**कार्यकारी सारांश**
यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली, 2003 में संशोधन को संदर्भित करता है। 01 अक्टूबर 2014 को जारी, औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 मौजूदा नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन करता है, विशेष रूप से परिसंपत्तियों पर शुल्क और पात्र इकाइयों द्वारा सुरक्षा की कमी को दूर करने के तरीके के संबंध में। यह संशोधन पूरे उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
**मुख्य बातें**
*नाम और दायरा*
* संशोधन को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 के रूप में जाना जाएगा।
* यह पूरे उत्तर प्रदेश में लागू है और तुरंत प्रभावी हो जाता है।
*नियम 5(13) में संशोधन*
* पात्र इकाई अपनी संपत्तियों पर पिकप/यूपीएफसी के पक्ष में प्रथम या द्वितीय शुल्क लगाएगी, जो ऋण की राशि के लिए पर्याप्त सुरक्षा हो। पिकप/यूपीएफसी उचित कारणों को रिकॉर्ड करते हुए द्वितीय चार्ज के अतिरिक्त पात्र इकाई के भागीदारों, निदेशकों से अतिरिक्त जमानत या व्यक्तिगत बांड मांग सकते हैं।
* पात्र इकाई द्वारा सुरक्षा में कमी को कोलेटरल सिक्योरिटी के रूप में भूमि/भवन आदि प्रदान करके या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/अनुसूचित बैंक से ब्याज मुक्त ऋण के बराबर बैंक गारंटी (पूरी ऋण भुगतान अवधि के लिए) प्रदान करके पूरा किया जा सकता है।
**प्रभाव विश्लेषण**
**पात्र इकाइयाँ**
* **प्रभाव:** सुरक्षा में कमी को पूरा करने के लिए उपलब्ध विकल्पों में बदलाव, परिसंपत्तियों पर आरोपों से संबंधित नियम और विनियमों का अनुपालन।
* **आवश्यक कार्रवाई:** संशोधित नियमों को समझना और उसके अनुसार ऋण सुरक्षा रणनीति को समायोजित करना।
**पिकप/यूपीएफसी**
* **प्रभाव:** द्वितीय शुल्क स्वीकृति और अतिरिक्त जमानत या व्यक्तिगत बांड के अनुरोध से संबंधित निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को अद्यतन करने की आवश्यकता है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** संशोधित नियमों के अनुसार अपनी प्रक्रियाओं को अनुकूलित करना।
**सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/अनुसूचित बैंक**
* **प्रभाव:** सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/अनुसूचित बैंक जो आरबीआई द्वारा एजेंसी बैंक के रूप में मान्यता प्राप्त हैं, से ब्याज मुक्त ऋण के बराबर बैंक गारंटी प्रदान करने की क्षमता।
* **आवश्यक कार्रवाई:** पात्रता इकाई के लिए गारंटी जारी करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं और जोखिम मूल्यांकन को समझना।
**उद्योग विभाग**
* **प्रभाव:** नए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना और संशोधन के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करना।
* **आवश्यक कार्रवाई:** संशोधित नियमों की व्याख्या और क्रियान्वयन करना और इच्छुक हितधारकों के लिए जानकारी उपलब्ध कराना।
Key Entities Referenced
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014: औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 जो औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली, 2003 में संशोधन करता है।
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली, 2003: वह नियमावली जिसमें औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन देने के प्रावधान हैं और जिसे औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 द्वारा संशोधित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश: वह राज्य जहाँ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 लागू है।
पिकप/यू.पी.एफ.सी.: एक वित्तीय संस्था जो औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 के अनुसार ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में परिसंपत्तियों पर प्रभार रखती है।
उत्तर प्रदेश शासन
औद्योगिक विकास अनुभाग-6
WEAT-540 /77-6-4-4 (eg) /2007
लखनऊ : दिनांक 09 अक्टूबर, 2074
“भारत के संविधान” के अनुच्छेद 62 के अधीन राज्य सरकार को प्रदत्त कार्यकारी
शक्ति का प्रयोग करके औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली, 2003 जो शासनादेश संख्या
3090/77-6-03-4(e44)/0
दिनांक 06 नवम्बर, 2003 द्वारा बनाई गई थी, यथा
संशोधित में निम्नलिखित संशोधन करने की श्री राज्यपाल महोदय wet स्वीकृति प्रदान करते
है :-
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2074
संक्षिप्त नाम विस्तार एवं प्रारम्भ I(]) यह नियमावली औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन
नियमावली (पंचम संशोधन), 2074 कही
जायेगी |
(2) यह सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में लागू होगी ।
(3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी ।
2- Faa-5(73) का संशोधन औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (चतुर्थ
संशोधन), 2077 के fraq-5(73) को निम्नवतु
संशोधित कर दिया गया है।
वर्तमान नियम... संशोधित नियम
“S(73/ UR seg अपनी | “5(3- पात्र इकाई अपनी परिसम्पत्तियों a
परिसम्पत्तियों का पिकप/८यू.पी.एफ.सी. पिकप/यू.पी.एफ.सी. के पक्ष में प्रथम अथवा fadia
के पक्ष में प्रथम अथवा द्वितीय प्रभार प्रभार उत्पन्न करेगी जो ऋण की धनराशि की सुरक्षा
उत्पनन करेगी जो ऋण की धनराशि की के लिए पर्याप्त हो। पिकप/यू.पी.एफ.सी. युक्तियुक्त
सुरक्षा के लिए पर्याप्त हो। पिकप//यू.पी. कारणों को अभिलिखित करते हुए द्वितीय चार्ज के
एफ.सी. . युक्तियुक्त कारणों को अतिरिक्त पात्र इकाई के सझ्ेदारों, निदेशकों से
अभिलिखित करते हुए दितीय चार्ज के अतिरिक्त जमानत अथवा पर्सनल बाण्ड मांग सकते
'. | अतिरिक्त पात्र इकाई के साझेदारों,
निदेशकों से अतिरिक्त जमानत अथवा
| पर्सनल बाण्ड मांग सकते 2)”
' उक्त के अतिरिक्त पात्र इकाई द्वारा उक्त के अतिरिक्त पात्र इकाई द्वारा प्रतिभूति की
प्रतिभूति की कमी को निम्नवतू पूर्ण कमी को Pag पूर्ण किया जा सकता है:-
किया जा सकता है:- (अ) इकाई द्वारा प्रतिभूति की कमी को कोलेट्रल
(अ) इकाई err प्रतिभूति की कमी को सिक्योरिटी के रूप में भूमि/भवन आदि देकर वांछित=
कोलेट्रल _ सिक्योरिटी के रूप... में | प्रतिभ्ूति ऋण अनुपात पूर्ण कर लिया जाबे।
भूमि/भवन आदि देकर वांछित प्रतिभूति तथा
ऋण अनुपात पूर्ण कर लिया जाये। (ब) इकाई द्वारा पब्लिक सेक्टर बैंक /शेड्यूल्ड बैंक जो
तथा आर.बी.आई. द्वारा मान्य wat बैंक हो, से
(ब) इकाई द्वारा पब्लिक सेक्टर बैंक से | ब्याजमुक्त ऋण के समतुल्य बैंक गारण्टी (सम्पूर्ण ऋण
ब्याजमुक्त ऋण के समतुल्य बैंक गारण्टी | अदायगी की अवधि के लिए)
(सम्पूर्ण ऋण अदायगी की अवधि के
लिए)
बट (fp?
रंजन)
मुख्य सचिव सह अवस्थापना एवं औद्योगिक
विकास आयुक्त,
SOHO शासन |
WEM-540()/77-6-4-4(2a)/200,
तदुदिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :-
आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर ।
प्रबन्ध निदेशक, उ0प्र0 वित्तीय निगम, कानपुर |
प्रबन्ध निदेशक, पिकप, पिकप भवन, गोमती नगर, लखनऊ |
विशेष सचिव, WT अनुभाग-। को उनके अशासकीय yodo-4/2/77 /204-at0ua0(7)
दिनांक 30-09-2074 के संदर्भ में सूचनार्थ ।
अधिशासी निदेशक, उद्योग sy, 2 सी माल wey, लखनऊ।
आयुक्त, व्यापार कर गोमती नगर, लखनऊ।
वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-6
वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-4
कर निबन्धन अनुभाग-2
गार्ड फाईल |
आज्ञा से,
विशेष सचिव |