ज़रूर, यहाँ दी गई संरचना का उपयोग करके नीति पाठ का सारांश दिया गया है:
**कार्यकारी सारांश**
यह दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों के अधिकारियों/कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के भुगतान के सम्बन्ध में एक आदेश है। दिनांक 01 जनवरी, 2016 से प्रभावी, यह विभिन्न प्रकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की संशोधित दरों को निर्धारित करता है, जो पहले से ही राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाली दर पर महंगाई भत्ता प्राप्त कर रहे हैं और वेतन बोर्ड के द्विपक्षीय समझौतों के अधीन नहीं आते हैं। यह आदेश बताता है कि बढ़ी हुई दर से महंगाई भत्ता केवल उन सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को दिया जाएगा जिनकी अपनी आंतरिक क्षमता ऐसी हो कि वे अतिरिक्त व्यय भार वहन करने में सक्षम हों।
**मुख्य बातें**
* **महंगाई भत्ते की संशोधित दरें:**
* 01 जनवरी, 2016 से पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स पाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए: 01 जुलाई, 2025 से मूल वेतन का 58 प्रतिशत।
* 01 जनवरी, 2006 से पुनरीक्षित वेतनमान पाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए: 01 जुलाई, 2025 से मूल वेतन का 257 प्रतिशत।
* 01 जनवरी, 1996 से पुनरीक्षित वेतनमान पाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए: 01 जुलाई, 2025 से वेतन तथा महंगाई वेतन का 474 प्रतिशत।
* जिन अधिकारियों/कर्मचारियों का महंगाई वेतन परिवर्तित नहीं किया गया है, उनके लिए: 01 जुलाई, 2025 से मूल वेतन का 524 प्रतिशत।
* **वित्तीय क्षमता का आकलन:** प्रत्येक सार्वजनिक उपक्रम/निगम को अपनी वित्तीय क्षमता का आंकलन करना होगा और भुगतान क्षमता का निर्धारण करने के लिए एक अधिकृत समिति को एक प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा।
* **शर्तें:** बढ़ी हुई दर से महंगाई भत्ता केवल उन्हीं सार्वजनिक उद्यमों के कार्मिकों को अनुमन्य होगा जिनकी अपनी आन्तरिक क्षमता ऐसी हो कि वे अतिरिक्त व्यय भार वहन करने में सक्षम हों। जिन सार्वजनिक उद्यमों को बंद करने का औपचारिक निर्णय लिया जा चुका है, उन्हें बढ़ी हुई दर से महंगाई भत्ता अनुमन्य नहीं होगा। सम्बन्धित निगम/उपक्रम का सांविधिक देय ई0पी0एफ0, पेंशन अंशदान तथा आयकर लम्बित न हो। प्रदेश सरकार द्वारा कोई भी वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जायेगी।
* **मूल वेतन की परिभाषा:** 01-01-2006 से पुनरीक्षित वेतनमान पाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए मूल वेतन का तात्पर्य 01-01-2006 से लागू पुनरीक्षित वेतन संरचना में कर्मचारियों को अनुमन्य वेतन बैण्ड में वेतन तथा अनुमन्य ग्रेड वेतन के योग से होगा।
**प्रभाव विश्लेषण**
**सार्वजनिक उपक्रम/निगम के अधिकारी/कर्मचारी**
* **प्रभाव:** महंगाई भत्ते की संशोधित दरों का सीधा लाभ। वित्तीय स्थिति में सुधार यदि उनके निगम/उपक्रम वित्तीय रूप से सक्षम हैं।
* **आवश्यक कार्रवाई:** अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करने और नई दरों के लिए आवेदन करने के लिए अपने निगम/उपक्रम के साथ समन्वय करें।
**सार्वजनिक उपक्रम/निगम प्रबंधन**
* **प्रभाव:** कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान करने के लिए वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन। वित्तीय क्षमता का आकलन करने और आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने की जिम्मेदारी।
* **आवश्यक कार्रवाई:** अपनी वित्तीय क्षमता का आकलन करें, संबंधित समिति को प्रस्ताव प्रस्तुत करें, और संशोधित दरों के अनुसार महंगाई भत्ते का भुगतान करें।
**उत्तर प्रदेश सरकार (सार्वजनिक उद्यम विभाग)**
* **प्रभाव:** सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा महंगाई भत्ते का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना। वित्तीय व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी।
