Executive Summary & Key Takeaways
**कार्यकारी सारांश**
दस्तावेज़ में उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और निर्यात संवर्धन नीति, 2017 के कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला गया है। इसमें औद्योगिक क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए न्यूनतम 30% क्षेत्र आरक्षित करना और एमएसएमई क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना, पूंजी निवेश को आकर्षित करना और रोजगार सृजन करना शामिल है। यह दस्तावेज़ सभी प्रमुख सचिवों/सचिवों और उद्योग आयुक्तों और उत्तर प्रदेश के निदेशक को संबोधित है और 9 फरवरी, 2018 को जारी किया गया था।
**मुख्य बातें**
*औद्योगिक क्षेत्र का आरक्षण*
* औद्योगिक क्षेत्रों में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए कम से कम 30 प्रतिशत क्षेत्र आरक्षित किया जाएगा।
*एमएसएमई परिभाषा*
* सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषाएँ प्रदान की गई हैं।
*दृष्टि*
* उत्तर प्रदेश को पूंजी निवेश के लिए एक आकर्षक क्षेत्र के रूप में स्थापित करना, जिससे वार्षिक विकास दर 15% हो।
* नई इकाइयों में रोजगार सृजन बढ़ाना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार से रोजगार में 15% की वार्षिक वृद्धि करना।
*रणनीतियाँ*
* उद्यमों के लिए संसाधन, अवसंरचना और विपणन सहायता में सुधार करना।
* व्यवसाय करने में आसानी के लिए एक अनुकूल औद्योगिक वातावरण को बढ़ावा देना।
* क्षेत्रीय असमानताओं और सामाजिक वर्गों के बीच असमानताओं को दूर करना।
*भूमि आवंटन*
* मौजूदा उद्योग विभाग के औद्योगिक संपदा में इच्छुक उद्यमियों को खाली भूमि का आवंटन सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली बनाना।
* औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मौजूदा औद्योगिक संपदा में फर्श क्षेत्र अनुपात (एफएआर) बढ़ाना।
*बुंदेलखंड क्षेत्र*
* बुंदेलखंड में निजी क्षेत्र के औद्योगिक पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
*व्यापार में आसानी*
* उद्यमियों के लिए अनुमोदन को सुव्यवस्थित करने के लिए स्व-प्रमाणीकरण सक्षम करना।
*वित्तीय प्रोत्साहन*
* अधिकतम निवेश आकर्षित करने और अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए कुछ शर्तों के अधीन छूट, अनुदान और वित्तीय सुविधाएं प्रदान करना।
* जिला उद्योग एवं उद्यम संवर्धन केंद्रों (डीआईईपीसी) के माध्यम से बैकेबल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने और बैंकों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद करना।
*अन्य हाइलाइट*
* ग्रामसभा भूमि का उपयोग, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के पास भूमि, विद्युत मूल्य प्रतिपूर्ति, स्टाम्प शुल्क छूट, क्रेडिट गारंटी फंड, वेंचर कैपिटल फंड, कौशल विकास कार्यक्रम, गुणवत्ता सुधार को प्रोत्साहित करना।
**प्रभाव विश्लेषण**
**हितधारक:** सूक्ष्म एवं लघु उद्योग
**प्रभाव:** उद्योग नीति में उनके लिए लक्षित क्षेत्र के आरक्षण के माध्यम से लाभ, और संवर्धन नीतियों के साथ जो उनके लिए आवश्यक सहायता प्रदान करेगा
**आवश्यक कार्रवाई:** नई नीति और इसके प्रावधानों के बारे में खुद को जानकार करना और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना।
**हितधारक:** राज्य सरकार (विशेष रूप से औद्योगिक विकास विभाग)
**प्रभाव:** संवर्धन नीतियों को कार्यान्वित करके एमएसएमई क्षेत्र में विकास, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने का काम सौंपा गया
**आवश्यक कार्रवाई:** आरक्षित क्षेत्र का प्रावधान सुनिश्चित करने और विकास का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीतियों को जारी करना और नीतियों के कार्यान्वयन की निगरानी करना।
**हितधारक:** संभावित उद्यमी
**प्रभाव:** उद्योग नीति में उनके लिए लक्षित क्षेत्र के आरक्षण के माध्यम से लाभ, और संवर्धन नीतियों के साथ जो उनके लिए आवश्यक सहायता प्रदान करेगा
**आवश्यक कार्रवाई:** आवश्यक वित्तीय प्रोत्साहन का लाभ उठाने के लिए विनियामक आवश्यकताओं के बारे में खुद को जानकार करना और योजनाओं के तहत आवेदन करना।
Key Entities Referenced
उत्तर प्रदेश शासन : नीति के कार्यान्वयन में शामिल राज्य सरकार।
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2017 : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन और रोजगार प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई नीति।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) : नीति का ध्यान केंद्रित करने वाला विषय।
औद्योगिक क्षेत्र : वे स्थान जहाँ नीति क्षेत्रफ़ल आरक्षण को लक्षित करती है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 : भारत सरकार का अधिनियम है जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को परिभाषित करता है।
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अनिल कुमार,
sage सचिव,
उतर प्रदेश TTT
aaa, *
©
अपर मुख्य सचिव,
etn विकास विभाग,
उत्तर प्रदेश शासन।
सक्षम लघु एवं मध्यम उयम अनुभाग-2 लखनऊ: दिनांक लि ुरवरी, 2008
विषय:- औद्योगिक क्षेत्र मैं कम से कम 30 प्रतिशत क्षेत्रफल सूकष्म एवं. लघु उपमों के लिये आरक्षित किये
जाने के सम्बन्ध में।
wee,
ges एवं लघु sual को सरलता पूर्वक oat की स्थापना कीं सुविधा Ga करावे जाने के
इषटिगत शासनादेश सं0
22/2027/869/38-2-2027-80(030)/2027, दिनांक 52.2037 द्वार प्रथ्यापित
उतर प्रदेश सुहम, लघु एवं मध्यम sea प्र त्साहन NA, 2007 कै विन्दु सं0 5.2.6 मैं औद्योगिक क्षेर मैं कम
से कम ३ प्रतिशत क्षेत्रफल सूबम एवं लघु Se के लिये आरक्षित किये जाने का निर्णय लिया गया है।
अतः अनुरोध हैं कि उपरोक्त नीति के क्रियात्वयन हेतु औद्योगिक कषेत्री में कम से कम 30 प्रतिशत
क्षेत्रफल सूकम एवं लघु seal के लिये आरक्षित किये जाने हेतु शासनादेश Pit कराने का कह करें।
(अनिल कुमार)
प्रमुख संचिय।y._—
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम som एवं निर्यात प्रोत्साहन अनुभाग-2 लखनऊ:
कुमार,
प्रमुख सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में, ८
r समस्त प्रमुख सचिव/सचिव
उत्तर प्रदेश शासत।
2 आयुक्त एवं निदेशक, Sct
उत्तर प्रदेश कालपुर।
'विषय-उ0प्र0 सूक्ष्म! लघु एवं मध्यम Saar तथा. निर्यात. प्रोत्साहन नीति-207 का
प्र्यापन।
महोदय,
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रौजगार प्रोत्साहन नीति-
207 लायू की गयी है। इस नीति के अनुक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उदममों को गति
प्रदान करते हुये इन उद्योगों को प्रोत्सहित करने एवं इस क्षेत्र मैं अधिक से अधिक रोजगार
सूजित किये जाने तथा प्रदेश में पूंजी निवेश को आकर्षित करने हेतु उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु
एवं मध्यम उयम प्रोत्साहन नीति-20 का wearer लिम्लवत प्रस्तावित है. जिससे कि
उत्तर प्रदेश देश के अयणी विकसित राज्यों मैं सम्मिलित हो सके।
2 उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उयम प्रोत्साहन नीति-207
24 प्रस्तावना
उत्तर प्रदेश 2,40.028 वर्म किलोमीटर मैं फैला हुआ है। प्रदेश का क्षेफल देश के भौगोलिक क्षेत्र
का 7.5 प्रतिशत है तथा abr के दृहि कोण से उत्तर प्रदेश देश मैं चौथा सबसे बड़ा राज्य है। वर्ष 204
की जनगणना के अनुसार राज्य की आबादी 9.98 करोड़ है, जो भारत की आबादी का लगभग 65,
प्रतिशत है तथा भारत के सभी राज्यों मैं सबसे अधिक है। वर्ष 20I5-I6 मैं BO I45.234 करोड़ के जी
| साथ उत्तर प्रदेश भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका अंश देश की
मैं 54 प्रतिशत है।
की अर्थव्यवस्था मैं सूकम, लघु एवं मध्यम उदयमों का महत्वपूर्ण यौगदाल है। यह क्षे्र पूंजी
निवेश, उत्पादत और रोजगार की eB से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सूक्ष्म, लघु एवं सध्यम इकाइयों की
संख्या की दृष्टि से (लगमग 46 लाख; 5१%) उतर प्रदेश का देश मैं प्रथम स्थान है, तथा रोजगार प्रदान
करने में इस क्षेत्र का कृषि क्षेत्र के बाद दूसरा स्थाल है। इस क्षेत्र का प्रदेश से होे वाले निर्यात मैं भी
महत्वपूर्ण योगदान है। हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत wre उत्पाद, इंजीनियरिंग गुइस: कारपेट, रेडीमेड
गारमैंट्स तथा चर्म उत्पादों के निर्यात मैं उतर प्रदेश लिरंतर अयणी रहा है। देश के समस्त निर्यात मैं
उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 4.737 BI
ee rents eof जी किस गला हैंड अर. पद बताकर की gree नह है ।
2 इस शासलदेश की cor वैव AE balms में सत्यापित बी सा रफती हैप्रदेश में —_ स्वरोजगार,
(a) inthe cae ofthe enterprises engaged inthe manufacture or production
‘of goods pertaining 0 any industry specified in the First Schedule to the
Industries (Development and Regulation) Act, 954 (65 of 950), as—
(0) a micro enterprise, where the investment in plant and machinery does not
exceed twenty-five lakh rupees;
(@) 2 smal enterprise, where the investment in plant and machinery is more
than twenty.ve lakh rupees but does not exceed five crore rupees. or
(Gi) amedium enterprise, where the Investment in plant and machinery is more
than five crore rupees but does not exceed ten crore rupees;
(&) inthe case of the enterprises engaged in providing or rendering of services,
(i) 2 mero enterprise, whore the investment in equipment does not exceed ten
lakh rupees:
3 small enterprise, whore the investment in equipment is more than ten
lakh rupees but does not exceed two crore rupees; or
(i) medium enterprise, where the investment in equipment is more than two
crore rupees but does not exceed five crore rupees.
3 Ra
न. सुकम, लघु एवं मध्यम उयमों कीं en लवीत इकाइयों की स्थापना के लिए उतर प्रदेश
की पूंजी निवेश के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक क्षेत्र के रूप मैं स्थापना,
परिणामस्वरुप 75 प्रतिशत वार्षिक विकास दर।
archer इकाइयों में अधिकाधिक रोजगार सृजन तथा पूर्व से स्थापित इकाइयों मैं विस्तार एवं
उन्नयन Sate मैं 45 प्रतिशत वार्षिक विकास दर के साथ वृद्धि
ce उचमिता, रौजगार एवं प्रति व्यक्ति आय के मानकों पर क्षेत्रीय असमातताओं एवं समाज के
'विभिल्त वर्गों के मध्य व्याप्त असमानताओं को कम करने का प्रयास
० पूर्व से स्थापित इकाइयों के seater एवं उद्यमियों की समस्याओं के निराकरण के लिए उत्कृ्
आधुनिक तकलीकी युक्त संवेदनशील प्रशसकीय व्यवस्था।
4 रणनीति
उक्त विज़त को साकार करने के लिए प्रदेश सरकार लिम्न रणलीति के अनुरूप कार्य योजना का.
निर्माण करेगी:
लय
०. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उदम की वॉर्षिक विकास दर का लक्ष्य 5%
०. इस क्षे् मैं जार सूजन की वार्षिक विकास दर का लक्ष्य 5%
उपरोक्त लक्ष्यों को प्रा करने के लिए लिम्न महत्वपूर्ण दिशाएं चिन्हित की गई है:
ae tre eet उरी किया गया Beg प्र NE की ye नहीं है ।
37 इस शासनादेश की carting धफ 'िदान। 50... से Aer बी जा सकती है] zm वर्तमान मैं वियमान surat के विस्तार एवं aah उन्नयन के लिये संसाधनों की
उपलब्धता, अवस्थापना सुविधाओं का सुश्ढीकरण एवं लिर्मित उत्पादों के विपणल में
सहयता।
se नवीन उपमों की स्थापना के लिए भूमि की सुलभ उपलब्धता, नवील अवस्थापना सुविधाओं का
विकास तथा वियमान सुविधाओं का उन्नयन
०». सुगमता एवं सहजल्ला के साथ ब्यापार करते के लिए अनुकूल औद्यौगिक वातावरण का निर्माण।
०. पर्यावरण संतुलन की दृष्टिगत रखते हुए स्थाई तथा समावेशी विकास।
०. क्षेत्रीय असंतुलन की समस्या का समाधाल करते की दिशा मैं बुंदेलखंड, पूर्वाचल एवं मध्यांचल
में ser की स्थापना एवं उन्नयन को विशेष प्रोत्साहन।
०. समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य असंतुलन को इृडिगत रखते हुए महिलाओं, अनुसूचित
जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों की भागीदारी को बढ़ाने कै लिए विशेष
sea
०. निवेश के आकर्षण के लिए cher प्रोत्साहन।
०. सूचना एवं लघु Sera के उत्पादों एवं सेवाओं की गुणवत्ता के विकास के लिए तकनीकी उन््नयत
की योजनाएं।
ep जनपद एक उत्पाद अवधारणा का विकास, ae ee अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के विशिष्ट
उत्पादों की पहचान बनाना।
coger, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, मेक इन इंडिया एवं भारत सरकार के अन्य मिशन
मोड कार्यक्रमों एवं योजलाओं से समल्यित करते हुए प्रदेश सरकार की योजलाओं का निर्माण
उचमों के लिए अवस्थापनाओं er ERT एवं विकास
5 मूमि
6.0. चर्तमान मैं विद्यमान उद्योग विभाग के औद्योगिक आस्थानों एवं विभिन्न औद्योगिक विकास
प्राधिकरणों के ऑदयोगिक क्षेत्र में रिक्त भूमि के तथा बंद हो गई इकाईयों की भूमि के इच्छुक
उदयमियों को:आवंटन के लिए पूर्ण पारदर्शी व्यवस्था का सृजन किया जाएगा।
5.4.2. औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में
वियमान atelier आस्थानों एवं विभित्त औद्योगिक क्षेत्र में इस हेतु निर्धारित शर्तों एवं
'लियमों
5.3 unter dat मैं gem एवं लघु suet के विकास हैतु यामसभा की उपलब्ध
केअधीन PAR को बढ़ाया जाएगा।
भूमि को लघु
teva आस्थान के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, इसके लिए याम सभाओं
'की ।0 एकड़ से अधिक की भूमि चिल्हित कर Sai निदेशालय को पुनर्गहीत कर लि:शुल्क
हस्तांतरित की जाएगी। उस भूमि पर भूखंडों का विकास सूक्ष्म एवं लघु उयमों की मांग के
अनुरूप उद्योग एवं उपम प्रोत्साहन तिदेशालय द्वारा कराया जाएगा।
5.4. जिस याम की भूमि पुनर्रहीत की जाएगी, उस याम से संबंधित विकासखंड के उयमियों को
संबंधित औद्योगिक आस्थानों मैं उयमों की स्थापना के लिए प्राथमिकता पर भूखंड आवंटित
किए जाएंगे।
se een seit पी किया गय Bet पर see की आवश्यक नही हैं. ना
इस शालनादेस की परमाणिकला x राइट रा दम द0:2:20:0 से ea की जा सकती है.4 5. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वै, पूर्वायल एक्सप्रेस-वे aN बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे तथा प्रदेश में
विकसित किए जा रहै अन्य कारीडोर्स मैं 5 किलौमीटर की दूरी के अंतर्गत ग्राम सा की 5 एकड़
से अधिक भूमि एक जगह उपलब्ध होने पर Scher निदेशालय को मिनी औद्योगिक आस्थान
विकसित करने के लिए यह भूमि लि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी तथा इस क्षेत्र मं
6a
5.
sa
6A
50% भूखण्ड
Aen तथा ay suet के लिए आरक्षित हंगे।
6 सूक्ष्म एवं लघु seat को सरंततापूर्वक Sunt की स्थापना की सुविधा सुलभ कराने के उद्देश्य से
प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक आस्थातों में तथा यूपीएसआइडीसी एवं अन्य औद्योगिक विकास
प्राधिकरण द्वारा विकसित किए गए औद्योगिक क्षेत्रों में कम से कम 300 क्षेतफल सूक्ष्म एवं लघु
Sait के लिए आरक्षित किया जाएगा।
7 बुंदेलखंड, पूर्वाचल तथा मध्यांचल तथा गौतम ye नगर एवं गाजियाबाद set ay छोड़कर
शेष पब्चिमी उत्तर प्रदेश मैं लिजी क्षेत्र द्वार 20 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल के औद्योगिक पार्क एवं
एस्टेट की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक लिवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन AM, 207
के प्रस्तर- 32.3, 9292, 92.9.3 एवं 3.2.3.4 के अनुरूप सुविधाएं एवं प्र त्साहन
प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक प्रथम खरीददार को प्रतिबल्धित saat को छोड़कर 700
प्रतिशत स्टाम्प शुल्क मैं छूट प्रदाल की जायेगी। साय ही इस क्षेत्रफल के मध्य आले वाली
यम समाज की भूमि, उस भूमि के स्किल दर पर निजी विकासकर्ता को उपलब्ध करायी
are
8 निजी औयोगिक पार्कों एवं एस्टेट की स्थापना के लिये विकासकर्ता को कृषि भूमि के
क्रय के लिये अधिकतम सीमा जौत आरौपण अधिनियम (Ceiling of Land Holding
Act) के अन्तर्गत निर्धारित सीमा से अधिक भूमि के क्रय के लिये लियमों को अनुकूल
बनाया जायेगा। साथ ही, राजस्व संहिता की धारा-80 के अनुसार या समतुल्य
प्राविधान अकृषक भूमि घोषित कराने की आवश्यकता नहीं होगी, अपितु उयौग विभाग
को इस आशय के आवेदन पर स्वीकृति प्रदान की जायेगी। कृषि भूमि को औद्योगिक
पार्क में प्रयोजन की उक्त स्वीकृति के लिये कोई भू-उपयोग परिवर्तल शुल्क नहीं लिया.
rim
9 प्रदेश मैं वियमान औद्योगिक आस्थातों में अवस्थापना सुविधाओं के yedtawer के लिए उस
'आस्थान के safe के सहयोग से एसपीवी का गठन किया जाएगा तथा इस एसपीवी मैं
उयमियों की सहमागिता के समानुपात मैं प्रदेश सरकार द्वारा योगदान किया जाएगा।
40 निजी क्षेत्र के अवस्थापना निवेश: उत्त प्रदेश औद्योगिक तिवेश एवं रोजगार wT नीति,
2007 के प्रस्तर 3.2 के अनुरूप सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम sont क्षेत्र में थी अवस्थापना
लिवेश के लिए लिजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के सभी संभव कारगर तरीके अपनाए जाएंगे।
व्यापार करनेमैं सुगमता अनुकूल वातावरण का सृजन एवं संवेदनशील प्रशासन
उत्तर प्रदेश औद्योगिक लिवेश एवं रौजगार प्रोत्साहन तीति, 2007 के अनुरूप प्रदेश में स्थापित
होने वाले लए सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए भी आवश्यक विभित्ल स्वीकृतियों, अलापतियों
ncn इलकटरलिकड ao किया गया te aot .स पर हस्त कर थी आवश्यकता मी है ।
3- इस emt की en Aa TEE supine की जा सकती है|.तथा सहमतियों हेतु स्वत: प्रमाणत की सुविधा sug कराई जाएगी, जिससे स्थापना के
ef अवस्था मैं विभिन्न तिरीक्षणी से लिवृत्ति मिल सके, साथ ही saat की स्थापना सुगम
हो सके।
6.2 सभी वांछित स्वीकृतियाँ, अनुमोदनों तथा अनुमतियों को उयमियों को ऑनलाइन प्रदान किये
जाने की क्रिया विधि को सुलिश्धित किया जाएगा।
6.3. sarah की समसूझा के एकल मैज की व्यवस्था के भाव के अनुरुप निराकरण के लिए जल
समस्याओं के निस्तारण के पोर्टल के अनुरूप पोर्टल विकसित किया जाएगा तथा समस्याओं के
निस्तारण के लिए अधिकारियों का serena निर्धारित किया जाएगा।
6.4. सरकार द्वारा बनाई गई लीतियाँ व चलाई जा रही योजलाओं तथा कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन
में (सुगठित। तकतीकी रूप से सक्षम तथा संवेदनशील प्रशासलिक मशीनरी का महत्वपूर्ण
योगदान है। अत: योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संगठलात्मक Bee को Ae
किया जाएगा। कार्मिकों की तकलीकी क्षमता के विकास के लिए तथा उनमें अपेक्षित
संवेदनशीलता के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
6.5... राज्य सरकार जिला उद्योग एवं Sun प्रौत्साहन केंद्रों को आधुनिकीकृत करेगी, जिनके द्वारा
परामर्श देने हेतु सक्षम हैल्पड़स्क, परियोजना निर्माण तथा ऑनलाइन एकल खिड़की अनुमोदन
आदि कार्यों का कुशलतापूर्वक संघालन किया जा सके।
7: सक्षम, लघु एवं मध्यम उयमों के लिए पूंजी एवं ऋण का प्रवाह
राज्य में अधिकतम निवेश आकर्षित करने एवं अन्य प्रदेशों के सापेक्ष प्रतिस्पर्धत्मकता को
बनाए रखते के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कुछ नियम एवं शर्तों के अधीन निम्नानुसार छूट
अनुदान एवं वितीय सुविधाएं प्रदान करेंगी:
7A जिला eter एवं उद्यम प्रोत्साहन केद्रीं मैं सूक्म एवं लघु उयमियों एवं स्वरौजगार हेतु उत्सुक
युवक एवं युवतियों के लिए विशेषज्ञ सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वैंकेविल प्रोजेक्ट
रिपोर्ट तैयार हो सके और उनका बैंकों से वित पोषण कराते में सुविधा हो सके। इस हेतु विशेषज्ञ
का एक पैनल अनुमोदित किया जाएगा, जिससे प्रत्येक जनपद के जिला Seer एवं उयम
प्रोत्साहन Set ot देखरेख में इस सुविधा का लाभ उद्यमियों को प्राप्त से सके। विशेषज्ञों को
तैयार किए गए प्रोजेक्ट रिपोर्ट के सापेक्ष उतका वित-पोषण होने की दशा मैं ऋण राशि के 2%
प्रतिशत के शुल्क अथवा वास्तविक, जो कम हो, अधिकतम रू0 00 लाख सामान्य
और FO 0.90 लाख महिला अथवा अनुसूचित जाति/ जनजाति कै उयमियों हेतु भुगतान
विभाग द्वारा वहल किया जाएगा।
7.2... प्रदेश में स्थापित होने वाली सुकष्म, लघु एवं मध्यम उयमों की hatha इकाइयों को उत्तर
प्रदेश आद्योगिक निवेश एवं रौजगार प्रौत्साहन नीति, 2007 के MA 57 के अनुरूप स्टॉप
शुल्क से फूट प्रदान की जाएगी।
7.3 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम scat मैं सभी नई औद्योगिक इकाइयों को इकाई प्रारंभ होने के दिलांक
के 5 वर्ष तक लियोक्ता EPP के शत-प्रतिशत अंश की प्रतिपूर्ति राज्य द्वारा की जाएगी।
ae mim उलेकटरलिक री जपी किया te aa पर eee की आवश्यक ली है ।
2: इस शासनादेश की पमाशिकता लेब साइट पाक पीद६6:842 22:20 मे सत्यापित की जा करती है |zoel 4. उत्तर प्रदेश औद्योगिक लिवेश एवं रोजगार प्रोत्साहल AG 2007 के प्रसतर 5.3, 54, 5.5, 56,
57, 58,59, 5008 5.2 मैं दी गई सुविधाएं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम Saat पर भी प्रभावी
en
7.5... विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाली कृषि भूमि के भू-ठपयोग औययोगिक मैं परिवर्तन
कराने मैं सुकम, लघु एवं मध्यम उयम की इकाइयां परिवर्तन शुल्क से मुक्त Te)
7.6... नए ARH एवं लघु.उद्योगों के लिए उत्पाद लिथि से 5 वर्ष हेतु रुपए एक प्रति यूलिट की दर से
aga मूल्य की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
7.7. RR एवं लघु उद्योगों के लिए सा) 2.00 करोड़ तक के कोलेटरल फ्री ऋण हैतु बैंकों दरों क्रेडिट
गाएंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइको एंड स्माल इंटरप्राइजैज हैतु लिए जाने वाले वन टाइम EU,
फीस तथा वार्षिक सेवा-शुल्क का भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा बजट प्रायिधान कराते हुए वहन
किया जाएगा। .
7.8 प्रदेश सरकार द्वारा अल्य वित्तीय संस्थानों की सहायता लेकर एक लघु, मध्यम Ser वैंचर
कैपिटल फंड का सृजल किया जाएगा, जिसके द्वारा स्टार्टअप एवं edna लघु एवं मध्यम
उधम की प्रोत्साहन दिया जाएगा।
7.9. क्रियाशील qe एवं लघु Seba at विस्तार एवं विविधीकरण हेतु प्रोत्साहित करने के लिए
कतिपय शर्तों के अधीन नई इकाइयों के समा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
70. विशेष योजनाएं
7904, विश्वकर्मा श्रम सम्मान atte क्रियात्यित की जाएगी। इस योजना के द्वारा मार्जित मती
अनुदान एवं ब्याज अनुदान की सुविधा स्थानीय दस्तकारों तथा पारंपरिक sea को
पारंपरिक sit के विकास हैतु वैक द्वारा ऋण प्राप्त करे पर उपलब्ध करायी जाएंगी।
7.40.2 प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए sche तथा सर्विस क्षेत्र में उधम स्थापित करने हेतु
प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरौजगार यौजना प्राइंम की जाएगी। इस यौजना के
अंतर्गत लाभार्थियों को ater मनी अनुदान एवं ब्याज अनुदान सुलभ कराते हुए उनकी
परियोजनाओं को आवश्यकतानुसार प्रधानमंत्री मुद्दा योजना अथवा स्टैंड अप इंडिया योजना के
साथ समल्चित किया जाएगा।
7.00.8 अनुसूचित जाति जनजाति एवं महिला उदमियों हेतु विशेष प्रावधान
(i) मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना मैं अनुसूचित जाति एवं जलजाति हेतु क्रमश: 2। एवं 2%
तथा महिलाओं हेतु 20% लक्ष्य तिर्धीरित किया जाएगा।
(मा पूर्वांचल मध्यांचल व बुंदेलखंड में क्रियात्यित होने वाली उत्तर प्रदेश लघु एवं मध्यम उयौग
ब्याज उपादान योजला के अंतर्गत 205 लाभार्थी महिलाएं हॉंगी।
(iy भारत सरकार की स्टैंड अप योजला एवं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना मैं समल्वय स्थापित
कर प्रत्येक बैंक शाखा क्षेत्र में कम से कम एक अनुसूचित जाति / जनजाति अथवा महिला
उयमी को aT लघु तथा मध्यम scar स्थापित करने में मदद की जाएगी।
8: .. क्षमता विकास एवं प्रशिक्षण
se sere उरी en By gor हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है।
ए 4 पलाशिकला वेब सा छ202: 37 इस शासन 85542... से Hew A जा कली है./. 4
प्रदेश की जनसांख्यिकीय विभाजन का लाभ उठाने की eB से यह आवश्यक हैं कि राज्य की
युवा जनशक्ति see एवं व्यापारिक दि से कुशल व प्रशिक्षित हो। इस हेतु कौशल विकास
की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं को निम्नवत क्रियांवित किया जाएगा।
सुकषम, लघु एवं मध्यम उपम विभाग के अंतर्गत सैंटर ऑफ एक्सीलैंस के रुप मैं उदमिता
82
विकास संस्थान कौ संस्थित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण संस्थान विभाग द्वारा संचालित
समस्त योजनाओं मैं
83
84
85
86
87
9
शत
प्रशिक्षण मॉइयूल तैयार करने एवं उसे क्रियाल्वित करने के लिए अधिकृत
होगा। उपमिता विकास कार्यक्रमों को चिभित्ल विभागों और संस्थानों के साथ समल्वय कर
अपनी विशेषजता का लाभ विकास के aE aa में प्रदान करते का अधिकारिक संस्थान
रहेगा।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा अल्य पिछड़े वर्ग के उयमियाँ के कौशल विकास पर विशेष
बल देते हुए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने को प्रोत्साहित किया जौयेगा।
राज्य के सभी जिलों में उपमिता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उदमिता विकास
संस्थान, लखनऊ इस उद्देश्य के लिए एक लोडल एजेंसी के रूप मैं कार्य करेंगी।
डिजाइन, विनिर्माण और विपणन में आधुलिक तकलीक पर कारीगरों और युवा aA के
लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए ws हस्तशिल्प कैंद्र स्थापित किए जाएंगे। उतर प्रदेश
इंसटीट्यूट ऑफ डिज़ाइल, लखनऊ एक नोडल एजेंसी के रुप में इस प्रयोजन के लिए कार्य
करेगा।
Seto एवं उयम प्रौत्साहल निदेशालय के अधीन विभागीय प्रशिक्षण केंद्रों की समीक्षा कर
उपयोगी प्रशिक्षण केंद्रों को क्रियाशीलर बनाया जाएगा।
प्रदेश सरकार द्वारा अन्य वित्तीय संस्थातों की सहायता लैकर एक एम.एस.एम.ई. लघु, मध्यम
उयम वैचर कैपिटल फंड का सृजन किया जाएगा, जिसके द्वार स्टार्ट अप एवं उ््यगामी लघु एवं
मध्यम उद्योग को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
गुणवत्ता तथा मानक
तकनीकी के er में निरंतर हो रहे दुत विकास एवं पर्यावरण तथा तकलीकी मानकों के
प्रति वैश्विक स्तर पर अपनाये जा रहे उच्चीकृत मानकों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी
उन्नयन एवं परीक्षण संबंधी आधारभूत अवस्थापना पर किया जाने वाला लिवेश सूकषम, लघु
एवं मध्यम उयमों के प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता की वृद्धि हेतु महत्वपूर्ण है। अतः उसोर्गों को
अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों, प्रदूषण लियंत्रण सुविधाओं एवं मालकों को प्राप्त करने के लिए
प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रदेश सरकार की वर्तमान तकनीकी उल्तयत योजना को पुनर्निर्मित करते हुए इस प्रकार
प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे महतम ढंग से उच्चीकृत तकनीक को विभिन्न a जैसे
उत्पाद गुणवत्ता सुधार, पर्यावरण सुधार, ऊर्जी-दक्षता, गुणात्मक-पैकेजिंग, परीक्षण-सुविधाएं
एवं कंप्यूटरीकृत गुणवत्ा-लियंत्रण को बढ़ावा मिले। इस हैलु ऊपमियों को उनके द्वारा इन
उद्देश्यों के लिए वित्त पोषित परियोजनाओं पर ब्याज उपादान सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ae rent ect उरी फिसा गख wwe eee की आवश्ककर नही दै ।
5 इस शमलादेत की प्रलाणिक्ता वैब साइट एज ८७2.8८ 0 से Ree की जा सकी है |इस योजना को दो श्रेणियाँ के उयोगों- ge schol एवं लघु उद्योगों के लिए N
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किया
जाएगा। .
सूक्ष्म एवं लघु उयोगों को गुणात्मक उत्पादों के विनिर्माण हेतु प्रोत्साहिंत किया जाएगा.
जिससे वे विभिन्न मानकों जैसे जीरों इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट (ZED) एवं भारतीय मातक
संस्थान के मूल्यांकन स्तर पर खरे उतर wh) इस उद्देश्य हेतु भारत सरकार की PET
संगठनों जैसे: ब्यूगुं ऑफ इंडियन स्टैंडड्स (905) तथा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QIC)
के साथ समन्वय सुंनिचित किया जाएगा।
प्रदेश के इंजीलियरिंग कॉलेजों तथा अन्य तकलीकी संस्थानों में इंक्यूवेशन केंद्रों की स्थापना
को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उद्यमियों के साथ इसका संयोजन सुनिश्चित कराया जाएगा।
राज्य के आई0आईएटी तथा अल्य इंजीनियरिंग कॉलेजों, एम.एस.एमई. टेक्नोलॉजी केंद्रों एवं
भारत सरकार के विशिष्ट संस्थातों के साथ समल्वय करके एक तंत्र को eS किया जाएगा तथा
इसके लिए एक सूचना तंत्र द्योग एवं उधम निदेशालय स्तर पर विकसित किया जाएगा।
रिसर्च एंड डेवलपमेंट गुणवत्ता gure तथा प्रौडक्ट डेवलपमेंट हेतु प्लांट मशीनरी और उपकरणों
पर लिये गाए व्यय पर उत्पादन की तिथि से 5 वर्ष के लिए 5१% वार्षिक दर से ब्याज अनुदान की
प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिससे इन उचो्गों द्वार टैस्टिंग लैब, क्वालिटी सर्टिफिकेशन लैब, टूल
रूम की स्थापना की जा सके। इसकी अधिकतम सीमा रु. 50.00 लाख तक होगी।
विपणन
प्रदेश मैं निर्मित उत्पादों a राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार मैं मॉग अनुरूप विपणन सामर्थ्य को
सुनिचित करते की आवश्यकता है। राज्य सरकार इस क्षेत्र की कमी को पूरा करने के लिए
उपयुक्त कदम उठाएगी।
to सरकार समर्थित लॉजिस्टिक्स के साथ ही कॉमर्स पोर्टल का विकास कराया जाएगा, जिसके
माध्यम से परंपरागत शिल्पकार को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार सें जौड़ा जाएगा।
30.2 वर्तमान quo बिजनेस मार्ट पोर्टल को ee किया जाएगा एवं इसका प्रचार-प्रसार किया
जाएगा।
30.3. लखलऊ मैं एक स्थाई प्रदर्शनी कैद्व का विकास किया जाएगा तथा राज्य के चयलित शहरों मैं
एक्सपो मार्ट की स्थापा की जाएगी।
0.4 उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद को इस प्रकार Bre किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय
व्यापार मैलों में सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन को आयोजित करते में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
40.5 हस्तशिल्प एवं सूबम, लघु एवं मध्यम इकाइयीं को विपणन सहायता प्रदान की जाएगी। उत्तर
प्रदेश व्यापार प्रोत्साहन प्राधिकरण को इस प्रकार Bes किया जाएगा, जिससे वह राष्ट्रीय एवं
aber स्तर पर प्रदर्शनी एवं क्रेता-विक्रेता सम्मेलल का आयोजन करते हुए हस्तशिल्पियों एवं
sera की सहभागिता को प्रोत्साहित कर सके।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उधम की वियमान इकाईयों के विस्तार एवं उल्नयन मैं
सहयोग:
2s tnt see जाए फिया me हि उत्तर eee की wero नही है
7 इस शासनादेश went बैब साइट व ा७40 220: 49 से Hee बी जा सकती है |वर्तमान नीति के विजन मैं विधयमान इकाईयों के विस्तार एवं उन्नयन के माध्यम से
रोजगार सृजन एवं प्रदेश के विकास को बढ़ावा दिये जाने को अपेक्षित महत्ता प्रदान की गयी
है। इस हेतु जिला उयोग केन्द्रों को जिला sche एवं saat प्रोत्साहन कैल्द्र के रूप मैं विकसित
किया जायेगा, st कि उद्यमियों के लिये सलाहकार एवं मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा।
M4 'वियमान इकाईयों के विस्तार के लिये भूमि की सीमित उपलब्धता को इृष्टिगत रखते
हुये निर्धारित Bem, एवं शर्तों के अनुसार FAR बढाया जाएगा। इसके उपयोग से
विद्यमान इकाईयां अपना विस्तार कर सकेंगी।
v2 sah द्वारा उयोग विभाग के आस्थालों के अल्तर्गत भूखण्ड के आवंटल के उपरान्त
किसी कारणवश Gets समयावधि में son की स्थापना नहीं करने पर भूखण्ड को
विभाग में समर्पण और जमा 'धलराशि की वापसी की लौति को तर्कसंगत बनाया
जायेगा, जिससे यह रिक्त भूमि नये उयमियों को बिना किसी विवाद के tear की.
जा सके।
3. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम sum इकाईयों के तकतीकी sera के लिये भारत सरकार के
अन्तर्गत चलायी जा रहीं क्लस्टर योजनाओं को अधिक से अधिक लाभ देने हेतु प्रदेश
में अधिकाधिक क्लस्टर विकसित किये जायेंगे तथा इकाईयों के समय लाभ के लिये
कामन फैसिलिटी सैल्टर बनाये जायेंगे. जिससे सभी इकाईयों को अधिक लागत की
उच्च तकलीक का लाभ प्राप्त है सके।
॥.4. स्थानीय तिर्दिष्ट कृषि उत्पादों का उचित मूल्य संवर्धन करने तथा पैकेजिंग आदि के
लिये woh परिषद द्वारा MN की उपलब्धता को देखते हुये एवं मण्डी समिति की
आवश्यकताओं में इसकी उपयोगिता का आकलन करते हुये मण्डी स्थलों में कामन
कैसिलिटी सेल्टर स्थापित किये जायेंगे।
5. आवश्यकतानुसार औद्योगिक areal एवं औद्योगिक at में एफ्लुऐनट ट्रीटमेंट पलाण्ट
(sMucnt Treaiment Plan), कामने एफ्लुऐनट ट्रीटमेंट TAIT (Common 00!
Teatment Plan!) तथा सामाल्य सुविधा =X (Common Facility Come) लगाने हैतु
विकासकर्ता/कार्यदायी संस्था को प्रोत्साहित किया जायेगा।
पे, 6. सम, लघु एवं मध्यम उपम इकाईयों को प्रोत्साहन देने के लिये भारत सरकार द्वारा देश
में स्थापित उत्पादों के प्रोत्साहन के अनुरूप प्रदेश मैं स्थित एवं स्थापित इकईयों से
क्रय योजता को फ्रियाल्वित किया जायेगा।
7. रूण इकाई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम Suet में कम प्रतिस्पर्धात्सक क्षमता के कारण व
प्रबंधकीय, तकनीकी तथा अन्य कारकों के फलस्वरूप उयमों रूग्णता की स्थिति
उत्पन्न सोती है। रूण इकाईयों के पुनर्वासल के संबंध में भारत सरकार की योजना
को सार्वजनिक क्षेत्र एवं लिजी क्षेत्र क्षेत्र de से समन्वय करते हुये प्रभावी दंग से
लायू किया जायेगा।
8. उचमियों की समस्याओं के समाधान के लिये वेब आधारित आल लाइल पोर्टल की
व्यवस्था एवं काल Beet की प्रणाली को क्रियात्वित किया जायेगा।
ae mete tert जाए किया गया fe अर ERE आवश्यकता नहीं है ।
2. इस re की प्रमणिक्ता वेब साइट ॥क:.अधर्ाध50.2 8:40 से सत्यापित की जा AEप्रदेश में athe नौतियों जैसे उत्तर प्रदेश खाय प्रसंस्करण Sehr नीति, जैव N
१2: अन्य
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नीति,
आईटी नौति, बायोटेक्नौलॉजी नीति आदि नीतियां प्रभावी है। एक ही मद में विभिन््ल नीतियों के
अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं मैं से एक saat को एक ही नीति के अंतर्गत सुविधा अनुमल्य
होगी।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उयम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग इस नीति के क्रियान्वयन एवं
अनुशवण के लिए नल विभाग eT
इस नीति के क्रियात्वयन के लिए संबंधित विभागों द्वारा सुसंगत शासनादेश निर्गत किए जाएंगे।
उपयुक्त उत्तर प्रदेश BEN, लघु एवं मध्यम उधम प्रोत्साहन afA-2007 मैं समय की
आवश्कताओं के अनुरूप किसी प्रकार का परिमार्जन/परिवर्दन सक्षम स्तर के अनुमोदनोपरान्त
किया जा सकेगा। >
4 कृपया उपर्युक्त नीति का प्रत्येक स्तर पर अनुपालत सुनिश्चित करने का कह करें।
wade
( अनिल कुमार )
प्रमुख afta
3482-22 /20!/ /869/I8-2-20'7-80(S050)/2007 तडिनांक
प्रतिलिपि लिम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हैतु प्रैचित।
महालेखाकर (लेखा एवं हकदारी) प्रथम/द्वितीय तथा (आडिट-प्रथम /दितौय) उतर प्रदेश
इलाहाबाद।
2 प्रमुख सचिव, श्री राज्यपाल उत्तर प्रदेश, TTT, लखलऊ।
3: .. प्रमुख सचिव, mo मुख्यमंत्री जी] उत्तर wee
4... सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपम मंत्रालय, भारत सरकार, नई RET
5: स्टाफ आफीसर, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन।
6-.. स्टाफ आफीसर, कृषि उत्पादन आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन।
7. समस्त प्रमुख सचिव/सचिव उ0प्र0 शासन को इस आशय सें प्रेषित कि. कृपया अपने
अधीनस्थ समस्त विभागाध्यक्ष/कार्यालयाध्यक्षों को शासनादेश अनुपालन ty सम्यक निर्देश
अपने स्तर से जारी करें।
8 सचिवालय के समस्त अनुभाग।
9-.. गाई फाइल!
आजा सै
(ue लाल )
उप सचिव।
se cre saci anf किया गया te a पर IN ero है ।
2: इस erent की परसणिकला a साइट fnpstsmadahapacin से सत्यापित की जा we |