Date: 2026-01-19Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद-अयोध्या में नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र के भवन निर्माण कार्य हेतु तृतीय किश्त की वित्तीय स्वीकृति के संबंध में।
ज़रूर, यहाँ अनुरोधित संरचना का उपयोग करके नीति पाठ का सारांश दिया गया है:
**कार्यकारी सारांश**
यह दस्तावेज़ वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र के भवन निर्माण के लिए तीसरी किश्त की वित्तीय स्वीकृति के संबंध में है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कुल 200.00 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। दस्तावेज़ में धन के उपयोग से संबंधित शर्तें और दिशानिर्देशों को रेखांकित किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह कुशलतापूर्वक और इच्छित उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाए।
**मुख्य बातें**
* **वित्तीय स्वीकृति:**
* नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र के भवन निर्माण कार्य हेतु तीसरी किश्त के रूप में 200.00 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
* **व्यय शर्तें और दायित्व:**
* निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश और कार्यान्वयन एजेंसी के पास धन के आहरण और व्यय की जिम्मेदारी है।
* व्यय वित्तीय नियमावली और समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों के अनुरूप होना चाहिए।
* आवश्यक वैधानिक अनापत्तियाँ और पर्यावरणीय मंजूरी निर्माण से पहले प्राप्त की जानी चाहिए।
* **परियोजना और गुणवत्ता नियंत्रण:**
* निर्माण की गुणवत्ता और विशिष्टियों का उत्तरदायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश और कार्यदायी संस्था का होगा।
* प्रस्तावित लागत में परिवर्तन के लिए सक्षम स्तर से पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता है।
* **अनुपालन और निगरानी:**
* परियोजना को टाइम ओवर रन या कास्ट ओवर रन नहीं करना चाहिए, और शासन द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।
* लेबर सेस का भुगतान श्रम विभाग को किया जाना चाहिए, और कार्यदायी संस्था द्वारा केवल स्वीकृत सीमा तक ही सेंटेज चार्ज लिया जाएगा।
* स्वीकृत धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित कार्य/मद के लिए ही किया जाना चाहिए।
**प्रभाव विश्लेषण**
**हितधारक:** निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश।
* **प्रभाव:** निधि आहरण और व्यय के लिए उत्तरदायी, नियमानुसार सभी आवश्यक वैधानिक आपत्तियाँ प्राप्त करना तथा गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** वित्तीय प्रावधानों का अनुपालन, परियोजना की समय सीमा पर पूर्णता सुनिश्चित करना तथा पारदर्शिता के साथ निधि का उपयोग करना।
**हितधारक:** कार्यान्वयन एजेंसी (उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लि0)।
* **प्रभाव:** परियोजना के निर्माण तथा धन के उपयोग के लिए उत्तरदायी, राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** नियमानुसार आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना, परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा बजट सीमा के भीतर बने रहना।
**हितधारक:** दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, अयोध्या मण्डल।
* **प्रभाव:** जिले में परियोजना की निगरानी।
* **आवश्यक कार्रवाई:** सुनिश्चित करें कि निर्माण समय पर हो और निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन किया जाए।
Key Entities Referenced
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश का विभाग जो विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए जिम्मेदार है, इस नीति का एक मुख्य कार्यान्वयनकर्ता।
जनपद-अयोध्या: उत्तर प्रदेश का वह जिला जहां एक नया मानसिक रूप से विकलांग आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र के भवन का निर्माण किया जाना है; स्थान नीति के दायरे में केंद्रीय है।
नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र: वह आश्रय गृह जिसका भवन निर्माणाधीन है और जिसके लिए यह वित्तीय स्वीकृति है।
उत्तर प्रदेश शासन: उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार, जो इस नीति के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर रही है।
वित्तीय हस्तपुस्तिका: वित्तीय नियमों और विनियमों का दस्तावेज़ जिसका पालन प्रस्तावित व्यय करते समय किया जाना है।
aeal-5/2026/I/4208 00/2026/65-2002(002)//2024
राकेश कुमार यादव,
उप सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
निदेशक,
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग।
उत्तर प्रदेश लखनऊ।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण अनुभाग-2 लखनऊ: दिनांक 49 जनवरी, 2026
विषय:- वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद-अयोध्या में नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र के
