Date: 2026-01-08Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान सं0-58 लेखाशीर्षक-3054 के अन्तर्गत राज्य सड़क निधि से गोरखपुर मण्डल के विभिन्न जनपदों के कुल 02 विशेष मरम्मत के कार्यों हेतु प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति।
**Executive Summary**
This document, issued by the Uttar Pradesh Government's Public Works Department on January 8, 2026, grants administrative and financial approval for special repairs on 2 roads within the Gorakhpur division for the financial year 2025-26. The total sanctioned amount is ₹3,24,16,000, with ₹1,13,45,000 released from the State Road Fund under Grant No. 58, Account Head 3054, subject to specific conditions and restrictions. All work must be completed by March 31, 2026.
**Key Points / Main Content**
* **Project Approval:**
* Administrative and financial approval is granted for two special repair works in the Gorakhpur Mandal for a total cost of ₹3,24,16,000.
* ₹1,13,45,000 is released from the State Road Fund for the financial year 2025-26 under Grant No. 58, Account Head 3054.
* **Approved Projects:**
* Repair work on NH-29 Sohagoura Tikar Marg in Vikas Khand Kaudiram, Gorakhpur (4.5 km): ₹235.69 lakh total cost with ₹82.49 lakh released.
* Construction of a box culvert in place of a damaged culvert on Hata Gauri Marg to Rampur Sohrauna Marg, Kushinagar (Culvert): ₹88.47 lakh total cost with ₹30.96 lakh released.
* **Conditions and Restrictions:**
* Duplication of work must be avoided. The Chief Engineer must ensure that the approved work is not already covered under any other scheme.
* Technical approval from the competent authority must be obtained before commencing work.
* Labor cess (1%) must be paid to the Labor Department.
* GST (18%) is included in the project cost, and payment should adhere to government regulations.
* The expenditure should adhere to the state road fund rules and financial regulations.
* Allocated funds cannot be used for any other purpose.
* **Deadlines and Reporting:**
* Funds must be utilized by March 31, 2026.
* A utilization certificate must be submitted to the government by April 30, 2026.
* Weekly progress review by the regional Chief Engineer and monthly review by the Head of the Public Works Department are required.
**Impact Analysis**
**Chief Engineer (Development) and Head of Department, Public Works Department, Lucknow**
* **Impact:** Responsible for ensuring compliance with all terms and conditions, avoiding duplication of work, securing technical approval, monitoring project progress, and submitting required reports.
* **Action Required:** Verify project alignment with existing plans, obtain necessary approvals, ensure quality execution, and meet deadlines.
**Chief Engineer (Zone-1) and Concerned Regional Chief Engineer**
* **Impact:** Responsible for ensuring the quality of work is high, supervising project execution, monitoring project progress, and ensuring financial prudence.
* **Action Required:** Ensure compliance with construction standards, monitor project implementation, address any cost overruns, and coordinate with relevant stakeholders.
**Executive Engineer**
* **Impact:** Execute the project and ensure timely completion.
* **Action Required:** Manage and execute the project within the approved budget and timeline. Ensure high quality of work is delivered.
Key Entities Referenced
राज्य सड़क निधि: Fund from which the financial approvals are being granted for road repairs.
गोरखपुर मण्डल: The region (Mandal) within Uttar Pradesh where the road repair work will be conducted across multiple districts.
लोक निर्माण विभाग: Public Works Department of Uttar Pradesh, the primary department responsible for the road repair works.
अनुदान सं0-58 लेखाशीर्षक-3054: Grant number 58, Head of Account 3054 under which the budget is allocated for state road maintenance.
Uttar Pradesh: The state where the policy is applicable.
