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Date: 2016-04-29 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्न कम्‍पनियों हेतु अधिग्रहीत की गयी भूमि को फ्री-होल्ड किये जाने सम्बन्धी नीति, 2016

Issued by औद्योगिक विकास विभाग · औद्योगिक विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

**कार्यकारी सारांश** यह दस्तावेज़ उन नीतियों की रूपरेखा प्रदान करता है जो औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा विभिन्न कंपनियों को उद्योगों की स्थापना के लिए अधिग्रहित भूमि को फ्रीहोल्ड करने की अनुमति देती हैं, जो स्थानांतरण विलेखों/अनुबंधों के माध्यम से दी गई हैं। यह सरकारी अनुदान अधिनियम के तहत निहित है। दिशानिर्देश उस मानदंड और प्रक्रियाओं को रेखांकित करते हैं जिनके तहत भूमि को फ्रीहोल्ड में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसमें रुग्ण/बंद इकाइयों से जुड़े पहलू और भूमि के उपयोग से संबंधित विशिष्ट प्रतिबंध शामिल हैं। यह दस्तावेज़ 29 अप्रैल 2016 को जारी किया गया था और इसमें तत्काल प्रभाव से फ्रीहोल्ड रूपांतरण करने के लिए दिशानिर्देश शामिल हैं। **मुख्य बातें** * **फ्रीहोल्ड के लिए पात्रता:** * औद्योगिक इकाइयां जो रुग्ण घोषित हैं, बंद हैं, या प्रदूषणकारी हैं और जिन्हें पर्यावरणीय कारणों से बंद/स्थानांतरित करने की आवश्यकता है, वे फ्रीहोल्ड के लिए योग्य हैं। * उद्योगों के पास मानक से अधिक भूमि है, वे अतिरिक्त भूमि को फ्रीहोल्ड कर सकते हैं यदि वर्तमान औद्योगिक इकाई के लिए 1.0 हेक्टेयर से अधिक भूमि मौजूद है। * **आवश्यक दस्तावेज़:** * रुग्ण/बंद इकाइयों के लिए, दिवालियापन पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) के निर्णय की एक प्रति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/पर्यावरण विभाग से एक प्रमाण पत्र आवश्यक है। * मानक से अधिक भूमि वाली इकाइयों के लिए, स्थानिक जिलाधिकारी, स्थानीय संयुक्त उद्योग निदेशक और स्थानीय क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीएसआईडी, की त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट की आवश्यकता होती है। * **फ्रीहोल्ड के लिए शर्तें और प्रतिबंध:** * फ्रीहोल्ड केवल स्वामित्व बदलता है, न कि भूमि के उपयोग को। यदि भूमि का उपयोग ज़ोनल डेवलपमेंट प्लान से अलग तरीके से करने का प्रस्ताव है तो फ्रीहोल्ड के बाद भूमि उपयोग रूपांतरण आवश्यक है। * यदि कोई कंपनी अनुलेख की शर्तों का उल्लंघन करते हुए भूमि का उपयोग कर रही है, तो फ्रीहोल्ड केवल तभी अनुमत है जब भूमि का उपयोग अनुलेख की शर्तों के अनुसार बहाल हो जाए। * विवाद होने पर फ्रीहोल्ड की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि कानूनी रूप से हल न हो जाए। * **फ्रीहोल्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया:** * आवेदकों को राज्य सरकार में आधारिक संरचना और औद्योगिक विकास विभाग के प्रधान सचिव को निर्धारित फॉर्म में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। * प्रत्येक 1.0 हेक्टेयर के लिए 2500 रुपये की गैर-वापसी योग्य प्रोसेसिंग फीस देय है। * भूमि के सर्कल रेट, क्षेत्रफल और निर्धारित फ्रीहोल्ड दर के आधार पर स्व-मूल्यांकन के आधार पर फ्रीहोल्ड देय राशि का 25% बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से देय होगा। * **शुल्क और शुल्क:** * फ्रीहोल्ड के लिए शुल्क फ्रीहोल्ड रूपांतरण की तिथि पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित वर्तमान सर्कल दर का 15% है। * भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अनुसूची-1ख के अनुच्छेद-23 (क) के अनुसार मूल्यांकित कर स्टाम्प शुल्क जमा करने की आवश्यकता है। * **अनुमोदन प्राधिकारी:** * फ्रीहोल्ड के संबंध में निर्णय लेने के लिए निम्नलिखित उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है: आधारिक संरचना और औद्योगिक विकास आयुक्त, उ0प्र0 शासन (अध्यक्ष); प्रमुख सचिव, औद्योगिक विकास विभाग, उ0प्र0 शासन (सदस्य-संयोजक)। * उच्च स्तरीय समिति भूमि के स्थान, विकास और निर्माण की प्रकृति, यातायात कनेक्टिविटी, भूमि के प्रचलित बाजार मूल्य आदि पर विचार करेगी और फ्रीहोल्ड के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी, जिस पर मा0 मंत्री परिषद के अनुमोदन से अंतिम निर्णय लिया जाएगा। **प्रभाव विश्लेषण** * **औद्योगिक इकाइयां:** * प्रभाव: फ्रीहोल्ड इकाइयों को जमीन पर अधिक स्वायत्तता और लचीलापन मिलेगा, जिससे संभावित रूप से विविधीकरण, विस्तार और वित्तीय अवसर बढ़ेंगे। * आवश्यक कार्रवाई: फ्रीहोल्ड को प्राप्त करने के लिए, इकाइयों को पात्रता मानदंड का आकलन करना होगा, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने होंगे, प्रासंगिक शुल्कों का भुगतान करना होगा और आवेदन प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे अनुलेख की शर्तों का पालन करें और भू-उपयोग प्रतिबंधों का अनुपालन करें। * **राज्य सरकार:** * प्रभाव: फ्रीहोल्ड से सरकार के राजस्व में वृद्धि हो सकती है, कानूनी विवादों को सुलझाया जा सकता है और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है। * आवश्यक कार्रवाई: सरकार को आवेदनों को संसाधित करना होगा, मूल्यांकन करना होगा कि फ्रीहोल्ड के लिए पात्रता मानदंड पूरा हो रहा है या नहीं और फ्रीहोल्ड रूपांतरण को मंजूरी देनी होगी। * **खरीदने वाले/ कानूनी उत्तराधिकारी:** * प्रभाव: फ्रीहोल्ड रूपांतरण के लिए अनुलेख के तहत विधिक क्रेता/विधिक उत्तराधिकारियों की पात्रता। * आवश्यक कार्रवाई: उत्तराधिकार की वैधता की पुष्टि करने के लिए कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी। * **अवैध कब्जा करने वाले:** * प्रभाव: अवैध कब्जा करने वालों को फ्रीहोल्ड रूपांतरण में कोई सहायता नहीं मिलेगी। * आवश्यक कार्रवाई: यदि कब्ज़ा करने के लिए भूमि का उपयोग किया जा रहा है तो कब्जा करने वालों को ज़मीन खाली करनी होगी।

Key Entities Referenced

औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग): उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्न कम्पनियों हेतु अधिग्रहीत की गयी भूमि को फ्री-होल्ड करने सम्बन्धी नीतियां उत्तर प्रदेश: पॉलिसी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित औद्योगिक भूमि के फ्री-होल्ड से संबंधित है। भूमि अध्याप्ति अधिनियम, 1894: भूमि अधिग्रहण का कानून, जिसके प्रावधानों के तहत औद्योगिक विकास विभाग द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया गया। भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899: भारतीय स्टाम्प अधिनियम की अनुसूची-1ख के अनुच्छेद-23(क) की व्यवस्था के अनुसार फ्री-होल्ड किये जाने हेतु निर्धारित मूल्यांकन कर स्टाम्प शुल्क की देयता सुनिश्चित की जायेगी। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उ0प्र0 शासन: भूमि के फ्री-होल्ड के सम्बन्ध में निर्णय लेने हेतु शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष।
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संख्या-0-638/ 77-3-46-9489T/ 84 प्रेषक, ऊलकनन्वा दयाल, सचिव, Seay प्रदेश Waa! सेवा में, समस्त मण्डलायुक्त/ जिलाधिकारी, Seat प्रदेश। औद्योगिक विकास अनुभाग-3 _ लखनऊ:दिनांक: 29 अप्रैल, 20:6 विषय:-औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्‍न कम्पनियों हेतु अधिग्रहीत की गयी भूमि को फ्री- होल्ड किये जाने सम्बन्धी नीति, 2046. महोदय, प्रदेश के विभिन्‍न भागों में औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा निजी कम्पनियों स्थापित किये जाने वाले उद्योगों के लिए समय- समय पर उनकी मांग के अनुसार भूमि का अधिग्रहण भूमि Heats अधिनियम, 894 & प्राविधानों के अधीन किया गया। इन मामलों में प्रतिकर तथा भूमि के अर्जन पर आने वाले अन्य व्यय का वहन पूर्णतया निजी कम्पनियों द्वारा किया गया है। ऐसे मामलों में AA के अधिग्रहण के उपरान्त 'गवर्नमेंट vec’ के अन्तर्गत भूमि का हस्तांतरण संबंधित कम्पनी के पक्ष में डीड/ अनुबन्ध के माध्यम से किया गया है, जिसमें यह प्राविधान है कि कम्पनी द्वारा भूमि का उपयोग डीड/ अनुबन्ध में वर्णित शर्तों के अधीन किया जाएगा। डीड/ अनुबन्ध में वर्णित weal एवं प्रयोजन से इतर भूमि के उपयोग पर कम्पनी द्वारा राज्य हू की पूर्वानुमति ली जाएगी। म्पनियों के लिए अधिग्रहीत भूमि में से कतिपय भूमि शहर के मध्य आ गयी है जहां उद्योग को चलाना प्रदूषण एवं शहरी विकास जैसे कारणों से अब सम्भव नहीं है। इसके अतिरिक्त जहां इकाईयां वर्तमान में भी संचालित हैं, किन्तु सम्बन्धित कम्पनी के पास उनकी आवश्यकता से काफी अधिक जमीन उपलब्ध है और उन्हें अपने उद्योग का विविधीकरण/ विस्तारीकरण/ नई इकाई की स्थापना i- Ge शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |के उद्देश्य से अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है, जो उनके पास उपलब्ध सरप्लस भूमि के विक्रय से अर्जित धनराशि से करना चाहते हैं। 3. उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा निजी कम्पनियों के लिये अधिग्रहीत भूमि, जो उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्‍न कम्पनियों को गवर्नमेंट WUE एक्ट के तहत cleat डीड/ अलुबन्ध के माध्यम से दी गयी है, को फ्रीहोल्ड किये जाने हेतु निम्नवत निर्णय लिये गये हैं :- 3. ऐसी औद्योगिक इकाईयां जो eu घोषित दहो/ बन्द पड़ी हो अथवा ऐसी प्रदूषणकारी/ खतरनाक कार्यरत औद्योगिक इकाईयां जो प्रदूषण के टइृष्टिकोण से मानवीय स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं और जिन्हें जनहित में अथवा पर्यावरणीय कारणों से बन्द किये जाने/ शहर के बाहर स्थानान्तरित किये जाने की बाध्यता हो, को फ्रीहोल्ड किया जाना :- औद्योगिक परियोजनाओं हेतु औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा निजी कम्पनियों के लिए अधिग्रहीत भूमि, जो विभिन्‍न कम्पनियों को Cea डीड/ अनुबन्ध के माध्यम से दी गयी है, का फ्रीहोल्ड में परिवर्तन उसी दशा में अनुमन्य होगा, जब ऐसी भूमि पर स्थापित औद्योगिक इकाई रूग्ण घोषित हो/ बन्द पड़ी हो अथवा ऐसी प्रदूषणकारी/ खतरनाक कार्यरत औद्योगिक इकाईयां, जो प्रदूषण के दृष्टिकोण से मानवीय स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं, जिन्हें जनहित में अथवा पर्यावरणीय कारणों से deq किये जाने/ शहर के बाहर स्थानान्तरित किये जाने की बाध्यता हो। रूगण/ बन्द पड़ी औद्योगिक इकाईयों के सम्बन्ध में बी0आई0एफ0आई0आर0 के निर्णय की प्रति तथा प्रदूषण अथवा पर्यावरणीय कारणों से बन्द किये जाने/ शहर के बाहर स्थानान्तरित किये जाने के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण विभाग का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। (Il) रूगण/ बन्द पड़ी औद्योगिक इकाईयों के सम्बन्ध A फ्री-होल्ड की. कार्यवाही बी0आई0एफ0आई0 3.2 आर0/ AIO न्यायालयों/ मा0 उच्च न्यायालयों/ Al उच्चतम्‌ न्यायालय द्वारा रूगण औद्योगिक इकाईयों के सम्बन्ध में पारित किये गये आदेश का अनुपालन करते हुए उस दशा में की जाएगी जब वे आदेश अन्तिम हो गये हों। ऐसी कार्यरत औद्योगिक इकाईयां जिनके पास मानक से अधिक भूमि उपलब्ध हैं, ऐसी सरप्लस भूमि का फ्री-होल्ड किया जाना :- औद्योगिक परियोजनाओं हेतु औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा निजी कम्पनियों के लिए अधिग्रहीत भूमि, जो विभिन्‍न कम्पनियों को ट्रांसफर डीड/ अनुबन्ध के माध्यम से दी गयी है, का फ्रीहोल्ड में परिवर्तन उसी दशा में अनुमन्य होगा, जब ऐसी इकाई को .0 हेक्टेयर अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल की - यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | - इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |भूमि औद्योगिक प्रयोजन हेतु दी गयी हो और ऐसी आवंटित भूमि पर वर्तमान मैं औद्योगिक इकाई कार्यरत हो। (Il) ta प्रकरणों मैं औद्योगिक इकाई के लिए मानक से अधिक सरप्लस भूमि की उपलब्धता के प्रमाणन के लिए स्थानीय जिलाधिकारी, स्थानीय संयुक्त उद्योग निदेशक तथा स्थानीय क्षेत्रीय प्रबन्धक, यू0पी0एस0आई0डी0सी0 की त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट वांछित होगी। 3.3 ऐसी औद्योगिक इकाईयां जिन्हें clear डीड/ अनुबन्ध के माध्यम से भूमि दी गयी है, और यदि औद्योगिक इकाई वहां पर संचालित होने के बाद पूर्णत: बन्द पड़ी है और जिसे पुनर्वासित किया जाना सम्भव नहीं है, भले ही ऐसे औद्योगिक इकाई बी0एफ0आई0आर0 के निर्णय हेतु संदर्भित न हो, ऐसे इकाईयां विवाद रहित होने की स्थिति में इनसे अध्यासित भूमि का इस नीति की व्यवस्थानुसार फ्रीहोल्ड अनुमन्य होगा। ऐसे प्रकरणों मैं इस आशय के प्रमाणन के लिए पिकप तथा उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम के वरिष्ठ प्रबन्धक से अनिम्न स्तर के अधिकारियों की संयुक्त रिपोर्ट वांछित होगी। 3.4 ऐसी संचात्रित औद्योगिक इकाईयां जिन्हें ट्रा्सफर डीड/ अलुबन्ध के माध्यम से भूमि दी गयी है तथा जो विस्तार हेतु Wa की अतिरिक्त आवश्यकता होने अथवा जिन्हें कन्जेशन, यातायात Va परिवहन सम्बन्धी समस्याओं के कारण वर्तमान स्थल पर कार्यशील रहना व्यवहारिक नहीं है और शहर के Ta क्षेत्रों में स्थानान्तरण के लिए इच्छुक हों, से अध्यासित भूमि का इस नीति की व्यवस्थालुसार फ्री-होल्ड अनुमन्य होगा। ऐसे प्रकरणों में इस आशय के प्रमाणन के लिए स्थानीय जिलाधिकारी, स्थानीय संयुक्त उद्योग निदेशक तथा स्थानीय क्षेत्रीय प्रबन्धक, यू0पी0एस0आई0डी0सी0 की त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट वांछित होगी। 4. औद्योगिक परियोजनाओं हेतु ट्राट्सफर डीड/ अनुबन्ध के माध्यम से दी गयी भूमि का तात्कालिक प्रभाव से चालू लीज के विधिक उत्तराधिकारी अथवा विधिक क्रेता के पक्ष में फ्री-होल्ड करने की तिथि को जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित तत्समय . प्रचलित सर्किल रेट के '5 प्रतिशत पर फ्री-होल्ड किया जाएगा। भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 899 की अनुसूची-[खि के अनुच्छेद-23(क) की व्यवस्था के अनुसार फ्री-होल्ड किये जाने हेतु निर्धारित मूल्यांकन कर स्टाम्प शुल्क की देयता सुनिश्चित की जायेगी। 5. भूमि के फ्री-होल्ड के सम्बन्ध में निर्णय लेने हेतु शासन स्तर पर निम्नानुसार उच्च स्तरीय समिति गठित की जाती है :- (।). | अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुकक्‍्त,ठ0प्र0शासन अध्यक्ष (2) | प्रमुख सचिव, औद्योगिक विकास विभाग,50प्र0 शासन सदस्य-संयोजक i- Ge शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |(3) | प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन,ठ50प्र0शासन सदस्य (4) | प्रमुख सचिव, वित्त विभाग,उ0प्र0शासन सदस्य (5) | प्रमुख सचिव, न्याय विभाग,उ0प्र0शासन सदस्य (6) | प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग,उ0प्र0शासन सदस्य (7) | संबंधित जनपद के जिलाधिकारी सदस्य (8) | प्रबन्ध निदेशक,यू0पी0एस0 आई0डी0सी0 सदस्य उच्च स्तरीय समिति द्वारा संबंधित भूमि की लोकेशन, उसके चारों ओर हो चुके विकास/ निर्माण की प्रकृति, यातायात कनेक्टिविटी, भूमि AT प्रचलित मार्केट वैल्यू आदि के आलोक में विचार कर फ्री-होल्ड हेतु अपनी संस्तुति प्रस्तुत की जायेगी, जिस पर AO मंत्रि परिषद के अनुमोदन से अन्तिम निर्णय लिया जायेगा। 6. फ्री-होल्ड के लिए अन्य शर्ते एवं प्रतिबन्ध निम्नवत होंगे : 6. ट्रांसफर डीड/ अलुबन्ध के माध्यम से दी गयी aA के फ्रीहोल्ड का सम्बन्ध केवल भूमि के स्वामित्व परिवर्तन से है, भू-ठपयोग परिवर्तन से नहीं, अर्थात फ्रीहोल्ड के उपरान्त lal आवेदक के स्वामित्व मैं निहित हो जायेगी। 6.2 भूमि का उपयोग यदि महोयाजना/ जोनल डेवलपमेंट प्लान/ ले-आउट प्लान में अंकित भू-उपयोग से भिन्न A किया जाना प्रस्तावित है, तो भूमि के फ्रीहोल्ड के उपरान्त नियमानुसार भू-ठपयोग परिवर्तन कराना आवश्यक होगा। 6.3 यदि किसी कम्पनी द्वारा भूमि का भू-उपयोग ट्रांसफर डीड/ अनुबन्ध की शर्तों के विरूद्ध किया जा रहा है, तो फ्रीहोल्ड उसी दशा मैं किया जायेगा जब उसके द्वारा भूमि का उपयोग लीज की शर्तों के अनुरूप पुनर्स्थीपित कर लिया जाए। 6.4 भूमि के फ्रीहोल्ड में परिवर्तन से प्राप्त धनराशि कोषागार A सुसंगत लेखाशीर्षक के अन्तर्गत जमा कराई जायेगी। 6.5 फ्रीहोल्ड की सुविधा ट्रांसफर डीड/ अनुबन्ध में अंकित समस्त प्रकृति के उपयोगों के लिए अनुमन्य होगी। 6.6 अवैध कब्जेदार के पक्ष मैं किसी भी प्रकार की भूमि का फ्रीहोल्ड अनुमन्य नहीं होगा। 6.7 भू-सवामित्व को लेकर किसी प्रकार का विधिक विवाद होने पर फ्रीहोल्ड तब तक अनुमन्य नहीं होगा, जब तक कि विवाद का समाधान न हो जाए। इसी प्रकार मूल डीडधारक तथा विधिक उत्ततराधिकारी अथवा विधिक क्रेता न यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |के मध्य कोई विवाद होने की दशा में आवेदन-पत्र तभी स्वीकार्य होगा, जब विवाद का समाधान हो जाए। 6.8 भूमि के पक्ष में किसी प्रकार का लीजरेन्ट अथवा अन्य कोई बकाया होने की स्थिति A _ ट्रांसफर डीड/ अनुबन्ध की शर्तों में निर्धारित ब्याजदर पर बकाए का भुगतान आवेदक द्वारा करना होगा और उसके पश्चात ही eles पर विचार किया जायेगा। 6.9 भूमि sie बन्धक रखी गयी. हो, तो ऐसे प्रकरणों A फ्रीहोल्ड तभी अनुमन्य होगा, जब जिस व्यक्ति/ संस्था के पक्ष में भूमि बन्धक रखी गयी हो, से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत किया जाए। भूमि के फ्रीहोल्ड हेतु आवेदन की प्रक्रिया निम्नवत होगी :- 7.4 आवेदक द्वारा भूमि के फ्रीहोल्ड हेतु निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन-पत्र शासन में प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग को. प्रस्तुत किया जायेगा। 7.2. आवेदन-पत्र के साथ नॉन-रिफण्डेबल प्रोसेसिंग फीस के रूप में प्रत्येक [.0हेक्टेयर अथवा उसके अंश पर BO 2500/- की. दर से धनराशि सुसंगत लेखाशीर्षक के अंतर्गत कोषागार में जमा करके उसके चालान की प्रति संलग्न की जायेगी। 7.3. आवेदन-पत्र के साथ प्रोसेसिंग फीस एवं फ्रीहोल्ड हेतु देय धनराशि का 25 प्रतिशत नियमानुसार aed के आधार पर बैंक ड्राफ्ट (जो प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग,उ0प्र0शासन के पक्ष में देया होगा) के माध्यम से जमा की जायेगी तथा आवेदन-पत्र जिस तिथि को जमा किया जायेगा, वही तिथि आवेदन की तिथि मानी जायेगी। स्वमूल्यांकन के आधार पर जमा की जाने वाली धनराशि -संबंधित भूखण्ड का सर्किल रेट X भूखण्ड का क्षेत्रफल X फ्रीहोल्ड के लिए निर्धारित दर X 25 प्रतिशत। 7.4 ऐसे प्राप्त आवेदन-पत्र परीक्षणोपरान्त पूर्ण पाये जाने की दशा A फ्री-होल्ड के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किये जायेंगे तथा समिति की संस्तुति प्राप्त होने के बाद सक्षम स्तर के अनुमोदन के उपरान्त ही फ्रीहोल्ड के सम्बन्ध में आदेश निर्गत किया जायेगा। 7.5 प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग,50प्र0शासन द्वारा डिमाण्ड नोटिस जारी करने के उपरान्त. फ्रीहोल्ड के लिए आगणित अवशेष धनराशि. आवेदक द्वारा बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से 90 दिन के i- Ge शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |अन्दर एकमुश्त जमा करनी होगी। यदि आवेदक उक्त अवधि में सम्पूर्ण धनराशि जमा करने में असमर्थ हो, तो आवेदक के अनुरोध पर देय धनराशि को. अधिकतम 0' वर्ष में 4 प्रतिशत साधारण ब्याज सहित वसूल करने पर आवेदक की सुविधानुसार सामान्य मासिक किश्तों का निर्धारण किया जा सकता है। 7.6 भूमि के फ्रीहोल्ड हेतु विक्रय-विलेख के पंजीकरण के समय ट्रान्सफर डीड तत्समय निरस्त कर दी जायेगी और उसकी मूल प्रति पर तद्ठुसार अंकन करते हुए विक्रय-विलेख के साथ आवेदक को वापस कर दी जायेगी। 7.7. आवेदन-पत्र के साथ आवेदक द्वारा निम्न दस्तावेज जमा किये जायेंगे :- (क) भूमि के TIGR डीड/ अनुबन्ध की सत्यापित प्रतिलिपि। (ख) जिस व्यक्ति के पक्ष में फ्रीहोल्ड होना है, उसके पक्ष में विधिक उत्तराधिकार अथवा अन्य विधिक अधिकार प्राप्त होने का प्रमाण- पत्र भूमि का भौतिक कब्जा उस व्यक्ति के पक्ष में होने का प्रमाण-पत्र जिसके पक्ष में फ्रीहोल्ड होता है। इस आशय का प्रमाण पत्र. कि फ्रीहोल्ड हेतु प्रस्तावित भूमि के पक्ष में समस्त बकाया धनराशि यथा लीज Yee, आदि का भुगतान किया जा युका है। रूग्ण/ बंद औद्योगिक इकाईयों के सम्बन्ध में बी0आई0एफ0आर0 के निर्णय की प्रति। (a) m0 न्यायालयों / AO उच्च न्यायालय/ AO उच्चतम न्यायालय तथा बी0आई0एफ0आर0 का निर्णय, जो अन्तिम हो गया हो, की प्रति | (S) प्रदूषणकारी एवं खतरनाक उद्योगों के सम्बन्ध में उ0प्र0 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/ पर्यावरण विभाग द्वारा ऐसी इकाई को बन्द करने अथवा शहर के बाहर स्थानान्तरित करने से संबंधित जारी प्रमाण- पत्र ऐसी कार्यरत औद्योगिक इकाईयां जिनके पास मानक से अधिक भूमि उपलब्ध है, उस दशा मैं ऐसी सरप्लस भूमि के फ्रीहोल्ड हेतु मानक से अधिक सरप्लस भूमि की उपलब्धता के प्रमाणन के लिए त्रिसदस्यीय समिति की Rare ऐसी औद्योगिक इकाईयां जो संचालित होने के बाद Wid: बन्द पड़ी हैं और जिसे पुनर्वासित किया जाना सम्भव नहीं है, भले ही ऐसी i- Ge शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |औद्योगिक इकाई बी0एफ0आई0आर0 के निर्णय हेतु संदर्भित न हों, के सन्दर्भ में दो सदस्यीय समिति की Rare (ट) ah संचालित औद्योगिक इकाईयां जिन्हें विस्तार हेतु Wa AT अतिरिक्त आवश्यकता होने अथवा जिन्हें कन्‍्जेशन यातायात Vd परिवहन सम्बन्धी समस्याओं के कारण वर्तमान स्थल पर कार्यशील रहना व्यवहारिक नहीं है, के संदर्भ में त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट | 8. .... भू-अर्जन अधिनियम, 894 के अन्तर्गत अधिग्रहीत भूमि को फ्री-होल्ड करते समय भू-अर्जन अधिनियम, (894 एवं भूमि Bold, Yada एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2043 के प्राविधानों का पालन सुनिश्चित किया जायेगा। फ्री-होल्ड से प्राप्त धनराशि राजकोष में जमा की जायेगी। 9. कृपया उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का कष्ट करें। भवदीय, (अलकनन्दा दयाल) सचिव। संख्या-638/ 77-3-46 तदिनांक प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- Ron प्रमुख स्टाफ आफीसर,मुख्य सचिव,50प्र0 शासन | समस्त प्रमुख सचिव/ सचिव,ऊ0प्र0 शासन | प्रबन्ध निदेशक,यू0पी0एस0आई0डी0सी0,ए-/ 4, लखनपुर,कानपुर | ...... मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा/ ग्रेटर नोएडा/ यमुना एक्सप्रेसवे/ लीडा/ सीडा/ गीडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण। मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक,उ0प्र0, लखनऊ । औद्योगिक विकास विभाग के समस्त अलुभाग। गार्ड फाईल। o आज्ञा से, (अनिल कुमार) अनु सचिव। i- Ge शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.nic.in से सत्यापित की जा सकती है |

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