* **आवश्यक कार्रवाई:** सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय क्षमता का आकलन करने और अनुमोदन प्रदान करने के लिए एक अधिकृत समिति का गठन करें।
Key Entities Referenced
उत्तर प्रदेश शासन: उत्तर प्रदेश की सरकार
सार्वजनिक उद्यम: सार्वजनिक उपक्रम/निगम
शासनादेश संख्या-1090/44-1-2009-2 उ0वे0रि0/98, दिनांक 11 सितम्बर, 2009: महंगाई भत्ते की शर्तों/प्रतिबन्धों को निर्धारित करने वाला संदर्भ शासनादेश
उ0प्र0 सार्वजनिक निगमों पर नियन्त्रण अधिनियम, 1975 (उ0प्र0 अधिनियम संख्या 41, 1975): सार्वजनिक निगमों को विनियमित करने वाला कानूनी ढाँचा
समिति: प्रमुख सचिव/सचिव सार्वजनिक उद्यम विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति जो सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों की वित्तीय क्षमता का आंकलन करती है
संख्या-(/2026/ 58 /44-4-2026-02 उ0वे0रि0/98 टी०सी ०
प्रेषक,
अनिल कुमार सागर,
प्रमुख सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
समस्त सार्वजनिक उपक्रम/निगम के प्रशासनिक
विभागों के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव।
सार्वजनिक उद्यम अनुभाग-4 लखनऊ: दिनांक: 28 जनवरी, 2026
विषय- सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों के अधिकारियों/कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक शासनादेश AEAT-2/2025/647/44--2025-02-30rORO/98st0H0, दिनांक 07 जुलाई,
2025 के अनुक्रम में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों से सम्बन्धित अधिनियमों/विनियमों,
कम्पनीज एक्ट, (956 अथवा सोसाइटीज एक्ट, 860 के अन्तर्गत पंजीकृत सार्वजनिक उपक्रमों के आर्टीकिल्स ऑफ
एसोसिएशन से सम्बन्धित आर्टीकिल्स तथा उ0प्र0 सार्वजनिक निगमों पर नियन्त्रण अधिनियम, 4975 (उ0प्र0
अधिनियम संख्या 4, 975) set प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए श्री राज्यपाल उक्त संस्थाओं के पूर्णकालिक
अधिकारियों/कर्मचारियों को, जो पूर्व से ही राज्य सरकार के कार्मिकों को मिलने वाली दर पर महंगाई भत्ता/अतिरिक्त
महंगाई भत्ता पाते है तथा वेज बोर्ड द्विपक्षीय समझौते के अन्तर्गत नहीं आते है, को निम्नानुसार संशोधित दर पर महंगाई
भत्ते के भुगतान की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है:-
(क) 04 जनवरी, 206 से पुनरीक्षित बेतन मैट्रिक्स पाने दिनांक 0 जुलाई, 2025 से मूल वेतन का 58 प्रतिशत।
वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए।
(ख) 04 जनवरी, 2006 से पुनरीक्षित वेतनमान पाने वाले
अधिकारियों/कर्मचारियों, जिनके द्वारा वेतन समिति,
उ0प्र0 (2046) के प्रथम प्रतिवेदन की संस्तुतियों पर लिए
गये निर्णयानुसार दिनांक 04 जनवरी, 20॥6 से
पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स का चयन नहीं किया गया है
अथवा जिनके वेतनमान O4 जनवरी, 206 से पुनरीक्षित
नहीं हये हैं, के
दिनांक 0 जुलाई, 2025 से मूल वेतन का 257 प्रतिशत।
लिए।
(ग) O4 जनवरी, 4996 से पुनरीक्षित वेतनमान पाने
वाले अधिकारियों/कर्मचारियों, जिनके द्वारा वेतन समिति,
उ0प्र0(2008) के प्रथम प्रतिवेदन की संस्तुतियों पर लिये
गये निर्णयानुसार दिनांक 04 जनवरी, 2006 से
पुनरीक्षित वेतन संरचना का चयन नहीं किया गया है
अथवा जिनके वेतनमान दिनांक 04 जनवरी, 2006 से
पुनरीक्षित नहीं हुए हैं, के
सार्वजनिक उपक्रमों।निगमों के ऐसे अधिकारी/
कर्मचारी जिनका शासनादेश दिनांक 44 सितम्बर, 2009 के
अनुसार मूल वेतन के 50 प्रतिशत के वेतन के बराबर
महंगाई भत्ते को महंगाई वेतन के रूप में परिवर्तित किये जाने
का निर्णय लिया गया है, उनके लिए दिनांक 04 जुलाई,
2025 से वेतन तथा महंगाई वेतन का 474 प्रतिशत।
ऐसे अधिकारी/कर्मचारी जिनका शासनादेश दिनांक
लिए।
44 सितम्बर, 2009 के अनुसार मूल वेतन के 50 प्रतिशत के
बराबर महंगाई वेतन के रूप में परिवर्तित नहीं किया गया है,
उनके लिये O4 जुलाई, 2025 से मूल वेतन का 524 प्रतिशत
(474+50=524)|
2- यहाँ यह भी स्पष्ट किया जाता है कि महंगाई भत्तेकी उपरोक्त किश्तें शासनादेश Heat-090/44-7-2009-2
उ0वे0रि0/98, दिनांक i4 सितम्बर, 2009 में निर्धारित निम्न शर्तों/प्रतिबन्धों के अधीन होंगी-
I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(4) बढ़ी हुई दर से महंगाई भत्ता केवल Seal सार्वजनिक उद्यमों के कार्मिकों को अनुमन्य होगा जिनकी
अपनी आन्तरिक क्षमता ऐसी हो कि वे अतिरिक्त व्यय भार वहन करने में सक्षम ST
(2) जिन सार्वजनिक उद्यमों को बन्द करने का औपचारिक निर्णय सक्षम स्तर पर लियाजा चुका है, उन्हें
बढी हुई दर से महंगाई भत्ता अनुमन्य नहीं होगा।
(3) सम्बन्धित निगम/उपक्रम का सांविधिक देय ई0पी0एफ0, पेंशन अंशदान तथा आयकर लम्बित न ST
(4) प्रदेश सरकार द्वारा कोई भी वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जायेगी।
3- उपर्युक्त प्रस्तर-2() में उल्लिखित शर्त के तहत प्रत्येक सार्वजनिक उपक्रम/निगम की वित्तीय क्षमता का आंकलन
सम्बन्धित उद्यम/निगम के बोर्ड द्वारा अनुमोदन के पश्चात सम्बन्धित निगम/उपक्रम के प्रबन्ध निदेशक द्वारा अपने
प्रशासकीय विभाग के माध्यम से प्रमुख सचिव/सचिव सार्वजनिक उद्यम विभाग की अध्यक्षता में गठित अधिकृत समिति
को प्रस्ताव सन्दर्भित किया जायेगा। उक्त समिति में प्रशासकीय विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव एवं प्रमुख सचिव/सचिव
वित्त विभाग तथा सम्बन्धित उपक्रम के प्रबन्ध निदेशक सदस्य है। उक्त समिति निर्णय लेते समय सम्बन्धित
उद्यम/निगम के चार्टेड एकाउन्टेन्ट द्वारा आडिट की हुई acta शीट के अनुसार नकद लाभ अर्जित होने की स्थिति के आधार
पर भुगतान क्षमता का आकलन करेगी। ऐसा आकलन इस दृष्टिकोण से भी किया जाना अपेक्षित होगा कि महंगाई भत्ते
की किश्त का भुगतान किस तिथि से तथा किस रूप में किया जाना है।
4- दिनांक 04-04-2006 से पुनरीक्षित वेतनमान पाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए आगणन हेतु मूल
वेतन का तात्पर्य दिनांक 07-04-2006 से लागू पुनरीक्षित वेतन संरचना में कर्मचारियों को अनुमन्य वेतन बैण्ड में वेतन
तथा अनुमन्य ग्रेड वेतन के योग से होगा, किन्तु नियत वेतनमान में अनुमन्य वेतन ही मूल वेतन माना जायेगा। उक्त के
अतिरिक्त अन्य प्रकार के वेतन जैसे विशेष वेतन, सीमान्त विशेष वेतन/भत्ता, बैयक्तिक वेतन, प्रतिनियुक्ति भत्ता/ वेतन
तथा अन्य भत्ते आदि भले ही वे मूल नियम के अन्तर्गत वेतन की परिभाषा में आते हो, को मूल वेतन के साथ सम्मिलित
नहीं किया जायेगा।
5- महंगाई भत्ते को एक तरह का विशिष्ट घटक ही माना जायेगा तथा वित्तीय नियम के अन्तर्गत वेतन नहीं माना
जायेगा।
भवदीय,
अनिल कुमार सागर
प्रमुख सचिव।
संख्या- /2026/ 58(4)/44-4-2026-02उ0वे०0रि0/98 टी ०सी०,तददिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
|- महालेखाकार (लेखा परीक्षा) द्वितीय, SOW लखनऊ।
2- राज्य के समस्त सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों के प्रबन्ध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी।
3- महानिदेशक, सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो, जवाहर भवन, लखनऊ।
4- वित्त (वेतन आयोग) अनुभाग ॥/2
5- उपनिदेशक, सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो, जवाहर भवन को विभागीय वेबसाइट हेतु।
6- सार्वजनिक उद्यम अनुभाग-2/सार्वजनिक उद्यम विभाग, आडिट प्रकोष्ठ (वाणिज्यिक)।
7- निदेशक, सूचना एवं विशेष कार्याधिकारी, सूचना मुख्यमंत्री, उ0प्र0 लखनऊ।
8- गार्ड फाइल।
आज्ञा से,
पुष्पेन्द्र सिंह
संयुक्त सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अतः इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |