Date: 2021-01-11Category: Not ApplicableState: Uttar PradeshCountry: India
प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की सहभागिता से किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग-इन-पार्टनरशिप) बनाये जाने के सम्बन्ध में।
**कार्यकारी सारांश:**
यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ सस्ती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग-इन-पार्टनरशिप) के निर्माण के संबंध में शासन द्वारा लिए गए निर्णयों को रेखांकित करता है, जिसका लक्ष्य 17.06.2015 को शुरू हुई मिशन के जरिए 2022 तक शहरी क्षेत्रों के सभी पात्र परिवारों को आवास प्रदान करना है। इसमें किफायती आवास घटकों के तहत ईडब्ल्यूएस के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता शामिल है।
**मुख्य बातें / मुख्य सामग्री:**
* **पात्रता और परियोजना आवश्यकताएं:**
* परियोजना में कम से कम 250 आवास होने चाहिए, कुल आवासों का कम से कम 35% ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आरक्षित होना चाहिए।
* विकासकर्ताओं के पास योजना क्षेत्र के आधार पर रियल एस्टेट में न्यूनतम औसत नेटवर्थ होनी चाहिए, 3 हेक्टेयर तक के लिए 2 करोड़ रुपये से लेकर 10 हेक्टेयर से अधिक के लिए 10 करोड़ रुपये तक।
* कान्सॉर्शियम निर्माण के लिए सदस्यों के बीच एक पंजीकृत एमओयू की आवश्यकता होती है, जिसमें प्रमुख सदस्य की हिस्सेदारी कम से कम 26% होनी चाहिए।
* विकासकर्ताओं को निषिद्ध नहीं किया जाना चाहिए और अपराधों के दोषी नहीं पाए जाने चाहिए।
* **क्षेत्र और क्रियान्वयन:**
* यह योजना उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के तहत अधिसूचित औद्योगिक विकास क्षेत्रों में लागू है।
* यह योजना केवल उन भूखंडों पर लागू होगी जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अनौपचारिक आवास के लिए चिन्हित किया गया है और नीलामी के माध्यम से आवंटित किया गया है।
* औद्योगिक विकास प्राधिकरण "विनियमन प्राधिकरण" के रूप में कार्य करेगा।
* **मानक और प्रोत्साहन:**
* न्यूनतम 250 आवासीय इकाइयाँ, जिनमें प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 35% ईडब्ल्यूएस इकाइयाँ शामिल हैं।
* ईडब्ल्यूएस इकाइयों का न्यूनतम कारपेट एरिया 22.77 वर्ग मीटर और अधिकतम 30 वर्ग मीटर के बीच होना चाहिए।
* भवन मानकों का अनुपालन, खुला स्थान, सड़कें और सामुदायिक सुविधाएँ शामिल हैं।
* अधिकतम बेसिक एफएआर 3.5 और 600 आवासीय इकाईयां प्रति हेक्टेयर है, कुल एफएआर का 10% व्यावसायिक उपयोग के लिए है।
* **वित्तीय विवरण और सब्सिडी:**
* प्रत्येक ईडब्ल्यूएस इकाई पर 2.50 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध है।
* कारपेट एरिया के आधार पर 6.00 लाख रुपये तक लागत वाली ईडब्ल्यूएस इकाइयों के लिए न्यूनतम सीलिंग कास्ट।
* **कार्यान्वयन प्रक्रिया:**
* भूखंड का आवंटन नीलामी के माध्यम से।
* आवंटन के एक महीने के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जमा करना आवश्यक है, जिसके बाद रेरा में पंजीकरण होगा।
* यह सुनिश्चित करने के लिए कि ईडब्ल्यूएस इकाइयां बनाई गई हैं, विकासकर्ता योजना क्षेत्र के 15% विक्रय योग्य भूमि को प्रदर्शन गारंटी के रूप में गिरवी रखेगा।
* अनुमोदन के बाद डीपीआर के अनुसार समय पर निर्माण करने के लिए डेवलपर के साथ विकास समझौता।
* **अनुमोदन समितियाँ:**
* विभिन्न स्तरों पर मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए राज्य स्तरीय और केंद्रीय स्तर की समितियां गठित की जाती हैं।
* डीपीआर में ले-आउट, सर्कुलेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान और वित्तीय विवरण शामिल होना चाहिए।
* **शर्तें:**
* परियोजना में निर्मित भवनों का प्लिंथ बन जाने के बाद जी.पी.एस. कोआर्डिनेट्स, तिथि एवं समय के साथ डिजिटल फोटोग्राफ्स शासकीय अभिकरण के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
* विकासकर्ता को योजना का क्रियान्वयन रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में पंजीकरण की तिथि से प्रारंभ करना अनिवार्य होगा
* विलम्ब शुल्क लगेगा (योजना की लागत का 0.1% प्रति दिन)।
* **हितधारकों को आवास का आवंटन:**
* राज्य नोडल एजेंसी (एसएलएनए) द्वारा सत्यापित लाभार्थियों को भवन आवंटन लाटरी के माध्यम से निम्न समिति द्वारा किया जायेगा
**प्रभाव विश्लेषण:**
**हितधारक:** औद्योगिक विकास प्राधिकरण
**प्रभाव:** सस्ती आवास परियोजनाओं के क्रियान्वयन को लागू करना, नीलामी प्रक्रियाओं का समन्वय करना, जमीनों का आवंटन और बुनियादी ढांचे का विकास करना। नियामक कार्यों की निगरानी करना।
**आवश्यक कार्रवाई:** कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देशों का अनुपालन, डीपीआर प्रस्तुत करना, आवंटित भूखंड पर स्वीकृत मानचित्र के अनुसार कार्य सुनिश्चित करना।
**हितधारक:** निजी विकासकर्ता
**प्रभाव:** किफायती आवास परियोजनाओं का विकास और निर्माण, पात्रता मानदंड का अनुपालन, वित्तीय सहायता का लाभ उठाना और समय पर निर्माण सुनिश्चित करना।
**आवश्यक कार्रवाई:** परियोजना में भाग लेने, पात्रता मानदंडों को पूरा करने, डीपीआर जमा करने और समय पर निर्माण पूरा करने के लिए विधिक और नियामक अनुपालन का पालन करना।
**हितधारक:** ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए संभावित लाभार्थी
**प्रभाव:** सस्ती आवास के अवसरों तक पहुंच, सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता तक पहुंच, किफायती आवास की समय पर उपलब्धता।
**आवश्यक कार्रवाई:** योजना के लिए पंजीकरण करना, आवंटन प्रक्रिया का पालन करना और आवश्यक दस्तावेज़ जमा करना।
**हितधारक:** राज्य सरकार
**प्रभाव:** योजनाओं की सफलता और किफायती आवास की आपूर्ति में वृद्धि सुनिश्चित करना, वित्तीय सहायता और पर्यवेक्षण का समन्वय करना।
**आवश्यक कार्रवाई:** योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना और सहायता प्रदान करना।
Key Entities Referenced
प्रधानमंत्री आवास योजना-सबके लिए आवास (शहरी) मिशन: भारत सरकार की एक पहल जिसका लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को आवास प्रदान करना है।
अफोर्डेबल हाउसिंग-इन-पार्टनरशिप: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घटक जो निजी क्षेत्र की भागीदारी से किफायती आवास को बढ़ावा देता है।
औद्योगिक विकास प्राधिकरण: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास क्षेत्रों का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार निकाय, किफायती आवास परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन और सुविधा प्रदान करने में शामिल।
उत्तर प्रदेश: नीति का भौगोलिक क्षेत्र, विशेष रूप से औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र जो उत्तर प्रदेश के भीतर हैं।
राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति (एस.एल.एस.एम.सी.): राज्य स्तर की एक समिति जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत परियोजनाओं का मूल्यांकन, अनुमोदन और निगरानी करती है।
WEAT:0/202/207/77-4-2-22veA/7
प्रेषक,
आलोक कुमार,
अपर मुख्य सचिव,
उ0प्र0 शासन।
सेवा में,
मुख्य कार्यपालक अधिकारी,
समस्त औद्योगिक विकास प्राधिकरण।
औद्योगिक विकास अनुभाग-4 लखनऊ : दिनांक i4 staat, 202
विषयः- प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की
सहभागिता से किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग-इन-पार्टनरशिप) बनाये जाने के सम्-बन्ध में।
महोदय,
अवगत कराना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में
निजी क्षेत्र की सहभागिता से किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग-इन-पार्टनरशिप) बनाये जाने के सम्बन्ध में
सम्यक विचारोपरान्त शासन दूवारा निम्नलिखित निर्णय लिए गए go:
. भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-सबके लिए आवास (शहरी) मिशन का शुभारम्भ
दिनांक 47.06.205 को किया गया है। यह मिशन 2022 तक शहरी क्षेत्र के सभी पात्र परिवारों के
लाभार्थियों को आवास प्रदान करने के लिए केन्द्रीय सहायता प्रदान करेगा। मिशन के अन्तर्गत आर्थिक
रूप से कमजोर वर्ग (ई.डब्ल्यू.एस.) तथा निम्न आय वर्ग (एल.आई.जी) वाले परिवारों को लाभान्वित
किया जाएगा। भारत सरकार GaN इस मिशन के चार कम्पोनेन्ट्स में से “अफोर्डेबल हाउसिंग-इन
पार्टनरशिप' कम्पोनेन्ट के अन्तर्गत ई.डब्ल्यू.एस. हेतु अनुमन्य अनुदान के लिए Hegre रू. 2.50
लाख निर्धारित किया गया है, जबकि रू. .00 लाख अनुदान राज्य सरकार दूवारा दिया जाएगा। इस
प्रकार प्रत्येक ई.डब्ल्यू.एस. इकाई के लिए कुल रू. 2.50 लाख की सहायता उपलब्ध होगी।
.2 प्रधानमंत्री आवास योजना अफोर्डेबल हाउसिंग-इन पार्टनरशिप कम्पोनेन्ट (भागीदारी में किफायती
आवास) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ¥..50 लाख के केन्द्रीय अनुदान की पात्रता के लिए परियोजना
मैं कम से कम 250 आवास तथा कुल आवासों का न्यूनतम 35 प्रतिशत ई.डब्लू.एस. श्रेणी के लिए
होना अनिवार्य है।
4.3 भागीदारी A किफायती आवास कम्पोनेन्ट के क्रियान्वयन के लिए निजी/सार्वजनिक क्षेत्र की
सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग नीति में प्रदत्त रियायतों
को eed रखते हुए विकासकर्ताओं को कतिपय इन्सेंटिव उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है।
2. निजी विकासकर्ता की पात्रता
2. निजी विकासकर्ता का तात्पर्य किसी व्यक्ति, लीगल पर्सन, कान्सॉर्शियम, पंजीकृत ट्रस्ट, कम्पनी,
औद्योगिक इकाई पंजीकृत सोसायटी, को-आपरेटिव हाउसिंग सोसायटी या एसोसिएशन, व्यक्तियों के
निकाय चाहे निगमित हो या न हो, से है, जो विकास के लिए भूमि क्रय करने के लिए सहमत हो।
यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |2.2 योजना के क्षेत्रफल के आधार पर विकासकर्ता की गत 3 वित्तीय वर्षों में रियल sete में
न्यूनतम औसत नेटवर्थ निम्नानुसार होनी चाहिएः-
योजना का क्षेत्रफल गत 3 वित्तीय वर्षों में न्यूनतम
3 हेक्टेयर तक औसत नेटवर्थ
3 Ore. से अधिक परन्तु 5 OF. तक रू. 2.00 करोड
5 tae. से अधिक परन्तु 0 See. तक रू. 5.00 करोड़
0 eae. से अधिक रू. 0.00 करोड़
2.3 योजना के क्रियान्वयन हेतु निजी विकासकर्ताओं द्वारा कान्सॉर्शियम बनाये जाने की स्थिति
मैं कान्सॉर्शियम के समस्त Teste सदस्यों के मध्य संलग्नक- पर निर्धारित प्रपत्र पर एम.ओ.यू.
का निष्पादन अनिवार्य होगा, जो सम्बन्धित जनपद के सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में पंजीकृत होना
चाहिए। Hata के लीड मेम्बर की. अंशधारिता न्यूनतम 26 प्रतिशत होनी चाहिए।
2.4 विकासकर्ता को केन्द्र अथवा राज्य सरकार के किसी fase शासकीय अभिकरण द्वारा
निषिद्ध/ब्लैकलिस्ट न किया गया atl इस सम्बन्ध मैं विकासकर्ता दूवारा उक्त आशय का एफिडेविट
(शपथ-पत्र का प्रारूप संलग्नक-2 पर) प्रस्तुत करना होगा।
2.5 विकासकर्ता को लागू विधिक प्राविधानों के अधीन किसी न्यायालय दूवारा अपराध का दोषी न पाया
गया हो।
योजना का कार्य-क्षेत्र
योजना उ.प्र. औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 976 के अधीन अधिसूचित औद्योगिक
विकास क्षेत्रों में केवल प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु अथवा इन्फारमल हाउसिंग हेतु चिन्हित एवं
नीलामी के cant आवंटित भूखण्डों पर ही क्रियान्वित की जा सकती है जिसके लिए सम्बन्धित
औद्योगिक विकास अभिकरण CANT *विनियामक अभिकरण” की भूमिका निभाई जाएगी।
प्राधिकरणों द्वारा यदि किसी भूखण्ड विशेष को केवल ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयों के निर्माण हेतु
प्रस्तावित किया जाता है तो इस प्रकार का विकास केवल इन्फार्मल सेक्टर हेतु आरक्षित भूखण्डों पर
TAY होगा तथा भूखण्ड का आरक्षित मूल्य भी तद्नुसार निर्धारित किया जा सकेगा।
योजना के मानक एवं शर्ते
4. ameter मैं कुल आवासीय इकाईयों की संख्या न्यूनतम 250 होगी जिसमें न्यूनतम 35
प्रतिशत (न्यूनतम 00 ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयां प्रति हेक्टेयर, योजना का क्षेत्रफल एक हेक्टेयर से कम
a अधिक होने पर इसी अनुपात A) ई.डब्ल्यू.एस. आवासीय इकाईयां निर्मित की. जाएंगी।
ई.डब्ल्यू.एस. आवासीय इकाईयों का न्यूनतम कारपेट एरिया 22.77 वर्ग मीटर एवं अधिकतम कारपेट
एरिया 30 वर्ग मीटर तक होगा, उदाहरणार्थ, टिपिकल यूनिट प्लान संलग्न है (संलग्नक-3)। उक्त
कारपेट एरिया की सीमान्तर्गत इससे भिन्न प्लान भी क्रियान्वित किया जा सकेगा। योजनान्तर्गत
ई.डब्लू.एस. भवनों का निर्माण संत्ग्नक-4 पर दिये गये स्पेसिफिकेशन्स अथवा षहरी विकास, आवास
एवं शहरी. गरीबी उपशमन wa संसदीय. कार्य ae, भारत. सरकार के. FNo.
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |3िचा+(छिनिताला/204/7/6/4 A afta “उभरती, किफायती, आवास प्रौद्योगिकियों जो
निम्नानुसार उल्लिखित है, के अनुसार करना होगा:-
l- Monolithic Concrete Construction System Using Plastic- Aluminium
Formwork
2- Monolithic Concrete Construction System Using Aluminium Formwork
3- Expanded Polystyrene Core Panel System
4- Industrialized 3-S System Using Cellular Light Weight Concrete Slabs &
Precast Columns
5- Factory made Fast Track Modular Building System- INSTACON
6- Glass Fibre Reinforced Gypsum Panel System
7- Advanced Building System EMMEDUE
भारत सरकार CAR इस सम्बबन्ध A समय-समय पर जारी की जाने वाली गाइडलाइन्स का पालन
किया जाएगा। योजनान्तर्गत अन्य आय वर्गों की आवासीय इकाईयां, व्यवसायिक, संस्थागत, मनोरंजन
तथा अन्य सामुदायिक सुविधाएं नियोजित की जा सकती हैं। अन्य सम्पत्ियों के निर्माण हेतु समय-सीमा का
निर्धारण रेरा के प्राविधानों से आच्छादित होगा।
टिप्पणीः 'कारपेट एरिया' का तात्पर्य किसी अपार्टमेन्ट के शुद्ध प्रयोग में आने वाले तल क्षेत्रफल से है,
जिसके अन्तर्गत बाह्य दीवारों से आच्छादित क्षेत्र, सर्विस शाफ्ट के अन्तर्गत क्षेत्र, एक्सक्लूसिव बालकनी
अथवा NIAC का क्षेत्र एवं एक्सक्लूसिव खुले छत का क्षेत्र शामिल नहीं होगा, Wed अपार्टमेन्ट की आंतरिक
दीवारों का क्षेत्रफल शमिल होगा।
4.2 योजनान्तर्गत पार्क एवं खुले स्थलों का Wide, sed सड़कों का नियोजन तथा सामुदायिक
सुविधाओं, सेवाओं एवं उपयोगिताओं का प्राविधान, पार्किंग एवं अन्य अपेक्षाओं का प्राविधान प्रभावी (समय-
समय पर यथासंशोधित) भवन विनियमावली के अनुसार किया जाएगा।
4.3... योजना हेतु अधिकतम बेसिक एफ.ए.आर. 3.5 एवं अधिकतम घनत्व 600 आवासीय इकाईयां प्रति
हेक्टेयर अनुमन्य होगा। कुल एफ.ए.आर. का अधिकतम 0 प्रतिशत तल क्षेत्रफल व्यवसायिक उपयोग हेतु
HAAS होगा। सम्बन्धित प्राधिकरणों द्वारा भूखण्ड की नीलामी से पूर्व स्थल की स्थिति के दृष्टिगत देय
एफ.ए.आर. का निर्धारण अपने स्तर से किया जा सकेगा।
इस सीमा तक औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की भवननियमावल्री संशोधित समझी जायेगी।
4.4 योजना के लिए अधिकतम भू-आच्छादन भवन नियमावली के प्राविधानों के अनुरूप होगा तथा
एफ.ए.आर. योजना के सम्पूर्ण क्षेत्रफल पर अनुमन्य होगा, परन्तु क्रय-योग्य एफ.ए.आर. HAAS नहीं होगा।
भवन की ऊंचाई पर कोई प्रतिबन्ध नहीं होगा, परन्तु भवन की अधिकतम उंचाई अन्य 'स्टेच्यूट्री' प्राविधानों से
नियन्व्रित होगी।
इस सीमा तक औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की भवननियमावल्री संशोधित समझी जायेगी।
45 ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयों का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए विकासकर्ता द्वारा परफार्मेस गारण्टी के
रूप में योजना के सम्पूर्ण क्षेत्रफल की 5 प्रतिशत विक्रय योग्य भूमि बंधक रखी जाएगी, जिसे ई.डब्लू.एस.
इकाईयों के लाभार्थियों को कब्जा दिये जाने के अनुपात मैं अधिकतम चार समान किश्तों में अवमुक्त कर दिया
जायेगा। विकासकर्ता औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पक्ष में बंधक/गिरवी रखी भूमि पर विकास एवं निर्माण
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |कार्य कर सकेगा, परन्तु उनका हस्तान्तरण तब तक नहीं कर सकेगा जब तक कि ई.डब्ल्यू.एस. आवासीय
इकाईयों का निर्माण पूर्ण नहीं कर दिया जाता है। विकासकर्ता द्वारा ई.डब्ल्यू.एस. भवनों का निर्माण न किये
जाने की स्थिति में बन्धक रखी भूमि व उस पर निर्मित सम्पत्ति को जब्त कर उसका विक्रय कर शासकीय
अभिकरण SANT ई.डब्ल्यू.एस. भवनों का निर्माण पूर्ण कराया जाएगा। इसके साथ ही ई.डब्ल्यू.एस. भवनों हेतु
डी.पी.आर. मैं निर्धारित भूमि एवं उस पर आंशिक बने भवन (यदि कोई हों) भी जब्त किए जाएंगे।
46 बन्धक रखी भूमि जब्त करने से पूर्व विकासकर्ता को सुधार करने की हिदायत के साथ मुख्य
कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण aan नोटिस दिया जायेगा जिसकी तामीली
डी.पी.आर. मैं उल्लिखित विकासकर्ता के ई-मेल पर प्रेषित कर सुनिश्चित की जाएगी। ई-मेल का प्रारूप
संलग्नक-5 पर है। नोटिस अवधि की समाप्ति की तिथि पर सुधार होने अथवा न होने का निर्धारण
स्थल पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा उनके cant नामित
प्रतिनिधि (जो अधिशासी अभियन्ता अथवा उच्चतर स्तर का हो) द्वारा किया जायेगा एवं इस तिथि
को विकासकर्ता स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के लिए बाध्य होगा जिसके
लिए उसे अलग से कोई नोटिस नहीं दिया जायेगा। यदि नोटिस की अन्तिम तिथि को विकासकर्ता या
उसके प्रतिनिधि नहीं पहुँचते हैं तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण दूवारा
यह मानकर कार्यवाही की जाएगी कि विकासकर्ता द्वारा कुछ नहीं कहना है।
4.7... आवास एवं. शहरी नियोजन अनुभाग-4. के. शासनादेश संख्या 3:88/3H75--3-
8O0fataeH/200, दिनांक 05 दिसम्बर, 203 के प्रस्तर-2 के अनुसार ई.डब्ल्यू.एस. एव एल.आई.जी.
भवनों का विक्रय/ हस्तान्तरण आवंटन की तिथि से 05 वर्षों तक प्रतिबन्धित है। इस योजनान्तर्गत
उक्त शर्त का इस सीमा तक शिथिल्लीकरण किया जाता है कि किसी बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा
उक्त भवनों के लिए दिये गये ऋण की वसूली हेतु बन्धक रखे गये भवन की नीलामीविक्रय हेतु उक्त
प्रतिबन्ध लागू नहीं होगा, किन्तु नीलामी/विक्रय से प्राप्त धनराशि से सर्वप्रथम शासकीय सब्सिडी की
वसूली की जाएगी। तत्पश्चात बैंक द्वारा अपने ऋण की वसूली की जाएगी। उपरोक्त दोनों धनराशि
की वसूली के पश्चात् कोई धनराशि बचती है तो वह धनराशि सम्बन्धित विकास प्राधिकरण को वापस
की जाएगी।
निर्माण के उपरान्त लाभार्थी के पक्ष में औपचारिकताएं पूर्ण कराते हुए पंजीकृत अनुबन्ध
(त्रिपक्षीय) निष्पादित कराते हुए कब्जा दिया जाएगा। कब्जे की तिथि से 5 वर्ष तक उक्त इकाई का
उपयोग आवंटी दूवारा स्वयं किया जाएगा। 5 वर्ष की अवधि के बाद ही विक्रय विलेख निष्पादित किया
जाएगा। यदि 5 वर्ष की अवधि में आवंटी द्वारा उक्त इकाई का उपयोग स्वयं हेतु नहीं किया जाता है,
तो आवंटन निरस्त करते हुए उक्त इकाई सम्बन्धित प्राधिकरण में निहित हो जाएगी तथा आवंटी को
कोई धनराशि देय नहीं होगी।
डिमांड का आकलन
5.4 प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास हेतु चिन्हित भू-खण्डों पर प्रस्तावित ई.डब्लू.एस. ईकाईयों
की न्यूनतम संख्या व स्थल, उनमैं प्रदत्त की जाने वाली सुविधाओं तथा, प्रति भवन मूल्य एवं
रिफन्डेबल रू0 5000/- आवेदन शुल्क का उल्लेख करते हुए मांग सर्वेक्षण (डिमाण्ड सर्वे संलग्नक-5अ
पर है) हेतु विज्ञापन प्रकाशित कराया जायेगा। विज्ञापन राज्य नोडल एजेन्सी (एसएलएनए) दूवारा
ए.एच.पी. घटक के अन्तर्गत He लाभार्थियों के लिये ही प्रकाशित होगा। मांग सर्वेक्षण का प्रारूप
शासनादेष संख्या: 2379/आठ-4-79 toH/20i7 दिनांक 24.42.208 cant निर्गत प्रधानमंत्री आवास
योजना सबके लिये आवास (षहरी) के अन्तर्गत लाभार्थियों के चयन हेतु पंजीकरण पुस्तिका एवं ऑन-
लाइन पंजीकरण फार्म के प्रारूप के आधार पर स्थलीय आवष्यकताओं के अनुसार संशोधित कर तैयार
किया जा सकता है। मांग सर्वेक्षण (डिमाण्ड सर्वे) के विज्ञापन के आधार पर पर्याप्त आवेदकों की
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |उपलब्धता सुनिश्चित करने के इष्टिकोण A अभिकरणों द्वारा स्वंय अपने व्यय पर विधिवत् प्रचार
कराया जायेगा। विज्ञापन के आधार पर प्राप्त आवेदकों की सूची को अध्यक्ष डूडा/ जिलाधिकारी को
प्रेषित की जायेगी एवं वह इस सूची का भौतिक सत्यापन करते हुए सत्यापित सूची अभिकरणों को
उपलब्ध करायेंगे।
5.2 यदि उपरोक्त आवेदन प्रक्रिया के क्रम मैं अपरिहार्य परिस्थितियों A योजना में न्यूनतम 250
भवन एवं 35 प्रतिशत दुर्बल आय वर्ग के भवनों की अनिवार्यता का अनुपालन सम्भव नहीं हो पा रहा
है तो ऐसी परिस्थिति में भारत सरकार की गाइड लाइन्स के प्रस्तर-6.4 के क्रम में राज्य सरकार के
अनुरोध पर केन्द्रीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति (सीएसएमसी) इन प्रतिबन्धों को शिथिल कर
सकती है, जिस हेतु राज्य सरकार द्वारा अनुरोध किया जायेगा।
विकासकर्ताओं की चयन प्रक्रिया
6.] प्राधिकरणों द्वारा यह सुनिश्चित करने पर कि योजना हेतु समुचित लाभार्थी उपलब्ध हो सकेगें,
चिन्हित भू-खण्डों को सामान्य नीलामी शर्तों के अन्तर्गत नीलामी के माध्यम से निस्तारित किया
जायेगा। नीलामी की शर्तों A प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन हेतु निर्धारित शर्तों को भी
सम्मिलित किया जायेगा।
6.2 प्राधिकरण can भू-खण्ड आवंटित किये जाने की दषा में विलम्बतम एक माह में बिन्दु संख्या-8
के प्राविधानों के अन्तर्गत योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (संलग्नक-5ब) प्रस्तुत करनी होगी
डी0पी0आर0 की अंतिम रूप से स्वीकृति के बाद प्रोजेक्ट को उ0प्र0 रियल gece रेगुलेटरी अर्थोरिटी
(रेरा) मैं नियमानुसार पंजीकृत कराना होगा।
विकासकर्ता द्वारा प्रति ई.डब्ल्यू.एस. आवास पर रू. 2.50 लाख के अनुदान के ऊपर 22.77
वर्गमी0 कारपेट एरिया के लिए रू0 6.00 लाख तथा 22.77 वर्गमी0 से 30 वर्गमी0 तक के कारपेट
एरिया के भवनों की लागत को प्रो-रेटा क्षेत्रफल के आधार पर न्यूनतम सीलिंग कास्ट रखनी होगी।
अवषेष धनराषि का भुगतान लाभार्थी द्वारा किया जायेगा।
चयनित विकासकर्ताओं को अनुमन्य इन्सेन्टिव्स
7.4 विकासकर्ता को प्रति ई.डब्ल्यू.एस. आवासीय इकाई के सापेक्ष रू. 2.50 लाख का अनुदान तथा
लाभार्थियों द्वारा विक्रय मूल्य की अवषेष धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी।
7.2... केन्द्र सरकार द्वारा इस योजनान्तर्गत निजी विकासकर्ताओं को यदि किसी प्रकार के करों में
कोई छूट प्रदान की जाती है, तो राज्य सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी, Wed
विकासकर्ता द्वारा केन्द्र सरकार की गाईडलाइन्स का अनुपालन करना अनिवार्य होगा।
योजना के अनुमोदन की प्रक्रिया
8.. चयन के उपरान्त विकासकर्ता cant योजना की Sees प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डी.पी.आर.) शासकीय
अभिकरण को एक माह के Heat Wedd की जाएगी, जो शासकीय अभिकरण gant अनुमोदित की
जायेगी। शासकीय अभिकरण को प्रस्तुत की जाने वाली डी.पी.आर. की विषय-वस्तु प्रस्तर-8.3 मैं
उल्लिखित की गयी है।
8.2 शासकीय अभिकरण gant अनुमोदित डौ.पी.आर. राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति
(एस.एल.ए.सी.) के माध्यम से राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति (एस.एल.एस.एम.सी.) की
स्वीकृति हेतु प्रस्तुत की जाएगी। तत्पश्चात एस.एल.एस.एम.सी. द्वारा केन्द्रीय सहायता के लिए
अपनी संस्तुति केन्द्रीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति (सी.एस.एम.सी.) को प्रेषित की जाएगी।
शासनादेश AKA-762/206/623/69--2046-4(439) /20i5 ara, दिनांक 24 मार्च, 206 द्वारा
राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति (एस.एल.ए.सी.) एवं राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति
(एस.एल.एस.एम.सी.) गठित की गयी है, जबकि भारत सरकार cant जारी प्रधानमंत्री आवास योजना
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |सबके लिए आवास (Set) स्कीम दिशा-निर्देश A केन्द्रीय स्वीकृति va अनुश्रवण समिति
(सी.एस.एम.सी.) गठित की गयी है। उक्त समितियों का संरचनात्मक स्वरूप निम्नवत् हैः-
(क) wea स्तरीय मूल्यांकन समिति (एस.एल.ए.सी.)
() | मिशन निदेशक अथवा उनके द्वारा नामित तकनीकी अधिकारी।
(2) | सम्बन्धित, ओदूयौगिक विकास प्राधिकरण द्वारा नामित अधिकारी।
(ख) राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति (एस.एल.एस.एम.सी.)
4 मुख्य सचिव अध्यक्ष
2 | प्रमुख सचिव/सचिव, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम ' उपाध्यक्ष
विभाग, उत्तर प्रदेश शासना
3 | प्रमुख सचिव/सविच, नगर विकास विकास उ0प्र0 शासन सदस्य
4 प्रमुख सचिव/सचिव, वित्त विभाग, उ0प्र0शासन | सदस्य
5 wae सचिव/सचिव, राजस्व विभाग, उ0प्र0शासन | सदस्य
6 | प्रमुख सचिव/सचिव, आवास एवं welt नियोजन fast, | सदस्य
उ0प्र0शासन |
7 | प्रमुख सचिव/सचिव, पर्यावरण विभाग, उ0प्र0शासन | सदस्य
8 . प्रमुख सचिव/सचिव, औद्योगिक विकास विभाग, उ0प्र0शासन | सदस्य
9 WHE सचिव/सचिव, अवस्थापना विभाग, उ0प्र0शासन | सदस्य
0 . संयोजक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति सदस्य
।. | मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, SACK प्रदेश शासन। सदस्य
i2 | निदेशक राज्य नगरीय विकास अभिकरण (राज्य नोडल User | सदस्य
(एसएलएनए))/मिशन डायरेकटर। सचिव
(ग).. केन्द्रीय स्वीकृति एवं अनुश्रवण समिति (सी.एस.एम.सी.)
l. . सचिव, आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय। अध्यक्ष
2... . सचिव (शहरी विकास), शहरी विकास मंत्रालय। उपाध्यक्ष
3... | सचिव, वित्त मंत्रालय (व्यय विभग)। सदस्य
4. | सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय। सदस्य
5. सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सदस्य
०... . सचिव, वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय। सदस्य
7. | सचिव, श्रम मंत्रालय। सदस्य
8... . सचिव, अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय। सदस्य
9... | संयुक्त सचिव (यूपीए) आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय। सदस्य
0. dara सचिव और वित्त सलाहकार, शहरी विकास मंत्रालय/ आवास एवं सदस्य
I- US शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय।
l. | मिशन निदेशक (स्मार्ट सिटी), शहरी विकास मंत्रालय। सदस्य
2. . सभी के लिए आवास के प्रभारी संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक, आवास | सदस्य
Ud शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय।
यदि उक्त समितियाँ सक्षम स्तर से संशोधित होती हैं तो संशोधित समिति प्रभावी होगी।
8.3 डी.पी.आर. के अन्तर्गत ले-आउट प्लान, सर्कुलेषन प्लान एवं रोड HMA सेक्षन्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं
सर्विसेज यथा जलापूर्ति, stat, सीवरेज, विद्युत आपूर्ति, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, कूड़ा-निस्तारण व्यवस्था,
लैण्डस्केप प्लान तथा अन्य जनसुविधाओं Ar विशिष्टियां एवं प्लान, योजना का क्रियान्वयन हेतु
चरणबदूध समय-सारिणी, परियोजना लागत एवं वित्त पोषण व्यवस्था तथा योजना के रख-रखाव हेतु
प्रस्ताव सम्मिलित होगें। डी.पी.आर. के अन्तर्गत ग्रीन बिल्डिंग सम्बन्धी प्राविधानों तथा पर्यावरण
संरक्षण के प्राविधानों को भी सम्मिलित किया. जायेगा। डी.पी.आर. की विषय-वस्तु तथा उसमें
सम्मिलित किये जाने वाले विवरण (संलग्नक-6) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की चेकलिस्ट के अनुसार
होंगे।
8.4 डी.पी.आर. का परीक्षण कर अपनी संस्तुति मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रस्तुत करने हेतु
निम्न समिति गठित की जायेगीः-
(7). | अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा. | अध्यक्ष
उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि
(2) | मुख्य अभियंता/ वरिष्ठतम अभियंता, औद्योगिक विकास प्राधिकरण सदस्य
(3) | वित्त नियंत्रक/वरिष्ठतम वित्त अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण सदस्य
(4) | सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी का प्रतिनिधि सदस्य
(5) | निदेषक, पर्यावरण विश्वाग अथवा उनके प्रतिनिधि सदस्य
(6) | मुख्य अग्निशमन अधिकारी, अग्निशमन विभाग अथवा उनके प्रतिनिधि | सदस्य
(7) | मुख्य नगर नियोजक a वरिष्ठतम नगर नियोजकए औद्योगिक | सदस्य:
विकास प्रधिकरण संयोजक
यदि प्रस्तुत डी.पी.आर. में समिति द्वारा कतिपय कमियाँ/आपत्तियाँ पायी जाती है, तो
तद्नुसार विकासकर्ता को सूचित करते हुए उसके निराकरण हेतु 7 कार्यदिवसों का समय दिया
जाएगा। कमियों/आपत्तियों के निराकरण हेतु अधिकतम दो बार अवसर दिए जाएंगे तथा तीसरी
बार भी वही कमियाँ।आपत्तियाँ पाई जाती हैं तो डी.पी.आर. को निरस्त कर दिया जाएगा।
विकासकर्ता द्वारा संषोधित डी.पी.आर. प्रस्तुत किए जाने में लगने वाले समय को शून्य
अवधि मानते हुए अग्रेतर कार्यवाही की जाएगी। sea समिति दूवारा परीक्षणोपरान्त उसकी
संस्तुति पर डी.पी.आर. का अनुमोदन मुख्य कार्यपालक अधिकारी gant किया. जाएगा।
डी.पी.आर. के साथ-साथ विकास एवं निर्माण की अनुमति भी दी जाएगी। डी.पी.आर. एवं ले-
आउट के अनुमोदन हेतु स्वीकृति का प्रारूप (संलग्नक-7) के अनुसार होगा।
I- US शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |8.5 डी.पी.आर. के अनुमोदन की कार्यवाही अधिकतम 30 कार्यदिवस में पूर्ण किए जाने हेतु समय-
सारणी (संलग्नक-8) पर संलग्न है। उक्त कार्यवाही 30 कार्य दिवस में पूर्ण न होने की स्थिति में
डी.पी.आर. स्वतः अनुमोदित मानी जाएगी।
8.6 योजना के विकास एवं निर्माण कार्य अनुमोदित डौ.पी.आर. के अनुसार समयबदूध एवं
गुणवकत्तापूर्वक पूर्ण करने हेतु विकासकर्ता द्वारा नियमानुसार सम्बन्धित शासकीय अभिकरण के साथ
*डेवलपमेन्ट एग्रीमेन्ट' (संलग्नक-9) का निष्पादन किया जाएगा।
8.7 योजना के अन्तर्गत प्रस्तावित भवनों का प्लिन्थ तक निर्माण पूर्ण हो जाने पर स्थल का
जी.पी.एस. कोआर्डिनेट्स, तिथि एवं समय के साथ डिजिटल फोटोग्राफ्स शासकीय अभिकरण के समक्ष
प्रस्तुत करना होगा जिसके साथ इस आशय का एफिडेविट (शपथ-पत्र का प्रारूप संलग्नक-0 पर) भी
प्रस्तुत करना होगा कि मौके पर फोटोग्राफ्स के अनुसार निर्माण किया गया है, और यदि यह पाया
जाता है कि विकासकर्ता द्वारा स्वीकृत मानचित्र से इतर निर्माण कार्य कराया गया है जिसमें सेटबैक
परिवर्तित हुए हैं, तो ऐसे निर्माण को शासकीय अभिकरण cant सील कर दिए जाने में उन्हें कोई
आपत्ति नहीं होगी तथा उसके लिए वह किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति का दावा नहीं करेगें। उक्त कार्यवाही
करने के उपरान्त विकासकर्ता द्वारा स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप अग्रेतर निर्माण कार्य जारी रखा
जाएगा।
फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रभारी अभियंता cant तीन दिन मैं स्थल निरीक्षणोपरान्त
विकासकर्ता द्वारा प्रस्तुत विवरण से विचलन/त्रुटि/गलत पाए जाने पर तत्काल विकासकर्ता को नोटिस
दी जाएगी जिसका प्रारूप संलग्नक-4। पर है। इसके साथ ही प्रभारी अभियन्ता दूवारा अपनी आख्या
मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। उक्त आख्या
के सापेक्ष स्थल पर विचलन/त्रुटि का निर्धारण यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक
विकास प्राधिकरण दूवारा स्वयं किया जायेगा तथा विचलन पाये जाने पर निर्माण कार्य को सीलबन्द
कर दिया जायेगा। यह कार्यवाही अधिकतम 5 कार्यदिवस में सुनिश्चित की जाएगी।
8.8 विकासकर्ता द्वारा योजना का क्रियान्वयन रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में पंजीकरण की
तिथि से प्रारम्भ करना अनिवार्य होगा तथा ई.डब्ल्यू.एस. श्रेणी के भवनों का निर्माण अधिकतम 04
dat में प्रस्तावित होने की दषा में (स्थल विकास सहित) 24 माह तथा चार dal से अधिक तलों मैं
प्रस्तावित होने की दशा में अधिकतम 30 माह में पूर्ण करना होगा। निर्धारित अवधि में उक्त कार्य
पूर्ण न करने पर विकासकर्ता द्वारा डी.पी.आर. मैं उल्लिखित ई.डब्ल्यू.एस. योजना की लागत की 0.4
प्रतिशत प्रतिदिन (अधिकतम 60 दिन तक) की दर से पेनाल््टी शासकीय अभिकरण को देय होगी। 60
दिन की अवधि के पश्चात् प्रस्तर-4.5 एवं प्रस्तर-4.6 के प्राविधानानुसार यथास्थिति, बैंक गारन्टी तथा
बन्धक रखी गयी भूमि के जब्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी। योजना के अवशेष विकास एवं निर्माण
कार्य प्रभावी नियमों की व्यवस्थानुसार पूर्ण करके पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा।
9. आवासो का लाभार्थियों को आवंटन
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |9.4 राज्य नोडल एजेन्सी (एसएलएनए) cant सत्यापित लाभार्थियों को भवन आवंटन लाटरी के
माध्यम से निम्न समिति gant किया जायेगा:-
(l) | सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी/अध्यक्ष, SST अध्यक्ष
(ii) | सम्बन्धित मुख्य कार्यपालक अधिकारी, औद्योगिक विकास सदस्य संयोजक
प्राधिकरण CANT नामित प्रतिनिधि
(iii) | सम्बन्धित ओदू्यौगिक विकास प्राधिकरण के वित्त नियंत्रक, सदस्य
औद्योगिक विकास प्राधिकरण
(iv) | सम्बन्धित परियोजना अधिकारी, डूडा
सदस्य
चयनित लाभार्थियों को आवंटन पत्र सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा निर्गत किया जायेगा।
9.2 औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विज्ञापित किये गये डिमाण्ड सर्वे के आधार पर प्राप्त इच्छुक
लाभार्थियों के पंजीकरण में से लाभार्थियों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जायेगा। लॉटरी कुल
भवनों की संख्या से 0 प्रतिशत अधिक लाभार्थियों (यदि उपलब्ध हो) हेतु की जायेगी। sea 0
प्रतिशत की संख्या के लाभार्थियों की प्रतीक्षा सूची अभिकरण द्वारा जारी करते हुए प्रतीक्षा सूची के
अन्तर्गत आ रहे सभी लाभार्थियों को भी आवंटन पत्र जारी किया जायेगा। वास्तविक चयनित
लाभार्थियों में से डिफाल्टर (यदि कोई हो) लाभार्थियों का आवंटन निरस्त करते हुए प्रतीक्षा सूची मैं
स्थित लाभार्थियों को क्रमवार डिफाल्टर लाभार्थियों के अवन आवंटित कर संशोधित पत्र जारी किया
जायेगा। ऐसी दशा मैं डिफाल्टर लाभार्थियों द्वारा जमा धनराशि अभिकरणों के आवंटन नियमावली के
आधार पर कटौती के उपरान्त डिफाल्टर लाभार्थियों को वापस कर दी जायेगी। यदि लॉटरी से चयनित
वास्तविक लाभार्थियों द्वारा मांग पत्र के अनुसार धनराशि जमा कर भवन हस्तगत कर लिया जाता है,
तो प्रतीक्षा सूची के लाभार्थियों को प्रचलित एफ.डी.आर. की दर से अभिकरण cant ब्याज सहित
पंजीकरण धनराशि वापस की जायेगी।
0. विकासकर्ताओं के दायित्व
0.. विकासकर्ता द्वारा ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयों का निर्माण कर उन्हें शासकीय अभिकरण द्वारा
चिन्हित ऐसे लाभार्थियों के पक्ष में हस्तांतरित करना होगा जिनके cant योजनान्तर्गत पंजीकरण
कराया जायेगा। विकासकर्ता द्वारा प्रस्तुत परियोजना की सक्षम स्तर से स्वीकृति के पष्चात लाभार्थी
द्वारा मात्र रू0 5000.00 (रू. पांच हजार मात्र) पंजीकरण धनराशि अभिकरण के माध्यम से
विकासकर्ता को दी जाएगी। अवषेष धनराषि छः तिमाही किश्तों A अभिकरण दूवारा लाभार्थियों से
प्राप्त कर प्रत्येक तिमाही विकासकर्ता को उपलब्ध करायी जायेगी। इस प्रकार fasted को भवन
मूल्य की धनराशि प्राप्त होगी। प्रधानमंत्री आवास योजना की. गाईडलाइन्स के प्राविधानानुसार
विकासकर्ता को कुल 2.5 लाख रूपये प्रति ई.डब्ल्यू.एस. आवासीय इकाई (Hear 7.50 लाख एवं
राज्यांश 7.00 लाख) शासकीय अभिकरण के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। ई.डब्ल्यू.एस. भवनों
के उपरोक्तानुसार निर्धारित 22.77 वर्गमी0 कारपेट एरिया के लिए रू0 6.00 लाख तथा 22.77
व0मी0 से 30 व0मी0 तक के कारपेट एरिया के भवनों की लागत को प्रो-रेटा क्षेत्रफल के आधार पर
न्यूनतम सीलिंग कास्ट के अतिरिक्त विकास एवं निर्माण की शेष लागत, (यदि कोई अवशेष हो)
राज्य सरकार GANT प्रदत्त इन्सेन्टिव्स से “क्रास-सब्सिडाइज' की जानी होंगी। केन्ट्रांश व राज्यांश के मद
की धनराशि प्राप्त होने पर अधिकतम एक माह मैं विकासकर्ता को उपलब्ध करायी जायेगी।
0.2 ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयों के अतिरिक्त योजनान्तर्गत निर्मित होने वाली अन्य सम्पत्तियों का
निस्तारण विकासकर्ता द्वारा स्वयं किया जाएगा।
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |0.3 योजना के सम्बन्ध मैं समस्त विधिक एवं नियमानुसार वांछित अन्य अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा
पर्यावरणीय स्वीकृति, आदि के सम्बन्ध में प्राधिकरणों में लागू ओबीपीएएस सिस्टम व निवेष मित्र के
प्राविधानों के अनुसार कार्यवाही की जायेगी।
0.4 विकासकर्ता द्वारा योजना का क्रियान्वयन निर्धारित अवधि के अन्दर प्रारम्भ करना अनिवार्य
होगा। उल्लंघन की दशा में 'इन्सेन्टिव* वापस ले लिए जाएंगे।
0.5 विकासकर्ता दूवारा योजना के समस्त आन्तरिक विकास कार्य अपनी लागत पर स्वयं क्रियान्वित
किये जाएंगे।
0.6 विकासकर्ता दूवारा योजना के प्रासंगिक चरण का पूर्णता प्रमाण-पत्र लिए बिना भूमि अथवा उसके
किसी भू-भाग का हस्तान्तरण/सब-लीजिंग अनुमन्य नहीं होगी। उल्लंघन की दशा मैं विकासकर्ता को
प्रदत्त समस्त रियायतें/इन्सेन्टिव वापस ले लिये जाएंगे तथा सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा रियल इस्टेट
(रेगुलेशन एण्ड डेवल्पमेन्ट) एक्ट के अन्तर्गत कार्यवाही की जाएगी।
0.7 विकासकर्ता द्वारा डी.पी.आर. की स्वीकृति के समय रू.00/-(रूपए एक सौ मात्र) के स्टाम्प
पेपर पर शासकीय अभिकरण को इस आशय का शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा कि योजना के
अन्तर्गत निर्मित ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयों का निर्माण कर उन्हें शासकीय अभिकरण gant चिन्हित
लाभार्थियों को निर्धारित समय में हस्तांतरित किया जाएगा।
0.8 विकासकर्ता द्वारा रियल इस्टेट (रेगुलेशन एण्ड डेवलपमेन्ट एक्ट), 20I6 तथा. तदधीन बनाये
गये नियमों का पालन किया जाएगा।
0.9 ई.डब्ल्यू.एस. तथा अन्य आय वर्गों की आवासीय इकाईयों के लिए मानकों के अनुसार पृथक-
पृथक Het क्षेत्र एवं सुविधाओं का नियोजन/प्राविधान किया जा सकता है तथा पृथक-पृथक रेजीडेन्ट
वेलफेयर एसोसिएशन (आर.डब्ल्यू.ए.) बनाए जा सकते हैं, ताकि साझे क्षेत्रों एवं सुविधाओं का समुचित
रख-रखाव सुनिश्चित हो सके।
0.0 विकसित योजना की सेवाओं का स्थानीय निकाय को हस्तान्तरण होने तक उनका रख-रखाव
विकासकर्ता द्वारा किया जाएगा। योजनान्तर्गत निर्मित अपार्टमेन्ट्स में कॉमन सुविधाओं के रख-रखाव
हेतु उत्तर प्रदेश अपार्टमेन्ट अधिनियम, 20i0 के सुसंगत प्राविधानों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
विकासकर्ता दूवारा भवन के नियमित अनुरक्षण हेतु, भवन के निर्धारित मूल्य की. 0 प्रतिशत की
धनराशि का अनुरक्षण HVS तथा वृहद एवं आकस्मिक अनुरक्षण कार्यों हेतु भवन के निर्धारित मूल्य के
0 प्रतिशत धनराशि का कारपस Hos बनाया जायेगा। उक्त दोनो wus मैं सम्पूर्ण धनराषि का
योगदान लाभार्थियों द्वारा किया जायेगा। उक्त धनराषि भवन के सामान्य मूल्य के अतिरिक्त होगी।
उक्त भवनों के पूर्ण होने के उपरांत प्रथम कब्जे की दिनांक से अधिकतम 5 वर्ष तक अनुरक्षित किया
जायेगा। 5 वर्ष से पूर्व आर.डब्ल्यू.ए. का गठन हो जाने की स्थिति मैं साझा क्षेत्रों एवं सामूहिक
सुविधाओं का हस्तान्तरण होने के पश्चात अनुरक्षण फण्ड एवं कारपस Hos की अवशेष धनराशि
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को हस्तगत कर दी जायेगी।
चार मंजिला से अधिक तलों के अपार्टमेंट भवनों के नियमित अनुरक्षण हेतु । प्रतिशत तथा
वृहद एवं आकस्मिक अनुरक्षण कार्यो हेतु । प्रतिशत प्रति इकाई का अतिरिक्त कारपस फण्ड बनाया
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |जायेगा। उक्त दोनो अतिरिक्त wos में सम्पूर्ण धनराशि का योगदान विकासकर्ता द्वारा किया जायेगा।
उक्त भवनों के पूर्ण होने के उपरांत प्रथम कब्जे की दिनांक से अधिकतम 5 वर्ष तक विकासकर्ता
द्वारा अनुरक्षित किया जायेगा। 5 वर्ष से पूर्व आर.डब्ल्यू.ए. का गठन हो जाने की स्थिति में साझा
aa एवं सामूहिक सुविधाओं का हस्तान्तरण होने के पश्चात् अनुरक्षण फण्ड एवं कारपस wus की
अवशेष धनराशि रेजिडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन को हस्तगत कर दी जायेगी।
44. वित्तीय सहायता हेतु शर्तें एवं प्रतिबन्ध
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन की गाईडलाइन्स के अनुसार विकास कर्ता को
ई.डब्ल्यू.एस. आवासों हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु निम्न प्रक्रिया होगीः-
4.4 राज्यांश एवं Hegre की धनराशि हेतु सम्बन्धित औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से
अपनी मांग प्रस्तुत करेगे एवं इस मांग के आधार पर सूडा द्वारा अभिकरणों को पब्लिक फाईनेन्स
मैनेजमेन्ट सिस्टम (पीएफएमएस) के माध्यम से सीधे राज्यांश एवं केन्द्रान्श.. की धनराशि
हस्तान्तरित की जायेगी।
4.2 सी.एस.एम.सी. की संस्तुति के उपरान्त प्रथम किस्त के रूप में hea की 40 प्रतिशत धनराशि
अवमुक्त की जाएगी, जिसके सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा मैचिंग शेयर Hane किया जाएगा।
.3 दूवितीय feta के रूप मैं 40 प्रतिशत धनराशि केन्द्र एवं राज्यांश can अवमुक्त की गई प्रथम
किस्त की कुल धनराशि का 70 प्रतिशत उपयोग हो जाने तथा 25 प्रतिशत ई.डब्ल्यू.एस. इकाईयों की
छत पड़ जाने पर अवमुक्त की जाएगी। दूवितीय किस्त अवमुक्त किए जाने से पूर्व योजनान्तर्गत
निर्माणाधीन भवनों का सी.एस.एम.सी. द्वारा रैण्डम निरीक्षण किया जा सकता है।
.4 विकासकर्ता cant क्रियान्वित की जा रही योजना की निगरानी राज्य नोडल Wiest
(एसएलएनए) दूवारा निर्धारित तृतीय पक्ष गुणवत्ता निगरानी एजेन्सी से करायी जायेगी जिसके लिए
विकासकर्ता से कोई अन्य शुल्क नहीं लिया. जाएगा। इस एजेन्सी को राज्य नोडल एजेन्सी
(एसएलएनए) FART उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि से भुगतान किया जाएगा।
.5 अन्तिम feta की 20 प्रतिशत धनराशि प्रथम एवं द्वितीय किस्तों A अवमुक्त कुल धनराशि
का 70 प्रतिशत उपयोग हो जाने पर Hana की जाएगी। इस राशि को अवमुक्त करने से पूर्व
यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी औद्योगिक विकास प्राधिकरण यह संतुष्टि कर लेंगे कि निर्माण
की भौतिक प्रगति अवमुक्त की जा चुकी धनराशि से अधिक है।
.6 भारत सरकार द्वारा अवमुक्त धनराषि राज्य सरकार को प्राप्त होने की तिथि के yess दिन के
अन्दर राज्यांष सहित विकासकर्ता को अवमुक्त की जाएगी।
2. राज्य सरकार एवं शासकीय अभिकरणों की भूमिका
2. उत्तर प्रदेश राज्य पर्यावरण विभाग द्वारा राज्य स्तर पर स्टेट इन्वायरमेन्टल बोर्ड का शीघ्र
गठन कराये जाने का प्रयास किया जाएगा, जिसे 3.0 लाख वर्ग मीटर बिल्ट-अप एरिया तक के
I- US शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |योजनाओं की स्वीकृति का अधिकार होगा। फलस्वरूप प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत संचालित
योजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु भारत सरकार के अनुमोदनार्थ भेजने की आवश्यकता नहीं
होगी।
2.2 स्टेट इन्वायरमेन्टल बोर्ड के स्तर पर प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु अलग से डेडीकेटेड चैनल
बनाया जाएगा तथा “इन्वायरमेन्टल इम्पेक्ट असेसमेन्ट' हेतु निर्धारित 03 माह की अवधि को इस
योजना हेतु कम कर 0l माह कराये जाने का प्रयास किया जाएगा। फलस्वरूप 0 माह के अन्दर ही
परियोजना स्टेट इन्वायरमेन्टल बोर्ड को प्रस्तुत हो सकेगी और अगले 0 माह में स्वीकृति प्रदान कर
दी जाएगी। इस प्रकार पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र 02 माह की अवधि के पश्चात् निर्गत
किए जाने का प्रयास किया जाएगा।
अनुश्रवण एवं कठिनाई निवारण
योजना के क्रियान्वयन की प्रगति के अनुश्रवण, क्रियान्वयन में उत्पन्न कठिनाईयों के
निवारण, निजी विकासकर्ताओं की समस्याओं तथा आवंटियों/क्रेताओं की शिकायतों के समाधान हेतु
अध्यक्ष, विकास प्राधिकरण की अध्यक्षता में एक समिति होगी जिसमें विकासकर्ता/प्रतिनिधि, संबंधित
शासकीय अभिकरण का प्रतिनिधि तथा प्रथम आवंटी/क्रेता (यदि हों) सदस्य होगें। इस सम्बन्ध मैं
नगर विकास अनुभाग-। के शासनादेश WCAT-623/69- -2076-4(39)/205er.M., दिनांक 2 मार्च,
206 के प्राविधानों का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा।
3. अन्य बिन्दु
3.... योजना के क्रियान्वयन मैं पर्यावरणीय नियमों/अधिनियमों के अन्तर्गत वांछित स्वीकृति के
साथ-साथ इस सम्बन्ध में AO न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों का सम्यक अनुपालन
सुनिश्चित किया जायेगा।
3.2 यह योजना वर्ष 2020-202। तक ही लागू होगी।
3.3 . प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) मिशन के अन्तर्गत विकासकर्ता cant निर्मित किये जा रहे
ई.डब्लू.एस. भवन का निबन्धन विकासकर्ता द्वारा लाभार्थियों के पक्ष में BO 500/- (रूपया पांच सौ
मात्र) के स्टाम्प पेपर पर निष्पादित किया जायेगा।
2. इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि कृपया शासन दूवारा लिए गए उपर्युक्त निर्णय
का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का कष्ट करें।
संलग्नक: यथोक्त
भवदीय,
(आलोक कुमार)
अपर मुख्य सचिव
संख्या: /202/207_(4)/7 7-4-2 ages
oa Fk WN
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषितः-
= अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग, उ0प्र0शासन।
प्रमुख सचिव, नगर विकास fastest, उ0प्र0शासन।
प्रमुख सचिव, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग, उ0प्र0शासन।
प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उ0प्र0 शासन।
निदेशक, सूडा, उ0प्र0 लखनऊ |
मुख्य नगर एवं ग्राम्य नियोजक, उत्तर प्रदेश लखनऊ।
- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |निदेशक, आवास Tee], उत्तर प्रदेश लखनऊ।
8. गार्ड बुक।
आजा से,
(आनन्द कुमार सिंह)
अनु सचिव।
I- US शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |