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है
ee प्रदेश शासन
औद्योगिक विकास अनुभाग-८
. संख्या: 6८५4 /77-6-8-एल.सी. 478
लखनऊ : दिनांक 27 फरवरी, 2078
| अधिसूचना
भारत का संविधान के = 62 के अन्तर्गत कार्यपालिका शक्तियों का .
' प्रयोग 'करते हुए श्री. राज्यपाल “उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स
“ifq-20I8” प्रख्यापित करने कीं सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है।
संख्या: £ ५०. () /77-6-8-एल.सी.
fl
आलोक़ सिन्हा
अपर मुख्य सचिव
4/20:8 तद्दिनांक
BRR निम्नलिखित को सूचनार्थ wd आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः-
महालेखाकार, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद |
()
मुख्य सचिव /अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उ.प्र: |
(3) समस्त अपर मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव /सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
(4) समस्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, उत्तर
' प्रदेश। न
समस्त मण्डलायुक्त /जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश |
(5)
प्रबन्ध निदेशक, पिकप/ उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम
(6)
अधिशासी निदेशक, उद्योग sy, 2-, माल wey, लखनऊ को इस
_).
' ' « अनुरोध के साथ प्रेषित कि कृपया प्रश्ननत संशोधन उद्योग बन्धु की
. वेब-साइट पर आज ही अपलोड कराते हुए 50 प्रतियां शासन को
उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर।
(8)
निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद |
(9)
(il) गार्ड पत्रावली |न ° |
उत्तर प्रदेश वेअरहाउसिंग sa लेजिस्टिक्स AR 2078
T. प्रस्तावना
नवीन प्रोद्यौगिकी, उपभोक्ताओं की नई अपेक्षाओं एवं व्यवसाय के नवीन went (मॉडल्स) के उदय
के साथ ही लॉजिस्टिक्स उद्योग विश्व-स्तर पर त्वरित गति से प्रगति कर रहा है। राजस्व के सन्दर्भ
में इस उद्योग में 205 से 2024 तक 7.5 प्रतिशत की दर से सी.ए.जी.आर. (कम्पाउण्ड एनुअल
ग्रोथ रेट) में वृद्धि की सम्भावना है aA इण्टरनेशनल रिपोर्ट, 2076)) एशिया पैसिफिक क्षेत्र
विश्व में सबसे बड़ा एवं ga गति से वृद्धिमान बाजार है, जिसमें भारतवर्ष सबसे अधिक
सम्भावनाओं वाले बाजारों में से एक है।
भारत की लॉजिस्टिक्स परफॉरमेंन्स इन्डेक्स रैकिंग में तेजी से सुधार हो रहा है तथा वर्ष 2076 में
]9 स्थानों के सुधार के साथ 35वें स्थान पर पहुँच गयी है (विश्व बैंक)। वर्ष 206 से 2020 के
मध्य इस उद्योग में 5-20 प्रतिशत् सी.ए.जी.आर.की वृद्धि की सम्भावना है (सीएआरई रेटिंग्स
2076) तथा आशा है कि वर्ष 2079 तक भारतीय लॉजिस्टिक्स उद्योग 6.73,000 करोड़ तक पहुँच
.. जाएगा।
भारत में कूल माल परिवहन का लगभग 60 प्रतिशत सड़क-मार्ग a होता है, जबकि रेल एवं तटीय
SERRE -ज़ल Art का अंश क्रमशः प्रतिशत 32 प्रतिशत एवं 7प्रतिशितू है। आन्तरिक जलमार्ग तथा
हवाई-मार्ग, प्रत्येक का अंश 7 प्रतिशत से भी कम है, जिससे राष्ट्रीय जलमार्ग कार्यक्रम निशनल
वॉटरवेज प्रोग्राम) तथा उड्डयन क्षेत्र में क्षेत्रीय कनेक्टीविटी योजना (रीजनल कनेक्टीविटी स्कीम) के
विकास के साथ इस क्षेत्र के व्यापक विस्तार का महत्व परिलक्षित होता है। |
हाल ही में समस्त लॉजिस्टिक्स सेवाओं हेतु i00 mag प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ्.डी.आई.) को
स्वतःमार्ग (ऑटोमेटिक रूट) के अन्तर्गत स्वीकृति प्रदान की गयी है (हवाई-कार्गों एवं कूरियर के
अतिरिक्त, जिसमें 74 प्रतिशत् एफ.डी.आई: अनुमन्य है)। इसके अतिरिक्त वस्तु एवं सेवा कर
(जीएसटी) के लायू हो जाने से लॉजिस्टिक्स उद्योग की कुल लागत के और कम होने का अनुमान
है। पूर्व में भिन्न-भिन्न कर-श्रेणियों के कारण कम्पनियों को प्रत्येक राज्य में वेअरहाउसेज़ स्थापित
करने पड़ते थे। किन्तु वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के कारण अब छोटे-छोटे कई वेअरहाउसेज़ के
स्थान पर कम्पनियाँ व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों .पर बड़े-बड़े वेअरहाउसेज़ स्थापित कर
सकेंगी | इसके अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अब देश में बुनियादी eta (अवस्थापकीय सुविधा) के
रूप में मान्यता प्रदान कर दी गयी है। व व
भारत सरकार के “मेक इन इण्डिया' कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उद्योग
तथा सम्बन्धित अवस्थापना सुविधाओं में निवेश हेतु अनुकूल पारिस्थिकी तंत्र के निर्माण के लिए
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2077 एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीतिreemesescera -207 घोषित की हैं। उत्तर प्रदेश वेअरहाउसिंग॑ तथा लॉजिस्टिक्स नीति 20I8 का लक्ष्य उत्तर प्रदेश,
.. औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2077 की पूरक के रूप में राज्य में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र
को सुदृढ़ करना है। न
2. उत्तर प्रदेश-लाभ के अवसर |
उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य तथा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। देश के शीर्ष.
के पाँच विनिर्माण (मिन्यूफक्चरिंग) प्रदेशों में से एक, उत्तर प्रदेश में सूक्ष, लघु एवं मध्यम उचमों न
(संगठित व असंगठित) की देश में दूसरी सर्वाधिक संख्या है। विगत 5 वर्षों (2072-77) में प्रदेश से. )
Patt में सी.ए.जी.आर. में 73.26 प्रतिशत् की दर से वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश में 20 करोड़ से न
अधिक जनसंख्या वाला सबसे बड़ा उपभोक्ता आधार है, इसलिये लॉजिस्टिक्स उद्योग के विकास हेतु
प्रदेश में प्रचुर संभावनाएं है। ं
2. उच्च-स्तरीय अवस्थापना सुविधाएं
रणनीतिक रूप में स्वर्णिम चतुष्कोण (गोल्डन क्वाड़िलेटरल) पर स्थित तथा 8,949 किलोमीटर में
फैले हुए सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क के साथ, उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक उद्योग के विस्तार हेतु
आवश्यक वातावरण तैयार है। देश के प्रमुख राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों से जुड़ा
होना प्रदेश को बाजार तक पहुंच का सामरिक लाभ प्रदान करता है। प्रमुख राष्ट्रीय एवं
अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर और वाराणसी में स्थित हैं।
.. लखनऊ, कानपुर, मेरठ तथा वाराणसी में स्थापित होने वाली मल्टी-सिटी मेट्रो रेल
परियोजनाएं तथा जेवर एवं कुशीनगर में बनने वाले अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे प्रदेश में न
कनेक्टीविटी के लाभ की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर रहे हैं। राष्ट्रीय ae
(इलाहाबाद-हल्दिया अन्तरदेशीय जलमार्ग) परियोजना से पूर्वी उत्तर प्रदेश में निर्यातक केन्द्रों
(एक्सपोर्टिंग हब्स) को लाभ मिलने की सम्भावना है। दीर्घकालिक योजना के अन्तर्गत उत्तर
' प्रदेश सरकार वायु, जल एवं रेल कनेक्टीविटी सुविधाओं के नेटवर्क, का सृजन करेगी, जिससे
राज्य की उद्योग एवं मैन्यूफैकचरिंग इकाइयों को परिवहन के विभिन्न माध्यमों से अपने उत्पादों
को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने हेतु उत्कृष्ट व सुचारू सुविधाएं सुलभ हो
a |
2.2 प्रमुख we कॉरीडोर्स तथा औद्योगिक कॉरीडोर्स .
उल्लेखनीय है कि देश में विकसित किए जा रहे दो औद्योगिक तथा we कॉरीडोर्स -
दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियिल कॉरीडोर (डी.एम.आई.सी.)-वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर
(डब्ल्यू.डी .एफ.सी.] तथा अमृतसर-कोलकता इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर (ए.के.आई.सी.)-ईस्टर्न
डेडिकेटेड He कॉरीडोर (ई.डी.एफ.सी.) के बड़े भाग उत्तर प्रदेश में हैं।वेस्टर्न डेडिकेटेड we कॉरीडोर (डब्त्यू-डी.एफ.सी.) एवं दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल
ater (डी.एम.आई.सी.): गाजियाबाद में दादरी से मुम्बई में जवाहरलाल नेहरू
TIS तक विकसित हो रहे डब्ल्यू.डी.एफ.सी. से बन्दरगाह तक परिवहन-समय
में कमी होगी, जिससे राज्य में आर्थिक गतिविधि को गति मिलेगी । उत्तर प्रदेश के 72
जनपदों में 36,000 वर्ग किमी. का विस्तृत क्षेत्र डी.एम.आई.सी. परियोजना से
आच्छादित है। इस परियोजना का अधिकतम लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से उत्तर
प्रदेश सरकार ग्रेटर नोएडा में इंटीग्रेटेड इण्डस्ट्रियल टाउनशिप, दादरी में मल्टी-मोडल
' लॉजिस्टिक्स हब तथा बोडाकी में मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब जैसी परियोजनाओं के
विकास में पूर्ण सहयोग कर रही है। इस कॉरीडोर के विकसित हो जाने के पश्चात
मेरठ एवं मुजफ्फरनगर जैसे नये औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हो सकेगा।
ged डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ई.डी.एफ.सी.) एवं अमृतसर-कोलकता इण्डस्ट्रियल
कॉरीडोर (ए.के.आई.सी.): उत्तर प्रदेश में ई.डी.एफ.सी. परियोजना का 57 प्रतिशत
आच्छादित क्षेत्र है जो पूर्वी क्षेत्र को पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार
पूर्व से ही इस कॉरीडोर के संरेखण के पर इंटीग्रेटेड इण्डस्ट्रििल टाउनशिप्स,
इंटीग्रेटेड मैन्यूफक्चरिंग क्लस्टर्स तथा लॉजिस्टिक्स हब्स के विकास को प्रोत्साहित कर
रही है। इसके अतिरिक्त कॉरीडोर के किनारे औद्योगिक परिक्षेत्रों के विकास हेतु
राज्य सरकार ग्रीनफील्ड रेलवे स्टेशनों तथा परिक्षेत्रों को भी चिन्हित कर रही है, .
जहाँ सम्बन्धित लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा सकेगा।
राज्य सरकार की ged डेडिकेटेड we कॉरीडोर के सरेखण से ae क्षेत्रों में
माल-प्रेषण उद्योगों Ge कॉन्साइनिंग इण्डस्ट्रीज) के बाज़ार को विस्तारित की योजना
है। न
प्रमुख लॉजिस्टिक्स तथा निवेश परिक्षेत्र
उत्तर प्रदेश में विद्यमान लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं में, मुरादाबाद में रेल से |
जुड़े संयुक्त घरेलू एवं wae (निर्यात-आयात) टर्मिनल, कानपुर में रेल से जुड़े
प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल तथा अन्तरदेशीय कन्टेनर डिपो (इन्लैण्ड कन्टेनर डिपो-आई.सी.
डी.) तथा दादरी टर्मिनल स्थित आई.सी.डी. व कानपुर आई.सी.डी. सम्मिलित है।
इसके अतिरिक्त प्रदेश में नोएडा, बोराकी तथा वाराणसी में भी तीन मल्टी-मोडल
लॉजिस्टिक्स ८ ट्रॉसपोर्ट हब प्रस्तावित हैं। .
प्रदेश में पूर्व से स्थित तथा विकसित किए जा रहे इन समस्त सड़क एवं रेल
dat at उपलब्धता के दृष्टिगतू विभिन्न निवेश परिक्षेत्रों तथा लॉजिस्टिक्स हब्स का
विकास अत्यन्त महत्वपूर्ण है, जिससे इन अवस्थापना सुविधाओं का अधिकतम लाभलि 8... किया. जा. सके। डी:एम.आई.सी. तथा ई.डी.एफ.सी. परियोजनाओं
सेआच्छादित क्षेत्रों (कैचमेट एरिया) से सटे क्षेत्रों के अतिरिक्त राज्य में कई अन्य
स्थानों पर भी लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा सकता है।
इसमें दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पास मेरठ में तथा प्रस्तावित भाउपुर औद्योगिक क्षेत्र
के निकट लेजिस्टिक्स हब सम्मिलित हैं। इसी प्रकार 3,000 satay से अधिक के
क्षेत्रफल में प्रस्तावित मुगलसराय-वाराणसी-मिर्जापुर निवेश परिक्षेत्र (इन्वेस्टमेण्ट जोन)
के निकट पूर्वान््वल एक्सप्रेसवे के पास आजमगढ़ इस प्रयोजन हेतु एक उपयुक्त स्थान
है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से सटे 5567 Vata क्षेत्र में प्रस्तावित झाँसी राष्ट्रीय
निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र (एनआईएमजेड) एक अन्य ऐसा स्थान है, जो उत्तर
भारतीय राज्यों के लिये दक्षिण भारत के राज्यों तक पहुँचने का प्रवेशद्वार है। इसके
अतिरिक्त, हल्दिया बंदरगाह की ओर जाने के लिये विकसित किये जाने वाले
अन्तर्देशीय जलमार्ग (इनलैण्ड वाटरवे) के .साथ सटे हुये क्षेत्र में इलाहाबाद भी
लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने के लिये अत्यन्त आकर्षक स्थानों में से एक है।
3. नीति-विषय
उत्तर प्रदेश सरकार का विश्वास है कि राज्य में स्थाई व wag औद्योगिक विकास के लक्ष्य को
प्राप्त करने हेतु वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का विकास अत्यन्त
महत्वपूर्ण है। घरेलू एवं निर्यात बाजार में राज्य में निर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में
वृद्धि हेतु एक जीवंत वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र होना आवश्यक है। इस क्षेत्र के विकास
से राज्य में न केवल विनिर्माण एवं रोज़गार सृजन को प्रोत्साहन मिलेगा, अपितु प्रदेश के सकल
घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में भी वृद्धि होगी। उपरोक्त विकासकारक तथ्यों के आलोक में उत्तर
प्रदेश सरकार ने राज्य की सामरिक भौगोलिक स्थिति का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु
अधिकतम लाभ उठाने के आशय से इस “वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति” को प्रख्यापित
करने का निर्णय लिया है।
औद्योगिकरण की त्वरित गति प्रदेश में और अधिक परिष्कृत लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चवर की
एक बड़ी मांग सृजित कर रही है। जीएसटी लागू होने के कारण भारत एक एकीकृत बाजार
बन गया है, तथा उत्तर प्रदेश में देश के मैन्युफैक्चरिंग एवं वेअरहाउसिंग हब के रूप में उभरने
की असीम सम्भानाएं हैं। राज्य में स्टेट वेअरहाउस कारपोरेशन के अन्तर्गत विद्यमान बड़ी
संख्या में वेअरहाउसेज़, नेशनल sider मिशन के अन्तर्गत शीतगृह, राष्ट्रीय कृषि एवं
ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अधीन ग्रामीण भण्डारण गृह आदि की उपस्थिति में विशाल
भण्डारण क्षमता Sl वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में 77.84 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले लगभग
74 वेअरहाउसेज हैं। तथापि यह क्षमता बढ़ती हुई भण्डारण आवश्यकताओं के लिये पर्याप्त
नहीं है। इसलिये प्रदेश की भण्डारण क्षमता को विस्तारित किये जाने पर बल दिया जा रहा है।। पिनणनपणनण इस नीति के माध्यम से. राज्य सरकार का उद्देश्य निम्नलिखित श्रेणियों तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश
आकर्षित करना है- व
e वेअरहाउसिंग, साइलोज़, शीतगृह तथा संबंधित aa
© ई-कॉमर्स हब
०. रियल टाइम लॉजिस्टिक्स में तकनीकी समाधान, सप्लाई चेन प्रबन्धन तथा प्रोसेस इम्प्रूवमेंट
० देअरहांउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रोबोटिक्स तथा स्वचालन(ऑटोमेशन)
© कौशल विकास एवं प्रशिक्षण
यह नीति, प्रदेश की औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति- 2077 के विज़न और उदुदेश्य |
को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगामी 5 वर्षों में प्रदेश में लॉजिस्टिक उद्योग के विकास हेतु दिशा
प्रदान करती है।
3.. नीति के उद्देश्य
० फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड fetta के साथ प्रदेश में लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की.
स्थापना हेतु निजी निवेश को बढ़ावा देना |
e आर्थिक गतिविधियों तथा geq स्तर पर रोज़गार प्रोत्साहन हेतु विद्यमान
वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण तथा सुधार।
© प्रदेश की भण्डारण क्षमता में वृद्धि करते हुये प्राइमरी एवं सेकेन्डरी aed के
हित को बढ़ावा देना। |
० ग्रीन एवं इनोवेटिव लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देते हुये प्रदेश में प्रतिस्पर्धी
लेजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करना।
3.2. परिभाषाएं
इस नीति के अन्तर्गत लॉजिस्टिक्स पार्क तथा अन्य लॉजिस्टिक्स इकाईयों पर लागू
होने वाले प्रोत्साहनों को निम्नवत परिभाषित किया गया है-
... afer पाक-
प्रदेश में न्यूनतम -50-एकड़ भूमि पर विकसित किये; जाने वाला लॉजिस्टिक्स
पार्क, जिसमें कटेनर फ्रेट स्टेशन (ACHE) .तथा/अथवा अन्तर्देशीय कन्टेनर
डिपो (आईसीडी)' तथा /अथवा, एयर -फ्रेट स्टेशन्स- तथा / अथवा वेअरहाउसेज़
तथा/अथवा कोल्ड चेन्स एवं संबंधित अवस्थापना सुविधाएं सम्मिलित हो,{ नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु पात्र होगा। इस प्रकार के
. पार्क में निम्न सेवायें एवं अवस्थापना सुविधाएं सम्मिलित होंगी-
० लॉजिस्टिक्स सेवायें- पार्क की अवाश्यकताओं के अनुसार anit
एग्रीगेशन /सेग्रीगेशन, वितरण, सामग्री एवं ae के इन्टर-मॉडिल
ट्रांसफर, चालू तथा बन्द भंडारण, कार्गों ट्रांसिट अवधि में भण्डारण
अनुकूल स्थिति, सामग्री प्रबन्धन उपकरण तथा व्यापार एवं व्यावसायिक
सुविधाएं एवं कॉमन सुविधाएं |
° सहायक अवस्थापना सुविधाएं-पाक॑ की ' अवाश्यकताओं के अनुसार
अवस्थापना सुविधाएं यथा- आन्तरिक सड़क मार्ग, संचार सुविधाएं, खुला
तथा हरित स्थान, जल आपूर्ति तंत्र (वाटर पाइप-लाइन्स), सीवेज एवं
sta प्रणाली, Setar सुविधाएं,विद्युत वितरण व्यवस्था की स्थापना,
फीडर,सौर ऊर्जा Wer इत्यादि। |
भारत सरकार द्वारा लॉजिस्टिक्स अवस्थापना के रूप में लॉजिस्टिक्स इकाइयों की
परिभाषा का अनुसरण करते हुए यह नीति निम्नलिखित मानदण्डों को पूर्ण करने
वाली लॉजिस्टिक्स इकाइयों को प्रोत्साहन प्रदान करेगी-
2 कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सी.एफ.एस.) अथवा अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो
crs | (आईसीडी),जिसमें न्यूनतम रु. so करोड़ का निवेश किया गया हो तथा
न्यूनतम क्षेत्रफल I0 एकड़ हो।। क्षेत्रफल i0 एकड़ हो।।
3... वेअरहाउसिंग सुविधा, जिसमें न्यूनतम रु. 25 करोड़ का निवेश किया गया हो
तथा न्यूनतम seri लाख वर्ग फीट हो। _ न
4, कोल्डचेन सुविधा, जिसमें न्यूनतम रु. 5 करोड़ का. निवेश किया गया हो
तथा न्यूनतम क्षेत्रफल 20,000 वर्ग फीट हो।
3.3. नीति का क्रियान्वयन
०". यह नीति अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी तथा 05 वर्षों at अवधि तक
लायू रहेगी | | :
o किसी भी चरण पर, यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे नीति में संशोधन
अथवा नीति के अधिक्रमण की आवश्यकता होती है, तो ऐसे संशोधन /
अतिकमण को अनुमोदित करने हेतु मा. मंत्रि परिषद ही अधिकृत होगी।०. यदि इस नीति में कोई संशोधन किया जाता है, तो भी राज्य सरकार द्वारा इकाई
को पूर्व में किसी प्रोत्साहन पैकेज का वचन दिए जाने पर, उसे वापस नहीं लिया
जायेगा एवं इकाई को लाभ मिलते रहेंगे।
4. नीति संरचना (फ्रेमवर्क)
4. लेजिस्टिक्स क्षेत्र को अवस्थापना के रूप में मान्यता-इस क्षेत्र के महत्व के दृष्टिगतू
भारत सरकार ने पुनःनामित “ट्रांसपोर्ट एवं. लॉजिस्टिक्स' श्रेणी के अन्तर्गत
“लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर” को नए मद के रूप में सम्मिलित किया है। इसके -
अन्तर्गत मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, जिसमें इस नीति के अधीन परिभाषित
areata कन्टेनर डिपो (आईसीडी), कोल्ड चेन सुविधा तथा वेअरहाउसिंग सुविधा
को अवस्थापना के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इससे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को
आसान शर्तों तथा बढ़ी हुई सीमा के अनुसार अवस्थापना ऋण उपलब्ध हो सकेगा, -
वाहूय वाणिज्यिक ऋण (एक्सटर्नल कॉमर्शियल बौरोइंग- ई.सी.बी.) के रूप में अधिक
धनराशि, बीमा कम्पनियों से दीर्घकालिक वित्त पोषण एवं teary निधि प्राप्त हो सकेगी
तथा यह क्षेत्र इण्डिया इन्फ्रास्ट्रक्चर wet कम्पनी लि. (आई.आई.एफ.सी.एल.)
से ऋण ले सकेगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नीति के माध्यम से लॉजिस्टिक्स उद्योग
के प्रोत्साहन हेतु भारत सरकारके विज़न को आगे बढ़ाएगी।
4.2 लेजिस्टिक्स क्षेत्र को उद्योग के रूप में मान्यता-भारत सरकार द्वारा “इन्फ्रास्ट्रक्वर
स्टेटस' हेतु निर्दिष्ट शर्तों को पूर्ण करने वाली वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों
को प्रदेश में “उद्योग” की.
4.3
4.4
दर्जा भी प्रदान किया जाएगा। यद्यपि वेअरहाउसिंग के लिए
भूमि आवंटन हेतु विकास प्राधिकरणों द्वारा पात्रता शर्तें एवं दर निर्धारित की जाएंगी।
विकास प्राधिकरणों द्वारा वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों हेतु 60 प्रतिशतू तक
की ग्राउंण्ड कवरेज की अनुमति भी दी जाएगी।
लेजिस्टिक्स के विकास हेतु समर्पित एजेन्सी-राज्य सरकारकी अवस्थापना एवं
औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अन्तर्गत सचिव स्तर के अधिकारी
के नेतृत्व में | एक समर्पित लॉजिस्टिक्स प्रभाग(डिवीजन) lat स्थापना की योजना है।
यह प्रभाग प्रदेश में लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु विभिन्न
संबंधित विभागों, यथा-नागरिक veer, परिवहन, ऊर्जा, खादूय एवं कृषि तथा
अन्य सम्बन्धित विभागों के साथ बेहतर समन्वयन सुनिश्चित करेगा।
एक्जिम(निर्यात-आयात) art हेतु ग्रीन चैनल का विकास -प्रदेश में एक्जिम कार्गो
का परिवहन करने वाले वाहनों को होने वाले विलम्ब की रोकथाम के लिए (ट्रांजिट में
कम निरीक्षण वाले) ग्रीन dae चिन्हित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की समस्तa नाम
4.5
4.6
4.7
नगरों में व्यापक ट्रांसपोर्ट ज़ोन्स (ट्रासपोर्ट नगर) को विकसित करने की योजना
है, जिनमें प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग, weeds, निवेश क्षेत्रों तथा
stead कॉरिडोर्स के समीप ट्रक eter को विकसित किया जाना सम्मलित है।
इन व्यापक ट्रान्सपोर्ट ज़ोन्स तथा टर्मिनल्स में माल ढोने वाले वाहनों के लिए
कार्यशालाएं, भोजनालय, विश्राम-गृह इत्यादि कॉमन सुविधाएं उपलब्ध होंगी। |
निःशुल्क व्यापार एवं वेअरहाउसिंग परिक्षेत्र (फ्री ट्रेड एण्ड वेअरहाउसिंग जोन
-एफटीडब्लूजेड)-राज्य में Fata रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं के आयात व निर्यात के
सुचारू संचालन हेतु उत्तर प्रदेश सरकार अन्तर्देशीय कंटेनर डिपोज़, शुष्क बन्दरगाहों
(ड्राई Wea) तथा विद्यमान एवं विकसित किए जा रहे एक्सप्रेसवेज, wert एवं
फ्रेट कॉरीडोर्स के समीपवर्ती क्षेत्रों में एफटीडब्लूजेड्स की स्थापना का प्रयास करेगी।
इन परिक्षेत्रों में कस्टमाइज्ड वेअरहाउसिंग, शीतगृह, कार्यालय हेतु स्थान, परिवहन व
हैण्डलिंग सुविधाएं, यथा-स्वास्थ्य केन्द्र, भोजनालय आदि के साथ ही निर्यात-आयात .
हेतु एकल बिन्दु स्वीकृति व्यवस्था उपलब्ध होगी।
लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र (ज्ोन)-उत्तर भारत को देश के पूर्वी एवं पश्चिमी बन्दरगाहों से
जोड़ने वाले दो मुख्य फ्रेट कॉरीडोर्स - वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर तथा deed
डेडिकेटेड फ्रेट atten का जंक्शन दादरी में होने के कारण, राज्य सरकार इस क्षेत्र
को लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र के रूप में विकसित करने को विशेष महत्व देगी। इसी प्रकार
भाउपुर व नैनी को भी लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उत्तर
प्रदेश सरकार समय-समय पर इस प्रकार के लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्रों को चिन्हित व
घोषित करेगी।
इन परिक्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा बाधारहित कनेक्टिविटी, उत्कृष्ट सामाजिक एवं
भौतिक अवस्थापना सुविधाएं, 24/7 जलापूर्ति तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध
कराने की योजना है। इस नीति में परिभाषित लॉजिस्टिक्स पाकों को राज्य सरकार
tet परिधीय सम्पक अवस्थापना सुविधाओं, यथा- सड़क, जल, विद्युत आपूर्ति,
Sips, गैस तथा उत्वाह निष्कासन व्यवस्था को उपलब्ध कराने में सहायता करेगी।
लेजिस्टिक्स अवस्थापकीय आवश्यकताओं का निर्धारण - उपर्वर्णित तथा सम्बन्धित _
सुविधाओं सहितअतिरिक्त लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्रों, विशेषतः वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट
कॉरीडोर तथा geet डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर, विद्यमान एवं प्रस्तावित एक्सप्रेसवे
Sees आगरा-लखनऊ wed, yaar एक्सप्रेसवे aia), राष्ट्रीय
aerart-i(garerare-eieaa), Faas क्षेत्र (राष्ट्रीय 'राजमार्ग-44 पर झाँसी)
तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की आवश्यकताओं के आकलन हेतु राज्य सरकार
नियमित रूप से अध्ययन व सर्वेक्षण करवाएगी।अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) को प्रोत्साहन - वर्तमान में प्रदेश में दादरी,
4.8
आगरा, मिर्जापुर, मुरादाबाद, कानपुर आदि नगरों में प्रमुख आईसीडी हैं तथा नोएडा,
बोडाकी एवं वाराणसी में मुख्य मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स ट्रांसपोर्ट हब प्रस्तावित हैं ।
राज्य सरकार ऐसे उपयुक्त स्थानों में, जहाँ रोड Set, 4 लेन एवं 6 लेन
राजमार्गों का गुणवत्तापरक नेटवर्क, इण्टर-लिंकिग सड़कें उपलब्ध हों, ड्राई ada तथा
अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो को Yse करने पर बल देगी।
गुणवत्तापूर्ण भण्डारण सुविधाएं- प्रदेश में त्वरित गति से प्रगति कर रहे कृषि एवं
4.9
खाद्य तथा अन्य उद्योगों, जैसे फामस्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग आदि की
' आवश्यकताओ को पूर्ण करने के लिए राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण भण्डारण सुविधाओं,
'. विशेषकर ग्रामीण इलाकों में area भंडारण की सुविधाओं, के विकास को बढ़ावा
देगी। भंडारण सुविधाओं 7 वेअरहाउसेज, agit तथा शीतगृह एवं सम्बन्धित
अवस्थापना सुविधाएं सम्मिलित हैं। प्रदेश में निजी संस्थाओं को उपयुक्त स्थानों पर
इन सुविधाओं के विकास किये जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा तथा मौजूदा
भण्डारण सुविधाओं में निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार सुधार किया जाएगा।
सार्वजनिक निजी सहभागिता (पब्लिक प्रावेट पार्टनरशिप) को प्रोत्साहन -राज्य
4.0
सरकार प्रदेश में आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के सृजन हेतु सार्वजनिक निजी
सहभागिता को प्रोत्साहित करेगी।
नवाचार एवं प्रज्ञ(इन्टेलीजेन्ट) लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन-दक्षता संवर्धन करने वाली
4.
प्रणालियों तक पहुंच को उपलब्ध कराने एवं आधुनिक प्रोद्यौगिकी को अंगीकृत करने
में सक्षम बनाने हेतु राज्य सरकार बेहतर यंत्रों, यथा-बड़े एवं सुविधायुक्त ट्रक, उच्च
भार क्षमता वाले रेलवे वैगन इत्यादि की अधिप्राप्ति को प्रोत्साहित करेगी। राज्य
सरकार इण्टर-मोडल ट्रांसपोर्ट तथा लॉजिस्टिक्स हब्स में कन्टेनर्स, पैलेट्रस, Say
इत्यादि के मानकीकृत aera (लेआउटोके विकास को भी बढ़ावा देगी। राज्य में
कम लागत से उत्तम गुणवत्ता की इन्टर-लिकिंग सड़कों जैसी सहायक अवस्थापना
सुविधाओं के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी। इसके अतिरिक्त इस संदर्भ में इस
नीति का उद्देश्य सप्लाई चेन में डिज़ीटाइजशन तकनीकों, नवाचार तथा ऑटोमेशन
को बढ़ावा देना है।
ग्रीन लेजिस्टिक्स को प्रोत्साहन-राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश में एक
4,72
पर्यावरण-अनुकूल तथा टिकाऊ लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन व्यवस्था का सुजन करना
है। ग्रीन लॉजिस्टिक्स ऐसी तकनीकें हैं, जिनका उद्ेदश्य लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के
पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल परिवहन, कार्बन .
उत्सर्जन को PT करने, ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन, साइंटिफिकडिस्पोजुल तकनीक,बायो-डिग्रेडेबल वस्तुओं का उपयोग, रिसाइक्लिंग तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा आदि .
को अपनाया जाना शामिल हैं। इस प्रकार ग्रीन लॉजिस्टिक्स को इस नीति के अन्तर्गत
प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस संदर्भ में इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड
वाहनों के उपयोग को मल्टी-मोडल टासपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स पाकों में बढ़ावा दिया
जाएगा।
सौर-ऊर्जायुक्त लॉजिस्टिक्स पार्क को प्रोत्साहन - स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता के
दृष्टिगत्राज्य सरकार लॉजिस्टिक्स पार्क के विकासकर्ताओं को ऊर्जा के नवीन एवं
नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करेगी।
4. 4 लेजिस्टिक्स कौशल विकास- लॉजिस्टिक्स उद्योग में विस्तार के परिणामस्वरूप
वेअरहाउस प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स प्रबंधन, भारी-वाहन चालकों आदि जैसे कुशल
कर्मियों की मांग बढ़ रही है। इसलिए राज्य सरकार प्रदेश में क्षेत्र-विशेष पाठ्यक्रमों
को प्रारम्भ करेगी तथा उद्योग की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण के वर्तमान बुनियादी
ढांचे के उन्नयन पर विशेष बल देगी।
5. निजी लेजिस्टिक्स पाक हेतु प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश सरकार 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित किये गये लॉजिस्टिक्स oat को
प्रोत्साहन प्रदान करेगी। इन creat को निम्नलिखित प्रोत्साहन दिये जाएंगे-
5. पूँजीगत ब्याज उपादान- सामंत्री हैण्डलिंग उपकरण, लोडिंग एवं अनलोडिंग aE एवं
मशीनरी के क्रय हेतु लिए गये ऋण TC
5.2
5.3
5.4
Su की दर aS वर्षों हेतु पूँजीगत
ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमारु
(2 करोड़ प्रतिवर्ष तथा G-0- करोड़. की. कुल अधिकतम सीमा तक पुूँजीगत ब्याज
cc
उपादान प्रदान किया जाएगा।
अवस्थापना ब्याज उपादान -अवस्थापना सुविधाओं के विकास, यथा- सड़कों, ड्रेनेज,
विद्युत वितरण लाइनों की स्थापना, सौर ऊर्जा Gace हेतु लिए गए ऋण पर प्रतिपूर्ति
के रूप में 5 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 5 प्रतिशतू तक, अधिकतम रुं.2 करोड़ प्रतिवर्ष
तथा रु. 0 करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक अवस्थापना ब्याज उपादान प्रदान
किया जाएगा।
स्टॉम्प डूयूटी से छूट-लेजिस्टिक्स पार्क के विकासकर्ता द्वारा भूमि क्रय करने पर
स्टॉम्प ड्यूटी पर 00 प्रतिशत छूट /प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी।
इलेक्ट्रिसिटी डूयूटी से छूट-लॉजिस्टिक्स पार्क के विकासकर्ता को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से
0 वर्ष की अवधि हेतु i00 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।5.6 भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क-विकासकर्ता को
5.7
5.8
5.9
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क TSO. प्रतिशत
की-छूट प्रदान की जाएगी |
विकास शुल्क-पार्क-से-विकास शुल्क केवल विकास -प्राधिकरण-की महायोजना (मास्टर
प्लान) क्षेत्र में उपलब्ध. सुविधाओं के उपयोग पर लिया जाएगा, किसी भी सुविधा का
उपयोग न करने पर एक सांकेतिक (टोकन) धनराशि का भुगतान करना होगा।
कौशल विकास प्रोत्साहन-वेअरहाउस प्रबन्धन, लॉजिस्टिक्स प्रबन्धन आदि विषयों में
कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने पर विकासकर्ता को-वर्तमान-में राज्य सरकार द्वारा:
संचालित कौशल विकास. मिशन के अन्तर्गत कौशल /विंकास प्रोत्साहन की सुविधा
अनुमन्य होगी।
Mat (इन्टेलीजेन्ट) लेजिस्टिक्स हेतु प्रोत्साहन- मल्टी-मोडल ट्रान्सपोर्ट हब्स अथवा
लॉजिस्टिक्स get अथवा कंटेनर we स्टेशन/इनलैण्ड कंटेनर डिपो
(सीएसएफ /आईसीडी) में सामग्री हैंडलिंग, कार्गो परिवहन तथा ari ट्रेफिक की
डी-कन्जेस्टिंग हेतु स्वाचलित सप्लाई चेन प्रोचौगिकी स्थापित करने हेतु लिए गये ऋण .
पर 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की. दर से ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की
जायेगी, -जिसकी अधिकतम dhe. करोड़ प्रति पार्क होगा।
6. लेजिस्टिक्स इकाइयों हेतु प्रोत्साहन
इस नीति में परिभाषित लॉजिस्टिक्स इकाइयाँ निम्नलिखित प्रोत्साहनों की पात्र होंगी-
पूँजीगत ब्याज उपादान-सामग्री हैण्डलिंग उपकरण, लोडिंग एवं अनलोडिंग प्लान्ट एवं
6.]
मशीनरी के क्रय हेतु लिए गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्षों हेतु पूँजीगत
ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा रु
. 50 लाख प्रतिवर्ष प्रति इकाई होगी ।
6.2 अवस्थापना ब्याज उपादान-सड़क, जल-निकासी, विद्युत wea के निर्माण, सौर ऊर्जा
पैनल्स इत्यादि जैसे स्वयं के उपयोगार्थ बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु लिए गये
ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्षों हेतु अवस्थापना ब्याज उपादान के रूप में[ee
6.3
6.4
6.5
6.6
6 * 7
6.8
की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी प्रतिवर्ष अधिकतम सीमा Sats होगी तथा
कुल अधिकतम सीमा रु. 5 करोड़ होगी।
इलेक्ट्रसिटी डूयूटीसे छूट-सभी नई लॉजिस्टिक्स इकाइयों को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से
l0 वर्ष की अवधि हेतु i00 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी ।
wey डूयूटी में छूट- बुन्देलखण्ड एवं Yat क्षेत्र में t00 प्रतिशत, मध्यान्वल एवं
पश्चिमांचल (गौतमबुद नगर तथा गाजियाबाद को छोड़कर) क्षेत्र में 75 प्रतिशत तथा
WAGs नगर तथा गाजियाबाद जनपद में 50 प्रतिशत की दर से स्टाम्प शुल्क पर
छूट।
ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति सुविधा-सभी नई लॉजिस्टिक्स इकाइयाँ, जो i00 अथवा उससे
अधिक अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करती हैं, को Pata के अंश के
50 प्रतिशत की दर से तथा जो इकाइयाँ 200 कुशल एवं अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष
रोज़गार प्रदान करती हैं, उन्हें अतिरिक्त i0 प्रतिशत की दर से ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति
की सुविधा राज्य सरकार द्वारा केवल उन पाकों /इकाइयों को अनुमन्य होगी जो
भारत सरकार की नीति से आच्छादित नही होते हैं।
भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क-परिभाषित लॉजिस्टिक्स इकाइयों को भू-उपयोग परिवर्तन
शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी।
विकास शुल्क-विकासकर्ता को स्थल चयन ध्यानपूर्वक इस प्रकार करना होगा कि
प्रस्तावित स्थल के अधिकतम so मीटर दूरी के अन्दर आवश्यक समस्त ट्रंक
सुविधायें यथा-जलापूर्ति, जल-मल निस्तारण, सॉलिड वेस्ट डिस्पोज़ल, विद्युत आपूर्ति
तथा निर्धारित चौड़ाई की पक्की निर्मित सड़क पर्याप्त रूप से उपलब्ध हो। ऐसी
स्थिति में विकास कर्ता को योजना के सम्पूर्ण क्षेत्रफल पर area विकास शुल्क की
देयता-में-50-प्रतिशत--की-पूर्ण-छूट होगी। ,योजना के समस्त आंतरिक विकास कार्य
विकासकर्ता द्वारा अपनी लागत पर स्वयं क्रियान्वित किये जायेंगे। विकासकर्ता द्वारा
योजना के निवासियों के लिये जलापूर्ति, जल-मल निस्तारण, dfs वेस्ट fetta,
विद्युत आपूर्ति की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जायेगा।८इस- हेतु
प्रस्तावित स्थल, यदिं किसी _ भी ट्रंक अवस्थापना सुविधा से निर्धारित सीमा 50 मीटर
से “अधिक दूरी पर स्थित होने -की स्थिति में उक्त छूंट अनुमन्य नहीं होगी और
वेअरहाउसेज का गुणवत्ता प्रमाणन[|क्वालिटी सर्टिफिकेशन)- नीति में परिभाषित
इकाइयों को गुणवत्ता प्रमाणन की लागत की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी
अधिकतम सीमा 3.7.50 लाख होगी।कौशल विकास प्रोत्साहन-वेअरहाउस प्रबन्धन, लॉजिस्टिक्स प्रबन्धन आदि विषयों में
6.9
कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाली इकाइयों को अधिकतम 50 प्रशिक्षु प्रतिवर्ष के
अनुसार 06 माह तक B.r000 प्रतिमाह प्रति-प्रशिक्षु की प्रतिपूति 5 वर्षों तक प्रदान
की जायगी। न
नोट -
ग बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल क्षेत्रों तथा अधिसूचित लॉजिस्टिक्स cet में इस नीति में उल्लिखित
पात्र निजी लॉजिस्टिक्स wet एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को /पूंजीगत् ब्याज उपादान तथा '
—_— ST
अवस्थापना ब्याज उपादान Te IO Mt अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। अतः निजी
लॉजिस्टिक्स wel एवं लॉजिस्टिक्स इंकाइयों को पूंजीगत ब्याज उपादान तथा अंवस्थापना
ब्याज उपादान प्रतिपूर्ति के रूप में प्रतिवर्ष 5.5 प्रतिशत् की सीमा एवं निर्धारित अवधि तक .
प्रदान की जाएगी, जिसकी सीमा प्रतिवर्ष 2.2 करोड़ एवं 5 वर्ष में कूल 77 करोड़ होगी।
2. इस नीति के अन्तर्गत परिभाषित परियोजनाओं हेतु प्रतिपूर्ति, .उपादान, छूट आदि समस्त
प्रोत्साहन परिभाषित इकाइयों द्वारा किए गए स्थाई पूंजी निवेश के अधिकतम 00 प्रेतिशेतुः
की (सीमा तक होंगे तथा वार्षिक अधिकतम सीमा स्थाई पूंजी निवेश- की 5 प्रतिशतू' होगी ।
7. व्यापार करने में सहजता Ss ऑफ डूईंग बिजनेस)
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन. नीति-2077 के विजन एवं मिशन को art
बढ़ाते हुए यह नीति प्रदेश में व्यापार करने में सहजता सुनिश्चित करती है।
सिंगल विण्डो-लॉजिस्टिक्स इकाईयों हेतु आवश्यक समस्त स्वीकृतियाँ मुख्यमंत्री
नी
कार्यालय की सीधी निगरानी में क्रियाशील राज्य के सिंगल fest सिस्टम के माध्यम
से प्रदान की जाएंगी।
समयबद्ध स्वीकृतियाँ-शीघ्र एवं समयबद्ध स्वीकृतियों प्रदान करना इस नीति के मुख्य
7.2
उददेश्यों में से एक है। इस दिशा में अधिनियम के माध्यम से समस्त
सेवाओं /स्वीकृतियों /अनुमोदनों /अनुमतियों / अनुज्ञा आदि का समय से निर्गत किया
जाना सुनिश्चित किया जाएगा।
गुणवत्तापरक विद्युत आपूर्ति-औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 20:7 के
7.3
प्राविधानों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को
24/7 निर्बाध एवं गुणवत्तापरक विद्युत आपूर्ति हेतु प्रतिबद्ध है।
औद्योगिक सुरक्षा- उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में निरापद एवं सुरक्षित औद्योगिक
7.4
वातावरण प्रदान करेगी।जा
7.5. स्वीकृतियों प्रदान करने की प्रक्रिया का सरलीकरण- .
इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहनों की स्वीकृतियों को युक्तिसंगत रूप से प्रदान करने
हेतु निम्न प्राविधान किये जाएंगे- '
7.5.7 प्रशासनिक सरलीकरण- नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहनों की स्वीकृति एवं वितरण
की प्रक्रिया का सरलीकरण करने के उद्देश्य से एक प्राधिकृत समिति गठित की
जाएगी ।
7.5.2 वित्तीय सरलीकरण-नीति के अन्तर्गत समस्त प्रोत्साहनों हेतु एक स्वीकृति-पत्र
निर्गत किया जाएगा तथा एकल बजट मद का सृजन किया जाएगा।
नोट- लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयाँ जो किसी अन्य नीति के अन्तर्गत aaa राज्य
सरकार के किसी अन्य विभाग द्वारा स्वीकृत प्रोत्साहनों का लाभ प्राप्त करती हैं, aa इस नीति में
उल्लिखित प्रोत्साहन /लाभ प्राप्त करने की भी पात्र होंगी, sad इन इकाईयों डारा एक ही प्रकार का
लाभ किसी अन्य नीति के अन्तर्गत प्राप्त नहीं किया जा रहा हो।
REKEEFees प्रदेश शासन
औद्योगिक विकास अनुभाग-6
OA- 279) ,/77-6-2048-एलएसी0-4 /8
लखनऊ : दिनांक ०८ अुदाई, 048
कार्यालय-ज्ञाप
प्रदेश में औद्योगिक विकास का वातावरण तैयार कर प्रदेश के सर्वागीण
विकास हेतु उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा 'लॉजिस्टिक्स नीति-208 दिनांक 27.
02.20i8 oT मा0 . मंत्रि-परिषद के. अनुमोदनोपरान्त शासनादेश
संख्या-649 /77-6-48-एलएसी0-ए04 / 8, दिनांक 27-02-208 द्वारा निर्गते की
जा चुकी है। |
o— ऊत: “उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति-208” के
कियान्वयन हेतु श्री राज्यपाल निम्नलिखित मार्गदर्शी सिद्धान्त / नियमावली बनाये
जाने की सहर्ष स्वीकृति एतद्द्वारा प्रदान करते हैं:-
उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति-208 के कियान्वयन सम्बन्धी मार्गदर्शी
सिद्धान्त / नियमावली
4, संक्षिप्त नाम एवं RAT
44 यह नियमावली “उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति-208 के
कियान्वयन सम्बन्धी मार्गदर्शी सिद्धान्त / नियमावली ” कहलाएगी।
4.2 यह नियमावली दिनांक 27.02.2023 तक अथवा उस अवधि तक प्रभावी रहेगी जब
तक कि राज्य सरकार द्वारा इरो संशोधित नहीं किया जाता है। कि
2. परिभाषायें:
2.... “नीति” का aed इस नियमावली में उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स ह
नीति-208 से है। |
22 “लॉजिस्टिक्स ure” तथा “लॉजिस्टिक्स इकाईयों” की परिभाषा के सम्बन्ध में “नीति” के
प्रस्तर 3.2 ay होंगे!
० oy
. * o -* a TMPra
:. et og बट”... ... 4७2... हैं.2.3
24
2.9
2.6
27
:
लि...
8
2.9
2.0
'छूट की अधिकतम सीमा” नीति के अन्तर्गत परिभाषित परियोजनाओं हेतु प्रतिपूर्ति, उपादान,
छूट आदि समस्त प्रोत्साहन परिभाषित इकाइयों द्वारा किए गए स्थाई पूंजी निवेश के
अधिकतम t00 प्रतिशत् की सीमा तक होंगे तथा वार्षिक अधिकतम सीमा स्थाई पूंजी निवेश
की is प्रतिशत होगी | | |
“स्वीकार्यता की तिथि” का तात्पर्य नीति के अन्तर्गत सुविधाओं के आहरण के प्रयोजनार्थ उस
तिथि से है जिस पर नीति के अन्तर्गत परिभाषित लॉजिस्टिक पार्क / परियोजनाओं द्वारा
उसकी श्रेणी के अनुसार पात्र teh निवेश की न्यूनतम सीमा प्राप्त कर स्थापित किया जा
चुका हो |
“कट ऑफ तिथि” का तात्पर्य निवेश को प्रारम्भ किए जाने की उस तिथि से & जिसका
विकल्प आवेदक द्वारा चुना गया हो |
“प्रभावी तिथि" का तात्पर्य उस तिथि से है जिससे यह नियमावली प्रभावी होगी,
“प्रभावी अवधि” का तात्पर्य दिनांक 27.2208 से इस नियमावली के राज्य सरकार द्वारा
संशोधन अथवा निरसन की तिथि तक की अवधि से है।
“पात्र पूँजी निवेश” का तात्पर्य ऐसे पूँजी निवेश से है जो किसी लॉजिस्टिक्स इकाईयों द्वारा
उसकी श्रेणी के अनुसार, पात्र निवेश की अवधि के भीतर किया गया Vl
“कर्मचारियों” का तात्पर्य औद्योगिक उपकम के dao Gla पर wh
कर्मचारी / कर्मी से है।
“sara पूँजी निवेश
निम्नलिखित को पूँजी निवेश की गणना में नही सम्मिलित किया जाएगा:
8. कार्यशील पूँजी
9 गुडविल
0. रायल्टी
i4. प्रिलिग्नरी व प्रिऑपरेटिव व्यय
2. ब्याज जिसे कैपिटलाइज किया गया है
43. स्वयं उपयोग के अलावा विद्युत उत्पादन
4. तकनीकी कार्यज्ञान (knowhow) शुल्क / परांमर्शी शुल्क
“औद्योगिक उपकम” का तात्पर्य ऐसी औद्योगिक इकाई से है जो किसी ऐसी संस्था के
स्वामित्व में हो जो कम्पनी, साझेदारी फर्म, (जिसमें एल.एल.पी., सोसाइटी, न्यास, औद्योगिक
सहकारिता समिति, अथवा स्वामित्व फर्म सम्मिलित हैं) के रूप में गठित हो, एवं जो सामग्री
के निर्माण, उत्पादन, प्रौद्योगिकी अथवा ठेके के कार्य में प्रवृत्त हो अथवा प्रवृत्त होना
प्रस्तावित कर रही Bll औद्योगिक उपकम में वे उद्यम भी सम्मिलित होंगे जिन्हें सूक्ष्म, लघुऔर मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में लघु एवं मध्यम उद्यम के रूप में परिभाषित
किया गया है।
ऐसे औद्योगिक उपकम जोकि प्रतिबंधित उद्योगों की सूची में अधिसूचित किए गये हैं
सुविधाओं हेतु अपात्र होंगे |
2.2 सहायक अवस्थापना सुविधाओं” से तात्पर्य पार्क की आवश्यकताओं के अनुसार अवस्थापना
सुविधाएं यथा-- आन्तरिक सड़क मार्ग, संचार सुविधाएं, खुला तथा हरित स्थान, जल आपूर्ति
तंत्र (वाटर पाइप-लाइन्स), सीवेज एवं ड्रेनेज प्रणाली, डिस्पोज़ल सुविधाएं, विद्युत वितरण
व्यवस्था की स्थापना, फीडर, सौर ऊर्जा Grew इत्यादि से है।
2.i3 “विभाग” से अभिप्राय अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग से है।
2./4 यूपीसीडा” का अभिप्राय उ. प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण से है, जो उ. प्र
औद्योगिक विकास. अधिनियम, i976 के अधीन एक शासन-नियंत्रित प्राधिकरण के रूप में
:... गठित किया गया है।
2.5 नोडल संस्था” का तात्पर्य उ. प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) से है। इस
प्रयोजनार्थ यूपीसीडा में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी |
2.6 अकुशल कर्मियों” का तात्पर्य उपकम के वेतन-पत्रक पर अकुशल कर्मियों से है।
2./7 “निजी विकासकर्ता” का तात्पर्य ऐसे औद्योगिक संगठन / उद्यम से है, जो संस्था पंजीकरण
अधिनियम i860, भारतीय भागीदारी अधिनियम 932 अथवा कम्पनी अधिनियम 2073 अथवा
विशेष प्रयोजन माध्यम संस्था-एस.पी.वी. (Special Purpose Vehicle) (अथवा इसी प्रकार के
समान / प्रतिस्थापन अधिनियम /विधि, जो नीति की वैधता अवधि में समय-समय पर प्रचलित
हों) के अन्तर्गत पंजीकृत हों तथा पार्क की स्थापना हेतु गठित किया गया हो।
2.78 “प्रथम् क्रेता” का तात्पर्य ऐसी विशिष्ट पृथक इकाइयों से है जो पार्क में स्थित भूखण्ड को
प्रथम बार विकासकर्ता से प्रत्यक्ष रूप से क्रय करती हैं |
2.9 “वित्तीय संस्था” का तात्पर्य ऐसी वित्तीय संस्थाओं से है जो केन्द्र अथवा राज्य. सरकार के
नियंत्रणाधीन हो, अथवा कोई अनुसूचित बैंक हो Coa ग्रामीण बैंक के अतिरिक्त)
2.20 प्राधिकार प्राप्त समिति” का तात्पर्य मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित प्राधिकृत समिति से
है।
2.24 “सक्षम प्राधिकारी (कॉम्पिटेण्ट अथॉरिटी)” से तात्पर्य ऐसे प्राधिकारी (अथॉरिटी) से है, जिनके
द्वारा मानचित्र को अनुमोदित किया जाता है। सक्षम प्राधिकारी (अथॉरिटी) उपलब्ध न हो तो
नोडल संस्था द्वारा किया जांयेगा।लॉजिस्टिक 3. .... लॉजcिh _स T्s,टिक इकाईयों को अनुमन्य सुविधायें
3. भारत सरकार द्वारा 'इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टेटस' हेतु निर्दिष्ट शर्तों को पूर्ण करने वाली
वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को प्रदेश में 'उद्योग' का दर्जा प्रदान किया
जाएगा एवं इसको औद्योगिक क्रिया (एक्टिविटी) मानी जायेगी |
3.2 वेअरहाउसिंग के लिए भूमि आवंटन हेतु विकास प्राधिकरणों द्वारा पात्रता शर्ते एवं दर
निर्धारित की जाएंगी |
3.3 सक्षम प्राधिकारी (कॉम्पिटेण्ट अर्थोरिटी) द्वारा वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों
हेतु 60 प्रतिशत् तक की ग्राउण्ड कवरेज की अनुमति दी जाएगी |
4. fof लॉजिस्टिक्स पार्क हेतु प्रोत्साहन
50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित किये जा रहे लॉजिस्टिक्स पार्कों को नीति के प्रस्तर-5
के अन्तर्गत 5. से 5.9 तक में वर्णित प्रोत्साहन प्रदान किये जाएगें। प्रोत्साहन की स्वीकृति
WR 2 में उल्लिखित प्रक़ियानुसार तथा प्रोत्साहन का वितरण weR-73 में उल्लिखित
प्रक्रियानुसार किया जायेगा |
5. .... लॉजिस्टिक्स इकाइयों हेतु प्रोत्साहन
5. “नीति” में परिभाषित लॉजिस्टिक्स इकाइयाँ को “नीति” के प्रस्तर' 6.। से 6.9 में
वर्णित प्रोत्साहन “छूट की अधिकतम सीमा” के अन्तर्गत प्रदान किये जाएगें।
52 बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल क्षेत्रों तथा अधिसूचित लॉजिस्टिक्स पार्कों में “Aiea
उल्लिखित पात्र निजी लॉजिस्टिक्स पार्कों एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को पूंजीयत्
ब्याज उपादान तथा अवस्थापना ब्याज उपादान पर +0 प्रतिशत अतिरिक्त प्रदान
किया जाएगा |
5.3. निजी लॉजिस्टिक्स wet एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को पूंजीगत ब्याज उपादान
तथा अवस्थापना ब्याज उपादान प्रतिपूर्ति के रूप में प्रतिवर्ष 5.5 प्रतिशत की सीमा
एवं निर्धारित अवधि तक प्रदान की जाएगी, जिसकी सीमा प्रतिवर्ष 2.2 करोड़ एवं 5
वर्ष में eat करोड़ होंगी |
6... दादरी, भाउपुर व नैनी को लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र के रूप में विकसित किया जायेगा। ' प्रदेश
सरकार किसी अन्य क्षेत्र को भी लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र के रूप में अधिसूचित कर सकती है |
7... अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अन्तर्गत सचिव स्तर के
अधिकारी के नेतृत्व में एक समर्पित लॉजिस्टिक्स प्रकोष्ठ की स्थापना की जायेगी |7. यह प्रकोष्ठ प्रदेश में लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु विभिन्न संबंधित
विभागों, यथा-नागरिक उद्धडयन, परिवहन, ऊर्जा, खाद्य एवं कृषि तथा अन्य सम्बन्धित
विभागों के साथ बेहतर समन्वयन सुनिश्चित करेगा |
72 यथावश्यक सुसंगत नियमों के अन्तर्गत भूमि के आबंटन हेतु संबंधित विभाग /विकास
प्राधिकरण ,/ औद्योगिक विकास प्राधिकरण ,/ हाउसिंग बोर्ड / यू पी.एस.आई.डी.सी / alter
इत्यादि को निर्देश जारी करेगा।
73 लॉजिस्टिक इकाईयों हेतु आवश्यक समस्त समयबद्ध स्वीकृतियों //अनापत्तियाँ, सिंगल
विण्डो विण्डो\ सिस्टम, 'निवेश मित्र' के माध्यम से प्रदान किये जाएगें |
74 लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउसिंग gargal, जो किसी अन्य नीति के अन्तर्गत अथवा राज्य
सरकार के किसी अन्य विभाग द्वारा स्वीकृत viewed का लाभ प्राप्त करती है, तो वे
इस नीति 4 उल्लिखित प्रोत्साहन / लाभ प्राप्त करने की भी पात्र होंगी, ad इन
इकाईयों .द्वारा एक ही प्रकार का. लाभ किसी अन्य नीति के अन्तर्गत प्राप्त नहीं किया
जा रहा हो।
8. ... नियमावली में उल्लिखित सभी सुविधायें यथा प्रचलित शासनादेशों / सुसंगत नियमों के
अन्तर्गत (सम्बन्धित विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली ड्यूटी / शुल्क में छूट से सम्बन्धित
सुविधाओं को छोड़कर) “नोडल संस्था” द्वारा वितरित किया जायेगा ।
9... “नीति” के अन्तर्गत सुदिधा प्राप्त करने वाले लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयाँ यदि
किसी कारणवश प्रभावी अवधि में सुविधायें प्राप्त कर लेती हैं किन्तु लॉजिस्टिक सेवायें तथा
सहायक अवस्थापना सुविधायें नहीं विकसित कर पाती हैं तो इकाइयों को दी गयी प्रतिपूर्ति,
उपादान, छूट की वितरित धनराशि भू-राजस्व की भाँति वसूल किया जायेगा |
i0. . निम्नलिखित परिस्थितियों के घटित होने की दशा में भी संबंधित विकासकर्ता / इकाइयों को
प्रतिपूर्ति, उपादान, छूट देय नहीं होगा एवं विकासकर्ता/ इकाई को प्रतिपूर्ति, उपादान, छूट
वितरित होने की दशा में वितरित धनराशि भू-राजस्व की भॉति वसूल किया जायेगा।
io) जब कोई विकासकर्ता/ इकाई निर्धारित विवरण व सूचना, जो उससे FH जाए,
देने में असफल रहे |
i0(2) जब किसी विकासकर्ता/ इकाई द्वारा आवश्यक तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत
करके अथवा असत्य सूचना देकर उपादान प्राप्त किया हो।
i0(3) जब किसी विकासकर्ता द्वारा लॉजिस्टिक पार्क urer करने की तिथि से 5 क्रमागत
वर्षो: की अवधि के अन्तर्गत विकास कार्य स्थाई रूप से (छः माह से अधिक) बन्द कर
दिया गया हो तो विकास कार्य अवरूद्ध होने के कारण सहित एक माह के अन्दर ही
संबंधित नोडल संस्था को सूचना लिखित रूप से प्राप्त कराना अनिवार्य होगा। नोडलकिया जायेगा |
4. अन्य प्राविधान / शर्ते
चरणबद्ध स्थापन: लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयों को, जो विभिन्न चरणों में
4.5
परियोजना स्थापित करना चाहते है, प्रथम चरण की स्थापना से पूर्व आवेदन करना
होगा।
सूचनायें उपलब्ध कराया जाना: सुविधाओं के वितरण की शर्तों के अनुसार, सभी पात्र
.2
लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयों द्वारा समय समय पर आवश्यक जानकारी
इकाई की बंदी, आंदि we कारणों सहित, स्थायी पूँजी निदेश में वृद्धि का सत्यापित
विवरण (यदि कोई हो), स्थायी सम्पत्तियों का विकय / नुकसान (यदि कोई हो), एवं
इकाई के संविधान में बदलाव, पात्र इकाई का अंकेक्षित लेखा विवरण और आर्थिक
Rica (प्रत्येक वित्तीय वर्ष समाप्त होने के 6 माह के भीतर), इत्यादि नोडल एजेन्सी
अथवा राज्य सरकार द्वारा यथा-अपेक्षित उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
परियोजना & पैरामीटर्स में परिवर्तन: लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयों द्वारा
4.3
परियोजना की प्रकृति अथवा परियोजना लागत में परिवर्तन /बदलाव, जिससे इसकी
श्रेणी में परिवर्तन उत्पन्न हो, शर्तों में परिवर्तन, इत्यादि हेतु दिये गये आवेदन का
नोडल संस्था द्वारा स्वयं अथवा बाहय सक्षम संस्था के माध्यम से परीक्षण कर
“प्राधिकार प्राप्त समिति” के विचार हेतु प्रस्तुत किया जायेगा, जिनका निर्णय अन्तिम
होगा |
सुविधाओं की निर्धारित सीमा (मात्रा /अवधि) पूरी होने पर अथवा नियमों एवं शर्तों
4.4
का उल्लंघन होने पर दी गई सुविधाओं को स्वतः निरस्त समझा जायेगा |
यदि लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयों द्वारा दी गयी जानकारी / अभिलेख
44.5
असत्य पाये जाते हैं अथवा भौतिक तथ्यों को छिपा कर सुविधाएं प्राप्त की जाती है
तो ऐसी दशा में स्वीकृति सुविधाएं निरस्त किये जायेगे एवं इकाइयों को वितरित की
गयी सभी सुविधाओं की राशि प्रदेश के प्रचलित अधिनियमों के अन्तर्गत भूमि राजस्व
के बकायों के रूप में वसूली योग्य होगी |
2. प्रसंस्करण, स्वीकृति एवं वितरण की प्रकिया
आवेदन जमा किया जाना : नीति के अन्तर्गत वित्तीय प्रोत्साहनों हेतु सभी प्रार्थना पत्र
42.4
सभी आवश्यक दस्तावेज सहित निर्धारित प्रारूप में (अनुलग्नक-][) नोडल संस्था को
प्रस्तुत किये जायेगें। नोडल संस्था प्रार्थना पत्रों को परीक्षण कर संस्तुति सहित विभाग22 “FART द्वारा प्राप्त प्रार्थना पत्र को “प्राधिकार प्राप्त समिति” के समक्ष स्वीकृति हेतु
प्रस्तुत किया जायेगा। .
i23 Asa संस्था द्वारा प्रार्थना पत्रों की स्थिति, स्वीकृति पत्र एवं निजी विकासकर्ता /
इकाइयों के प्रगति की परिवीक्षा की जायेगी |
24 ‘deft: मुख्य सचिव, ovo की अध्यक्षता में प्रार्थना पत्र की स्वीकृति हेतु एक
“प्राधिकार प्राप्त समिति” का गठन किया जा रहा है, जिसके wea निम्नवत् होंगे:
() «HARTA एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, Sou |
(i) अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, औद्योगिक विकास विभाग
ain) अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, पर्यावरण विभाग
(iv) अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, निबन्धन विभाग
(४)... अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग
(VV) ऊपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, ऊर्जा विभाग
(vn) अपर मुख्य संचिव / प्रमुख सचिंव / संचिव, वित्त विभाग
(vIn) अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, आवास विभाग
(x) अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, नगर विकास विभाग
(X) , अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, श्रम विभाग
xy प्रबन्ध निदेशक, यूपीएसआईडीसी
xn) अन्य सम्बन्धित विभागों के प्रतिनिधि जिनसे कि वित्तीय प्रोत्साहन प्रार्थित है|
मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीसीडा समिति के सदस्य संयोजक होंगे |. समिति की
बैठक में आवेदक: अथवा आवेदक के प्रतिनिधि भी आमंत्रित किये जायेंगे; परन्तु उनकी
अनुपस्थिति से स्वीकृति की प्रकिया बाधित नहीं होगी |
2.5 “प्राधिकार प्राप्त समिति” द्वारा वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकति के पश्चात “नोडल संस्था'
द्वारा निर्धारित प्रारूप में 'स्वीकति oa’ निर्गत किया जायेगा |
43. fdarar:
34 आवेदक द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज सहित निर्धारित प्रारूप rere I) में
नोडल संस्था को प्रार्थना-पत्र देना होगा।
32 “नोडल संस्था” प्रार्थना पत्रों को संस्तुति सहित विभाग को प्रसंस्करण हेतु अग्रसारित
करेगी | |
33 दस्तावेजों को विभाग के स्तर पर परीक्षण एवं स्वीकृति पत्र में निर्धारित शर्तों के
अनुपालनों की पुष्टि के पश्चात, प्रस्ताव को 'प्राधिकार प्राप्त समिति” के समक्ष प्रस्तुतथि.
44 योजनान्तर्गत समस्त व्यय, यथा-सहमति-पत्र (एग्रीमेंट) का निष्पादन, तथा अन्य
प्रासंगिक व्यय का वहन निजी विकासकर्ता / इकाइयों द्वारा किया जाएगा |
4.2... समस्त .प्रोत्साहन धनराशि का 4.00 प्रतिशत यूपीसीडा द्वारा प्रशासनिक शुल्क के रूप
में कटौती कर लिया जायेगा।
विविध :
5,
5.] नीति के अन्तर्गत स्वीकृत राशि का लेखा शीर्षक वित्त विभाग द्वारा आवंटित किया
जायेगा। विभाग उक्त लेखा शीर्षक के नियंत्रक व प्राक्कलन अधिकारी होंगे। वह
लेखा शीर्षक के बजट तथा पुनरीक्षित अनुमान प्रस्तावित करेंगे तथा आवश्यकतानुसार
अनुपूरकें AT कां प्रेस्तीव॑ करेंगें। नीति के क्रियान्वयन हेतु वित्तीय स्वींकृंति fear
स्वीकृति के पश्चात् निर्गत की जायेगी | ं
5.2 'प्राधिकार प्राप्त समिति” द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाने वाली शर्तें व नियम
लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करने वाले निजी विकासकर्ता पर लागू होंगी ।
53 ऐसे कोई भी अन्य मानदण्ड लागू होंगे, जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समय-संमय पर
निर्धारित तथा / अथवा अधिसूचित किए जाएंगे |
54 इस नियमावली के किसी भी अनुच्छेद के अनुपालन के सम्बन्ध में 'प्राधिकार प्राप्त
समिति” द्वारा दी गई व्यवस्था अंतिम होगी |
5.5 अन्य विभागों से सम्बच्धित सुविधाओं हेतु बजट प्राविधान सम्बच्धित विभागों द्वारा किया
जाएंगे |
56 योजनान्तर्गत किसी विषय वस्तु को स्पष्ट करने का अधिकार ‘wer प्राप्त समिति”
को होगा |
5.7 इस नियमावली के साथ संलग्न आवेदन पत्र के प्रारूपों में किसी भी प्रकार के संशोधन
अथवा परिवर्तन किये जाने हेतु 'प्राधिकार प्राप्त समिति” सक्षम होगें |45.8 किसी भी प्रकार के विवाद की रिथिति में लखनऊ स्थित न्यायालयों मे ही ae दायर
किया जा सकेगा।
promtey __
संलग्नक Bad
अनूप चन्द्र पाण्डेय
अवस्थाप॑ना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त |
संख्या : 2790 (4)/77-6-78-Yootlo—4 /i8 तदृदिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
महालेखाकार, लेखा परीक्षा प्रथम एवं द्वितीय, उ0प्र0, इलाहाबाद |
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त एवं प्रमुख सचिव, उ0प्र0 शासन |
प्रमुख सचिव, मा0 मुख्यमंत्री, Boo शासन | :
प्राधिकार. प्राप्त समिति के माएसदस्यगण |
समस्त अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, उ0प्र0 शासन |
समस्त मंडलायुक्त / जिलाधिकारी, Gov |
आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उ0प्र0, उद्योग निदेशालय, कानपुर |
अधिशासी निदेशक, उद्योग Fey 42 सी, माल एवेन्यू, लखनऊ |
मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीसीडा, कानपुर |
0.... औद्योगिक विकास विभाग के नियन्त्रणाधीन समस्त विभागाध्यक्ष / निगमों के अध्यक्ष / प्रबंध
—
OON
एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अध्यक्ष |
iW. औद्योगिक विकास 'विभाग के समस्त संयुक्त सचिव, उप सचिव, अनु सचिव एवं समस्त
अनुभाग | |
2. स्टाफ आफीसर, मुख्य सचिव, soo ARF}
3. निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री, ऐशबाग, लखनऊ को इस अनुरोध के साथ प्रेषित है
कि कृपया नियमावली की i500 प्रतियाँ मुद्रित करा कर औद्योगिक विकास अनुभाग-6
को उपलब्ध कराने एवं समस्त जिलाधिकारी, GRR प्रदेश तथा समस्त मण्डलायुक्त,
ODOR WHR =
आज्ञा से,
(अंकित an
i
विशेष सचिव | |Ue: 279 @)/77-6-78-Vootho—4 /i8 तद॒दिनांक
प्रतिलिपि निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 'लखनऊ को इस अभ्युक्ति के
साथ प्रेषित है कि कृपया इस नीति ,/ नियमावली का समस्त समाचार पत्रों में व अन्य माध्यमों रो
समुचित प्रचार-प्रसार करवाने का कष्ट करें।
आज्ञा 0.
(अंकित क अग्रवाल)
विशेष सचिव | |लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयों के लिए आवेदन पत्र
(सभी सहायक अभिलेखों को आवेदक द्वारा अपनी ओर से विधिवत रूप से प्राधिकृत
निदेशक / साझेदार / अधिकारी द्वारा अधिप्रमाणित किया जाना चाहिये)
क. विवरण oN सम्बंधित सहायक तावेज
4. | आवेदक का नाम,/८ पता एवं निगमीकरण प्रमाणपत्र, पंजीकृत
सम्पकं विवरण भागीदारी विलेख,
न्यास / सोसायटी पंजीकरण
विलेख
2. | आवेदक का संघटन कम्पनी / भागीदारी. | संगम अनुच्छेद / अनुच्छेद /
(कान्सटीट्यूशन) फर्म / अन्य उप-नियम आदि
MoA/Articles/By-laws)
। 3... | मौजूदा / प्रस्तावित |
परियोजना स्थल
न निदेशकों / भागीदारों / sat पैन और fsa (DIN)
के AA / पता एवं सम्पर्क (संबंधित दस्तावेजों द्वारा
विवरण समर्थित)
5. | आवेदक की जीएसटीआईएन संबंधित दस्तावेजों द्वारा
(GSTIN) समर्थित
oo इकाई की प्रकृति नया /मौजूंदा
(विस्तार / विविधिकरण)
7... | श्रेणीकरण न्यूनतम 50 एकड़
भूमि पर विकसित
किये जाने वाला
लॉजिस्टिक्स पार्क
अथवा लॉजिस्टिक्स
इकाई
की .... | लॉजिस्टिक्स पाक अथवा संबंधित दस्तावेजों द्वारा
लॉजिस्टिक्स इंकाई की समर्थित
स्थापना के लिए पंजीकरण
या -पत्र
* लॉजिस्टिक्स पाक अथवा
लॉजिस्टिक्स इकाई की
स्थापन की प्रस्तावित तारीख
0. | प्रस्तावित पूँजी निवेश विस्तृत परियोजना रिपोर्ट
(DPR
. | वह तारीख जब से पूँजी संबंधित दस्तावेजों द्वारा
निवेश आरंभ किया गया है, समर्थित
या आरंग किया जाना
प्रस्तावित है
| ही:
i
42, आवेदक द्वारा प्रार्थित लाभ
we मद मात्रा (करोड़)
42.4 वित्तीय art की कुल औसत मात्रा
2.2 प्रार्थित लाभ का विवरण po
i2.2.. | स्टाम्प ड्यूटी से छूट
42.2.2 | ईपीएफ प्रतिपूर्ति (oo या इससे अधिक अकुशल कामगार)
42.2.3 |0% अतिरिक्त इंपीएफ प्रतिपूर्ति (200 कुशल और अकुशल कामगार)
2.2.4 पूंजीगत ब्याज उपादान
42.2.5 | अवस्थापना ब्याज उपादान
4226 | भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क से छूट
42.2.7 | विकास शुल्क से छूट
i2.28 | flea शुल्क से we
i229 | वेअरहाउसेज का गुणवत्ता प्रमाणन की प्रतिपूर्ति
2.2..0 | दिव्यांग श्रमिकों हेतु 500 /- प्रतिमाह पे रोल सहायता
i2.2.4 | कौशल विकास प्रोत्साहन
i2.2.:2 | प्रज्ञ लाजिस्टिक हेतु प्रोत्साहन
+2-%.
घोषणा
उपर्युक्त सूचना पूर्णतया सत्य है और किसी भी तथ्य को छिपाया या गलत ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया
है। आगे स्पष्ट किया जाता है कि आवेदक ने उपर्युक्त प्रकृति के लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से उत्तर
प्रदेश सरकार की किसी क्षेत्र-विशिष्ट या ara नीति के अधीन उपर्युक्त प्रकृति के लाभों के लिए आवेदन
नहीं किया है। 7
4/84 VdER सहमत हूँ / हैं कि उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति-208 के नियमों के
अधीन यदि यह पाया जाता है कि मुझे / हमें उक्त लाभों का face किसी भी कारण से .वास्तविक रूप
से स्वीकार्य राशि से अधिक किया गया है तो मैं/हम जारी किए गए aM की तत्काल वापसी कर
दूँगा / देंगे |
प्राधिकृत हस्ताक्षरी के हस्ताक्षर
नाम, पदनाम और कार्यालय मुहर सहित
तारीख :
स्थान :
सहायक दस्तावेज:
(a) निगमीकरण प्रमाणपत्र, पंजीकृत भागीदारी विलेख, न्यास / सोसायटी पंजीकरण विलेख
(9) समस्त अनुसचियों सहित इकाई के लेखा परीक्षित लेखे (चालू वित्त वर्ष के साथ-साथ पिछले पॉच
वर्ष)
(८) विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)
(dd) संगम अनुच्छेद /अनुच्छेद / उप-नियम आदि तथा मौजूदा सकल परिसम्पत्तियों हेतु सनदी
लेखाकार का प्रमाणपत्र
(€) सकल ब्लॉक के समर्थन में मौजूदा औद्योगिक उपकम की स्थायी परिसम्पत्तियों की सनदी अभियंता
द्वारा प्रमाणित सूची
(f) शपथपत्र (रू0 i0 के CTY पेपर पर AAA 4-अ के अनुसार)
ie
deअनुलग्नक-। |
लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग इकाइयों के लिए, जिन्हे स्वीकृति पत्र जारी किए गए है, प्रोत्साहन राशियों के वितरण
के लिए आवेदन पत्र
4. ..... वितरण के स्तर पर जमा की जाने वाली सूचना और दस्तावेज
कम सं विवरण |. ब्यौरा... |
I) आवेदक का नाम और पत्ता |... |
| |) मौजूदा / प्रस्तावित उपकम का परियोजना स्थल
|| |) किये गये वास्तविक पूँजी निवेश का चरणबद्ध विवरण
एवं लॉजिस्टिक्स पार्क अथवा लॉजिस्टिक्स इकाई की
स्थापन की तिथि (उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं
उद्यम प्रोत्साहन He अथवा सनदी लेखाकार (CA)
का प्रमाण पत्र संलग्न करें) |
2. लॉजिस्टिक्स पार्क अथवा लॉजिस्टिक्स इकाई की स्थापन में पात्र पूँजीगत निवेश का ब्यौरा
कम संख्या मद नया /मे विस्तार /विविधिकरण | विस्तार/विविधिकरण
के आधीन वृद्धि का :
i) भूमि
ii) भवन
iii) अन्य निर्माण
न iv) संयंत्र और मशीनरी
v) अवस्थापना सुविधाएँ
न vi) कल
टिप्पणी :-.
. संबधित दस्तावेज, नियमो/ सरकारी आदेशों /एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 के प्राविधानों के अनुरूप ऊपर बताये
अनुसार किए गए पूँजीगत निवेश के लिए सनदी लेखाकार के प्रमाणपत्र के साथ प्रस्तुत किए जाएं।
2. नोडल एजेंसी अपने पैनल में शामिल सनदी लेखाकारों के माध्यम से शासनादेश के प्राविधान के अनुसार कम्पनी द्वारा
|
किए गए पूँजीगत निवेश पर परीक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था करेगी |
3. नोडल एजेंसी अपने पेनल में शामिल परामर्शदाताओं
पूँजीगत निवेश (भूमि, भवन और संयंत्र तथा मशीनरी) के संस्थापन की जांच और सत्यापन की व्यवस्था भी करेगी |
उपर्युक्त दो रिपोर्ट पूंजीगत निवेश की मात्रा के निर्धारण के लिए सक्षम समिति के समक्ष लाभो के संवितरण किये जाने की
/ मूल्यांकनकर्ताओं / इंजीनियर के माध्यम से साइट पर किए गए
स्थिति में प्रस्तुत की जांएगी।-2-
7
3, लॉजिस्टिक्स पार्क अथवा लॉजिस्टिक्स इकाई की स्थापन में किये. गये पूँजीगत निवेश का विवरण :
कम से. | घटक परियोजना लागत वास्तविक पूँजी निवेश कुल य
डीपीआर HP | एप्रेजल के कट at | कट आफ डेट | अंतिम चरण के
अनुसार अनुसार डेट के पूर्व | व स्थापन की | स्थापन की
तिथि के मध्य | तिथि से अब
(यदि चरणों | तक (पात्र पूँजी
में, तो निवेश अवधि
चरणबद्ध पूंजी | तक)
निवेश)
[0% | 90%
{ 2 3 4 5 | 6... | 7 | है. | | og
4.0 उपादान
4.4 पूँजीगत ब्याज उपादान
4ii | बैकों /वित्तीय संस्थाओं का नाम और पत्ता
जिनसे ऋण प्राप्त किया गया
44.2 | संयंत्र और मशीनरी में निवेश के लिए स्वीकृत पत्र, वित्तीय
स्वीकृत ऋण की राशि ं संस्था / बैंक के साथ करार
4.43 | ब्याज की दर 'स्वीकुतत पत्र, वित्तीय
संस्था/ बैंक के साथ करार
4.4 | स्वीकृति की तारीख
4i5 | वित्तरण की तारीख सहित संयंत्र और |. संयंत्र और मशीनरी के
मशीनरी में निवेश के लिए वितरित ऋण लिए ऋण प्रमाणित करने
की राशि। वाले बैक / वित्तीय संस्था
से ऋण ब्याज एवं अन्य
विवरण की प्रमाण पत्र |
2. सम्पूर्ण अवधि; जिसके
लिए प्रतिपूर्ति का दावा किया
गया है, के दौरान भुगतान में
कोई चूक न होने संबंधी बैक
/ वित्तीय संस्था का प्रमाण
पत्र |
ae3
! 4
i
)
4.2 पूँजीगत ब्याज उपादान की स्वीकृति के लिए दावों का विवरण
कम | वर्ष जिसके लिए सब्सिडी का वर्ष के दौरान वित्तीय | आवेदन किए गए. | समर्थन मे अपेक्षित cere
सं0 | आवेदन किया गया संस्था को किया गया. | ब्याज सब्सिडी की.
] राशि
गुल धनराशि. ब्याज
i |a-¢ ) वित्तीय संस्था / बैंक से प्रमाण
पत्र अपेक्षित...
जि वर्ष ला (. )
3. वर्ष-पा ( )
4. विष लाश (. )
5. |वर्ष-४(. )
कल
43 अवस्थापना ब्याज उपादान
43.4 | बैकों/ वित्तीय संस्थाओं का नाम
और पता जिनसे, ऋण प्राप्त किया
| गया
4.3.2 | बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं के स्वीकृत पत्र, वित्तीय संस्था /
विकास, यथा- सड़कों, SAG, बैंक के साथ करार
विद्युत वितरण लाइनों की ं
स्थापना, सौर ऊर्जा पैनल्स में
निवेश पर स्वीकृत ऋण की
धनराशि
43.3 | ब्याज की दर स्वीकृत्त पत्र, वित्तीय संस्था /
बैंक के साथ करार
43.4 | ad की तारीख
435 | बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं के ।.. ऋण प्रमाणित करने
विकास, यथा- सड़कों, ड्रेनेज, वाले बैक / वित्तीय
विद्युत वितरण लाइनों की संस्था से ऋण ब्याज एवं
स्थापना, सौर ऊर्जा Fes में अन्य विवरण का प्रमाण
ऋण निवेश की राशि वितरण की पत्र | "
तारीखों सहित 2. सम्पूर्ण अवधि, जिसके
लिए प्रतिपूर्ति का दावा
किया गया है, के दौरान
भुगतान में कोई चूक न
होने संबंधी बैक ,/
वित्तीय संस्था का प्रमाण
पत्र |4.36 अवस्थापना ब्याज उपादान की स्वीकृत्ति के लिए दावों का विवरण .
कम | वर्ष जिसके लिए सब्सिडी का... | वर्ष के दौरान वित्तीय संस्था | आवेदन किए गए व मे अपेक्षित दस्तावे
Wo | आवेदन किया गया को किया गया भुगतान ब्याज सब्सिडी की
राशि
तल धनराशि. ब्याज
4 | वर्ष-( ) वित्तीय संस्था / बैंक से
प्रमाण पत्र अपेक्षित
2 |qy-( )
3. |ay—-in( )
4. |ay-Iv( )
5. |qv—-v(_)
कल
5.] कर्मचारी भविष्य निधि प्रतिपूर्ति
5.4.4 | 00 अकुशल कामगारों के विवरण सहित मुख्य प्रोत्साहक / प्राधिकृत की ओरसे इस आशय
FHM कामगारों की संख्या और संबंधित का शपथ पत्र कि उपर्युक्त सभी विवरण सत्य हैं
वर्ष के लिए कर्मचारी-वार अंशदानों का और इकाई में संबंधित वर्ष की पूर्ण अवधि के लिए
विवरण इसके सतत रोजगार में i00 अकुशल कामगार थे
जिसके लिए प्रतिपूर्ति का आवेदन किया गया है|
54:2 अन्य कामगारों की संख्या
54.3 | कामगारों की कल संख्या
5.4 | ईपीएफ प्रतिपूर्ति के लिए दावों का ब्यौरा इंपीएफओ या कर्मचारी के भविष्य निधि न्यास में
अदा किए गए अशदानों का महीना-वार ब्यौरा, जिसे
ईपीएफओ के संबंधित सक्षम अधिकारी / न्यास के
सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए।
प्राप्त की गई भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क से छूट
प्राप्त की गई विकास शुल्क से छूट
प्राप्त की गई वेअरहाउसेज का गुणवत्ता प्रमाणन की
प्रतिपूर्ति
9 | प्राप्त की गई स्टाम्प ड्यूटी छूट की विस्तृत गणना
40 प्राप्त की गई va लाजिस्टिक हेतु प्रोत्साहन की विस्तृत
गणना
' प्राप्त की गई विद्युत Yow छूट की विस्तृत गणना
42 कौशल विकास प्रोत्साहन / सहायता का विस्तृत विवरणघोषणा
उपर्युक्त सूचना पूर्णतया सत्य है और किसी भी तथ्य को छिपाया या गलत ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया है। आगे स्पष्ट
किया जाता है कि कम्पनी ने उपर्युक्त प्रकृति के लाभ प्राप्त करने के उददेश्य से उत्तर प्रदेश सरकार की किसी क्षेत्र- विशिष्ट
या अन्य नीति के अधीन उपर्युक्त vals के लाभो के लिए आवेदन नही किया है।
गै/हम एतदद्वारा सहमत हूँ/ है कि उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति-2048 के नियमों के अधीन यदि यह
पाया जाता है कि मुझे/हमें उक्त लाभों का संवितरण किसी भी कारण से वास्तविक रूप से स्वीकार्य राशि से अधिक किया
गया है तो मै,/हम जारी किए गए लाभों की तत्काल वापसी कर देगे।
प्राधिकृत हस्ताक्षरी के हस्ताक्षर
A, पदनाम-और कार्यालय-मुहर सहित
स्थान :
दिनांक :
48अनुलग्नक i-F
ee न सा
,
के नाम से उत्तर प्रदेश राज्य में कय किये गये Go i0/- के
जनरल स्टाम्प पेपर पर पब्लिक नोटरी के समक्ष शपथ पत्र
शपथ aA
ee आयु.......................८८ वर्ष , पुत्र. (श्री/स्व0 ..............................८०-०००-.------ निवासी ...
सन मे0 जिसका पंजीकृत कार्यालय पर स्थित है, का अधिकृत
हस्ताक्षरी, सत्यनिष्ठा के साथ शपथ लेता हूँ एवं निम्नवत घोषणा करता हूँ :-.
यह कि शपथी मे0.........................................«८०«« को ................................८८८८ है एवं कम्पनी के निदेशक. मंडल द्वारा
स्वीकृत प्रस्ताव दिनांक के द्वारा यह Wy पत्र दाखिल करने हेतु ald किया गया है।
स्थान
दिनांक
व
@) ae कि मैं प्रमाणित करता हूँ कि राज्य सरकार की किसी उद्योग विशेष सम्बन्धी विभागीय नीति के अन्तर्गत
आवेदक कम्पनी के औद्योगिक उपकम द्वारा कोई लाभ न तो प्राप्त किया गया है और न ही भविष्य में प्राप्त
करेंगे | |
यह कि मैं निम्नवत शपथ लेता हूँ _
(4) यह कि आवेदक कम्पनी के औद्योगिक उपकम द्वारा शासनादेश संख्या........................................ दिनांक .............
में उल्लिखित सभी प्रावधानों का पालन किया जायेगा एवं किसी भी स्थिति मे यदि यह पाया गया
कि आवेदक कम्पनी के औद्योगिक उपकम द्वारा किसी शर्त का veo किया गया है अथवा असत्य
जानकारी उपलब्ध करायी गयी है तो ऐसी दशा में आवेदक कम्पनी के औद्योगिक उपकम को स्वीकृत
विशेष सुविधाओं को वापस लिये जाने पर कोई आपत्ति नहीं की जायेगी |
(3) यह कि यदि किसी भी कारणवश वास्तविक अनुमन्य राशि से अधिक वित्तीय लाभ की राशि प्राप्त की जाती
है तो ऐसी दशा में आवेदक कम्पनी के औद्योगिक उपकम द्वारा, उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा
लॉजिस्टिक्स Aia-208 के अन्तर्गत वास्तविक अनुमन्य राशि से अधिक प्राप्त किये गये वित्तीय लाभ की
राशि को वापस किया जायेगा।
यह कि आवेदक कम्पनी के औद्योगिक उपकम द्वारा उपलब्ध करायी गयी सभी सूचनाएं / दस्तावेज, मेरी जानकारी
एवं विश्वास के अनुसार पूर्णतः सत्य है|
शपथकर्ता
सत्यापन
मैं ............ उपरोक्त नामित शपथकर्ता सत्यापित करता हूँ कि प्रस्तर । से 3 पर इंगित विवरण मेरी व्यक्तिगत
जानकारी के अनुसार सही है एवं कोई भी तथ्यपरक जानकारी wag नहीं गयी है एवं दोषरहित है। इसलिए ईश्वर
मेरी सहायता करें।
सत्याप्ति एवं हस्ताक्षरित ..................................... दिनांक .......
शपथकर्ता
_—
कम्पनी के निदेशक मंडल द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव, जिसके द्वारा शपथकर्ता को उपरोक्त शपथपत्र दाखिल करने हेतु
अधिकृत किया गया है, की प्रमाणित प्रति शपथपत्र के साथ संलग्न करें|कैद
अनुलग्नक-ग
qe cc nn पश्चिमाचल me नगर एवं
गाजियाबाद Blea)
फैजाबाद मण्डल झांसी मण्डल आगरा मण्डल
. .... फैजाबाद 4. झांसी 4. आगरा
2... अम्बेडकरनगर 2. जालौन 2. फिरोजाबाद
3. ... .बराबंकी 3. ललितपुर 3.. मैनपुरी
4. .... सुल्तानपुर चित्रकूट 4. मथुरा
5. ... अमेठी 4. बांदा अलीगढ़ मण्डल
गोरखपुर मण्डल 5. चित्रकूट 5. अलीगढ़
6. .... गोरखपुर 6. हमीरपुर 6. हाथरस
7. ... देवरिया 7. महोबा 7. कासगंज
8. ..... महाराजगंज 8. एटा
9. ... कुशीनगर मध्यॉचल मुरादाबाद मण्डल
| इलाहाबाद मण्डल 9. मरादाबाद
(0.... इलाहाबाद कानपुर मण्डल 0. बिजनौर
4. कौशाम्बी ।.. कानपुर नगर 4. सम्मल
2, फ्त्तेहपुर 2. कानपुर देहात {2. रामपुर
43. .... प्रतापगढ़ (रमाबाईनगरो 3. अमरोहा
वाराणसी मण्डल 3. इटावा मेरठ मण्डल
4. ... वाराणसी 4. औरैया 4. ARS
45. चन्दौली 5. फर्रुखाबाद 44. बुलन्दशहंर
6. जौनपुर 6. कन्नौज 6. हापुड (पंचशील नगर)
7. ... गाजीपुर लखनऊ मण्डल 47. बागपत
मिर्जापुर मण्डल 7. लखनऊ सहारनपुर मण्डल
8. ... मिर्जापुर 8. हरदोई 48. मुजफ्फरनगर
|9. ... सन्तरविदासनगर 9. लखीमपुर खीरी 9. शामली
(भदोही) 0. रायबरेली 20. सहारनपुर
20. WAAR t. सीतापुर बरेली मण्डल
आजमगढ़ मण्डल 42. उन्नाव 24. . बरेली
24. आजमगढ़ 22. बदायूं
22. . बलिया 23. पीलीभीत
23. मऊ 24. शहजहांपुर
देवीपाटन मण्डल ं
24. गोण्डा
25. ... बहराइच
सन्तकबीरनगर
26. ... बलरामपुर
27... श्रावस्ती
बस्ती मण्डल
28... बस्ती
30. सिद्धार्थनगर