Date: 2026-01-27Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
जिला कारागार, मेरठ में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी खालिद पुत्र श्री जमीलउददीन, निवासी जनपद- मेरठ की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्ब्न्ध में।
**Executive Summary**
This document, dated January 27, 2026, from the Uttar Pradesh government, addresses the early release of convicted prisoner Khalid, son of Jameel Uddin, from Meerut District Jail based on Form-A/License. It references a previous communication on the same matter. The document states that the Governor has rejected the early release of the prisoner. The prison is required to acknowledge receipt of the order and promptly inform the prisoner of the decision.
**Key Points / Main Content**
* **Subject:** Early release denial for convicted prisoner Khalid from Meerut District Jail.
* **Background:**
* Khalid is a resident of Bani Sarai, Kotwali, Meerut.
* He was convicted in two separate cases:
* **Case 1 (FIR 82/1994):** Murdered Sarfaraz with a pistol along with an accomplice (January 7, 1990). Sentenced to life imprisonment on January 25, 2005.
* **Case 2 (FIR 668/2003):** Murdered 3 individuals with firearms along with 4 accomplices (June 7, 2003). Initially sentenced to death, later commuted to life imprisonment with the condition of no remission until 20 years of actual imprisonment served (August 4, 2007).
* **Sentence Details:**
* As of July 19, 2023, Khalid had served:
* 18 years, 10 months, and 4 days of non-remissible sentence and 24 years, 9 months, 24 days of remissible sentence in the first case.
* 20 years and 23 days of non-remissible sentence in the second case.
* Khalid's current age is 63 years.
* **Probation and Law Enforcement Assessment:**
* The District Probation Officer, Senior Superintendent of Police, and District Magistrate of Meerut opposed early release.
* Their assessment, based on Supreme Court guidelines, indicated:
* The crimes severely impacted society.
* Khalid cannot be ruled out from committing further crimes.
* No meaningful purpose would be served by further detention.
* The family's social and economic conditions do not warrant early release.
* **Decision:**
* The Probation Board opined that early release would send a negative message about the judicial system.
* Considering the severity and heinousness of the crimes and opposition from local authorities, the request for early release under the Prisoners Release on Probation Act-1938, Section 2, based on Form-A/License, has been rejected by the Governor.
* The returned Form-A/License, with the government's decision, should be acknowledged and the prisoner informed immediately.
**Impact Analysis**
**Meerut District Jail (Superintendent)**
* **Impact:** Required to acknowledge receipt of the order and inform prisoner Khalid of the rejection of his early release.
* **Action Required:** Acknowledge receipt of the returned Form-A/License and inform Khalid of the Governor's decision.
**District Magistrate, Meerut**
* **Impact:** Must be aware of the decision
* **Action Required:** N/A, for information.
**Superintendent, Meerut District Jail**
* **Impact:** Must be aware of the decision
* **Action Required:** N/A, for information.
**Department of Prisons Administration and Reform Services, Section-2, Uttar Pradesh Government**
* **Impact:** Departmental recording.
* **Action Required:** N/A, for information.
Key Entities Referenced
District Jail, Meerut: Location where the prisoner Khalid is incarcerated.
Khalid: The prisoner whose premature release is under consideration and ultimately rejected.
UP Prisoners Release on Probation Act, 1938: Law under which the premature release of the prisoner was being considered (specifically Section 2).
Meerut: District where the crimes were committed and where the prisoner is incarcerated.
Ghaziabad: District where the initial life imprisonment sentence was delivered.
EEA-33/2026/202H-2/22-3-2024-I7((338)/2023
प्रेषक,
कमलेश कुमार,
उप सचिव
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
पुलिस महानिदेशक /महानिरीक्षक,
कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-3 लखनऊ: दिनांक 27 जनवरी, 2026
विषय:- जिला कारागार, मेरठ में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी खाल्निद पुत्र श्रीे जमीलठददीन, निवासी जनपद-
मेरठ की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक अपने कार्यालय के पत्र संख्या-30070/प्रोवेशन-3-फार्म-ए/ (एम0-05.09.2023)
feath-04.0.2023 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें।
2- अक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार जिला कारागार, मेरठ में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी
खालिद पुत्र श्री जमीलठददीन, बनी सराय, थाना-कोतवाली, जनपद-मेरठ का निवासी है। ट्राली खाली न
होने के विवाद में गाली दिये जाने से मना करने की रंजिश को लेकर दिनांक 07.0:.990 को बनन््दी ने
अपने 0। सहअभियुक्त के साथ मित्रकर पिस्तौल से गोली मारकर सरफराज नामक व्यक्ति की हत्या कर
दी। द्वितीय वाद में जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने की रंजिश को लेकर दिनांक 07.06.2003 को acct
ने अपने 04 सहअभियुकतों के साथ मिल्रकर dean, रिवाल्वर व रायफल से गोली मारकर 03 व्यक्तियों
की हत्या कर दी। प्रथम वाद में बन्दी को सत्र परीक्षण संख्या-82/994 के अन्तर्गत भा0द0वि0 की
धारा-302/34 में Alo अपर जिला एवं सत्र नन्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-02, गाजियाबाद के आदेश
दिनांक 25.0:.2005 द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया गया। द्वितीय वाद में बन्दी को
सत्र परीक्षण संख्या-668/2003 के अन्तर्गत भा0द0वि0 की धारा-48, 307/49, 302/49 व 25
आर्म्स एक्ट A मा० अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-0।, मेरठ के आदेश दिनांक
04.08.2007 द्वारा मृत्युदण्ड की सजा से दण्डित किया गया। मा0 उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा
मृत्युदण्ड की सजा को आजीवन कारावास मैं परिवर्तित इस शर्त के साथ किया गया कि बन्दी द्वारा 20
वर्ष की वास्तविक सजा पूरी किये जाने तक रिमिशन का पात्र नहीं होगा। बन्दी द्वारा दिनांक 9.07.2023
तक प्रथम वाद में i8 वर्ष, 40 माह 04 दिन की अपरिहार सजा तथा 24 वर्ष, 09 माह 24 दिन की
सपरिहार सजा एवं द्वितीय वाद में 20 वर्ष 23 दिन की अपरिहार की सजा भोगी गयी है एवं बन्दी की
आयु 63 वर्ष है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ द्वारा Alo
उच्चतम न्यायात्रय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या मेँ बन्दी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक
रूप से प्रभावित करने, भविष्य में अपराध कारित करने से इन्कार नहीं किये जाने, पुन:अपराध करने में
अशक्त नहीं होने, जेल में और आगे निरूद्ध रखने का सार्थक प्रयोजन होने, बन्दी के परिवार की
सामाजिक, आर्थिक दशा समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नहीं होने की आख्या अंकित करते हुए aed) की
समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन बोर्ड के सदस्यों का अभिमत है कि इस तरह के अपराधियों की समयपूर्व रिहाई के समाज
में न्यायिक प्रणाली बारे में विपरीत संदेश जायेगा। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |एवं जघन्यता, जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बन्दी की
समयपूर्व रिहाई का विरोध किये जाने के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज ऑन प्रोबेशन Vec-938 की धारा-2 के
अन्तर्गत सिद्धदोष बन्दी खालिद पुत्र श्री जमीलठददीन को फार्म-ए/लाईसेन्स के आधार पर रिहा किये जाने
की संस्तुति नहीं की गयी है।
3- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि जिला
कारागार, मेरठ में निरूद्ध Waele deci खालिद (बन्दी संख्या-]780/2005) पुत्र श्री जमीलठददीन,
निवासी जनपद-मेरठ को फार्म-ए/लाईसेंस पर यू0पी0 प्रिजनर्स रिलीज ऑन प्रोबेशन Vac, 938 की
धारा-2 के प्राविधानों के अन्तर्गत सम्यक् विचारोपरान्त मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त
बन्दी की लाइसेन्स पर मुक्ति श्री राज्यपाल द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार बंदी के फार्म-
ए/लाईसेंस पर शासन के आदेश अंकित करके एतद्द्वारा वापस लौटाया जा रहा है। कृपया प्रासि स्वीकार
करते हुए शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें।
संलग्नक: यथोपरि।
(बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त पत्रादि सहित)
भवदीय,
कमलेश कुमार
उप सचिव।
संख्या व दिनांक ada:
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: -
- जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ।
2- अधीक्षक, जिला कारागार, मेरठ।
3- कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2, ठ0प्र0 शासन।
4- गार्ड फाईल।
आज्ञा से,
ममता श्रीवास्तव
अनु सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश WSAT-33/2026/ 202H-2/ 22-3-2024-I7(338)/2023
दिनांक 27 जनवरी, 2026 का संलग्नक
सरकार के आदेश
जिला कारागार, मेरठ में fee सिद्धदोष deci खालिद पुत्र श्री जमीलठददीन, बनी सराय, थाना-
कोतवाली, जनपद-मेरठ का निवासी है। ट्राली खाली न होने के विवाद में गाली दिये जाने से मना करने
की रंजिश को लेकर दिनांक 07.0i.990 को बन्दी ने अपने 0। सहअभियुकत के साथ मिल्रकर पिस्तौत्र
से गोली मारकर सरफराज नामक व्यक्ति की हत्या कर Al द्वितीय वाद में जमीन पर जबरदस्ती कब्जा
करने की रंजिश को लेकर दिनांक 07.06.2003 को बन्दी ने अपने 04 सहअभियुक्तों के साथ मित्रकर
बन्दूक, रिवाल्वर व रायफल से गोली मारकर 03 व्यक्तियों की हत्या कर दी। प्रथम वाद A बन्दी को सत्र
परीक्षण GSA-82/994 के अन्तर्गत भा0द0वि0 की धारा-302/34 A Alo अपर जिला एवं सत्र
न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-02, गाजियाबाद के आदेश दिनांक 25.0:.2005 द्वारा आजीवन
कारावास की सजा से दण्डित किया गया। द्वितीय वाद में बन्दी को सत्र परीक्षण संख्या-668/2003 के
अन्तर्गत भा0द0वि0 की धारा-48, 307/749, 302/749 व 25 आर्म्स एक्ट A Alo अपर जिला एवं सत्र
न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-0।, मेरठ के आदेश दिनांक 04.08.2007 द्वारा मृत्युदण्ड की सजा से दण्डित
किया गया। मा0 उच्च न्यायाल्रय, इलाहाबाद द्वारा मृत्युण्ड की सजा को आजीवन कारावास मेँ परिवर्तित
इस शर्त के साथ किया गया कि बन्दी द्वारा 20 वर्ष की वास्तविक सजा पूरी किये जाने तक रिमिशन का
पात्र नहीं होगा। deel द्वारा दिनांक 9.07.2023 तक प्रथम वाद में i8 वर्ष, ॥0 माह 04 दिन की
अपरिहार सजा तथा 24 वर्ष, 09 माह 24 दिन की सपरिहार सजा एवं द्वितीय वाद में 20 वर्ष 23 दिन
की अपरिहार की सजा भोगी गयी है एवं बन्दी की आयु 63 वर्ष है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ
पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ द्वारा Alo उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की
आख्या में बन्दी द्वारा HINA अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करने, भविष्य में अपराध कारित
करने से इन्कार नहीं किये जाने, पुन:अपराध करने में अशक्त नहीं होने, जेल में और आगे निरूद्ध रखने
का सार्थक प्रयोजन होने, बन्दी के परिवार की सामाजिक, आर्थिक दशा समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नहीं
होने की आख्या अंकित करते हुए बन्दी की समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन बोर्ड के सदस्यों का अभिमत है कि इस तरह के अपराधियों की समयपूर्व रिहाई के समाज
में न्यायिक प्रणाली बारे में विपरीत संदेश जायेगा। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता
एवं जघन्यता, जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बन्दी की
समयपूर्व रिहाई का विरोध किये जाने के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज ऑन प्रोबेशन Vec-938 की धारा-2 के
अन्तर्गत सिद्धदोष बन्दी खालिद पुत्र श्री जमीलठददीन को फार्म-ए/लाईसेन्स के आधार पर रिहा किये जाने
की संस्तुति नहीं की गयी है।
उक्त के ead सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा बंदी की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर
समयपूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है।
कमलेश कुमार
उप सचिव ।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |