**कार्यकारी सारांश:**
इस दस्तावेज़ में सिंगल विंडो पोर्टल 'निवेश मित्र' पर उपलब्ध कराई गई ऑनलाइन सेवाओं के लिए ऑफ़लाइन आवेदन और प्रोसेसिंग पर प्रतिबंध है, जिसका उद्देश्य ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में सुधार करना है। यह निर्देश 1 जुलाई, 2018 से लागू है और इसके लिए 31 दिसंबर, 2020 तक अनुपालन सुनिश्चित करने की समय सीमा निर्धारित है। दस्तावेज़ सभी संबंधित विभागों के लिए है और सख्त अनुपालन के लिए निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
**मुख्य बातें / मुख्य सामग्री:**
*सिंगल विंडो पोर्टल और ऑनलाइन सेवाएं:*
* प्रदेश में 1 जुलाई, 2018 से सिंगल विंडो पोर्टल 'निवेश मित्र' लागू है।
* सभी औद्योगिक स्वीकृतियाँ, अनापत्तियाँ और अनुमतियाँ अब अनिवार्य रूप से केवल 'निवेश मित्र' पोर्टल के माध्यम से ही प्राप्त की जानी हैं।
* सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
*ऑफलाइन आवेदन और प्रोसेसिंग पर प्रतिबंध:*
* ऑनलाइन उपलब्ध सेवाओं के लिए ऑफलाइन आवेदन लेने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
* ऑनलाइन आवेदन करने वाले आवेदकों से दस्तावेजों की हार्ड कॉपी मांगने या उन्हें व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में आने के लिए कहने की अनुमति नहीं है।
*अनुपालन और कार्रवाई:*
* विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑनलाइन सेवाओं के स्थिरीकरण के लिए अधिकतम 3 महीने का समय दिया जाए, जिसके बाद कोई भी ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
* विभागों को इन निर्देशों के अनुपालन की मासिक समीक्षा करनी होगी और निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी।
* 31 दिसंबर, 2020 तक निर्देशों के अनुपालन पर जारी किए गए विभागीय शासनादेशों की प्रतियां इन्वेस्ट यूपी को उपलब्ध करानी होंगी।
**प्रभाव विश्लेषण:**
**हितधारक:** अपर मुख्य सचिव/प्रमुखसचिव, सभी संबंधित विभाग।
**प्रभाव:**
उन्हें 'निवेश मित्र' पोर्टल पर ऑनलाइन सेवाओं के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।
**आवश्यक कार्रवाई:**
* उन्हें ऑनलाइन सेवाओं के लिए ऑफ़लाइन आवेदनों को प्रतिबंधित करने के लिए तत्काल शासनादेश जारी करना होगा।
* उन्हें इन निर्देशों के अनुपालन की मासिक समीक्षा करनी होगी।
* निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करनी होगी।
* उन्हें 31 दिसंबर, 2020 तक जारी किए गए शासनादेशों की प्रतियां इन्वेस्ट यूपी को उपलब्ध करानी होंगी।
**हितधारक:** विभागीय अधिकारी
**प्रभाव:**
उन्हें अब ऑनलाइन उपलब्ध सेवाओं के लिए ऑफ़लाइन आवेदन स्वीकार करने की अनुमति नहीं है, और आवेदकों को कार्यालय आने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
**आवश्यक कार्रवाई:**
* उन्हें निर्देशों का पालन करना होगा, ऐसा न करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
**हितधारक:** आवेदक / कम्पनियाँ
**प्रभाव:**
औद्योगिक अनुमोदन, अनापत्ति और अनुमति की प्रक्रिया को ऑनलाइन करना।
**आवश्यक कार्रवाई:**
औद्योगिक अनुमोदन, अनापत्ति और अनुमति प्राप्त करने के लिए, 'निवेश मित्र' पोर्टल पर ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करना।
Key Entities Referenced
निवेश मित्र: सिंगल विण्डो पोर्टल (सिंगल विंडो पोर्टल) जो प्रदेश में औद्योगिक स्वीकृति, अनापत्ति, अनुमति इत्यादि के आवेदन के लिए बनाया गया है।
ईज ऑफ डूईंग बिज़नेस: व्यापार करने में सुगमता की समीक्षा।"
औद्योगिक विकास विभाग: उत्तर प्रदेश सरकार का एक विभाग।
उ०प्र० शासन: उत्तर प्रदेश सरकार।
इन्वेस्ट यूपी: उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने वाली एजेंसी।
संख्या: 37/2020/394/77-6-20-08(CH)/2072¢.. ei. 8 (कैबिनेट)
प्रेषक,
राजेन्द्र कुमार तिवारी,
मुख्य सचिव,
उ0प्र0 शासन।
सेवा में,
अपर मुख्य सचिव/प्रमुखसचिव,
कृषि/राजस्व/राज्य कर/आबकारी/श्रम/स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन/उपभोकक््ता संरक्षण एवं बांट
माप/ऊर्जा/खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन/पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन/आवास एवं
शहरी नियोजन/चिकित्सा Ud स्वासथ्य/लोक निर्माण/नगर विकास/गृह/भूतत्व Ud खनिकर्म/
आई.टी. Ud इलेक्ट्रानिक्स/सूचना एवं जनसम्पर्क /नमामि गंगे/वित्त विभाग,
उ0प्र0 शासन।
औद्योगिक विकास अनुभाग-6 लखनऊ : दिनांक 4 दिसम्बर, 2020
विषय- सिंगल विण्डो पोर्टल 'निवेश मित्र' पर उपलब्ध करायी गयी ऑनलाईन सेवाओं में ऑफलाईन
आवेदन/प्रोसेसिंग को कड़ाई से प्रतिबन्धित किये जाने के सम्बन्ध में।
महोदय,
सिंगल विण्डो पोर्टल 'निवेश मित्र' को प्रदेश में दिनांक 0। जुलाई, 208 से लागू किये जाने
हेतु आवश्यक दिशा निर्देश/मार्गदर्शी सिद्धान्त जारी किये गये थे। शासनादेश दिनांक 09 अगस्त, 208
द्वारा आंशिक संशोधन करते हुए सभी सम्बन्धित विभागों को दिनांक 0। जुलाई, 20:8 से केवल सिंगल
विण्डो पोर्टल निवेश मित्र के माध्यम से ही समस्त औद्योगिक स्वीकृति, अनापत्ति, अनुमति इत्यादि के
आवेदन आवश्यक रूप से प्राप्त करने के निर्देश जारी किये गये।
2- .... ईज ऑफ Set बिज़नेस की समीक्षा मा0 मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक
दिनांक 4 सितम्बर, 2020 को की गयी, जिसमें अन्य बिन्दुओं के साथ यह भी निर्णय लिया गया था कि
सभी विभाग अविलम्ब शासनादेश जारी कर यह व्यवस्था सुनिश्चित करायेंगे कि जो सेवाएं ऑन लाइन
उपलब्ध करा दी गयी है अथवा भविष्य में हो जाती है, उनके लिये ऑफ लाइन आवेदन लिया जाना
बिना किसी अपवाद के प्रतिबन्धित होगा और यदि कोई विभागीय अधिकारी ऑफ लाइन आवेदन पत्र
स्वीकार करता है तो उसके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की जायेगी।
3- निवेश मित्र पोर्टल पर उपलब्ध करायी गयी ऑनलाईन सेवाओं के लिये आफलाइन आवेदन
प्राप्त करने तथा ऑनलाइन प्राप्त आवेदन-पत्रों की आफलाइन प्रोसेसिंग करने को प्रतिबन्धित
करने के सम्बन्ध में शासन के स्पष्ट निर्देश होने के पश्चात् भी विभिन्न स्रोतों से इस प्रकार
की शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि अभी भी कतिपय विभागों द्वारा जिन सेवाओं को ऑनलाइन
उपलब्ध करा दिया गया है उनके लिये आफलाइन आवेदन प्राप्त किये जा रहे हैं तथा
कुछ मामलों में ऑनलाइन प्राप्त आवेदन-पत्रों की प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में आवेदक से
अभिलेखों की हार्डकॉपी कार्यालय में जमा करने के लिये कहा जा रहा है अथवा आवेदक
को कार्यालयों में आने के लिये विवश किया जा रहा है। यह प्रक्रिया स्वीकार किए जाने योग्य
नहीं है।
I- Fe शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है।
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in & सत्यापित की जा सकती है |4- Yea में so ऑफ gen बिजनेस में उत्तरोत्तर सुधार लाने के लिये प्रदेश सरकार
इस बात के लिये बचनबद्ध है कि अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध
कराया जाय और उपलब्ध करायी गयी ऑनलाइन सेवाओं के लिये किसी भी दशा में न तो
ऑफलाइन आवेदन प्राप्त किया जाए और न ही ऑनलाइन आवेदन करने वाले आवेदकों
से अभिलेखों की हार्डकॉपी देने अथवा उनसे कार्यालय में सम्पर्क करने के लिये बुलाया
जाए।
५- ... अत: मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि कृपया अपने विभागीय अधिकारियों को इस
सम्बन्ध में स्पष्ट एवं कड़े निर्देश देने के लिये अविलम्ब शासनादेश निर्गत करायें कि जो भी
सेवायें ऑनलाइन उपलब्ध करा दी जाती हैं उनके स्टेबिलाईजेशन के लिये अधिकतम 03
माह का समय प्रदान किया जाए और 03 माह की अवधि बीतने के बाद किसी भी दशा
में न तो कोई आफलाइन आवेदन प्राप्त किया जाएगा और न ही ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों
की प्रोसेसिंग के लिये आवेदकों को हार्डकॉपी देने के लिये विवश किया जाएगा और न ही
उन्हें किसी भी अन्य कारण से कार्यालय में बुलाया जाएगा। शासनादेश में यह भी स्पष्ट
कर दिया जाए कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने पर सम्बन्धित अधिकारी के विरूद्ध
कठोर विभागीय कार्यवाही की जाएगी।
6-... विभागीय स्तर पर अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव के स्तर पर प्राप्त इन निर्देशों
के अनुपालन की प्रत्येक माह समीक्षा की जाए और निर्देशों के उल्लंघन करने वाले
अधिकारियों के विरूद्ध कठोर विभागीय कार्यवाही कराया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।
7-... कृपया उपरोक्त निर्देशों के क्रम में जारी किये गये अपने विभागीय शासनादेश की
प्रति इन्वेस्ट यूपी को प्रत्येक दशा में 37 दिसम्बर, 2020 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
भवदीय,
राजेन्द्र कुमार तिवारी
मुख्य सचिव।
UBA:37/2020/394()/77-6-20-08(RA)/202¢L. a. 8 (कैबिनेट) तद्दिनांक
प्रतिलिपित निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित-
. अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उ0प्र0।
2. अपर मुख्य सचिव, Alo मुख्यमंत्री जी।
3. मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यू0पी0 |
4. समस्त मण्डलायुक्त, उ0प्र0 |
5. समस्त जिलाधिकारी, Joyo |
6. औद्योगिक विकास विभाग के समस्त अनुभाग।
7. गार्ड फाइल।
आज्ञा से,
आलोक कुमार
अपर मुख्य सचिव।
I- Fe शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है।
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in & सत्यापित की जा सकती है |