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Date: 2018-04-20 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

''उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017''

Issued by औद्योगिक विकास विभाग · औद्योगिक विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

**कार्यकारी सारांश** दस्तावेज़ में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के लिए एक व्यापक ढांचा बताया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य में औद्योगीकरण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। यह नीति अधिसूचना की तारीख से 5 साल तक प्रभावी रहेगी। दस्तावेज़ एक सक्षम बुनियादी ढांचा बनाने, निवेश आकर्षित करने, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, कौशल विकास को बढ़ावा देने और एमएसएमई के लिए सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है। **मुख्य बातें** * **दृष्टिक्षेत्र और कार्यान्वयन:** * उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना। * अवस्थापना को सक्षम करके और सुलभ बुनियादी ढांचे के विकास और उन्नयन के माध्यम से निवेश आकर्षित करना। * रोजगार सृजन पर ध्यान देना। * **अवस्थापना विकास:** * औद्योगिक विकास के लिए भूमि की उपलब्धता को प्राथमिकता देना और मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करना। * नए औद्योगिक पार्कों के विकास और मौजूदा पार्कों के उन्नयन को प्रोत्साहित करना। * प्रमुख बाजारों के साथ संपर्क सुनिश्चित करने के लिए सड़क, वायु, रेल और जलमार्गों के माध्यम से कनेक्टिविटी में सुधार करना। * लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और समर्पित माल ढुलाई गलियारों का लाभ उठाना। * सभी के लिए निरंतर और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बिजली के बुनियादी ढांचे का विकास करना। * **व्यापार करने में सहजता:** * औद्योगिक सेवाओं, स्वीकृतियों और अनुमोदनों से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाना। * समयबद्ध स्वीकृतियां और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस स्थापित करना। * वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए राज्य में एक अनुकूल माहौल को बढ़ावा देना। * उद्योगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना। * **कौशल विकास:** * कौशल विकास केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करना और युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करना। * कुशल कार्यबल के साथ उद्योगों का समर्थन करने के लिए मौजूदा आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के साथ सहयोग करना। * **एमएसएमई सहायता:** * सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए पूंजी और ऋण के प्रवाह में सुधार करना। * उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और सामान्य सुविधा केंद्र प्रदान करना। * विपणन सहायता और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए सहायता प्रदान करना। * **वित्तीय प्रोत्साहन:** * पूंजी निवेश के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी, ईपीएफ और ब्याज सब्सिडी पर छूट प्रदान करना। * निर्यात उन्मुख इकाइयों के लिए प्रोत्साहन देना। * मेगा निवेश को प्रोत्साहन देना। * **क्षेत्रीय दृष्टिकोण:** * आईटी/आईटीईएस उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करके शक्तिशाली क्षेत्रों से लाभ उठाना। * कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, नवीकरणीय ऊर्जा, हथकरघा और वस्त्र उद्योग, और पर्यटन जैसे विशिष्ट उद्योगों को बढ़ावा देना। **प्रभाव विश्लेषण** **हितधारक:** निवेशक और उद्यमी * **प्रभाव:** यह नीति निवेश और व्यावसायिक विकास के लिए एक अनुकूल माहौल प्रदान करती है, जिसका लक्ष्य प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके, बुनियादी ढांचा सहायता प्रदान करके और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करके राज्य में अधिक निवेश को आकर्षित करना है। * **आवश्यक कार्रवाई:** इस नीति में उल्लिखित विभिन्न प्रोत्साहन और समर्थन कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए, निवेशकों और उद्यमियों को पात्रता मानदंडों और आवेदन प्रक्रियाओं से खुद को परिचित करना चाहिए। **हितधारक:** उद्योग निकाय और संघ * **प्रभाव:** यह नीति उद्योगों को उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास में मदद करने के लिए राज्य सरकार के समर्थन को बढ़ावा देती है, जिसका उद्देश्य सहयोग करना और विशिष्ट उद्योगों के लिए वकालत करना है। * **आवश्यक कार्रवाई:** इन नीतिगत परिवर्तनों से अपने सदस्यों को अवगत कराने और प्रासंगिक सरकारी निकायों के साथ साझेदारी करने से बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। **हितधारक:** राज्य सरकार के विभाग और एजेंसियां * **प्रभाव:** यह नीति सभी सरकारी विभागों के लिए एक व्यापक दिशा प्रदान करती है और एजेंसियों को सुव्यवस्थित प्रक्रिया, बुनियादी ढांचा विकास और कौशल विकास पहल को बढ़ावा देने में भूमिका प्रदान करती है। * **आवश्यक कार्रवाई:** नीति कार्यान्वयन को सुचारू बनाने के लिए विभागों को नीतियों के साथ अपने कार्यों को संरेखित करने और प्रभावी समन्वय के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता होगी।

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उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017: उत्तर प्रदेश सरकार की नीति जिसका उद्देश्य राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहन देना है। भारत का संविधान: भारत का सर्वोच्च कानून, जिसके अनुच्छेद 162 के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नीति को प्रख्यापित किया। उत्तर प्रदेश शासन: राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार उत्तर प्रदेश राज्य सरकार। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी): औद्योगिक परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए गठित बोर्ड। मेक इन यूपी: मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप उत्तर प्रदेश में विनिर्माण को बढ़ावा देने का कार्यक्रम।
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उत्तर प्रदेश शासन औद्योगिक विकास अनुभाग-6 संख्या: G9! /77-6-7-5(एम)/77 लखनऊ : दिनांक | 2 जुलाई, 2077 अधिसूचना भारत का संविधान के अनुच्छेद 62 के अन्तर्गत कार्यपालिका शाक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री राज्यपाल महोदय द्वारा उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन stft-2077 को प्रख्यापित किया जाता है। 2- ... उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन *Aifa-2077, इस अधिसूचना के निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष तक प्रभावी रहेगी। howe आलोक सिन्हा प्रमुख सचिव संख्या: ८9) (0 777-6-77-5(GA) /207 तद॒ुदिनांक प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः- महालेखाकर, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद समस्त अपर मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव / सचिव, उत्तर प्रदेश शासन समस्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश | समस्त मण्डलायुक्त ४ / जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश | प्रबन्ध निदेशक, पिकप /उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम । अधिशासी निदेशक, उद्योग sy, क2-सी, माल एवेन्यू, लखनऊ। आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर | निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद | समस्त अनुभाग, अवस्थापना एवंऔद्योगिक विकास विभाग। गार्ड Tract | ON AUN KR WN | —ie) आज्ञा से, (अलकनंदा दयाल) सचिव | quउत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एव रोजगार प्रोत्साहन नीति-207.पृष्ठभूमि 4. भारत: एक उभरती वैशिवक अर्थव्यवस्था .2 उत्तर प्रदेश: एक संभावित आर्थिक विकास साधन .3 उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 20:74e7 आशय 2. नीति का दृष्टिक्षेत्र (विजन) एवंकार्यान्वयन 2.। ध्येय मिशन) 22 दृष्टिक्षेत्र (विजन) प्राप्त करने की रणनीतियां 2.3 नीति का कार्यान्वयन 3. अवस्थापना को सक्षम बनाना- नई अवस्थापना का विकास करना एवं वर्तमान अवस्थापनाओं का उन्नयन करना 3.4 भूमि 3.2 औद्योगिक पार्क / एस्टेट को प्रोत्साहन 3.3 राष्ट्रीय निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र 3.4 विशेष आर्थिक क्षेत्र 3.5 औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्र तथा एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी) 3.6 सम्पर्क (कनेक्टिविटी) 3.6. सड़क मार्ग 3.6.2 वायुमार्ग 3.6.3 रेल मार्ग 3.6.4 जल मार्ग 3.6.5 डिजिटल 3.7 परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स 3.7.। परिवहन 3.7.2 लॉजिस्टिक्स 3.8 समर्पित माल-दढुलाई गलियारे (डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) 3.8.i पश्चिमी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (डब्ल्यूडीएफसी) 3.8.2 पूर्वी समर्पित माल-दढुलाई गलियारा (ईडीएफसी) 3.9 विद्युत 3.40 जल एवं जल-निकासी (SA)3. निजी क्षेत्र के अवस्थापना निवेश 4. रोजगार सृजन - नए अवसरों की रचना 5. वित्तीय प्रोत्साहन - निवेश आकर्षण 6. व्यापार करने में सहजता - एक अनुकूल औद्योगिक वातावरण बनाना 6.' प्रक्रियाओं का सरलीकरण 6.2 समयबद्ध स्वीकृतियां 6.3 एकल खिड़की स्वीकृतियां (सिंगल विंडो क्लीयरेंस) 6.4 राज्य में वाणिज्यिक गतिविधियों हेतु सहजता 6.5 औद्योगिक सुरक्षा 6.6 अन्य नियामक सरलीकरण Maat 6.7 राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (Vass dial) 7.मेक इन यूपी- मेक इन इंडिया की सफलता का लाभ उठाना 8.कुशल कार्यबल - जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना 9.नवाचार- स्टार्ट-अप को बढ़ावा 9.4 विनियामक सरलीकरण एवं हैंडहोल्जडिंग 9.2 अनुदान सहायता एवं प्रोत्साहन 9.3 ऊष्मायन (इन्क्यूबेशन) सहायता 40. सृक्ष्य, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई)-चहुंमुखी औद्योगिक विकास का सुनिश्चियन (0.4-Wet, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिये पूंजी एवं ऋण के प्रवाह में सुधार 40.2 क्षमता विकास 40.3 गुणवत्ता तथा मानक 40.4 औद्योगिक अवस्थापना तथा सामान्य सुविधा केन्द्र 40.5 विपणन 40.6 सुशासन एवं अनुकूल वातावरण का सृजन (गुड गवर्नन्स एवं इनेबलिंग एनवायरमेंट) 0.7 अन्य 8a दृष्टिकोण - शक्तिशाली क्षेत्रों से लाभ उठाना 444 आईटी /आईटीईएस उद्योग एवं आईटी स्टार्ट अप 44.2 इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण4.3 कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण 4.4 डेयरी 44.5 नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा 4.6 हथकरघा एवंवस्त्र उद्योग 44.7 निर्यात sya इकाइयां 44.8 पर्यटन 4.9 फिल्‍म 2. स्थायी एवं समावेशी विकास - स्वच्छ विकास एवं आर्थिक प्रगति का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना 2. स्थायी विकास 42.2 संतुलित क्षेत्रीय विकास 42.3 अनुसूचित जाति / जनजाति, महिला / दिव्यांग उद्यमियों को बढ़ावा 42.4 अनुसूचित जाति / जनजाति, महिला / दिव्यांग / बीपीएल श्रमिकों के रोजगार को प्रोत्साहन 43.निवेश का प्रोत्साहन एवं ‘sis उत्तर प्रदेश' का विपणन 44.घरेलू तथा वैश्विक परिवेश - qe कारकों से लाभ प्राप्त करना एवं उनके प्रति अनुक्रियाशीलता 4.'.वाह्य कारकों से लाभ 44..2बदलते परिवेश के प्रति अनुक्रियाशीलताl. पृष्ठभूमि भारत: एक उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था गा, भारत वैश्विक विकास को संचालित करने वाली प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आगामी एक दशक में होने जा रहा विश्व का सर्वाधिक आबादी वालायह देश, अभी तक के अपने सबसे बड़े तथा युवा कार्यबल के साथ विश्व की सबसे तीव्र गति से बढ़ रहीं gee अर्थव्यवस्थाओं में है। इससे देश के समक्ष बहुतायत नए अवसरों के साथ-साथ नई चुनौतियां भी आयेंगी | औद्योगीकरण के दृष्टिकोण से, भारत का बड़ा घरेलू बाजार है, जीडीपी विकास में वृद्धि एवं वैश्विक मंदी की प्रवृत्ति को झेलने की क्षमता है जो भारत को दुनिया भर से निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाता है। भारत सरकार के नए उपक्रम जैसे मेक इन इंडिया, नवाचार को बढ़ावा देने, व्यवसायिक विनियामक वातावरण को सक्षम करने, कौशल विकसित करने, बौद्धिक सम्पदा (आईपी) की रक्षा करने एवं अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ विनिर्माण बुनियादी ढांचों के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को राष्ट्रव्यापी स्तर पर प्रेरित कर रहे S| इन अवसरों पर प्रतिक्रिया करने के लिए देश को, अपने कार्यबल को प्रशिक्षण प्रदान करके अपने कार्यबल के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करके, समावेशी आर्थिक विकास एवं अपने नागरिकों का आर्थिक उत्थान सुनिश्चित करके, क्षेत्रीय असमानता समाप्त करके, पर्यावरण की रक्षा करके, अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को सुनिश्चित करके एवं साथ ही सतत विकास की गति का जारी रहना सुनिश्चित करते हुए ठोस कदम उठाने पड़ेंगे | उत्तर प्रदेश: एक सम्भावित आर्थिक विकास साधन 2. भारत के गढ़ के रूप में वर्णित उत्तर प्रदेश, 2,40,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 48 मंडल, 75 जिले एवं 82। सामुदायिक विकास ब्लॉक हैं ।देश के भौगोलिक क्षेत्र के 7.3 प्रतिशत क्षेत्र को आवरित करने वाला उत्तर प्रदेश, देश में चौथा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य की जनसंख्या 49.98 करोड़ है (207: की जनगणना के अनुसार) जो भारत की आबादी का लगभग 46.5%है एवं भारत के सभी राज्यों में सबसे अधिक S| 20:5-76 में रु 44,45,234 करोड़ के जीएसडीपी के साथ उत्तर प्रदेश, भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जो देश की अर्थव्यवस्था में 8.4% का योगदान करता है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर, मुख्य रूप से तृतीय (टर्शरी) क्षेत्र का वर्चस्व है, इसके बाद प्राथमिक (प्राइमरी) एवं माध्यमिक (सेकेण्डरी) क्षेत्र आते हैं। राज्य को भारत की खाद्य टोकरी के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह देश में गन्ना, waa, मटर, आलू, खरबूजा, तरबूज, HE, दूध एवं दूध के उत्पादों का प्रमुख उत्पादक है| भारत के सर्वाधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उत्तर प्रदेश में है। राज्य में स्थानीय स्तर पर कई विशेष व्यवसाय समूह हैं जैसे मेरठ में खेलकूद के सामान, मुरादाबाद में पीतल के सामान, कन्नौज में इत्र, कानपुर में चमड़े, आगरा में जूते, वाराणसी में कशीदाकारी वाली साड़ियां, भदोही में कालीन, लखनऊ में चिकन काकाम आदि। उत्तर प्रदेश, भारत में, शीर्ष विनिर्माण स्थलों में से एक है जो राष्ट्रीय विनिर्माण उत्पादन में 8% से अधिक का योगदान करता है। उत्तर प्रदेश, देश का एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर निर्यातक है एवं सॉफ्टवेयर, कैप्टिव बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) तथा अनुसंधान एवं विकास सेवाओं सहित आईटी /आईटीईएस सेवा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर के आया है। तृतीय क्षेत्र व्यापार, होटल, रीयल एस्टेट, वित्त, बीमा, परिवहन, संचार एवं अन्य सेवाओं द्वारा संचालित होता है। 3. उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 207:मुख्य आशय उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 20:7, भारतीय, एशियाई तथा वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिशीलता को देखते हुए राज्य की निहित शक्तियों का लाभ उठाने के साथ साथ नई शक्तियों का विकास करते हुए अपनी अंतर्निहित कमजोरियों से निपटने का प्रयास करेगी। नीति का लक्ष्य, वर्तमान उद्योगों को स्थिरता प्रदान करने एवं अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ ही साथ औद्योगिक क्षेत्र में नए अन्तराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने एवं समझने के लिए एक ढांचा तैयार करना होगा । नीति के मुख्य आशय है- 4.3. औद्योगिक विकास के लिए एक रूपरेखा तैयार करना जो लोगों को सशक्त बनाए एवं रोजगार उत्पन्न करे, जिसके फलस्वरुप अर्थव्यवस्था में तेजी से वृद्धि हो। .3.2 व्यवसाय को आकर्षित करने तथा सुविधा देने की क्षमता में सुधार के लिए राज्य में एक कार्ययोजना बनाना | 4.3.3 आर्थिक विकास की नीतियों, कानूनों एवं सिद्धांतों के अन्तर-शासकीय तथा सार्वजनिक-निजी समन्वय के लिए एक संदर्भ बिंदु प्रदान करना | 4.3.4. संस्थागत शिक्षण को प्रोत्साहित करना जिसमें राज्य-उद्योग sia: क्रिया शामिल है | 2. नीति का दृष्टिक्षेत्र एवं कार्यान्वयन उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-207 का दृष्टिक्षेत्र, उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है जिससे रोजगार सृजित हो सके एवंप्रदेश के स्थायी, समेकित तथा संतुलित आर्थिक विकास को बल मिले | 2... ध्येय (मिशन) = प्रदेश में पूंजी निवेश बढ़ाना = उद्योगों के बढ़ने के लिए गुणवत्तायुक्त अवस्थापना उपलब्ध कराना © त्यापार अनुकूल वातावरण बनाने के लिए व्यवसाय करने की सहजता को बढ़ावा देनाकुशल व अकुशल श्रमिकों के लिए अधिकतम प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा स्व-रोजगार के अवसर सृजित करना रोजगार योग्यता एवं सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के कार्यबल को कुशल बनाना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को अग्र-सक्रिय सहायता प्रदान करना युवाओं में नवाचार की भावना को बढ़ाना एवं उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना संतुलित, स्थायी एवं समेकित आर्थिक विकास सुनिश्चित करना नीति का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना 2.2. दृष्टिक्षेत्र (विजन) प्राप्त करने की रणनीतियाँ प्रदेश सरकार निम्नलिखित रणनीतियों के माध्यम से दृष्टिक्षेत्र (विजन) को प्राप्त करने का प्रयास करेगा अवस्थापना को सक्षम बनाना - नवीन अवस्थापकीय सुविधाओं का विकास तथा विद्यमान अवस्थापकीय सुविधाओं का उन्नयन करना रोजगार सृजन-नए अवसरों की रचना वित्तीय प्रोत्साहन - निवेश आकर्षण व्यापार करने में सहजता -एक अनुकूल औद्योगिक वातावरण बनाना मेक इन यूपी - मेक इन इण्डिया की सफलता का लाभ उठाना कुशल कार्यबल - जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना नवाचार - स्टार्ट-अप को बढ़ावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई)-चहुंमुखी औद्योगिक विकास का सुनिश्चियन क्षेत्रीय दृष्टिकोण -शकक्‍्तिशाली क्षेत्रों से लाभ उठाना स्थायी तथा समावेशी विकास - स्वच्छ विकास एवं आर्थिक प्रगति का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना निवेश को प्रोत्साहन एवं'ब्रांड उत्तर प्रदेश' का विपणन घरेलू एवं वैश्विक परिवेश- वाह्म कारकों से लाभ प्राप्त करना एवं उनके प्रति अनुक्रियाशीलता 2.3. नीति का क्रियान्वयन 2.3. यह नीति, अधिसूचना की तिथि से आगामी 05 वर्षों तक प्रभावी होगी | 2.3.2 किसी भी चरण पर, यदि ऐसी कोई भी स्थिति उत्पन्न होती है जिससे नीति में किसी भी संशोधन अथवा नीति के अतिक्रमण की आवश्यकता होती है, तो ऐसे संशोधन अथवा नीति के अतिक्रमण को अनुमोदित करने के लिए केवल मा. मंत्रिपरिषद ही अधिकृत होगा।2.3.3 यदि इस नीति में कोई संशोधन किया जाता है तो भी सरकार द्वारा इकाई को पूर्व ead पैकेज वापस नहीं लिया जाएगा एवं इकाई को पूर्व स्वीकृत लाभ मिलते रहेंगे | 2.3.4 वे इकाइयां, जिन्हें आईआईआईपी 202 के अर्न्तगत प्रोत्साहन पैकेज स्वीकृत किए गये है, वे लाभों की पात्र बनी रहेंगी इसके लिए प्रदेश सरकार वचनबद्ध =| 3. अवस्थापना को सक्षम बनाना -- नई अवस्थापना का विकास करना एव वर्तमान अवस्थापनाओं का उन्नयन करना सक्षम एवं लचीली अवस्थापना की उपलब्धता, औद्योगिक विकास के महत्वपूर्ण आधारों में से एक है। यह न केवल व्यवसायों के संचालन लागत को कम करता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी पुर्नसंतुलित करता है जिसके फलस्वरूप अधिक विकास एवं जीवन स्तर बेहतर होता है। लेकिन, ऐसी लचीली अवस्थापनाएँ जो राज्य के विकास उद्देश्यों से जुड़ी हुई हैं एवं लंबे समय में परिवर्तनीय सिद्ध हो सकती हैं, प्रायः निजी क्षेत्र द्वारा प्रदान नहीं की जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश शासन, ऐसी सुविधाओं को बनाने एवं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार इस उद्देश्य को प्राप्त करने में निजी निवेशों के महत्व को अनुभव करती है। इसलिए वह एक नियामक वातावरण बनाने का भी प्रयास करेगी जो राज्य के नए तथा वर्तमान बुनियादी ढांचे में निजी निवेश के अवसर प्रदान कर सकता है एवं दीर्घकालिक विकास का समर्थन कर सकता है। इस नीति के माध्यम से सरकार स्थानीय विकास आवश्यकताओं के साथ बुनियादी ढांचे की योजना को भी अधिक प्रभावी ढंग से संरेखित करने का उद्देश्य रखती है। अपनी औद्योगिक विकास रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा निम्नलिखित आर्थिक अवस्थापना पर ध्यान दिया जाएगा - भूमि 3. स्थायी औद्योगिक विकास के लिए भूमि की उपलब्धता एक प्राथमिक आवश्यकता है। राज्य में औद्योगिक विकास के लिए दोनों सरकारी एवं निजी भूखण्डों की पर्याप्त उपलब्धता है | औद्योगीकरण की दर में वृद्धि के लिए राज्य सरकार, ऐसी Raa भूमि को चिह्नित करेगी जिसका उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों «८ परिक्षेत्रों में उद्योग के लिए भूमि-बैंकों के रुप में किया जा सकता है। इस नीति के अन्तर्गत निवेशकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर इन भूखण्डों को उपलब्ध कराये जाने का प्रयास किया जायेगा | सरकार, उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप, वर्तमान तथा नए क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की योजना बनाएगी। वर्तमान औद्योगिक क्षेत्रों का आवश्यकतानुसार विस्तार किया जाएगा एवं नए औद्योगिक क्षेत्रों को आवश्यक औद्योगिक अवस्थापना के साथ विकसित किया जाएगा। भौगोलिक शक्तियों के आधार पर एवं मांग काआकलन करने के पश्चात, संतुलित तथा न्यायसंगत विकास के लिए सभी क्षेत्रों में इस प्रकार के औद्योगिक अवस्थापना विकसित किए जाएंगे। भू-उपयोग परिवर्तन सहित भूमि आवंटन एवं प्रबंधन से सम्बंधित नियमों को भी तर्कसंगत तथा निवेशक-अनुकूल बनाया जाएगा। औद्योगिक पार्क 3.2. / एस्टेट को प्रोत्साहन नए औद्योगिक wel का विकास we विद्यमान et का 3.2. उन्नयनीकरण औद्योगिक पार्क / एस्टेट्स, उद्योगों को एकीकृत सुविधाएं प्रदान करते हैं एवं इनकी मजबूती, औद्योगिक दक्षता में वृद्धि के लिए योगदान देती है। इस नीतिके द्वारा नए उद्योगों को आकर्षित करने तथा वर्तमान उद्योगों को गुणवत्ता वाली सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से नए औद्योगिक west का विकास करने एवं वर्तमान उद्योगों का उन्नयन करने की योजना है। अधिसूचित औद्योगिक एस्टेट्स तथा समूहों के पास औद्योगिक भूमि में उच्च गुणवत्ता की बुनियादी सुविधाओं का भी नियोजन किया जाएगा। राज्य, फूड पार्क, आईटी पार्क एवं फार्मा पार्क को भी विकसित करने पर विशेष ध्यान देगा । प्रमुख एक्सप्रेस-वेज,राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राज्य राजमार्गा के आस-पास औद्योगिक पार्कों की स्थापना की जाएगी। Sede प्रदेश शासन, एफडीआई को आकर्षित करने के लिए देश- विशिष्ट औद्योगिक पार्क को भी बढ़ावा देगा। सभी प्रमुख औद्योगिक uel में ट्रक टर्मिनल तथाकर्मचारियों के लिए आवास सुविधाओं सहित लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा | राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण एवं निगम द्वारा विकसित औद्योगिक wees / पार्का में मौजूदा बुनियादीढांचे के उन्नयन के लिए सहायता का प्रावधान भी किया जाएगा | निजी औद्योगिक पार्क /एस्टेट्स को प्रोत्साहन 3.2.2 यह नीति, क्षेत्र-विशिष्ट आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं रोजगार उत्पन्न करने हेतु औद्योगिक एस्टेट्स तथा विशेष औद्योगिक oat की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन प्रदान करेगी। यह नीति, निवेश को गति देने के लिए उद्योगों को प्लग एंड प्ले सुविधा प्रदान करके एक योजनाबद्ध तरीके से ऐसे एस्टेट्स «८ पार्कां के विकासकर्ताओं को वित्तीय सहायता Vd उपयुक्त भूमि चिन्हित प्रदान करने पर बल देगी। विकासकर्ताओ को उद्योगों को ट्रक पाकिंग-वे एवं कर्मचारियों के लिए आवास सुविधाओं सहित पर्याप्त लॉजिस्टिक्स सुविधा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया. जाएगा। उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ-कानपुर, कानपुर-इलाहाबाद तथा वाराणसी- इलाहाबाद क्षेत्र के आस-पास निजी औद्योगिक पार्क को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देगा |3.2.3 निजी क्षेत्र के औद्योगिक पार्कों/ एस्टेटों को प्रोत्साहन निजी क्षेत्रद्वारा विकसित बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल में 00 एकड़ तथा मध्यांचल में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर विकसित औद्योगिक पार्का/ एस्टेटों तथा बुंदेलखंड, पूर्वांचल एवं मध्यांचल में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर विकसित एग्रो uel के लिए राज्य सरकार द्वारा निम्नलिखित प्रोत्साहन प्रदान किये जाएंगे- 3.23.44 क्रय करने हेतु लिए गए ऋण पर भूमि की प्रचलित सर्किल रेट के समतुल्य धनराशि पर आगणित देय ब्याज की प्रतिपूर्ति के रूप में 7 वर्षों के लिए वार्षिक ब्याज का 50 प्रतिशत तक रु0 50 लाख प्रति वर्ष प्रति औद्योगिक एस्टेट / एग्रो we की अधिकतम सीमा तकब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी | 3.2.3.2 अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु लिए गए ऋण पर देय ब्याज की प्रतिपूर्तिके रूप में 7 वर्ष के लिए वार्षिक ब्याज का 60 प्रतिशत तक अधिकतम रु0 40 करोड़ प्रतिवर्ष प्रति औद्योगिक एस्टेट // wat पार्क तथा रु0 50 करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी | 3.2.3.3 श्रमिकों के लिए हॉस्टल ,/ डारमैट्री आवास के निर्माण हेतु लिए गए ऋण पर देय ब्याज की प्रतिपूर्ति के रूप में 7 वर्ष के लिए वार्षिक ब्याज का 60 प्रतिशत तक अधिकतम रु0 5 करोड़ प्रतिवर्ष प्रति औद्योगिक wec/ एग्रो पार्क तथा रु0 30 करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी | 3.2.34 विकासकर्ता द्वारा भूमि की खरीद पर एवं इनमें स्थापित किए जाने वाली इकाइयों के प्रत्येक प्रथम खरीदार को स्टैंप ड्यूटी पर छूट प्रदान की जाएगी । विकासकर्ता को 