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Date: 2018-03-09 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के क्रियान्वयन हेतु वित्तीय स्वीकृति।

Issued by औद्योगिक विकास विभाग · औद्योगिक विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

**कार्यकारी सारांश** यह दस्तावेज़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम, कानपुर को वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 4,57,08,836.00 रुपए की राशि स्वीकृत करने की मंजूरी देता है। यह राशि उन पात्र मेगा इकाइयों को प्रदान की जाएगी जो प्रोत्साहन नियमावली, 2003 में उल्लिखित शर्तों का पूरी तरह से पालन करती हैं। स्वीकृत धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के माध्यम से शासन को उपलब्ध कराया जाना है। **मुख्य बातें** *वित्तीय स्वीकृति और प्रबंधन* * उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम द्वारा स्वीकृत राशि का लेखा जोखा रखा जाएगा। * यह राशि पात्र मेगा इकाइयों को वरीयतानुसार उपलब्ध कराई जाएगी जो नियमावली की शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करती हों। * ऋण की वसूली का पूर्ण उत्तरदायित्व उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम पर होगा, जो नियमावली में दिए गए प्रावधानों के अनुसार प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। * ऋण की वापसी में विलम्ब होने पर इकाई से वसूला जाने वाला ब्याज राजकोष में जमा कराया जाएगा। * उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम द्वारा डिफ़ॉल्ट होने पर सरकार को 1.25% प्रतिमाह की दर से ब्याज का भुगतान किया जाएगा। *व्यय और निगरानी* * स्वीकृत धनराशि का आहरण एक माह की आवश्यकतानुसार किया जाएगा, जिसका आकलन आयुक्त एवं निदेशक उद्योग द्वारा किया जाएगा। * ऋण वितरण का अनुश्रवण आयुक्त एवं निदेशक उद्योग द्वारा किया जाएगा, जो धनराशि के सदुपयोग के संबंध में संतुष्ट होने के उपरान्त ही अगली किश्त का आहरण करेंगे। * व्यय से पहले वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का पूर्णतया अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। *उपयोगिता और लेखा* * उक्त धनराशि आहरित करके उ0प्र0 वित्तीय निगम को उपलब्ध कराई जाएगी, जिसका उपयोगिता प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध कराया जाएगा। * उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम ऋण वितरित करने से पहले इकाइयों की स्थिति स्पष्ट करेगा। * इस व्यय को वित्तीय वर्ष 2017-18 के आय-व्ययक में उद्योग विभाग के लेखा शीर्षक के तहत डाला जाएगा। **प्रभाव विश्लेषण** **हितधारक:** उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम (UPFC) **प्रभाव:** UPFC स्वीकृत धनराशि का प्रबंधन करने, खातों को बनाए रखने, पात्र इकाइयों को निधियों का वितरण करने, ऋण की वसूली सुनिश्चित करने, डिफ़ॉल्ट के लिए ब्याज का भुगतान करने और शासन को उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। **आवश्यक कार्रवाई:** निगम को वित्तीय स्वीकृति का प्रबंधन करना चाहिए, लेखांकन रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फंड प्राप्त करने वाली इकाइयाँ प्रोत्साहन नियमावली, 2003 का अनुपालन करती हैं, ऋण की वसूली के लिए एक प्रभावी प्रणाली लागू करती हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि विलंबित भुगतान पर लगाए गए ब्याज राजकोष में जमा किए जाएं, और निधि व्यय के उपयोगिता प्रमाणपत्र को सरकार को प्रदान करना चाहिए। **हितधारक:** मेगा औद्योगिक इकाइयाँ **प्रभाव:** मेगा औद्योगिक इकाइयाँ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त करती हैं, जिससे विकास और विस्तार में मदद मिलती है। **आवश्यक कार्रवाई:** यह सुनिश्चित करने के लिए कि उन्हें धन प्राप्त करने के लिए माना जाता है, इकाइयों को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली, 2003 की सभी शर्तों का पालन करना चाहिए। उन्हें ऋण चुकाना होगा और कोई भी विलंबित भुगतान शुल्क देना होगा। **हितधारक:** आयुक्त एवं निदेशक उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर **प्रभाव:** आयुक्त और निदेशक उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर निधियों की आवश्यकता का आकलन करने, ऋण वितरण की निगरानी करने और धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने में शामिल हैं। **आवश्यक कार्रवाई:** उन्हें फंड की आवश्यकता का आकलन करना चाहिए, U.P. वित्तीय निगम द्वारा ऋण वितरण की निगरानी करनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धन सही तरीके से खर्च किया जा रहा है। स्वीकृति के बाद ही अगली किश्त की निकासी की जा सकती है। **हितधारक:** उत्तर प्रदेश सरकार (औद्योगिक विकास विभाग, वित्त विभाग) **प्रभाव:** उत्तर प्रदेश सरकार स्वीकृत धन आवंटित और जारी करती है, निधि उपयोग की निगरानी करती है और नीति के प्रभाव का आकलन करती है। **आवश्यक कार्रवाई:** वित्तीय निगम द्वारा प्रदान किए गए उपयोगिता प्रमाण पत्र की समीक्षा करें। सुनिश्चित करें कि U.P. वित्तीय निगम ऋण वितरण की निगरानी कर रहा है और धन का सही तरीके से उपयोग किया जा रहा है।

Key Entities Referenced

औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक योजना। उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम: औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के तहत वित्तीय लेनदेन के लिए जिम्मेदार वित्तीय संस्था। उत्तर प्रदेश शासन: सरकारी प्राधिकरण जो औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान करता है। उद्योग निदेशालय, कानपुर: आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के अधीन, वित्तीय लेनदेन की आवश्यकता का आकलन करने के लिए जिम्मेदार। उत्तर प्रदेश: वह राज्य जहाँ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 लागू है।
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संख्या: 478 / 77-6-8-3(Tate)/ 6टीसी नरेन्द्र सिंह पटेल, विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर | औद्योगिक विकास अनुभाग-6 लखनऊ: दिनांक 09 मार्च, 2048 fava: औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के क्रियान्वयन हेतु वित्तीय स्वीकृति। महोदय, उपर्युक्त विषयक प्रबन्धक निदेशक, उत्तर प्रदेश वित्तीय . निगम, . कानपुर के पत्र संख्या- 447/ विनि/ वियोवि/ 2047-48 दिनांक 08-08-2077, 77 विनि/ वियोवि/ 207-48 दिनांक 04-0-2047, 2242/ विनि/ वियोवि/ 207-8 दिनांक 04-44-20(7 एवं 2524/ विनि/ वियोवि/ 207-48 दिनांक 5-0- 20i8 के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ. है कि औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के क्रियान्वयन हेतु वित्तीय वर्ष 20:7-8 के आय-व्ययक में प्राविधानित धनराशि BO ,09,86,00,000.00 (रू0 एक अरब al करोड़ छियासी लाख मात्र) में A "अवशेष धनराशि BO 4,57,08,836.00 (रू0 चार करोड़ सत्तावन लाख आठ हजार आठ सौ Seda मात्र) निम्नलिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन निर्गत करने की श्री राज्यपाल्र Bev स्वीकृति प्रदान करते हैं- t- स्वीकृत धनराशि का AE जोखा Scat प्रदेश वित्तीय निगम द्वारा रखा जाएगा। 2- यह धनराशि उन पात्र मेगा. इंकाइयों को उनके Wa प्रत्यावेदनों के यथाक्रम A वरीयतानुसार उपलब्ध करायी जाएगी जो. औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली 2003(/यथा संशोधित) में उल्लिखित शर्तों का पूर्णतया अनुपालन सुनिश्चित करती हो। 3- पात्र sisal को वितरित ऋण की वसूली का पूर्ण उत्तरदायित्व उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम पर होगा। उत्तर प्रदेश. वित्तीय निगम द्वारा इकाइयों को स्वीकृत किये गये ऋण की वापसी हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली-2003 (यथा संशोधित) में दिए गए प्राविधानों के अनुसार प्रभावी व्यवस्था की जाएंगी. तथा धनराशि की सुरक्षा हेतु समस्त औपचारिकताएं पूर्ण की जाएंगी। 4- ऋण की वापसी A विलम्ब करने वाली इकाई A वसूला जाने वाला ब्याज (4.25 प्रतिशत प्रतिमाह साधारण ब्याज) राजकोष में जमा कराया जाएगा। 5-..... यदि उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम द्वारा किसी किश्त के भुगतान में डिफाल्ट किया जाता है तो उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम द्वारा शासन को .25 प्रतिशत प्रतिमाह साधारण ब्याज की दर से विलम्ब की अवधि मे ब्याज का भुगतान किया जाना होगा।7- स्वीकृत धनराशि का आहरण एक माह की आवश्यकतानुसार किया जाएगा। आवश्यकता का आकलन आयुक्त एवं निदेशक उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर द्वारा किया जाएगा। SOW वित्तीय निगम को उपलब्ध कराए गए ऋण के सापेक्ष उ0प्र0 वित्तीय निगम द्वारा ऋण वितरण का अनुश्रवण भी आयुक्त एवं निदेशक उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर द्वारा किया जाएगा तथा धनराशि के सदुपयोग के संबंध में संतुष्ट होने के उपरान्त ही अगली किश्त का आहरण किया जाएगा। 8-..... स्वीकृत धनराशि को व्यय किए जाने से पूर्व वित्त विभाग के कार्यालय ज्ञाप संख्या-8/ 2047/ बी- t-790/ दस-207-23॥ 2077 दिनांक 03-08-20i7 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्णतया . अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। 9- उक्त धनराशि को आहरित करके उ0प्र0 वित्तीय निगम को उपलब्ध करोया see जिसका उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रबंध निदेशक, उ0प्र0 वित्तीय निगम द्वारा हस्ताक्षरित कर आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के माध्यम से शासन के औद्योगिक विकास विभाग (अनुभाग-6)/ वित्त. (आय-व्ययक) अलुभाग-4 को उपलब्ध कराया जाएगा। ऊ0प्र0 वित्तीय निगम द्वारा ऋण वितरित किए जाने के पूर्व पात्र इकाइयों के संबंध में अपने स्तर से स्थिति स्पष्ट कर लेंगे। 0- उक्त के संबंध में होने वाला व्यय वित्तीय वर्ष 207-48. & आय-व्ययक में उद्योग विभाग की अनुदान संख्या-7 के लेखा शीर्षक 6885-sa तथा खेंनिज के लिए अन्य कर्ज-0।-औद्योगिक वित्तीय संस्थाओं को कर्ज-490-सार्वजनिक क्षेत्र के तथा अन्य. उपक्रमों को कर्ज-06-औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-30-निवेश/ ऋण के नाम डाला जाएगा। 4- यह आदेश वित्त विभाग के अशासकीय सख्या-8-4-7/ ह-208 में दिनांक 28-02-208 में प्राप्त उनकी सहमति से जारी किये जा रहे हैं। भवदीय, (नरेन्द्र सिंह पटेल) विशेष सचिव। संख्या: 778(4)/-77-6-8-3(Tsle)/ 6टीसी तद्दिनांक उपर्युक्त की प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः- - महालेखाकार, (लेखा एवं हकदारी) प्रथम, उ.प्र., इलाहाबाद | 2 मुख्य कोषाधिकारी, लखनऊ। 3- .... प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम, कानपुर। 4- ..... आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग निदेशालय, कानपुर । 5- निदेशक, वित्तीय सांख्यकीय निदेशालय, जवाहर भवन, लखनऊ। 6- वित्त (आय-व्ययक) अलुभाग-/ 4 7- वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग -6 8-..... नियोजन अनुभाग-/ 49-.... औद्योगिक विकास अलुभाग-2 0- - गाई फाइल। आज्ञा से, (बाबू राम) अनु सचिव।

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