भवन निर्माण कार्य हेतु तृतीय किश्त की वित्तीय स्वीकृति के संबंध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक अपने पत्र संख्या-3862/दि0ज0स0वि0/निर्माण/मा0मं0आ0गृ0-अयोध्या/2025-
26, दिनांक 30 दिसम्बर, 2025 का कृपया संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके द्वारा जनपद-अयोध्या में
नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्र के भवन निर्माण कार्य हेतु अवशेष धनराशि
रू0 200.00 लाख (रू0 दो करोड़ मात्र) Hadad किये जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही कराये जाने की
अपेक्षा की गयी है।
2. अवगत कराना है कि नवीन मानसिक Aled आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्र के भवन निर्माण कार्य हेतु
प्रायोजना रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग द्वारा मूल्यांकित लागत BO 974.45 लाख (रूपये नौ करोड़ Alsat
लाख पैंतालीस हजार मात्र) की शासनादेश संख्या-57/2024॥/823508/2024/65-2002(002)॥/2024
दिनांक 3.2.2024 द्वारा प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति तथा इस कार्य हेतु प्रथम किश्त के रूप में
रू0 200.00 लाख (रूपये दो करोड़ मात्र) एवं शासनादेश AEAT-63/2025/|/969 86/2025/65-2002
(002)/॥/2024 दिनांक 24 मई, 2025 द्वारा पुनरीक्षित लागत रू0 973.77 लाख (रू0 नौ करोड तिह॒त्तर
लाख सतहत्तर हजार मात्र) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति तथा उक्त कार्य हेतु द्वितीय किश्त के रूप में
रू0 300.00 लाख (रूपये तीन करोड़ मात्र) अर्थात कुल रू0 500.00 लाख की धनराशि निर्गत की गयी।
3. इस संबंध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि जनपद-अयोध्या में नवीन मानसिक मंदित आश्रय गृह
सह प्रशिक्षण केन्द्र के भवन निर्माण कार्य हेतु तृतीय किश्त के रूप में रू0 200.00 लाख (रू0 दो करोड़ मात्र)
की वित्तीय स्वीकृत को व्यय किये जाने हेतु आपके निवर्तन पर रखे जाने की श्री राज्यपाल महोदय सहर्ष
स्वीकृति निम्नलिखित शर्तों/प्रतिबन्धों के अधीन प्रदान करते हैं:-
() प्रश्नगत कार्य हेतु धनराशि राज्य बजट से स्वीकृत की जा रही Sl धनराशि का आहरण एवं व्यय
आवश्यकतानुसार व नियमानुसार किये जाने का पूर्ण दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग,
उत्तर प्रदेश एवं कार्यदायी संस्था का होगा। स्वीकृत धनराशि के आहरण एवं व्यय वित्तीय हस्तपुस्तिका के
सुसंगत प्राविधानों तथा समय-समय पर निर्गत शासनादेशों/आदेशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जायेगा।
योजना हेतु स्वीकृत की जा रही धनराशि को पी0एल0ए0 इत्यादि में नहीं रखा जायेगा।
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(ii) स्वीकृत धनराशि का आहरण/व्यय एवं कार्यवाहियों में वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग- के कार्यालय ज्ञाप
संख्या-6/2025/बी-4-352/दस-2025-234/2025 दिनांक 27.03.2025 एवं वित्त (लेखा) अनुभाग-2
द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या-04/2023/ए-2-60/दस-2023-47(4)/75 दिनांक 47 मई, 2023 में दिये गये
दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किये जाने का पूर्ण उत्तरदायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण
विभाग/कार्यदायी संस्था का होगा।
(iii) नियमानुसार एवं आवश्यकतानुसार समस्त आवश्यक वैधानिक अनापत्तियाँ एवं पर्यावरणीय क्लीयरेन्स
सक्षम स्तर से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य कराये जाने का दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग
एवं कार्यदायी संस्था का होगा।
(५) प्रश्नगत निर्माण कार्य हेतु निर्विवादित भूमि की उपलब्धता एवं अन्य विभागों से क्लीयरेन्स प्राप्त किये
जाने का दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग एवं कार्यदायी संस्था का होगा।
(५) प्रायोजनान्तर्गत प्रस्तावित कार्यों की मात्राओं एवं विशिष्टियों को यथावत मानते Sa लागत का परीक्षण
किया गया है। मात्राओं को निर्माण के समय सुनिश्चित किये जाने का पूर्ण उत्तरदायित्व निदेशक, दिव्यांगजन
सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश एवं कार्यदायी संस्था का होगा।
(vi) कार्य की गुणवत्ता, मानक एवं विशिष्टियों का पूर्ण उत्तरदायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण
विभाग, उत्तर प्रदेश एवं कार्यदायी संस्था का होगा। यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा कि गुणवत्ता
उच्चु कोटि की हो तथा समय-समय पर सम्पादित कार्यों की मॉनिटरिंग भी की जायें तथा इस संबंध में प्रमाण-
पत्र शासन को उपलब्ध कराया जाये।
(vii) प्रायोजना का सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के उपरान्त ही निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया
जायेगा।
(शा) प्रस्ताव का परीक्षण लागत आगणन में प्रस्तावित विशिष्टियों एवं कार्य प्रावधानों को यथावत् मानते St
किया गया है, जिनमें कोई उल्लेखनीय परिवर्तन जैसे-नये कार्य को बढ़ावा, कार्यों के आकार में वृद्धि एवं अन्य
उच्च विशिष्टियाँ इस्तेमाल करना इत्यादि, सक्षम स्तरका पूर्व अनुमोदन प्राप्त किये बिना नहीं किया जायेगा।
(90 प्रायोजनान्तर्गत प्रस्तावित कार्यों की द्विरावृति (ड्प्लीकेसी) को रोकने की दृष्टि से प्रयोजना की स्वीकृति
से पूर्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग/कार्यदायी संस्था द्वारा यह सुनिश्चित किया जायेगा कि यह
कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना॥कार्यक्रम के अन्तर्गत न तो स्वीकृत है और न ही वर्तमान में किसी अन्य
योजना/ कार्यक्रम में आच्छादित किया जाना प्रस्तावित Sl
(X) प्रायोजना की लागत टाइम ओवर रन/कास्ट ओवर रन न हो। अत: इस संबंध में शासन द्वारा निर्गत दिशा-
निर्देश एवं बजट मैनुअल के प्रस्तर-242 में दिये गये निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किये जाने का
समस्त दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश/कार्यदायी संस्था का होगा।
(xi) आगणन में वर्णित लेबर सेस की कुल धनराशि इस शर्त के अधीन होगी कि श्रम विभाग को उक्त धनराशि
का भुगतान किया जायेगा एवं कार्यदायी संस्था द्वारा आगणन में अनुमोदित सीमा तक ही सेंटेज चार्ज लिया
जायेगा।
(xii) जिस कार्य/मद में वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जा रही है, उसका उपयोग नियमानुसार उसी कार्य/मद हेतु
किया जायेगा और इसका समस्त दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश/कार्यदायी
संस्था का होगा।
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(xiii) TTA स्वीकृति मानक के संबंध में निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा
उपलब्ध करायी गयी सूचना के आधार पर दी जा रही है, यदि मानक के संबंध में कोई सूचना गलत पायी
जाती है, तो उसका पूर्ण दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश/कार्यदायी संस्था का
होगा।
(xiv) यह सुनिश्चित किये जाने का पूर्ण उत्तरदायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश/
कार्यदायी संस्था को होगा कि प्रश्नगत कार्य किसी अन्य कार्ययोजना में सम्मिलित नहीं है तथा इस हेतु पूर्व में
किसी अन्य योजना/स्रोत से धनराशि स्वीकृत नहीं की गयी है।
(XV) प्रश्नगत धनराशि के आहरण एवं व्यय के दौरान योजना से संबंधित राज्य सरकार की गाइडलाइन्स का
अनुपालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा।
(xvi) योजनान्तर्गत बाटआउटस आइटम्स की श्रेणी से आच्छादित कार्यों हेतु कार्यदायी संस्था को कोई भी
सेन्टेज चार्ज दे नहीं होगा।
(xvii) स्वीकृत धनराशि का व्यय वित्तीय हस्तपुस्तिका के सुसंगत प्रावधानों, समय-समय पर शासन द्वारा
निर्गत शासनादेशों के अनुरूप किये जाने का पूर्ण दायित्व निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर
प्रदेश/कार्यदायी संस्था का होगा।
(xviii) वित्त विभाग के समय-समय पर निर्गत सुसंगत शासनादेशों एवं इस शासनादेशों में अंकित शर्तों का
अनुपालन निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश एवं निदेशालय में तैनात वित्त नियंत्रक/
लेखाधिकारी/वित्तीय सलाहकार द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा।
(१490 कार्यदायी संस्था द्वारा स्वीकृत की जा रही धनराशि पर जो भी ब्याज अर्जित किया जायेगा वह
नियमानुसार राजकोष में जमा कराया जाना सुनिश्चित किया जायेगा।
(xx) शासनादेश संख्या-63/2025/॥/969486/2025/65-2002(002)/4/2024 दिनांक 24 मई, 2025 की
शेष शर्तें यथावत रहेंगी।
4. उपर्युक्त निर्माण कार्य पर होने वाला व्यय चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्ययक के अनुदान
संख्या-79 के लेखाशीर्ष-4235-सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण पर पूँजीगत परिव्यय-02-समाज कल्याण-
404-विकलांग व्यक्तियों का कल्याण-09-राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्रों का भवन
निर्माण-24-वृहत निर्माण कार्य मद के नामे डाला जायेगा।
5. यह आदेश वित्त (आय-व्ययक) ACATT-7 के कार्यालय ATT संख्या-6/2025/बी-4-352/दस-2025-
234/2025 दिनांक 27.03.2025 में fated प्रावधानों एवं प्रदत्त अधिकारों के अन्तर्गत जारी किये जा रहे
हैं।
भवदीय,
राकेश कुमार यादव
उप सचिव।
संख्या/दिनांक तदैव।
प्रतिलिपि-निम्नलिखित को कृपया सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
4. महालेखाकार-लेखा एवं हकदारी प्रथम/द्वितीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज |
2. मुख्य कोषाधिकारी, जवाहर भवन, लखनऊ |
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |3. जिलाधिकारी, अयोध्या।
4. उपनिदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, अयोध्या मण्डल, अयोध्या।
5. जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, अयोध्या।
6. प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लि0, लखनऊ/अधिशाषी अभियमन्ता, उत्तर प्रदेश
राज्य निर्माण सहकारी संघ लि0, निर्माण प्रखण्ड, अयोध्या।
7. वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-4/वित्त (आय-व्ययक) ATATT-4 AST योजना आयोग-4।
8. गार्ड फाइल ।
आज्ञा से,
राकेश कुमार यादव
उप सचिव।
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |