Date: 2025-07-25Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के अन्तर्गत प्राविधानित धनराशि रूपये 130.00 करोड़ के सापेक्ष रू. 48,07,434.00 की वित्तीय स्वीकृति प्रदान किए जाने के संबंध में।
निश्चित रूप से। नीचे दिए गए अनुरोध के अनुसार नीति पाठ का सारांश दिया गया है।
**कार्यकारी सारांश:**
यह दस्तावेज़, क्रमांक-58/2025/1281/77-6-25/1771640, 25 जुलाई, 2025 को जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में आवंटित 130.00 करोड़ रुपये की धनराशि में से 48,07,434.00 रुपये की वित्तीय मंजूरी प्रदान करना है। इसमें इस धनराशि के वितरण के लिए नियम और शर्तें शामिल हैं।
**मुख्य बातें / मुख्य सामग्री:**
* **धनराशि की मंजूरी:** वित्त वर्ष 2025-26 के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003 के तहत 48,07,434.00 रुपये की वित्तीय मंजूरी जारी की गई है।
* **वितरण नियम:**
* स्वीकृत धनराशि का भुगतान आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से सीधे इकाई के बैंक खाते में किया जाना चाहिए।
* प्रबंध निदेशक, पिकअप द्वारा हस्ताक्षरित उपयोगिता प्रमाण पत्र तुरंत प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
* पिकअप को ऋण वितरित करने से पहले पात्रता की स्थिति सत्यापित करनी चाहिए और ऋण स्वीकृति प्रक्रियाओं के साथ अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।
* **व्यय और रखरखाव:**
* आवश्यकतानुसार राजकोष से ही धनराशि निकाली जाए।
* धनराशि को अग्रिम में निकालकर किसी बैंक खाते में न रखा जाए।
* पिकअप को स्वीकृत धनराशि का हिसाब-किताब रखना चाहिए।
* धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए।
* **अनुपालन और रिकवरी:**
* धनराशि का उपयोग करने वाली पात्र इकाइयों को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली-2003 (संशोधित) में निर्धारित शर्तों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए।
* पात्र इकाइयों से ऋण की वसूली के लिए पिकअप जिम्मेदार होगा।
* डिफ़ॉल्ट होने पर आगे के संवितरण बंद कर दिए जाएंगे, और पिकअप को नियमावली के प्रावधानों के अनुसार रिकवरी के लिए प्रभावी उपाय करने चाहिए।
* **ब्याज और अतिरिक्त शर्तें:**
* विलम्ब से भुगतान पर 1.25% प्रति माह का ब्याज वसूला जाएगा।
* यदि किश्तों के भुगतान में पिकअप डिफॉल्ट करता है, तो उस पर डिफ़ॉल्ट अवधि के लिए 1.25% प्रति माह की दर से ब्याज लगेगा।
* आवश्यकतानुसार ही धन निकाला जाएगा और संयुक्त आयुक्त, उद्योग, लखनऊ मंडल द्वारा आकलन किया जाएगा।
* उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम द्वारा ऋण वितरण का पर्यवेक्षण किया जाना चाहिए और धनराशि का सदुपयोग सुनिश्चित होने के बाद ही आगामी किश्त निकाली जानी चाहिए।
* व्यय जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए, और किसी भी वित्तीय अनियमितता के लिए नोडल एजेंसी जिम्मेदार होगी।
* **व्यय विवरण:** स्वीकृत व्यय को अनुदान संख्या 007, लेखा शीर्षक 6885011900600 औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना, 2003, मानक मद 30 निवेश/ऋण के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
**प्रभाव विश्लेषण:**
**हितधारक:** संयुक्त आयुक्त, उद्योग, लखनऊ मण्डल
* **प्रभाव:** इकाई की आवश्यकता के आधार पर धन के उपयोग का आंकलन करने, ऋण के संबंध में वित्तीय निगम के प्रदर्शन की निगरानी करने और धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी।
* **आवश्यक कार्रवाई:** इकाई की धन की आवश्यकता का आंकलन, उचित पर्यवेक्षण सुनिश्चित करना और यह सत्यापित करना कि धन का सदुपयोग हुआ है।
**हितधारक:** प्रबंध निदेशक, पिकअप
* **प्रभाव:** पात्र इकाइयों को ऋण वितरित करने, उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त करने, पात्रता को सत्यापित करने और औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी। रिकवरी प्रक्रिया का संचालन और डिफॉल्ट की स्थिति में उचित कार्रवाई करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** इकाइयों को धन वितरित करें, उचित दस्तावेज़ीकरण और सत्यापन सुनिश्चित करें और पुनर्भुगतान के लिए प्रभावी उपाय लागू करें।
**हितधारक:** अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उ0प्र0 शासन।
* **प्रभाव:** औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए धन का उपयोग हो रहा है यह सुनिश्चित करके कार्यक्रम की निगरानी में शामिल।
* **आवश्यक कार्रवाई:** कार्यक्रम की प्रगति और प्रभाव की समीक्षा करें।
**हितधारक:** लेखाकार सामान्य (लेखा और हकदारी) प्रथम/द्वितीय, उ०प्र०, प्रयागराज।
* **प्रभाव:** धन के उचित लेखांकन और रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करके वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड रखना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** सुनिश्चित करें कि लेनदेन सटीक रूप से दर्ज किए गए हैं और वित्तीय विनियमों के अनुपालन की निगरानी करें।
Key Entities Referenced
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना-2003: एक योजना जिसके तहत पात्र इकाइयों को ब्याजमुक्त ऋण स्वीकृत किया जाता है।
औद्योगिक विकास अनुभाग-6: उत्तर प्रदेश सरकार का विभाग जो औद्योगिक विकास से संबंधित है और इस दस्तावेज़ का विषय है।
पिकप (PICUP): एक संस्था जिस पर पात्र इकाइयों को वितरित ऋण की वसूली की ज़िम्मेदारी है।
लखनऊ मण्डल, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक मंडल, जहाँ स्वीकृत धनराशि के मूल्यांकन और उपयोग का दायित्व संयुक्त आयुक्त, उद्योग के पास है।
उत्तर प्रदेश: वह राज्य जिस पर यह नीति लागू होती है।