**कार्यकारी सारांश**
यह दस्तावेज़ 1 अक्टूबर, 2014 के राज्य सरकार के आदेश को प्रस्तुत करता है, जो औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 में संशोधन करता है, जिसे पहले 6 नवंबर, 2003 को स्थापित किया गया था। संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू होते हैं और पूरे उत्तर प्रदेश में लागू होते हैं। दस्तावेज़ का उद्देश्य नियमावली के प्रावधानों को संशोधित करना है, विशेष रूप से नियम 5(13) से संबंधित प्रतिभूति आवश्यकताओं से संबंधित।
**मुख्य बातें**
* **नामकरण और विस्तार:**
* संशोधन को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014 के रूप में जाना जाएगा।
* यह पूरे उत्तर प्रदेश में लागू होगा और तुरंत प्रभावी होगा।
* **नियम 5(13) का संशोधन (प्रतिभूति आवश्यकताएं):**
* पात्र इकाइयां अपनी परिसंपत्तियों पर PICUP/UPFC के पक्ष में पहला या दूसरा प्रभार बनाएंगी जो ऋण की राशि की सुरक्षा के लिए पर्याप्त है। PICUP/UPFC के पास उचित कारणों को रिकॉर्ड करते हुए दूसरे शुल्क के अतिरिक्त पात्र इकाई के भागीदारों, निदेशकों से अतिरिक्त जमानत या व्यक्तिगत बांड मांगने का विकल्प है।
* प्रतिभूति की कमी को निम्नलिखित तरीके से पूरा किया जा सकता है:
* इकाई भूमि/भवन आदि के रूप में कोलेट्रल सिक्योरिटी प्रदान करके वांछित प्रतिभूति ऋण अनुपात प्राप्त कर सकती है।
* इकाई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/शेड्यूल्ड बैंक (RBI द्वारा स्वीकृत एजेंसी बैंक) द्वारा ब्याज मुक्त ऋण के बराबर बैंक गारंटी प्रदान कर सकती है, जो संपूर्ण ऋण चुकौती अवधि को कवर करती है।
**प्रभाव विश्लेषण**
**हितधारक:** औद्योगिक इकाइयाँ
**प्रभाव:** संशोधित नियमों के अनुसार ऋणों को सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त तरीके प्रदान करके प्रतिभूति आवश्यकताओं के संबंध में इकाइयों के लिए अधिक लचीलापन।
**आवश्यक कार्रवाई:** प्रतिभूति की कमी को पूरा करने के लिए संशोधित विकल्पों से अवगत होना।
**हितधारक:** PICUP/UPFC
**प्रभाव:** ऋण सुरक्षा के लिए स्वीकार्य संपार्श्विक विकल्पों के संबंध में प्रक्रियाओं में बदलाव।
**आवश्यक कार्रवाई:** संशोधित नियमावली के अनुसार प्रक्रियाओं का अद्यतन करना।
**हितधारक:** राज्य सरकार
**प्रभाव:** औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन) में किए गए परिवर्तनों के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में बदलाव।
**आवश्यक कार्रवाई:** संशोधित नियमों को लागू करना सुनिश्चित करें।
Key Entities Referenced
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2014: औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली में पाँचवाँ संशोधन जो उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन को लेकर नियमों में बदलाव करता है।
उत्तर प्रदेश: वह राज्य जहाँ यह नीति लागू होती है।
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (चतुर्थ संशोधन), 2011: औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली का पिछला संशोधन, जिसका वर्तमान संशोधन खंडन करता है।
पिकप/यू.पी.एफ.सी.: संस्थाएँ जिनका पात्र इकाइयों की परिसंपत्तियों पर प्रथम या द्वितीय प्रभार होगा।
उत्तर प्रदेश शासन
औद्योगिक विकास अनुभाग-6
GEAT-540 /77-6-4-4 (ea) /200
लखनऊ : दिनांक 09 अक्टूबर, 2074
“भारत के संविधान” के अनुच्छेद 62 के अधीन राज्य सरकार को प्रदत्त कार्यकारी
शक्ति का प्रयोग करके औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली, 2003 जो शासनादेश संख्या
3090/77-6-03-4(टैक्स)/0 दिनांक 06 नवम्बर, 2003 द्वारा बनाई गई थी, यथा
संशोधित में निम्नलिखित संशोधन करने की श्री राज्यपाल महोदय सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते
है :-
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (पंचम संशोधन), 2074
संक्षिप्त नाम विस्तार एवं प्रारम्भ (7) यह नियमावली औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन
नियमावली (पंचम संशोधन), 2074 कही
जायेगी ।
(2) यह सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में लागू होगी ।
(3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी ।
2- fraa-5(73) का संशोधन औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (चतुर्थ
संशोधन), 2077 के नियम-5(73) को Parag
संशोधित कर दिया गया है।
वर्तमान नियम . संशोधित नियम
“5(73- पात्र. इकाई. अपनी | “5(3)- पात्र इकाई अपनी परिसम्पत्तियों _ का
परिसम्पत्तियों का पिकप/८यू.पी .एफ.सी. पिकप/यू.पी.एफ.सी. के पक्ष में प्रथम अथवा द्वितीय
के पक्ष में प्रथम अथवा द्वितीय प्रभार प्रभार SOT करेगी जो ऋण की धनराशि की सुरक्षा
उत्पनन करेगी जो ऋण की धनराशि की के लिए पर्याप्त हो। पिकप/यू.पी.एफ.सी. युक्तियुक्त
सुरक्षा के लिए पर्याप्त हो। पिकप/यू.पी. कारणों को अभिलिखित करते हुए द्वितीय चार्ज के
wal. gear कारणों at अतिरिक्त पात्र इकाई के सझ्नेदारों, निदेशकों से
अभिलिखित करते हुए द्वितीय चार्ज के अतिरिक्त जमानत अथवा पर्सनल बाण्ड मांग सकते
faite पात्र इकाई के aaa
निदेशकों से अतिरिक्त जमानत अथवा
| पर्सनल बाण्ड मांग सकते हैं ।”
' उक्त के अतिरिक्त पात्र इकाई द्वारा उक्त के अतिरिक्त पात्र इकाई द्वारा प्रतिभूति की
प्रतिभूति की कमी को निम्नवतू पूर्ण कमी को निम्नवत् पूर्ण किया जा सकता है:-
किया जा सकता है:- (अ) इकाई द्वारा प्रतिभूति की कमी को कोलेट्रल
(अ) इकाई दारा प्रतिभूति की कमी को सिक्योरिटी के रूप में भूमि/भवन आदि देकर वांछित--ं...
कोलेट्रल सिक्योरिटी के रूप... में प्रतिभूति ऋण अनुपात पूर्ण कर लिया जाये |
भूमि/भवन आदि देकर वांछित प्रतिभूति तथा
ऋण अनुपात पूर्ण कर लिया जाये। (ब) इकाई द्वारा पब्लिक सेक्टर बैंक/शेड्यूल्ड बैंक जो
तथा आर.बी.आई. द्वारा मान्य GR बैंक हो, से
(ब) इकाई द्वारा पब्लिक सेक्टर बैंक से | ब्याजमुक्त ऋण के समतुल्य बैंक गारण्टी (सम्पूर्ण ऋण
ब्याजमुक्त ऋण के समतुल्य बैंक गारण्टी | अदायगी की अवधि के लिए)
(सम्पूर्ण ऋण अदायगी की अवधि के
लिए)
है रंजन)
मुख्य सचिव सह अवस्थापना एवं औद्योगिक
विकास आयुक्त,
SOHO शासन |
WeM-540()/77-6-74-4(84a)/200,
तद॒दिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :-
ty आयुक्त एवं निदेशक, उद्योग, उद्योग निदेशालय, कानपुर ।
प्रबन्ध निदेशक, उ0प्र0 वित्तीय निगम, कानपुर ।
प्रबन्ध निदेशक, पिकप, पिकप भवन, गोमती नगर, लखनऊ।
विशेष सचिव, गोपन अनुभाग- को उनके अशासकीय प0सं0-4,/2/7 7/2074-सी0एक्स0(7)
दिनांक 30-09-2074 के संदर्भ में सूचनार्थ
अधिशासी निदेशक, उद्योग ry, 72 सी माल way, लखनऊ।
आयुक्त, व्यापार कर गोमती नगर, लखनऊ।
वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-6
वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-4
कर निबन्धन अनुभाग-2
गार्ड फाईल |
आज्ञा से,
विशेष सचिव |
ns