Date: 2023-12-21Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
लिगेसी स्टाल्ड रियल स्टेट प्रोजेक्ट्स की समस्याओं के निदान के लिए श्री अमिताभ कान्त (एक्स-सी.ई.ओ. नीति आयोग), भारत सरकार की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की गयी संस्तुतियों के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में।
**Executive Summary:**
This document outlines the Uttar Pradesh government's policy for resolving issues with stalled legacy real estate projects in Noida, Greater Noida, and the Yamuna Expressway area. It implements recommendations from a committee chaired by Amitabh Kant (ex-CEO of NITI Aayog). The goal is to deliver homes to buyers and facilitate flat registration, with a focus on Group Housing Projects.
**Key Points / Main Content:**
* **Scope of the Policy:**
* Covers Group Housing Projects, including components within commercial or township developments, and those involved in NCLT or court cases (provided the case is withdrawn).
* Excludes Group Housing Projects within Sports City or Recreational Entertainment Park schemes, and additional projects like commercial or industrial developments.
* **Policy Measures & Incentives:**
* Zero Period benefits for COVID-19 (April 1, 2020 - March 31, 2022) and NGT orders concerning the Okhla Bird Sanctuary.
* Allows for co-developers to complete projects, with joint responsibility between the original allottee and the co-developer, subject to Authority approval and payment of dues.
* Permits partial surrender/cancellation of unsuitable land within projects.
* Re-validation of outstanding dues by a chartered accountant.
* No cancellation of the lease deed for compliant developers.
* Prohibits additional charges from flat buyers if the project benefits from the package/concessions.
* Allows additional FAR (Floor Area Ratio) as per existing regulations.
* Extends project completion deadlines by up to 3 years without charges.
* Permission to Mortgage (PTM) is granted upon depositing 25% of net dues, to facilitate developer financing.
* **Financial Provisions:**
* Depositing 25% of net dues enables registration, plan approval, and extensions.
* Payment Schedule: 25% of dues within 60 days of package acceptance; remaining 75% over three years with interest.
* Net dues payment timelines based on outstanding amount (1 year for up to 1 billion, 2 years for up to 5 billion, 3 years for over 5 billion).
* If a developer fails to complete the project within the set time, a 20% penalty will be applied to outstanding dues.
* **Implementation and Monitoring:**
* The policy will be implemented under the oversight of the Authority's board, with regular agenda items in board meetings and special meetings as needed.
* Third-party assessment of dues, zero-period relief, and the calculation of net dues.
* 25% of net dues must be deposited within 60 days of notification from the Authority.
* Land alloted and leased will be cancelled, 20% penaulty with additional dues, if the flat owners are not given the land/flat
* After depositing 25% of dues an application will be required in the Authority, after that permission to co-developer will be granted in 15 days.
* Grant Permission to Mortgage upon 25% net dues, developers needs to fulfill the obligations of the authorities in the Permission to Mortgage letter
* Per flat amount should be collected for total incomplete and unregistered flats.
* In any event, there should be registry of complete flats or flats, if the allottees are residing at that place the flats are to be registered with in 3 months.
* Before registration, documents should be checked with authority
* Fire NOC, Structure NOC, should be obtained
* For approval from Authorities to approve the project, meetings should be conducted every time.
* The Flats should be given to the Allottees with registry.
* Financial support and bank quarentees from the Bank with respect to Bank guarantee given to builders.
* The Authority can surrender or cancell any allotted area and that portion of area will be given for equivalent registry or the remaining flats
**Impact Analysis:**
**Stakeholder:** *Flat Buyers (Home Buyers)*
* **Impact:** Ensures timely delivery of homes and facilitates registration. Protects from additional financial burdens.
* **Action Required:** Await project completion and registration processes; they will not be charged extra costs or penalities.
**Stakeholder:** *Real Estate Developers*
* **Impact:** Provides financial relief, extended deadlines, and avenues for project completion. Offers clarity on dues and allows for collaboration with co-developers.
* **Action Required:** Review policy, accept terms, deposit 25% of dues within 60 days, and adhere to project completion timelines.
**Stakeholder:** *Noida, Greater Noida, and Yamuna Expressway Industrial Development Authorities*
* **Impact:** Enables resolution of stalled projects, stimulates economic activity in the region, and ensures collection of dues.
* **Action Required:** Implement the policy, monitor project progress, facilitate co-developer agreements, and collect dues according to the outlined schedule. Ensure a smooth handover of flats/units.
Key Entities Referenced
Amitabh Kant (ex-CEO, NITI Aayog): Head of committee formed by the Government of India to address legacy stalled real estate projects
Legacy Stalled Real Estate Projects: The central problem the policy aims to solve
Noida, Greater Noida, and YEIDA: Regions where the policy's provisions regarding stuck housing projects are applicable
Group Housing Projects: Projects covered under this policy/package. Includes projects of authorities, housing components of commercial projects, and township development projects.
UP Apartment (Promotion of Construction, Ownership and Maintenance) Act, 2010: The relevant act of Uttar Pradesh under which actions must be taken to implement the policy.
UGAl-6/202 3/7774/7 7-4-2023-60I/2023
मनोज कुमार सिंह,
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
मुख्य कार्यपालक अधिकारी,
adie ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण/
ग्रेटर नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण/
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण।
औद्योगिक विकास अनुभाग-4 लखनऊ: fect: 2। दिसम्बर, 2023
विषय- लिगेसी teres रियल स्टेट प्रोजेक्ट्स की समस्याओं के निदान के लिए श्री अमिताभ कान्त
(एक्स-सी.ई.ओ. नीति आयोग), भारत सरकार की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की गयी
संस्तुतियों के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में।
महोदय,
“सफलता में निर्णय का रोल 5% होता है, और क्रियान्वयन की भूमिका 95 फीसदी होती है।”
2. Bat प्रदेश शासन नौएडा, ग्रेटर नौएडा एवं यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के
के क्षेत्र में लम्बे समय से रूकी ग्रुप हाऊसिंग परियोजनाओं को तत्काल पूरा करने, तथा फ्लैट बायर
को यथाशीघ्र मकान उपलब्ध कराने एवं फ्लैट की रजिस्ट्री करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय
लिया है।
3. इस निर्णय के सफल क्रियान्वयन हेतु प्राधिकरण, डेवलपर, वित्तीय संस्थाएं व फ्लैट बायर एवं
अन्य सभी स्टेक होल्डर्स का एक्टिव पार्टिसिपेशन आवश्यक है।
4. पुरानी रूकी हुई भू-सम्पदा परियोजनाओं (लिगेसी teres Raat स्टेट प्रोजेक्ट्स) के सम्बन्ध
में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश संख्या-ओ-7024/059/207-हाऊसिंग
सेक्शन-एमएचयूपीए-पार्ट (9) ईएफएस- 9:38424, दिनांक 3.03.2023 द्वारा श्री अभिताभ led
(एक्स-सी.ई.ओ. नीति आयोग) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। समिति को घर
खरीददारों के हितों की रक्षा के लिए तथा रूकी हुई परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करते
हुए घर खरीददारों को आवास dios के लिए उपायों की संस्तुति करनी थी। समिति द्वारा विभिन्न
Eth Best के साथ 05 doh की गयीं और अपनी बैठक दिनांक 20.07.2023 में रिपोर्ट को
अन्तिम किया गया। समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट दिनांक 24.07.2023 को प्रस्तुत की गयी।
5. रियल स्टेट एक महत्वपूर्ण सेक्टर है और इससे 200 से अधिक इण्डस्ट्रीज जुड़ी हुई हैं तथा
इसमें बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन होता है। इण्डियन बैंक एसोसिएशन के एक अनुमान के
अनुसार पूरे देश में लगभग 4.i2 लाख ऐसे घर हैं, जो डेवलपर्स की खराब वित्तीय स्थिति की वजह
से पूर्ण नहीं हो पा रहे हैं। इनमें से लगभग 2.40 लाख घर एन.सी.आर. में स्थित हैं। इनके पूर्ण हो
जाने से जहाँ एक ओर मध्यम व निम्न वर्ग, जिन्होंने इन मकानों के लिए बड़ी धनराशि बिल्डर्स को
अदा की है, उनके मकान का सपना पूरा होगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति
मिलेगी।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |6. .... नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यीडा में कतिपय कारणों से ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गयी कि
बिल्डरों द्वारा फ्लैट/घर के बायर्स को पूर्ण निर्मित फ्लैट नियत समय से बहुत अधिक समय बीत जाने
जाने के बावजूद भी उपलब्ध नहीं कराया जा पा रहा है। दूसरी तरफ फ्लैट के बायरों को बिल्डर से
फ्लैट की उपलब्धता सुनिश्चित कराने पर प्रश्न चिन्ह होने की वजह से वह अपने देय किश्तों का
भुगतान बिल्डर को नहीं कर रहे Sl उक्त के अतिरिक्त बायर, बैंकों से लिए गए लोन की ई.एम.आई.
