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jftLVªh lañ Mhñ—221 REGISTERED NO. D.—221
सी.जी.-डीx.एxलx.G-अI.D-3H0x10x2x024-258345
CG-xDxLx-EG-I3D01E02x0x2x4-258345
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EXTRAORDINARY
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PART II—Section 1A
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PUBLISHED BY AUTHORITY
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No. 3 NEW DELHI, THURSDAY, MAY 30, 2024/JYAISHTHA 9, 1946 (SAKA) VOL. LX
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ds izkf/kdkj ls izdkf'kr fd, tkrs gSa vkSj ;s jktHkk"kk vf/kfu;e] 1963 ¼1963 dk 19½ dh
/kkjk 5 dh mi/kkjk ¼1½ ds [kaM ¼d½ ds v/khu muds fgUnh esa izkf/kd`r ikB le>s tk,axs %—
MINISTRY OF LAW AND JUSTICE
(Legislative Department)
New Delhi, May 30, 2024/Jyaishtha 9, 1946 (Saka)
The Translation in Hindi of the following, namely:— The National Commission For
Homoeopathy Act, 2020 (2) The National Bank For Financing Infrastructure And Development
Act, 2021; (3) The National Institutes Of Food Technology, Entrepreneurship And Management
Act, 2021; (4) The Limited Liability Partnership (Amendment) Act, 2021; (5) The Dam Safety
Act, 2021; (6) The Chartered Accounts, the Cost and Works Accountants and the Company
Secretaries (Amendment) Act, 2022; (7) The Constitution (Scheduled Castes and Scheduled
Tribes) Orders (Second Amendment) Act, 2022; (8) The New Delhi International Arbitration
Centre (Amendment) Act, 2022; (9) The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Second
Amendment) Act, 2022; (10) The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Fourth Amendment)
Act, 2022; and (11) The Finance Act, 2023 are hereby published under the authority of the
President and shall be deemed to be the authoritative texts thereof in Hindi under clause (a)
of sub-section (1) of section 5 of the Official Languages Act, 1963 (19 of 1963):—i`"B
jk"Vªh; gkE;ksiSFkh vk;ksx vf/kfu;e] 2020 ¼2020 dk vf/kfu;e la[;kad 15½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 537
The National Commission For Homoeopathy Act, 2020
jk"Vªh; volajpuk foÙkiks"k.k vkSj fodkl cSad vf/kfu;e] 2021 ¼2021 dk vf/kfu;e la[;kad 17½ - - - - - - - - - 571
The National Bank for Financing Infrastructure and Development Act, 2021
jk"Vªh; [kk| izkS|ksfxdh] m|ferk vkSj izca/k laLFkku vf/kfu;e] 2021 ¼2021 dk vf/kfu;e la[;kad 19½ - - - - - - 601
The National Institutes of Food Technology, Entrepreneurship and Management Act, 2021
lhfer nkf;Ro Hkkxhnkjh ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2021 ¼2021 dk vf/kfu;e la[;kad 31½ - - - - - - - - - - - - - - - 619
The Limited, Liability Partnership (Amendment) Act, 2021
cka/k lqj{kk vf/kfu;e] 2021 ¼2021 dk vf/kfu;e la[;kad 41½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 635
The Dam Safety Act, 2021
pkVZMZ vdkmaVsaV] ykxr vkSj ladeZ ys[kkiky vkSj daiuh lfpo ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2022 ¼2022 dk 663
vf/kfu;e la[;kad 12½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -
The Chartered Accountants, The Cost and Works Accountants and the Company Secretaries
(Amendment) Act, 2022
lafo/kku ¼vuqlwfpr tkfr;ka vkSj vulq wfpr tutkfr;ka½ vkns'k ¼nwljk la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2022 ¼2022 - - - - - 713
vf/kfu;e la[;kad 20½
The Constitution (Scheduled Castes and Schedule Tribes) Orders (Second Amendment) Act, 2022
ubZ fnYyh varjjk"Vªh; ek/;LFke~ dsanz ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2022 ¼2022 dk vf/kfu;e la[;kad 23½ - - - - - - - 717
The New Delhi International Arbitration Centre (Amendment) Act, 2022
lafo/kku ¼vuqlwfpr tutkfr;ka½ vkns'k ¼nwljk la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2022 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 1½ - - 721
The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Second Amendment) Act, 2022
lafo/kku ¼vuqlwfpr tutkfr;ka½ vkns'k ¼pkSFkk la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2022 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 2½ - - 723
The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Fourth Amendment) Act, 2022
foÙk vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 8½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 725
The Finance Act, 2023अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
537
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020
(2020 का अधिनियम संखयांक 15)
[20 ससतम्बर, 2020]
ऐसी धिककत्सा सिक्षा पद्िनत के सिए, जो देि के सभी भागों में क्वासिटी और सस्ती
आयुर्वज्ञि ाि सिक्षा तक पहुंि बिािे में असभवद्ृ धि करती है; जो पयािप्त और उच्ि
क्वासिटी वािे होम्योपैथी धिककत्सा वर्ृिकों की उपिब्िता को सुनिश्चित करती है ;
जो ऐसी साम्यापूर् ि और सावभि ौसमक स्वास््य देख-रेख का संवििि करती है श्जससे
सामुदानयक स्वास््य पररप्रेक्ष्य को बढावा समिता है और सभी िागररकों के
सिए होम्योपैथी धिककत्सा वर्ृिकों की सेवाओं को सुगम और वहि करिे
योग्य बिाती है; जो राष्ट्रीय स्वास््य सम्बन्िी िक्ष्यों का सवं ििि करती
है; होम्योपैथी धिककत्सा वर्ृिकों को उिके काय ि में िवीितम धिककत्सा
अिुसंिाि को अंगीकृत करि े और अिुसंिाि में योगदाि देिे के सिए
प्रोत्साहहत करती है; श्जसका उद्देचय आयुर्वज्ञि ाि संस्थाओ ं का
आवधिक और पारदिी रूप से नििािरर् करिा और भारत
के सिए होम्योपैथी धिककत्सा रश्जस्टर के रखरखाव को
सुकर बिािा तथा धिककत्सीय सेवाओं के सभी पहिुओं
में उच्ि िनैतक मािकों को िागू करिा है ; जो
पररवतिि िीि आवचयकताओं को अंगीकार
करिे के सिए सुिम्य है और श्जसमें
एक प्रभावी सिकायत समािाि तंत्र
सश्म्मसित हो तथा उससे सम्बश्न्ित
या उसके आिुषंधगक र्वषयों का
उपबंि करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर् ष में ससं द् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
538
अध्याय 1
प्रारश्म्भक
संक्षिप्त नाम, 1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधधननयम,
ववस्तार और
2020 है ।
प्रारम्भ ।
(2) इसका ववस्तार संपूण ष भारत पर है ।
(3) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना
द्वारा ननयत करे :
परंतु इस अधधननयम के ववलभन्द्न उपबंधों के लिए लभन्द्न-लभन्द्न तारीिें ननयत की
जा सकेंगी और ऐस े ककसी उपबंध में इस अधधननयम के प्रारम्भ के प्रनत ककसी ननर्देश
का यह अथ ष िगाया जाएगा कक यह उस उपबंध के प्रवत्तृ होने के प्रनत ननर्देश है ।
पररभार्ाएं । 2. इस अधधननयम में, जब तक कक संर्दभ ष से अन्द्यथा अपेक्षित न हो,—
(क) “स्वायत्त बोर्”ष से धारा 18 के अधीन गठित कोई स्वायत्त बोर् ष अलभप्रेत
है ;
(ि) “होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर्”ष स े धारा 18 के अधीन
गठित बोर् ष अलभप्रेत है ;
(ग) “अध्यि” स े धारा 5 के अधीन ननयुक्त राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग का
अध्यि अलभप्रेत है ;
(घ) “आयोग” से धारा 3 के अधीन गठित राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग
अलभप्रेत है ;
(ङ) “पररर्द्” से धारा 11 के अधीन गठित होम्योपैथी सिाहकार पररर्द्
अलभप्रेत है ;
(च) “होम्योपैथी” से होम्योपैधथक आयुववषज्ञान प्रणािी अलभप्रेत है जजसके
अन्द्तगषत ऐसे जैव रसायन उपचार का उपयोग करना है जो ऐसे आधुननक
अलभर्दाय, वैज्ञाननक और प्रौद्योधगक ववकास द्वारा अनुपूररत है जजन्द्हें आयोग,
केन्द्रीय सरकार के परामश ष स े समय-समय पर अधधसूचना द्वारा घोवर्त करे ;
(छ) “होम्योपैथी लशिा बोर्”ष से धारा 18 के अधीन होम्योपैथी लशिा के लिए
गठित बोर् ष अलभप्रेत है ;
(ज) “अनुज्ञजप्त” से धारा 33 की उपधारा (1) के अधीन मंजूर की गई
होम्योपैथी का व्यवसाय करने के लिए अनुज्ञजप्त अलभप्रेत है ;
(झ) “होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर्”ष स े धारा 18 के अधीन
गठित धचककत्सा संस्थाओं का ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष अलभप्रेत है ;
(ञ) “धचककत्सा संस्था” से भारत के भीतर या उसके बाहर की कोई ऐसी
संस्था अलभप्रेत है जो होम्योपैथी में उपाधध, डर्प्िोमा या अनुज्ञजप्त प्रर्दान करती है
और इसके अंतगतष सहबद्ध महाववद्यािय और माननत ककए जाने वािे
ववश्वववद्यािय भी हैं ;
( ) “सर्दस्य” से धारा 4 में ननठर्दषष्ट् आयोग का कोई सर्दस्य अलभप्रेत है और
इसके अंतगषत उसका अध्यि भी है ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
539
(ि) “राष्ट्रीय रजजस् र” से धारा 32 के अधीन होम्योपैथी नैनतक और
रजजस्रीकरण बोर् ष द्वारा अनुरक्षित राष्ट्रीय होम्योपैथी धचककत्सा रजजस् र अलभप्रेत
है;
(र्) “अधधसूचना” से राजपत्र में प्रकालशत कोई अधधसूचना अलभप्रेत है और
“अधधसूधचत करना” पर्द का तद्नुसार अथ ष िगाया जाएगा ;
(ढ) “ववठहत” स े इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ननयमों द्वारा ववठहत
अलभप्रेत है ;
(ण) “प्रधान” से धारा 20 के अधीन ननयुक्त स्वायत्त बोर् ष का प्रधान अलभप्रेत
है;
(त) “ववननयम” स े इस अधधननयम के अधीन आयोग द्वारा बनाए गए
ववननयम अलभप्रेत हैं ;
(थ) “राज्य धचककत्सा पररर्द्” से ककसी राज्य या संघ राज्यिेत्र में तत्समय
प्रवत्तृ ककसी ववधध के अधीन होम्योपैथी व्यवसानययों के व्यवसाय को ववननयलमत
करन े और उनका रजजस्रीकरण करने के लिए गठित राज्य होम्योपैथी धचककत्सा
पररर्द् अलभप्रेत है ;
(र्द) “राज्य रजजस् र” से होम्योपैथी व्यवसानययों का रजजस्रीकरण करने के
लिए ककसी राज्य या संघ राज्यिेत्र में तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध के अधीन
अनुरक्षित राज्य होम्योपैथी रजजस् र अलभप्रेत है ;
(ध) “ववश्वववद्यािय” का वह अथ ष होगा जो ववश्वववद्यािय अनुर्दान आयोग
अधधननयम, 1956 की धारा 2 के िंर् (च) में है और इसके अंतगतष कोई स्वास््य
1956 का 3
ववश्वववद्यािय भी है ।
अध्याय 2
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग
3. (1) केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के अधीन अधधसूचना द्वारा राष्ट्रीय राष्ट्रीय होम्योपैथी
आयोग का
होम्योपैथी आयोग के नाम से ज्ञात एक आयोग का गिन करेगी जो उसे प्रर्दत्त शजक्तयों
गिन ।
का प्रयोग करेगा और उसको समनुर्देलशत कृत्यों का पािन करेगा ।
(2) आयोग, पूवोक्त नाम का एक ननगलमत ननकाय होगा जजसके पास शाश्वत
उत्तराधधकार और एक सामान्द्य मुरा होगी और जजसे इस अधधननयम के उपबंधों के
अधीन रहते हुए जंगम और स्थावर र्दोनों प्रकार की संपवत्त का अजनष , धारण और व्ययन
करने तथा संववर्दा करने की शजक्त होगी और वह उक्त नाम से वार्द िाएगा और उस
पर वार्द िाया जाएगा ।
(3) आयोग का मुख्यािय नई ठर्दल्िी में होगा ।
4. (1) आयोग, ननम्नलिखित व्यजक्तयों से लमिकर बनेगा, अथाषत ् :— आयोग की
संरचना ।
(क) अध्यि ;
(ि) सात पर्देन सर्दस्य ; और
(ग) उन्द्नीस अंशकालिक सर्दस्य ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
540
(2) अध्यि, उत्कृष्ट् योग्यता, प्रमाखणत प्रशासननक िमता और सत्यननष्ट्िा वािा
ऐसा व्यजक्त होगा, जजसके पास ककसी मान्द्यताप्राप्त ववश्वववद्यािय से होम्योपैथी में
स्नातकोत्तर उपाधध हो और होम्योपैथी के िेत्र में कम स े कम बीस वर् ष का अनुभव हो
जजसमें से कम से कम र्दस वर् ष स्वास््य र्देि-रेि पररर्दान, होम्योपैथी की उन्द्ननत और
ववकास या उसकी लशिा के ित्रे में अग्रणी के रूप में रहा हो ।
(3) ननम्नलिखित व्यजक्त, केन्द्रीय सरकार द्वारा आयोग के पर्देन सर्दस्य के रूप
में ननयुक्त ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
(क) होम्योपैथी लशिा बोर् ष का प्रधान ;
(ि) होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष का प्रधान ;
(ग) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष का प्रधान ;
(घ) आयुर् मंत्रािय में सिाहकार (होम्योपैथी) या भारत सरकार का संयुक्त
सधचव, जो होम्योपैथी का भारसाधक है ;
(ङ) ननर्देशक, राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान, कोिकाता ;
(च) ननर्देशक, पूवोत्तर आयुवेठर्दक और होम्योपैथी संस्थान, लशिांग ; और
(छ) महाननर्देशक, केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान पररर्द्, जनकपुरी, नई
ठर्दल्िी ।
(4) केन्द्रीय सरकार द्वारा ननम्नलिखित व्यजक्त आयोग के अंशकालिक सर्दस्य के
रूप में ननयुक्त ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
(क) योग्यता, सत्यननष्ट्िा और प्रनतष्ट्िा वाि े व्यजक्तयों में से ननयुक्त ककए
जाने वािे ऐस े तीन सर्दस्य, जजनके पास होम्योपैथी, प्रबंध, ववधध, स्वास््य
अनुसंधान, ववज्ञान और प्रौद्योधगकी तथा अथशष ास्त्र के िेत्रों में ववशेर् ज्ञान और
ववृत्तक अनुभव हों ;
(ि) सिाहकार पररर्द् में राज्यों और संघ राज्यिेत्रों के नामननर्देलशनतयों में
से चक्रानुक्रम आधार पर ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, र्दो वर् ष की अवधध के
लिए ननयुक्त ककए जाने वािे र्दस सर्दस्य ;
(ग) धारा 11 की उपधारा (2) के िंर् (घ) के अधीन राज्यों और संघ
राज्यिेत्रों के नामननर्देलशनतयों में से ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए, र्दो वर् ष की
अवधध के लिए ननयुक्त ककए जाने वािे सिाहकार पररर्द् के छह सर्दस्य :
परंतु कोई सर्दस्य या तो स्वयं या अपने कु ुम्ब सर्दस्यों में से ककसी सर्दस्य के
माध्यम से प्रत्यितः या अप्रत्यितः ककसी प्राइवे या गैर-सरकारी आयुववज्ञष ान संस्था,
जो इस अधधननयम के अधीन ववननयलमत है, के प्रबंध ननकाय का स्वामी नहीं होगा या
उसके साथ सहबद्ध नहीं होगा या उसके साथ कोई संबंध नहीं रिेगा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा और धारा 19 के प्रयोजन के लिए “अग्रणी” पर्द से कोई
ववभागाध्यि या ककसी संगिन का प्रधान अलभप्रेत है ।
अध्यि और सर्दस्यों 5. (1) केन्द्रीय सरकार, ननम्नलिखित से लमिकर बनी िोजबीन सलमनत की
की ननयुजक्त के लिए
लसफाररश पर धारा 4 में ननठर्दषष्ट् अध्यि और धारा 20 में ननठर्दषष्ट् स्वायत्त बोर्ों के
िोजबीन सलमनत ।
प्रधान की ननयुजक्त करेगी,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
541
(क) मंत्रत्रमंर्ि सधचव – अध्यि ;
(ि) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाने वाि े र्दो ववशेर्ज्ञ, जजनके
पास होम्योपैथी के िेत्र में उत्कृष्ट् अहषताएं और कम से कम पच्चीस वर् ष का
अनुभव हो – सर्दस्य ;
(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 4 की उपधारा (4) के िंर् (ग) में
यथाननठर्दषष्ट् सर्दस्यों में से, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, नामननठर्दषष्ट् ककया
जाने वािा एक ववशेर्ज्ञ – सर्दस्य ;
(घ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाने वािा एक ऐसा व्यजक्त,
जो उत्कृष्ट् अहषताएं और स्वास््य अनुसंधान, प्रबंध, ववधध, अथशष ास्त्र या ववज्ञान
और प्रौद्योधगकी के िेत्र में कम स े कम पच्चीस वर् ष का अनुभव रिता हो
– सर्दस्य ;
(ङ) आयुर् का भारसाधक, भारत सरकार का सधचव, जो संयोजक होगा
– सर्दस्य :
परन्द्तु धारा 4 की उपधारा (4) के िंर् (क) में ननठर्दषष्ट् आयोग के अंशकालिक
सर्दस्यों, धारा 8 में ननठर्दषष्ट् सधचव और धारा 20 में ननठर्दषष्ट् स्वायत्त बोर्ों के अन्द्य
सर्दस्यों के चयन के लिए िोजबीन सलमनत िंर् (ि) स े िंर् (घ) में ववननठर्दषष्ट् सर्दस्यों
और संयोजक-सर्दस्य के रूप में भारत सरकार के आयुर् मंत्रािय के संयुक्त सधचव से
लमिकर बनेगी तथा इसकी अध्यिता भारत सरकार के आयुर् मंत्रािय के भारसाधक
सधचव द्वारा की जाएगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, ककसी ररजक्त के होने, जजसके अन्द्तगतष , अध्यि या ककसी
सर्दस्य की मत्ृ यु, पर्दत्याग या ह ाए जाने के कारण हुई ररजक्त भी है, की तारीि स े एक
मास के भीतर या अध्यि अथवा सर्दस्य की अवधध की समाजप्त स े पूव ष तीन मास के
भीतर ररजक्त को भरने के लिए िोजबीन सलमनत को ननर्देश करेगी ।
(3) िोजबीन सलमनत, उसको ननठर्दषष्ट् प्रत्येक ररजक्त के लिए कम से कम तीन
नामों के एक पैनि की लसफाररश करेगी ।
(4) आयोग के अध्यि या ककसी सर्दस्य के रूप में ननयुजक्त के लिए ककसी
व्यजक्त की लसफाररश करने से पूव,ष िोजबीन सलमनत स्वयं का यह समाधान करेगी कक
ऐसा व्यजक्त कोई ववत्तीय या अन्द्य ठहत तो नहीं रिता है, जजससे ऐसे अध्यि या
सर्दस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रनतकूि प्रभाव पड़ने की संभावना है ।
(5) अध्यि या सर्दस्य की ननयुजक्त केवि िोजबीन सलमनत के ककसी सर्दस्य की
ककसी ररजक्त या अनुपजस्थनत के कारण अववधधमान्द्य नहीं होगी ।
(6) उपधारा (2) से उपधारा (5) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, िोजबीन सलमनत
अपनी स्वयं की प्रकक्रया ववननयलमत कर सकेगी ।
6. (1) अध्यि और सर्दस्य (पर्देन सर्दस्यों से लभन्द्न) तथा धारा 4 की अध्यि और
सर्दस्यों की
उपधारा (4) के िंर् (ि) के अधीन ननयुक्त सर्दस्य चार वर् ष से अनधधक की अवधध के
पर्दावधध और सेवा
लिए पर्द धारण करेंगे और वे ककसी ववस्तार या पुनननयष ुजक्त के लिए पात्र नहीं होंगे :
की शतें ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
542
परंतु ऐसा व्यजक्त सत्तर वर् ष की आयु पूरी करने के पश्चात ् पर्द धारण नहीं करेगा।
(2) ककसी पर्देन सर्दस्य की पर्दावधध तब तक बनी रहेगी, जब तक वह उस आधार
पर, जजसका वह ऐसा सर्दस्य है, पर्द धारण करता है ।
(3) जहां पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न कोई सर्दस्य, आयोग के तीन क्रमवती साधारण
बैिकों में अनुपजस्थत रहता है और उसकी ऐसी अनुपजस्थनत का कारण आयोग की राय
में कोई ववधधमान्द्य कारण नहीं माना जा सकता वहां ऐस े सर्दस्य के बारे में यह समझा
जाएगा कक उसने अपना स्थान ररक्त कर ठर्दया है ।
(4) अध्यि और ककसी पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न सर्दस्य को संर्देय वेतन तथा भत्ते
और उसकी सेवा के अन्द्य ननबंधन और शतें वे होंगी, जो ववठहत की जाएं।
(5) अध्यि या कोई सर्दस्य—
(क) केन्द्रीय सरकार को कम से कम तीन मास की लिखित सूचना र्देकर
अपना पर्द त्याग सकेगा ; या
(ि) धारा 7 के उपबंधों के अनुसार उसे पर्द स े ह ाया जा सकेगा :
परंतु यठर्द केन्द्रीय सरकार ऐसा ववननश्चय करती है तो ऐसा व्यजक्त तीन मास से
पहिे कतव्ष यों से मुक्त ककया जा सकेगा या तीन मास स े आगे जब तक कोई उत्तरवती
ननयुक्त नहीं हो जाता है, बने रहने के लिए अनुज्ञात ककया जा सकेगा ।
(6) आयोग का अध्यि और प्रत्येक सर्दस्य अपना पर्द ग्रहण करते समय और
अपना पर्द छोड़ते समय अपनी आजस्तयों तथा र्दानयत्वों की घोर्णा करेगा और अपनी
ववृत्तक तथा वाखणजज्यक वचनबंध या अन्द्तगस्ष तता को भी ऐसे प्ररूप और रीनत में घोवर्त
करेगा जो ववठहत की जाए और ऐसी घोर्णा आयोग की वेबसाइ पर प्रकालशत की
जाएगी ।
(7) अध्यि या कोई सर्दस्य, उस रूप में पर्द धारण करने से प्रववरत हो जाने पर,
ऐसे पर्द को त्यागने की तारीि से र्दो वर् ष की अवधध के लिए ककसी भी हैलसयत में,
जजसके अन्द्तगषत कोई परामशी या कोई ववशेर्ज्ञ भी है, ककसी प्राइवे होम्योपैथी
धचककत्सा संस्था में या जजसका मामिा ऐस े अध्यि या सर्दस्य द्वारा प्रत्यित: या
अप्रत्यित: ननप ाया गया है, कोई ननयोजन स्वीकार नहीं करेगा:
परंतु इसमें अंतववष्ट्ष ककसी बात का यह अथष नहीं िगाया जाएगा कक वह ऐसे
व्यजक्त को केन्द्रीय सरकार या ककसी राज्य सरकार द्वारा ननयंत्रत्रत या अनुरक्षित ककसी
ननकाय या संस्था, जजसके अन्द्तगतष होम्योपैथी धचककत्सा संस्था भी है, में कोई ननयोजन
स्वीकार करने से ननवाररत करती है ।
(8) उपधारा (7) में की कोई बात, केन्द्रीय सरकार को अध्यि या ककसी सर्दस्य
को ककसी ऐस े प्राइवे होम्योपैथी धचककत्सा संस्था में ककसी भी हैलसयत में, जजसके
अन्द्तगषत कोई परामशर्दष ाता या ववशेर्ज्ञ भी है, जजसका मामिा ऐसे अध्यि या सर्दस्य
द्वारा ननप ाया गया है, में कोई ननयोजन स्वीकार करने से ननवाररत नहीं करेगी ।
आयोग के अध्यि 7. (1) केन्द्रीय सरकार, आर्देश द्वारा, अध्यि या ककसी अन्द्य सर्दस्य को पर्द से
और सर्दस्यों का ह ा सकेगी—
ह ाया जाना ।
(क) जजसे ठर्दवालिया न्द्यायननणीत ककया गया है ; याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
543
(ि) जजसे ऐसे ककसी अपराध के लिए लसद्धर्दोर् िहराया गया है, जजसमें
केन्द्रीय सरकार की राय में नैनतक अधमता अंतग्रस्ष त है ;
(ग) जो अध्यि या सर्दस्य के रूप में शारीररक या मानलसक रूप से काय ष
करने में असमथ ष हो गया है; या
(घ) जो ववकृतधचत्त का है और ककसी सिम न्द्यायािय द्वारा ऐसी घोर्णा
ववद्यमान है; या
(ङ) जजसने ऐसा ववत्तीय या अन्द्य ठहत अजजतष कर लिया है जजससे सर्दस्य
के रूप में उसके कृत्यों पर प्रनतकूि प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(च) जजसने अपने पर्द का इस प्रकार र्दरुु पयोग ककया है जजसके कारण
उसका पर्द पर बने रहना िोक ठहत के प्रनतकूि है ।
(2) ककसी सर्दस्य को उपधारा (1) के िंर् (ङ) और िंर् (च) के अधीन तब तक
नहीं ह ाया जाएगा जब तक उसे मामिे में सुने जाने का युजक्तयुक्त अवसर प्रर्दान न
कर ठर्दया गया हो ।
8. (1) आयोग का एक सधचवािय होगा जजसका प्रधान सधचव होगा, जजसकी आयोग के सधचव,
ववशेर्ज्ञों, ववृत्तकों,
ननयुजक्त धारा 5 के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा की जाएगी ।
अधधकाररयों और
(2) आयोग का सधचव प्रमाखणत प्रशासननक योग्यता और सत्यननष्ट्िा वािा ऐसा
कमचष ाररयों की
व्यजक्त होगा जजसके पास ऐसी अहषताएं और अनुभव हो, जो ववठहत ककया जाए । ननयुजक्त ।
(3) सधचव, केन्द्रीय सरकार द्वारा चार वर् ष की अवधध के लिए ननयुक्त ककया
जाएगा और वह ककसी ववस्तार या पुनननयष ुजक्त का पात्र नहीं होगा ।
(4) सधचव, आयोग के ऐसे कृत्यों का ननवहष न करेगा जो आयोग द्वारा उस े
समनुर्देलशत ककए जाएं और जो इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ववननयमों द्वारा
ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।
(5) आयोग, इस अधधननयम के अधीन अपने कृत्यों के र्दि ननवहष न के लिए
केन्द्रीय सरकार द्वारा सजृजत पर्दों पर ऐसे अधधकाररयों और अन्द्य कमषचाररयों को
ननयुक्त कर सकेगा, जो वह आवश्यक समझे ।
(6) आयोग के सधचव, अधधकाररयों और अन्द्य कमचष ाररयों को सर्दं ेय वेतन तथा
भत्ते और उनकी सेवा के अन्द्य ननबंधन तथा शतें वे होंगी, जो ववठहत की जाएं ।
(7) आयोग, ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् प्रकक्रया के अनुसार, उतनी संख्या में,
जजतनी वह आवश्यक समझे, इस अधधननयम के अधीन अपने कृत्यों के ननवहष न में
आयोग की सहायता करने के लिए सत्यननष्ट्िा और उत्कृष्ट् योग्यता वाि े ऐस े ववशेर्ज्ञों
और ववृत्तकों को ननयुक्त कर सकेगा, जो होम्योपैथी का ववशेर् ज्ञान तथा होम्योपैथी,
िोक स्वास््य, प्रबंध, अथशष ास्त्र, प्रत्यायन, रोगी परामशी सेवा, स्वास््य अनुसंधान,
ववज्ञान और प्रौद्योधगकी, प्रशासन, ववत्त, िेिा या ववधध में अनुभव रिते हैं ।
9. (1) आयोग, प्रत्येक नतमाही में कम से कम एक बार ऐसे समय और स्थान पर आयोग की
बैिकें ।
बैिक करेगा जो अध्यि द्वारा ननयत ककया जाए ।
(2) अध्यि, आयोग की बैिक की अध्यिता करेगा और यठर्द ककसी कारण स े
अध्यि, आयोग की बैिक में उपजस्थत होने में असमथ ष है तो अध्यि द्वारा नामननठर्दषष्ट्
ऐसा कोई सर्दस्य, जो ककसी स्वायत्त बोर् ष का प्रधान है, बैिक की अध्यिता करेगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
544
(3) जब तक आयोग की बिै कों में अनुसरण की जाने वािी प्रकक्रया, ववननयमों
द्वारा अन्द्यथा उपबंधधत नहीं कर र्दी जाती है तब तक आयोग के सर्दस्यों की कुि
संख्या के आधा, जजसके अंतगतष अध्यि भी है, से गणपूनत ष होगी और आयोग के सभी
ववननश्चय उपजस्थत और मतर्दान करने वाि े सर्दस्यों के बहुमत द्वारा ककए जाएंगे तथा
मतों के बराबर होने की र्दशा में, अध्यि या उसकी अनपु जस्थनत में उपधारा (2) के
अधीन नामननठर्दषष्ट् स्वायत्त बोर् ष के प्रधान का ननणाषयक मत होगा ।
(4) आयोग के प्रशासन का साधारण अधीिण, ननर्देशन और ननयंत्रण अध्यि में
ननठहत होगा ।
(5) आयोग का कोई काय ष या कायवष ाही केवि इस कारण से अववधधमान्द्य नहीं
होगी कक—
(क) आयोग में कोई ररजक्त या उसके गिन में कोई त्रुठ है ; या
(ि) अध्यि के रूप में या सर्दस्य के रूप में काय ष करने वािे ककसी व्यजक्त
की ननयुजक्त में कोई त्रुठ है ।
(6) ऐसा कोई व्यजक्त, जो धारा 30 की उपधारा (4) के अधीन ठर्दए गए ववननश्चय
के लसवाय, आयोग के ककसी ववननश्चय से व्यधथत है, वह ऐसे ववननश्चय की संसूचना के
पंरह ठर्दन के भीतर ऐसे ववननश्चय के ववरूद्ध केन्द्रीय सरकार को अपीि कर सकेगा ।
आयोग की शजक्त 10. (1) आयोग ननम्नलिखित कृत्यों का पािन करेगा, अथाषत ् :—
और कृत्य ।
(क) होम्योपैथी की लशिा में उच्च गुणवत्ता और उच्च मानकों को बनाए
रिने के लिए नीनतयां अधधकधथत करना और इस ननलमत्त आवश्यक ववननयम
बनाना ;
(ि) आयुववज्ञष ान संस्थाओं, धचककत्सा अनुसंधानों और धचककत्सा ववृत्तकों को
ववननयलमत करने के लिए नीनतयां अधधकधथत करना और इस ननलमत्त आवश्यक
ववननयम बनाना ;
(ग) स्वास््य र्देि-रेि में अपेिाओं, जजनके अंतगतष स्वास््य के लिए
मानव संसाधन और स्वास््य संबंधी र्देि-रेि अवसंरचना भी हैं, का ननधाषरण
करना; और ऐसी अपेिाओं को पूरा करने के लिए काय ष योजना ववकलसत करना ;
(घ) ऐसे ववननयम बनाकर जो आयोग, स्वायत्त बोर्ों और राज्य होम्योपैथी
धचककत्सा पररर्र्दों के उधचत कायकष रण के लिए आवश्यक हों, मागर्दष शकष लसद्धांत
ववरधचत करना और नीनतयां अधधकधथत करना ;
(ङ) स्वायत्त बोर्ों के बीच समन्द्वय को सुननजश्चत करना ;
(च) ऐसे उपाय करना, जो इस अधधननयम के अधीन उनके प्रभावी कायकष रण
के लिए इस अधधननयम के अधीन ववरधचत मागर्दष शषक लसद्धातों और बनाए गए
ववननयमों का राज्य होम्योपैथी धचककत्सा पररर्र्दों द्वारा अनुपािन सुननजश्चत करने
के लिए आवश्यक हों ;
(छ) स्वायत्त बोर्ों के ववननश्चयों के संबंध में अपीिी अधधकाररता का प्रयोग
करना ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
545
(ज) धचककत्सा व्यवसाय में ववृत्तक नैनतकता का पािन सुननजश्चत करने और
धचककत्सा व्यवसानययों द्वारा र्देि-रेि की व्यवस्था के र्दौरान नैनतक आचरण का
संवधनष करने के लिए ववननयम बनाना ;
(झ) ऐसे प्राइवे आयुववज्ञष ान संस्थाओं और माननत ववश्वववद्याियों में के,
जो इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन शालसत होते हैं, पचास प्रनतशत स्थानों के
संबंध में फीस और अन्द्य सभी प्रभारों को अवधाररत करने के लिए मागर्दष शकष
लसद्धांत ववरधचत करना ;
(ञ) ऐसी अन्द्य शजक्तयों का प्रयोग करना और ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन
करना, जो ववठहत ककए जाएं ।
(2) आयोग के सभी आर्देश और ववननश्चय सधचव के हस्तािर द्वारा अधधप्रमाखणत
ककए जाएंगे तथा आयोग, सधचव को प्रशासननक और ववत्तीय ववर्यों पर अपनी ऐसी
शजक्तयों को प्रत्यायोजजत कर सकेगा, जो वह िीक समझे ।
(3) आयोग उपसलमनतयों का गिन कर सकेगा और उनको अपनी उन शजक्तयों को
प्रत्यायोजजत कर सकेगा, जो ववननठर्दषष्ट् कायों को पूरा ककए जाने हेत ु उन्द्हें समथ ष बनाने
के लिए आवश्यक हों ।
अध्याय 3
होम्योपैथी सिाहकार पररषद्
11. (1) केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा होम्योपैथी सिाहकार पररर्द् नामक होम्योपैथी
एक सिाहकार ननकाय का गिन करेगी ।
सिाहकार पररर्द्
का गिन और
(2) पररर्द्, एक अध्यि और ननम्नलिखित सर्दस्यों से लमिकर बनेगी, अथाषत:्— संरचना ।
(क) आयोग का अध्यि पररर्द् का पर्देन अध्यि होगा;
(ि) आयोग का प्रत्येक सर्दस्य पररर्द् का पर्देन सर्दस्य होगा;
(ग) प्रत्येक राज्य का प्रनतननधधत्व करने के लिए एक सर्दस्य, जो उस
राज्य में ककसी ववश्वववद्यािय का कुिपनत हो, जजसके पास होम्योपैथी में अहषताएं
हों, जजसे उस राज्य सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए और प्रत्येक संघ
राज्यिेत्र का प्रनतननधधत्व करने के लिए एक सर्दस्य, जो उस संघ राज्यिेत्र में के
ककसी ववश्वववद्यािय का कुिपनत हो, जजसके पास होम्योपैथी में अहताषएं हों, जजसे
भारत सरकार के गहृ मंत्रािय द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए :
परंतु जहां होम्योपैथी में अहषताएं रिने वािा कुिपनत उपिब्ध नहीं है, वहां
होम्योपैथी में अहताषएं रिने वािा कोई संकायाध्यि या संकाय के प्रधान को
नामननठर्दषष्ट् ककया जाएगा ;
(घ) राज्य हौम्योपैथी धचककत्सा पररर्द् के ननवाषधचत सर्दस्यों में प्रत्येक राज्य
और प्रत्येक संघ राज्यिेत्र का प्रनतननधधत्व करने के लिए एक ऐसा सर्दस्य, जजस े
उस राज्य की धचककत्सा पररर्द् द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ङ) अध्यि, ववश्वववद्यािय अनुर्दान आयोग ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
546
(च) ननर्देशक, राष्ट्रीय ननधाषरण और प्रत्यायन पररर्द् ;
(छ) चार सर्दस्य, जो भारतीय प्रौद्योधगकी संस्थानों, भारतीय प्रबंध संस्थानों
और भारतीय ववज्ञान संस्थान में ननर्देशक के पर्द धारण करने वािे व्यजक्तयों में से
केन्द्रीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाएं ;
(ज) पररर्द् में गैर-पर्देन सर्दस्यों की पर्दावधध चार वर् ष की होगी ।
होम्योपैथी 12. (1) पररर्द्, ऐसा प्राथलमक मंच होगा जजसके माध्यम से राज्य और संघ
सिाहकार पररर्द् के
राज्यिेत्र आयोग के समि अपने ववचार तथा सरोकार रि सकेंगे और जो होम्योपैथी की
कृत्य ।
धचककत्सा लशिा, प्रलशिण, अनुसंधान और ववकास से संबंधधत समग्र कायसष ूची, नीनत और
कारषवाई को तैयार करने में सहायक हो सके ।
(2) पररर्द्, आयोग को ऐस े उपायों के बारे में सिाह र्देगी जो धचककत्सा लशिा,
प्रलशिण, अनुसंधान और ववकास संबंधी सभी मामिों में न्द्यूनतम मानकों का अवधारण
करने तथा उनको बनाए रिने और उनके रिरिाव का समन्द्वय करने से संबंधधत हो ।
(3) पररर्द्, आयोग को धचककत्सा लशिा तक साम्यापूण ष पहुंच की वद्ृ धध करने के
उपायों पर सिाह र्देगी ।
होम्योपैथी 13. (1) पररर्द्, वर् ष में कम से कम र्दो बार ऐस े समय तथा स्थान पर बैिक
सिाहकार पररर्द्
करेगी जो अध्यि द्वारा ववननजश्चत ककया जाए ।
की बैिकें ।
(2) अध्यि, पररर्द् की बैिक की अध्यिता करेगा और यठर्द ककसी कारण से
अध्यि, पररर्द् की बैिक में उपजस्थत होने में असमथ ष है तो अध्यि द्वारा यथा
नामननठर्दषष्ट् ऐसा अन्द्य सर्दस्य बैिक की अध्यिता करेगा ।
(3) जब तक कक ववननयमों द्वारा प्रकक्रया अन्द्यथा उपबंधधत न की जाए, तब तक
अध्यि सठहत पररर्द् के आधे सर्दस्यों स े गणपूनत ष होगी और पररर्द् के सभी काय ष
उपजस्थत और मतर्दान करने वािे सर्दस्यों के बहुमत द्वारा ववननजश्चत ककए जाएंगे ।
अध्याय 4
राष्ट्रीय परीक्षा
राष्ट्रीय पात्रता-सह- 14. (1) इस अधधननयम के अधीन शालसत सभी आयुववज्ञष ान संस्थाओं में होम्योपैथी
प्रवेश परीिा ।
की स्नातकपूव ष में प्रवेश के लिए एक समान राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीिा होगी ।
(2) आयोग, ऐसे अलभठहत प्राधधकारी के माध्यम से और ऐसी रीनत में, जो
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीिा अंग्रेजी और ऐसी
अन्द्य भार्ाओं में संचालित करेगा ।
(3) आयोग ववननयमों द्वारा, इस अधधननयम के अधीन शालसत सभी आयुववज्ञष ान
संस्थाओं में प्रवेश के लिए अलभठहत प्राधधकारी द्वारा सामान्द्य काउंसेलिगं संचालित करन े
की रीनत ववननठर्दषष्ट् करेगा :
परन्द्तु सामान्द्य काउंसेलिगं —
(i) अखिि भारतीय स्थानों के लिए केन्द्रीय सरकार ; और
(ii) राज्य स्तर पर शेर् स्थानों के लिए राज्य सरकार ,
के अलभठहत प्राधधकारी द्वारा संचालित होगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
547
15. (1) राष्ट्रीय ननकास परीिा के नाम से ज्ञात सामान्द्य अंनतम वर् ष स्नातकपूवष राष्ट्रीय ननकास
धचककत्सा परीिा का आयोजन होम्योपैथी के धचककत्सा व्यवसायी के रूप में व्यवसाय परीिा ।
करने हेतु अनुज्ञजप्त प्रर्दान करने के लिए और यथाजस्थनत, राज्य रजजस् र या राष्ट्रीय
रजजस् र में नामांकन के लिए ककया जाएगा ।
(2) आयोग, ऐसे अलभठहत प्राधधकारी के माध्यम से और ऐसी रीनत में, जो
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, अंग्रेजी और ऐसी अन्द्य भार्ाओं में होम्योपैथी के
लिए राष्ट्रीय ननकास परीिा सचं ालित करेगा ।
(3) राष्ट्रीय ननकास परीिा उस तारीि से, जजसको यह अधधननयम प्रवत्तृ होता है,
तीन वर् ष के भीतर ऐसी तारीि से जो केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा ननयत करे,
प्रवतनष शीि होगी ।
(4) ववर्देशी धचककत्सा अहषता रिने वािे ककसी व्यजक्त को होम्योपैथी के धचककत्सा
व्यवसायी के रूप में होम्योपथै ी व्यवसाय करने के लिए अनुज्ञजप्त प्राप्त करने हेतु और
यथाजस्थनत, राज्य रजजस् र या राष्ट्रीय रजजस् र में नामांकन के लिए राष्ट्रीय ननकास
परीिा, ऐसी रीनत में जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, अठहतष करना होगा ।
16. (1) इस अधधननयम के अधीन शालसत सभी आयुववज्ञष ान संस्थाओं में होम्योपैथी स्नातकोत्तर
राष्ट्रीय प्रवेश
के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक समान स्नातकोत्तर राष्ट्रीय प्रवेश परीिा
परीिा ।
संचालित की जाएगी ।
(2) आयोग, ऐसे अलभठहत प्राधधकारी के माध्यम से और ऐसी रीनत में जो ववननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, अग्रं ेजी और ऐसी अन्द्य भार्ाओं में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में
प्रवेश के लिए राष्ट्रीय प्रवेश परीिा संचालित करेगा ।
(3) आयोग, ववननयमों द्वारा इस अधधननयम के अधीन शालसत सभी आयुववज्ञष ान
संस्थाओं में स्नातकोत्तर सी ों के लिए प्रवेश हेतु अलभठहत प्राधधकारी द्वारा सामान्द्य
काउंसेलिगं संचालित करने की रीनत ववननठर्दषष्ट् करेगा ।
17. (1) राष्ट्रीय अध्यापक पात्रता परीिा होम्योपैथी के उन स्नातकोत्तरों के लिए होम्योपैथी के लिए
राष्ट्रीय अध्यापक
पथृ क़़तः संचालित की जाएगी जो उस ववधाशािा में अध्यापन व्यवसाय अपनाने की
पात्रता परीिा ।
वांछा रित े हैं ।
(2) आयोग ऐसे अलभठहत प्राधधकारी के माध्यम से और ऐसी रीनत में, जो ववननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, राष्ट्रीय होम्योपैथी अध्यापक पात्रता परीिा संचालित करेगा ।
(3) राष्ट्रीय होम्योपैथी अध्यापक पात्रता परीिा उस तारीि से, जजसको यह
अधधननयम प्रवत्तृ होता है, तीन वर् ष के भीतर ऐसी तारीि से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा
अधधसूधचत ककया जाए, प्रवतनष शीि होगी :
परन्द्तु इस धारा की कोई बात, उपधारा (3) के अधीन अधधसूधचत तारीि से पूव ष
ननयुक्त अध्यापकों को िागू नहीं होगी ।
अध्याय 5
स्वायि बोर् ि
18. (1) केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा आयोग के समग्र पयवष ेिण के अधीन, स्वायत्त बोर् ष का
ननम्नलिखित स्वायत्त बोर्ों का, इस अधधननयम के अधीन ऐसे बोर्ों को समनुर्देलशत गिन ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
548
कृत्यों का पािन करने के लिए गिन करेगी, अथाषत:्—
(क) होम्योपैथी लशिा बोर् ष ;
(ि) होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष ; और
(ग) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष ।
(2) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक बोर्,ष एक स्वायत्त ननकाय होगा जो आयोग
द्वारा बनाए गए ववननयमों के अनुसार इस अधधननयम के अधीन अपने कृत्यों का पािन
करेगा ।
स्वायत्त बोर्ों की 19. (1) स्वायत्त बोर्ों की संरचना ननम्नानुसार होगी, अथाषत:्—
सरंचना ।
(क) होम्योपैथी लशिा बोर्,ष होम्योपैथी की ववधाशािा से एक प्रधान और चार
सर्दस्यों से लमिकर बनेगा ;
(ि) होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष होम्योपैथी की ववधाशािा
से एक अध्यि और र्दो सर्दस्यों स े लमिकर बनेगा जजनमें से एक सर्दस्य
होम्योपैथी की ववधाशािा से होगा और र्दसू रा सर्दस्य प्रत्यायन ववशेर्ज्ञ होगा ;
(ग) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर्,ष होम्योपैथी की ववधाशािा से
एक अध्यि और र्दो सर्दस्यों से लमिकर बनेगा जजनमें स े एक सर्दस्य होम्योपैथी
की ववधाशािा से होगा और र्दसू रा सर्दस्य ऐसा व्यजक्त होगा, जो धचककत्सा आचार
पर काय ष के िोक अलभिेि का प्रर्दशनष कर चुका है या गुणवत्ता आश्वासन, िोक
स्वास््य, ववधध या रोगी पि समथनष में से ककसी ववधाशािा से चुना गया हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन चुने जाने वािे स्वायत्त बोर् ष के प्रधान और सर्दस्य
उत्कृष्ट् योग्यता, प्रमाखणत प्रशासननक िमता और सत्यननष्ट्िा वाि े व्यजक्त होंगे, जजनके
पास ककसी मान्द्यताप्राप्त ववश्वववद्यािय से संबंधधत ववधाशािाओं में स्नातकोत्तर उपाधध
हो और जो संबंधधत िेत्रों में कम से कम पंरह वर् ष का अनुभव रिते हों जजनमें से कम
से कम सात वर् ष अग्रणी के रूप में रहे हो:
परन्द्तु होम्योपैथी के प्रधान और सर्दस्य की र्दशा में, अग्रणी के रूप में सात वर् ष
होम्योपैथी में स्वास््य, उन्द्ननत और लशिा के ववकास के िेत्र में रहे हों ।
प्रधान और सर्दस्यों 20. केन्द्रीय सरकार, धारा 5 में ववननठर्दषष्ट् प्रकक्रया के अनुसार तद्धीन गठित
की ननयुजक्त के
िोजबीन सलमनत द्वारा की गई लसफाररशों के आधार पर स्वायत्त बोर्ों के प्रधान और
लिए िोजबीन
सर्दस्यों की ननयुजक्त करेगी ।
सलमनत ।
प्रधान और सर्दस्यों 21. (1) प्रत्येक स्वायत्त बोर् ष का प्रधान और सर्दस्य चार वर् ष से अनधधक की
की पर्दावधध और
अवधध के लिए पर्दधारण करेंगे और ककसी ववस्तार या पुनननयष ुजक्त के लिए पात्र नहीं
सेवा की शतें ।
होंग:े
परन्द्तु ऐसा व्यजक्त सत्तर वर् ष की आयु पूरी करन े के पश्चात ् पर्द धारण नहीं
करेगा।
(2) स्वायत्त बोर् ष के प्रधान और सर्दस्यों को संर्देय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा
की अन्द्य ननबंधन और शतें वे होगीं, जो ववठहत की जाएं ।
(3) आयोग के अध्यि और सर्दस्यों की सेवा के अन्द्य ननबंधनों और शतों सेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
549
संबंधधत धारा 6 की उपधारा (3), उपधारा (5), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा
(8) और उनके पर्द से ह ाए जाने से संबंधधत धारा 7 में अन्द्तववष्ट्ष उपबंध, स्वायत्त बोर्ों
के प्रधान और सर्दस्यों को भी िागू होंगे ।
22. (1) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष के लसवाय प्रत्येक स्वायत्त बोर् ष ववशेर्ज्ञों की
सिाहकार
की सहायता ववशेर्ज्ञों की ऐसी सिाहकार सलमनतयों द्वारा की जाएगी जो इस
सलमनत ।
अधधननयम के अधीन ऐसे बोर्ों के कृत्यों के र्दि ननवहष न के लिए आयोग द्वारा गठित
की जाएं ।
(2) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष की सहायता ववशेर्ज्ञों की ऐसी
नैनतक सलमनतयों द्वारा की जाएगी जो इस अधधननयम के अधीन उस बोर् ष के कृत्यों के
र्दि ननवहष न के लिए गठित की जाएं ।
23. धारा 8 के अधीन ननयुक्त ववशेर्ज्ञों, वनृतकों, अधधकाररयों और अन्द्य स्वायत्त बोर्ों के
कमचष ाररयों को स्वायत्त बोर्ों को, उतनी संख्या में और ऐसी रीनत में उपिब्ध कराया कमचष ाररवन्द्ृ र्द ।
जाएगा जो आयोग द्वारा बनाए गए ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए ।
24. (1) प्रत्येक स्वायत्त बोर् ष मास में कम से कम एक बार ऐसे समय और स्थान स्वायत्त बोर्ों की
पर, जो वह ननयत करे, बैिक करेगा ।
बैिकें ।
(2) ऐसे ववननयमों के अधीन रहते हुए, जो इस ननलमत्त बनाए जाएं, स्वायत्त बोर्ों
के सभी ववननश्चय सवसष म्मनत से ककए जाएंगे और यठर्द सवसष म्मनत संभव नहीं है तो
ववननश्चय, प्रधान और सर्दस्यों के बहुमत द्वारा ककया जाएगा ।
(3) ऐसा कोई व्यजक्त, जो स्वायत्त बोर् ष के ककसी ववननश्चय से व्यधथत है, ऐसे
ववननश्चय की संसूचना के तीस ठर्दन के भीतर ऐसे ववननश्चय के ववरुद्ध आयोग को
अपीि कर सकेगा ।
25. (1) आयोग, प्रत्येक स्वायत्त बोर् ष के प्रधान को ननववषघ् न और र्दितापूण ष काय ष शजक्तयों का
प्रत्यायोजन ।
करने के लिए ऐस े बोर् ष को समथ ष बनाने के लिए अपनी सभी या ककन्द्हीं प्रशासननक और
ववत्तीय शजक्तयों का प्रत्यायोजन कर सकेगा ।
(2) ककसी स्वायत्त बोर् ष का प्रधान उस बोर् ष के ककसी सर्दस्य या अधधकारी को
अपनी शजक्तयों में से ककसी शजक्त का और प्रत्यायोजन कर सकेगा ।
26. (1) होम्योपैथी लशिा बोर् ष ननम्नलिखित काय ष करेगा, अथाषत:्— होम्योपैथी लशिा
बोर् ष की शजक्तया ं
(क) स्नातकपूव,ष स्नातकोत्तर और अनत ववलशष्ट् स्तरों पर लशिा के मानकों
और कृत्य ।
का अवधारण करना और उनसे संबंधधत सभी पहिुओं का पयवष ेिण करना ;
(ि) इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ववननयमों के अनुसार सभी स्तरों
पर होम्योपैथी के लिए सिमता आधाररत गत्यात्मक पाठ्यक्रम को ऐसी रीनत में
ववकलसत करना जो स्नातकोत्तर और अनत ववलशष्ट् छात्रों में समुधचत कौशि, ज्ञान,
दृजष्ट् कोण, मूल्यों और नैनतकता को ववकलसत करता है और उन्द्हें स्वास््य र्देि-रेि
उपिब्ध कराने, धचककत्सा लशिा प्रर्दान करने तथा धचककत्सा अनुसंधान करने में
समथ ष बनाता है ;
(ग) र्देश की आवश्यकताओं, वैजश्वक सजन्द्नयमों और इस अधधननयम के
अधीन बनाए गए ववननयमों को ध्यान में रिते हुए, होम्योपैथी में स्नातकपूवष,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
550
स्नातकोत्तर और अनतववलशष्ट् पाठ्यक्रमों को प्रर्दान करने वािी आयुववज्ञष ान
संस्थाओं की स्थापना करने के लिए मागर्दष शकष लसद्धान्द्त ववरधचत करना ;
(घ) स्थानीय स्तरों पर सजृ नात्मक आवश्यकताओं और इस अधधननयम के
अधीन बनाए गए ववननयमों को ध्यान में रिते हुए, आयुववषज्ञान संस्थाओं में
पाठ्यक्रमों और परीिाओं को संचालित करने के लिए न्द्यूनतम अपेिाएं और
मानकों को अवधाररत करना ;
(ङ) इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ववननयमों के अनुसार, होम्योपैथी
आयुववषज्ञान संस्थाओं में लशिा और अनुसंधान की अवसंरचना, संकाय और
क्वालि ी के लिए मानकों और सजन्द्नयमों का अवधारण करना ;
(च) होम्योपैथी आयुववज्ञष ान संस्थाओं द्वारा अपने ऐस े कृत्यों के सबंध में,
जो ववलभन्द्न पणधाररयों, जजनमें छात्र, संकाय, आयोग और सरकार भी हैं, के ठहत
से संबंधधत हैं, इिैक्राननक रूप से और अन्द्यथा अननवाय ष वावर्कष प्रक न के लिए
सजन्द्नयम ववननठर्दषष्ट् करना ;
(छ) संकाय सर्दस्यों के ववकास और प्रलशिण को सुकर बनाना;
(ज) अनुसंधान कायक्रष म को सुकर बनाना ;
(झ) सभी स्तरों पर होम्योपैथी धचककत्सा अहषताओं को मान्द्यता प्रर्दान
करना ।
(2) होम्योपैथी लशिा बोर्,ष अपने कृत्यों के ननवषहन में, आयोग को ऐसी लसफाररशें
कर सकेगा और ऐसे ननर्देश की मांग कर सकेगा, जो वह आवश्यक समझे ।
होम्योपैथी नैनतक 27. (1) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष ननम्नलिखित कृत्यों का पािन
और रजजस्रीकरण करेगा, अथाषत:्—
बोर् ष की शजक्तया ं
और कृत्य ।
(क) धारा 32 के उपबंधों के अनुसार, होम्योपैथी के सभी अनुज्ञप्त
व्यवसानययों का एक राष्ट्रीय रजजस् र रिना ;
(ि) इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ववननयमों के अनुसार, ववृत्तक
आचरण को ववननयलमत करना और धचककत्सीय नैनतकता का संवधनष करना :
परन्द्तु होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर्,ष उस र्दशा में जहां ऐसी
राज्य धचककत्सा पररर्द् को संबंधधत राज्य अधधननयमों के अधीन धचककत्सा
व्यवसानययों द्वारा ववृत्तक या नैनतक कर्दाचार की बाबत अनुशासननक कारषवाई
करने की शजक्त प्रर्दत्त की गई है, वहां राज्य धचककत्सा पररर्द् के माध्यम स े
ववृत्तक और नैनतक आचार संठहता का अनुपािन सुननजश्चत करेगा ;
(ग) होम्योपैथी धचककत्सा व्यवसानययों के आचरण को प्रभावी रूप स े
अलभवद्ृ धध करने और ववननयलमत करने के लिए राज्य होम्योपैथी धचककत्सा पररर्द्
के साथ ननरन्द्तर संपकष बनाए रिने के लिए तंत्र ववकलसत करना ;
(घ) धारा 31 के अधीन ककसी राज्य धचककत्सा पररर्द् के द्वारा की गईअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
551
कारषवाई के संबंध में अपीिीय अधधकाररता का प्रयोग करना ।
(2) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष अपने कृत्यों के ननवहष न में, आयोग
को ऐसी लसफाररशें कर सकेगा और उसस े ऐसे ननर्देशों की मांग कर सकेगा, जो वह
आवश्यक समझे ।
28. (1) होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष ननम्नलिखित कृत्यों का होम्योपैथी
पािन करेगा, अथाषत:्— धचककत्सा ननधाषरण
और रेठ गं बोर् ष
(क) इस अधधननयम के अधीन बनाए ववननयमों के अनुसार, आयुववज्ञष ान की शजक्तयां और
संस्थाओं के ननधाषरण और रेठ गं की प्रकक्रया का होम्योपैथी लशिा बोर् ष द्वारा
कृत्य ।
अधधकधथत मानकों का उनके अनुपािन के आधार पर अवधारण करना ;
(ि) धारा 29 के उपबंधों के अनुसार, नई आयुववषज्ञान संस्था की स्थापना
करने या ककसी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम को प्रारंभ करने या स्थानों की संख्या को
बढाने के लिए अनुज्ञा प्रर्दान करना ;
(ग) इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ववननयमों के अनुसार, ऐसी
संस्थाओं के ननधाषरण और रेठ गं के लिए आयुववज्ञष ान संस्थाओं का ननरीिण
करना :
परन्द्तु होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर्,ष यठर्द यह आवश्यक
समझे, तो ऐसी संस्थाओं के ननधाषरण और रेठ गं के लिए आयुववषज्ञान संस्थाओं का
ननरीिण करने हेतु ककसी अन्द्य ततृ ीय पिकार अलभकरण या व्यजक्तयों को ककराए
पर िे सकेगा और उन्द्हें प्राधधकृत कर सकेगा :
परन्द्तु यह और कक जहां आयुववषज्ञान संस्थाओं का ननरीिण होम्योपैथी
धचककत्सा ननधाषरण और रेठ ंग बोर् ष द्वारा प्राधधकृत ऐसे ततृ ीय पिकार अलभकरण
या व्यजक्तयों द्वारा ककया जाता है, वहां ऐसी संस्थाओं के लिए बाध्यकारी होगा
कक वे ऐसे अलभकरण या व्यजक्त तक पहुंच का उपबंध करें ;
(घ) ऐसी सभी आयुववज्ञष ान संस्थाओं को उनके िुिने की ऐसी अवधध के
भीतर और उसके पश्चात ् प्रत्येक वर् ष ऐस े समय पर और रीनत में, जो ववननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, सचं ालित करने, उनका ननधाषरण करने तथा उनका रे
करने के लिए स्वतंत्र रेठ गं अलभकरणों को संचालित करना या जहां यह आवश्यक
समझे, उन्द्हें पैनिीकृत करना ;
(ङ) इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ववननयमों के अनसु ार, आयुववज्ञष ान
संस्थाओं के ननधाषरण और रेठ गं को ननयलमत अन्द्तरािों पर अपनी वेबसाइ पर
या िोकाधधकारी िेत्र में उपिब्ध कराना ;
(च) ककसी आयुववज्ञष ान संस्था के ववरुद्ध, इस अधधननयम के अधीन बनाए
गए ववननयमों के अनुसार होम्योपैथी लशिा बोर् ष के द्वारा ववननठर्दषष्ट् न्द्यूनतम
आवश्यक मानकों को बनाए रिने में उसकी असफिता के लिए ऐसे उपाय करना,
जजनके अन्द्तगतष चेतावनी जारी करना, धनीय शाजस्त का अधधरोपण करना, प्रवेश
के अन्द्तग्रषहण या िहराव को कम करना और आयोग को मान्द्यता की वापसी केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
552
लिए लसफाररश करना भी है ।
(2) होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर्,ष अपने कृत्यों के ननवषहन में,
आयोग को ऐसी लसफाररश ें कर सकेगा और उसस े ऐस े ननर्देशों की मांग कर सकेगा, जो
वह आवश्यक समझे ।
नई आयुववज्ञष ान 29. (1) कोई व्यजक्त होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष की पूव ष
संस्था स्थावपत
अनुज्ञा प्राप्त ककए त्रबना कोई नई आयुववज्ञष ान संस्था की स्थापना नहीं करेगा या कोई
करने के लिए
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ नहीं करेगा या स्थानों की संख्या नहीं बढाएगा ।
अनुज्ञा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, “व्यजक्त’’ पर्द के अन्द्तगतष कोई
ववश्ववव़़द्यािय या कोई न्द्यास या कोई अन्द्य ननकाय भी है ककन्द्तु इसके अन्द्तगतष
केन्द्रीय सरकार नहीं है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा अलभप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए, कोई
व्यजक्त होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष को एक स्कीम, ऐसी ववलशजष्ट् यों
को अन्द्तववष्ट्ष करते हुए, ऐसे प्ररूप में, ऐसी फीस के साथ और ऐसी रीनत में, जो
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, प्रस्तुत कर सकेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त स्कीम पर ववचार करते समय, होम्योपैथी
धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष लशिा और अनुसंधान मानकों, अवसंरचना और
संकाय संबंधी मानकों और सजन्द्नयमों, आयुववषज्ञान संस्थाओं की स्थापना करने संबंधी
मागर्दष शकष लसद्धान्द्तों और होम्योपैथी लशिा बोर् ष द्वारा अवधाररत अन्द्य अपेिाओं को
ध्यान में रिेगा और ऐसी स्कीम की प्राजप्त की तारीि से तीन मास के भीतर स्कीम
का अनुमोर्दन या अननुमोर्दन करने वािा कोई आर्देश पाररत करेगा :
परंतु ऐसी स्कीम को अननुमोठर्दत करने से पहिे, संबंधधत व्यजक्त को त्रुठ यों का,
यठर्द कोई हो, सुधार करने के लिए अवसर प्रर्दान करेगा ।
(4) जहां, उपधारा (3) के अधीन कोई स्कीम अनुमोठर्दत की जाती है, वहां ऐसा
अनुमोर्दन नई आयुववषज्ञान संस्था स्थावपत करने के लिए उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा
होगी ।
(5) जहां, कोई स्कीम उपधारा (3) के अधीन अननुमोठर्दत की जाती है या जहा ं
उपधारा (2) के अधीन ककसी स्कीम को प्रस्तुत करने के तीन मास के भीतर कोई आर्देश
पाररत नहीं ककया जाता है, वहां संबंधधत व्यजक्त, आयोग को, यथाजस्थनत, ऐसे
अननुमोर्दन के पंरह ठर्दन के भीतर या तीन मास बीत जाने के पश्चात,् ऐसी रीनत में,
जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, अपीि कर सकेगा ।
(6) जहां, आयोग ने स्कीम का अननुमोर्दन कर ठर्दया है या उपधारा (5) के अधीन
अपीि करने की तारीि से पंरह ठर्दन के भीतर कोई आर्देश पाररत नहीं ककया है, वहां
संबंधधत व्यजक्त, केन्द्रीय सरकार को यथाजस्थनत, ऐसे अननुमोर्दन की संसूचना के सात
ठर्दन के भीतर या पंरह ठर्दन की ववननठर्दषष्ट् अवधध बीत जाने पर र्दसू री अपीि कर
सकेगा ।
(7) होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष ककसी पूव ष सूचना के त्रबना ककसीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
553
भी समय या तो सीधे या ककसी अन्द्य ववशेर्ज्ञ के माध्यम से, जजसे धचककत्सा ववृत्त में
सत्यननष्ट्िा और अनुभव हो, ककसी ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था का मूल्यांकन
और ननधाषरण कर सकेगा तथा ऐसे ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था के ननष्ट्पार्दन,
मानकों और ननर्देश धचह्नों का ननधाषरण और मूल्यांकन कर सकेगा ।
30. धारा 29 के अधीन ककसी स्कीम का अनुमोर्दन या अननुमोर्दन करते समय, स्कीम का
अनुमोर्दन या
यथाजस्थनत, होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष या आयोग ननम्नलिखित
अननुमोर्दन करने
मानर्दंर्ों पर ववचार करेगा, अथाषत ्:—
के लिए मानर्दंर् ।
(क) अवसंरचना और ववत्तीय संसाधनों की पयाषप्तता ;
(ि) क्या पयाषप्त शैिखणक संकाय, अध्यापनेतर कमचष ाररवंर्दृ और ऐसी अन्द्य
आवश्यक सुववधाओं का आयुववज्ञष ान संस्था के समुधचत कायकष रण को सुननजश्चत
करने हेतु उपबंध ककया गया है या स्कीम में ववननठर्दषष्ट् समयसीमा के भीतर
उपबंध कर ठर्दया जाएगा ;
(ग) क्या पयाषप्त धचककत्सािय सुववधाएं प्रर्दान की गई हैं या स्कीम में
ववननठर्दषष्ट् समयसीमा के भीतर प्रर्दान कर ठर्दया जाएगा ;
(घ) ऐसे अन्द्य कारक, जो ववठहत ककए जाएं :
परन्द्तु केन्द्रीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन के अधीन रहते हुए, ऐसी आयुववज्ञष ान
संस्थाओं के लिए जो ऐसे ित्रे ों में स्थावपत हैं, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं,
मानर्दंर्ों को लशधथि ककया जा सकेगा ।
31. (1) राज्य सरकार, अधधसूचना द्वारा, इस अधधननयम के प्रारंभ से तीन वर् ष राज्य धचककत्सा
के भीतर, यठर्द ककसी राज्य में कोई राज्य होम्योपैथी धचककत्सा पररर्द् ववद्यमान नहीं पररर्द् ।
है तो वह उस राज्य में ऐसी पररर्द् की स्थापना करेगी ।
(2) जहा ं कोई राज्य अधधननयम, राज्य धचककत्सा पररर्द् को, होम्योपैथी के ककसी
रजजस्रीकृत व्यवसायी के ककसी ववृत्तक या नैनतक कर्दाचार के संबंध में अनुशासननक
कारषवाई करने की शजक्त प्रर्दान करता है, वहां राज्य धचककत्सा पररर्द् इस अधधननयम के
अधीन बनाए गए ववननयमों और ववरधचत मागर्दष शकष -लसद्धान्द्तों के अनुसार काय ष करेगी :
परंतु उस समय तक, जब तक कक ककसी राज्य में राज्य होम्योपैथी धचककत्सा
पररर्द् की स्थापना नहीं हो जाती है, होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर्,ष उस
राज्य में ऐसी प्रकक्रया के अनुसार जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, उस राज्य
में होम्योपैथी के रजजस्रीकृत व्यवसायी के ककसी ववृत्तक या नैनतक कर्दाचार स े संबंधधत
पररवार्दों और लशकायतों को प्राप्त करेगा :
परंतु यह और कक यथाजस्थनत, होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष या राज्य
धचककत्सा पररर्द् ऐसे ककसी व्यवसायी को, कोई आर्देश पाररत करने या कोई कारषवाई
करने से पूव,ष जजसके अंतगतष ऐसे व्यजक्त के ववरुद्ध धनीय शाजस्त अधधरोवपत ककया
जाना भी है, सुनवाई का अवसर प्रर्दान करेगा ।
(3) कोई होम्योपैथी व्यवसायी, जो ननम्नलिखित द्वारा पाररत ककसी आर्देश या
की गई कारषवाई से व्यधथत है—
(क) उपधारा (2) के अधीन राज्य धचककत्सा पररर्द्, होम्योपैथी नैनतक औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
554
रजजस्रीकरण बोर् ष के समि अपीि कर सकेगा और उस पर होम्योपैथी नैनतक और
रजजस्रीकरण बोर् ष का ववननश्चय, यठर्द कोई हो, ऐसी राज्य धचककत्सा पररर्द् पर
तब तक आबद्धकर होगा, जब तक कक उपधारा (4) के अधीन र्दसू री अपीि
फाइि नहीं कर र्दी जाती है ;
(ि) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष उपधारा (2) के पहिे परंतुक
के अधीन आयोग को अपीि कर सकेगा ।
(4) ऐसा कोई होम्योपैथी धचककत्सा व्यवसायी, जो होम्योपैथी नैनतक और
रजजस्रीकरण बोर् ष के ववननश्चय से व्यधथत है, ऐसे ववननश्चय की संसूचना के साि ठर्दन
के भीतर आयोग को अपीि कर सकेगा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए,—
(क) “राज्य” के अंतगतष कोई संघ राज्यिेत्र भी है और ककसी संघ राज्यिेत्र
के संबंध में “राज्य सरकार” और “राज्य होम्योपैथी धचककत्सा पररर्द्” पर्दों स े
क्रमशः “केन्द्रीय सरकार” और “होम्योपैथी संघ राज्यिेत्र धचककत्सा पररर्द्” अलभप्रेत है;
(ि) “ववृत्तक या नैनतक कर्दाचार” पर्द के अंतगतष ऐसे ककसी काय ष को करना
या उसका िोप भी है, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
होम्योपैथी का 32. (1) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष एक राष्ट्रीय रजजस् र रिेगा,
राष्ट्रीय रजजस् र
जजसमें होम्योपैथी के ककसी अनुज्ञप्त धचककत्सा व्यवसायी का नाम, पता और उसके
और राज्य
द्वारा धारण की जाने वािी सभी मान्द्यताप्राप्त अहषताएं और ऐसी अन्द्य ववलशजष्ट् यां
रजजस् र ।
होंगी, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाएं ।
(2) राष्ट्रीय रजजस् र ऐसे प्ररूप में, जजसके अंतगतष इिैक्राननक प्ररूप भी है, और
ऐसी रीनत में रिा जाएगा, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
(3) राष्ट्रीय रजजस् र में ककसी नाम या अहषता को जोड़े जाने या उससे ह ाए जाने की
रीनत और उसके ह ाए जाने के आधार वे होंगे, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं।
(4) राष्ट्रीय रजजस् र, होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष की वेबसाइ पर
र्ािकर जनसाधारण को उपिब्ध कराया जाएगा ।
(5) प्रत्येक राज्य धचककत्सा पररर्द्, ववननठर्दषष्ट् इिैक्राननक रूपववधान में एक
राज्य रजजस् र रिेगी तथा उसे ननयलमत रूप से अद्यतन करेगी और उसकी एक प्रनत
इस अधधननयम के प्रारंभ से तीन मास के भीतर होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण
बोर् ष को प्रर्दाय करेगी ।
(6) होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष यह सुननजश्चत करेगा कक राष्ट्रीय
रजजस् र और राज्य रजजस् र ऐसी रीनत में इिैक्राननक रूप से समसामनयक रहे कक ऐस े
ककसी एक रजजस् र में कोई पररवतनष स्वतः ही अन्द्य रजजस् र में प्रनतत्रबत्रंबत हो ।
राष्ट्रीय रजजस् र में 33. (1) ऐसे ककसी व्यजक्त को, जजसके पास इस अधधननयम के अधीन होम्योपैथी
नामांककत ककए जान े
में कोई मान्द्यताप्राप्त धचककत्सा अहषता है और जो धारा 15 के अधीन आयोजजत की
वािे व्यजक्तयों के
जाने वािी राष्ट्रीय ननकास परीिा में अहषता प्राप्त करता है, उसे होम्योपैथी में व्यवसाय
अधधकार और इस
संबंध में उनकी करने की अनुज्ञजप्त होगी और उसके नाम तथा अहषताओं को, यथाजस्थनत, राष्ट्रीय
बाध्यताएं । रजजस् र या ककसी राज्य रजजस् र में नामांककत ककया जाएगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
555
परंतु ऐसे ककसी व्यजक्त को, जजसे इस अधधननयम के प्रवत्तृ होने के पूव ष और धारा
15 की उपधारा (3) के अधीन राष्ट्रीय ननकास परीिा प्रचालित होने से पहिे होम्योपैथी
1973 का 59 केन्द्रीय पररर्द् अधधननयम, 1973 के अधीन रिे गए होम्योपैथी के केन्द्रीय रजजस् र में
रजजस्रीकृत ककया गया है, इस अधधननयम के अधीन रजजस्रीकृत ककया गया समझा
जाएगा और उसे इस अधधननयम के अधीन प्रथमतः अनुरक्षित राज्य रजजस् र में और
तत्पश्चात ् राष्ट्रीय रजजस् र में नामांककत ककया जाएगा ।
(2) ऐसे ककसी व्यजक्त को, जजसने भारत से बाहर के ककसी र्देश में स्थावपत
आयुववषज्ञान संस्था से होम्योपैथी में कोई अहषता अलभप्राप्त की है और जो उस र्देश में
होम्योपैथी के धचककत्सा व्यवसायी के रूप में मान्द्यताप्राप्त है, इस अधधननयम के प्रारंभ
तथा धारा 15 की उपधारा (3) के अधीन होम्योपैथी की राष्ट्रीय ननकास परीिा के
प्रचािन में आने के पश्चात ् होम्योपैथी के राष्ट्रीय रजजस् र में तब तक नामांककत नहीं
ककया जाएगा, जब तक वह होम्योपैथी की राष्ट्रीय ननकास परीिा अठहतष नहीं कर िेता
है ।
(3) जब ऐसा कोई व्यजक्त, जजसका नाम, यथाजस्थनत, राज्य रजजस् र या राष्ट्रीय
रजजस् र में प्रववष्ट् ककया जाता है, कोई उपाधध, डर्प्िोमा, ववज्ञान या धचककत्सा में
प्रवीणता संबंधी ऐसी कोई अहषता अलभप्राप्त करता है जो, यथाजस्थनत, धारा 34 या
धारा 35 के अधीन एक मान्द्यताप्राप्त अहषता है, तो वह, ऐसी रीनत में, जो ववननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ऐसी उपाधध, डर्प्िोमा या अहषता को राज्य रजजस् र या
राष्ट्रीय रजजस् र में अपने नाम के सामने प्रववष्ट् ककए जाने का हकर्दार होगा ।
34. (1) यथाजस्थनत, राज्य रजजस् र या राष्ट्रीय रजजस् र में नामांककत व्यजक्त से व्यजक्तयों का
लभन्द्न कोई व्यजक्त,— व्यवसाय करने का
अधधकार ।
(क) एक अठहतष व्यवसायी के रूप में होम्योपैथी में व्यवसाय करने के लिए
अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा ;
(ि) धचककत्सक या शल्य धचककत्सक के रूप में कोई पर्द या ऐसा कोई अन्द्य
पर्द, चाहे वह ककसी भी नाम से ज्ञात हो, धारण नहीं करेगा, जजसे, यथाजस्थनत,
धचककत्सक या शल्य धचककत्सक द्वारा धाररत ककया जाना है ;
(ग) सम्यक् रूप से ककसी अठहतष धचककत्सा व्यवसायी द्वारा हस्तािररत या
अधधप्रमाखणत ककए जाने के लिए, ककसी ववधध द्वारा अपेक्षित है, ककसी धचककत्सा
या आरोग्य प्रमाणपत्र या ककसी अन्द्य ऐसे प्रमाणपत्र पर, हस्तािर करने या उसे
अधधप्रमाखणत करने का हकर्दार नहीं होगा ;
1872 का 1 (घ) ककसी मत्ृ यु-समीिा में या भारतीय साक्ष्य अधधननयम, 1872 की धारा
45 के अधीन ववशेर्ज्ञ के रूप में होम्योपैथी स े संबंधधत ककसी ववर्य पर ककसी
न्द्यायािय में साक्ष्य र्देने का हकर्दार नहीं होगा :
परंतु आयोग ऐसे व्यवसानययों की एक सूची, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए,
केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा :अनुभाग
1क]
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परंतु यह और कक ऐसे ककसी ववर्देशी नागररक को, जो अपने र्देश में, उस र्देश में
ऐसे व्यवसानययों के रजजस्रीकरण को ववननयलमत करने वािी ववधध के अनुसार
होम्योपैथी में व्यवसायी के रूप में नामांककत है, उस े भारत में ऐसी अवधध के लिए और
ऐसी रीनत में, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, अस्थायी रजजस्रीकरण अनुज्ञात
ककया जा सकेगा ।
(2) ऐसे ककसी व्यजक्त को, जो इस धारा के उपबंधों के उल्िंघन में कोई काय ष
करता है, ऐसी अवधध के कारावास से, जो एक वर् ष तक का हो सकेगा या जुमाषने से, जो
पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, या र्दोनों से, र्दंडर्त ककया जाएगा ।
(3) उपधारा (2) की कोई बात ननम्नलिखित को प्रभाववत नहीं करेगी कक,—
(क) ककसी राज्य रजजस् र में होम्योपैथी के व्यवसायी के रूप में नामांककत
ककसी व्यजक्त के ककसी भी राज्य में व्यवसाय करने के अधधकार को, केवि इस
आधार पर प्रभाववत नहीं करेगी कक उसके पास इस अधधननयम के प्रारंभ की
तारीि को होम्योपैथी में मान्द्यताप्राप्त धचककत्सा अहषता नहीं है ;
(ि) ककसी ऐसे व्यजक्त के, जो ककसी राज्य में कम से कम पांच वर् ष से
होम्योपैथी में व्यवसाय कर रहा है, उस राज्य में व्यवसाय जारी रिने के अधधकार
को प्रभाववत नहीं करेगी, जजसमें इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि को
होम्योपैथी का राज्य रजजस् र अनुरक्षित नहीं ककया जाता है ।
अध्याय 6
होम्योपैथी की अहिताओं को मान्यता
भारत में 35. (1) भारत में ककसी ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था द्वारा होम्योपैथी में
ववश्वववद्याियों या
स्नातकपूव ष या स्नातकोत्तर या अनत ववलशष्ट् स्तर पर प्रर्दान की गई धचककत्सा अहषताओं
आयुववज्ञष ान
को होम्योपैथी लशिा बोर् ष द्वारा ऐसी रीनत में, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए,
संस्थाओं द्वारा
अनुर्दत्त अहषताओं को सूचीबद्ध और अनुरक्षित ककया जाएगा तथा ऐसी धचककत्सा अहषता इस अधधननयम के
मान्द्यता । प्रयोजनों के लिए मान्द्यताप्राप्त अहषता होगी ।
(2) भारत का कोई ऐसा ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था, जो होम्योपैथी में
स्नातकपूव ष या स्नातकोत्तर या अनत ववलशष्ट् अहषता प्रर्दान करता है, ककंतु उसे होम्योपैथी
लशिा बोर् ष द्वारा अनुरक्षित सूची में सजम्मलित नहीं ककया गया है, वह ऐसी अहषता को
मान्द्यता प्रर्दान करने के लिए उस बोर् ष को आवेर्दन कर सकेगा ।
(3) होम्योपैथी लशिा बोर्,ष मान्द्यता प्रर्दान करने के लिए ककसी आवेर्दन की, छह
मास की अवधध के भीतर ऐसी रीनत में, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, परीिा
करेगा ।
(4) जहां, होम्योपैथी लशिा बोर्,ष मान्द्यता प्रर्दान करने का ववननश्चय करता है,
वहां, वह ऐसी अहषता को उसके द्वारा अनुरक्षित सूची में सजम्मलित करेगा और ऐसी
मान्द्यता को प्रभावी करने की तारीि भी ववननठर्दषष्ट् करेगा, अन्द्यथा वह मान्द्यता प्रर्दान न
करने के अपने ववननश्चय की संसूचना संबद्ध ववश्वववद्यािय या आयुववषज्ञान संस्था को र्देगा
।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
557
(5) व्यधथत ववश्वववद्यािय या आयुववषज्ञान संस्था, होम्योपैथी लशिा बोर् ष के
ववननश्चय की संसूचना की तारीि से साि ठर्दन की अवधध के भीतर ऐसी रीनत में, जो
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, आयोग को अपीि कर सकेगी ।
(6) आयोग, उपधारा (5) के अधीन प्राप्त अपीि की र्दो मास की अवधध के भीतर
परीिा करेगा और यठर्द यह ववननश्चय करता है कक ऐसी धचककत्सा अहषता को मान्द्यता
प्रर्दान की जा सकेगी तो वह संबद्ध बोर् ष को, ऐसी अहषता को उस बोर् ष द्वारा अनुरक्षित
सूची में ऐसी रीनत में, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए,सजम्मलित करने का
ननर्देश र्दे सकेगा ।
(7) जहां आयोग उपधारा (6) के अधीन मान्द्यता प्रर्दान न करने का ववननश्चय
करता है या ववननठर्दषष्ट् अवधध के भीतर ववननश्चय करने में असफि रहता है, वहां
व्यधथत ववश्वववद्यािय या सबं ंधधत आयुववषज्ञान संस्था, यथाजस्थनत, ऐसे ववननश्चय की
संसूचना की तारीि से या ववननठर्दषष्ट् अवधध के अवसान की तारीि से तीस ठर्दन की
अवधध के भीतर केन्द्रीय सरकार को र्दसू री अपीि कर सकेगा ।
(8) ऐसी सभी धचककत्सा अहषताओं को, जजन्द्हें इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से
1973 का 59 पूव ष मान्द्यता प्रर्दान की गई है और जजन्द्हें होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् अधधननयम, 1973
की र्दसू री अनुसूची में सजम्मलित ककया गया है, होम्योपैथी लशिा बोर् ष द्वारा भी ऐसी
रीनत में जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, उसे सूचीबद्ध और अनुरक्षित ककया
जाएगा ।
36. (1) जहां भारत स े बाहर ककसी र्देश में कोई प्राधधकरण, जजसे उस र्देश की भारत के बाहर
आयुववज्ञष ान
ववधध द्वारा, उस र्देश में होम्योपैथी की अहषताओं की मान्द्यता का काय ष सौंपा गया है,
संस्थाओं द्वारा
भारत में ऐसी अहषता को मान्द्यता प्रर्दान करने हेतु आयोग को कोई आवेर्दन करता है,
अनुर्दत्त धचककत्सा
वहां आयोग, ऐसे सत्यापन के अधीन रहते हुए, जजसे वह आवश्यक समझे, उस अहषताओं की
धचककत्सा अहषता को मान्द्यता प्रर्दान कर सकेगा या मान्द्यता प्रर्दान करने स े इंकार कर मान्द्यता ।
सकेगा ।
(2) जहां आयोग, उपधारा (1) के अधीन ककसी धचककत्सा अहषता को मान्द्यता प्रर्दान
करता है, वहां ऐसी अहषता, इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए मान्द्यताप्राप्त अहषता
होगी और उसे ऐसी रीनत में, जो ववननठर्दषष्ट् की जाए, आयोग द्वारा अनुरक्षित सूची में
सजम्मलित ककया जाएगा :
परंतु उस र्दशा में, जहां आयोग ककसी अहषता को मान्द्यता प्रर्दान न करने का
ववननश्चय करता है, वहां आयोग ऐसी मान्द्यता.को प्रर्दान करने से इंकार करने से पवू ष
उस प्राधधकरण को सुनवाई का युजक्तयुक्त अवसर प्रर्दान करेगा ।
(3) जहां आयोग, उपधारा (2) के अधीन ककसी धचककत्सा अहषता को मान्द्यता प्रर्दान
करने से इंकार करता है, वहां संबद्ध प्राधधकरण मान्द्यता प्रर्दान ककए जाने के लिए
केन्द्रीय सरकार को अपीि कर सकेगा ।
(4) ऐसी सभी अहषताएं, जजन्द्हें इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से पवू ष मान्द्यता
1973 का 59 प्रर्दान की गई है और जजन्द्हें होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् अधधननयम, 1973 की तीसरी
अनुसूची में सजम्मलित ककया गया है, इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए भी
मान्द्यताप्राप्त धचककत्सा अहषताएं होंगी और उन्द्हें आयोग द्वारा ऐसी रीनत में, जोअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
558
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए, सूचीबद्ध और अनुरक्षित ककया जाएगा ।
अहषता की मान्द्यता 37. (1) जहां आयोग को, होम्योपैथी धचककत्सा ननधाषरण और रेठ गं बोर् ष स े कोई
वापस िेना या ररपो ष प्राप्त होने पर या अन्द्यथा यह प्रतीत होता है कक—
मान्द्यता समाप्त
करना । (क) ककसी ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था द्वारा चिाए जा रहे
अध्ययन पाठ्यक्रम और परीिा या उसके द्वारा आयोजजत ककसी परीिा में
अभ्यधथषयों से अपेक्षित प्रवीणता, होम्योपैथी लशिा बोर् ष द्वारा ववननठर्दषष्ट् मानकों के
अनुरूप नहीं है; या
(ि) होम्योपैथी लशिा बोर् ष द्वारा यथा अवधाररत आयुववषज्ञान संस्थाओं में
अवसंरचना, संकाय और लशिा की गुणवत्ता के लिए मानकों और सजन्द्नयमों का
ककसी ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था द्वारा अनुपािन नहीं ककया जाता है
और ऐसा ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था ववननठर्दषष्ट् न्द्यूनतम मानकों को
बनाए रिने हेतु आवश्यक सुधारात्मक कारषवाई करने में असफि रही है,
वहां आयोग, उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार कारषवाई आरम्भ कर सकेगा :
परंतु आयोग स्वप्रेरणा से ककसी ववश्वववद्यािय या आयुववषज्ञान संस्था द्वारा प्रर्दान
की गई धचककत्सा अहषता को अनुर्दत्त मान्द्यता वापस िने े की कारषवाई करने से पूव ष
धारा 28 की उपधारा (1) के िंर् (च) के उपबंधों के अनुसार शाजस्त अधधरोवपत करेगा ।
(2) आयोग, ऐसी और जांच करने के पश्चात,् जजसे वह िीक समझे, और राज्य
सरकार तथा संबद्ध ववश्वववद्यािय या आयुववज्ञष ान संस्था के प्राधधकारी से परामश ष करने
के पश्चात,् इस ननष्ट्कर् ष पर पहुंचता है कक ककसी धचककत्सा अहषता को अनुर्दत्त की गई
मान्द्यता को वापस लिया जाना चाठहए, तो वह आर्देश द्वारा, ऐसी धचककत्सा अहषता को
अनुर्दत्त की गई मान्द्यता को वापस ि े सकेगा और होम्योपथै ी लशिा बोर् ष को यह ननर्देश
र्दे सकेगा कक वह उस बोर् ष द्वारा अनुरक्षित सूची में संबद्ध ववश्वववद्यािय या
आयुववषज्ञान संस्था के सामने की प्रववजष्ट् यों में इस प्रभाव का संशोधन करे कक ऐसी
अहषता को अनुर्दत्त की गई मान्द्यता, उस आर्देश में ववननठर्दषष्ट् तारीि से वापस िी जाती
है ।
(3) यठर्द आयोग की, भारत से बाहर ककसी र्देश के प्राधधकरण से सत्यापन के
पश्चात,् यह राय है कक कोई मान्द्यताप्राप्त धचककत्सा अहषता की, जजसे उसके द्वारा
अनुरक्षित सूची में सजम्मलित ककया गया है, मान्द्यता को समाप्त ककया जाना है, वहां
वह आर्देश द्वारा, ऐसी धचककत्सा अहषता की मान्द्यता को समाप्त कर सकेगा और उस े
ऐसे आर्देश की तारीि से आयोग द्वारा अनुरक्षित सूची से ह ा सकेगा ।
कनतपय र्दशाओं में 38. जहां आयोग ऐसा करना आवश्यक समझता है, तो वह अधधसूचना द्वारा, यह
अहषताओं की
ननर्देश र्दे सकेगा कक भारत से बाहर ककसी आयुववज्ञष ान संस्था द्वारा प्रर्दान की गई
मान्द्यता के लिए
होम्योपैथी में कोई अहषता, ऐसी तारीि के पश्चात,् जजसे उस अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट्
ववशेर् उपबंध ।
ककया जाए, इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए मान्द्यताप्राप्त अहषता होगी :
परंतु ऐसी अहषता रिन े वाि े ककसी व्यजक्त द्वारा धचककत्सा व्यवसाय को केवि
तभी अनुज्ञात ककया जाएगा यठर्द ऐसे व्यजक्त को उस र्देश में तत्समय प्रवत्तृ धचककत्साअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
559
व्यवसायी के रजजस्रीकरण को ववननयलमत करने वािी ववधध के अनुसार ककसी धचककत्सा
व्यवसायी के रूप में नामांककत ककया गया है :
परंतु यह और कक ऐसी अहषता रिन े वािे ककसी व्यजक्त द्वारा धचककत्सा व्यवसाय
ऐसी अवधध के लिए सीलमत होगा, जो उस आर्देश में ववननठर्दषष्ट् ककया जाए :
परंतु यह भी कक ऐसी अहषता रिन े वािे ककसी व्यजक्त द्वारा धचककत्सा व्यवसाय
को केवि तभी अनुज्ञात ककया जाएगा यठर्द ऐसा व्यजक्त राष्ट्रीय ननकास परीिा अठहतष
करता है ।
अध्याय 7
अिुदाि, संपरीक्षा और िेखा
39. केन्द्रीय सरकार, इस ननलमत्त संसद् की ववधध द्वारा सम्यक् ववननयोग के केन्द्रीय सरकार
द्वारा अनुर्दान ।
पश्चात,् आयोग को ऐसी धनरालश का अनुर्दान कर सकेगी, जो केन्द्रीय सरकार िीक
समझे ।
40. (1) “होम्योपैथी राष्ट्रीय आयोग ननधध” नामक एक ननधध का गिन ककया होम्योपैथी राष्ट्रीय
जाएगा और उसमें ननम्नलिखित जमा ककया जाएगा— आयोग ननधध ।
(क) आयोग और स्वायत्त बोर्ों द्वारा प्राप्त सभी सरकारी अनुर्दान, फीस,
शाजस्तयां और प्रभार ;
(ि) आयोग द्वारा ऐसे अन्द्य स्रोत से, जो उसके द्वारा ववननजश्चत ककया
जाए, प्राप्त सभी धन रालशयां ।
(2) इस ननधध को ननम्नलिखित के मद्र्दे संर्दाय करने के लिए उपयोजजत ककया
जाएगा—
(क) आयोग के अध्यि और सर्दस्यों, स्वायत्त बोर्ों के प्रधान और सर्दस्यों
को संर्देय वेतन और भत्तों तथा प्रशासननक व्ययों, जजनके अंतगतष आयोग तथा
स्वायत्त बोर्ों के अधधकाररयों और अन्द्य कमचष ाररयों को सर्दं ेय वेतन और भत्ते भी
हैं ;
(ि) इस अधधननयम के उपबंधों को कायाषजन्द्वत करने के लिए उपगत व्ययों
या उपगत होने वािे व्ययों, जजसके अंतगष त आयोग और स्वायत्त बोर्ों के कृत्यों के
ननवहष न से जुड़े व्यय भी हैं ।
41. (1) आयोग, उधचत िेिे और अन्द्य सुसंगत अलभिेि रिेगा और ऐसे प्ररूप संपरीिा और
में, जो भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक के परामश ष स े ववठहत ककया जाए, िेिाओं का िेिा ।
एक वावर्कष वववरण तैयार करेगा ।
(2) आयोग के िेिाओं की संपरीिा, भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक द्वारा
ऐसे अंतरािों पर, जो उसके द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, की जाएगी और ऐसी संपरीिा
के संबंध में उपगत कोई व्यय, आयोग द्वारा भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक को
संर्देय होगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
560
(3) भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक और आयोग के िेिाओं की संपरीिा के
संबंध में उसके द्वारा ननयुक्त ककन्द्हीं अन्द्य व्यजक्तयों को उस संपरीिा के संबंध में वही
अधधकार, ववशेर्ाधधकार और प्राधधकार होंगे, जो सरकारी िेिाओं की संपरीिा के संबंध
में साधारणतया, भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक के होत े हैं और ववलशष्ट् रूप से
अलभिेिों, पुस्तकों, िेिाओं, संबद्ध वाऊचरों तथा अन्द्य र्दस्तावेजों और कागज-पत्र पेश
ककए जाने की मांग करने और उस तक पूण ष पहुंच बनाने तथा आयोग के कायाषियों का
ननरीिण करने का अधधकार होगा ।
(4) भारत के ननयंत्रक महाििे ापरीिक या इस ननलमत्त उसके द्वारा ननयुक्त ककए
गए ककसी अन्द्य व्यजक्त द्वारा यथा प्रमाखणत आयोग के िेिे, उस पर संपरीिा ररपो ष
के साथ आयोग द्वारा वावर्कष रूप से केन्द्रीय सरकार को भेजे जाएंगे, जजन्द्हें प्राप्त करने
के पश्चात ् वह उसे यथासंभव शीघ्र संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिवाएगी ।
वववरखणयों और 42. (1) आयोग, केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीनत
ररपो ों का केन्द्रीय
में, जो ववठहत की जाए या जैसा केन्द्रीय सरकार ननर्देश र्दे, ऐसी ररपो ों और वववरखणयों
सरकार को प्रस्ततु
तथा आयोग की अधधकाररता के अधीन ककसी ववर्य से संबंधधत ऐसी ववलशजष्ट् यां को,
ककया जाना ।
जजनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेिा करे, प्रस्तुत करेगा ।
(2) आयोग, प्रत्येक वर् ष में एक बार, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो ववठहत
ककया जाए, पूववष ती वर् ष के र्दौरान उसके कक्रयाकिापों का एक संक्षिप्त वववरण र्देते हुए
एक वावर्कष ररपो ष तैयार करेगा और उस ररपो ष की प्रनतयां केन्द्रीय सरकार को अग्रेवर्त
की जाएंगी ।
(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त ररपो ष की एक प्रनत केन्द्रीय सरकार द्वारा उसकी
प्राजप्त के पश्चात,् यथासंभव शीघ्र संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिी जाएगी ।
अध्याय 8
प्रकीर् ि
केन्द्रीय सरकार की 43. (1) इस अधधननयम के पूवगष ामी उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना,
आयोग और स्वायत्त
आयोग और स्वायत्त बोर्,ष इस अधधननयम के अधीन अपनी शजक्तयों का प्रयोग करने में
बोर्ों को ननर्देश र्देन े
की शजक्त ।
और कृत्यों के ननवहष न में, नीनत के प्रश्नों पर ऐस े ननर्देशों से आबद्ध होंगे, जो केन्द्रीय
सरकार समय-समय पर उन्द्हें लिखित में र्दे :
परंतु आयोग और स्वायत्त बोर्ों को, यथासाध्य, इस उपधारा के अधीन कोई ननर्देश
ठर्दए जाने से पूव ष अपने ववचार अलभव्यक्त करने का अवसर प्रर्दान ककया जाएगा।
(2) क्या कोई प्रश्न नीनत का है या नहीं, केन्द्रीय सरकार का ववननश्चय अंनतम
होगा।
केन्द्रीय सरकार की 44. केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के सभी या ककन्द्हीं उपबंधों को कायाषजन्द्वत
राज्य सरकारों को
करने के लिए ककसी राज्य सरकार को ऐसे ननर्देश र्दे सकेगी, जजन्द्हें वह आवश्यक समझे
ननर्देश र्देने की
और राज्य सरकार ऐसे ननर्देशों का अनुपािन करेगी ।
शजक्त ।
आयोग द्वारा र्दी 45. (1) आयोग, केन्द्रीय सरकार को ऐसी ररपो ष, अपने कायवष त्तृ की प्रनतयां,
जाने वािी जानकारी
अपने िेिाओं का सार और अन्द्य जानकारी र्देगा, जजसकी वह सरकार अपेिा करे ।
और उसकाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
561
प्रकाशन । (2) केन्द्रीय सरकार, ऐसी रीनत में, जो वह िीक समझे, उपधारा (1) के अधीन
उसे र्दी गई ररपो ष, कायवष त्तृ ों, िेिाओं का सार और अन्द्य जानकारी को प्रकालशत कर
सकेगी ।
46. इस अधधननयम के अधीन आने वािा प्रत्येक ववश्वववद्यािय और आयुववषज्ञान ववश्वववद्याियों
और आयुववज्ञष ान
संस्था हर समय एक वेबसाइ अनुरक्षित करेगी और अपनी वेबसाइ पर ऐसी सभी
संस्थाओं की
सूचनाएं प्रर्दलशतष करेगी, जो यथाजस्थनत, आयोग और ककसी स्वायत्त बोर् ष द्वारा अपेक्षित
बाध्यताएं ।
हो ।
47. (1) इस अधधननयम में ककसी बात के होते हुए भी, ऐसा कोई छात्र, जो इस आयुववज्ञष ान
संस्थाओं में
अधधननयम के प्रारंभ स े िीक पूव ष ककसी आयुववज्ञष ान संस्था में ककसी डर्ग्री या डर्प्िोमा
पाठ्यक्रमों का पूरा
के लिए अध्ययन कर रहा था, वैसे ही अध्ययन करता रहेगा और ऐसी डर्ग्री या
ककया जाना ।
डर्प्िोमा के लिए अपने पाठ्यक्रम को पूरा करेगा तथा ऐसी संस्था, ऐसे प्रारंभ स े पूव ष
यथा ववद्यमान पाठ्यचयाष और अध्ययन के अनुसार, ऐसे छात्र के लिए अनुर्देश उपिब्ध
कराती रहेगी तथा परीिाओं का आयोजन कराती रहेगी और ऐसे छात्र के बारे में यह
माना जाएगा कक उसने इस अधधननयम के अधीन अपने पाठ्यक्रम को पूरा कर लिया है
तथा उसे इस अधधननयम के अधीन डर्ग्री या डर्प्िोमा प्रर्दान की जाएगी ।
(2) इस अधधननयम में ककसी बात के होते हुए भी, जहां ककसी आयुववज्ञष ान संस्था
को प्रर्दान की गई मान्द्यता व्यपगत हो गई है, चाहे यह समय के बीत जाने के कारण
हुआ हो या स्वेच्छया अभ्यपषण के कारण या ककसी अन्द्य कारण से हुआ हो, वहां ऐसी
आयुववषज्ञान संस्था उस समय तक, जब तक कक ऐस े सभी अभ्यथी उस संस्था में अपन े
अध्ययन को पूरा करने में समथ ष नहीं हो जाते हैं, आयोग द्वारा यथा अनुमोठर्दत
न्द्यूनतम मानकों को बनाए रिेगी और उसका उपबंध करेगी ।
48. आयोग का अध्यि, सर्दस्य, अधधकारी और अन्द्य कमचष ारी तथा स्वायत्त बोर्ों आयोग, स्वायत्त
के प्रधान और सर्दस्यों के बारे में, जब वे इस अधधननयम के ककसी भी उपबंध के
बोर्ों के अध्यि,
सर्दस्यों,
अनुसरण में काय ष कर रहे हों या काय ष का ककया जाना तात्पनयषत हो, तो उस े भारतीय
अधधकाररयों का
1860 का 45 र्दंर् संठहता की धारा 21 के अथ ष के अन्द्तगषत िोक सेवक समझा जाएगा । िोक सेवक होना ।
49. इस अधधननयम या इसके अधीन बनाए गए ननयमों या ववननयमों के अधीन सद्भावपूवकष की
गई कारषवाई का
सद्भावपूवकष की गई या ककए जाने के लिए आशनयत ककसी बात के लिए कोई वार्द,
संरिण ।
अलभयोजन या अन्द्य ववधधक कायवष ाही सरकार, आयोग या ककसी स्वायत्त बोर् ष या ककसी
राज्य धचककत्सा पररर्द् या उसकी ककसी सलमनत या इस अधधननयम के अधीन काय ष
करने वािे सरकार या आयोग के ककसी अधधकारी या अन्द्य कमषचारी के ववरुद्ध नहीं होगी।
50. कोई न्द्यायािय, इस अधधननयम के अधीन र्दंर्नीय ककसी अपराध का संज्ञान, अपराधों का
संज्ञान ।
यथाजस्थनत, आयोग या होम्योपैथी नैनतक और रजजस्रीकरण बोर् ष या राज्य धचककत्सा
पररर्द् द्वारा इस ननलमत्त प्राधधकृत ककसी अधधकारी द्वारा की गई लिखित लशकायत के
लसवाय नहीं करेगा ।
51. (1) यठर्द ककसी भी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कक— केन्द्रीय सरकार
की आयोग को
(क) आयोग, इस अधधननयम के उपबंधों द्वारा या उसके अधीन उस पर
अधधक्रांत करने की
अधधरोवपत कृत्यों और कतव्ष यों का ननवहष न करने में असमथष है ; या शजक्त ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
562
(ि) आयोग ने, इस अधधननयम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी ककसी
ननर्देश के अनुपािन में या इस अधधननयम के उपबंधों द्वारा या उसके अधीन उस
पर अधधरोवपत कृत्यों और कतव्ष यों के ननवहष न में बारबार व्यनतक्रम ककया है,
तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में, अधधसूचना द्वारा, आयोग को छह मास स े अनधधक की
ऐसी अवधध के लिए अधधक्रांत कर सकेगी, जो अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् ककया जाए :
परंतु इस उपधारा के अधीन कोई अधधसूचना जारी करने से पूव ष केन्द्रीय सरकार,
आयोग को इस बात का कारण बताने का युजक्तयुक्त अवसर प्रर्दान करेगी कक उस े
अधधक्रांत क्यों न कर ठर्दया जाए और आयोग द्वारा ठर्दए गए स्पष्ट् ीकरणों और आिेपों
पर, यठर्द कोई हों, ववचार करेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन आयोग को अधधक्रांत करने वािी ककसी अधधसूचना के
प्रकाशन पर,—
(क) सभी सर्दस्य अधधक्रमण ककए जाने की तारीि स े अपना पर्द उसी रूप
में ररक्त कर र्देंगे ;
(ि) इस अधधननयम के उपबंधों द्वारा या इसके अधीन आयोग द्वारा या
उसके ननलमत्त प्रयोग की जाने वािी सभी शजक्तयों या ननवहष न ककए जाने वािे
कृत्यों और कतव्ष यों का, उपधारा (3) के अधीन आयोग का पुनगिष न ककए जाने
तक ऐसे व्यजक्त या व्यजक्तयों द्वारा, जैसा केन्द्रीय सरकार ननर्देश र्दे, प्रयोग और
ननवहष न ककया जाएगा ;
(ग) आयोग के स्वालमत्वाधीन या ननयंत्रणाधीन सभी संपवत्त, उपधारा (3) के
अधीन आयोग का पुनगिष न ककए जाने तक केन्द्रीय सरकार में ननठहत होंगी ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन जारी अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट्
अनतजष्ट्िनत काि के अवसान पर,—
(क) अनतजष्ट्िनत काि को, छह मास से अनधधक ऐसी और अवधध के लिए
ववस्ताररत कर सकेगी, जो वह आवश्यक समझे ; या
(ि) नई ननयुजक्त द्वारा आयोग का पुनगिष न कर सकेगी और ऐसी र्दशा में
ऐसे सर्दस्य, जजन्द्होंने उपधारा (2) के िंर् (क) के अधीन अपने पर्द ररक्त ककए थे,
ननयुजक्त के लिए ननरठहतष नहीं समझे जाएंगे :
परंतु केन्द्रीय सरकार, अनतजष्ट्िनत काि, चाहे वह अवधध मूि रूप से उपधारा (1) के
अधीन ववननठर्दषष्ट् की गई हो या इस उपधारा के अधीन यथाववस्ताररत अवधध हो, के
अवसान से पूव,ष ककसी भी समय, इस उपधारा के िंर् (ि) के अधीन कारषवाई कर सकेगी।
(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन एक अधधसूचना जारी करेगी और इस
धारा के अधीन की गई ककसी कारषवाई और ऐसी कारषवाई को ककए जाने वािी
पररजस्थनतयों से संबंधधत एक पूरी ररपो ष को सवप्रष थम अवसर पर संसद् के र्दोनों सर्दनों
के समि रिवाएगी ।
आयोग, राष्ट्रीय 52. (1) होम्योपैथी भारतीय धचककत्सा पद्धनत और आधुननक आयुववषज्ञान पद्धनत
भारतीय धचककत्सा
पद्धनत आयोग और के बीच इं रफेश का संवधषन करने के लिए वर् ष में कम से कम एक बार, ऐसे समय और
राष्ट्रीय धचककत्सा
स्थान पर, जो परस्पर ननयत ककया जाए, आयोग, राष्ट्रीय भारतीय धचककत्सा पद्धनत
आयोग की संयक्ु तअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
563
बैिकें । आयोग और राष्ट्रीय धचककत्सा आयोग की संयुक्त बैिक की जाएगी ।
(2) संयुक्त बैिक की कायसष चू ी संबद्ध आयोगों के अध्यिों के बीच पारस्पररक
सहमनत से प्रस्तुत की जा सकेगी ।
(3) संयुक्त बैिक में, उपजस्थत और मतर्दान करने वािे सभी सर्दस्यों के
सकारात्मक मत द्वारा, ऐसे ववननठर्दषष्ट् शैिखणक और धचककत्सा मापर्दंर् या कायक्रष मों को
अनुमोठर्दत करने का ववननश्चय ककया जा सकेगा, जजन्द्हें सभी धचककत्सा पद्धनतयों में
स्नातकपूव ष और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में आरंभ ककया जा सकेगा और इस प्रकार
धचककत्सा बहुिवार्द की अलभवद्ृ धध की जा सकेगी ।
53. प्रत्येक राज्य सरकार, िोक स्वास््य का पता िगाने या उसकी अलभवद्ृ धध राज्य सरकार
द्वारा िोक
करने के प्रयोजनों के लिए स्वास््य र्देि-रेि ववृत्तकों की िमता में वद्ृ धध करने हेतु
स्वास््य की
आवश्यक उपाय कर सकेगी ।
अलभवद्ृ धध करना ।
54. (1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना द्वारा, इस अधधननयम के ननयम बनाने की
शजक्त ।
प्रयोजनों को कायाषजन्द्वत करने के लिए ननयम बना सकेगी ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, ऐसे ननयम,
ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अथाषत ् :—
(क) धारा 4 की उपधारा (4) के िंर् (ि) के अधीन सिाहकार पररर्द् में
राज्यों और संघ राज्यिेत्रों के नामननर्देलशनतयों में से चक्रानुक्रम आधार पर आयोग
के पांच सर्दस्यों को ननयुक्त करने की रीनत ;
(ि) धारा 4 की उपधारा (4) के िंर् (ग) के अधीन सर्दस्यों को ननयुक्त
करने की रीनत ;
(ग) धारा 5 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा
एक ववशेर्ज्ञ को नामननठर्दषष्ट् ककए जाने की रीनत ;
(घ) धारा 6 की उपधारा (4) के अधीन अध्यि और सर्दस्यों को संर्देय वेतन
और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्द्य ननबंधन और शतें ;
(ङ) धारा 6 की उपधारा (6) के अधीन घोर्णा करने का प्ररूप और रीनत ;
(च) धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन सधचव द्वारा धारण की जाने वािी
अहषताएं और अनुभव ;
(छ) धारा 8 की उपधारा (6) के अधीन आयोग के सधचव, अधधकाररयों और
अन्द्य कमचष ाररयों को संर्देय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्द्य ननबंधन
और शतें ;
(ज) धारा 10 की उपधारा (1) के िंर् (झ) के अधीन आयोग द्वारा प्रयोग
की जाने वािी अन्द्य शजक्तयां और पािन ककए जाने वािे अन्द्य कृत्य ;
(झ) धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन ककसी स्वायत्त बोर् ष के प्रधान और
सर्दस्यों को संर्देय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्द्य ननबंधन और शतें ;
(ञ) धारा 30 के िंर् (घ) के अधीन अन्द्य कारक;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
564
( ) धारा 33 की उपधारा (1) के र्दसू रे परंतुक के अधीन व्यवसानययों की
सूची प्रस्तुत करने की रीनत ;
(ि) धारा 41 की उपधारा (1) के अधीन िेिाओं का वावर्कष वववरण तैयार
करने का प्ररूप ;
(र्) धारा 42 की उपधारा (1) के अधीन वह समय, जजसके भीतर और वह
प्ररूप तथा रीनत, जजसमें आयोग द्वारा ररपो ष और वववरण तथा ककसी ऐसे ववर्य
से संबंधधत ववलशजष्ट् यां, जजसके संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा अपेिा की जाए,
प्रस्तुत ककए जाएंगे;
(ढ) धारा 43 की उपधारा (2) के अधीन वावर्कष ररपो ष तैयार करने का प्ररूप
और समय ;
(ण) धारा 58 की उपधारा (3) के र्दसू रे परंतुक के अधीन ननयोजन को
समयपूव ष समाप्त करने के लिए प्रनतकर ;
(त) ऐसा कोई अन्द्य ववर्य, जजसके संबंध में ननयमों द्वारा उपबंध ककया
जाना है ।
ववननयम बनाने की 55. (1) आयोग, अधधसूचना द्वारा, इस अधधननयम के उपबंधों को कक्रयाजन्द्वत
शजक्त ।
करने के लिए, इस अधधननयम और इसके अधीन बनाए गए ननयमों से सुसंगत ववननयम
बना सकेगा ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना,
ऐसे ववननयम, ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अथाषत:्—
(क) धारा 8 की उपधारा (4) के अधीन आयोग के सधचव द्वारा ननवहष न
ककए जाने वािे कृत्य ;
(ि) वह प्रकक्रया, जजसके अनुसार धारा 8 की उपधारा (7) के अधीन
ववशेर्ज्ञों और ववृत्तकों को ननयोजजत ककया जा सकेगा तथा ऐसे ववशेर्ज्ञों और
ववृत्तकों की संख्या ;
(ग) धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन आयोग की बैिकों में अनुसरण की
जाने वािी प्रकक्रया, जजसके अतं गतष उसकी बैिकों में गणपूनत ष भी है ;
(घ) धारा 10 की उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन होम्योपैथी की लशिा
में बनाई रिी जाने वािी गुणवत्ता और मानक ;
(ङ) धारा 10 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन आयुववज्ञष ान संस्थाओं,
धचककत्सा अनुसंधानों और धचककत्सा ववृत्तकों को ववननयलमत करने की रीनत ;
(च) धारा 10 की उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन आयोग, स्वायत्त बोर्ों
और राज्य धचककत्सा पररर्र्दों के कायकष रण को ववननयलमत करने की रीनत ;
(छ) धारा 13 की उपधारा (3) के अधीन धचककत्सा सिाहकार पररर्द् की
बैिकों में अनुसरण की जाने वािी प्रकक्रया, जजसके अतं गतष इसकी बैिकों में
गणपूनत ष भी है ;
(ज) धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन ऐसी अन्द्य भार्ाएं, जजसमें अलभठहतअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
565
प्राधधकरण ऐसे माध्यम से और ऐसी रीनत में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीिा का
आयोजन करेगा ;
(झ) धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन अलभठहत प्राधधकरण द्वारा
आयुववषज्ञान संस्थाओं में प्रवेश हेतु सामान्द्य काउंसेलिगं कराए जाने की रीनत ;
(ञ) धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन ऐसी अन्द्य भार्ाएं, जजसमें अलभठहत
प्राधधकरण ऐसे माध्यम से और ऐसी रीनत में राष्ट्रीय ननकास परीिा का आयोजन
करेगा ;
( ) धारा 15 की उपधारा (4) के अधीन वह रीनत, जजसमें ऐसा व्यजक्त,
जजसके पास ववर्देशी धचककत्सा अहषता है, राष्ट्रीय ननकास परीिा अठहतष करेगा ;
(ि) धारा 16 की उपधारा (2) के अधीन ऐसी अन्द्य भार्ाएं, जजसमें अलभठहत
प्राधधकरण ऐसे माध्यम से और ऐसी रीनत में जजसमें स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के
लिए प्रवेश संचालित ककया जाएगा ;
(र्) धारा 16 की उपधारा (3) के अधीन अलभठहत प्राधधकरण द्वारा सभी
आयुववषज्ञान संस्थाओं में स्नातकोत्तर स्थानों में प्रवेश हेतु सामान्द्य काउंसेलिगं
कराए जाने की रीनत ;
(ढ) धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन होम्योपैथी राष्ट्रीय अध्यापक पात्रता
परीिा का आयोजन करने की रीनत और अलभठहत प्राधधकरण, जजसके माध्यम से
ऐसी परीिा का आयोजन ककया जाएगा ;
(ण) धारा 23 के अधीन ववशेर्ज्ञों, ववृत्तकों, अधधकाररयों और अन्द्य
कमचष ाररयों की संख्या और वह रीनत, जो आयोग द्वारा स्वायत्त बोर्ों को उपिब्ध
कराई जाएगी ;
(त) धारा 24 की उपधारा (2) के अधीन वह रीनत, जजसमें स्वायत्त बोर्ों का
ववननश्चय ककया जाएगा ;
(थ) धारा 26 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन सभी स्तरों पर
सिमता आधाररत सकक्रय पाठ्यचयाष ;
(र्द) धारा 26 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन होम्योपैथी में
स्नातकपूव,ष स्नातकोत्तर और अनत ववलशष्ट् पाठ्यक्रम प्रर्दान करने के लिए
आयुववषज्ञान संस्थाएं स्थावपत करने की रीनत ;
(ध) धारा 26 की उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन आयुववज्ञष ान संस्थाओं
में पाठ्यक्रमों और परीिाओं के संचािन के लिए न्द्यूनतम अपेिाएं और मानक ;
(न) धारा 26 की उपधारा (1) के िंर् (ङ) के अधीन होम्योपैथी की
आयुववषज्ञान संस्थाओं में की अवसंरचना, संकाय और लशिा तथा अनुसंधान की
गुणवत्ता संबंधी मानक और सजन्द्नयम ;
(प) धारा 27 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन ववृत्तक आचरण को
ववननयलमत करने और धचककत्सा नैनतकता का संवधनष करने की रीनत ;
(फ) धारा 28 की उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन आयुववज्ञष ान संस्थाओं
के ननधाषरण और रेठ गं की प्रकक्रया ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
566
(ब) धारा 28 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन आयुववज्ञष ान संस्थाओं
के ननधाषरण और रेठ गं का ननरीिण करने की रीनत ;
(भ) धारा 28 की उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन सभी आयुववज्ञष ान
संस्थाओं का संचािन, ननधाषरण और रेठ गं करने के लिए स्वतंत्र रेठ गं अलभकरणों
को संचालित करने की रीनत और उन्द्हें पैनिबद्ध करने की रीनत ;
(म) धारा 28 की उपधारा (1) के िंर् (ङ) के अधीन आयुववज्ञष ान संस्थाओं
के ननधाषरण और रेठ गं को वेबसाइ या िोकाधधकारी ित्रे में उपिब्ध कराए जान े
की रीनत ;
(य) धारा 28 की उपधारा (1) के िंर् (च) के अधीन ककसी आय़ुववज्ञष ान
संस्था द्वारा न्द्यूनतम अननवाय ष मानकों को बनाए रिने में असफि रहने पर
उनके ववरुद्ध ककए जाने वािे उपाय ;
(यक) धारा 29 की उपधारा (2) के अधीन नए आयुववज्ञष ान महाववद्यािय की
स्थापना करने के लिए स्कीम का प्ररूप, उसकी ववलशजष्ट् यां, उसके साथ िगाई
जाने वािी फीस और स्कीम को प्रस्तुत करने की रीनत ;
(यि) धारा 29 की उपधारा (5) के अधीन स्कीम के अनुमोर्दन के लिए
आयोग को अपीि करने की रीनत ;
(यग) धारा 30 के परंतुक के अधीन ऐसे िेत्र जजनके संबंध में मानर्दंर्
लशधथि ककए जा सकेंगे ;
(यघ) धारा 31 की उपधारा (2) के अधीन ककसी रजजस्रीकृत धचककत्सा
व्यवसायी के ववरुद्ध ववृत्तक या नैनतक कर्दाचार के लिए ककसी राज्य धचककत्सा
पररर्द् द्वारा अनुशासननक कारषवाई करने की रीनत और होम्योपैथी नैनतक और
रजजस्रीकरण बोर् ष द्वारा पररवार्द और लशकायतें प्राप्त करने की प्रकक्रया ;
(यङ) धारा 31 के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ि) के अधीन काररत ऐसे कृत्य या
िोप, जो ववृत्तक या नैनतक कर्दाचार की कोठ में आता है ;
(यच) धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय रजजस् र में अंतववष्ट्ष की
जाने वािी अन्द्य ववलशजष्ट् यां ;
(यछ) धारा 33 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय रजजस् र के अनुरिण का
प्ररूप, जजसके अंतगतष इिैक्राननक प्ररूप और उसकी रीनत भी है;
(यज) धारा 34 की उपधारा (3) के अधीन वह रीनत, जजसमें ककसी नाम या
अहषता को राष्ट्रीय रजजस् र में जोड़ा जा सकेगा या ह ाया जा सकेगा और उन्द्हें
ह ाए जाने के लिए आधार ;
(यझ) धारा 35 की उपधारा (3) के अधीन राज्य रजजस् र या राष्ट्रीय
रजजस् र में उपाधध, डर्प्िोमा या अहषता को प्रववजष्ट् करने की रीनत ;
(यञ) धारा 34 की उपधारा (1) के तीसरे परंतुक के अधीन वह रीनत,
जजसमें और वह अवधध, जजसके लिए ककसी ववर्देशी नागररक का अस्थायीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
567
रजजस्रीकरण अनुज्ञात ककया जा सकेगा ;
(य ) धारा 35 की उपधारा (1) के अधीन ककसी ववश्वववद्यािय या
आयुववषज्ञान संस्था द्वारा प्रर्दान की गई धचककत्सा अहषताओं की सूची तैयार करने
और उसका अनुरिण करने की रीनत ;
(यि) धारा 35 की उपधारा (3) के अधीन मान्द्यता प्रर्दान करने के लिए
आवेर्दन का परीिण करने की रीनत ;
(यर्) धारा 35 की उपधारा (5) के अधीन मान्द्यता प्रर्दान ककए जाने के
संबंध में आयोग को अपीि करने की रीनत ;
(यढ) धारा 36 की उपधारा (6) के अधीन बोर् ष द्वारा अनुरक्षित सूची में
कोई धचककत्सा अहषता सजम्मलित करने की रीनत ;
(यण) धारा 35 की उपधारा (8) के अधीन वह रीनत, जजसमें होम्योपैथी
लशिा बोर् ष ऐसी धचककत्सा अहषताओं की सूची बनाएगा और उसका अनुरिण करेगा,
जजन्द्हें इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से पूव ष मान्द्यता प्रर्दान की गई है ;
(यत) धारा 36 की उपधारा (4) के अधीन वह रीनत, जजसमें आयोग उन
धचककत्सा अहषताओं की सूची बनाएगा और उसका अनुरिण करेगा, जजन्द्हें इस
अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से पूव ष मान्द्यता प्रर्दान की गई है ।
56. इस अधधननयम के अधीन बनाए गए प्रत्येक ननयम और प्रत्येक ववननयम को, ननयमों और
ववननयमों का
इसके बनाए जाने के पश्चात,् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि, जब वह सत्र
संसद् के समि
में हो, कुि तीस ठर्दन की अवधध के लिए रिा जाएगा, जो एक सत्र में अथवा र्दो या
रिा जाना ।
अधधक आनुक्रलमक सत्रों में परू ी हो सकेगी और यठर्द उस सत्र के या पूवोक्त आनुक्रलमक
सत्रों के िीक बार्द के सत्र के अवसान के पूव ष र्दोनों सर्दन, उस ननयम या ववननयम में
कोई पररवतनष करने के लिए सहमत हो जाते हैं, या र्दोनों सर्दन सहमत हो जाते हैं कक
वह ननयम या ववननयम नहीं बनाया जाना चाठहए, तो तत्पश्चात ् वह ननयम या ववननयम,
यथाजस्थनत, ऐसे पररवनततष रूप में ही प्रभावी होगा या वह ननष्ट्प्रभावी हो जाएगा, ककन्द्त ु
इस प्रकार, उस ननयम या ववननयम के ऐसे पररवनततष या ननष्ट्प्रभावी होने से उसके
अधीन पहिे की गई ककसी बात की ववधधमान्द्यता पर प्रनतकूि प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
57. (1) यठर्द इस अधधननयम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई कठिनाइयों को र्दरू
करने की शजक्त ।
उत्पन्द्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा, ऐसे उपबंध कर
सकेगी, जो इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हों, जो उस कठिनाई को र्दरू करने
के लिए उसे आवश्यक प्रतीत हो :
परंतु इस अधधननयम के प्रारंभ से र्दो वर् ष की अवधध की समाजप्त के पश्चात,् इस
धारा के अधीन ऐसा कोई आर्देश नहीं ककया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन ककया गया प्रत्येक आर्देश, उसके ककए जाने के पश्चात,्
यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिा जाएगा ।
58. (1) उस तारीि से, जो केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा इस ननलमत्त ननयत ननरसन और
1973 का 59 करे, होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् अधधननयम, 1973 ननरलसत हो जाएगा और उक्त व्याववृत्त ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
568
अधधननयम की धारा 3 के अधीन गठित होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् ववघठ त हो जाएगी ।
(2) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् अधधननयम के ननरसन के होते हुए भी, ननम्नलिखित
पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा,—
(क) इस प्रकार ननरलसत अधधननयम के पूव ष प्रवतनष या उसके अधीन सम्यक्
रूप से की गई ककसी बात या ककसी कारषवाई पर ; या
(ि) इस प्रकार ननरलसत अधधननयम के अधीन अजजषत, प्रोद्भूत या उपगत
ककसी अधधकार, ववशेर्ाधधकार, बाध्यता या र्दानयत्व पर ; या
(ग) इस प्रकार ननरलसत अधधननयम के अधीन ककसी उल्िघं न के संबंध में
उपगत ककसी शाजस्त पर ; या
(घ) यथापूवोक्त ककसी ऐसे अधधकार, ववशेर्ाधधकार, बाध्यता, र्दानयत्व या
शाजस्त के संबंध में ककसी कायवष ाही या उपचार पर और ऐसी ककसी कायवष ाही या
उपचार को उसी प्रकार संजस्थत ककया जा सकेगा, जारी या प्रवत्तृ रिा जा सकेगा
या ऐसी कोई शाजस्त वैसे ही अधधरोवपत की जा सकेगी, मानो वह अधधननयम
ननरलसत ही नहीं ककया गया है ।
(3) होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् के ववघ न पर, उस पररर्द् के अध्यि के रूप में
ननयुक्त व्यजक्त और सर्दस्य के रूप में ननयुक्त अन्द्य प्रत्येक व्यजक्त तथा पररर्द् का
कोई अधधकारी एवं अन्द्य कमचष ारी, जो ऐसे ववघ न से िीक पूव ष ऐसा कोई पर्द धारण
ककया हुआ था, वे अपने-अपने पर्दों को ररक्त कर र्देंगे और ऐसा अध्यि और अन्द्य
सर्दस्य, अपनी पर्दावधध या सेवा की ककसी संववर्दा के समयपूव ष समापन के लिए तीन
मास से अनधधक के वेतन और भत्तों के प्रनतकर का र्दावा करने के लिए हकर्दार होंगे :
परंतु ऐसा कोई अधधकारी या अन्द्य कमषचारी, जो होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् के
ववघ न से िीक पूव ष होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् में प्रनतननयुजक्त के आधार पर ननयुक्त
था, वह ऐसे ववघ न पर, यथाजस्थनत, अपने मूि कार्र, मंत्रािय या ववभाग में वापस
चिा जाएगा :
परंतु यह और कक ऐसा कोई अधधकारी, ववशेर्ज्ञ, ववृत्तक या अन्द्य कमषचारी, जजसे
होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् के ववघ न से िीक पूव ष ननयलमत आधार पर या संववर्दा के
आधार पर पररर्द् द्वारा ननयोजजत ककया गया था, वह केन्द्रीय पररर्द् का ऐसा
अधधकारी, ववशेर्ज्ञ, ववृत्तक या अन्द्य कमषचारी नहीं रहेगा और वह अपने ननयोजन के
समयपूव ष समापन के लिए ऐस े प्रनतकर का हकर्दार होगा, जो कम स े कम तीन मास का
ऐसा वेतन और भत्ता होगा, जो ववठहत ककया जाए ।
(4) पूवोक्त अधधननयलमनत के ननरसन के होते हुए भी, होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द्
अधधननयम, 1973 के अधीन ककया गया कोई आर्देश, व्यवसाय करन े के लिए जारी की 1973 का 59
गई कोई अनुज्ञजप्त, ककया गया कोई रजजस्रीकरण, ककसी नई आयुववषज्ञान संस्था को
आरंभ करने या उच्चतर अध्ययन पाठ्यक्रमों को आरंभ करने या अनुर्दत्त प्रवेश िमता
में वद्ृ धध करने के लिए कोई अनुमनत, ककसी अनुर्दत्त धचककत्सा अहषताओं की कोई
मान्द्यता, जो इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि को प्रवतनष में हैं, उनके अवसान की
तारीि तक, सभी प्रयोजनों के लिए, इस प्रकार से प्रवतनष में बने रहेंगे, मानों उन्द्हें इस
अधधननयम या उसके अधीन बनाए गए ननयमों या ववननयमों के उपबंधों के अधीन जारी
या मंजूर ककया गया हो ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
569
59. (1) आयोग, होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द्, जजसके अंतगषत उसके समनुर्ंगी या संक्रमणकािीन
उपबंध ।
उसके स्वालमत्वाधीन न्द्यास भी है, के ठहत में उत्तरवती होगा और होम्योपैथी केन्द्रीय
पररर्द् की सभी आजस्तयों और र्दानयत्वों के बारे में यह समझा जाएगा कक व े आयोग को
अंतररत हो गए हैं ।
1973 का 59 (2) होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् अधधननयम, 1973 का ननरसन होते हुए भी,
होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् अधधननयम, 1973 और उसके अधीन बनाए गए ननयमों और
ववननयमों के लशिा और धचककत्सा मानक, अपेिाएं और अन्द्य उपबंध तब तक प्रवतनष
और प्रचािन में रहेंगे, जब तक कक इस अधधननयम या उसके अधीन बनाए गए ननयमों
या ववननयमों के अधीन नए मानक या अपेिाएं ववननठर्दषष्ट् न कर र्दी जाए ं :
परंतु ननरसनाधीन अधधननयलमनत और उसके अधीन बनाए गए ननयमों या
ववननयमों के अधीन शैक्षिक और धचककत्सा मानकों तथा अपेिाओं के संबंध में की गई
कोई बात या कोई कारषवाई इस अधधननयम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई
समझी जाएगी और वह तद्नुसार, तब तक प्रवतनष में बनी रहेंगी, जब तक उसे इस
अधधननयम के अधीन की गई ककसी बात या की गई ककसी कारषवाई द्वारा अधधक्रांत नहीं
कर ठर्दया जाता है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के अधीन नए आयोग के तत्स्थानी ववघठ त
होम्योपैथी केन्द्रीय पररर्द् के ननबाषध संक्रमण के लिए ऐसे समुधचत उपाय कर सकेगी,
जो आवश्यक हो ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
571
राष्ट्रीय अवसंरििा र्विपोषर् और र्वकास
बकैं अधिनियम, 2021
(2021 का अधिनियम संखयांक 17)
[28 माि,ि 2021]
भारत में दीर्कि ासिक अिाविबं र्विपोषर् अवसंरििा के र्वकास में सहायता करिे के
सिए, श्जसमें अवसंरििा र्विपोषर् हेतु आवचयक बंिपत्र और व्युत्पाद बाजारों
का र्वकास भी सश्म्मसित है और अवसंरििा र्विपोषर् का कारबार करिे
के सिए राष्ट्रीय अवसंरििा र्विपोषर् और र्वकास बकैं की स्थापिा
करि े तथा उससे संबंधित या उसके आिुषंधगक
र्वषयों के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर् ष में ससं द् द्वारा यह ननम्नलिखित रूप में
अधधननयलमत हो :—
अध्याय 1
प्रारंसभक
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और संक्षिप्त नाम,
ववस्तार और
ववकास बकैं अधधननयम, 2021 है ।
प्रारंभ ।
(2) इसका ववस्तार संपूण ष भारत पर है ।
(3) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा, जो केंरीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना
द्वारा, ननयत करे और इस अधधननयम के लभन्द्न-लभन्द्न उपबंधों के लिए लभन्द्न-लभन्द्नअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
572
तारीिें ननयत की जा सकेंगी तथा ऐसे ककसी उपबंध में इस अधधननयम के प्रारंभ के
प्रनत ककसी ननर्देश का यह अथ ष िगाया जाएगा कक वह उस उपबंध के प्रवत्तृ होने के
प्रनत ननर्देश हैं ।
पररभार्ाएं । 2. (1) इस अधधननयम में, जब तक कक संर्दभ ष से अन्द्यथा अपेक्षित न हो,—
(क) ‘‘संपरीिा सलमनत’’ स े धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन गठित बोर् ष
की संपरीिा सलमनत अलभप्रेत है ;
(ि) ‘‘बोर्’ष’ से धारा 6 के अधीन गठित ननर्देशक बोर् ष अलभप्रेत हैं ;
(ग) ‘‘ब्यूरो’’ स े कोई ऐसा ननकाय अलभप्रेत है जजसे केंरीय सरकार, धारा 6
की उपधारा (1) के अधीन प्रबधं ननर्देशक और उप प्रबंध ननर्देशक की ननयुजक्त के
लिए और धारा 11 की उपधारा (1) के िंर् (ii) के अधीन ककसी ननर्देशक को
ह ाए जाने के लिए अभ्यधथषयों की लसफाररश करने के प्रयोजन हेत ु अधधसूधचत
कर सकेगी ;
(घ) ‘‘अध्यि’’ से धारा 6 की उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन ननयुक्त
बोर् ष का अध्यि अलभप्रेत है ;
(ङ) ‘‘सलमनत’’ से धारा 15 के अधीन गठित बोर् ष की कोई सलमनत अलभप्रेत
है ;
(च) ‘‘उप प्रबंध ननर्देशक’’ से धारा 6 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के
अधीन ननयुक्त उप प्रबंध ननर्देशक अलभप्रेत है ;
(छ) ‘‘ननर्देशक’’ के अंतगतष धारा 6 के अधीन ननयुक्त या नामननठर्दषष्ट् बोर् ष
के अध्यि, प्रबंध ननर्देशक, उप प्रबंध ननर्देशक और अन्द्य ननर्देशक आत े हैं ;
(ज) ‘‘कायपष ालिका सलमनत’’ स े धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन गठित
बोर् ष की कायपष ालिका सलमनत अलभप्रेत है ;
(झ) ‘‘ववत्तीय संस्था’’ का वही अथ ष होगा जो ववत्तीय आजस्तयों का
प्रनतभूनतकरण और पुनगिष न तथा प्रनतभूनत ठहत का प्रवतनष अधधननयम, 2002 2002 का 54
की धारा 2 की उपधारा (1) के िंर् (र्) में उसका है ;
(ञ) ‘‘स्वतंत्र ननर्देशक’’ से धारा 6 की उपधारा (1) के िंर् (च) के अधीन
ननयुक्त बोर् ष का स्वतंत्र ननर्देशक अलभप्रेत है ;
( ) ‘‘अवसंरचना’’ से केंरीय सरकार द्वारा समय-समय पर अधधसूधचत
अवसंरचना िेत्र की सूची के अंतगतष आने वािे िेत्र अलभप्रते हैं ;
(ि) ‘‘संस्था’’ स े धारा 3 के अधीन स्थावपत राष्ट्रीय अवसरं चना ववत्तपोर्ण
और ववकास बकैं अलभप्रेत है ;
(र्) ‘‘बीमाकताष’’ का वही अथ ष होगा जो बीमा अधधननयम, 1938 की 1938 का 4
धारा 2 की उपधारा (9) में है ;
(ढ) ‘‘प्रबंध ननर्देशक’’ से धारा 6 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन
ननयुक्त ननर्देशक अलभप्रेत है ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
573
(ण) ‘‘नामांकन और पाररश्रलमक सलमनत’’ से धारा 15 की उपधारा (1) के
अधीन गठित बोर् ष की नामांकन और पाररश्रलमक सलमनत अलभप्रेत है ;
(त) ‘‘अधधसूचना’’ से राजपत्र में प्रकालशत कोई अधधसूचना अलभप्रेत है और
‘‘अधधसूधचत’’ पर्द का अथ ष तर्दनुसार िगाया जाएगा ;
(थ) ‘‘पेंशन ननधध’’ का वही अथ ष होगा, जो पेंशन ननधध ववननयामक और
2013 का 23 ववकास प्राधधकरण अधधननयम, 2013 की धारा 2 की उपधारा (1) के िंर् (ि) में
उसका है ;
(र्द) ‘‘ववठहत’’ से केंरीय सरकार द्वारा इस अधधननयम के अधीन बनाए गए
ननयमों द्वारा ववठहत अलभप्रेत है ;
(ध) ‘‘ववननयम’’ से इस अधधननयम के अधीन बोर् ष द्वारा बनाए गए
ववननयम अलभप्रेत हैं और इसमें धारा 29 के अधीन ररजव ष बकैं द्वारा बनाए गए
ववननयम भी सजम्मलित हैं ;
1934 का 2 (न) ‘‘ररजव ष बकैं ’’ से भारतीय ररजव ष बकैं अधधननयम, 1934 के अधीन
स्थावपत भारतीय ररजव ष बकैं अलभप्रेत है ;
(प) ‘‘जोखिम प्रबंध सलमनत’’ से धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन गठित
बोर् ष की जोखिम प्रबंध सलमनत अलभप्रेत है ;
(फ) ‘‘अनुसूची’’ से इस अधधननयम से संिग्न कोई अनुसूची अलभप्रेत है ।
(2) उन शब्र्दों और पर्दों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और इस अधधननयम में
1872 का 9 पररभावर्त नहीं हैं ककन्द्तु भारतीय संववर्दा अधधननयम, 1872, भारतीय भागीर्दारी
1932 का 9
1956 का 42 अधधननयम, 1932, प्रनतभूनत संववर्दा (ववननयम) अधधननयम, 1956, भारतीय प्रनतभूनत
1992 का 15
और ववननमय बोर् ष अधधननयम, 1992, बकैं और ववत्तीय संस्थाओं को शोध्य ऋण
1993 का 51
2009 का 6 वसूिी अधधननयम, 1993, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी अधधननयम, 2008 और कंपनी
2013 का 18
अधधननयम, 2013 में पररभावर्त हैं, वही अथ ष होंगे, जो उन अधधननयमों में हैं ।
अध्याय 2
संस्था की स्थापिा और निगमि
3. (1) इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए, एक ववत्तीय ववकास संस्था के रूप संस्था की
स्थापना और
में, जजसे राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं कहा जाएगा, एक सस्ं था
ननगमन ।
स्थावपत की जाएगी ।
(2) संस्था, पूवोक्त नाम से एक ननगलमत ननकाय होगी, जजसका शाश्वत
उत्तराधधकार और एक सामान्द्य मुरा होगी, जजसे इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन
रहते हुए, जंगम और स्थावर र्दोनों प्रकार की संपवत्त का अजनष , धारण और व्ययन
करने और संववर्दा करने की शजक्त होगी तथा उक्त नाम से वह वार्द िाएगी और उस
पर वार्द िाया जाएगा ।
(3) संस्था का मुख्यािय मुम्बई में होगा ।
(4) संस्था, भारत के भीतर या भारत स े बाहर ककसी भी स्थान पर कायाषिय,
शािाएं या अलभकरण स्थावपत कर सकेगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
574
संस्था के प्रयोजन 4. (1) संस्था के, उपधारा (2) और उपधारा (3) में यथा उपवखणतष ववकासात्मक
और उद्र्देश्य ।
और ववत्तीय उद्र्देश्य होंगे ।
(2) संस्था का ववकासात्मक उद्र्देश्य, भारत में र्दीघकष ालिक अनाविंब ववत्तपोर्ण
अवसंरचना के ववकास में सहायता के लिए ननमाषण को सुकर बनाने और सुसंगत
संस्थाओं की अलभवद्ृ धध के लिए केंरीय और राज्य सरकारों, ववननयामकों, ववत्तीय
संस्थाओं, संस्थागत ववननधानकताषओं तथा भारत के भीतर या भारत से बाहर ऐसे
अन्द्य सुसंगत पणधाररयों के बीच समन्द्वय बनाने का होगा ।
(3) संस्था का ववत्तीय उद्र्देश्य, प्रत्यित: या अप्रत्यित: उधार र्देना या ननवेश
करना और भारत में सतत ् आधथकष ववकास का पोर्ण करने की दृजष्ट् से, भारत में या
भागत: भारत में और भागत: भारत स े बाहर अवजस्थत अवसंरचना पररयोजनाओं में
प्राइवे सेक् र के ननवेशकों और संस्थागत ननवेशकों से ननवेश को आकवर्तष करना
होगा ।
प्राधधकृत शेयर 5. (1) संस्था की प्राधधकृत शेयर पूंजी र्दस िरब रुपए होगी, जो प्रत्येक
पूंजी ।
र्दस रुपए के पूणषत: समार्दत्त शेयरों के र्दस हजार करोड़ रुपए से ववभाजजत की जाएगी :
परंतु बोर्,ष शेयरों का अलभठहत या अंककत मूल्य बढा या घ ा सकेगा और ऐसे
मूल्य वग ष में से प्राधधकृत पूंजी को ववभाजजत कर सकेगा, जसै ा वह ववननश्चय करे :
परंतु यह और कक बोर्,ष केंरीय सरकार के परामश ष से, पणू तष : समार्दत्त शेयरों के
सभी मामिों में शेयरों के अध्यधीन प्राधधकृत पूंजी को बढा या घ ा सकेगा ।
(2) संस्था की जारी की गई शेयर पूंजी, ऐसी तारीि को, जो केंरीय सरकार
द्वारा अधधसूधचत ककया जाए, केंरीय सरकार को आबंठ त ककया जाएगा ।
(3) संस्था के शेयर केंरीय सरकार, बहुपिीय संस्थाएं, संप्रभु स्वास््य ननधधयों,
पेंशन ननधधयों, बीमाकताषओं, ववत्तीय संस्थाओं, बकैं ों और ऐसी अन्द्य संस्थाओं द्वारा,
जो ववठहत की जाएं, धाररत ककए जा सकेंगे :
परंतु केंरीय सरकार, सभी समयों पर संस्था के शेयरों का कम स े कम छब्बीस
प्रनतशत धाररत करेगी ।
(4) बोर्,ष केंरीय सरकार के पूवाषनुमोर्दन से अपनी शेयर पूंजी को कम कर
सकेगा, जजसके अन्द्तगतष शेयरों को क्रय द्वारा वापस िेना भी है ।
अध् याय 3
निदेिक बोर् ि और प्रबंिि
ननर्देशक बोर् ष । 6. (1) संस् था का ननर्देशक बोर् ष ननम् नलिखित से लमिकर बनेगा, अथाषत ् :—
(क) केंरीय सरकार द्वारा ररजव ष बकैं के परामश ष से ननयुक् त ककया जाने
वािा एक अध् यि;
(ि) बोर् ष द्वारा ब् यूरो की लसफाररशों पर और ऐसी प्रकक्रया के और ऐसे
अलभकरणों से अनापवत्त के अध् यधीन रहते हुए, जो केंरीय सरकार द्वारा
अवधाररत ककया जाए, ननयुक् त ककया जाने वािा एक प्रबंध ननर्देशक;
(ग) तीन से अनधधक उप प्रबंध ननर्देशक, जजनमें से प्रत् येक बोर् ष द्वारा
ब् यूरो की लसफाररशों पर और ऐसी प्रकक्रया के और ऐस े अलभकरणों से अनापवत्त केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
575
अध् यधीन रहते हुए, जो केंरीय सरकार द्वारा अवधाररत ककया जाए, ननयुक् त
ककए जाएंगे;
(घ) केंरीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाने वाि े र्दो ननर्देशक, जो
केंरीय सरकार के पर्दधारी होंगे;
(ङ) तीन स े अनधधक ननर्देशकों की ऐसी संख्या, जो शेयर धारकों द्वारा
ऐसी रीनत में ननवाषधचत ककए गए हैं, जो ववठहत की जाए, केंरीय सरकार स े
लभन्द्न ऐसा कोई शेयर धारक, जो कुि जारी की गई साधारण अंश पूंजी का र्दस
प्रनतशत या उसस े अधधक धारण करता है, एक ननर्देशक नामननर्देलशत कर
सकेगा ;
(च) नामननर्देशन और पाररश्रलमक सलमनत की लसफाररशों पर बोर् ष द्वारा
ननयुक् त ककए जाने वािे तीन से अनधधक या बोर् ष के ननर्देशकों की कुि संख् या के
एक नतहाई, जो भी उच् चतर हो, ऐसी संख् या में स् वतंत्र ननर्देशक :
परंतु यठर्द शेयर धारकों के साथ जारी साधारण शेयर पूंजी की धनृत की
प्रनतशतता तीन ननर्देशकों के ननवाषचन की अनुज्ञा नहीं र्देती है या शेयर धारकों द्वारा
ननवाषधचत ननर्देशकों द्वारा भार ग्रहण ककए जाने तक, बोर्,ष नामननर्देशन और
पाररश्रलमक सलमनत की लसफाररशों पर बोर् ष द्वारा ननयुक् त ककए जाने वािे तीन से
अनधधक स् वतंत्र ननर्देशकों की ऐसी संख्या को ककसी भी समय सहयोजजत कर सकेगा,
जो शेयर धारकों द्वारा ननवाधषचत ननर्देशकों द्वारा भार ग्रहण करने तक पर्द धारण
करेंगे और ऐसे सहयोजजत स् वतंत्र ननर्देशक ककसी समान संख्य ा में सहयोजन के क्रम में
सेवाननवत्तृ होंगे:
परंतु यह और कक िंर् (ङ) या िंर् (च) में ववननठर्दषष्ट् ननर्देशकों में कम से कम
एक मठहिा होगी ।
(2) प्रबंध ननर्देशक या उप प्रबधं ननर्देशक, बोर् ष के पूणकष ालिक ननर्देशक होंगे ।
(3) कोई व् यजक् त, जो संस् था का वेतन भोगी अधधकारी या अन्द्य कमचष ारी है,
प्रबंध ननर्देशक या उप प्रबंध ननर्देशक के पर्द के लसवाय, बोर् ष के ननर्देशक के रूप में
ननयुक् त नहीं ककया जाएगा ।
(4) अध् यि, बोर् ष की बैिकों की अध् यिता करेगा ।
(5) उपधारा (1) के िंर् (च) के अधीन बोर् ष के स् वतंत्र ननर्देशकों के समावेशन की
ननबंधन और शतें वे होंगी, जो ववठहत की जाएं ।
(6) उपधारा (1) के िंर् (घ) और िंर् (च) के अधीन ननयुक् त ककए गए ननर्देशक
2013 का 18 कंपनी अधधननयम, 2013 के अधीन स् वतंत्र ननर्देशकों को उपिब् ध उन्द् मुजक् तयों के
प्रयोजन के लिए, स् वतंत्र ननर्देशक समझे जाएंगे ।
7. (1) संस् था के काय ष और कारबार का साधारण अधीिण, ननर्देशन और प्रबंधन प्रबंधन ।
बोर् ष में ननठहत होगा, जो उन सभी शजक् तयों का प्रयोग करेगा और वे सभी कायष या
चीजें करेगा, जजनका संस् था द्वारा प्रयोग ककया जाए या जो उसके द्वारा ककए जाएं ।
(2) इस अधधननयम के उपबंधों के अध् यधीन रहते हुए, बोर् ष अपने कृत् यों के
ननवहष न में कारबार के लसद्धातं ों के अनुसार काय ष करेगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
576
शजक् तयों का 8. बोर्,ष साधारण या ववशेर् आर्देश द्वारा, ककसी ननर्देशक या इस अधधननयम के
प्रत् यायोजन ।
अधीन गठित सलमनत या संस् था के ककसी अधधकारी या अन्द्य कमचष ारी को ऐसी शतों
और सीमाओं के अध् यधीन रहते हुए, यठर्द कोई हो, जो आर्देश में ववननठर्दषष्ट् की जाए,
इस अधधननयम के अधीन अपनी ऐसी शजक् तयों और कृत् यों का प्रत्य ायोजन कर सकेगा,
जो वह आवश् यक समझे ।
बोर् ष के अध् यि 9. (1) अध् यि, प्रबंध ननर्देशक, उप प्रबंध ननर्देशक या धारा 6 की उपधारा (1) के
और अन्द् य
िंर् (घ) के अधीन केंरीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ननर्देशकों से लभन्द्न बोर् ष के अन्द्य
ननर्देशकों की
ननर्देशक, ऐसी अवधध के लिए, जो पांच वर् ष स े अधधक का न हो, पर्द धारण करेंगे और
पर्दावधध तथा सेवा
की अन्द् य ननबंधन र्दस वर् ष से अनधधक की संपूण ष पर्दावधध के अध् यधीन रहते हुए पुनननयष ुजक् त के पात्र
और शतें । होंगे :
परंतु प्रबंध ननर्देशक और उप प्रबंध ननर्देशक, क्रमश: पसैं ि वर् ष और बासि वर्ष
की आयु प्राप् त करने के पश् चात ् पर्द धारण नहीं करेंगे ।
(2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी, धारा 6 की उपधारा (1) के
अधीन नामननठर्दषष्ट् या ननयुक् त अध् यि और ननर्देशक, उन्द्ह ें नामननठर्दषष्ट् करने वािे या
ननयुक् त करने वािे प्राधधकारी के प्रसार्दपयतं पर्द धारण करेंगे ।
(3) केंरीय सरकार या शेयर धारकों और स् वतंत्र ननर्देशकों द्वारा नामननठर्दषष्ट्
अध् यि और ननर्देशक, ऐसी फीस और पाररश्रलमक प्राप् त करेंगे, जो ववठहत की जाए:
परंतु इस उपधारा के अधीन संर्देय कोई फीस या पाररश्रलमक को संस् था के
अलभिाभों के साथ नहीं जोड़ा जाएगा ।
(4) प्रबंध ननर्देशक और उप प्रबंध ननर्देशक को संर्देय वेतन और भत्ते बाजार
मानकों द्वारा मागर्दष लशतष नामननर्देशन और पाररश्रलमक सलमनत की लसफाररशों पर
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएंगे ।
(5) अध् यि, प्रबंध ननर्देशक, उप प्रबंध ननर्देशक और धारा 6 की उपधारा (1) के
िंर् (घ) के अधीन केंरीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ननर्देशकों से लभन्द्न बोर् ष के अन्द्य
ननर्देशकों की पर्दावधध और सेवा की अन्द्य ननबंधन और शतें वे होंगी, जो ववठहत की
जाएं ।
(6) इस अधधननयम में ककसी बात के होते हुए भी, ककसी ननर्देशक को, जो केंरीय
सरकार का कोई अधधकारी है, कोई फीस संर्देय नहीं होगी ।
ननर्देशकों की 10. (1) केंरीय सरकार, ककसी ऐसे ननर्देशक को पर्द से ह ा सकेगी—
ननरहषताएं और पर्द
(क) जजसे ठर्दवालिया न्द्य ायननणीत ककया जाता है या ककसी समय ठर्दवालिया
से ह ाया जाना ।
न्द्यायननणीत ककया गया है; या
(ि) जो ननर्देशक के रूप में काय ष करने में शारीररक या मानलसक रूप से
असमथ ष हो गया है; या
(ग) जजसे ककसी ऐसे अपराध के लिए लसद्धर्दोर् िहराया गया है, जजसमें
केंरीय सरकार की राय में नैनतक अधमता अंतवलषित है; या
(घ) जजसने ऐसा ववत्तीय या अन्द्य ठहत अजजषत कर लिया है, जजससे
ननर्देशक के रूप में उसके कृत् यों पर प्रनतकूि प्रभाव पड़ने की संभावना है; याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
577
(ङ) जजसने केंरीय सरकार की राय में अपनी जस् थनत का ऐसे र्दरुु पयोग
ककया है जजससे उसके पर्द पर बने रहने से िोकठहत पर प्रनतकूि प्रभाव पड़ेगा;
या
(च) जजसे ककन्द्ह ीं कारणों से—
(i) सरकार; या
(ii) ककसी बकैं , जजसके अंतगतष भारतीय ररजव ष बकैं या भारतीय स् े
बकैं भी हैं; या
(iii) ककसी िोक ववत्तीय संस् था या राज् य ववत्तीय ननगम; या
(iv) सरकार के स् वालमत् वाधीन या ननयंत्रणाधीन ककसी अन्द्य ननगम,
की सेवा स े ह ाया गया है या पर्दच् युत ककया गया है ।
(2) ककसी ननर्देशक को उपधारा (1) के िंर् (घ) या िंर् (ङ) के अधीन तब तक
नहीं ह ाया जाएगा जब तक कक उसे मामिे में सुनवाई का युजक् तयुक् त अवसर नहीं
ठर्दया गया है ।
(3) कोई ननर्देशक, जो संसद् या ककसी राज् य ववधान-मंर्ि में सर्दस् य के रूप में
ननवाषधचत या नामननठर्दषष्ट् हो जाता है, तो वह यथाजस् थनत, ऐसे ननवाषचन या
नामननर्देशन की तारीि से ननर्देशक नहीं रहेगा ।
(4) इस धारा के अधीन ननरहषताएं या ह ाया जाना—
(क) न्द्य ायननणषयन, र्दंर्ार्देश या आर्देश की तारीि स े तीस ठर्दन के लिए
प्रभावी नहीं होगा ; या
(ि) जहां र्दंर्ार्देश या आर्देश के पररणामस्वरूप ऐसे न्द्य ायननणषयन, र्दंर्ार्देश
या र्दोर्लसद्धध के ववरुद्ध तीस ठर्दन के भीतर कोई अपीि या याधचका र्दाखिि
की जाती है वहां ऐसी तारीि स े जजसको ऐसी अपीि या याधचका का ननप ारा
ककया जाता है, सात ठर्दन की समाजप् त तक प्रभावी नहीं होगी ।
11. (1) धारा 10 में ककसी बात के होते हुए भी,— कनतपय मामिों
में अध् यि और
(i) केंरीय सरकार, ररजव ष बकैं से परामश ष करने के पश्चात,् अध् यि को पर्द
अन्द् य ननर्देशकों
से ह ा सकेगी और ररजक् त को भरने के लिए उसके स् थान पर ककसी अन्द् य का ह ाया
व् यजक् त को ननयुक् त कर सकेगी; जाना ।
(ii) बोर्,ष ब् यूरो स े परामश ष करने के पश्चात,् धारा 6 की उपधारा (1) के
िंर् (ि) या िंर् (ग) या िंर् (च) के अधीन ननयुक् त ककसी ननर्देशक को उसके
पर्द स े ह ा सकेगा और ररजक्त को भरने के लिए उसके स्थ ान पर ककसी अन्द्य
व् यजक् त को ननयुक् त कर सकेगा;
(iii) केंरीय सरकार से लभन्द्न शेयर धारक, जो ऐस े सभी शये र धारकों द्वारा
धाररत शेयर पूंजी के आधे से अन्द्यून सकि धनृत रिते हैं, ऐसे शेयर धारकों के
बहुमत से पाररत संकल् प द्वारा धारा 6 की उपधारा (1) के िंर् (ङ) के अधीन
ननवाषधचत ककसी ननर्देशक को ह ाया जा सकेगा और ररजक् त को भरने के लिए
उसके स् थान पर ककसी अन्द्य व् यजक् त को ननवाषधचत ककया जा सकेगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
578
परंतु कोई व् यजक् त इस उपधारा के अधीन अपने पर्द से तब तक नहीं ह ाया
जाएगा जब तक कक उस े ऐस े ह ाए जान े के ववरुद्ध कारण र्दशाषने का अवसर प्रर्दान
नहीं ककया जाता है ।
(2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी, केंरीय सरकार को, ररजव ष बकैं से
परामश ष करके, यथाजस् थनत, अध् यि, प्रबंध ननर्देशक, उप प्रबंध ननर्देशक या ननर्देशकों को
तीन मास स े अन्द्यून की लिखित सूचना या ऐसी सूचना के बजाय तीन मास का वेतन
और भत्ता प्रर्दान करते हुए धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन ववठहत पर्दावधध की
समाजप् त से पहिे ककसी भी समय, उनकी पर्दावधध समाप् त करने का अधधकार होगा ।
ररजक् त और 12. (1) यठर्द कोई ननर्देशक—
ननर्देशकों द्वारा
(क) धारा 10 में उजल् िखित ककन्द्ह ीं ननरहषताओं के अध् यधीन हो जाता है या
पर्दत् याग ।
धारा 11 के अधीन ह ाया जाता है ; या
(ि) बोर् ष से छुट् ी के त्रबना िगातार तीन या अधधक उसकी बैिकों में
अनुपजस्थत रहता है,
तो उसका पर्द ररक् त हो जाएगा ।
(2) कोई ननर्देशक बोर् ष को लिखित सूचना र्देकर अपना पर्द त् याग सकेगा और
बोर् ष द्वारा ऐसा त् यागपत्र स् वीकार ककए जाने पर या यठर्द ऐसा त् यागपत्र यथाशीघ्र
स् वीकार नहीं ककया जाता है, तो बोर् ष द्वारा उसके प्राप् त ककए जाने से तीन मास के
अवसान पर, ऐसा ननर्देशक अपन े पर्द से ररक् त समझा जाएगा ।
बोर् ष की बैिकें । 13. (1) बोर्,ष ऐसे समय और स् थानों पर बैिक करेगा और अपनी बैिकों के
काय ष संचािन के संबंध में प्रकक्रया के ऐस े ननयमों का पािन करेगा, जो ववननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
(2) बोर् ष की बैिक प्रत्य ेक कैिेंर्र नतमाही में कम से कम एक बार आयोजजत की
जाएगी और प्रत्य ेक वर् ष कम से कम ऐसी चार बैिकें आयोजजत की जाएंगी ।
(3) बोर् ष का अध् यि या प्रबंध ननर्देशक, यठर्द ककसी भी कारण से, वह बैिक में
उपजस् थत होने में असमथ ष है या अध् यि और प्रबंध ननर्देशक र्दोनों के बैिक में उपजस् थत
होने में असमथ ष होने की र्दशा में, इस ननलमत्त अध् यि द्वारा नामननठर्दषष्ट् कोई अन्द् य
ननर्देशक और ऐसे नामननर्देशन के अभाव में, बैिक में उपजस् थत ननर्देशकों में से
ननवाषधचत कोई ननर्देशक बोर् ष के बैिक की अध् यिता करेगा ।
(4) बोर् ष की ककसी बैिक के समि आने वािे सभी प्रश् न, उपजस् थत और मतर्दान
करने वािे ननर्देशकों के बहुमत द्वारा ववननजश् चत ककए जाएंगे और मत बराबर होने की
र्दशा में, अध् यि या उसकी अनुपजस् थनत में अध् यिता करने वािा व् यजक् त ननणाषयक
मत र्देगा ।
(5) उपधारा (4) में यथा उपबंधधत के लसवाय, प्रत् येक ननर्देशक के पास एक मत
होगा ।
ननयुजक् त में त्रुठ 14. (1) बोर् ष या उसकी ककसी सलमनत के ककसी काय ष या कायवष ाही को केवि
से कायों, आठर्द यथाजस् थनत, बोर् ष या सलमनत में ववद्यमान ककसी ररजक् त या उसके गिन में ककसी त्रुठ
का अववधधमान्द् य
के आधार पर प्रश् नगत नहीं ककया जाएगा ।
न होना ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
579
(2) बोर् ष के ननर्देशक के रूप में या उसकी सलमनत के सर्दस् य के रूप में ककसी
व् यजक् त द्वारा सद्भावपूवकष ककया गया कोई काय ष केवि इस आधार पर अववधधमान्द् य
नहीं हो जाएगा कक वह ननर्देशक होने के लिए ननरठहतष था या उसकी ननयुजक् त में कोई
अन्द्य त्रुठ थी ।
15. (1) बोर्,ष एक नामननर्देशन और पाररश्रलमक सलमनत, एक जोखिम प्रबंध बोर् ष की
सलमनत और एक संपरीिा सलमनत का गिन करेगा, जो प्रत्य ेक बहुमत बनाने वािे सलमनतयां।
स् वतंत्र ननर्देशकों के साथ न्द् यूनतम तीन ननर्देशकों से लमिकर बनेगी ।
(2) बोर्,ष एक कायकष ारी सलमनत का गिन करेगा जो ननर्देशकों की ऐसी संख्या से
लमिकर बनेगी, जो आवश् यक समझा जाए ।
(3) संस् था का अध् यि कायकष ारी सलमनत का सर्दस् य नहीं होगा और पहिे वर् ष के
पश्चात ् वह संपरीिा सलमनत या नामननर्देशन और पाररश्रलमक सलमनत का अध्यि नहीं
रहेगा ।
(4) बोर्,ष ऐसी अन्द्य सलमनतयों का गिन कर सकेगा, जैसा वह िीक समझे ।
(5) इस धारा के अधीन गठित कायकष ारी सलमनत या कोई अन्द्य सलमनतयां ऐसे
समय और स् थानों पर बैिकें करेंगी और अपनी बैिकों के काय ष संचािन के संबंध में
प्रकक्रया के ऐसे ननयमों का पािन करेंगी और ऐसे कृत् यों का ननवहष न करेगी, जो
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
16. (1) प्रत्य ेक ननर्देशक, बोर् ष की पहिी बैिक में, जजसमें वह ननर्देशक के रूप में बोर् ष या
सलमनतयों के
भाग िेता है और उसके पश् चात ् प्रत् येक ववत्तीय वर् ष में बोर् ष की पहिी बैिक में या जब
सर्दस् यों द्वारा
कभी पहिे स े ककए गए प्रक नों में कोई पररवतनष होता है, तो ऐसे पररवतनष के पश् चात ्
ठहत का
आयोजजत बोर् ष की पहिी बैिक में, ककसी ननगलमत ननकाय में अपना सरोकार या ठहत, प्रक न ।
जजसके अंतगतष शेयर धारण भी है, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, प्रक करेगा ।
(2) प्रत्य ेक ननर्देशक, जो प्रत्य ितः या अप्रत् यितः ककसी भी तरह, संववर्दा या
िहराव या प्रस् ताववत संववर्दा या िहराव, जो संस् था द्वारा की जाती है या की जानी है,
से संबद्ध या ठहतबद्ध है—
(क) ऐस े ककसी ननगलमत ननकाय के साथ, जजसमें ऐसा ननर्देशक या ककसी
अन्द्य ननर्देशक के साथ सहयोजन में ऐसा ननर्देशक, उस ननगलमत ननकाय के र्दो
प्रनतशत शेयर धारण से अधधक शेयर धारण करता है या उस ननगलमत ननकाय
का संप्रवतकष , प्रबंधक, मुख् य कायपष ािक अधधकारी या न्द्य ासी है ; या
(ि) ककसी फम ष या अन्द्य इकाई के साथ, जजसमें ऐसा ननर्देशक, यथाजस् थनत
भागीर्दार, स् वामी या सर्दस् य है,
बोर् ष या उसकी सलमनत की ककसी बैिक में भाग नहीं िगे ा, जजसमें ऐसी संववर्दा या
िहराव पर ववचार-ववमश ष ककया जाता है या ऐसी संववर्दा या िहराव के संबंध में कोई
अन्द्य ववचार-ववमश ष या चचाष की जाती है और बोर् ष या उसकी सलमनत की बैिक में ऐस े
ववचार-ववमश ष की र्दशा में, यथाजस् थनत, बोर् ष या सलमनत में उसके सरोकार या ठहत कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
580
प्रकृनत का प्रक न होता है:
परंतु जहां कोई ननर्देशक, जो ऐसी संववर्दा या िहराव करते समय इस प्रकार
संबद्ध या ठहतबद्ध नहीं है, यठर्द वह संववर्दा या िहराव ककए जाने के पश् चात,् संबद्ध
या ठहतबद्ध हो जाता है, तो उसके संबद्ध या ठहतबद्ध हो जाने पर अपने सरोकार या
ठहत को तुरंत या उसके इस प्रकार संबद्ध या ठहतबद्ध हो जाने के पश् चात ् आयोजजत
बोर् ष की पहिी बैिक में उस े प्रक करेगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन प्रक न के त्रबना संस् था द्वारा की गई कोई संववर्दा या
िहराव या ऐसे ककसी ननर्देशक द्वारा, जो ऐसी संववर्दा या िहराव में प्रत् यितः या
अप्रत् यितः ककसी भी तरह संबद्ध या ठहतबद्ध है, भाग िेना, संस् था के ववकल्प पर
शून्द् यकरणीय होगा ।
(4) ऐस े कमचष ाररयों को, जजन्द्ह ें बोर्,ष संस् था में ज् येष्ट् ि प्रबधं गठित करने वािा
ववननठर्दषष्ट् करे, बोर् ष को सभी सामग्री, ववत्तीय और वाखणजज् यक संव् यवहार, जजसमें
उनका वैयजक् तक ठहत है जजनसे संस् था के ठहत से मतभेर्द संभाव् य है, का प्रक न करेंगे
और बोर्,ष ऐसे संव् यवहारों पर उनकी ककसी ताजववक सीमा सठहत कोई नीनत ववननलमषत
करेगा और ऐसी नीनत का प्रत्येक तीन वर् ष में कम से कम एक बार पुनवविष ोकन
करेगा ।
स् पष्ट् टीकरर्—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ठहत संघर्,ष ऐसे ननकाय जजनमें
ज् येष्ट् ि प्रबंध व् यजष्ट् या उसके नातेर्दारों के पास शेयरधारण, आठर्द हैं, से वाखणजज् यक
व्यवहार करने वािी संस् था या उसकी ककसी समनुर्ंधगयों या सहायक कंपननयों के
शेयरों से व् यवहार करने से संबंधधत हैं ।
(5) यठर्द कोई व् यजष्ट् , जो एक ननर्देशक है, उपधारा (1) या उपधारा (2) के
उपबंधों का उल्ि ंघन करता है या उपधारा (4) में ननठर्दषष्ट् कोई कमचष ारी ऐस े उपबंधों
का उल् िंघन करता है, तो ऐसा व् यजष्ट् या कमचष ारी एक िाि रुपए तक की शाजस् त के
संर्दाय का र्दायी होगा ।
(6) उपधारा (5) में अंतववष्ट्ष ककसी बात पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, यह
संस् था पर ननभरष होगा कक वह ऐसे ननर्देशक या ककसी अन्द्य कमचष ारी के ववरूद्ध, जो
इस धारा के उपबंधों के उल् िंघन में ऐसी संववर्दा या िहराव ककया है, ऐसी संववर्दा या
िहराव के पररणामस् वरूप उसके द्वारा वहन की गई ककसी हानन की वसूिी के लिए
कायवष ाही करे ।
स् पष्ट् टीकरर्—इस धारा और धारा 19 के प्रयोजनों के लिए, “ननगलमत ननकाय”
पर्द में कोई कंपनी, कंपनी अधधननयम, 2013 की धारा 2 के िंर् (11) में यथा 2013 का 18
पररभावर्त ननगलमत ननकाय, फम,ष ववत्तीय संस् था या अनुसधूचत बकैं या ककसी केंरीय
अधधननयम या राज् य अधधननयम द्वारा या उसके अधीन स् थावपत या गठित पजब् िक
सेक् र उपक्रम और व् यजक् तयों का कोई अन्द्य ननगलमत संगम या व् यजष्ट् ननकाय
सजम् मलित है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
581
अध् याय 4
संस् था के कियाकिाप
17. (1) संस् था, ननम् नलिखित कृत् यों को करेगी और ननम् नलिखित शजक् तयों का संस् था के कृत् य
प्रयोग करेगी, अथाषत ् :— और शजक्त यां ।
(i) अपने कृत् यों का ननष्ट् पार्दन करने के लिए, भारत में या भारत स े बाहर
अवजस्थत समनुर्ंधगयों या संयुक् त उद्यमों या शािाओं से और ऐसी समनुर्ंगी
कंपनी या संयुक् त उद्यम या शािा के साथ ऐसी समनुर्गं ी कंपनी या संयुक् त
उद्यम या शािा का ववत्तपोर्ण करने या उनके ककन्द्ह ीं र्दानयत् वों को प्रनतभूत
करने सठहत कोई िहराव करना या ऐसे अन्द्य िहराव करना, जजन्द्ह ें बोर् ष वांछनीय
समझे ।
(ii) अपने प्रचािन और अवसंरचना ववत्त के िेत्र में िगी हुई ववलभन्द् न
संस् थाओं के प्रचािन में समन्द्व य करना और अवसंरचना ववत्त से संबंधधत
समस् याओं का अध् ययन करने के लिए ववशेर्ज्ञ कमचष ाररवंर्दृ रिना और केंरीय
सरकार, ररजव ष बकैं और अवसंरचना ववत्त के िेत्र में िगी हुई अन्द्य संस् थाओं को
परामश ष के लिए उपिब् ध रहना ;
(iii) ऐसी प्रकृनत की ननधधयों की स् थापना के लिए, जो भारत में या भागत:
भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत अवसंरचना पररयोजनाओं के
1882 का 2 ववत्तपोर्ण में सहायता करेगी, भारतीय न्द्य ास अधधननयम, 1882 के अधीन
न्द्य ासों की स् थापना करना, जजसके अंतगतष भू-संपर्दा ववननधान न्द्य ास और
अवसंरचना ववननधान न्द् यास भी हैं ;
(iv) अवसंरचना ववत्तपोर्ण, जजसके अंतगषत इिैक् राननक और बातचीत से
तय की गयी बाजार अवसंरचना को सुकर बनाना, ववननधानकताष की सुरिा,
अवसंरचना न्द्य ायननणयष न, आठर्द भी है, के लिए बंधपत्रों, ऋणों और व् युत् पन्द्न ों के
लिए गहन और नकर्द बाजार के ववकास में सहायता करना ;
(v) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना पररयोजनाओं को, जजसके अंतगतष उसके प्राप्यों के ननम् नांकन प्रत्यय,
प्रनतभूनतकरण जजसके अंतगतष ननकासी प्रमाणपत्र या प्रत् यि समनुर्देशन, अंतरण
या नवीयन के रूप में या पररयोजना से प्राप्यों द्वारा प्रनतभूत संव् यवहार सठहत
नवोन्द्मेर्ी ववत्तीय साधनों द्वारा उधार र्देना और ववननधान करना भी है ;
(vi) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना पररयोजनाओं को ववत्तीय सहायता प्रर्दान करने के प्रयोजनों के लिए
ककसी अवसंरचना ननधीयन कंपनी या कानूनी ननगम या न्द् यास या ककसी ववत्तीय
संस् था के ऋण और अधधर्दायों का ववस् तार करना ;
(vii) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना पररयोजनाओं के लिए उधार र्देने वािे के द्वारा बढाए गए ववद्यमान
ऋणों का कायभष ार िेना या उनकी पुनववत्तष पूनत ष करना;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
582
(viii) उसके द्वारा प्रर्दत्त ऋणों और अधधर्दायों का प्रनतफि के लिए
प्रनतभूनत सठहत या उसके त्रबना न्द्य ासों को अंतरण करना;
(ix) संस् था द्वारा धाररत ऋणों या अधधर्दायों को अिग रिना और ऋण
बाध् यता, फायर्दाप्रर्द ठहत का न्द्य ास प्रमाणपत्र या अन्द्य लिित के रूप में, जो
चाहे ककसी भी नाम स े ज्ञात हो, इस प्रकार अिग रिे गए ऐसे ऋणों या
अधधर्दायों पर आधाररत प्रनतभूनतयों को जारी करना और उनका ववक्रय करना
तथा ऐसी प्रनतभूनतयों के धारकों के लिए न्द् यासी के रूप में काय ष करना ;
(x) संस् था को जारी की गई प्रनतभूनतयों को समनुर्देलशत करना ;
(xi) ककसी कंपनी या न्द्य ास या रजजस् रीकृत सोसाइ ी या सहकारी सोसाइ ी
या संगम या केंरीय सरकार या ककसी राज् य सरकार या अवसंरचना ववत्तपोर्ण
करने वािी ककसी ववत्तीय संस् था द्वारा जारी या प्रत्याभूत, स् ॉकों, शेयरों,
बंधपत्रों, डर्बेंचर स् ॉकों, ऋण प्रनतभूनतयों, बाध् यताओं और प्रनतभूनतयों,
वाखणजज् यक पत्रों, ननिेप-प्रमाणपत्रों या डर्बेंचरों को भारत में या भागत: भारत में
और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत अवसंरचना पररयोजनाओं के ववत्तपोर्ण को
सुकर बनाने के लिए या अवसंरचना ववत्तपोर्ण के लिए बंधपत्र बाजार को मजबूत
करने को सुकर बनाने के लिए प्रनतश्रुत करना या क्रय, ननम् नांकन, अजनष , धारण
या ववक्रय करना ;
(xii) ऋण के माध् यम से या अन्द्य था, रुपए या ववर्देशी मरु ा र्दोनों में धन
उधार िेना या समुत् थावपत करना या डर्बेंचरों, डर्बेंचर स् ाकों, बंधपत्रों, सभी
प्रकार की बाध् यताओं, बंधकों और प्रनतभूनतयों, चाहे शाश् वत या पयवष सेय हो और
चाहे ववमोचनीय या अन्द्य था हो, के ननगमष और ववक्रय द्वारा धन का संर्दाय
सुननजश् चत करना या उसे न्द्य ास वविेि या अन्द्य था द्वारा संस् था के वचनबंध पर,
जजसके अंतगतष उसकी प्राधधकृत और जारी की गई पूंजी भी है या संस् था या
अन्द्यथा ककसी भी तरह की वतमष ान या भववष्ट् यवती ककसी ववननठर्दषष्ट् संपवत्त और
अधधकार पर भाररत या प्रनतभूत करना ;
(xiii) केंरीय सरकार, अनुसूधचत बकैं ों, ववत्तीय संस् थाओं, पारस् पररक
ननधधयों, व् यजक् तयों के ककसी वग ष और केंरीय सरकार द्वारा अधधसूधचत ककसी
अन्द्य संस् था या प्राधधकरण या संगिन से, ऐसे ननबंधनों और शतों पर जजन पर
सहमनत हो, धन उधार िेना और केवि आजस् त र्दानयत् व असंतुिन के प्रबंधन के
लिए और न कक ककसी अन्द्य कारबार के प्रयोजन के लिए, अल् पावधध ऋण
स् वीकार करना;
(xiv) क्रय या ववक्रय या ऐसे अन्द्य ववर्देशी ववननमय में व्यवहार करना, जो
उसके कृत् यों के ननवहष न के लिए आवश् यक हो ;
(xv) भागीर्दारी प्रमाणपत्र या ऋण प्रनतभूनतयां जारी करना तथा अवसंरचना
ववकास और ववत्तपोर्ण में िगी हुई कंपननयों और अन्द् य इकाईयों के ऋण
संववभाग के प्रनतभूनतकरण की अलभवद्ृ धध करना और उसे सुकर बनाना तथा
प्रत्याभूत प्राप्यों के लिए द्ववतीयक बाजार का सजृ न करना और ववकास करना,
जजसके अंतगतष ककसी मध् यवती के रूप में काय ष करना भी है ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
583
(xvi) प्रनतभूनत पर या प्रनतभनूत के त्रबना धन उधार र्देना और न्द्य ास में
धनृत पर अलभर्दाय र्देना, ककन्द् हीं प्रनतभूनतयों या ववननधानों को कमीशन पर या
अन्द्य था जारी करना, क्रय करना, ववक्रय करना या अन्द्य था अजजतष करना या
उनका ननप ारा करना या इस प्रकार के ककसी प्रयोजन के लिए अलभकताष के रूप
में काय ष करना;
(xvii) पररयोजनाओं के पूरे जीवन चक्र के अवसंरचना िेत्र में काय ष करने
वािी कंपननयों को उधार र्देना या उनमें ववननधान करना या उनकी ववृत्तक या
तकनीकी सेवाएं अजजतष करना;
(xviii) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर
अवजस् थत अवसंरचना पररयोजनाओं के ववत्तपोर्ण के लिए प्रत्य य वद्ृ धध सुववधाओं
को ववस् तार रूप में सजम्मलित करते हुए अवसंरचना कंपननयों और ववत्तीय
संस् थाओं द्वारा जारी ऋण प्रनतभूनतयों से संबंधधत संव् यवहारों या सेवाओं के
संबंध में एक मध् यवती के रूप में काय ष करना;
(xix) अवसंरचना ववत्तपोर्ण के िेत्र में प्रभावी वववार्द समाधान के लिए
ववलभन्द्न सरकारी प्राधधकाररयों और पणधाररयों के साथ बातचीत या ववचार-ववमशष
में सकक्रय भूलमका ननभाना ;
(xx) राष्ट् रीय और अंतराषष्ट् रीय स्रोतों से, जजसके अंतगतष ववश् व बकैं , न्द् य ू
र्ेविपमें बकैं , जापान इं रनेशनि कोआपरेशन एजेंसी, यूनाइ ेर् स् े एजेंसी
फार इं रनेशनि र्ेविपमें , क्रेडर् ें स् ेल् फर वाइर्रराऊफ्ब, यूरोवपयन इंवेस् में
बकैं , एलशयन र्ेविपमें बकैं , इं रनेशनि फाइनेंस कॉरपोरेशन और अन्द् य संगिन
तथा अलभकरण भी हैं, अनुर्दान, सहायता, सहायककयां, ननधधयां या संर्दान, आठर्द
प्राप् त करने के लिए आवेर्दन करना, स् वीकार करना, प्रशासन करना और प्रबंध
करना तथा अवसंरचना ववकास पररयोजनाओं में ववर्देशी भागीर्दारी को सुकर
बनाना;
(xxi) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना पररयोजनाओं का ननधीयन करने वािी ककसी ववत्तीय संस् था द्वारा
ऋण या ककए गए प्रत् यय िहराव या जारी ककए गए डर्बेंचर या बंधपत्र के लिए
प्रत्य ाभूनत, आश् वासन पत्र या प्रत्य य पत्र जारी करना;
(xxii) ररजव ष बकैं से मांग पर या उस तारीि से, जब ऐसा धन स् ॉक,
ननधधयों या प्रनतभूनतयों (स् थावर संपवत्त से लभन्द्न ) की, जजनमें कोई न्द्यासी, भारत
में तत् समय प्रवत्तृ ककसी ववधध द्वारा न्द्य ास धन का ववननधान करने के लिए
प्राधधकृत है, प्रनतभूनत के ववरुद्ध इस प्रकार धन उधार लिया जाता है, नब् बे ठर्दन
से अनधधक की ननयत अवधध की समाजप् त पर प्रनतसंर्देय धन उधार िेना;
(xxiii) उधार लिए जाने की तारीि से पांच वर् ष के भीतर पररपक् व होने
वािे सद्भाववक वाखणजज् यक या व् यापार संव् यवहारों से, उद्भूत ववननमयपत्र या
वचनपत्र के ववरुद्ध ररजव ष बकैं से धन उधार िेना;
(xxiv) ककसी ऋण को, जजस े उधार िेने वािे तक ववस् ततृ ककया गया है,
साधारण शेयर में पररवनततष करना; औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
584
(xxv) ककसी अन्द्य प्रकार का कारबार या ककसी अन्द्य प्रकार के कक्रयाकिाप
करना, जजसे केंरीय सरकार ररजव ष बकैं के साथ परामश ष करके प्राधधकृत करे ।
(2) उपधारा (1) को अग्रसर करने में, संस् था या तो स् वयं या अपनी ककसी
समनुर्ंगी या संयुक् त उद्यम के माध् यम से या ककसी अन्द्य के सहयोजन से
ननम् नलिखित कृत् यों का ननष्ट् पार्दन कर सकेगी, अथाषत ् :—
(क) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना ववकास पररयोजनाओं में केंरीय सरकार, पजब् िक सेक् र, प्राइवे
सेक् र और भारत या ववर्देश से संस् थागत ववननधानकताषओं की भागीर्दारी को
संचालित करना और उस े सुकर बनाना ;
(ि) प्रलशिण के लिए, सूचना के प्रसार और अनुसंधान की वद्ृ धध करने के
लिए, जजसके अंतगतष अवसंरचना ववकास के िेत्र में अध् ययन, अनुसंधान,
तकनीकी-आधथकष और अन्द्य सवेिण कराना भी है, सुववधाएं प्रर्दान करना और
उक् त प्रयोजनों के लिए वह ऋण या अधधर्दाय या अनुर्दान, जजसके अंतगतष
अध् येताववृत्त के लिए उपबंध के माध् यम से अनुर्दान भी हैं, र्दे सकेगा और ककसी
संस् था की अध् यिता करना;
(ग) अवसंरचना ववकास कक्रयाकिापों में िगे हुए ककसी व् यजक् त को
तकनीकी, ववधधक, ववपणन और प्रशासननक सहायता प्रर्दान करना;
(घ) अवसंरचना ववकास, पररयोजना संरचना, पूंजी संरचना या प्रवतनष के
लिए पश् चातवती प्रचािन और भारत में या भारत से बाहर संबंधधत अन्द् य मामिों
के िेत्र में परामशी सेवाएं प्रर्दान करना;
(ङ) ककन्द्ह ीं डर्बेंचरों, डर्बेंचर स् ॉक या अन्द्य प्रनतभूनतयों या बाध् यताओं को
गठित करने वािे या उन्द्ह ें सुननजश् चत करने वािे ककन्द् हीं वविेिों के न्द्य ासी के रूप
में काय ष करना और कोई अन्द्य न्द्य ास प्रारंभ करना और उसका ननष्ट् पार्दन करना
तथा ननष्ट् पार्दक, प्रशासक, प्रापक, कोर्ाध् यि, अलभरिक और न्द्य ास ननगम का
पर्द ग्रहण करना और उनकी शजक् तयों का प्रयोग करना;
(च) ककसी उपक्रम का अजनष करना, जजसके अंतगतष ककसी संस् था का ऐसा
कारबार, आजस् तयां और र्दानयत् व भी हैं जजनका मुख् य उद्र्देश् य भारत में या
भागत: भारत में और भागत: भारत स े बाहर अवजस् थत पररयोजनाओं के लिए
अवसंरचना ववत्तपोर्ण की वद्ृ धध करना या उसका ववकास करना है;
(छ) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना पररयोजनाओं और सुववधाओं की वद्ृ धध, ववत्तपोर्ण और ववकास के
प्रयोजन के लिए समुधचत ववत्तीय लिितों के ववकास और प्रसार, सभी प्रकृवत्त के
ऋणों और अधधर्दायों के परक्राम् य और संसाधनों के संग्रहण के लिए स् कीमें
ववननलमतष करने के माध् यम से ववत्तीय मध् यवती के रूप में काय ष करना;
(ज) भारत में या भागत: भारत में और भागत: भारत से बाहर अवजस् थत
अवसंरचना पररयोजनाओं के प्रस् तावकों और अवसंरचना पररयोजनाओं में
ववननधानकताषओं के साथ प्रस् तावों की संरचना करना और करारों पर बातचीत
करना;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
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(झ) भारत में या भारत से बाहर के ककसी बकैं में कोई िाता िोिना या
ककसी अलभकरण के साथ िहराव करना या भारत में या भारत से बाहर के ककसी
बकैं या अन्द्य संस् था के अलभकताष या सम्पकी के रूप में काय ष करना; और
(ञ) ऐसे अन्द्य काय ष या चीजें करना जो इस अधधननयम या तत् समय प्रवत्तृ
ककसी अन्द्य ववधध के अधीन उसकी शजक् तयों का प्रयोग करने या उसके कतव्ष यों
का ननवहष न करने का आनुर्ंधगक या पाररणालमक हो, जजसके अंतगतष उसकी
ककन्द्ह ीं आजस् तयों का ववक्रय या अंतरण भी है ।
(3) केंरीय सरकार, संस् था द्वारा उसस े अनुरोध ककए जाने पर संस् था द्वारा जारी
ककए गए बंधपत्रों, डर्बेंचरों और ऋणों को प्रत्य ाभूत कर सकेगी जजसस े मूि का
प्रनतर्दाय और ब् याज का संर्दाय ऐसी र्दर, ननबंधनों और शतों पर ककया जा सके, जजस
पर केंरीय सरकार सहमत हो ।
18. (1) संस् था, अपने स्वयं के बंधपत्रों या डर्बेंचरों की प्रनतभूनत पर कोई ऋण प्रनतवर्द्ध
कारबार ।
या अधधर्दाय नहीं र्देगी ।
(2) संस् था, ककसी ऐसे व् यजक् त या व् यजक् त-ननकाय को, जजसमें संस् था का कोई
ननर्देशक स् वत् वधारी, भागीर्दार, ननर्देशक, कमचष ारी या प्रत्य ाभूनत-र्दाता है या जजसमें
संस् था के एक या अधधक ननर्देशक कोई सारवान ् ठहत रिते हैं, कोई ऋण या अधधर्दाय
नहीं र्देगी ।
(3) उपधारा (2) ककसी ऐसे उधार िेने वािे पर िागू नहीं होगी यठर्द संस् था का
कोई ननर्देशक, संस् था या केंरीय सरकार द्वारा ऐस े उधार िेने वािे के बोर् ष में ननर्देशक
के रूप में नामननठर्दषष्ट् ककया जाता है या संस् था द्वारा ऐस े उधार िेने वािे में धाररत
शेयरों के आधार पर ऐसे उधार िेने वािे को बोर् ष में ननवाषधचत ककया जाता है ।
स् पष्ट् टीकरर्—इस धारा के प्रयोजन के लिए, ककसी उधार िेने वािे के संबंध में
“सारवान ् ठहत” से संस् था के एक या अधधक ननर्देशकों द्वारा या कंपनी अधधननयम,
2013 का 18 2013 की धारा 2 के िंर् (77) में यथापररभावर्त ऐसे ननर्देशक के ककसी नातेर्दार
द्वारा उधार िेने वाि े के शेयर में या तो एकि रूप में या साथ-साथ धाररत फायर्दाप्रर्द
ठहत अलभप्रेत है और उस पर समार्दत्त सकि रकम या तो पचास िाि रुपए से अधधक
या उधार िेने वाि े की समार्दत्त शेयर पूंजी का र्दो प्रनतशत, जो भी कम हो या ऐसी
अन्द्य सीमा है, जो ववठहत की जाए ।
19. (1) बोर् ष की सम्मनत के त्रबना और ऐसी शतों के अधीन रहते हुए, जो संबंधधत पिकार
संव्यवहार ।
ववठहत की जाए, संस्था ककसी संबंधधत पिकार के साथ ननम्नलिखित के संबंध में कोई
संववर्दा या िहराव नहीं करेगी—
(क) ककसी भी माि या सामधग्रयों का ववक्रय, क्रय या पूनत ष करना ;
(ि) ककसी भी ककस्म की सपं वत्त का ववक्रय या अन्द्यथा ननप ान या क्रय
करना ;
(ग) ककसी भी ककस्म की संपवत्त को पट् े पर र्देना ;
(घ) ककन्द्हीं सेवाओं का िेना या प्रर्दान करना ;
(ङ) माि, सामधग्रयों, सेवाओं या संपवत्त का क्रय या ववक्रय करने के लिए
ककसी अलभकताष की ननयुजक्त करना ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
586
(च) ऐस े संबंधधत पिकार की संस्था में, उसकी समनुर्ंधगयों या संयुक्त
उद्यमों या सहयोजजत कंपननयों में ककसी पर्द या िाभ के स्थान पर ननयुजक्त
करना ;
(छ) संस्था की ककन्द्हीं प्रनतभूनतयों या उसकी व्युत्पजन्द्नयों के अलभर्दान की
हामीर्दारी करना :
परंतु कोई संववर्दा या िहराव, शेयरधारकों की साधारण बैिक में पूव ष अनुमोर्दन के
त्रबना नहीं ककया जाएगा, जजसमें ऐसी धनरालशयों, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की
जाए, से अधधक का संव्यवहार अंतवलषित है :
परंतु यह और कक कोई शेयरधारक ऐसी साधारण बैिक में ककसी संववर्दा या
िहराव, जो संस्था द्वारा ककया जाए, का अनुमोर्दन करने के लिए मत नहीं र्देगा, यठर्द
ऐसा शेयरधारक संबंधधत पिकार है :
परंतु यह भी कक इस उपधारा की कोई बात, संस्था द्वारा संव्यवहारों स े लभन्द्न
कारबार के अपने साधारण अनुक्रम में ककए गए ककन्द्हीं संव्यवहारों, जो आसजन्द्नक के
आधार पर नहीं है, को िागू नहीं होगी :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक के अधीन अनुमोर्दन की आवश्यकता, ऐसे
संव्यवहारों के लिए िागू नहीं होगी, जो संस्था और उसके पूणतष या स्वालमत्वाधीन
समनुर्ंगी, यठर्द कोई हो, जजसके ववत्तीय वववरणों को संस्था के साथ समेककत ककया
जाता है और अंगीकार ककए जाने के लिए साधारण बैिक में शेयरधारकों के समि रिा
जाता है, के बीच ककए जाते हैं ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस उपधारा में,—
(क) “पर्द या िाभ का स्थान” पर्द से कोई ऐसा पर्द या स्थान अलभप्रेत है—
(i) जहां ऐसा पर्द या स्थान ककसी ननर्देशक द्वारा धारण ककया जाता
है, यठर्द उसे धारण करने वािा ननर्देशक संस्था स े उस पाररश्रलमक का,
जजसका वह ननर्देशक के रूप में हकर्दार है, वेतन, फीस, कमीशन,
पररिजब्धयां, ककसी भा क मुक्त आवास या अन्द्यथा से अधधक पाररश्रलमक
के रूप में कुछ भी प्राप्त करता है ;
(ii) जहां ऐसा पर्द या स्थान ननर्देशक से लभन्द्न ककसी व्यजष्ट् या
ककसी फम,ष प्राइवे कंपनी या अन्द्य ननगलमत ननकाय द्वारा धारण ककया
जाता है, यठर्द वह व्यजष्ट् , फम,ष प्राइवे कंपनी या ननगलमत ननकाय, जो
उसे धारण कर रहा है, सस्ं था से पाररश्रलमक, वेतन, फीस, कमीशन,
पररिजब्धयां, भा क मुक्त आवास या अन्द्यथा के रूप में कुछ भी प्राप्त
करता है ;
(ि) “आसजन्द्नक संव्यवहार” पर्द स े र्दो संबंधधत पिकारों के बीच का ऐसा
कोई संव्यवहार अलभप्रेत है, जो इस प्रकार स े संचालित ककया जाता है, मानो व े
संबंधधत नहीं थे, जजससे ठहत का कोई ववरोध न हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन की गई प्रत्येक संववर्दा या िहराव को, शेयरधारकों को
बोर् ष द्वारा की गई ररपो ष में ऐसी संववर्दा या िहराव करने के न्द्यायोधचत्य के साथ
ननठर्दषष्ट् ककया जाएगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
587
(3) जहां कोई संववर्दा या िहराव, ककसी ननर्देशक या ककसी कमचष ारी द्वारा बोर् ष
की सहमनत या उपधारा (1) के अधीन शेयरधारकों की साधारण बैिक में संकल्प द्वारा
अनुमोर्दन अलभप्राप्त ककए त्रबना ककया जाता है और यठर्द इसका, यथाजस्थनत, बोर् ष या
शेयरधारकों द्वारा ककसी बैिक में उस तारीि से तीन मास के भीतर, जजसमें ऐसी
संववर्दा या िहराव ककया गया था, अनुसमथनष नहीं ककया जाता है, तो ऐसी संववर्दा या
िहराव, यथाजस्थनत, बोर् ष या शेयरधारकों के ववकल्प पर शन्द्ू यकरणीय होगा और यठर्द
संववर्दा या िहराव ककसी ननर्देशक से संबंधधत पिकार के साथ है या ककसी अन्द्य
ननर्देशक द्वारा प्राधधकृत ककया गया है, तो संबंधधत ननर्देशक संस्था की उसके द्वारा
उपगत ककसी हानन के लिए िनतपूनत ष करेगा ।
(4) उपधारा (3) में अंतववष्ट्ष ककसी बात पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, संस्था
ककसी ननर्देशक या ककसी अन्द्य कमषचारी के ववरुद्ध ऐसी संववर्दा या िहराव के
पररणामस्वरूप हुई ककसी हानन की वसिू ी के लिए कायवष ाही करेगी, जजसने इस धारा के
उपबंधों के उल्िंघन करते हुए ऐसी संववर्दा की थी या िहराव ककया था ।
(5) संस्था का कोई ननर्देशक या कमचष ारी, जजसने इस धारा के उपबंधों के
उल्िंघन में कोई संववर्दा या िहराव ककया था या करने के लिए प्राधधकृत ककया था, तो
वह पच्चीस िाि रुपए तक की धनरालश की शाजस्त का सर्दं ाय करने का र्दायी होगा ।
20. (1) संस्था के काय ष ननष्ट्पार्दन का पुनवविष ोकन, केंरीय सरकार द्वारा ननयुक्त संस्था के काय ष
ननष्ट्पार्दन का
ककए जाने वािे ककसी बाह्य अलभकरण द्वारा प्रत्येक पांच वर् ष में एक बार ककया
पुनवविष ोकन ।
जाएगा ।
(2) बाह्य अलभकरण, धारा 4 में यथा उपवखणतष संस्था के प्रयोजन और उद्र्देश्यों
के संबंध में सस्ं था के काय ष ननष्ट्पार्दन का वपछिे पांच वर् ष का पुनवविष ोकन करेगा और
ऐसे मुख्य काय ष ननष्ट्पार्दन उपर्दशकष ों को ठहसाब में िेगा, जो ववठहत ककए जाएं ।
(3) बाह्य अलभकरण, अपने ननष्ट्कर्ों की एक ररपो ष बोर् ष को प्रस्तुत करेगा, जो
की गई कारषवाई, यठर्द कोई हो, के साथ उसकी एक प्रनत ऐसी ररपो ष के अनुसरण में
ररपो ष की प्राजप्त की तारीि स े तीन मास की अवधध के भीतर केंरीय सरकार को
भेजेगा ।
अध्याय 5
सरकारी अिुदाि, प्रत्याभूनतयां और अन्य ररयायतें
21. (1) केंरीय सरकार, नकर्द या ववपणीय सरकारी प्रनतभूनतयों के रूप में अनुर्दान और
अलभर्दाय ।
अनुर्दान या अलभर्दाय के माध्यम से, जब कभी आवश्यक हो, संस्था की सहायता कर
सकेगी ।
(2) पूवगष ामी की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, केंरीय सरकार, संस्था
की स्थापना से पहिे ववत्तीय वर् ष की समाजप्त तक, नकर्द या ववपणीय सरकारी
प्रनतभूनतयों के रूप में संस्था को पांच हजार करोड़ रुपए की रकम का अनुर्दान या
अंशर्दान करेगी ।
22. सरकार, 0.1 प्रनतशत से अनधधक फीस की ररयायती र्दर ववठहत कर सकेगी, सरकारी
प्रत्याभूनत की
जजस पर सरकारी प्रत्याभूनत का ववस्तार संस्था पर, बहुपिीय संस्थाओं, संप्रभू संपर्दा
ररयायती र्दर ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
588
ननधधयों और ऐसी अन्द्य ववर्देशी संस्थाओं से, जो ववठहत की जाएं, उधार िेने के लिए
ककया जा सकेगा ।
बचाव िागत । 23. ववननमय र्दरों में ककन्द्हीं उतार-चढावों से संस्था को अिग करने के लिए
ऋणों और अधधर्दायों को प्रर्दान करने या उसका पुनसर्दं ाय करन े के प्रयोजनों के लिए
संस्था द्वारा ववर्देशी मुरा को उधार िेने के संबंध में बचाव िागत की प्रनतपूनत ष केंरीय
सरकार द्वारा भागत: या पूणतष : की जा सकेगी ।
अध्याय 6
िेखा, िेखापरीक्षा और ररपोटि
संस्था को उद्भूत 24. (1) संस्था, एक आरक्षित ननधध की स्थापना करेगी, जजसमें संस्था को
होने वािे िाभों
उद्भूत होने वािे वावर्कष िाभों में से ऐसी धनरालशयों का अंतरण ककया जा सकेगा,
का आरक्षित ननधध
जजसे बोर् ष िीक समझे :
में व्ययन ।
परंतु इस उपधारा के अधीन अंतररत की जाने वािी धनरालशयां, संस्था को
उद्भूत होने वािे वावर्कष िाभों के बीस प्रनतशत से कम नहीं होंगी ।
(2) र्ूबंत और शंकास्पर्द ऋणों, आजस्तयों का अवियण और अन्द्य सभी ववर्य,
जजनके लिए उपबंध ककया जाना आवश्यक या समीचीन है या जजनके लिए बकैं कारों
द्वारा प्राय: उपबंध ककया जाता है और उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् आरक्षित ननधध के लिए
उपबंध ककए जाने के पश्चात ् और िाभ के एक भाग को ऐसी अन्द्य आरक्षिनतयों या
ननधधयों में अंतररत ककए जाने के पश्चात,् जो समुधचत समझी जाएं, बोर् ष अपने शुद्ध
िाभ में स े िाभांश का प्रस्ताव कर सकेगा ।
तुिनपत्र और 25. (1) संस्था का तुिनपत्र और िेिा ऐसे प्ररूप और रीनत में तैयार ककए
िेिाओं का तैयार जाएंगे, जो ववठहत की जाए ।
ककया जाना ।
(2) बोर्,ष संस्था की बठहयों और िेिाओं को प्रत्येक वर्ष की 31 माच ष को या
ऐसी अन्द्य तारीि को, जो बोर् ष द्वारा अवधाररत ककया जाए, बंर्द करवाएगा और तुिन
करवाएगा ।
िेिापरीिा । 26. (1) संस्था के िेिाओं की िेिापरीिा, कंपनी अधधननयम, 2013 की धारा 2013 का 18
141 की उपधारा (1) के अधीन िेिापरीिकों के रूप में काय ष करने के लिए सम्यक्
रूप से अठहतष िेिापरीिकों द्वारा की जाएगी, जजनकी ननयुजक्त संस्था द्वारा
शेयरधारकों की साधारण बैिक में, ररजव ष बकैं द्वारा अनुमोठर्दत िेिापरीिकों के पैनि
में से ऐसी अवधध और ऐसे पाररश्रलमक पर, जो ररजव ष बकैं ननयत करे, की जाएगी ।
(2) िेिापरीिकों को संस्था के वावर्कष तुिनपत्र की एक प्रनत प्रर्दाय की जाएगी
और उनका यह कतव्ष य होगा कक वह िेिाओं और उससे संबंधधत वाउचरों के साथ
उसकी जांच करें और उन्द्हें संस्था द्वारा रिी गई सभी बठहयों की एक सूची पररर्दत्त की
जाएगी और उनकी सभी युजक्तयुक्त समय पर, संस्था की बठहयों, िेिाओं, वाउचरों
और अन्द्य र्दस्तावेजों तक पहुंच होगी ।
(3) िेिापरीिक ऐसे िेिाओ ं के संबंध में, संस्था के ककसी ननर्देशक या ककसी
अधधकारी या अन्द्य कमचष ारी की जांच कर सकेंगे और वह बोर् ष या अधधकाररयों याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
589
संस्था के अन्द्य कमचष ाररयों से ऐसी सूचना और स्पष्ट् ीकरण की अपेिा करने के
हकर्दार होंगे, जैसा वह अपने कतव्ष यों के अनुपािन के लिए आवश्यक समझे ।
(4) िेिापरीिक संस्था को वावर्कष तुिनपत्र और उनके द्वारा जांच ककए गए
िेिाओं पर एक ररपो ष र्देंग े तथा ऐसी प्रत्येक ररपो ष में वे यह कथन करेंगे कक क्या
उनकी राय में तुिनपत्र पूण ष है और सभी आवश्यक ववलशजष्ट् यों को अंतववष्ट्ष करते हुए
उधचत और िीक प्रकार से तुिनपत्र तैयार ककया गया है, जजससे संस्था के कायों का
सही और उधचत दृश्य का प्रर्दशनष ककया जा सके और यठर्द उन्द्होंने बोर् ष या ककसी
अधधकारी या संस्था के अन्द्य कमचष ारी से ककसी स्पष्ट् ीकरण या सूचना की मांग की थी
तो क्या वह र्दी गई है और क्या वह समाधानप्रर्द है ।
(5) संस्था, केंरीय सरकार और ररजव ष बकैं को उस तारीि से चार मास के
भीतर, जजसको िेिाओं को बर्दं ककया जाता है और उनका तुिन ककया जाता है, उनके
तुिनपत्र और िेिाओं की प्रनत सठहत िेिापरीिकों की ररपो ष की एक प्रनत और
सुसंगत वर् ष के र्दौरान संस्था के कायकष रण पर एक ररपो ष प्रस्तुत करेगी तथा केंरीय
सरकार उसकी प्राजप्त के पश्चात ् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि उसे रिेगी ।
27. संस्था, केंरीय सरकार और ररजव ष बकैं को समय-समय पर ऐसी वववरखणयां वववरणी और
ररपो ष ।
प्रस्तुत करेगी, जैसा केंरीय सरकार या ररजव ष बकैं अपेिा करे ।
अध्याय 7
प्रकीर् ि
28. (1) संस्था स े पुन: ववत्तपोर्ण के लिए ककसी ववत्तीय संस्था द्वारा प्राप्त न्द्यास में धाररत
की जाने वािी
ककन्द्हीं धनरालश को, संस्था द्वारा अनुर्दत्त सौकय ष सीमा तक और बकाया शेर् को संस्था
प्राप्य रालशया।ाँ
के लिए न्द्यास के रूप में ववत्तीय संस्था द्वारा प्राप्त ककया गया समझा जाएगा तथा
तर्दनुसार उनका ऐसी ववत्तीय संस्था द्वारा संस्था को संर्दाय ककया जाएगा ।
(2) जहां संस्था द्वारा ककसी ववत्तीय संस्था को कोई सौकय ष अनुर्दत्त ककया जाता
है, वहां ककसी ऐसे संव्यवहार के मद्धे ऐसी ववत्तीय संस्था द्वारा धाररत सभी
प्रनतभूनतयां या जो धाररत की जा सकेंगी, जजनकी बाबत ऐसा सौकय ष अनुर्दत्त ककया
गया है, ऐसी ववत्तीय संस्था द्वारा न्द्यास के रूप में संस्था के लिए धाररत की जाएंगी ।
29. (1) कोई व्यजक्त, जो इस अधधननयम के अधीन स्थावपत संस्था के अन्द्य ववकास
ववत्तीय संस्था
अनतररक्त, ककसी ववकास ववत्तीय संस्था की स्थापना करने की वांछा करता है, वह
की स्थापना ।
अनुज्ञजप्त के लिए ररजव ष बकैं को आवेर्दन करेगा ।
(2) ररजव ष बकैं , केंरीय सरकार के परामश ष से ऐसे मानर्दंर्, ननबंधनों और शतों के
अधीन रहते हुए, जो ववननयमों द्वारा ररजव ष बकैं ववननठर्दषष्ट् करें, अनुज्ञजप्त प्रर्दान कर
सकेगा ।
(3) कोई संस्था, जजसे उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञजप्त प्रर्दान की जाती है
1934 का 2 वह यथाजस्थनत, भारतीय ररजव ष बकैं अधधननयम, 1934 या बकैं कारी ववननयम
1949 का 10 अधधननयम, 1949 के उपबंधों के अध्यधीन होगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
590
(4) ररजव ष बकैं द्वारा बनाए गए ववननयम, इस अधधननयम के अधीन स्थावपत
संस्था को उस सीमा तक िाग ू होंगे, जो इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हो ।
अधधकारी और 30. (1) संस्था, अपने कृत्यों के र्दि अनुपािन के लिए उतनी संख्या में
कमचष ारी ।
अधधकाररयों और अन्द्य कमचष ाररयों की ननयुजक्त कर सकेगी, जो वह आवश्यक या
वांछनीय समझे और सेवा में उनकी ननयुजक्त की ननबंधनों और शतों को अवधाररत कर
सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन ननयुक्त संस्था के अधधकाररयों और अन्द्य कमचष ाररयों
के कतव्ष य और आचरण, ननबंधन और सेवा की अन्द्य शत,ें जजसके अंतगतष उनके वेतन
और भत्ते तथा उनके फायर्दे के लिए भववष्ट्य ननधध या ककसी अन्द्य ननधध की स्थापना
और अनुरिण भी है, वे होंगे, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए :
परंतु अधधकाररयों और कमषचाररयों को संर्देय वेतन और भत्तों का अवधारण,
बाजार मानकों द्वारा मागर्दष लशतष नामननर्देशन और पाररश्रलमक सलमनत द्वारा ककया
जाएगा ।
(3) संस्था, ककसी अधधकारी या अपने कमचष ाररवंर्दृ के ककसी सर्दस्य को ऐसी
अवधध के लिए और ऐसे ननबंधनों और शतों पर, जो अवधाररत की जाए, ककसी अन्द्य
संस्था में, जजसके अंतगतष कोई अवसंरचना ववत्त या ववकास संस्था भी है, तैनात कर
सकेगी ।
(4) संस्था, ककसी संस्था से, जजसके अंतगषत कोई अवसंरचना ववत्त या ववकास
संस्था भी है, ककसी अधधकारी या अन्द्य कमचष ारी को ऐसी अवधध के लिए और ऐस े
ननबंधनों और शतों पर, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं, प्रनतननयुजक्त पर
प्राप्त कर सकेगी या िे सकेगी ।
(5) इस धारा में अंतववष्ट्ष कोई बात, संस्था को ककसी अधधकारी या अपने
कमचष ाररवंर्दृ के ककसी सर्दस्य को ककसी सस्ं था में ऐस े वते न, पररिजब्धयों या अन्द्य
ननबंधनों और शतों पर तैनात करने के लिए सशक्त नहीं करेगी, जो उसके लिए उसस े
या उनसे जजसका वह ऐसी प्रनतननयुजक्त से िीक पूव ष हकर्दार है, कम अनुकूि है ।
केंरीय सरकार की 31. (1) केंरीय सरकार, अधधसूचना द्वारा, इस अधधननयम के उपबंधों को
ननयम बनाने की
कायाषजन्द्वत करने के लिए ननयम बना सकेगी ।
शजक्त ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ाि े
त्रबना, ऐसे ननयम, ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे,
अथाषत ् :—
(क) व े संस्थाएं, जो धारा 5 की उपधारा (3) के अधीन सस्ं था के शेयर को
धारण कर सकेंगी ;
(ि) धारा 6 की उपधारा (1) के िंर् (ङ) के अधीन शये रधारकों द्वारा
ननर्देशकों का चयन करने की रीनत ;
(ग) धारा 6 की उपधारा (5) के अधीन बोर् ष में स्वतंत्र ननर्देशकों के
समावेशन की ननबंधन और शतें ;
(घ) उपधारा (3) के अधीन स्वतंत्र ननर्देशकों की बाबत फीस और प्रनतपूनत षअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
591
तथा धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन अध्यि, प्रबंध ननर्देशक, उप प्रबंध
ननर्देशक और बोर् ष के अन्द्य ननर्देशकों की पर्दावधध तथा सवे ा के अन्द्य ननबंधन
और शत ें ;
(ङ) धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन बोर् ष और सलमनत के सर्दस्यों
द्वारा ठहत का प्रक न करने की रीनत ;
(च) धारा 18 की उपधारा (3) के स्पष्ट् ीकरण के अधीन संस्था के
ननर्देशकों या ऐसे ननर्देशक के ककसी नातेर्दार द्वारा फायर्दाप्रर्द ठहत का अवधारण
करने की सीमा ;
(छ) धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन वे शत,ें जजनके अधीन रहते हुए
संस्था कोई संववर्दा या िहराव कर सकेगी ;
(ज) ऐसे मानर्दंर्, जजनके आधार पर बाह्य अलभकरण, धारा 20 की
उपधारा (2) के अधीन संस्था के काय ष ननष्ट्पार्दन का पुनवविष ोकन करेगा ;
(झ) धारा 22 के अधीन सरकार के लिए फीस की र्दर ;
(ञ) वह प्ररूप और रीनत, जजसमें धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन
संस्था का तुिनपत्र और िेिे तैयार ककए जाएंगे ;
( ) कोई अन्द्य ववर्य, जो ववठहत ककया जाना है या ववठहत ककया जाए ।
32. (1) बोर्,ष केंरीय सरकार के पूवाषनुमोर्दन से और ररजव ष बकैं के परामश ष से बोर् ष की
ववननयम बनान े
सभी ववर्यों का उपबंध करने के लिए, जजसके लिए इस अधधननयम के उपबंधों को
की शजक्त ।
प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, अधधसूचना
द्वारा ववननयम बना सकेगा, जो इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हो ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ाि े
त्रबना, ऐसे ववननयम ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे,
अथाषत:्—
(क) धारा 9 की उपधारा (4) के अधीन प्रबंध ननर्देशक और उप प्रबंध
ननर्देशक को संर्देय वेतन और भत्ते ;
(ि) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन बोर् ष के काय ष संचािन के संबंध
में समय, स्थान और प्रकक्रया के ननयम ;
(ग) धारा 15 की उपधारा (5) के अधीन सलमनतयों के काय ष संचािन के
संबंध में समय, स्थान और प्रकक्रया के ननयम तथा उनके कृत्य ;
(घ) धारा 19 की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन संव्यवहारों के लिए
रकम ;
(ङ) उपधारा (2) के अधीन सस्ं था के अधधकाररयों और कमषचाररयों की सेवा
की ननबंधन और अन्द्य शतें तथा धारा 30 की उपधारा (4) के अधीन
प्रनतननयुजक्त की ननबंधन और शतें ;
(च) धारा 16 की उपधारा (5) और धारा 19 की उपधारा (5) के अधीन
ववननठर्दषष्ट् शाजस्तयों का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए धारा 39 की
उपधारा (1) के अधीन तंत्र ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
592
(छ) कोई अन्द्य ववर्य, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाना है या
ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
ननयमों और 33. इस अधधननयम के अधीन बनाया गया प्रत्येक ननयम और ववननयम, उसके
ववननयमों का
बनाए जाने के पश्चात ् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि, जब वह सत्र में
संसद् के समि
हो, कुि तीस ठर्दन की अवधध के लिए रिा जाएगा, जो एक सत्र में या र्दो या
रिा जाना ।
अधधक आनुक्रलमक सत्रों में समाववष्ट् हो सकेगी और यठर्द उस सत्र के या पवू ोक्त
आनुक्रलमक सत्रों के तुरंत बार्द के सत्र के अवसान के पूव ष र्दोनों सर्दन उस ननयम या
ववननयम में कोई उपांतर करन े के लिए सहमत हो जाते हैं कक वह ननयम या
ववननयम नहीं बनाए जाने चाठहए तो तत्पश्चात ् वह ननयम या ववननयम, यथाजस्थनत,
ऐसे उपांतररत रूप में ही प्रभावी होंगे या ननष्ट्प्रभावी हो जाएंगे; तथावप, ऐसा उपांतरण
या बानतिीकरण उस ननयम या ववननयम के अधीन पहिे की गई ककसी बात की
ववधधमान्द्यता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना ककया जाएगा ।
सद्भावपूवकष की 34. इस अधधननयम के या तद्धीन बनाए गए ननयमों या ववननयमों के अधीन
गई कारषवाई का
सद्भावपूवकष की गई या की जाने के लिए आशनयत ककसी बात के लिए संस्था या
संरिण ।
उसके अध्यि या अन्द्य ननर्देशकों, कमचष ाररयों या अधधकाररयों के ववरुद्ध कोई वार्द,
अलभयोजन या अन्द्य ववधधक कायवष ाठहयां, जजसके अंतगतष संस्था को सजृजत या
अन्द्तररत आजस्तयों की बाबत भी है, नहीं की जाएगी ।
पूछताछ, जांच, 35. (1) कोई अन्द्वेर्ण अलभकरण, जजसके अंतगतष पुलिस, केंरीय अन्द्वेर्ण ब्यूरो,
अन्द्वेर्ण और
गंभीर कप अन्द्वेर्ण कायाषिय, प्रवतनष ननर्देशािय और ऐसे अन्द्य अलभकरण भी हैं,
अलभयोजन के
ककंतु जो इन्द्हीं तक सीलमत नहीं है, ककसी ऐसे अपराध के बारे में कोई पूछताछ या
लिए मंजूरी ।
जांच या अन्द्वेर्ण नहीं करेगा, जजसे ननम्नलिखित के पूव ष अनुमोर्दन के त्रबना, संस्था के
अध्यि या अन्द्य ननर्देशकों, कमचष ाररयों या अधधकाररयों द्वारा उनके पर्दीय कृत्यों या
कतव्ष यों के ननवहष न में की गई ककसी लसफाररश या ककए गए ववननश्चय के संबंध में
ककसी ववधध के अधीन ककया जाना अलभकधथत ककया गया है,—
(क) जहां अपराध, अध्यि या अन्द्य ननर्देशकों द्वारा ककया जाना
अलभकधथत ककया गया है, वहां केंरीय सरकार के ; या
(ि) जहां अपराध, संस्था के ककसी कमचष ारी या अधधकारी द्वारा ककया
जाना अलभकधथत ककया गया है, वहां प्रबंध ननर्देशक के :
परन्द्तु ऐसे मामिों के लिए, जजनमें ककसी व्यजक्त की स्वयं के लिए या ककसी
अन्द्य व्यजक्त के लिए कोई अनुधचत िाभ स्वीकार करने या स्वीकार करने का प्रयत्न
करने के आरोप में मौके पर धगरफ्तारी अन्द्तवलषित है, ऐसा कोई अनुमोर्दन आवश्यक
नहीं होगा :
परंतु यह और कक, यथाजस्थनत, केंरीय सरकार या प्रबंध ननर्देशक अपने ववननश्चय
को तीन मास की अवधध के भीतर सूधचत करेगा और ऐसी अवधध, यथाजस्थनत, केंरीय
सरकार या प्रबंध ननर्देशक द्वारा उन कारणों स,े जो अलभलिखित ककए जाएं, एक मास
की अनतररक्त अवधध तक बढायी जा सकेगी :
परंतु यह भी कक केंरीय सरकार या प्रबंध ननर्देशक के, र्दसू रे परन्द्तुक के अधीन
ववननठर्दषष्ट् समय के भीतर इस उपधारा के अधीन अपने ववननश्चय को सूधचत करने मेंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
593
असफि रहने पर कोई पूछताछ या जांच या अन्द्वेर्ण आरंभ करने के लिए समझे गए
अनुमोर्दन के रूप में नहीं माना जाएगा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “अनुधचत िाभ” पर्द का वही अथष
1988 का 49 होगा, जो भ्रष्ट् ाचार ननवारण अधधननयम, 1988 में उसका है ।
(2) कोई न्द्यायािय, संस्था के अध्यि या अन्द्य ननर्देशकों, कमचष ाररयों या
अधधकाररयों द्वारा ककसी ववधध के अधीन अलभकधथत ककए गए ककसी र्दंर्नीय अपराध
का संज्ञान नहीं िेगा, जजसके लिए ननम्नलिखित की पूव ष मंजूरी के त्रबना, उपधारा (1)
के अधीन कोई पूछताछ या जांच या अन्द्वेर्ण करने की मंजूरी प्रर्दान की गई थी—
(क) जहां अपराध, अध्यि या अन्द्य ननर्देशकों द्वारा ककया जाना
अलभकधथत ककया गया है, वहां केंरीय सरकार की ; या
(ि) जहां अपराध, संस्था के ककसी कमचष ारी या अधधकारी द्वारा ककया
जाना अलभकधथत ककया गया है, वहां प्रबंध ननर्देशक की :
परंतु केंरीय सरकार या प्रबधं ननर्देशक, इस उपधारा के अधीन अलभयोजन के
लिए मंजूरी की अपेिा करने वािे प्रस्ताव प्राप्त हो जाने के पश्चात,् ऐसे प्रस्ताव पर
ववननश्चय को इसकी प्राजप्त की तारीि स े तीन मास की अवधध के भीतर सूधचत करने
का भरसक प्रयास करेगी या करेगा :
परंतु यह और कक उस र्दशा में, जहां अलभयोजन के लिए मंजूरी प्रर्दान करने के
प्रयोजन के लिए, ववधधक परामश ष की अपेिा की जाती है, वहां ऐसी अवधध को, ऐसे
कारणों से, जो अलभलिखित ककए जाएं, एक मास की अनतररक्त अवधध तक बढायी जा
सकेगी :
परंतु यह भी कक ववननठर्दषष्ट् समय के भीतर इस उपधारा के अधीन अपना
ववननश्चय संसूधचत करने में केंरीय सरकार या प्रबंध ननर्देशक की असफिता को
अलभयोजन के आरंभ ककए जाने के लिए समझा गया अनमु ोर्दन के रूप में नहीं माना
जाएगा ।
36. (1) जहां उधार िेने वािी ककसी इकाई के साथ ऋण और अधग्रम प्रर्दान संस्था द्वारा
करते समय संस्था द्वारा ककया गया कोई िहराव, ऐसी इकाई के एक या अधधक
ननर्देशकों की
ननयुजक्त का
ननर्देशकों की संस्था द्वारा ननयुजक्त या नामननर्देशन के लिए उपबंध करता है, वहां
अलभभावी
ऐसा उपबंध और उसके अनुसरण में की गई ननर्देशकों की ननयुजक्त, कंपनी होना ।
2013 का 18 अधधननयम, 2013 में या तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध में या ज्ञापन और संगम के
अनुच्छेर्दों या इकाई से संबंधधत ककसी अन्द्य लिित में अंतववष्ट्ष ककसी प्रनतकूि बात
के होते हुए भी, ववधधमान्द्य और प्रभावी होगी, और शेयर अहषता, आयु सीमा, ननर्देशक
पर्दों की संख्या, ननर्देशकों का पर्द से ह ाए जाने और ऐसी ककसी ववधध या पूवोक्त
लिित में अंतववष्ट्ष ऐसी ही शतों के बारे में कोई उपबंध यथापूवोक्त िहराव के
अनुसरण में संस्था द्वारा ननयुक्त ककसी ननर्देशक को िागू नहीं होगा ।
(2) यथापूवोक्त रूप में ननयक्ु त कोई ननर्देशक—
2013 का 18 (क) कंपनी अधधननयम, 2013 के अधीन स्वतंत्र ननर्देशकों को उपिब्ध
उन्द्मुजक्तयों के प्रयोजन के लिए स्वतंत्र ननर्देशक समझा जाएगा ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
594
(ि) संस्था के प्रसार्दपयन्द्ष त पर्द धारण करेगा और संस्था के लिखित आर्देश
द्वारा ककसी व्यजक्त द्वारा ह ाया जा सकेगा या प्रनतस्थावपत ककया जा सकेगा ;
(ग) स्वयं के ननर्देशक होने के कारण ही या ननर्देशक के रूप में अपने
कतव्ष यों के ननवहष न में सद्भावपूवकष की गई या ककए जाने के लिए िोप की गई
ककसी बात या उसके संबद्ध में ककसी बात के लिए कोई बाध्यता या र्दानयत्व
उपगत नहीं करेगा ;
(घ) चक्रानुक्रम द्वारा सेवाननववृत्त के लिए र्दायी नहीं होगा और उस पर
ऐसी सेवाननववृत्त के लिए र्दायी ननर्देशकों की संख्या की सगं णना करने के लिए
ववचार नहीं ककया जाएगा ।
ऋण या अधग्रम 37. (1) तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध में अंतववष्ट्ष ककसी प्रनतकूि बात के
की ववधधमान्द्यता
होते हुए भी, इस अधधननयम के उपबंधों के अनुसरण में संस्था द्वारा मंजूर ककए गए
पर प्रश्न न ककया
ककसी ऋण या अधग्रम की ववधधमान्द्यता को यथापूवोक्त ऐसी अन्द्य ववधध या ककसी
जाना ।
संकल्प, संववर्दा, ज्ञापन, संगम अनुच्छेर्दों या अन्द्य लिित की अपेिाओं के अननुपािन
के आधार पर भी प्रश्नगत नहीं ककया जाएगा ।
(2) इस धारा की कोई बात, ककसी कंपनी को कोई ऋण या अधग्रम अलभप्राप्त
करने के लिए वहां समथ ष नहीं बनाएगी, जहां ऐसी कंपनी के गिन स े संबंधधत लिित
ऐसी कंपनी को ऐसा करने के लिए सशक्त नहीं करती है ।
ववश्वसनीयता और 38. (1) संस्था, इस अधधननयम के द्वारा या ककसी अन्द्य ववधध के द्वारा जैसा
गोपनीयता के
अपेक्षित है, उसके लसवाय, ऐसी पररजस्थनतयों में, के लसवाय, जजनमें ववधध या बकैं कारों
संबंध में
में पररपा ी और रूठढजन्द्य प्रथा के अनुसार, संस्था के सबं ंध में ऐसी जानकारी प्रक
बाध्यताएं ।
करने के लिए आवश्यक या उधचत हैं, उसके संघ कों से सबं ंधधत या उसके कायकष िापों
से संबंधधत कोई जानकारी प्रक नहीं करेगा ।
(2) प्रत्येक ननर्देशक, सलमनत का सर्दस्य, संस्था या ररजव ष बकैं का िेिापरीिक,
अधधकारी या अन्द्य कमचष ारी जजसकी सेवाएं इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन
संस्था द्वारा उपयोग की जाती हैं, अपने कतव्ष य ग्रहण करने से पूव,ष पहिी अनुसूची में
ठर्दए गए प्ररूप में ववश्वसनीयता और गोपनीयता की घोर्णा करेगा ।
न्द्यायननणयष न । 39. (1) बोर्,ष धारा 16 की उपधारा (5) और धारा 19 की उपधारा (5) के अधीन
ववननठर्दषष्ट् शाजस्तयों का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए एक तंत्र स्थावपत करने
हेतु ववननयम बनाएगा ।
(2) ववननयमों में, यथाजस्थनत, ननर्देशक या ककसी कमचष ारी को, जजसके ववरुद्ध
धारा 16 या धारा 19 के उपबंधों का उल्िंघन करने के लिए लशकायत की जाती है,
सुनवाई का युजक्तयुक्त अवसर तथा शाजस्त अधधरोवपत करने वािे ककसी आर्देश के
ववरुद्ध अपीि करने के अधधकार के लिए उपबंध होगा ।
ननर्देशकों की 40. (1) प्रत्येक ननर्देशक को, उसके द्वारा अपने कतव्ष यों के ननवहष न में या उसके
िनतपूनत ष ।
संबंध में, लसवाय ऐसे कतव्ष यों के जो उसके द्वारा जानबूझकर ककए गए काय ष या
व्यनतक्रम के कारण हुए हों, उपगत ऐसी सभी हाननयों और व्ययों के लिए संस्था द्वारा
िनतपूनत ष की जाएगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
595
(2) कोई ननर्देशक, संस्था के ककसी अन्द्य ननर्देशक के प्रनत या ककसी अधधकारी
या अन्द्य कमचष ारी के प्रनत या संस्था की ओर स े अजजतष या िी गई ककसी संपवत्त या
प्रनतभूनत के मूल्य या हक की ककसी अपयाषप्तता या कमी या ककसी ऋणी या सस्ं था के
प्रनत बाध्यता के अधीन ककसी व्यजक्त के ठर्दवालियापन या सर्दोर् काय ष या अपने पर्द
के कतव्ष यों के ननष्ट्पार्दन में या उसके संबंध में सद्भावपवू कष की गई ककसी बात के
पररणामस्वरूप संस्था को होने वािी ककसी हानन या व्ययों के लिए उत्तरर्दायी नहीं
होगा ।
1891 का 18 41. बकैं कार बही साक्ष्य अधधननयम, 1891, संस्था के संबंध में इस प्रकार िागू बकैं कार बही
होगा, मानो वह उस अधधननयम की धारा 2 में यथापररभावर्त कोई बकैं हो ।
साक्ष्य
अधधननयम,
1891 का संस्था
के संबंध में
िागू होना ।
1949 का 10 42. बकैं कारी ववननयमन अधधननयम, 1949 की धारा 34क और 36कघ के बकैं कारी
उपबंध संस्था को िागू होंगे ।
ववननयमन
अधधननयम,
1949 की धारा
34क और धारा
36कघ का
संस्था को िाग ू
होना ।
43. कंपननयों के पररसमापन से संबंधधत ववधध का कोई उपबंध संस्था को िागू संस्था का
समापन ।
नहीं होगा और समापन में संस्था को, केंरीय सरकार के आर्देश से और ऐसी रीनत में
ही रिा जाएगा, जैसा वह ननर्देश करे, अन्द्यथा नहीं ।
केंरीय सरकार
44. इस अधधननयम के पूवगष ामी उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, संस्था
की ननर्देश जारी
इस अधधननयम के अधीन अपने कृत्यों का पािन करन े में, ऐसी नीनत के प्रश्नों पर करने की
ऐसे ननर्देशों द्वारा आबद्धकर होगी, जो केंरीय सरकार, समय-समय पर, उस े लिखित शजक्त ।
में र्दे ।
इस अधधननयम
45. इस अधधननयम के उपबंध, तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध या ककसी ऐसी
का अध्यारोही
ववधध के आधार पर प्रभाव रिने वािे ककसी लिित में उससे असंगत ककसी बात के प्रभाव होना ।
होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
कठिनाइयों को
46. (1) यठर्द इस अधधननयम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई
र्दरू करने की
उत्पन्द्न होती है तो केंरीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा, ऐस े उपबंध कर शजक्त ।
सकेगी या ऐस े ननर्देश र्दे सकेगी, जो इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हो, जो
कठिनाई को र्दरू करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :
परंतु ऐसा कोई आर्देश, इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से तीन वर् ष की
समाजप्त के पश्चात ् नहीं ककया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन ककया गया प्रत्येक आर्देश, इसके बनाए जाने के शीघ्रअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
596
पश्चात,् संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिा जाएगा ।
1934 का 47. भारतीय ररजव ष बकैं अधधननयम, 1934 का, र्दसू री अनुसूची में ववननठर्दषष्ट्
अधधननयम संख्यांक
रीनत में संशोधन ककया जाएगा ।
2 का संशोधन ।
1949 का 48. बकैं कारी ववननयमन अधधननयम, 1949 का, तीसरी अनुसूची में ववननठर्दषष्ट्
अधधननयम संख्यांक
रीनत में संशोधन ककया जाएगा ।
10 का संशोधन ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
597
पहिी अनुसूची
[िारा 38(2) देखखए]
र्वचवसिीयता और गोपिीयता की र्ोषर्ा
म,ैं एतर्दद्वारा घोर्णा करता हूाँ कक म ैं राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास
बकैं के, यथाजस्थनत, ननर्देशक, िेिापरीिक, अधधकारी या अन्द्य कमचष ारी के रूप में
मुझसे अपेक्षित कतव्ष यों का और जजनका संबंध उधचत तौर से उक्त संस्था में मेरे
द्वारा धाररत पर्द या ओहर्दे से है, ननष्ट्िापूवकष , सत्यननष्ट्िा से और अपनी पूण ष कुशिता
तथा योग्यता से ननष्ट्पार्दन और पािन करूंगा ।
2. म ैं यह और घोर्णा करता हूाँ कक म ैं उक्त संस्था के कायों से या उक्त संस्था
से व्यवहार करने वािे ककसी व्यजक्त के कायों से संबंधधत कोई जानकारी, उसके लिए
ककसी व्यजक्त को, जो उसका ववधधक रूप से हकर्दार नहीं है, संसूधचत नहीं करूंगा या
संसूधचत नहीं होने र्दंगू ा और न ककसी ऐस े व्यजक्त को उक्त संस्था का या उसके कब्ज े
में की तथा उक्त संस्था के कारबार या उक्त संस्था स े व्यवहार करने वाि े ककसी
व्यजक्त के कारबार से संबंधधत ककन्द्हीं बठहयों या र्दस्तावेजों का ननरीिण करने र्दंगू ा
और न उसकी उन तक पहुाँच होने र्दंगू ा ।
मेरे समि हस्तािर ककए (ह स् तािर)अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
598
र्दसू री अनुसूची
[िारा 47 देखखए]
भारतीय ररजव ि बकैं अधिनियम, 1934 का संिोिि
धारा 2 का 1. भारतीय ररजव ष बकैं अधधननयम, 1934 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् मूि 1934 का 2
संशोधन । अधधननयम कहा गया है) की धारा 2 में, िंर् (गगग) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर्
अंतःस्थावपत ककए जाएंग,े अथाषत ् :—
‘(गगगi) “राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं ” से राष्ट्रीय
अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं अधधननयम, 2021 की धारा 3 के अधीन
स्थावपत संस्था अलभप्रेत है ;
(गगगii) “अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था” से राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण
और ववकास बकैं अधधननयम, 2021 की धारा 29 के अधीन अनुज्ञप्त कोई
ववकास ववत्तीय संस्था अलभप्रेत है ;’।
धारा 17 का 2. मूि अधधननयम की धारा 17 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (4छ) में, “या िघु उद्योग बकैं ” शब्र्दों के पश्चात,् “या
राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था”
शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) उपधारा (4झ) में, “औद्योधगक ववत्त ननगम” शब्र्दों के पश्चात ् “राष्ट्रीय
अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे;
(ग) उपधारा (4 ) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंतःस्थावपत की
जाएगी, अथाषत ् :—
“(4ि) राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य
ववकास ववत्तीय संस्था को,—
(क) ऐस े स् ॉकों, ननधधयों और प्रनतभूनतयों (स्थावर संपवत्त स े
लभन्द्न) के प्रनतभूनत पर, जजनमें न्द्यास-धन ववननठहत करने के लिए
कोई न्द्यासी भारत में तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध द्वारा प्राधधकृत है,
ऐसा उधार या अधग्रम र्देना, जो मांगे जाने पर या उस उधार या
अधग्रम की तारीि से नब्बे ठर्दन से अनधधक की ननयत अवधध के
अवसान पर प्रनतसंर्देय है ; या
(ि) ऐसे ववननमयपत्रों या वचनपत्रों की प्रनतभूनत पर उधार और
अधग्रम र्देना, जो सद्भावपूवकष ककए गए वाखणजज्यक या व्यापाररक
संव्यवहारों से उद्भूत होत े हैं, जजन पर र्दो या अधधक मान्द्य हस्तािर
हैं और जो ऐसी उधार या अधग्रम की तारीि स े पांच वर् ष के भीतर
पररपक्व होते हैं ;”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
599
(घ) उपधारा (12ि) में, “औद्योधगक ववत्त ननगम” शब्र्दों के पश्चात,्
“राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय
संस्था” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ।
3. मूि अधधननयम की धारा 42 की उपधारा (1) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ग) के धारा 42 का
उपिंर् (ii) में, “अथवा िघु उद्योग बकैं से” शब्र्दों के पश्चात,् “या राष्ट्रीय अवसंरचना संशोधन ।
ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं से या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था से” शब्र्द अंतःस्थावपत
ककए जाएंगे ।
4. मूि अधधननयम की धारा 46ग की उपधारा (2) में,— धारा 46ग का
संशोधन ।
(क) िंर् (ग) में, “या िघु उद्योग बकैं ” शब्र्दों के पश्चात ् “या राष्ट्रीय
अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) िंर् (घ) में, “या िघु उद्योग बकैं ” शब्र्दों के पश्चात ् “या राष्ट्रीय
अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
600
तीसरी अनुसूची
[िारा 48 देखखए]
बकैं कारी र्वनियमि अधिनियम, 1949 का संिोिि
धारा 5 का 1. बकैं कारी ववननयमन अधधननयम, 1949 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् मूि 1949 का 10
संशोधन। अधधननयम कहा गया है) की धारा 5 में, िंर् (जक) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर्
अंतःस्थावपत ककए जाएंग,े अथाषत ् :—
‘(जि) “राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं ” से राष्ट्रीय
अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं अधधननयम, 2021 की धारा 3 के अधीन
स्थावपत संस्था अलभप्रेत है ;
(जग) “अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था” से राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और
ववकास बकैं अधधननयम, 2021 की धारा 29 के अधीन अनुज्ञप्त ववकास ववत्तीय
संस्था अलभप्रेत है ;’।
धारा 18 का 2. मूि अधधननयम की धारा 18 की उपधारा (1) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (क) के
संशोधन । उपिंर् (ii) में, “िघु उद्योग बकैं से” शब्र्दों के पश्चात,् “या राष्ट्रीय अवसंरचना
ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं से या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था से” शब्र्द अंतःस्थावपत
ककए जाएंगे ।
धारा 34क का 3. मूि अधधननयम की धारा 34क की उपधारा (3) में, “िघु उद्योग बकैं ,” शब्र्दों
संशोधन। के पश्चात,् “राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय
संस्था,” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ।
धारा 36कघ का 4. धारा 36कघ की उपधारा (3) में, “िघु उद्योग बकैं ,” शब्र्दों के पश्चात,्
संशोधन। “राष्ट्रीय अवसंरचना ववत्तपोर्ण और ववकास बकैं या अन्द्य ववकास ववत्तीय संस्था,” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ।
__________अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 601
,
राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योधगकी उद्यसमता और प्रबंि
,
संस्थाि अधिनियम 2021
(2021 का अधिनियम संखयांक 19)
[30 जुिाई, 2021]
खाद्य प्रौद्योधगकी, उद्यसमता और प्रबंि की कनतपय संस्थाओं को राष्ट्रीय महत्व की
संस्थाएं र्ोर्षत करिे तथा खाद्य प्रौद्योधगकी, उद्यसमता और प्रबंि में सिक्षर् और
अिुसंिाि का उपबंि करिे और ऐसी िाखाओं में र्वद्या की असभवद्ृ धि
तथा ज्ञाि का प्रसार करिे और उससे सम्बश्न्ित या
उसके आिुषंधगक र्वषयों का उपबंि
करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह अधधननयलमत
हो :—
अध्याय 1
प्रारश्म्भक
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय िाद्य प्रौद्योधगकी, उद्यलमता और संक्षिप्त नाम
प्रबंध संस्थान अधधननयम, 2021 है । और प्रारम्भ ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा जो केंरीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना द्वारा,
ननयत करे :
परंतु इस अधधननयम के लभन्द्न-लभन्द्न उपबंधों के लिए लभन्द्न-लभन्द्न तारीिें ननयत की
जा सकेंगी और ककसी ऐसे उपबंध में इस अधधननयम के प्रारम्भ के प्रनत ककसी ननर्देश का
यह अथ ष िगाया जाएगा कक वह उस उपबंध के प्रवत्तृ होने के प्रनत ननर्देश है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 602
कनतपय 2. अनुसूची में उजल्िखित संस्थानों के उद्र्देश्य ऐसे हैं जो उन्द्हें राष्ट्रीय महत्व की
संस्थाओं की संस्था बनाते हैं । अतः, यह घोवर्त ककया जाता है कक प्रत्येक ऐसा संस्थान एक राष्ट्रीय
राष्ट्रीय महत्व
महत्व की संस्था है ।
की संस्थाओं के
रूप में घोर्णा ।
पररभार्ाए ं । 3. इस अधधननयम में, जब तक कक संर्दभ ष स े अन्द्यथा अपेक्षित न हो,—
(क) “बोर्”ष से ककसी सस्ं थान के सम्बन्द्ध में धारा 11 में ननठर्दषष्ट् शासी बोर् ष
अलभप्रेत है ;
(ि) “अध्यि” से बोर् ष का अध्यि अलभप्रेत है ;
(ग) “तत्स्थानी संस्थान” से अनुसूची के स्तम्भ (2) में उजल्िखित ककसी संस्थान
के सम्बन्द्ध में उक्त अनुसूची के स्तम्भ (3) में यथाववननठर्दषष्ट् कोई संस्थान अलभप्रेत है ;
(घ) “पररर्द्” स े धारा 28 के अधीन स्थावपत पररर्द् अलभप्रेत है ;
(ङ) “ननर्देशक” स े धारा 19 के अधीन ननयुक्त संस्थान का ननर्देशक अलभप्रेत है ;
(च) “ववद्यमान संस्थान” से अनुसूची के स्तम्भ (2) में उजल्िखित संस्थान
अलभप्रेत है ;
(छ) “ननधध” से धारा 33 के अधीन बनाई रिी जाने वािी संस्थान की ननधध
अलभप्रेत है ;
(ज) “संस्थान” से अनुसूची के स्तम्भ (3) में उजल्िखित संस्थान अलभप्रेत है ;
(झ) “सर्दस्य” से बोर् ष का कोई सर्दस्य अलभप्रेत है और इसके अंतगतष अध्यि भी
है ;
(ञ) “अधधसूचना” से राजपत्र में प्रकालशत कोई अधधसूचना अलभप्रेत है ;
( ) “ववठहत” से इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ननयमों द्वारा ववठहत
अलभप्रेत है ;
(ि) “कुिसधचव” स े धारा 20 के अधीन ननयुक्त संस्थान का कुिसधचव अलभप्रेत
है ;
(र्) “अनुसूची” से इस अधधननयम से उपाबद्ध अनुसूची अलभप्रेत है ;
(ढ) “लसने ” से धारा 16 में ननठर्दषष्ट् संस्थान की लसने अलभप्रेत है ;
(ण) “सोसाइ ी” से सोसाइ ी रजजस्रीकरण अधधननयम, 1860 के अधीन सोसाइ ी 1860 का 21
के रूप में रजजस्रीकृत ववद्यमान संस्थान अलभप्रेत है ;
(त) ककसी संस्थान के सम्बन्द्ध में “पररननयम और अध्यार्देश” से इस अधधननयम
के अधीन बनाए गए उस संस्थान के पररननयम और अध्यार्देश अलभप्रेत हैं ।
अध्याय 2
संस्थाि
संस्थानों का 4. इस अधधननयम प्रारम्भ के तारीि से ही, अनुसूची के स्तम्भ (3) में उजल्िखित प्रत्येक
ननगमन । संस्थान का एक ननगलमत ननकाय होगा, जजसका शाश्वत उत्तराधधकार और एक सामान्द्य मुरा
होगी जजसे इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, चि और अचि र्दोनों ही प्रकार
की संपवत्त का अजनष , धारण और व्ययन करने तथा संववर्दा करने की शजक्त होगी और वह
उक्त नाम से वार्द िाएगा या उसके ववरूद्ध वार्द िाया जाएगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 603
5. इस अधधननयम के प्रारम्भ के तारीि से ही,— संस्थाओ ं के
ननगमन का
(क) तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध में या ककसी संववर्दा या अन्द्य लिित में
प्रभाव ।
ववद्यमान संस्थान के प्रनत ककसी ननर्देश के बारे में यह समझा जाएगा कक वह
तत्स्थानी संस्थान के प्रनत ननर्देश है ;
(ि) ककसी ववद्यमान संस्थान की या उससे सम्बजन्द्धत सभी चि और अचि
संपवत्तयां तत्स्थानी संस्थान में ननठहत हो जाएंगी ;
(ग) ककसी ववद्यमान संस्थान के सभी अधधकार और र्दानयत्व, तत्स्थानी संस्थान
को अंतररत हो जाएंगे और वे उसके अधधकार और र्दानयत्व हो जाएंगे ;
(घ) ऐस े प्रारम्भ स े िीक पूव ष ककसी ववद्यमान संस्थान द्वारा ननयोजजत प्रत्येक
व्यजक्त तत्स्थानी संस्थान में अपना पर्द या सेवा, उसी सेवा धनृत के साथ, उसी
पाररश्रलमक और उन्द्हीं ननबंधनों तथा शतों पर और पेंशन, छुट् ी, उपर्दान, भववष्ट्य ननधध
और अन्द्य ववर्यों के सम्बन्द्ध में उन्द्हीं अधधकारों और ववशेर्ाधधकारों सठहत धारण
करेगा, जैसे वह उसे उस र्दशा में धारण करता है, यठर्द यह अधधननयम पाररत नहीं
ककया गया होता और तब तक इस प्रकार धारण करता रहेगा, जब तक उसका
ननयोजन समाप्त नहीं कर ठर्दया जाता या जब तक उसकी सेवाधनृत, पाररश्रलमक,
ननबंधन और शतें पररननयमों द्वारा सम्यक् रूप से पररवनततष नहीं कर र्दी जाती हैं :
परंतु यठर्द इस प्रकार का ककया गया पररवतनष ऐसे कमषचारी को स्वीकाय ष नहीं है
तो उसका ननयोजन संस्थान द्वारा उक्त कमचष ारी से की गई संववर्दा के ननबंधनों और
शतों के अनुसार या, यठर्द उसमें इस ननलमत्त कोई उपबंध नहीं ककया गया है तो स्थायी
कमचष ारी की र्दशा में तीन मास के पाररश्रलमक और अन्द्य कमचष ारी की र्दशा में एक
मास के पाररश्रलमक के समतुल्य प्रनतकर का संस्थान द्वारा उसको संर्दाय करके
संस्थान द्वारा समाप्त ककया जा सकेगा :
परंतु यह और कक तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध या ककसी लिित या अन्द्य
र्दस्तावेज के अधीन ववद्यमान संस्थान के ननर्देशक या कुिपनत और अन्द्य अधधकाररयों
के प्रनत कोई ननर्देश, चाहे ककन्द्हीं भी शब्र्दों में हों, का यह अथ ष िगाया जाएगा कक वह
तत्स्थानी संस्थान के ननर्देशक और अन्द्य अधधकाररयों के प्रनत ननर्देश है ;
(ङ) इस अधधननयम के प्रारम्भ से पूव ष ककसी ववद्यमान संस्थान में ककसी
शैिखणक या अनुसंधान पाठ्यक्रम का अध्ययन करने वािे प्रत्येक व्यजक्त के बारे में
यह समझा जाएगा कक उसने उस संस्थान से, जजससे ऐसे व्यजक्त ने प्रव्रजन ककया है,
पाठ्यक्रम के उसी स्तर पर ऐसे प्रारम्भ पर तत्स्थानी संस्थान को प्रव्रजन कर लिया है
और उसके पास रजजस्रीकृत हो गया है ; और
(च) इस अधधननयम के प्रारम्भ स े िीक पूव ष ककसी ववद्यमान संस्थान द्वारा या
उसके ववरूद्ध संजस्थत सभी वार्द और अन्द्य ववधधक कारषवाइयां या जो उसके द्वारा या
उसके ववरूद्ध संजस्थत ककए जा सकते थे, तत्स्थानी संस्थान द्वारा या उसके ववरूद्ध
जारी रिी जाएंगी या संजस्थत की जाएंगी ।
6. (1) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान ननम्नलिखित संस्थानों की
शजक्तयों का प्रयोग करेगा और ननम्नलिखित कृत्यों का पािन करेगा, अथाषत ्:— शजक्तयां और
कृत्य ।
(क) आहार ववज्ञान और िाद्य प्रौद्योधगकी की ऐसी शािाओं में औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 604
इंजीननयरी, प्रौद्योधगकी, ववज्ञान और प्रबंध की ऐसी ककन्द्हीं अन्द्य शािाओं में, जजस े
संस्थान िीक समझे, लशिण और अनुसंधान के लिए और ऐसी शािाओं में ववद्या के
अलभवद्ृ धध और ज्ञान के प्रसार के लिए उपबंध करना ;
(ि) परीिाएं आयोजजत करना और डर्धग्रयां, डर्प्िोमा, प्रमाणपत्र और अन्द्य ववद्या
सम्बन्द्धी ववशेर् उपाधधयां या पर्दववयां प्रर्दान करना ;
(ग) मानर्द डर्धग्रयां या अन्द्य उपाधधयां प्रर्दान करना ;
(घ) फीस और अन्द्य प्रभारों को ननयत करना, उनकी मांग करना और उन्द्हें प्राप्त
करना ;
(ङ) छात्रों के ननवास के लिए छात्र ननवासों और छात्रावासों की स्थापना, उनका
रिरिाव और प्रबंध करना ;
(च) संस्थान के सभी प्रवगों के कमचष ाररयों और छात्रों के अनुशासन का
पयवष ेिण करना और ननयंत्रण करना तथा उनके स्वास््य, सामान्द्य कल्याण, सांस्कृनतक
और सामूठहक जीवन के संवधषन की व्यवस्था करना ;
(छ) छात्रों के लिए राष्ट्रीय कैर्े कोर की यूनन ों के रिरिाव के लिए उपबंध
करना ;
(ज) शैिखणक और अन्द्य पर्दों को संजस्थत करना और ननर्देशक के लसवाय उन
पर ननयुजक्तयां करना ;
(झ) संस्थान से सम्बजन्द्धत या उसमें ननठहत ककसी संपवत्त के ववर्य में ऐसी
रीनत से संव्यवहार करना, जो संस्थान के उद्र्देश्यों को अग्रसर करने के लिए िीक
समझे ;
(ञ) सरकार से र्दान, अनुर्दान, संर्दान या उपकृनतयां प्राप्त करना और यथाजस्थनत,
वसीयतकताषओं, र्दानर्दाताओं या अंतरकों से चि या अचि संपवत्त की वसीयत, संर्दान
और अंतरण प्राप्त करना;
( ) ववश्व के ककसी भी भाग में ऐसी शैिखणक या अन्द्य संस्थाओं के साथ,
जजनका उद्र्देश्य पूणषतया या भागतः अध्यापकों और ववद्वानों के आर्दान-प्रर्दान द्वारा
संस्थान के उन उद्र्देश्यों के समरूप है और साधारणतया ऐसी रीनत में, जो उनके
सामान्द्य उद्र्देश्यों के सहायक हों, सहकार करना और उनका सहयोग करना;
(ि) अध्येताववृत्त, छात्रववृत्त, छात्र-सहायता ववृत्त, पुरस्कार और पर्दक संजस्थत करना
और प्रर्दान करना ; और
(र्) ऐसी सभी बातें करना, जो संस्थान के सभी या ककन्द्हीं उद्र्देश्यों की प्राजप्त के
लिए आवश्यक, आनुर्ंधगक या सहायक हो ।
(2) उपधारा (1) में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, कोई संस्थान केन्द्रीय सरकार
के पूव ष अनुमोर्दन के त्रबना ककसी अचि संपवत्त का ककसी रीनत में व्ययन नहीं करेगा ।
संस्थान का सभी 7. (1) प्रत्येक संस्थान सभी व्यजक्तयों के लिए िुिा होगा, चाहे वे ककसी लिगं ,
मूिवंश, पंथ और मूिवंश, पंथ, जानत या वग ष के हों और सर्दस्यों, छात्रों, लशिकों, अधधकाररयों, कमचष ाररयों या
वगों के लिए
िुिा होना ।
कमकष ारों को प्रवेश र्देने या ननयुक्त करने में या ककसी भी अन्द्य बात के सम्बन्द्ध में, वह
चाहे जो भी हो, धालमकष ववश्वास या मान्द्यता के बारे में कोई परीिण या शत ष अधधरोवपत
नहीं की जाएगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 605
(2) ककसी भी संस्थान द्वारा ककसी ऐसी संपवत्त की कोई वसीयत, संर्दान या अंतरण
स्वीकार नहीं ककया जाएगा, जजसमें पररर्द् की राय में इस धारा के भाव और उद्र्देश्य के
ववरूद्ध शतें या बाध्यताएं अंतग्रस्ष त हैं ।
(3) प्रत्येक संस्थान में प्रत्येक शैिखणक पाठ्यक्रम या अध्ययन के कायक्रष म में प्रवेश,
ऐसे संस्थान द्वारा प्रवेश की प्रकक्रया के प्रारंभ होने के पूवष उसके प्रास्पेक् स के माध्यम से
प्रकठ त पारर्दशी और युजक्तयुक्त मानर्दंर् के माध्यम से ननधाषररत योग्यता पर आधाररत
होगा :
परंतु इस धारा की ककसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कक वह संस्थान को
मठहिाओं, ठर्दव्यांगजनों या सामाजजक और शैिखणक रूप से वपछड़े वग ष के और ववलशजष्ट् तया
अनुसूधचत जानत और अनुसूधचत जनजानत के व्यजक्तयों के ननयोजन या प्रवेश के लिए
ववशेर् उपबंध करने से ननवाररत करती है :
परन्द्तु यह और कक ऐसा प्रत्येक संस्थान केन्द्रीय लशिा संस्था (प्रवेश में आरिण)
2007 का 5 अधधननयम, 2006 के प्रयोजनों के लिए एक केन्द्रीय लशिा सस्ं था होगा ।
8. (1) प्रत्येक संस्थान एक अिाभकारी ववधधक इकाई होगा और ऐसे संस्थान के राजस्व संस्थानों का
में के अधधशेर् के, यठर्द कोई हो, ककसी भाग को, इस अधधननयम के अधीन उसकी संकक्रयाओं अिाभकारी
ववधधक इकाई
के ववर्य में सभी व्ययों को चुकाने के पश्चात,् ऐसे संस्थान की अलभवद्ृ धध और ववकास
होना ।
अथवा उसमें अनुसंधान करने से लभन्द्न ककसी प्रयोजन के लिए ववननठहत नहीं ककया
जाएगा ।
(2) प्रत्येक संस्थान अपनी आत्म-ननभरष ता और संधारणीयता के लिए ननधधयां जु ाने का
प्रयास करेगा ।
9. प्रत्येक संस्थान में सभी लशिण काय ष संस्थान द्वारा या उसके नाम से इस ननलमत्त संस्थानों में
बनाए गए पररननयमों और अध्यार्देशों के अनुसार ककया जाएगा ।
लशिण ।
अध्याय 3
संस्थािों के प्राधिकारी
10. संस्थान के प्राधधकारी ननम्नलिखित होंगे, अथाषत ् :— संस्थानों के
प्राधधकारी ।
(क) शासी बोर् ष ;
(ि) लसने ; और
(ग) ऐसे अन्द्य प्राधधकारी, जो पररननयमों द्वारा सस्ं थान के प्राधधकारी घोवर्त ककए
जाएं ।
11. (1) प्रत्येक संस्थान का शासी बोर् ष उस सस्ं थान का प्रधान कायपष ािक ननकाय शासी बोर् ष ।
होगा ।
(2) प्रत्येक संस्थान का बोर् ष ननम्नलिखित सर्दस्यों से लमिकर बनेगा, अथाषत ्:—
(क) िाद्य उद्योग या लशिा या आहार ववज्ञान या िाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योधगकी
या प्रबंधन या ऐस े ही अन्द्य िेत्र में ववलशष्ट् ख्यानतप्राप्त व्यजक्तयों में स े केन्द्रीय
सरकार द्वारा ननयुक्त ककया जाने वािा एक अध्यि ;
(ि) संस्थान का ननर्देशक—सर्दस्य, पर्देन ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 606
(ग) भारतीय िाद्य सुरिा और मानक प्राधधकरण का अध्यि या उसका
नामननर्देलशती—सर्दस्य, पर्देन ;
(घ) भारतीय कृवर् अनुसंधान पररर्द् का महाननर्देशक या उसका नामननर्देलशती—
सर्दस्य, पर्देन ;
(ङ) िाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से सम्बजन्द्धत केन्द्रीय सरकार के मंत्रािय या
ववभाग का एक प्रनतननधध, जो ननर्देशक की पंजक्त से नीचे का न हो—सर्दस्य, पर्देन ;
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामननर्देलशत ककए जाने वािे िाद्य प्रसंस्करण
उद्योग के िेत्र में ववशेर् ज्ञान रिने वािे र्दो प्रनतननधध—सर्दस्य ;
(छ) भारतीय प्रबंध संस्थान से एक प्रनतननधध—सर्दस्य, पर्देन ;
(ज) भारतीय प्रौद्योधगकी संस्थान से एक प्रनतननधध—सर्दस्य, पर्देन ;
(झ) संस्थान का संकायाध्यि, यठर्द कोई हो—सर्दस्य, पर्देन ;
(ञ) भारत सरकार, उच्चतर लशिा ववभाग का सधचव या उसका नामननर्देलशती—
सर्दस्य, पर्देन ;
( ) आचायों, सह-आचायों और सहायक आचायों में स े ज्येष्ट्िता के चक्रानुक्रम स े
संस्थान के तीन संकाय सर्दस्य—सर्दस्य, पर्देन ;
(ि) सम्बद्ध राज्य सरकार का एक नामननर्देलशती, जो संयुक्त सधचव की पंजक्त
से नीचे का न हो—सर्दस्य, पर्देन ;
(र्) संस्थान का कुिसधचव—सर्दस्य-सधचव, पर्देन ।
(3) अध्यि को ककन्द्हीं ऐस े ववशेर्ज्ञों को, जो बोर् ष के सर्दस्य न हों, बोर् ष की बैिकों में
भाग िेने के लिए आमंत्रत्रत करने की शजक्त होगी ककन्द्तु ऐसे आमंत्रत्रत को बैिक में मतर्दान
करने के हकर्दार नहीं होंगे ।
बोर् ष की शजक्तया ं 12. (1) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान का बोर्,ष
और कृत्य । संस्थान के कायकष िापों के साधारण अधीिण, ननर्देशन और ननयंत्रण के लिए उत्तरर्दायी होगा
और संस्थान की उन सभी शजक्तयों का प्रयोग करेगा जजनका इस अधधननयम, पररननयमों
और अध्यार्देशों द्वारा अन्द्यथा उपबंध नहीं ककया गया है और उसे लसने के कायों का
पुनवविष ोकन करने की शजक्त होगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, प्रत्येक संस्थान का बोर् ष
ननम्नलिखित शजक्तयों का प्रयोग करेगा और ननम्नलिखित कृत्यों का पािन करेगा,
अथाषत ्:—
(क) संस्थान के प्रशासन और कायकष रण से संबंधधत नीनत के प्रश्नों पर ववननश्चय
करना ;
(ि) संस्थान के वावर्कष बज प्राक्किनों की परीिा करना और उसका अनुमोर्दन
करना ;
(ग) संस्थान के ववकास के लिए योजना की परीिा करना और उसका अनुमोर्दन
करना तथा ऐसी योजना के कायाषन्द्वयन के लिए ववत्त के स्रोतों की पहचान करना ;
(घ) अध्ययन के ववभागों, संकायों या ववद्याियों की स्थापना करना और संस्थान
में अध्ययन कायक्रष मों या पाठ्यक्रमों को आरंभ करना ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 607
(ङ) केन्द्रीय सरकार के अनुमोर्दन के पश्चात ् र्देश के भीतर िाद्य प्रसंस्करण
अध्ययन और सहबद्ध िेत्र केन्द्रों को स्थावपत करना ;
(च) डर्धग्रयां, डर्प्िोमा और ववद्या संबंधी अन्द्य ववशेर् उपाधधयां या पर्दनाम र्देना
और अध्येताववृत्तयां, छात्रववृत्तयां, पुरस्कार और पर्दक संजस्थत और प्रर्दान करना ;
(छ) ऐसी रीनत में मानद् उपाधधयां र्देना, जो पररननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की
जाए ;
(ज) मानद् पुरस्कार और अन्द्य उपाधधयां र्देना ;
(झ) शैिखणक, प्रशासननक, तकनीकी और अन्द्य पर्दों को सजृजत करना और
ववननयमों द्वारा सेवा की अहषता, वगीकरण, उसके ननबंधन और शतें तथा ऐसे पर्दों की
ननयुजक्त की पद्धनत का अवधारण करना ;
(ञ) भारत से बाहर, केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर अधधकधथत मागषर्दशकष
लसद्धांतों के अनुसार और ऐस े ववर्देश में तत्समय प्रवत्तृ ववधधयों के उपबंधों के अनुसार
िाद्य प्रसंस्करण अध्ययन और सहबद्ध िेत्र केंर स्थावपत करना ;
( ) संस्थान के ननर्देशक को, ऐसे उद्र्देश्यों के पािन के आधार पर, जो पररननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं, पररवतनष ीय वेतन का संर्दाय करना ;
(ि) पररननयम बनाना, उनका संशोधन और ननरसन करना ;
(र्) अध्यार्देशों पर ववचार करना और उनका उपांतरण करना या उन्द्हें रद्र्द
करना ; और
(ढ) ऐसी अन्द्य शजक्तयों का प्रयोग करना और ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन करना,
जो इस अधधननयम या पररननयमों द्वारा उसे प्रर्दत्त ककए जाएं या समनुर्देलशत ककए
जाएं ।
(3) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन रहते हुए बोर्,ष पररननयमों द्वारा, बोर् ष की ऐसी
शजक्तयां और कृत्यों को, ननर्देशक को प्रत्यायोजजत कर सकेगा, जो वह उधचत समझे ।
(4) बोर्,ष संस्थान के उद्र्देश्यों की उपिजब्धयों के संर्दभ ष में ननर्देशक के काय ष का वावर्कष
पुनवविष ोकन करेगा :
परन्द्तु ऐसे पुनवविष ोकन में, ऐसे मानर्दंर्ों के आधार पर, संस्थान के संकाय सर्दस्यों के
काय ष का पुनवविष ोकन, ननयतकालिकता और सौंपे गए कृत्य, जो बोर् ष द्वारा अवधाररत ककए
जाएं, सजम्मलित होंगे ।
(5) बोर्,ष संस्थान के ननगमन की तारीि स े तीन वर् ष की अवधध के भीतर, और उसके
पश्चात ् प्रत्येक तीन वर् ष में कम से कम एक बार संस्थान के, जजसके अन्द्तगतष उसका संकाय
भी है, काय ष का, र्दीघकष ालिक रणनीनत के मानर्दंर्ों और संस्थान की प्रवाही आयोजना तथा ऐस े
अन्द्य मानर्दंर्ों के आधार पर जैसा बोर् ष ववननश्चय करे, मूल्यांकन और पुनवविष ोकन करेगा
और ऐसे पुनवविष ोकन की ररपो ष को सावजष ननक करेगा ।
(6) उपधारा (5) में ननठर्दषष्ट् स्वतंत्र अलभकरण या ववशेर्ज्ञ समूह की अहषता, अनुभव और
चयन की रीनत वह होगी जो पररननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए ।
(7) उपधारा (5) के अधीन मूल्यांकन और पुनवविष ोकन की ररपो ष, बोर् ष द्वारा केंरीय
सरकार को, उस पर की गई कारषवाई की ररपो ष के साथ प्रस्तुत की जाएगी :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 608
परंतु केन्द्रीय सरकार, ररपो ष पर ववचार करने के पश्चात,् उसके द्वारा की जाने वािी
अगिी कारषवाइयों के सम्बन्द्ध में बोर् ष को सुझाव र्दे सकेगी ।
(8) जहां अध्यि या ननर्देशक की राय में, जस्थनत इतनी आपानतक है कक संस्थान के
ठहत में तुरन्द्त ववननश्चय ककया जाना आवश्यक है, वहां अध्यि, ननर्देशक के परामश ष से,
अपनी राय के आधारों को अलभलिखित करने के पश्चात,् ऐसे आर्देश जारी कर सकेगा, जो वह
आवश्यक समझे :
परन्द्तु ऐसे आर्देश, बोर् ष द्वारा अगिी बैिक में अनुसमथनष के लिए प्रस्तुत ककए
जाएंगे ।
(9) बोर्,ष इस अधधननयम के अधीन अपनी शजक्तयों का प्रयोग करते हुए और अपने
कृत्यों का ननवहष न करते हुए, केन्द्रीय सरकार के प्रनत जवाबर्देह होगा और केन्द्रीय सरकार
नीनत ववर्यक मामिों पर िोकठहत में बोर् ष को ननर्देश जारी कर सकेगी ।
(10) बोर् ष को उतनी सलमनतयां ननयुक्त करने की शजक्त होगी, जजतनी वह इस
अधधननयम के अधीन अपनी शजक्तयों के प्रयोग के लिए और अपने कृत्यों का पािन करने
के लिए आवश्यक समझे ।
बोर् ष के सर्दस्यों 13. (1) इस धारा में अन्द्यथा उपबंधधत के लसवाय, अध्यि या पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न,
की पर्दावधध, ककसी सर्दस्य की पर्दावधध, उसकी ननयुजक्त या नामननर्देशन की तारीि से तीन वर् ष की
ररजक्तयां और
अवधध के लिए होगी ।
उनको संर्देय
भत्ते । (2) ककसी पर्देन सर्दस्य की पर्दावधध तब तक बनी रहेगी, जब तक वह उस पर्द को
धारण करता है, जजसके आधार पर वह बोर् ष का सर्दस्य है ।
(3) इस धारा में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, पर्देन सर्दस्य स े लभन्द्न कोई पर्द
छोड़ने वािा सर्दस्य, जब तक कक पररर्द् अन्द्यथा ननर्देश न र्दे, उसके स्थान पर सर्दस्य के
रूप में ककसी अन्द्य व्यजक्त के नामननर्देलशत ककए जाने तक या छह मास की समाजप्त तक,
जो भी पहिे हो, पर्द पर बना रहेगा ।
(4) पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न बोर् ष के सर्दस्य ऐस े भत्तों के लिए हकर्दार होंगे, जजनका
पररननयमों द्वारा उपबंध ककया जाए ।
आकजस्मक 14. जब अध्यि या सर्दस्य के पर्द की ररजक्त, चाहे वह ह ाए जाने, त्यागपत्र, मत्ृ यु या
ररजक्त का भरा अन्द्यथा के कारण उद्भूत होती है तो ऐसी ररजक्त धारा 11 के उपबंधों के अनुसार ऐसी ररजक्त
जाना ।
की तारीि से छह मास की अवधध के भीतर भरी जाएगी ।
सर्दस्यों का 15. अध्यि या पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न, कोई सर्दस्य, केन्द्रीय सरकार को सम्बोधधत
त्यागपत्र । अपने हस्तािर सठहत लिखित रूप में सूचना द्वारा अपना पर्द त्याग सकेगा :
परंतु अध्यि या पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न कोई सर्दस्य, जब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा
उसे अपना पर्द पहिे ही छोड़ने के लिए अनुज्ञात नहीं ककया जाता है, ऐसी सूचना की प्राजप्त
की तारीि से छह मास की अवधध की समाजप्त तक या उसके पर्द पर उसके उत्तराधधकारी के
रूप में ककसी व्यजक्त को सम्यक् रूप से ननयुक्त ककए जाने तक या उसकी पर्दावधध की
समाजप्त तक, इसमें जो भी सबसे पहिे हो, पर्द धारण करता रहेगा ।
लसने । 16. (1) लसने , संस्थान का प्रधान लशिण ननकाय होगा, जो ननम्नलिखित व्यजक्तयों से
लमिकर बनेगा, अथाषत ् :—
(क) ननर्देशक — अध्यि, पर्देन ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 609
(ि) कुिसधचव — सर्दस्य, पर्देन ;
(ग) संस्थान में लशिा प्रर्दान करने के प्रयोजन के लिए संस्थान द्वारा उस रूप में
ननयुक्त या मान्द्यताप्राप्त आचायों के स्तर पर सभी पूणकष ालिक संकाय —
सर्दस्य, पर्देन ;
(घ) ऐसे तीन व्यजक्तयों को, जो संस्थान के कमचष ारी नहीं है, ख्यानत प्राप्त
ववद्वानों में से ननर्देशक के परामश ष से बोर् ष द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाएं, जजनमें से
एक-एक आहार ववज्ञान, प्रबंधन और िाद्य प्रौद्योधगकी के िेत्र स े होगा — सर्दस्य ;
और
(ङ) कमचष ाररवन्द्ृ र्द के ऐसे अन्द्य सर्दस्य, जो पररननयमों में अधधकधथत ककए
जाएं — सर्दस्य, पर्देन ।
(2) उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन नामननर्देलशत सर्दस्य की पर्दावधध उसके
नामननर्देशन की तारीि से र्दो वर् ष की होगी ।
(3) ककसी पर्देन सर्दस्य की पर्दावधध तब तक बनी रहेगी, जब तक वह उस पर्द को
धारण करता है, जजसके आधार पर वह सर्दस्य है ।
17. इस अधधननयम, पररननयमों और अध्यार्देशों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ककसी लसने के
संस्थान का लसने , संस्थान में लशिण, लशिा और परीिा के स्तरों पर ननयंत्रण रिेगी और कृत्य ।
साधारण ववननयमन करेगी और उसको बनाए रिने के लिए उत्तरर्दायी होगी और ऐसी अन्द्य
शजक्तयों का प्रयोग करेगी और ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन करेगी जो पररननयमों द्वारा उसे
प्रर्दत्त या समनुर्देलशत ककए जाएं ।
18. (1) अध्यि, बोर् ष के अधधवेशनों और संस्थान के र्दीिान्द्त समारोहों की साधारणतया अध्यि की
अध्यिता करेगा ।
शजक्तयां और
कृत्य ।
(2) अध्यि का यह कतव्ष य होगा कक वह यह सुननजश्चत करे कक बोर् ष द्वारा ककए गए
ववननश्चय कायाषजन्द्वत ककए जाते हैं ।
(3) अध्यि ऐसी अन्द्य शजक्तयों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन
करेगा जो इस अधधननयम या पररननयमों द्वारा उसे प्रर्दत्त या समनुर्देलशत ककए जाएं ।
19. (1) ननर्देशक की ननयुजक्त बोर् ष द्वारा की जाएगी । ननर्देशक ।
(2) ननर्देशक, संस्थान का मुख्य शैिखणक और कायपष ािक अधधकारी होगा और संस्थान
के उधचत प्रशासन के लिए तथा लशिा प्रर्दान करने और उसमें अनुशासन बनाए रिने के
लिए उत्तरर्दायी होगा ।
(3) ननर्देशक, बोर् ष के वावर्कष ररपो ष और िेिा को प्रस्तुत करेगा ।
(4) ननर्देशक ऐसी अन्द्य शजक्तयों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन
करेगा जो इस अधधननयम या पररननयमों या अध्यार्देशों द्वारा उसे प्रर्दत्त या समनुर्देलशत ककए
जाएं ।
20. (1) प्रत्येक संस्थान का कुिसधचव, ऐसे ननबंधनों और शतों पर ननयुक्त ककया कुिसधचव ।
जाएगा जो पररननयमों द्वारा अधधकधथत ककए जाएं और वह संस्थान के अलभिेिों, सामान्द्य
मुरा, ननधधयों और संस्थान की ऐसी अन्द्य संपवत्तयों का अलभरिक होगा जजसे बोर् ष उसके भार
साधन में सुपुर्दष करे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 610
(2) कुिसधचव बोर्,ष लसने और ऐसी सलमनतयों के सधचव के रूप में काय ष करेगा जो
पररननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाएं ।
(3) कुिसधचव अपने कृत्यों के उधचत ननवहष न के लिए ननर्देशक के प्रनत उत्तरर्दायी
होगा ।
(4) कुिसधचव ऐसी अन्द्य शजक्तयों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन
करेगा जो इस अधधननयम या पररननयमों या ननर्देशक द्वारा उसे प्रर्दत्त या समनुर्देलशत ककए
जाएं ।
अन्द्य प्राधधकारी 21. ऊपर उजल्िखित वखणतष प्राधधकाररयों और अधधकाररयों से लभन्द्न अन्द्य प्राधधकाररयों
और अधधकारी ।
और अधधकाररयों की शजक्तयां और कृत्य वे होंगे जो पररननयमों द्वारा अवधाररत ककए
जाएं ।
ननयुजक्तयां । 22. प्रत्येक संस्थान के कमचष ाररवन्द्ृ र्द की सभी ननयुजक्तयां, पररननयमों में अधधकधथत
प्रकक्रया के अनुसार,—
(क) यठर्द ननयुजक्त शैिखणक कमचष ाररवन्द्ृ र्द में सहायक आचाय ष या उसके ऊपर के
पर्द पर की जाती है या यठर्द ननयुजक्त अशैिखणक कमचष ाररवन्द्ृ र्द में ककसी ऐसे पर्द पर
की जाती है जो वेतन मैठरक्स में स्तर 7 से ऊपर है तो बोर् ष द्वारा ; और
(ि) ककसी अन्द्य र्दशा में, ननर्देशक द्वारा,
की जाएंगी ।
पररननयम । 23. इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, पररननयम ननम्नलिखित सभी या
ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अथाषत ्:—
(क) मानद् उपाधधयों का प्रर्दान ककया जाना ;
(ि) लशिण ववभागों का बनाया जाना ;
(ग) संस्थान में अध्ययन पाठ्यक्रमों के लिए और संस्थान की डर्ग्री एवं डर्प्िोमा
हेतु परीिाओं में प्रवेश के लिए प्रभाररत की जाने वािी फीस ;
(घ) अध्येताववृत्तयों, छात्रववृत्तयों, छात्र-सहायता ववृत्तयों, पर्दकों और पुरस्कारों का
संजस्थत ककया जाना ;
(ङ) अहषताएं, वगीकरण, सेवा के ननबंधन और शतें तथा शैिखणक, प्रशासननक,
तकनीकी और अन्द्य पर्दों पर ननयुजक्त की पद्धनत ;
(च) संस्थान के अधधकाररयों, लशिकों और अन्द्य कमचष ाररवंर्दृ के फायर्दे के लिए
पेंशन, बीमा और भववष्ट्य ननधधयों की स्थापना करना ;
(छ) संस्थान के प्राधधकरणों का गिन, उनकी शजक्तयां और कतव्ष य ;
(ज) छात्र-ननवास और छात्रावासों की स्थापना और उनका रिरिाव करना ;
(झ) संस्थान के छात्रों के आवास की शत ें और छात्र-ननवासों तथा छात्रावासों में
ननवास के लिए फीस और अन्द्य प्रभारों को प्रभाररत करना ;
(ञ) बोर् ष के सर्दस्यों की ररजक्तयों को भरने की रीनत ;
( ) बोर् ष के अध्यि और सर्दस्यों को संर्दत्त ककए जाने वाि े भत्ते ;
(ि) बोर् ष के आर्देशों और ववननश्चयों का अधधप्रमाणन ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 611
(र्) संस्थान की ववत्तीय जवाबर्देही ;
(ढ) बोर्,ष लसने या ककसी सलमनत के अधधवेशन, ऐसे अधधवेशनों में गणपूनत ष और
उनके कारबार के संचािन में अनुसरण की जाने वािी प्रकक्रया ; और
(ण) कोई ऐसा अन्द्य ववर्य, जो इस अधधननयम द्वारा अपेक्षित है या पररननयमों
द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
24. (1) प्रत्येक संस्थान के प्रथम पररननयम, केन्द्रीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन स े पररननयम कैसे
बनाए जाएंगे ।
पररर्द् द्वारा बनाए जाएंगे और उनकी एक प्रनत इसके बनाए जाने के पश्चात ् संसद् के
प्रत्येक सर्दन के समि यथाशक्य शीघ्र रिी जाएगी ।
(2) बोर्,ष समय-समय पर, नए या अनतररक्त पररननयम बना सकेगा या इस धारा में
इसके पश्चात ् उपबंधधत रीनत से पररननयमों को संशोधधत या ननरलसत कर सकेगा ।
(3) प्रत्येक नए पररननयम के लिए या पररननयमों में पररवधनष या पररननयम के ककसी
संशोधन या ननरसन के लिए केन्द्रीय सरकार का पूव ष अनुमोर्दन अपेक्षित होगा जो उसका
अनुमोर्दन कर सकेगी या उसे बोर् ष के ववचारण के लिए भेज सकेगी ।
(4) कोई नया पररननयम या ववद्यमान पररननयम को संशोधधत या ननरलसत करने वािा
कोई पररननयम तब तक ववधधमान्द्य नहीं होगा, जब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा उसका
अनुमोर्दन नहीं हो जाता है ।
25. इस अधधननयम और पररननयमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संस्थान के अध्यार्देश ।
अध्यार्देशों में ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध ककए जा सकेंगे,
अथाषत ्:—
(क) संस्थान में छात्रों का प्रवेश ;
(ि) संस्थान की सभी डर्धग्रयों और डर्प्िोमा के लिए अधधकधथत ककए जाने वािे
पाठ्यक्रम ;
(ग) वे शतें, जजनके अधीन छात्रों को डर्ग्री या डर्प्िोमा के पाठ्यक्रमों में और
संस्थान की परीिाओं में प्रवशे ठर्दया जाएगा और वे उन डर्ग्री और डर्प्िोमा के लिए
पात्र होंगे ;
(घ) अध्येताववृत्तयों, छात्रववृत्तयों, छात्र-सहायता ववृत्तयों, पर्दकों और पुरस्कारों को
प्रर्दान करने की शतें ;
(ङ) परीिा ननकायों, परीिकों और अनुसीमकों की ननयुजक्त करने की शतें और
ढंग तथा उनके कतव्ष य ;
(च) परीिाओं का संचािन ;
(छ) संस्थान के छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रिना ; और
(ज) कोई अन्द्य ववर्य, जजन्द्हें इस अधधननयम या पररननयमों या अध्यार्देशों द्वारा
उपबंधधत ककया जाना है या ककए जाएं ।
26. (1) इस धारा में अन्द्यथा उपबंधधत के लसवाय, अध्यार्देश लसने द्वारा बनाए अध्यार्देश कैसे
जाएंगे ।
बनाए जाएंगे ।
(2) लसने द्वारा बनाए गए सभी अध्यार्देश, उस तारीि से प्रभावी होंगे जो वह
ननर्देलशत करे, ककन्द्तु इस प्रकार बनाया गया प्रत्येक अध्यार्देश इसके बनाए जाने के पश्चात,्अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 612
यथाशक्य शीघ्र बोर् ष को प्रस्तुत ककया जाएगा और बोर् ष अपने आगामी अधधवेशन में उस पर
ववचार करेगा ।
(3) बोर् ष के पास संकल्प द्वारा ककसी अध्यार्देश को उपांतररत या रद्र्द करने की शजक्त
होगी और ऐसा अध्यार्देश, ऐस े संकल्प की तारीि से यथाजस्थनत, तद्नुसार उपांतररत या रद्र्द
हो जाएगा ।
माध्यस्थम ् 27. (1) संस्थान और उसके ककसी कमचष ारी के बीच ककसी संववर्दा से उद्भूत होने वािा
अधधकरण । कोई वववार्द, संबद्ध कमचष ारी के अनुरोध पर या संस्थान की प्रेरणा पर, माध्यस्थम ् अधधकरण
को ननठर्दषष्ट् ककया जाएगा, जजसमें संस्थान द्वारा ननयुक्त एक सर्दस्य, संबद्ध कमचष ारी द्वारा
नामननर्देलशत एक सर्दस्य और केन्द्रीय सरकार द्वारा ननयुक्त एक अधधननणाषयक होगा ।
(2) माध्यस्थम ् अधधकरण का ववननश्चय अंनतम होगा और उक्त अधधकरण द्वारा
ववननश्चय ककए गए मामिों के संबंध में कोई वार्द ककसी लसववि न्द्यायािय में नहीं िाया
जाएगा :
परंतु इस उपधारा में की गई कोई बात, यथाजस्थनत, कमषचारी या संस्थान को संववधान
के अनुच्छेर्द 32 और अनुच्छेर्द 226 के अधीन उपिब्ध न्द्यानयक उपचारों का िाभ िेने स े
ननवाररत नहीं करेगी ।
(3) माध्यस्थम ् अधधकरण को स्वयं अपनी प्रकक्रया को ववननयलमत करने की शजक्त
होगी ।
(4) माध्यस्थम ् से सम्बजन्द्धत तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध की कोई बात, इस धारा के
अधीन माध्यस्थमों को िागू नहीं होगी ।
अध्याय 4
पररषद्
पररर्द् की 28. (1) ऐसी तारीि से, जजसे केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा इस ननलमत्त ववननठर्दषष्ट्
स्थापना । करे, एक केन्द्रीय ननकाय की स्थापना की जाएगी, जजसे पररर्द् कहा जाएगा ।
(2) पररर्द्, ननम्नलिखित सर्दस्यों से लमिकर बनेगी, अथाषत ् :—
(क) िाद्य प्रसंस्करण उद्योग का भारसाधक मंत्री, केन्द्रीय सरकार — अध्यि,
पर्देन ;
(ि) िाद्य प्रसंस्करण उद्योग का राज्य मंत्री, केन्द्रीय सरकार —सर्दस्य, पर्देन ;
(ग) अध्यि, भारतीय िाद्य सुरिा और मानक प्राधधकरण —सर्दस्य, पर्देन ;
(घ) केन्द्रीय सरकार के मंत्रािय या ववभाग का, जो ववत्त से सम्बजन्द्धत हो,
भारसाधक सधचव, भारत सरकार — सर्दस्य, पर्देन ;
(ङ) मुख्य कायपष ािक अधधकारी, राष्ट्रीय भारत पररवतनष संस्था— सर्दस्य, पर्देन ;
(च) केन्द्रीय सरकार के मंत्रािय या ववभाग का, जो उच्चतर लशिा से सम्बजन्द्धत
हो, भारसाधक सधचव, भारत सरकार — सर्दस्य, पर्देन ;
(छ) पररर्द् के अध्यि द्वारा नामननर्देलशत ककए जाने वािे िाद्य प्रसंस्करण
उद्योग से तीन ख्यानतप्राप्त प्रनतननधध,— सर्दस्य ;
(ज) ऐसे तीन ख्यानतप्राप्त लशिाववद्, जो िाद्य प्रसंस्करण के िेत्र में अपने
योगर्दान के लिए जाने जात े हों, पररर्द् के अध्यि द्वारा नामननर्देलशत ककए जाएं—
सर्दस्य ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 613
(झ) संसद् के तीन सर्दस्य, जजनमें से र्दो िोक सभा द्वारा और एक राज्य सभा
द्वारा ननवाषधचत ककए जाएंगे —सर्दस्य :
परंतु पररर्द् के सर्दस्य का पर्द, संसद् के ककसी भी सर्दन का सर्दस्य चुने जाने
या सर्दस्य होने के लिए, उसके धारक को ननरठहतष नहीं करेगा ;
(ञ) केन्द्रीय सरकार के मंत्रािय का, जो िाद्य प्रसंस्करण उद्योग से सम्बजन्द्धत
हो, भारसाधक सधचव, भारत सरकार —सर्दस्य-सधचव, पर्देन ।
(3) केन्द्रीय सरकार, आर्देश द्वारा, सर्दस्यों में से एक सर्दस्य को पररर्द् के उपाध्यि के
रूप में पर्दालभहीत कर सकेगी ।
29. (1) इस धारा में अन्द्यथा उपबंधधत के लसवाय, पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न पररर्द् के पररर्द् के
सर्दस्यों की
ककसी सर्दस्य की पर्दावधध उसके नामननर्देशन की तारीि से तीन वर् ष की अवधध के लिए
पर्दावधध,
होगी :
ररजक्तयां और
परंतु धारा 28 की उपधारा (2) के िंर् (झ) में ननठर्दषष्ट् सर्दस्य की पर्दावधध वैसे ही उनको संर्देय
भत्ते ।
यथाशीघ्र समाप्त हो जाएगी जैसे ही सर्दस्य, मंत्री या राज्य मंत्री या उप मंत्री या िोक सभा
अध्यि या उपाध्यि या राज्य सभा का उपसभापनत बन जाता है या उस सर्दन का, जजससे
वह ननवाषधचत हुआ था, सर्दस्य नहीं रह जाता है ।
(2) ककसी पर्देन सर्दस्य की पर्दावधध तब तक बनी रहेगी, जब तक वह उस पर्द को
धारण करता है, जजसके आधार पर वह सर्दस्य है ।
(3) धारा 28 की उपधारा (2) के िंर् (छ) और िंर् (ज) में ननठर्दषष्ट् पररर्द् के सर्दस्य
केन्द्रीय सरकार के प्रसार्दपयन्द्ष त पर्दधारण करेंगे ।
(4) पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न पररर्द् के सर्दस्य की ररजक्त ऐसी रीनत में भरी जाएगी, जो
ववठहत की जाए ।
(5) ककसी आकजस्मक ररजक्त को भरने के लिए नामननर्देलशत सर्दस्य की पर्दावधध, उस
सर्दस्य की पर्दावधध के शेर् भाग तक बनी रहेगी जजसके स्थान पर वह इस प्रकार ननयुक्त
ककया गया है ।
(6) इस धारा में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, पर्देन सर्दस्य स े लभन्द्न, पर्द
छोड़ने वािा सर्दस्य जब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा, अन्द्यथा ननर्देश न र्दे, जब तक कोई
अन्द्य व्यजक्त उसके स्थान पर सर्दस्य के रूप में नामननर्देलशत नहीं कर ठर्दया जाता है या
छह मास की समाजप्त तक, जो भी पहिे हो, तब तक पर्द धारण करता रहेगा ।
(7) पर्देन सर्दस्यों से लभन्द्न, पररर्द् के सर्दस्यों को ऐसे यात्रा और अन्द्य भत्ते संर्दत्त ककए
जाएंगे जजन्द्हें पररननयमों द्वारा उपबंधधत ककया जाए ।
(8) पर्देन सर्दस्य से लभन्द्न, पररर्द् के ककसी सर्दस्य को, केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके
पर्द से, ऐसी पररजस्थनतयों और ऐसी रीनत स े ह ाया जा सकेगा, जो ववठहत की जाएं ।
30. (1) पररर्द् का यह साधारण कतव्ष य होगा कक वह सभी संस्थानों के कक्रयाकिापों पररर्द् के
का समन्द्वय करे और यह सस्ं थानों के काय ष को बढाने की दृजष्ट् स े अनुभवों, ववचारों तथा कृत्य ।
प्रसंगों को साझा करने के लिए उसे सुकर बनाएगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, पररर्द् ननम्नलिखित कृत्यों का
पािन करेगी, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 614
(क) संस्थानों के कायकष रण के लिए व्यापक नीनत ववर्यक काय ष ढांचा अधधकधथत
करना ;
(ि) छात्रववृत्तयों, जजनमें नागररकों के अनुसूधचत जानतयों, अनुसूधचत जनजानतयों
और अन्द्य सामाजजक एवं शैक्षिक रूप से वपछड़े वगों के छात्रों द्वारा अनुसंधान और
उनके फायर्दे के लिए छात्रववृत्तयां भी हैं, के संस्थान की केन्द्रीय सरकार को लसफाररश
करना ;
(ग) सामान्द्य ठहत के ऐस े ववर्यों पर सस्ं थानों स े ववचार-ववमश ष करना, जो ककसी
संस्थान द्वारा, उसे ननठर्दषष्ट् ककए जाएं ;
(घ) संस्थानों के कायकष रण में आवश्यक समन्द्वय और सहयोग को बढावा र्देना ;
(ङ) नीनत ववर्यक उद्र्देश्यों की उपिजब्ध का पुनवविष ोकन करना ; और
(च) ऐसे अन्द्य कृत्यों का पािन करना, जो ववठहत ककए जाएं ।
पररर्द् की 31. पररर्द्, ऐसे समय और स्थान पर बैिक करेगी और अपनी बैिकों (ऐसी बैिकों में
बैिकें । गणपूनत ष सठहत) में ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगी, जो ववठहत की जाए ।
अध्याय 5
र्वि, िेखा और संपरीक्षा
केन्द्रीय सरकार 32. केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के अधीन संस्थानों को अपने कृत्यों का र्दितापूण ष
द्वारा अनुर्दान । ननवहष न करने में समथ ष बनाने के प्रयोजन के लिए, संसद् द्वारा इस ननलमत्त ववधध द्वारा
ककए गए सम्यक् ववननयोग के पश्चात,् प्रत्येक संस्थान को प्रत्येक ववत्तीय वर् ष में ऐसी
धनरालशयों का संर्दाय ऐसी रीनत में कर सकेगी, जो वह िीक समझे ।
संस्थान की 33. (1) प्रत्येक संस्थान एक ननधध बनाए रिेगा, जजसमें ननम्नलिखित को जमा ककया
ननधध । जाएगा,—
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा उपिब्ध कराई गई सभी धनरालशयां ;
(ि) संस्थान द्वारा प्राप्त सभी फीस और अन्द्य प्रभार ;
(ग) संस्थान द्वारा अनुर्दानों, र्दानों, संर्दानों, उपकृनतयों, वसीयतों या अंतरणों के रूप
में प्राप्त सभी धनरालशयां ; और
(घ) संस्थान द्वारा ककसी अन्द्य रीनत से या ककसी अन्द्य स्रोत स े प्राप्त सभी
धनरालशयां ।
(2) प्रत्येक संस्थान की ननधध में जमा की गई सभी धनरालशयां, ऐसे बकैं ों में जमा की
जाएंगी या ऐसी रीनत में ववननठहत की जाएंगी, जो संस्थान, बोर् ष के अनुमोर्दन से ववननश्चय
करे ।
(3) प्रत्येक संस्थान की ननधध, संस्थान के व्ययों को, जजसके अन्द्तगषत इस अधधननयम के
अधीन अपनी शजक्तयों का प्रयोग करते हुए और अपने कृत्यों का ननवहष न करते हुए उपगत
व्यय भी हैं, चुकाने के लिए उपयोजजत की जाएगी ।
िेिा और 34. (1) प्रत्येक संस्थान उधचत िेिा और अन्द्य सुसंगत अलभिेि बनाए रिेगा तथा
संपरीिा । िेिाओं का एक वावर्कष वववरण, जजसके अन्द्तगषत तुिनपत्र भी है, ऐसे प्ररूप में और रीनत स े
तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक के परामश ष स े
ववठहत ककया जाए ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 615
(2) प्रत्येक संस्थान के िेिाओं की संपरीिा भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक द्वारा
की जाएगी और ऐसी संपरीिा के सम्बन्द्ध में उसके द्वारा उपगत कोई व्यय संस्थान द्वारा
भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक को संर्देय होगा ।
(3) भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक को और संस्थान के िेिाओं की संपरीिा के
सम्बन्द्ध में उसके द्वारा ननयुक्त ककसी व्यजक्त को ऐसी संपरीिा के सम्बन्द्ध में वही
अधधकार, ववशेर्ाधधकार और प्राधधकार प्राप्त होंगे जो भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक को
सरकारी िेिाओं की संपरीिा के सम्बन्द्ध में प्राप्त हैं और ववलशष्ट् तया उस े बठहयां, िेिाओं,
सम्बजन्द्धत वाउचरों और अन्द्य र्दस्तावेजों तथा कागजपत्रों को प्रस्तुत ककए जाने की मांग
करने और संस्थान के कायाषियों का ननरीिण करने का अधधकार होगा ।
(4) भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक द्वारा या उसके र्दवारा इस ननलमत्त ननयुक्त
ककसी अन्द्य व्यजक्त द्वारा यथाप्रमाखणत प्रत्येक संस्थान के िेिे, उस पर संपरीिा ररपो ष के
साथ, प्रनतवर् ष केन्द्रीय सरकार को अग्रेवर्त ककए जाएंगे और वह सरकार उन्द्हें ऐसी प्रकक्रया के
अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधधकधथत की जाए, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि
रिवाएगी ।
35. (1) प्रत्येक संस्थान अपने कमचष ाररयों, जजनमें ननर्देशक भी है, के फायर्दे के लिए ऐसी पेंशन, बीमा
रीनत से और ऐसी शतों के अधीन रहते हुए, जो पररननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाएं, ऐसी और भववष्ट्य
ननधध ।
पेंशन, बीमा और भववष्ट्य ननधध ननयत करेगा, जो वह िीक समझे ।
(2) जहां, उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् भववष्ट्य ननधध ननयत की गई है, वहां केन्द्रीय सरकार
1925 का 19 यह घोर्णा कर सकेगी कक भववष्ट्य ननधध अधधननयम, 1925 के उपबंध ऐसी ननधध को वैसे ही
िागू होंगे, मानों वे सरकारी भववष्ट्य ननधध हैं ।
अध्याय 6
प्रकीर् ि
36. इस अधधननयम या पररननयमों के अधीन गठित पररर्द् या ककसी संस्थान या बोर् ष ररजक्तयों, आठर्द
के कारण
या लसने या ककसी अन्द्य सलमनत का कोई काय ष केवि इस कारण से अववधधमान्द्य नहीं हो
कायों और
जाएगा कक,—
कायवष ाठहयों का
(क) उसमें कोई ररजक्त है या उसके गिन में कोई त्रुठ है ; या अववधधमान्द्य न
(ि) उसके सर्दस्य के रूप में काय ष करने वािे ककसी व्यजक्त के नामननर्देशन या होना ।
ननयुजक्त में कोई त्रुठ है ; या
(ग) उसकी प्रकक्रया में कोई ऐसी अननयलमतता है जो मामिे के गुणागुण को
प्रभाववत नहीं करती है ।
37. इस अधधननयम, पररननयमों या अध्यार्देशों के उपबंधों के अनुसरण में सद्भावपूवकष सद्भावपूवकष
की गई या की जाने के लिए आशनयत ककसी बात के लिए कोई भी वार्द, अलभयोजन या की गई
कारषवाई का
अन्द्य ववधधक कायवष ाही बोर् ष के अध्यि या सर्दस्यों, लसने या पररर्द् या संस्था के ककसी
संरिण ।
अधधकारी या कमचष ारी के ववरूद्ध नहीं होगी ।
38. (1) केन्द्रीय सरकार अधधसूचना द्वारा, इस अधधननयम के उपबंधों को कायाषजन्द्वत ननयम बनान े
करने के लिए ननयम बना सकेगी ।
की शजक्त ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, ऐस े
ननयम ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अथाषत ् :—
(क) धारा 29 की उपधारा (4) के अधीन ररजक्त को भरने की रीनत ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 616
(ि) वे पररजस्थनतयां और रीनत, जजनमें पररर्द् के ककसी सर्दस्य को धारा 29 की
उपधारा (8) के अधीन ह ाया जा सकेगा ;
(ग) धारा 30 की उपधारा (2) के िंर् (च) के अधीन पररर्द् के अन्द्य कृत्य ;
(घ) धारा 31 के अधीन पररर्द् की बैिक का समय और स्थान, उसकी गणपूनत ष
तथा उसमें कारबार संचािन की प्रकक्रया ;
(ङ) धारा 34 की उपधारा (1) के अधीन वह प्ररूप और रीनत, जजसमें िेिाओं का
वावर्कष वववरण, जजसके अन्द्तगषत तुिनपत्र भी है, तैयार ककया जाएगा ; और
(च) कोई अन्द्य ववर्य, जो ववठहत ककया जाना अपेक्षित है या ववठहत ककया
जाए ।
ननयमों, 39. (1) इस अधधननयम के अधीन बनाया गया प्रत्येक ननयम, प्रत्येक पररननयम और
पररननयमों और
प्रत्येक अध्यार्देश भारत के राजपत्र में प्रकालशत ककया जाएगा ।
अध्यार्देशों का
(2) इस अधधननयम के अधीन बनाया गया प्रत्येक ननयम, प्रत्येक पररननयम और प्रत्येक
राजपत्र में
प्रकालशत ककया अध्यार्देश बनाए जाने के पश्चात,् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि, जब वह सत्र में
जाना और संसद् हो, कुि तीस ठर्दन की अवधध के लिए रिा जाएगा, जो एक सत्र में या र्दो या अधधक
के समि रिा
आनुक्रलमक सत्रों में समाववष्ट् हो सकेगी और यठर्द उस सत्र के या पूवोक्त आनुक्रलमक सत्रों
जाना ।
के िीक बार्द के सत्र के अवसान के पूव,ष र्दोनों सर्दन उस ननयम, पररननयम या अध्यार्देश में
कोई पररवतषन करने के लिए सहमत हो जाते हैं कक वह ननयम, पररननयम या अध्यार्देश नहीं
बनाया जाना चाठहए तो वह, यथाजस्थनत, तत्पश्चात ् ननयम, पररननयम या अध्यार्देश ऐसे
पररवनततष रूप में ही प्रभावी होगा या वह ननष्ट्प्रभावी हो जाएगा ; तथावप इस प्रकार का कोई
पररवतनष या बानतिीकरण इस ननयम, पररननयम या अध्यार्देश के अधीन पूव ष में की गई
ककसी बात की ववधधमान्द्यता पर प्रनतकूि प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
कठिनाइयों को 40. (1) यठर्द इस अधधननयम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्द्न
र्दरू करने की होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस
शजक् त ।
अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हों और जो कठिनाई को र्दरू करने के लिए उस े
आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो :
परंतु इस धारा के अधीन कोई आर्देश इस अधधननयम के प्रारम्भ की तारीि स े
तीन वर् ष की समाजप्त के पश्चात ् नहीं ककया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन ककया गया प्रत्येक आर्देश, इसे ककए जाने के पश्चात,् यथाशीघ्र
संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिा जाएगा ।
संक्रमणकािीन 41. इस अधधननयम में ककसी बात के होते हुए भी,—
उपबंध । (क) ककसी संस्थान का शासी बोर्,ष जो इस अधधननयम के प्रारम्भ से िीक पहि े
उस रूप में काय ष कर रहा है, तब तक काय ष करता रहेगा, जब तक इस अधधननयम के
अधीन उस संस्थान के लिए ककसी नए बोर् ष का गिन नहीं हो जाता है, ककन्द्तु इस
अधधननयम के अधीन ककसी नए बोर् ष के गिन पर ववद्यमान बोर् ष के ऐस े सर्दस्य, जो
ऐसे गिन से पहिे पर्दधारण कर रहे हैं, पर्दधारण करने से प्रववरत हो जाएंगे :
(ि) जब तक कक इस अधधननयम के अधीन प्रथम पररननयम या अध्यार्देश नहीं
बनाए जाते हैं, तब तक इस अधधनयम के प्रारम्भ स े िीक पहिे यथाप्रवत्तृ ववद्यमान
संस्थानों के पररननयम और अध्यार्देश तत्स्थानी संस्थानों को वहां तक िाग ू होते रहेंगे,
जहां तक वे इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 617
अनुसूची
[िारा 4 देखखए]
िम सं. र्वद्यमाि संस्थाि का िाम तत्स्थािी संस्थाि का िाम
(1) (2) (3)
1. राष्ट्रीय िाद्य प्रौद्योधगकी उद्यलमता और राष्ट्रीय िाद्य प्रौद्योधगकी, उद्यलमता और
प्रबंध संस्थान (एनआईएफ ीईएम) कंुर्िी, प्रबंध संस्थान कंुर्िी, हररयाणा ।
हररयाणा ।
2. भारतीय िाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योधगकी राष्ट्रीय िाद्य प्रौद्योधगकी, उद्यलमता और
संस्थान (आईआईएफपी ी) तंजावुर, तलमिनार्ु । प्रबंध संस्थान तंजावुर, तलमिनार्ु ।
__________अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 618अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
619
सीसमत दानयत्व भागीदारी (सिं ोिि)
अधिनियम, 2021
(2021 का अधिनियम संखयांक 31)
[13 अगस्त, 2021]
सीसमत दानयत्व भागीदारी अधिनियम, 2008
का संिोिि करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी (संशोधन) संक्षिप्त नाम
और प्रारंभ ।
अधधननयम, 2021 है ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना
द्वारा, ननयत करे और इस अधधननयम के लभन्द्न-लभन्द्न उपबंधों के लिए लभन्द्न-लभन्द्न
तारीिें ननयत की जा सकेंगी और ककसी ऐसे उपबंध में इस अधधननयम के प्रारंभ के
प्रनत ककसी ननर्देश का यह अथ ष िगाया जाएगा कक वह उस उपबंध के प्रवत्तृ होने के
प्रनतननर्देश है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
620
कनतपय अन्द्य पर्दों 2. संपूण ष सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी अधधननयम, 2008 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् 2009 का 6
द्वारा कनतपय पर्दों मूि अधधननयम कहा गया है) में “कंपनी अधधननयम, 1956” शब्र्दों और अंकों के स्थान 1956 का 1
के ननर्देश का
पर, जहां-जहां वे आते हैं, “कंपनी अधधननयम, 2013” शब्र्द और अंक रिे जाएंगे । 2013 का 18
प्रनतस्थापन ।
धारा 2 का 3. मूि अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (1) में,—
संशोधन ।
(क) िंर् (ग) में, “धारा 10चर्द की उपधारा (1)”, शब्र्दों, अंकों, अिरों और
कोष्ट्िकों के स्थान पर, “धारा 410”, शब्र्द और अंक रिे जाएंगे ;
(ि) िंर् (घ) में, “धारा 3”, शब्र्द और अंक, जहां-जहां वे आते हैं, “धारा 2
के िंर् (20)”, शब्र्द, अंक और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ग) िंर् (ङ) में, “और उपजीववका”, शब्र्दों के स्थान पर, “और उपजीववका,
ककसी अन्द्य कक्रयाकिाप के लसवाए, जो केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा,
अपवजजतष कर सकेगी” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(घ) िंर् (र्द) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(र्दक) “प्रार्देलशक ननर्देशक” से, यथाजस्थनत, इस अधधननयम या कंपनी
अधधननयम, 2013 के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी हैलसयत 2013 का 18
से ननयुक्त व्यजक्त अलभप्रेत है ;’;
(ङ) िंर् (ध) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(ध) “रजजस्रार” से, यथाजस्थनत, इस अधधननयम या कंपनी
अधधननयम, 2013 के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा, रजजस्रार, 2013 का 18
अपर रजजस्रार, संयुक्त रजजस्रार, उप-रजजस्रार या सहायक रजजस्रार के
रूप में ननयुक्त व्यजक्त अलभप्रेत है ;’;
(च) िंर् (न) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(नक) “िघु सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी” से ऐसी सीलमत र्दानयत्व
भागीर्दारी अलभप्रेत है—
(i) जजसका अलभर्दाय पच्चीस िाि रुपए से अधधक नहीं है या
ऐसी उच्चतर रकम, जो ववठहत की जाए, पांच करोड़ रुपए से अनधधक
है ; और
(ii) जजसका आवत,ष िीक पवू वष ती ववत्तीय वर् ष के लिए िेिा-
वववरण और शोधन िमता के अनुसार, चािीस िाि रुपए से अधधक
नहीं है या ऐसी उच्चतर रकम, जो ववठहत की जाए, पचास करोड़
रुपए से अनधधक है ; या
(iii) ऐसी अन्द्य अपेिाएं, जो ववठहत की जाएं, पूरी करती हैं,
और ऐसी अन्द्य शतें और ननबंधन, जो ववठहत की जाएं, पूरी करती हैं ;’;
(छ) िंर् (प) में, “धारा 10चि की उपधारा (1)” शब्र्दों, अंकों, अिरों और
कोष्ट्िकों के स्थान पर “धारा 408” शब्र्द और अंक रिे जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
621
4. मूि अधधननयम की धारा 7 में,— धारा 7 का
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) के स्पष्ट् ीकरण में, “िीक पूववष ती एक वर् ष के र्दौरान एक
सौ बयासी ठर्दन” शब्र्दों के स्थान पर, “ववत्तीय वर् ष के र्दौरान बीस ठर्दन” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ि) उपधारा (6) में, “धारा 266क से धारा 266छ”, शब्र्दों, अंकों और
अिरों के स्थान पर, “धारा 153 से धारा 159” शब्र्द और अंक रिे जाएंगे ।
5. मूि अधधननयम की धारा 10 में,— धारा 10 का
संशोधन ।
(क) पाश्व ष शीर् ष में, “धारा 8” शब्र्द और अंक का िोप ककया जाएगा ;
(ि) उपधारा (1) में, “जुमाषने स,े जो र्दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा,
ककन्द्त ु जो पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंर्नीय होगा”, शब्र्दों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“र्दस हजार रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा और ऐसा उल्िंघन जारी
रहने की र्दशा में, ऐसे पहिे ठर्दन के पश्चात ् जजसके र्दौरान ऐसा उल्िंघन
जारी रहता है, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी अधधकतम एक िाि रुपए और
प्रत्येक सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी के ऐसे भागीर्दार पचास हजार रुपए तक
के अधीन रहते हुए, प्रत्येक ठर्दन के लिए सौ रुपए अनतररक्त शाजस्त का
र्दायी होगा ।”;
(ग) उपधारा (2) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधाराएं रिी जाएंगी,
अथाषत ् :—
“(2) यठर्द सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, धारा 7 की उपधारा (4) के
उपबंध का उल्िंघन करती है तो ऐसी सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और उसका
प्रत्येक अलभठहत भागीर्दार पाचं हजार रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा और
ऐसा उल्िंघन जारी रहने की र्दशा में, ऐस े पहिे ठर्दन के पश्चात ् जजसके
र्दौरान ऐसा उल्िंघन जारी रहता है, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी अधधकतम
पचास हजार रुपए और उसका प्रत्येक अलभठहत भागीर्दार पच्चीस हजार
रुपए तक के अधीन रहते हुए, प्रत्येक ठर्दन के लिए सौ रुपए अनतररक्त
शाजस्त का र्दायी होगा ।
(3) यठर्द सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, धारा 7 की उपधारा (5) या धारा
9 के उपबंधों का उल्िंघन करती है तो ऐसी सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और
उसका प्रत्येक भागीर्दार र्दस हजार रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा और ऐसा
उल्िंघन जारी रहने की र्दशा में, ऐस े पहिे ठर्दन के पश्चात ् जजसके र्दौरान
ऐसा उल्िंघन जारी रहता है, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी अधधकतम एक िाि
रुपए और उसका प्रत्येक भागीर्दार पचास हजार रुपए तक के अधीन रहते
हुए, प्रत्येक ठर्दन के लिए सौ रुपए अनतररक्त शाजस्त का र्दायी होगा ।”।
6. मूि अधधननयम की धारा 13 में, उपधारा (4) के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा 13 का
उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(4) यठर्द इस धारा की अपिे ाओं के अनुपािन में कोई व्यनतक्रम ककया
जाता है तो सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और उसका प्रत्येक भागीर्दार, ऐसाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
622
व्यनतक्रम के जारी रहने के र्दौरान, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और उसका प्रत्येक
भागीर्दार अधधकतम पचास हजार रुपए तक के अधीन रहते हुए, प्रत्येक ठर्दन के
लिए पांच सौ रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा ।”।
धारा 15 का 7. मूि अधधननयम की धारा 15 की उपधारा (2) में, िंर् (ि) के स्थान पर,
संशोधन । ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(ि) ककसी अन्द्य सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी या कंपनी या व्यापार धचह्न
अधधननयम, 1999 के अधीन ककसी अन्द्य व्यजक्त के रजजस्रीकृत व्यापार धचह्न 1999 का 47
के समरूप है या उससे बहुत कुछ लमिता-जुिता है ।”।
धारा 17 के स्थान 8. मूि अधधननयम की धारा 17 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
पर नई धारा का अथाषत ् :—
प्रनतस्थापन ।
सीलमत र्दानयत्व “17. (1) धारा 15 और धारा 16 में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी,
भागीर्दारी के नाम
जहां कोई सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, चाहे अनवधानता से या अन्द्यथा, अपने
की पररशुद्धध ।
पहिे रजजस्रीकरण पर या ककसी नए नाम में उसके रजजस्रीकरण पर ककसी ऐस े
नाम से रजजस्रीकृत हो गई है, जो,—
(क) ककसी अन्द्य सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी या कंपनी ; या
(ि) व्यापार धचह्न अधधननयम, 1999 के अधीन ककसी स्वालमत्वधारी 1999 का 47
का रजजस्रीकृत व्यापार धचह्न है,
के समरूप है या उससे बहुत कुछ लमिता-जुिता है, जजससे भूि होने की
संभावना है, वहां केन्द्रीय सरकार, ऐसी सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी या क्रमश: िंर्
(क) और िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् स्वत्वधारी या कंपनी को ननर्देश र्दे सकेगी कक ऐसी
सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी ऐसे ननर्देश जारी करने की तारीि से तीन मास की
अवधध के भीतर अपने नाम में या नए नाम में पररवतनष करे :
परंतु यह कक रजजस्रीकृत व्यापार धचह्न के स्वत्वधारी का कोई आवेर्दन,
इस अधधननयम के अधीन ननगमन या रजजस्रीकरण या सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी
के नाम पररवतनष की तारीि से तीन वर् ष की अवधध के भीतर चिाने योग्य
होगा ।
(2) जहां कोई सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, उपधारा (1) के अधीन अपना
नाम पररवतनष करती है या नया नाम अलभप्राप्त करती है, वहााँ वह ऐसे पररवतषन
की तारीि स े पंरह ठर्दन की अवधध के भीतर, रजजस्रार को केन्द्रीय सरकार के
आर्देश सठहत पररवतनष की सूचना र्देगी जो ननगमन प्रमाणपत्र में आवश्यक
पररवतनष करेगा और ननगमन प्रमाणपत्र में ऐस े पररवतनष के तीस ठर्दन के भीतर
ऐसी सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी अपने सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी करार में अपना
नाम पररवनततष करेगी ।
(3) यठर्द सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, उपधारा (1) के अधीन ठर्दए गए ककसी
ननर्देश का अनुपािन करने में व्यनतक्रम करती है, तो केन्द्रीय सरकार, ऐसी रीनत
में, जो ववठहत की जाए, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी को कोई नया नाम आवंठ त
करेगी और रजजस्रार पुराने नाम के स्थान पर सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी का नया
नाम रजजस् र में र्दज ष करेगा और नए नाम के साथ नया ननगमन प्रमाणपत्र जारीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
623
करेगा जजसे सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी उसके पश्चात ् उपयोग करेगी :
परंतु इस उपधारा में अन्द्तववषष्ट् कोई बात, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी को
धारा 16 के उपबंधों के अनुसार अपने नाम में पश्चातवती पररवतनष को नहीं
रोकेगी ।”।
9. मूि अधधननयम की धारा 18 का िोप ककया जाएगा । धारा 18 का
िोप ।
10. मूि अधधननयम की धारा 21 में, उपधारा (2) के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा 21 का
उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(2) यठर्द सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, इस धारा के उपबधं ों का उल्िंघन
करती है तो सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी र्दस हजार रुपए की शाजस्त का र्दायी
होगी ।”।
11. मूि अधधननयम की धारा 25 में, उपधारा (4) और उपधारा (5) के स्थान धारा 25 का
पर, ननम्नलिखित उपधाराएं रिी जाएंगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(4) यठर्द सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, उपधारा (2) के उपबधं ों का उल्िंघन
करती है तो सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और उसका प्रत्येक अलभठहत भागीर्दार र्दस
हजार रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा ।
(5) यठर्द उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् उल्िंघन सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी के
ककसी भागीर्दार द्वारा ककया गया है तो ऐसा भागीर्दार र्दस हजार रुपए की शाजस्त
का र्दायी होगा ।”।
12. मूि अधधननयम की धारा 30 की उपधारा (2) में, “र्दो वर्”ष शब्र्दों के स्थान धारा 30 का
संशोधन ।
पर, “पांच वर्”ष शब्र्द रिे जाएगं े ।
13. मूि अधधननयम की धारा 34 में, उपधारा (5) के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा 34 का
उपधाराएं रिी जाएंगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(5) कोई सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, जो उपधारा (3) के उपबंधों का
अनुपािन करने में असफि रहती है, तो ऐसी सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और
उसका अलभठहत भागीर्दार ऐसी असफिता के जारी रहने के र्दौरान, सीलमत
र्दानयत्व भागीर्दारी अधधकतम एक िाि रुपए और उसके प्रत्येक अलभठहत
भागीर्दार पचास हजार रुपए तक के अधीन रहते हुए, प्रत्येक ठर्दन के लिए सौ
रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा ।
(6) कोई सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, जो उपधारा (1), उपधारा (2) और
उपधारा (4) के उपबंधों का अनुपािन करने में असफि रहती है, तो ऐसी सीलमत
र्दानयत्व भागीर्दारी, ऐसे जुमाषन े से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा
ककन्द्त ु पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंर्नीय होगा और ऐसी सीलमत
र्दानयत्व भागीर्दारी का प्रत्येक अलभठहत भागीर्दार ऐसे जुमाषने से, जो र्दस हजार
रुपए स े कम का नहीं होगा ककन्द्त ु एक िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंर्नीय
होगा ।”।
14. मूि अधधननयम की धारा 34 के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा अंतःस्थावपत नई धारा
34क का
की जाएगी, अथाषत ् :— अंतःस्थापन ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
624
िेिा और संपरीिा “34क. केन्द्रीय सरकार, कंपनी अधधननयम, 2013 की धारा 132 के अधीन 2013 का 18
मानक ।
गठित राष्ट्रीय ववत्तीय ररपोठ ंग प्राधधकरण के परामश ष से, चा षर् ष अकाउं ें
अधधननयम, 1949 की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय चा षर् ष अकाउं ें संस्थान 1949 का 38
द्वारा की गई लसफाररशों के अनुसार, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी के ककसी प्रवग ष
या प्रवगों के लिए ननम्नलिखित मानक ववठहत कर सकेगी,—
(क) िेिा मानक ; और
(ि) संपरीिा मानक ;”।
धारा 35 का 15. मूि अधधननयम की धारा 35 की उपधारा (2) और उपधारा (3) के स्थान पर
संशोधन । ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(2) यठर्द कोई सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी, उपधारा (1) के अधीन अपनी
वावर्कष वववरणी उसमें ववननठर्दषष्ट् अवधध की समाजप्त से पूव ष फाइि करने में
असफि रहती है, तो ऐसी सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और उसका अलभठहत
भागीर्दार ऐसी असफिता के जारी रहने के र्दौरान, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी
अधधकतम एक िाि रुपए और प्रत्येक अलभठहत भागीर्दार पचास हजार रुपए तक
के अधीन रहते हुए, प्रत्येक ठर्दन के लिए सौ रुपए शाजस्त का र्दायी होगा ।”।
धारा 39 के स्थान 16. मूि अधधननयम की धारा 39 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
पर नई धारा का अथाषत ् :—
प्रनतस्थापन ।
अपराधों का “39. (1) र्दंर् प्रकक्रया संठहता, 1973 में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए 1974 का 2
शमन ।
भी, प्रार्देलशक ननर्देशक या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधधकृत कोई ऐसे अन्द्य
अधधकारी, जो प्रार्देलशक ननर्देशक की पंजक्त से कम का न हो इस अधधननयम के
अधीन ऐसे ककसी अपराध का, जो केवि जुमाषन े से र्दंर्नीय है, ऐसे व्यजक्त से,
जजसके बारे में युजक्तयुक्त रूप से अपराध काररत करने का संर्देह है ऐसी रालश
का, जो अपराध के लिए उपबंधधत अधधकतम जुमाषने की रकम तक की हो
सकेगी, ककन्द्तु जो अपराध के लिए उपबंधधत न्द्यूनतम रकम से अन्द्यून नहीं होगी,
संग्रहण करके, शमन कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, सीलमत र्दानयत्व
भागीर्दारी या उसका भागीर्दार या उसका अलभठहत भागीर्दार द्वारा काररत ऐस े
अपराध, जो उस तारीि से तीन वर् ष की अवधध के भीतर, जजसको उसके द्वारा
वैसा ही अपराध काररत ककया गया था या इस धारा के अधीन उसे शमन ककया
गया था, को िागू नहीं होगी ।
स्पष्ट्टीकरर्—शंकाओं को र्दरू करने के लिए यह स्पष्ट् ककया जाता है कक
कोई र्दसू रा अपराध या पश्चातवती अपराध, उस तारीि से तीन वर् ष की अवधध
की समाजप्त के पश्चात ् काररत ककया जाता है, जजसको पूववष ती अपराध शमन
ककया गया था, को प्रथम अपराध समझा जाएगा ।
(3) ककसी अपराध के शमन के लिए प्रत्येक आवेर्दन, रजजस्रार को ककया
जाएगा जो इसे अपनी ीका-ठ प्पणी के साथ, यथाजस्थनत, प्रार्देलशक ननर्देशक या
ऐसे ककसी अधधकारी को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधधकृत प्रार्देलशक ननर्देशक
की पंजक्त से कम का न हो, अग्रेवर्त करेगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
625
(4) जहा ं इस धारा के अधीन ककसी अपराध का चाहे वह ककसी अलभयोजन
को संजस्थत ककए जाने से पूव ष हो या पश्चात ् शमन ककया जाता है, तो उसकी
संसूचना रजजस्रार को उस तारीि से, जजसको अपराध का इस प्रकार शमन ककया
जाता है, सात ठर्दन की अवधध के भीतर र्दी जाएगी ।
(5) जहां ककसी अपराध का, ककसी अलभयोजन को संजस्थत ककए जाने स े
पूव ष शमन ककया जाता है, वहां ऐस े अपराध के संबंध में कोई अलभयोजन संजस्थत
नहीं ककया जाएगा ।
(6) जहां ककसी अलभयोजन के संजस्थत ककए जाने के पश्चात,् ककसी अपराध
का शमन ककया जाता है, वहां ऐसे शमन को रजजस्रार द्वारा लिखित में उस
न्द्यायािय को सूचना र्दी जाएगी जजसमें अलभयोजन िंत्रबत है और अपराध के
शमन की ऐसी सूचना र्देने पर ऐसे अपराध के बारे में जजसका शमन ककया गया
है, अपराधी उन्द्मोधचत हो जाएगा ।
(7) प्रार्देलशक ननर्देशक या कोई अन्द्य अधधकारी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा
प्राधधकृत प्रार्देलशक ननर्देशक की पंजक्त से कम का न हो ककसी अपराध के शमन
के प्रस्ताव पर ननप ारा करत े समय आर्देश द्वारा, सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी के
ककसी भी भागीर्दार, अलभठहत भागीर्दार या अन्द्य कमचष ारी को, इस अधधननयम के
अधीन संर्दत्त की जाने वािी यथा अपेक्षित फीस या अनतररक्त फीस के संर्दाय पर
या ऐसे समय के भीतर जो आर्देश में ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, ऐसी वववरणी, िेिा
या अन्द्य र्दस्तावेज फाइि करने या रजजस् र करने का ननर्देश र्दे सकेगा ।
(8) इस धारा में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, यठर्द सीलमत
र्दानयत्व भागीर्दारी का कोई भागीर्दार या अलभठहत भागीर्दार या अन्द्य कमचष ारी, जो
प्रार्देलशक ननर्देशक या केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राधधकृत प्रार्देलशक ननर्देशक की पंजक्त
से अन्द्यून का ककसी अन्द्य अधधकारी द्वारा उपधारा (7) के अधीन ककए गए
ककसी आर्देश का अनुपािन करने में असफि रहता है तो इस धारा के अधीन
अपराध के शमन के लिए जुमाषने की अधधकतम रकम, जो प्रार्देलशक ननर्देशक या
ऐसे प्राधधकृत अधधकारी के ववचाराधीन है, तत्स्थानी धारा में उपबंधधत रकम की
र्दोगुनी होगी जजसमें ऐसे अपराध के लिए र्दंर् उपबंधधत है ।”।
17. मूि अधधननयम की धारा 60 में, उपधारा (4) के स् थान पर, ननम् नलिखित धारा 60 का
उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(4) यठर्द उपधारा (3) के उपबंधों का अनुपािन करने में कोई व्यनतक्रम
ककया जाता है, तो सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारीी और उसका प्रत्य ेक अलभठहत
भागीर्दार र्दस हजार रुपए की शाजस् त का र्दायी होगा और व्यनतक्रम के जारी रहने
की र्दशा में, ऐसे प्रथम व्यनतक्रम के पश्चात ् जजसके र्दौरान ऐसा व्यनतक्रम जारी
रहता हो, तो सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी एक िाि रुपए और प्रत्य ेक अलभठहत
भागीर्दार पचास हजार रुपए तक के अधधकतम के अधीन रहते हुए प्रत्येक ठर्दन
के लिए सौ रुपए की अनतररक् त शाजस् त का र्दायी होगा ।”।
18. मूि अधधननयम की धारा 62 में, उपधारा (4) और उपधारा (4) के पश् चात ् धारा 62 का
संशोधन ।
आने वािे स् पष्ट् ीकरण के स्थ ान पर, ननम् नलिखित उपधारा और स् पष्ट् ीकरण रिाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
626
जाएगा, अथाषत ् :—
‘(4) यठर्द उपधारा (3) के उपबंधों का अनुपािन करने में कोई व्यनतक्रम
ककया जाता है, तो सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी और उसका प्रत्येक अलभठहत
भागीर्दार र्दस हजार रुपए की शाजस्त का र्दायी होगा और व्यनतक्रम के जारी रहने
की र्दशा में, ऐसे प्रथम व्यनतक्रम के पश्चात ् जजसके र्दौरान ऐसा व्यनतक्रम जारी
रहता हो, तो सीलमत र्दानयत्व भागीर्दारी एक िाि रुपए और प्रत्येक अलभठहत
भागीर्दार पचास हजार रुपए तक के अधधकतम के अधीन रहते हुए प्रत्येक ठर्दन
के लिए सौ रुपए की अनतररक्त शाजस्त का र्दायी होगा ।
स् पष्ट् टीकरर्—इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए, —
(i) “संपवत्त” के अंतगतष प्रत्य ेक प्रकार की संपवत्त, अधधकार और
शजक् तयां भी हैं और “र्दानयत्वों” के अंतगतष प्रत्य ेक प्रकार के कतव्ष य भी हैं;
(ii) “सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी” में कंपनी का समामेिन नहीं
होगा ।’।
धारा 67क, धारा 19. मूि अधधननयम की धारा 67 के पश् चात,् ननम् नलिखित धाराएं अंत:स् थावपत
67ि और धारा की जाएंगी, अथाषत ् :—
67ग का
अंत:स् थापन ।
ववशेर् न्द् यायाियों “67क. (1) केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के अधीन अपराधों के शीघ्र
की स् थापना ।
ववचारण का उपबंध करने के प्रयोजन के लिए, अधधसूचना द्वारा ऐस े िेत्र या
िेत्रों के लिए उतने ववशेर् न्द्य ायाियों की स्थापना या अलभठहत करेगी जजतने
आवश् यक हो जो अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाए ।
(2) ववशेर् न्द्य ायािय ननम् नलिखित से लमिकर बनेगा, —
(क) इस अधधननयम के अधीन तीन वर् ष या उससे अधधक के
कारावास से र्दंर्नीय अपराधों के मामिे में सेशन न्द्य ायाधीश या अपर सेशन
न्द्य ायाधीश के रूप में पर्दधारण करने वािा एकि न्द्य ायाधीश; और
(ि) अन्द्य अपराधों के मामिे में प्रथम वग ष महानगर मजजस् रे या
न्द्य ानयक मजजस् रे ,
जजसे उच् च न्द्य ायािय के मुख् य न्द्य ायमूनत ष की सहमनत से केन्द्रीय सरकार द्वारा
ननयुक् त ककया जाएगा :
परंतु उपधारा (1) के अधीन जब तक ववशेर् न्द् यायािय, अलभठहत या
स् थावपत नहीं ककए जाते हैं, तब तक कंपनी अधधननयम, 2013 की धारा 435 के 2013 का 18
ननबंधनानुसार ववशेर् न्द् यायाियों के रूप में अलभठहत ककए गए न्द्य ायाियों को इस
अधधननयम के अधीन र्दंर्नीय अपराधों के ववचारण के प्रयोजन के लिए ववशेर्
न्द्य ायािय समझा जाएगा :
परंतु यह और कक र्दंर् प्रकक्रया संठहता, 1973 में अंतववष्ट्ष ककसी बात के 1974 का 2
होते हुए भी, इस अधधननयम के अधीन ककया गया कोई अपराध, जजसका ककसी
ववशेर् न्द्य ायािय द्वारा ववचारण ककया जाता है, इस अधधननयम या कंपनी
अधधननयम, 2013 के अधीन जब तक ववशेर् न्द्यायािय स् थावपत नहीं ककया 2013 का 18
जाता है तब तक उस िेत्र पर अधधकाररता का प्रयोग, यथाजस्थनत, सेशनअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
627
न्द्य ायािय या महानगर मजजस् रे न्द्य ायािय या प्रथम वग ष न्द्य ानयक मजजस् रे
द्वारा ववचारण ककया जाएगा ।
1974 का 2 67ि. (1) र्दंर् प्रकक्रया संठहता, 1973 में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए ववशेर् न्द् यायािय
भी, धारा 67क की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् सभी अपराध केवि उस िेत्र
की प्रकक्रया और
शजक् तया ं ।
के लिए स् थावपत या अलभठहत ककए गए ववशर्े न्द्य ायािय द्वारा जजसमें सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारी के रजजस् रीकृत कायाषिय जस् थत है जजसके संबंध में अपराध
ककया गया है या जहां ऐसे िेत्र के लिए एक से अधधक ववशेर् न्द्य ायािय हैं जो
संबद्ध उच् च न्द्य ायािय द्वारा इस ननलमत्त ववननठर्दषष्ट् ककया जाए उनमें स े एक के
द्वारा ववचारणीय होंगे ।
(2) इस अधधननयम के अधीन ककसी अपराध का ववचारण करते समय एक
ववशेर् न्द्य ायािय इस अधधननयम के अधीन एक अपराध के अिावा र्दंर् प्रकक्रया
1974 का 2 संठहता, 1973 के अधीन समान ववचारण के लिए अऩ्य अपराध पर भी ववचारण
कर सकेगा जजसके साथ अलभयुक् त को आरोवपत ककया जा सकता है ।
1974 का 2 (3) र्दंर् प्रकक्रया संठहता, 1973 में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी,
ववशेर् न्द्य ायािय, यठर्द वह िीक समझे, तो इस अधधननयम के अधीन ककसी
अपराध का, जो तीन वर् ष से अनधधक अवधध के कारावास से र्दंर्नीय है, संक्षिप्त
ववचारण करेगा :
परंतु ककसी संक्षिप् त ववचारण में ककसी र्दोर्लसद्धध के मामि े में, एक वर् ष से
अनधधक की अवधध के कारावास का कोई र्दंर्ार्देश पाररत नहीं करेगा :
परंतु यह और कक जब ककसी संक्षिप्त ववचारण के प्रारंभ में या उसके र्दौरान
ववशेर् न्द्य ायािय को यह प्रतीत होता है कक मामि े की प्रकृनत ऐसी है कक एक
वर् ष से अधधक की अवधध के कारावास का र्दंर्ार्देश पाररत ककया जा सकता है या
इसके ककसी अन्द्य कारण स े मामिे के संक्षिप् त ववचारण के लिए अवांछनीय होने
पर, ववशेर् न्द्य ायािय, पिकारों की सुनवाई के पश् चात ् उस प्रभाव के लिए एक
आर्देश अलभलिखित करने के पश्चात ् ककसी सािी को जजसकी परीिा की जा
सकेगी पुन: बुिवाएगा और ननयलमत ववचारण की प्रकक्रया के अनुसार मामि े की
सुनवाई या पुन:सुनवाई की कारषवाई करेगा ।
67ग. उच् च न्द्य ायािय, जहां तक िागू हो, उच् च न्द्य ायािय पर र्दंर् प्रकक्रया अपीि और
1974 का 2 संठहता, 1973 का अध् याय 29 और अध् याय 30 द्वारा प्रर्दत्त सभी शजक् तयों का पुनवविष ोकन ।
प्रयोग कर सकेगा, मानो एक ववशेर् न्द्य ायािय, उच् च न्द् यायािय की अधधकाररता
की स् थानीय सीमाओं के भीतर मामिों के ववचारण के लिए एक सेशन न्द्य ायािय
थ।े ”।
20. मूि अधधननयम की धारा 68 के पश् चात,् ननम् नलिखित धारा अंत:स् थावपत की नई धारा 68क
जाएगी, अथाषत ् :— का अंत:स् थापन ।
“68क. (1) केन्द्रीय सरकार को प्रर्दत्त शजक् तयों का प्रयोग करने और ऐस े रजजस् रीकृत
कृत् यों का ननवहष न करने के प्रयोजन के लिए जजसे इस अधधननयम या इसके कायाषिय ।
अधीन बनाए गए ननयमों द्वारा या उसके अधीन और इस अधधननयम के अधीन
सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी के रजजस् रीकरण के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
628
अधधसूचना, अपनी अधधकाररता को ववननठर्दषष्ट् करते हुए ऐसे स्थानों पर उतनी
संख्या में, जजतनी वह िीक समझे, रजजस् रीकरण कायाषियों की स् थापना करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी के रजजस् रीकरण के लिए
और इस अधधननयम के अधीन ववलभन्द्न कृत् यों का ननवहष न करने के लिए, जो वह
आवश् यक समझे, ऐसे रजजस् रारों, अपर रजजस् रारों, सयं ुक् त रजजस् रारों, उप
रजजस् रारों और सहायक रजजस् रारों की ननयुजक् त कर सकेगी ।
(3) उपधारा (2) में ननठर्दषष्ट् रजजस् रारों की शजक् तयां और कतव्ष य तथा उनके
ननबंधन और शतें वे होंगी, जो ववठहत की जाए ।
(4) केन्द्रीय सरकार, सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी के रजजस् रीकरण के लिए या
उससे संबद्ध अपेक्षित र्दस् तावेजों के अधधप्रमाणन के लिए मुरा या मुराओं को
तैयार कराने के लिए रजजस् रार को ननर्देश र्दे सकेगी ।”।
धारा 69 के स् थान 21. मूि अधधननयम की धारा 69 के स् थान पर, ननम् नलिखित धारा रिी जाएगी,
पर नई धारा का अथाषत ् :—
प्रनतस्थापन ।
अनतररक्त फीस का “69. इस अधधननयम के अधीन रजजस् रार के पास रजजस् रीकृत या फाइि
संर्दाय ।
ककए जाने के लिए अपेक्षित कोई र्दस् तावेज या वववरणी, यठर्द उसमें उपबंधधत
समय में रजजस् रीकृत या फाइि नहीं की जाती है, तो उस समय के पश् चात,् जो
ववठहत की जाए, र्दस्तावेज या वववरणी फाइि करने के लिए संर्देय हो, अनतररक् त
फीस के संर्दाय पर रजजस् रीकृत या फाइि की जा सकेगी :
परंतु ऐसा र्दस् तावेज या वववरणी, इस अधधननयम के अधीन ककसी अन्द्य
कारषवाई या र्दानयत् व पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, फाइि ककए जान े की सम् यक्
तारीि के पश् चात ् भी फाइि की जा सकेगी :
परंतु यह और कक सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी के ववलभन्द्न वगों के लिए या
इस अधधननयम या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के अधीन फाइि ककए जाने
के लिए अपेक्षित ववलभन्द्न र्दस्त ावेजों या वववरखणयों के लिए एक अिग फीस या
अनतररक् त फीस ववठहत की जा सकेगी ।”।
धारा 72 का 22. मूि अधधननयम की धारा 72 में उपधारा (2) के स् थान पर, ननम् नलिखित
संशोधन । उपधाराएं रिी जाएंगी, अथाषत ् :—
“(2) अधधकरण के ककसी आर्देश स े व् यधथत कोई व् यजक् त अपीि अधधकरण
को अपीि कर सकेगा :
परंतु पिकारों की सहमनत से अधधकरण द्वारा ककए गए ककसी आर्देश से
अपीि अधधकरण में कोई अपीि नहीं होगी ।
(3) उपधारा (2) के अधीन की गई प्रत्य ेक अपीि, उस तारीि से, जजसको
अधधकरण के आर्देश की प्रनत व् यधथत व् यजक् त को उपिब् ध करा र्दी जाती है, साि
ठर्दन की अवधध के भीतर और ऐसे प्ररूप में और ऐसी फीस के साथ, जो ववठहत
की जाए, फाइि की जाएगी:
परंतु अपीि अधधकरण साि ठर्दन की उक् त अवधध के अवसान के पश् चात ्
ककन्द्तु साि ठर्दन से अनधधक अनतररक्त अवधध के भीतर अपीि ग्रहण कर
सकेगी, यठर्द उसका यह समाधान हो जाता है कक अपीिकताष इस प्रकारअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
629
ववननठर्दषष्ट् अवधध के भीतर अपीि फाइि करने से पयाषप्त कारण से ननवाररत
ककया गया था ।
(4) उपधारा (2) के अधीन ककसी अपीि की प्राजप् त पर, अपीि अधधकरण,
उस पाररत आर्देश की, जजसके ववरुद्ध अपीि की गई है, अपीि के पिकारों को
सुनवाई का अवसर र्देने के पश्च ात,् उस पर ऐस े आर्देश, जो वह िीक समझे पुष्ट् ,
उपांतरण या अपास्त करेगा ।
(5) अपीि अधधकरण अपने द्वारा ककए गए प्रत्य ेक आर्देश की एक प्रनत
अधधकरण और अपीि के पिकारों को भेजेगा ।”।
23. मूि अधधननयम की धारा 73 का िोप ककया जाएगा । धारा 73 का िोप
ककया जाना ।
24. मूि अधधननयम की धारा 74 के स् थान पर, ननम् नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 74 के
अथाषत ् :— स् थान पर नई
धारा का
प्रनतस्थापन ।
“74. यठर्द कोई सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी या कोई भागीर्दार या कोई साधारण
अलभठहत भागीर्दार या कोई अन्द्य व् यजक् त, इस अधधननयम या उसके अधीन बनाए शाजस् तयां ।
गए ननयमों के ककन्द्ह ीं उपबंधों का उल् िंघन करता है या ककसी शत,ष सीमा या
ननबधं न, जजसके अधीन कोई अनुमोर्दन, मंजूरी, सहमनत, पुजष्ट् , मान्द्य ता, ननर्देश
या ककसी मामि े के संबंध में छू र्दी गई या अनुर्दत्त की गई है तथा जजसके लिए
इस अधधननयम में अन्द्य त्र ककसी शाजस् त या र्दंर् का उपबधं नहीं ककया गया है,
सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी या कोई भागीर्दार या कोई अलभठहत भागीर्दार या कोई
अन्द्य व् यजक् त, जजसने व्यनतक्रम ककया है, पांच हजार रुपए की शाजस् त और
उल् िंघन के जारी रहने की र्दशा में प्रत्येक उल् िंघन के पश्चात ् जजसके र्दौरान
ऐसा उल्ि ंघन जारी रहा हो, एक िाि रुपए के अधधकतम के अधीन रहते हुए
प्रत्येक ठर्दन के लिए सौ रुपए की अनतररक् त शाजस् त का र्दायी होगा ।”।
25. मूि अधधननयम की धारा 76 के पश् चात,् ननम् नलिखित धारा अंत:स् थावपत की नई धारा 76क
जाएगी, अथाषत ् :— का अंत:स् थापन ।
“76क. (1) इस अधधननयम के अधीन, शाजस् तयों पर न्द्यायननणषयन करने के शाजस् तयों का
प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा, ऐसी रीनत न्द् यायननणयष न ।
में, जो ववठहत की जाए, केन्द्रीय सरकार के ऐसे अनेक अधधकाररयों को, जो
रजजस् रार की पंजक् त से कम के न हो, न्द्यायननणाषयक अधधकारी के रूप में ननयुक् त
कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार, न्द्यायननणाषयक अधधकाररयों की ननयुजक् त करते समय
उपधारा (1) के अधीन आर्देश में उनकी अधधकाररता को ववननठर्दषष्ट् करेगी ।
(3) न्द्यायननणाषयक अधधकारी, आर्देश द्वारा—
(क) इस अधधननयम के सुसंगत उपबंधों के अधीन उसमें ककसी
अननुपािन या व्यनतक्रम का कथन करते हुए, यथाजस् थनत, सीलमत र्दानयत् व
भागीर्दारी या उसके भागीर्दारों या अलभठहत भागीर्दारों या कोई अन्द्य व् यजक् त
पर शाजस्त अधधरोवपत करेगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
630
परंतु यठर्द व्यनतक्रम धारा 34 की उपधारा (3) या धारा 35 की
उपधारा (1) के अननुपािन से संबंधधत है, के मामिे में और ऐसीे
व्यनतक्रम को या तो सूचना जारी करने के तीस ठर्दन स े पहिे या इसके
भीतर सुधार ककया गया है, तो न्द्यायननणाषयक अधधकारी इस संबंध में कोई
शाजस्त अधधरोवपत नहीं करेगा और ऐसे व्यनतक्रम के संबंध में इस धारा के
अधीन कायवष ाठहयों को समाप् त माना जाएगा :
परंतु यह और कक इस अधधननयम में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते
हुए भी यठर्द शाजस् त, इस अधधननयम के ककसी भी उपबंध के अननुपािन के
लिए िघु सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी या स् ा ष-अप सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी
या उसके भागीर्दार या अलभठहत भागीर्दार द्वारा या ऐसे सीलमत र्दानयत् व
भागीर्दारी के संबंध में ककसी अन्द्य व् यजक् त द्वारा र्देय है तो ऐसी सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारी या उसका भागीर्दार या अलभठहत भागीर्दार या कोई अन्द्य
व् यजक् त, उस शाजस् त के लिए सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी एक िाि रुपए
तथा, यथाजस्थनत, प्रत् येक भागीर्दार या अलभठहत भागीर्दार या कोई अन्द्य
व् यजक् त पचास हजार रुपए तक के अधधकतम के अधीन रहते हुए र्दायी
होगा जो ऐसे उपबंध में ववननठर्दषष्ट् शाजस्त की आधी होगी ।
स् पष्ट् टीकरर्—इस परन्द्तुक के प्रयोजन के लिए “स् ा ष-अप सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारी” पर्द से इस अधधननयम के अधीन ननगलमत सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारी अलभप्रेत है और इसे केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय
पर जारी अधधसूचनाओं के अनुसार मान्द् यताप्राप् त है ।
(ि) यथाजस् थनत, ऐसे सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी या उसके भागीर्दार या
अलभठहत भागीर्दार या कोई अन्द्य व् यजक् त, उन कारणों के लिए, जो
िेिबद्ध ककए जाएं, जहां-जहां वह िीक समझे व्यनतक्रम का सुधार करने
के लिए ननर्देश र्दे ।
(4) न्द्य ायननणाषयक अधधकारी ककसी शाजस् त को अधधरोवपत करने से पूव ष ऐस े
सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी या उसके भागीर्दार या अलभठहत भागीर्दार या ककसी
अन्द्य व् यजक् त को, जजससे व्यनतक्रम हुई है, सुनवाई का अवसर र्देगा ।
(5) उपधारा (3) के अधीन न्द्यायननणाषयक अधधकारी द्वारा ककए गए ककसी
आर्देश से व् यधथत कोई व् यजक् त, मामिे में अधधकाररता रिने वािे प्रार्देलशक
ननर्देशक को अपीि कर सकेगा ।
(6) उपधारा (5) के अधीन की गई प्रत्य ेक अपीि उस तारीि से जजस
तारीि को न्द्यायननणाषयक अधधकारी द्वारा ककए गए आर्देश की प्रनत व् यधथत
व् यजक् त द्वारा प्राप् त कर िी जाती है साि ठर्दन की अवधध के भीतर और ऐस े
प्ररूप, रीनत और ऐसी फीस के साथ, जो ववठहत की जाए, फाइि की जाएगी:
परंतु प्रार्देलशक ननर्देशक, उन कारणों के लिए, जो िेिबद्ध ककए जाएं, इस
उपधारा के अधीन अपीि फाइि करने की अवधध को तीस ठर्दन से अधधक नहीं
बढा सकेगा ।
(7) प्रार्देलशक ननर्देशक, अपीि के पिकारों को सुनवाई का अवसर र्देने के
पश्चात ् ऐसे आर्देश, जजसके ववरुद्ध अपीि की गई है, पुष्ट् , उपांतररत या अपास्त
करते हुए, जो वह िीक समझे, पाररत कर सकेगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
631
(8) जहां सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी, आर्देश के प्रनत की प्राजप्त की तारीि से
नब्बे ठर्दन की अवधध के भीतर, यथाजस् थनत, उपधारा (3) या उपधारा (7) के
अधीन ककए गए आर्देश के अनुपािन में असफि हो जाता है, वहां ऐसी सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारी, ऐस े जुमाषने से, जो पच् चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा
ककन्द्तु जो पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंर्नीय होगा ।
(9) जहा ं सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी का कोई भागीर्दार या अलभठहत भागीर्दार
या कोई अन्द्य व् यजक् त, जो व्यनतक्रम ककया है, आर्देश के प्रनत की प्राजप् त की
तारीि से नब् ब े ठर्दन की अवधध के भीतर, यथाजस् थनत, उपधारा (3) या उपधारा
(7) के अधीन ककए गए आर्देश के अनुपािन में असफि रहता है, ऐसा भागीर्दार
या अलभठहत भागीर्दार या कोई अन्द्य व् यजक् त, ऐसे कारावास से, जो छह मास तक
का हो सकेगा या ऐसे जुमाषने से, जो पच् चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा
ककन्द्तु एक िाि रुपए तक का हो सकेगा या र्दोनों स े र्दंर्नीय होगा ।”।
26. मूि अधधननयम की धारा 77 के स् थान पर, ननम्न लिखित धाराएं रिी धारा 77 के स् थान
जाएंगी, अथाषत ् :— पर नई धाराओं
का प्रनतस्थापन ।
“77. इस अधधननयम के अधीन ववशेर् न्द्य ायाियों की स् थापना या अलभठहत न्द् यायािय की
अधधकाररता ।
ककए जाने की तारीि से ही, धारा 67क और धारा 67ि में अंतववष्ट्ष उपबधों के
अध्यधीन,—
(i) धारा 67क की उपधारा (2) के िंर् (क) में ननठर्दषष्ट् ववशेर्
न्द्य ायािय को इस अधधननयम की धारा 30 के अधीन र्दंर् अधधरोवपत करने
की अधधकाररता और शजक् त होगी; और
(ii) सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी या उसके भागीर्दारों या अलभठहत
भागीर्दारों या ककसी अन्द्य व् यजक् त के व्यनतक्रम ककए जाने के ववरुद्ध ऐसे
र्दांडर्क मामिे, जो इस अधधननयम के अधीन फाइि की गई है और जो,
यथाजस् थनत, प्रथम वग ष न्द्य ानयक मजजस् रे या महानगर मजजस् रे के
न्द्य ायािय के समि िंत्रबत है, धारा 67क की उपधारा (2) के िंर् (ि) में
ननठर्दषष्ट् ववशेर् न्द्य ायािय को अनत् ररत ककया जाएगा ।
77क. धारा 67क में ननठर्दषष्ट् ववशेर् न्द्य ायाियों से लभन्द्न कोई भी अपराध का
न्द्य ायािय, रजजस् रार द्वारा या इस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा संज्ञान ।
सम् यक् रूप से प्राधधकृत रजजस् रार की पंजक् त से कम के ककसी अधधकारी द्वारा
लिखित में लशकायत ककए जाने के लसवाय इस अधधननयम या उसके अधीन बनाए
गए ननयमों के अधीन र्दंर्नीय ककसी अपराध का संज्ञान नहीं िेगा ।”।
27. मूि अधधननयम की धारा 79 की उपधारा (2) में, — धारा 79 का
(i) िंर् (क) के स् थान पर, ननम् नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(क) धारा 2 के िंर् (नक) के उपिंर् (i) और उपिंर् (ii) के अधीन
ऐसी उच् चतर रकम का अलभर्दाय;
(कक) धारा 2 के िंर् (नक) की र्दीघ ष पंजक् त के अधीन सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारों के वग ष या वगों द्वारा पूरा ककए जाने वािे ननबंधन और
शतें;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
632
(कि) धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन अलभठहत भागीर्दार द्वारा र्दी
जाने वािी पूव ष सहमनत का प्ररूप और रीनत ;”;
(ii) िंर् ( ) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“( क) धारा 17 की उपधारा (3) के अधीन सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी
के लिए नया नाम आबंठ त करने की रीनत;”;
(iii) िंर् (न) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(नक) धारा 34क के अधीन िेिा और संपरीिीा मानक ;”;
(iv) िंर् (यच) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत ् :—
“(यचक) धारा 68क की उपधारा (3) के अधीन रजजस् रारों द्वारा
ननवहष न की जाने वािी शजक् तयां और कतव्ष य तथा उनकी सेवा के ननबंधन
और शतें;
(यचि) धारा 69 के अधीन र्दस् तावेज या वववरणी फाइि करने के
लिए अनतररक् त फीस के संर्दाय और ववलभन्द्न फीस या अनतररक् त फीस कीे
संर्दाय;
(यचग) धारा 72 की उपधारा (3) के अधीन अपीि फाइि करने के
लिए प्ररूप और फीस;”;
(v) िंर् (यछ) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत ् :—
“(यछक) धारा 76क की उपधारा (1) के अधीन न्द्यायननणषयन शाजस् त
के लिए न्द्यायननणाषयक अधधकाररयों की ननयुजक् त करने की रीनत;
(यछि) धारा 76क की उपधारा (6) के अधीन न्द्यायननणाषयक
अधधकारी द्वारा ककए गए आर्देश के ववरुद्ध अपीि फाइि करने का प्ररूप,
रीनत और फीस;”;
(vi) िंर् (यि) के अंत में आने वािे “और” शब् र्द का िोप ककया जाएगा;
(vii) िंर् (यर्) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(यढ) कोई अन्द्य मामिा, जजसे ववठहत ककया गया है या ववठहत
ककया जा सकता है, या जजसके संबंध में ननयमों द्वारा उपबंध ककया जाना
है ।”।
धारा 80 का 28. मूि अधधननयम की धारा 80 में उपधारा (1) के पश् चात,् ननम् नलिखित
संशोधन । उपधारा अंत:स् थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(1क) उपधारा (1) में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, यठर्द सीलमत
र्दानयत् व भागीर्दारी (सशं ोधन) अधधननयम, 2021 द्वारा यथा संशोधधत इसअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
633
अधधननयम के उपबंध को प्रभावी बनाने में कोई कठिनाई उत् पन्द्न होती है, तो
केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा ऐस े उपबंध कर सकेगी जो इस
अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हो जो उस कठिनाई को र्दरू करने के लिए
आवश् यक प्रतीत हो :
परंतु इस धारा के अधीन ककया गया कोई ऐसा आर्देश, सीलमत र्दानयत् व
भागीर्दारी (संशोधन) अधधननयम, 2021 के प्रारंभ की तारीि से तीन वर् ष की
समाजप् त के पश् चात ् नहीं ककया जाएगा ।”।
धारा 81 का
29. मूि अधधननयम की धारा 81 का िोप ककया जाएगा ।
िोप ।
——————अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
634अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
635
बांि सुरक्षा अधिनियम, 2021
(2021 का अधिनियम संखयांक 41)
[13 हदसम्बर, 2021]
बांि र्वफिता संबद्ि आपदाओं के निवारर् के सिए विनिर्दिष्ट ब ांध की
निगर िी, उसके निरीक्षर्, प्रिािि और अिुरक्षर् का उपबंि करि े
और उिके सुरक्षक्षत कायकि रर् को सुनिश्चित करिे के सिए
संस्थागत कियार्वधि तथा उिसे संबंधित या
उिके आिुषंधगक र्वषयों का उपबंि
करि े के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
अध्याय 1
प्रारश्म्भक
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम बांध सुरिा अधधननयम, 2021 है । संक्षिप्त नाम,
ववस्तार और
(2) इसका विस्तार संपूर् ण भारत पर है ।
प्रारम्भ ।
(3) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा, जो केंरीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना
द्वारा, ननयत करे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
636
संघ के ननयंत्रण के 2. यह घोर्णा की जाती है कक िोक ठहत में यह समीचीन है कक संघ को
औधचत्य के बारे में
ववननठर्दषष्ट् बांध के लिए एकसमान बांध सुरिा प्रकक्रया का ववननयमन, इसमें इसके
घोर्णा ।
पश्चात ् उपबंधधत ववस्तार तक अपने ननयंत्रण में िेना चाठहए ।
िागू होना । 3. इस अधधननयम के अधीन जैसा उपबंधधत है उसके लसवाय, यह अधधननयम
प्रत्येक विनिर्दणष्ट बांध के ऐसे स्िामी को लाग ू होगा, जो—
(क) यथाजस्थनत, केंरीय सरकार या राज्य सरकार या एक या अधधक
सरकारों के संयुक्त रूप से स्वालमत्वाधीन या ननयंत्रणाधीन कोई पजब्िक सेक् र
उपक्रम या संस्था या ननकाय है; और
(ि) यथाजस्थनत, राज्य सरकार या केंरीय सरकार के स्वालमत्वाधीन या
ननयंत्रणाधीन उपक्रम या कंपनी या संस्था या ननकाय से लभन्द्न कोई उपक्रम या
कंपनी या संस्था या ननकाय है ।
पररभार्ाए ं । 4. इस अधधननयम में, जब तक कक संर्दभ ष से अन्द्यथा अपेक्षित न हो,—
(क) “बांध का पररवतनष ” से ऐसे पररवतनष या मरम्मत अलभप्रेत हैं, जो
बांध या जिाशय की सुरिा को प्रत्यि रूप से प्रभाववत करता हो ;
(ि) “वावर्कष ररपो ष” से प्रत्येक ववत्तीय वर् ष के र्दौरान प्राधधकरर् और
राज्य बांध सुरक्षा संगठि के कक्रयाकिापों तथा उनकी अधधकाररता के अन्द्तगषत
आन े वािे ववननठर्दषष्ट् बांधों की सुरिा प्राजस्थनत का उल्िेि करने वािी ररपो ष
अलभप्रेत है ;
(ग) “अनुिग्न संरचिा” से ऐसी संरचना अलभप्रेत है जो,—
(i) अधधप्िवमान माग ष है, चाहे वे बांध में हों या उससे पथृ क् हों ;
(ii) ननम्न ति ननकास संरचिा और सुरंगें, पाइप िाइनें या ननगमष
द्वार जैसी जि नालियां हैं, चाहे वे बांध के या उसके अन्द्त्याधारों या
जिाशय ककनारों के आर-पार हों ;
(iii) जि-यांत्रत्रक उपस्कर है, जजसके अंतगतष द्वार, कपा , उद्वाहक
उत्थापक भी हैं ;
(iv) ऊजा ष िय और नर्दी प्रलशिण संरचिा ; और
(v) बांध या उसके जिाशय या जिाशय के ककनारे के साथ अलभन्द्न
रूप से काय ष करन े वािी अन्द्य सहयोजजत संरचनाएं हैं ;
(घ) “प्राधधकरर्” से धारा 8 के अधीन स्थावपत राष्रीय बांध सुरक्षा
प्राधधकरर् अलभप्रेत है ;
(ङ) “बांध” से जि को अवरुद्ध करने या उसका व् यपवतनष करने की
दृजष्ट् से कोई ऐसा कृत्रत्रम अवरोधक और नर्दयों या उसकी सहायक िर्दयों के
आर-पार संननलमतष इसकी अनुिग्न संरचिा अलभप्रेत है, जजसके अंतगतण बैराज,
बंधधका और इसी प्रकार के जि पररबंधन संरचनाएं भी हैं, ककंतु इसमें
ननम्नलिखित सजम्मलित नहीं हैं—
(क) नहर, जिवाही सेत ु और नौपररवहन जिसरणी और वैसी ही
जलप्रवहण संरचिाएं ;
(ि) बाढ त बंध, कुल्या, ननयामक बंध तथा वैसे ही प्रवाह ननयंत्रण
संरचनाएं ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
637
(च) “बांध संबंधी ववफिता” से ककसी बांध की संरचना या संकक्रया में ऐसी
कोई ववफिता अलभप्रेत है, जजसके कारण रोके हुए जि का ऐसा अननयंत्रत्रत
प्रवाह होता है, जजसके पररणामस्वरूप ननम्न सतह की ओर जि का भराव होता
है, जजससे िोगों का जीवन और संपवत्त तथा वनस्पनत, प्राखणजात और नर्दीय
पाररजस्थनतकी सठहत पयाषवरण प्रभाववत होता है ;
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, संकक्रया संबंधी ववफिता स े
बांध के ऐसी र्दोर्पूण ष संकक्रयाएं अलभप्रेत हैं, जो संकक्रया और अनुरिण मैनुअि
से असंगत हैं ;
(छ) “बांध संबंधी घ ना” से बांध को होने वािी ऐसी सभी समस्याए ं
अलभप्रेत हैं, जो ककसी बांध संबंधी ववफिता में अवक्रलमत नहीं हुई हैं और इसमें
ननम्नलिखित सजम्मलित हैं,—
(i) बांध और उसस े अनिु ग्न संरचिाओ ं को हुआ कोई संरचनात्मक
नुकसान ;
(ii) बांध में के ककसी उपकरण का कोई अप्रानयक पिन ;
(iii) बांध के ढांचे में से कोई अप्रानयक प्रस्राव या ररसाव ;
(iv) प्रस्राव या ररसाव व्यवस्था में कोई अप्रानयक पररवतनष ;
(v) बांध के नीचे अवेक्षित कोई क्वथन या उत्स्रुत अवस्था ;
(vi) बांध के आधार या ढांचे से या उसकी ककन्द्हीं बीधथयों में से,
ककसी प्रस्राव या ररसाव में कोई आकजस्मक रोक या अप्रानयक घ ाव ;
(vii) फा कों की कोई अपकक्रया या उनका अनुपयुक्त प्रचािन ;
(viii) ऐसी बाढ की उत्पवत्त, जजसका लशिर बांध की उपिब्ध बाढ
ननस्सार िमता या अनुमोठर्दत डर्जाइन बाढ के सत्तर प्रनतशत से अधधक
है ;
(ix) ककसी ऐसी बाढ की उत्पवत्त, जजसके पररणामस्व रूप उपिब्ध
िुिी जगह पर या अनुमोठर्दत डर्जाइन िुिी जगह पर अधधक्रमण होता
है ;
(x) अधधप्िवन-माग ष या पक्की ढाि, आठर्द के अनुप्रवाह से पांच सौ
मी र तक ननक प्रनतवास में कोई अप्रानयक अपिरण ; और
(xi) कोई अन्द्य ऐसी घ ना, जजसका कोई प्रज्ञावान बांध इंजीननयर,
बांध संबंधी सुरिा के ववर्यों से संबंध स्थावपत कर सके;
(ज) “बांध सुरिा इकाई” से धारा 30 में ननठर्दषष्ट् ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध
की बांध सुरिा इकाई अलभप्रेत है ;
(झ) “संक जस्थनत” से बांध या अनुिग्न संरचना या उसके जिाशय या
जिाशय के ककनारे में ऐसी जस्थनतयों का घ ना या संभाववत ववकास अलभप्रेत है
जो, यठर्द उन पर काय ष न ककया जाए तो, बांध को उसके आशनयत फायर्दों के
लिए सुरक्षित संकक्रया में बाधा पहुंचा सकती है या िोगों के जीवन और संपवत्त
को तथा पयाषवरण को, जजसके अंतगतष वनस्पनत, प्राखणजात और नर्दीय
पाररजस्थनतकी भी है, गंभीर जोखिम पहुंचा सकती हैं ;
(ञ) “प्रिेिीकरण” से बांधों के अन्द्वेर्ण, डर्जाइन, संननमाषण, प्रचािन,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
638
ननष्ट्पार्दन, अनुरिण, मुख्य मरम्मत, पररवतनष , ववस्तार और सुरिा से संबंधधत
इिैक् राननक अलभिेिों सठहत सभी स्थायी अलभिेि अलभप्रेत हैं और इनके
अंतगतष डर्जाइन ज्ञापन, संननमाषण रेिाधचत्र, भू-गभीय ररपो ें, बांध की
अनुकारक संरचना और हाइड्रोलिक प्रनतकक्रया से संबंधधत ववशेर् अध्ययन ररपो ें,
डर्जाइन और रेिाधचत्रों में ककए गए पररवतनष , क्वालि ी ननयंत्रण अलभिेि,
आपात कारषवाई योजना, प्रचािन और अनुरिण ननयमाविी, यंत्रीकरण मापन,
ननरीिण और परीिण ररपो ें, प्रचािन संबंधी ररपो ष तथा बांध सुरिा
पुनवविष ोकन ररपो ें और अन्द्य समान प्रकार की ररपो ें भी हैं ;
( ) “बांध का ववस्तार” से ववद्यमान बांध या जिाशय के िेत्र में कोई
पररवतनष अलभप्रेत है, जजससे जि भंर्ारण की ऊंचाई में वद्ृ धध होती है या बांध
द्वारा रोके गए जि की मात्रा में वद्ृ धध होती है ;
(ि) “सरकार” से, यथाजस् थनत, केंरीय सरकार या कोई राज् य सरकार
अलभप्रेत है ;
(र्) “ननरीिण” से बांध और उसके अनुिग्न संरचना के ककसी संघ क की
स्थि पर परीिा अलभप्रेत है ;
(ढ) “अन्द्वेर्ण” से ककसी बांध और उसकी अनुिग्न या उसके ककसी भाग
से संबंधधत ककसी ववननठर्दषष्ट् समस्या के साक्ष्य का संग्रहण, उसकी ववस्ततृ
परीिा, ववश्िेर्ण या संवीिा अलभप्रेत है और इसके अंतगतष प्रयोगशािा परीिण,
स् वस् थाने परीिण, भू-गभीय पूवेिण, मार्ि परीिण और समस्या का सुननजश्चत
अनुरूपण भी है ;
(ण) “राष्ट्रीय सलमनत” से धारा 5 के अधीन गठित राष्ट्रीय बांध सुरिा
पर सलमनत अलभप्रेत है ;
(त) “अधधसूचना” स े राजपत्र में प्रकालशत कोई अधधसूचना अलभप्रेत है
और “अधधसूधचत करना” पर्द का तद्नसु ार अथ ष िगाया जाएगा ;
(थ) “बांध की संकक्रया” से बाधं के उपयोग, ननयंत्रण और कायकष रण के
ऐसे तत् व अलभप्रेत हैं, जो प्राथलमक रूप से जि के संग्रहण, उसकी ननकासी और
बांध की ढांचागत सुरिा को प्रभाववत कर सके ;
(र्द) “प्रचािन और अनुरिण ननर्देलशका” से ऐसे लिखित अनुर्देश अलभप्रेत
हैं, जजनमें प्रचािन प्रकक्रयाएं, अनुरिण प्रकक्रयाएं, आपात प्रकक्रयाएं और बांध के
सुरक्षित प्रचािन के लिए आवश्यक कोई अन्द्य ववशेर्ता उपबंधधत हैं ;
(ध) “ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी” से केन्द्रीय सरकार या कोई राज्य
सरकार या संयुक् त रूप स े एक या अधधक सरकारें या पजब्िक सेक् र उपक्रम
या स्थानीय प्राधधकारी या कंपनी और ऐसे कोई या सभी व्यजक्त या संगिन
अलभप्रेत हैं, जजनका ववननठर्दषष्ट् बांध पर स्वालमत्व है, ननयंत्रण है, प्रचािन करते
हैं, या अनुरिण करत े हैं ;
(न) “ववठहत” से, यथाजस्थनत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा
बनाए गए ननयमों द्वारा ववठहत अलभप्रेत है ;
(प) “ववननयमों” से इस अधधननयम के अधीन प्राधधकरण द्वारा बनाए गए
ववननयम अलभप्रेत हैं ;
(फ) “उपचारात्मक उपाय” से ऐसे संरचनात्मक या असंरचनात्मक उपायअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
639
अलभप्रेत हैं जो ववननठर्दषष्ट् बांध की संक कािीन जस्थनत को र्दरू करन े या कम
करन े के प्रयोजन के लिए ववननठर्दषष्ट् बांध या अनुिग्न संरचना या जिाशय या
जिाशय ककनारे या जिाशय के जि-ग्रहण िेत्र के संबंध में अपेक्षित हों ;
(ब) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के संबंध में, “जिाशय” से ककसी ववननठर्दषष्ट्
बांध द्वारा रोके गए जि का कोई ववस्तार अलभप्रेत होगा ;
(भ) “ववननठर्दषष्ट् बांध” से इस अधधननयम के प्रारंभ से पूव ष या उसके
पश् चात ् सजन्द् नलमषत ऐसा कोई बांध अलभप्रेत है, जो—
(i) साधारण आधार िेत्र के ननम्नतम भाग से बांध के लशिर तक
मावपत ऊंचाई में पन्द्रह मी र से अधधक है ; या
(ii) ऊंचाई में र्दस मी र स े पन्द्रह मी र के बीच है और
ननम्नलिखित में से कम से कम एक को पूरा करता है, अथाषत ् :—
(अ) लशिर की िंबाई कम स े कम पांच सौ मी र है ; या
(आ) बांध द्वारा बनाए गए जिाशय की िमता कम से कम
र्दस िाि घनमी र है ;
(इ) बांध द्वारा ववसजनष ककया गया अधधकतम बाढ ननस्सारण
प्रनत सेकेंर् कम से कम र्दो हजार घनमी र है ;
(ई) बांध में ववलशष्ट् रूप स े कठिन आधार संबंधी समस्याएं
हैं ;
(उ) बांध अप्रानयक डर्जाइन का है ;
(म) “राज्य सलमनत” से धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन गठित राज्य
बांध सुरिा सलमनत अलभप्रेत है ;
(य) “राज्य बांध सुरिा संगिन” से धारा 14 के अधीन स्थावपत राज् य
बांध सुरिा संगिन अलभप्रेत है ; और
(यक) “भेद्यता और पररसंक वगीकरण” से बांधों की जस्थनत,
अवस्थान, नुकसान या पररसंक संभाव्यता के आधार पर उनके वगीकरण की
प्रणािी या प्रणालियां अलभप्रेत हैं ।
अध्याय 2
राष्ट्रीय बांि सुरक्षा ससमनत
5. (1) उस तारीि से, जो केन्द्रीय सरकार अधधसूचना द्वारा ननयत करे, इस राष्ट्रीय सलमनत
अधधननयम के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय बांध सुरिा सलमनत नाम से ज्ञात एक राष्ट्रीय
का गिन ।
सलमनत का गिन ककया जाएगा, जो ननम्नलिखित सर्दस्यों से लमिकर बनेगी,
अथाषत ् :—
(क) अध्यि, केन्द्रीय जि आयोग — अध्यि, पर्देन ;
(ि) केंरीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् र्दस से अनधधक बांध इंजीननयरी या
बांध सुरिा से संबंधधत ववर्यों में काय ष करने वािे, केंरीय सरकार के ऐसे
प्रनतननधध, जो उस सरकार के संयुक् त सधचव या समतुल् य पंजक्त से नीचे के न
हों — सर्दस्य, पर्देन ;
(ग) केंरीय सरकार द्वारा राज्य सरकारों के मुख्य इंजीननयर या समतुल्य
स् तर के चक्रानुक्रम द्वारा नामननठर्दषष्ट् सात स े अनधधक प्रनतननधध — सर्दस्य,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
640
पर्देन ; और
(घ) केंरीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् बांध सुरिा के िेत्र में के और
सहबद्ध िेत्रों में के तीन से अनधधक ववशेर्ज्ञ — सर्दस्य ।
(2) राष्ट्रीय सलमनत का गिन, इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से साि
ठर्दन की अवधध के भीतर ककया जाएगा और उसके पश् चात ् प्रत्येक तीन वर् ष के लिए
उसका पुनगिष न ककया जाएगा ।
राष्ट्रीय सलमनत के 6. (1) राष्ट्रीय सलमनत पहिी अनुसूची में यथा ववननठर्दषष्ट् ऐसे कृत्यों का
कृत्य ।
ननवहष न करेगी, जो आपर्दाओं से संबंधधत बांध संबंधी ववफिता का ननवारण करने के
लिए और बांध सुरिा के मानकों को बनाए रिने के लिए आवश् यक हों ।
(2) राष्ट्रीय सलमनत, अपने कृत्यों का ननवहष न करते हुए उतनी उपसलमनतयां
गठित कर सकेगी, जजतनी वह सलमनत को सहायता करन े के लिए और राष्ट्रीय
सलमनत की सधचवािनयक सहायता के लिए आवश्यक समझे और ऐसी उपसलमनतयां
प्राधधकरण द्वारा उपबंधधत की जाएंगी ।
(3) राष्ट्रीय सलमनत द्वारा सगं हृ ीत या जननत जानकारी और सूचना का प्रसार
प्राधधकरण द्वारा सभी पणधाररयों को ककया जाएगा ।
राष्ट्रीय सलमनत की 7. (1) राष्ट्रीय सलमनत की बैिक ऐसे समय और स्थानों पर होगी तथा वह
बैिकें ।
अपनी बैिकों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रकक्रया के ऐसे ननयमों का पािन
करेगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा ववठहत ककए जाएं :
परंतु राष्ट्रीय सलमनत वर् ष में र्दो बार बैिक करेगी और एक बैिक वर्ाष ऋत ु के
प्रारंभ होने से पहिे आयोजजत की जाएगी ।
(2) राष्ट्रीय सलमनत ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी के प्रनतननधध को और बांध
सुरिा में ऐसे अन्द्य ववशेर्ज्ञों को (जजनके अंतगतष अंतरराष्ट्रीय ववशेर्ज्ञ भी हैं), जजन्द्हें
वह अपने कृत्यों के ननवहष न के लिए समुधचत समझे, आमंत्रत्रत कर सकेगी ।
(3) राष्ट्रीय सलमनत पर उपगत व्यय ऐसी रीनत में होगा, जो केन्द्रीय सरकार
द्वारा ववठहत की जाए ।
अध्याय 3
राष्ट् रीय बांि सुरक्षा प्राधिकरर्
राष्ट् रीय बांध सुरिा 8. (1) इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से साि ठर्दन की अवधध के भीतर,
प्राधधकरण की
उस तारीि से, जो केंरीय सरकार, अधधसूचना द्वारा ननयत करे, इस अधधननयम के
स्थापना ।
प्रयोजनों के लिए, राष्ट् रीय बांध सुरिा प्राधधकरण की स्थापना की जाएगी ।
(2) प्राधधकरण की अध् यिता, केंरीय सरकार द्वारा ननयुक् त ककए जाने वािे
ककसी ऐसे अधधकारी द्वारा की जाएगी, जो भारत सरकार के अपर सधचव या
समतुल् य की पंजक् त से नीचे का न हो और जजसके पास बांध इंजीननयरी और बांध
सुरिा प्रबंध स े संबंधधत समस् याओं का ननप ारा करने का ज्ञान और पयाषप् त अहषता,
अनुभव और िमता हो ।
(3) प्राधधकरण का मुख् यािय ठर्दल् िी राष्ट् रीय राजधानी राज् यिेत्र में होगा और
प्राधधकरण भारत में अन्द् य स् थानों पर कायाषियों की स् थापना कर सकेगा ।
(4) प्राधधकरण ऐसे ननर्देशों का अनुपािन करेगा, जो केंरीय सरकार द्वारा, उसे
समय-समय पर ठर्दए जाएं ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
641
प्राधधकरण के 9. (1) प्राधधकरण, र्दसू री अनुसूची में यथा ववननठर्दषष्ट् ऐसे कृत्यों का ननवहष न
कृत्य ।
करेगा, जो ववननठर्दषष्ट् बांधों की उधचत ननगरानी, ननरीिण और अनुरिण के लिए
राष्ट्रीय सलमनत द्वारा तैयार की गई नीनत, मागर्दष शकष लसद्धांतों और मानकों के
कायाषन्द्वयन के लिए आवश्यक हों और ऐस े प्रयोजनों के लिए, उस े ककसी व्यजक्त को
हाजजर करने और उसस े कोई ऐसी जानकारी, जो आवश्यक हो, मांगने की शजक्त
होगी ।
(2) उपधारा (1) में अंतववष्ट्ष उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना प्राधधकरण
राज्यों के राज्य बांध सुरिा सगं िनों के बीच या ककसी राज्य बांध सुरिा संगिन और
उस राज्य में के ववननठर्दषष्ट् बाधं के स्वामी के बीच ककसी मद्ु र्दे का समाधान करने के
लिए सभी प्रयास करेगा ।
(3) इस अधधननयम के अधीन ववर्यों के संबंध में ककया गया प्राधधकरण का
प्रत्य ेक ववननश्चय अंनतम और उस वववार्द के सभी पिकारों पर आबद्धकर होगा ।
10. (1) केंरीय सरकार, प्राधधकरण को इस अधधननयम के अधीन उसके कृत्यों प्राधधकरण के
अधधकारी और
का पािन करने के लिए समथ ष बनाने के प्रयोजन के लिए उतने अधधकारी और अन्द्य
कमचष ारी ।
कमचष ारी, जजतने वह आवश्यक समझे, उपिब्ध कराएगी :
परंतु ऐसे अधधकाररयों और अन्द्य कमषचाररयों के पास बाधं सुरिा के िेत्र में,
जजसके अंतगतष बांध डर्जाइन, जिीय यांत्रत्रकी इंजीननयरी, जि-ववज्ञान, भू-तकनीकी
अन्द्व ेर्ण, साधन ववननयोग, बांध-पुनवाषस के िेत्र या ऐस े अन्द्य िेत्र भी हैं, ऐसी
अहषताएं और अनुभव होगा, जो केंरीय सरकार द्वारा ववठहत ककया जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन ननयुक्त अधधकाररयों और अन्द्य कमषचाररयों के
कृत्य, शजक्तयां और उनकी सेवा के ननबंधन तथा शत ें वे होंगी, जो केन्द्रीय सरकार
द्वारा ववठहत की जाएं ।
अध्याय 4
राज्य बांि सुरक्षा ससमनत
11. (1) उस तारीि से, जो राज्य सरकार, अधधसूचना द्वारा, ननयत करे, इस राज्य बांध सुरिा
सलमनत का
अधधननयम के प्रयोजनों के लिए एक राज्य बांध सुरिा सलमनत का गिन ककया
गिन ।
जाएगा, जो ननम्नलिखित सर्दस्यों से लमिकर बनेगी, अथाषत ् :—
(क) राज्य के बांध सुरिा के लिए उत्तरर्दायी ववभाग का मुख्य इंजीननयर
या समतुल्य अधधकारी — अध्यि, पर्देन ;
(ि) ऐसे ववभागों से, जो राज्य सरकार द्वारा ववननजश्चत ककए जाएं, या
ऐसे अन्द्य संगिनों से, जो ववननठर्दषष्ट् बांधों के स्वामी हैं, छह व्यजक्तयों से
अनधधक व्यजक्तयों, मुख्य इंजीननयर की पंजक्त के तकनीकी और वैज्ञाननक
अधधकारी — सर्दस्य ;
(ग) उन र्दशाओं में, जहां ककसी राज्य के ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के
जिाशय िेत्र का ववस्तार, ककसी अन्द्य राज्य तक है, प्रत्येक ऐसे अनुप्रवाह
राज्य का मुख्य इंजीननयर या समतुल्य स्तर का अधधकारी — सर्दस्य ;
(घ) उन र्दशाओं में, जहां ककसी राज्य के ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध की बाढ
ननकासी का प्रवाह ककसी पड़ोसी राज्य में होता है, प्रत्येक ऐसे अनुप्रवाह राज्य
का मुख्य इंजीननयर या समतुल्य स्तर का अधधकारी — सर्दस्य ;
(ङ) अध्यि, केंरीय जि आयोग द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाने वािाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
642
केंरीय जि आयोग का एक प्रनतननधध, जो ननर्देशक की पजं क् त से नीचे का न
हो — सर्दस्य ;
(च) जि-ववज्ञान या बांध डर्जाइनों के िेत्र में, तीन से अनधधक इंजीननयरी
संस् थानों के ववशेर्ज्ञ — सर्दस्य ; और
(छ) अध्यि, केंरीय ववद्युत प्राधधकरण द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाने
वािा केंरीय ववद्युत प्राधधकरण का एक प्रनतननधध, जो ननर्देशक की पंजक्त से
नीचे का न हो — सर्दस्य ।
(2) राज्य सलमनत का गिन इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से एक सौ
अस् सी ठर्दन की अवधध के भीतर ककया जाएगा और उसके पश् चात ् प्रत्येक तीन वर् ष के
लिए उसका पुनगिष न ककया जाएगा ।
राज्य सलमनत के 12. (1) राज्य सलमनत, तीसरी अनुसूची में यथाववननठर्दषष्ट् ऐसे कृत्यों का
कृत्य ।
ननवहष न करेगी, जो प्राधधकरण द्वारा जारी बांध सुरिा संबंधी मागर्दष शकष लसद्धांतों,
मानकों और अन्द्य ननर्देशों के अनुसार, इस अधधननयम के अधीन आपर्दाओं से
संबंधधत बांध संबंधी ववफिता के ननवारण के लिए आवश्यक हों ।
(2) राज्य सलमनत अपने कृत्यों के ननवहष न में, उतनी उपसलमनतयों द्वारा
सहायता प्राप्त करेगी, जजतनी वह आवश्यक समझे और राज्य सलमनत तथा उसकी
उपसलमनतयों को सधचवािनयक सहायता संबद्ध राज्य बांध सुरिा संगिन द्वारा प्रर्दान
की जाएगी ।
राज्य सलमनत की 13. (1) राज्य सलमनत की बिै कें ऐसे समय और स्थानों पर होंगी तथा अपनी
बैिकें ।
बैिकों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में, प्रकक्रया के ऐसे ननयमों का पािन करेंगी
जो राज्य सरकार द्वारा ववठहत ककए जाएं :
परंतु राज्य सलमनत, एक वर् ष में र्दो बार बैिक करेगी और एक बैिक, वर्ाष ऋत ु
के प्रारंभ होने से पहिे आयोजजत की जाएगी ।
(2) राज्य सलमनत, ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी के प्रनतननधध को और बांध
सुरिा में ऐसे अन्द्य ववशेर्ज्ञों को, जो वह अपने कृत्यों के ननवहष न के लिए समुधचत
समझे, आमंत्रत्रत कर सकेगी ।
(3) राज्य सलमनत की बैिकों पर उपगत व्यय ऐसी रीनत में ककया जाएगा, जो
राज्य सरकार द्वारा ववठहत की जाए ।
(4) ऐस े ववशर्े ज्ञ सर्दस्यों और अन्द्य आमंत्रत्रत ववशेर्ज्ञों को, जो राज्य सलमनत
या उसकी उपसलमनतयों की बैिकों में उपजस्थत होते हैं, ऐसी फीस और भत्ते संर्दत्त
ककए जाएंगे, जो राज्य सरकार द्वारा ववठहत ककए जाएं ।
अध्याय 5
राज्य बांि सुरक्षा संगठि
राज्य बांध सुरिा 14. (1) राज्य सरकार, इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से एक सौ अस् सी
संगिन की
ठर्दन की अवधध के भीतर, अधधसूचना द्वारा, इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए,
स्थापना ।
बांध सुरिा से संबंधधत ववर्य में काय ष करन े वािे ककसी ववभाग में, “राज्य बांध सुरिा
संगिन” के नाम से ज्ञात एक पथृ क् संगिन की स्थापना करेगी :
परंतु ऐसे राज्यों में, जहां ववननठर्दषष्ट् बांधों की संख् या तीस से अधधक है, राज्य
बांध सुरिा संगिन की अध्यिता ककसी ऐस े अधधकारी द्वारा की जाएगी, जो मुख्य
इंजीननयर या समतुल्य की पंजक्त से नीचे का न हो और सभी अन्द्य र्दशाओं में राज्यअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
643
बांध सुरिा संगिन की अध्यिता ककसी ऐसे अधधकारी द्वारा की जाएगी, जो
अधीिण इंजीननयर या समतुल्य की पंजक्त से नीचे का न हो ।
(2) राज्य बांध सुरिा संगिन, बांध सुरिा स े संबंधधत ववर्य में काय ष करन े
वािे ववभाग के तकनीकी प्रधान के प्रनत उत्तरर्दायी होगा और वह उसको ररपो ष
करेगा ।
(3) राज्य बांध सुरिा संगिन की संगिनात्मक संरचना और काय ष प्रकक्रयाएं ऐसी
होंगी, जो राज् य सरकार द्वारा ववठहत की जाएं ।
(4) राज्य बांध सुरिा संगिन के प्रशासननक और अन्द्य व्यय संबद्ध राज्य
सरकार द्वारा वहन ककया जाएगा ।
15. (1) राज्य सरकार, उस राज्य में ववननठर्दषष्ट् बांधों की संख्या को ध्यान में राज् य बांध सुरिा
संगिन के
रित े हुए, राज्य बांध सुरिा संगिन को उतने अधधकारी और कमचष ारी उपिब्ध
अधधकारी और
कराएगी, जजतने वह उक्त संगिन के र्दि कायकष रण के लिए आवश्यक समझे :
कमचष ारी ।
परंतु ऐसे अधधकाररयों और कमचष ाररयों के पास बांध सुरिा के िेत्र में, जजसके
अंतगतष बांध डर्जाइन, जिीय यांत्रत्रकी इंजीननयरी, जि-ववज्ञान, भू-तकनीकी अन्द्वेर्ण,
साधन ववननयोग, बांध पुनवाषस के ित्रे या ऐसे अन्द्य िेत्र भी हैं, ऐसी अहषताएं और
अनुभव होगा, जो राज् य सरकार द्वारा ववठहत ककया जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन ननयुक्त अधधकाररयों और कमषचाररयों के कृत्य और
शजक्तयां वे होंगी, जो राज्य सरकार द्वारा ववठहत की जाएं ।
अध्याय 6
बांि सुरक्षा से संबंधित कतव्ि य और कृत्य
16. (1) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन, ऐसे ववननठर्दषष्ट् बांधों की सतत ् ननगरानी और
ननरीिण ।
सुरिा सुननजश्चत करन े के लिए उसकी अधधकाररता के भीतर आन े वािे सभी
ववननठर्दषष्ट् बांधों की,—
(क) शाश्वत ननगरानी रिेगा ;
(ि) ननरीिण करेगा ; और
(ग) उनकी संकक्रया और अनुरिण को मानन र करेगा,
और ऐसे उपाय करेगा, जो सुरिा संबंधी ऐसी सरोकारों का पता िगाने के लिए
आवश्यक हों, जो ऐसे बांध सुरिा संबंधी मागर्दष शकष लसद्धांतों, मानकों और अन्द्य
ननर्देशों के अनुसार, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं, बांध सुरिा आश्वासन
के समाधानप्रर्द स्तर को प्राप्त करन े की दृजष्ट् से जानकारी में आई हों ।
(2) राज्य बांध सुरिा संगिन, िोक सुरिा के अनुरूप ववननश्चय करने में स्वयं
अपने को समथ ष बनान े के प्रयोजन के लिए ऐसे अन्द्वेर्ण करेगा या करवाएगा और
ऐसे आंकड़े एकत्रत्रत करेगा या एकत्रत्रत करवाएगा, जो उसकी अधधकाररता के अधीन
आने वािे बांधों, जिाशयों और अनुिग्न संरचनाओं के डर्जाइन, संननमाषण, मरम्मत
और ववस्तारण की ववलभन्द्न ववशेर्ताओं के उधचत पुनवविष ोकन और अध्ययन के लिए
अपेक्षित हों ।
17. राज्य बांध सुरिा संगिन, उसकी अधधकाररता के अधीन आने वािे प्रत्येक बांधों की भेद्यता
और पररसंक
बांध को ऐसी भेद्यता और पररसंक वगीकरण मापर्दंर् के अनुसार वगीकृत करेगा,
वगीकरण ।
जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
644
18. (1) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन उसकी अपनी अधधकाररता के अधीन िाग बुकों का
रिा जाना ।
आने वािे प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध के लिए एक िाग बुक या र्ा ा बेस सामग्री रिेगा,
जजसमें ननगरानी और ननरीिण से संबंधधत सभी कक्रयाकिापों को और बांध सुरिा स े
संबंधधत सभी महत्वपूण ष घ नाओं को ऐसे ब्यौरों के साथ तथा ऐसे प्ररूप में, जो
ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, को अलभलिखित ककया जाएगा ।
(2) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन, प्राधधकरण को, उसके द्वारा जब कभी
अपेिा की जाए, ऐसी सभी जानकारी प्रस्तुत करेगा ।
बांध संबंधी 19. (1) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन, उसकी अपनी अधधकाररता के अधीन
ववफिता और बांध
ककसी बांध संबंधी ववफिता की घ ना की ररपो ष प्राधधकरण को करेगा और उसे, जब
संबंधी घ नाओं के
कभी उसके द्वारा अपेिा की जाए, सूचना र्देगा ।
अलभिेि ।
(2) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन, उसकी अधधकाररता के अधीन आने वािे
प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध की मुख्य बांध संबंधी घ नाओं के अलभिेि रिेगा और
प्राधधकरण को, जब कभी उसके द्वारा अपेक्षित हो, ऐसी सभी सूचना र्देगा ।
ववननठर्दषष्ट् बांधों 20. (1) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन, ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी को ककसी
की सुरिा संबंधी
बांध के संबंध में ककए जाने के लिए अपेक्षित सुरिा या उपचारात्मक उपायों पर अपने
अनुर्देश ।
अनुर्देश र्देगा ।
(2) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, राज्य बांध सुरिा संगिन द्वारा उसके
अपने स्वालमत्व वाि े ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के संबंध में सुरिा या उपचारात्मक उपायों
के संबंध में जारी ककए गए अनुर्देशों का अनुपािन करेगा ।
अनुरिण और 21. ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, ववननठर्दषष्ट् बांधों के अनुरिण और
मरम्मतों के लिए
मरम्मत के लिए तथा राज्य बांध सुरिा संगिन की लसफाररशों को कायाषजन्द्वत करन े
ननधधयां ।
के लिए पयाषप् त और ववननठर्दषष्ट् ननधधयों को ननजश्चत करेगा ।
तकनीकी 22. (1) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, जिववज्ञान, बांध के आधार, बांध
प्रिेिीकरण ।
की संरचनात्मक इंजीननयरी, बांध का जि ववभाजक, ऊपरी प्रवाह और बांध के भूलम
संबंधी ननचिे प्रवाह की प्रकृनत या उपयोग स े संबंधधत सभी तकनीकी प्रिेिीकरणों को
आधथकष या संभारतंत्र या पयाषवरणीय संबंधी महत्व के ऐसे सभी संसाधनों या
सुववधाओं, जजनके बांध संबंधी ववफिता होने के कारण प्रभाववत होने की संभावना है,
संबंधी जानकाररयों के साथ संकलित करेगा ।
(2) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, राज्य बांध सुरिा संगिन और
प्राधधकरण को, जब कभी उनके द्वारा अपेिा की जाए, ऐसी सभी जानकारी र्देगा ।
(3) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी बांध सुरिा और बाधं काय ष ननष्ट्पार्दन से
संबंधधत आंकड़े का भंर्ारण करन,े पुनः प्राप्त करन े और ववतररत करने के लिए
आधुननक सूचना प्रौद्योधगकी साधनों से अपने संगिन को सुसजज्जत करेगा ।
ववननठर्दषष्ट् बांधों 23. ववननठर्दषष्ट् बांधों की सुरिा और उनसे संबंधधत सभी कक्रयाकिापों के लिए
की सुरिा के लिए
उत्तरर्दायी प्रत्येक व्यजक् त के पास ऐसी अहषताएं और अनभु व होगा तथा वह ऐसा
उत्तरर्दायी व्यजक्त यों
प्रलशिण पूरा करेगा, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
की अहषताएं और
अनुभव ।
राज्य बांध सुरिा 24. (1) इस अधधननयम के उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, सभी
संगिन और
ववननठर्दषष्ट् बांध, बांध ननरीिण, सूचना के ववश्िेर्ण, अन्द्व ेर्ण ररपो ों या सुरिा
प्राधधकरण की
प्राजस्थनत से संबंधधत लसफाररशों और बांध सुरिा में सुधार करन े के लिए ककए जाने
अधधकाररता ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
645
वािे उपचारात्मक उपायों स े संबंधधत ववर्यों में, उस राज्य के, जजसमें ऐसा बांध
जस्थत है, राज्य बांध सुरिा संगिन की अधधकाररता के अधीन होंगे ; और सभी ऐस े
ववर्यों में ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी द्वारा पूण ष सहयोग ठर्दया जाएगा :
परंतु जहां कोई ववननठर्दषष्ट् बांध केन्द्रीय पजब्िक सेक् र पर उपक्रम के
स्वालमत्वाधीन है या जहां ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का र्दो या अधधक राज्यों पर ववस्तार
ककया गया है या जहां एक राज्य में कोई ववननठर्दषष्ट् बांध ककसी अन्द्य राज्य के
स्वालमत्वाधीन है, वहां प्राधधकरण का, इस अधधननयम के प्रयोजन के लिए राज्य बांध
सुरिा संगिन के रूप में अथ ष िगाया जाएगा :
परन्द्तु यह और कक ऐसे सभी बांधों में, जहां प्राधधकरण राज्य बांध सुरिा
संगिन की भूलमका ननभाता है, वहां राज्य सरकारों की, जजनकी अधधकाररता के भीतर
ऐसे बांध अवजस्थत हैं, प्राधधकरण के पास यथा उपिब्ध इन ववननठर्दषष्ट् बांधों स े
संबंधधत सभी जानकारी तक पहुंच होगी ।
(2) प्राधधकरण या संबंधधत राज्य बांध सुरिा संगिन का प्राधधकृत प्रनतननधध
इस अधधननयम के उपबंधों के कायाषन्द्वयन के लिए कोई आवश्यक ननरीिण या
अन्द्वेर्ण करन े के प्रयोजनों के लिए, जब कभी अपेक्षित हो, ववननठर्दषष्ट् बांध के ककसी
भाग या उसके स्थि में प्रवेश कर सकेगा और ऐसी अन्द्वेर्ण पद्धनतयों का उपयोग
कर सकेगा, जो आवश्यक समझी जाएं ।
(3) उपधारा (2) के अधीन ननरीिण या अन्द्वेर्ण करन े के पश्चात,् उस उपधारा
में ननठर्दषष्ट् प्रनतननधध की यह राय है कक कनतपय उपचारात्मक उपाय ककए जान े
अपेक्षित हैं तो वह ऐसे ववननठर्दषष्ट् बांध के भारसाधक अधधकारी को और संबंधधत
राज्य बांध सुरिा संगिन को ऐसे उपचारात्मक उपायों की ररपो ष करेगा ।
(4) ववननठर्दषष्ट् बांधों के, उनकी समय-सीमा, ववकृनत, अवक्रमण, संरचना संबंधी
या अन्द्य बाधाओं के कारण संक ापन्द्न पाए जाने की र्दशा में, प्राधधकरण और
संबंधधत राज्य बांध सुरिा सगं िन ऐसे प्रचािन संबंधी पमै ानों के आधार पर, ऐस े
उपचारात्मक उपायों का (जजसके अन्द्तगषत अधधकतम जिाशय स्तर, अधधकतम
उत्प्िव माग ष ननस्सारण और अन्द्य स्थानों के माध्यम स े अधधकतम ननस्सारण भी है)
जो वह आवश्यक समझे, सुझाव र्देगा ।
(5) उपधारा (1), उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4) की कोई बात,
ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी या ककसी अन्द्य प्राधधकारी या व्यजक्त को, इस अधधननयम
के उपबंधों के अधीन उस े न्द्य स् त ककए गए ककन्द्हीं उत्तरर्दानयत्वों या बाध्यताओं से
मुक्त नहीं करेगी और उपधारा (1), उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4) के
उपबंध इस अधधननयम के ककन्द्हीं उपबंधों के अनतररक्त होंगे, न कक उनके अल्पीकरण
में ।
25. प्राधधकरण या राज्य बांध सुरिा संगिन द्वारा ककए गए ककसी प्रकार के अन्द्वेर्ण की
िागत ।
अन्द्वेर्ण पर उपगत ककए जान े वािे सभी िचों को, जजसके अन्द्तगतष ककसी परामशी
और ववशेर्ज्ञ को ठर्दए जान े वािे संर्दाय भी हैं, ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी द्वारा वहन
ककया जाएगा ।
26. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का कोई संननमाषण या पररवतनष काय,ष ऐसे बांधों का
संननमाषण या
अलभकरणों द्वारा, जो यथाजस्थनत, प्राधधकरण या राज्य सरकार द्वारा प्रत्यानयत हों,
पररवतनष ।
ककए जाने वाि े अन्द्वेर्ण, डर्जाइन और संननमाषण काय ष के अधीन रहते हुए ककया
जाएगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
646
परंतु प्राधधकरण ककसी ऐसे अलभकरण को ननरठहतष कर सकेगा, जो इस
अधधननयम या उसके अधीन बनाए गए ननयमों या ववननयमों के ककन्द्हीं उपबंधों का
उल्िंघन करता है ।
(2) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक अलभकरण, ववननठर्दषष्ट् बांध की सुरिा का
डर्जाइन बनाने या मूल्यांकन करन े के प्रयोजन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो की
सुसंगत मानक संठहताओं और मागर्दष शकष लसद्धांतों का उपयोग करेगा तथा यठर्द
डर्जाइन या बांध सुरिा मूल्यांकन में कोई ववचिन ककया गया है, तो उसके कारण
र्देगा ।
(3) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक अलभकरण अन्द्वेर्ण, डर्जाइन और
संननमाषण के प्रयोजन के लिए ऐस े अठहतष , अनुभवी और सिम इंजीननयरों को
ननयोजजत करेगा जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।
(4) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक अलभकरण, बांध के डर्जाइन का अनुमोर्दन
करन े के प्रयोजन के लिए, यथाजस् थनत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की सुसंगत
संठहताओं और मागर्दष शकष लसद्धांतों के उपबंधों के अनुसार डर्जाइन की सुरिा,
प्रचािन संबंधी मानकों और नीनतयों का प्रर्दशनष करेगा ।
(5) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक अलभकरण, बांध संननमाषण के प्रयोजन के
लिए ऐसे क् वालि ी ननयंत्रणाकारी उपाय करेगा, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए
जाएं ।
(6) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का संननमाषण या ककसी ववद्यमान ववननठर्दषष्ट् बांध का
पररवतनष या ववस्तारण ऐसे सिम प्राधधकारी के अनुमोर्दन से ककया जाएगा, जो,
यथाजस्थनत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अधधसूचना द्वारा ववननठर्दषष्ट्
ककया जाए ।
जिाशयों का 27. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बाधं के ककसी जिाशय के आरंलभक भराव से पूव,ष
आरंलभक भराव ।
उसके डर्जाइन के लिए जजम् मेर्दार अलभकरण, बांध और उसकी अनुिग्न संरचनाओं के
काय-ष ननष्ट्पार्दन को मानन र करन े और उनका मूल्यांकन करन े के लिए पयाषप्त समय
रहते हुए, भराव संबंधी मापर्दंर् बनाएगा और एक आरंलभक भराव योजना तैयार
करेगा ।
(2) जिाशय का आरंलभक भराव ककए जाने से पवू ,ष राज्य बांध सुरिा संगिन,
ववननठर्दषष्ट् बांध का ननरीिण करेगा या अपने स्वयं के इंजीननयरों द्वारा या ववशेर्ज्ञों
के स्वतंत्र पैनि द्वारा ननरीिण करवाएगा, जो आरंलभक भराव कायक्रष म की भी
परीिा करेगा और भराव के लिए बांध की उपयुक्तता को सम्यक् रूप से प्रमाखणत
करते हुए उसकी ववस्ततृ ररपो ष तैयार करेगा ।
प्रचािन और 28. (1) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, ववननठर्दषष्ट् बांध के लिए प्रचािन
अनुरिण ।
और अनुरिण स्थापन उपिब्ध कराएगा तथा यह सुननजश्चत करेगा कक ऐसे प्रत्येक
बांध पर पयाषप् त संख् या में प्रलशक्षित संकक्रया और अनुरिण इंजीननयर या तकनीकी
व्यजक्त तैनात ककए जाएंगे ।
(2) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, यह सुननजश्चत करेगा कक प्रत्येक
ववननठर्दषष्ट् बांध पर उधचत प्रिेिीकृत प्रचािन और अनुरिण ननर्देलशका रिी जाए और
सभी समयों पर उसका अनुसरण ककया जाए ।
ववननठर्दषष्ट् बांध के 29. इस अधधननयम में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात का यह अथष नहीं िगाया जाएगा
स्वामी काअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
647
उत्तरर्दानयत्व । कक ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का स्वामी, बांध या जिाशय के संननमाषण, प्रचािन,
अनुरिण और पयवष ेिण के लिए अनुर्ंगी कतव्ष यों, बाध्यताओं या र्दानयत्वों से मुक्त
हो गया है ।
अध्याय 7
सुरक्षा, निरीक्षर् और आंकडे संग्रहर्
30. प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध के लिए, स्वामी, उसके प्रचािन और अनुरिण बांध सुरिा
इकाई ।
स्थापन के भीतर ऐसे सिम स्तरीय इंजीननयरों से, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट्
ककए जाएं, से लमिकर बनी बाधं सुरिा इकाई को उपिब्ध कराएगा ।
31. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, प्रत्येक वर् ष अपनी बांध ननरीिण ।
सुरिा इकाई के माध्यम से, ऐसे प्रत्येक बांध के संबंध में वर्ाष ऋतु के पहिे और
वर्ाष ऋतु के पश् चात ् ननरीिण कराएगा ।
(2) उपधारा (1) पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे त्रबना, ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का
प्रत्येक स्वामी, प्रत्येक बाढ के र्दौरान और उसके पश्चात,् भूकंप या ककन्द्हीं अन्द्य
प्राकृनतक या मानव ननलमतष ववपवत्तयों के पश्चात ् या यठर्द बांध में कोई संक ग्रस् त या
असामान्द्य प्रनतकक्रया का कोई संकेत र्देिा जाता है तो प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध का
ननरीिण करेगा या बांध सुरिा इकाई द्वारा उसका ननरीिण कराएगा ।
(3) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी,—
(क) उपधारा (1) और उपधारा (2) में ननठर्दषष्ट् सभी ननरीिण ऐसे
मागर्दष शकष लसद्धान्द्तों और जाचं सूधचयों के अनुसार करेगा जो ववननयमों द्वारा
ववननजश्चत की जाएं ;
(ि) संपूण ष वर्ाष ऋतु अवधध में प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध स्थि पर, ऐसे
इंजीननयरों और अन्द्य तकनीकी कालमकष ों को तैनात करेगा, जजनका राज् य बांध
सुरिा संगिन के परामश ष से ववननश् चय ककया जाए :
परंतु ऐसे इंजीननयरों और अन्द्य तकनीकी कालमकष ों को, ऐसी ककसी अन्द्य
प्राकृनतक या मानव ननलमतष ववपवत्तयों के पश् चात,् जजससे बांध में संक ग्रस् त
जस् थनतयां पैर्दा हो सकती हैं, संपूण ष आपात अवधध के र्दौरान उनके अपने-अपने
बांध स्थिों पर तैनात ककया जाना अपेक्षित होगा ;
(ग) बांध सुरिा इकाई द्वारा ननरीिण ररपो ष, राज्य बांध सुरिा संगिन
को भेजेगा, जो उस ररपो ष का ववश्िेर्ण करेगा और ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी
को कलमयों और उपचारात्मक उपाय, यठर्द कोई हों, पर ीका-ठ प्पखणयां प्रस्तुत
करेगा ।
32. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बाधं के प्रत्येक स्वामी के पास, ऐसे बांध के काय ष प्रत्येक ववननठर्दषष्ट्
बांध में
ननष्ट्पार्दन को मानी र करन े के लिए, प्रत्येक ऐसे ववननठर्दषष्ट् बांध पर न्द्यूनतम संख्या
प्रनतष्ट्ि ावपत ककए
में ऐसे उपकरण होंगे और उन्द्ह ें ऐसी रीनत में प्रनतष्ट् िावपत ककया जाएगा, जो ववननयमों
जाने वािे
द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए । उपकरण ।
(2) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् उपकरणों के
पािय़ांक का अलभिेि रिेगा और ऐसे पािय़ांक का ववश्िेर्ण राज्य बांध सुरिा
संगिन को ऐसे प्ररूप, रीनत में और ऐसे अंतरािों पर भजे ेगा, जो ववननयमों द्वारा
ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।
33. (1) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध के समीप जि-मौसमअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
648
जि-मौसम ववज्ञान केंर स्थावपत करेगा, जो ऐसे आंकड़े अलभलिखित करन े में समथ ष ववज्ञान केंर की
स्थापना ।
हैं, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।
(2) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, ककसी उपयुक्त अवस्थान पर
उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् आंकड़ों का संग्रहण, संकिन, प्रक्रमण और भंर्ारण करेगा ।
भूकंप-ववज्ञानी केंर 34. (1) ऐस े प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध की र्दशा में, जजसकी ऊंचाई तीस मी र या
का प्रनतष्ट्ि ापन ।
उसस े अधधक है या जो ऐसे भूकंप जोन में आता है, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट्
ककया जाए, ववननठर्दषष्ट् बांध का स्वामी, सूक्ष्म और प्रबि गनत के भूकंपों तथा ऐसे
अन्द्य आंकड़ों को, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं, अलभलिखित करने के
लिए प्रत्येक ऐसे बांध के समीप एक भूकंप-ववज्ञानी केंर स्थावपत करेगा ।
(2) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् र्ा ा का
संग्रहण, संकिन, प्रक्रमण और भंर्ारण ऐसे उपयुक्त स्थान पर और ऐसी रीनत में
करेगा, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाए ।
अध्याय 8
आपात काय ि योजिा और आपदा प्रबंिि
ववननठर्दषष्ट् बांध के 35. (1) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध के संबंध
स्वामी की में,—
बाध्यता ।
(क) सुअलभकजल्पत जि-मौसम ववज्ञान ने वकष और एक अंतःप्रवाही
पूवाषनुमान प्रणािी स्थावपत करेगा ;
(ि) बांध के अनुप्रवाह अधधसंभाव् य बाढ प्रभाववत िेत्रों के लिए आपात
बाढ चेतावनी प्रणािी स्थावपत करेगा ;
(ग) िंर् (क) और िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रणालियों के कायकष रण का
आवधधक रूप से परीिण करेगा या करवाएगा ;
(घ) ऐसे वैज्ञाननक और तकनीकी उपकरण संस्थावपत करेगा, जो बांध
सुरिा और अनुप्रवाह िेत्र के िोगों के जीवन और संपवत्त को सुननजश्चत करने
के प्रयोजन के लिए समय-समय पर आववष्ट्कृत या अंगीकृत ककए गए हैं ;
(ङ) संबंधधत जजिा प्राधधकाररयों को बाढ सबं ंधी चेतावनी सठहत अधधकतम
पूवाषनुमाननत अंतवाषह और बठहवाषह तथा बांध के धारा प्रनतकूि प्रवाह या
अनुप्रवाह के संबंध में व्यजक्तयों और संपवत्त पर उसका प्रनतकूि समाघात, यठर्द
कोई हो, से संबंधधत जानकारी उपिब्ध कराएगा और ऐसी जानकारी को
सावजष ननक अधधकाररता में भी उपिब्ध कराएगा ;
(च) जिाशयों की संकक्रया से संबंधधत तत्काि जि-ववज्ञान और मौसम
ववज्ञान संबंधी आंकड़ों तथा जानकारी के आर्दान-प्रर्दान के लिए आरंलभक
चेतावनी प्रणािी के स्थापन और उसको चिाने में प्राधधकरण को आवश्यक
सहायता र्देगा ।
(2) ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी, अपने प्रत्येक बांध के लिए ऐसे
अंतराि पर, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, जोखिम ननधाषरण अध्ययन
करेगा और ऐसा पहिा अध्ययन इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से पांच वर् ष के
भीतर ककया जाएगा ।
आपात काय ष 36. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बाधं का प्रत्येक स्वामी, प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध के
योजना ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
649
संबंध में,—
(क) जिाशय की आरंलभक भराई की अनुज्ञा र्देने से पूव ष आपात कायष
योजना तैयार करेगा और तत्पश्चात ् ननयलमत अंतरािों पर ऐसी योजनाओं को
अद्यतन करेगा ;
(ि) ऐसे बांध के संबंध में, जजनका संननमाषण और भराई इस अधधननयम
के प्रारंभ के पूव ष की गई है, इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से पांच वर् ष के
भीतर आपात काय ष योजना तैयार करेगा और तत्पश्चात ् ऐसे ननयलमत अंतरािों
पर, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं, ऐसी योजनाओं को अद्यतन
करेगा ।
(2) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् आपात काय ष योजना में,—
(क) ककसी वास्तववक या आसन्द्न बांध ववफिता की र्दशा में ववननठर्दषष्ट्
बांध के धारा प्रनतकूि प्रवाह या अनुप्रवाह वाि े व्यजक्तयों और संपवत्त की संरिा
के लिए या आपर्दा के प्रभावों को कम करने के लिए अनसु रण की जाने वािी
प्रकक्रयाएं उपवखणतष होंगी ;
(ि) उसमें,—
(i) ऐस े आपातों के प्रकार सजम्मलित होंग,े जजनके ककसी जिाशय
की संकक्रया में घठ त होने की संभावना है ;
(ii) ककसी बांध संबंधी ववफिता की र्दशा में, जिाशय से छोड़े गए
बाढ के पानी के कारण प्रनतकूि रूप स े प्रभाववत होने वािे अधधसंभाव्य
संभाववत िेत्रों, जनसंख्या, संरचनाओं और संस्थापनों के साथ संभाव्य
ववध् वंसात्मक बाढ का पता िगाना सजम् मलित होगा ;
(iii) संभाव् य प्रनतकूि र्दशाओं से, ववशेर् रूप से मानव जीवन की
हानन से बचने के लिए र्दि और सवोतम संभाववत रीनत से ननप ने के
लिए, चेतावनी प्रकक्रयाएं, जि प् िावन मानधचत्र और अधग्रम तैयाररयां
सजम्मलित होंगी ;
(iv) ऐसे अन्द्य ववर्य, जो भौगोलिक र्दशाओं, बांध के आकार और
ऐसे अन्द्य सुसंगत कारकों जो आवश्यक हों को ध्यान में रिते हुए
सजम्मलित होंगे ।
(3) इस धारा के अधीन आपात काय ष योजना को तब कायाजषन्द्व त ककया जाएगा,
जब कभी ऐसी जस्थनतयां उत्पन्द्न हों, जो ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के लिए पररसंक मय
हों या उसके लिए पररसंक मय हो सकती हैं या सावजष ननक सुरिा, अवसंरचना, अन्द्य
संपवत्त के लिए या पयाषवरण के लिए संभवत: पररसंक मय हो सकती हैं ।
(4) ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक स्वामी आपात काय ष योजना को तैयार करते
समय और उस े अद्यतन करत े समय, सभी आपर्दा प्रबंधन अलभकरणों और राज् य के
अन्द्य ऐसे ववभाग, जजन्द्ह ें प्रभाववत होने वािे िेत्र में आपर्दा प्रबंधन और राहत संबंधी
काय ष सौंपा गया हो, और प्रभाववत होने वािे ननक तम सामीप्य बांधों के स्वालमयों के
साथ परामश ष प्रकक्रया करेगा, जजससे बांध सुरिा के मुद्र्दों पर समन्द्व य और पारर्दलशतष ा
को िाया जा सके और ककसी अवांनछत भय का ननराकरण ककया जा सके ।
37. इस अधधननयम के उपबंधों पर या ववलशष्ट् बांध के स्वामी और अन्द्य अन्द्य आपर्दा
प्रबंधन
संगिनों और इस अधधननयम के अधीन प्राधधकाररयों के र्दानयत्व पर प्रनतकूि प्रभाव
प्राधधकाररयों कोअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
650
र्ािे त्रबना, प्रत्येक स्वामी, संगिन और प्राधधकारी, ववननठर्दषष्ट् बांधों में उद्भूत ककसी सहायता ।
आपर्दा या आपातजस्थनत से ननप ने या कम करने के लिए तत् समय प्रवत्तृ ककसी ववधध
के ककसी प्राधधकारी को, यठर्द उसके द्वारा ऐसी अपेिा की जाए, आवश्यक सहायता
प्रर्दान करेगा ।
अध्याय 9
व् यापक बांि सुरक्षा मूलयांकि
व् यापक बांध सुरिा 38. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बाधं का स्वामी, ववननठर्दषष्ट् बांध और उसके जिाशय
मूल्यांकन ।
की र्दशाओं के अवधारण के प्रयोजन के लिए, ववननयमों के अनुसार गठित ववशेर्ज्ञों
के ककसी स्वतंत्र पैनि के माध्यम से प्रत्येक ववननठर्दषष्ट् बांध का व् यापक बांध सुरिा
मूल्यांकन करेगा या करवाएगा :
परंतु प्रत्येक ववद्यमान ववननठर्दषष्ट् बांध के लिए पहिा व् यापक बांध सुरिा
मूल्यांकन इस अधधननयम के प्रारंभ होने की तारीि से पांच वर् ष के भीतर ककया
जाएगा और तत्पश्चात ् प्रत्येक ऐसे बांध का व् यापक सुरिा मूल्यांकन ऐसे ननयलमत
अंतरािों पर ककया जाएगा जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककया जाए ।
(2) व् यापक बांध सुरिा मल्ू यांकन में ननम्नलिखित सजम् मलित होगा, ककन्द्तु यह
इन तक ही सीलमत नहीं होगा,—
(क) संरचना के अलभकल्प, संननमाषण, संकक्रया, अनुरिण और ननष्ट्पार्दन
पर उपिब्ध आंकड़ों का पुनवविष ोकन और ववश्िेर्ण ;
(ि) ववननयमों द्वारा यथाववननठर्दषष्ट् अलभकल्प बाढ के आज्ञापक
पुनवविष ोकन सठहत जिरालशक और जि व् यवस् था संबंधी पररजस् थनतयों का
साधारण ननधाषरण ;
(ग) कनतपय र्दशाओं में, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् की जाएं,
आज्ञापक स्थि ववलशष्ट् भूकंप पैरामी रों के साथ ववननठर्दषष्ट् बांध की भूकंपीय
सुरिा का साधारण ननधाषरण ;
(घ) संकक्रया, अनुरिण और ननरीिण प्रकक्रयाओं का मूल्यांकन; और
(ङ) ककन्द्हीं अन्द्य पररजस्थनतयों का मूल्यांकन जो ढांचे की अितता के
प्रनत पररसंक मय पैर्दा करता हो ।
कनतपय र्दशाओ ं 39. धारा 38 में ननठर्दषष्ट् व् यापक बांध सुरिा मूल्यांकन,—
में अननवाय ष
(क) मूि ढांचे या अलभकल्प संबंधी मानर्दंर् में वहृ त्त उपांतरण ;
मूल्यांकन ।
(ि) बांध या जिाशय के ककनारे पर ककसी अप्रानयक जस्थनत का पता
िगन े ; और
(ग) चरम जिीय या भूकंपीय घ ना,
की र्दशा में अननवाय ष हो जाएगा ।
व् यापक मूल्यांकन 40. (1) ककसी ववननठर्दषष्ट् बाधं का स्वामी, धारा 38 या धारा 39 के अधीन
की ररपो ें ।
ककए गए बांध सुरिा मूल्यांकन के पररणामों की ररपो ष राज्य बांध सुरिा संगिन को
र्देगा ।
(2) उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् ररपो ों में ननम्नलिखित सजम्मलित होंगे, ककन्द्तु यह
उन तक ही सीलमत नहीं होगी,—
(क) ढांचे के अलभकल्प, जि ववज्ञान, संननमाषण, संकक्रया, अनुरिण औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
651
ननष्ट् पार्दन का दृजष्ट् क संप्रेिण और उसस े संबंधधत उपिब्ध आंकड़ों के आधार
पर ढांचे की जस्थनत का ननधाषरण ;
(ि) ढांचे की तत् काि सुरिा को सुननजश्चत करन े के लिए ककन्द्ह ीं आपात
उपायों या कारषवाइयों की लसफाररशें, यठर्द अपेक्षित हों ;
(ग) ढांचे के अलभकल्प, संननमाषण, प्रचािन, अनुरिण और ननरीिण से
संबंधधत उपचारात्मक उपायों और कारषवाइयों की लसफाररशें, यठर्द अपेक्षित हों ;
(घ) अनतररक्त ववस्ततृ अध्ययन, अन्द्वेर्ण और ववश्िेर्ण की लसफाररशें,
यठर्द अपेक्षित हो ; और
(ङ) बांधों के नैत्यक अनुरिण और ननरीिण में सुधार करने हेतु
लसफाररशें, यठर्द अपेक्षित हों ।
(3) जहां धारा 38 या धारा 39 के अधीन ककए गए सुरिा मूल्यांकन का
पररणाम उपचारात्मक कारषवाई की लसफाररश हैं, वहां राज्य बांध सुरिा संगिन,
ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी स े यह सुननजश्चत करने के लिए पैरवी करेगा कक ऐस े
उपचारात्मक उपाय समय पर ककए जाएं, जजनके लिए स्वामी पयाषप्त ननधधयां उपिब्ध
कराएगा ।
(4) जहां धारा 38 की उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् ववशेर्ज्ञों के स्वतंत्र पैनि और
ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी के बीच कोई अननणीत ववर्य उत्पन्द्न होता है, वहां ऐसा
ववर्य राज्य बांध सुरिा संगिन को ननठर्दषष्ट् ककया जाएगा, और कोई समझौता न हो
पाने की र्दशा में उक् त ववर्य को प्राधधकरण को ननठर्दषष्ट् ककया जाएगा, जो उस संबंध
में अपनी सिाह र्देगा और उसके कायाषन्द्वयन के लिए संबंधधत राज्य सरकार को
लसफाररशें करेगा ।
अध्याय 10
अपराि और िाश्स्तयां
41. जो कोई, त्रबना ककसी युजक्तयुक्त कारण के,— बाधा र्ािने, आठर्द
के लिए र्दंर् ।
(क) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के ककसी अधधकारी या कमचष ारी को
या राष्ट्रीय सलमनत या प्राधधकरण या राज्य सलमनत या राज्य बांध सुरिा
संगिन द्वारा प्राधधकृत ककसी व्यजक्त को इस अधधननयम के अधीन उसके
कृत्यों के ननवषहन में बाधा र्ािेगा ; या
(ि) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या राष्ट्रीय सलमनत या प्राधधकरण
या राज्य सलमनत या राज्य बांध सुरिा संगिन के द्वारा या उसकी ओर से इस
अधधननयम के अधीन ठर्दए गए ककसी ननर्देश का पािन करन े से इंकार करेगा,
वह कारावास से, जजसकी अवधध एक वर् ष तक की हो सकेगी या जुमाषने से, या र्दोनों
से र्दंर्नीय होगा और यठर्द ऐसी बाधा र्ािने या ननर्देशों के पािन से इंकार करने का
पररणाम जीवन हानन या उसके लिए आसन्द्न संक है, तो वह ऐसे कारावास से,
जजसकी अवधध र्दो वर् ष तक की हो सकेगी, र्दंर्नीय होगा ।
42. (1) जहां इस अधधननयम के अधीन कोई अपराध, सरकार के ककसी ववभाग सरकार के
ववभागों द्वारा
द्वारा ककया गया है, वहां ववभाग का प्रमुि, अपराध का र्दोर्ी समझा जाएगा और
अपराध ।
तद्नुसार अपने ववरुद्ध कायवष ाही ककए जाने और र्दंडर्त ककए जाने का भागी होगा,
जब तक वह यह सात्रबत नहीं कर र्देता है कक अपराध उसकी जानकारी के त्रबना ककयाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
652
गया था या उसने ऐसे अपराध को रोकन े के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में ककसी बात के होत े हुए भी, जहां इस अधधननयम के अधीन
कोई अपराध ककसी सरकारी ववभाग द्वारा ककया गया है और यह सात्रबत हो जाता है
कक वह अपराध, ववभाग प्रमुि से लभन्द्न ककसी अधधकारी की सहमनत या
मौनानुकूिता से ककया गया है या उस अपराध का ककया जाना उसकी उपेिा का
कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा अधधकारी उस उल् िंघन का र्दोर्ी समझा जाएगा
और तद्नुसार अपने ववरुद्ध कायवष ाही ककए जाने और र्दंडर्त ककए जाने का भागी
होगा ।
कंपननयों द्वारा 43. (1) जहां, इस अधधननयम के अधीन कोई अपराध, ककसी कंपनी या
अपराध ।
ननगलमत ननकाय द्वारा ककया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यजक्त, जो उस अपराध के
ककए जाने के समय उस कंपनी के कारोबार के संचािन के लिए उस कंपनी का
भारसाधक और उसके प्रनत उत्तरर्दायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे उल्िंघन
की र्दोर्ी समझी जाएंगी और तद्नुसार अपने ववरुद्ध कायवष ाही ककए जाने और र्दंडर्त
ककए जाने के भागी होंगे :
परंतु इस उपधारा की कोई बात ककसी ऐस े व्यजक्त को इस अधधननयम में
उपबंधधत ककसी र्दंर् का भागी नहीं बनाएगी यठर्द वह यह सात्रबत कर र्देता है कक
अपराध उसकी जानकारी के त्रबना ककया गया था या उसने ऐसे अपराध के ककए जान े
का ननवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में ककसी बात के होत े हुए भी, जहां इस अधधननयम के अधीन
कोई अपराध, ककसी कंपनी द्वारा ककया गया है और यह सात्रबत हो जाता है कक वह
अपराध कंपनी के ककसी ननर्देशक, प्रबंधक, सधचव या अन्द्य अधधकारी की सहमनत या
मौनानुकूिता से ककया गया है या उस अपराध का ककया जाना उसकी ककसी उपेिा के
कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा ननर्देशक, प्रबंधक, सधचव या अन्द्य अधधकारी भी
उस अपराध का र्दोर्ी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने ववरुद्ध कायवष ाही ककए जाने
और र्दंडर्त ककए जाने का भागी होगा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) “कंपनी” से कोई ननगलमत ननकाय अलभप्रेत है और इसके अंतगषत
फम ष या व्यजष्ट् यों का अन्द्य संगम भी है ; और
(ि) फम ष के संबंध में, “ननर्देशक” से उस फम ष का भागीर्दार अलभप्रेत है ।
अपराध का 44. (1) कोई भी न्द्यायािय इस अधधननयम के अधीन र्दंर्नीय ककसी अपराध
संज्ञान ।
का संज्ञान, यथाजस्थनत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा या राष्ट्रीय सलमनत
या प्राधधकरण या राज्य सलमनत या राज्य बांध सुरिा संगिन द्वारा इस ननलमत्त
प्राधधकृत ककसी व्यजक्त द्वारा की गई लशकायत के लसवाय नहीं करेगा ।
(2) महानगर मजजस्रे या प्रथम वग ष न्द्यानयक मजजस्रे के न्द्यायािय से
ननम्नतर कोई न्द्यायािय इस अधधननयम के अधीन र्दंर्नीय ककसी अपराध का
ववचारण नहीं करेगा ।
अध्याय 11
प्रकीर् ि
ववननठर्दषष्ट् बांधों 45. (1) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन, पूववष ती ववत्तीय वर् ष की समाजप्त के
की सुरिाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
653
प्राजस्थनत पर तीन मास के भीतर अपने कायकष िापों और राज्य में ववननठर्दषष्ट् बांधों की सुरिा
वावर्कष ररपो ष ।
प्राजस्थनत की एक वावर्कष ररपो ष तैयार करेगा और ऐसी ररपो ष, प्राधधकरण और राज्य
सरकार को अग्रेवर्त करेगा और वह सरकार, उस,े जहां राज् य ववधान-मंर्ि में र्दो
सर्दन हैं वहां प्रत् येक सर्दन के समि और जहां राज् य ववधान-मंर्ि में केवि एक
सर्दन है, वहां उस सर्दन के समि रिवाएगी ।
(2) प्रत्येक राज्य बांध सुरिा संगिन और ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध का प्रत्येक
स्वामी, प्राधधकरण को, जब कभी अपेक्षित हो, ऐस े रूपववधान में और ऐसी रीनत में,
जैसा प्राधधकरण द्वारा ववननश्चय ककया जाए, पररयोजनाओं के प्रिेिन, ववफिता की
जांचों की ररपो ष और कोई अन्द्य आंकड़े उपिब् ध करवाएगा ।
(3) प्राधधकरण र्देश में बांध सुरिा कक्रयाकिापों की एक समेककत वावर्कष ररपो ष
तैयार करेगा और उस े पूववष ती ववत्तीय वर् ष की समाजप्त स े छह मास के भीतर केन्द्रीय
सरकार को प्रस्तुत करेगा तथा वह सरकार उस े संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि
रिवाएगी ।
(4) प्राधधकरण, राष्ट्रीय आपर्दा प्रबंधन प्राधधकरण को ववननठर्दषष्ट् बांधों की सुरिा
प्राजस्थनत पर अपनी वावर्कष ररपो ष अग्रेवर्त करेगा और वह ऐसी ररपो ष पजब्िक र्ोमेन
पर भी उपिब्ध करवाएगा ।
(5) प्रत्येक राज्य का राज्य बांध सुरिा संगिन संबंधधत राज्य आपर्दा प्रबंधन
प्राधधकरण को अपनी वावर्कष ररपो ष अग्रेवर्त करेगा और वह ऐसी ररपो ष पजब्िक
र्ोमेन पर भी उपिब्ध करवाएगा ।
46. ववननठर्दषष्ट् बांधों से लभन्द्न बांध का प्रत्येक स्वामी, ऐसे उपाय करेगा, जो ववननठर्दषष्ट् बांधों
से लभन्द्न बांधों के
बांध की सुरिा सुननजश्चत करने के लिए आवश्यक हों और ऐसे उपायों का अनुपािन
संबंध में सुरिा
करेगा, जो ववननयमों द्वारा ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।
उपाय ।
47. जहां कोई बांध जजसके अंतगतष भू-स्ििन या ठहमनर्दीय, ठहमोढ के कारण भारत के
राज्यिेत्र से बाहर
सजृजत कोई बांध भी है, भारत के राज्यिेत्र से बाहर अवजस्थत है और प्राधधकरण की,
अवजस्थत बांधों के
स्वप्रेरणा से या ककसी व्यजक्त या संगिन या प्राधधकारी या स्रोत स े प्राप्त सूचना के
संबंध में सुरिा
आधार पर प्रथमदृष्ट् या यह राय है कक ऐसे बांधों की सुरिा सुननजश्चत करने के लिए उपाय ।
उपाय ककए जाने अपेक्षित हैं और जजनकी ववफिता भारत में अवजस्थत िोगों के
जीवन और संपवत्त के लिए संक ापन्द्न हो सकेगी, वहां वह केन्द्रीय सरकार को,
लिखित में उसकी इत्तिा, उसमें ऐसे संभाववत नुकसानों, जो ऐसे बांधों की ववफिता के
कारण उद्भूत हो सकेंग े और ऐसे बांध के संबंध में ककए जाने वािे अपेक्षित सुरिा
उपायों को उपर्दलशतष करत े हुए करेगा और केंरीय सरकार ककसी संभाववत आशंका को
कम करने के लिए सभी यथोधचत उपाय करेगी ।
48. इस अधधननयम के उपबंध, तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध में अंतववष्ट्ष अधधननयम का
अध् यारोही प्रभाव
ककसी असंगत बात के होत े हुए भी प्रभावी होंगे ।
होना ।
49. (1) यठर्द केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कक ऐसा करना अनुसूधचयों का
संशोधन करन े की
आवश्यक या समीचीन है, तो वह अधधसूचना द्वारा, पहिी अनुसूची, र्दसू री अनुसूची
शजक्त ।
या तीसरी अनुसूची का संशोधन कर सकेगी और तर्दपु री, अनुसूधचयां तद्नुसार
संशोधधत की गई समझी जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन जारी प्रत्येक अधधसूचना की प्रनत उसके जारी ककएअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
654
जाने के पश्चात ् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिी जाएगी ।
50. केंरीय सरकार, इस अधधननयम के प्रभावी कायाषन्द्वयन के लिए राज्य केंरीय सरकार की
ननर्देश र्देने की
सरकार को, जहां वह राज् य सरकार ववननठर्दषष्ट् बांध की स्व ामी है और ककसी अन्द्य
शजक्त ।
मामिे में, ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वामी को ऐसे ननर्देश र्दे सकेगी, जो वह
आवश्यक समझे ।
ररजक्तयों, आठर्द स े 51. राष्ट्रीय सलमनत, प्राधधकरण और राज्य सलमनत का कोई काय ष या कायवष ाही
राष्ट्रीय बांध सुरिा केवि इस कारण अववधधमान्द्य नहीं होगी कक,—
सलमनत, प्राधधकरण
और राज्य बांध (क) प्राधधकरण में कोई ररजक्त है या उसके गिन में कोई त्रुठ है ;
सुरिा सलमनत की
(ि) प्राधधकरण के सर्दस्य के रूप में काय ष करने वािे ककसी व्यजक्त की
कायवष ाठहयों का
ननयुजक्त में कोई त्रुठ है ; या
अववधधमान्द्य न
होना । (ग) प्राधधकरण की प्रकक्रया में कोई अननयलमतता मामिे के गुणागुण पर
प्रभाव नहीं र्ािेगी ।
केंरीय सरकार की 52. (1) केंरीय सरकार, इस अधधननयम के उपबंधों को कायाषजन्द्वत करने के
ननयम बनान े की
लिए, अधधसूचना द्वारा, ननयम बना सकेगी ।
शजक्त ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे
त्रबना, ऐसे ननयम ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे,
अथाषत ् :—
(क) धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय सलमनत की बैिकों का
समय और स्थान तथा ऐसी बैिकों में अनुसरण की जाने वािी प्रकक्रया और
धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन राष्ट्रीय सलमनत की बैिकों पर उपगत व्यय ;
(ि) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन बांध सुरिा के िेत्र में या ऐस े
अन्द्य िेत्र में के अधधकाररयों और अन्द्य कमषचाररयों की अहषताएं और अनुभव ;
(ग) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन अन्द्य अधधकाररयों और
प्राधधकरण के अन्द् य कमचष ाररयों के कृत्य, शजक्तयां और सेवा के ननबंधन और
शत ें ;
(घ) कोई ऐसा अन्द्य ववर्य, जो ववठहत ककया जाना है या ववठहत ककया
जाए या जजसके संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा ननयमों द्वारा उपबंध ककया
जाना है ।
राज्य सरकार की 53. (1) राज्य सरकार, इस अधधननयम के उपबंधों को कायाषजन्द्वत करने के
ननयम बनान े की
लिए, अधधसूचना द्वारा, ननयम बना सकेगी ।
शजक्त ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे
त्रबना, ऐसे ननयम ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे,
अथाषत ् :—
(क) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सलमनत की बैिकों का
समय और स्थान तथा ऐसी बिै कों में अनुसरण की जाने वािी प्रकक्रया ;
(ि) धारा 13 की उपधारा (3) के अधीन राज्य सलमनत की बैिकों पर
उपगत व्यय ;
(ग) धारा 13 की उपधारा (4) के अधीन राज्य सलमनत या उसकी उप-अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
655
सलमनतयों के ववशेर्ज्ञ सर्दस्यों या आमंत्रत्रत ववशेर्ज्ञों को संर्दत्त फीस और भत्ते ;
(घ) धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन राज्य बांध सुरिा संगिन का
संगिनात्मक ढांचा और काय ष प्रकक्रया ;
(ङ) धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन बांध सुरिा के िेत्र में या ऐसे
अन्द्य िेत्र में के राज्य बाधं सुरिा संगिन के अधधकाररयों और अन्द्य
कमचष ाररयों की, अहषताएं और अनुभव ;
(च) धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन राज्य बांध सुरिा संगिन के
कमचष ाररयों के कृत्य, शजक्तयां और सेवा के ननबंधन और शत ें ;
(छ) धारा 46 के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों से लभन्द्न बांधों की बाबत बांध
सुरिा उपाय ;
(ज) कोई अन्द्य ववर्य, जो ववठहत ककया जाना है या ववठहत ककया जाए
या जजसकी बाबत राज्य सरकार द्वारा, ननयमों द्वारा उपबंध ककया जाना है ।
(3) इस अधधननयम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक ननयम
यथासंभवशीघ्र इसके बनाए जाने के पश्चात ् राज्य ववधान-मंर्ि जहां वह र्दो सर्दनों स े
लमिकर बना है या जहां ऐसा ववधान-मंर्ि एक सर्दन से लमिकर बना है, के समि
रिा जाएगा ।
54. (1) प्राधधकरण, राष्ट्रीय सलमनत की लसफाररशों पर, इस अधधननयम के प्राधधकरण द्वारा
ववननयम बनान े
प्रयोजनों को कायाषजन्द्वत करन े के लिए, इस अधधननयम और उसके अधीन बनाए गए
की शजक्त ।
ननयमों से संगत ववननयम बना सकेगा ।
(2) ववलशष्ट् तया और पूवगष ामी शजक्त की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव र्ािे
त्रबना, ऐसे ववननयम ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे,
अथाषत ् :—
(क) धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन बांध सुरिा आश्वासन का
संतोर्जनक स्तर प्राप्त करने के लिए मागर्दष शकष लसद्धांत, मानक और अन्द्य
ननर्देश ;
(ि) धारा 17 के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों की भेद्यता और संक
वगीकरण के लिए मानर्दंर् ;
(ग) धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन िाग बुकों या र्ा ा बेस के
अनुरिण से संबंधधत ब्यौरे और प्ररूप ;
(घ) धारा 23 के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों की सुरिा के लिए उत्तरर्दायी
व्यजक् तयों की अहषताएं, अनुभव और प्रलशिण ;
(ङ) धारा 26 की उपधारा (3) के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों के अन्द्वेर्ण,
डर्जाइन और संननमाषण के प्रयोजन के लिए सिम इंजीननयरों का ननयोजन तथा
उनकी अहषताएं और अनुभव ;
(च) धारा 26 की उपधारा (5) के अधीन बांध संननमाषण के प्रयोजन के
लिए क्वालि ी ननयंत्रण उपाय ;
(छ) धारा 30 के अधीन बांध सुरिा इकाइयों के लिए सिम इंजीननयरों
का स्तर ;
(ज) धारा 31 की उपधारा (3) के िंर् (क) के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
656
ननरीिण के लिए मागर्दष शकष लसद्धांत और जांच सूधचयां ;
(झ) धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों में उपस्कर से ों
की न्द्यूनतम संख्या और उनके प्रनतष्ट्िापन की रीनत ;
(ञ) धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन राज्य बांध सुरिा संगिन को
पाठ्यांकन का ववश्िेर्ण अग्रेवर्त करने का प्ररूप, रीनत और समय अंतराि ;
( ) धारा 33 की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों के समीप जि
मौसम ववज्ञान केन्द्रों की आंकड़े अपेिाएं ;
(ि) धारा 34 की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों के समीप में
भूकंप-ववज्ञानी केन्द्रों की र्ा ा अपेिाएं ;
(र्) धारा 34 की उपधारा (2) के अधीन र्ा ा के संग्रहण, संकिन,
प्रक्रमण और भंर्ारण के उपयुक्त स्थान और रीनत ;
(ढ) धारा 35 की उपधारा (2) के अधीन ककए जाने वािे जोखिम ननधाषरण
अध्ययनों का समय अंतराि ;
(ण) धारा 36 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन आपात काय ष
योजना को अद्यतन करने के लिए समय अंतराि ;
(त) धारा 38 की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् बाधं ों के व् यापक
सुरिा मूल्यांकन के लिए समय अंतराि ;
(थ) धारा 38 की उपधारा (2) के िंर् (ि) के अधीन ववद्यमान बांधों के
बाढ संबंधी डर्जाइन का आज्ञापक पुनवविष ोकन ;
(र्द) धारा 38 की उपधारा (2) के िंर् (ग) के अधीन ववद्यमान बांधों का
आज्ञापक स्थि ववननठर्दषष्ट् भूकंप-ववज्ञानी पैरामी र अध्ययन ;
(ध) धारा 46 के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों से लभन्द्न बांध के प्रत्येक स्वामी
द्वारा बांध सुरिा सुननजश्चत करने के लिए आवश्यक उपाय ;
(न) कोई अन्द्य ववर्य, जो ववननठर्दषष्ट् ककया जाना है या जजसकी बाबत
प्राधधकरण द्वारा उपबंध ककया जाना है ।
ननयमों और 55. इस अधधननयम के अधीन बनाया गया प्रत्येक ननयम और ववननयम, बनाए
ववननयमों का
जाने के पश्चात,् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि, जब वह सत्र में हो, कुि
संसद् के समि
तीस ठर्दन की अवधध के लिए रिा जाएगा । यह अवधध एक सत्र में अथवा र्दो या
रिा जाना ।
अधधक आनुक्रलमक सत्रों में परू ी हो सकेगी । यठर्द उस सत्र के या पूवोक्त आनुक्रलमक
सत्रों के िीक बार्द के सत्र के अवसान के पूव ष र्दोनों सर्दन उस ननयम या ववननयम में
कोई पररवतनष करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात ् वह ऐस े पररवनततष रूप में
ही प्रभावी होगा । यठर्द उक्त अवसान के पूव ष र्दोनों सर्दन सहमत हो जाएं कक वह
ननयम या ववननयम नहीं बनाया जाना चाठहए तो तत्पश्चात ् वह ननयम या ववननयम
ननष्ट् प्रभाव हो जाएगा । ककंत ु ननयम या ववननयम के इस प्रकार पररवनततष या
ननष्ट् प्रभाव होने से उस ननयम या ववननयम के अधीन पहिे की गई ककसी बात की
ववधधमान्द्यता पर प्रनतकूि प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
कठिनाइयों को र्दरू 56. (1) यठर्द इस अधधननयम के उपबंधों को प्रभावी करन े में कोई कठिनाई
करन े की शजक्त ।
उत्पन्द्न होती है तो केंरीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत ऐस े आर्देश द्वारा, ऐस े उपबंध
कर सकेगी, जो इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हों, जो उस कठिनाई को र्दरू
करन े के लिए उसको आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
657
परंतु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आर्देश इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि
से तीन वर् ष की समाजप्त के पश्चात ् नहीं ककया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन ककया गया प्रत्येक आर्देश, उसके ककए जाने के पश्चात,्
यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिा जाएगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
658
पहिी अनुसूची
[िारा 6(1) देखखए]
राष्ट्रीय बांि सुरक्षा ससमनत के कृत्य
1. बांध सुरिा के मानकों को बनाए रिने और आपर्दा सबं धं ी बांध ववफिता
को रोकने के प्रयोजन के लिए, ऐसी बांध सुरिा नीनतयां ववकलसत करना तथा ऐसे
आवश्यक ववननयमों की लसफाररश करना, जजनकी अपेिा की जाए ;
2. ववननठर्दषष्ट् बांधों और अनुिग्न संरचनाओं में र्दबाव सबं ंधी जस्थनतयों को
ह ाने हेतु उपचारात्मक उपाय के लिए अपनाई जाने वािी तकनीकों पर ववचारों के
आर्दान-प्रर्दान के लिए मंच के रूप में काय ष करना ;
3. प्रमुि बांध संबंधी घ नाओं और बांध असफिताओं के कारणों का
ववश्िेर्ण करना तथा ऐसी घ नाओं और असफिताओं की पुनराववृत्त से बचने के
लिए योजना, ववननर्देश, संननमाषण, प्रचािन और अनुरिण पद्धनतयों में पररवतनष ों
का सुझाव र्देना ;
4. सुरिा आश्वासन के वांनछत स्तर के लिए बांध सुरिा मूल्यांकन, जोखिम
ननधाषरण और जोखिम प्रबंधन के एकीकरण के रूप में व् यापक बांध सुरिा प्रबंधन
दृजष्ट् कोण ववकलसत करना ; और बांध संबंधी ववफिताओं के कारण प्रभाववत
व् यजक् तयों के लिए बीमा रिण के द्वारा प्रनतकरों की भी जाचं करना ;
5. बांध सुरिा से संबंधधत ककसी ऐसे ववननठर्दषष्ट् ववर्य पर सिाह र्देना, जो,
यथाजस्थनत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा उस े ननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
6. भारत के राज् यिेत्र स े बाहर जस् थत बांधों के संबंध में सुरिोपायों पर
केन्द्रीय सरकार के अनुरोध पर लसफाररशें करना ;
7. पुराने बांधों की पुनरुद्धार संबंधी अपेिाओं पर लसफाररश ें करना ;
8. ऐसे बांध पुनरुद्धार कायक्रष मों पर, राज्यों में जजनका ननष्ट्पार्दन केन्द्रीय या
बाहरी ववत्तपोर्ण के माध्यम से ककया जा रहा है, अनुकूि पयवष ेिण का उपबंध
करना ;
9. बांध सुरिा के लिए अनुसंधान और ववकास के िेत्रों की पहचान करना
और ननधधयों के उपबंध की लसफाररश करना ;
10. जिप्रपातीय बांधों के लिए समजन्द्वत जिाशय प्रचािन के संबंध में
लसफाररशें करना ; और
11. बांध सुरिा से संबंधधत कोई अन्द्य ववननठर्दषष्ट् ववर्य, जो केन्द्रीय सरकार
द्वारा उस े ननठर्दषष्ट् ककया जाए ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
659
र्दसू री अनुसूची
[िारा 9(1) देखखए]
राष्ट्रीय बांि सुरक्षा प्राधिकरर् के कृत्य
1. बांध सुरिा मानकों को बनाए रिने और आपर्दा संबंधी बांध ववफिताओं
को रोकने के प्रयोजन के लिए ऐस े कृत्यों का ननवहष न करना, जो राष्ट्रीय सलमनत
द्वारा बनाई गई नीनतयों के कायाषन्द्वयन से संबंधधत हैं, जजसके अंतगतष राष्ट्रीय
सलमनत की लसफाररशों पर ववननयम बनाना भी है ;
2. राज्यों के राज्य बांध सुरिा संगिनों के बीच या ककसी राज्य बांध सुरिा
संगिन और उस राज्य में ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के ककसी स्वामी के बीच ककसी
मुद्र्दे का समाधान करना ;
3. राज्य बांध सुरिा संगिनों को अद्यतन तकनीकी और प्रबंधकीय सहायता
उपिब् ध कराना ;
4. र्देश में सभी ववननठर्दषष्ट् बांधों के लिए राष्ट्रीय स्तर के र्ा ा बेस का
अनुरिण करना, जजसके अंतगतष उसमें अपेक्षित गंभीर र्दबाव की जस्थनतयां, यठर्द
कोई हों, भी हैं ;
5. राज्य बांध सुरिा संगिनों और ववननठर्दषष्ट् बांध के स्वालमयों के साथ बांध
सुरिा स े संबंधधत र्ा ा और पद्धनतयों तथा तकनीकी या प्रबंधकीय सहायता संबंधी
मानकीकरण के लिए संपकष बनाए रिना ;
6. ववननठर्दषष्ट् बांधों और अनिु ग्न संरचनाओं के नेमी ननरीिण और ववस्ततृ
अन्द्वेर्ण के लिए मागर्दष शकष लसद्धान्द्त और जांच सूधचयां अधधकधथत करना ;
7. र्देश में प्रमुि बांध संबंधी ववफिताओं के अलभिेिों का अनुरिण करना ;
8. ककसी प्रमुि बांध ववफिता के कारण की, अपने स्वयं के इंजीननयरों के
माध्यम से या ववशेर्ज्ञों के पैनि के माध्यम से, जहां कहीं आवश्यक हो, परीिा
कराना और राष्ट्रीय सलमनत को उसकी ररपो ष प्रस्तुत करना ;
9. ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के संबंध में ककसी प्रमुि िोक सुरिा धचतं ा के
कारण का अपने स्वयं के इंजीननयरों के माध्यम से या ववशेर्ज्ञों के पैनि के
माध्यम से, जब कभी अपेक्षित हो, परीिा करना तथा आग े और अन्द्वेर्णों, प्रचािन
संबंधी पैरामी रों या उपचारात्मक उपायों के संबंध में समुधचत अनुर्देश जारी
करना ;
10. र्देश में के ववननठर्दषष्ट् बाधं ों की भेद्यता और संक के वगीकरण के लिए
एक समान मानर्दंर् अधधकधथत करना और जब भी आवश्यक हो, ऐसे मानर्दंर् का
पुनवविष ोकन करना ;
11. िाग बुक या र्ा ा बेस को बनाए रिने के संबंध में ननर्देश र्देना ;
12. ववननठर्दषष्ट् बांधों की सुरिा के लिए उत्तरर्दायी व्यजक् तयों की अपेक्षित
अहषताओं और अनुभव के संबंध में ननर्देश र्देना ;
13. ऐसे अलभकरणों को प्रत्यायन प्रर्दान करना, जजन्द्ह ें ववननठर्दषष्ट् बांधों का
अन्द्वेर्ण, डर्जाइन या संननमाषण सौंपा जा सकेगा ;
14. ककसी ऐसे अलभकरण को ववननठर्दषष्ट् बांधों के अन्द्व ेर्ण, डर्जाइन,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
660
संननमाषण या पररवतषन करने से ननरठहतष करना, यठर्द वह इस अधधननयम के अधीन
ककसी ववननयम का उल् िंघन करता है ;
15. ववननठर्दषष्ट् बांधों के अन्द्वेर्ण, ववन्द्यास या संननमाषण के लिए उत्तरर्दायी
व्यजक् तयों की अपेक्षित अहषताओं और अनुभव के संबंध में ननर्देश र्देना ;
16. ववननठर्दषष्ट् बांधों के संननमाषण के र्दौरान ककए जाने वािे क् वालि ी ननयंत्रण
उपायों के संबंध में ननर्देश र्देना ;
17. सजन्द्न माषणाधीन ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध के समीप भू-स्ििनों से असुरक्षित
िेत्रों में ननवारक उपायों के लिए मागर्दष शकष लसद्धांत अधधकधथत करना ;
18. ऐसे बांधों की भेद्यता और संक के वगीकरण के आधार पर ववननठर्दषष्ट्
बांधों के बांध सुरिा एककों में इंजीननयरों की सिमता स्तरों के संबंध में ननर्देश
र्देना ;
19. ववननठर्दषष्ट् बांधों में उपस्करों की आवश्यकता और उनके कायनष नष्ट्पार्दन
को मानी र करन े के लिए उनके लिए प्रनतष्ट्िापन की रीनत के संबंध में ननर्देश
र्देना ;
20. ववननठर्दषष्ट् बांधों के आसपास जि-मौसम ववज्ञान केन्द्रों की आंकड़े
अपेिाओं के संबंध में ननर्देश र्देना ;
21. ववननठर्दषष्ट् बांधों के आस-पास भूकंप-ववज्ञानी स् ेशनों के र्ा ा अपेिाओं
के संबंध में ननर्देश र्देना ;
22. ववननठर्दषष्ट् बांधों की भेद्यता और संक वगीकरण के आधार पर ऐसे
बांधों के जोखिम ननधाषरण अध्ययनों के लिए समय अंतराि के संबंध में ननर्देश
र्देना ;
23. ववननठर्दषष्ट् बांधों की भेद्यता और संक वगीकरण के आधार पर ऐसे
बांधों की आपातजस्थनत काय ष योजनाओं को अद्यतन करने के लिए समय अंतराि
के संबंध में ननर्देश र्देना ;
24. ववननठर्दषष्ट् बांधों के व् यापक बांध सुरिा मूल् यांकन के लिए ववशेर्ज्ञों के
स् वतंत्र पैनि के गिन के संबंध में ननर्देश र्देना ;
25. ववननठर्दषष्ट् बांधों की भेद्यता और संक वगीकरण के आधार पर ऐसे
बांधों के व् यापक सुरिा मूल्याकं न के लिए समय अंतराि के संबंध में ननर्देश र्देना ;
26. ववद्यमान ववननठर्दषष्ट् बांधों के बाढ ववन्द्यास के पुनवविष ोकन के लिए
मागर्दष शकष लसद्धान्द्त अधधकधथत करना ;
27. ववननठर्दषष्ट् बांधों के स्थि ववननठर्दषष्ट् भूकंपी पैरामी र अध्ययनों के
पुनवविष ोकन के लिए मागर्दष शकष लसद्धान्द्त अधधकधथत करना ;
28. जि ववज्ञान और मौसम ववज्ञान और सूचना से संबंधधत वास्तववक र्ा ा
के आर्दान-प्रर्दान के लिए ककसी बांध के स्वामी द्वारा जिाशयों के प्रचािन स े
संबंधधत समुधचत ढांचे को सजम्मलित करत े हुए ककसी आरंलभक चेतावनी प्रणािी की
स्थापना करना ;
29. बांध सुरिा के संबंध में सामान्द्य लशिा और जागरूकता का संवधषन
करना ;
30. राष्ट्रीय सलमनत और उसकी उपसलमनतयों को सधचवािनयक सहायताअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
661
उपिब्ध कराना ;
31. ऐस े बांध पुनवाषस कायक्रष मों के, जो राज् यों, केंरीय या बाह्य ववत्तपोर्ण के
माध् यम से ननष्ट् पाठर्दत ककए जाते हैं, समन्द्व यन और संपूण ष पयवष ेिण का उपबंध
करना ; और
32. बांध सुरिा से संबंधधत कोई अन्द्य ववननठर्दषष्ट् ववर्य, जो उसको केन्द्रीय
सरकार द्वारा ननठर्दषष्ट् ककया जाए ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
662
तीसरी अनुसूची
[िारा 12(1) देखखए]
राज्य बांि सुरक्षा ससमनत के कृत्य
1. बांध सुरिा के मानकों को बनाए रिने तथा आपर्दा संबंधी बांध ववफिता
को रोकने के प्रयोजन के लिए ऐसे कृत्यों का ननवषहन करना जो प्राधधकरण द्वारा
जारी मागर्दष शकष लसद्धांतों, मानकों और अन्द्य ननर्देशों के अनुसार आवश्यक हों ;
2. राज्य बांध सुरिा संगिन द्वारा ककए गए काय ष का पुनवविष ोकन ;
3. संक ग्रस्त र्दशाओं के अधीन ववननठर्दषष्ट् बांधों की र्दशा में अन्द्वेर्णों के
लिए पूववकष ताएं स्थावपत करना ;
4. ऐस े मामिों में, जहा ं राज्य में ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध की सुरिा के संबंध
में पहिे से ही अन्द्वेर्ण ककए जा रहे हैं, वहां ऐसे ववननठर्दषष्ट् बांध की सुरिा के
संबंध में आगे और अन्द्वेर्णों के लिए आर्देश र्देना और ननष्ट्पार्दन हेतु उत्तरर्दानयत्व
सौंपना, जजसके अंतगतष गैर-ववभागीय संसाधनों और स्वतंत्र ववशेर्ज्ञों के संगम का
उपयोग भी है, जहां आवश्यक हो ;
5. ऐसे ककसी ववननठर्दषष्ट् बांध की, जो ककसी संक ग्रस् त जस्थनत में है, सुरिा
के संबंध में ककए जाने हेतु समुधचत उपायों की लसफाररश करना ;
6. ऐसी पररयोजनाओं के बीच, जजनमें उपचारात्मक सुरिा संकम ष अपेक्षित हैं,
पूववकष ताएं स्थावपत करना ;
7. बांध सुरिा के संबंध में लसफाररश ककए गए उपायों की प्रगनत का
पुनवविष ोकन करना ;
8. ककसी प्रनतस्रोत राज्य के संबंध में राज्य में ववननठर्दषष्ट् बांध के जिाशय
को भरने की संभाववत ववविा का ननधाषरण करना और ऐस े प्रनतस्रोत राज्यों के साथ
न्द्यूनीकरण उपायों के संबंध में समन्द्वय करना ;
9. ककसी अनुस्रोत राज्य के संबंध में राज्य में ववननठर्दषष्ट् बांध की ववफिता
की संभाववत ववविा का ननधाषरण करना और ऐसे अनुस्रोत राज्यों के साथ
न्द्यूनीकरण उपायों के संबंध में समन्द्वय करना ;
10. जि प्रपातीय बांध ववफिता की संभावना का ननधाषरण करना और
सीमावती राज्यों सठहत सभी संबद्ध व्यजक्तयों के साथ न्द्यूनीकरण उपायों के संबंध
में समन्द्वय करना ;
11. राज्य में पुराने हो रहे बांधों के योजनाबद्ध और उपयुक्त रूप स े
चरणबद्ध पुनवाषस के प्रयोजन के लिए ननधधयों के उपबंध की लसफाररश करना ;
12. ऐसे बांध सुधार तथा पुनवाषस कायक्रष मों के लिए, जजन्द्हें राज्य ववत्त पोर्ण
के माध्यम से ननष्ट्पाठर्दत ककया जाता है, रणनीनतक पयवष ेिण का उपबंध करना ;
13. बांधों की सुरिा स े संबंधधत ऐसा कोई अन्द्य ववननठर्दषष्ट् ववर्य, जो उस े
राज्य सरकार द्वारा ननठर्दषष्ट् ककया जाए ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
663
िाटिर् ि अकाउंटेंट, िागत और संकम ि िेखापाि
और कं पिी सधिव (सिं ोिि)
अधिनियम, 2022
(2022 का अधिनियम संखयांक 12)
[18 अप्रैि, 2022]
िाटिर् ि अकाउंटेंट अधिनियम, 1949, िागत और
संकम ि िेखापाि अधिनियम, 1959 और
कंपिी सधिव अधिनियम, 1980
का और संिोिि
करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के नतहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्न लिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
अध्याय 1
प्रारंसभक
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम चा षर् ष अकाउं ें , िागत और संकमष संक्षिप्त नाम और
िेिापाि और कंपनी सधचव (संशोधन) अधधननयम, 2022 है ।
प्रारंभ ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा, जो केंरीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना
द्वारा, ननयत करे, और इस अधधननयम के ववलभन्द्न उपबंधों के लिए ववलभन्द्न तारीिें
ननयत की जा सकेंगी तथा ककसी उपबंध में इस अधधननयम के प्रारंभ के प्रनत ननर्देश काअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
664
यह अथ ष िगाया जाएगा कक यह उस उपबंध के प्रवत्तृ होने के प्रनत ननर्देश है ।
अध्याय 2
िाटिर् ि अकाउंटेंट अधिनियम, 1949 का संिोिि
वहृ त ् नाम और 2. चा षर् ष अकाउं ें अधधननयम,1949 (जजस े इस अध्याय में इसके पश्चात ् मूि 1949 का 38
उद्र्देलशका का
अधधननयम कहा गया है) के र्दीघ ष शीर्कष और उद्र्देलशका में, “ववननयम” शब्र्द के स्थान
संशोधन ।
पर, “ववननयम और ववकास” शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 2 का 3. मूि अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (1) में,—
संशोधन ।
(i) िंर् (ककक) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(कि) “अनुशासन बोर्”ष स े धारा 21क की उपधारा (1) के अधीन
गठित अनुशासन बोर् ष अलभप्रेत है ;’;
(ii) िंर् (ि) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत ् :—
‘(िक) “समन्द्वय सलमनत” से धारा 9क के अधीन गठित समन्द्वय
सलमनत अलभप्रेत है ;
(िि) “कंपनी अधधननयम” से कंपनी अधधननयम, 2013 या उक्त 2013 का 18
अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (67) में यथापररभावर्त कोई अन्द्य पूवष
कंपनी ववधध अलभप्रेत है ;’;
(iii) िंर् (ग) में “संस्थान की पररर्द्” शब्र्दों से पूव,ष “धारा 9 के अधीन
गठित” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(iv) िंर् (गक) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत ् :—
‘(गि) “ननर्देशक (अनुशासन)” से धारा 21 में ननठर्दषष्ट् ननर्देशक
(अनुशासन) अलभप्रेत है और इसके अंतगषत संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन)
सजम्मलित है ;
(गग) “अनुशासन सलमनत” स े धारा 21ि की उपधारा (1) के अधीन
गठित अनुशासन सलमनत अलभप्रेत है ;
(गघ) “अनुशासन ननर्देशािय” से धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन
स्थावपत अनुशासन ननर्देशािय अलभप्रेत है ;
(गङ) “अध्येता” से संस्थान का अध्येता सर्दस्य अलभप्रेत है ;’;
(v) िंर् (ङक) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(ङक) “अधधसूचना” से राजपत्र में प्रकालशत कोई अधधसूचना अलभप्रेत है
और “अधधसूधचत” पर्द का तर्दनुसार अथाषन्द्वयन ककया जाएगा ;’;
(vi) िंर् (छ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(छ) “रजजस् र” से, यथाजस्थनत, धारा 19 के अधीन रिा गया संस्थान
के सर्दस्यों का रजजस् र या धारा 20ि के अधीन रिा गया संस्थान की फमोंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
665
का रजजस् र अलभप्रेत है ;’;
(vii) िंर् (जकक) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् : —
‘(जककक) “स्थायी सलमनत” से धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन
गठित स्थायी सलमनत अलभप्रेत है ;’।
4. मूि अधधननयम की धारा 4 में,— धारा 4 का
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, जहां-कहीं भी वह आता हैं, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1) में िंर् (v) और िंर् (vi) में ठहन्द्र्दी पाि में सशं ोधन की
आवश्यकता नहीं है ;
(iii) उपधारा (3) में,—
(क) “जो तीन हजार रुपए से अधधक की नहीं होगी” शब्र्दों का िोप
ककया जाएगा ;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
5. मूि अधधननयम की धारा 5 में,— धारा 5 का
संशोधन ।
(i) र्दोनों स्थानों पर आने वािे “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (3) में,—
(क) “जो पांच हजार रुपए से अधधक की नहीं होगी” शब्र्दों का िोप
ककया जाएगा ;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
6. मूि अधधननयम की धारा 6 की उपधारा (2) के स्थान पर ननम्नलिखित उपधारा धारा 6 का
रिी जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(2) प्रत्येक सर्दस्य प्रमाणपत्र के लिए वावर्कष फीस जो पररर्द् द्वारा
अधधसूचना द्वारा अवधाररत की जाए, का संर्दाय करेगा और ऐसी फीस प्रत्येक वर् ष
1 अप्रैि को या उससे पूव ष सर्दं ेय होगी ।”।
7. मूि अधधननयम की धारा 8 में,— धारा 8 का
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) िंर् (iii) में “अनुन्द्मक्ु त ठर्दवालिया” शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई अनुन्द्मुक् त
शोधन अिम” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(iii) िंर् (iii) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
2016 का 31 “(iiiक) ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 के अधीन शोधन
अिम घोवर्त ककया गया है ; या” ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
666
(iv) िंर् (v) में,—
(क) ठहन्द्र्दी पाि में सशं ोधन की आवश्यकता नहीं है ;
(ि) “ननवाषसन, या” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ।
धारा 9 का 8. मूि अधधननयम की धारा 9 में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (2) में,—
(क) र्दोनों स्थानों पर आने वािे “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, “सर्दस्यों
का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) “तीन वर्”ष शब्र्दों के स्थान पर, “चार वर्”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) “छह वर्”ष शब्र्दों के स्थान पर, “आि वर्”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (4) में,—
(क) “व्यजक्त” शब्र्द के स्थान पर, “संस्थान का सर्दस्य या फम ष का
कोई भागीर्दार” शब्र्द रिे जाएगं े ;
(ि) “तीन वर्”ष शब्र्दों के स्थान पर, “चार वर्”ष शब्र्द रिे जाएंगे ।
नई धारा 9क का 9. मूि अधधननयम की धारा 9 के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा अंतःस्थावपत की
अंतःस्थापन । जाएगी, अथाषत ् :—
समन्द्वय “9क. (1) चा षर् ष अकाउं ें , िागत और संकम ष िेिापाि तथा कंपनी सधचव
सलमनत ।
की ववृत्तयों के ववकास और सुमेिन के लिए एक समन्द्वय सलमनत होगी, जो
भारतीय चा षर् ष अकाउं ें संस्थान, भारतीय िागत और संकम ष िेिापाि संस्थान
तथा भारतीय कंपनी सधचव संस्थान, हर एक संस्थान में स े पररर्द् के अध्यि,
उपाध्यि और सधचव से लमिकर बनेगी ।
(2) समन्द्वय सलमनत की बैिक की अध्यिता सधचव, कारपोरे काय ष मंत्रािय
द्वारा की जाएगी ।
(3) समन्द्वय सलमनत की बैिक वर् ष की प्रत्येक नतमाही में एक बार की
जाएगी ।
(4) सलमनत, प्रत्येक संस्थान को सौंपे गए कृत्यों के प्रभावी समन्द्वय के लिए
उत्तरर्दायी होगी और,—
(i) संस्थान की ववद्या, अवसंरचना, अनुसंधान और उसके सभी संबंधधत
कायों में क्वालि ी सुधार को सुननजश्चत करेगी ;
(ii) ववृत्त को अधधक प्रभावी और सुदृढ बनाने के लिए ववृत्तयों के बीच
समन्द्वय और सहयोग पर ध्यान केजन्द्रत करेगी ;
(iii) अंतःववृत्तक ववकास के लिए अन्द्तर अनुशासननक ववननयामक तंत्रों
को समरूप करेगी ;
(iv) ववृत्तयों के लिए ववननयामक नीनतयों से संबंधधत ववर्यों पर
लसफाररशें करेगी ;
(v) पूवोक्त िंर्ों (i) से िंर् (iv) तक के आनुर्ंधगक ऐसे अन्द्य कृत्य
करेगी ।”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
667
धारा 10 का 10. मूि अधधननयम की धारा 10 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुन:संख्यांककत
संशोधन । ककया जाएगा और,—
(i) इस प्रकार पुन:संख्यांककत उपधारा (1) के पहिे परंतुक में “तीन से
अधधक आनुक्रलमक अवधधयों” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दो आनुक्रलमक अवधधयों” शब्र्द
रिे जाएंगे ;
(ii) इस प्रकार पुन:संख्यांककत और संशोधधत उपधारा (1) के पश्चात,्
ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(2) उपधारा (1) में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, पररर्द् का
कोई सर्दस्य, जजसने चा षर् ष अकाउं ें , िागत और संकम ष िेिापाि तथा
कंपनी सधचव (संशोधन) अधधननयम, 2022 के िीक प्रारंभ होने पर ऐसे
सर्दस्य के रूप में र्दो पर्दावधधयों के लिए पर्द धारण ककया है या तीन वर् ष की
र्दसू री पर्दावधध के लिए पर्दधारण कर रहा है, चार वर् ष की एक और अवधध के
लिए िड़ने के लिए पात्र होगा तथा कोई सर्दस्य, जजसने एक पर्दावधध के लिए
पर्द धारण ककया है या तीन वर् ष की पहिी पर्दावधध के लिए पर्द धारण कर
रहा है, र्दो और आनुक्रलमक अवधधयों के लिए िड़ने हेतु पात्र होगा ।”।
11. मूि अधधननयम की धारा 12 में,— धारा 12 का
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में परंतुक का िोप ककया जाएगा ;
(ii) उपधारा (2) में, “मुख्य कायपष ािक प्राधधकारी” शब्र्दों के स्थान पर,
“प्रधान” शब्र्द रिा जाएगा ;
(iii) उपधारा (2) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधाराएं अंत:स्थावपत की जाएंगी,
अथाषत ् :—
“(2क) अध्यि, पररर्द् की बिै कों की अध्यिता करेगा ।
(2ि) अध्यि और उपाध्यि, ऐसी शजक्तयों का प्रयोग करेंगे और ऐसे
कतव्ष यों और कृत्यों का पािन करेंगे, जो ववठहत ककए जाएं ।
(2ग) पररर्द् द्वारा ककए गए ववननश्चयों को कायाषजन्द्वत करने का
सुननश्चय करना अध्यि का कतव्ष य होगा ।
(2घ) यठर्द, ककसी भी कारण से अध्यि का पर्द ररक्त होता है या यठर्द
अध्यि अनुपजस्थत है या ककसी अन्द्य कारण से शजक्तयों का प्रयोग करने में
या उसे सौंपे गए कतव्ष यों का ननवहष न करने में असमथ ष है, तो उपाध्यि उसके
स्थान पर काय ष करेगा और अध्यि की शजक्तयों का प्रयोग करेगा तथा उसके
कतव्ष यों का पािन करेगा ।”।
12. मूि अधधननयम की धारा 13 की उपधारा (2) में, “रजजस् र” शब्र्द के स्थान धारा 13 का
संशोधन ।
पर, “सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ।
13. मूि अधधननयम की धारा 14 की उपधारा (1) में, “तीन वर्”ष शब्र्दों के स्थान धारा 14 का
संशोधन ।
पर, “चार वर्”ष शब्र्द रिे जाएगं े ।
14. मूि अधधननयम की धारा 15 की उपधारा (2) में,— धारा 15 का
संशोधन ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
668
(i) िंर् (ि) और िंर् (ग) के स्थान पर ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंग,े
अथाषत ् :—
“(ि) अभ्यावेशन हेतु अभ्यधथयष ों की परीिा के लिए फीस ववठहत
करना ;
(ग) ककसी फम ष को रजजस्रीकरण अनुर्दत्त करना या इंकार करना ;”;
(ii) िंर् (घ) में, “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, “सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द
रिे जाएंगे ;
(iii) िंर् (च) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :—
“(च) इस अधधननयम के अधीन व्यवसाय का प्रमाणपत्र अनुर्दत्त करने
या उससे इंकार करने के लिए ठर्दशा-ननर्देश ववठहत करना ;
(चक) इस अधधननयम के उद्र्देश्यों को पूरा करन े के प्रयोजन के लिए
ठर्दशा-ननर्देश जारी करना ;”;
(iv) िंर् (छ) का िोप ककया जाएगा ;
(v) िंर् (ज) में, “और संग्रहण” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(vi) िंर् (झ) का िोप ककया जाएगा ;
(vii) िंर् (ि) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :—
“(ि) ववननधानकताष लशिा और जागरूकता कायक्रष म संचालित करना ;
(िक) इस अधधननयम के अधीन कृत्यों का ननष्ट्पार्दन करने के प्रयोजन
के लिए केंरीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन से ककसी अलभकरण या र्दसू रे र्देश के
साथ कोई ज्ञापन या िहराव करना ;”।
नई धारा 15ि 15. मूि अधधननयम की धारा 15क के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा अंत:स्थावपत
का अंत:स्थापन । की जाएगी, अथाषत ् :—
संस्थान के “15ि. संस्थान के कृत्यों में, ननम्नलिखित सजम्मलित होंगे,—
कृत्य ।
(क) अभ्यावेशन के लिए अभ्यधथयष ों की परीिा ;
(ि) आब् द्ध सहायक और संपरीिा सहायकों के ववननयोजन और प्रलशिण
के लिए ववननयमन करना ;
(ग) चा षर् ष अकाउं ें के रूप में व्यवसाय करने के लिए अठहतष
व्यजक्तयों का रजजस् र रिा जाना और उसका प्रकाशन करना ;
(घ) फमों के रजजस् र का अनुरिण करना और उसका प्रकाशन करना ;
(ङ) सर्दस्यों, परीिाधथयष ों और अन्द्य व्यजक्तयों से फीस का संग्रहण
करना ;
(च) इस अधधननयम के अधीन समुधचत प्राधधकाररयों के आर्देशों के
अधीन रहते हुए, सर्दस्यों और फमों के रजजस् र से नामों को ह ाना तथा
सर्दस्यों और फमों के रजजस् र में ऐस े नामों को पुनःर्दज ष करना, जजनको का
ठर्दया गया है ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
669
(छ) ककसी पुस्तकािय का अनुरिण और िेिाकम ष से तथा सहबद्ध
ववर्यों से संबंधधत पुस्तकों और ननयतकालिक पत्रत्रकाओं का प्रकाशन ;
(ज) संस्थान की पररर्द् के ननवाषचनों का संचािन ; और
(झ) पररर्द् द्वारा जारी मागर्दष शकष लसद्धान्द्तों के अनुसार व्यवसाय
प्रमाणपत्र अनुर्दत्त करना या इंकार करना ।”।
16. मूि अधधननयम की धारा 16 में,— धारा 16 का
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(1) पररर्द् अपने कतव्ष यों के र्दितापूण ष पािन के लिए—
(क) एक सधचव की ननयुजक्त करेगी, जो मुख्य कायषपािक
अधधकारी के रूप में संस्थान के प्रशासननक कृत्य भी करेगा ;
(ि) ननर्देशक (अनुशासन) और संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन) जो
संस्थान के उप सधचव की पंजक्त से अन्द्यून पंजक्त का न हो की
ननयुजक्त ऐसे कृत्यों का ननष्ट्पार्दन करने के लिए करेगी, जो उन्द्हें इस
अधधननयम और उसके अधीन बनाए गए ननयमों और ववननयमों के
अधीन समुर्देलशत ककए जाएं :
परंतु ककसी ननर्देशक (अनुशासन) या संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन)
की कोई ननयुजक्त या पुनननषयुजक्त या ननयुजक्त की समाजप्त तब तक
प्रभावी नहीं होगी जब तक ऐसी ननयुजक्त, पुनननषयुजक्त या ननयुजक्त की
समाजप्त को केंरीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन से न ककया जाए ।”;
(ii) उपधारा (2) के िंर् (ग) के स्थान पर ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“(ग) सधचव और अन्द्य अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों की ननयुजक्त
की रीनत, शजक्तयों, कतव्ष यों और कृत्यों, उनके वेतन, फीस, भत्ते और सेवा
के अन्द्य ननबंधन और शतों को ववठहत करना ;”।
17. मूि अधधननयम की धारा 18 की उपधारा (5) के स्थान पर ननम्नलिखित धारा 18 का
उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(5) पररर्द् के वावर्कष िेिे ऐसी रीनत में तैयार ककए जाएगं े, जो ववठहत की
जाए और वह पररर्द् द्वारा भारत के ननयंत्रक और महािेिापरीिक द्वारा रिे गए
िेिापरीिकों के पैनि से ननयुक्त की जाने वािी चा षर् ष अकाउन्द् ें ो की फम ष द्वारा
वावर्कष रूप से की जाने वािी िेिापरीिा के अधीन होंगे :
परंतु कोई फम ष इस उपधारा के अधीन िेिापरीिक के रूप में ननयुक्त ककए
जाने के लिए पात्र नहीं होगी यठर्द उसका कोई भागीर्दार पररर्द् का सर्दस्य है या
वपछिे चार वर् ष के र्दौरान सर्दस्य रहा है :
परंतु यह और कक पररर्द् की जानकारी में यह िाए जाने पर कक पररर्द् के
िेिे उसके ववत्त का सही और उधचत दृश्य प्रस्तुत नहीं करते हैं तब पररर्द् स्वयं
एक ववशेर् िेिापरीिा का सचं ािन कर सकेगी :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
670
परंतु यह भी कक केन्द्रीय सरकार द्वारा पररर्द् को ऐसी सचू ना भेजी जाती है
कक पररर्द् के िेिें उसके ववत्त का सही और उधचत दृश्य उत्पन्द्न नहीं करते है, तो
जहां समुधचत हो, पररर्द् एक ववशेर् िेिा परीिा करवाएगी या ऐसी अन्द्य कारषवाई
करेगी, जो वह आवश्यक समझे और उस पर की गई कारषवाई की एक ररपो ष
केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगी ।”।
धारा 19 का 18. मूि अधधननयम की धारा 19 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1) के स्थान पर ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(1) पररर्द् संस्थान के सर्दस्यों का एक रजजस् र ऐसी रीनत में रिेगी,
जो ववठहत की जाए ।”;
(iii) उपधारा (2) में, िंर् (ग) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(गक) अध्याय 5 के अधीन उसके ववरुद्ध क्या कोई अनुयोज्य सूचना
या लशकायत िंत्रबत है या कोई शाजस्त अधधरोवपत की गई है, जजसके अंतगषत
उसके ब्यौरे भी हैं, यठर्द कोई हों ;”;
(iv) उपधारा (4) में,—
(क) “जो पांच हजार रुपए स े अधधक नहीं होगी” शब्र्दों का िोप ककया
जाएगा ;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।”।
धारा 20 का 19. मूि अधधननयम की धारा 20 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द, जहां-कहीं वह आता है, के स्थान पर, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (3) में,—
(क) “जो र्दो हजार रुपए से अधधक नहीं होगी” शब्र्दों का िोप ककया
जाएगा ;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
नए अध्याय 4क 20. मूि अधधननयम के अध्याय 4 के पश्चात ् ननम्नलिखित अध्याय अंत:स्थावपत
का अंत:स्थापन । ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“अध्याय 4क
फमों का रश्जस्रीकरर् और रश्जस्टर
फमों का 20क. ककसी फम ष के ककसी भागीर्दार या स्वामी द्वारा पररर्द् को उसके नाम
रजजस्रीकरण ।
के अनुमोर्दन तथा रजजस्रीकरण अनुर्दत्त करने के लिए ककए गए आवेर्दन पर प्रत्येक
फम ष को संस्थान के पास ऐसी रीनत में और ऐस े ननबंधन और शतों के अधीन रहते
हुए, जो ववठहत की जाएं, रजजस् र ककया जाएगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
671
परंतु पररर्द् ककसी फम ष को रजजस् र करने स े इंकार कर सकेगी यठर्द ऐसी
फम ष का नाम पहिे से ही रजजस्रीकृत ककसी फम ष या भारत में या भारत स े बाहर
ककसी फम ष द्वारा उपयोग ककए गए नाम से लमिता-जुिता है या उसके समान है
या पररर्द् की राय में फम ष का रजजस्रीकरण अवांछनीय है ।
फमों का 20ि. (1) पररर्द्, फमों का एक रजजस् र, ऐसी रीनत में रिेगी, जो ववठहत
रजजस् र ।
की जाए ।
(2) फमों के रजजस् र में, फम ष के संबंध में, ऐसी ववलशजष्ट् यां सजम्मलित
होंगी, जजनके अंतगतष ऐसे प्ररूप और ऐसे अंतरािों पर, जो ववठहत ककया जाए,
अध्याय 5 के अधीन उसके ववरुद्ध ककसी अनुयोज्य सूचना या लशकायत या उस
पर अधधरोवपत ककसी शाजस्त के ब्यौरे हैं ।
(3) पररर्द्, प्रत्येक वर् ष 1 अप्रैि को या ऐसे अंतराि पर, जजसका पररर्द्
द्वारा ववननश्चय ककया जाए, संस्थान के साथ रजजस्रीकृत फमों की सूची ऐसी रीनत
में, जो ववठहत की जाए, प्रकालशत करवाएगी और ऐस े व्यजक्तयों की सूची को ऐस े
प्ररूप में और ऐसी रकम का संर्दाय करने पर, जो ववठहत की जाए, उपिब्ध
कराएगी ।
20ग. पररर्द् फमों के रजजस् र से ककसी फम ष के नाम को ह ाएगी,— फमों के रजजस् र
से ह ाया जाना ।
(क) जजसका ववघ न या पररसमापन हो गया है ; या
(ि) जजससे इस ननलमत्त कोई अनुरोध प्राप्त हुआ है ; या
(ग) जजसे ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 के उपबंधों के
2016 का 31
अधीन ठर्दवािा या शोधन अिम घोवर्त ककया गया है और जो अनुन्द्मोधचत
रहती है ; या
(घ) जजसे तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध के अधीन या ककसी सिम
न्द्यायािय द्वारा व्यवसायरत चा षर् ष अकाउं ें की ववृत्त से संबंधधत ककसी
कायकष िाप या कायकष िापों को करने से वववजजतष ककया गया है ; या
(ङ) जजसके संबंध में, ह ाए जाने के लिए इस अधधननयम के अधीन
कोई आर्देश पाररत ककया गया है ।
20घ. (1) रजजस्रीकरण स े इंकार करने के ककसी ववननश्चय से व्यधथत कोई पररर्द् के समि
पुनवविष ोकन ।
फम ष पररर्द् के समि पुनवविष ोकन करने के लिए ऐस े इंकार की तारीि स े एक
मास की अवधध के भीतर आवर्दे न कर सकेगी ।
(2) पररर्द्, पुनवविष ोकन आवेर्दन पर ववचार करने के पश्चात ् इस प्रकार ककए
गए ववननश्चय की पुजष्ट् कर सकेगी या उस े अपास्त कर सकेगी या ऐसा आर्देश
पाररत कर सकेगी, जो वह समुधचत समझे ।”।
21. मूि अधधननयम की धारा 21 के स्थान पर ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 21 का
अथाषत ् :— प्रनतस्थापन ।
“21. (1) पररर्द्, ऐसे प्ररूप में ऐसी फीस के साथ जो ववननठर्दषष्ट् की जाए, अनुशासननक
ननर्देशािय ।
जांच करने के लिए या तो स्व:प्रेरणा से या ककसी सूचना या ककसी लशकायत की
प्राजप्त पर जांच करने के लिए अधधसूचना द्वारा एक अनुशासननक ननर्देशािय कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
672
स्थापना करेगी, जो संस्थान के ननर्देशक (अनुशासन), उप सधचव के रैंक से अन्द्यून
कम से कम र्दो संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन) और धारा 16 के अधीन ननयुक्त
अन्द्य कमषचाररयों से लमिकर बनेगा ।
(2) ककसी सूचना या लशकायत की प्राजप्त के तीस ठर्दन के भीतर, ननर्देशक
(अनुशासन) ऐसी रीनत में जो ववननठर्दषष्ट् की जाए, ववननश्चय करेगा कक क्या
लशकायत या सूचना कारषवाई ककए जाने योग्य है या कारषवाई नहीं ककए जा सकने
के लिए बन्द्र्द की जा सकती है :
परंतु ननर्देशक (अनुशासन) यह ववननश्चय करने से पूव ष पन्द्रह ठर्दन का समय
से कक क्या कोई मामिा कारषवाई ककए जाने योग्य है या कारषवाई ककए जाने योग्य
नहीं है, यथाजस्थनत, लशकायतकताष या इवत्तिा र्देने वािे स े अनतररक्त सूचना की
मांग कर सकेगा :
परंतु यह और कक ननर्देशक (अनुशासन) कारषवाई न ककए जाने योग्य
लशकायतों या सूचना की लसफाररश को अनुशासन बोर् ष को उनकी प्राजप्त के साि
ठर्दन के भीतर प्रस्तुत ककया जाएगा तथा अनुशासन बोर् ष गुणागुण पर ववचार करने
के पश्चात ् ऐसी ककसी लशकायत या सूचना को आगे अन्द्वेर्ण करने हेत ु ननर्देशक
(अनुशासन) को ननठर्दषष्ट् कर सकेगा ।
(3) मामिे का अन्द्वेर्ण करते समय जजसे कारषवाई करने योग्य पाया जाता
है, ननर्देशक (अनुशासन), यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष को, इक्कीस ठर्दन के भीतर
लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर र्देगा, जजसका कारणों को िेिबद्ध करत े
हुए इक्कीस ठर्दन के लिए और ववस्तार ककया जा सकेगा ।
(4) उपधारा (3) के अधीन लिखित कथन, यठर्द कोई हो, की प्राजप्त पर
ननर्देशक (अनुशासन), उसकी एक प्रनत लशकायतकताष या इवत्तिा र्देने वािे को भेजेगा
और लशकायतकताष और इवत्तिा र्देने वाि े को ऐसा लिखित कथन प्राप्त होने के
इक्कीस ठर्दन के भीतर अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत करेगा ।
(5) उपधारा (3) के अधीन लिखित कथन और उपधारा (4) के अधीन
प्रत्युत्तर की प्राजप्त पर, ननर्देशक (अनुशासन) यठर्द प्रथमदृष्ट् या, यथाजस्थनत, सर्दस्य
या फम ष के ववरुद्ध कोई मामिा बनता है तो तीस ठर्दन के भीतर प्रारंलभक जांच
ररपो ष प्रस्तुत करेगा ।
(6) पहिी अनुसूची में अधधकधथत ककसी ववृत्तक या अन्द्य अवचार का यठर्द
प्रथमदृष्ट् या मामिा बनता है तो ननर्देशक (अनुशासन), ननर्देशक बोर् ष को एक
प्रारंलभक जांच ररपो ष प्रस्तुत करेगा तथा जहां र्दसू री अनुसूची में या पहिी और
र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में, अधधकधथत ववृत्तक या अन्द्य अवचार का प्रथमदृष्ट् या
मामिा बनता है तो वह प्रारंलभक जांच ररपो ष अनुशासननक सलमनत को प्रस्तुत
करेगा :
परंतु केंरीय सरकार या राज्य सरकार या ककसी कानूनी प्राधधकरण के ककसी
प्राधधकृत अधधकारी द्वारा फाइि की गई ककसी लशकायत या सूचना को, जो जांच
ररपो ष या समथनष कारी साक्ष्य के साथ जांच ररपो ष के सुसगं त सार द्वारा सम्यक्
रूप से समधथतष है, को प्रारंलभक जांच ररपो ष माना जाएगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
673
परंतु यह और कक जहां प्रथमदृष्ट् या, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष के ववरुद्ध
कोई मामिा नहीं बनता है तो ननर्देशक (अनुशासन) सुसंगत र्दस्तावेजों के साथ
ऐसी सूचना या लशकायत को अनुशासन बोर् ष को भेजेगा और अनुशासन बोर्,ष यठर्द
ननर्देशक (अनुशासन) के ननष्ट्कर्ों स े सहमत होता है तो मामिे को समाप्त कर
र्देगा या असहमनत की र्दशा में, स्वयं अग्रसर हो सकेगा या अनुशासननक सलमनत
को ननठर्दषष्ट् कर सकेगा या ननर्देशक (अनुशासन) को मामि े की और जांच करने के
लिए परामश ष र्देगा ।
(7) इस अधधननयम के अधीन जांच के प्रयोजनों के लिए अनुशासननक
ननर्देशािय ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगा, जो ववननठर्दषष्ट् की जाए ।
(8) अनुशासननक ननर्देशािय के पास फाइि की गई लशकायत को ककसी भी
जस्थनत में वापस नहीं लिया जाएगा ।
(9) अनुशासन ननर्देशािय, अनुशासन बोर् ष और अनुशासननक सलमनत के
समि िंत्रबत कारषवाई की जा सकने वािी सूचना और लशकायतें तथा धारा 21क के
अधीन अनुशासन बोर् ष द्वारा और धारा 21ि के अधीन अनुशासननक सलमनत द्वारा
पाररत आर्देशों को अनुशासन ननर्देशािय द्वारा पजब्िक र्ोमेन में ऐसी रीनत में
उपिब्ध कराया जाएगा, जो ववठहत की जाए ।”।
22. मूि अधधननयम की धारा 21क के स्थान पर ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 21क का
अथाषत ् :— प्रनतस्थापन ।
“21क. (1) पररर्द्, अधधसूचना द्वारा एक या अधधक अनुशासन बोर्ों का अनुशासन बोर् ष ।
गिन करेगी, प्रत्येक बोर् ष ननम्नलिखित से लमिकर बनेगा,—
(क) ववधध का अनुभव और अनुशासननक ववर्यों तथा व्यवसाय की
जानकारी रिने वािा एक व्यजक्त जो संस्थान का सर्दस्य न हों, जजसको
पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और उपिब्ध कराए गए पैनि में से पीिासीन
अधधकारी के रूप में ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, केन्द्रीय सरकार
द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाएगा ;
(ि) एक सर्दस्य, जो ववधध, अथशष ास्त्र, कारबार, ववत्त या िेिाकं न के िेत्र
में अनुभव रिने वािा ववख्यात व्यजक्त है और जो संस्थान का सर्दस्य न हों,
जजसको पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और उपिब्ध कराए गए पैनि में से
पीिासीन अधधकारी के रूप में, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, केन्द्रीय
सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाएगा ;
(ग) एक सर्दस्य, जजसको पररर्द् द्वारा, तैयार ककए गए संस्थान के सर्दस्यों
के पैनि में से, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, नामननठर्दषष्ट् ककया जाएगा ;
(घ) उप सधचव की पंजक्त से अन्द्यून पंजक्त का संस्थान का कोई
अधधकारी अनुशासन बोर् ष के सधचव के रूप में काय ष करेगा :
परंतु िंर् (क) के अधीन नामननठर्दषष्ट् पीिासीन अधधकारी और िंर् (ि)
के अधीन नामननठर्दषष्ट् सर्दस्य इस उपधारा के अधीन गठित लभन्द्न-लभन्द्न
अनुशासन बोर्ों के लिए वही रहेंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
674
(2) अनुशासन बोर्,ष उसके समि रिे गए मामिों पर ववचार करते समय
ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगा, जजसके अंतगतष फेसिेस कायवष ाठहयां और आभासी
सुनवाइयां जो ववननठर्दषष्ट् की जाएं, भी हैं ।
(3) अनुशासन बोर्,ष ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक जांच ररपो ष की प्राजप्त
पर, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष जजसके ववरुद्ध ऐसी प्रारंलभक जांच ररपो ष फाइि
की गई है से इक्कीस ठर्दन, जजसका आपवाठर्दक पररजस्थनतयों में कारणों को
िेिबद्ध करते हुए, इक्कीस ठर्दन की और अवधध तक ववस्तार ककया जा सकेगा,
के भीतर एक लिखित वववरण प्रस्तुत करने की अपेिा करेगा ।
(4) अनुशासन बोर्,ष ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक जांच ररपो ष प्राप्त होने
के नब्बे ठर्दन के भीतर, अपनी जांच पूरी करेगा ।
(5) जांच करने पर, यठर्द अनुशासन बोर् ष यह पाता है कक ऐसा सर्दस्य पहिी
अनुसूची में वखणतष ववृत्तक या अन्द्य अवचार का र्दोर्ी है, तो वह सर्दस्य को ऐसे
ननष्ट्कर् ष के तीस ठर्दन के भीतर सुनवाई का अवसर प्रर्दान करने के पश्चात ्
ननम्नलिखित कारषवाईयों में से कोई एक या अधधक कारषवाई करने का आर्देश पाररत
कर सकेगा, अथाषत ् :—
(क) सर्दस्यों को धधग्र्दंडर्त करने और सर्दस्यों के रजजस् र में इसे
अलभलिखित करने ;
(ि) सर्दस्य के नाम को सर्दस्यों के रजजस् र में से छह मास की
कािावधध तक के लिए ह ाने ;
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करने, जो वह िीक समझे, जो र्दो िाि
रुपए तक का हो सकेगा ।
(6) जहां, ककसी सर्दस्य के सबं ंध में या ककसी अलभिेि पर रिे गए साक्ष्य
के आधार पर, अनुशासन बोर् ष की यह राय है कक ऐसा कोई सर्दस्य जो ककसी फम ष
का भागीर्दार या स्वामी है, पहिी अनुसूची में उजल्िखित अवचार का वपछिे पांच
वर् ष के र्दौरान बार-बार र्दोर्ी पाया गया है, तो ऐसी फम ष के ववरुद्ध ननम्नलिखित
कारषवाई की जा सकेगी, अथाषत ् :—
(क) फम ष को व्यवसायरत चा षर् ष एकाउं ें की ववृत्त से सबं ंधधत कोई
कायकष िाप या कायकष िापों को करने से एक वर् ष से अनधधक अवधध के लिए
प्रनतवर्द्ध कर सकेगा ; या
(ि) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत कर सकेगा, जो वह िीक समझे, जो
पच्चीस िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(7) जब कोई सर्दस्य या फमष, उपधारा (5) या उपधारा (6) के अधीन
अधधरोवपत जुमाषने का ववननठर्दषष्ट् अवधध के भीतर संर्दाय करने में असफि रहता है
तो पररर्द् ऐस े सर्दस्य या फम ष का नाम, यथाजस्थनत, सर्दस्यों के रजजस् र या फम ष
के रजजस् र से ऐसी अवधध के लिए, जो वह िीक समझे, ह ा र्देगी ।
(8) अनुशासन बोर् ष के पीिासीन अधधकारी और सर्दस्यों को ऐसे भत्तों का
संर्दाय ककया जाएगा, जो ववठहत ककए जाएं ।”।
धारा 21ि का 23. मूि अधधननयम की धारा 21ि के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
675
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—
अनुशासन “21ि. (1) पररर्द्, अधधसूचना द्वारा एक या अधधक अनुशासननक सलमनतयों
सलमनत । का गिन करेगी, जजसमें ननम् नलिखित प्रत्येक में होंगे—
(क) कोई ऐसा व्यजक्त जो संस्थान का सर्दस्य न हो और जजसके पास
ववधध का अनुभव और अनुशासननक मामिों तथा ववृत्त का ज्ञान हो, केन्द्रीय
सरकार द्वारा पीिासीन अधधकारी के रूप में पररर्द् द्वारा, ऐसी रीनत में जो
ववठहत की जाए, तैयार ककए गए और उपिब्ध कराए गए व्यजक्तयों के पैनि
में से नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ि) ऐस े र्दो सर्दस्य जो सस्ं थान के सर्दस्य न हो और जो ववधध,
अथशष ास्त्र, कारबार, ववत्त या िेिांकन के िेत्र में अनुभव रिने वािे प्रख्यात
व्यजक्त हों, जजनका केन्द्रीय सरकार द्वारा, पररर्द् द्वारा ऐसी रीनत में जो
ववठहत की जाए, तैयार ककए गए और उपिब्ध कराए गए व्यजक्तयों के पैनि
में से नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ग) ऐसे र्दो सर्दस्य जो पररर्द् द्वारा ऐसी रीनत में जो ववठहत की
जाए, तैयार ककए जाने वािे संस् थान के सर्दस् यों के पैनि में से नामननठर्दषष्ट्
ककए जाएं :
परंतु िंर् (क) के अधीन नामननठर्दषष्ट् पीिासीन अधधकारी और िंर् (ि) के
अधीन नामननठर्दषष्ट् सर्दस् य, इस धारा के अधीन गठित लभन्द्न-लभन्द्न अनुशासननक
सलमनतयों के लिए वही हो सकेंगे ।
(2) अनुशासननक सलमनत, उसके समि रिे गए मामिों पर ववचार करते
समय, ऐसी प्रकक्रया जो ववननठर्दषष्ट् की जाएं का अनुसरण करेगी जजसके अंतगषत
फेसिेस कायवष ाठहयां और वचुषअि सुनवाइयां भी हैं ।
(3) अनुशासननक सलमनत, ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक परीिा ररपो ष की
प्राजप् त पर, यथाजस् थनत, ऐसे सर्दस् य या फम,ष जजसके ववरुद्ध ऐसी प्रारंलभक परीिा
ररपो ष फाइि की गई है, 21 ठर्दन के भीतर जजसे आपवाठर्दक पररजस् थनतयों में,
कारणों को िेिबद्ध करके अनतररक् त 21 ठर्दनों तक बढाया जा सकेगा, लिखित
कथन प्रस् तुत करने की अपेिा करेगी ।
(4) अनुशासन सलमनत, ननर्देशक (अनुशासन) स े प्रारंलभक परीिा ररपो ष की
प्राजप् त से एक सौ अस् सी ठर्दनों के भीतर उसकी जांच पूरी करेगी ।
(5) जांच करने पर यठर्द अनुशासन सलमनत का यह ननष्ट्कर् ष है कक कोई
सर्दस्य र्दसू री अनुसूची में या पहिी अनुसूची और र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में वखणतष
ववृत्तक या अन्द्य अवचार का र्दोर्ी है, तो वह ऐसे ननष्ट्कर् ष से तीस ठर्दन के भीतर,
उस सर्दस्य को सुनवाई का अवसर र्देने के पश्चात,् ननम्नलिखित कोई एक या
अधधक कारषवाई करने का आर्देश पाररत कर सकेगी, अथाषत ् :—
(क) सर्दस्य को धधग्र्दंर् र्देना और उस े सर्दस् यों के रजजस् र में
अलभलिखित करना ; याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
676
(ि) सर्दस्य के नाम को स्थायी रूप से या ऐसी अवधध के लिए, जो
वह िीक समझे, सर्दस्यों के रजजस् र से ह ाना ; या
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना जो वह िीक समझे, जो र्दस िाि
रुपए तक का हो सकेगा ।
(6) जहां ककसी सर्दस्य से संबंधधत जांच के क्रम के र्दौरान या अलभिेि पर
िाए गए साक्ष्य के आधार पर अनुशासन सलमनत की, यह राय है कक कोई ऐसा
सर्दस्य, जो फम ष का भागीर्दार या स्वामी है, वपछिे पाचं वर् ष के र्दौरान र्दसू री
अनुसूची या पहिी और र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में वखणतष अवचार का बार-बार र्दोर्ी
पाया गया है, वहां फम ष के ववरुद्ध ननम्नलिखित कारषवाई भी की जा सकेगी,
अथाषत:्—
(क) फम ष को र्दो वर् ष स े अनधधक की ऐसी अवधध के लिए चा षर् ष
अकाउं ें व्यवसाय की ववृत्त स े संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप या कक्रयाकिापों को
करने से प्रनतवर्द्ध करना ; या
(ि) फम ष के रजजस्रीकरण को ननिंत्रबत या रद्र्द करना और फम ष के
रजजस् र स े उसका नाम स्थायी रूप स े या ऐसी अवधध के लिए जो वह िीक
समझे, ह ाना ; या
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना, जो वह िीक समझ,े जो पचास
िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(7) जहां कोई सर्दस्य या फम ष ववननठर्दषष्ट् समय के भीतर, उपधारा (5) या
उपधारा (6) के अधीन अधधरोवपत जुमाषने का संर्दाय करने में ववफि रहता है वहां
पररर्द् ऐसे सर्दस्य या फम ष का नाम ऐसी अवधध के लिए, यथाजस्थनत, सर्दस्यों के
रजजस् र या फम ष के रजजस् र से ह ा र्देगी ।
(8) अनुशासननक सलमनत के पीिासीन अधधकारी और सर्दस् यों को ऐसे भत्तों
का संर्दाय ककया जाएगा जो ववठहत ककए जाएं ।”।
धारा 21ग का 24. मूि अधधननयम की धारा 21ग में स्पष्ट् ीकरण का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 21घ का 25. मूि अधधननयम की धारा 21घ के स् थान पर ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन ।
अथाषत ् :—
संक्रमणकािीन “21घ. चा षर् ष अकाउं ें , िागत और संकम ष िेिापाि तथा कंपनी सधचव
उपबंध ।
(संशोधन) अधधननयम, 2022 के प्रारंभ से पूव,ष अनुशासन बोर् ष या अनुशासन
सलमनत के समि िंत्रबत सभी लशकायतें या कोई जांच या अपीि प्राधधकारी या
उच्च न्द्यायािय के समि फाइि की गई कोई अपीि या कोई ननर्देश इस
अधधननयम के उपबंधों द्वारा शालसत होना जारी रहेगा, मानो यह अधधननयम, चा षर् ष
अकाउं ें , िागत और संकम ष िेिापाि तथा कंपनी सधचव (संशोधन) अधधननयम,
2022 द्वारा संशोधधत नहीं ककया गया हो ।”।
धारा 22 का 26. मूि अधधननयम की धारा 22 के स् थान पर ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन ।
अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
677
पररभावर्त ववृत्तक ‘22. इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए, “ववृत्तक या अन्द्य अवचार” पर्द में
और अन्द् य
संस् थान के ककसी सर्दस् य की ओर स े ककसी अनुसूची में यथा उजल् िखित या तो
अवचार।
उसकी व् यजक् तगत िमता या फम ष के भागीर्दार या स् वामी के रूप में कोई काय ष या
िोप सजम् मलित समझा जाएगा, परन्द्त ु इस धारा की ककसी बात का यह अथ ष नहीं
िगाया जाएगा कक धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन ननर्देशक (अनुशासन) को
ककन्द्ह ीं अन्द्य पररजस् थनतयों के अधीन ऐसे सर्दस् यों या फम ष के आचरण की जांच
करने के लिए प्रर्दत्त शजक् त या ननिेवपत कतव्ष य ककसी रूप में सीलमत या न्द् यून
करती हैं ।’।
धारा 22छ का 27. मूि अधधननयम की धारा 22छ में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में,—
(क) “संस्थान का कोई सर्दस्य” शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई फम”ष शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) “उस पर अधधरोवपत करने” शब्र्दों के स्थान पर, “ऐस े सर्दस्य या
फम ष पर अधधरोवपत करने” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) “धारा 21क की उपधारा (3) और धारा 21ि की उपधारा (3)”
शब् र्दों, कोष्ट् िकों, अंकों और अिरों के स् थान पर “धारा 21क की उपधारा (5)
या उपधारा (6) या धारा 21ि की उपधारा (5) या उपधारा (6)” शब् र्द,
कोष्ट् िक, अंक और अिर रिे जाएंगे;
(घ) “उसे आर्देश संसूधचत ककया जाता है” शब्र्दों के स्थान पर, “ऐसे
सर्दस्य या फम ष को आर्देश ससं ूधचत ककया जाता है” शब्र्द रिे जाएंगे ।
(ii) उपधारा (2) में, “धारा 21क की उपधारा (3) और धारा 21ि की
उपधारा (3)” शब् र्दों, कोष्ट् िकों, अंकों और अिरों के स् थान पर “धारा 21क की
उपधारा (5) या उपधारा (6) अथवा धारा 21ि की उपधारा (5) या उपधारा (6)”
शब् र्द, कोष्ट् िक, अंक और अिर रिे जाएंगे ;
(iii) उपधारा (2) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा और स् पष्ट् ीकरण
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
‘(3) प्राधधकरण के ककसी आर्देश या काय ष या कायवष ाही को प्राधधकरण
के गिन में केवि ककसी त्रठु या आकजस्मक ररजक्त या एक अथवा र्दो
सर्दस्यों की अनुपजस्थनत के आधार पर, ककसी भी रीनत में प्रश्नगत नहीं
ककया जाएगा ।
स् पष्ट् टीकरर् 1—इस अध् याय के प्रयोजनों के लिए,—
(अ) “संस् थान के सर्दस् य” में ऐसा व् यजक् त भी सजम् मलित है जो
अलभकधथत अवचार की तारीि को संस् थान का सर्दस् य था, तथावप वह
जांच के समय संस् थान का सर्दस् य नहीं रह गया हो ;
(आ) संस् थान के साथ रजजस् रीकृत “फम”ष भी ऐसे सर्दस् य के
अवचार के लिए र्दायी होगी जो अलभकधथत अवचार की तारीि को
उसका भागीर्दार या स् वामी था के तथावप जांच के समय वह ऐसाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
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भागीर्दार या स्व ामी नहीं रह गया हो ।
स् पष्ट् टीकरर् 2—इस अध् याय के अधीन की गई कोई कारषवाई, केन्द्र ीय
सरकार के ववभाग या राज् य सरकार या ककसी कानूनी प्राधधकारी या
ववननयामक ननकाय द्वारा संस् थान के साथ रजजस् रीकृत ककसी सर्दस् य या फम ष
के ववरुद्ध तत् समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध के अधीन कारषवाई करने का
वजनष नहीं करेगी ।’।
28. मूि अधधननयम की धारा 24 में,— धारा 24 का
संशोधन ।
(क) “एक हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “एक िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ि) “पांच हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ।
धारा 24क का 29. मूि अधधननयम की धारा 24क की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) “जुमाषने से, जो प्रथम र्दोर्लसद्धध पर एक हजार रुपए तक का हो सकेगा”
शब्र्दों के स्थान पर, “कारावास से, जो प्रथम र्दोर्लसद्धध पर छह मास तक का हो
सकेगा या जुमाषने से, जो एक िाि रुपए स े कम का नहीं होगा, ककंतु पांच िाि
रुपए तक का हो सकेगा या र्दोनों से र्दंर्नीय होगा” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) “जो छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषने से, जो पांच हजार रुपए तक
का हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर, “जो एक वर् ष तक का हो सकेगा या जुमाषने से,
जो र्दो िाि रुपए से कम का नहीं होगा, ककंतु र्दस िाि रुपए तक का हो सकेगा”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 25 का 30. मूि अधधननयम की धारा 25 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(क) “जुमाषन े से, जो प्रथम र्दोर्लसद्धध पर एक हजार रुपए तक का हो
सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर, “जुमाषने से, जो प्रथम र्दोर्लसद्धध पर र्दो िाि रुपए से
कम का नहीं होगा, ककंतु र्दस िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) “एक हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दस िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ग) “पांच हजार रुपए तक हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर, “जुमाषने से, जो
चार िाि रुपए से कम का नहीं होगा, ककंतु बीस िाि रुपए तक का हो सकेगा”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 26 का 31. मूि अधधननयम की धारा 26 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(क) “पांच हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “एक िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ि) “एक िाि रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
679
(ग) “र्दस हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दो िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(घ) जो “र्दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, ककन्द्तु जो र्दस िाि रुपए
तक का हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर, “जो र्दो िाि रुपए से कम का नहीं होगा,
ककन्द्तु जो र्दस िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 28ि का 32. मूि अधधननयम की धारा 28ि के िंर् (ग) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर्
संशोधन ।
अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(घ) संस्थान या फमों के सर्दस्यों द्वारा ववलभन्द्न कानूनी और ववननयामक
अपेिाओं के अननुपािन के मामिों को, जो उसके द्वारा उनके पुनवविष ोकन के
र्दौरान ध्यान में आए हों, अनुशासन ननर्देशािय को उनकी परीिा के लिए अग्रेवर्त
करना ।”।
33. मूि अधधननयम की धारा 29 की उपधारा (2) में, “रजजस् र” शब्र्दों के स्थान धारा 29 का
संशोधन ।
पर, “सर्दस्यों के रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ।
34. मूि अधधननयम की धारा 29क की उपधारा (2) में,— धारा 29क का
संशोधन ।
(i) िंर् (ग) और िंर् (घ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंगे,
अथाषत ् :—
“(ग) धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन कोई सूचना या लशकायत
फाइि करने के लिए प्ररूप और फीस, ककसी लशकायत या सूचना का या गैर-
अनुयोज्य रूप में होने संबंधी उपधारा (2) के अधीन अनुयोज्य ववननश्चय
करने की रीनत और उपधारा (7) के अधीन अन्द्वेर्ण की प्रकक्रया ;
(घ) धारा 21क की उपधारा (2) के अधीन अनुशासन बोर् ष द्वारा
मामिों पर ववचार करते समय प्रकक्रया और उपधारा (7) के अधीन जुमाषने के
संर्दाय के लिए समय—सीमा ;
(घक) धारा 21ि की उपधारा (2) के अधीन अनुशासन सलमनत द्वारा
मामिों पर ववचार करते समय प्रकक्रया और उपधारा (7) के अधीन जुमाषने के
संर्दाय के लिए समय-सीमा ;”।
35. मूि अधधननयम की धारा 30 की उपधारा (2) में,— धारा 30 का
संशोधन ।
(i) िंर् (ि), िंर् (ङ) और िंर् (ज) में, “रजजस् र” शब्र्दों के स्थान पर, जहां
वह आता है, “सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) िंर् (छ) और िंर् (झ) का िोप ककया जाएगा ;
(iii) िंर् (र्द) के स्थान पर ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :—
“(र्द) धारा 5 की उपधारा (3) के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित अहषता ;
(र्दक) ऐसी पररजस् थनतयां जजनके अधीन धारा 6 की उपधारा (3) के
अधीन व् यवसाय प्रमाणपत्र रद्र्द ककए जा सकेंगे ;
(र्दि) धारा 15 की उपधारा (2) के िंर् (च) के अधीन व् यवसायअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
680
प्रमाणपत्र प्रर्दान करने या िाररज करने के मागर्दष शकष लसद्धांत;
(र्दग) धारा 16 की उपधारा (2) के िंर् (ग) के अधीन पररर्द् के
सधचव और अन्द् य अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों की ननयुजक् त की रीनत,
शजक् तयां, कतव्ष य, कृत् य, वेतन, फीस, भत्ते और सेवा की अन्द्य ननबंधन और
शत;ें
(र्दघ) धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन वावर्कष ववत्तीय वववरण और
उपधारा (5) के अधीन वावर्कष िेिे तैयार करने की रीनत;
(र्दङ) धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन संस् थान के सर्दस्यों के
रजजस् र को बनाए रिने की रीनत और वह रीनत जजसमें संस्थान के साथ
रजजस् रीकृत सर्दस् यों की वावर्कष सूची, उपधारा (3) के अधीन प्रकालशत की
जाएगी;
(र्दच) धारा 20क के अधीन ककसी फम ष का रजजस्रीकरण प्रर्दान करने के
लिए आवेर्दन करने की रीनत और ऐसे रजजस् रीकरण के ननबंधन और शतें ;
(र्दछ) धारा 20ि के अधीन फमों के रजजस् र और अन्द्य ववलशजष्ट् यों के
अनुरिण की रीनत, जजसके अंतगतष उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन
ककसी फम ष के ववरुद्ध ककसी अनुयोज् य सूचना या िंत्रबत लशकायत अथवा
अधधरोवपत शाजस् त के ब् यौरे भी है और वह रीनत जजसमें संस् थान के साथ
रजजस् रीकृत फम ष की वावर्कष सूची, उपधारा (3) के अधीन प्रकालशत की
जाएगी ;
(र्दज) धारा 21 की उपधारा (9) के अधीन अनुयोज् य सूचना और
लशकायतों तथा पाररत आर्देशों की प्राजस् थनत उपिब् ध कराने की रीनत;
(र्दझ) धारा 21क की उपधारा (1) के िंर् (क), िंर् (ि) और िंर् (ग)
के अधीन व्यजक्तयों के पैनि तैयार करने की रीनत और उपधारा (8) के
अधीन अनुशासन बोर् ष के पीिासीन अधधकाररयों और सर्दस्यों को संर्देय भत्ते;
(र्दञ) धारा 21ि की उपधारा (1) के िंर् (क), िंर् (ि) और िंर् (ग)
के अधीन व्यजक्तयों के पैनि तैयार करने की रीनत और उपधारा (8) के
अधीन अनुशासन सलमनत के पीिासीन अधधकाररयों और सर्दस्यों को संर्देय
भत्ते ;
(र्द ) धारा 22ङ की उपधारा (2) के अधीन प्राधधकरण के अधधकाररयों
और अन्द्य कमषचाररवन्द्ृ र्द के वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की शतें ;
(र्दि) वह रीनत जजसमें ित्रे ीय पररर्द् धारा 23 की उपधारा (2) के
अधीन गठित की जा सकेगी और उसके कृत्य ; और ।”।
पहिी अनुसूची 36. मूि अधधननयम की पहिी अनुसूची में,—
का संशोधन ।
(i) शीर्कष में, “धारा 21(3), धारा 21क(3)” शब् र्दों, अंकों, अिर और कोष्ट् िकों
के स् थान पर “धारा 21(6), धारा 21क(5) और (6), धारा 21ि(5) और (6)” शब् र्द,