WEAI-05/2026/3S/ 99520/23--26/003-23-7002(002)/283/2025
प्रेषक,
राजेश प्रताप सिंह,
संयुक्त सचिव,
उ0प्र0 शासन।
सेवा में,
प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष,
लोक निर्माण विभाग,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
लोक निर्माण अनुभाग-] लखनऊ : दिनांक 08 जनवरी, 2026
विषय- वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान सं0-58 लेखाशीर्षक-3054 के अन्तर्गत राज्य सड़क
निधि से गोरखपुर मण्डल के विभिन्न जनपदों के कुल 02 विशेष मरम्मत के कार्यो हेतु
प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक मुख्य अभियंता (HO-), लोक निर्माण विभाग, लखनऊ के अधोलिखित
तालिका के स्तम्भ-2 में अंकित पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्ताव के संबंध में मुझे यह
कहने का निदेश हुआ है कि निम्न विवरणानुसार गोरखपुर मण्डल के विभिन्न जनपदों के कुल
02 विशेष मरम्मत के कार्यों हेतु कुल लागत GO 3,24,6,000/- (रूपये तीन करोड़ चौबीस लाख
सोलह हजार मात्र) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के साथ चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में
अनुदान सं0-58 के ल्ेखाशीर्षक-3054 के अन्तर्गत राज्य सड़क निधि से कुल BO ,3,45,000/-
(रूपये एक करोड़ तेरह लाख पैंताल्लीस हजार मात्र) की वित्तीय स्वीकृति निम्नलिखित शर्तों एवं
प्रतिबन्धों के अधीन निर्गत किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं:-
(धनराशि Go लाख में)
m0 | मुख्य अभियन्ता खण्ड/ यूनिक कार्य का नाम क्षतिग्र कुल Waar
Ho | (H0-7), लोएनि0वि0 | जनपद का कोड ta लागत धनराशि
का पत्र संख्या व नाम लम्बाई
feo (fo ato
में)
|. 2. 53 | 4 Bi 7 | 8 |
date 23/]2/2025 "
गोरखपर सोहगारा टीकर मार्ग के विशेष मरम्मत
no]
का कार्य।
date 04/2/2025 में ° .
कशीनगर के किमी004 में 4 गुणे 3 मी० स्थान एवं
बे किमी0 02 ममेेंं 2 गुणे Alo स्पान की
क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर के
STH कल्वर्ट का निर्माण का कार्य |
कुल योग- | 324.6 | 23.45
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |प्रश्गगत कार्य की दविरावृत्ति को रोकने की दृष्टि से प्रमुख अभियंता(विकास) एवं
विभागाध्यक्ष, लो0/नि0वि0, लखनऊ द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा कि उक्त कार्य पूर्व
में किसी अन्य योजना/कार्यक्रम के अन्तर्गत न तो स्वीकृत है और न वर्तमान में किसी
अन्य योजना/कार्यक्रम में आच्छादित किया जाना प्रस्तावित है। यदि दविरावृत्ति पायी जाय
तो उस स्वीकृति को निरस्त करते हुए संबंधित कार्य पर आवंटित धनराशि शासन को
तत्काल समर्पित की जाय।
प्रश्तगत कार्य को
(4)
उस समय तक प्रारम्भ न किया जाय और न ही उन पर कोई व्यय
भार लिया जाय जब तक कि स्वीकृत लागत के अन्तर्गत विस्तृत आगणन गठित कर
उस पर सक्षम अधिकारी द्वारा प्राविधिक स्वीकृति प्रदान न कर दी जाय। यदि यह
कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की जाती है तो समस्त उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य
अभियंता/अधीक्षण अभियंता/अधिशासी अभियंता का होगा।
लेबर सेस की एक प्रतिशत धनराशि इस शर्त के अधीन होगी कि श्रम विभाग को उक्त
धनराशि का भुगतान किया जायेगा।
प्रायोजनान्तर्गत 8 प्रतिशत की दर से जी0एस0टी0 की धनराशि सम्मिलित की गयी है।
विभाग का दायित्व होगा कि भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था के
अनुसार जी0एस0टी0 का भुगतान सुनिश्चित किया जाये। साथ ही विभाग का यह भी
दायित्व होगा कि प्रायोजना के निर्माण कार्यो में वास्तविक खपत (CONSUMED) हुई
मुख्य सामग्री (सीमेन्ट व स्टील, ग्रिट, बिटुमिन इत्यादि) की मात्राओं का अनुपातिक/मानक
मिलान करते हुए जी0एस0टी0 भुगतान किया जाये।
प्रश्नगत कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व वित्तीय हस्तपुस्तिका, खण्ड-6 के अध्याय-2 के
WER-38 में वर्णित व्यवस्था के अनुसार प्रायोजना पर सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति
अवश्य प्राप्त कर ली जाय तथा सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात
ही कार्य प्रारम्भ किया जाय। यदि यह कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की जाती है तो समस्त
उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य अभियंता/अधीक्षण अभियंता/अधिशासी अभियंता का होगा।
प्रश्नगत कार्य हेतु आवंटित धनराशि का उपयोग प्रत्येक दशा में 3 मार्च, 2026 तक
कर लिया जाय। कार्य सम्पादन के अनुरूप उपयोगिता प्रमाण पत्र दिनांक 30 अप्रैल 2026
तक शासन को निश्चित रूप से उपलब्ध करा दिया जाय।
Watt कार्य हेतु आवंटित धनराशि के सापेक्ष व्यय, वित्त विभाग द्वारा निर्गत
आदेशों/ज़ापों में उल्लिखित शर्तों के अनुसार बजट मैनुअल एवं वित्तीय हस्तपुस्तिका के
नियमों, स्थायी आदेशों आदि तथा राज्य सड़क निधि नियमावली में किये गये प्राविधानों
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए किया जाय तथा किसी भी दशा A प्रश्नगत कार्य हेतु
आवंटित धनराशि का उपयोग किसी अन्य मद में न किया जाय।
राज्य सड़क निधि हेतु गठित उ0प्र0 राज्य सड़क निधि प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित
परियोजनाओं/प्रयोजनों के लिये ही स्वीकृत/आवंटित धनराशि का उपयोग किया जायेगा।
यह सुनिश्चित किया जाय कि जिन प्रयोजनों हेतु राज्य सड़क निधि से धनराशि स्वीकृत
हुई है वह उसी प्रायोजन हेतु व्यय की गयी है। विभाग द्वारा यह भी सुनिश्चित किया
जाय कि कार्य की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद कार्य की अव्यवहारिकता दर्शाते हुए स्वीकृति
निरस्त न हो।
प्रश्नगत कार्य निर्धारित व अनुमोदित मानकों एवं विशिष्टियों के अनुरूप सम्पादित कराये
जाय ताकि उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। यदि किसी अपरिहार्य परिस्थितिवश निर्धारित
मानकों/विशिष्टियों में परिवर्तन किया जाना अपेक्षित हो तो, उक्त परिवर्तन/विचलन शासन
की पूर्वानुमति से ही किया जाय। प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लो0नि0वि0,
लखनऊ CANT सुनिश्चित किया जायेगा कि आगणन में किसी भी प्रकार की त्रुटि न होने
पाये।
(70) विभाग द्वारा यथावश्यक वैधानिक अनापत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लियरेन्स नियमानुसार
सक्षम स्तर
(77)
(72)
(73)
(74)
से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जायेगा।
परियोजना की लागत व समय सीमा में बढोत्तरी न हो, इस हेतु परियोजना के निर्माण
कार्य की साप्ताहिक समीक्षा सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता द्वारा एवं माह में कम
से कम एक बार समीक्षा विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के स्तर पर सुनिश्चित की
जायेगी।
प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ द्वारा प्रश्नगत
कार्य से सम्बन्धित बचत (यदि हो तो) व कार्य पूर्णता इत्यादि की सूचना यथासमय
शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जायेगा।
परियोजना को निर्धारित समयसीमा के अन्दर अवश्य पूर्ण कर लिया जाये तथा टाइम
ओवर रन Ud क्रास्ट ओवर रन इत्यादि के कारण प्रायोजना का पुनरीक्षण भविष्य में नहीं
किया जायेगा।
वित्त विभाग के शासनादेश WO-0/202/sI-2-96/4a-202-0/99, दिनांक 22 मार्च,
202 के अनुसार अनुमोदित प्रायोजना की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के उपरान्त
इसकी डी0पी0आर0 गठित करने के उपरान्त ही तकनीकी स्वीकृति निर्गत की जाय। यदि
इस प्रक्रिया में यह परिल्क्षित होता है कि प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष
यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htty://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |तकनीकी स्वीकृति की लागत 0 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो रही है, तो प्रायोजना
का पुनरीक्षित आगणन गठन करते हुए 03 माह के भीतर पुनरीक्षित आगणन पर व्यय-
वित्त समिति का अनुमोदन प्राप्त किया जाय, अन्यथा की स्थिति में पुनरीक्षित प्रायोजना
पर व्यय-वित्त समिति दूवारा विचार नहीं किया जायेगा।
(I5) वित्त विभाग के शासनादेश AEAN-0/2023/t-2-60/qa-2023-7(4)/75, दिनांक 7
मई, 2023 के अनुसार परियोजना की वित्तीय स्वीकृति व प्रथम किश्त मूल्यांकित लागत
पर जारी की जाये, किन्तु द्वितीय किश्त जारी करने से पूर्व परियोजना की ल्रागत को
निविदा में प्राप्त मूल्य (CUS PIC) के अनुसार विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए
पुनरीक्षित करा लिया जाये। परियोजना की अनुवर्ती किश्तें पुनरीक्षित लागत के आधार
पर ही जारी की जायें ताकि कार्यदायी संस्था को कार्य की वास्तविक लागत से अधिक
धनराशि अवमुक्त न हो सके। यदि निविदा के बाद कार्यों की लागत में कमी आती है,
तो बचत की धनराशि को सुसंगत वित्तीय नियमों के अन्तर्गत राजकोष में जमा किया
जाये।
(76) प्रस्ताव का परीक्षण लागत आगणन मेँ प्रस्तावित विशिष्टियों एवं कार्य प्राविधानों को
यथावत मानते हुए किया गया है। मार्ग निर्माण की लम्बाई/चौड़ाई में परिवर्तन, संशोधन,
स्वीकृत प्रायोजना के THT में परिवर्तन आदि शासन स्तर से अनुमोदन प्राप्त किये बिना
नहीं किया जायेगा।
(77) परियोजना पूर्ण होने A fara की स्थिति उत्पन्न होने अथवा परियोजना की लागत में
वृद्धि की दशा में इसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व प्रमुख अभियन्ता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष,
लोक निर्माण विभाग एवं मुख्य अभियन्ता (40-) एवं सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता
का होगा तथा भविष्य में यदि परियोजना की त्रागत में वृद्धि होती है तो ऐसी दशा में
लागत में बढोत्तरी की कुल धनराशि की वसूली सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता आदि
के वेतन से की जायेगी।
(78) परियोजना से सम्बन्धित समस्त तकनीकी पक्षों/तथ्यों व उनके परीक्षण/सत्यापन तथा
इस परियोजना के निर्धारित मानकों के अनुरूप होने का पूर्ण उत्तरदायित्व प्रमुख अभियन्ता
(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग का होगा।
(79) जिन मार्गों के सृष्टि कोड अंकित नहीं है, उनके संबंध में प्रमुख अभियंता(विकास) एवं
विभागाध्यक्ष, ल्रोक निर्माण विभाग, लखनऊ द्वारा यह सुनिश्चित किया जायेगा कि मार्ग
लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व के हैं अथवा उनके लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व
में न होने की दशा में संबंधित विभाग से अनापततिि प्राप्त किये जाने के उपरान्त कार्यवाही
की जाय।
गा यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट htty://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(20) प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ द्वारा वित्त
विभाग के कार्यालय AT AkA-06/2025/a--352/4a-2025-23/2025, दिनांक 27
मार्च, 2025 तथा अन्य सुसंगत शासनादेशों का अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित किया
जायेगा।
(2) उपरिलिखित सभी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने का दायित्व प्रमुख
अभियन्ता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, मुख्य अभियन्ता (मु0-) एवं
सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता का होगा।
2- इस संबंध में होने वाला व्यय रू0 ,3,45,000/- (रूपये एक करोड़ ave लाख daria
हजार मात्र) को चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्ययक में अनुदान संख्या-58 ल्लेखाशीर्षक
"3054043370500 राज्य सड़क निधि से सड़कों का अनुरक्षण मानक मद 29 अनुरक्षण" के
नामे डाला जायेगा।
3- यह आदेश वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग- के कार्यालय ATT AEAT-6/2025/a- -352/eH-
2025-23 /2025, दिनांक 27 मार्च, 2025 में प्रशासकीय विभाग को उक्तवत प्रतिनिधानित
अधिकार के अंतर्गत निर्गत किये जा we हैं।
भवदीय,
राजेश प्रताप सिंह
संयुक्त सचिव।
WSAT-05/2026/3TS/799520( )/23--26/003-23-4002(002)/283/2025, तद्दिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
|- निजी सचिव, मा0 मुख्यमंत्री जी उत्तर प्रदेश शासन।
2- निजी सचिव, AIO राज्य मंत्री जी, ल्रोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन।
3- महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), प्रथम/दवितीय Scat प्रदेश, प्रयागराज।
4- जिलाधिकारी/कोषाधिकारी, संबंधित जनपद।
5- मुख्य अभियंता(मुख्यालय-), लोक निर्माण विभाग, लखनऊ |
6- मुख्य अभियंता, संबंधित क्षेत्र, लोक निर्माण विभाग।
7- संबंधित अधिशासी अभियन्ता, लोक निर्माण विभाग।
8- वित्त नियंत्रक, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ |
9- वेब मास्टर, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ |
0- वेब अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ |
V4- लोक निर्माण अनुभाग-0/वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-8, उ0प्र0 शासन।
42- नोडल अधिकारी (आनलाइन बजट एलॉटमेंट सिस्टम), लोक निर्माण विभाग, उ0प्र0 शासन।
3- गार्ड फाइल।
आज्ञा से,
अभिषेक गंगवार
अनु सचिव ।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |