See Full Document Text
ECAl-376/2026/24/ 22-2-2025-7(928)/2025
प्रेषक,
कमलेश कुमार,
उप सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन।
सेवा में,
पुलिस महानिदेशक»महानिरीक्षक,
कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ: दिनांक 07 अप्रैल, 2026
विषय:- केन्द्रीय PRIN, इटावा में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी जयदत्त पुत्र श्री पुलन्दर सिंह, निवासी जनपद-
इटावा वर्तमान औरैया की दयायाचिका के आधार पर समय पूर्व रिहाई के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपयुक्त विषयक वरिष्ठ अधीक्षक (मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उ0प्र0 लखनऊ के
पत्र संख्या-963/ प्रोबे0-5-दया0 बैठक 25.04.2025, दिनांक 08.05.2025 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें।
2- कअक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार बंदी जयदत्त पुत्र श्री पुलन्दर सिंह (दिनांक
07.2.2024 तक बन्दी की आयु लगभग 66 वर्ष) बदनपुर, थाना-बिधूना, जनपद-इटावा का निवासी है।
deel द्वारा दिनांक 20.2.983 को 03 सहअभियुक्तों के साथ मिलकर भाला, मूसल व गदा से मारकर
रामऔतार को घायल कर दिया जिसकी उपचार के दौरान दिनांक 26.2.:983 को मृत्यु हो गयी। उक्त
अपराध हेतु सत्र परीक्षण संख्या- 477985 में भा०द0वि0 की धारा-302/34 के अन्तर्गत Alo न््यायात्रय,
सत्र न्यायाधीश, इटावा के आदेश दिनांक 24.03.987 द्वारा आजीवन कारावास से दण्डित किया गया।
Alo उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के आदेश दिनांक 8.09.20I9 द्वारा आजीवन कारावास की सजा को
लघुकृत कर 02 वर्ष कर दिया गया था। Ale उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के आदेश दिनांक
9.0.2022 @RI Alo सत्र न्यायालय द्वारा दी गयी आजीवन कारावास की सजा को रिस्टोर कर दिया
गया। बंदी द्वारा दिनांक 07.2.2024 तक अपरिहार 04 वर्ष, 02 माह, 29 दिन तथा सपरिहार 05 वर्ष,
02 माह, 20 दिन की मात्र सजा भोगी गयी है। जिला मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधीक्षक, औरैया द्वारा बन्दी
द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किये बिना व्यक्ति विशेष तक सीमित अपराध की
sot में न होने, भविष्य में अपराध किये जाने की आशंका व्याप्त होने, पुनः अपराध किये जाने की
सम्भावना होने, रिहा होने पर पुनः अपराध कारित किये जाने की सम्भावना जाहिर किये जाने एवं बन्दी
के परिवार की सामाजिक व आर्थिक दशा समय पूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नहीं होने के दृष्टिगत समयपूर्व
रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है की गयी है। दयायाचिका समिति की आख्यानुसार बन्दी को Alo सत्र
न्यायालय द्वारा प्रदत्त आजीवन कारावास के सापेक्ष दिनांक 07.2.2024 तक अपरिहार 04 वर्ष, 02 माह
29 दिन तथा सपरिहार 05 वर्ष, 02 माह 20 दिन की भोगी गयी सजा के सापेक्ष रिहा होने पर समाज में
प्रतिकूल संदेश जाने तथा पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, औरैया द्वारा समयपूर्व रिहाई की सस्तुति
नहीं किए जाने के इृष्टिगत सभी बिन्दुओं पर सम्यक् विचारोपरान्त समिति द्वारा sect की समयपूर्व रिहाई
की संस्तुति नहीं की गई है।
3- उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का fade हुआ है कि केन्द्रीय
कारागार, इटावा में निरूद्द सिद्धदोष बंदी जयदत्त (बन्दी AEA-2I/2023) YA श्री पुलन्दर सिंह, निवासी
जनपद-इटावा वर्तमान औरैया की भारत का संविधान के Hqede-i6 के अन्तर्गत दयायाचिका के आधार
पर समयपूर्व रिहाई सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। कृपया उपरोक्त से
deal को भी अवगत कराने का कष्ट करें।
भवदीय,
कमलेश कुमार
उप सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |ABA-376/2026/24 ()/22-2-2025 तटदिनांक
प्रतिल्रिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: -
4. जिला मजिस्ट्रेट, इटावा/औरैया।
2- पुलिस अधीक्षक, इटावा/औरैया।
3- वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, इटावा।
4- निजी सचिव, माए0 मंत्री/ AlO राज्य मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को AIO
मंत्री जी के सूचनार्थ।
5- गार्ड Wisc
आज्ञा से,
ममता श्रीवास्तव
अनु सचिव।
4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है |
2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |