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Date: 2026-01-23 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

जनपद-सिद्धार्थनगर के विकास खण्ड-इटवा के परिसर में एक सभागार के निर्माण हेतु अवशेष धनराशि की वित्तीय स्वी‍कृति।

Issued by ग्राम्य विकास विभाग · ग्राम्य विकास विभाग

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Executive Summary & Key Takeaways

ज़रूर, अनुरोधित संरचना का उपयोग करके दिए गए नीति दस्तावेज़ का सारांश यहां दिया गया है: **कार्यकारी सारांश** यह दस्तावेज़ सिद्धार्थनगर जिले के इटवा विकास खंड में एक सभागार के निर्माण के लिए 4,725,000 रुपये (सैतालीस लाख पच्चीस हजार रुपये) की अतिरिक्त धनराशि जारी करने की स्वीकृति देता है। यह स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किया जाना है। इस सभागार के निर्माण के लिए पहले 94.50 लाख रुपये की मंजूरी दी गई थी, जिसमें 47.25 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की गई थी। यह दस्तावेज़ विशिष्ट नियमों, शर्तों और अनुपालन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य करता है। **मुख्य बातें** *वित्तीय स्वीकृति और व्यय* * वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में धनराशि का प्रावधान किया गया है। * यह स्वीकृति किसी भी प्रकार के व्यय करने का अधिकार नहीं देती है। * संबंधित नियमों और विनियमों के अनुपालन के अधीन पहले से जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। * फंड का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए जिसके लिए मंजूरी दी गई है, और किसी अन्य कार्य में डायवर्ट नहीं किया जाना चाहिए। * फंड को एकमुश्त आहरित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि कार्यदायी संस्था द्वारा आवश्यकतानुसार आहरित किया जाना चाहिए। * व्यय मौजूदा सार्वजनिक निर्माण विभाग की दरों के अनुसार किया जाना चाहिए। *अनुपालन और जवाबदेही* * निर्धारित मानकों और विशिष्टताओं के अनुसार निर्माण कार्य किया जाना चाहिए। * धनराशि के पूर्ण उपयोग के बाद सरकार को उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए। * ई-परियोजना प्रबंधन वेबसाइट पर सभी परियोजनाओं की जानकारी आयुक्त, ग्राम्य विकास, मुख्य विकास अधिकारी और कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा हर महीने अपडेट की जानी चाहिए। * निर्माण कार्य स्वीकृत लागत के भीतर निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाना चाहिए। **प्रभाव विश्लेषण** **प्रमुख हितधारक:** उत्तर प्रदेश सरकार **प्रभाव:** सरकार सभागार के निर्माण के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। **आवश्यक कार्रवाई:** सभी नियमों का पालन करें और धन के उचित उपयोग और निर्माण प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित करें। **प्रमुख हितधारक:** आयुक्त, ग्राम्य विकास **प्रभाव:** आयुक्त, ग्राम्य विकास को निर्माण परियोजना के वित्तीय और भौतिक प्रगति की निगरानी करनी होगी। **आवश्यक कार्रवाई:** यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से निगरानी करें कि परियोजना समय पर और निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी हो। **प्रमुख हितधारक:** संबंधित मुख्य विकास अधिकारी और कार्यदायी संस्था **प्रभाव:** उन्हें निर्माण प्रक्रिया का प्रबंधन करने, धन का उपयोग करने और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। **आवश्यक कार्रवाई:** निर्माण शुरू करने और पूर्ण करने के लिए राज्य के दिशानिर्देशों का पालन करें और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट जमा करें। **प्रमुख हितधारक:** वित्त नियंत्रक/मुख्य/वरिष्ठ लेखा अधिकारी **प्रभाव:** वित्तीय शर्तों के अनुपालन की निगरानी के लिए जिम्मेदार। **आवश्यक कार्रवाई:** यह सुनिश्चित करें कि वित्तीय नियमों का पालन किया जाए। यदि कोई विसंगति हो तो रिपोर्ट करें। **प्रमुख हितधारक:** जिलाधिकारी, सिद्धार्थनगर **प्रभाव:** जिले में परियोजना के कार्यान्वयन की देखरेख के लिए जिम्मेदार। **आवश्यक कार्रवाई:** यह सुनिश्चित करें कि निर्माण कार्य सुचारू रूप से चले।

Key Entities Referenced

उत्तर प्रदेश शासन: उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार, जो नीतियों को जारी करने और निर्माण कार्यों को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार है। ग्राम्य विकास अनुभाग-2: ग्रामीण विकास विभाग का खंड जो विशिष्ट नीति कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है, इस मामले में, एक सभागार का निर्माण। जनपद-सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश का एक जिला जहाँ सभागार निर्माण परियोजना स्थित है। विकास खण्ड-इटवा: जनपद-सिद्धार्थनगर में एक ब्लॉक जहाँ सभागार निर्माण परियोजना को मंज़ूरी दी जा रही है। वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-1: वित्त विभाग का खंड जो वित्तीय मंजूरियाँ जारी करने और बजट के प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
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संख्या-5/2026/ |-274599 /सा0-38/38-2-2025 007-38-2099-99-0-2026 प्रेषक, जयनाथ यादव, विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, आयुक्त, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश लखनऊ। ग्राम्य विकास अनुभाग-2 लखनऊ : दिनांक 23 जनवरी, 2026 विषय:- जनपद-स्िद्धार्थनगर के विकास खण्ड-इटवा के परिसर में एक सभागार के निर्माण हेतु अवशेष धनराशि की वित्तीय स्वीकृति। महोदय, उपर्युक्त विषय के सन्दर्भ में अवगत कराना है कि शासनादेश ACAT-23/202/Al0-40/ 38-2-202, दिनांक 08 मार्च, 202 द्वारा जनपद-सिद्धार्थनगर के विकास खण्ड-इटवा के परिसर में एक सभागार के निर्माण हेतु रू0 94.50 लाख (रूपये चौरान्‍नवे लाख पचार हजार मात्र) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति निर्गत करते हुए वर्ष 2020-2 में प्रथम किश्त के रूप में HO 47.25 लाख (रूपये सैतालीस लाख पचीस हजार मात्र) अवमुक्त की गयी थी। 2- आपके पत्रांक-79/मु0प्राएप0/एतसप“/सामु0वि0/2024-25, दिनांक 2। जनवरी, 2025 द्वारा उपलब्ध कराये गये परियोजना हेतु अवमुक्त की गयी धनराशि का उपभोग प्रमाण-पत्र एवं अन्य संगत अभिलेखों एवं वित्त विभाग के कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 27 मार्च, 2025 में दिये गये निर्देश के क्रम में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि ure वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद-सिद्धार्थनगर के विकास खण्ड-इटवा के परिसर में एक सभागार के निर्माण हेतु द्वितीय किश्त/अन्तिम किश्त के रूप में धनराशि BO 47.25 लाख (रूपये सैतालीस लाख पचीस हजार मात्र) की स्वीकृति निम्नलिखित शर्तों/प्रतिबन्धों के अधीन श्री राज्यपात्र प्रदान करते हैं :- नियम व शर्ते / प्रतिबन्धों (।) वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित धनराशि के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृतियाँ निर्गत किये जाने विषयक वित्त (आय-व्ययक)अनुभाग-। के कार्याल्य-ज्ञाप संख्या-6/2025/बी--352/दस-2025- 23/2025 दिनांक 27 मार्च, 2025 एवं अन्य सुसंगत शासनादेशों/मानकों A प्रावधानित व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा और शासनादेश में दिये गये अन्य दिशा निर्देशों का भी अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। (2) प्रश्नगत प्रस्ताव का परीक्षण बजट की उपलब्धता के आधार पर किया गया है। UAT धनराशि की स्वीकृति किसी प्रकार के व्यय करने का प्राधिकार नहीं देता है। जिन मामलों में उ0प्र० बजट मैनुअल और फाईनेंशियल 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |हैण्डबुक के नियमों तथा अन्य स्थायी आदेशों के अन्तर्गत राज्य WHR /heg सरकार अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त की जानी आवश्यक हो, उन मामलों में व्यय करने से पूर्व ऐसी स्वीकृति अवश्य प्राप्त कर ली जाय। (3) निर्माण कार्य निर्धारित मानकों एवं विशिष्टियों के अनुसार कराये जायेंगे। निर्माण के समय मात्राओं को सुनिश्चित किये जाने का पूर्ण उत्तरदयित्व कार्यदायी संस्था का होगा। (4) उक्त धनराशि का आहरण आवश्यकतानुसार ही किया जायेगा, जिस बाउचर संख्या एवं जिस तिथि को धनराशि कोषागार से आहरित की जाय, उसका विवरण महालेखाकार, उ0प्र0 एवं आयुक्त, ग्राम्य विकास एवं शासन को अविलम्ब प्रेषित किया जाय तथा धनराशि के पूर्ण उपयोग की सूचना शासन को उपलब्ध करायी जाय। निर्माण कार्य के वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की सूचना प्रतिमाह आयुक्त, ग्राम्य विकास को भेजी जाय। (5) इस धनराशि का उपयोग उसी प्रकार किया जायेगा, जिसके लिए धनराशि स्वीकृत की जा रही है तथा इसे अन्य कार्यों के लिए डाइवर्ट नहीं किया जायेगा, जैसे ही धनराशि का पूर्ण उपयोग हो जाय, उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र शासन को प्रेषित कर दिया जाय। (6) इस धनराशि से निष्पादित कराये जाने वाले कार्यों के लेखों की लेखा परीक्षा भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के विवेकानुसार की जायेगी। (7) आयुक्त, ग्राम्य विकास, सम्बन्धित मुख्य विकास अधिकारी एवं कार्यदायी संस्था द्वारा ई-परियोजना प्रबन्धन वेबसाइट पर दर्ज परियोजनाओं की सूचना प्रत्येक माह अद्यतन किया जाय। (8) कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 27 मार्च, 2025, शासनादेश दिनांक 08 मार्च, 202। एवं इस शासनादेश का अनुपालन विभाग में कार्यरत वित्त नियंत्रक/ मुख्य/वरिष्ठ लेखाधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, सुनिश्चित करेंगे तथा यदि निर्धारित शर्तों में किसी प्रकार का विचलन हो तो सम्बन्धित वित्त नियंत्रक आदि का दायित्व होगा कि वे मामले की पूर्ण सूचना विवरण सहित शासन“वित्त विभाग को प्रेषित करेंगे। (9) उक्त कार्यों की वर्तमान तथा भविष्य में अन्य योजनाओं#कार्यक्रम में पुनरावृत्ति/द्विरावृत्ति नहीं की जायेगी। (0) स्वीकृत धनराशि के संबंध में वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग- के कार्यालय-ज्ञाप ACAl-6/2025/a-- 352/G8-2025-23:/2025 दिनांक 27 मार्च, 2025 का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कार्यदायी संस्था को जो धनराशि अवमुक्त की जायेगी वह कार्य की आवश्यकता के अनुसार आहरण एवं वितरण अधिकारी द्वारा कोषागार से HET कर उपलब्ध करायी जाय तथा कार्यदायी संस्था को दी गयी धनराशि के 75 प्रतिशत का उपभोग करने के उपरान्त पुन: आवश्यक धनराशि कोषागार से आहरित करके दी जाय। (I) उक्त निर्माण कार्य स्वीकृत लागत से निर्धारित समयावधि में ही पूरे किये जायेंगे। इस हेतु कोई अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत नहीं की जायेगी। (2) स्वीकृत की जा रही धनराशि को आहरित कर किसी भी दशा में पी0एल0ए0»बैंक/डाकघर में नहीं रखा जायेगा। (3) स्वीकृत की जा रही धनराशि जिस Aaya हेतु दी जा रही है उसी मद/कार्य में ही व्यय की जायेगी। इसका किसी अन्य मद#कार्य में व्यय अनुमन्य नहीं होगा। (4) धनराशि का व्यय ae वित्तीय वर्ष में सुनिश्चित किया जायेगा। (5) प्रायोजना A सम्मिलित उपकरणों आदि का क्रय सुसंगत क्रय नियमों के अन्तर्गत सुनिश्चित किया जायेगा। (6) धनराशि एकमुश्त आहरित न करके अपितु आवश्यकतानुसार आहरित कर व्यय हेतु कार्यदायी संस्था को उपलब्ध करायी जायेगी। Re यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | Il इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(7) कार्यदायी GEA द्वारा प्रश्गनगत धनराशि के व्यय हेतु संगत शासनादेशों में निहित व्यवस्था व निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। (8) स्वीकृत की जा रही धनराशि से कराये जाने वाले निर्माण कार्यों में क्रय की जाने वाली सामग्री आदि के सम्बन्ध में निर्गत संगत शासनादेशों व वित्तीय नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। (9) परियोजना में टाइम ओवर रन/कास्ट ओवर रन को नियंत्रित करने के सम्बन्ध में वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग- द्वारा निर्गत शासनादेश AAM-O7 /20i7 /At--823/AH-207-VA -04/20i7, दिनांक 2I- 06-20I7 में दिये गये दिशानिर्देशों तथा शासनादेश AeAT-Al--95/GH-6/94, दिनांक 06-06-994 द्वारा निर्गत आदेशों का कड़ाई के साथ अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। (20) कार्यदायी संस्था द्वारा लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित विशिष्टयों एवं मानक के अनुसार गुणवत्ता पूर्ण कार्य सम्पादित किया जायेगा। निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार ही हो तथा उसकी गुणवत्ता उत्कृष्ट कोटि की हो, इसकी पूर्ण जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की होगी तथा समय-समय पर स्थलीय अनुश्रवण कर कार्य की गुणवत्ता एवं कार्य निर्धारित समय मेँ पूर्ण हो, यह सुनिश्चित कराये जाने का उत्तरदायित्व आयुक्त, ग्राम्य विकास उ0प्र0 लखनऊ तथा सम्बन्धित अधिकारियों का होगा। (27) परियोजना में सम्मिलित उपकरणों आदि का क्रय सुसंगत क्रय नियमों»/स्टोर पर्चेज Bet के अन्तर्गत किया जायेगा। (22) प्रस्तावित धनराशि निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के शिड्यूल रेट से करायी जायेगी। (23) कार्यदायी संस्था द्वारा आगणन में निर्धारित सीमा तक ही समस्त कर लिया जायेगा तथा संबंधित को नियमानुसार भुगतान किया जायेगा। (24) प्रायोजनान्तर्गत प्रस्तावित प्रावधानों को यथा मानते हुये मुख्य प्राविधिक परीक्षक टी0ए0सी0, ग्राम्य विकास उ0प्र0 द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण किया गया है जिनमें कोई उल्लेखनीय परिवर्ततन जैसे- नये कार्य को सम्मिलित करना, कार्यों के आकार में वृद्धि एवं अन्य उच्च विशिष्टियाँ इस्तेमाल करना इत्यादि, सक्षम स्तर का पूर्व अनुमोदन प्राप्त किये बिना नहीं किया जायेगा। 3- इस संबंध में होने वाला व्यय रुपये 47,25,000 (रुपये सैंतालीस लाख पच्चीस हजार मात्र) को Wg वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्ययक मे अनुदान संख्या 0I3 लेखा शीर्षक 405907050700 जिला विकास कार्यालय तथा सामुदायिक विकास खण्ड कार्यात्र्यों/केन्द्रों के भवनों का निर्माण (जिला योजना)(चाल्ू कार्य) मानक मद 24 वृहत्‌ निर्माण कार्य के नामे डाला जायेगा। 4- यह आदेश वित्त (आय-व्ययक) HAHM-7 के कार्यालय ज्ञाप ACA-6/2025/al--352/Ea-2025- 23/2025, दिनाँक- 27-मार्च, 2025 में प्रशासकीय विभाग को उक्तवत प्रतिनिधानित अधिकार के अंतर्गत निर्गत किये जा रहे है। भवदीय, जयनाथ यादव विशेष सचिव। ACAM-5/2026/|-424599/H0-38/38-2-2025 तद्दिनांक। प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- l- महालेखाकार, (लेखा एवं हकदारी) प्रथम द्वितीय, उ0प्र0, प्रयागराज। 2- महालेखाकार, (लेखा-परीक्षा) प्रथम /द्वितीय, उ0प्र)) लखनऊ “/प्रयागराज। 3- आयुक्त, ग्राम्य विकास उ0प्र0, लखनऊ को समेकित बजट व्यवस्था के अनुश्रवण हेतु। 4- अपर आयुक्त, (वित्त) ग्राम्य विकास 50प्र0, लखनऊ। 5- नोडल अधिकारी, ग्राम्य विकास विभाग, S00 शासन। 6- जिलाधिकारी, सिद्धार्थनगर। I- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |7- मुख्य विकास अधिकारी/जिला विकास अधिकारी, सिद्धार्थनगर। 8- कोषाधिकारी, सिद्धार्थनगर। 9- जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, सिद्धार्थनगर। I0- वित्त (व्यय-नियंत्रण) अनुभाग-2/नियोजन अनुभाग-4/वित्त (बजट) AGHTT-7/2 H- अधिशासी अभियन्ता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, प्रखण्ड सिद्धार्थनगर। 2- ग्राम्य विकास अनुभाग-5 3- TS बुक। आज़ा से, चन्ट्रिका प्रसाद उप सचिव। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |

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