Home India कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-473 (सी0आर0पी0सी0 ...
Date: 2026-01-19 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-473 (सी0आर0पी0सी0 1973 की धारा-432) के अन्‍तर्गत नामिनल रोल/इनफरमिटी रोल के आधार पर सिद्धदोष बन्दियों की समयपूर्व रिहाई की कार्यवाही के सम्‍बन्‍ध में दिशा-निर्देश।

Issued by कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग · कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग

Research with AI Agent Chat with Document Generate Summary Translate Helpful Share Add to Project Create Task

Executive Summary & Key Takeaways

ज़रूर, अनुरोधित संरचना का उपयोग करके दिए गए नीति पाठ का सारांश नीचे दिया गया है: **कार्यकारी सारांश** दस्तावेज़ का उद्देश्य भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 473 के तहत नामिनल रोल/इनफरमिटी रोल के आधार पर सिद्धदोष कैदियों की समयपूर्व रिहाई को विनियमित करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करना है, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में है। इसके अतिरिक्त, यह उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित करना और इसके लिए दिशा-निर्देश प्रदान करना है। तत्काल कार्रवाई के लिए 120 दिनों की समय-सीमा दी गई है। **मुख्य बातें** * **प्रक्रिया की शुरुआत और निगरानी:** * कारागार अधीक्षक हर साल 1 जनवरी, 1 मई और 1 सितंबर को संभावित रिहाई के लिए योग्य कैदियों की समीक्षा प्रक्रिया शुरू करेंगे। * सिद्धदोष कैदियों की समयपूर्व रिहाई के प्रस्तावों को सक्षम प्राधिकारी (राज्यपाल) के निर्णय के लिए 120 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा। * **नोडल अधिकारी की नियुक्ति:** * महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे जो राज्य की जेलों से प्रस्ताव प्राप्त करने, उनका पर्यवेक्षण करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार होगा। * **परामर्श समिति का अधिकार:** * परामर्श समिति परिहार की सिफारिश करते समय उचित शर्तें तय कर सकती है, जो कैदी के अपराध की प्रकृति, समाज में पुनर्वास और लोक सुरक्षा जैसे कारकों को ध्यान में रखे। * **अस्वीकरण प्रक्रिया:** * अस्वीकृति के आदेशों में अस्वीकार के संक्षिप्त कारणों का उल्लेख किया जाएगा, साथ ही अस्वीकृति के विरुद्ध अपील करने के बंदी के अधिकार का भी उल्लेख किया जाएगा। * कैदी जेल अधीक्षक या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अपील भेज सकते हैं, जिसके बाद परामर्श समिति मामले की समीक्षा करेगी और राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें भेजेगी। * **परिहार रद्द करना:** * परिहार के रद्द करने से पहले, कैदियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, कारण सहित एक आदेश जारी किया जाएगा, और अपील की अनुमति दी जाएगी। परामर्श समिति जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस आयुक्त से इनपुट सहित मामले की समीक्षा करेगी और राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें भेजेगी। * **चिकित्सा अयोग्यता के लिए प्रावधान:** * स्थायी नीति के अनुरूप, यदि चिकित्सा बोर्ड के अनुसार कैदी कुछ सूचीबद्ध बीमारियों से ग्रसित है, तो मैनुअल की धारा 179 के तहत कार्यवाही शुरू की जाएगी। * **अपात्र श्रेणियाँ:** * स्थायी नीति के अनुरूप, कुछ कैदी परिहार के लिए पात्र नहीं होंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश राज्य के बाहर सजा सुनाए गए लोग, आजीवन कारावास की सजा वाले लोग, पेशेवर हत्यारे और कुछ अधिनियमों के तहत दोषी लोग शामिल हैं। * **न्यूनतम सजा आवश्यकताएँ:** * कुछ अपराधों में शामिल लोगों के लिए परिहार पर विचार किए जाने से पहले न्यूनतम सजा (20-30 साल) पूरी होनी चाहिए। * **उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन:** * सभी प्रावधानों का अनुपालन माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के रिट याचिका संख्या-4/2021 और विशेष अनुमति याचिका (क्रि०) सं0-529/2021, सोनाधर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य में पारित आदेश दिनांक 18.02.2025 के अनुपालन में किया जाना सुनिश्चित किया जाना है। **प्रभाव विश्लेषण** **हितधारक:** पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन और सुधार सेवाएँ, उत्तर प्रदेश * **प्रभाव:** इन अधिकारियों के पास राज्य के कारागारों में कैदियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया को लागू करने और उसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी है। * **आवश्यक कार्रवाई:** कारागार मुख्यालय में उप महानिरीक्षक के पद से अनिम्न अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया जाना है, जो राज्य के कारागारों से इस प्रक्रिया के अन्तर्गत प्रस्ताव प्राप्त करने, उनके पर्यवेक्षण तथा उन पर कार्यवाही कराने के लिये उत्तरदायी होगें। **हितधारक:** कारागार अधीक्षक * **प्रभाव:** कारागार अधीक्षकों को प्रत्येक वर्ष के दौरान समीक्षा प्रक्रियाएँ शुरू करनी होती हैं और यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रस्ताव 120 दिनों की समय-सीमा के भीतर राज्यपाल के निर्णय के लिए प्रस्तुत किए जाएँ। * **आवश्यक कार्रवाई:** उन्हें पात्र कैदियों की पहचान करनी है और समयपूर्व रिहाई के लिए उनके मामलों की समीक्षा करनी है, इन नियमों और समय-सीमाओं का पालन करना है। **हितधारक:** परामर्श समितियाँ * **प्रभाव:** परामर्श समितियाँ परिहार पर सिफारिशें करती हैं, शर्तों की सिफारिश करती हैं और अस्वीकृति की अपीलों की समीक्षा करती हैं। * **आवश्यक कार्रवाई:** समिति को विचार करने वाले कारकों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष और उचित सिफारिशें देनी हैं और जेल मैनुअल में उल्लिखित प्रक्रियाओं का पालन करना है। **हितधारक:** सिद्धदोष बंदी * **प्रभाव:** ये दिशा-निर्देश समयपूर्व रिहाई के लिए पात्रता और प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। * **आवश्यक कार्रवाई:** बंदियों को इन नियमों और दिशा-निर्देशों से अवगत होना चाहिए, समयपूर्व रिहाई के लिए आवेदन करना चाहिए, और अस्वीकृति की स्थिति में अपील करने के अधिकार का उपयोग करना चाहिए। **हितधारक:** जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस आयुक्त * **प्रभाव:** यदि सिद्धदोष बदियों के स्वीकृत परिहार को निरस्त किया जाता है, तो कारागार मुख्यालय द्वारा उक्त प्रत्यावेदन को जेल मैनुअल के प्रस्तर-180 के अनुसार गठित परामर्श समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा, जहाँ जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस कमिश्नर की आख्या ली जाएगी। * **आवश्यक कार्रवाई:** जेल मैनुअल के प्रस्तर-180 के अनुसार कारागार मुख्यालय द्वारा उक्त प्रत्यावेदन को जेल मैनुअल के प्रस्तर-180 के अनुसार गठित परामर्श समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा, जहाँ जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस कमिश्नर की आख्या देनी है। **हितधारक:** राज्य सरकार * **प्रभाव:** राज्य सरकार सक्षम प्राधिकारी (राज्यपाल) के माध्यम से परिहार की सिफारिशों और रद्द करने पर अंतिम निर्णय लेती है। * **आवश्यक कार्रवाई:** सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्णय सभी प्रासंगिक कारकों पर आधारित हों और निरंतर और पारदर्शी हों। **हितधारक:** न्यायालय * **प्रभाव:** नियम मा० उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा क्रिमिनल अपील संख्या-4307/2024 माफाभाई मोतीभाई सागर बनाम गुजरात राज्य में पारित आदेश दिनांक 21.10.2024 के अनुपालन के दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। * **आवश्यक कार्रवाई:** न्यायालय को यह सुनिश्चित करना है कि अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित हो।

Key Entities Referenced

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022: उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल, 2022 उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली: भारत का सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में स्थित है उत्तर प्रदेश शासन: उत्तर प्रदेश राज्य सरकार कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में जेलों के प्रशासन और सुधार के लिए जिम्मेदार विभाग।
Official Source Record View Original Source →
See Full Document Text
शीर्ष प्राथमिकता»कोर्ट केस FTN-56/2026/25/22-2-2026-9 Sl/20I2 प्रेषक, रवि शंकर मिश्र, विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक»/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ दिनांक 49 जनवरी, 2026 विषय:-भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-473 (सी0आर0पी0सी0 4973 की धारा-432) के अन्तर्गत नामिनल रोल/इनफरमिटी रोल के आधार पर सिद्धदोष बन्दियों की समयपूर्व रिहाई की कार्यवाही के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश। महोदय, AIO उच्चतम न्यायालय, नई दिल्‍ली A योजित सूओ मोटो Re पिटीशन (क्रि0) Weai-4/202: “इन रीः Ute स्ट्रैटजी फॉर ग्राण्ट ऑफ बेल” व विशेष अनुज्ञा याचिका (क्रि0) AO-529/202 सोनाधर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य में ALO न्‍्यायात्रय द्वारा पारित आदेश दिनांक 8.02.2025 के समादर में अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश राज्य में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-473 (सी०आरग्पीण्सी०- 973 की ORT 432) सपठित उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के wen-i77 से 90 में नामिनल रोल/इनफरमिटी रोल के द्वारा सिद्धदोष बन्दियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया प्रचलित है, जिसके नियमन हेतु निम्नांकित निर्गत शासनादेशों में भी प्रावधान किये गये है (i) WO 2834/22-2-9I-5(55)/9, दिनांक-03 जुलाई 99! (ii) GO 2VaqHR/22-2-96-2 मा0आ0/96, feetih-0 AS 996 (iii) GO 658/22-2-2004-25(94)/97, दिनांक-6 सितम्बर 2004 (iv) WO 250/2-2-200-25(94), दिनांक- 0 AS 20I0 (v) AO 292/22-2-20i2-9s/202, दिनांक-02 नवम्बर 202 (vi) WO 808/22-2-206-49ai/ 205, fealh-2 जुलाई 206 (vii) WO 34/20I8/987aWe/ 22-3-8-53/206, दिनांक-24 AS 208 (viii) PO 287/22-2-2024-03cN/ 2024, दिनांक-22 फरवरी 2024 2- इस संबंध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि प्रश्नगत Re याचिका A AO उच्चतम न्यायालय, नई दिल्‍ली द्वारा पारित उक्त आदेश दिनांक :8-02-2025 के अनुपालन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-473 (सी०आरगश्पी०्सी०-973 की धारा 432) सपठित उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के Weat-i77 से 90 मेँ निहित प्रावधानों (नामिनल रोल/इनफरमिटी रोल) के अन्तर्गत सिद्धदोष बन्दियो की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया के विनियमन हेतु एतदविषयक पूर्व से प्रचलित शासनादेशों के अनुक्रम में निम्नवत अतिरिक्त प्रावधान किये जाते है:- (4) उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के Weat-80 (नामिनल रोल) के अन्तर्गत आगामी 04 माह में पात्र होने वाले सिद्धदोष बन्दियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया कारागार अधीक्षक द्वारा प्रत्येक वर्ष Ol जनवरी, 0। मई व Ol सितम्बर को स्वचालित रूप से प्रारम्भ की जायेगी। सिद्धदोष बन्दियों की समयपूर्व रिहाई के प्रस्तावों को i20 दिवस के भीतर सक्षम स्तर (श्री राज्यपाल) के निर्णय हेतु प्रस्तुत किया जायेगा। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(2) पुलिस महानिदेशक»महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उ0प्र0 लखनऊ द्वारा कारागार मुख्यालय में उप महानिरीक्षक पद से अनिम्न अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया जायेगा, जो राज्य के कारागारों से इस प्रक्रिया के अन्तर्गत प्रस्ताव प्राप्त करने, उनके पर्यवेक्षण तथा उन पर कार्यवाही कराने के ल्रिये उत्तरदायी होगें। (3) उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के Wear-80 A वर्णित परामर्श समिति द्वारा सिद्धदोष बन्दियों का परिहार स्वीकार किये जाने की संस्तुति करते समय युक्तियुक्त शर्ते आरोपित किये जाने की संसतुति की जा सकती है, जो बन्दी के अपराध की प्रकृति, अपराध का उद्देश्य, बन्दी की आपराधिक पृष्ठभूमि, बन्दी का समाज में पुनर्वास, पीडित पक्ष पर व समाज पर प्रभाव, लोक सुरक्षा तथा dect की आपराधिक प्रवृत्ति को अंकुश में रखने के दृष्टिगत होंगी। (4) सिद्धदोष बंदियों के परिहार के प्रस्ताव को अस्वीकृत करते समय अस्वीकार आदेश में संक्षिप्त कारणों का उल्लेख किया जायेगा। परिहार अस्वीकार होने की दशा में सिद्धदोष बंदी को अस्वीकार आदेश के विरूद्ध प्रत्यावेदन देने का अधिकार होगा, इसका अस्वीकार आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया जायेगा। इस संदर्भ में बंदियों द्वारा प्रत्यावेदन कारागार अधीक्षक अथवा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कारागार मुख्यालय को प्रेषित किया जायेगा। तदुपरानत कारागार मुख्यालय द्वारा उक्त प्रत्यावेदन को जेल मैनुअल के WVEAN-(80 के अनुसार गठित परामर्श समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। प्रकरण पर पुनर्विचार करते हुए परामश समिति अपनी टिप्पणी /संस्तुति सहित प्रस्ताव शासन को प्रेषित करेगी, जिसे शासन द्वारा सक्षम स्तर पर अंतिम निर्णय हेतु प्रस्तुत किया जायेगा। (5) यदि सिद्धदोष बदियों के स्वीकृत परिहार को निरस्त किया जाता है तो मा0 उच्चतम न्यायालय, नई दिल्‍ली नई द्वारा क्रिमिनल अपील संख्या-4307/2024 माफाभाई मोतीभाई सागर बनाम गुजरात राज्य में पारित आदेश दिनांक 2.:0.2024 के अनुपालन में ऐसे आदेश निर्गत करने के पूर्व fears बंदियों को अपना पक्ष«प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया जायेगा। स्वीकृत परिहार को निरस्त करते समय निरस्तीकरण आदेश में संक्षिप्त कारणों का उल्लेख किया जायेगा। बंदी द्वारा अपना प्रत्यावेदन fort मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस आयुक्त द्वारा (पुलिस कमिश्नरेट की दशा में) कारागार मुख्यालय को प्रेषित किया जायेगा। तदुपरान्त कारागार मुख्यात्रय द्वारा उक्त प्रत्यावेदन को जेल मैनुअल के UER-i80 के अनुसार गठित परामर्श समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। परामर्श समिति जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस कमिश्नर की आख्या के आलोक A अपना स्पष्ट अभिमत>“संस्तुति सहित प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया जायेगा, जिसे शासन द्वारा सक्षम स्तर पर अंतिम निर्णय हेतु प्रस्तुत किया जायेगा। 3- उक्त के अतिरिक्त भारतीय संविधान के zeqedc-i6. के अन्तर्गत सिद्धदोष बन्दियों की समयपूर्व रिहाई हेतु स्थायी नीति विषयक पूर्व से प्रचलित शासनादेश AeAM-564/20I8/06/22-2-20I8- O7ci/208, दिनांक 0॥ अगस्त 20i8 एवं सपठित संशोधन विषयक शासनादेश AWEA-720/202/382/ 22-2-202-O7ai/20:8, दिनांक 28.07.202। व शासनादेश ACAl-52/2022/240/22-2-2022- O7a/20I8, दिनांक 27.05.2022 के अन्तर्गत निहित व्यवस्था के समरूप ही नामिनत्र रोल/इनफरमिटी रोल हेतु भी निम्न प्राविधान किये जाते है:- (।) उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल 2022 के Weat-i77 में वर्णित चिकित्सा बोर्ड के परीक्षणोपरान्त यदि कोई सिद्धदोष बंदी निम्नलिखित में से किसी भी घातक बीमारी से ग्रसित पाया जाता है, जो स्थायी नीति विषयक उक्त शासनादेशों में उल्लिखित है, तो उसके इनफरमिटी रोल पर dea मैनुअल के WEAR-79 के अन्तर्गत कार्यवाही की जायेगी:- i. Advanced bilateral pulmonary tuberculosis l- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |ii. Incurable malignancy iii. Incurable Blood diseases iv. Congestive heart failure v. Chronic epilepsy with mental degeneration vi. Advanced leprosy with deformities and trophic ulcer vii. Total blindness of both eyes viii. Incurable paraplegias and hemiplegias ix. Advanced Parkinsonism x. Brain Tumour xi. Incurable Aneurysms xii. Irreversible Kidney failure xiii. Any other terminal disease (2) स्थायी नीति विषयक उक्त शासनादेशों A उल्लिखित व्यवस्था के समान ही इस प्रक्रिया के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रतिबन्धित श्रेणी के सिद्धदोष बंदियों को परिहार देय नही होगाः- (क) ऐसे मामले में, जहां उसे उत्तर प्रदेश राज्य के बाहर स्थित किसी anaes द्वारा किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो। (ख) उन मामलों में, जहाँ आजीवन कारावास की सजा दी गई हो और जहाँ मा0 उच्चतम न्यायालय या AO उच्च Males ने विशिष्ट रूप से उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए कारावास आदेशित किया हो या ऐसे सभी सिद्धदोष बंदी जिनको बिना किसी परिहार के कारावास की सजा दी गई हो। (ग) जो एक पेशेवर हत्यारा है और उसे भाड़े पर हत्या करने या करवाने का दोषी पाया गया है। (घ) निम्नलिखित में से किसी भी अधिनियम के अन्तर्गत दोषसिद्ध किये गये बंदी- (i) शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 923 Gi) विदेशियों विषयक अधिनियम, 946 (ii) सीमा शुल्क अधिनियम, :962 Gv) विधि विरूद्ध क्रिया-कल्लाप (निवारण) अधिनियम, 967 () विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, 974 wi) Faro औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 985 Wii) आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम, :987 (वर्तमान में निरसित) (viii) Faron औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, :988 (x) आतंकवाद निवारण अधिनियम, 2002 (वर्तमान A निरसित) ७) लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 202 (5) जिसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 की URI-47 से 57 (भारतीय दण्ड संहिता i860 की धारा-2] से 730) (राज्य के विरुद्ध अपराधों के विषय में) के अंतर्गत दोषी ठहराया गया हो। (च) जिसे एक से अधिक विचारणों में आजीवन कारावास की सजा दी गयी हो। (छ) जिसे कारागार या पुलिस अभिरक्षा से पत्रायन के लिए दोषी ठहराया गया हो। (ज) जिसे पैरोल या गृह अवकाश या किसी अन्य प्रकार के अवकाश के दौरान किये गए अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो। (झ) जिसे सरकारी सेवक की कर्तव्य पालन के दौरान उसकी हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया गया हो। I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(ट) जिसे निर्रा की अवधि में उ0प्र0 जेल मैनुअल 2022 के प्रस्तर-77 के अन्तर्गत विगत 02 aut केदौरान औपचारिक चेतावनी से भिन्‍न किसी भी लघु दण्ड से और विगत 05 वर्षों के दौरान किसी दीर्घ दण्ड से कारागार प्रशासन द्वारा दण्डित किया गया हो। (3) ऐसे सिद्धदोष बन्दी, जिन्हें एक ही विचारण (Trial) में तीन या अधिक व्यक्तियों की हत्या के लिये आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी हो, तो स्थायी नीति विषयक पूर्व से प्रचलित शासनादेशों के अनुरूप ही इस प्रक्रिया के अन्तर्गत भी 25 वर्ष की अपरिहार सजा एवं 30 वर्ष की सपरिहार सजा व्यतीत करने के उपरान्त पात्र होगें। (4) ऐसे सिद्धदोष बन्दी, जिन्हे भारतीय न्याय संहिता(बी0एन0एस0)-2023 या भारतीय दण्ड संहिता (37S0I0HI0)-860 की निम्नलिखित में किसी भी धारा में दोषसिद्ध किया गया हो, को स्थायी नीति विषयक पूर्व से प्रचल्रित शासनादेशों के अनुरूप ही इस प्रक्रिया के अन्तर्गत भी 20 वर्ष की अपरिहार सजा एवं 25 वर्ष की सपरिहार सजा व्यतीत करने के उपरान्त पात्र होगें- (क) बी0एन0एस0-2023 की धारा 64- बलात्संग के लिए दण्ड (आई0पी0सी0 (860 की धारा-376) (ख) बी0एन0एस0-2023 की धारा 65- कतिपय मामलों A बलात्संग के लिए ave (आई0पी0सी0 860 की धारा-376) (ग) बी0एन0एस0-2023 की धारा 87- विवाह, आदि के करने को विवश करने के लिए किसी महिला का व्यपहरण करना, अपहरण करना या उत्प्रेरित करना (आई0पी0सी0 860 की धारा-366) (घ) बी0एन0एस0-2023 की UNI-96- शिशु का उपापन (आई0पी0सी0 860 की धारा-366ए) (ड) बी0एन0एस0-2023 की धारा 97- दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण (आई0पी0सी0 i860 की धारा-369) (a) बी0एन0एस0-2023 की धारा 98- वेश्यावृति, आदि के प्रयोजन के लिए शिशु को बेचना (आई0पी0सी0 860 की धारा-372) (छ) बी0एन0एस0-2023 की धारा 99- वेश्यावृति, आदि के प्रयोजन के लिए शिशु को खरीदना (आई0पी0सी0 860 की धारा-373) (A) बी0एन0एस0-2023 की धारा 39- भीख माँगने के प्रयोजनों के लिए शिशु का व्यपहरण या विकलांगीकरण (आई0पी0सी0 860 की धारा-373ए) (st) बी0एन0एस0-2023 की हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण (आई0पी0सी0 860 की धारा-364) धारा 40()- (ज) बी0एन0एस0-2023 की फिरोती आदि के लिए व्यपहरण या अपहरण (आई0पी0सी0 I860 की धारा-364ए) धारा 740(2)- (ट) बी0एन0एस0-2023 की व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से CAVA या अपहरण (आई0पी0सी0 860 की धारा-367) धारा 740(4)- (ठ) बी0एन0एस0-2023 की धारा 74- विदेश से बालिका या बालक का आयात करना (आई0पी0सी0 i860 की थधारा-366बी) (3) बी0एन0एस0-2023 की धारा 42- caved या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना (आई0पी0सी0 860 की धारा-368) अत: AO उच्चतम न्यायालय, नई दिल्‍ली द्वारा Yar मोटो Ne पिटीशन (क्रि0) Wear-4/202i “इन्न रीः पात्रिसी स्ट्रैटजी फॉर ग्राण्णट ऑफ बेल” व विशेष अनुज्ञा याचिका (fo) सं0-529/202। सोनाधर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य में पारित आदेश दिनांक 8.02.2025 के अनुपालन A भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-473 (सी०आरग्पी०्सी०-973 की धारा 432) सपठित उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-2022 के प्रस्तर- i774 90 में निहित प्रावधानों के सुसंगत तथा एतद्विषयक पूर्व के weal के अनुक्रम में सिद्धदोष बंदियों की समय पूर्व रिहाई की प्रक्रिया के विनियमन हेतु निर्धारित उक्त व्यवस्था का कृपया कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाय। भवदीय, रवि शंकर मिश्र विशेष सचिव। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |EAI-56/2026/25(l)/22-2-2026 तटदिनांक प्रतिल्रिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: - विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर), उत्तर प्रदेश। प्रमुख सचिव, मा0 मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश। tei ऑफिसर, मुख्य सचिव, उत्त्तर प्रदेश। सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्‍ली। समस्त प्रान्तो/केन्द्र शासित प्रदेशों के i0- li- i2- 3- 4- 5- 6- I7- 8- 9- 20- 2i- 22- मुख्य सचिव। प्रमुख सचिव, चिकित्सा विभाग, उत्तर प्रदेश। प्रमुख सचिव, न्याय विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को इस अनुरोध के साथ प्रेषित है कि विषयांकित याचिकाओं में AIO उच्चतम SAMs द्वारा पारित आदेश दिनांक 8.02.2025 के बिन्दु सं0०-27(एफ/जी) में अंकित दिशा-निर्देशों के अनुपालन हैतु राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण /जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को अपने स्तर से निर्देशित करने का कष्ट करें। श्री प्रदीप मिश्रा, एडवोकेट ऑन रिकार्ड, Al उच्चतम न्यायालय, नई दिल्‍ली द्वारा नोडल अधिकारी »अधीक्षक, जिला कारागार, गाजियाबाद। रजिस्ट्रार, AO उच्चतम न्‍यायात्रय, नई दिल्‍ली द्वारा नोडल अधिकारी»/अधीक्षक, जिला कारागार, गाजियाबाद। रजिस्ट्राय, AlO उच्च SII, इलाहाबाद द्वारा नोडल अधिकारी»वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, नैनी, प्रयागराज। रजिस्ट्रार, AO उच्च नन्‍यायात्रय, इलाहाबाद, खण्डपीठ, लखनऊ द्वारा नोडल अधिकारी»वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार, लखनऊ। महाधिवक्‍्ता, उत्तर प्रदेश। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। महानिदेशक, अभियोजन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। समस्त AVSAYFA, उत्तर प्रदेश। समस्त जिला मजिस्ट्रेट, उत्तर प्रदेश। समस्त पुलिस आयुक्त»वरिष्ठ पुत्रिस अधीक्षक»पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश। समस्त मुख्यचिकित्साधिकारी, उत्तर प्रदेश। समस्त उप महानिरीक्षक, परिक्षेत्रीय कारागार, उत्तर प्रदेश। समस्त वरिष्ठ अधीक्षक»अधीक्षक, केन्‍्द्रीय/आदर्श/जिला कारागार, उत्तर प्रदेश। निदेशक, सूचना विभाग, उत्तर प्रदेश। गार्ड फाईल। आज्ञा से, ममता श्रीवास्तव अनु सचिव। यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |

Continue your research