Date: 2026-01-29Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान सं0-58 लेखाशीर्षक-5054 के अन्तर्गत राज्य सड़क निधि से मेरठ मण्डल के अन्तर्गत जनपद मेरठ में सरधना से रासना वाया ईकड़ी पथौली (अ0जि0मा0) का चैनेज 8.620 से 10.820 किमी0 तक चौडीकरण एवं सुदृढीकरण का कार्य हेतु प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति।
ज़रूर, यहाँ अनुरोधित स्वरूप में सारांश दिया गया है:
**कार्यकारी सारांश**
दस्तावेज़ में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान संख्या-58, लेखाशीर्षक-5054 के अंतर्गत राज्य सड़क निधि से, मेरठ मंडल के अंतर्गत जनपद मेरठ में सरधना से रासना वाया ईकड़ी पथौली (अ०जि०मा०) के चैनेज 8.620 से 10.820 किमी0 तक चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य हेतु प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के बारे में उल्लेख है। कुल स्वीकृत राशि 4,03,50,000/- रुपये है जिसमें चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 39,39,000/- रुपये की वित्तीय स्वीकृति शामिल है। यह आदेश 29 जनवरी 2026 को जारी किया गया था।
**मुख्य बातें**
* **परियोजना स्वीकृति**:
* जनपद मेरठ में सरधना से रासना वाया ईकड़ी पथौली (अ०जि०मा०) का चैनेज 8.620 से 10.820 किमी0 तक चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण किया जाना है।
* प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति कुल 4,03,50,000/- रुपये की है।
* चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत वित्तीय राशि 39,39,000/- रुपये है।
* **शर्तें और प्रतिबन्ध**:
* यह सुनिश्चित किया जाए कि यह कार्य किसी अन्य योजना/कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत या प्रस्तावित न हो।
* राज्य सड़क निधि से स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत प्रयोजन हेतु ही हो।
* बजट मैनुअल और वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
* कार्य शुरू करने से पहले सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त की जाए।
* अधिष्ठान व्यय की धनराशि स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष ही जमा की जाए।
* सेन्टेज चार्जेज (प्रतिशत प्रभार) से सम्बन्धित शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाये।
* **अतिरिक्त आवश्यकताएं**:
* भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य पहले पूरा किया जाए।
* यदि वन भूमि शामिल है, तो आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए।
* श्रम विभाग को लेबर सेस की धनराशि का भुगतान किया जाना चाहिए।
* जी0एस0टी0 का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और वास्तविक खपत के अनुसार जी0एस0टी0 का भुगतान किया जाये।
* मूल्य ह्रास आरक्षित निधि को नियमानुसार जमा किया जाए।
* पुल/पुलियों का निर्माण आई0आर0सी0/विभागीय मानकों के अनुसार किया जाए।
* परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
* आवंटित धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2026 तक कर लिया जाए और उपयोगिता प्रमाण पत्र 30 अप्रैल, 2026 तक जमा किया जाए।
* मानकों और विशिष्टियों के अनुरूप कार्य सम्पादित किया जाए और विचलन के लिए पूर्वानुमति ली जाए।
* वैधानिक अनापत्तियां और पर्यावरणीय क्लियरेन्स प्राप्त किए जाएं।
* **अनुपालन और रिपोर्टिंग**:
* पंचवर्षीय अनुरक्षण की स्वीकृति के सम्बन्ध में कार्यवाही की जाए।
* बचत और कार्य पूर्णता की सूचना समय पर शासन को दी जाए।
* समयसीमा के अन्दर परियोजना पूर्ण की जाए।
**प्रभाव विश्लेषण**
**प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ**
* **प्रभाव**: उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना निर्धारित मानकों के अनुसार हो और नियमों का अनुपालन हो। परियोजना की गुणवत्ता और समय पर पूर्ण होने के लिए जिम्मेदार हैं।
* **आवश्यक कार्रवाई**: दस्तावेजों में निर्धारित सभी शर्तों का अक्षरश: पालन करें। परियोजना की निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि सभी कार्य नियमों के अनुसार हों।
**मुख्य अभियंता (मु0-1) एवं संबंधित क्षेत्रीय मुख्य अभियंता**
* **प्रभाव**: परियोजनाओं की लागत और समय पर होने वाली वृद्धि के लिए जिम्मेदार।
* **आवश्यक कार्रवाई**: परियोजना की लागत और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करें। यदि लागत बढ़ती है, तो इसकी वसूली उनके वेतन से की जाएगी।
**संबंधित अधिशासी अभियंता**
* **प्रभाव**: फील्ड पर परियोजना के निष्पादन के लिए जिम्मेदार।
* **आवश्यक कार्रवाई**: परियोजना के कार्यान्वयन की निगरानी करें और परियोजना के निष्पादन के दौरान सभी मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
**जिलाधिकारी/कोषाधिकारी, संबंधित जनपद**
* **प्रभाव**: जनपद में परियोजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार।
* **आवश्यक कार्रवाई**: निधि के उचित आवंटन और परियोजना के सुचारू निष्पादन को सुनिश्चित करना।
Key Entities Referenced
उत्तर प्रदेश शासन: वह प्रशासनिक प्राधिकरण जो नीति जारी करता है।
लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश: वह विभाग जो राज्य में सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के लिए जिम्मेदार है, इस दस्तावेज़ में नामित परियोजना का प्राथमिक कार्यान्वयनकर्ता है।
राज्य सड़क निधि: सार्वजनिक सड़कों के निर्माण, रखरखाव और उन्नयन के लिए समर्पित एक निधि।
अनुदान संख्या-58 लेखाशीर्षक-5054: परियोजना के लिए विशिष्ट बजटीय आवंटन, जिसका उपयोग खर्चों को वर्गीकृत करने और निधि के उपयोग पर नज़र रखने के लिए किया जाता है।
जनपद मेरठ: वह जिला जहां बुनियादी ढाँचे का काम किया जाएगा।
WEAT-59/2026/3i7S/2222/23--26/00I-23-002(002)/45/2026
प्रेषक,
राजेश प्रताप सिंह,
संयुक्त सचिव,
उ0प्र0 शासन।
सेवा में,
प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष,
लोक निर्माण विभाग,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
लोक निर्माण अनुभाग- लखनऊ : दिनांक 29 जनवरी, 2026
विषय- वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान सं0-58 लेखाशीर्षक-5054 के अन्तर्गत राज्य सड़क निधि से
मेरठ मण्डल के अन्तर्गत जनपद मेरठ A सरधना से Ween वाया ईकड़ी पथौली (अ0जि0मा0)
का चैनेज 8.620 से 0.820 किमी0 तक चौंडीकरण एवं सुदृढीकरण का कार्य हेतु प्रशासकीय एवं
वित्तीय स्वीकृति।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक मुख्य अभियंता (H0-), लोक निर्माण विभाग, लखनऊ के अधोलिखित तालिका
के स्तम्भ-2 में अंकित पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्ताव के संबंध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ
है कि निम्नलिखित मेरठ मण्डल के अन्तर्गत जनपद मेरठ A Wea से Waa वाया ईकड़ी
पथौली (अ0जि0मा0) का चैनेज 8.620 से 0.820 किमी0 तक चौडीकरण एवं सुदृढीकरण का
कार्य हेतु कुल लागत रू0 4,03,50,000/- (रूपये चार करोड़ तीन लाख पचास हजार मात्र) की प्रशासकीय
एवं वित्तीय स्वीकृति के साथ चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान सं0-58 के ल्लेखाशीर्षक-5054 के
अन्तर्गत राज्य सड़क निधि से कुल BO 39,39,000/- (रूपये उनतालीस लाख उनतात्रीस हजार मात्र) की
वित्तीय स्वीकृति निम्नलिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन निर्गत किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष
स्वीकृति प्रदान करते हैं:-
(धनराशि Go लाख में)
क्र0 | मुख्य अभियन्ता | खण्ड/ जनपद कार्य का नाम लम्बाई | कार्य की | 5 वर्षीय कुल लागत | अवमुक्क्त
सं0 (40-), का नाम (कि0मी0 लागत | अनुरक्षण | (05 वर्षीय | धनराशि
लो0नि0वि0 का में) (48 % | की लागत | अनुरक्षण
पत्र संख्या व जी0एस0 | (8 % 8 %
feo टी0 जी0एस0 जी0
सहित) टी0 एस0टी0
सहित) सहित)
2 3 | 4 ।श।। 5 | 6 | 7 | 8 | 9 |
4 3g80feo/ii6- | नि0०खं0 मेरठ | जनपद मेरठ A सरधना से | 2.200 | 393.93 9.57 403.50 39.39
04नि0/25- 26, रासना वाया ईकड़ी पथौली
दिनांक (अ0जि०मा0) का चैनेज 8.620 से
9.42.2025 0.820 किमी0 तक चौडीकरण
एवं सुदृढीकरण का कार्य।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(7) प्रश्तगत कार्य की ट्विरावृत्ति को रोकने की दृष्टि से प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष,
लो0नि0वि0, लखनऊ द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा कि उक्त कार्य पूर्व में किसी अन्य
योजना/कार्यक्रम के अन्तर्गत न तो स्वीकृत है और न वर्तमान में किसी अन्य योजना/कार्यक्रम में
आच्छादित किया जाना प्रस्तावित है। यदि द्विरावृत्ति पायी जाय तो उस स्वीकृति को निरस्त करते
हुए संबंधित कार्य पर आवंटित धनराशि शासन को तत्कात्र समर्पित की जाय।
(2) राज्य सड़क निधि हेतु गठित उ0प्र0 राज्य सड़क निधि प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित
परियोजनाओं/प्रयोजनों के लिये ही स्वीकृत/आवंटित धनराशि का उपयोग किया जायेगा। यह
सुनिश्चित किया जाय कि जिन प्रयोजनों हेतु राज्य सड़क निधि से धनराशि स्वीकृत हुई है वह
उसी प्रायोजन हेतु व्यय की गयी है। विभाग द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाय कि कार्य की
स्वीकृति प्राप्त होने के बाद कार्य की अव्यवहारिकता दर्शाते हुए स्वीकृति निरस्त न हो।
(3) प्रश्नगत कार्य हेतु आवंटित धनराशि के सापेक्ष व्यय, वित्त विभाग द्वारा निर्गत आदेशों/ज़ापों में
उल्लिखित शर्तों के
(4)
(5)
(6)
(7)
(8)
अनुसार बजट मैनुअल एवं वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों, स्थायी आदेशों आदि
तथा राज्य सड़क निधि नियमावली A किये गये प्राविधानों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए किया
जाय तथा किसी भी दशा में प्रश्नगत कार्य हेतु आवंटित धनराशि का उपयोग किसी अन्य मद में
न किया जाय।
प्रश्नगत कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व वित्तीय हस्तपुस्तिका, खण्ड-6 के अध्याय-42 के प्रस्तर-38 में
वर्णित व्यवस्था के अनुसार प्रायोजना पर सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति अवश्य प्राप्त कर ली
जाय तथा सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात ही कार्य प्रारम्भ किया जाय।
यदि यह कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की जाती है तो समस्त उत्तरदायित्व संबंधित मुख्य
अभियंता/अधीक्षण अभियंता/अधिशासी अभियंता का होगा।
अधिष्ठान व्यय की धनराशि समय-समय पर स्वीकृत/आवंटित की जा रही धनराशि के सापेक्ष ही
जमा की जायेगी। अधिष्ठान व्यय की धनराशि वित्त(लेखा) अनुभाग-2 के संशोधित शासनादेश सं0-
U-2-606/E8-204-74(4)/75, दिनांक (7.44.44 द्वारा जारी संशोधित/परिवर्तित व्यवस्था के
अनुसार राजकीय विभागों cant कैश क्रेडिट लिमिट(सी0सी0एल0) प्रणाली व डिपार्टमैंट क्रेडिट
