Executive Summary & Key Takeaways
**कार्यकारी सारांश:**
यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के तहत मेगा परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाने वाली विशेष सुविधाओं और रियायतों पर सरकार के निर्देशों का विवरण प्रस्तुत करता है। इस दस्तावेज़ में विभिन्न कंपनियों की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए विशिष्ट अनुमोदन और शर्तें शामिल हैं, जो विविधीकरण योजनाओं और नई इकाइयों के लिए सुविधाएँ प्रदान करती हैं। तत्काल कार्रवाई के लिए उल्लिखित प्रमुख समय सीमा या तिथियां नहीं हैं।
**मुख्य बातें/मुख्य सामग्री:**
* **मेसर्स हिंदुस्तान यूनीलिवर लि0, जिला हमीरपुर (बुन्देलखण्ड क्षेत्र):**
* ₹111.40 करोड़ के निवेश के साथ 50000 टन प्रतिवर्ष की उत्पादन क्षमता वाले पर्सनल केयर सोप के विविधीकरण परियोजना के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी गई।
* स्वीकृत सुविधाएँ: जमा किए गए नेट SGST की 70% तक प्रतिपूर्ति (10 वर्षों के लिए), SC/ST श्रेणी के श्रमिकों के 25% नियोक्ताओं के लिए जमा किए गए नेट SGST का 10% तक अतिरिक्त लाभ, और विभिन्न शर्तों के तहत कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की प्रतिपूर्ति की अनुमति दी गई।
* **मेसर्स जेकेसेम (सेंट्रल) लि0, जिला प्रयागराज (पूर्वांचल क्षेत्र):**
* प्रयागराज में ₹380.23 करोड़ के निवेश के साथ 2.0 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष की सीमेन्ट उत्पादन क्षमता के लिए नई परियोजना स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी गई।
* स्वीकृत सुविधाएँ: जमा किए गए नेट SGST की 70% तक प्रतिपूर्ति (10 वर्षों के लिए), स्टाम्प शुल्क से पूरी तरह से छूट, और विभिन्न शर्तों के तहत पूंजीगत ब्याज उपादान की प्रतिपूर्ति।
* **मेसर्स आर0एल0जे0 इन्फ्रासीमेन्ट प्रा0लि0, जिला मिर्जापुर (पूर्वांचल क्षेत्र):**
* मिर्जापुर में मौजूदा सीमेन्ट इकाई के विस्तार के लिए ₹144.78 करोड़ के निवेश के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी गई, जिससे इकाई की सीमेन्ट उत्पादन क्षमता 0.18 से 1.18 एमएमटीपीए तक हो जाएगी।
* स्वीकृत सुविधाएँ: जमा किए गए नेट SGST की 70% तक प्रतिपूर्ति (10 वर्षों के लिए), स्टाम्प शुल्क से पूरी तरह से छूट, और विभिन्न शर्तों के तहत पूंजीगत ब्याज उपादान की प्रतिपूर्ति।
* **मेसर्स वन्डर सीमेन्ट लि0, जिला अलीगढ़ (पश्चिमांचल क्षेत्र):**
* अलीगढ़ में 2.0 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के साथ सीमेन्ट उत्पादन इकाई की नई परियोजना स्थापित करने के लिए ₹528.84 करोड़ के निवेश पर लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी गई।
* स्वीकृत सुविधाएँ: जमा किए गए नेट SGST की 70% तक प्रतिपूर्ति (10 वर्षों के लिए), स्टाम्प शुल्क में 75% छूट, और विभिन्न शर्तों के तहत पूंजीगत ब्याज उपादान की प्रतिपूर्ति।
* **मेसर्स त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इंडस्ट्रीज लि0, जिला बुलंदशहर (पश्चिमांचल क्षेत्र):**
* हालांकि शुरू में इथेनॉल उत्पादन इकाई के लिए कुछ सुविधाएं स्वीकृत की गई थीं, लेकिन भारत सरकार के कार्यक्रमों के तहत हित प्राप्त करने के कारण, कंपनी को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के फैसले को रद्द कर दिया गया।
* **सामान्य शर्तें और निर्देश:**
* औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के अनुसार सभी अर्ह सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
* कंपनियों को मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का अनुपालन करना आवश्यक है।
* नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए विशिष्ट व्यक्तियों से संबंधित लेनदेन की अनुमति नहीं है।
* पूंजीगत निवेश के सत्यापन के दौरान, यदि इकाई की श्रेणी में कोई परिवर्तन होता है, तो इसका दायित्व आवेदक का होगा।
**प्रभाव विश्लेषण:**
**हितधारक:** संबंधित अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, उ0प्र0शासन।
* **प्रभाव:** इन नीतियों और दिशानिर्देशों के बारे में सूचित किया गया है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** नीति का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
**हितधारक:** संबंधित मण्डलायुक्त/जिलाधिकारी, उ0प्र0।
* **प्रभाव:** इन नीतियों और दिशानिर्देशों के बारे में सूचित किया गया है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** स्थानीय परियोजनाओं के लिए उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
**हितधारक:** आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग निदेशालय, कानपुर।
* **प्रभाव:** सूचित किया गया और नीति के कार्यान्वयन में शामिल।
* **आवश्यक कार्रवाई:** नीति को क्रियान्वित करना।
**हितधारक:** प्रबन्ध निदेशक, पिकप।
* **प्रभाव:** सूचित किया गया और नीति के कार्यान्वयन में शामिल।
* **आवश्यक कार्रवाई:** स्वीकृत परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान करना।
**हितधारक:** मेसर्स हिंदुस्तान यूनीलिवर लि0, मेसर्स जेकेसेम (सेंट्रल) लि0, मेसर्स आर0एल0जे0 इन्फ्रासीमेन्ट प्रा0लि0, मेसर्स वन्डर सीमेन्ट लि0 और मेसर्स त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इंडस्ट्रीज लि0।
* **प्रभाव:** उनकी परियोजनाओं के लिए स्वीकृत सुविधाएँ और उन विशिष्ट शर्तों के अधीन हैं जिनका उन्हें पालन करना है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** नीति का अनुपालन सुनिश्चित करना और सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा करना।
**हितधारक:** औद्योगिक विकास विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त विभागाध्यक्ष/निगमों के प्रबन्ध निदेशक एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी।
* **प्रभाव:** सूचित किया गया और कार्यान्वयन में शामिल।
* **आवश्यक कार्रवाई:** अनुमोदन प्रदान करना और सुविधाओं का वितरण सुनिश्चित करना।
Key Entities Referenced
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 : उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017, जिसके तहत प्रदेश में मेगा परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष सुविधाओं और रियायतों का प्रावधान है।
उत्तर प्रदेश शासन : उत्तर प्रदेश सरकार की प्रशासनिक शाखा जो नीतियाँ और कानून लागू करती है।
हमीरपुर (बुन्देलखण्ड क्षेत्र) : वह क्षेत्र जहाँ मेसर्स हिन्दुस्तान यूनीलिवर लि० ने 50000 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के साथ पर्सनल केयर सोप उत्पादन की परियोजना प्रस्तावित की है।
प्रयागराज (पूर्वांचल क्षेत्र) : वह क्षेत्र जहाँ मेसर्स जेकेसेम (सेन्ट्रल) लि० द्वारा 2.0 मिलियन मैट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के साथ सीमेन्ट उत्पादन की नयी परियोजना स्थापित की जानी है।
जिला बुलन्दशहर (पश्चिमांचल क्षेत्र) : वह क्षेत्र जहाँ मेसर्स त्रिवेणी इन्जीनियरिंग एण्ड इण्डस्ट्रीज लि० को डिस्टिलरी परियोजना स्थापित करने की अनुमति दी गई थी (लेकिन बाद में संस्तुति निरस्त कर दी गई)।
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संख्या-26/2022/480/77-6-2022-6099/35/202
प्रेषक,
अरविन्द कुमार,
अपर मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
wn सम्बन्धित अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, उ0प्र0शासन।
सम्बन्धित मण्डलायुक्त/ जिलाधिकारी, उ0प्र0|
आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग निदेशालय, कानपुर ।
4. प्रबन्ध निदेशक, पिकप।
औद्योगिक विकास अनुभाग-6 लखनऊ : दिनांक i7 जून, 2022
विषय: उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन alid-20I7 के क्रियान्वयन सम्बबन्धी
नियमावत्री के अन्तर्गत प्रदेश A मेगा परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहन देने के
उद्देश्य से दी जाने वाली विशेष सुविधाओं एवं रियायतों के संबंध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक प्रदेश सरकार द्वारा निर्गत उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार
प्रोत्साहन Alfa-207 के क्रियान्वयन सम्बन्धी नियमावत्री के अन्तर्गत प्रदेश में मेगा परियोजनाओं
की स्थापना हेतु दिए जाने वाले प्रोत्साहन विषयक शासनादेश AeA-7359/77-6-7-5(va)/7
दिनांक 25.0.20i7 के क्रम में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि इस संबंध A सम्यक्
विचारोपरान्त निम्नांकित इकाईयों को मेगा परियोजनान्तर्गत विशेष सुविधाए एवं रियायतें नियमावली
के प्राविधानों के अनुसार निर्धारित की गयी सीमा तक निम्नानुसार प्रदान किए जाने का निर्णय लिया
गया हैं:-
() Fae हिन्दुस्तान यूनीलिवर fer, जिला हमीरपुर(बुन्देलखण्ड क्षेत्र)
मेसर्स हिन्दुस्तान यूनीलिवर लि0 द्वारा दिनांक 08.(2.202 को पुनरीक्षित प्रस्ताव प्रस्तुत
किया गया जो कि इकाई के वर्तमान परियोजना स्थल core BO v-, औद्योगिक क्षेत्र भरूआ
सुमेरपुर, जिला हमीरपुर पर विविधीकरण परियोजना के रूप में दर्शाया गया है एवं इसके साथ
as डी0पी0आर0 एवं अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराये गये हैं, जिनके अध्ययन के पश्चात
नोडल संस्था दूवारा एजेण्डा नोट में इंगित किया गया है कि इकाई के वर्तमान परियोजना स्थल
प्लाट सं0 v-l, औद्योगिक क्षेत्र भरूआ सुमेरपुर, जिला हमीरपुर पर दो इकाईयोां वर्तमान में
कार्यरत हैं जिसमें ग्रास ब्लाक रू.69.96 करोड़ दर्शाया गया है। नियमावली के प्रस्तर 2.3 में
विविधीकरण की परिभाषा के अनुसार वर्तमान इकाई GANT न्यूनतम 25 प्रतिशत का नया निवेश
करना होगा एवं यह शर्त इस प्रस्ताव में पूर्ण हो रही है, चूँकि प्रस्तावित परियोजना मैं &.47.40
करोड़ का नया स्थाई पूंजी निवेश वर्तमान ग्रास ब्लाक का 65.68 प्रतिशत होना दर्शाया गया है।
मेसर्स हिन्दुस्तान यूनीलिवर लि0 दूवारा जिला हमीरपुर (बुन्देलखण्ड क्षेत्र) A 50000 टन
प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के साथ पर्सनल केयर सोप उत्पादन हेतु %.(2.60 करोड़ पूँजी निवेश
=
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(अह Yo निवेश 6.444.40 करोड़) के माध्यम से एक विविधीकरण की परियोजना (इकाई
संख्या-3) स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
उक्त परियोजना हेतु कम्पनी द्वारा औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन affA-2077
के क्रियान्वयन सम्बन्धी नियमावली के अन्तर्गत निम्नलिखित सुविधाओं हेतु आवेदन किया
गया है:-
7080, आवेदित सुविधा नियमावली के अन्तर्गत सुविधाओं की अनुमन्यता
. जमा की गई नेट एस0जी0एस0टी0 नियमावली के प्रस्तर 3.2 के अनुसार जमा की गई नेट
की प्रतिपूर्ति। एस0जी0एस0 टी0 की 70 प्रतिशत प्रतिपूर्ति 0 वर्षों
हेतु अनुमन्य है।
मा की गई नेट एस0जी0एस0टी0 की अतिरिक्त प्रतिपूर्ति।
0 प्रतिशत. जी.एस.टी. oer नियमावली के प्रस्तर 3.4 के अनुसार निम्नलिखित
न्यूनतम 25 प्रतिशत एस0सी0/ प्रत्येक स्थिति में औद्योगिक उपक्रमों cant पश्चिमांचल
एस0टी0 श्रेणी के श्रमिक कार्यरत क्षेत्र में 400 या उससे अधिक श्रमिकों एवं बुन्देलखण्ड,
हैं बशर्तें पश्चिमांचल क्षेत्र में पूर्वांचल एवं मध्यांचल क्षेत्र में 200 या उससे अधिक
स्थित औद्योगिक उपक्रमों A श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराये जाने की दशा में
श्रमिकों की न्यूनतम संख्या 400 राज्य सरकार के खाते A जमा A गई नेट
हो और बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल एवं एस0जी0एस0टी0 का 0 प्रतिशत अतिरिक्त सुविधा के
मध्यांचल क्षेत्र में न्यूनतम 200 रूप मैं निम्न परिस्थितियों मैं अनुमन्य हैः-
या उससे अधिक श्रमिक हों। अ. औद्योगिक उपक्रमों cant गरीबी रेखा से नीचे रहने
2.2 0 प्रतिशत. जी.एस.टी. oe वाले कम से कम 25 प्रतिशत श्रमिकों को रोजगार देने
न्यूनतम 40 प्रतिशत. महिला पर।|
कर्मचारी... कार्यरत € बशर्ते ब. औद्योगिक उपक्रमों द्वारा कम से कम 40 प्रतिशत
पश्चिमां क्षेत्र मैं स्थित महिला श्रमिकों को रोजगार देने पर।
aa उपक्रमों मैं श्रमिकों की स. औद्योगिक उपक्रमों द्वारा कम से कम 25 प्रतिशत
न्यूनतम संख्या. 400 हो. और
एस0सी0/एस0टी0 श्रेणी के श्रमिकों को रोजगार देने पर।
बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल एवं मध्यांचल
क्षेत्र में न्यूनतम 200 या उससे
थधिक श्रमिक हों
कर्मचारी भविष्य निधि (ई0पी0 नियमावली के प्रस्तर 3.3 के अनुसार सभी पात्र नई
फ0) की प्रतिपूर्ति। औद्योगिक somal, जिनमें (00 या उससे अधिक
अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराया गया
a, को. Sah द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि
(ई0पी0एफ0) में श्रमिकों के पक्ष मैं जमा की गयी
नियोक्ता योगदान की राशि की 50 प्रतिशत धनराशि की
प्रतिपूर्ति वाणिज्यिक उत्पादन की तिथि से तीन वर्ष के
पश्चात् अगले 5 वर्ष हेतु अनुमन्य है।
चूंकि कम्पनी द्वारा विविधीकरण परियोजना की स्थापना
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |प्रस्तावित है अतः यह सुविधा अनुमन्य नही FI
3. तिरिक्त (0 प्रतिशत कर्मचारी | नियमावल्नी के प्रस्तर 3.5.8 के अनुसार औद्योगिक
भविष्य निधि (ई0पी0एफ0) की | उपक्रमों cant कम से कम 200 प्रत्यक्ष श्रमिकों (कुशल
प्रतिपूर्ति | और अकुशल) को रोजगार उपलब्ध कराने पर नियोक्ता
अंशदान पर अतिरिक्त 0 प्रतिशत ई0पी0एफ0 की
प्रतिपूर्ति उपलब्ध करायी जायेगी।
चूंकि कम्पनी द्वारा विविधीकरण परियोजना की स्थापना
प्रस्तावित है अतः यह सुविधा अनुमन्य नही FI
4. fe, निर्माण सामग्री एवं अन्य | नियमावत्री के प्रस्तर 3.5.7 के अनुसार उद्योग/ उपक्रम,
पूंजीगत माल इत्यादि अपात्र इनपुट | जोकि जी.एस.टी. व्यवस्था के अन्तर्गत इनपुट टैक्स
कस क्रेडिट की प्रतिपूर्ति क्रेडिट हेतु अपात्र है, क्रय किये गये यंत्र एवं as,
निर्माण सामग्री एवं निर्माण और प्रचलन (कमीशनिंग)
अवधि में क्रय किये अन्य पूंजीगत/ कच्चे माल इत्यादि
पर जमा किये गये जी.एस.टी. की प्रतिपूर्ति हेतु 3
होंगे। सम्पूर्ण पात्र पूंजी निवेश की गणना के समय इस
प्रकार की राशि. पूंजी निवेश में सम्मिलित की जायेगी।
5. पावर कम्पनियों से विद्युत क्रय | नियमावत्री के प्रस्तर 3.5.4 के अनुसार राज्य में स्थापि
पर विद्युत शुल्क से छूट होने वाले सभी नये औद्योगिक उपक्रमों को इलेक्ट्रिसिटी
इयूटी में 0 वर्ष हेतु छूट HAT है।
चूंकि कम्पनी द्वारा विविधीकरण परियोजना की cart
प्रस्तावित है अतः यह सुविधा अनुमन्य नही FI
बुन्देलखण्ड A मेगा श्रेणी हेतु %.00 करोड़ से अधिक किन्तु 250 करोड़ से कम के पूँजी
निवेश एवं 5 वर्ष की निवेश अवधि का प्राविधान है।
कम्पनी CART निवेश प्रारम्भ करने की तिथि दिनांक (0.02.202 चुनी गयी है एवं परियोजना
का वाणिज्यिक उत्पादन दिनांक 07.42.2022 को प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है। पूंजीगत निवेश
के मदों में आवेदक aan कतिपय सम्पपत्तियाँ दर्शायी गयी है, जो कि नियमावल्ली के संगत प्राविधान
(2.3.2) के अनुसार HAA हैं, अतः यह स्पष्ट किया जा रहा है कि पूंजीगत निवेश के सत्यापन के
दौरान ऐसे मदों को पूंजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के कारण इकाई की श्रेणी में यदि
कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
अत: कम्पनी cant पूर्व में औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन aAia-20i7 के
क्रियान्वयन सम्बन्धी नियमावल्ली के अन्तर्गत उनके निवेश मित्र पोर्टल पर प्रस्तुत/लम्वित प्रस्ताव को
निरस्त किये जाने तथा कम्पनी की प्रस्तावित परियोजना हेतु उपरोक्त तालिका के क्रम AEAT-,2
(2. एवं 2.2) एवं 4 पर आवेदित सुविधाओं के सम्बन्ध में निम्न शर्तों के अधीन लेटर ऑफ HEHE
