Date: 2026-01-23Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी अरशद पुत्र नजर अहमद, निवासी जनपद-बुलन्दशहर की फार्म-ए/लाइसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में।
**Executive Summary**
This document pertains to the premature release of Arshad, son of Nazar Ahmad, an inmate at the Central Jail, Agra, who was convicted in a case involving an acid attack. The communication, dated January 23, 2026, addresses the Director General/Inspector General of Prisons Administration and Correctional Services, Uttar Pradesh, Lucknow, regarding the rejection of Arshad's early release request based on Form A/license. The decision stems from the severity of the crime and objections from district officials.
**Key Points / Main Content**
* **Case Details:**
* Arshad, a resident of Bulandshahr, was convicted for an acid attack on the nephew and niece of Tasleem Khan on February 17, 2019.
* He was sentenced to 12 years of imprisonment by the Additional Sessions Judge (Fast Track Court No. 1), Aligarh, on January 21, 2022, under Section 326A/34 of the Indian Penal Code (IPC).
* Arshad has served 5 years, 3 months, and 27 days of actual imprisonment and 5 years, 9 months, and 9 days with remission as of June 14, 2024.
* His appeal is pending in the High Court of Allahabad.
* **Assessment & Recommendations:**
* The District Probation Officer, Senior Superintendent of Police, and District Magistrate of Bulandshahr opposed Arshad's early release.
* Their assessment indicated that his crime had a widespread impact on society, he had the potential to re-offend, and disputes between the parties remained unresolved.
* The Probation Board also opposed the early release, noting the potential for a negative message to society regarding the judicial system.
* **Decision:**
* Given the severity of Arshad's crime and the opposition from district officials, his request for early release under Section 2 of the Prisoners Release on Probation Act, 1938, based on Form A/license, was rejected.
* The Governor has rejected the release on license. The Form A/license is being returned with the order.
**Impact Analysis**
**Impact:** The Central Jail, Agra is required to inform Arshad of the Governor's decision.
**Action Required:** The Central Jail is required to acknowledge receipt of the order and inform Arshad of the Governor's decision.
**Impact:** The District Magistrate, Bulandshahr is to be informed.
**Action Required:** For information and further action.
**Impact:** Senior Superintendent of Police, Bulandshahr is to be informed.
**Action Required:** For information and further action.
Key Entities Referenced
Arshad: Convicted prisoner in Central Jail, Agra, whose premature release on Form-A/License is under consideration and ultimately rejected.
Bulandshahr: District where Arshad resides and where the crime took place; also the location of officials (District Magistrate, Senior Superintendent of Police, Probation Officer) whose reports are considered in the premature release decision.
Uttar Pradesh Prisoners Release on Probation Act, 1938: The act under which the release of the prisoner is being considered (specifically, Section 2).
Central Jail, Agra: The location where Arshad is imprisoned.
WAM-70/2026/4 08/22-2-2024-77(77)/2025
प्रेषक,
कमलेश कुमार,
उप सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक,
कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ: दिनांक 23 जनवरी, 2026
विषय:- केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी अरशद पुत्र नजर अहमद, निवासी जनपद-
बुलन्दशहर की फार्म-ए/लाइसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषयक वरिष्ठ अधीक्षक (मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उ0प्र0 के पत्र
संख्या-2026॥/प्रो0-7/05/सीमित/एम-28.06.2024, दिनांक 08.07.2024 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें।
2- उक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार केन्द्रीय कारागार, आगरा मेँ निरूदध
सिद्धदोष बन्दी अरशद पुत्र नजर अहमद, जो बैर, थाना-ककोड, जनपद-बुलन्दशहर का निवासी है। वादिया
achat खां के अनुसार घटना दिनांक (7-02-20i9 को मेरा भरतीजा अरमान व भतीजी गुलशाना
बुलन्दशहर से अपने पिता से मुलाकात करके आ रहे थे तभी रास्ते में अभियुक्तगण, अरशद ने अपने 02
सहअभियुकतों के साथ मिलकर पुरानी रंजिश के कारण वादिया के भतीजे तथा भतीजी पर तेजाब डाल
दिया और वहां से भाग गये जिससे वादिया की भतीजी तथा भतीजे बुरी तरह से घायल हो गये। बन्दी को
सत्र परीक्षण BO-403/20i9, भा0द0वि0 की धारा-326ए0/34 के अन्तर्गत Alo न्यायालय, अपर सत्र
न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) कोर्ट BO-, अलीगढ के आदेश दिनांक 27-0-2022 द्वारा 2 वर्ष के कारावास
से दण्डित किया गया। बन्दी की अपील Alo उच्च न्यायालय इलहाबाद में लम्बित है। बंदी ने दिनांक
4.06.2024 तक अपरिहार 05 वर्ष, 03 माह, 27 दिन तथा सपरिहार 05 वर्ष, 09 माह, 09 दिन की
सजा पूरी कर ली है।
3- जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट बुलन्दशहर द्वारा मा0
उच्चतम न्यायात्रय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या A बन्दी का अपराध समाज को व्यापक रूप से
प्रभावित करने, जेल से छूटने पर पुनः अपराध करने की सम्भावना होने, पुनः: अपराध करने A सक्षम
होने, दोनों पक्षों के मध्य विवाद समाप्त नहीं होने की आख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की
संस्तुति नहीं की गयी Sl जिला प्रोबेशन अधिकारी cant अपेन्डिक्स-बी में समयपूर्व रिहाई की संस्तुति
नही की है। जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर द्वारा बंदी का अभिभावक उपयुक्त पाया गया है, किन्तु समयपूर्व
रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
4- प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि वादिया aces खां के अनुसार घटना दिनांक 7-02-209 को
मेरा भतीजा अरमान व भतीजी गुलशाना बुलन्दशहर से अपने पिता से मुलाकात करके आ रहे थे तभी
रास्ते में अभियुक्तगण, अरशद ने अपने 02 सहअभियुक्तों के साथ मिलकर पुरानी रंजिश के कारण
वादिया के भतीजे तथा भतीजी पर तेजाब डाल दिया और वहां से भाग गये जिससे वादिया की भतीजी
तथा भतीजे बुरी तरह से घायल हो गये। इस तरह के अपराधियों की समयपूर्व रिहाई से समाज में
न्यायिक प्रणाली के बारे विपरीत संदेश जायेगा। बन्दी का अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित
करने, पुनः अपराध कारित करने में सक्षम होने दोनो पक्षों के मध्य विवाद समाप्त नहीं होने की आख्या
का अंकन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट cant निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में किया
l. यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है।
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।गया है। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता जिला प्रोबेशन अधिकारी,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बन्दी की समयपूर्व रिहाई का विरोध किये जाने के
दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन एक्ट 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी अरशद पुत्र
नजर अहमद को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है।
5- अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि केन्द्रीय
कारागार, आगरा A निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी अरशद (बन्दी WEA-7044) पुत्र श्री नजर अहमद, निवासी
जनपद-बुलन्दशहर की यू0पी0 प्रिजनर्स रिलीज ऑन प्रोबेशन vee-938 की धारा-2 के प्राबिधानों के
अन्तर्गत सम्यक विचारोपरान्त उसे मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त बन््दी के लाईसेन्स
पर मुक्ति श्री राज्यपाल द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए/लाईसेंस पर शासन का
आदेश अंकित करके एतददवारा वापस लौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए शासन के
निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें।
संलग्नकः यथोपरि।
(बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त पत्रादि सहित)
भवदीय,
कमलेश कुमार
उप सचिव।
PEAT-70/2026/4 08()/22-2-2024 तद॒दिनांकित।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:-
|- जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर।
2-.. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बुलन्दशहर।
3- वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, आगरा।
4- निजी सचिव, माए0 मंत्री, कारागार प्रशासन Ud सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को माए0 मंत्री के
सूचनार्थ।
5- निजी सचिव, मा0 राज्यमंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को माए मंत्री
के सूचनार्थ।
6- गार्ड फाइल।
आज्ञा से,
ममता श्रीवास्तव
अनु सचिव।
l. यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है।
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।शासनादेश HAT-70/2026/ 08/22-2-2024-7(77)/2025
दिनांकः 23 जनवरी, 2026 का संलग्नक
सरकार के आदेश
केन्द्रीय कारागार, आगरा मेँ निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी अरशद पुत्र नजर अहमद, जो बैर, थाना-
ककोड, जनपद-बुलन्दशहर का निवासी है। वादिया AeA खां के अनुसार घटना दिनांक 77-02-20i9 को
मेरा भतीजा अरमान व भतीजी गुलशाना बुलन्दशहर से अपने पिता से मुलाकात करके आ रहे थे तभी
रास्ते में अभियुक्तगण, अरशद ने अपने 02 सहअभियुक्तों के साथ मिलकर पुरानी रंजिश के कारण
वादिया के भतीजे तथा भतीजी पर तेजाब डाल दिया और वहां से भाग गये जिससे वादिया की भतीजी
तथा भतीजे बुरी तरह से घायल हो गये। बन्दी को सत्र परीक्षण BO-403/20I9, भा0द0वि0 की धारा-
3260/34 के अन्तर्गत Alo न्यायालय, अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) कोर्ट AO-, अलीगढ के आदेश
दिनांक 2(-04-2022 द्वारा ॥2 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। बन्दी की अपील Ale उच्च
न्यायालय इलहाबाद में लम्बित है। बंदी ने दिनांक (4.06.2024 तक अपरिहार 05 वर्ष, 03 माह, 27
दिन तथा सपरिहार 05 वर्ष, 09 माह, 09 दिन की सजा पूरी कर ली है।
जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट बुलन्दशहर द्वारा मा0
उच्चतम FARMS द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या मैं बन्दी का अपराध समाज को व्यापक रूप से
प्रभावित करने, जेल से छूटने पर पुनः अपराध करने की सम्भावना होने, पुनः: अपराध करने A सक्षम
होने, दोनों पक्षों के मध्य विवाद समाप्त नहीं होने की आख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की
संस्तुति नहीं की गयी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी cant अपेन्डिक्स-बी में समयपूर्व रिहाई की संस्तुति
नही की है। जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर द्वारा बंदी का अभिभावक उपयुक्त पाया गया है, किन्तु समयपूर्व
रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है।
प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि वादिया aces खां के अनुसार घटना दिनांक 7-02-209 को
मेरा भतीजा अरमान व भतीजी गुलशाना बुलन्दशहर से अपने पिता से मुलाकात करके आ रहे थे तभी
रास्ते में अभियुक्तगण, अरशद ने अपने 02 सहअभियुक्तों के साथ मिलकर पुरानी रंजिश के कारण
वादिया के भतीजे तथा भतीजी पर तेजाब डाल दिया और वहां से भाग गये जिससे वादिया की भतीजी
तथा भतीजे बुरी तरह से घायल हो गये। इस तरह के अपराधियों की समयपूर्व रिहाई से समाज में
न्यायिक प्रणाली के बारे विपरीत संदेश जायेगा। बन्दी का अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित
करने, पुनः अपराध कारित करने में सक्षम होने दोनो पक्षों के मध्य विवाद समाप्त नहीं होने की आख्या
का अंकन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट cant निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में किया
गया है। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता जिला प्रोबेशन अधिकारी,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट cant बन्दी की समयपूर्व रिहाई का विरोध किये जाने के
दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन एक्ट 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी अरशद पुत्र
नजर अहमद को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है।
उक्त के दृष्टिगत सम्यक विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा बंदी की फार्म-ए/ल्राईसेंस के आधार
पर समयपूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है।
कमलेश कुमार
उप सचिव।
l. यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है।
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है।