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Date: 2025-05-07 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंन्द्र नीति-2024

Issued by औद्योगिक विकास विभाग · औद्योगिक विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

यहां दिए गए दस्तावेज़ के सारांश का संक्षिप्त विवरण दिया गया है: **कार्यकारी सारांश:** दस्तावेज़ 7 मई, 2025 को जारी किया गया उत्तर प्रदेश सरकार का एक आधिकारिक अधिसूचना है, जो उत्तर प्रदेश में वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) की स्थापना और संचालन का समर्थन करने के उद्देश्य से "उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र नीति-2024" को मंजूरी देता है। इसका उद्देश्य राज्य को GCC निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करना है और यह 5 वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी है। **मुख्य बातें / मुख्य सामग्री:** * **नीति का उद्देश्य:** * GCC निवेश के लिए उत्तर प्रदेश को एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करना। * एक मजबूत GCC पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना। * राज्य में उच्च-मूल्य वाली डिजिटल सेवाओं, अनुसंधान और विकास तथा इंजीनियरिंग के लिए एक केंद्र के रूप में उत्तर प्रदेश को बदलना। * **पात्रता:** * GCC परियोजनाओं की स्थापना करने वाली कंपनियाँ इस नीति के तहत प्रोत्साहन के लिए पात्र हैं। * इस नीति में पात्र इकाइयों की परिभाषा शामिल है, और इसमें ऐसे औद्योगिक उपक्रम शामिल हैं (संयुक्त क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे औद्योगिक उपक्रम को छोड़ कर, जिसमें सरकार या सरकारी उपक्रम की शेयर पूंजी 50% या उससे अधिक हो) से है, जो किसी कंपनी, एलएलपी, सोसायटी, ट्रस्ट, औद्योगिक सहकारी सोसायटी के स्वामित्व वाली संस्था अथवा एकायत फर्म (Proprietary concern) के रूप में गठित किसी इकाई के स्वामित्व में है, जिसके द्वारा प्रदेश में वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) परियोजना की स्थापना की जा रही हो। * **वित्तीय प्रोत्साहन:** * फ्रंट-एंड भूमि सब्सिडी * स्टाम्प ड्यूटी में छूट/प्रतिपूर्ति * पूंजीगत सब्सिडी * ब्याज सब्सिडी * संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी * वेतन-पत्र (Pay roll) सब्सिडी * भर्ती (Recruitment) सब्सिडी * कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में नियोक्ता के अंशदान की वापसी * पात्र जीसीसी इकाई को प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन * अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार हेतु प्रोत्साहन * बौ‌द्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) सब्सिडी * कैस-टू-केस प्रोत्साहन * **गैर-वित्तीय सहायता:** * जीसीसी हेतु तकनीकी सहायता समूह * लिंकेज समर्थन * विनियामक समर्थन * **कार्यान्वयन:** * इन्वेस्ट यूपी नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। * मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए समितियाँ स्थापित की जाएँगी। * **सामान्य प्रावधान:** * नीति अधिसूचना की तारीख से 5 वर्षों के लिए प्रभावी है। * पहले से स्वीकृत पैकेजों का सम्मान किया जाएगा। * इस नीति के तहत लाभ भारत सरकार की किसी भी योजना के अतिरिक्त हैं। **प्रभाव विश्लेषण:** **हितधारक:** उत्तर प्रदेश में स्थापित होने या पहले से ही स्थापित GCC **प्रभाव:** वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से बढ़ा हुआ समर्थन, सुव्यवस्थित संचालन, नियामक सहायता और सुगम कनेक्टिविटी। **आवश्यक कार्रवाई:** प्रोत्साहन के लिए आवेदन करने और नीति का लाभ उठाने के लिए पात्रता मानदंडों को पूरा करना। **हितधारक:** उत्तर प्रदेश सरकार **प्रभाव:** निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करना। **आवश्यक कार्रवाई:** प्रभावी कार्यान्वयन और नीति-संचालित प्रशासन सुनिश्चित करना। **हितधारक:** उत्तर प्रदेश के स्थानीय शैक्षणिक संस्थान **प्रभाव:** उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम और GCC क्षेत्र में रोजगार के लिए बेहतर तैयारी के माध्यम से छात्रों के लिए प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के अवसर बढ़ेंगे। **आवश्यक कार्रवाई:** GCC सेक्टर की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों को अद्यतन और अनुकूलित करना।

Key Entities Referenced

उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र नीति-2024: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक नीति। उत्तर प्रदेश शासन: नीति जारी करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की शासी संस्था। औद्योगिक विकास अनुभाग-6, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार का विभाग जो राज्य में औ‌द्योगिक विकास नीति को लागू करता है। इन्वेस्ट यूपी: उत्तर प्रदेश सरकार की एजेंसी, जो राज्य में निवेश आकर्षित करने में मदद करती है, और इस नीति के तहत नोडल एजेंसी है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक पहले से मौजूद नीति, जिसके कुछ प्रोत्साहन इस नई नीति के तहत भी लागू हैं।
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SAAT प्रदेश शासन औद्योगिक विकास अनुभाग-6 संखया-38/2025/935/77-6-2025/0। (जी0सी0सी0)/2024 लखनऊ : दिनांक 07 AS, 2025 अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद (62 के अन्तर्गत कार्यपालक शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री राज्यपाल "उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंन्द्र नीति-2024 को प्रख्यापित करने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं। 2- "उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंन्द्र नीति-2024" संलग्न है। आलोक कुमार प्रमुख सचिव। संख्या-38/2025/935()/77-6-2025/0 (जी0एसी0एसी0)/2024 9 महालेखाकार, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज। समस्त अपर मुख्य सचिवप्रमुख सचिव//सचिव, उ0प्र0 शासन। स्टाफ ऑफिसर, मुख्य सचिव, उ0प्र0 शासन | मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यू0पी0 | समस्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, उत्तर Weel समस्त मण्डलायुक्त/जिलाधिकारी, उ0प्र0 | समस्त विभागाध्यक्ष, उ0प्र0 | प्रबंध निदेशक, पिकप। 9. आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर । |0.निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग,उ0प्र0, लखनऊ। |7.संयुक्त निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, ऐशबाग, लखनऊ। 2.समस्त अनुभाग, औद्योगिक विकास विभाग 3.गार्ड फाइल। ;4 9 छा पी WN > आजा से, पीयूष वर्मा विशेष सचिव। I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htip://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |संलग्नक (कर INVEST UP उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र नीति 2024 (Uttar Pradesh Global Capability Centres (GCC) Policy 2024)विषय-सूची पृष्ठ 3 4, प्रस्तावना 2. उत्तर प्रदेश: भारत मैं उदीयमान वैश्विक क्षमता कैंद्र गंतव्य पृष्ठ 4 पृष्ठ 9 3. नीतिगत फ्रेमवर्क पृष्ठ t4 4, वित्तीय प्रौत्साहन 5. गैर-वित्तीय प्रोत्साहन पृष्ठ 25 6. कार्यान्वयन संरचना पृष्ठ 27प्रस्ताबना- वैस्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेशल्स (एमएनसी) हेतु महत्वपूर्ण रणनीतिक परिसंपत्ति सिद्ध हों रहें हैं, जो उत्पादों के विकास, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (oa), er एनालिटिक्स एवं साइबर सुरक्षा जैसे प्रमुख व्यावसायिक wat हेतु नवाचार केंद्र के रुप मैं acter हैं। जीसीसी मूल रूप से लागत-प्रभावी बैक-ऑफिस इकाइयों के रूप में परिकल्पित किए. गए थे, वर्तमान मैं उक्त कैंद्र वैश्विक मूल्य सृजन, डिजिटल परिवर्तन तथा तकनीकी नवाचार के प्रमुख संचालक के रुप में विकसित हुए EL जौसौसी द्वारा अभियंत्रण (इंजीनियरिंग), अनुसंधान * एवं विकास (आर एण्ड डी) तथा उन्नत विश्लेषण सहित उच्च-मूल्य संघालत को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। भारत द्वारा जीसीसी सेक्टर मैं स्वयं को वैस्विक स्तर पर अग्रणी तथा AeA से स्थापित किया गया हैं एवं अनुमान हैं कि वर्ष 2030 तक इसका घरेलू बाजार लगभग 70 बिलियन ऑॉलर तक पहुंच जाएगा, जो सॉफ्टवेयर निर्यात gare संचालित हैं! वर्ष 2024 तक भारत के वैश्विक क्षमता कैंद्र उद्योग ने .9 मिलियन से अधिक विशेषज्ञों को रोजगार दिया एवं अर्थव्यवस्था मैं 64.6 बिलियन डॉलर का योगदान दिया है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद के *% से अधिक है। वर्ष 2030 तक भारत में जौसीसी की संख्या 4,700. बढ़कर 2.400 से अधिक होने की सम्भावना है, जिसमें 2,550 केंद्रों तक संभावित विस्तार हों जाएगा, जिससे 25 लाख से अधिक रोजगारसूजित हाँगे। नवीन वैश्विक क्षमता कैंद्रों की वार्षिक स्थापना 70 से 005 , होने की सम्भावना है, जो ae प्रौद्योगिकी तथा सेवा कैंद्र के रुप मैं भारत के नेतृत्व को सशक्त करेगी। वैश्विक क्षमता केंद्रों का विकास प्रभावशाली रहा है, जो साधारण बिजनेस प्रोसेस आउटसोसिंग (बीपीओ) कैद्रों से नॉलेज प्रोसेस आउटसौसिंग (केपीओ) एवं बहुक्रियाशील et A परिवर्तित हुए Set जौसौसी अब उत्पादों का एआई-संचालित Reena, साइबर सुरक्षा, इंजीनियरिंग अनुसंधान तथा उन्नत विश्लेषण जैसे अधिक जटिल, उच्च-मूल्य वाले sat का प्रबंधन करते हैं। मशील लिंग (ere), क्लाउड कंप्यूटिंग तथा रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन (आरपीए) जैसी तकनीकों के आने से इन केंद्रों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नवाचार रणनीतियों by अपरिहार्य बा दिया है। उत्तर प्रदेश अपनी रणनीतिक स्थिति, युवा कार्यबल एवं प्रगतिशील अवस्थापना के साथ इस उन्नति का लाम प्राप्त करने हेतु अगसर है। अवस्थापना विकास, प्रतिभा संवर्धन एवं वित्तीय प्रोत्साहनों पर कैंद्रित कार्यवाही से राज्य सरकार का TENE कि प्रदेश को जौसौसी निवेशों हैतु ‘ Vvcom अग्रणी गंतव्य के रुप में स्थापित किया जाए। बीडीओ इंडिया (बेल्जियम मैं मुख्यालय) जैसी प्रमुख उद्योग कंपनियाँ ने नौएडा को अपने fees क्षमता कैंद्र हेतु निवेश स्थल के रुप में चयनित किया हैं, जो उतर प्रदेश के व्यापार-अनुकूल वातावरण को रेखांकित करता है। उतर प्रदेश सरकार एआई एवं साइबर सुरक्षा जैसे उदीयमान abst मैं उत्कृष्टता Hah (athe) को भी प्रोत्साहित कर रही है, जिससे जीसीसी परिस्थिति की तंत्र मैं वैश्विक स्तर पर उतर प्रदेश की भूमिका aes होगी। 2. उत्तर प्रदेश: भारत में उदीयमातर वैश्विक शमता कैंद्र (जीसीसी) गंतब्य 2.4, क्षेत्रीय (सेक्टोरल) लाभ: Apes क्षमता कैंदर, आईटी सेवाओं, वित एवं लेखा, मानव संसाधन एवं ग्राहक सहायता सहित विभिन्‍न सेवा क्षेत्र में संचालित हैं। जौसीसी द्वारा एनालिटिक्स, डेटा प्रबंधन व अनुसंधान एवं विकास जैसे जटिल कार्यों का संचालन करते हुए मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाया गया हैं; जिनके लिए गहन व्यावसायिक eRe तथा विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। वर्तमान मैं, भारत मैं सीसी ने प्रमुख eat में एक ee उपस्थिति स्थापित की है, जिसमैं सॉफ्टवेयर व प्रौद्योगिकी 38%, बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा) 8%, दूरसंचार एवं नेटवर्तिग 5% तथा औद्योगिक, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, परिवहन एवं निर्माण, मीडिया व pantie एवं सेसीकेंडक्टर (प्रत्येक 4%) BATRA हैं। अन्य क्षेत्र मैं रसायन एवं सामग्री (4%), फार्मस्यूटिकल्स (2%), ऊर्जा एवं जनोपयोगी सेवाएं (2%), चिकित्सा उपकरण (0%) सम्मिलित हैं, इसके अतिरिक्त एयरोस्पेस, ae व गैस तथा स्वास्थ्य सैवाओं में उनकी उपस्थिति मैं वृद्धि हो रही है। जासीसी सेक्टर्स को मुख्यतः अपस्ट्रीम, एवं डाउनस्ट्रीम श्रेणियाँ मैं वर्गीकृत किया गया है। पस्ट्रीम क्षेत्र अत्यधिक विशिष्ट व ज़ान-प्रधान हैं, जिनेके विकास हेतु आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, क्वोटम कंप्यूटिंग, डीप-टैक एवं रोबोटिक्स जैसे औद्योगिक समूह के पूर्व से उपस्थित पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता हीती है। दूसरी और, आउनस्ट्रीम क्र यृहद व्यवसाय दर निर्भर किए बिना संचालित हो सकते Bead उन्हें एक कुशल कार्यबल, गुणवततपूर्ण अवस्थापना एवं व्यवसाय-अनुकूल शासन के साथ कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। इनमें बैंकिंग, वितीय सेवाएं एवं बीमा, सॉफ्टवेयर व प्रौद्योगिकी, एवं ऊर्जा व उपयोगिताएँ जैसे क्षेत्र सम्मिलित *हैं। वर्तमान मैं, भारत में अपस्ट्रीम क्षेत्र सभी वैरिवक क्षमता कैंद्रों के लगभग 25% प्रतिनिधित्व 'करतें हैं, जबकि डाउनस्ट्रीस क्षेत्र कुल वैश्विक क्षमता केंद्रों के लगमग 75% हैं। उतर प्रदेश पूर्व से ही मौतम age नगर सॉफ्टवेयर एवं प्रोद्योगिकी क्षे्र हेतु एक जौसीसी हब के रुप में स्थापित है। इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन व विनिर्माण एवं सूचना प्रॉद्योगिकीसूचना _ प्रौद्योगिकी जनित सेवा सेक्टर मैं सु उपस्थिति के साथमारत मैं. इन क्षेत्र मैं निर्यात का सर्वाधिक योगदान तथा 3,50,000 से अधिक प्रौफेशनल्स को रोजगार देने के साथ, उत्तर प्रदेश 4 संबंधित झाउनस्ट्रीम वैश्विक क्षमता केंद्रों को आकर्षित करने हैतु बेहतर विकल्प हैं। राज्य में 200 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन व विनिर्माण एवं सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां हैं, a जिनमें सैमसंग, shed, हायर, एनटीटी, एसटीटी, ग्लोबल, tame, एचसीएल टेक्‍्नौलॉजीज, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एडोब एवं माइक्रोसॉक्ट जैसे प्रमुख वैश्विक ब्रांड सम्मिलित हैं। अतः, उत्तर प्रदेश में सॉफ्टवेयर एवं प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, विताय सेवाएं एवं बीमा, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य एवं मेडिकल डिवाइस सहित अउनस्ट्रीम जौसीसी decd का मुख्य केंद्र बलने की “क्षमता है। 2.2. सक्षम अवस्थापना सुविधाएँ: उत्तर प्रदेश सरकार व्यवसाय में वृद्धि का समर्थन करने हेतु अवस्थापना के विकास हैतु प्रतिबद्ध है। विगलपांच वर्षो में, उत्तर प्रदेशमें अवस्थापना के पूंजीगत व्यय में 5.3 लाख “ite का निवेश किया गया है, जो भारत मैं सर्वाधिक है। यह निवेश गंगा एक्सप्रेसव, Gate 'एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रैसवे तथा गौरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं मैं परिल्रक्षित होता है, जिनका उददैश्य पीएम गतिशक्ति योजना के अंतर्गत मात्र gag को Staats करना है। उत्तर प्रदेश अयोध्या, कुशीनगर, लखनऊ, वाराणसी एवं आगामी नोएडा अंतर्ष्ट्रीय हवाई-जइडे के साथ20 घरेलू हवाई-अड्डों के माध्यम से वैश्विक रूप से जुड़ा हुआ है, जो संचालित व प्रस्तावित हैं। उत्तर प्रदेश में 40 से अधिक आईटी पार्क एवं 25 विशेष आर्थिक परिक्षत्र (एस ईँ ज़ेड) हैं, जो आधुनिक, उपयोग हेतु लैयार कार्यालय स्थल (ऑफ़िस स्पेस) उपलब्ध कराते हैं। नोएडा जीसीसी हेतु एक प्रमुख गंतव्य बन गया है, जो विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर मैं वैश्विक प्रौद्योणिकी एवं विनिर्माण कंपनियों से महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहा है। प्रदेश उत्तर भारत में डेटा सेंटर ब सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित हुआ है, जिसके अंतर्गत यौद्टा, एसटीटी ग्लोबल एवं वेब वर्क्स जैसी प्रमुख कंपनियाँ उतर प्रदेश मैं कार्य कर रही हैं। उतर प्रदेश सरकार हि,मे हाल ही मैं नोएडा अंतर्ष्ट्रीय ee एकड़ के सेमीकंडक्टर पार्क की दोषणा की है, जिसको यमुना canted औद्योगिक विकास प्राधिकरण मैं मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क तथा रैंपिड रेल ट्रॉजिट सिस्टम का लाम प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, राज्य यमुना एक्सप्रेस औद्योगिक विकास प्राधिकरण ate में एक इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क (250 एकड़ एक Ber dex पार्क एवं अन्य इलेक्ट्रॉलिक विनिर्माण क्लस्टर्स हैं। लखनऊ में (40 एकड़) में एक ong सिटी की योजनाउतर प्रदेश 'अवस्थापना सुविधाओं को रेखांकित करती है। एकीकृत ऑदूयोगिक टाउनशिप (750 एकड़), मेडिकल डिवाइस पार्क (250 एकड़) तथा यमुना CTT < औदयोगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में फिलटेक पार्क जैसी सुविधाओं के साथ प्रदेश वैश्विक मत कैंदर (जीसीसी) विकास का समर्थन करता है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी raat ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) उतर प्रदेश मैं प्रतिस्पर्धी रेड ए ऑफिस pte किमाए पर उपलब्ध कराता है, जिसमें नोएडा का औसत किरायां भारत के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में प्रतिस्पर्धी है। एसटीपीआई वर्तमात मैं कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, atest तथा मेरठ में संचालित हैं, जो लगभग 300 पंजीकृत आईटी इकाइयों को सैवा प्रदान कर रहे हैं; . ज़बकि आगरा, बरेली, गोरखपुर व वाराणसी By नए एसटीपीआई कीं योजना बनाई गई हैं। 2.3. प्रतिभावान कार्यशक्ति की उपलब्धता: Sree मैं वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की वृद्धि देश के विशाल प्रौद्योगिकी प्रतिभा की rear डिजिटल नवाचार हेतु अनुकूल वातावरण को पिन्हांकितकरती है। भारत के जीसीसी कार्यबल मैं लागत-प्रतिस्पर्धी औसत वैतन पर लगभग 46 लाख प्रोफेशनल्स कार्यरत हैं। विभित्न शुक्षणिक एवं तकनीकी संस्थातों दवारा इस प्रतिमावान ree की लिरंतरपूर्ति की जा सी है; जिससे इंजीनियरिंग, डेटा विज्ञान, आईटी व दित में विशेषज्ञों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होती by प्रदेश की Serr 56% जनसंख्या कार्यशील आयु वर्म (78-60 ayer अंतर्गत हैं, जिससे उत्तर Seer को, एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय लामांश का लाभ प्राप्त हौता हैं, जो देश में उच्च 'रोजगारपरक संसाधनों की सुलभता को परिलशित करता हैं। उतर प्रदेश प्रति वर्ष लगभग 2.75. लाख eevee को शिक्षित करता ere इंडिया स्किल्‍्स रिपोर्ट 2024 के अनुसार, प्रदेश युवाओं ge रोजगार की उपलब्धता में शीर्ष राज्यों में सम्मिलित हैं, जो जौसीसी क्र में बदती मांग की पूर्ति करने हेतु कुशल प्रोफशनल्स के निरंतर प्रवाह को सनिश्थित करता है। व्हौलबॉक्स रिसर्च के *९ अनुसार, उत्तर प्रदेश में 22-25 आयु वर्ग में रोजगार-यौरय प्रतिभाओं की सबसे अधिक भागीदारी है, जिसमें 74.77% आवेदक अत्यधिक रोजगार-योग्य मानें जाते हैं। उतर प्रदेश शैक्षणिक अवस्थापलासेक्टर मैं देश मैं अयणी राज्य है, यहाँ 8975 उच्च शिक्षा संस्थान, 72 से अधिक विश्वविद्यालय, लगमग 6,000 महाविद्यालय एवं 68 पॉलिटेक्निक में 425,000 से अधिक सीटें हैं। see प्रदेश में एक Ary व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली भी है, जिसमैं ce उपर. कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) के अंतर्गत 3,000 से अधिक ऑदयोगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) एवं 4000 से अधिक प्रशिक्षण सहमागी हैं। आईआईटी कानपुर, आईआईटी dire, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी तथा एनआईटी प्रयागराज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान यहाँ स्थित हैं, जो राज्य की yee शैक्षणिक नींव में योगदान दे रहें हैं। वर्ष DOT सूपीएसडीएम के अंतर्गत लगभग 76,000 कौशल प्रशिक्षण Sgt के माध्यम से 7 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रदान किया हैं। उत्तर प्रदेश अपने विशाल, शिक्षित कार्यबल, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के निकट रणनीतिक, स्थिति एवं नोएडा, गाजियाबाद तथा लखनऊ जैसे तीव्रता से विकसित हो रहे शहरी केंद्रों के कारण वैश्विक कॉ्पोरेशन्स को आकर्षित करने हेतु विशिष्ट स्थिति में है। चूंकि आगामी वर्षों में जीसीसी सेक्टर मैं दोगुने artes की अपेक्षा है, अतः टियर-2 शहरों की और ध्यानुकर्षण हो रहा है, जहां कुशल प्रतिभाओं की सु्रता है। * लखनऊ, विशेष रूप सै, जीसीसी हेतु एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा हैं, विशेषतः 'आईटी।आईटीईएस फर्मो हेतु, जिनकों लागत-कुशल संघालन एवं विशाल कुशल व प्रतिभावान * कार्यबल-की आवश्यकता हैं। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पा्व्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) are लखनऊ को टेक स्टार्टअप हेतु एक केंद्र के रुप में मान्यता दिए जाने के साथ, यह शहर वेब demic में अग्रणी बन रहा हैं तथा एडटैक, हैल्‍्थटेक व रिटेलटेक की ओर अयसर है। नैसकॉम ने लखनऊ एवं कानपुर को आईटी व बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (वीपीएम) उद्योगों हैतु उदीयमान ah के रूप मैं भी मान्यता भी प्रदान की है। 2.4. नवाचार पारिस्थिकी तंत्र: , बहुराष्ट्रीय कंपनियों हेतु मात्र बैक ऑफिस के रूप मैं कार्य करने से अधिक, जीसीसी अतिरिक्त राजस्व स्रोत उत्पन्न करने एवं वैरिक समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका Fa रहेहैं। जीसीसी अधिकाधिक स्टार्टअप्स मैं निवेश कर रहें हैं तथा उनके साय सहयोग कर रहे हैं, जिससे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय योगदान प्राप्त हो रहा है। भारत मैं, जौसीसी दूवारा देश के aes अभियंत्रग अलुसंधान एवं विकास (ईआरएंडडी) सेवा प्रदाला समुदाय, स्टार्टअप यारिस्थितिकी तंत्र एवं नॉलेज बेस का लाभ उठते हुए 5 से अधिक इनक्यूबेटर्स, 40 से अधिक सक्सेलेरेटर तथा विभिन्‍न सहभागिता कार्यक्रम स्थापित किए गए हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत मैं कुल पंजीकृत स्टार्टअप्स मैं से लगमग 9% उत्तर प्रदेश “में स्थित हैं। लगभग 79,209 स्टार्टअप्स के साथ, विशेष रुप से टियर-2 एवं टियर-3 शहरों मैं, प्रदेश स्टार्टअप्स की संख्या मैं चौथे स्थान पर है, जो जीसीसी को संचालन स्थापित करने में लाभ प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य आगामी दशक में प्रति वर्ष 7,00,000 ars को वित्त पौषित करना है, जिससे t0 लाख मए स्टार्टअप्स स्थापित करने मैं सहायता प्राप्त हौगी। प्रदेश में वर्तमान में 23 जनपदों में 63 इनक्यूबेटर एवं 08 उत्कृष्टता कैंद्र (सीओई) हैं, जो cong व एमएल, ब्लॉकचैन, 5जी/6जी; ड्रौन, At इलेक्ट्रॉलिक्स तथा स्वास्थ्य सूचना विज्ञान जैसे क्षेत्रों पर कैद्वित हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की योजना tO लाख वर्ग फीट के संयुक्त स्थान के gre न्यूनतम t00 इनक्यूबेटर्स स्थापित करने की है, जिससे 70,000 स्टार्टअप्स हैतु एक 'पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा। उत्तर प्रदेश पेटीएम, पेटीएम मॉल, इंडिया मार्ट, मौग्लिक्स, पाइन िव्स, इनोवैसर, इन्फोएज एवं फिजिक्स वालाह जैसे यूनिकॉर्न (अर्थात्‌ 70 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्यवाले स्टार्टअप) के साथ-साथ सूनीकॉर्न व मिनीकॉर्न का हब बन रहा हैं। पर प्रदेश की प्रतिष्ठा मैं आईआईटी कानपुर (एआई, ड्रोन प्रौद्योगिकी, 5जी/6जी में विशेषज्ञता), 'आईआईएंम लखनेऊ (ब्लॉकपैन) wt एसपीजीपीआई लखनऊ. (मेडटेक) जैसे विश्वस्तरीय rs संस्थानों के कारण बुद्धि हुई हैं, जो अनुसंधान, नवाचार एवं उन्नत प्रॉद्योगिकियों के जद के स्प में राज्य की स्थिति को ee करते हैं। उक्त उत्कृष्टता केंद्र (सीऔई) जीसीसी को रणनीतिक, साझेदारी व नवाचार को cre करने हेतु अदवितीय अवसर प्रदान करते हैं 25. अनुकूल निवेश वातावरण: जगत दो at से निरंतर 'ईज़ ऑफ डूडंग बिज़नेस' की रैंकिंग मैं एक 'अचीवर स्टेट' के रूप मैं उतर प्रदेश निवेश एवं व्यवसाय के संचालन हैतु एक बेहतर वातावरण प्रदान करता हैं। श्रम * OYpte, भूमि प्रशासन, सूचना तक पहुंच व पारदर्शिता तथा निर्माण परमिट जैसे कई सुधार क्रियन्बित किए गए हैं। निवेश मित्र, सबसे बड़ा समर्पित सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल, स्वीकृतियोँ को समयबद्ध रूप व शीघ्रता से प्रदान करने हेतु विकसित किया गया है। इसके अंतर्गत43 विजागों की 490 से अधिक सेवाओं को एकीकृत किया गया है तथा यह 4500 से अधिक अनुपालनों को सफलतापूर्वक कम करने मैं सहायक सिदुध हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निवेशकों की सुविधा हेतु एक व्यापक res विकसित किया गया है। समझौता-ज्ञापन (एमओयू। हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया को सरल बनाने एवं निवेशक को उचित ** सहायता प्रदान करने हेतुएक ऑनलाइन इन्वेस्टर रिलेशनशिप मैनेजमैंट पोर्टल विकसित किया ८ गया हैं, जिसे "निवेश सारथी" के रूप मैं जाना जाता है, जो निवेशकों हैतु उलके संशर्यो!आपत्तियों पर सहज प्रतिक्रिया, शिकायतों का निस्तारण, निवेश आशय दर्ज करने, सुविधा प्राप्त करने तथा उनके निवेश परियोजनाओं के अनुभवण हैतु वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म है। “निवेश सारथी” ने उत्तर प्रदेश में निवेशकों से जुड़ने की संपूर्ण प्रक्रिया में आमूलन्यूल परिवर्तन किया है। इसमें निवेशकों की सहायता हेतु समर्पित रिलेशनशिप मैनेजर के रुप में t00 उद्यमी मित्रों को मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र के रूप मैं नियुक्त करना सम्मित्तित है। * बारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार की एक समर्पित संस्था gra यूपी, राज्य में अपना व्यवसाय स्थापित करने की योजना बनाने वाले निवेशकों को आवश्यक सहायता प्रदान करती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आईटीआईटीईएस, डेटा सेंटर, ईएसडीएम, ., सैमीकंडक्टर, स्टार्टअप, डिफेंस एवं एयरोस्पैस, इलेक्ट्रिक वाहन, वेयरहाउसिंग व लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, टैक्सटाइल आदि सहित विभिन्‍न क्षेत्रों मैं निवेश को आकर्षित करने हेतु लगभग 27 ४ प्रोत्साहन नीतियाँ ' को प्रख्यापित किया गया tod नीति-संचालित प्रशासन के माध्यम से औद्योगिक विकास हेतु एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित करने मैं विभिन्‍न सुधार ५ क्रियान्वित किएगए हैं। उक्त नीतियां अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा उदयमिता को प्रोत्साहित करने हैतु निजी कंपनियों को आकर्षित करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप, उत्कृष्टता, कौशल एवं अनुसंधान तथा विकास केंद्र स्थापित करने हेतु आकर्षक सब्सिडी भी प्रदान की जा सही हैं। 2९ 3. नौतिगत्‌ फ्रेमवर्क 3. उतर प्रदेश में आवश्यकता एवं महत्व » Wwउत्तर प्रदेश में जौसीसी की स्थापना से राज्य की आर्थिक वृद्धि एवं रोजगार सृजन पर उल्लेखनीय व सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, आईटी Mara, परामर्श व इंजीनियरिंग में इसका विशेष लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, जीसीसी Rae, टियर-2 एवं टियर-3 शहरों को विकसित करने मे सहयोग करेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी एवं शहरी व ग्रामीण आय- असमानताओं को कम किया जा सकेगा। टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में जीवन-यापन की कम लागत तथा नवीन अवस्थापना विकास के साथ वैश्विक कंपनियां हेतु लागत-प्रभावी समाधान उपलब्ध हो रहें हैं, जिससे वे नवीने जीसौसी निवेश हेतु आकर्षक गंतव्य हैं। इसके अतिरिक्त, जीसीसी की उपस्थिति से प्रदेश में अवस्थापना विकास में वृद्धि होगी, जिसमें आईटी पार्क, सह-कार्यशील स्थान (को-वर्तिंग स्पेसेज़) एवं विशेष आर्थिक Rete (was) का. विस्तार सम्मिलित है। इससे कनेक्टिविटी तथा व्यापार करने में आसानी होगी, जिससे उतर आदेश tg निवेशकों हेतु एक अधिक आकर्षक गंतव्य के रूप मैं स्थापित होगा। 32. विज़न 4. उत्तर प्रदेश अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, विशाल प्रतिभा संसाधन एवं उत्कृष्ट अवस्थापना का लाभ उठाकरवैर्विक क्षमता कैंद्रों (जीसीसी) सेक्टर में स्वयं को वैश्विक रूप से अग्रणीराज्य के रुप मैं स्थापित करने की परिकल्पना करता हैं। राज्य का लक्ष्य Sa सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है, जौ नवाचार, उद्यमशौलता एवं ART प्रतिस्पर्धी को प्रोत्साहित करे, जिससे स्वदेशी तथा अंतर्राट्रीय कंपनियां अपने oat स्थापित करने हेतु आकर्षित at 2. प्रदेश सरकार का आशय हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भविष्य की आवश्यकताओं की afta करके उत्तर प्रदेश को उच्च-मूल्य वाली डिजिटल सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास तथा इंजीनियरिंग हेतु एक प्रमुख गंतब्य मैं परिवर्तित किया जाए। इनमें एआई, मशीन afta, डेटा एलालिटिक्स, क्लाउड Seat एवं साइबर सुरक्षा जैसे उदीयमान क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो वैश्विक व्यवसायों हैतु महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। 3. इसके अतिरिक्त, At का उददेश्य उत्तर प्रदेश को भारत हेतु नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है; जिससे कंपनियाँ को उन्नत विनिर्माण, डिजिटल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजैंस cd ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र - ०...(सीओई) स्थापित करने में सहयोग मिलेगा। अनुकूल व्यावसायिक वातावरण, उच्च गुणवत्ता वाली अवस्थापना सुविधाओं एवं विनियामक सहायता प्रदान करके, राज्य का. लक्ष्य अपने प्रौद्योगिकी आधारित प्रतिभावान कार्यबल को दोगुना करना एवं जीसीसी हब के रूप मैं अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ावा देना है। 4. इस विज़नमैं उन शहरों मैं नगरीय सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य संवा एवं मनौरंजक सुविधाओं को बेहतर करके जीवन स्तर को सुगम बनाना सम्मिलित हैं, जिनमें जौसौसी crafter किए जाते हैं, जिससे उतर प्रदेश प्रोफेशनल्स तथा उनके परिवारों हैतु एक आकर्षक गंतब्य बन सके। 3.3. रणनीतिक उददैश्य “* उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति के रणनीतिक sete जौसीसी की स्थापना एवं विकास हैतु अनुकूल वातावरण को प्रोत्साहित करने हैतु विकसित किए गए हैं। इन उददेश्यों का लक्ष्य उन प्रमुख कारकों को पुष्ट करना है, जो वैश्विक कंपनियों के भारत में निवेश करने के निर्णयाँ को प्रभावित ORG हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि उतर प्रदेश उच्च तकनीक, जान-आधारित (नॉलेज-बेस्ड) संचालन हेतु एक प्रमुख गंतव्य के रुप मैं स्थापित होसके। नीति के प्रमुख उददेश्य निम्नलिखित & 4, विशवस्तरीय अवस्थापना का तिर्माण; जीसीसी को आकर्षित करने हेतु भौतिक एवं डिजिटल अवस्थापना में निवेश महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रौद्योगिकी et (टेक्नोलॉजी oh, एसईजेड एवं सह-कार्य स्थलों (को-्वक्तिंग स्पेसेज़,के विकास में निवेश किया जाएगा। प्रदेश मैं निर्बाध वैश्विक 2१ संचार tg उत्तम सड़क नेटवर्क, हाई-स्पीड इंटरनेट तथा उन्नत दूरसंघार अवस्थापना सुविधाओं सहित परिवहन कनेक्टिविटी की वृद्धि होगी। जीसीसी हैतु पर्यावरण के अनुकूल कार्यशैली एवं हरित xed मानकों का समर्थन करने वाली टिकाऊ अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना पर ‘ita कार्यवाही की जाएगी। 2. हब-स्पीक ऑपरेटिंग मॉडल: जौसीसी विकसित करने हेतु एक हब-स्पीक मॉडल की परिकल्पना की गई है, जो व्यवसायों को उच्च विशेषज्ञ प्रतिभा, लागत अंतरपणत (Cost Aritragel एवं संचालन दक्षता का लाभ उठाने * nu दी \में सहायता करता हैं। इस मॉडल के चार घटक हैं, अर्थात्‌ ग्लोबल हब, सैटेलाइट ऑफिस, आउटसोर्स Hex तथा आउट पॉस्ट/क्लस्टर ऑफिस। ग्लोबल हब्स स्वतंत्र केद्र होते हैं, जो सीधे मुख्यालय के सांथ कार्य करते हैं। सैटेलाइट कार्यालय ग्लोबल हब के सहायक केंद्र होते हैं एवं राष्ट्रीयक्षेत्ीय व्यापार रणनीति के साथ 'सरेखित होते हैं। आउटसोर्स कैंद्र स्थानीय सहभागियों द्वारा स्थापित निष्पादन केंद्र हौते हैं तथा इनका उत्तरदायित्व कंपनी की डिलीवरी का होता है। आउटपोस्टाक्लस्टर कार्यालय सीमित मौतिक स्थान वाले विस्तारित सैटेलाइट कार्यालय होते हैं an स्थानीय कार्यबलर की सुविधा प्रदान करते हैं, जो मुख्य रूप से वर्क फ्रॉम हौम होते हैं। उतर प्रदेश सरकार टियर-2 शहरों में सैटेलाइट कार्यालय एवं आउटसौर्स केंद्र तथा टियर-3 सहरों मैं 'आउटपॉस्ट/क्लस्टर कार्यालय स्थापना पर केंद्रित कार्यवाही करेगी। ta आकर्षण हेतु प्रोत्साहन: उत्तर प्रदेश में जीसीसी मैं निवेश आकर्षित करें हेतु कर-छूट, सब्सिडी एवं पूंजीगत्‌ अनुदान सहित वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। ये प्रोत्साहन कंपनी कै. कार्य-प्रदर्यन पर आधारित होंगे, जौ रोजगार सुजन, निर्यात वृद्धि तथा प्रौद्योगिकी नवाचार पर केंद्रित हांगे। प्रदेश सरकार दवारा कंपनियों पर प्रशासलिक भार की कर्म: करने हेतु इन प्रोत्साहनों का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी सुव्यवस्थित किया जाएगा। 4. उद्योग की आवश्यकताओं से कौशल संरेखण: यह नीति शैक्षिक पाठ्यक्रम को जीसीसी सेक्टर की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में सहायक poten यह सुनिरिधित करेगी कि स्नातकों के पास उच्च तकनीक वाले वातावरण मैं सफल होने हेतु आवश्यक कौशल हो; जिससे कार्यबल मैं कौशल अंतराल कम हो सके। 5. व्यावसायिक वातावरण में सुधार: तर प्रदेश सरकार व्यवसाय के अनुकूल विनियामक वातावरण का सृजन करेगी, जिसमें अनुपालन आवश्यकताओं का संरलीकरण, स्वीकृतियों हेतु आवश्यक समय को कम करना एवं Bora विंडो स्वीकृति प्रणाली प्रदान करना सम्मिलित है। प्रशासनिक बाधाओं को कम करके, राज्य का [लक्ष्य वैस्विक कंपनियों gan अपने संधालन को स्थापित करने तथा विस्तारित करने को सरल बनाना हैं। 2 Ww6, जोखिम न्यूनीकरण एवं स्थायित्व: यह नौति जीसीसी संचालन स्थायित्व सुनिश्चित करने हेतु जोडिम प्रबंधन स्परेखा पर भी केंद्रित है। उक्त रुपरेखा साइबर सुरक्षा, मू-ाजनीतिक परिवर्तनों एवं वैश्विक बाजार में परिवर्तनों से संबंधित जोखिम का भी निवारण करेगी। प्रदेश सरकार पर्यावरणीय स्थायित्व को भी प्राथमिकता देगी, जौसीसी को हरित कार्य-प्रथाओं के अंगीकरण तथा कार्बन eter को कम ६ करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। 7. आर्थिक प्रभाव में वृद्धि करना: प्रदेश, सरकार का लक्ष्य जीसीसी के आर्थिक योगदान को प्रोत्साहित करना हैं, क्योंकि इसका * रोजगार सृजन पर गुणक प्रभाव पड़ता है। यह सेक्टर शीर्ष प्रतिभाओं को आकर्षित करने हेतु प्रवृत है, अतः जिन शहरों में जीसीसी स्थापित किए जाएंगे, वहां जीवन की गुणवत्ता मैं सुधार होगा! स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास व मनोरंजन सुविधाओं मैं निवेश यह सुनिश्चित करेगा कि उत्तर प्रदेश न केवल व्यवसाय हेतु अनुकूल गंतब्य है, अपितु प्रोफेशनल्स एवं उनके परिवारों के “pare हेतु एक बांउनीय स्थान भी हैं। इस समग्र इष्टिकोण के परिणामस्वरूप प्रति्ावां कर्मियों को रोकने में योगदान देगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रदेश में एक स्थायी एवं उच्च गुणवत्ता वाला कार्यबल सुलभ wi 34: वित्तीय प्रोत्साहन 44 पात्रता एवं परिभाषाएँ प्रभावी लियि का अभिप्राय उस तिथि से है, जिस तिथि से यह नीति प्रभावी होगी। 444 प्रभावी अवधि का अभिप्राय प्रभावी तिथि से लेकर इस नौति के प्रभावी रहने की 442. अवधि (5 वर्ष) तक अथवा राज्य सरकार द्वारा इसमें कोई संशोधन या निरसन होने तक की अवधि से हैं। बाज इकाई का अभिप्राय ऐसे औद्योगिक उपक्रम (संयुक्त क्षे्र या सार्वजलिक ar 4.43. के ऐसे औद्योगिक उपक्रम को og कर, जिसमैं सरकार या सरकारी उपक्रम की शेयर पूंजी 50% या se ' अधिक हों) से है, जौ किसी कंपनी, एलएलपी, सौसायटी, ट्रस्ट, औदयोगिक सहकारी सौसायटी के स्वामित्व वाली संस्था अथवा 'एकायत फर्म (Proprietary concern) के रूप मैं गठित किसी इकाई के स्वामित्व मे है, जिसके carr प्रदेश, में वैस्विक क्षमता कैंद्र (जौसौसी) परियोजना की स्थापना की जा रही हो। वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) परियोजना का अभिप्राय किसी बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेशन (एमएलसी) अथवा किसी भारतीय मूत्र की कंपनी जिसके दवारा बहुराष्ट्री कारपॉरेशन (एमएनसी)' के रूप में वाणिज्यिक गतिविधि की जा रही हो, ऐसी कम्पनियों are स्थापित Af इन-हाउस कैंद्र अथवा ऑफसोर इकाई से है, जो मूल कंपनी के पूर्ण स्वामित्व एवं संघालन मैं है तथा सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, वित, मानव संसाधन व अन्य बैक-ऑफिस संचालन मैं मूल कंपनी हेतु विशेष सेवाएं प्रदान करती हैं। बदयपि तृतीय पक्ष के आधार पर निम्नलिखित गतिविधियों इस नीति के अंतर्गत जीसीसी के रुप मैं पात्र जहीं at a) प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, संचालन, डिजिटल कारों हैतु सैवा-प्रदाता अथवा उत्पादासमाधान/प्लेटफॉर्म के विकास का समर्थन करने वाले इंटीयरेटर ख) प्रतिभावान कर्मीजयवा आकस्मिक स्टाफ (Contingency Staff) को आउटसौर्स करके राजिस्व अर्जित, करने वाली स्टाफिंग कंपनियों “Oya) भारत. एवं निकटव्ती के क्षेत्रों मैं उत्पाद. अथवा. कस्टमाइज्ड 'उपकरण/सॉफ्टवेयर Rare करने वाली Payee बिक्री संस्थाएं (Pure play sales entiies) घ) व्यावसायिक सेवा कंपनियाँ 4.45, पूंजीगत लिवेश का अभिग्राय पात्र इकाई दुबारा वहन की जाने वाली लागतों से है, जितकों इस नौति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु उनकी श्रेणी निर्धारित करने हैतु स्वीकार्य माना जाएगा। इसमें उप्र, औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीतिः2022 के प्रस्तर 2.4.6 मैं यथा परिभाषित-भूमि, भवन एवं निर्माण, संयं्र व मशीनरी (कंप्यूटर, अनुसंधान एवं विकास उपकरण, नेटवर्किंग हाईवेयर, सॉफ्टवैयर व पात्र इकाई के संचालन से प्रत्यक्ष रुप से संबंधित अचल पत्तियां) एवं अवस्थापना सुविधाओं पर किए गए व्यय सम्मितित हांगे। इसके अतिरिक्त, विद्यमान फिक्सचर्स (focures) को पुनः संयोजित (retro) करने हेतु इकाइयों द्वारा किए गाए व्यय का 50% भी सम्मिलित किया जाएगा, यदि इस प्रकार के मूल्य को इकाइयों दुवारा पूंजीकृत (capitalize) किया जाता हैं। यदि पात्र इकाई carer प्रस्तावित परियोजना हेतु फ्रेंड लैंड सब्सिडी का लाभ प्राप्त किया जाता है, तो भूमि लागत को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि परियोजना किनायेसह-कार्यशील स्थान (co-working space) से संचालित की जाती है, तो भूमि एवं भवन की लागत को सम्मिलित नहीं किया rem 44.6, अपात्र पूंजीगत निवेश में कार्यशील पूंजी; सदभावना; ore एवं संचालन-पूर्व व्यय; पूंजीकृत ब्याज; रॉयल्टी; डिजाइन व चित्र; तथा कैप्टिव उपयोग को छोड़ कर विद्युत उत्पादन सम्मिलित हैं। पूंजीगत निवेश की गणना हेतु ऐसे शीर्ष पर विचार नहीं किया जाएगा। 4.47, प्रोत्साहनों को वितरित करने ty निम्नलिखित न्यूनतम निवेश एवं रौजगार प्रतिबदधता-आधारित परियोजना श्रेणियाँ को चिन्हित किया गया है: at | न्यूनतम Ped रोजगार aes [meet [re प्रदेश मे कह भी (गौतम age नगर व गाजियाबाद को छोड़ कर | "OY. ा क Bis करोड़ एवं उससे अधिक का न्यूनतम पूंजी निवेश तथा गौतम सी age नगर एवं गाजियाबाद मैं ₹20 करोड़ एवं उससे अधिक का पूंजी सी | निवेश; = अथवा 200 से अधिक कर्मचारियों iota रोजगार सूजन (ater बुद्ध नगर एवं गाजियाबाद हेतु), अन्य किसी जनपद मैं न्यूनतम 700 से | अधिक कर्मचारियों bg रोजगार सुजन। cee प्रदेश में कहीं भी [गौतम gee नगर व गाजियाबाद को छोड़ कर ( 250 करोड़ एवं उससे अधिक का न्यूनतम पूंजी निवेश तथा ate उन्नत gu नगर एवं गाजियाबाद में र5 करोड़ एवं उससे अधिक का. पूंजी । जी | निवेश; अथवा सौ सौ | न्यूनतम 500 से अधिक कर्मचारियों हेतु रोजगार का सुजल(गॉतम RU नगर व गाजियाबाद हेतु); अन्य किसी जनपद मैं न्यूनतम 300 से अधिक कर्मचारियों हेतु रजगार सूजन। 4.2.8, निवेश orien करने की तिथि का अभिप्राय 'कट-ऑफ तिथि' से है, जो नीति की प्रभावी अवधि के औतर आती है, यदि निवेश नीति की प्रभावी तिथि को या उसके पश्चात प्रारम्भ होता है। यद्यपि ऐसे प्रकरण भीं areas होंगे, जहां निवेश प्रारंभ करने की तिथि प्रभावी तिथि से पूर्व 5 वर्ष की अवधि के भीतर है, बशर्तें कि ऐसी दशा मैं बाणिज्यिक संचालन प्रभावी तिथि के पश्चात प्रारम्भ होता है तथा न्यूनतम 80% पूंजी निवेश प्रभावी तिथि के उपरांत किया गया हों। ऐसे प्रकरणों मैं नीति की प्रभावी तिथि ही कट-ऑफ तिथि होगी। 4.9, वाणिज्यिक संचालन: प्रारंभ करने की तिथि का अभिप्राय उस तिथि से है, जिस तिथि को औद्योगिक उपक्रम दवारा वाशिज्यिक संचालन प्रारंभ किया जाता El 4..0.पात्र निवेश अवधि का अभिप्राय इस नीति की प्रभावी अवधि में आने वाली कट: ऑफ FARE से आरंभ होकर 3 वर्ष तक की अवधि अथवा व्यावसायिक उत्पादन दिप्रारंभ हौने की तिथि तक, जो भी स्तर जीसीसी इकाई हेतु पहले हो, से है तथा समान अवधि उन्नत जीसीसी इकाई हैतु 5 वर्ष तक सीमित होगी। Ad.a4.9r8 पूंजी निवेश (ईसीआई) का अभिप्राय ऐसे पूंजीगत निवेश से है, जो पार इकाई eer नीति की प्रभावी तिथि के उपरांत अपनी पात्र निवेश अवधि में किया गया है। यदि इकाई care पूंजी निवेश प्रभावी तिथि से पूर्व प्रारंभ किया गया है, तो ऐसे पूंजी निवेश का न्यूनतम 80% नीति की प्रभावी तिथि के पश्चात्‌ किया जाना चाहिए एवं उसी पूंजी निवेश को पात्र पूंजी लिवेश माना जाएगा। यद्यपि, परियोजना श्रेणी निर्धारित करने हेतुरेसो पूंजी निवेश का 700% विचयारित किया जाएगा 4a szaatarttat का अभिप्राय ऐसे नियोजित व्यक्ति से है, जौ इकाई के वेतन पत्रक (९०४ roll) पर 8) इसमें कंपनी के निदेशक मंडल के समस्त सदस्य एवं कंपनी अधिनियम, 203 मैं परिभाषित समस्त प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (केएमपी) सम्मिलित नहीं et asia freatert का अभिप्राय उस स्थिति से है, जब उत्तर प्रदेश मैं पूर्व से ही संचालित. इकाई. दूवारा नये पूंजीगत निवेश के माध्यम से अपने विद्यमान/सन्निहित परिसर मैं अपने विद्यमान सकल ब्लॉक मैं न्यूनतम 25% की वृद्धि की जा रही हो। अथवा Sate पर नियोजित जनशक्तिकार्मिकों की संख्या मैं न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि या t00 कार्मिकों की वृद्धि मैं से जो अधिक हो उस इकाई को भी विस्तारीकरण का पात्र माना जाएगा। Aa t4artoer एजेंसी का अभिप्राय इन्वैस्ट यूपी से है, जो इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहनों हेतु आवेदनों के प्रकूमण / पर कार्यवाही करने हेतु उत्रायी होगी। W v74.2. प्रोत्साहन-लाम इस नीति में परिभाषित पात्र इकाइयों की नवीन एवं विस्तारीकरण करने वाली परियोजनाओं को निम्नलिखित प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे - फ्रेट-एंड लैंड सब्सिडी: राज्य के औद्योगिक विकास प्राधिकरण, विकास प्राधिकरण, 424. नगरीय स्थानीय निकाय अथवा किसी अन्य सरकारी एजंसी से भूमि आवंटन किए जाने पर पात्र स्तर-। एवं उन्नत जीसीसी इकाइयों को निम्नलिखित दरों पर फ्रंट: एंड लैंड सब्सिडी प्रदान की जाएगी- क) गॉँतमबुदूध नगर एवं गाजियाबाद जलपदों में 30% ख) पर्चिमांचल (गौतमबुदूध' नगर व गाजियाबाद को छोड़कर)एवं मध्यांचल क्षेत्रमै40% मा) पूर्वांचल व बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 422, 50% किसी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी द्वारा पात्र इकाई को रियायत के सापेक्ष प्रदान की गई ऐसी भूमि, पावर निवेश अवधि या वाणिज्यिक सेंचालन प्रारंभ होने तक, जो भी पहले हो, संबंधित सरकारी निकाय के पास बंधक (Mortgaged) viet) उल्लिखित निर्धारित समयावधि के तर परियोजना को पूर्ण करने मैं विफल रहते पर, संबंधित सरकारी निकाय 2% प्रति वर्ष की ब्याज दर से भूमि पर प्रदान की गई सब्सिडी वसूल करेगा। यदि परियोजना किराये/सह-कार्य स्थान पर संचालित हो रही हो तो इस प्रकार की. भूमि सब्सिडी लागू नहीं होगी। फ्रंट एंड dus सब्सिडी की .धलराशि की प्रतिपूर्ति का व्यय का वहन औद्योगिक विकास विभाग द्वारा किया. जाएगा। स्टाम्प इयूटी में छूट/प्रतिपूर्ति: पात्र जीसौसी इकाइयों को प्रस्तावित परियोजना हैतु मूमिकार्यालय स्थान।भवत wtemet पर स्टाम्प इयूटी की t00% emg प्रदान की जाएगी। यह छूट, प्राप्त फूट की समतुल्य राशि की बैंक गाएंटी प्रस्तुत करने पर प्रदान कीं जाएगी, जिसको पात्र निवेश अवधि के भीतर 8 \वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ करने पर इकाई को वापस कर दिया जाएगा। जबकि Fey इयूटी की प्रतिपूर्ति वाणिज्यिक संघालन प्रारंभ होने के पश्चात्‌ की जाएगी। पूंजीगत सब्सिडी: पावर निवेश अवधि के भीतर वाणिल्यिक संचालन प्रारंभ होने के 423. पश्चात्‌ Fat-t जीसीसी ड़काई को अधिकतम है0 करोड़ की सीमा के अधीन एवं उन्नत जीसीसी इकाई को अधिकतम ₹25 करोड़ की सीमा के अधीन 7 समान वार्षिक किस्तों मैं पूंजीगत सब्सिडी पात्र पूंजी निवेश के 28% की दर से प्रदान की जाएगी। यदि पात्र इकाई care प्रस्तावित परियोजना हैतु wees भूमि सब्सिडी का ला प्राप्त किया गया है, तो भुगतान की गई भूमि लागत/स्टाम्प शुल्क को पूंजीगत निवेश मैं सम्मिलित नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार किराया प्रभार पढ़टा प्रभार को पूंजीगत निवेश में सम्मिलित नहीं किया जाएगा यदि परियोजना किराए परसह-कार्यशील स्थान से संचालित होती है। ब्याज सब्सिडी: किसी भी पात्र जीसीसी इकाई carr संयंत्र एवं मशीनरी के 424, निर्माण एवं क्रय तथा परियोजना स्थल पर अन्य अवस्थापना सुविधाओं की स्थापना हेतु लिए गए ऋण पर अनुसूचित बैंकॉवितीय संस्थाओं से प्राप्त आवधिक ऋण पर 5% प्रति वर्ष की दर से ब्याज सब्सिडी या वास्तविक भुगतान किया गया ब्याज, जो भी कम हो, प्रदान किया जाएगा, जो वाणिज्यिक संघालन के प्रारंभ से 5 वर्ष की अवधि हेतु प्रति इकाई अधिकतम ₹ करोड प्रति वर्ष तक होगा। संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी; संचालन व्यय पर 20% की दर से सब्सिरी, 425. जिसमें seer किराया, Haft व्यय, डेटा सैंटर/ क्लाउड सेवा लागत एवं दिद्युत प्रभार सम्मिलित हैं, Fact जीसीसी इकाइयों हेतु प्रति वर्ष अधिकतम र40 करोड़ एवं उन्नत जौसीसी इकाइयों हेतु वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ होने के पश्चात्‌ 5 वर्ष की अवधि हेतु अधिकतम ९80 करोड़ तक की सब्सिडी प्रदात की जाएगी। 'क) eh, eer किराये में सभी ae वालें स्थान (प्लग एंड प्ले सुविधाएं / सह- कार्य सुविधाएँ सहित) सम्मिलित होंगे, जिनका अधिकतम मासिक किराया 250 प्रति वर्ग फुट कारपेट एरिया होगा। 2 \cmp विदूयुत प्रभार का अभिप्राय विद्युत Pt की लागत से हैं। राज्य सरकार पात्र इकाइयों को औद्योगिक दरों पर विंदयुत उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी। अतः मा0 विद्युत नियामक आयोग दूवारा पृथक से अधिसूचना जारी की sre ay इसी प्रकार, बैंडविड्थ oxy केवल arp प्राप्त इंटरनेट सेवा-प्रदाताओं को किए गए भुगतान हैतु स्वीकार्य होगा। (a) डाटा संटर तथा।अथवा क्लाउड सैवाएं उत्तर प्रदेश स्थित उन सैवा-प्रदाताओं से प्राप्त की जाएंगी, जिनके. पास उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत वैध जीएसटीआईएन हो तथा जिससे सेवाओं हेतु चालान जारी किया. गया हो। 426, वेतन-पत्र (९8४! roll) सब्सिडी: A एवं उन्नत जीसीसी को न्यूनतम वर्ष के निरंतर रोजगार वाले ऑल:रौल कर्मचारियों (अनुसंधान एवं विकास मैं संतरग्त कार्मिकों सहित) को दिए गए doer तथा' परित्नत्थियों की लागत की प्रतिपूर्ति निम्नवत प्राप्त होगी। का गौतमबुदूध नगर एवं साजियाबाद जनपद में :- उत्तर प्रदेश के अधिवासी कर्मचारियों अथवा महिला/अनुसूचित जाति (जनजाति /ट्ांसजेंडरदिव्यांगजन कर्मचारियों के प्रकरण में सब्सिडी की राशि वाणिज्यिक wows के परचात इकाई को आगामी 3 वर्ष में निम्नवत अनुमन्य होगी : wearer | अनुमल्य थे अधिकतम सीमा वर्ष... | रोल सब्सिडी प्रतिशत wa P| % | aii को मिलने वाले वेतन का 35% या कुल वार्षिक बैतन का अधिकतम 5 लाख मैं से जो कम हो| । ar P| % | aie को Rat जले वेतन का 30% सा कुल | वार्षिक वैतन का अधिकतम 4 लाख मैं से जो aA हो। L cod P| wate को fiat we बेतन का 30% या कु atte tat का अधिकतम 3 लाख में से जो कम! ः Fry Vपे रोल सब्सिडी 3 वर्ष की अवधि हेतु स्तर “7 की इकाई को अधिकतम C0 करोड़ प्रति वर्ष तक होगा। उन्नत जौसीसी की दशा में उक्त को अधिकतम ₹20 करोड़ अनुमन्य होगा | इस सब्सिडी के प्रयोजन हेतु एक वितीय वर्ष के दौरान इकाई can कार्मिक के हेतु निरंतर बनाए रखे गए रोजगार के आधार पर विचार किया जाएगा। इस मद मैं प्रतिपूर्ति प्राप्त करने में १२ माह से कम कार्य करने वाले कार्मिक को इस हेतु सम्मिलित नहीं किया जायेगा | गॉतमबुध नगर एवं गाजियाबाद के अतिरिक्त प्रदेश के अन्य क्षेत्र में स्थापित जीसीसी : उतर प्रदेश के अधिवासी कर्मचारियों अथवा महिला।अनुसूचित जाति /जनजाति _(्रांसजेंडरदिव्यांगजन कर्मचारियों के प्रकरण में सब्सिडी की राशि वाशिल्यिक सश्चालन के पश्चात इकाई को आगामी 4 वर्ष में निम्नवत अनुमन्य होगी qua | अनुमन्य पे del अधिकतम सीमा ] का वर्ष | सब्सिडी प्रतिशत | | कार्मिक को मिलने वाले वेतन का 50 के या कु वार्षिक वैतन का अधिकतम 7 लाख मैं से जो कम दुचितीय | कार्मिक को मिलने ae बेतन का 40% या कुल वार्षिक वेतन का अधिकतम 6 लाख मैं से जो कम हो | ae =| wile को Ra वाले वेतन का 30% या, कुल वार्षिक वैतन का अधिकतम 5ल्लाख मैं से जो कम हो | age ex | % wits को मिलने वाले बेतन का 25 % या कुल वार्षिक वेतन का अधिकतम 4 लाख में से जो कम हो| मॉतमबुध्द नगर एवं माजियाबाद के अतिरिक्त प्रदेश के अन्य जिलों में स्थापित होने वाली Fact की इकाई को इकाई को पे रोल सब्सिडी 4 वर्ष की अवधि हेतु अधिकतम 2 करोड़ प्रति वर्ष तक होगा। उन्नत जीसीसी की दशा में उक्त सीमा प्रति वर्ष अधिकतम ₹25 करोड़ तक होगा| इस सब्सिडी के प्रयोजन हेतु एक वित्तीय वर्ष के दौरान इकाई Ga कार्मिक के हैतु निरंतर बनाए रखे गए रोजगार के आधार पर विचार किया जाएगा। इस मद मैं प्रतिपूर्ति प्राप्त करने a2 माह से कम कार्य करने वाले कार्मिक को इस हेतु सम्मिलित नहीं किया जायेगा। कर vate सब्सिडी हैतु जीसीसी eh care नियोजित ऐसे कार्मिक जिन्हें नेट वेतन a रूt . e L0Darer से अधिक मिलती है उन्हें इसका पात्र माना जाएगा।(मूल वेतन + FETE पत्ता के समरप इण्डरस्टी बैस्ट गुड प्रक्टिस फार्मूला पर महज वो संकलर वैतन केवल जो कर्मचारी के खाते मैं कम्पनी दबारा हस्तांतरित किया जाता है। इसमें अन्य MAT लाभ जैसे कि आवास कियारा भत्त, वाहन भत्ता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति इत्यादि सम्मिलित नहीं हैं भर्ती (Recruitment) सब्सिडी: उत्तर प्रदेश मैं स्थित इकाइयों मैं उतर प्रदेश के 427. अधिवासी प्रत्येक नए कर्मचारी को ₹20,000 की टर से नवीन कर्मचारियों की भर्ती tg किसी भी पात्र जीसीसी इकाई को ऐसी सब्सिडी प्रदान की जाएगी, बच्चे कि न्यूनतम वर्ष तक निरंतर रोजगार हों एवं अधिकतम वार्षिक at मैं न्यूनतम 30 नवीन कर्मचारी उत्तर प्रदेश के अधिवासी हाँ। यह सब्सिडी किसी विशिष्ट इकाई हेतु अधिकतम र5 करोड़ तक सीमित ah dg नए कर्मचारी (फ्रेशर्स) की भर्ती सब्सिडी केवल उन कर्मचारियों हेतु लागू है, जिन्हें अपनी पहली नौकरी हैतु भर्ती किया गया हैं तथा जो उतर प्रदेश के अधिवासी हैं एवं जिन्होंने केवल उत्तर प्रदेश में स्थित किसी मान्यता प्राप्त शक्षणिक संस्थान से स्नातक/स्नातकौतर की उपाधि प्राप्त की है। इस प्रकार के प्रोत्साहन का लाम संचालने writ होनें से 5 वर्ष की अवधि हेतु उठाया जा सकता है। कर्मचारी अविष्य निधि (ईपीएफ) मैं नियौकता के अंशदान की वापसी: किसी भी 428 पात्र जीसीसी इकाई Zen कर्मचारी विषय लियि (ईपीएफ) मैं नियोक्ता के अंशदान के रूप मैं महिला।अनुसूचित जाति /जनजाति /ट्रॉंसजैंडरदिव्यांगजन कर्मचारियों तथा उत्तर प्रदेश के अधिवाशियों हेतु भुगतान की गई कुल ईपीएफ शशि की 400% प्रतिपूर्ति की जाएगी, जो वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ होने के पश्चात 3 वर्षों by ₹2000 प्रति कर्मचारी प्रति माह की दर से, अधिकतम रा करोड़ प्रति वर्ष होगी। पात्र जीसीसी इकाई को प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन: 429, wm) प्रशिक्षुतांटर्नशिप) के. अवसर सृजित करने हेतु सहायता लागत के 50% कीं दर से प्रतिपूर्ति के रूप मैं, जिसकी अधिकतम सीमा र5,000 प्रति छात्र व.प्रति माह होगी, वाणिज्यिक संचालन आएं होने के, पश्चात्‌ 3 वर्ष की अवधि हेतु प्रति वर्ष अधिकतम 50 प्रशिक्ुओं तक सीमित होगी, जौ पात्र इकाई दवारा उतर प्रदेश मैं स्थित शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों एवं उत्तर प्रदेश के अधिवासी ont को स्टाइपैंड देने हेतु किया orem) इंटर्लशिप इकाई के कार्य-स्थल पर हीं होनी चाहिए तथा न्यूनतम 2 माह तक संचालित होनी चाहिए। ख) कौशल विकास सब्सिडी: पात्र इकाई gar प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की लागत के 50% की दर से प्रतिपूर्ति के रूप मैं कौशलर विकास सब्सिडी या. पाढ़यक्रम शुल्क हेतु प्रति कर्मचारी ₹50,000 का लाभ पात्र इकाई care संचालन प्रारंभ होने की लियि से 3 वर्ष की अवधि हेतु अधिकतम 500 कर्मचारियों bg प्रति वर्ष 50 लाख की सीमा के अधीन उठाया जा सकता है। 42.40, अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार हेतु प्रोत्साहन: चूंकि नीति का उददेश्य जौसीसी उद्योग में निवेश को आकर्षित करने एवं बनाए रखने हेतु एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र सूजित करना भी है, अतः नौति के अंतर्गत स्टार्टअप्स एवं उत्कृष्टता dh (सीओइ) को प्रोत्साहित किया जाएगा। 'क) उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हैंतु अनुदान सहायता: राज्य मैं अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार को बढ़ावा देने हैतु RAG एवं उल्नत जौसीसी इकाइयों को उत्कृष्टता कैंद्र (सीओई) स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे उत्कृष्टता te हेतु प्रोत्माहन-लाभ उ. प्र औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नौति-2022 के प्रस्तर 72.8 के अनुसार प्रदान किए जाएंगे। ऐसे उत्कृष्टता केंद्र शैक्षणिक संस्थानों उद्योग संघोंकिसी अल्य सार्वजनिक संस्थाओं के सहयोग से स्थापित किए जा सकते हैं। ख) स्टारट-अप विचार (Ideation): पारिस्थितिकी तंत्र मैं स्टाट-अप्सउद्यमियाँ की आगीदारी को प्रोत्साहित करने हैतुस्तर-| एवं उन्नत जीसीसी इकाइयों को स्टारट-अप्स & परिकल्पना/प्ूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट संचालन अथवा समस्या- समाधान करने मैं व्यय होने वालीं लागत के 50% प्रतिपूर्ति की जाएगी, जौ 2B ७वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ होने की तिथि से 5 वर्ष के भीतर इकाई मैं ऐसे अनुसंधान एवं विकास /स्टाटअप गतिविधि प्रारंभ करने की तिथि से 5 वर्ष हेतु प्रति वर्ष र50 लाख की सीमा के अधीन होगी। मा) ater संपदा अधिकार (आईपीआर) सब्सिडी; राज्य सरकार SRT पात्र जौसीसी इकाई at ee दाखिल करने हेतु वैधानिक शुल्क का 700% प्रतिपूर्ति की जाएगी, घरेलू पेंट हेतु अधिकतम र5 लाख एवं अंतरराष्ट्रीय ade हेतु U0 लाख की सीमा के अधीन होगी। इस प्रोत्साहन का दावा नीतिकी प्रभावी अवधि के दौरान दो बार तथा किसी भी पात्र जीसीसी दूवारा प्रति वर्ष एक बार केवल प्राप्त किए गए पेटेंट परकिया जा सकता है। Lazar aeegae प्रोत्साहन: इस नीति मैं परिभाषित Fae एवं उन्नत जीसीसी इकाइयां निम्नलिखित sitar मानदंडों के अधीन, राज्य सरकार दवारा आवश्यक समझे जाने पर केस-टू- केस आधार पर प्रोत्सानों के कस्टमाइज्ड पैकेज का लाभ उठाने हेतु पात्र en का न्यूनतम 7500 कार्मिको को नियोजित करना | (a इकाई कंपनी care 250 करोड़ से अधिक कैपिटल निवेश (भूमि की लागत wher) तीज रेट पर (a) इकाई कंपनी दूवारा फारेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट निवेश कम से कम 50. करोड़ रुपये| इस हैतु कैपिटल. निवेश (भूमि और मवन स्वयं निर्मित करने की दा मैं) अथवा वार्षिक परियालन (Re पर सन्चालन करने की दशा में ) व्यय के वित्त पोषण में ऐँक्र थी आई के रूप में निवेश के माध्यम को कंसौडर किया जायेगा |(एफडीआई की परिभाषा बहीं मान्य होगी जो att sates इल्वैस्ट्मेंट[एफडीआई), विदेशी पूंजी निवेश (एफलीआई) एवं oredr रलोबल 500 निवेश प्रोत्साहन नौति 2023 में परिभाषित है)। (rater weit 500 होल्डिंगपैरन्ट ach) wt wre इण्डिया 500(होल्डिंगपैरेल्ट' कम्पनी) मैं सूचीबद्ध ऐसी कम्पनी जिसके दवारा न्यूनतम 7000 कर्मिक नियोजित किया जा रहा हो | ऐसे कस्टमाइजड पैकेजों को Reger आधार पर माननीय मंत्रिपरिषद दूवारा अनुमोदित किया जाएगा। x NY,८० 5. गैर-वि्तीय सहायता 54, जौसौसी हेतु तकनीकी सहायता समूह: प्रदेश में संचालने स्थापित करने वाले जौसीसी को सहायता प्रदान करने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अंतर्गत एक समर्पित तकलीकी सहायता समूह (टी:एस.जी) की स्थापना करेगी। की) संरचना: इस प्रकार के तकनीकी सहायता समूह की अध्यक्षता उतर प्रदेश सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख afte करेंगे तथा pet उदयोग जगत के विशेषज्ञ सम्मिलित हाँगे, जिनको उदयोग-जगत से are संबंध, कॉर्पोरेट मामलों, जीसीसी उद्योग, जैसे नैसकॉम, एसटीपीआई आदि मैं भागीदारी का व्यापक अनुभव होंगा। इसमें रलौबल oat सम्मिलित होंगे, जिनमें शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जीसीसी के heat, अंतर्राष्ट्रीय ब्यापार विशेषज्ञ एवं व्यापार रणनीति व नवाचार का नेतृत्व सम्मिलित होगा। इससे राज्य की जौसीसी पहलों का मार्गदर्शन करने ty इष्टिकोण एवं अनुभ्ों की समृद्ध विविधता सुनिश्चित ett उपर्युक्त व्यक्तिओं को प्रति वर्ष आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग दुवारा पृथक शासनादेशों द्वारा नामित किया जाएगा। इस समूह द्वारा प्रदेश मैं उद्योग की प्रगति एवं मुद्दों की समीक्षा करने हेतु शैमासिक बैठक की जाएगी। ख) भूमिका: तकनीकी सहायता समूहकी योजना राज्य की जीसीसी पलों को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने हेतु बनाई जा रहीं है, जौ वैश्विक व्यापार प्रचलन एवं क्षेत्रीय विकास उददैश्यों के साथ सरेखित रणनीतिक मार्गदर्शन तथा अंतर्वष्टि प्रदान करेगा। (0) तकनीकी सहायता समूह उद्योग को प्रोत्साहित करने एवं उसके मुद्दों के निवारण हेतु उत्तरदायी होगा तथा मुख्य रूप से निवेशकों की सुविधा पर केंदित कार्यवाही करेगा। 0). तकनीकी सहायता समूह जीसीसी एवं राज्य सरकार के विभिन्‍न विभागों के मध्य प्राथमिक समल्वय कैद्र के रूप मैं कार्य करेगा, जिससे राज्य मैं नए एवं विद्यमान जौसीसी का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा। as Ww(iy तकनीकी सहायता समूह जौसीसी इकाइयों को नीतियों, विनियमों पं अनुपालन पर व्यापक मार्गदर्शन शी प्रदान करेगा, जिससे कंपनियों को सभी कानूनी तथा uy प य् हर श sास eनि rक eआव ,श् य एक वत ं ा उओ दं य ौके ग -सं जब गंध त म कें े म नेल तृी त ्प व् र कक ेा र स स ाे थ ज वा िन चक ाा रर ी व िमम रि ्शल मस ैंक े भ। ा सुविधा प्रदान करेगा, जिससे स्थानांतरण मूल्य, आयातानियत विनियमन तथा BT जैसे विषयों पर भारत सरकार. को नौतिमत संस्तुतियाँ की जा a 5.2. ल 'ि क)ं के वज ा णस िम जर् ्थ यन ि: क स्थान: राज्य सरकार रियंत्र एस्टेट भागीदारों के साथ मिलकर, FES TE oe डिजिटल पोर्टल के विकास की सुविधा प्रदान करेगी, जिससे जौसीसी इकाइयों को प्रदेश मैं उपलब्ध 'वाणिल्यिक oat की सूची का पता लगाने हेतु STS स्लेटफ्ॉर्म मिलेगा, जिससे आदर्श स्थानों की सूचना आसानी से प्राप्त होगी। प्रथम चरणमें, यह मुख्य रूप से तोड़ा, गाजियाबाद, लखनऊ; कानपुर एवं मेरठ जैसे शहरों पर केंद्रित रहेगा। हा) तकनीकी ante: राज्य सरकार जौसीसी को स्थानीय गैक्षणिक संस्थानों उत्मृ्टता कदर; स्टार्टअप ck ett से जुड़े, परतिमावां व्यक्तियों की भर्ती को बढावा 2, उदयोग-विशिष्ट कौशल कार्यक्रम विकसित करने, सहयोगी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा खुले नवाचार (open Innovation) को प्रोत्साहित करने मैं भी मदद' करेगी। इस SENT हैतु तकनीकी सहायता समूह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के साथ समन्वय करेगा। 5.3. वितियामक समर्थन: को राज्य में किसी भी पात्र जीसीसी इकाई हैंतु 25 कैवीए से अधिक क्षमता के विद्युत उत्पादन सैटों को छोड़कर, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के दायरे से छूट। खा) राज्य में किसी भी पात्र जीसीसी इकाई को विशिष्ट शिकायतों से उत्पन्न निरीक्षणों को छोड़ कर, निम्नलिखित अधिनियमों एवं उनके अंतर्गत बनाएं गए नियमों के अंतर्गत निरीक्षण से get इस प्राविधान के अंतर्गत इकाइयों हर 5 वर्ष मैं एकमात्र निरीषण हेतु पावर eh Vv i. कारखाना अधिनियम 6fi मातृत्व लाभ अधिनियम fi, उ.प्र. दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान अधिनियम Iv, ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम ४. मजदूरी संदाय अधिनियम i Fae मजदूरी अधिनियम vil, सैवायोजन कार्यालय (रिक्लियाँ का अनिवार्य अधिसूचन) अधिनियम 7959 पात्र इकाइयों को स्व-प्रमाणन दाखिल करने की अनुमति होनी (समय-समय पर इसमें संशोधन किया जा सकता BL गा) किसी भी पात्र जीसीसी इकाई को 2427 संचालन (तीन Reet मैं संचालन हैंतु) तथा तीनों शिफ्टों मैं महिलाओं को रोजगार देने की अनुमति। यथावस्यकता राज्य सरकार wart after पार जौसीसी इकाइयों को 'आवश्यक सेवाआं/जनोपयोगी सेवाओं के रूप मैं अधिसूचित किया जा सकता हैं। घ) फ्लौर एरिया अनुपात (एफएआर): पात्र जीसीसी इकाइयों पर एफएआर wT (उस समय प्रचलित मवन उप:नियमों के अनुसार क्रय योग्य) लागू। 'ड) इकाइयां घर से कार्य करने वाले उतर प्रदेश मैं स्थित कर्मचारियों उत्तरप्रदेश मैं स्थित ऐसे अन्य परिसरों के संबंध में इस नीति के अंतर्गत प्रदान किए गए रोजगार सूजन सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति एवं अन्य रोजगार से संबंधित लाभों हेतु पाव होंगी। 6... कार्यान्वयन संरचना 6A. यह नीति अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगी तथा 5 वर्ष की अवधि तक प्रभावी em 6.2. इस att मैं परिभाषित नोडल एजेंसी, इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन-लाभों हेतु आवेदनों का प्रक़मण करेगी। नौइल एजेंसी में एक नौति कार्यान्वयन इकाई (पीआईय) स्थापित की जाएगी, जिसमें आउटसो्स्ड stirrer तथा परामर्शियों के साथ पर्याप्त «स्टाफ होगा, जो एक नामित नोडल अधिकारी- अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, grace यूपी की अध्यक्षता में आवेदनों एवं सिंगल विंडो संघालन के प्रबंधन में सहायता करेगा। » Wउक्त ney आवेदन sr करेगी एवं उनका प्रकमण करेगी, जो इंस नीति हेतु नोडल है 63. 64. bs. का के सचिवालय के रुप मैं कार्य करेगी। नोइल AT HT MEE अकाउंट इंजीनियर, कॉस्ट' अकाउंटेंट, जीएसटी ऑडिटर आदि को मी ब्वक्तियं या कर्मी या स आं वस े् दथ ना ोओ ंं क केे मर ूु लप ् यमै ां ं स कनू च ही ैब तुद ् Bध R(E Emp a यूn पe ीl क) े क मर ुे ख्ग यी Ts अधिकारी की अध्यक्षता a हित मुल्यांकन समिति HE प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन a 2022 के क्रम मैं तिर्गत ahs, विषयक शासनादेश संख्या-2॥[20233070775- 23-अरम) 2022, दिनांक 4.04-2028 के ERED के उफस्तर52.। के अनुसार teat का मूल्यांकन करेगी एवं anda संस्तृतियों हैतु राज्य सरकार. को प्रेषित a r seh lc gat स मितिऔ द (् ईसय ीो )ग ि (क उत ्व तरि क पा ्रस द ेशआ य ऑु ंक द् ूत य, ो गO िकH O त. ि वेश शा स एन वं क री ो जअ गध ा् रय क प् ्ष रत ोा त् सव ाहा नल aी ए eक 2022 के क्रम में निर्गत एस.ओ पी. विषयक शासनदिश ET 24/20297307777-8- 25:2[एम) 2022 दिनांक (4.042008 के AZ के उपप्रस्तर5.3. के HIRT) स्तर। जौसीसी आवेदनों कीं अय्ेतर समीक्षा करेगी एवं' संस्तुति करेगी। NET समिति की संस्तुति पर माए मंत्री, औदयोगिक विकास विभाग देवारा अंतिम अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। मुख्य सचिव, उ0प्र0 शासन. की अध्यक्षता वाली एक TCT स्तरीय प्राधिकृत समिति' (एचएलईसी) (उत्तर प्रदेश teat निवेश एवं रोजगार प्रेत्साहन नौति-2022 के क्रम में निर्गत एस.ओ.पी. विषयक शासनादेश संख्या: 2(2023307077-6-23-2[एम)/2022 दिनांक 44.04.2023 के प्रस्तर-2 के उपप्रस्तर- 5.82 के अनुसार) उन्नत जीसौसी के आवेदनों तथा प्रोत्साहन हैतु AAT आवैदनों के अनुमोदन हेतु संस्तुति stim 'उच्च-स्तरीय प्राधिकृत समिति! की संस्तुति पर मा0 मंत्रिवरिषद eat अंतिम अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। नीति या उसके पश्चात्‌ दिशा-निर्देशो मैं निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार यदि आवेदक दूवारा वाणिज्यिक संचालन aint करने से. पूर्व अनुरोध किया जाता है, तो stg समितियों को चरणों की संडया एवं उनकी अवधि मैं परिवर्तन, कट-ऑफ तिथि मे परिवर्तन, समान श्रेणी मैं पूंजी निवेश में परिवर्तन, तथा वाणिल्यिक उत्पादन प्रारंभ करने की तिथि आदि मैं परिवर्तन को अनुमौद प्रदान का अधिकार भी होगा। RAT Vv °समिति की संस्तुति विभागीय मंत्री के अवलोकलोपरांत निर्गत की जाएंगी। एचएलईसी को नीति के विषय मैं कोई भी स्पष्टता या व्याख्या करने तथा नीति के कार्यान्वयन में आने बाली किसी भी समस्या का समाधान करने का अधिकार होगा। उच्च स्तरीय प्राधिकृत समितिं की संस्तुति विभागीय संत्री के अदलौकनौपरॉत निर्गत की जाएंगी। नीति में संशोधनों को अनुमोदित करने tg कैवल मा. मंत्रिपरिषद ही अधिकृत होगी। 66. इस नीति में किसी भी संशोधन की स्थित मैं, ae में संशोधन से पूर्व स्वीकृत किए गए प्रोत्साहनों के प्रतिबद्ध पैकेज को वापस नहीं Far जाएगा एवं इकाई लाभ हेतु पात्र बनी रहेगी। इस नीत के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी 67. अन्य नीति/योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु पाउ नहीं हॉँगी। इस नीति में निर्दिष्ट समस्त प्रोत्साहन-लाभ भारत सरकार की, किसी भी योजना।नौति के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों के अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकते हैं।

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