ज़रूर, यहां सारांश दिया गया है:
**कार्यकारी सारांश**
यह दस्तावेज़ दिनांक 20 जनवरी, 2014 का एक कार्यालय आदेश है, जो विजय कुमार श्रीवास्तव और अन्य बनाम यूपी राज्य में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों से संबंधित है। दस्तावेज़ वेतन संरक्षण के लाभों पर केंद्रित है जो उत्तर प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम के छटनीशुदा कर्मचारियों को संभावित रूप से प्रदान किए जा सकते हैं। यह याचिकाओं पर पहले के न्यायालय के आदेशों और निर्देशों पर ध्यान देता है, वेतन संरक्षण की याचिकाओं से संबंधित विशिष्ट कार्यों और अनुपालन को रेखांकित करता है।
**मुख्य बातें**
* **वेतन संरक्षण के लिए प्रारंभिक याचिकाएँ:** याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर प्रमुख सचिव, उद्योग विभाग, यूपी सरकार, लखनऊ को अपनी शिकायतों के बारे में एक नई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई।
* **प्रतिवेदनों पर विचार:** प्रमुख सचिव को प्रतिवेदन और सहायक सामग्री की प्राप्ति के बाद चार सप्ताह की अवधि के भीतर कानून के अनुसार एक बोलने और तर्कसंगत आदेश द्वारा उन पर विचार और निपटान करना था।
* **वेतन संरक्षण लाभ:** कर्मचारियों को वेतन संरक्षण का लाभ प्रदान करने और पाँचवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार अग्रिम लाभ केसी मिश्रा और केएन चंदोला के मामले में लिए गए निर्णयों के अनुसार प्रदान करने का अनुरोध किया गया।
* **वेतन निर्धारण का आदेश:** निदेशक, मुद्रण एंव लेखन सामग्री को राज्य सरकार द्वारा योजित विशेष अपील मे पारित अंतिम निर्णय के अधीन वित्त विभाग द्वारा किये गये वेतन निर्धारण के अनुसार वेतन निर्धारण का आदेश दिया गया।
* **याचिका का निरसन:** याचीगण के प्रत्यावेदन दिनांक 5 दिसम्बर, 2013 को बलहीन, नियम विरूद्ध एवं औचित्यहीन होने के कारण एतदद्वारा निरस्त किया जाता है।
**प्रभाव विश्लेषण**
**प्रमुख सचिव, उद्योग विभाग, यूपी सरकार:**
* **प्रभाव:** उन्हें न्यायालय के पहले के आदेशों के संदर्भ में एक प्रतिवेदन पर विचार करने और निपटाने का कार्य सौंपा गया है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** याचिकाओं पर विचार करें और कानून के अनुसार एक बोलने और तर्कसंगत आदेश जारी करके उन पर कार्रवाई करें।
**निदेशक, मुद्रण एंव लेखन सामग्री:**
* **प्रभाव:** उन्हें पूर्व छटनीशुदा कर्मचारियों के वेतन निर्धारण को सुविधाजनक बनाने का कार्य सौंपा गया है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** याचिकाओं पर विचार करें और कानून के अनुसार एक बोलने और तर्कसंगत आदेश जारी करके उन पर कार्रवाई करें।
**उत्तर प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम के छटनीशुदा कर्मचारी (विशेष रूप से विजय कुमार श्रीवास्तव और अन्य):**
* **प्रभाव:** उन वेतन संरक्षण और संबंधित लाभों के लिए संभावित पात्रता पर उन पर सीधे प्रभाव पड़ता है।
* **आवश्यक कार्रवाई:** नई प्रतिवेदन प्रस्तुत करें और विभाग की कार्रवाई की प्रतीक्षा करें।
Key Entities Referenced
Department of Industries, Government of U.P. Lucknow: विभाग को याचिकाकर्ताओं के शिकायतों के संबंध में ताज़ा प्रतिनिधित्व पर विचार करने और उनका निपटान करने का निर्देश दिया गया है।
High Court: विभिन्न रिट याचिकाओं और अवमानना याचिकाओं के संबंध में कई उल्लेख हैं जो कर्मचारियों के वेतन सुरक्षा के संबंध में जारी किए गए हैं।
Director, Printing and Stationery: वेतन तय करने और अधिकारियों को अंतिम फैसले के लिए भेजने में शामिल है।
Finance Department: वेतन तय करने और वेतन संरक्षण लाभ के लिए अनुमोदन प्रदान करने में शामिल है।
U.P. State Mineral Development Corporation: यह निगम है जिसके छंटनी किए गए कर्मचारी वेतन सुरक्षा और समावेशन की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश शासन
औद्योगिक विकास अनलुभाग-2
संख्या- 2/ 874 / 77-2-204-24(Re)/ 203
लखनऊ दिनांक 20 जनवरी, 2044
कार्यालय- आदेश
Re याचिका संख्या- 7(20(Vava)/ 20:3 विजय कमार श्रीवास्तव व 6 अन्य बनाम SOU
राज्य व अन्य में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के सुसंगत अंश लिम्न्वत है-
" ...ह fter H € a ring le a rned counsel for parties, in the interest of Justice, as an
interim measure, it is provided that petitioners are permittedXSto move fresh
representation to O.P. No. 2/ Principal Secretary, Department of Industries,
Government of U.P. Lucknow within two weeks from today in respect to their
grievances which they have raised in the presentwrtpetition annexing all relevant
documents and materials in support of their casesand after receiving the same, O.P.
No 2 shall consider and dispose of by wayeef"Speaking and reasoned order in
accordance with law within a further periodjof¢our weeks threafter..."
2- Sed आदेश दिनांक 29-(4-20I3 की..प्रमार्णिन्न प्रति उपलब्ध कराते हुए याचीगण द्वारा
दिनांक 5 दिसम्बर, 203 को प्रमुख Ula (मह्नौदय को सम्बोधित अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत
किया गया। प्रत्यावेदन A याचीगण gal झा0*उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के कम में वेतन
संरक्षण का लाभ प्रदान किये जाने तथी..घौंचवे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार अग्रिम
लाभ के0 सी0 मिश्रा एवूं के0 VAN च॑न्दोला के प्रकरण में लिये गये निर्णय के अनुसार प्रदान
किये जाने का अनुरोध किया 'गु्यी Sl याचीगण के उक्त प्रत्यावेदन पर निदेशक मुद्रण एंव
लेखन सामग्री की६अखियी utd की गयी। निदेशक मुद्रण की आख्या दिनांक 37-2-203 के
अनुसार उ0प्र0 राज्य, Beat विकास निगम के छटनीशुदा कर्मचारियां द्वारा योजित Re याचिका
संख्या-332. (Ta) h997 राज्य खनिज विकास निगम संघर्ष समिति बनाम उ0प्र0 राज्य व
अन्य मैं#पॉरित, आदेश के अनुक्रम में निगम कर्मियों को समयबध् रूप से शासन के विभिन्न
TAA लिगैमो/ एजेन्सियों में समायोजित करने हेतु मुख्य सचिव स्तर से शासनादेश दिनांक
30-424999 निर्गत किया गया था। उक्त शासनादेश के अनक्रम में शासनादेश दिनांक 6 मार्च,
2002 एव दिनांक 8-3-2002 द्वारा खनिज निगम के 43 छटनीशुदा कर्मचारियों को विभिन्न
मुदणालयों A समायोजित किये जाने के आदेश दिये गये। Sea कर्मियों को समूह- ग के सीधी
भर्ती के न्यूनतम पद कनिष्ठ लिपिक, हितकारी संचालक एवं हितकारी सहायक के पद परनियुक्ति की गयी। इनकी नियुक्ति की शर्तों में वेतन संरक्षण का लाभ दिये जाने का कोई उल्लेख
नहीं किया गया।
3- खनिज निगम के छटनीशुदा कर्मियों द्वारा वेतन संरक्षण का लाभ अनुमन्य कराये जाने के
संबंध A AO उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच में Re याचिका संख्या- 5495 (एसएस) / 2003
के0सी0 मिश्रा व अन्य बनाम राज्य व अन्य योजित की गई जिसमें AO उच्च न्यायालय द्वारा
अपने आदेश दिनांक 4-9-2003 के अन्तर्गत विपक्षीगण को 6 सप्ताह के अन्दर पप्रतिशप्थ पत्र
दाखिल करने एवं O. सप्ताह के अन्दर याचीगण के रिजवाइडर के साथ साथ सचिवैक औदयोगिक
विकास हेतु यह निर्देश जारी किये कि याचीगणों के प्रार्थना पत्रो को सकारुण निस्ताईरिते किया
जाये। मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश दिनांक 4-9-2003 Ax Hawa में शासन
द्वारा कार्यालय आदेश दिनांक (4-0-2003 निर्गत करते हुए याचीगण् के Wel पत्र आधारहीन
Teele, नियम विरूद्ध एवं औचित्यहीन होने के कारण निरस्त कर«दिया Wat था।
4- .... पुन- Re याचिका संख्या- 5495 (एसएस)/ 2003 के0सीणिमिश्रे बैनाम राज्य व अन्य में
मा0 उच्च न्यायालय में सुनवाई के उपरान्त मा0 उच्च AAA '्वारा अपने निर्णय दिनांक 3-
3-202 में खनिज विकास निगम के छटनीशुदा कर्मचास्योंब्दकी वेतन संरक्षण का लाभ अनुमन्य
कराये जाने के संबंध में आदेश पारित किया TAWA उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के
अनुपालन में आ रही कठिनाईयों के दृष्टिगत MO अच्छे न्यायालय, लखनऊ da में विशेष अपील
संख्या- 543/ 20i2 राज्य सरकार व Hew GA HOF मिश्रा व अन्य योजित किया गया जो
मा0 उच्च न्यायालय में अभी भी aie Oi
5- इसी बीच याचीगण द्वारी.«माँ0४ Sea न्यायालय के आदेश दिनांक 3-3-20i2 को
समयान्तर्गत अनुपालन न a के Gd अवमाननावाद संख्या- 709/ 2 उमाकान्त तिवारी व
अन्य बनाम श्री sda Seah मुख्य सचिव व अन्य योजित की गई। शासन द्वारा विशेष
अपील में AO न्यायालय से कोई अनुतोष प्राप्त न होने के द्ृष्टिगत मा0 उच्च न्यायालय के
आदेश दिनांक 3:32 के अनुपालन विशेष अपील में पारित अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया
गया। मा0 उर्डचीऋयायीलय के आदेश दिनांक (3-3-3 द्वारा वेतन सरक्षण के संबंध में रजिस्ट्रार
की रिषोर्ट' के HIN पर पुन: वेतन संरक्षण प्रदान करने का आदेश दिया गया। मा0 न्यायालय
hor Me के अनुक्रम में रजिस्ट्रार के रिपोर्ट को वित्त विभाग भेजकर उनके माध्यम से
27 Udon का वेतन निर्धारण कराया गया तथा शासनादेश दिनांक (2 अगस्त, 2043 द्वारा
वित्त विभाग द्वारा किये गये वेतन निर्धारण के अनुसार वेतन निर्धारण का आदेश निदेशक,
मुद्रण एंव लेखन सामग्री को राज्य सरकार द्वारा योजित विशेष अपील मे पारित अंतिम निर्णय
के अधीन दिया गया। निदेशक मुद्रण द्वारा तदतुसार उक्त याचीगण का वेतन निर्धारित कर
वेतन सरंक्षण कर दिया गया।. उक्तानुसार वेतन निर्धारण/ संरक्षण मात्र वादीगण का किया
गया हैं। खनिज निगम के छटनीशुदा एंव मुद्रण विभाग में कार्यरत श्री विजय कुमार श्रीवास्तवएवं 06 अन्य कार्मिक उक्त वाद में वादी नहीं थे, Hed: उनके वेतन का संरक्षण नहीं किया
गया हैं। अतएव श्री विजय कुमार श्रीवास्तव व 06 अन्य कार्मिकों द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में
वाद योजित कर उक्तानुसार वेतन सरंक्षण का लाभ दिये जाने का अनुरोध किया गया है।
6- Re याचिका संख्या- 720 (एसएस)/ 20:3 विजय कुमार श्रीवास्तव व अन्य बनाम राज्य
सरकार में पारित AO उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 29-74-20i3 के अनुक्रम A याचीगण
श्री विजय कुमार श्रीवास्तव व 06 अन्य कार्मिकों द्वारा खनिज निगम के अन्य कार्मिकों को
उक्तानुसार के0सी0 मिश्रा व अन्य में पारित आदेश के क्रम में दिये गये वेतन संरक्षण का लाभ
के समान ही स्वयं को भी वेतन संरक्षण व अन्य लाभ प्रदान करने का अपने फ्रत्यावेद्ल दिनांक
5-72-20i3 में अनुरोध किया गया है। इस संबंध में स्पष्ट किया जाना _हैबविरि्केठसी0 मिश्रा व
अन्य में पारित मा0 उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक (3-3-20I2 के _विरूंदे६रज्यि सरकार द्वारा
AO उच्च न्यायालय में विशेष अपील योजित हैं, मा0 उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक (3-3-
20i2 में पारित आदेश के अनुक्रम में विशेष अपील में पारित अँत्लिम॑औदेश के अधीन ही उक्त
वाद में अर्न्तनिहित वादीगण को वेतन सरक्षण का लग. विद्त७ विभाग से निर्धारित कराकर
प्रदान किया गया हैं। प्रश्तगत वाद संख्या- 7(20/ 2043edP पारित मा0 उच्च न्यायालय के
आदेश दिनांक 29-4-2043 में वादीगण को dda ँरक्षण का लाभ प्रदान करने का स्पष्ट
आदेश नहीं है, अपितु मात्र इस संबंध में AVM के प्रत्यावेदन का सकारण एवं नियमानुसार
निस्तारण करने का आदेश हैं। अतएव Bad qe संख्या- 5495(एसएस) / 2003 में पारित
आदेश दिनांक 3- 3- 2 के अनुक्रम में. के0सी0मिश्रा व अन्य को दिये गये वेतन संरक्षण के
आधार पर वादीगण श्री विजय कुमीर्नश्रीबास्तव व अन्य को वेतन संरक्षण का लाभ प्रदान किया
जाना समीचीन नहीं हैं
7- यह भी Fe Atal evi उ0प्र0 राज्य खनिज विकास निगम को dee किये जाने के
निर्णय संबंधी शसनादेश दिनांक 7-4-2000 के अनुपालन में जिन कर्मियों द्वारा स्वैच्छिक
सेवानिवृत्ति. नहीं, ली. गयी थी, उनकी छटनी औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत कार्य की
श्रेणी में आने. HART नियमानुसार छटनी प्रतिपूर्ति के साथ समस्त वैधानिक देयताओं का
भुगतान,#करेते SY समाप्त की गयी थी। निगम कर्मी की सेवाए 35000 राज्य खनिज विकास
frat Haw नियमावली के नियमों के अन्तर्गत समस्त वैधानिक देयताओं का भुगतान
TATA करते हुए समाप्त की गयी थी। शासन द्वारा मानवीय द्रृष्टिकोण अपनाते हुए निगम
के छटनीशुदा कर्मचारियों को सरकारी सेवा हेतु Hea! एवं अनुमन्यता के आधार पर शासनादेश
दिनांक 0-7-2000 द्वारा नियुक्ति प्रदान करने का आदेश दिया गया था जिसमें किसी प्रकार का
वेतन संरक्षण का कोई भी प्राविधान नहीं Al उक्त कार्मिकों के नियुक्ति आदेश में स्पष्ट रूप से
सेवा शर्तों का उल्लेख करते हुए वेतन संरक्षण का हित लाभ अनुमन्य न कराने का उल्लेख
किया गया था जिसे उनके द्वारा तत्समय स्वीकार किया गया था।8-.... TAU उपरोक्त तथ्यों के आधार पर याचीगण के प्रत्यावेदन दिनांक 5 दिसम्बर, 203
को बलहीन, नियम विरूद्ध एवं औचित्यहीन होने के कारण एतदद्वारा निरस्त किया जाता है।
( धीरज साहू)
सचिव
संख्या (874(4) 77-2-44 तददिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रषित
- मुख्य स्थायी अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, लखनऊ बेंच लखनऊ -
oO
- निदेशक,मुद्रण एंव लेखन सामग्री,50प्र0 इलाहाबाद |
- श्री विजय कुमार FOG अन्य याचीगण को निदेशक, मुद्रण एव. MUA Aas 35040
इलाहाबाद के माध्यम से।
गार्ड फाइल।
2... —
+
आज्ञा से,
(कंचन वर्मा)
विशेष सचिव।