निर्गत किए जाने का निर्णय लिया गया है:-
t. सभी ae सुविधाएं औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-207 के क्रियान्वयन
सम्बन्धी नियमावली के प्रस्तर-3 के अनुसार उपलब्ध करायी जायेंगी।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति-2020 के अन्तर्गत आवेदक कम्पनी की i00 प्रतिशत सहायक
कम्पनी मे0 यूनीलिवर इण्डिया लि0को विशेष सुविधाएं अनुमोदित की गयी हैं। इस सम्बन्ध
HAO यूनीलिवर इण्डिया लि0 द्वारा विक्रय किये जाने वाले उत्पाद के किसी भी अंश की
आवेदक कम्पनी AO हिन्दुस्तान यूनीलिवर for की प्रस्तावित इकाई संख्या-3 को आपूर्ति
नहीं की जायेगी।
कम्पनी द्वारा मानक परिचालन प्रक्रिया सम्बन्धी यथा-संशोधित शासनादेश दिनांक
|2.06.2020 (संशोधित दिनांक 4.42.2020 ve 26.03.202) का. अनुपालन करना
आवश्यक होगा।
नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20(7 की उपवर्णित धारा
25(4) A वर्णित "सुभिन््न cafta(distinct person)’ से सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20(7 की उपवर्णित धारा
5 में परिभाषित "सम्बन्धित व्यक्ति (related person)” से सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
पूँजीगत निवेश के Hel में आवेदक cant कतिपय सम्पत्तियाँ दर्शायी गयी है, जो कि
नियमावली के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार अमान्य हैं, अतः पूँजीगत निवेश के
सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूँजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के कारण इकाई
की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।"
(2) Fae जेकेसेम (Arca) लि0, जिला प्रयागराज (पूर्वांचल क्षेत्र
इम्पाव्ड कमेटी को अवगत कराया गया कि AGH जेकेसेम (Acca) लि0 aan जिला
प्रयागराज (पूर्वांचल) मैं 2.0 मिलियन मैट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के साथ सीमेन्ट उत्पादन
हेतु रू. 380.23 करोड़ पूजी निवेश (He पूँजी निवेश रू.346.79 करोड़) के माध्यम से एक नयी
परियोजना स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
उक्त परियोजना हेतु कम्पनी द्वारा औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-207 के
क्रियान्वयन सम्बन्धी नियमावत्री के अन्तर्गत निम्नलिखित सुविधाओं हेतु आवेदन किया गया है:-
क्र0सं0 आवेदित सुविधा नियमावली के अन्तर्गत सुविधाओं की अनुमन्यता
. जमा. की. गई नेट एस0जी0 | नियमावली के प्रस्तर 3.2 के अनुसार जमा की गई नेट
एस0टी0 की प्रतिपूर्ति। एस0जी0एस0टी0 की 70 प्रतिषत प्रतिपूर्ति 0 वर्षों हेतु
AAT है।
2. स्टाम्प शुल्क से छूट नियमावली के प्रस्तर 3.. के अनुसार पूर्वांचल क्षेत्र में
स्टाम्प शुल्क मैं 00 प्रतिशत की छूट HAT है।
3. पूंजीगत ब्याज. उपादान . की | नियमावल्री के प्रस्तर 3.5. के अनुसार प्लांट एवं मशीनरी
प्रतिपूर्ति के लिए वितरित सावधिक ऋण पर भुगतान किये गये
वास्तविक ब्याज अथवा 5 प्रतिशत की ब्याज दर से किया
गया भुगतान, जो भी कम हो, 5 वर्ष तक पूंजी ब्याज
उपादान प्रतिपूर्ति की सुविधा इस प्रतिबन्ध के साथ
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |अनुमन्य है कि सुविधा की अधिकतम वार्षिक सीमा रू0
50 लाख से अधिक नही होगी। यद्यपि औद्योगिक उपक्रम
मैं दिव्यांग/एस.सी./एस.टी./महिला प्रवर्तकों की कम से कम
75 प्रतिषत इक्विटी होने की दशा में 2.5 प्रतिशत
अतिरिक्त पूंजी ब्याज उपादान की सुविधा (अधिकतम 7.5
प्रतिशत) उपलब्ध कराई जायेगी।
4. पावर कम्पनियों से विद्युत क्रय | नियमावल्री के प्रस्तर 3.5.4 के अनुसार राज्य में स्थापित
पर विद्युत शुल्क से छूट होने वाले सभी नये औद्योगिक उपक्रमों को इलेक्ट्रिसिटी
इयूटी से 0 वर्ष हेतु छूट अनुमन्य है।
पूर्वांचल में मेगा प्लस श्रेणी हेतु रू.250 करोड़ से अधिक fed रू.500 करोड़ से कम के पूँजी
निवेश एवं 5 वर्ष की निवेश अवधि का प्राविधान है।
कम्पनी द्वारा निवेश प्रारम्भ करने की तिथि दिनांक 07.04.2022 चुनी गयी है एवं
परियोजना दिनांक 07.04.2024 तक पूर्ण किया जाना अवगत कराया गया है।
पूंजीगत निवेश के मदों A आवेदक द्वारा कतिपय सम्पत्तियां दर्शायी गयी है, जो कि
नियमावल्ली के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार HAA हैं, अतः यह स्पष्ट किया जा रहा है कि
पूंजीगत निवेश के सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूँजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के
कारण इकाई की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
आवेदक कम्पनी मे0 जे0के0 सीमैंट लि0 की (00 प्रतिशत अनुषंगी कम्पनी है। आवेदक कम्पनी
AO AGH जेकेसेम (सेन्ट्रल) लि0 द्वारा एन0सी0एल0टी0 में मे0जे0के0 सीमेंट लि0 के साथ
समामेलन (amalgamation) हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। AATActe(amalgamation) के
पश्चात आवेदक कम्पनी मे0जे0के0सीमेंट लि0 के नाम से जानी जायेगी।
अतः: कम्पनी की प्रस्तावित परियोजना हेतु उपरोक्त तालिका के क्रम संख्या-, 2, 3 एवं 4 पर
उल्लिखित सुविधाएं नीति/नियमावल्ली-207 के अन्तर्गत प्राविधानित सीमाओं के भीतर एवं निम्न
शर्तों के अधीन लेटर ऑफ Hee निर्गत किए जाने का निर्णय लिया गया है:-
. सभी ae सुविधाएं औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन afa-207 के क्रियान्वयन
सम्बन्धी नियमावली के प्रस्तर-3 के अनुसार उपलब्ध करायी जायेंगी।
2. कम्पनी दूवारा प्रस्तावित परियोजना स्थल हेतु पृथक जी.एस.टी.आई.एन. प्राप्त करना होगा।
3. कम्पनी द्वारा मानक परिचालन प्रक्रिया सम्बन्धी यथा-संशोधित शासनादेश दिनांक
|2.06.2020 (संशोधित दिनांक 4.42.2020 vd 26.03.202) का. अनुपालन करना
आवश्यक होगा।
4. नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20i7 की उपवर्णित धारा
25(4) A वर्णित "सुभिन््न व्यक्ति (distinct person)” A सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
5. ae एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20:7 की उपवर्णित धारा
5 में परिभाषित “सम्बन्धित व्यक्ति (related person)” A सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |6. पूंजीगत निवेश के मदों में आवेदक दूवारा कतिपय सम्पत्तियां दर्शायी गयी है, जो कि
नियमावल्ली के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार अमान्य हैं, अतः पूंजीगत निवेश के
सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूंजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के कारण इकाई
की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
7. चूंकि आवेदक कम्पनी AO मेसर्स जेकेसेम (Arca) लि0 का AO जे0के0 सीमेंट लि0 के साथ
समामेलन (amalgamation) प्रस्तावित है अतः निम्नलिखित शर्तों का प्रस्तावित cet ऑफ
कम्फर्ट में समावेश किया जाना है:-
7. हस्तांतरणकर्ता AO मेसर्स जेकेसेम (Acca) लि0 va हस्तांतरी AO जे0के0 सीमेंट
fao की समस्त इकाईयों को, जिनको विभिन्न नीतियों के अन्तर्गत ल्लैटर ऑफ
कम्फर्ट निर्गत किये गये हैं, स्वतंत्र TFA ऑफ एकाउन्ट्स रखने होंगे।
7.2 हस्तांतरणकर्ता एवं Bea को इकाईयों से सम्बन्धित इनपुट टैक्स क्रेडिट को
सम्बन्धित इकाईयों में रिटिन करके रखना होगा।
7.3 हस्तांतरणकर्ता एवं हस्तांतरी इकाईयों में उत्पादन में वृद्धि इन इकाईयों A निर्गत
किये गये एल0ओएसी0 के आधार पर किये गये पूंजी निवेश पर आधारित होगी न
कि हस्तांतरणकर्ता एवं हस्तांतरी इकाईयों A समामेलन के कारण होगी।
7.4 हस्तांतरणकर्ता एवं हस्तांतरी कम्पनियों को दी जाने वाली सुविधायें नियमावली 207
एवं समय-समय पर जारी एस0ओए0पी0 के शासनादेशों एवं प्रदेश सरकार की अन्य
नीतियों के प्राविधानों के अनुसार होंगी।
7.5 अन्य विस्तृत शर्तें औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से अनुमोदन के
पश्चात एल0ओएसी0 में सम्मिलित की जायेंगी।
(3) मेसर्स आर0एल0जे0 इन्फ्रासीमेन्ट प्रा0लि0,जिला मिर्जापुर(पूर्वांचल क्षेत्र)
AO आर0एल0जे0 इन्फ्रासीमेन्ट WOO द्वारा जिला मिर्जापुर (पूर्वांचल) A पूर्व स्थापित
सीमेन्ट इकाई के विस्तारीकरण हेतु ¥.44.78 करोड़ पूंजी निवेश (3s Yoh निवेश %.34.24 करोड़)
के माध्यम से एक परियोजना स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। विस्तारीकरण के पश्चात इकाई की
सीमेन्ट उत्पादन क्षमता निम्नवत् होगीः-
पूर्व क्षमता 0.48 एम.एम.टी.पी.ए.
प्रस्तावित क्षमता {.00 एम.एम.टी.पी.ए.
कुल क्षमता .8 एम.एम.टी.पी.ए
उक्त परियोजना हेतु कम्पनी द्वारा औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन aflfa-20i7 के
क्रियान्वयन सम्बन्धी gach के अन्तर्गत निम्नलिखित सुविधाओं हेतु आवेदन किया गया है:-
क्रफसं0 | वेदित सुविधा नियमावली के अन्तर्गत सुविधाओं की अनुमन्यता
l. frat की. गई नेट एस0जी0| नियमावली के GER 3.2 के अनुसार जमा की गई नेट
एस0टी0 की प्रतिपूर्ति। एस0जी0एस0टी0 की 70 प्रतिशत प्रतिपूर्ति 0 वर्षों हेतु
अनुमन्य है।
2. स्टाम्प शुल्क से छूट नियमावलत्री के प्रस्तर 3.] के अनुसार पूर्वांचल क्षेत्र मैं
स्टाम्प शुल्क मैं 00 प्रतिशत की छूट अनुमन्य है।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |चूंकि कम्पनी cart नयी भूमि का क्रय प्रस्तावित नहीं है
अतः यह सुविधा कम्पनी को अनुमन्य नहीं होगी।
3. पूंजीगत ब्याज. उपादान की नियमावली के प्रस्तर 3.5. के अनुसार प्लांट एवं मशीनरी
प्रतिपूर्ति के लिए वितरित सावधिक ऋण पर भुगतान किये गये
वास्तविक ब्याज अथवा 5 प्रतिशत की ब्याज दर से किया
गया. भुगतान, जो भी कम हो, 5 वर्ष तक पूंजी ब्याज
उपादान प्रतिपूर्ति की सुविधा इस प्रतिबन्ध के साथ अनुमन्य
है कि सुविधा की अधिकतम वार्षिक सीमा रू0 50 लाख से
अधिक नहीं होगी। यद्यपि. औद्योगिक उपक्रम में
दिव्यांग/एस.सी./एस.टी./महिला प्रवर्तकों की कम से कम 75
प्रतिशत इक्विटी होने की दशा में 2.5 प्रतिशत अतिरिक्त
पूंजी ब्याज उपादान की सुविधा (अधिकतम 7.5 प्रतिशत)
उपलब्ध कराई जायेगी।
4. अवस्थापना ब्याज उपादान की नियमावली के Wat 3.5.2 के अनुसार अवस्थापना
प्रतिपूर्ति सुविधाओं के विकास हेतु लिये गये ऋण पर भुगतान किये
गये वास्तविक ब्याज अथवा 5 प्रतिशत की ब्याज दर से
किया. गया. भुगतान, जो भी कम हो, 5 वर्ष तक
अवस्थापना ब्याज उपादान प्रतिपूर्ति की सुविधा इस प्रतिबन्ध
के साथ अनुमन्य है कि सुविधा की अधिकतम सम्पूर्ण सीमा
रू. | करोड़ से अधिक नहीं होगी। यद्यपि औद्योगिक
उपक्रम में दिव्यांग/एस.सी./एस.टी./महिला प्रवर्तकों की कम
से कम 75 प्रतिशत इक्विटी होने की दशा में 2.5 प्रतिशत
अतिरिक्त अवस्थापना ब्याज उपादान की सुविधा (अधिकतम
7.5 प्रतिशत) उपलब्ध कराई जायेगी।
5. lat कम्पनियों से विद्युत क्रय नियमावली के प्रस्तर 3.5.4 के अनुसार राज्य में स्थापित
पर विद्युत शुल्क से छूट होने वाले सभी नये औद्योगिक उपक्रमों को इलेक्ट्रिसिटी
saci मैं i0 वर्ष हेतु छूट अनुमन्य है।
चूंकि कम्पनी द्वारा विस्तारीकरण परियोजना की स्थापना
प्रस्तावित है अतः यह सुविधा अनुमन्य नही है।
पूर्वांचल A मेगा श्रेणी हेतु ¥.00 करोड़ से अधिक किन्तु रू.250 करोड़ से कम के पूँजी निवेश
एवं 5 वर्ष की निवेश अवधि का प्राविधान है।
कम्पनी CART निवेश प्रारम्भ करने की तिथि दिनांक 04.04.2022 चुनी गयी है एवं परियोजना
दिनांक 0.04.2024 तक पूर्ण किया जाना अवगत कराया गया FI
पूंजीगत निवेश के मदों में आवेदक द्वारा कतिपय सम्पत्तियां दर्शायी गयी है, जो कि नियमावल्री
के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार HAY हैं, अतः यह स्पष्ट किया जा रहा है कि पूंजीगत
निवेश के सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूंजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के कारण
इकाई की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |अत: कम्पनी की प्रस्तावित परियोजना हेतु उपरोक्त तालिका के क्रम संख्या-4, 3 एवं 4 पर
उल्लिखित आवेदित सुविधाएं नियमावली-207 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित की गयी सीमा तक
तथा निम्न शर्तों के अधीन उपलब्ध कराये जाने हेतु लेटर आफ कम्फर्ट निर्गत किए जाने का निर्णय
लिया गया हैः-
t. सभी ae सुविधाएं औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन afa-20I7 के क्रियान्वयन
सम्बन्धी नियमावली के प्रस्तर-3 के अनुसार उपलब्ध करायी जायेंगी।
कम्पनी द्वारा मानक परिचालन प्रक्रिया सम्बन्धी यथा-संशोधित यशासनादेश दिनांक
|2.06.2020 (संशोधित दिनांक (4.2.2020 एवं 26.03.202) का अनुपालन करना
आवश्यक होगा।
नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20(7 की उपवर्णित धारा
25(4) A वर्णित "ate व्यक्ति (distinct person)” से सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20(7h) उपवर्णित धारा
5 में परिभाषित "सम्बन्धित व्यक्ति (related person)” से सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
पूंजीगत निवेश के मदों में आवेदक द्वारा कतिपय सम्पत्तियां दर्शायी गयी है, जो कि
नियमावल्ली के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार अमान्य हैं, अतः पूंजीगत निवेश के
सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूंजीगत निवेश मैं सम्मिलित न किये जाने के कारण
इकाई की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
3.4 मेसर्स वन्डर सीमेन्ट लि0, जिला अलीगढ़ (पश्चिमांचल क्षेत्र)
मेसर्स dest सीमेन्ट TIO cant जिला अलीगढ़ (पश्चिमांचल क्षेत्र) में 2.0 मिलियन मैट्रिक
टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता के साथ सीमेन्ट उत्पादन हेतु रू.528.84 करोड़ पूंजी निवेश (अहँ पूँजी
निवेश रू.470.99 करोड़) के माध्यम से एक नयी परियोजना स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।
उक्त परियोजना हेतु कम्पनी द्वारा औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन aAlfA-20i7 के
क्रियान्वयन सम्बन्धी नियमावत्री के अन्तर्गत निम्नलिखित सुविधाओं हेतु आवेदन किया गया हैः-
ORO आवेदित सुविधा नियमावली के अन्तर्गत सुविधाओं की अनुमन्यता
. जमा की. गई नेट एस0जी0 नियमावत्नी के प्रस्तर 3.2 के अनुसार जमा की गई
एसए0टी0 की प्रतिपूर्ति। नेट एस0जी0एस0टी0 की 70 प्रतिशत प्रतिपूर्ति 0
वर्षों हेतु अनुमन्य है।
2. स्टाम्प शुल्क से छूट नियमावली के प्रस्तर 3.7 के अनुसार पश्चिमांचल क्षेत्र
में स्टाम्प शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट अनुमन्य है।
3. पूंजीगत ब्याज. उपादान A नियमावत्री के प्रस्तर 3.5. के अनुसार प्लांट एवं
प्रतिपूर्ति मशीनरी के ल्लिए वितरित सावधिक ऋण पर भुगतान
किये गये वास्तविक ब्याज अथवा 5 प्रतिशत की ब्याज
दर से किया गया भुगतान, जो भी कम हो, 5 वर्ष तक
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |पूंजी ब्याज उपादान प्रतिपूर्ति की सुविधा इस प्रतिबन्ध
के साथ अनुमन्य है कि सुविधा की अधिकतम वार्षिक
सीमा रू0 50 लाख से अधिक नहीं होगी। यद्यपि
औद्योगिक उपक्रम में दिव्यांग एस.सी./एस.टी./महिला
प्रवर्तकों की कम से कम 75 प्रतिशत इक्विटी होने की
दशा में 2.5 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी ब्याज उपादान की
सुविधा (अधिकतम 7.5 प्रतिशत) उपलब्ध कराई
जायेगी।
A. पावर कम्पनियों से विद्युत may नियमावत्री के प्रस्तर 3.5.4 के अनुसार राज्य में
पर विद्युत शुल्क से छूट स्थापित होने वाले सभी नये औद्योगिक उपक्रमों को
इलेक्ट्रिसिटी इयूटी में i0 वर्ष हेतु छूट अनुमन्य है।
पश्चिमांचल मैं मेगा प्लस श्रेणी हेतु रू.300 करोड़ से अधिक किन्तु रू.750 करोड़ से कम के
पूँजी निवेश एवं 5 वर्ष की निवेश अवधि का प्राविधान है।
कम्पनी द्वारा निवेश प्रारम्भ करने की तिथि दिनांक 9.08.202। चुनी गयी है एवं
परियोजना दिनांक 37.42.2023 तक पूर्ण किया जाना अवगत कराया गया है।
पूंजीगत निवेश के मदों में आवेदक द्वारा कतिपय सम्पत्तियां दर्शायी गयी है, जो कि
नियमावल्ली के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार HAA हैं, अतः यह स्पष्ट किया जा रहा है कि
पूंजीगत निवेश के सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूंजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के
कारण इकाई की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
अतः: कम्पनी की प्रस्तावित परियोजना हेतु उपरोक्त तालिका के क्रम संख्या-।,2,3 एवं 4 पर
आवेदित सुविधाएं नियमावत्नी-207 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित की गयी सीमा तक निम्न
शर्तों के अधीन उपलब्ध कराने हेतु लेटर आफ कम्फर्ट निर्गत किए जाने का निर्णय लिया गया है:-
t. सभी are सुविधाएं औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन oAia-20I7 के क्रियान्वयन
सम्बन्धी नियमावल्ली के प्रस्तर-3 के अनुसार उपलब्ध करायी जायेंगी।
2. कम्पनी द्वारा मानक परिचालन Wiha सम्बन्धी यथा-संशोधित शासनादेश दिनांक
2.06.2020 (संशोधित दिनांक 4.42.2020 va 26.03.202!) का अनुपालन करना
आवश्यक होगा।
3. नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20:7 की उपवर्णित धारा
25(4) में वर्णित "सुभिन्न व्यक्ति (distinct person)” A सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
4. नेट एस.जी.एस.टी की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य जी.एस.टी. अधिनियम, 20:7 की उपवर्णित धारा
5 में परिभाषित "सम्बन्धित व्यक्ति (related person)” से सम्बन्धित transactions
अनुमन्य नहीं होंगे।
5. पूंजीगत निवेश के मदों में आवेदक cant कतिपय सम्पत्तियां दर्शायी गयी है, जो कि
नियमावली के संगत प्राविधान (2.3.2) के अनुसार HATA हैं, अतः पूंजीगत निवेश के
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |सत्यापन के दौरान ऐसे मदों को पूंजीगत निवेश में सम्मिलित न किये जाने के कारण इकाई
की श्रेणी में यदि कोई परिवर्तन होगा तो इसका दायित्व आवेदक का ही होगा।
3.5 मेसर्स त्रिवेणी इन्जीनियरिंग एण्ड इण्डस्ट्रीज लि0, जिला बुलन्दशहर (पश्चिमांचल क्षेत्र
शासनादेश सं0-3/77-6-2020-6(एम)/208 दिनांक 29.07.2020 (संशोधित शासनादेश
सं0-837/77-6-2020-6(एम)/208 दिनांक 8.03.2020), द्वारा मेसर्स त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड
इण्डस्ट्रीज लरि0 को तहसील Gail, जिला. बुलन्दशहर (पश्चिमांचल) में इथेनॉल उत्पादन हेतु
रू.75.00 करोड़ पूँजी निवेश के माध्यम से डिस्टिलरी परियोजना स्थापित करने हेतु नियमावल्नी-
20I7 के अन्तर्गत निम्नलिखित सुविधाएं अनुमोदित की गयी हैं:-
3. जमा की गई नेट एस0जी0एस0टी0 की प्रतिपूर्ति,
ब. . पूँजीगत ब्याज उपादान
GT. अवस्थापना ब्याज उपादान
तत्पश्चात चीनी उद्योग विभाग द्वारा सूचित किया गया कि आवेदक cant भारत सरकार की
"Scheme for extending financial assistance to Sugar Mills for Enhancement &
Augmentation of Ethanol Production Capacity" के अन्तर्गत ब्याज उपादान सुविधा प्राप्त की
जा चुकी है। इस विषय में आवेदक can नोडल संस्था को आवेदन के अवसर पर संसूचित नहीं
किया गया था। नियमावली के प्रस्तर 3.0 के प्राविधानों के अनुसार यदि कोई आवेदक अन्य
नीतियों के अन्तर्गत कोई सुविधा प्राप्त कर रहा है तो उस प्रकृति की सुविधा इस नियमावल्री में उसे
उपलब्ध नहीं कराई जा सकती है। इस आधार पर इम्पावर्ड कमेटी द्वारा दिनांक 6.8.2020 को
सम्पन्न बैठक मैं इस प्रकरण में पुनः शासनादेश दिनांक 29..2020 एवं शासनादेश दिनांक
|8.3.2020 को संशोधन हेतु संस्तुति की गई थी जिस पर अभी मा0 मंत्रिपरिषद का अनुमोदन
अप्राप्त है। मेसर्स त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इण्डस्ट्रीज लि0 को लेटर आफ कम्पफर्ट निर्गत नहीं किया
गया है।
उपरोक्त के अनुक्रम में राज्य कर विभाग से उनके पत्र संख्या (092/saNS-2-9(56)/ 7टी.सी.
दिनांक 8.0.202। एवं ततविषयक नोडल संस्था के विश्लेषण के आधार पर इम्पावर्ड कमेटी की
दिनांक 29.0.202 के सम्पन्न बैठक में बताया गया था कि प्रश्नगत इकाई दूवारा कच्चे माल
(शीरा) के क्रय पर देय एस0जी0एस0टी0 दर 4 प्रतिशत एवं मुख्य उत्पाद इथेनॉल के विक्रय पर
देय एस0जी0एस0टी0 दर 2.5 प्रतिशत होने के कारण एस0ओए0पी0 की पृथक जी0एस0टी0एन0 की
अनिवार्य शर्त के कारण प्रकरण में 'इन्वर्टेड इयूटी स्ट्रक्चर' की स्थिति उत्पन्न होने के कारण नेट
राज्य जी0एस0टी0 की प्रतिपूर्ति की सुविधा इकाई को प्राप्त न हो सकेगी। तद्नुसार समिति ant
यह निर्णय लिया गया था कि एस0ओए0पी0 के संगत शासनादेशों के अधीन आवेदकों द्वारा उनके पक्ष
में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने हेतु सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त किये जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ
करने के पूर्व पृथक जी0एस0टी0 रजिस्ट्रीकरण प्राप्त किया जाना होगा।
उपरोक्त निर्देशो के अनुपालन मैं कम्पनी द्वारा अपने पत्र दिनांक 0.47.202 के माध्यम से
अवगत कराया गया कि मुख्य कच्चे माल के इनपुट के रूप में पृथक जी0एस0टी0 रजिस्ट्रेशन प्राप्त
करना व्यवहारिक नहीं होगा क्योंकि शीरे (कच्चा माल) पर 28 प्रतिशत जी0एसए0टी0 हैं एवं
इथेनाल(अन्तिम उत्पाद) पर 5 प्रतिशत जी0एएस0टी0 है। 'इन्वर्टेड इयूटी स्ट्रक्चर' होने के कारण
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |कम्पनी CART भुगतान किये गये नेट एस0जी0एस0टी0 की प्रतिपूर्ति हेतु कोई लाभ अर्जित होने की
सम्भावना नहीं है। आवेदक द्वारा आसवनी इकाईयों के लिए कुछ विशेष प्रावधान बनाने पर विचार
करने का अनुरोध किया गया है जिससे कि नीति के अन्तर्गत वांछित सुविधाएं किसी रूप में उपलब्ध
हो सकें।
एस0ओए0पी0 शासनादेश दिनांक 72.06.2020, इम्पाव्ड कमेटी की दिनांक 29.0.2024 को
सम्पन्न बैठक में लिये गये निर्णय एवं एस0ओए0पी0 शासनादेश के अनुपालन के विषय में व्यक्त की
गई कम्पनी की अनापत्ति (पृथक जी0एस0टी0 रजिस्ट्रीकरण के संबंध में) के eed नोडल Wales
ART इम्पावर्ड कमेटी द्वारा दिनांक 06.08.2020 को की गई संस्तुति पर पुनर्विचार करते हुए मेसर्स
त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इण्डस्ट्रीज THO को लेटर ऑफ कम्फफर्ट विषयक शासनादेश सं0-34/77-6-
2020-6(एम)/208 दिनांक 29.0.2020(संशोधित शासनादेश सं0-837/77-6-2020-6(एम)/208
दिनांक 8.03.2020) निरस्त करने हेतु संस्तुति की गई। इम्पावर्ड कमेटी से यह भी अनुरोध किया
गया कि कम्पनी के आवेदन दिनांक 0..202। को निरस्त कर दिया जाए।
अतः: मेसर्स त्रिवेणी इन्जीनियरिंग एण्ड इण्डस्ट्रीज लि0 को उनके द्वारा जिला बुलन्दशहर में
स्थापित की जाने वाली प्रस्तावित परियोजना हेतु पूर्व A निर्गत शासनादेश A0-34/77-6-2020-
6(एम)/208दिनांक 29.07.2020 (संशोधित शासनादेश WO0-837/77-6-2020-6(UA)/20i8 दिनांक
8.03.2020) दूवारा अनुमोदित लेटर आफ Hee को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।
2. राज्य सरकार Gah इस शासनादेश एव शासनादेश 4359/77-47-5(TA)/7 दिनांक
25.0.207 की व्यवस्था के अन्तर्गत जिन मेगा परियोजनाओं को विशेष सुविधाएं va रियायतें
प्रदान करने पर अनुमोदन प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है उनको प्रश्नगत सभी प्रकार की
सुविधाए प्राधिकृत संस्था द्वारा संबंधित शासनादेशों के प्राविधानों का अनुपालन करते हुए वितरित
की जाएगी।
3. संबंधित विभागों द्वारा संदर्भित नई इकाईयों हेतु अनुमोदित सुविधाओं को निर्णीत सीमा तक
उपलब्ध कराए जाने हेतु शासनादेश जारी किए जायेंगे।
A. किसी भी प्रकार की प्रक्रिया के निर्धारण हेतु प्राधिकृत संस्था cant इम्पाव्ड कमेटी से
अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।
5. .... औद्योगिक उपक्रमों cant परियोजना की प्रकृति अथवा परियोजना लागत में परिवर्तन/बदलाव
जिससे इसकी श्रेणी मैं परिवर्तन उत्पन्न हो, लेटर ऑफ कम्फफर्ट की शर्तों के परिवर्तन, इत्यादि हेतु
दिये गये आवेदन का नोडल संस्था द्वारा स्वयं अथवा बाह्य संस्था के माध्यम से परीक्षण कर
स्वीकृति प्राधिकारी के विचार हेतु प्रस्तुत किया जाएगा, जिनका निर्णय अन्तिम होगा।
6. सुविधाओ की निर्धारित सीमा(मात्रा(अवधि) पूरी होने अथवा नियमों एवं शर्तों का उल्लंघन होन
पर लेटर ऑफ कम्फर्ट स्वत: निरस्त समझा जाएगा।
7. यदि औद्योगिक उपक्रमों cant दी गयी जानकारी/अभिलेख असत्य पाए जाते हैं अथवा
भौतिक तथ्यों को छिपाकर सुविधाएं प्राप्त की जाती है तो ऐसी दशा में लेटर ऑफ कम्फर्ट/स्वीकृति
पत्र निरस्त किए जायेंगे एवं औद्योगिक उपक्रम को वितरित की गयी सभी सुविधाओं की राशि प्रदेश
में प्रचलित अधिनियमों के अन्तर्गत भूमि राजस्व के बकायों के रूप वसूली योग्य होगी।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |8. शासनादेश संख्या-24/2020/4395/77-6-2020-5(एम)/207टी0सी0-2 दिनांक 2.06.2020
(यथासंशोधित) दूवारा निर्धारित मानक परिचालन प्रक्रिया($07) की सभी शर्तों(प्रतिबन्धों एवं सुरक्षा
उपायों 'सेफगाईस' का अनुपालन करते हुए इकाईयों को नेट एस.जी.एस.टी. प्रतिपूर्ति की जाएगी।
भवदीय,
अरविन्द कुमार
अपर मुख्य सचिव।
WCAI-26/2022/480( )/77-6-2022-6099/3 5/202 aa fear
उपर्युक्त की प्रति निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित हैः-
६ 9 ;,4 9 छा फी wr = अध्यक्ष,उ.प्र. राजस्व परिषद, लखनऊ।
मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त,उ0प्र0 |
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री, उ.प्र. शासन।
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, वित्त विभाग, उ.प्र. शासन।
प्रमुख सचिव, न्याय विभाग, उ.प्र. शासन।
स्टाफ ऑफीसर, मुख्य सचिव, उ.प्र. शासन।
महालेखाकार,लेखा परीक्षा (प्रथम एवं द्वितीय) उ.प्र., प्रयागराज।
औद्योगिक विकास विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त विभागाध्यक्ष/निगमों के प्रबन्ध
निदेशक एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी।
—s© मुख्य Heh, इनवेस्ट यू0पी0, पिकप भवन गोमतीनगर, लखनऊ को इस
अनुरोध के साथ प्रेषित कि शासनादेश की 00 प्रतियाँ मुद्रित कराकर औद्योगिक
विकास अनुभाग-6 को उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
2. नियोजन अनुभाग-, उ.प्र. शासन, लखनऊ।
3. वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-4/वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-6
4. गार्ड फाइल।
आजा से,
रजनी Sled पाण्डेय
अनु सचिव।
यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |