**Executive Summary**
This document, dated January 12, 2026, communicates the decision by the Uttar Pradesh government regarding the premature release of convict Brijgopal, son of Ghanshyam, incarcerated in Fatehgarh Central Jail. After reviewing the case, the Governor has rejected the release of the convict Brijgopal based on his Form-A/License, citing the severity and heinous nature of his crimes. The order instructs the Police Director General/Inspector General to inform the convict of the decision.
**Key Points / Main Content**
* **Case Details:**
* Convict: Brijgopal, son of Ghanshyam, resident of Hamirpur district.
* Crime: Murder of a woman named Sarbati and rape of a girl on March 15, 2010, with an accomplice.
* Sentence: Life imprisonment by the Additional District and Sessions Judge, Etawah, on December 11, 2012, under sections 452, 323/34, 324/34, 308/34, 304/34, 376(2) of the IPC.
* Time Served: 14 years, 1 month, and 22 days of actual imprisonment, and 17 years, 1 month of imprisonment with remission, as of June 1, 2024.
* **Rejection of Early Release:**
* District Probation Officer, Superintendent of Police, and District Magistrate of Hamirpur did not recommend early release.
* The Probation Board also opposed the release, emphasizing the severity of the crime.
* No facts were found to deviate from the assessment of the District Probation Officer, Superintendent of Police and District Magistrate.
* The Governor has rejected the release under Section 2 of the Prisoners Release on Probation Act, 1938.
* **Instructions:**
* The Central Jail, Fatehgarh, is instructed to inform the convict Brijgopal of the Governor's decision.
* The Form-A/License is being returned with the government's order marked on it.
**Impact Analysis**
**Police Director General/Inspector General, Uttar Pradesh, Lucknow:**
* **Impact:** Responsible for ensuring the government's decision is implemented.
* **Action Required:** Notify the convict, Brijgopal, of the Governor's decision to reject his early release.
**Central Jail, Fatehgarh:**
* **Impact:** Needs to update their records and processes based on the government's decision.
* **Action Required:** Accept the returned Form-A/License with the government's order marked on it and inform the convict, Brijgopal, of the decision.
**District Magistrate, Hamirpur:**
* **Impact:** Needs to be aware of the decision.
* **Action Required:** Review decision.
**Superintendent of Police, Hamirpur:**
* **Impact:** Needs to be aware of the decision.
* **Action Required:** Review decision.
**Nodal Officer/Superintendent, District Jail, Ghaziabad:**
* **Impact:** Needs to be aware of the decision.
* **Action Required:** Review decision.
Key Entities Referenced
Central Jail, Fatehgarh: Location where prisoner Brijgopal is incarcerated.
Prisoners Release on Probation Act-1938: Relevant act under which Brijgopal's early release request was considered and ultimately rejected.
Brijgopal: The prisoner whose early release is being considered and rejected.
Hathipur District: District where Brijgopal committed the crime
Uttar Pradesh Government: Issuing authority of the order to deny early release of Brijgopal
PAT-23/2026/699/22-2-2024-7(448)/2025
प्रेषक,
कमलेश कुमार,
उप सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक,
कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ दिनांक i2 जनवरी, 2026
विषय:- केन्द्रीय कारागार, फतेहगढ़ A निरूद्ध सिद्धदोष deel बृजगोपाल पुत्र श्री घनश्याम, निवासी जनपद-
हमीरपुर की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समय पूर्व रिहाई के सम्बन्ध FI
महोदय,
उपयुक्त विषयक उप महानिरीक्षक (मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश,
लखनऊ के पत्र संख्या-30380/प्रोवेशन-3-फार्म-ए/ (VA-03.0.2024), दिनांक 08.0.2024 का कृपया
संदर्भ ग्रहण करें।
2- eh पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार केन्द्रीय कारागार, फतेहगढ़ A निरूद्ध Mealy
deal बृजगोपाल पुत्र श्री घनश्याम, कलियारी, थाना-जरिया, जनपद-हमीरपुर का निवासी है। आपसी रंजिश
में बंदी ने दिनांक 5.03.20I0 को अपने Ol सहअभियुक्त के साथ मित्रकर कुल्हाड़ी, लाठी, टकोरा व
सरिया से वारकर सरबती नामक महिला की हत्या कर दी व Ol लड़की से बलात्कार किया। उक्त अपराध
हेतु बन्दी को सत्र AeA-i83/20I0 में भा०द0वि0 की धारा-452, 323/34, 324/34, 308/34,
304/34, 376(2) छः: के अन्तर्गत Alo अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट सं0-08 इटावा के आदेश
दिनांक .2.20I2 द्वारा आजीवन कारावास से दण्डित किया गया। बंदी द्वारा दिनांक 0:.06.2024 तक
अपरिहार ॥4 वर्ष, 0। माह, 22 दिन तथा सपरिहार i7 वर्ष, 0। माह की सजा भोग ली गयी है। जिला
प्रोबेशन अधिकारी, Urea अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, हमीरपुर द्वारा बंदी का अपराध व्यक्ति विशेष तक
सीमित अपराध की श्रेणी में न आने, भविष्य में अपराध किये जाने से इन्कार नही किये जाने, जेल में
और आगे निरूद्ध करने का सार्थक प्रयोजन होने, बंदी के परिवार की सामाजिक, आर्थिक दशा समय पूर्व
रिहाई हैतु उपयुक्त न होने का अंकन करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन as का अभिमत है कि प्रकरण में आपसी रंजिश में बन्दी द्वारा दिनांक 5.03.20i0 को
अपने 0॥ सहअभियुक्त के साथ मित्रकर कुल्हाड़ी, लाठी, टकोरा व GRA से वारकर सरबती नामक महिला
की हत्या कर दी व 0l लड़की से बलात्कार करने का जघन्य अपराध कारित किया गया है। जिला
प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा स्थानीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों का
सम्यक परीक्षण कर मा0 उच्चतम न्यायात्रय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में समयपूर्व रिहाई का
विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नही है, जिसके आधार पर जिला
प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिल्रा मजिस्ट्रेट की आख्या»संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा
बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स
रिलीज आन प्रोबेशन Vee-938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी बृजगोपाल पुत्र श्री घनश्याम को
फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |3- अत: उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि केन्द्रीय
कारागार, फतेहगढ़ A निरूद्ध सिद्धदोष deel बृजगोपाल (बंदी संख्या-26536) पुत्र श्री घनश्याम, निवासी
जनपद-हमीरपुर के फार्म-ए/लाईसेंस पर यू0पी0 प्रिजनर्स रिलीज आंन प्रोबेशन एक्ट, 938 की धारा-2 के
प्राविधानों के अन्तर्गत सम्यक् विचारोपरान्त उसे मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त बन्दी की
लाइसेन्स पर मुक्ति राज्यपाल्र महोदया द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए/ल्राईसेंस
पर शासन के आदेश अंकित करके एतदद्वारा वापस लौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए
शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें।
संलग्नक: यथोपरि।
(बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त varie सहित)
भवदीय,
कमलेश कुमार
उप सचिव।
CAMN-23/2026/699()/22-2-2024 तद्रदिनांक
Wate निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: -
- जिला मजिस्ट्रेट, हमीरपुर।
2-.. पुलिस अधीक्षक, हमीरपुर।
3- वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, फतेहगढ़।
4- नोडल अधिकारी»अधीक्षक, जिला कारागार, गाजियाबाद को विशेष अनुज्ञा याचिका (क्रिमि0)
UAI-529/202] WA बनाम छत्तीसगढ़ राज्य तथा सुओ मोटो रिट पिटीशन (क्रिमि0)
संख्या-04/202 पॉलिसी स्ट्रेटजी HK Mec ऑफ बेल में मा0 उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली
द्वारा पारित आदेश दिनांक 0.09.2024 के Wan Fl
5- निजी सचिव, माए0 मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ50प्र0 शासन को मा0 मंत्री जी को
सूचनार्थ।
6- निजी सचिव, माए राज्य मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को माए0 मंत्री
जी को सूचनार्थ।
7- गार्ड फाईल।
आज्ञा से,
ममता श्रीवास्तव
अनु सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश ACA -23 /2026/699/22-2-2024-7(448)/ 2025
दिनांक i2 जनवरी, 2026 का संलग्नक
सरकार के आदेश
केन्द्रीय कारागार, फतेहगढ़ में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी बृजगोपाल् पुत्र श्री घनश्याम, कलियारी,
थाना-जरिया, जनपद-हमीरपुर का निवासी है। आपसी रंजिश में बंदी ने दिनांक 5.03.20I0 को अपने Ot
सहअभियुक्त के साथ मिलकर कुल्हाड़ी, लाठी, टकोरा व सरिया से वारकर सरबती नामक महिला की हत्या
कर दी व Ol लड़की से बलात्कार किया। उक्त अपराध हेतु Feel को सत्र AEAT-783/20I0 में भा0द0वि0
की धारा-452, 323/34, 324/34, 308/34, 304/34, 376(2) छः के अन्तर्गत Alo अपर जिला एवं
सत्र न्यायाधीश, कोर्ट सं0-08 इटावा के आदेश दिनांक 4.2.20i2 द्वारा आजीवन कारावास से दण्डित
किया गया। बंदी द्वारा दिनांक 0.06.2024 तक अपरिहार ॥4 वर्ष, 0। माह, 22 दिन तथा सपरिहार 7
वर्ष, 0॥ माह की सजा भोग ली गयी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट,
हमीरपुर द्वारा बंदी का अपराध व्यक्ति विशेष तक सीमित अपराध की श्रेणी में न आने, भविष्य में अपराध
किये जाने से इन्कार नही किये जाने, जेल में और आगे निरूद्ध करने का सार्थक प्रयोजन होने, बंदी के
परिवार की सामाजिक, आर्थिक दशा समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त न होने का अंकन करते हुए समयपूर्व
रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में आपसी रंजिश में बन्दी द्वारा दिनांक 5.03.20i0 को
अपने Ol सहअभियुक्त के साथ Aa कुल्हाड़ी, लाठी, टकोरा व सरिया से वारकर सरबती नामक महिला
की हत्या कर दी व 0l लड़की से बलात्कार करने का जघन्य अपराध कारित किया गया है। जिला
प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा स्थानीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों का
सम्यक परीक्षण कर AIO उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में समयपूर्व रिहाई का
विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नही है, जिसके आधार पर जिला
प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिल्रा मजिस्ट्रेट की आख्या»संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा
बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स
रिलीज आन प्रोबेशन Vee-938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी बृजगोपाल पुत्र श्री घनश्याम को
फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है।
उक्त के दृष्टिगत सम्यक् विचारोपरान्त राज्यपाल महोदया द्वारा बंदी की फार्म-ए/लाईसेंस के
आधार पर समय पूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है।
कमलेश कुमार
उप सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |