Date: 2026-01-27Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी राजू पुत्र श्री जीवन लाल, निवासी जनपद-मथुरा की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में।
**Executive Summary**
This document, dated January 27, 2026, from the Uttar Pradesh government, addresses the premature release of Raju, son of Jeevan Lal, an inmate at the Central Jail in Agra, based on Form-A/License. It references a previous letter dated July 8, 2024, and informs that the Governor has rejected Raju's release on Form-A/License after due consideration. The document requests acknowledgment of receipt and that the prisoner be promptly informed of the decision.
**Key Points / Main Content**
* **Inmate Details:**
* Name: Raju, son of Jeevan Lal.
* Location: Central Jail, Agra (Prisoner No. -18762).
* Residence: Janpad-Mathura.
* Crime: Convicted under Section 377 of the Indian Penal Code (IPC) relating to unnatural offenses.
* Sentence: 10 years imprisonment, sentenced on November 24, 2020.
* Time served: 6 years, 10 months, and 26 days without remission, or 7 years, 11 months, and 20 days with remission, as of June 14, 2024.
* **Circumstances of the Crime:**
* On August 31, 2017, the victim, a 6-year-old boy, went missing while playing with other children.
* He was found in a delirious state near his home on September 1, 2017.
* The boy reported being sexually assaulted by a man working at an ice factory on the Parikrama route.
* The victim identified Raju as the perpetrator.
* **Reasons for Denial of Early Release:**
* The District Probation Officer, Senior Superintendent of Police, and District Magistrate of Mathura opposed early release.
* The crime was seen as significantly impacting society, and there was a high likelihood of Raju re-offending.
* Release could cause fear and outrage within the community.
* The Probation Board shared the view that releasing such criminals prematurely would send a negative message about the judicial system.
* **Government Decision:**
* Based on the severity of the crime and the objections from local authorities, the Governor has rejected the premature release of Raju on Form-A/License under Section 2 of the UP Prisoners Release on Probation Act, 1938.
**Impact Analysis**
**District Magistrate, Mathura**
* **Impact:** Must be aware of and possibly manage any local issues or impact to the community of continued detention.
* **Action Required:** Must know about the situation.
**Police Superintendent, Mathura**
* **Impact:** Must be aware of and manage possible safety concerns related to the crime and the perpetrator.
* **Action Required:** Must know about the situation.
**Senior Superintendent, Central Jail, Agra**
* **Impact:** Responsible for informing the inmate of the decision and ensuring compliance with the government's order.
* **Action Required:** Must get the order to the prison and make sure it is followed.
**Private Secretary, Minister/State Minister, Prison Administration and Correctional Department, UP Government**
* **Impact:** Must keep their minister informed.
* **Action Required:** Must let the minister know.
Key Entities Referenced
Prisoners Release on Probation Act, 1938: Indian Law that allows for early release of prisoners
Central Jail, Agra: Location where the prisoner Raju is held.
Raju: Convicted prisoner seeking early release, resident of Mathura
Mathura: District in Uttar Pradesh, Relevant for residency and crime location.
Section 377 of IPC: Relates to unnatural offences, under which Raju was convicted.