लिमिट(डी0सी0एल0) प्रणाली के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्यों पर दिनांक 07.04.204 से सेन्टेज
कार्याश(लागत (00) का 6.875 प्रतिशत सेन्टेज/अधिष्ठान व्यय की धनराशि वित्त(आय-व्ययक)
3ePSTT- के शासनादेश विभाग AO-s-7-90I/ea- 207-237/204I, दिनांक 2.03.204 के
संलग्नक में प्रदर्शित प्राप्ति लेखाशीर्षक- ”7054-00-800-05-00-00" में ट्रान्सफर इंट्री डाटा क्रेडिट
करके जमा की जायेगी।
Geta चार्जेज (प्रतिशत प्रभार), निर्माण लागत तथा वित्तीय स्वीकृति से सम्बन्धित वित्तीय प्रबंधन
विषयक वित्त विभाग के शासनादेश PeA-04/2023/v-2-60/4a-2023-7(4)/75, दिनांक
7.05.2023 एवं शासनादेश BEAI-02/2023/U-2-66/G4-2023-7(4)/75, दिनांक 9.05.2023
में निर्धारित प्रक्रिया एवं निहित शर्तों का अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा।
प्रायोजनान्तर्गत विभाग द्वारा सर्वप्रथम भूमि अधिग्रहण एवं यूटिल्रिटी शिफ्टिंग का कार्य पूर्ण किया
जाये तदोपरान्त ही मार्ग का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जाये।
प्रायोजनान्तर्गत यदि वन भूमि से संबंधित कार्य प्रस्तावित किया जाता है तो इस संबंध में आवश्यक
वैधानिक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाना आवश्यक होगा।
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(9) लेबर सेस की एक प्रतिशत धनराशि इस शर्त के अधीन होगी कि श्रम विभाग को उक्त धनराशि
का भुगतान किया जायेगा।
(70) प्रायोजनान्तर्गत 8 प्रतिशत की दर से जी0एस0टी0 की धनराशि सम्मिलित की गयी है। विभाग
का दायित्व होगा कि भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जी0एस0टी0
का भुगतान सुनिश्चित किया जाये। साथ ही विभाग का यह भी दायित्व होगा कि प्रायोजना के
निर्माण कार्यो में वास्तविक खपत (CONSUMED) हुई मुख्य सामग्री (सीमेन्ट व स्टील, ग्रिट, बिट॒मिन
इत्यादि) की मात्राओं का अनुपातिक/मानक मिलान करते हुए जी0एस0टी0 भुगतान किया जाये।
(77) मूल्य हास आरक्षित निधि की धनराशि समय-समय पर स्वीकृत/ आवंटित की जा रही धनराशि के
सापेक्ष ही
(72)
(73)
(74)
(75)
(76)
(7)
(78)
(79)
जमा की जायेगी। मूल्य SM आरक्षित निधि की धनराशि शासनादेश HO-3280()23-9-
05-25-20एसी/05, दिनांक 2.09.2005 एवं शासनादेश A0-343/23-9-203-2008/04 टीसी,
दिनांक 74.03.3 मेँ की गई व्यवस्था के अनुसार लेखाशीर्षक” 054-ash तथा सेतु-800-अन्य
प्राप्तियां-04-टूल्स एवं प्ल्लाण्ट की प्राप्तियां" में जमा करायी जायेगी।
प्रायोजनान्तर्गत आकस्मिक व्यय मद में प्रस्तावित धनराशि का व्यय, वित्तीय हस्तपुस्तिका में
TACT मर्दों पर ही नियमानुसार सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त करने के उपरान्त ही किया
जायेगा।
प्रायोजनान्तर्गत प्रस्तावित पुल/पुलियों का इक्सटेंशन-तथा-नाल्रा-नाली आदि के निर्माण का प्राविधान
किया गया sl भविष्य में मार्ग के चौड़ीकरण की सम्भावना के दृष्टिगत मार्ग के संरेखण में आने
वाले पक्के स्ट्रक्चर (पुल/पुलिया/नाली इत्यादि) का निर्माण आई0आर0सी0/ विभागीय मानकों में
पूर्व निर्धारित फारमेशन fase (चौड़ाई) के अनुसार ही कराया जाय।
परियोजना की लागत व समय सीमा में बढोत्तरी न हो, इस हेतु परियोजना के निर्माण कार्य की
साप्ताहिक समीक्षा सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता द्वारा एवं माह में कम से कम एक बार
समीक्षा विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के स्तर पर सुनिश्चित की जायेगी।
प्रश्नगत कार्य हेतु आवंटित धनराशि का उपयोग प्रत्येक दशा में 3 मार्च, 2026 तक कर लिया
जाय। कार्य सम्पादन के अनुरूप उपयोगिता प्रमाण पत्र दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक शासन को
निश्चित रूप से उपलब्ध करा दिया जाय।
Wand कार्य निर्धारित व अनुमोदित मानकों एवं विशिष्टियों के अनुरूप सम्पादित कराये जाय
ताकि उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित हो ahi यदि किसी अपरिहार्य परिस्थितिवश निर्धारित
मानकों/विशिष्टियों में परिवर्तन किया जाना अपेक्षित हो तो, उक्त परिवर्तन/विचलन शासन की
पूर्वानुमति से ही किया जाय। प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लो0नि0वि0, लखनऊ
cant सुनिश्चित किया जायेगा किआगणन मैं किसी भी प्रकार की त्रुटि न होने पाये।
विभाग द्वारा यथावश्यक वैधानिक अनापत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लियरेन्स नियमानुसार सक्षम स्तर
से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जायेगा।
प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोएनि0वि0, लखनऊ द्वारा यह सुनिश्चित किया जायेगा
कि कार्यों हेतु पंचवर्षीय अनुरक्षण की स्वीकृति के सम्बन्ध में शासनादेश में निर्धारित व्यवस्था के
अनुसार कार्यवाही की जाय।
प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ द्वारा प्रश्नगत कार्य से
सम्बन्धित बचत (यदि हो तो) व कार्य पूर्णता इत्यादि की सूचना यथासमय शासन को उपलब्ध
कराना सुनिश्चित किया जायेगा।
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(20) परियोजना को aa समयसीमा के अन्दर अवश्य पूर्ण कर त्रिया जाये तथा टाइम ओवर रन
Ud क्रास्ट ओवर रन इत्यादि के कारण प्रायोजना का पुनरीक्षण भविष्य मेँ नहीं किया जायेगा।
(2) वित्त विभाग के शासनादेश सं0-40/2024/बी-2-96/दस-202-40/99, दिनांक 22 मार्च, 2024 के अनुसार
अनुमोदित प्रायोजना की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के उपरान्त इसकी डी0पी0आर0 गठित
करने के उपरान्त ही तकनीकी स्वीकृति निर्गत की जाय। यदि इस प्रक्रिया में यह परिलक्षित होता
है कि प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष तकनीकी स्वीकृति की ल्रागत 40 प्रतिशत से
अधिक की वृद्धि हो रही है, तो प्रायोजना का पुनरीक्षित आगणन गठन करते हुए 03 माह के भीतर
पुनरीक्षित आगणन पर व्यय-वित्त समिति का अनुमोदन प्राप्त किया जाय, अन्यथा की स्थिति में
पुनरीक्षित प्रायोजना पर व्यय-वित्त समिति द्वारा विचार नहीं किया जायेगा।
(22) वित्त विभाग के शासनादेश WeAT-0/2023/0-2-60/4a-2023-7(4)/75, दिनांक 77 मई, 2023
के अनुसार परियोजना की वित्तीय स्वीकृति व प्रथम किश्त मूल्यांकित oad पर जारी की जाये,
किन्तु द्वितीय किश्त जारी करने से पूर्व परियोजना की लागत को निविदा में प्राप्त मूल्य (टेण्डर
कॉस्ट) के अनुसार विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए पुनरीक्षित करा लिया जाये। परियोजना की
अनुवर्ती fred पुनरीक्षित लागत के आधार पर ही जारी की जायें ताकि कार्यदायी संस्था को कार्य
की वास्तविक लागत से अधिक धनराशि अवमुक्त न हो सके। यदि निविदा के बाद कार्यों की
लागत में कमी आती है, तो बचत की धनराशि को सुसंगत वित्तीय नियमों के अन्तर्गत राजकोष
में जमा किया जाये।
(23) प्रस्ताव का परीक्षण लागत आगणन में प्रस्तावित विशिष्टियों एवं कार्य प्राविधानों को
(24)
यथावत मानते
हुए किया गया él मार्ग निर्माण की लम्बाई/चौड़ाई में परिवर्तन, प्रस्तावित क्रस्ट डिजाइन में
संशोधन, स्वीकृत प्रायोजना के tar मैं परिवर्तन आदि व्यय वित्त समिति का पूर्व अनुमोदन
प्राप्त किये बिना नहीं किया जायेगा।
प्रमुख अभियंता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ द्वारा वित्त विभाग के
कार्यालय AMT W0-6/2025/s--352/aa-2025-23/2025, दिनांक 27 मार्च, 2025 एवं अन्य
सुसंगत शासनादेशों में दिये गये निर्देशों का पूर्णतया अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा।
(25) विभागीय व्यय वित्त समिति द्वारा लगायी गयी शर्तों का पूर्णतय: अनुपालन सुनिश्चित किया
जायेगा।
(26) परियोजना पूर्ण होने मेँ fara की स्थिति उत्पन्न होने अथवा परियोजना की ल्रागत में वृद्धि की
दशा A इसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व प्रमुख अभियन्ता(विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण
विभाग एवं मुख्य अभियन्ता (HO-I) एवं सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता का होगा तथा भविष्य
में यदि परियोजना की लागत मेँ वृद्धि होती है तो ऐसी दशा में लागत में बढोत्तरी की कुल
धनराशि की वसूली सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ता आदि के वेतन से की जायेगी।
(27) परियोजना से सम्बन्धित समस्त तकनीकी पक्षों/तथ्यों व उनके परीक्षण/सत्यापन तथा इस परियोजना
के निर्धारित मानकों के अनुरूप होने का पूर्ण उत्तरदायित्व प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं
विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग का होगा।
(28) उपरिलिखित सभी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने का दायित्व प्रमुख अभियन्ता(विकास) एवं
विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, मुख्य अभियन्ता (H0-l) एवं सम्बन्धित क्षेत्रीय मुख्य
अभियन्ता का होगा।
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |2- इस संबंध में होने वाला व्यय रू0 39,39,000/- (रूपये उनतालीस लाख उनतालीस हजार मात्र)
को चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्ययक में अनुदान संख्या-58 लेखाशीर्षक-
5054043375800 राज्य सड़क निधि से सड़कों का निर्माण/सुदृढ़करण/चौड़ीकरण मानक मद
24-वृहत निर्माण कार्य के नामे डाला जायेगा।
3- यह आदेश वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग- के कार्यालय ATT AEA-6/2025/a--352/ea-
2025-23/2025, दिनांक 27 मार्च, 2025 में प्रशासकीय विभाग को उक्तवत प्रतिनिधानित
अधिकार के अंतर्गत निर्गत किये जा रहे हैं।
भवदीय,
राजेश प्रताप सिंह,
संयुक्त सचिव।
WSAT-59/2026/3iTS/22422()/23-4-26/00I-23-4002(002)/5/2026, तद्दिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
I- fetoht सचिव, माए मुख्यमंत्री जी उत्तर प्रदेश शासन।
2- निजी सचिव, माए0 राज्य मंत्री जी, ल्रोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन।
3- महालेखाकार (लेखा Ud हकदारी), प्रथम/द्वितीय Scat प्रदेश, प्रयागराज।
4- जिलाधिकारी/कोषाधिकारी, संबंधित जनपद।
5- मुख्य अभियंता(मुख्यालय-4), लोक निर्माण विभाग, लखनऊ |
6- मुख्य अभियंता, संबंधित क्षैत्र, लोक निर्माण विभाग।
7- संबंधित अधिशासी अभियन्ता, लोक निर्माण विभाग।
8- वित्त नियंत्रक, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ |
9- वेब मास्टर, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ |
0- वेब अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ |
4- लोक निर्माण अनुभाग-0/वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-8, उ0प्र0 शासन।
42- नोडल अधिकारी (आनलाइन बजट एलॉटमेंट सिस्टम), लोक निर्माण विभाग, उ0प्र0 शासन।
43- गार्ड फाइल्र।
आज्ञा से,
अभिषेक गंगवार
अनु सचिव ।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |