लस भूमि की बिक्री से
प्राप्त होने वाली धनराशि का उपयोग रूग्ण इकाई के पुनर्वासन के लिए ही किया
जायेगा।
घ- नोडल Wied :
(0) इस पुनर्वासन योजना के लिए पिकप नोडल val होगी जो कि रूग्ण इकाईयों को पुनर्वासन
पैकेज को तैयार कराने में सहायता प्रदान करेगी और पुनर्वासन पैकेज को क्रियान्वित भी करायेगी। इसके
लिए सम्बन्धित BIT इकाई द्वारा पिकप को BO 0.00 लाख पुनर्वासन Yow के रूप में आवेदन पत्र के
साथ देना होगा।
ड्.- योजना के क्रियान्वयन के लिए समिति का गठन एवं उसके अधिकार :
(0) इस "एकमुश्त पुनर्वासन" नीति के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार स्तर पर निम्नवत्
समिति का गठन किया जाता है :-
. मुख्य सचिव - अध्यक्ष
2. अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त - सदस्य
3. प्रमुख सचिव/ सचिव, अवस्थापना एवं - सदस्य
औद्योगिक विकास विभाग4. प्रमुख सचिव/ सचिव, वित्त विभाग - सदस्य
5. प्रमुख सचिव/ सचिव, वाणिज्य कर विभाग - सदस्य
6. प्रमुख सचिव/ सचिव, आबकारी विभाग - सदस्य
7. प्रमुख सचिव/ सचिव, श्रम विभाग - सदस्य
8. प्रमुख सचिव/ सचिव, ऊर्जा विभाग - सदस्य
9. प्रमुख सचिव/ सचिव, teu एवं निबंधन विभाग. - सदस्य
0. YWae सचिव/ सचिव, राजस्व विभाग - सदस्य
0 «= प्रमुख सचिव/ सचिव, न्याय विभाग - सदस्य
2. .... प्रबन्ध निदेशक, पिकप - सदस्य/ संयोजक
(2) उक्त सदस्यों के अतिरिक्त जिस विभाग से सम्बन्धित अनुतोष एवं रियायतों का प्रस्ताव
विचारार्थ होगा, उस विभाग के प्रमुख सचिव/ सचिव को भी समिति में सम्मिलित किया
जायेगा।
(3) यह समिति He रूगण इकाईयों को इस एकमुश्त पुनर्वासन नीति के अन्तर्गत अपेक्षित
सुविधाओं/ रियायतों को दिये जाने के लिये पूर्णत: अधिकृत होगी।
(4)... इस एकमुश्त पुनर्वासन नीति के तहत एवं राज्य सरकार द्वारा पूर्व में दिये गये पुनर्वासन
पैकेज के तहत किसी भी बिन्दु पर शंका निवारण, स्पष्टीकरण अथवा समाधान करने के
लिए यह समिति पूर्णत: अधिकृत होगी।
भवदीय,
(आलोक रंजन)
मुख्य सचिव।
संख्या- 2/ 2045/ 4704(4)/ 77-4-205, तदडिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :-
।. रजिस्ट्रार, औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड, अन्सल UR-4, भीकाजी कामा प्लेस, नई दिल्ली
को इस अनुरोध के साथ कि वे कृपया उक्त आदेशों से सभी आपरेटिंग एजेन्सी को अवगत कराने का
कष्ट करें।
2. महालेखाकार (प्रथम/ द्वितीय) उ0प्र0, इलाहाबाद।
3. प्रमुख स्टाफ आफीसर, मुख्य सचिव, उ0प्र0 शासन।. अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उ0प्र0 शासन।
प्रमुख सचिव/ सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास fasts, उ0प्र0 शासन।
प्रमुख सचिव/ सचिव, वित्त विभाग, उ0प्र0 शासन।
प्रमुख सचिव/ सचिव, वाणिज्य कर विभाग, उ0प्र0 शासन।
प्रमुख सचिव/ सचिव, आबकारी विभाग, उ0प्र0 शासन।
. प्रमुख सचिव/ सचिव, श्रम विभाग, उ0प्र0 शासन।
॥0. प्रमुख सचिव/ सचिव, ऊर्जा विभाग, उ0प्र0 शासन।
. प्रमुख सचिव/ सचिव, स्टाम्प एवं निबंधन विभाग, उ0प्र0 शासन।
I2. प्रमुख सचिव/ सचिव, राजस्व विभाग, उ0प्र0 शासन।
3. प्रमुख सचिव/ सचिव, न्याय विभाग, 5000 शासन।
4. प्रमुख सचिव/ सचिव, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उ0प्र0 शासन।
5. प्रमुख सचिव/ सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन fasts, उ0प्र0 शासन।
6. प्रबन्ध निदेशक, पिकप, गोमती नगर, लखनऊ।
7. आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, 5000, कानपुर।
8. अधिशाषी निदेशक, उद्योग Fey, (3 सी, माल VAY, लखनऊ।
9. समस्त मण्डलायुक्त/ जिलाधिकारी, उत्ततर प्रदेश।
20. प्रबन्ध निदेशक, उ0प्र0 वित्त निगम/ यू0पी0एस0आई0डी0सी0, कानपुर।
27. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नौयडा/ dex नौयडा/ यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण/ गोरखपुर
औद्योगिक विकास प्राधिकरण/ लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण/ भदोही औद्योगिक विकास
प्राधिकरण/ सतहरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण/ यूपीडा।
22. गोपन अलुभाग-
23. औद्योगिक विकास अलुभाग-6
24. Ts फाइल।
आजा से,
(महेश कुमार गुप्ता)
प्रमुख सचिव।