भी चुका रहे हैं तथा tee के मकान में रेन्टल की अदायगी करने का दोहरा भार भी उठा रहे Fl
बिल्डर्स को बैंक व अन्य वित्तीय संस्थानों से वर्तमान हालातों को देखते हुए अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा
करने के लिए लोन भी मुहैया नहीं कराया जा रहा है। उपरोक्त डेडलॉक की स्थिति में बिल्डर द्वारा
अथॉरिटी को विभिन्न देयकों का भुगतान न करने से अथॉरिटी द्वारा फ्लैट की रजिस्ट्री करने की
अनुमति, AM पास करने अथवा NY करने एवं परमीशन-टू-मॉर्टगेज आदि भी नहीं दिया जा रहा
है। शासन द्वारा लिया गया उपरोक्त विषय पर यह निर्णय विद्यमान डेडलॉक को समाप्त कर सभी पक्षों
पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए विकास को आगे बढ़ाने में कारगर भूमिका अदा करेगा। शासन द्वारा
इस विषय पर सम्यक् विचारोपरान्त नीतिगत निर्णय लेते हुए एक पैकेज निर्धारित किया गया है।
7. .... उपर्युक्त वर्णित तथ्यों/परिस्थितियों के दृष्टिगत श्री अमिताभ pied, एक्स सी.ई.ओ., नीति
आयोग की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की गई संस्तुतियों पर सम्यक् विचारोपरान्त उन्हें
स्वीकार करते हुए राज्य सरकार द्वारा निम्नवत् नीति/पैकेज निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है।
है। नीति/पैकेज का मुख्य लक्ष्य होम बायर को रजिस्ट्री के साथ घर/फ्लैट यथाशीघ्र उपलब्ध कराना
है।
7. प्रकरण जो इस नीति/पैकेज से आच्छादित होंगे:-
() प्राधिकरणों के gu हाऊसिंग प्रोजेक्ट्स।
di) ग्रुप हाऊसिंग कम्पोनेन्ट यदि किसी वाणिज्यिक प्रोजेक्ट का हिस्सा है तो ग्रुप
हाऊसिंग कम्पोनेन्ट की सीमा awl
(ii) qo हाऊसिंग कम्पोनेन्ट ऑफ टाउनशिप डेवलपमेंट प्रोजेक्ट।
(MW ग्रुप हाऊसिंग प्रोजेक्ट, जो एन.सी.एल.टी. अथवा कोर्ट में हैं, वह भी इस पैकेज का
लाभ ले सकते हैं यदि वह एन.सी.एल.टी. एवं कोर्ट से अपना वाद विदड्टा करते हैं
अथवा AAA कराते हैं।
() eed सिटी योजना के अन्तर्गत स्थित gu हाऊसिंग प्रोजेक्ट।
(i) रिक्रिएशनल इन्टरटेनमेंट पार्क योजना के अन्तर्गत शामिल Qo हाऊसिंग प्रोजेक्ट।
di) go हाउसिंग प्रोजेक्ट के अतिरिक्त प्रोजेक्ट यानि कॉमर्शियल, इन्स्टीट्यूशनल,
इण्डस्ट्रियल आदि।
7.3. . प्राधिकरण के बोर्ड के अनुश्रवण में इस नीति/पैकेज का क्रियान्वयन-
इस नीति/पैकेज के अन्तर्गत दिए जा रहे अनुतोष एवं किए जा रहे प्रस्तावों के क्रियान्वयन
के लिए आवश्यक निर्णय प्राधिकरण बोर्ड की देखरेख में किया जाएगा। इसके लिए आवश्यकतानुसार
बोर्ड विशेष doh आहूत करेगा। समस्या के समुचित निदान होने तक यह विषय प्रत्येक बोर्ड बैठक में
एक एजेण्डा के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। बोर्ड आवश्यकतानुसार बिल्डर बायर को भी प्रगति की
समीक्षा के लिए आमंत्रित कर सकता है।
8. "शून्य अवधि" का लाभ दिया जानाः
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |() aifas-i9 पैन्डेमिक- aifas-i9 महामारी के दृष्टिगत दिनांक 07.04.2020 से दिनांक
दिनांक 3:.03.2022 की अवधि में जीरो पीरियड का लाभ दिया जाएगा।
di) seer oS सेंचुरी के i0 कि.मी. के दायरे में एन.जी.टी. के आदेशों के क्रम मैं
दिनांक 4.08.20i3 से 9.08.20i5 तक जीरो पीरियड का लाभ दिए जाने पर ग्रुप
हाऊसिंग परियोजनाओं पर केस-टू-केस आधार पर विचार किया जाएगा।
(ii) परियोजनाओं पर अन्य परिस्थितियों के दृष्टिगत प्राधिकरण की नीतियों के अनुसार
केस-टू-केस आधार पर जीरो पीरियड का लाभ दिया जाएगा।
प्राधिकरण में पूर्व में जमा की गयी धनराशि इन प्राविधानों को लागू करने के
उपरान्त वापस नहीं की जाएगी। जीरो पीरियड का आशय यह होगा कि wad अवधि में
ब्याज तथा पीनल इन्टरेस्ट नहीं लगेगा तथा किस्तें उक्त अवधि से आगे शिफ्ट की जायेंगी।
9. .... को-डेवलपर (सह-डेवलपर्स) को शामिल करनाः परियोजना को पूरा करने के लिए को-डेवलपर्स
को प्राधिकरण के अभिलेखों में रिकोनाईज करते हुए अनुमति दी जाएगी। को-डेवलपर को अनुमति की
दशा में प्राधिकरण के इयूज को अदा करने तथा परियोजना को पूर्ण करने की जिम्मेदारी संयुक्त रूप
से को-डेवलपर तथा आवंटी की होगी।
0. आंशिक सरेंडर नीति/आंशिक कैंसिलेशन नीतिः परियोजना के अनुपयुक्त भूमि का आंशिक
सरेंडर/कैंसिलेशन की अनुमति होगी। प्राधिकरण सरेंडर की गई भूमि के लिए पहले से भुगतान की गई
राशि को डेवलपर्स के बकाया के साथ समायोजित करेगा। पार्शियल सरेन्डर पॉलिसी अथवा पार्शियल
कैंसिलेशन पॉलिसी के अन्तर्गत डेवलपर अनुपयुक्त भूखण्ड को प्राधिकरण को समर्पित कर सकता है।
डेवलपर द्वारा WISN न करने की दशा में तथा प्राधिकरण के इयूज की अदायगी न करने की दशा में
में प्राधिकरण अनुपयुक्त भूखण्ड के आंशिक भाग का एलाटमेंट एवं लीज ss कैंसिल कर सकेगा।
पार्शियल सरेंडर/कैंसिलेशन के केस में प्रश्नगत भूखण्ड के इयूज के सापेक्ष भुगतान की गयी
राशि को डेवलपर के नेट इयूज से समायोजित की जाएगी। डेवलपर को प्राधिकरण द्वारा भूखण्ड की
लागत का 0 प्रतिशत लेकर भूखण्ड हस्तगत किया गया है। प्राधिकरण द्वारा डेवलपर को एक पेमेन्ट
पेमेन्ट प्लान उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें 6-0 वर्षों तक छमाही fecal के भुगतान का प्लान
होता है। इसमें प्रीमियम तथा ब्याज की राशि शामिल होती है। इस निर्गत पेमेन्ट प्लान के अनुसार
भूखण्ड का कुल मूल्य (समस्त प्रीमियम राशि तथा ब्याज राशि पेमेन्ट प्लान अवधि) के सापेक्ष
भुगतान की गई कुल प्रीमियम तथा कुल ब्याज की राशि के रेशियों में भूखण्ड का सरेन्डर/समायोजन
HAST होगा। पीनल इन्ट्रेस्ट और पैनाल्टी आदि की राशि इसमें शामिल नहीं होगी।
W4, 9 बकाया राशि की पुनर्गणनाः सभी बकाया राशि का एक स्वतंत्र चार्टड अकाउंटेंट/तृतीय पक्ष
द्वारा पुनः सत्यापन किया जाएगा और इसकी पुनर्गणना लीज डीड की शर्तों तथा प्राधिकरण द्वारा इस
इस विषय पर समय-समय पर निर्गत आदेशों के क्रम में की जाएगी।
i2. पट्टा विलेख रद्द न करनाः प्रस्तावित पैकेज के अनुसार कार्य की सहमति देने वाले तथा कार्य
कार्य करने वाले डेवलपर के पट्टा विलेख निरस्त नहीं किए जायेंगे।
3. फ्लैट बायर से कोई अतिरिक्त लागत नहीं लिया जाना: जिस परियोजना में राज्य सरकार के
के पैकेज/रियायतों का लाभ उठाया गया है, वहां आवास क्रेताओं से कोई जुर्माना/अतिरिक्त
ब्याज/अतिरिक्त लागत नहीं ली जाएगी ताकि शासन/प्राधिकरण द्वारा बिल्डर को अनुमन्य कराई जा
रही सुविधा अन्ततः बायर को मिल सके।
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |4. परियोजनाओं के लिए फ्लोर एरिया अनुपात (एफएआर): वर्तमान नीति के अनुसार जरूरी
आवश्यकताओं और नियमों को पूरा करने के पश्चात प्रचलित दर पर अतिरिक्त एफ.ए.आर. अनुमन्य
कराया जाएगा।
5. .... परियोजना को अधिकतम 3 वर्ष के अन्दर पूरा करने के लिए समय विस्तार बगैर शुल्क के
दिया जाएगा।
6. परमीशन टू मॉर्टगेज (पी.टी.एम.): पैकेज स्वीकार कर नेट इयूज के सापेक्ष 25 प्रतिशत
धनराशि जमा करने पर प्राधिकरण द्वारा भूमि गिरवी रखने की अनुमति दी जाएगी ताकि बिल्डर
परियोजनाओं को पूरा करने और बकाया राशि के भुगतान के लिए संसाधन जुटा सकें। पी.टी.एम. में
प्राधिकरण के इयूज का स्पष्ट उल्लेख होगा। वित्तीय संस्था से इस 25% धनराशि को मोबलाईज करने
करने के लिए भी यदि PIM की आवश्यकता है तो उस दशा में वित्तीय संस्था इस आशय का एक
पत्र प्राधिकरण को लिखेगी एवं 25% की धनराशि एक in dependent escrow account में जमा
करेगी, जो PTM बैंक को wre होते ही स्वतः प्राधिकरण के एकाउण्ट F release हो जाएगी।
7. नेट sat के सापेक्ष 25% धनराशि जमा करने के उपरान्त रजिस्ट्री, प्लैन ayaa,
एक्सर्टेशन आदि तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा।
8. पैकेज स्वीकार करने तथा इसके प्रति प्रतिबद्धता के रूप A डेवलपर्स उपरोक्त कोविड-9 के
tad जीरो पीरियड के लाभ के रियायतों के बाद आंगणित धनराशि का 25% साठ (60) दिनों के
भीतर प्राधिकरण को भुगतान करेगा। शेष 75% का भुगतान साधारण ब्याज के साथ तीन साल की
अवधि में किया जाएगा।
9. 00 करोड़ तक के नेट बकाए की राशि अधिकतम एक वर्ष में अदा की जाएगी। रू. 500
करोड़ तक की नेट बकाए की राशि दो वर्षों में अदा की जाएगी तथा रू. 500 करोड़ से ऊपर की
बकाए की राशि 3 वर्षों में अदा की जाएगी। डेवलपर को दी जाने वाली रियायत तथा प्राधिकरण के
नेट इयूज के भुगतान तथा फ्लैट बायर को मकानों की रजिस्ट्री आपस में लिन्क्ड रहेगी।
परियोजना की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर प्रत्येक बिल्डर द्वारा बायर के फ्लैट के
निर्माण को पूर्ण करने तथा प्राधिकरण के इयूज के भुगतान की एक समय-सारिणी उपरोक्त प्राविधानों
के दृष्टिगत दी जाएगी। प्राधिकरण बोर्ड समय-सारिणी को दिए जाने वाले रिलीफ के साथ लिंक करते
हुए प्रोपोजल सम्बन्धित बिल्डर को उपलब्ध कराएगा तथा इसके क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग करेगा।
यदि कोई माइल स्टोन मिस होता है तो उस अवधि की रियायत राशि का समायोजन नहीं किया
जाएगा।
20. Ufa कोई डेवलपर निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने में विफल रहता
है तो 3 वर्ष की अवधि के बाद इयूज की शेष धनराशि पर 20% जुर्माना लगाया जाएगा, और
परियोजना प्राधिकरण द्वारा पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। यदि प्राधिकरण को इयूज का
भुगतान किया जा चुका है तो जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
2i. Uchor को क्रियान्वित करने के लिए निर्धारित चरणबद्ध रणनीति निम्नवत् होगीः-
() dea का क्रियान्वयन प्राधिकरण के बोर्ड द्वारा मॉनिटर किया जाएगा तथा सभी
महत्वपूर्ण निर्णय बोर्ड से अनुमोदित कराए जायेंगे। पैकेज के क्रियान्वयन पूर्ण होने
तक यह प्रत्येक बोर्ड बैठक में एक एजेण्डा के रूप में अनिवार्य रूप से अनुश्रवण
किया जाएगा। आवश्यकतानुसार इसके लिए विशेष बोर्ड बैठकों का आयोजन किया
I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |जाएगा, जिसमें यदि आवश्यक हो तो डेवलपर व बायर को भी समय-समय पर
अनुश्रवण के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
dl) सर्वप्रथम थई पार्टी/सी.ए. द्वारा आंकलित किए गए इयूज तथा कोविड-9 से उत्पन्न
परिस्थितियों के दृष्टिगत 02 वर्ष की अवधि में दिए जाने वाले जीरो पीरियड की
रिलीफ राशि को आंकलित करते हुए उसे इयूज की राशि से घटाते हुए नेट इयूज की
राशि आंकलित की जाएगी।
ii) उक्त आंकलित धनराशि (इयूज एवं नेट इयूज) से सम्बन्धित बिल्डर को प्राधिकरण में
में बुलाकर अवगत कराया जाएगा। 25: धनराशि जमा करने की 60 दिन की अवधि
की गणना इस सूचना को बिल्डर को उपलब्ध कराने की तिथि से की जायेगी।
(Vv बिल्डर द्वारा नेट इयूज की 25 प्रतिशत की धनराशि 60 दिन के अन्दर प्राधिकरण में
में जमा की जाएगी।
(V) यदि कोई को-डेवलपर परियोजना को पूर्ण करने मैं शामिल होना चाहता है तो वह
प्राधिकरण में बिल्डर की सहमति के साथ को-डेवलपर के रूप में परियोजना में
शामिल होने के लिए आवेदन करेगा। प्राधिकरण द्वारा i5 दिन के अन्दर को-डेवलपर
के विषय में प्राप्त आवेदन पर निर्णय लेते हुए आवेदक को परियोजना में को-डेवलपर
के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके उपरान्त प्राधिकरण के बकायों के भुगतान के
लिए तथा परियोजना को पूरा करने के लिए ओरिजनल आवंटी तथा को-डेवलपर
संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे।
(MW) परमीशन-टू-मार्टगेजः नेट इयूज के 25 प्रतिशत की धनराशि जमा करने के उपरान्त
प्राधिकरण द्वारा विकासकर्ता को परमीशन-टू-मार्टगेज उनके अनुरोध के सापेक्ष उपलब्ध
उपलब्ध करायी जाएगी। परमीशन-टू-मार्टगेज के पत्र में प्राधिकरण के बकाए की
धनराशि का स्पष्ट उल्लेख होगा AM बकाए की धनराशि जमा होने तक सम्पत्ति पर
प्रथम चार्ज प्राधिकरण का होगा। प्राधिकरण के बकाए की राशि के भुगतान के
उपरान्त प्रथम चार्ज वित्तीय संस्था को प्राप्त होगा। इस विषय पर w-i6 में
उल्लिखित व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
(Mi) नेट इयूज की राशि को कुल इनकम्प्लीट एवं अनरजिस्टर्ड फ्लैटों की संख्या से भाग
देते हुए प्रति फ्लैट राशि आगणित की जाएगी और उसके सापेक्ष बिल्डर/को-डेवलपर
द्वारा धनराशि जमा करते ही उस संख्या में फ्लैट के रजिस्ट्रेशन की अनुमति तत्काल
तत्काल निर्गत की जाएगी।
(Mil) परन्तु यह सुनिश्चित किया जाना है कि प्रत्येक दशा में सभी कम्प्लीट फ्लैट wd
फ्लैट, जिनमें ओ0सी0 We कर अथवा बिना ओएसी0 प्रात किए फ्लैट बायर निवास
निवास कर रहे हैं, उन सबकी रजिस्ट्री आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर 03 माह के
Heat सुनिश्चित की जाएगी।
(x रजिस्ट्री करने के पूर्व यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फ्लैट/टॉवर को फायर
एन.ओ.सी., स्ट्रक्चरल एन.ओ.सी. एवं अन्य सभी आवश्यक एन.ओ.सी. सक्षम
प्राधिकारियों से प्रास है।
(29 एन.ओ.सी. ससमय प्राप्त हो, इसके लिए इस पैकेज के क्रियान्वयन के लिए आहत की
की जाने वाली विशेष बोर्ड बैठकों में/अथवा सामान्य बोर्ड बैठकों A ऐसे सभी
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |विभाग/पदाधिकारियों के प्रतिनिधि, जिन्हें एन.ओ.सी. निर्गत करना है, वह विशेष
अमंत्री के रूप में बुलाएं जायेंगे तथा प्रोजक्टवार एन0ओएसी0 आदि निर्गत करने के
कार्यवाही की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
(M) 03 माह के अन्दर उपरोक्त पैरा-2। ;अपपपद्ध में अंकित श्रेणी के सभी फ्लैट की
रजिस्ट्री को पूर्ण करने के लिए डेवलपर/को-डेवलपर द्वारा उपरोक्तानुसार प्रति फ्लैट
आंकलित धनराशि जमा करनी होगी, यह धनराशि नेट इयूज के 25% जमा की गई
धनराशि से अधिक होने पर डेवलपर द्वारा उपरोक्तानुसार धनराशि जमा न किए जाने
जाने की दशा में प्राधिकरण उस yo हाऊसिंग प्रोजेक्ट के साथ सम्बद्ध कॉमर्शिलय
प्रोपर्टी को अटैच करते हुए सील कर अपने कब्जे में लेगा और उसका मूल्यांकन करते
हुए उसके वैल्यू के समतुल्य प्रति फ्लैट नेट इयूज की राशि के अनुसार फ्लैट की
रजिस्ट्री सुनिश्चित करायेगा। उपरोक्तानुसार अटैच की जाने वाली कॉमर्शियल प्रोपर्टी से
से यदि सभी फ्लैटों की रजिस्ट्री सम्भव नहीं हो पा रही है तो प्राधिकरण आवंटित
भूखण्ड का पार्शियल सरेन्डर अथवा पार्शियल कैंसिलेशन करते हुए अवशेष भूखण्ड पर
कब्जा We कर उसकी समतुल्य राशि के बराबर फ्लैटों की रजिस्ट्री सुनिश्चित
करायेगा। इस धनराशि के सापेक्ष बिल्डर द्वारा बैंक गारण्टी भी देने की सुविधा
उपलब्ध होगी। उपरोक्तानुसार कार्यवाही करते हुए प्रत्येक दशा में प्रश्नगत श्रेणी के
फ्लैट्स की रजिस्ट्री 3 माह में सुनिश्चित की जाएगी। प्राधिकरण के कुल इयूज के
भुगतान के उपरान्त उपरोक्त अटैचमेन्ट स्वतः समाप्त माना जाएगा।
(xi) नेट इयूज के सापेक्ष 25 प्रतिशत की धनराशि जमा करते ही प्लैन के अप्रूवल व
एक्सटेंशन आदि 5 दिन के अन्दर प्राधिकरण द्वारा निर्गत किए जायेंगे।
(Mil) कोविड-9 के etd 0.04.2020 से 3.03.2022 की अवधि में दिया जा रहा
जीरो पीरियड का लाभ अथवा केस-टू-केस आधार पर ओखला as सैन्क्चुएरी में
एन0जी0एटी0 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में दिए जाने वाले जीरो पीरियड का लाभ अथवा
प्राधिकरण के नियमों के अन्तर्गत केस-टू-केस बेसिस पर पूर्व में दिए गए जीरो
पीरियड का लाभ वर्तमान में परीक्षण के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव में यह ध्यान रखा
जाएगा कि वर्णित अवधि का दोहरा लाभ किसी प्रकरण में नहीं प्रात हो रहा है।
(MV) बिल्डर द्वारा नेट इयूज का 25 प्रतिशत धनराशि 60 दिन के Heat जमा करने की
बाध्यता है और यह नेट इयूज थर्ड पार्टी द्वारा आंकलित इयूज से कोविड-9 के
दृष्टिगत उत्पन्न परिस्थितियों से 04.04.2020 से 3.03.2022 की अवधि में दिए
जा रहे जीरो पीरियड के लाभ को घटाकर आंकलित की जाएगी। यदि किसी बिल्डर
को कालान्तर में एन0जी0टी0 के आदेश की वजह से अथवा केस-टू-केस बेसिस पर
कोई अन्य जीरो पीरियड का लाभ Wa होता है तो वह इयूज से समायोजित किया
जाएगा। परन्तु रजिस्ट्री, परमीशन-टू-मार्टगेज आदि की कार्यवाही नेट इयूज के 25
प्रतिशत के भुगतान के उपरान्त अथवा नेट इयूज के 25 प्रतिशत के समतुल्य
कॉमर्शियल प्रोपटी के अटैचमेंट अथवा पार्शियल सरेंडर व पार्शियल कैंसिलेशन के
उपरान्त अटैच सम्पत्तियों के सापेक्ष प्रारम्भ की जाएगी।
(XV) जिन प्रोजेक्ट्स ने ओ.सी./सी.सी. wre नहीं किए हैं और अभी निर्माण किया जाना है
और उन बिलल्डर्स द्वारा यह पैकेज स्वीकार किया जाता है तो उन्हें 03 वर्षों तक बगैर
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |चार्ज यानि कि निःशुल्क टाईम एक्सर्टेशन Mee किया जाएगा। Wed 25 प्रतिशत
नेट इयूज की राशि जमा करने के उपरान्त Hilas-9, एन0जी0टी0 के आदेश अथवा
केस-टू-केस आधार पर We होने वाले Reith की धनराशि घटाकर अवशेष इयूज को
जमा करने एवं फ्लैट निर्माण को पूर्ण कर रजिस्ट्री कराने का प्रस्ताव बिल्डर द्वारा
दिया जायेगा, जिसे बोर्ड द्वारा देय रिलीफ के साथ लिंक करते हुए अनुमोदन दिया
जायेगा।
(XM) यदि बिल्डर द्वारा निर्धारित अवधि में फ्लैट ओनर को फ्लैट का कब्जा देते हुए
रजिस्ट्री नहीं करायी जाती है तो प्रस्तावित Rely (कोविड-9, एन0जी0टी0, केस-टू-
केस बेसिस) पर दिए जा रहे रिलीफ को निरस्त माना जाएगा और कुल तत्समय
अवशेष इयूज के ऊपर 20 प्रतिशत अतिरिक्त पैनल्टी लगाते हुए प्रोजेक्ट को आवंटित
आवंटित भूमि एवं लीज डीड कैंसिल की जाएगी तथा उसका कब्जा प्राधिकरण द्वारा
We कर आवश्यक sida कार्यवाही की जाएगी। उक्त के अतिरिक्त बिल्डर/डेवलपर को
को ब्लैकलिस्ट करने की कार्यवाही एवं अगले 05 वर्षों तक नोएडा, ग्रेटर नोएडा व
यमुना अथॉरिटी के क्षेत्र में ऐसे डेवलपर को भूखण्ड आवंटन नहीं करने पर
प्राधिकरणों द्वारा विचार कर कार्यवाही की जायेगी।
उपर्युक्तानुसार कार्यवाही किए जाने में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-206,
22.
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) fraatach-20i6, उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट (निर्माण, स्वामित्व और
रख-रखाव का संवर्धन) अधिनियम-200 एवं भारतीय स्टाम्प Vee-899 के प्राविधानों का अनुपालन
सुनिश्चित किया जाएगा।
भवदीय,
(मनोज कुमार सिंह)
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त।
संख्या-7774()/77-4-2023तददिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः-
श्री अमिताभ bled, एक्स-सी.ई.ओ., नीति आयोग, सुषमा स्वराज भवन, चाणक्यपुरी, नई
दिल्ली-002 , ई-मेलः amitabh.kant@nic.in
सचिव, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, निर्माण भवन, नई दिल्ली।
डा. विवेक जोशी, सचिव, वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, जीवन दीप बिल्डिंग, संसद
मार्ग, नई दिल्ली-000, ई-मेल: secy-fs@nic.in
SIO मनोज Wide, सचिव, कार्पोरेट कार्य मंत्रालय, Sa तल, ए-विंग, शास्त्री भवन, as
दिल्ली-000, ई-मेल: 380/ nca@ncin
श्री अरूण कुमार गुप्ता, अपर मुख्य सचिव, नगरीय निकाय एवं नगर एवं ग्राम नियोजन
विभाग, हरियाणा सरकार, रूम नं0-303, तीसरा तल, न्यू हरियाणा, सिविल सेक्रेटेरिएट,
चंडीगठ, ई-मेलः fetecp@hry.nic.in
श्री रवि मित्तल, अध्यक्ष, भारतीय इन्सॉल्वेंसी wos बैंकरप्सी बोर्ड, 7वां तल, मयूर भवन,
शंकर मार्केट, Hele Wha, नई दिल्ली-000, ई-मेलः chairperson@ibbi. gov.in
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |श्री एस.के. होता, प्रबन्ध निदेशक, नेशनल हाऊसिंग बैंक, कोर-5, इंडिया हैबीटेट सेन्टर, लोधी
रोड, as feeeil-0003, ई-मेलः hotask@nhb.org.in
डा0 एम0एस0 साहू, डिस्टिंगुडश्ड प्रोफेसर, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली, Arex-4,
द्वारिका, नई दिल्ली-0078, ई-मेलः mssahoo@nludelhi.ac.in
अध्यक्ष, Wi, उत्तर प्रदेश, राज्य नियोजन संस्थान, काला कांकर हाऊस, पुराना हैदराबाद,
लखनऊ-22600, ई-मेलः contactuprera@up-rera.in
अध्यक्ष, WI, हरियाणा, न्यू पी.डब्ल्यू.डी. we हाऊस, सिविल लाईन, गुरूग्राम, हरियाणा-
0.
2200, ई-मेलः hareragurugram@gmail.com
श्री सतिन््द्र पाल सिंह, अपर सचिव, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, निर्माण भवन, as
4.
दिल्ली-00, ई-मेलः as-mohua@gov.in
2. अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश शासन।
3. अपर मुख्य सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उ0प्र0 शासन।
4. प्रमुख सचिव, न्याय विभाग, 50प्र0 शासन।
प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन।
5.
6. प्रमुख सचिव, स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग, उ0प्र0 शासन।
7. प्रमुख सचिव, नियोजन विभाग, उ0प्र0 शासन।
8. श्री इरफान काजी, चीफ इन्वेस्टमेन्ट आफिसर, SWAMIH इन्वेस्टमेन्ट फण्ड-, ए-विंग i2a7
तल, मैराथन फ्यूचरएक्स, मफतलाल Med कम्पाउन्ड, एन.एम.जोशी मार्ग, लोअर पारेल,
मुम्बई-4000 3, ई-मेल: Irfan. kazi@sbicapventures.com
9. गार्ड फाईल।
आज्ञा से,
(मनोज कुमार सिंह)
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |I- Ue शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट hitp://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |