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उत्तर प्रदेश शासन
औद्योगिक विकास अनुभाग-6
संख्या: D9 2_/77-6- 8-03 /8
लखनऊ : दिनांक (6 जुलाई, 2078
अधिसूचना
भारत का संविधान के अनुच्छेद 62 के अन्तर्गत कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग करते
हुए श्री राज्यपाल महोदय “उत्तर प्रदेश रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन
नीति-208'' प्रख्यापित करने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।
\
2... उत्तर प्रदेश रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन Ait-2078, अधिसूचना
के निर्गत होने की तिथि से 05 वर्ष तक प्रभावी रहेगी।
राजेश कुमार सिंह
प्रमुख सचिव
संख्या: 2742 ()/77-6-78-va.t.03/208 Tales
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवंआवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः-
| महालेखाकार, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद |
. मुख्य सचिव /अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उ.प्र. |
समस्त अपर मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव /सचिव, उत्तर प्रदेश शासन |
समस्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश |
समस्त मण्डलायुक्त
छा
/ जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश।
« प्रबन्ध निदेशक, परिकप /उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम ।
UB WwW hk =
, Zo अधिशासी निदेशक, उद्योग sy, 2-dt, माल एवेन्यू, लखनऊ को इस अनुरोध के साथ प्रेषित कि
कृपया प्रश्नगत नीति उद्योग sy की वेब-साइट पर आज ही अपलोड कराते हुए 750 प्रतियां शासन को
उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
8. आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर ।
9. निदेशक, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद ।
0. समस्त अनुभाग, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग।
T4.8 पत्रावली।
आज्ञा से,
(अंकित कुग्रेड "अग्रवाल
विशेष
3उत्तर प्रदेश रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन *ffi-2078
4. . प्रस्तावना
गत तीन वर्षों (2074-75 से 2076-7) में सकल घरेलू उत्पाद में निरन्तर 7 प्रतिशतू की वृद्धि दर के
साथ भारतीय अर्थव्यवस्था ने विश्व में अग्रणी स्थान बना रखा है। वृहदू जनसांख्किय लाभ से पोषित
भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की सबसे गतिमान अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता है। मैन्युफैक्चरिंग
क्षेत्र इस आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है, जो भारत को विश्वस्तरीय मैन्युफैक्वरिंग हब के रूप में स्थापित
करने की दिशा में अग्रसर है।
राजस्व के सन्दर्भ में रक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्र का वैश्विक बाजार रु. 64 लाख करोड़ का होने का अनुमान
' है (2076), जिससे 20 लाख लोगों को रोज़गार प्राप्त हुआ है। विश्व में भारतीय थल सेना, तीसरी सबसे
बड़ी थल-सेना है, जबकि वायु-सेना चौथे एवं नौसेना सातवें स्थान पर है। भारत विश्व में रक्षा उत्पादों का
पांचवाँ सबसे बड़ा क्रेता (SIPRI 2047- Stockholm International Peace Research Institutejat के
कारण रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण का एक महत्वपूर्ण बाजार है।
-तलिका 7- भारत का रक्षा व्यय
वर्ष ss /व्ययरुपये करोड़ में)...
2072-73 | 8805
203-4 203575
2074-5 222365
205-6 246740
206-7 249080
207-8 (बजट प्राक्कलन) 347750
Get: CH मंत्रालय, ANT सरकार एवं आई.डी.एस.ए: ( युएसडीलर,65/
भारत के रक्षा बाजार में निरन्तर वृद्धि हो रही है तथा वित्तीय वर्ष 2037-8 के केन्द्रीय बजट में भारत
सरकार ने रक्षा मंत्रालय हेतु रु. 3.6 लाख करोड़ का आवंटन किया है जो वर्ष 2076-77 तथा 2077-78
के मध्य रक्षा बजट में 5 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष 20I7-78 के रक्षा बजट में पूंजीगत व्यय का अंश
लगभग 33 प्रतिशत था। स्पष्ट है कि भारत की रक्षा- उत्पाद आवश्यकताओं की अधिकांश पूर्ति आयात पर
निर्भर है, अतः इस क्षेत्र में आयात के प्रतिस्थापन की वृहद सम्भावना है। वर्तमान पूंजीगत क्रय
आवश्यकताओं के आधार पर ऐसी सम्भावना है कि भारतीय रक्षा ऑफ-सेट बाजार में आगामी कुछ वर्षों में
Ta वृद्धि हो सकती है।
इस अवसर का लाभ उठाने हेतु भारत सरकार दारा रक्षा अधिप्राप्ति प्रक्रिया (Defence Procurement
Procedure)2076 निर्गत की गयी है, जिसमें सुरक्षा (5४८.ा7४) में स्वावलम्बन प्राप्त करने के सन्दर्भ में दो
मौलिक नीतियों, यथा- “स्वदेशीकरण' एवं “सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन” पर बल दिया गया है।
NYस्वदेशीकरण को बढ़ावा देने हेतु एक नई श्रेणी- “भारतीय आई.डी.डी.एम. wa’(Buy Indian IDDM)
('इण्डियन डिज़ाइण्ड Same एण्ड मैन्युफैक्चर्ड'-आई.डी .डी.एम.) को अधिकतम वरीय मार्ग (Preferred
route) के रूप में सम्मिलित किया गया है। रक्षा परियोजनाओं के विकास के लिए उद्योग वित्त-पोषण को
सक्षम करने हेतु AH (Make-ll) का एक अन्य प्राविधान भी सम्मिलित किया गया है।
मेक-। और मेक-।। परियोजनाएं क्रमशः रु. i0 करोड़ तथा रु. 3 करोड़ के पूंजीगत उदुव्यय (Capital
Outlay) के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम veri के लिए आरक्षित हैं। एक अन्य पहल में रक्षा अधिप्राप्ति
प्रक्रिया-2076 के अन्तर्गत रक्षा ऑफ-सेट नीति में ऑफ-सेट की अर्हता की प्रारम्भिक सीमा (Threshold)
को रु. 300 करोड़ से बढ़ा कर रु. 2000 करोड़ कर दिया गया है, जिससे विदेशी मौलिक उपकरण
निर्माताओं की बाधाओं का निराकरण हो सके तथा ऑफ-सेट खट के माध्यम से उच्च तकनीक को प्राप्त
' करने हेतु रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FD!) को प्रोत्साहित किया जा सके।
रक्षा क्षेत्र में सरकार के माध्यम से 700 प्रतिशतुप्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा 49 प्रतिशत्प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
स्वतः मार्ग (Automatic routey@ अनुमन्य होने के पश्चात पूरे विश्व का ध्यान इस ओर गया है। हाल के
वर्षों में भारत से रक्षा Pals में वृद्धि हुई है। रक्षा-उत्पाद निर्यात की दृष्टि से रक्षा सार्वजनिक
उपक्रमों( 0505) आयुध फैक्ट्रियों तथा (अनापत्ति निर्गत होने के आधार पर) निजी क्षेत्र से वर्ष 2072-73
में रु. 46 करोड़ का निर्यात बढ़ कर वर्ष 2076-7 में रु. 05 करोड़ (अनंतिम) हो गया।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण पर केन्द्रित नीतियों के फलस्वरूप आशातीत परिणाम मिल रहे हैं, रक्षा मंत्रालय
ने गत 2 वर्षों में भारत में निर्मित कई रक्षा उत्पादों का अनावरण किया है। भारत में इस क्षेत्र में लाइसेन्स
प्रदान करने की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए उसे और पारदर्शी बनाया गया है। इसलिए कुछ वर्षों से
रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक स्वीकृतियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2007 से 2074 के मध्य की 3 वर्षों
की अवधि में कूल 274 लाइसेन्सों की तुलना में वर्ष 2074 से 2076 के मध्य कुल 79 लाइसेन्स निर्गत
किये गये हैं।
हाल ही में भारत सरकार द्वारा रक्षा विनिर्माण हेतु क्रमशः उत्तर प्रदेश तथा तमिलनाडु में दो रक्षा औद्योगिक
उत्पादन गलियारों (Defence Industrial Production Corridors) की घोषणा की गई है। भारत सरकार
के “मेक इन इण्डिया” कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नागरिक उड्डयन नीति-2077
एवं औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति-207 घोषित की गयी है, जिससे राज्य में इस क्षेत्र में
मांग तथा निवेश में वृद्धि सम्भावित है।
राज्य सरकार रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र के सयंत्रों,
उपकरणों व सह-उत्पादों के विनिर्माण हेतु अनुकूल पारिस्थिकी तंत्र के सृजन हेतु कृत संकल्प है।
2. उत्तर प्रदेश-लाभ की स्थिति
उत्तर प्रदेश, भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य तथा तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था है। देश की 76.5
प्रतिशत् जनसंख्या वाला उत्तर प्रदेश, भारत के शीर्ष के पाँच विनिर्माण राज्यों में से एक है तथा भारत में
देसूक्ष्म, लघु एवं मध्यम set की संख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है। विगत पाँच वर्षों
(202-7) में राज्य से निर्यात 73.26 प्रतिशतू सी .ए .जी.आर, (Compound Annual Growth Rate)
दर्ज किया गया है।
2 उच्च-स्तरीय अवस्थापना सुविधाएं
रणनीतिक रूप से स्वर्णिम चतुष्कोण (Golden Quadrilateral) पर स्थित, प्रदेश देश के प्रमुख
राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। राज्य में 8,949 किलोमीटर में फैला हुआ
देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। गाजियाबाद में दादरी से मुम्बई के जवाहरलाल नेहरू बन्दरगाह
तक विकसित हो रहे वेस्टर्न डेडिकेटेड me कॉरीडोर-डब्ल्यू.डी.एफ.सी..(४४९५६९ा। Dedicated
Freight Corridor-WDFC) से बन्दरगाह तक परिवहन-समय में कमी होगी, जिससे राज्य में
आर्थिक गतिविधि को गति मिलेगी।
इसी प्रकार, ged डेडिकेटेड फ्रेट Het s.ci.uH.al.(Eastern Dedicated Freight
Corridor-EDFC) परियोजना का 57 प्रतिशत् आच्छादित क्षेत्र उत्तर प्रदेश में है जो पूर्वी क्षेत्र को
पश्चिमी क्षेत्र से जोड़ता है। इन दोनों फ्रेट कॉरीडोर्स का जंक्शन दादरी, गाजियाबाद में होने के कारण
लेजिस्टिक्स एवं वेअरहाउसिंग क्षेत्र में प्रदेश अत्यंत लाभ की स्थिति में है। ई.डी.एफ.सी. तथा
SLATS. के समानान्तर विकसित हो रहे दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रििल कॉरीडोर (डी.एम.आई.
सी.) तथा अमृतसर-कोलकता इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर (ए.के.आई.सी.) से आच्छादित क्षेत्र का बड़ा भाग
उत्तर प्रदेश में है। डब्ल्यू.डी.एफ.सी. एवं ई.डी.एफ,सी. परियोजनाओं का प्रदेश के हित में अधिकतम
लाभ अर्जित करने हेतु राज्य सरकार इन कॉरीडोर्स से सटे नगरों, यथा- ग्रेटर नोएडा, इलाहाबाद, व
कानपुर आदि में इंटीग्रेटेड मैन्यूफक्चरिंग ered, लॉजिस्टिक्स तथा इंटीग्रेटेड इण्डस्ट्रिल टाउनशिप्स
के विकास को प्रोत्साहित कर रही है।
उत्तर प्रदेश में विद्यमान लॉजिस्टिक्स अवस्थापना सुविधाओं में, मुरादाबाद में रेल से जुड़े
संयुक्त घरेलू एवं एक्जिम (निर्यात-आयात) टर्मिनल, कानपुर में रेल से जुड़े प्राइवेट फ्रेट टर्मिनल एवं
अन्तरदेशीय कन्टेनर डिपो-आई.सी .डी. (0800 Container Depot - ICD)aet दादरी टर्मिनल स्थित
आई.सी.डी. व कानपुर आई.सी.डी. सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश में नोएडा, बोड़ाकी तथा
वाराणसी में भी तीन मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स/ट्रॉसपोर्ट हब प्रस्तावित हैं। कानपुर, नोएडा, वाराणसी
व गाजियाबाद जैसे प्रमुख निवेश केन्द्रों के अतिरिक्त दादरी-नोएडा-गाज़ियाबाद निवेश क्षेत्र,
मेरठ-मुज़फ्फरनगर निवेश क्षेत्र, दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय)-वाराणसी-मिर्जापुर जैसे नवीन
निवेश क्षेत्र भी विकसित हो रहे हैं।
प्रदेश के कनेक्टीविटी नेटवर्क में पूर्व से विकसित एवं विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे, यधा-
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुन्देलखण्ड एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे आदि; 4 लेन तथा ८ लेन के
राजकीय राजमार्ग; राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय हवाई-अड्डे; इलाहाबाद, वाराणसी तथा हल्दिया TOTS
\)को जोड़ने वाले राष्ट्रीय SRTATI-7 (NW 2)@ माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार वायु, जल एवं रेल
कनेक्टीविटी सुविधाओं के नेटवर्क का सृजन करेगी, जिससे राज्य की औद्योगिक एवं मैन्यूफैकचरिंग
इकाइयों को परिवहन के विभिन्न माध्यमों से अपने उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक
पहुँचाने हेतु उत्कृष्ट व सुचारू सुविधाएं सुलभ हो सकेंगी। लखनऊ, कानपुर, मेरठ तथा वाराणसी में
स्थापित होने वाली मल्टी-सिटी मेट्रो रेल परियोजनाएं तथा जेवर एवं कुशीनगर में विकसित होने वाले
अंतर्राष्ट्रीय हवाई-अडूडों के कारण प्रदेश के कनेक्टीविटी तंत्र के लाभ की स्थिति के और अधिक
सुदृढ़ होने की सम्भावना है।
2.2 रक्षा औद्योगिक गलियारा/डिफेन्स इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर (Defence industrial Corridor)
माह फरवरी 20i8 में आयोजित यूपी sted समिट में भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के
बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपए के नियेश से डिफेन्स कॉरीडोर के विकास की घोषणा की
गई थी। अनुमान है कि इस कॉरीडोर के निर्माण से एक लाख से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन
होगा। प्रस्तावित गलियारे में 6 नोड, यथा- अलीगढ़, आगरा, झाँसी, चित्रकूट, कानपुर एवं लखनऊ
होंगे। प्रस्तावित गलियारे हेतु राज्य सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड क्षेत्र में लगभग 3,000 हेक्टेअर भूमि
अधिसूचित की जाएगी |
इन जिलों में Serr मैन्यूफैक्चरिंग की आवश्यकताओं को पूर्ण करने तथा कच्चे माल, श्रम
आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ सहायक आधार विद्यमान है। डी.एम.आई.सी. तथा
ए.के.आई.सी. के निकट होने के कारण कॉरीडोर विशेष लाभ की स्थिति में है। इसके अतिरिक्त,
RTS Te तथा प्रस्तावित पूर्वांचल एवं बुन्देलखखण्ड एक्सप्रेसवे से कॉरीडोर को
कनेटिविटी का लाभ उपलब्ध होगा।
2.3 विद्यमान विनिर्माण आधार
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में अनेक इकाइयां हैं जो रक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्र के
उत्पादों का विनिर्माण करती हैं। स्थानीय स्रोतों से सामग्री एवं आवश्यक pi की अधिप्राप्ति
(Procurement}@r वाली सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाइयां राज्य के YES स्थानीय बाजार का -प्रमुख
आधार हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ईकाइयों में 9 भारतीय aga कारखाने तथा 3 हिन्दुस्तान
ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (एच.ए.एल.) की विनिर्माण इकाइयां सम्मिलित हैं ।
तालिका-2: उत्तर प्रदेश में स्थित आयुध कारखाने
मुरादनगर, गाजियाबाद स्थित आयुध | सादा. कार्बन (Plain carbone टैंक,
कारखाना TWeA-TSe(Ammunition), स्टील फोर्जिंग हेतु
मिश्रित धातु स्टील कास्टिंग
कानपुर स्थित आयुध कारखाना मध्यम एवं उच्च क्षमता वाली बन्दूकें, खाली
Wla(Shell empties)
कानपुर स्थित लघु शस्त्र कारखाना लघु शस्त्र/(5098॥ arms)
कानपुर स्थित फील्ड गन फैक्ट्री उच्च AAMCalibre) के आयुध एवं स्पेयर
NYata, .32” रिवॉल्विर
कानपुर स्थित आयुध उपकरण फैक्ट्री चमड़ा उत्पादों, कपड़ा उत्पादों, पर्वतारोहण
उपकरण सहित इंजीनियरिंग उपकरण
कानपुर स्थित आयुध पैराशूट फैक्ट्री विभिन्न प्रकार के पैराशूट
शाहजहॉपुर स्थित आयुध कपड़ा फैक्ट्री युद्ध हेतु कपड़े तथा कपड़ा एवं टेण्ट आइटम्स
ao स्थित आयुध उपकरण | टेण्ट एवं अन्य वस्त्र निर्मित आइटमूस
कोरवों स्थित आयुध फैक्ट्री कार्बाइन के उत्पादन हेतु (परियोजना स्तर पर)
तालिका-3: उत्तर प्रदेश में स्थित हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. की प्रमुख विनिर्माण इकाइयां
कानपुर Rat एच.ए.एल. | घरेलू एवं अन्तर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों हेतु हल्के परिवहन
ट्रांसपोर्ट were डिवीज़न | विमान तथा ट्रेनर विमान के निर्माण, रख-रखाव,
अनुरक्षण, उच्चीकरण में मूलभूत (Core)! यह
Sika विमान. के. Wer, aye तथा
ओवरहॉल(0५४४705.)भी करता है। यह मानव रहित वायु
वाहन (Unmanned Arial Vehicles-UAVs)> इंजनों तथा
हाइड्रोलिक सिस्टम की सर्विसिंग करता है।
लखनऊ स्थित एच.ए.एल. | हाइड्रॉलिक्स,इंजन ईंधन, एयर कंडीशनिंग एवं प्रेशराइजेशन,
सहायक डिवीज़न फ्लाइट कंट्रोल, Se एवं ब्रेक, जाइरो(6#०]एवं बैरोमेट्रिक
इंस्ट्मेंट्स, इलेक्ट्रिकल पावर जेनरेशन एंड कंट्रोल सिस्टम,
अंडरकैरियेजेस (Undercarriages), . ऑक्सीजन एवं
इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, ईंधन कंटेंट गेज इत्यादि का विनिर्माण ।
ara स्थित. एच.ए.एल. | मिग-27एम अपग्रेड, .. मिराज-2000, . एलसीएए।0/8),
एविऑनिक्स डिवीज़न Wr wis, एजेटी-हॉक एयरक्राफ्ट पर लगाए गये
विभिन्न एक्ओनिक्स प्रणालियों के लिए विनिर्माण
तथाअनुरक्षण की सुविधा
उपरोक्त सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाइयों के अतिरिक्त निजी क्षेत्र की भी कई इकाइयां राज्य में रक्षा तथा
एयरोस्पेस क्षेत्र में टेकनिकल टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पादों व gif one के विनिर्माण में संलग्न हैं।
2.4 अनुसंधान एवं विकास (Research & Development - रि & 0])पारिस्थिकी तंत्र
उत्तर प्रदेश में विविध शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संस्थान हैं, जो अनुसंधान एवं विकासमें संलग्न हैं। राज्य
में 53 विश्वविद्यालय, 4,345 कॉलेज, 68 पॉलिटेक्निक्स है, जिनमें अनेक शोध संस्थान, उत्कृष्टता
#a(Centres of Excellence) एवं अन्य व्यावसायिक संस्थान हैं। राज्य आईआईटी कानपुर, बीएचयू
आईआईटी जैसे विशिष्ट संस्थानों का गढ़ हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
(0१90)के मैटिरियल्स एण्ड स्टोर आर एण्ड डी इस्टैब्लिशमेंट (DMSRDE), तथा एच.ए.एल. इत्यादि
जैसे प्रमुख संस्थान उत्तर प्रदेश में रक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्र हेतु उत्तम अनुसंधान एवं विकास
पारिस्थिकी तंत्र उपलब्ध कराते हैं ।
एच.ए.एल. के अन्तर्गत लखनऊ में स्थित एयरोस्पेस सिस्टम एण्ड इक्यूप्मेंट आर एण्ड डी
सेंटर (ASERDC) है, जो स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग करके विमान, हेलीकॉप्टर तथा
\इंजन के लिए आवश्यक सभी प्रमुख प्रणालियों और उपकरणों हेतु व्यावहारिक अनुसंधान (Applied
Research), डिजाइन एवं विकास में कार्यरतू है। कोरवा स्थित एच.ए.एल. के अन्तर्गत एयरोस्पेस
सिस्टम एण्ड इक्यूप्मेंट आर एण्ड डी सेंटर (ASERDC) में फ्लाइट डेटा रिकॉर्ड्स तथा अन्य
एवियोनिक एलआरयूज़ (Avionic LRUs) का विकास किया जाता है।
इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में लखनऊ एवं आगरा में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज स्थित हैं,
जिनके अन्तर्गत 7 प्रभागों (Divisions) के माध्यम से यू.पी. पुलिस को आधुनिक तकनीकों एवं
उपकरणों से सहायता प्रदान की जा रही है।
2.5 उत्तर प्रदेश में उपलब्ध अवसर
उत्कृष्ट अवस्थापना सुविधाओं एवं अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ इस नीति का आशय रक्षा तथा
एयरोस्पेस क्षेत्र के निम्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना है-
PSST पार्क-कानपुर तथा अन्य जिलों, जैसे-झाँसी, आगरा, लखनऊ आदि में
". रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (Defence ?505)का विस्तारीकरण अथवा
सहभागिता
*. एयरोस्पेस पार्क-लखनऊ तथा अन्य जिलों, जैसे-कानपुर, आगरा, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर
आदि में
+ परीक्षण सुविधाओं (Testing Facilitiesyar विकास- तोपखाने (Artillery) तथा अन्य
सैन्य ret हेतु
« ड्रोन विनिर्माण एवं परिक्षण सुविधाएं
*. वायुयान/ हेलिकॉप्टर विनिर्माण/ एसेम्बलिंग इकाइयां (Assembling Units)
*+. सेना हेतु ऑटो से संबंधित उपकरण/पुर्जे तथा ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
© पुलिस आधुनिकीकरण
*+. इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी/ सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित सेवाएं (IT/ ies) केन्द्र-
आगरा, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, ast आदि में।
> इंजीनियरिंग केन्द्र-अलीगढ़ में धातु परिशुद्धता कार्य (Metal precision work), आगरा
में ढलाईखाना (Foundry) इत्यादि।
*. चमड़ा, वस्त्र विनिर्माण केन्द्र-कानपुर एवं आगरा में रक्षा क्षेत्र हेतु टेकनिकल Tet का
विकास |
3. नीति के सम्बन्ध में
माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी arr उत्तर प्रदेश में डिफेन्स इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर की स्थापना की घोषणा
के सन्दर्भ में इस नीति का ध्येय राज्य में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना है। यह
नीति राज्य की औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2077 के sPaqa(vision)aen उद्देश्यों को
क्षेत्-केन्द्रित रूप से आगे बढ़ाते हुए
राज्य की नागरिक उड्डयन नीति-2077 तथा उ.प्र. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ARE20I7 का अनुपूरण
करती है। आकर्षक प्रोत्साहनों से सुसज्जित, यह नीति आगामी पाँच वर्षों में राज्य में रक्षा तथा एयरोस्पेस
क्षेत्र के विकास के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान करती है।
\3. नीति के उदूदेश्य
T, उत्तर प्रदेश को रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र हेतु सर्वोत्तम गंतव्यके रूप में स्थापित करना।
2. रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्रों के लिए निजी औद्योगिक wet को प्रोत्साहन ।
3. बाजार के अंतर को कम करने तथा रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की आवश्यकताओं
spt करने हेतु राज्य में सहायक इकाइयों को उनसे जोड़ना।
4. डिफेन्स afisk के समानान्तर रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण aed की स्थापना को
प्रोत्साहन |
5. रक्षा क्षेत्र में निर्यातोन्मुख विनिर्माण आधार का विकास।
6. एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण परियोजनाओं के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा
इकाइयों (DPSUs) /ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (OFB) को राज्य में आकर्षित करना ।
7. रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में अनुष॑गिक/ सहायक उद्योग को प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म, लघु
एवं मध्यम seat का विकास ।
8. रक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना तथा निरंतर प्रौद्योगिकी
उन्नयन सुनिश्चित करना।
9. आगामी 5 वर्षों में डिफेन्स कॉरीडोर में कम से कम 2 विश्वस्तरीय परीक्षण तथा अनुसंधान एवं
विकास (R & 0) सुविधाओं का विकास करना।
]0, रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में कौशल विकास को प्रोत्साहित करना ।
3.2 लक्ष्य
. आगामी 5 वर्षों की अवधि में रु. 50,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना ।
2. रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में 2.5 लाख रोज़गारों का सृजन करना।
3.3. परिभाषाएं
. रक्षा तथा एयरोस्पेस उत्पाद: यह निर्धारित करने के लिए कि कोई उत्पाद /
तकनीक रक्षा तथा, अथवा एयरोस्पेस की श्रेणी में है, भारत सरकार की
किसी भी नीति, योजना अथवा किसी अन्य संबंधित प्रलेखों में सम्मिलित
प्राविधानों / परिभाषाओं अथवा विदेशों में अधिकृत समकक्ष प्राविधानों को सन्दर्भित
किया जाएगा।
2. रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां: रक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्र की मूल्य-श्रंखला (Value chain) में
उपर्यक्त परिभाषित रक्षा तथा एयरोस्पेस उत्पादों का विनिर्माण करने वाले समस्त
\\.आपूर्तिकर्ताओं को इस नीति के अन्तर्गत रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई माना गया है। इस नीति
में परिभाषित मेगा एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां, एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां,
वेण्डररक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.)
इकाइयां इस नीति के अधीनरक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों के रूप में प्रोत्साहन की पात्र होंगी।
3. मेगा एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां: ऐसी वैश्विक अथवा भारतीय मौलिक उपकरण
निर्माता (Original Equipment Manufacturers - OEMs) कम्पनियां, जो रक्षा तथा
एयरोस्पेस विनिर्माण प्लेटफार्म को डिज़ाइन एवं निर्माण करती हों तथा उनके द्वारा रु. 7000
करोड़ रूपये से अधिक का निवेश किया गया हो।
कम्पनी ak रक्षा मंत्रालय अथवा गृह मंत्रालय (भारत सरकार) अथवा विदेशों में उनके
समकक्ष अधिकृत संस्था अथवा सिविल एयरोस्पेस निर्माता/ आपूर्तिकर्ता अथवा मेंटेनेंस,
रिपेयर एण्ड ओवरहॉल-एम.आर.ओ. (Maintenance, Repair & Overhaul - MRO)
इकाई को अपने तैयार उत्पादों के मूल्य के न्यूनतम 25 प्रतिशत की आपूर्ति की जा रही हो
अथवा कम्पनी के पक्ष मेंके न्यूनतम रु. 50 करोड़ के रक्षा उत्पादों की पूर्ति के आदेश हो ।
नोट -इस नीति में परिभाषित एंकर डी एंड ए इकाइयों पर लायू सभी प्रोत्साहन मेगा एंकर
डी एंड ए इकाइयों पर भी ary होंगे।
4, एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां: ऐसी वैश्विक अथवा भारतीय मौलिक उपकरण निर्माता
{Original Equipment Manufacturers - OEMs) कम्पनियां, जो रक्षा तथा एयरोस्पेस
विनिर्माण प्लेटफार्स्स को डिजाइन एवं निर्माण करती हों तथा उनके द्वारा निम्नलिखित श्रेणियों में
निवेश किया गया हो-
निवेश क्षेत्र पात्रता का मानदण्ड
बुंदेलखण्ड एवं पूर्वांचल क्षेत्र रु.200 करोड़ से अधिक निवेश अथवा न्यूनतम
]000 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजन
wart = एवं... पश्चिमांचल | रु.300 करोड़ से अधिक निवेश अथवा न्यूनतम
(गौतमबुख नगर, गाजियाबाद को | 500 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजन
छोड़कर)
गौतमबुछ नगर एवं गाजियाबाद. | रु.400 करोड़ से अधिक निवेश अथवा न्यूनतम
2000 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजन
कम्पनी दारा रक्षा मंत्रालय अथवा गृह मंत्रालय (भारत सरकार) अथवा विदेशों में उनके समकक्ष
अधिकृत संस्था अथवा सिविल एयरोस्पेस निर्माता/ आपूर्तिकर्ता अथवा मेंटेनेंस, रिपेयर एण्ड
ओवरहॉल-एम.आर.ओ. (Maintenance, Repair & Overhaul - MRO) इकाई को अपने तैयार
उत्पादों के मूल्य के न्यूनतम 25 प्रतिशत् की आपूर्ति की जा रही हो अथवा कम्पनी के पक्ष में के
न्यूनतम रु. 30 करोड़ के रक्षा उत्पादों की पूर्ति के आदेश हों ।
‘aay’एक आपूर्तिकर्ता एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई के रूप में अर्हता प्राप्त करेगा, यदि विनिर्माण के
परिणामस्वरूप प्राप्त कारोबार (Turnover) न्यूनतम 50 प्रतिशत् अंश रक्षा तथा एयरोस्पेस मूल्य
श्रृंखला में मेगा एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई अथवा अन्य एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई के
लिए आपूर्तिकर्ता के रूप में अर्जित किया गया हो।
5.वेण्डर्[४८0००) रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां: ऐसी इकाइयां, जो उसी ax में स्थित हों जिसमें
एंकर यूनिट कार्यरतू हो एवं अपने अन्तिम उत्पाद का न्यूनतम 40 प्रतिशत एंकर इकाई को आपूर्ति
करती हों।
6. सूबम, लघु एवं मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई) इकाइयां: भारत सरकार द्वारा एम.एस.एम.ई
अधिनियम 2006 के अन्तर्गत एम.एस.एम.ई. हेतु निर्धारित एम.एस.एम.ई परिभाषा का पालन राज्य
सरकार द्वारा किया जाएगा। भारत सरकार के दिशा निर्देशों के क्रम में समय-समय पर एम.एस.एम.ई
की संशोधित परिभाषा स्वतः संशोधित मानी जायेगी।
एक एम.एस.एम.ई. रक्षा तथा एयरोस्पेस आपूर्तिकर्ता के रूप में अर्हता प्राप्त करेगा, यदि विनिर्माण के
परिणामस्वरूप प्राप्त कारोबार (Turnover) का न्यूनतम 50 प्रतिशत् अंश रक्षा तथा एयरोस्पेस
मूल्य-श्रृंखला में मेगा एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई या एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई या वेण्डर
रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई या रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई /ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (FB)
के लिए आपूर्तिकर्ता के रूप में अर्जित किया गया हो।
7, सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयां (Beet पब्लिक सेक्टर यूनिट्स)/ ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड
(OFB): रक्षा मंत्रालय के अधीन केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम।
निजी रक्षा तथा एयरोस्पेस पार्क
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में, विशेष रूप से yes पारिस्थितिकी तंत्र वाले क्षेत्रों में, रक्षा तथा
एयरोस्पेस wet को स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करेगी। इन पार्कों में “प्लग-एंड-प्ले” औद्योगिक
अवस्थापना सुविधा होगी, जिससे कम्पनियां अपने मुख्य व्यापार पर ध्यान केन्द्रित कर सकें।
इन wel में निम्नलिखित सुविधाएं होगी:
L. विनिर्माण क्षेत्र (कम्पोनेण्ट्रस, सब-कम्पोनेण्ट्रस, सब-एसेम्बलीज़, एयरोस्पेस पार्ट्स) एवं विशेष
आर्थिक परिक्षेत्र (एस.ई.जेड.)
छा परीक्षण केन्द्र
हार्डवेयर /एम्बेडेड प्रौद्योगिकी केन्द्र
प्रौद्योगिकी नवाचार केन्द्र
हाउसिंग एवं कॉमन सुविधा केन्द्र
की YN= |०-
इस हेतु उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में निजी रक्षा तथा एयरोस्पेस wat को निजी औद्योगिक पाकों के
समानसुविधाएं प्रदान करेगी । (सन्दर्भ: उ.प्र. औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति 2077
का अनुच्छेद 3.2.3)
डिफेन्स कॉरीडोर में निवेश करने वाली इकाइयों हेतु प्रोत्साहन
राज्य सरकार दारा उत्तर प्रदेश में डिफेन्स कॉरीडोर हेतु अधिसूचित क्षेत्र में भूमि के क्रय करने पर
ही प्रोत्साहन उपलब्ध कराये जाएंगे। इस प्रकार की अधिसूचना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय
पर निर्गत की जाएगी।
5.2 इस नीति में परिभाषित एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों को डिफेन्स कॉरीडोर में भूमि की
प्रचलित सर्किल दर अथवा क्रय मूल्य में से जो भी कम हो, की लागत के 25 प्रतिशतू तक की
प्रतिपूर्ति |
6. रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों हेतु प्रोत्साहन
6.ञ परिवहन प्रभार पर छूट-
6,].।.. प्लाण्ट व मशीनरी के परिवहन पर-आयातित उपकरणों एवं are व मशीनरी को लेजिस्टिक
पार्क/ट्रान्सपोर्ट हब तथा हार्बर/पोर्ट से प्रदेश में स्थित उत्पादन स्थल पर ले जाने हेतु एंकररक्षा
तथा एयरोस्पेस इकाइयां परिवहन लागत के 50 प्रतिशत् परिवहन उपादान की पात्र होंगी, जिसकी
समेकित अधिकतम सीमा रु. 2 करोड़ होगी।
यह उपादान रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों द्वारा उपकरणों के परिवहन पर उन परियोजनाओं हेतु
लागू होगा, जिनके अनुबन्ध का मूल्य रु.50 करोड़ अथवा उससे अधिक हो, यह उपादानप्रथम
वर्ष के उत्पादन के प्रारम्भ की तिथि तक ही प्रदान किया जाएगा।
6.7.2 तैयार उत्पादों के परिवहन पर-तैयार उत्पाद को प्रदेश में स्थित इकाई से लॉजिस्टिक
पार्क /ट्रान्सपोर्ट हब, हार्बर/पोर्ट तक ले जाने हेतु एंकररक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां वाणिज्यिक
उत्पादन के प्रारम्भ की तिथिसे 5 वर्ष की अवधि तक परिवहन लागत के 30 प्रतिशत परिवहन
उपादान की पात्र होंगी, जिसकी प्रतिवर्ष अधिकतम सीमा रु.। करोड़ होगी।
6.2 THANE उपचार WF (Effluent Treatment Plant-ETP)at स्थापना हेतु उपादान-एंकर रक्षा तथा
एयरोस्पेस इकाइयों द्वारा स्थापित की गए उत्मवाह उपचार संयंत्र की लागत की 20 प्रतिशत प्रतिपूर्ति
रु.] करोड़ की अधिकतम सीमा तक की जायेगी।
6.3 प्रौद्योगिकी हस्तानान्तरण (Tech Transfer) उपादान-एंकर इकाइयों को एक ही क््लस्टर में स्थितप्रत्येक
est इकाई हेतु अधिकतम रु.50 लाख की सीमा तक प्रथम 5 विक्रताओं को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
की लागत की 75 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति तथा तत्पश्वात् अगले 5 वेष्डर्स को 50 प्रतिशत् की प्रतिपूर्ति
की जायेगी ।
7. अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण सुविधा हेतु सहायताएप
7 oa कॉरीडोर के अधिसूचित क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास अथवा परीक्षण सुविधा की स्थापना
हेतु- रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई द्वारा इस प्रकार की सुविधा की स्थापना हेतु लिये गये ऋण पर
प्रतिवर्ष 50 प्रतिशत की दर से 5 वर्ष हेतु ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी प्रति इकाई
अधिकतम सीमा रु.2 करोड़ होगी, wera यह होगा कि-
«. रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई के पास रक्षा मंत्रालय/गृह मंत्रालय/समकक्ष विदेशी सरकारों /सिविल
एयरोस्पेस आपूर्तिकर्ता से अथवा मेंटेनेंस, रिपेयर एण्ड ओवरहॉल-एम.आर.ओ. सुविधा का न्यूनतम
रु. 5 करोड़ का प्रत्यक्ष आपूर्ति आदेश det चाहिए।
*अधवा'
« रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई द्वारा एक ऐसे निर्माता को सेवाएं प्रदान की जा रही हों, जिसके पास
रक्षा मंत्रालय/गृह मंत्रालय/समकक्ष विदेशी सरकारों /नागरिक एयरोस्पेस आपूर्तिकर्ता से अथवा एम.
आर.ओ. सुविधा का न्यूनतम रु. 50 करोड़ का आपूर्ति आदेश हो।
नोट- इकाई द्वारा संचालन प्रारम्भ होने के 2 वर्ष के भीतर समस्त मानदण्ड पूर्ण कर लिए जाने
चाहिए |
7.2 सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों(0 «0८6 PSUs)/ seta फैक्टरी बोर्ड (ors) में सार्वजनिक
परीक्षण (Common Testing) तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं का उपयोग करने हेतु-रक्षा
तथा एयरोस्पेस इकाइयों are सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों में सार्वजनिक परीक्षण तथा अनुसंधान
एवं विकास सुविधाओं का उपयोग करने हेतु भुगतान किए गए प्रभार/ शुल्क के 50 प्रतिशत की
प्रतिपूर्ति प्रति इकाई प्रतिवर्ष अधिकतम रु. 5 लाख तक की जाएगी, समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति
की वार्षिक अधिकतम सीमा 2 करोड़ रुपये होगी।
7.3 नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहनः उत्तर प्रदेश सरकार रक्षा तथा एयरोस्पेस
विनिर्माण में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए यू.पी. स्टार्ट-अप नीति 2077 के अन्तर्गत बनाए गए
स्टार्ट अप फंड का. उपयोग करेगी। इस संदर्भ में राज्य सरकार आईआईटी-कानपुर,
बीएचयू-आईआओआईटी इत्यादि जैसे प्रतिष्ठित नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों के साथ
सहभागिता भी करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार भारत सरकार के आईडीईएक्स (iDexyed अन्य ऐसी
पहलों के साथ अपने अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार प्रयासों को संरेखित करेगी।
बाजार का feeera(Building Market)
इस नीति के अन्तर्गत पात्र एम.एस.एम.ई. इकाइयां अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों /मेलों में प्रतिभागिता लागत
के50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति हेतु पात्र होंगी, जिसकी अधिकतम सीमा रु. 5 लाख प्रति प्रदर्शनी /मेला
होगी। यह सुविधा अधिकतम i0 एम.एस.एम.ई. इकाइयों को दी जायेगी। एक इकाई को यह
प्रोत्साहन वर्ष में एक ही बार प्रदान किया जायेगा।
क्षमता feared Capacity Building)
क ह=) jl)
9.7 विधमान कौशल प्रशिक्षण आधार का सुदृढ़ीकरण-जहाँ व्यवहारिक होगा, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
समय-समय पर शासकीय आई.टी.आई. तथा पॉलीटेकनिक्स से विचार-विमर्श के उपरान्त रक्षा तथा
एयरोस्पेस क्षेत्र हेतु विशिष्ट रूप से निर्मित पाटूयक्रम (Customised courses) WT करवाए
जाएंगे।
9.2 शैक्षिक समझौते (Academic 76-00)-उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा तथा अनुसंधान एवं विकास
संस्कृति को बढ़ाने हेतु रक्षा तथा एयरोस्पेस प्रशिक्षण तथा अनुसंधान में उत्कृष्टता वाले
विश्वविधालयों (भारत और विदेशों में) को राज्य के विश्वविद्यालयों से शैक्षिक समझौते करने हेतु
प्रोत्साहित करेगी।
१0.. पेटेंट werd गुणवत्ता TCH(Patent Cost/ Quality Certification)
उत्तर प्रदेश सरकार पेटेंट पंजीकरण तथा गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त करने हेतु किए गये व्ययों के लिए
वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
70.7 पेटेंट शुल्क प्रतिपूर्ति-प्रदेश मे स्थापित रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों को घरेलू पेटेंट पंजीकरण के लिए
पेटेंट शुल्क के 700 प्रतिशतूतथा अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट पंजीकरण के लिए पेटेंट शुल्क के 50 प्रतिशत तक
प्रतिपूर्ति की जायेगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई रु. 25 लाख तकहोगी, समस्त इकाइयों को
देय प्रतिपूर्ति की वार्षिक अधिकतम सीमा रु. 7 करोड़ होगी। यह प्रतिपूर्ति केवल पेटेंट प्राप्त होने के
बाद ही की जाएगी।
0.2 गुणवत्ता प्रमाणन- उत्तर प्रदेश सरकार गुणवत्ता प्रमाणन यथा ए.एस. 9700 सीरीज, एन.ए.डी.सी.पी.
प्राप्त करने हेतु इस नीति में परिभाषित एम.एस.एम.ई. इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
प्रत्येक प्रमाण पत्र के लिए प्रमाणन शुल्क का 00 प्रतिशत, प्रति इकाई अधिकतम रु. लाख प्रतिवर्ष
प्रतिपूर्ति की जायेगी, समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा रु.20लाख प्रति वर्ष होगी।
0.3 ट्रेडमार्क पंजीकरण- समस्त पात्र रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण इकाइयों को ट्रेडमार्क पंजीकरण
आवेदन शुल्क की पूर्ण रूप से प्रतिपूर्ति की जायेगी, प्रति इकाई अधिकतम रु. लाख प्रतिवर्ष
प्रतिपूर्ति की जायेगी, समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा e.loqra प्रति वर्ष
होगी।
74, व्यवसाय में सहजता (Ease of Doing Business)
राज्य की औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन AR-2077 की परिकल्पना एवं लक्ष्य को आगे
बढ़ाते हुए यह नीति प्रदेश में व्यापार की सुगमता को भी सुनिश्चित करती है।
77.7 सिंगल विण्डो- राज्य सरकार द्वारा रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण विनिर्माण इकाइयों को सभी वांछित
अनुमोदन एवं स्वीकृतियां, मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में सिंगल विण्डो प्रणाली के माध्यम से
प्रदान किए जाएंगे।«~ | 2-
74.2 प्रोत्साहनों का एकमुश्त भुगतान- इस नीति के अन्तर्गत प्रतिपूर्ति व छूट आदि के रूप में दिये जाने
वाले समस्त प्रोत्साहनों का भुगतान एक स्वीकृति-पत्र एवं एक लेखाशीर्षक के माध्यम से नोडल wai
द्वारा किये जायेगे।
7-3 प्रक्रियाओं का सरलीकरण-इस नीति का उद्देश्य विद्यमान नियामक व्यवस्था तथा सरलीकृत प्रक्रियाओं
को स्व-प्रमाणीकरण, मानित sPANe(Deemed Approvals तृतीयपक्ष के प्रमाणीकरण के माध्यम
से युक्तिसंगत बनाना है।
72.4 श्रम अनुमतियां- उत्तर प्रदेश सरकार रक्षा तथा एयरोस्पेस उद्योगको संबंधित कानूनों के आधीनलचीली
रोज़गार शर्तें, काम के घण्टे एवं महिलाओं हेतु 3-पाली (शिफ्ट) तथा संविदीय आधार पर श्रमिकों की
भर्ती हेतु अनुमति प्रदान करेगी।
74.5 गुणवत्तायुक्त विद्युत आपूर्ति-उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन Afe-2077
में प्राविधानों के अनुसार रक्षा तथा एयरोस्पेस उद्योग को 24/7 विश्वसनीय, raged विद्युत
आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है।
.6 औद्योगिक सुरक्षा-उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में सुरिक्षत एवं भयमुक्त औद्योगिक वातावरण प्रदान
करेगी। इस हेतु विशिष्ट अधिकारी के आधीन औद्योगिक क्लस्टर/क्षेत्र में समर्पित पुलिस बल की
तैनाती की जायेगी तथा एकीकृत पुलिस-सह-अग्निशमन केन्द्र भी स्थापित किये जायेंगे।
2. नीति का क्रियान्वयन
72.] यह नीति, अधिसूचना की तिथि से प्रभावी हो जायेगी तथा 05 वर्ष की अवधि हेतु लागू रहेगी।
2.2 यदि किसी दशा में ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें नीति में किसी भी संशोधन या अतिक्रमण की
आवश्यकता होती है तो केवल मा. मंत्रि परिषद इस प्रकार के संशोधन/अतिक्रमण के अनुमोदन हेतु
अधिकृत होगी।
१2.3 इस नीति में किसी थी संशोधन के प्रकरण में, यदि राज्य सरकार ae किसी भी इकाई को
प्रोत्साहनों का कोई पैकेज पूर्व में ही स्वीकृत किया गया है तो उसे वापस नहीं लिया जायेगा, इकाई
लाभ की पात्र बनी रहेगी।
नोट
l. सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों / ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड (ओ.एफ.बी.) को अपनी सुविधाओं
(परीक्षण सुविधाएं, प्रयोगशालाएं, सहायक सुविधाएं एवं सार्वजनिक उपयोग हेतु सुविधाएं, यथा-
कर्मियों हेतु आवास इत्यादि) के निर्माण हेतु रियायती दर पर पटूटे पर भूमि उपलब्ध कराने में
सहायता प्रदान की जाएगी ।
2.इस नीति में उल्लेखित उपदानों के अतिरिक्त मेगा एंकर रक्षा तथा wie इकाइयों को
केस-दू-केस आधार पर प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे।eat | a 5
3.20 नीति के अन्तर्गत परिभाषित समस्त पात्र रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों को प्रतिपूर्ति, उपादान,
छूट आदि के रूप में प्रदान किए जाने वाले समस्त प्रोत्साहनों की अधिकतम सीमा निम्न श्रेणियों में
प्रदान की जाएगी, जिनकी प्रतिवर्ष अधिकतम सीमा कूल स्थाई पूंजी निवेश की 5 प्रतिशत
अधिकतम 0 वर्षों हेतु होगी -
० पूर्वान््वल एवं बुंदेलखण्ड क्षेत्र में किए गए स्थाई पूंजी निवेश के I00 प्रतिशत,
० मध्यांचल एवं पश्चिमांचल (गौतमबुख नगर एवं गाजियाबाद जनपद छोड़कर) क्षेत्र में किए गए
स्थाई पूंजी निवेश के 90 प्रतिशत
e गौतमबुद्ध एवं गाजियाबाद जनपदों में किए गए स्थाई पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत
4. समस्त प्रोत्साहन नयी रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों के साथ-साथ विस्तारीकरण/ विविधीकरण करने
वाली परियोजनाओं को भी अनुमन्य होंगे, जो कि नयी रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों की भांति
निवेश मानदण्डों को पूर्ण करती हों ।
5. अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग द्वारा इस नीति के अन्तर्गत जिन रक्षा तथा एयरोस्पेस
इकाइयों को पात्र पाया जाता है, केवल उन्हीं इकाइयों को इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहन प्रदान
किए जाएंगे।
6.किसी भी अन्य नीति अथवा राज्य एवं केंद्र सरकार के विभागों द्वारा स्वीकृत प्रोत्साहनों से लाभ
प्राप्त करने वाली रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां भी इस नीति में उल्लिखित प्रोत्साहनों /लाभों का
लाभ उठाने की पात्र होंगी, बशर्ते समान प्रकार के लाभ ,/प्रोत्साहनों का लाभ अन्य किसी नीति से
प्राप्त नहीं किया जा रहा हो।
7. विस्तारीकरण/विविधीकरण का तात्पर्य है जहाँ वर्तमान औद्योगिक उपकम नये पूँजी निवेश द्वारा
अपने ग्रॉस ब्लॉक में न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि करता है।”