400 प्रतिशत we एवं प्रत्येक प्रथम खरीदार को स्टांप शुल्क पर 50 प्रतिशत छूट | राष्ट्रीय निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र केयोगदान को अधिकतम करने के लिए, उत्तर प्रदेश शासन का ध्येय, राष्ट्रीय विनिर्माण नीति के प्राविधान के अन्तर्गत, झाँसी एवं औरैया में दो राष्ट्रीय निवेश तथा विनिर्माण क्षेत्र (एनआईएमजेड) का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इन एनआईएमजेड में स्थापित विनिर्माण उद्योगों को भारत सरकार की राष्ट्रीय विनिर्माण नीति में उल्लिखित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी जैसे सरलीकृत व्यापार विनियमन, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण एवं प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों / मशीनों / उपकरणों के उत्पादन / अभिग्रहण के लिए प्रोत्साहन, निजी क्षेत्र द्वारा कौशल विकास पहलों के लिए प्रोत्साहन, छोटे तथा मध्यम उद्यमों के लिए वित्त पोषण | ]0विशेष आर्थिक क्षेत्र 3.4. विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियां उत्पन्न करके, माल एवं सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देकर, घरेलू तथा विदेशी स्रोतों से निवेश को बढ़ावा देकरएवं रोजगार के अवसर GUS करने के द्वारा राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है। केंद्र सरकार द्वारा स्थापित नोएडा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) तथा राज्य सरकार द्वारा स्थापित मुरादाबाद Vagus के अतिरिक्त, राज्य में कुल i9 एसईजेड अधिसूचित किए गए हैं । प्रदेश सरकार का उदेश्य एसईजेड योजना के अन्तर्गत सरलीकृत रुप में स्वीकृतियां प्रदान करना, विश्व-स्तरीय अवस्थापना प्रदान करना. एवं निवेश को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध करना है। औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्र एवं एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर 3.5. प्रमुख बाजारों तक त्वरित पहुँच, पानी एवं बिजली की पर्याप्त आपूर्ति, उत्कृष्ट कचरा प्रबंधन प्रणाली तथा yap सुविधाओं सहित औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्र, निवेशकों एवं निर्माताओं को कार्य करने के लिए आदर्श स्थान उपलब्ध करते हैं। उत्तर प्रदेश शासन का. AV, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रमुख एक्सप्रेस-वे तथा राज्य के प्रमुख AMT के नेटवर्क के आसपास आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप सबसे उन्नत बुनियादी ढांचे एवं उच्चतम सुविधाओं से लैस क्षेत्रों का निर्माण करना है। उत्तर प्रदेश शासन, नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर लखनऊ-कानपुर, कानपुर-इलाहाबाद तथा वाराणसी-इलाहाबाद क्षेत्र का विकास कर इन क्षेत्रों में औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्रों तथा निजी औद्योगिक पार्कों को बढ़ावा देगा। राज्य में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ईडीएफसी के साथ-साथ औरैया-इटावा-कानपुर क्लस्टर, इलाहाबाद-वाराणसी FRY एवं आगरा-अलीगढ़ क्लस्टर सहित तीन एकीकृत विनिर्माण gee (आईएमसी) को चिद्नितकिया गया है। औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध कनेक्टिविटी तथा विश्व स्तर की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डब्लूडीएफसी एवं ईडीएफसी लिंक के निकट दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र को रणनीतिक रूप से विकसित किया जाएगा | सम्पर्क (कनेक्टिविटी) 3.6. बाजारों तक पहुँच सुनिश्चित करने तथा विकास एवं जीवन स्तर में वृद्धि किये जाने में सहायक उच्च स्तर की अर्थव्यवस्था को प्राप्त करने के लिए wap (कनेक्टिविटी) की fame आवश्यकता होती है। प्रदेश सरकार की यह एक दीर्घकालिक रणनीति होगी कि वायु, जल, सड़क एवं रेल नेटवर्क का एक संपर्क जाल (कनेक्टिविटी वेब) बनाया जाये, जो कि प्रदेश के उद्योगों तथा विनिर्माण इकाइयों को, बिना किसी परेशानी के परिवहन के विभिन्‍न साधनों के उपयोग से भारत एवं विदेशी बाजारों में उनके उत्पाद को पहुंचाने में, सहायता प्रदान He | दडिजिटल [aan कनेक्टिविटी इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार, राज्य में एक विश्वस्तरीय डिजिटल कनेक्टिवCिNटNी ढांचा बनाने के महत्व को भी स्वीकार करतीहे | सड़क मार्ग उ.6. विद्यमान लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे, आगरा एवं लखनऊ को जोड़ता है तथा प्रस्तावित पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, लखनऊ से गाजीपुर को जोड़ेगा। प्रदेश सरकार की भविष्य में एक ऐसे सड़क गलियारे के निर्माण की मंशा है, जो मथुरा, काशी, झाँसी एवं गोरखपुर को जोड़ेगा जिससे सम्पूर्ण प्रदेश सड़क मार्ग से जुड़ जाएगा। राज्य में 4 लेन एवं 6 लेन राजमार्गों का घना नेटवर्क भी है। सम्पूर्ण प्रदेश को आपस में बेहतर रूप से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार, पूरे राज्य में अधिक गुणवत्ता वाले 4 लेन तथा 6 लेन wernt को विकसित pet) यह नीति राज्य के बुनकरों एवं अन्य पारंपरिक कारीगरों के औद्योगिक उत्पादों, को बाजारों तक आसानी से पहुंचाना सुगम बनाएगी | वायुमार्ग 3.6.2 उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद एवं गोरखपुर में प्रमुख राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय हवाई-अड्डे हैं। प्रदेश सरकार, वायु संपर्क बेहतर किए जाने के आशय से नए हवाई अड्डों का विकास करने का विचार रखती है, जिससे राज्य के सभी क्षेत्रों को पूरे देश के साथ जोड़ा जा Aa | इस हेतु प्रदेश सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी | ड्राए कार्गो की सुविधा के साथ-साथ विमान रखरखाव केन्द्रों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा | रेलमार्ग 3.6.3 राज्य में रेल संपर्क बेहतर करने के आशय से प्रदेश सरकार द्वारा भारत सरकार से राज्य में रेलवे नेटवर्क की पहुँच एवं घनत्व बढ़ाने के लिए अनुरोध किया जायेगा। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप रेल गाड़ियों की बारम्बारता में वृद्धि लाने के प्रयास किए जाएंगे | जलमार्ग 3.6.4 प्रदेश सरकार द्वारा इलाहाबाद, वाराणसी एवं कोलकाता में स्थित हल्दिया बंदरगाह के बीच सम्पर्कता स्थापित करने के लिए गंगा जलमार्ग का विकास किया जायेगा। इससे राज्य को गंगा जलमार्ग से माल की विश्वसनीय एवं सस्ती आवागमन से उत्पन्न होने वाले लाभ प्राप्त हो apy | डिजिटल 3.6.5 डिजिटल संपर्कता की ओर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जायेगा | भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप, इस नीति में भारत को डिजिटल क्षमता-युक्त समाज एवं ज्ञानवान अर्थव्यवस्था में बदलने का 2विचार किया गया है। इस दिशा में प्रदेश सरकार मोबाइल सम्पर्कता के बीच सार्वभौमिक पहुंच का सुनिश्चयन करने के लिए ब्रॉडबैंड हाइवे एवं अन्य अवसंरचना के विकास से संबंधित एजेंसियों को आवश्यक प्रशासनिक सहायता प्रदान करना चाहती है। परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स 3.7. उत्कृष्ट परिवहन अवस्थापना, न केवल विलम्ब को कम करता है, बल्कि यह गाँवों एवं शहरों को सक्षम बनाकर सामुदायिक संचय लाभ को प्राप्त कर उत्पादकता में वृद्धि कर सकता है, एवं इस प्रकार राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनः संतुलित करने में सहयोग कर सकता है। इसमें लॉजिस्टिक्स अवस्थापना की भूमिका भी समान रूप से महत्व रखती है क्योंकि इससे उत्पादों एवं सेवाओं की डिलीवरी आवश्यकता तथा अपेक्षाओं के अनुसार की जा सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था में औद्योगिकीकरण, व्यापार एवं वाणिज्य के प्रमुख विकास सम्भव हो पाते है। 3.7.. परिवहन प्रदेश सरकार, लखनऊ एवं नोएडा में विद्यमान मेट्रो सेवाओं में विस्तार करना चाहती है तथा कानपुर, मेरठ, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, झांसी एवं गाजियाबाद नगरों में मेट्रो सेवाओं के विकास कार्य प्रारम्भ करना चाहती S| प्रदेश सरकार द्वारा प्रमुख राज्य राजमार्गों को चौड़ा करके एवंसुद्धढ बनाकर यातायात में कमी लाने के प्रयास भी किए जायेगें। सरकार नवीनतम प्रौद्योगिकियों के माध्यम से उन्नत यातायात प्रबंधन लागू करना चाहती है। 3.7.2. लॉजिस्टिक्स प्रदेश सरकार, राज्य के उचित स्थानों एवं डब्ल्यूडीएफसी एवं ईडीएफसी के आस-पास के क्षेत्रों में मल्टी-मोडल लौजिस्टिक्स हब विकसित करना चाहती है। सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए gig पोर्ट का भी विकास किया जायेगा। यह नीति, सम्पूर्ण प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्का के विकास में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना चाहती है। सभी प्रमुख विद्यमान एवं भावी औद्योगिक पार्को में ट्रक टर्मिनलों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जाएगा | समर्पित माल-ढुलाई गलियारे (डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) 3.8. भारत के प्रथम दो समर्पित माल-ढुलाई गलियारे (डेडीकेटेड we कॉरिडोर)- दिल्‍ली एवं मुंबई के बीच पश्चिमी गलियारे तथा लुधियाना एवं कोलकाता के बीच पूर्वी गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश में sl इस नीति का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास के लिए इन माल-ढुलाई गलियारों एवं उनसे प्रभावित क्षेत्रों का लाभ उठाना है। 3पश्चिमी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (डब्ल्यूडी.एफ.सी.) 3.8.I डब्लूडीएफसी, गाजियाबाद में दादरी से वडोदरा-अहमदाबाद-पालनपुर- फुलेरा-रेवारी होते हुए मुंबई में जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तक 4504 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है। यह माल-गलियारा विश्व स्तरीय एवं स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी से सुसज्जित डबल लाइन इलेक्ट्रिक ट्रैक होगा | डब्ल्यूडीएफसी, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य से माल ढुलाई के समय में कमी होगी, अब यह ढुलाई लगभग +4 घंटे में पूर्ण होने की संभावना है। बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों एवं औद्योगिक माल के साथ-साथ प्रदेश के किसानों को लाभ पहुंचाने हेतु कृषि उत्पादों को सुरक्षित एवं त्वरित परिवहन के माध्यम से प्रदेश सरकार इस गलियारे का पूर्ण लाभ उठायेगी | 3.8.2 पूर्वी समर्पित माल-ढुलाई गलियारा (ई.डी.एफ.सी.) |856 किलोमीटर लंबाई वाले पूर्वी समर्पित माल-ढुलाई गलियारे में पश्चिम बंगाल के दानकुनी एवं उत्तर प्रदेश में Gol के बीच i409 किमी का विद्युतीकृत डबल ट्रैक खंड एवं लुधियाना-खुर्जा-दादरी के बीच 447 किलोमीटर का विद्युतीकृत एकल ट्रैक दो अलग-अलग खंड हैं। ईडीएफसी परियोजना में i856 किमी की कुल लम्बाई के रेल ट्रैक में से 049 किलोमीटर (57 प्रतिशत) रेल ट्रैक उत्तर प्रदेश के 48 जिलों से गुजरती = प्रदेश सरकार इस गलियारे के फलस्वरूप विद्यमान Ge ट्रैफिक के डाइवर्जन का पूर्ण लाभ उठायेगी जिससे निकट स्थित पोर्ट पर त्वरित गति से माल भेजा जा सकेगा। इस परियोजना द्वारा परिवहन सम्पर्क में सुधार तथा माल प्रेषण इकाइयों हेतु बाजार का एकीकरण करते हुए प्रदेश सरकार एकीकरण, रूपान्तरण एवं समावेशन प्राप्त करने का भी प्रयास करेगी | 3.8.3 सरकार इन गलियारों के सफल एवं समय पर विकास के लिए भारत सरकार को सभी आवश्यक समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य, इन समर्पित we कॉरिडोर से लाभ लेने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा एवं इन गलियारों के आसपास परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करेगा जिससे भविष्य में आर्थिक गतिविधियों एवं रोजगार में वृद्धि हो। औद्योगिक गलियारे 3.9. समावेशी विकास पर रणनीतिक फोकस के साथ औद्योगीकरण एवं योजनाबद्ध शहरीकरण के प्रोत्साहन के लिए पूरे भारत में 05 प्रमुख औद्योगिक गलियारों को विकसित किया जा रहा है। इनमें से 02 गलियारों- दिल्‍ली-मुम्बई औद्योगिक गलियारा. . (डीएमआईसी) तथा. अमृतसर-कोलकाता.. औद्योगिक. गलियारा (एकेआईसी) का उत्त्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदेश सरकार अपने सकल 4.घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण के हिस्से को बढ़ाने के लिए इन गलियारों का उपयोग करेगी | 3.9.. दिल्‍ली-मुम्बई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी) डब्लूडीएफसी के माध्यम से उपलब्ध होने वाली तीव्र गति तथा हाई कैपेसिटी कनेक्टिविटी सिस्टम का लाभ उठाते हुए इस फ्रेट गलियारे के दोनों तरफ दिल्‍ली-मुम्बई औद्योगिक गलियारे का विकास किया जा रहा है । डीएमआईसी परियोजना में मेगा इंडस्ट्रियल जोन, तीन बंदरगाह एवं छह हवाई AS, मुंबई एवं दिल्‍ली को जोड़ने वाली छः-लेन, चौराहों से मुक्त एक्सप्रेस-वे एवं बिजली संयंत्र शामिल हैं | उत्तर प्रदेश में 36,000 वर्ग किलोमीटर का विशाल क्षेत्र दिल्‍ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के आस-पास i2 जिलों में फैला हुआ है। ग्रेटर नोएडा, डीएमआईसी का पहला नोड होने के साथ-साथ परियोजना का गेटवे भी है। उत्तर प्रदेश शासन ने, डब्लूडीएफसी से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के विचार से ग्रेटर नोएडा में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप, दादरी में मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स हब Ud बोड़ाकी में मल्टी मोडल ट्रांसपोर्ट हब पर पहले से ही कार्य शुरू कर दिया है। मेरठ, मुजफ्फरनगर औद्योगिक क्षेत्र एवं अन्य नए औद्योगिक क्षेत्रों को भी गलियारे से लाभ उठाने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। 3.9.2. अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (एकेआईसी) अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (एकेआईसी) परियोजना इस मार्ग में विद्यमान राज्य मार्ग प्रणालियों तथा पूर्वी समर्पित माल गलियारे (ईडीएफसी) के आस-पास संरचित किया गया है। प्रदेश सरकार, इण्टीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप, इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स एवं लॉजिस्टिक्स हब विकसित कर इस कॉरिडोर का अधिकतम लाभ उठाना चाहती है। प्रदेश सरकार द्वारा चिन्हित ग्रीन फील्ड रेलवे स्टेशन के आस-पास नये औद्योगिक क्षेत्र विकसित किये जायेंगे | 3.0. विद्युत उद्योगों के लिए उत्पादन हेतु गुणवत्तापूर्ण fate विद्युत आपूर्ति एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कारक है। प्रदेश सरकार ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने तथा माँग एवं आपूर्ति के अन्तर को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए, प्रदेश सरकार ऊर्जा उत्पादन, पारेषण एवं क्षमता में वृद्धि के लिए निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी। ए.टी. एण्ड सी. के नुकसान को प्रशासनिक उपायों के माध्यम से कम करने तथा बिजली चोरी एवं हेरा-फेरी को रोकने तथा विशेष पुलिस स्टेशनों की स्थापना किये जाने के कदम उठाये जायेंगे | यह नीति न्यूनतम निर्दिष्ट भार वाले औद्योगिक समूहों को चिह्नित कर उन्हे स्वतंत्र फीडर उपलब्ध कराने तथा उन्हे बिजली कटौती से मुक्त रखे जाने की मंशा रखती है। ऊर्जा भार के संवर्द्धन, आवर्धन तथा समर्पण की प्रक्रिया को सरलीकृत 5किया जायेगा। प्रदेश सरकार उद्योगों द्वारा अपने स्वयं की लागत पर निर्मित समर्पित फीडर्स का प्रयोग औद्योगिक प्रयोजनो के अतिरिक्त किसी भी स्थिति में अन्य प्रयोजनों में न किया जाना सुनिश्चित करेगी | प्रदेश सरकार, राज्य के समस्त औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ओपन एक्सेस एवं निजी औद्योगिक ut के लिए एकल बिन्दु ओपन vate की भी अनुमति इलेक्ट्रीसिटी एक्ट-2003 के अनुसार प्रदान की जाएगी | 3.. जलएवं जल-निकासी जल,उद्योगों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण साधन है। उद्योगों की माँग के अनुसार जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा जल एवं अपशिष्ट की निकासी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए निजी भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। उद्योग को प्राथमिकता के आधार पर जल उपलब्ध कराया जाएगा। इस प्रयोजन के लिए उद्योगों द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी के पुनर्चक्रण एवं औद्योगिक पानी के उपयोग के लिए अलग-अलग पाइप लाइन बिछाने को भूमि-जल नीति के अनुसार उचित महत्व दिया जाएगा। सरकार वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करेगी। यह नीति, सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के औद्योगिक क्षेत्रों एवंआस्थानों में जरूरी जल संयोजनतथा जल निकासी सुविधाएं प्रदान करेगी | 3.2. निजी क्षेत्र के अवस्थापना निवेश प्रदेश सरकार, आर्थिक बुनियादी ढांचे के विकास में निजी क्षेत्र की असीमित शक्ति को स्वीकार करती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से अवस्थापना परियोजनाओं में निजी फण्डकी waa पहुँच, उन्नत प्रबन्धन Vd उच्चतर कुशलता, दीर्घकालीन लाभों को उत्पन्न करने वाली स्थायी अवसंरचना के निर्माण के नीतिगत दृष्टिकोण को साकार किया जा सकता है। इसलिए प्रदेश सरकार और अधिक स्थायी नीतियों के माध्यम से उचित व्यावसायिक परिवेश का निर्माण करते हुए अवस्थापकीय सुविधाओं के विकास में निजी क्षेत्र के निवेश के समर्थन हेतु प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के विभिन्‍न मॉडलों सहित निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के नए एवं अभिनव तरीकों का भी स्वागत करेगी | 4. रोजगार सृजन - राज्य में समावेशी विकास प्राप्त करना प्रदेशमें नागरिकों की सामाजिक-आर्थिक स्थितिमें सुधार लाने और oe उच्चतर जीवन-स्तर प्रदान करने के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रदेश में कार्य करने वाले लोगों की जनसंख्या में वृद्धि के साथ व्यापक भौगोलिक विकास के दृष्टिगत प्रदेश सरकार रोजगार के अवसरों के सृजन पर विशेष बल देना चाहती है, जिससे प्रदेश में प्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजित हो सके। इस हेतु नीति में एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने का प्रयास किया जायेगा, जिससे समावेशी रोजगार के अवसर प्रदेश में समाज और क्षेत्र के सभी वर्गों को प्राप्त हों | 6यह नीति बुंदेलखंड, पूर्वांचल तथा मध्यांचल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने पर विशेष लाभ तथा प्रदेश के कुशल एवं अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने वाली औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करेगी | 5. वित्तीय प्रोत्साहन - निवेश आकर्षण राज्य में अधिकतम निवेश आकर्षित करने एवं प्रदेश के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए, नीति कुछ नियमों एवं wal के अधीन निम्नानुसार छूट, अनुदान एवं वित्तीय सुविधायें प्रदान करेगी — उ.. पूर्वान्वल Vd बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 400 प्रतिशत, मध्यांचल एवं. पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ करो) क्षेत्र में 75 प्रतिशत तथा गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में 50 प्रतिशत की दर से स्टाम्प Yow पर छूट | 5.2. 400 अथवा उससे अधिक अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करने वाली सभी नई औद्योगिक इकाइयों को Marat के अंश के 50 प्रतिशत की दर से ईपीएफ प्रतिपूर्ति की सुविधा | 5.3. नेट वैट एवं सीएसटी की कुल राशि अथवा नेट जीएसटी के अंतर्गत राज्य के अंश की सीमा तक जमा करायी गयी धनराशि के wader धनराशि की प्रतिपूर्ति निम्नानुसर प्रदान की जाएगी जोकि प्रतिपूर्ति की सीमा वर्ष में जमा की गयी उक्त धनराशि से अधिक नही होगी | ए.लघु उद्योगों हेतु 5 वर्षों के लिए go प्रतिशत की प्रतिपूर्ति। यह सुविधा स्थायी पूंजी निवेश के 20 प्रतिशत अथवा जमा किए गए वास्तविक कर, जो भी कम हो, की वार्षिक सीमा के अधीन, बुन्देलखण्ड एवं पूर्वानन्‍्चल में स्थायी पूंजी निवेश के 400 प्रतिशत, मध्यान्चल एवं पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ कर) में स्थायी पूंजी निवेश के oo प्रतिशत तथा गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत की कुल अधिकतम सीमा के अन्तर्गत देय होगी | बी. मध्यम उद्योगों हेतु 5 वर्षों के लिए 60 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति। यह सुविधा स्थायी पूंजी निवेश के 20 प्रतिशत अथवा जमा किए गए वास्तविक कर, जो भी कम हो, की वार्षिक सीमा के अधीन, बुन्देलखण्ड एवं पूर्वानन्‍्चल में स्थायी पूंजी निवेश के 400 प्रतिशत, मध्यान्चल एवं पश्चमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ करो में स्थायी पूंजी निवेश के 90 प्रतिशत तथा गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत की कुल अधिकतम सीमा के अन्तर्गत देय होगी | सी. बड़े उद्योगों (रुपये 40 करोड़ से अधिक एवं सभी श्रेणी की मेगा परियोजनाओं हेतु उल्लिखित पूंजी निवेश की धनराशि से कम) हेतु 5 वर्षों के लिए 60 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति। यह सुविधा स्थायी पूंजी निवेश के 20 प्रतिशत अथवा जमा किए गए वास्तविक कर, जो भी कम हो, की वार्षिक सीमा के अधीन, बुन्देलखण्ड एवं पूर्वानन्‍्चल में स्थायी पूंजी निवेश के 400 प्रतिशत, मध्यान्चल एवं 7पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ कर) में स्थायी पूंजी निवेश के 90 प्रतिशत तथा गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत की कुल अधिकतम सीमा के अन्तर्गत देय होगी | डी.मेगा / मेगा प्लस / सुपर मेगा श्रेणी के उद्योगों हेतु i0 ast के लिए 70 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति। यह सुविधा स्थायी पूंजी निवेश प्रतिपूर्ति के 20 प्रतिशत अथवा जमा किए गए वास्तविक कर, जो भी कम हो, की वार्षिक सीमा के अधीन, बुन्देलखण्ड एवं पूर्वान्चल में स्थायी पूंजी निवेश के 300 प्रतिशत, मध्यान्चल में स्थायी पूंजी निवेश के 200 प्रतिशत, पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ करो में स्थायी पूंजी निवेश के .00 प्रतिशत तथा गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत की कुल अधिकतम सीमा के अन्तर्गत देय होगी | 5.4. प्लाण्ट एवं मशीनरी के क्रय हेतु लिये गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्ष हेतु पूंजीगत ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा रु. 50 लाख प्रतिवर्ष होगी | 5.5. सड़क, सीवर, जल-निकासी, पावर लाइन, ट्रांसफार्मर एवं पावर फीडर जैसे स्वयं के उपयोगार्थ बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु लिये गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्ष हेतु अवस्थापना ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी कुल अधिकतम सीमा रु. 4 करोड़ होगी | 5.6. औद्योगिक अनुसंधान, उत्पाद की गुणवत्ता सुधार एवं विकास के लिए टेस्टिंग लैब, क्वालिटी सर्टिफिकेशन लैब एवं टूलरूम स्थापित करने हेतु प्लाण्ट, मशीनरी एवं इक्युपमेण्ट्स पर किये जाने वाले व्यय हेतु लिये गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्ष हेतु औद्योगिक गुणवत्ता विकास उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी कुल अधिकतम सीमा रु. 4 करोड़ होगी | 5.7. राज्य में स्थापित सभी नई औद्योगिक इकाइयों को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से i0 वर्ष की अवधि हेतु छूट प्रदान की जाएगी | 5.8. कैप्टिव पावर प्लाण्ट द्वारा उत्पादित एवं स्वयं प्रयोग की जाने वाली विद्युत्त को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से i0 वर्ष की अवधि तक मुक्त रखा जाएगा | 5.9. सभी नई खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चे माल की खरीद पर 5 वर्ष की अवधि के लिए मंडी शुल्क से छूट प्रदान की जाएगी | 5.0. जिन उद्योगों को जीएसटी नियमों के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए अनुमति नहीं दी गयी है, उन्हें निर्माण एवं प्रवर्तन में लाने के दौरान खरीदे गये प्लाण्ट एण्ड मशीनरी, बिल्डिंग मैटीरियल एवं अन्य पूंजीगत सामग्री तथा कच्चा माल एवं अन्य इनपुट्स, जिन पर इनपुट टैक्स क्रेडिट अनुमन्य नही है, के इनपुट क्रेडिट के वैट / सीएसटी / जीएसटी की समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति प्रदान की जायेगी | ]8उक्त के अतिरिक्त पूर्ववर्ती औद्योगिक नीति के अन्तर्गत पात्र इकाइयों को अनुमन्य de एवं सीएसटी की कुल राशि अथवा जीएसटी के अंतर्गत राज्य के अंश की सीमा तक जमा करायी गयी धनराशि के समतुल्य ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा यथावत जारी रहेगी | 5.4i. रोजगार सृजन को बढ़ावा न्यूनतम 200 कुशल एवं अकुशल प्रत्यक्ष रोजगार सृजन करने वाली इकाइयों को ईपीएफ में fate अंश का io प्रतिशत की दर से अतिरिक्त प्रतिपूर्ति की सुविधा प्रदान की जाएगी | 5.2. प्रतिपूर्ति, उपादान, छूट इत्यादि के रूप में दिये जा रहे समस्त इन्सेन्टिव्स प्रदेश के पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्र में किए गए स्थायी पूंजी निवेश की अधिकतम 00 प्रतिशत, मध्यांचल एवं पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ कर) में 90 प्रतिशत एवं गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में 80 प्रतिशत की सीमा तक देय होंगे | 5.3. मेगा निवेशों को प्रोत्साहन मेगा परियोजनाओं की स्थापन से गुणक प्रभाव पड़ता है जो कि रोजगार के निर्माण एवं समावेशी विकास के लिए आवश्यक हैं। राज्य में बड़े उद्योगों का विकास एसएमई क्षेत्र में सहायक कम्पनियों को भी आकर्षित करता है, जिससे सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं | मेगा परियोजनाओं द्वारा प्रदान किये जाने वाले बहु-लाभों को पहुचाते हुए, यह नीति ऐसे निवेशों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहनों का अनुकूलित पैकेज उपलब्ध कराना चाहती है। प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस प्रयास करेगी कि प्रदेश में ऐसे निवेशों का संतुलित क्षेत्रीय फैलाव हो | 5.3... प्रदेश में मेगा, मेगा प्लस एवं सुपर मेगा निवेश की सुगमता निम्नलिखित ढाँचे के अन्तर्गत लागू होगी: श्रेणी न्यूनतम पात्रता आवश्यकता गौतमबुद्ध नगर तथा मध्यांचल एवं बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल गाजियाबाद जनपद | पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ कर) wo 200 करोड़ Blo 450. करोड़ से | रु० i00 करोड़ से अधिक मेगा अधिक परन्तु Bo 500 | अधिक परन्तु रु० 300 | लेकिन Bo 250 करोड़ से करोड़ से कम का पुूँजी | करोड़ से कम का | कम का tof निवेश निवेश tot निवेश या या से अधिक al sitet को i000 .. से... अधिक | 7500 से... अधिक | OP से अधिक श्रमिकों को श्रमिकों को रोजगार. | श्रमिकों को रोजगार | रोजगार मेगा प्लस | रु०. 500 करोड़ से | रु०. 300 करोड़ से | रु० 20 करोड़ से अधिक 9अधिक लेकिन Bo अधिक लेकिन Go लेकिन रु० 500 करोड़ से 4000 करोड़ से कम 750 करोड़ से कम कम का पूँजी राशि निवेश का पूँजी निवेश का पूँजी निवेश या या या 4000 से अधिक श्रमिकों को 2000 से... अधिक 4500 Saft रोजगार श्रमिकों को रोजगार श्रमिकों को रोजगार सुपर मेगा Bo 4000 करोड़ से रु० 750 करोड से wo 500 करोड़ से अधिक अधिक का पूँजी निवेश अधिक a yl का पूँजी निवेश निवेश या या या 4000 से... अधिक 2000 से अधिक श्रमिकों को 3000 सेअधिक श्रमिकों को रोजगार रोजगार श्रमिकों को रोजगार 5.3.2. नीति. में aftta सुविधाये as इकाइयों के. साथ-साथ विस्तारीकरण / विविधीकरण परियोजनाओं के लिए भी लागू होगी | 5.33, मेगा (ATT, मेगा प्लस एवं सुपर मेगा) श्रेणी के अन्तर्गत वर्गीकृत समस्त परियोजनाओं हेतु दी जाने वाली सुविधाये केस-टू-केस आधार पर प्रदान की जायेगी | 5.3.4. प्रतिपूर्ति, उपादान, छूट इत्यादि के रूप में दी जा रहे समस्त इन्सेन्टिव्स मेगा परियोजनाओं हेतु प्रदेश के पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्र में किए गए स्थायी पूंजी निवेश की अधिकतम 300 प्रतिशत, मध्यान्चल में स्थायी पूंजी निवेश के 200 प्रतिशत, पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद को छोड़ करो) में स्थायी पूंजी निवेश के t00 प्रतिशत तथा गौतमबुद्ध नगर तथा गाजियाबाद जनपद में स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत की कुल अधिकतम सीमा के अन्तर्गत देय होंगे | ale: 4. इकाइयां जोकि किसी अन्य नीति के अन्तर्गत अथवा सरकार के किसी अन्य विभाग द्वारा स्वीकृत लाभ / सुविधाओं का उपयोग कर रही हैं वह भी इस नीति के अन्तर्गत सुविधायें / लाभ प्राप्त करने की पात्र होंगी बशर्ते इकाइयों द्वारा एक ही प्रकार का लाभ किसी अन्य नीति के अन्तर्गत उपभोग न किया गया हो। किसी इकाई द्वारा यदि राज्य सरकार की किसी उद्योग विशेष यथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग इत्यादि की विभागीय नीति में किसी प्रकृति की छूट, सुविधा का लाभ लिया जाता है, तो ऐसी इकाई को इस नीति के अन्तर्गत समान प्रकृति की we / सुविधा का लाभ प्राप्त नही कराया जाएगा | 2. ऋणात्मक औद्योगिक इकाइयों की सूची तैयार की जायेगी fore इस नीति के अन्तर्गत वर्णित विभिन्‍न इन्सेन्टिव्स / रियायतें उपलब्ध नहीं कराये जायेंगे। परन्तु सरकार द्वारा, ऋणात्मक सूची में आने के फलस्वरूप यदि किसी इकाई को पूर्व 20में कोई पैकेज स्वीकृत किया गया है तो वह वापस नहीं लिया जाएगा। इकाई को पूर्व स्वीकृत लाभ यथावत मिलते रहेंगे | 6. व्यापार करने में सहजता - एक अनुकूल औद्योगिक वातावरण बनाना इस नीति का उद्देश्य, प्रक्रियाओं का सरलीकरण, सर्वात्तम समयबद्ध मानदण्डों के अनुरुप स्वीकृति एवं अनुक्रियाशील सुविधा सेवाएं सुनिश्चित करके राज्य में अनुकूल व्यापार सहायक वातावरण बनाना है | प्रक्रियाओं का सरलीकरण 6... उत्तर प्रदेश सरकार, औद्योगिक सेवाओं / स्वीकृतियों / अनुमोदनों /अनुमतियों / लाइसेंसों से संबंधित अपनी गतिविधियों, नियमों, आवेदन ust एवं प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा करने का विचार रखती है एवं यथासंभव- 644 वर्तमान विनियामक व्यवस्था के अनुसार उन्हें तर्कसंगत बनाया जाएगा अथवा समाप्त किया जाएगा। 6.4.2 स्व-प्रमाणन, अनुमानित अनुमोदन तथा तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण से संबंधित प्रावधानों को लागू किया जाएगा। समयबद्ध स्वीकृतियां 6.2. शीघ्र एवं समयबद्ध स्वीकृति प्रदान करना इस नीति के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। प्रदेश सरकार,इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु औद्योगिक सेवाओं / स्वीकृतियों 6.3. / अनुमोदनों / अनुमतियों / लाइसेंसों से संबंधित अपने कृत्यों, नियमों, आवेदन vat एवं प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा करने का विचार रखती है एवं जहाँ भी संभव a 6.2.. सर्वत्तम मानदण्ड के सापेक्ष विद्यमान समय सीमा निर्धारित की जायेगी | 6.2.2 समयबद्ध ढंग से निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग, जिला स्तर के अधिकारियों को आवश्यक अधिकार प्रदान किये जायेंगे | 6.2.3 अधिनियम के अन्तर्गत प्रत्येक सेवाकी समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करेगी | एकल खिड़की स्वीकृतियां (सिंगल विंडो क्लीयरेंस) प्रदेश सरकार, सभी. औद्योगिक सेवाओं / स्वीकृतियों / अनुमोदनों / अनुमतियों / लाइसेंस को ऑनलाइन तथा एक छत के नीचे प्रदान करने की क्रिया विधि को प्रभावी रूप से क्रियान्वयन की आवश्यकता को अनुभव करती है। अतः यह नीति निम्नलिखित कार्यो को सम्पादित करेगी:- 6.3. सीधे मुख्यमंत्री के कार्यालय के अंर्तगत एक समर्पित सिंगल विंडो qa विभाग बनाया. जाएगा। यह विभाग समस्त औद्योगिक सेवाओं / स्वीकृतियों / अनुमोदनों / अनुमतियों / लाइसेंसों को प्रदान करने के लिए सरकार का एकमात्र इंटरफेस होगा। 26.3.2 scrista मानकों का एक सिंगल विंडो टेक्नोलॉजी पोर्टल विकसित किया जाएगा जिसके माध्यम से समस्त आवेदन ऑनलाइन प्राप्त कर औद्योगिक सेवाएँ / स्वीकृतियाँ / अनुमोदन / अनुमतियाँ / लाइसेंसऑनलाइन प्रदान किये जाएँगे | 6.3.3 सिंगल विंडो slave प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा। राज्य में वाणिज्यिक गतिविधियों के हेतु सहजता 6.4. 6.4. व्यापारियों के हितों की रक्षा करने के लिए एक व्यापार कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाएगी | 6.4.2 व्यापारियों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रत्येक जिले में एक विशेष मध्यस्थता प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा। 6.4.3 व्यापारियों को अनुकूल माहौल प्रदान करने के लिए राज्य में वाणिज्यिक गतिविधियों के प्रशासनिक ढांचे को सरल बनाया जाएगा। औद्योगिक सुरक्षा 6.5. प्रदेश सरकार, राज्य में एक सुरक्षित एवं भयरहित औद्योगिक वातावरण प्रदान करना चाहती है। इस हेतु औद्योगिक क्लस्टर,/क्षेत्र जैसे नोएडा, कानपुर, गोरखपुर, बुंदेलखंड, पूर्वांचल में विशेष अधिकारी के नेतृत्व में समर्पित पुलिस बल को तैनात किया. जाएगा। प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर,/क्षेत्रों में एकीकृत पुलिस-कम-फायर स्टेशन भी स्थापित किये जायेंगे | सरलीकरण के अन्य विनियामक उपाय 6.6. यह नीति, प्रदेश में व्यापार सरलीकरण हेतु विनियामक को सक्षम बनाने के लिए निम्नलिखित उपायों को भी लागू करने का विचार रखती है- 6.6. वर्तमान औद्योगिक हेल्पलाइन सेवा को सशक्त किया जाएगा। 6.6.2 मेगा परियोजनाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए समर्पित नोडल अधिकारी उपलब्ध कराये जायेंगे | 6.6.3 उद्योगों को सेवाएं प्रदान करने वाले सभी विभागों में ग्राहक उन्मुख मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट सॉफ्ट कौशल प्रशिक्षण शुरू किए जाएंगे | राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (Tassie) 6.7. 6.7. औद्योगिक परियोजनाओं से संबंधित निर्णय लेने में शीघ्रता लाने के लिए मा. मुख्य मंत्री की अध्यक्षता में एसआईपीबी का गठन किया जायेगा जिसमें मुख्य सचिव सदस्य संयोजक होंगे | 6.7.2 यह बोर्ड, निवेश प्रोत्साहन यथा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो, उद्योगों के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित करने तथा उन्हें क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करने की गतिविधियों का संचालन करेगा | 226.7.3 बोर्ड द्वारा निवेश सुगमता से संबंधित नीतिगत मुद्दे पर संस्तुति की जायेगी | 6.7.4 बोर्ड द्वारा मेगा परियोजनाओं को दी जाने वाली सुविधाओं एवं रियायतों की संस्तुति की जायेगी | 6.75 बोर्ड द्वारा प्रदेश में औद्योगिक वातावरण को प्रभावित करने वाले बिन्दुओं पर भी विचार विमर्श किया जायेगा। 7. मेक इन यूपी - मेक इन इंडिया की सफलता का लाभ उठाना भारत सरकार के “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम ने निवेश को बढ़ाते हुए, नवाचार एवं कौशल का विकास करते हुए, बौद्धिक संपदा (आईपी) की सुरक्षा एवं अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ विनिर्माण बुनियादी ढांचे के निर्माण से वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए रणनीति के रूप में तथा “मेक इन इंडिया” अभियान की प्रगति से उत्पन्न सकारात्मक वैश्विक भावनाओं का लाभ उठाने के लिए, उत्त्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक पहल को अपनाया जाएगा एवं एक व्यापक कार्यक्रम “मेक इन यूपी” को शुरू किया जायेगा | “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के अनुरुप, “मेक इन यूपी” कार्यक्रम ऐसी रणनीति अपनाएगा जो यूपी को भारत का एक विनिर्माण केंद्र बनाने में समान रूप से प्रेरित, सशक्त तथा सक्षम बनाएगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार निम्नलिखित को लागू करेगी — 7.. एक समर्पित “मेक इन यूपी” विभाग की स्थापना | 7.2. मेक इन यूपी विभाग, विनिर्माण को बढ़ावा देने, रोजगार उत्पन्न करने, जीवन मानकों को बढ़ाने एवं राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप निरन्तर विकास करने के उद्देश्य से उद्योग एवं सेक्टर विशिष्टराज्य निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र (एसआईएमजेड) को चिन्हित तथा सृजित करेगा। 7.3. प्रदेश सरकार, चिन्हित क्षेत्रों में संपूर्ण विनिर्माण वैल्यू चेन को बढ़ावा देने के लिए इस नीति में उल्लिखित वित्तीय एवं गैर-वित्तीय उपायों के साथ-साथ सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके आवश्यक समयबद्ध हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगी | 8. कुशल कार्यबल - जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना त्वरित आर्थिक विकास के लिए कुशल एवं प्रशिक्षित कार्यबल की आवश्यकता होती है। भारत की आबादी का पांचवा हिस्सा उत्तर प्रदेश में निवास करता है, जिसका 60 प्रतिशत कार्यशील आयु समूह है। उद्योग की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप इस आयु वर्ग के कौशल को संरेखित कर सरकार, राज्य के औद्योगिक विकास हेतु इस विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने की मंशा रखती है। यह नीति 5ः*«-एजुकेशन, इम्प्लॉयबिलिटी, इम्प्लॉयमेण्ट, इकोनॉमी एवं इन्वायरमेण्ट के सिद्धांत के आधार पर कार्यबल को क्षेत्र-विशिष्ट उच्च गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य हेतु प्रावधान करेगी, जिसके लिए- 8.l. उत्तर प्रदेश सरकार, समय-समय पर उद्योग विशिष्ट स्किल-गैप एवं कौशल आवश्यकताओं को चिन्हित करेगी एवं सक्रिय उपयोगकर्ता-उद्योग की भागीदारी से पाठ्यक्रम सामग्री एवं प्रशिक्षण को तैयार करके विद्यमान आईटीआई, पॉलिटेक्निक 23va इंजीनियरिंग कॉलेजों में उद्योग-आधारित लघु अवधि, दीर्घकालिक / मॉड्यूलर पाठ्यक्रमों को प्रारम्भ करेगी | 8.2. यह नीति,जो क्षेत्र-विशिष्ट कुशल जनशक्ति आधार को बढ़ाये ऐसे मौजूदा व नए निवेश को तथा उत्तर प्रदेश से कार्यबल की भर्ती करने वाले नियोक्ताओं को बढ़ावा देगी। ऐसे उद्योगों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों को आकर्षित करने के लिए एक रणनीति तैयार की जाएगी जोकि राज्य के कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान करेगी | 8.3. ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक पूंजी का दोहन करने पर विशेष ध्यान देने हेतु प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों / समूहों / पार्कों में कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे | 8.4. हस्तशिल्प एवं घरेलू व्यापार करने के लिए अनुसूचित जाति / जनजाति 8.5. ,/ पिछड़े वर्ग एवं महिला उद्यमियों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कौशल विकास विभाग द्वारा युवाओं को प्रशिक्षित कर औद्योगिक इकाइयों में प्रशिक्षु के रूप में नियोजित कराये जाने हेतु विशेष प्रयास किये जायेंगे | 9, नवाचार-स्टार्ट-अप को बढ़ावा भारत को नवाचार, डिजाइन एवं स्टार्ट-अप का केंद्र बनाने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य में स्टार्ट-अप आंदोलन को गति देना होगा। राज्य सरकार, नवाचार एवं स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए, एक सुदृढ़ ईको-सिस्टम बनाने पर ध्यान केन्द्रित करेगा, जिससे स्थायी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा एवं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी | इस पहल के उद्देश्य को पूरा करने के लिए, राज्य सरकार ननििमम््ननललििखखिितत पर बल देगी- विनियामक सरलीकरण एवं हैंडहोल्डिंग 9.7. यह नीति स्टार्ट-अप के अभिनवीकरण को बढ़ावा देगी एवं नियामक संबंधी प्रक्रियाओं को कम करेगी। इसके लिए, यह नीति विभिन्‍न करों, श्रम एवं पर्यावरण कानूनों से संबंधित अनुपालन को स्टार्ट-अप हेतु लचीला एवं मितव्ययी बनाएगी | अनुदान सहायता एवं प्रोत्साहन 9.2. यह नीति, नवाचार संचालित उद्यमों के विकास को प्रोत्साहित करेगी। राज्य एक उद्यम पूंजीगत निधि (वेन्चर कैपिटल फण्ड) बनाएगा | ऊष्मायन (Se) सहायता 9.3. राज्य में सफल स्टार्ट-अप उद्यमों के विकास को उत्प्रेरित करने के लिए, var प्रदेश सरकार का लक्ष्य अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ ऊष्मायन केंद्र स्थापित करना है। यह नीति, स्टार्ट अप्स को अपने कारोबार चलाने एवं उन्हें विशेषज्ञों के नेटवर्क के साथ जुड़ने के लिए संसाधन प्रदान करेगी। राज्य के शासकीय एवं निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों, प्रबंधन संस्थानों एवं अन्य तकनीकी संगठनों के ऊष्मायन केंद्रों को भी बढ़ावा दिया जाएगा | 24.सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) -चहुंमुखी औद्योगिक विकास का 0. सुनिश्चियन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह रोजगार सृजन तथा निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जित करने का साधन है। प्रदेश की जी0डी0पी0 को बढ़ाने, पूंजी निवेश को आकर्षित करने एवं औद्योगिक उत्पादकता की die में भी इस क्षेत्र का उल्लेखनीय महत्व है। देश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य होने के कारण उत्त्तर प्रदेश विभिन्‍न उत्पादों जैसे हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग के सामान, कालीन, वस्त्र आधारित उद्योग एवं चर्म आधारित उत्पादों इत्यादि के निर्यात में देश का अग्रणी राज्य है। इस नीति के द्वारा प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के भली भांति विकास हेतु निम्नलिखित सुविधायें एवं प्रोत्साहन प्रदान किये जायेंगे — 0.]. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम veal के लिये पूंजी एवं ऋण के प्रवाह में सुधार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम Vaal द्वारा अपनी स्थापना के समय सामर्थ्य की कठिनाइयों तथा विचलनशील बाजार व्यवस्था को देखते हुये उनको पूंजी एवं ऋण की साथ-साथ आवश्यकता होती है ताकि ये इकाइयां सफलतापूर्वक स्थापित हों सके | शासकीय सहायता से उद्यमों की इन कठिनाइयों को सरल करने की आवश्यकता है। इसे ध्यान में रखते हुये नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिये निम्नलिखित वित्तीय प्रोत्साहन दिये जायेंगे :- 0.44 कॉरपस फण्ड का सृजन करते हुये विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना कियान्वित की जायेगी। इस योजना के द्वारा मार्जिन मनी अनुदान एवं ब्याज अनुदान की सुविधा स्थानीय दस्तकारों तथा उद्यमियों को पारम्परिक उद्योगों के विकास हेतु बैंक द्वारा ऋण प्राप्त करने पर सुलभ करायी जायेगी | इस योजना के दो भाग होंगे। पहले भाग में, पारम्परिक दस्तकारों जैसे बढ़ई, मोची, दर्जी, बास्केट वीवर्स, नाई, सुनार, लोहार, HER, हलवाई इत्यादि को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत ऋण सुविधा उपलब्ध कराकर Ff मनी अनुदान दिया जायेगा। दूसरे भाग में स्थानीय पारम्परिक उद्योगों को करने वाले उद्यमियों को कम मात्रा की मार्जिन मनी अनुदान के साथ ब्याज अनुदान प्रदान किया जायेगा तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा महिला श्रेणी के लाभार्थियों की परियोजनाओं को 'स्टैण्ड अप इण्डिया' योजना के साथ Baad कराया जायेगा | 40..2 प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिये उद्योग तथा सर्विस क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिये "मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना' प्रारम्भ की जायेगी | इस योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को मार्जिन मनी अनुदान एवं ब्याज अनुदान सुलभ कराते हुये उनकी 25परियोजनाओं को आवश्यकता एवं अर्हतानुसार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अथवा “स्टैण्ड अप इण्डिया' योजना के साथ समन्वित किया जायेगा | 40..3 प्रदेश सरकार द्वारा अन्य वित्तीय संस्थानों की सहायता लेकर एक एस0एम0ई0 लघु, मध्यम उद्यम वेन्चर कैपिटल फण्ड का सृजन किया जायेगा जिसके द्वारा स्टार्ट अप एवं उर्ध्वगामी लघु एवं मध्यम उद्यम को प्रोत्साहन दिया जायेगा | 40..4 राज्य के पूर्वांचल, मध्यांचल एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्रों के लिये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा वर्तमान में कियान्वित उत्तर प्रदेश लघु एवं मध्यम उद्योग ब्याज उपादान योजना में यथोचित्‌ सुधार करते हुये राज्य सरकार के अन्य विभागों द्वारा इस क्षेत्र में संचालित ब्याज उपादान योजना के समरूप करते हुये ब्याज उपादान योजना के लाभार्थियों को सुलभ कराया जायेगा | 0..5 कियाशील सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को विस्तार एवं विवधीकरण हेतु प्रोत्साहित करने के लिये कतिपय शर्तों के अधीन ब्याज उपादान सुविधा सुलभ करायी जायेगी | 40..6 सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिये रू0 2.00 करोड़ तक के कोलैटरल Bl ऋण हेतु केडिट गारण्टी फण्ड ट्रस्ट फॉर माइको एण्ड Sa इण्टरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) के अन्तर्गत बैकों को देय सेवा Yow भुगतान की प्रतिपूर्ति प्रदेश सरकार द्वारा की जायेगी | 0.2. क्षमता विकास :-- प्रदेश की जनसांख्यकीय विभाजन का लाभ उठाने की दृष्टि से यह आवश्यक है कि राज्य की युवा जनशक्ति, उद्यमिता एवं व्यापारिक दृष्टि से कुशल व प्रशिक्षित हो। इस हेतु कौशल विकास की विभिन्‍न प्रोत्साहन योजनाओं को निम्नवत्‌ कियान्वित किया जायेगा - 0.2...u9 के सभी जिलों में उद्यमिता विकास कार्यकम आयोजित किये जायेगें । उद्यमिता विकास संस्थान, लखनऊ इस उद्देश्य के लिये एक नोडल WIR के रूप में कार्य करेगी | 0.2.2. डिजाइन, विनिर्माण एवं विपणन में आधुनिक तकनीक पर कारीगरों एवं युवा उद्यमियों के लिये प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये छः हस्तशिल्प केन्द्र स्थापित किये जायेंगें। उत्तर प्रदेश इन्सटीट्यूट ऑफ डिजाइन,लखनऊ एक नोडल एजेंसी के रूप में इस प्रयोजन के लिये कार्य करेगा। 0.2.3. उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय के अधीन विभागीय प्रशिक्षण केन्द्रों की समीक्षा कर उपयोगी प्रशिक्षण केन्द्रों को कियाशील बनाया जायेगा | 0.2.4. अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के उद्यमियों के कौशल विकास पर विशेष बल देते हुये विशेष प्रशिक्षण कार्यकम आयोजित किये जाने को प्रोत्साहित किया जायेगा | 260.3. गुणवत्ता तथा मानक तकनीक के क्षेत्र में निरन्तर हो रहे gd विकास एवं पर्यावरण तथा तकनीकी मानकों के प्रति वैश्विक स्तर पर अपनाये जा रहे उच्चीकृत मानकों को ध्यान में रखते हुये तकनीकी उन्नयन एवं परीक्षण सम्बन्धी आधारभूत अवस्थापना पर किया जाने वाला निवेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता की वृद्धि हेतु महत्वपूर्ण हैं। अतः उद्योगों को अपशिष्ट प्रबन्धक प्रणालियों, प्रदूषण नियंत्रण सुविधाओं एवं मानकों को प्राप्त करने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा | औद्योगिक अवस्थापना तथा सामान्य सुविधा केन्द्र 0.4. आवश्यकता के अनुरूप विकसित औद्योगिक अवस्थापना सुविधा की उपलब्धता उद्योगों की अभिवद्धि के लिये प्राथमिक आवश्यकता हैं। इस दृष्टि से सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाये जायेंगे | 0.4.] प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिये 20 से 400 एकड़ के नये मिनी औद्योगिक पार्क में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश सरकार भूमि के खरीद के लिये wry Yow की प्रतिपूर्ति के साथ-साथ ब्याज सब्सिडी के रूप में डेवलपर को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करेगी । पार्क में विद्युत सबस्टेशन निर्माण पर आने वाले व्यय को राज्य सरकार द्वारा साझा किया जायेगा। इस हेतु विकासकर्ता द्वारा भूमि निःशुल्क सुलभ करायी जायेगी। soyo लघु उद्योग निगम लि0 इस हेतु नोडल एजेंसी के रूप में ऐसे पार्क के विकास तथा स्थापना में सहायता प्रदान करेगी | 0.4.2 wey में क्लस्टर आधारित विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एस0पी0वी0 के गठन, उद्यमियों की समितियों तथा शिल्पकारों की समितियों के निर्माण को प्रोत्साहित करते हुये उन्हें सामान्य सुविधा केन्द्रों एवं कच्चा माल डिपो आदि प्रदान करना है। विपणन :- 0.5. प्रदेश में निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में मांग अनुरूप विपणन सामर्थ्य को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इस क्षेत्र की कमी को पूरा करने के लिये उपयुक्त कदम उठायेगी | 0.5.. सरकार समर्थित लॉजिस्टिक्स के साथ ई-कामर्स पोर्टल का विकास कराया जायेगा जिसके माध्यम से परम्परागत शिल्पकार को राष्ट्रीय एवं SRI बाजार से जोड़ा जायेगा | 0.5.2 वर्तमान यू0पी0 बिजनेस मार्ट पोर्टल को सुदृढ़ किया जायेगा एवं इसका प्रचार-प्रसार किया जायेगा | 0.5.3. लखनऊ में एक स्थाई प्रदर्शनी केन्द्र का विकास किया जायेगा तथा राज्य के चयनित शहरों में VR मार्ट की स्थापना की जायेगी | 270.5.4 उ0प्र0 निर्यात संवर्धन परिषद को इस प्रकार Yee किया जायेगा ताकि अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में सहभागिता एवं अन्तर्राष्ट्रीय केता-विकेता सम्मेलन को आयोजित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सके | 0.5.5 हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों को विपणन सहायता प्रदान की जायेगी | उत्तर प्रदेश व्यापार प्रोत्साहन प्राधिकरण को इस प्रकार सुदृढ़ किया जायेगा जिससे वह राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर प्रदर्शनी एवं केता-विकेता सम्मेलन का आयोजन करते हुये हस्तशिल्पियों एवं उद्यमियों की सहभागिता को प्रोत्साहित कर Ae | 0.6. सुशासन एवं अनुकूल वातावरण का सृजन (गुड Tata एवं इनेबलिंग एनवायरमेंट) — सरकार द्वारा बनायी गयी नीतियों व चलायी जा रही योजनाओं तथा कार्यकमों के समग्र एवं सफल कियान्वयन में सुगठित प्रशासनिक मशीनरी का महत्त्वपूर्ण योगदान है। योजनाओं के प्रभावी कियान्वयन हेतु संगठनात्म संरचना को सुदृढ़ किया जायेगा तथा कार्मिकों की तकनीकी क्षमता का विकास कराया जायेगा | 0,6. भारत सरकार की स्टार्टअप योजना की भांति प्रदेश में स्थापित होने वाले नये. सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिये भी आवश्यक विभिन्‍न स्वीकृतियों /अनापत्त्तियों /सहमतियों हेतु स्वतः . प्रमाणन (सेल्फ सर्टिफिकेशन) की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी ताकि स्थापना के प्रारम्मिक अवस्था में विभिन्‍न निरीक्षणों से निवृत्ति मिल ae | 0.6.2 राज्य सरकार 25 जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन Gal को 05 वर्षो में आधुनिकीकृत करेगी जिसके द्वारा परामर्श देने हेतु हेल्पडेस्क की स्थापना, प्रोजेक्ट परियोजना निर्माण कक्ष एवं ऑनलाइन एकल खिड़की अनुमोदन सेल आदि की स्थापना की जायेगी | 0.7. अन्य :-- 0.7. कमजोर श्रेणी एवं महिलाओं हेतु विशेष प्रोत्साहन 0.7.. मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों के कुछ अनुपात को अनुसूचित जाति एवं जनजाति gat तथा महिलाओं के लिए निर्धारित किया जायेगा | 0.7..2 पूर्वानन्‍्चल, मध्यांचल व बुन्देलखण्ड में कियान्वित होने वाली उ0प्र0 लघु एवं मध्यम उद्योग ब्याज उपादान योजनान्तगत लाभार्थियों का कुछ अनुपात महिलाओं के लिए निर्धारित किया जायेगा | 0.7.2 रूग्ण इकाई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में कम प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के कारण व प्रबन्धकीय, तकनीकी तथा अन्य कारकों के फलस्वरूप उद्यमों में wore की स्थिति उत्पन्न होती है। रूग्ण इकाइयों के पुनर्वासन के 28सम्बन्ध में भारत सरकार की योजना को सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र के बैंक से समन्वय करते हुये प्रभावी ढंग से लागू किया जायेगा | l. क्षेत्रीय दृष्टिकोण - शक्तिशाली क्षेत्रों से लाभ उठाना आईटी /आईटीईएस उद्योग एवं आईटी स्टार्ट-अप वि, बदलते व्यवसायिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश की स्थिति को आईटी /आईटीईएस उद्योग के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में सुदृढ़ करना एवं आईटी / आईटीईएस क्षेत्र में स्थापित स्टार्ट अप्स एवं उभरते उद्यमियों पर विशेष ध्यान देना है। आईटी / आईटीईएस क्षेत्र में, सवत्तिम प्रोत्साहन तथा अनुकूल नीतिगत ढांचे के साथ आईटी ,/ आईटीईएस उद्योग के सभी चरणों यथा- स्टार्ट अप्स / उद्यमियों, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्यम) एवं बड़े आईटी ,//आईटीईएस उद्योगों को सहायता प्रदान करना राज्य सरकार की रणनीति होगी | इसकेलिए यह नीति आईटी //आईटीईएस क्षेत्र की इकाइयों को विभिन्‍न वित्तीय एवं गैर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने की मंशा रखती है। वित्तीय प्रोत्साहन यथा- आईटी /आईटीईएस इकाइयों को ऋण पर देय ब्याज पर सब्सिडी, जमीन की खरीद / पट्टे पर ey शुल्क की छूट, इलेक्ट्रिसिटीड्यूटी पर छूट, गुणवत्ता प्रमाणन पर हुए व्यय की प्रतिपूर्ति एवं ईपीएफ की प्रतिपूर्ति आईटी /“आईटीईएस इकाइयों को प्रदान किया जाना सम्मिलित है। ve / किराये के शुल्क की प्रतिपूर्ति एवं बिजली बिलों पर छूट के रूप में एमएसएमई आईटी /आईटीईएस इकाइयों तथा इनक्यूबेटर को अतिरिक्त प्रोत्साहन उपलब्ध होंगे | मेगा इकाइयों कोकेस-टू-केस आधार पर विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जाएँगे। राज्य में टियर-2 एवं टीयर-3 शहरों में आईटी पार्क स्थापित करने वाले निजी इंफ्रास्ट्रक्चवर डेवलपर्स को भी केस-सटू-केस आधार पर प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे | आईटी ५.2. / आईटीईएस उद्योग को यूपी प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के दायरे से बाहर रखा जायेगा एवं विभिन्‍न श्रम संबंधी अधिनियमों के अंतर्गत निरीक्षणों से भी छूट दी जाएगी | 24५7 संचालन तथा सभी तीनों rect में महिलाओं के नियोजन की अनुमति दी जाएगी एवंसमस्त आईटी / आईटीईएस इकाइयों पर औद्योगिक बिजली टैरिफ लागू होगा | राज्य सरकार, आईटी /आईटीईएस क्षेत्र में स्टार्ट-अप संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। इस हेतु प्रदेश सरकार इनक्यूबेटर एवं स्टार्ट-अप को विभिन्‍न प्रोत्साहन प्रदान करेगी एवं उनको बढ़ावा देने के लिये एक सीड Hrs बनायेगी | इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मोबाइल एवं दूरसंचार उद्योग, आईटी व सॉफ्टवेयर उद्योग, स्वास्थ्य उद्योग, ऑटोमोबाइल उद्योग आदि में तेजी से वृद्धि के साथ-साथ मध्यम वर्गीय आबादी, बढ़ती उपभोज्य आय, उन्नत प्रौद्योगिकी को अपनाने में वृद्धि एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मांग के कारण भारत में 2020 तक 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 29इलेक्ट्रॉनिक बाजार बनने की संभावना है। यह नीति इसवृहद घरेलू मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार के दृढ़ संकल्प को प्रतिबिंबित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देकर वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य रखती है। यह नीति, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण gece (ईएमसी) / ईएसडीएम wel में ईएसडीएम इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने का विचार रखती है। इस नीति के द्वारा ग्रीनफील्ड ईएमसी के साथ, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस-वे के पूरे क्षेत्र को “इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण aa’ घोषित कर, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी की छूट, पेटेंट दाखिल करने की लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति एवं वैट ८ सीएसटी की प्रतिपूर्ति सहित वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जाएगें एवं इन SUR .3,. / ईएसडीएम पार्क /ईएसडीएम इकाइयों को राज्य एजेंसियों से क्रय की गयी भूमि पर छूट दी जाएगी | विशेषकर विदेशी निवेशकों द्वारा अपनाये जा रहे ईएसडीएम क्षेत्र के क्लस्टर / पाक आधारित दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र में ईएसडीएम Ue की स्थापना को प्रोत्साहित किया जायेगा। ईएसडीएम क्षेत्र मेंगेगा इकाइयों को निवेश की मात्रा के अनुसार केस-टू--केस आधार पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। फैब इकाइयों को भीकेस-टू--केस आधार पर अनुकूलित पैकेज प्रदान किया जाएगा। इस पैकेज में विभिन्‍न वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रोत्साहन शामिल होंगे, जिनमें भूमि की दरों, बिजली, पानी, अवस्थापना, इक्विटी शेयरिंग आदि पर छूट शामिल हैं। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य में बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में पूंजी निवेश, रोजगार सृजन एवं राज्य की ग्रामीण आय में वृद्धि के लिए काफी संभावनाएं हैं। भारत में खाद्यान्न, बागवानी उत्पाद, दूध एवं मांस के कुल उत्पादन के मामलों में कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख स्थान है। बड़े बाजार, उत्पादन की कम लागत एवं मानव संसाधन के अलावा कच्ची उपज की पर्याप्त उपलब्धता के कारण राज्य में बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना के लिए काफी संभावना है। इसलिए, राज्य को एक फूड पार्क राज्य में विकसित करना, उत्तर प्रदेश सरकार का संकल्प है। उत्तर प्रदेश सरकार, “मुख्य मंत्री खाद्य प्रसंस्करण मिशन योजना” के अंतर्गत इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न सुविधाओं एवं प्रोत्साहन प्रदान करेगा । उत्तर प्रदेश सरकार, छोटे. पैमाने W खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उनके प्रतिष्ठान ,/ विस्तार /“आधुनिकीकरण, कोल्ड चेन के. विकास, मूल्यवर्धन एवं प्रसंस्करण अवस्थापरना, ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक प्रसंस्करण क्षेत्र एवं संग्रह केंद्रों की स्थापना, रिफर वाहन ,/८ मोबाइल प्री-कूलिंग वैन के लिए ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करेगा एवं fray बिजली आपूर्ति एवं de / सीएसटी / जीएसटी की प्रतिपूर्ति, 30डिग्री / डिप्लोमा 4, .5. / प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों, खाद्य प्रसंस्करण कौशल विकास कार्यक्रमों आदि के लिए बुनियादी सुविधाओं की स्थापना करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार, बैंक को स्वीकार्य परियोजनाओं की तैयारी, अनुसंधान एवं गुणवत्ता विकास, बाजार विकास एवं ब्रांड प्रचार मानकीकरण को बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करेगा | उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में मेगा फूड पार्क की स्थापना एवं पैकेजिंग, निर्यात एवं अनुसंधान सुविधाओं के साथ राज्य के सभी क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण पार्क की स्थापना को बढ़ावा देगा | डेयरी उत्तर प्रदेश, देश के उच्चतम दूध उत्पादन राज्यों में से एक है। राज्य का यह अंतर्निहित लाभ, डेयरी क्षेत्र में क्षेत्रीय गहराई को प्राप्त करने एवं इसमें पूंजी निवेश एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए बहुत बड़ी क्षमता प्रदान करता है। इसके लिए, उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य में गुणवत्ता वाले दूध एवं डेयरी उत्पादों के बारे में जागरूकता प्रसार करेगी ; दूध एवं डेयरी उत्पादों की भंगुरता को कम करेगी ; डेयरी क्षेत्र में बाजार केंद्रित गतिविधियों को बढ़ावा देगीएवं इस aa में आधुनिक कार्यों के बारे में जागरूकता फैलाएगी | इस नीति का उद्देश्य प्रसंस्कृत दूध एवं डेयरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना, राज्य में मूल्य वृद्धि को बढ़ावा देना, डेयरी क्षेत्र इकाइयों के मौसमीपन की सुरक्षा करना, मंडी सुविधाओं का उपयोग नहीं करने वाले डेयरी प्रसंस्करणकर्ताओं को मण्डी शुल्क से मुक्त करना एवं बुनियादी ढांचा एवं औद्योगिक पार्क विकास में निजी निवेश को बढ़ावा देना है। उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य में श्वेत क्रांति लाने का विचार रखता है जिसके लिए एक डेयरी विकास कोष बनाया जाएगा। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की सहायता से, चार जिलों के प्रत्येक समूहों में एकीकृत दूध प्रसंस्करण डेयरियों को स्थापित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार, डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों को हल करने वाली विभिन्‍न प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा एवं राज्य में उद्योगों को प्रासंगिक बाजार जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से एक आईटी सक्षम डेटाबेस बनाएगा | नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य में बढ़ती ऊर्जा की मांग एवं पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा करने के कारण पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ऊर्जा के नए एवं नवीकरणीय स्त्रोतों से विद्यु्त उत्पादन एवं विद्युत दक्षता प्राप्त करने एवं बचत पर विशेष बल देगा। इसके लिए, गैर-पारंपरिक ऊर्जा के माध्यम से माइक्रो हाइड्रो-इलेक्ट्रिक विद्युत उत्पादन, अन्य विद्युत उत्पादन क्षेत्रों जैसे बायोगैस, बायोमास एवं HS को बढ़ावा दिया जाएगा। 34राज्य की सौर ऊर्जा क्षेत्र में विशाल क्षमता है। राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार, समुदाय एवं लाभार्थी केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाएगी | राज्य में सरकार द्वारा ग्रिड आधारित विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देगी | हथकरघा एवंवस्त्र उद्योग .6. .6.l. हथकरघा उद्योग हथकरघा उद्योग राज्य में शीर्ष रोजगार उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों में से एक है। राज्य के पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देना एवं इसक्षेत्र के विकास को अगले चरण में ले जाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, MAM बुनकरों के लिए हथकरघा एवं विद्युत चालित करघा से बुनाई में उनकी कला को बढ़ाने एवं जीवित रखने के लिए विभिन्‍न छात्रवृत्ति / प्रोत्साहन योजनाएं संचालित करने की मंशा रखती है | राज्य सरकार, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) के अंतर्गत प्रस्तावित वस्त्र wet की अवस्थापनात्मक सुविधाओं को विकसित करने में सहयोग प्रदान करेगी | राज्य में रेशम के उत्पादन को बढ़ाने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार Beda खेती के लिए क्लस्टर विकसित करेगी। राज्य सरकार द्वारा रेशम की धागाकरण इकाइयों को भी स्थापित करने हेतु सहयोग प्रदान किया जायेगा | .6.2. वस्त्र उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था में वस्त्रोद्योग का विशेष महत्व है। कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार वस्त्रोद्योग क्षेत्र एवं इससे सम्बंधित अनुपूरक उत्पादन इकाईयों एवं विनिर्माण इकाईयों से ही प्राप्त होता है। वस्त्रोद्योग श्रमिक प्रगाढ़ उद्योग है एवं इसमें प्रदेश के विकास के असीमित अवसर है वर्तमान में प्रदेश में खपत होने वाले लगभग दो तिहाई वस्त्रोद्योग से सम्बन्धित कच्चे माल व वस्त्र उत्पादों को अन्य प्रदेशों से आयात किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार परम्परागत हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध तथा उनको पुनर्जीवित करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है | इस क्रम में Ueda, बुन्देलखण्ड एवं मध्यान्चल में स्थापित की जाने वाली वस्त्रोद्योग इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दिया जायेगा। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग तथा रेषम की सभी उप शाखाओं जैसे-रेशम चाकी, कोया उत्पादन, किसी भी सामग्री की रीलिंग, स्पिनिंग, वीविंग, निटिंग, डाईग, प्रोसेसिंग, WAS उत्पाद एवं उसकी पैकिंग इकाइयो तथा तकनीकी कार्यों यथा- औद्योगिक टेक्सटाइल, फर्नीचर लाइनिंग, अग्निशमन उपकरण, बुलेटप्रूफ जैकेट, पैराशूट आदि तकनीकी वस्त्र को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रोत्साहन यथा- wry ड्यूटी में छूट, वाणिज्य कर से छूट, इत्यादि देने का प्राविधान किया गया है। इसके अतिरिक्त gered एवं औद्योगिक आस्थानों के विकास को भी बढ़ावा दिया जायेगा। वस्त्रोद्योग क्षेत्र की मेगा इकाइयों को केस-टू--केस आधार सुविधा प्रदान की जायेगी | 32वस्त्रोद्योग में कार्मिक शक्ति की उत्पादकता एवं रोजगार योग्यता को बढ़ाये जाने हेतु प्रौद्योगिकी तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना में प्रोत्साहन के साथ-साथ विद्यमान आई.आई.टी. पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग एवं डिग्री कॉलेजों को भी प्रशिक्षण क्षमताओं से सुसज्जित किया जायेगा। इस हेतु स्थानीय स्तर पर उद्योग, बुद्धिजीवियों तथा सरकार के सहयोग से आवश्यकतानुसार पाठयक्रम तैयार कराये जायेंगे जोकि व्यवहारिक एवं उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप हों। हथकरघा बुनकरों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में उत्पाद की बिकी को प्रोत्साहित करने के लिये प्रदेश के बाहर मेट्रो सिटी तथा विदेश में मेलों का यथासम्भव आयोजन अथवा भाग लेने हेतु विपणन प्रोत्साहन योजना चलायी जायेगी | विपणन हेतु कार्यशील पूँजी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से लाभान्वित कराने का प्रयास किया जायेगा रिशम कोया उत्पादन करने वाले कृषकों को pa उत्पादन की वर्किंग कैपिटल हेतु प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा | .7. निर्यात ope इकाइयां आर्थिक विकास, रोजगार के स्तरों एवं भुगतान के संतुलन को प्रभावित करते हुए निर्यात, राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस नीति का उद्देश्य भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के दृष्टिकोण के अनुसार राज्य से नियत को बढ़ावा देना है। उत्तर प्रदेश को एक निर्यात केंद्र बनाने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार राज्य भर में मल्टी मोडल लॉजिस्टिक हब, एसईजेड एवं एसआईएम जैसे विशिष्ठ औद्योगिक क्षेत्र जैसी सुविधापूर्ण अवस्थापना बनाने का विचार रखती S| उत्तर प्रदेश सरकार, निर्यात उन्मुख इकाइयों को विपणन सहायता, हवाईजहाज से भेजे जाने वाले निर्यात कार्गो पर छूट देकर एवं गेटवे पोर्ट पर भाड़ा शुल्क पर छूट देकर प्रोत्साहित करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार में निर्यात एवं संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार की योजनाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेगी | यह नीति निरयतिकों को बाजार एवं विनियामक आवश्यकताओं की सुविधा प्रदान करने का भी विचार रखती है । .8. पर्यटन प्रदेश के नागरिकों हेतु रोजगार के अवसर सृजित करते हुये, पर्यटन विदेशी मुद्रा अर्जन, अवस्थापना विकास एवं सांस्कृतिक अदान-प्रदान का मुख्य स्रोत्र है। प्रदेश की सर्वाच्च पर्यटन राज्य के रूप में स्थापना, जनसाधारण उद्धमशीलता को प्रोत्साहन एवं पर्यटन के माध्यम से सतत एवं समावेशी विकास के उद्देश्य से प्रदेश सरकार एक व्यापक पर्यटन विकास हेतु दीर्घकालीन बुनियादी gra तैयार करने की मंशा रखती है। इस बुनियादी ढ़ाचे के माध्यम से प्रदेश सरकार विभिन्‍न प्रकार के पर्यटन के अवसरों को चिन्हित एव विकसित कर उनका विपणन करेगी 33तथा राज्य की कलात्मक एवं सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखेगी। नए एवं विद्यमान पर्यटन स्थल एवं नागरिक अवस्थापना का विस्तार एवं निजी क्षेत्र की भागेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए प्रदेश सरकार पर्यटन परिवहन व्यवस्था का सुदृढीकरण एवं पर्यटन स्थल पर होटल के कमरों के अभाव की समस्या को दूर करने की मंशा रखती है। सरकार प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ विरासत स्थलों को संरक्षित करने का भी प्रयास करेगी | पर्यटन एवं होटल क्षेत्र में निवेश किए जाने पर विभिन्‍न वित्तीय एवं गैर वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएऐंगे। राज्य में Wega टूरिज्म' का विकास कर नागरिकों की अजीविका परिवर्तन तथा इस क्षेत्र के कार्यरत महिलाओं, युवाओं, समाज के विशेषाधिकारित, वंचित वर्ग एवं इस क्षेत्र के कार्यबल का अग्रे्तर कौशल विकास पर विशेष बल दिया जाएगा। इस रणनीति का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किए जाने हेतु प्रदेश सरकार प्रौद्योगिकी का इष्टत्म उपयोग करते हुए अपनी संस्थाओं को Yeo बनाएगी तथा एक सुरक्षित पर्यटन WTA के रूप में ब्रांड उत्तर प्रदेश स्थापित करने हेतु कदम उठाएगी | सिनेमा .9. फिल्म निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश को एक महत्वपूर्ण केन्द्र बनाने के लिए प्रदेश सरकार राज्य में फिल्‍म की शूटिंग की सुविधा के लिए एक सुखद माहौल बनाने एवं फिल्‍म निर्माण से सम्बंधित सभी गतिविधियों का विकास सुनिश्चित कराये जाने की मंशा रखती है| राज्य में स्टूडियो एवं प्रसंस्करण प्रयोगशालाओं की सहायता से शूटिंग एवं फिल्म निर्माण के लिए आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी। राज्य सरकार फिल्म शहरों की स्थापना करने एवं सहायक बुनियादी ढांचे के निर्माण में योगदान देगी । प्रदेश सरकार राज्य में सिनेमा घरों में अति आधुनिक प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की मंशा रखती है। प्रदेश सरकार विभिन्‍न राजकोषीय प्रोत्साहन के द्वारा मल्टीप्लेक्स को बढ़ावा S| बन्द या नुकसान में चल रहे सिनेमाघरों को प्राथमिकता के आधार पर पुनर्जीवित किया जाएगा। सरकार सिनेमा हॉल मालिकों द्वारा कैप्टिव पावर संयत्र जनरेटर की स्थापना को बढ़ावा देगी। इन Waal द्वारा उत्पन्न बिजली को बिजली शुल्क से छूट दी जाएगी । फिल्‍म उद्योग के विकास के लिए, प्रतिभाशाली कलाकारों va प्रशिक्षित तकनीशियनों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करना उचित है। इस उद्देश्य हेतु राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में फिल्‍म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना के लिए भारत सरकार के साथ समन्वय करेगी। राज्य में प्रशिक्षण संस्थान खोलने के लिए निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। फिल्मों / वीडियो फिल्‍मों / लघुवृतचित्र फिल्‍मों एवं क्षेत्रीय फिल्मों के निर्माण हेतु आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए सरकार एक फिल्‍म कोष बनाने का इरादा रखती है। व्यापार कर, मनोरंजन कर पर रियायत एवं कलाकारों को मजदूरी के 34.रूप में भुगतान की गई राशि पर सब्सिडी सहित फिल्‍म उद्योग के लिए अन्य वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे । एकल खिड़की क्लीयरेन्स एवं उत्पादन इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था हेतु विभिन्‍न प्रशासनिक सुविधाये भी प्रदान की जाएगी । फिल्म ay एक ही छत के नीचे सभी फिल्‍म निर्माण सम्बंधी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी | स्थायी एवं समावेशी विकास - स्वच्छ विकास एवं आर्थिक प्रगति का 2. संतुलित वितरण सुनिश्चित करना उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञात है कि राज्य की अर्थव्यवस्था का विस्तार ही इसका एकमात्र उद्देश्य नहीं हो सकता। यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होगा कि जिम्मेदार एवं स्थायी विकास समाज के सबसे कमजोर लोगों तक पहुंचे एवं उन क्षेत्रों में हो जहाँ वे रहते हैं। सभी से विकास में भागीदारी की इस उद्देश्य को प्राप्त करने करने के लिए, यह नीति निम्नलिखित रणनीतियों को अपनाने का विचार रखती है — 2. स्थायी विकास उत्तर प्रदेश सरकार स्थायी विकास के सिद्धांत के साथ पूरी तरह सहमत है एवं एक स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करने की अपने उत्तरदायित्व के बारे में सचेत है। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि औद्योगीकरण के हानिकारक प्रभाव को कम करे एवं पर्यावरण में सकारात्मक योगदान को बेहतर बनाए । इसके सन्दर्भ में, यह नीति, अपशिष्ट उपचार Waal एवं वर्षा जल संचयन की स्थापना को प्रोत्साहित करने का विचार रखती है। औद्योगिक विकास प्राधिकरण अपने औद्योगिक एस्टेट्स / पार्का / क्षेत्रों में कॉमन अपशिष्ट उपचार संयंत्रों को स्थापित करने का प्रयास करेगा। इसके अतिरिक्त, सरकार उद्योगों के पर्यावरण मानकों के अनुपालन के साथ वायु एवं जल प्रदूषण को कम करने वाली प्रौद्योगिकियों को अपनाने की प्रक्रिया को सुगम बनाएगी | यह नीति पर्यावरण मानकों के साथ अधिक अनुपालन प्रोत्साहित करने एवं वायु एवं जल प्रदूषण को कम करके पर्यावरण में सकारात्मक योगदान को बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन प्रदान करना चाहती है, जोकि निम्नवत्‌ है:- 42.4. चुर उपचार संयंत्र (इफ्लुएण्ट ट्रीटमेण्ट youve) एवं वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करना | 42..2 ग्रीन इण्डस्ट्रियल एस्टेट के विकास के लिए आवश्यकता आधारित वित्तीय सहायता | 42..3 रसायन आधारित इकाइयों को आवासीय क्षेत्र से औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यकता आधारित वित्तीय सहायता | संतुलित क्षेत्रीय विकास 2.2 सक्षम बनाने वाली अवस्थापना की अनुपलब्धता, विकास Hal, क्षेत्रीय कारकों एवं अन्य विभिन्‍न कारकों की कमी के कारण राज्य में विशेष रूप से बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल क्षेत्रों में असंतुलित विकास हुआ है। यह नीति, बुंदेलखंड, पूर्वांचल, 35मध्यांचल Vd पश्चिमांचल में लिंकेज, वित्तीय प्रोत्साहन को सुगम बनाकर एवं क्षेत्रीय अवसरों का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश में संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर देती है। सरकार, इन क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं पहुंच तथा कौशल विकास कार्यक्रमों को सुधारने, सड़क के बुनियादी ढांचों एवं बिजली कनेक्टिविटी को विकसित करने और इन क्षेत्रों में विभिन्‍न स्तरों पर सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने का प्रयास करेगी। साथ ही इन क्षेत्रों में नए औद्योगिक पार्क एवं क्षेत्र भी बनाये जाएंगे | सरकार को यह भी ज्ञात है कि राज्य में जिला स्तर पर कुछ क्षेत्र हैं जहाँ पर किसी भी प्रमुख औद्योगिक गतिविधि का अभाव है। इन क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने तथा प्रारम्भ करने के लिए यह नीति कोई भी प्रमुख उद्योग न होने वाले जिलों में निवेश को प्रोत्साहित करने का विचार रखती है। अनुसूचित जाति 2.3 2.4 ,/ जनजाति / महिला ,/ दिव्यांग उद्यमियों को बढ़ावा राज्य सरकार, इस नीति के तहत, अनुसूचित जाति / जनजाति / महिला / दिव्यांगों की न्यूनतम 75% स्वामित्व वाली औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित उपादान प्रदान करके अतिरिक्त लाभ देगी — 2.3.. ‘cro ड्यूटी पर 20 प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जायेगी जिसकी अधिकतम सीमा t00 प्रतिशत होगी | 2.3.2 ita ब्याज की 2.5 प्रतिशत की दर से प्रतिपूर्ति प्रदान की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 7.5 प्रतिशत होगी | 2.3.3 इन्फ्रास्ट्रक्चर ब्याज की 25 प्रतिशत की दर से प्रतिपूर्ति प्रदान की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 7.5 प्रतिशत होगी | 2.3.4 ईपीएफ की io प्रतिशत की दर से प्रतिपूर्ति प्रदान की जायेगी जिसकी अधिकतम सीमा 70 प्रतिशत होगी | अनुसूचित जाति / जनजाति / area / दिव्यांग / बीपीएल श्रमिकों के रोजगार को प्रोत्साहन 2.4. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 400 से अधिक श्रमिकों अथवा बुंदेलखंड, पूर्वांचल एवं मध्यांचल में 200 से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान कर रहीं औद्योगिक इकाइयों को नेट dey Mead / जीएसटी के तहत राज्य की हिस्सेदारी के रूप में राज्यों के खाते में जमा नेट वैट / सीएसटी / राशि के योग की (io प्रतिशत) अतिरिक्त प्रतिपूर्ति प्रत्येक प्रकरण में करायी जायेंगी- (अ) जिनमें कुल श्रमिक संख्या में न्यूनतम 25 प्रतिशत श्रमिक गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से हो। (ब) जिनमें न्यूनतम 40 प्रतिशत महिला श्रमिक हों | 36(स) जिनमें कुल श्रमिक संख्या में न्यूनतम 25 प्रतिशत श्रमिक, अनुसूचित जाति 3. 4. / अनुसूचित जनजाति वर्ग के हों | 2.4.2 दिव्यांग श्रमिकों को रोजगार देने वाली इकाइयों को ऐसे श्रमिकों हेतु रू0 500 /- प्रतिमाह प्रति श्रमिक की दर से पे-रोल सहायता मिलेगी | निवेश का प्रोत्साहन एवं'ब्रांड उत्तर प्रदेश' का विपणन उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 20i7 के सफल होने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश की एक 'सुरक्षित, अभिरक्षित, भ्रष्टाचार मुक्त, उद्योग अनुकूल- सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य' की छवि बनाने की एक व्यापक रणनीति के साथ-साथ निवेश प्रोत्साहन के एक पूरक ढांचा भी आवश्यक है| इसके लिए, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) राज्य में निवेश प्रोत्साहन गतिविधियों को संस्थागत बना देगी। संभावित निवेशकों तक पहुंचने एवं विभिन्‍न चैनलों के माध्यम से राज्य में निवेश के अवसरों का संचार करने के लिए एक लक्षित दृष्टिकोण लिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार विभिन्‍न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Fal, कार्यक्रमों एवं सम्मेलनों में प्रतिभाग करेगीएवंइस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन भी करेगी |इन कार्यक्रमों में उत्तर प्रदेश सरकार बी-2-जी वार्तालापएवं प्रदेश की क्षेत्रीय शक्तियों एवं अनुकूल नीतिगत ढांचे को प्रदर्शित करने के लिए एक आदर्श मंच के रूप में कार्य करेगी | उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआईएस) आयोजित की जाएगी | उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के प्रत्येक जिले के स्तर पर स्थानीय स्तर के विशेष व्यवसायों जैसे कि बुलंदशहर के मिट्टी के बर्तन, मेरठ के खेलकूद के सामान, फिरोजाबाद के कांच के काम, अलीगढ़ के ताले, रामपुर के चाकू, मुरादाबाद के पीतल के काम, संभल का पुदीना, बरेली के फर्नीचर, कन्नौज के इत्र, आगरा के जूते एवं पेठा, कानपुर के चमड़े का काम, भदोही के कालीन, वाराणसी की साड़ियाँ, बलरामपुर की चीनी, मुजफ्फरनगर की गुड़ एवं लखनऊ के चिकनकारी के काम आदि के प्रचार पर पर्याप्त जोर दिया जाएगा। घरेलू एवं वैश्विक परिवेश - qe कारकों से लाभ प्राप्त करना एवं उनके प्रति अनुक्रियाशीलता आज दुनिया अत्यधिक अप्रत्याशित एवं गतिशील है। विभिन्‍न व्यवधान, प्रतियोगिताओं एवं बदलती वरीयताओं से राज्य पर सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह नीति इन परिस्थितियों से लाभ प्राप्त करनेतथा साथ ही साथ उनके प्रति उत्तरदायी होने के लिए रूपरेखा तैयार करने का विचार रखती है। 44..वाह्य कारकों से लाभ सरकार अपनी प्राथमिकताओं को पंक्तिबद्ध करेगी एवं राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय रुझानों वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी । सरकार, भारत सरकार द्वारा किए गए विभिन्‍न द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के लाभों को अधिकतम करने का प्रयास करेगी । यह, राज्य के औद्योगिक एवं आर्थिक अवस्थापना के विकास एवं 37उन्नयन के लिए भारत सरकार की निधियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेगा | 44.2.बदलते परिवेश के प्रति अनुक्रियाशीलता राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि औद्योगिक नीति का क्रियान्वयनएवं उसके निर्धारित उद्देश्य पूरे हो। बार-बार एवं उचित प्रतिक्रिया की निरंतर आवश्यकता वाली विश्व अर्थव्यवस्था की बढ़ते हुए गतिशील स्वभाव को पहचानते हुए, एक कोर्स करेक्शन मैकेनिजम उपलब्ध कराया जाएगा। नीति में प्रतिक्रिया प्रणाली तैयार करने की परिकल्पना की गई है जिसमें नीति पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए उद्योगों, औद्योगिक निकायों एवं अन्य हित-धारकों से प्राप्त सुझावों पर निरंतर प्रतिक्रिया एवं विचार किया जायेगा | नोट-इस नीति में उल्लिखित एम.एस.एम.ई. एवं अन्य विभागीय नीतियां सरकार की मंशा का संक्षिप्त विवरण है। विस्तृत नीतियों को सम्बंधित शासकीय विभागों द्वारा पृथक से उपलब्ध कराया जाएगा | 38

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