ACA-89/2026/I06/ 22-2-2024-7(806)/ 2025
प्रेषक,
कमलेश कुमार,
उप सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक,
कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ दिनांक 27 जनवरी, 2026
विषय: - केन्द्रीय PRR, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी राजू पुत्र श्री जीवन लाल, निवासी जनपद-मथुरा
की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपयुक्त विषयक उप महानिरीक्षक (मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश,
लखनऊ के पत्र संख्या-2026/प्रो-7/05/सीमित/एम-28.06.2024, दिनांक 08.07.2024 का कृपया
संदर्भ ग्रहण करें।
2- अक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष aed}
राजू पुत्र श्री जीवन लाल (दिनांक 74.06.2024 तक बंदी की आयु 46 वर्ष 06 माह 2 दिन), जुलैदी,
थाना-गोवर्धन, जनपद-मथुरा का निवासी है। वादी राकेश के अनुसार घटना दिनांक 37.08.20I7 को
उसका पुत्र उम्र करीब 06 वर्ष बाहर बच्चों के साथ खेलते-खेलते गायब हो गया। दिनांक 0t.09.20i7 को
बदहबास अवस्था में घर के पास पड़ा मित्रा और पूरे दिन सोते रहा और शाम को जब उठा तो उसने
अपने मल द्वार पर दर्द बताया, पूछने पर बताया कि परिक्रमा मार्ग पर बर्फ की फैक्ट्री में काम करने
वाला एक आदमी उसे मुह दबाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ Weld काम किया, उस आदमी की
पीड़ित द्वारा पहचान करने पर उसने अपना नाम राजू पुत्र जीवन लाल बताया। उक्त अपराध हेतु बन्दी को
सत्र संख्या- 2680/20I7 में भा0द0वि0 की धारा-377 के अन्तर्गत A विशेष न्यायाधीश oR
एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-2, मथुरा के आदेश दिनांक 24.44.2020 ERI i0 वर्ष के
कारावास से दण्डित किया गया। बंदी द्वारा दिनांक 74.06.2024 तक अपरिहार 06 वर्ष, i0 माह 26 दिन
तथा सपरिहार 07 वर्ष ॥ माह 20 दिन की मात्र भोगी गयी सजा। जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस
अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, मथुरा द्वारा AO उच्चतम न्यायात्रय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या
A deel का अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करने, जेल से Bed पर पुनः अपराध कारित
करेगा तथा समाज में भय व आक्रोश व्याप्त होने की आख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की
संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि वादी राकेश के अनुसार घटना दिनांक 37.08.20i7 को उसका पुत्र
उम्र करीब 06 वर्ष बाहर बच्चों के साथ खेल्ते-खेलते गायब हो गया। दिनांक 0:.09.20I7 को बदहबास
अवस्था में घर के पास पड़ा मित्रा और पूरे दिन सोते रहा और शाम को जब उठा तो उसने अपने AA
द्वार पर दर्द बताया, पूछने पर बताया कि परिक्रमा मार्ग पर बर्फ की फैक्ट्री में काम करने वाला एक
आदमी उसे मुह दबाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ गलत काम किया, उस आदमी की पीड़ित
द्वारा पहचान करने पर उसने अपना नाम राजू पुत्र श्री जीवन लाल बताया। इस तरह के अपराधियों की
समय पूर्व रिहाई से समाज में न्यायिक प्रणाली के बारे में विपरीत संदेश जायेगा। deel का अपराध समाज
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |को व्यापक रूप से प्रभावित करने, जेल से Bed पर पुनः अपराध में लिप होने की पूर्ण सम्भावना होने
तथा समाज में भय व आकोश व्याप्त होने का अंकन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा
निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में किया गया है। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता
एवं जघन्यता, जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बन्दी की
समयपूर्व रिहाई का विरोध किये जाने के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आंन प्रोबेशन Vee-938 की धारा-2 के
अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी राजू पुत्र श्री जीवन ae को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की
संस्तुति नहीं की गयी है।
3- अत: उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि केन्द्रीय
कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी राजू (बंदी Wea-78762) पुत्र श्री जीवन लाल, निवासी जनपद-
मथुरा के फार्म-ए/लाईसेंस पर यू0पी0 प्रिजनर्स रित्रीज आंन प्रोबेशन एक्ट, i938 की धारा-2 के
प्राविधानों के अन्तर्गत सम्यक् विचारोपरान्त उसे मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। HAVA उक्त बन्दी की
लाइसेन्स पर मुक्ति राज्यपाल्र महोदया द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए/ल्राईसेंस
पर शासन के आदेश अंकित करके एतदद्वारा वापस लौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए
शासन के निर्णय से deel को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें।
संलग्नक: यथोपरि।
(deal का फार्म-ए एवं समस्त पत्रादि सहित)
भवदीय,
कमलेश कुमार
उप सचिव।
AEA-89/2026/06()/22-2-2024 तटदिनांक
Wate निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: -
l- जिला मजिस्ट्रेट, मथुरा।
2-.. पुलिस अधीक्षक, मथुरा।
3- वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय PRIN, आगरा।
4- निजी सचिव, माए मंत्री/ मा0 राज्य मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को
मा0 मंत्री जी को सूचनार्थ।
5- गार्ड फाईल।
आज्ञा से,
ममता श्रीवास्तव
अनु सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश AWEAI-89/ 2026/06/ 22-2-2024-7(806)/2025
दिनांक 27 जनवरी, 2026 का संलग्नक
सरकार के आदेश
केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी राजू पुत्र श्री जीवन लाल (दिनांक 4.06.2024
तक बंदी की आयु 46 वर्ष 06 माह 2 दिन), जुलैदी, थाना-गोवर्धन, जनपद-मथुरा का निवासी है। वादी
राकेश के अनुसार घटना दिनांक 3.08.20I7 को उसका पुत्र उम्र करीब 06 वर्ष बाहर बच्चों के साथ
खेलते-खेलते गायब हो गया। दिनांक 0.09.20i7 को बदहबास अवस्था A घर के पास पड़ा मिल्रा और
पूरे दिन सोते रहा और शाम को जब उठा तो उसने अपने A द्वार पर दर्द बताया, पूछने पर बताया कि
परिक्रमा मार्ग पर बर्फ की फैक्ट्री में काम करने वाल्रा एक आदमी उसे मुह दबाकर अपने साथ ले गया
और उसके साथ गलत काम किया, उस आदमी की पीड़ित द्वारा पहचान करने पर उसने अपना नाम राजू
पुत्र जीवन लाल FART उक्त अपराध हेतु बन्दी को सत्र संख्या- 2680/20i7 में भा०द०वि0 की धारा-377
के अन्तर्गत में विशेष न्यायाधीश Ua एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-2, मथुरा के आदेश
दिनांक 24.4.2020 @RI ॥0 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। बंदी द्वारा दिनांक 4.06.2024 तक
अपरिहार 06 वर्ष, i0 माह 26 दिन तथा BUREN 07 वर्ष ॥ माह 20 दिन की मात्र भोगी गयी सजा।
जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, मथुरा द्वारा मा0 उच्चतम “Aes
द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में बन्दी का अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करने, जेल
से छूटने पर पुनः अपराध कारित करेगा तथा समाज में भय व आक्रोश व्याप्त होने की आख्या अंकित
करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि वादी राकेश के अनुसार घटना दिनांक 37.08.20i7 को उसका पुत्र
उम्र करीब 06 वर्ष बाहर बच्चों के साथ खेलते-खेलते गायब हो गया। दिनांक 0:.09.20i7 को बदहबास
अवस्था में घर के पास पड़ा मित्रा और पूरे दिन सोते रहा और शाम को जब उठा तो उसने अपने AA
द्वार पर दर्द बताया, पूछने पर बताया कि परिक्रमा मार्ग पर बर्फ की फैक्ट्री में काम करने वाला एक
आदमी उसे मुह दबाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ गलत काम किया, उस आदमी की पीड़ित
द्वारा पहचान करने पर उसने अपना नाम राजू पुत्र श्री जीवन लाल बताया। इस तरह के अपराधियों की
समय पूर्व रिहाई से समाज में न्यायिक प्रणाली के बारे में विपरीत संदेश जायेगा। deel का अपराध समाज
को व्यापक रूप से प्रभावित करने, जेल से Bed पर पुनः अपराध में लिप होने की पूर्ण सम्भावना होने
तथा समाज में भय व आकोश व्याप्त होने का अंकन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा
निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की sear में किया गया है। इस प्रकार acl द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता
एवं जघन्यता, जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बन्दी की
समय पूर्व रिहाई का विरोध किये जाने के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आंन प्रोबेशन Vee-938 की धारा-2 के
अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी राजू पुत्र श्री जीवन ae को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की
संस्तुति नहीं की गयी है।
उक्त के ead सम्यक् विचारोपरान्त राज्यपात्र महोदया द्वारा बंदी की फार्म-ए/लाईसेंस के
आधार पर समय पूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है।
कमलेश कुमार
उप सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |