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Date: 2018-02-27 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

''उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्सव नीति-2018''

Issued by औद्योगिक विकास विभाग · औद्योगिक विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

ज़रूर, दी गई नीति पाठ का सारांश निम्नलिखित है: **कार्यकारी सारांश** यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश (यूपी) की वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स नीति 2018 है, जिसका उद्देश्य राज्य में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूत करना है। नीति यूपी औद्योगिक निवेश और रोजगार संवर्धन नीति 2017 का पूरक है, जिसका उद्देश्य उद्योग और संबंधित बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इस नीति का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में राज्य में लॉजिस्टिक्स उद्योग के विकास का मार्गदर्शन करना है। दस्तावेज़ 27 फरवरी, 2018 से प्रभावी है। **मुख्य बातें** उद्देश्य: * लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की स्थापना के लिए निजी निवेश को बढ़ावा देना। * मौजूदा वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे का उन्नयन और सुधार करना। * प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र के हितों को बढ़ावा देना। * ग्रीन और इनोवेटिव लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहित करके प्रतिस्पर्धात्मक लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे का विकास करना। प्रमुख प्रावधान: * लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना के लिए प्रोत्साहन, जिसमें पूंजीगत ब्याज उपादान, बुनियादी ढांचा ब्याज उपादान, स्टाम्प ड्यूटी से छूट और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट शामिल है। * लॉजिस्टिक्स इकाइयों के लिए प्रोत्साहन, जिनमें पूंजीगत ब्याज उपादान, बुनियादी ढांचा ब्याज उपादान और स्टाम्प ड्यूटी से छूट शामिल है। * गुणवत्तापूर्ण भंडारण सुविधाओं का विकास, ग्रामीण इलाकों में खाद्य भंडारण सुविधाओं पर विशेष जोर। * सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहन। * नवाचार और इंटेलिजेंट लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन। * ग्रीन लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल परिवहन और कार्बन उत्सर्जन को कम करने जैसी तकनीकें शामिल हैं। * सिंगल विंडो क्लीयरेंस, समयबद्ध स्वीकृतियां, निर्बाध बिजली आपूर्ति और औद्योगिक सुरक्षा सहित व्यवसाय करने में आसानी की पहल। **प्रभाव विश्लेषण** **हितधारक: उत्तर प्रदेश सरकार** * **प्रभाव:** राज्य में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। * **आवश्यक कार्रवाई:** नीति के कार्यान्वयन और लॉजिस्टिक्स उद्योग के विकास का समर्थन करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और समर्थन प्रणाली का निर्माण करें। **हितधारक: लॉजिस्टिक्स उद्योग** * **प्रभाव:** लॉजिस्टिक्स इकाइयों की स्थापना और विस्तार के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। व्यवसाय करने में आसानी में सुधार होगा, जिससे अधिक निवेश होगा। * **आवश्यक कार्रवाई:** लॉजिस्टिक्स पार्क और इकाइयों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनों का लाभ उठाएं। आधुनिक तकनीक को अपनाएं और टिकाऊ प्रथाओं को लागू करें। **हितधारक: किसान और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग** * **प्रभाव:** गुणवत्तापूर्ण भंडारण सुविधाओं में सुधार से फसल नुकसान कम होगा, जिससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार होगा। * **आवश्यक कार्रवाई:** भंडारण और परिवहन आवश्यकताओं के लिए लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का उपयोग करें। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में नई तकनीकों का उपयोग करके बेहतर उत्पादकता और दक्षता हासिल करें। **हितधारक: उपभोक्ता** * **प्रभाव:** आपूर्ति श्रृंखला दक्षता में सुधार से कम कीमतों और बेहतर उत्पाद उपलब्धता के साथ, उपभोक्ताओं को सामान और सेवाओं की त्वरित डिलीवरी मिलेगी। * **आवश्यक कार्रवाई:** बेहतर लॉजिस्टिक्स के परिणामस्वरूप होने वाले लाभों का आनंद लें, जैसे कि कम कीमतें और उच्च गुणवत्ता वाले सामान और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला।

Key Entities Referenced

उत्तर प्रदेश वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति 2018: उत्तर प्रदेश में वेअरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई एक नीति। उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2017: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति, जिसके पूरक के रूप में वेअरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स नीति काम करती है। भारत सरकार: भारत सरकार, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अवस्थापना का दर्जा प्रदान करने के माध्यम से नीति को प्रभावित करती है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (डब्ल्यू.डी.एफ.सी.): एक प्रमुख माल ढुलाई गलियारा जो गाजियाबाद को मुंबई से जोड़ता है, और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, जिससे राज्य में आर्थिक गतिविधि सुगम होती है। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ई.डी.एफ.सी.): एक अन्य प्रमुख माल ढुलाई गलियारा जो उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, राज्य के पूर्वी क्षेत्रों को पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ता है।
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उत्तर प्रदेश शासन औद्योगिक विकास अनुभाग-6 संख्या: 6449 /77-6-8-एल.सी. 4778 लखनऊ : दिनांक 27] फरवरी, 2078 अधिसूचना भारत का संविधान के अनुच्छेद i62 के अन्तर्गत कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री राज्यपाल “उत्तर प्रदेश वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति-2078” प्रख्यापित करने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है। आलोक सिन्हा अपर मुख्य सचिव संख्या: ८ ५० () /77-6-78-एल.सी. 4/20:8 agate प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः- महालेखाकार, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद | (I) मुख्य सचिव/अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उ.प्र. । (2) समस्त अपर मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव /सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। (3) समस्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, उत्तर (4) प्रदेश | समस्त मण्डलायुक्त (5) (6) 7) (8) (9) / जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश | प्रबन्ध निदेशक, पिकप/ उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम। अधिशासी निदेशक, उद्योग ay, 2-a, माल wy, लखनऊ को इस अनुरोध के साथ प्रेषित कि कृपया प्रश्ननत संशोधन उद्योग ay की वेब-साइट पर आज हीं अपलोड कराते हुए i50 प्रतियां शासन at उपलब्ध कराने का कष्ट BEI आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर । निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद । (0) समस्त अनुभाग, अवस्थापना एवंऔद्योगिक विकास विभाग। (yy गार्ड पत्रावली। से, fh (ats fae पटेल) विशेष afउत्तर प्रदेश वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति 2078 T. प्रस्तावना नवीन प्रोद्यौगिकी, उपभोक्ताओं की नई अपेक्षाओं एवं व्यवसाय के नवीन स्वरूपों (मॉडलुस) के उदय के साथ ही लॉजिस्टिक्स उद्योग विश्व-स्तर पर त्वरित गति से प्रगति कर रहा है। राजस्व के सन्दर्भ में इस उद्योग में 2075 से 2024 तक 7.5 प्रतिशत की दर से सी.ए.जी.आर.(कम्पाउण्ड एनुअल ग्रोथ रेट) में वृद्धि की सम्भावना है (eRe इण्टरनेशनल रिपोर्ट, 2076)| एशिया पैसिफिक क्षेत्र विश्व में सबसे बड़ा एवं ga गति से वृद्धिमान बाजार है, जिसमें भारतवर्ष सबसे अधिक सम्भावनाओं वाले बाजारों में से एक है। भारत की लेजिंस्टिक्स परफॉरमेंन्स इन्डेक्स रैकिंग में तेजी से सुधार हो रहा है तथा वर्ष 2006 में १9 स्थानों के सुधार के साथ 35वें स्थान पर पहुँच गयी है (विश्व बैंक) । वर्ष 2076 से 2020 के मध्य इस उद्योग में 5-20 प्रतिशतू सी.ए.जी.आर.की वृद्धि की सम्भावना है (सीएआरई रेटिंग्स 206) तथा आशा है कि वर्ष 209 तक भारतीय लॉजिस्टिक्स उद्योग ©.73,000 करोड़ तक पहुँच जाएगा। भारत में कुल माल परिवहन का लगभग 60 प्रतिशंतू सड़क-मार्ग से होता है, जबकि tr एवं तटीय जहाजुरानी जल मार्ग का अंश क्रमशः प्रतिशत 32 प्रतिशत एवं प्रतिशत है। आन्तरिक जलमार्ग तथा हवाई-मार्ग, प्रत्येक का sist 7 प्रतिशत से भी कम हैं, जिससे राष्ट्रीय जलमार्ग कार्यक्रम Gea वॉटरवेज़ प्रोग्राम) तथा उड़्डयन क्षेत्र में क्षेत्रीय कनेक्टीविटी योजना (रीजनल waded स्कीम) के विकास के साथ इस क्षेत्र के व्यापक विस्तार का महत्व परिलक्षित होतां है। हाल ही में समस्त लॉजिस्टिक्स सेवाओं हेतु i00 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ्‌.डी.आई.) को eat (ऑटोमेटिक रूट) के अन्तर्गत स्वीकृति प्रदान की गयी है (हवाई-कार्गो एवं कुरियर के अतिरिक्त, जिसमें 74 प्रतिशत्‌ एफ.डी.आई. अनुमन्य है)। इसके अतिरिक्त वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लायू हो जाने से लॉजिस्टिक्स उद्योग की कुल लागत के और कम होने का अनुमान है। पूर्व में भिन्न-भिन्न कर-श्रेणियों के कारण कम्पनियों को प्रत्येक राज्य में वेअरहाउसेज़ स्थापित करने पड़ते थे। किन्तु वस्तु एवं सेवा कर लायू होने के कारण अब छोटे-छोटे कई वेअरहाउसेज़ के स्थान पर कम्पनियाँ व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर बड़े-बड़े वेअरहाउसेज़ स्थापित कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को अब देश में बुनियादी ढाँचे (अवस्थापकीय सुविधा) के रूप में मान्यता प्रदान कर दी गयी हैं। भारत सरकार के “मेक इन इण्डिया” कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उद्योग तथा सम्बन्धित अवस्थापना सुविधाओं में निवेश हेतु अनुकूल पारिस्थिकी तंत्र के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2077 एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति2077 घोषित की हैं। उत्तर प्रदेश वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति 208 का लक्ष्य उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2077 की पूरक के रूप में राज्य में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को सुदृढ़ करना है। 2. उत्तर प्रदेश-लाभ के अवसर उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य तथा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। देश के शीर्ष के पाँच विनिर्माण िन्‍्यूफक्वरिंग) प्रदेशों में से एक, उत्तर प्रदेश में ge, लघु एवं मध्यम उद्यमों (संगठित व असंगठित) की देश में दूसरी सर्वाधिक संख्या है। विगतू 5 वर्षों (2072-77) में प्रदेश से निर्यात में सी.ए.जी.आर. में 73.26 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश में 20 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला सबसे बड़ा उपभोक्ता आधार है, इसलिये लॉजिस्टिक्स उद्योग के विकास हेतु प्रदेश में प्रचुर संभावनाएं है। 24 उच्च-स्तरीय अवस्थापना सुविधाएं रणनीतिक रूप में स्वर्णिम चतुष्कोण (गोल्डन क्वाड़िलेटरल) पर स्थित तथा 8,949 किलोमीटर में फैले हुए सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क के साथ, उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक उद्योग के विस्तार हेतु आवश्यक वातावरण तैयार है। देश के प्रमुख राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अडूडों से जुड़ा होना प्रदेश को बाजार तक पहुँच का सामरिक लाभ प्रदान करता है। प्रमुख राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय हवाई ages लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर और वाराणसी में स्थित हैं। लखनऊ, कानपुर, मेरठ तथा वाराणसी में स्थापित होने वाली मल्टी-सिटी मेट्रो रेल परियोजनाएं तथा जेवर एवं कुशीनगर में बनने वाले अंतर्राष्ट्रीय हवाई aes प्रदेश में कनेक्टीविटी के लॉभ की स्थितिं को और अधिक geo कर रहे हैं। राष्ट्रीय wert (इलाहाबाद-हल्दिया अन्तरदेशीय जलमार्ग) परियोजना से पूर्वी उत्तर प्रदेश में Paice केन्द्रों (एक्सपोर्टिंग हब्स) को लाभ मिलने की सम्भावना है। दीर्घकालिक योजनां के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश सरकार वायु, जल एवं रेल कनेक्टीविटी सुविधाओं के नेटवर्क ar सृजन करेगी, जिससे राज्य की उद्योग एवं मैन्यूफैकचरिंग इकाइयों को परिवहन के विभिन्‍न माध्यमों से अपने उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने हेतु उत्कृष्ट व सुचारू सुविधाएं सुलभ हो wl 2.2 प्रमुख we कॉरीडोर्स तथा औद्योगिक कॉरीडोर्स उल्लेखनीय है कि देश में विकसित किए जा रहे दो औद्योगिक तथा फ्रेट कॉरीडोर्स - दिल्‍ली-मुम्बई इण्डस्ट्रििल कॉरीडोर (डी.एम.आई.सी.)-वेस्टर्न sees फ्रेट कॉरीडोर (डब्ल्यू.डी.एफ.सी.) तथा अमृतसर-कोलकता इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर (ए.के.आई.सी.)-ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट atte (ई.डी.एफ.सी.) के बड़े भाग उत्तर प्रदेश में हैं ।को वेस्टर्न डेडिकेटेड te कॉरीडोर (डब्त्यू.डी.एफ.सी.) एवं दिल्‍ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर (डी.एम.आई.सी.)ः गाजियाबाद में दादरी से मुम्बई में जवाहरलाल jee बन्दरगाह तक विकसित हो रहे डब्त्यू.डी.एफ.सी. से बन्दरगाह तक परिवहन-समय में कमी होगी, जिंससे राज्य में आर्थिक गतिविधि को aie मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के 72 जनपदों में 36,000 वर्ग किमी. का विस्तृत क्षेत्र डी.एम.आई.सी. परियोजना से areata है। इस परियोजना का अधिकतम लाभ अर्जित करने के उदूदेश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ग्रेटर नोएडा में इंटीग्रेटेड इण्डस्ट्रियिल टाउनशिप, दादरी में मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स ea तथा बोडांकी में मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट es जैसी परियोजनाओं के विकास में पूर्ण सहयोग कर रही है। इस कॉरीडोर के विकसित हो जाने के पश्चात मेरठ एवं मुजफ्फरनगर जैसे नये औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हो सकेगा। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ई.डी.एफ.सी.) एवं अमृतसर-कोलकता इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर (ए.के.आई.सी.): उत्तर प्रदेश में ई.डी.एफ.सी. परियोजना का 57 प्रतिशत आच्छादित क्षेत्र है जो पूर्वी क्षेत्र को पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार पूर्व से ही इस कॉरीडोर के संरेखण के पर इंटीग्रेटेड इण्डस्ट्रियिल टाउनशिप्स, इंटीग्रेटेड मैन्यूफक्चरिंग क्लस्टर्स तथा लॉजिस्टिक्स हब्स के विकास को प्रोत्साहित कर रही है। इसके अतिरिक्त कॉरीडोर के किनारे औद्योगिक परिक्षेत्रों के विकास हेतु राज्य सरकार ग्रीनफील्ड रेलवे स्टेशनों तथा परिक्षेत्रों को भी चिन्हित कर रही है, जहाँ सम्बन्धित लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा संकेगा। राज्य सरकार की ged डेडिकेटेड be कॉरीडोर के सरेखण से ae क्षेत्रों में माल-प्रेषण उद्योगों Ge कॉन्साइनिंग इण्डस्ट्रीज) के बाज़ार को विस्तारित की योजना है। 2,3 प्रमुख लॉजिस्टिक्स तथा निवेश परिक्षेत्र उत्तर प्रदेश में विद्यमान लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं में, मुरादाबाद में रेल से जुड़े संयुक्त घरेलू एवं एक्जिम (निर्यात-आयात) टर्मिनल, कानपुर में रेल से जुड़े प्राइवेट she टर्मिनल तथा अन्तरदेशीय कन्टेनर डिपो (इन्लैण्ड कन्टेनर डिपो-आई.सी. डी.) तथा दादरी टर्मिनल स्थित आई.सी.डी. व कानपुर आई.सी.डी. सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में नोएडा, बोराकी तथा वाराणसी में भी तीन मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स /ट्रॉसपोर्ट हब प्रस्तावित हैं । प्रदेश में पूर्व से स्थित तथा विकसित किए जा रहे इन समस्त सड़क एवं रेल तंत्रों की उपलब्धत्ता के ster विभिन्‍न निवेश परिक्षेत्रों तथा लॉजिस्टिक्स cer का विकास अत्यन्त महत्वपूर्ण है, जिससे इन अवस्थापना सुविधाओं का अधिकतम लाभप्राप्त किया जा सके। डी.एम.आई.सी. तथा ई.डी.एफ.सी.. परियोजनाओं सेआच्छादित क्षेत्रों (कैचमेट एरिया) से सटे क्षेत्रों के अतिरिक्त राज्य में कई अन्य स्थानों पर भी लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। इसमें दिल्‍ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पास मेरठ में तथा प्रस्तावित्त भाउपुर औद्योगिक क्षेत्र के निकट लॉजिस्टिक्स हब सम्मिलित हैं। इसी प्रकार 3,000 deter से अधिक के क्षेत्रफल में प्रस्तावित मुगलसराय-वाराणसी-मिर्जापुर निवेश परिक्षेत्र (इन्वेस्टमेण्ट जोन) के निकट पूर्वान्वल एक्सप्रेसवे के पास आजमगढ़ इस प्रयोजन हेतु एक उपयुक्त स्थान है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से we 5567 हेक्टेअर क्षेत्र में प्रस्तावित झाँसी राष्ट्रीय निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र (एनआईएमजेड) एक अन्य ऐसा स्थान है, जो उत्तर भारतीय राज्यों के लिये दक्षिण भारत के राज्यों तक पहुँचने का प्रवेशडार है। इसके अतिरिक्त, ear बंदरगाह की ओर जाने के लिये विकसित किये जाने वाले अन्तर्देशीय जलमार्ग (इनलैण्ड वाटरवे) के .साथ सटे हुये क्षेत्र में इलाहाबाद भी लेजिस्टिक्स पार्क विकसित करने के लिये अत्यन्त आकर्षक स्थानों में से एक हैं। 3. नीति-विषय उत्तर प्रदेश सरकार का विश्वास है कि राज्य में स्थाई व wag औद्योगिक विकास के लक्ष्य को प्रात करने हेतु वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का विकास अत्यन्त महत्वपूर्ण है। घरेलू एवं निर्यात बाज़ार में राज्य में निर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि हेतु एक जीवंत वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र होना आवश्यक है। इस क्षेत्र केविकास से राज्य में न केवल विनिर्माण एवं रोज़गार सृजन को प्रोत्साहन मिलेगा, अपितु प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में भी वृद्धि होगी। उपरोक्त विकासकारक तथ्यों के आलोक में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की सामरिक भौगोलिक स्थिति का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु अधिकतम लाभ उठाने के आशय से इस “वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स नीति” को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया है। औद्योगिकरण की त्वरित गति प्रदेश में और अधिक परिष्कृत लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्वर की एक बड़ी मांग सृजित कर रही है। जीएसटी लागू होने के कारण भारत एक एकीकृत बाजार बन गया है, तथा उत्तर प्रदेश में देश के मैन्युफक्चरिंग एवं वेअरहाउसिंग हब के रूप में उभरने की असीम सम्भानाएं हैं। राज्य में स्टेट वेअरहाउस कारपोरेंशन के अन्तर्गतू विंद्यमान बड़ीं संख्या में वेअरहाउसेज़, नेशनल eae मिशन के अन्तर्गत शीतगृह, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अधीन ग्रामीण भण्डारण गृह आदि की उपस्थिति में विशाल भण्डारण क्षमता है। वर्तमान में, उत्तर प्रदेश A 77.94 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले लगभग १74 वेअरहाउसेज़ हैं। तथापि यह क्षमता बढ़ती हुई भण्डारण आवश्यकताओं के लिये पर्याप्त नहीं है। इसलिये प्रदेश की भण्डारण क्षमता को विस्तारित किये जाने पर बल दिया जा रहां है।इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार का उदूदेश्य निम्नलिखित श्रेणियों तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना है- e वेअरहाउंसिंग, Wena, शीतगृह तथा संबंधित क्षेत्र ० ई-कॉमर्स हब ० रियल टाइम लॉजिस्टिक्स में तकनीकी समाधान, सप्लाई चेन प्रबन्धन तथा प्रोसेस इम्प्रवमेंट ० वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रोबोटिक्स तथा स्वचालन(ऑटोमेशन) ० कौशल विकास एवं प्रशिक्षण यह नीति, प्रदेश की औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति- 207 के विज़न और उद्देश्य को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगामी 5 वर्षों में प्रदेश में लॉजिस्टिक उद्योग के विकास हेतु दिशा प्रदान करती है। 3.. नीति के उदुदेश्य ० फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड लिन्केजेस के साथ प्रदेश में लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की स्थापना हेतु निजी निवेश को बढ़ावा देना। ० आर्थिक गतिविधियों तथा geq स्तर पर रोज़गार प्रोत्साहन हेतु विद्यमान वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण तथा सुधार । © प्रदेश की भण्डारण क्षमता में वृद्धि करते हुये प्राइमरी एवं dad seed के हित को बढ़ावा देना। ० ग्रीन एवं इनोवेटिव लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देते हुये प्रदेश में प्रतिस्पर्धी लेॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करना। 3.2. परिभाषाएं इस नीति के अन्तर्गत लॉजिस्टिक्स पार्क तथा अन्य लॉजिस्टिक्स इकाईयों पर लागू होने वाले प्रोत्साहनों को निम्नवत परिभाषित किया गया है- : ... लेजिस्टिक्स पार्क- प्रदेश में न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किये जाने वाला लॉजिस्टिक्स पार्क, जिसमें कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस) तथा/अथवा अन्तर्देशीय कन्टेनर डिपो (आईसीडी) तथा/अथवा एयर फ्रेट Vera तथा/अथवा वेअरहाउसेज़ तथा/अथवा कोल्ड चेन्स एवं संबंधित अवस्थापना सुविधाएं सम्मिलित हो,इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु पात्र होगा। इस प्रकार के पार्क में निम्न सेवायें एवं अवस्थापना सुविधाएं सम्मिलित होंगी- ० लेजिस्टिक्स सेवायें- पार्क की अवाश्यकताओं के अनुसार art एग्रीगेशन/सेग्रीगेशन, fae, सामग्री एवं ae के इन्टर-मॉडल ट्रांसफर, चालू तथा बन्द भंडारण, कार्गी ट्रांज़िट अवधि में भण्डारण अनुकूल स्थिति, सामग्री प्रबन्धन उपकरण तथा व्यापार एवं व्यावसायिक सुविधाएं एवं कॉमन सुविधाएं | ० सहायक अवस्थापना सुविधाएं-पार्क की अवाश्यकताओं के अनुसार अवस्थापना सुविधाएं यथा- आन्तरिक सड़क मार्ग, संचार सुविधाएं, खुला तथा हरित स्थान, जल आपूर्ति तंत्र (वाटर पाइप-लाइन्स), सीवेज एवं ड्रेनेज प्रणाली, डिस्पोज़ल सुविधाएं,विद्युत्त वितरण व्यवस्था की स्थापना, फीडर,सौर ऊर्जा tart इत्यादि। भारत सरकार द्वारा लॉजिस्टिक्स अवस्थापना के रूप में लॉजिस्टिक्स इंकाइयों की परिभाषा का अनुसरण करते हुए यह नीति निम्नलिखित मानदण्डों को पूर्ण करने वाली लॉजिस्टिक्स इकाइयों को प्रोत्साहन प्रदान करेगी- 2. कंटेनर Be स्टेशन (सी.एफ.एस.) अथवा अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी),जिसमें न्यूनतम रु. 50 करोड़ का निवेश किया गया हो तथा न्यूनतम क्षेत्रफल 0 एकड़ हो ।। 3... वेअरहाउसिंग सुविधा, जिसमें न्यूनतम रु. 25 करोड़ का निवेश किया गया हों तथा न्यूनतम क्षेत्रफल लाख वर्ग फीट हो। 4, कोल्डचेन सुविधा, जिसमें न्यूनतम रु. is करोड़ का निवेश किया गया हो तथा न्यूनतम क्षेत्रफल 20,000 वर्ग फीट हो। 3.3. नीति का क्रियान्वयन ० यह नीति अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी तथा 05 वर्षों at अवधि तक लागू रहेगी। ० किसी भी चरण पर, यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे नीति में संशोधन अथवा At के अधिक्रमण की आवश्यकता होती है, तो ऐसे aster अतिकमण को अनुमोदित करने हेतु मा. मंत्रि परिषद ही अधिकृत होगी।०. यदि इस नीति में कोई संशोधन किया जाता है, तो भी राज्य सरकार द्वारा इकाई को पूर्व में किसी प्रोत्साहन पैकेज का वचन दिए जाने पर, उसे वापस नहीं लिया जायेगा एवं इकाई को लाभ मिलते रहेंगे। 4. नीति संरचना (फ्रेमवर्क) 4. Witter क्षेत्र कों अवस्थापना के रूप में मान्यता-इस क्षेत्र के महत्व के दृष्टिगतू भारत सरकार ने पुनः्नामित “ट्रांसपोर्ट एवं. लॉजिस्टिक्स' श्रेणी के अन्तर्गत “लॉजिस्टिक्स SR” को नए मद के रूप में सम्मिलित किया हैं। इसके अन्तर्गत मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, जिसमें इस नीति के अधीन परिभाषित अन्तर्देशीय कन्टेनर डिपो (आईसीडी), कोल्ड चेन सुविधा तथा वेअरहाउसिंग सुविधा को अवस्थापना के रूप में मान्यता प्रदान की गई हैं। इससे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को आसान शर्तों तथा बढ़ी हुई सीमा के अनुसार अवस्थापना ऋण उपलब्ध हो सकेगा, वाहूय वाणिज्यिक ऋण (एक्सटर्नल कॉमर्शियल बौरोइंग- ई.सी.बी.) के रूप में अधिक धनराशि, बीमा कम्पनियों से दीर्घकालिक वित्त पोषण एवं पेन्शन निधि प्राप्त हो सकेगी तथा यह क्षेत्र इण्डिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेन्स कम्पनी लि. (आई-आई.एफ.सी.एल.) से ऋण ले सकेगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नीति के माध्यम से लॉजिस्टिक्स उद्योग के प्रोत्साहन हेतु भारत सरकारके विजन को आगे बढ़ाएगीं। 42 लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को उद्योग के रूप में मान्यता-भारत सरकार द्वारा 'इन्फ्ास्ट्रक्चर स्टेट्स” हेतु निर्दिष्ट शर्तों को पूर्ण करने वाली वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को प्रदेश में “उद्योग” का दर्जा भी प्रदान किया जाएगा। यद्यपि वेअरहाउसिंग के लिए भूमिं आवंटन हेतु विकास प्राधिकरणों art पात्रता शर्तें एवं दर निर्धारित की जाएंगी । विकास प्राधिकरणों द्वारा वेअरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों हेतु 60 प्रतिशत तक की ग्राउण्ड कवरेज की अनुमति भी दी जाएगीं। 4.3 लॉजिस्टिक्स के विकास हेतु समर्पित एजेन्सी-राज्य सरकारकी अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अन्तर्गत सचिव स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एक समर्पित लॉजिस्टिक्स प्रभाग(डिवीज़न) की स्थापना की योजना है। यह प्रभाग प्रदेश में लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु विभिन्‍न संबंधित विभागों, यथा-नागरिक उड्डयन, परिवहन, ऊर्जा, खादूय एवं कृषि तथा अन्य सम्बन्धित विभागों के साथ बेहतर समन्वयन सुनिश्चित करेगा। एक्जिर्म(निर्यात-आयात) art हेतु ग्रीन चैनल का विकास -प्रदेश में एक्ज़िम कार्गों 4.4 का परिवहन करने Tet वाहनों को होने वाले विलम्ब की रोकथाम के लिए Etre में कम निरीक्षण वाले) ग्रीन daca चिन्हित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की समस्तप्रमुख नगरों में व्यापक ट्रांसपोर्ट ज़ोन्स (ट्रासपोर्ट नगर) को विकसित करने की योजना है, जिनमें प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य went, एक्सप्रेसवेज, निवेश क्षेत्रों तथा इण्डस्ट्रिल कॉरिडोर्स के समीप ट्रक efter को विकसित किया जाना सम्मलित है। इन व्यापक ट्रान्सपोर्ट oie तथा टर्मिनल्स में माल ढोने वाले वाहनों के लिए कार्यशालाएं, भोजनालय, विश्राम-गृह इत्यादि कॉमन सुविधाएं उपलब्ध होंगी । निःशुल्क व्यापार एवं वेअरहाउसिंग waa (फ्री ट्रेड we वेअरहाउसिंग जोन 4.5 -एफटीडब्लूजेड)-राज्य में निर्वाध रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं के आयात व नियत के Gas संचालन हेतु उत्तर प्रदेश सरकार अन्तर्देशीय कंटेनर eats, शुष्क बन्दरगाहों (ड्राई पोर्ट्स) तथा विद्यमान एवं विकसित किए जा रहे एक्सप्रेसवेज, राजमागों एवं फ्रेट कॉरीडोर्स के समीप्रवर्ती क्षेत्रों में एफटीडब्लूजेड्स की स्थापना का प्रयास करेगी। इन परिकषेत्रों में कस्टमाइज्ड वेअरहाउसिंग, शीतगृह, कार्यालय ढेतु स्थान, परिवहन व हैण्डलिंग सुविधाएं, यथा-स्वास्थ्य केन्द्र, भोजनालयं आदि के साथ ही निर्वात-आयात हेतु एकल बिन्दु स्वीकृति व्यवस्था उपलब्ध होगी। 4.6 लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र (जोन)-उत्तर भारत को देश के पूर्वी एवं पश्चिमी secre से जोड़ने वाले दो मुख्य Re कॉरीडोर्स - ted डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर तथा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर का जंक्शन दादरी में होने के कारण, राज्य सरकार इस क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र के रूप में विकसित करने को विशेष महत्व देगी। इसी प्रकार भाउपुर व नैनी को भी लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर इस प्रकार के लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्रों को चिन्हित व घोषित करेगी। इन परिक्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा बाधारहित कनेक्टिविटी, उत्कृष्ट सामाजिक एवं भौतिक अवस्थापना सुविधाएं, 24/7 जलापूर्ति तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इस नीति में परिभाषित लॉजिस्टिक्स पाकों को राज्य सरकार वाहूय परिधीय सम्पर्क अवस्थापना सुविधाओं, यथा- सड़क, जल, विद्युत आपूर्ति, Bees, गैस तथा उठ्मवाह निष्कासन व्यवस्था को उपलब्ध कराने में सहायता करेगी। 4.7 लॉजिस्टिक्स अवस्थापकीय आवश्यकताओं का निर्धारण - उपर्वर्णित तथा सम्बन्धित सुविधाओं सहितअतिरिक्त लॉजिस्टिक्स परिक्षेत्रों, विशेषतः वेस्टर्न डेडिकेटेड te कॉरीडोर तथा ged डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर, विद्यमान एवं प्रस्तावित एक्सप्रेसवे (यथा- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, wie एक्सप्रेसवे ane), राष्ट्रीय awn (sarees), बुन्देखखण्ड क्षेत्र (राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर झाँसी) तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की आवश्यकताओं के आकलन हेतु राज्य सरकार नियमित रूप से अध्ययन व॑ सर्वेक्षण करवाएगी।अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) को प्रोत्साहन - वर्तमान में प्रदेश में दादरी, 4.8 आगरा, मिर्जापुर, मुरादाबाद, कानपुर आदि नगरों में प्रमुख आईसीडी हैं तथा नोएडा, बोडाकी एवं वाराणसी में मुख्य मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स ट्रांसपोर्ट हब प्रस्तावित हैं। राज्य सरकार ऐसे उपयुक्त स्थानों में, जहाँ रोड Sted, 4 लेन एवं 6 लेन राजमार्गों का गुणवत्तापरक नेटवर्क, इण्टर-लिंकिग सड़कें उपलब्ध हों, ड्राई पोर्ट्स तथा अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो को ges करने पर बल देगी। गुणवत्तापूर्ण भण्डारण सुविधाएं- प्रदेश में त्वरित गति से प्रगति कर रहे कृषि एवं 49 खाद्य तथा अन्य उद्योगों, जैसे priate, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग आदि की आवंश्यकताओ को पूर्ण करने के लिए राज्य सरकार युणवत्तापूर्ण भण्डारण सुंविधाओं, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में aga भंडारण की सुविधाओं, के विकास को बढ़ावा देगी। भंडारण सुविधाओं में वेअरहाउसेज, met तथा शीतगृह एवं सम्बन्धित अवस्थापना सुविधाएं सम्मिलित हैं। प्रदेश में निजी संस्थाओं को उपयुक्त स्थानों पर इन सुविधाओं के विकास किये जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा तथा मौजूदा भण्डारण सुविधाओं में निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार सुधार किया जाएगा। 4,0 सार्वजनिक निजी सहभागिता (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) को प्रोत्साहन -राज्य सरकार प्रदेश में आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के सृजन हेतु सार्वजनिक निजी सहभागिता को प्रोत्साहित करेगी | नवाचार एवं प्रज्ञ(इन्टेलीजेन्ट) लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन-दंक्षता संवर्धन करने वाली प्रणालियों तक पहुंच को उपलब्ध कराने एवं आधुनिक प्रोदयौगिंकी को अंगीकृत करने में सक्षम बनाने हेतु राज्य सरकार बेहतर यंत्रों, यथा-बड़े एवं सुविधायुक्त ट्रक, उच्च भार क्षमता वाले रेलवे वैगन इत्यादि की अधिप्राप्ति को प्रोत्साहित करेगी। राज्य सरकार इण्टर-मोडल ट्रांसपोर्ट तथा लॉजिस्टिक्स हब्स में कन्टेनर्स, Ieee, Sar इत्यादि के मानकीकृत अभिन्‍्यास (लेआउट)के विकास को भी बढ़ावा देगी। राज्य में कम लागत से उत्तम गुणवत्ता की इन्टर-लिकिंग सड़कों जैसी सहायक अवस्थापना सुविधाओं के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी। इसके अतिरिक्त इस संदर्भ में इस नीति का उद्देश्य सप्लाई चेन में डिज़ीटाइनशन तकनीकों, नवाचार तथा ऑटोमेशन को बढ़ावा देना है। 4.2 ग्रीन लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन-राज्य सरकार का उदूदेश्य प्रदेश में एक पर्यावरण-अनुकूल तथा टिकाऊ लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन व्यवस्था का सुजन करना है। ग्रीन लॉजिस्टिक्स ऐसी तकनीकें हैं, जिनका उदेदश्य लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल परिवहन, कार्बन उत्सर्जन को AT करने, ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन, साइंटिफिकडिस्पोज़ल तकनीक,बायो-डिग्रेडेबल वस्तुओं का उपयोग, रिसाइंक्लिंग तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा आदि को अपनाया जाना शामिल हैं। इस प्रकार ग्रीन लॉजिस्टिक्स को इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस संदर्भ में इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों के उपयोग को alsa cect एवं लॉजिस्टिक्स oat में बढ़ावा दिया जाएगा। सौर-ऊर्जायुक्त लॉजिस्टिक्स पार्क को प्रोत्साहन - स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता के दृष्टिगत्राज्य सरकार लॉजिस्टिक्स पार्क के विकासकर्ताओं को ऊर्जा के नवीन एवं नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करेगी। 4. 4 लॉजिस्टिक्स कौशल विकास- लॉजिस्टिक्स उद्योग में विस्तार के परिणामस्वरूप वेअरहाउस प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स प्रबंधन, भारी-वाहन चालकों आदि जैसे कुशल कर्मियों की मांग बढ़ रही है। इसलिए राज्य सरकार प्रदेश में क्षेत्र-विशेष पाठूयक्रमों को प्रारम्भ करेगी तथा उद्योग की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण के वर्तमान बुनियादी ढांचे के उन्नयन पर विशेष बल देगी। 5. निजी लॉजिस्टिक्स पार्क हेतु प्रोत्साहन उत्तर प्रदेश सरकार 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित किये गये लॉजिस्टिक्स wet को प्रोत्साहन प्रदान करेगी। इन पार्कों को निम्नलिखित प्रोत्साहन दिये जाएंगे- 5.] पूँजीगत ब्याज उपादान- सामग्री हैण्डलिंग उपकरण, लोडिंग एवं अनलोडिंग are एवं मशीनरी के क्रय हेतु लिए गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्षों हेतु पूँजीगत ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमारु. 2 करोड़ प्रतिवर्ष तथा रु. to करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक पूँजीगत ब्याज उपादान प्रदान किया जाएगा। 5.2 अवस्थापना ब्याज उपादान -अवस्थापना सुविधाओं के विकास, यथा- सड़कों, ड्रेनेज, विद्युत वित्तरण लाइनों की स्थापना, सौर ऊर्जा पैनल्स हेतु लिए गए ऋण पर प्रतिपूर्ति के रूप में 5 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत तक, अधिकतम रु.2 करोड़ प्रतिवर्ष तथा रु. 70 करोड़ की कुल अधिकतम सीमा तक अवस्थापना ब्याज उपादान प्रदान किया जाएगा। स्टॉम्प ead से छूट-लॉजिस्टिक्स पार्क के विकासकर्ता द्वारा भूमि क्रय करने पर 5.3 स्टॉम्प डूयूटी पर t00 प्रतिशत छूट /प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। 5.4 इलेक्ट्रिसिटी डूयूटी से छूट-लॉजिस्टिक्स पार्क के विकासकर्ता को इलेक्ट्रिसिटी डूयूटी से lo वर्ष की अवधि हेतु i00 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी ।5.5 ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति सुविधा-विकासकर्ता को i00 अथवा उससे अधिक अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करने पर, नियोकता के अंश के 50 प्रतिशत की दर से तथा जो 200 कुशल एवं अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोज़गार प्रदान करने पर, उन्हें अतिरिक्त i0 प्रतिशत की दर से ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति की सुविधा राज्य सरकार द्वारा केवल उन पाकों इकाइयों को agar होगी ot भारत सरकार की नीति से आच्छादित नहीं होते हैं । 5.6 भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क-विकासकर्ता को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी | 5.7 विकास शुल्क-पार्क से विकास शुल्क केवल विकास प्राधिकरण की महायोजना (मास्टर प्लान) क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं के उपयोग पर लिया जाएगा, किसी भी सुविधा का उपयोग ने करने पर एक सांकेतिक (टोकन) धनराशि का भुगतान करनां होंगा। 5.8 कौशल विंकास प्रोत्साहन-वेअरहाउस प्रबन्धन, लॉजिस्टिक्स प्रबन्धन one विषयों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने पर विकासकर्ता को वर्तमान में राज्य सरकार दारा संचालित कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत कौशल विकास प्रोत्साहन की सुविधा अनुमन्य होगी | wa (इन्टेलीजेन्ट) लॉजिस्टिक्स हेतु प्रोत्साहन- मल्टी-मोडल ट्रान्सपोर्ट cor अथवा 5.9 लॉजिस्टिक्स wet अथवा कंटेनर Be Reaves कंटेनर डिपो (सीएसएफ/आईसीडी) में सामग्री हैंडलिंग, art परिवहन तथा ari ट्रेफिक की डी-कन्जेस्टिंग हेतु स्वाचलित सप्लाई चेन weet स्थापित करने हेतु लिए गये ऋण पर 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा o. करोड़ प्रति पार्क होगा। 6. लॉजिस्टिक्स इकाइयों हेतु प्रोत्साहन इस नीति में परिभाषित लॉजिस्टिक्स इकाइयाँ निम्नलिखित प्रोत्साहनों की पात्र होंगी- पूँजीगत ब्याज उपादान-सामग्री हैण्डलिंग उपकरण, लोडिंग एवं अनलोडिंग प्लान्ट एवं 6.4 मशीनरी के क्रय हेतु लिए गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्षों हेतु पूँजीगत ब्याज उपादान के रूप में ब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा रु. 50 लाख प्रतिवर्ष प्रति इकाई होगी | 6,2 अवस्थापना ब्याज उपादान-सड़क, जल्न-निकासी, विद्युत लाईन्स के निर्माण, सौर ऊर्जा ines इत्यादि ta स्वयं के उपयोगार्थ बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु लिए गये ऋण पर 5 प्रतिशत की दर से 5 वर्षों हेतु अवस्थापना ब्याज उपादान के रूप मेंब्याज की प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी प्रतिवर्ष अधिकतम सीमा e.reds होगी तथा कुल अधिकतम सीमा रु. 5 करोड़ होगी । 6.3 इलेक्ट्रसिटी ace छूट-सभी नई लॉजिस्टिक्स इकाइयों को इलेक्ट्रिसिटी eq से 0 वर्ष की अवधि हेतु i00 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी । 6.4 स्टैम्प gat में छूट- बुन्देलखण्ड एवं पूर्वीन्वल क्षेत्र में i00 प्रतिशत, मध्यान्वल एवं पश्चिमांचल (गौतमबुद नगर तथा गाजियाबाद को छोड़कर) क्षेत्र में 75 प्रतिशत तथा गौतमबुड नगर तथा गाजियाबाद जनपद में 50 प्रतिशत की दर से स्टाम्प शुल्क पर al 6.5 ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति सुविधा-सभी नई लॉजिस्टिक्स इकाइयाँ, जो t00 अथवा उससे अधिक अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करती हैं, को Palen के अंश के 50 प्रतिशत्त की दर से तथा जो इकाइयाँ 200 कुशल एवं अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोज़गार प्रदान करती हैं, उन्हें अतिरिक्त 0 प्रतिशत की दर से ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति की सुविधा राज्य सरकार द्वारा केवल उन पाकों /इकाइयों को अनुमन्य होगी जो भारत सरकार की नीति से आच्छादित नही होते हैं । 6.6 भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क-परिभाषित लॉजिस्टिक्स इकाइयों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी । 6.7 विकास शुल्क-विकासकर्ता को स्थल चयन ध्यानपूर्वक इस प्रकार करना होगा कि प्रस्तावित स्थल के अधिकतम so मीटर दूरी के अन्दर आवश्यक समस्त ट्रंक सुविधायें यथा-जलापूर्ति, जल-मल्ल निस्तारण, सॉलिड वेस्ट डिस्पोज़ल, विद्युत्त आपूर्ति तथा निर्धारित चौड़ाई की पक्की निर्मित सड़क पर्याप्त रूप से उपलब्ध a ऐसी स्थिति में विकास कर्ता को योजना के सम्पूर्ण क्षेत्रफल पर aes विकास शुल्क की देयता में 50 प्रतिशत्त की पूर्ण छूट होगी। योजना के समस्त आंतरिक विकास कार्य विकासकर्ता द्वारा अपनी लागत पर स्वयं क्रियान्वित्त किये जायेंगे। विकासकर्ता द्वारा योजना के निवासियों के लिये जलापूर्ति, जल-मल निस्तारण, सॉलिड वेस्ट Reta, विद्युत आपूर्ति की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जायेगा। इस हेतु प्रस्तावित स्थल यदि किसी भी ट्रंक अवस्थापना सुविधा से निर्धारित सीमा 50 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित होने at स्थिति में उक्त छूट aga नहीं होगी और आवेदक से पूर्ण विकास शुल्क एवं भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क उदूगुहीत होगा। वेअरहाउसेज का गुणवत्ता waren सर्टिफिकेशन)- नीति में परिभाषित 6.8 इकाइयों को गुणवत्ता प्रमाणन की लागत की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 6.7.50 लाख होगी।6.9 कौशल विकास प्रोत्साहन-वेअरहाउस प्रबन्धन, लॉजिस्टिक्स प्रबन्धन आदि विषयों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने वाली इकाइयों st अधिकतम 50 प्रशिक्षु प्रतिवर्ष के अनुसार 06 माह तक G. i000 प्रतिमाह प्रति-प्रशिक्षु की प्रतिपूति 5 वर्षों तक प्रदान की जायगी। नोट - « बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल क्षेत्रों तथा अधिसूचित लॉजिस्टिक्स wet में इस नीति में उल्लिखित पात्र निजी लॉजिस्टिक्स पाकों एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को पूंजीगतू ब्याज उपादान तथा अवस्थापना AM उपादान पर 0 प्रतिशत अतिरिक्त प्रदान किया जाएगा। अतः निजी लॉजिस्टिक्स पाकों एवं लॉजिस्टिक्स इकाइयों को पूंजीगत ब्याज उपादान तथा अवस्थापना ब्याज उपादान प्रतिपूर्ति के रूप में प्रतिवर्ष 5.5 प्रतिशत की सीमा एवं निर्धारित अवधि तक प्रदान की जाएगी, जिसकी सीमा प्रतिवर्ष 2.2 करोड़ एवं 5 वर्ष Hae करोड़ होगी। « इस नीति के अन्तर्गत परिभाषित परियोजनाओं हेतु प्रतिपूर्ति, उपादान, छूट आदि समस्त प्रोत्साहन परिभाषित इकाइयों द्वारा किए गए स्थाई पूंजी निवेश के अधिकतम t00 प्रतिशत की सीमा तक होंगे तथा वार्षिक अधिकतम सीमा स्थाई पूंजी निवेश की 75 प्रतिशतू होगी । 7. व्यापार करने में सहजता Ga ऑफ डूईंग बिजनेस) उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-207 के विजन एवं मिशन को आगे बढ़ाते हुए यह नीति प्रदेश में व्यापार करने में gen सुनिश्चित करती है। 7... सिंगल विण्डो-लॉजिस्टिक्स इकाईयों हेतु आवश्यक समस्त स्वीकृतियाँ मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में क्रियाशील राज्य के सिंगल Rest सिस्टम के माध्यम से प्रदान की जाएंगी | 7.2 समयबद्ध स्वीकृतियाँ-शीघ्र एवं समयबद्ध स्वीकृतियों प्रदान करना इस नीति के मुख्य उददेश्यों में से एक है। इस दिशा में अधिनियम के माध्यम से समस्त सेवाओं /स्वीकृतियों /अनुमोदनों /अनुमतियों / अनुज्ञा आदि का समय से निर्गत किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। 7.3 गुणवत्तापरक विद्युत आपूर्ति-औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 20:7 के प्राविधानों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार वेअरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को 24/7 Pate एवं गुणवत्तापरक विद्युत्त आपूर्ति हेतु प्रतिबद्ध है। 74 औद्योगिक सुरक्षा- उत्तर प्रदेश सरकार राज्य सें निरापद एवं सुरक्षित औद्योगिक वातावरण प्रदान करेगी।7.5 स्वीकृतियों प्रदान करने की प्रक्रिया ar सरलीकरण- इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहनों की स्वीकृतियों को युक्तिसंगत रूप से प्रदान करने हेतु निम्न प्राविधान किये जाएंगे- 7.5. प्रशासनिक सरलीकरण- नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहनों की स्वीकृति एवं वित्तरण की प्रक्रिया का सरलीकरण करने के उद्देश्य से एक प्राधिकृत समिति गठित की जाएगी। 7.5.2 वित्तीय सरलीकरण-नीति के अन्तर्गत समस्त प्रोत्साहनों हेतु एक स्वीकृति-पत्र निर्गत किया जाएगा तथा एकल बजट मद का सृजन किया जाएगा। नोट- लॉजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग saga जो किसी अन्य नीति के अन्तर्गत अथवा राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग द्वारा स्वीकृत प्रोत्साहनों का लाभ प्राप्त करती हैं, तोवे इस aie में उल्लिखित प्रोत्साहन/लाभ प्राप्त करने की भी पात्र होंगी, बशर्ते इन इकाईयों द्वारा एक ही प्रकार का लाभ किसी अन्य नीति के अन्तर्गत प्राप्त नहीं किया जा रहा हो। RRR

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