अंक, अिर और कोष्ट् िक रिे जाएंगे;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
681
(ii) भाग 1 की मर्द (9) में “कंपनी अधधननयम, 1956” शब् र्दों और अंकों के 1956 का 1
पश् चात ् “या कंपनी अधधननयम, 2013 की धारा 139 और धारा 141 अथवा िेिा 2013 का 18
परीिकों की ननयुजक् त से संबंधधत तत् समय प्रवत्तृ कोई अन्द् य ववधध” शब् र्द और अंक
अंत:स् थावपत ककए जाएंगे ।
र्दसू री अनुसूची 37. मूि अधधननयम की र्दसू री अनुसूची में,—
का संशोधन ।
(i) शीर्कष में, “धारा 21(3), धारा 21ि(3)” शब् र्दों, अकं ों, अिर और कोष्ट् िकों
के स् थान पर “धारा 21(6), धारा 21ि(5) और (6)” शब् र्द, अंक, अिर और
कोष्ट् िक रिे जाएंगे;
(ii) भाग 1 की मर्द (3) में “ऐसी रीनत स े जजसस े यह ववश् वास हो जाए कक
वह” शब् र्दों के स् थान “ऐसी रीनत से जजससे यह ववश् वास हो जाए कक वह या उसकी
फम”ष शब् र्द रिे जाएंगे ;
(iii) भाग 2 में, मर्द (4) के पश् चात ् ननम् नलिखित मर्द को अंत:स् थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
2013 का 18 “(5) कंपनी अधधननयम 2013 के उपबंधों के उल् िंघन में कंपनी के
िेिा परीिक के रूप में काय ष करता है ।”।
अध् याय 3
िागत और संकम ि िेखापाि अधिनियम, 1959 का संिोिि
1959 का 23 38. िागत और संकम ष िेिापाि अधधननयम, 1959 (जजसे इस अध् याय में इसके वहृ त्त नाम का
संशोधन ।
पश् चात ् मूि अधधननयम कहा गया है) के वहृ त्त नाम में “िागत और संकम ष िेिापािों की
ववृत्त के ववननयमन” शब् र्दों के स् थान पर “िागत िेिापािों की ववृत्त के ववननयमन और
ववकास” शब् र्द रिे जाएंगे ।
39. मूि अधधननयम की धारा 1 की उपधारा (1) में “िागत और संकम ष िेिापाि” धारा 1 का
संशोधन ।
के स् थान पर “िागत िेिापाि” शब् र्द रिे जाएंगे ।
40. मूि अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (1) में,— धारा 2 का
संशोधन ।
(i) िंर् (ककक) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(कि) “अनुशासन बोर्”ष से धारा 21क की उपधारा (1) के अधीन
गठित अनुशासन बोर् ष अलभप्रेत है;
2013 का 18 (कग) “कंपनी अधधननयम” से कंपनी अधधननयम, 2013 या उक् त
अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (67) में यथा पररभावर्त कोई अन्द्य पूवष
कंपनी ववधध अलभप्रेत है;’;
(ii) िंर् (ग) में, “संस्थान की पररर्द्” शब्र्दों के पूव ष “धारा 9 के अधीन
गठित” शब्र्द अतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(iii) िंर् (ग) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककए जाएंगे,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
682
अथाषत ् :—
‘(गक) “ननर्देशक (अनुशासन)” स े धारा 21 में ननठर्दषष्ट् ननर्देशक
(अनुशासन) अलभप्रेत है और उसमें संयुक् त ननर्देशक (अनुशासन) सजम् मलित
है;
(गि) “अनुशासन सलमनत” से धारा 21ि की उपधारा (1) के अधीन
गठित अनुशासन सलमनत अलभप्रेत है ;
(गग) “अनुशासन ननर्देशािय” से धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन
स् थावपत अनुशासन ननर्देशािय अलभप्रेत है;’;
(iv) िंर् (घ) में “1956” अंकों का िोप ककया जाएगा ;
(v) िंर् (ङ) के स्थान पर, ननम् नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(ङ) “अध् येता” से संस्थान का अध् येता सर्दस् य अलभप्रेत है ;’;
(vi) िंर् (चक) के स् थान पर, ननम् नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(चक) “अधधसूचना” से राजपत्र में प्रकालशत अधधसूचना अलभप्रेत है और
पर्द “अधधसूधचत” का तर्दनुसार अथ ष िगाया जाएगा ; ’;
(vii) िंर् (झ) के स् थान पर, ननम् नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(झ) “रजजस् र” स े यथाजस् थनत, धारा 19 के अधीन अनुरक्षित संस् थान
के सर्दस् यों का रजजस् र या धारा 20ि के अधीन अनुरक्षित संस् थान की फमों
का रजजस् र अलभप्रेत है;’;
(viii) िंर् (झकक) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(झककक) “स् थायी सलमनत” से धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन
गठित स् थायी सलमनत अलभप्रेत है ;’।
अध् याय 2 के 41. मूि अधधननयम के अध् याय 2 के शीर्कष में “और संकम”ष शब् र्दों का िोप ककया
शीर् ष का
जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 4 का 42. मूि अधधननयम की धारा 4 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है “सर्दस् यों के
रजजस् र” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ii) ठहन्द्र्दी पाि में संशोधन आवश् यक नहीं है;
(iii) उपधारा (3) में,—
(क) “जो तीन हजार रुपए से अधधक की नहीं होगी” शब्र्दों का िोप
ककया जाएगा;
(ि) परन्द्तुक का िोप ककया जाएगा ।
धारा 5 का 43. मूि अधधननयम की धारा 5 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस् यों केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
683
रजजस् र” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ii) उपधारा (4) में, “जो पाचं हजार रुपए स े अधधक नहीं होगी” शब्र्दों का
िोप ककया जाएगा;
(iii) परन्द्तुक का िोप ककया जाएगा ।
धारा 6 का 44. मूि अधधननयम की धारा 6 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) “जो तीन हजार रुपए से अधधक नहीं होगी” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा;
(ii) पहिे परन्द्तुक का िोप ककया जाएगा;
(iii) र्दसू रे परन्द्तुक में, “परन्द्तु यह और कक” शब्र्दों के स्थान पर “परन्द्तु”
शब्र्द रिा जाएगा ।
धारा 8 का 45. मूि अधधननयम की धारा 8 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस् यों के
रजजस् र” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ii) िंर् (iii) में, “अनुन्द् मोधचत ठर्दवालिया” शब् र्दों के पश् चात ् “या अनुन्द् मोधचत
शोधन अिम” शब् र्द अंत:स् थावपत ककए जाएंगे;
(iii) िंर् (iii) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
2016 का 31 “(iiiक) ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 के अधीन शोधन
अिम घोवर्त ककया गया है ;”;
(iv) िंर् (v) में सशं ोधन आवश् यक नहीं है ।
46. मूि अधधननयम की धारा 9 में,— धारा 9 का
संशोधन ।
(i) उपधारा (2) में,—
(क) “रजजस् र” शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस् यों के
रजजस् र” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ि) “तीन वर्”ष शब् र्दों के स् थान पर “चार वर्”ष शब् र्द रिे जाएंगे;
(ग) “छह वर्”ष शब्र्द ों के स् थान पर “आि वर्”ष शब् र्द रिे जाएंगे;
(ii) उपधारा (4) में,—
(क) “कोई व् यजक् त” शब् र्दों के स् थान पर “संस् थान का कोई सर्दस् य या
फम ष का कोई भागीर्दार” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ि) “तीन वर्”ष शब् र्दों के स् थान पर “चार वर्”ष शब् र्द रिे जाएंगे ।
47. मूि अधधननयम की धारा 12 में,— धारा 12 का
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में, पहिे परंतुक का िोप ककया जाएगा;
(ii) उपधारा (2) के पश् चात,् ननम् नलिखित उपधाराएं अंत:स् थावपत की जाएंगी,
अथाषत ् :—
“(2क) अध् यि, पररर्द् की बिै कों की अध्यिता करेगा ।
(2ि) अध् यि और उपाध् यि ऐसी शजक् तयों का प्रयोग करेंगें और ऐसेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
684
कतव्ष यों या कृत्यों का ननवहष न करेंगे, जो ववठहत ककए जाएं ।
(2ग) यह सुननजश् चत करना अध् यि का कतव्ष य होगा कक पररर्द् द्वारा
लिए गए ववननश् चयों को कक्रयाजन्द्व त ककया जाए ।
(2घ) यठर्द ककसी कारण से अध् यि का पर्द ररक् त हो जाता है या यठर्द
अध् यि अनुपजस् थत है अथवा ककसी अन्द्य कारण से, उसे समनुर्देलशत
शजक् तयों का प्रयोग करने या कतव्ष यों का पािन करने में असमथ ष है, तो
उपाध् यि उसके स्थ ान पर काय ष करेगा और अध् यि की शजक् तयों का प्रयोग
और उसके कतव्ष यों का पािन करेगा ।”।
48. मूि अधधननयम की धारा 13 की उपधारा (2) में, “रजजस् र” शब् र्द के स् थान धारा 13 का
संशोधन ।
पर “सर्दस् यों के रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ।
49. मूि अधधननयम की धारा 15 की उपधारा (2) में,— धारा 15 का
संशोधन ।
(i) िंर् (ग) में, “रजजस् र” शब् र्द के स् थान पर “सर्दस् यों के रजजस् र” शब् र्द
रिे जाएंगे;
(ii) िंर् (ङ) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(ङक) ककसी फम ष का रजजस् रीकरण प्रर्दान करना या नामंजूर करना ;”;
(iii) िंर् (ञ) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत ् :—
“(ञक) इस अधधननयम के प्रयोजन को पूरा करने के लिए मागर्दष शकष
लसद्धांत जारी करना;
(ञि) ववननधानकताष लशिा और जागरूकता कायक्रष मों का आयोजन
करना;
(ञग) इस अधधननयम के अधीन उसके कृत् यों का पािन करने के
प्रयोजन के लिए केंरीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन से ककसी ववर्देशी अलभकरण
के साथ कोई ज्ञापन या िहराव करना ;”;
(iv) िंर् ( ) में, “और उस पर केन्द्रीय सरकार को ररपो ष के साथ तीन मास
के भीतर कारषवाई करना और उनको वावर्कष ररपो ष में सजम्मलित करना” शब् र्दों के
स् थान पर “और उसकी वावर्कष ररपो ष में उस पर की गई कारषवाई के ब्यौरे रिना”
शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 15क का 50. मूि अधधननयम की धारा 15क में,—
संशोधन ।
(i) िंर् (ग) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(गक) फमों के रजजस् र का अनुरिण और प्रकाशन ;”;
(ii) िंर् (ङ) में, “रजजस् र स े नामों का ह ाया जाना और रजजस् र” शब् र्दों के
स् थान पर “ सर्दस् यों के रजजस् र और फमों से नामों का ह ाया जाना और सर्दस् यों
के रजजस् र और फमों” शब् र्द रिे जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
685
धारा 16 का 51. मूि अधधननयम की धारा 16 में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) के स् थान पर ननम् नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(1) पररर्द्, अपने कतव्ष यों के र्दितापूण ष पािन के लिए—
(क) एक सधचव की ननयुजक् त करेगी, जो संस् थान के प्रशासननक
कृत् यों का उसके मुख् य कायपष ािक अधधकारी के रूप में पािन करेगा;
(ि) एक ननर्देशक (अनुशासन) और संस् थान के उप सधचव से
अन्द् यून पंजक् त के र्दो संयुक् त ननर्देशक (अनुशासन), इस अधधननयम और
उसके अधीन बनाए गए ननयमों तथा ववननयमों के अधीन ऐसे कृत् यों
का पािन करने के लिए, जो उन्द्ह ें समनुर्देलशत ककए जाएं, ननयुक् त
करेगी:
परंतु ननर्देशक (अनुशासन) अथवा संयुक् त ननर्देशक (अनुशासन)
की कोई ननयुजक् त या पुनननषयुजक् त अथवा ननयुजक् त का पयवष सान तब
तक प्रभावी नहीं होगा जब तक कक ऐसी ननयुजक् त या पुनननयष ुजक् त
अथवा ननयुजक् त का पयवष सान केंरीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन से न
ककया गया हो ।”;
(ii) उपधारा (2) के िंर् (ग) के स् थान पर ननम् नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“(ग) सधचव और अन्द्य अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों की शजक् तयां,
ननयुजक् त की रीनत, कतव्ष यों और कृत् यों को, उनके वेतन, फीस, भत्ते और सेवा
की अन्द्य ननबंधनें और शतें, ववठहत कर सकेगी ;”।
52. मूि अधधननयम की धारा 18 की उपधारा (5) के स् थान पर ननम्न लिखित धारा 18 का
संशोधन ।
उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(5) पररर्द् के वावर्कष िेिे ऐसी रीनत में तैयार ककए जाएंगे जो ववठहत की
जाएं और वे पररर्द् द्वारा भारत के ननयंत्रक और महािेिापरीिक द्वारा अनुरक्षित
संपरीिकों के पैनि से हर वर् ष ननयुक् त ककए जाने वािे चा षर् ष अकाउं ें की फम ष
द्वारा संपरीक्षित ककए जाएंगें :
परंतु फम ष इस उपधारा के अधीन संपरीिक के रूप में ननयुजक् त के लिए पात्र
नहीं होगी यठर्द उसका कोई भागीर्दार पररर्द् का सर्दस् य है या वपछिे चार वर्ों के
र्दौरान भागीर्दार रहा है :
परंतु यह और कक यठर्द यह सूचना कक पररर्द् के िेिे उसकी ववत्तीय जस् थनत
का सही और उधचत धचत्र प्रस् तुत नहीं करते, केंरीय सरकार द्वारा पररर्द् को भेजी
जाती है तो पररर्द्, जहां भी उपयुक् त हो उसकी ववशेर् सपं रीिा करा सकेगी और
ऐसे अन्द्य काय ष कर सकेगी जजन्द्ह ें वह आवश् यक समझे तथा केंरीय सरकार को उस
पर की गई कारषवाई की ररपो ष र्देगी :
परंतु यह भी कक यठर्द केंरीय सरकार द्वारा पररर्द् को ऐसी सूचना भेजी
जाती है कक पररर्द् के िेिे उसकी ववत्तीय जस् थनत का सही और उधचत धचत्र प्रस् तुत
नहीं करते, तो पररर्द्, जहां समुधचत समझे, ववशेर् संपरीिा करा सकेगी या ऐसीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
686
अन्द्य कारषवाई करा सकेगी, जो वह उधचत समझे और उस पर की गई कारषवाई की
ररपो ष केंरीय सरकार को प्रस् तुत करेगी ।”।
53. मूि अधधननयम की धारा 19 में,— धारा 19 का
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब् र्द के स्थ ान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस् यों के
रजजस् र” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ii) उपधारा (1) के स् थान पर ननम् नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(1) पररर्द्, संस् थान के सर्दस् यों का रजजस् र ऐसी रीनत में अनुरक्षित
करेगी जो ववठहत की जाए ।”;
(iii) उपधारा (2) के िंर् (ग) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(गक) क् या उसके ववरुद्ध अध् याय 5 के अधीन कोई अनुयोज् य सूचना
या लशकायत िंत्रबत है अथवा कोई शाजस् त अधधरोवपत की गई है, यठर्द कोई
हो, जजसके अंतगतष उसके ब् यौरे भी है ;”;
(iv) उपधारा (4) में,—
(क) “और पांच हजार रुपए से अधधक नहीं होगी” शब् र्दों का िोप ककया
जाएगा;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
धारा 20 का 54. मूि अधधननयम की धारा 20 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है, “सर्दस् यों के
रजजस् र” शब् र्द रिे जाएंगे;
(ii) उपधारा (3) में,—
(क) “र्दो हजार रुपए से अधधक नहीं होगी” शब् र्दों का िोप ककया
जाएगा ;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
नए अध् याय 55. मूि अधधननयम के अध् याय 4 के पश् चात,् ननम् नलिखित अध् याय अंतःस् थावपत
4क का
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
अंत:स् थापन ।
“अध् याय 4क
फमों का रश्जस् रीकरर् और रश्जस् टर
फमों का 20क. (1) प्रत्य ेक फम,ष फम ष के ककसी भागीर्दार या स् वामी द्वारा, ऐसी रीनत
रजजस् रीकरण ।
में और ऐसे ननबंधनों तथा शतों के अधीन रहते हुए, जो ववठहत की जाए, पररर्द्
को ककए गए आवेर्दन पर संस्थान के पास रजजस् रीकृत की जाएगी :
परंतु पररर्द्, ककसी फम ष को रजजस् र करना नामंजूर कर सकेगी, यठर्द ऐसी
फम ष का नाम, ककसी अन्द्य फम ष के नाम के समरूप या समान है, जो पहिे स े हीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
687
रजजस् रीकृत है अथवा भारत के भीतर या बाहर ककसी फम ष द्वारा नाम उपयोग में
है या पररर्द् की राय में फम ष का रजजस् रीकरण अवांछनीय है ।
फमों का 20ि. (1) पररर्द्, फमों का रजजस् र, ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए,
रजजस् र।
अनुरक्षित करेगी ।
(2) फमों के रजजस् र में, फम ष के बारे में ऐसी ववलशजष्ट् यां, जजसके अंतगतष
अध् याय 5 के अधीन अनुयोज् य सूचना या पररर्द् के िंत्रबत अथवा इसके ववरुद्ध
ककसी अधधरोवपत शाजस् त के ब् यौरे भी है, ऐसी रीनत में और ऐसे अंतरािों पर होगी,
जो ववठहत ककए जाए ।
(3) पररर्द्, प्रत्य ेक वर् ष की पहिी अप्रैि को या ऐसे अंतरािों पर, जो पररर्द्
द्वारा ववननजश् चत ककए जाएं, संस् थान के साथ रजजस् रीकृत फमों की सूची, ऐसी
रीनत में, जो ववठहत की जाए, प्रकालशत कराएगी और ऐसे प्ररूप में और ऐसी रकम
के संर्दाय पर, जो ववठहत की जाए, ऐसे व् यजक् तयों को यह सूची, उपिब् ध
कराएगी ।
फमों के रजजस् र 20ग. (1) पररर्द्, फमों के रजजस् र से ऐसी ककसी फम ष के नाम को
से ह ाया जाना । ह ाएगी,—
(क) जजसका ववघ न या पररसमापन हो गया है ; या
(ि) जजससे इस ननलमत्त कोई अनुरोध प्राप्त हुआ है ; या
(ग) जजसे ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 के उपबंधों के 2016 का 31
अधीन ठर्दवािा या शोधन अिम घोवर्त ककया गया है और जो अननुमोधचत
रहती है ; या
(घ) जजसे तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध के अधीन या ककसी अन्द्य सिम
न्द्यायािय द्वारा व्यवसायरत िागत िेिापाि के व्यवसाय से संबंधधत ककसी
कायकष िाप या ककन्द्हीं कायकष िापों को करने से वजजतष ककया गया है ; या
(ङ) जजसके संबंध में इस अधधननयम के अधीन ह ाए जाने का आर्देश
पाररत ककया गया है ।
20घ. (1) रजजस्रीकरण से इंकार करने के ककसी ववननश्चय से व्यधथत कोई पररर्द् के समि
पुनवविष ोकन ।
फम,ष ऐसे इंकार की तारीि के एक मास के भीतर, पररर्द् के समि पुनवविष ोकन
के लिए आवेर्दन कर सकेगी ।
(2) पररर्द्, पुनवविष ोकन आवेर्दन पर ववचार करने के पश्चात,् इस प्रकार
ककए गए ववननश्चय की पुजष्ट् कर सकेगी या उस े अपास्त कर सकेगी या ऐसा
आर्देश पाररत कर सकेगी, जो वह समुधचत समझे ।”।
56. मूि अधधननयम की धारा 21 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 21 का
अथाषत ् :— प्रनतस्थापन ।
“21. (1) पररर्द्, अन्द्वेर्ण करने के लिए, या तो स्व:प्ररे णा से या ककसी अनुशासननक
ननर्देशािय ।
सूचना या लशकायत की प्राजप्त पर, अधधसूचना द्वारा, ऐसी रीनत में, ऐसी फीस के
साथ ववननठर्दषष्ट् की जाए, जो अधधसूचना द्वारा एक अनुशासननक ननर्देशािय की
स्थापना करेगी, जो ननर्देशक (अनुशासन), सस्ं थान के उप सधचव की पंजक्त स े
अन्द्यून के कम से कम र्दो संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन) और धारा 16 के अधीनअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
688
ननयुक्त ऐसे अन्द्य कमचष ाररयों से लमिकर बनेगा ।
(2) ककसी सूचना या लशकायत की प्राजप्त के तीस ठर्दन के भीतर, ननर्देशक
(अनुशासन) ऐसी रीनत में ववननश्चय करेगा जो ववनठर्दषष्ट् की जाए, क्या लशकायत
या सूचना अनुयोज्य है या गैर-अनुयोज्य रूप में बंर्द ककए जाने के लिए र्दायी है :
परंतु ननर्देशक (अनुशासन), यथाजस्थनत, लशकायतकताष या सूचनार्दाता से, यह
ववननश्चय करने से पूव ष कक क्या मामिा अनुयोज्य है या गैर-अनुयोज्य है, पन्द्रह
ठर्दन का समय र्देकर अनतररक्त सूचना मांग सकेगा :
परंतु यह और कक गैर-अनुयोज्य लशकायत या सूचना के संबंध में ननर्देशक
(अनुशासन) की लसफाररशों को अनुशासननक बोर् ष को उनकी प्राजप्त के साि ठर्दन के
भीतर प्रस्तुत ककया जाएगा तथा अनुशासननक बोर्,ष उनके गुणागुण की जांच करने
के पश्चात,् ऐसी लशकायत या सूचना को, उसका और अन्द्वेर्ण करने के लिए
ननर्देशक (अनुशासन) को ननठर्दषष्ट् कर सकेगा ।
(3) ककसी ऐसे मामि,े जो अनुयोज्य पाया जाता है, का अन्द्वेर्ण करते
समय, ननर्देशक (अनुशासन), यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष को इक्कीस ठर्दन के
भीतर एक लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर र्देगा, जजसको अन्द्य इक्कीस
ठर्दन तक, अनतररक्त ववस्तार मांगने के कारणों को िेिबद्ध करते हुए और बढाया
जा सकेगा ।
(4) उपधारा (3) के अधीन लिखित कथन, यठर्द कोई हो, की प्राजप्त पर,
ननर्देशक (अनुशासन), यथाजस्थनत, लशकायतकताष या सूचना र्देने वािे को उसकी एक
प्रनत भेजेगा और लशकायतकताष या सूचना र्देने वािा व्यजक्त ऐसे लिखित कथन की
प्राजप्त के इक्कीस ठर्दन के भीतर अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत करेगा ।
(5) उपधारा (3) के अधीन लिखित कथन और उपधारा (4) के अधीन
प्रत्युत्तर के प्राप्त हो जाने पर, ननर्देशक (अनुशासन), यठर्द, यथाजस्थनत, ककसी
सर्दस्य या फम ष के ववरुद्ध प्रथमदृष्ट् या मामिा बनता है, तो तीस ठर्दन के भीतर
एक प्रारंलभक जांच ररपो ष प्रस्तुत करेगा ।
(6) यठर्द पहिी अनुसूची में उजल्िखित ककसी ववृत्तक या अन्द्य अवचार के
लिए प्रथमदृष्ट् या मामिा बनता है तो ननर्देशक (अनुशासन), प्रारंलभक जांच ररपो ष
अनुशासननक बोर् ष को प्रस्तुत करेगा और जहां र्दसू री अनुसूची में या पहिी अनुसूची
और र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में, उजल्िखित ककसी ववृत्तक या अन्द्य अवचार का
प्रथमदृष्ट् या मामिा बनता है, तो वहां वह प्रारंलभक जांच ररपो ष अनुशासननक
सलमनत को प्रस्तुत करेगा :
परंतु केंरीय सरकार या राज्य सरकार या ककसी कानूनी प्राधधकारी के ककसी
प्राधधकृत अधधकारी द्वारा फाइि की गई लशकायत या सूचना, जो अन्द्वेर्ण ररपो ष
या समथनष कारी साक्ष्य के साथ अन्द्वेर्ण ररपो ष के सुसंगत उद्धरण द्वारा सम्यक् त
समधथतष है, प्रारंलभक जांच ररपो ष के रूप में समझा जाएगा :
परंतु यह और कक जहां, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष के ववरुद्ध प्रथमदृष्ट् या
कोई मामिा नहीं बनता है, वहां ननर्देशक (अनुशासन), अनुशासननक बोर् ष को
सुसंगत र्दस्तावेजों के साथ, ऐसी सूचना या लशकायत प्रस्तुत करेगा औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
689
अनुशासननक बोर्,ष यठर्द वह ननर्देशक (अनुशासन) के ननष्ट्कर्ों से सहमत हो जाता
है, मामिे को बंर्द कर सकेगा या असहमनत की र्दशा में, स्वयं आगे कायवष ाही कर
सकेगा या मामिे को अनुशासननक सलमनत को ननठर्दषष्ट् कर सकेगा या मामिे का
और आगे अन्द्वेर्ण करने के लिए ननर्देशक (अनुशासन) को सिाह र्दे सकेगा ।
(7) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन अन्द्वेर्णों के प्रयोजनों के लिए,
अनुशासननक ननर्देशािय ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगा, जो ववननठर्दषष्ट् की जाए।
(8) अनुशासननक ननर्देशािय के पास फाइि की गई लशकायत ककसी भी
पररजस्थनत में वापस नहीं िी जाएगी ।
(9) अनुशासननक ननर्देशािय, अनुशासननक बोर्ों और अनुशासननक सलमनतयों
के समि िंत्रबत लशकायतों और अनुयोज्य सूचना की प्राजस्थनत और धारा 21क के
अधीन अनुशासननक बोर् ष तथा धारा 21ि के अधीन अनुशासननक सलमनत द्वारा
पाररत आर्देश, अनुशासननक ननर्देशािय द्वारा, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए,
िोक अधधकाररता में उपिब्ध कराई जाएगी ।”।
धारा 21क का 57. मूि अधधननयम की धारा 21क के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—
अनुशासन बोर् ष । “21क. (1) पररर्द् अधधसूचना द्वारा ननम्नलिखित से लमिकर बनने वाि े
एक या अधधक अनुशासन बोर्ों का गिन करेगी—
(क) कोई व्यजक्त जो संस्थान का सर्दस्य नहीं हो, जजसके पास ववधध
का अनुभव हो तथा अनुशासनात्मक मामिों का और ववृत्त का ज्ञान हो, ऐसी
रीनत में जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और प्रर्दत्त
व्यजक्तयों के पैनि से इसके पीिासीन अधधकारी के रूप में केन्द्रीय सरकार
द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ि) एक सर्दस्य जो ववधध, अथशष ास्त्र, कारबार, ववत्त या िेिांकन के
िेत्र में ख्यानतप्राप्त व्यजक्त हो, और संस्थान का सर्दस्य न हो, ऐसी रीनत में
जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और प्रर्दत्त व्यजक्तयों के
पैनि से केन्द्रीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ग) एक सर्दस्य जो ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा
तैयार ककए सर्दस्यों के पैनि से पररर्द् द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(घ) उप सधचव से अन्द्यून पंजक्त का, संस्थान का एक अधधकारी
अनुशासन बोर् ष के सधचव के रूप में काय ष करेगा :
परन्द्तु िंर् (क) के अधीन नामननठर्दषष्ट् पीिासीन अधधकारी तथा िंर् (ि) के
अधीन नामननठर्दषष्ट् सर्दस्य, इस उपधारा के अधीन गठित प्रत्येक अनुशासन बोर् ष के
लिए समान होगा ।
(2) अनुशासन बोर् ष उसके समि रिे गए मामिों पर ववचार करते समय
ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगा, जो ववननठर्दषष्ट् की जाए जजसके अन्द्तगषत फेसिेस
कायवष ाठहयां तथा आभासी सुनवाइयां भी हैं ।
(3) अनुशासन बोर्,ष ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक परीिा ररपो ष कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
690
प्राजप्त पर, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष से, जजसके ववरुद्ध ऐसी प्रारंलभक परीिा
ररपो ष फाइि की गई है, इक्कीस ठर्दन के भीतर लिखित कथन प्रस्तुत करने की
अपेिा करेगा, जजसे आपवाठर्दक पररजस्थनतयों में िेिबद्ध ककए जाने वािे कारणों
से इक्कीस ठर्दन के लिए और बढाया जा सकेगा ।
(4) अनुशासन बोर्,ष ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक जांच ररपो ष प्राप्त होने
के नब्बे ठर्दन के भीतर अपनी जांच पूरी करेगा ।
(5) जांच करने पर यठर्द अनशु ासन बोर् ष यह पाता है कक ऐसा सर्दस्य पहिी
अनुसूची में वखणतष व्यवसानयक या अन्द्य अवचार का र्दोर्ी है तो वह सर्दस्य को
ऐसे ननष्ट्कर् ष से तीस ठर्दन के भीतर सुने जाने का अवसर प्रर्दान करने के पश्चात ्
ननम्नलिखित कारषवाइयों में स े कोई एक या अधधक कारषवाई ककए जाने का आर्देश
पाररत कर सकेगा, अथाषत ् :—
(क) सर्दस्यों को धधग्र्दंडर्त और सर्दस्यों के रजजस् र में इस े
अलभलिखित करने का ;
(ि) सर्दस्य के नाम को सर्दस्यों के रजजस् र से छह मास की
कािावधध तक के लिए ह ाने का ;
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करने का, जो वह िीक समझे, जो र्दो
िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(6) जहां अलभिेि पर िाए गए साक्ष्य के आधार पर या ककसी सर्दस्य स े
संबंधधत जांच के अनुक्रम के र्दौरान, अनुशासन बोर् ष यह राय बनाता है कक ऐसा
कोई सर्दस्य, जो ककसी फम ष का भागीर्दार या स्वामी है, वपछिे पांच वर् ष के र्दौरान
पहिी अनुसूची के अधीन अवचार का िगातार र्दोर्ी पाया गया है तो ऐसी फम ष के
ववरुद्ध ननम्नलिखित कारषवाई भी की जा सकेगी, अथाषत ् :—
(क) एक वर् ष स े अनधधक ऐसी अवधध के लिए व्यवसायरत ककसी
कम्पनी सधचव की ववृत्त से संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप या कक्रयाकिापों को
करने से फम ष को प्रनतवर्द्ध करना, या
(ि) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना जो पच्चीस िाि रुपए तक हो
सकेगा ।
(7) जहां कोई सर्दस्य उपधारा (5) या उपधारा (6) के अधीन अधधरोवपत
जुमाषने को ऐसे समय के भीतर जो ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, संर्दाय करने में असफि
रहता है तो पररर्द् ऐसी अवधध के लिए, जो वह िीक समझे, यथाजस्थनत, सर्दस्यों
के रजजस् र या फमों के रजजस् र से ऐसे सर्दस्य या फम ष का नाम ह ा र्देगी ।
(8) पीिासीन अधधकारी और अनुशासन बोर् ष के सर्दस्यों को ऐसे भत्तों का
संर्दाय ककया जाएगा, जो ववठहत ककए जाएं ।”।
धारा 21ि का 58. मूि अधधननयम की धारा 21ि के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—
अनुशासननक “21ि. (1) पररर्द्, अधधसूचना द्वारा, एक या अधधक अनुशासननक
सलमनत । सलमनतयों का गिन करेगी, प्रत्येक सलमनत ननम्नलिखित से लमिकर बनेगी—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
691
(क) पररर्द् द्वारा, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, तैयार
ककए गए और उपिब्ध कराए गए व्यजक्तयों के पैनि में से, केंरीय
सरकार द्वारा उसके पीिासीन अधधकारी के रूप में नामननठर्दषष्ट् ककए
जाने वािा, ववधध का अनुभव रिने वािा ऐसा व्यजक्त, जो संस्थान का
सर्दस्य नहीं है और जजसके पास अनुशासननक ववर्यों और व्यवसाय का
ज्ञान हो ;
(ि) पररर्द् द्वारा, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, तैयार
ककए गए और उपिब्ध कराए गए व्यजक्तयों के पैनि में से, केंरीय
सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाने वाि े र्दो सर्दस्य, जो ऐसे ववख्यात
व्यजक्त हों, जजनके पास ववधध, अथशष ास्त्र, कारबार, ववत्त या िेिांकन के
िेत्र में अनुभव हो और जो सस्ं थान का सर्दस्य नहीं हैं ;
(ग) पररर्द् द्वारा, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, तैयार
ककए जाने वािे संस्थान के सर्दस्यों के पैनि में से पररर्द् द्वारा
नामननठर्दषष्ट् ककए जाने वािे र्दो सर्दस्य :
परंतु िंर् (क) के अधीन नामननठर्दषष्ट् पीिासीन अधधकारी और
िंर् (ि) के अधीन नामननठर्दषष्ट् सर्दस्य, इस उपधारा के अधीन गठित
लभन्द्न-लभन्द्न अनुशासननक बोर्ों के लिए समान हो सकेंगे ।
(2) अनुशासननक बोर्,ष उसके समि रिे गए मामिों पर ववचार करते समय,
ऐसी प्रकक्रया, जो ववननठर्दषष्ट् की जाएं जजसमें फेसिेस कायवष ाठहयां और वचुअष ि
सुनवाइयां भी हैं, का अनुसरण करेगा ।
(3) अनुशासननक सलमनत, ननर्देशक (अनुशासन) स े प्रारंलभक जांच ररपो ष
प्राप्त होने पर, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष से, जजसके ववरुद्ध ऐसी प्रारंलभक जांच
ररपो ष फाइि की गई है, से अपेिा करेगा कक वह इक्कीस ठर्दन के भीतर, लिखित
कथन प्रस्तुत करे, जजसे आपवाठर्दक पररजस्थनतयों में, ऐसे कारणों से, जो िेिबद्ध
ककए जाएं, अन्द्य इक्कीस ठर्दनों तक और बढाया जा सकेगा ।
(4) अनुशासननक सलमनत, ननर्देशक (अनुशासन) स े प्रारंलभक जांच ररपो ष
प्राप्त होने के एक सौ अस्सी ठर्दन के भीतर अपनी जांच समाप्त करेगी ।
(5) जांच करने पर यठर्द अनुशासननक सलमनत यह पाती है कक ऐसा कोई
सर्दस्य र्दसू री अनुसूची में या पहिी और र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में वखणतष ववृत्तक या
अन्द्य अवचार का र्दोर्ी है तो वह सर्दस्य को सुने जाने का अवसर प्रर्दान करने के
पश्चात,् ऐसे ननष्ट्कर् ष के तीस ठर्दन के भीतर, ननम्नलिखित कारषवाइयों में से कोई
एक या अधधक कारषवाइयां ककए जाने का आर्देश पाररत कर सकेगी, अथाषत ् :—
(क) सर्दस्यों को धधग्र्दंडर्त र्देने का और सर्दस्यों के रजजस् र में इसे
अलभलिखित करने ; या
(ि) सर्दस्य के नाम को, सर्दस्यों के रजजस् र में से, स्थायी रूप से
ह ाने या छह मास की कािावधध तक के लिए ह ाने, जैसा वह िीक समझे ;
याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
692
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करने, जो वह िीक समझे, जो र्दस िाि
रुपए तक का हो सकेगा ।
(6) जहां अलभिेि पर िाए गए साक्ष्य के आधार पर या ककसी सर्दस्य स े
संबंधधत जांच के र्दौरान, अनुशासननक सलमनत की यह राय बनती है कक ऐसा कोई
सर्दस्य, जो फम ष का भागीर्दार या स्वामी है, गत पांच वर्ों के र्दौरान र्दसू री अनुसूची
में या पहिी अनुसूची और र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में वखणतष अवचार का बारम्बार
र्दोर्ी पाया गया है, वहां ऐसी फम ष के ववरुद्ध ननम्नलिखित कारषवाई भी की जा
सकेगी, अथाषत ् :—
(क) र्दो वर् ष से अनधधक ऐसी अवधध के लिए व्यवसायरत िागत
िेिापाि के व्यवसाय स े सबं ंधधत ककसी कक्रयाकिाप या कक्रयाकिापों को
करने से फम ष को प्रनतवर्द्ध करना ; या
(ि) फम ष के रजजस्रीकरण को ननिंत्रबत करना या रद्र्द करना और
उसके नाम को फमों के रजजस् र से स्थायी रूप स े या ऐसी अवधध के लिए,
जो वह िीक समझे, ह ाना ; या
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना, जो वह िीक समझ,े जो पचास
िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(7) जहां कोई सर्दस्य या फम ष उपधारा (5) या उपधारा (6) के अधीन ऐसे
समय के भीतर, अधधरोवपत जुमाषने का संर्दाय करने में असफि रहता है या रहती
है, वहां पररर्द्, यथाजस्थनत, ऐसे सर्दस्य या फम ष का नाम, सर्दस्यों के रजजस् र या
फमों के रजजस् र से, ऐसी अवधध के लिए, जो वह िीक समझे, ह ाएगी ।
(8) अनुशासननक सलमनत के पीिासीन अधधकारी और सर्दस्यों को ऐसे भत्तों
का संर्दाय ककया जाएगा, जो ववठहत ककए जाएं ।”।
59. मूि अधधननयम की धारा 21ग में, स्पष्ट् ीकरण का िोप ककया जाएगा । धारा 21ग का
संशोधन ।
धारा 21घ का 60. मूि अधधननयम की धारा 21घ के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—
संक्रमणकािीन “21घ. चा षर् ष अकाउं ें , िागत और संकम ष िेिापाि तथा कंपनी सधचव
उपबंध ।
(संशोधन) अधधननयम, 2021 के आरंभ से पूव,ष अनुशासननक बोर् ष या अनुशासननक
सलमनत के समि िंत्रबत सभी लशकायतें या कोई जांच या अपीि प्राधधकारी अथवा
ककसी उच्च न्द्यायािय के समि फाइि कोई ननर्देश या अपीि, इस अधधननयम
के उपबंधों द्वारा उसी प्रकार शालसत होते रहेंगे, मानो इस अधधननयम का
चा षर् ष अकाउं ें , िागत और संकम ष िेिापाि तथा कंपनी सधचव (संशोधन)
अधधननयम, 2021 द्वारा संशोधन नहीं ककया गया हो ।”।
धारा 22 का 61. मूि अधधननयम की धारा 22 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
693
पररभावर्त ववृत्तक ‘22. इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए, “ववृत्तक या अन्द्य अवचार” पर्द के
या अन्द्य
अन्द्तगषत संस्थान के ककसी सर्दस्य की ओर से या तो अपनी व्यजक्तगत हैलसयत में
अवचार ।
या ककन्द्हीं अनुसूधचयों में यथाउजल्िखित फम ष के भागीर्दार या स्वामी के रूप में
कोई कृत्य या िोप भी सजम्मलित समझा जाएगा, ककन्द्तु इस धारा की ककसी बात
का अथाषन्द्वयन ककन्द्हीं अन्द्य पररजस्थनतयों के अधीन ऐसे सर्दस्य या फम ष के
आचरण की जांच करने के लिए धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन ननर्देशक
(अनुशासन) को प्रर्दत्त कोई शजक्त या अधधरोवपत कतव्ष य को सीलमत या न्द्यून करने
वािा नहीं होगा ।’।
धारा 22ङ का 62. मूि अधधननयम की धारा 22ङ में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में,—
(क) “संस्थान का कोई सर्दस्य” शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई फम”ष शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) “कोई शाजस्त उस पर” शब्र्दों के स्थान पर, “कोई शाजस्त ऐस े
सर्दस्य या फम ष पर” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) “धारा 21क की उपधारा (3) और धारा 21ि की उपधारा (3)”
शब्र्दों, अंकों, अिरों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “, यथाजस्थनत, धारा 21क
की उपधारा (5) या उपधारा (6) या धारा 21ि की उपधारा (5) या उपधारा
(6)” शब्र्द, अंक, अिर और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(घ) “उस े आर्देश ससं ूधचत ककया जाता है” शब्र्दों के स्थान पर, “ऐस े
सर्दस्य या फम ष को आर्देश ससं ूधचत ककया जाता है” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (2) में “धारा 21क की उपधारा (3) और धारा 21ि की
उपधारा (3)” शब्र्दों, अंकों, कोष्ट्िकों और अिरों के स्थान पर “यथाजस्थनत,
धारा 21क की उपधारा (5) या उपधारा (6) या धारा 21ि की उपधारा (5) या
उपधारा (6)” शब्र्द, अंक, कोष्ट्िक और अिर रिे जाएंगे ;
(iii) उपधारा (2) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा और स्पष्ट् ीकरण
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
‘(3) प्राधधकरण के ककसी आर्देश या काय ष या कायवष ाही को, प्राधधकरण
के, गिन में केवि मात्र ककसी त्रुठ के, या आकजस्मक ररजक्त होने या एक
अथवा र्दो सर्दस्यों की अनुपजस्थनत के आधार पर, ककसी भी रीनत में,
प्रश्नगत नहीं ककया जाएगा ।
स्पष्ट्टीकरर् 1—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(अ) “संस्थान का सर्दस्य” के अंतगतष ऐसा व्यजक्त सजम्मलित है,
जो अलभकधथत अवचार की तारीि को संस्थान का सर्दस्य था, यद्यवप
जांच के समय वह संस्थान का सर्दस्य नहीं रह गया है ;
(आ) संस्थान के पास रजजस्रीकृत “फम”ष ककसी ऐसे सर्दस्य के
अवचार के लिए भी र्दायी िहराई जाएगी, जो अलभकधथत अवचार की
तारीि को इसका भागीर्दार या स्वामी था, यद्यवप जांच के समय वहअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
694
ऐसा भागीर्दार या स्वामी नहीं रह गया है ।
स्पष्ट्टीकरर् 2—इस अध्याय के उपबंधों के अधीन की गई कोई
कारषवाई, केंरीय सरकार के ववभाग या राज्य सरकार या ककसी कानूनी
प्राधधकरण या ववननयामक ननकाय को, संस्थान के पास रजजस्रीकृत ककसी
सर्दस्य या फम ष के ववरुद्ध तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध के अधीन
कारषवाई करने से वजजतष नहीं करेगी ।’।
63. मूि अधधननयम की धारा 24 में,— धारा 24 का
संशोधन ।
(क) “एक हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “एक िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(ि) “पांच हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ।
64. मूि अधधननयम की धारा 25 की उपधारा (2) में,— धारा 25 का
संशोधन ।
(i) “जुमाषने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर,
“कारावास स,े जो छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषन े से, जो एक िाि रुपए
से कम का नहीं होगा, ककंतु जो पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा या र्दोनों से”
शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) “जो छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषने से, जो पाचं हजार रुपए तक
का हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर, “जो एक वर् ष तक का हो सकेगा या जुमाषने से,
जो र्दो िाि रुपए स े कम का नहीं होगा, ककंतु र्दस िाि रुपए तक का हो सकेगा”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
65. मूि अधधननयम की धारा 26 में, उपधारा (2) के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा 26 का
उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(2) यठर्द कोई कंपनी उपधारा (1) के अधीन उपबंधों का उल्िंघन करती है,
तो प्रत्येक ननर्देशक, प्रबंधक, सधचव और कोई अन्द्य ऐसा अधधकारी जो जानबुझकर
ऐसे उल्िंघन का पिकार है, पहिे र्दोर्लसद्धध पर, ऐसे जुमाषने से, र्दो िाि रुपए
से कम का नहीं होगा, ककंतु जो र्दस िाि रुपए तक का हो सकेगा और ककसी
पश्चातवती र्दोर्लसद्धध पर ऐसे जुमाषने स,े जो चार िाि रुपए से कम का नहीं
होगा, ककंतु जो बीस िाि रुपए तक का हो सकेगा, र्दंडर्त ककया जाएगा ।”।
धारा 27 का 66. मूि अधधननयम की धारा 27 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(क) “पांच हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “एक िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(ि) “एक िाि रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ग) “र्दस हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दो िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(घ) “र्दो िाि रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दस िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
695
धारा 29ि का 67. मूि अधधननयम की धारा 29ि के िंर् (ग) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर्
संशोधन । अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(घ) संस्थान या फमों के सर्दस्यों द्वारा ववलभन्द्न कानूनी और ववननयामक
अपेिाओं के अननुपािन के मामिों को, जो उसके द्वारा उनके पुनवविष ोकन के
र्दौरान ध्यान में आए हों, उनकी परीिा के लिए अनशु ासननक ननर्देशािय को
अग्रेवर्त करना ।”।
धारा 34 का 68. मूि अधधननयम की धारा 34 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—
समन्द्वय “34. चा षर् ष अकाउं ें अधधननयम, 1949 की धारा 9क के अधीन गठित 1949 का 38
सलमनत । समन्द्वय सलमनत, इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए समन्द्वय सलमनत समझी
जाएगी ।”।
धारा 38 का 69. मूि अधधननयम की धारा 38 की उपधारा (2) में, “रजजस् र” शब्र्द के स्थान
संशोधन । पर, “सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 38क का 70. मूि अधधननयम की धारा 38क की उपधारा (2) में, िर्ं (ग) और िंर् (घ) के
संशोधन । स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :—
“(ग) धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन कोई सूचना या लशकायत फाइि
करने के लिए प्ररूप, रीनत और फीस तथा इसकी उपधारा (2) के अधीन अनुयोज्य
या गैर-अनुयोज्य के रूप में लशकायत या सूचना का ववननश्चय करने की रीनत और
उपधारा (7) के अधीन अन्द्वेर्ण की प्रकक्रया ;
(घ) धारा 21क की, उपधारा (2) के अधीन अनुशासननक बोर् ष द्वारा मामिों
पर ववचार करते समय प्रकक्रया और उपधारा (7) के अधीन जुमाषने के संर्दाय के
लिए समय-सीमा ;
(घक) धारा 21ि की, उपधारा (2) के अधीन अनुशासननक सलमनत द्वारा
मामिों पर ववचार करते समय प्रकक्रया और उपधारा (7) के अधीन जुमाषने के
संर्दाय के लिए समय-सीमा ;”।
धारा 39 का 71. मूि अधधननयम की धारा 39 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) िंर् (ि), िंर् (च) और िंर् (झ) में, “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर,
“सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) िंर् (ज) और िंर् (ञ) का िोप ककया जाएगा ;
(iii) िंर् (त) में, “के सर्दस्य” शब्र्दों के स्थान पर, “के पास रजजस्रीकृत
सर्दस्य और फम”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(iv) िंर् (ध) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंग,े अथाषत ् :—
“(ध) वे पररजस्थनतयां, जजनके अधीन धारा 6 की उपधारा (3) के अधीन
व्यवसाय प्रमाणपत्र रद्र्द ककया जा सकेगा ;
(धक) धारा 15 की उपधारा (2) के िंर् (ङ) के अधीन व्यवसायअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
696
प्रमाणपत्र प्रर्दान करने या उसके लिए इंकार करने के लिए मागर्दष शी
लसद्धांत ;
(धि) धारा 16 की उपधारा (2) के िंर् (ग) के अधीन पररर्द् के
सधचव और अन्द्य अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों की ननयुजक्त की रीनत,
शजक्तयां, कतव्ष य, कृत्य, वेतन, फीस, भत्ते तथा सेवा के अन्द्य ननबंधन और
शतें ;
(धग) धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन वावर्कष ववत्तीय वववरण और
उपधारा (5) के अधीन वावर्कष िेिा तैयार करने की रीनत ;
(धघ) धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन संस्थान के सर्दस्यों के
रजजस् र को बनाए रिने की रीनत ;
(धङ) धारा 20क के अधीन फम ष का रजजस्रीकरण प्रर्दान करने के लिए
आवेर्दन करने की रीनत और ऐसे रजजस्रीकरण के लिए ननबंधन और शतें ;
(धच) धारा 20ि की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन फम ष के
रजजस् र और अन्द्य ववलशजष्ट् यों, जजसमें फम ष के ववरुद्ध िंत्रबत लशकायतों या
अनुयोज्य सूचनाओं या ककसी शाजस्त के अधधरोपण के ब्यौरे भी हैं, के रि-
रिाव की रीनत, और वह रीनत, जजसमें उपधारा (3) के अधीन संस्थान के
पास रजजस्रीकृत फमों की वावर्कष सूची प्रकालशत की जाएगी ;
(धछ) धारा 21 की उपधारा (9) के अधीन अनुयोज्य सूचना तथा
लशकायतों और पाररत आर्देशों की प्राजस्थनत उपिब्ध कराने की रीनत ;
(धज) धारा 21क की उपधारा (1) के िंर् (क), िंर् (ि) और िंर् (ग)
के अधीन व्यजक्तयों का पैनि तैयार करने की रीनत और उपधारा (8) के
अधीन अनुशासननक सलमनतयों के पीिासीन अधधकाररयों और सर्दस्यों को
संर्देय भत्ते ;
(धझ) धारा 21क की उपधारा (8) के अधीन अनुशासननक बोर् ष के तथा
धारा 21ि की उपधारा (4) के अधीन अनुशासननक सलमनत के पीिासीन
अधधकारी और सर्दस्यों को संर्देय भत्ते ;
(धञ) धारा 22घ की उपधारा (2) के अधीन प्राधधकरण के अधधकाररयों
और अन्द्य कमषचाररवन्द्ृ र्द के वेतन, भत्ते और सेवा की शतें ;
(ध ) वह रीनत जजसमें धारा 23 की उपधारा (2) के अधीन िेत्रीय
पररर्द् का गिन ककया जा सकेगा और उसके कृत्य ।”।
पहिी अनुसूची 72. मूि अधधननयम की पहिी अनुसूची के शीर्कष में, “धारा 21(3), धारा 21क(3)”
का संशोधन ।
शब्र्दों, अंकों, कोष्ट्िकों और अिर के स्थान पर, “धारा 21(6), धारा 21क(5) और (6),
धारा 21ि(5) और (6)” शब्र्द, अंक, कोष्ट्िक और अिर रिे जाएंगे ।
र्दसू री अनुसूची 73. मूि अधधननयम की र्दसू री अनुसूची में,—
का संशोधन ।
(i) “धारा 21(3), धारा 21ि(3)” शब्र्दों, अंकों, कोष्ट्िकों और अिर के स्थान
पर, “धारा 21(6), धारा 21ि(5) और (6)” शब्र्द, अंक, कोष्ट्िक और अिर रिेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
697
जाएंगे ;
(ii) भाग 1 की मर्द (3) में, “जजससे यह ववश्वास हो जाए कक वह” शब्र्दों के
स्थान पर, “जजसस े यह ववश्वास हो जाए कक वह या उसकी फमष” शब्र्द रि े
जाएंगे ।
अध्याय 4
कंपिी सधिव अधिनियम, 1980 का संिोिि
धारा 2 का 74. कंपनी सधचव अधधननयम, 1980 (जजसे इस अध्याय में इसके पश्चात ् मूि 1980 का 56
संशोधन ।
अधधननयम कहा गया है) की धारा 2 में,—
(क) उपधारा (1) में,—
(i) िंर् (ककक) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
‘(कि) “अनुशासन बोर्”ष से धारा 21क की उपधारा (1) के अधीन
गठित अनुशासन बोर् ष अलभप्रेत है;’;
(ii) िंर् (ि) में “कंपनी अधधननयम, 1956” शब्र्दों और अंकों के स्थान 1956 का 1
पर, “कंपनी अधधननयम, 2013 या उक्त अधधननयम की धारा 2 की 2013 का 18
उपधारा (67) में यथा पररभावर्त कोई अन्द्य पूव ष कंपनी ववधध” शब्र्द, अकं
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(iii) िंर् (घ) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत:्—
‘(घक) “ननर्देशक (अनुशासन)” से धारा 21 में ननठर्दषष्ट् ननर्देशक
(अनुशासन) अलभप्रेत है और उसमें संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन) भी
सजम्मलित है ;
(घि) “अनुशासननक सलमनत” स े धारा 21ि की उपधारा (1) के
अधीन गठित अनुशासननक सलमनत अलभप्रेत है ;
(घग) “अनुशासननक ननर्देशािय” से धारा 21 की उपधारा (1) के
अधीन स्थावपत अनुशासननक ननर्देशािय अलभप्रेत है ;’;
(iv) िंर् (छक) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंग,े
अथाषत ् :—
‘(छक) “अधधसूचना” से राजपत्र में प्रकालशत अधधसूचना अलभप्रेत
है और “अधधसूधचत” पर्द का तर्दनुसार अथ ष िगाया जाएगा ;’;
(v) िंर् (ञ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(ञ) “रजजस् र” से, यथाजस्थनत, धारा 19 के अधीन बनाए रिा
गया संस्थान के सर्दस्यों का रजजस् र या धारा 20ि के अधीन बनाए
रिा गया संस्थान की फमों का रजजस् र अलभप्रेत है ;’;
(vi) िंर् (ञक) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
698
‘(ञकक) “स्थायी सलमनत” से धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन
गठित स्थायी सलमनत अलभप्रेत है ;’;
(ि) उपधारा (2) के िंर् (ग) के उपिंर् (vi) में,—
1947 का 29 (अ) “पूंजी ननगमष न (ननयंत्रण) अधधननयम, 1947” शब्र्दों, कोष्ट्िकों और
अंकों का िोप ककया जाएगा ;
(आ) “एकाधधकार तथा अवरोधक व्यापाररक व्यवहार अधधननयम,
1969 का 54 1969, ववर्देशी मुरा ववननयमन अधधननयम, 1973” शब्र्दों और अंकों के स्थान
1973 का 46 पर, “भारतीय प्रनतभूनत ववननयम बोर् ष अधधननयम, 1992, ववर्देशी मुरा प्रबंध
1992 का 15
अधधननयम, 1999, प्रनतस्पधाष अधधननयम, 2002” शब्र्द और अंक रि े
1999 का 42
जाएंगे ।
2003 का 12
75. मूि अधधननयम की धारा 4 में,— धारा 4 का
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, जहां-जहां वह आता है, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) ठहर्दं ी पाि में संशोधन की आवश्यकता नहीं है ;
(iii) उपधारा (3) में,—
(क) “जो तीन हजार रुपए से अधधक की नहीं होगी” शब्र्दों का िोप
ककया जाएगा ;
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
76. मूि अधधननयम की धारा 5 में,— धारा 5 का
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, जहां-जहां वह आता है, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (3) में, “जो पाचं हजार रुपए से अधधक नहीं होगी” शब्र्दों का
िोप ककया जाएगा ;
(iii) परन्द्तुक का िोप ककया जाएगा ।
77. मूि अधधननयम की धारा 6 की उपधारा (2) में,— धारा 6 का
संशोधन ।
(i) “जो तीन हजार रुपए स े अधधक की नहीं होगी” शब्र्दों का िोप ककया
जाएगा ;
(ii) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
धारा 8 का 78. मूि अधधननयम की धारा 8 में,—
संशोधन ।
(i) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, जहां-जहां वह आता है, “सर्दस्यों का
रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) िंर् (ग) में, “अननुमोधचत ठर्दवालिया” शब्र्दों के पश्चात,् “या अननुमोधचत
शोधन अिम” शब्र्द अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(iii) िंर् (ग) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
699
“(गक) ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 के उपबंधों के 2016 का 31
अधीन शोधन अिम घोवर्त ककया गया है ;”;
(iv) िंर् (ङ) में संशोधन आवश्यक नहीं है ।
धारा 9 का 79. मूि अधधननयम की धारा 9 में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (2) में,—
(क) “रजजस् र” शब्र्द के स्थान पर, र्दोनों स्थान पर, जहां वह आता है,
“सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) “तीन वर्”ष शब्र्दों के स्थान पर, “चार वर्”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) “छह वर्”ष शब्र्दों के स्थान पर, “आि वर्”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (4) में,—
(क) “व्यजक्त” शब्र्द के स्थान पर, “संस्थान का सर्दस्य या फम ष का
कोई भागीर्दार” शब्र्द रिे जाएगं े ;
(ि) “तीन वर्”ष शब्र्दों के स्थान पर, “चार वर्”ष शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 12 का 80. मूि अधधननयम की धारा 12 में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में, पहिे परंतुक का िोप ककया जाएगा ;
(ii) उपधारा (2) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधाराएं अत:स्थावपत की जाएंगी,
अथाषत ् :—
“(2क) अध्यि पररर्द् की बैिकों की अध्यिता करेगा ।
(2ि) अध्यि और उपाध्यि ऐसी शजक्तयों का प्रयोग और ऐसे कतव्ष यों
तथा कृत्यों का पािन करेंगे, जो ववठहत ककए जाएं ।
(2ग) अध्यि का यह कतव्ष य होगा कक वह यह सुननजश्चत करे कक
पररर्द् द्वारा ककए गए ववननश्चय कायाषजन्द्वत ककए जाते हैं ।”।
धारा 13 का 81. मूि अधधननयम की धारा 13 की उपधारा (2) में “रजजस् र” शब्र्द के स्थान
संशोधन ।
पर, “सर्दस्यों का रजजस् र” शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 15 का 82. मूि अधधननयम की धारा 15 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) िंर् (ग) में, ‘‘रजजस् र’’ शब् र्द के स् थान पर, ‘‘सर्दस् यों के रजजस् र’’ शब्र्द
रिे जाएंगे ;
(ii) िंर् (ङ) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘(ङक) फमष के रजजस् रीकरण को अनुर्दत्त करना या अस् वीकृत करना ;’’;
(iii) िंर् (ञ) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककए जाएंग,े
‘‘(ञक) इस अधधननयम के उद्र्देश्यों के कायाषन्द्वयन के प्रयोजन के लिए
मागर्दष शी लसद्धांत जारी करना ;
(ञि) ववननधानकत्ताष लशिा और जागरूकता कायक्रष म संचालित करना;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
700
(ञग) इस अधधननयम के अधीन इसके कृत्यों के पािन के प्रयोजन के
लिए, केन्द्रीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन स े ककसी अन्द्य बाहरी र्देश के ककसी
अलभकरण के साथ कोई ज्ञापन या िहराव करना ।’’।
83. मूि अधधननयम की धारा 15क में,— धारा 15क का
संशोधन ।
(i) िंर् (ग) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘(गक) फमों के रजजस् र का अनुरिण और प्रकाशन ;’’;
(ii) िंर् (ङ) में, ‘‘रजजस् र से नामों को ह ाया जाना और रजजस् र में ऐस े
नामों का प्रत्यावतनष ’’ शब् र्दों के स् थान पर, ‘‘सर्दस् यों और फमों के रजजस् र से नामों
को ह ाया जाना और सर्दस्यों और फमो के रजजस् र में ऐसे नामों का प्रत्यावतनष ’’
शब् र्द रिे जाएंगे ।
84. मूि अधधननयम की धारा 16 में,— धारा 16 का
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) के स् थान पर ननम् नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
‘‘(1) पररर्द् अपने कतव्ष यों के र्दितापूण ष पािन के लिए—
(क) एक सधचव की ननयुजक् त करेगी जो संस् थान के मुख् य
कायकष ारी अधधकारी के रूप में प्रशासननक कृत् यों का भी कायाषन्द्व यन
करेगा;
(ि) इस अधधननयम और उसके अधीन ववरधचत ननयमों और
ववननयमों के अधीन उन्द्ह ें समनुर्देलशत ऐसे कृत् यों के पािन के लिए
संस्थान के एक ननर्देशक (अनुशासन) और उप सधचव स े अन्द् यून पंजक्त
वािे संयुक् त ननर्देशकों (अनुशासन) को ननयुक् त करेगी :
परन्द्तु सधचव या ननर्देशक (अनुशासन) या संयुक्त ननर्देशक (अनुशासन)
की ननयुजक्त या पुनननयष ुजक्त या ननयुजक्त की समाजप्त नहीं की जाएगी यठर्द
ऐसी ननयुजक्त, पुनननषयुजक्त या ननयुजक्त की समाजप्त केन्द्रीय सरकार के पूव ष
अनुमोर्दन से नहीं की जाती है ।’’;
(ii) उपधारा (2) में िंर् (ग) के स् थान पर ननम् नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘(ग) सधचव और अन्द्य अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों की ननयुजक्त की
रीनत, शजक् तयां, कतव्ष य और कृत् य, उनके वेतन, फीस, भत्ते और सेवा के
अन्द्य ननबंधन और शतें ववठहत कर सकेगी ;’’।
धारा 18 का 85. मूि अधधननयम की धारा 18 की उपधारा (5) के स्थान पर ननम्नलिखित
संशोधन । उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
‘‘(5) पररर्द् के वावर्कष िेिे ऐसी रीनत में तैयार ककए जाएंगे जो ववठहत की
जाए तथा भारत के ननयंत्रक महािेिापरीिक द्वारा अनुरक्षित संपरीिकों के पैनि
से पररर्द् द्वारा वावर्कष रूप से ननयुक्त की जाने वािी चा षर् ष अकाउन्द् ें ों की फम ष
द्वारा संपरीिा के अधीन होंगे :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
701
परन्द्तु इस उपधारा के अधीन संपरीिक के रूप में ननयुजक्त के लिए कोई
फम ष पात्र नहीं होगी यठर्द इसका कोई भागीर्दार वपछिे चार वर्ों के र्दौरान पररर्द्
का सर्दस्य हो या रहा हो :
परन्द्तु यह और कक यठर्द पररर्द् की जानकारी में यह िाया जाता है कक
पररर्द् के िेि े इसके ववत्त का सत्य और ऋजु दृश्य प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो
पररर्द् स्वयं ही एक ववशेर् संपरीिा करवाएगी :
परन्द्तु यह भी कक यठर्द ऐसी सूचना, पररर्द् के िेिे इसके ववत्त का सत्य
और ऋजु दृश्य प्रस्तुत नहीं करते हैं, केन्द्रीय सरकार द्वारा पररर्द् को भेजी जाती
है, तो पररर्द्, जहां-कहीं उधचत हो, ववशेर् संपरीिा करवाएगी या ऐसी अन्द्य
कारषवाई करेगी जो वह आवश्यक समझे तथा इस पर की गई कारषवाई की ररपो ष
केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगी ।’’ ।
धारा 19 का 86. मूि अधधननयम की धारा 19 में,—
संशोधन ।
(i) ‘‘रजजस् र’’ शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है, ‘‘सर्दस् यों के
रजजस् र’’ शब् र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1) के स् थान पर ननम् नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
‘‘(1) पररर्द्, संस् थान के सर्दस् यों का रजजस् र ऐसी रीनत में रिेगी, जो
ववठहत की जाए ।’’;
(iii) उपधारा (2) में, िंर् (ग) के पश् चात ् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘‘(गक) क् या अध् याय 5 के अधीन उसके ववरुद्ध कोई कारषवाई योग्य
सूचना या पररवार्द िंत्रबत है या कोई शाजस् त अधधरोवपत की गई है, जजसके
अंतगतष उसके ब् यौरे भी हैं, यठर्द कोई हों ;’’;
(iv) उपधारा (4) में,—
(क) ‘‘जो पांच हजार रुपए स े अधधक नहीं होगी’’, शब्र्दों का िोप ककया
जाएगा ;
(ि) परन्द्तुक का िोप ककया जाएगा ।
धारा 20 का 87. मूि अधधननयम की धारा 20 में,—
संशोधन ।
(i) ‘‘रजजस् र’’ शब् र्द के स् थान पर, जहां-कहीं वह आता है, ‘‘सर्दस् यों के
रजजस् र’’ शब् र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (3) में,—
(क) जो ‘‘र्दो हजार रुपए से अधधक नहीं होगा’’, शब् र्दों का िोप ककया
जाएगा ;
(ि) परन्द्तुक का िोप ककया जाएगा ।
88. मूि अधधननयम के अध् याय 4 के पश् चात,् ननम् नलिखित अध् याय अंत:स् थावपत नए अध् याय 4कअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
702
ककया जाएगा, अथाषत ् :— का अंत:स् थापन ।
‘‘अध् याय 4क
फमों का रश्जस् रीकरर् और रश्जस् टर
20क. प्रत्य ेक फम,ष फम ष के ककसी भागीर्दार या स् वामी द्वारा ऐसी रीनत में, फमों का
रजजस् रीकरण ।
और ऐसे ननबंधनों और शतों के अधीन रहते हुए जो ववठहत की जाएं, पररर्द् को
ककए गए आवेर्दन पर संस् थान के पास रजजस् रीकृत करेगी :
परन्द्तु पररर्द् ककसी फम ष को रजजस् र करने स े इंकार कर सकेगी यठर्द ऐसी
फम ष का नाम पहिे से ही रजजस्रीकृत ककसी अन्द्य फम ष के नाम जैसा ही या समान
है या भारत के भीतर या बाहर ककसी फम ष द्वारा नाम उपयोग में है अथवा पररर्द्
की राय में फम ष का रजजस्रीकरण अवांछनीय है ।
20ि (1) पररर्द्, ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए, फमों का रजजस् र फमों का
रजजस् र ।
रिेगी ।
(2) फमों के रजजस् र में फम ष के बारे में ऐसी ववलशजष्ट् यां, जजसके अन्द्तगतष
अध्याय 5 के अधीन अनुयोज्य सूचना या पररवार्द या इसके ववरुद्ध ककसी शाजस्त
के अधधरोपण के ब्यौरे भी हैं, ऐसे प्ररूप में और ऐसे अंतरािों पर होंगी, जो ववठहत
ककए जाएं ।
(3) पररर्द्, प्रत्येक वर् ष के 1 अप्रैि को या ऐस े अंतरािों पर जो पररर्द्
द्वारा ववननजश्चत ककए जाएं, संस्थान में रजजस्रीकृत फमों की एक सूची, ऐसी रीनत
में जो ववठहत की जाए, प्रकालशत करवाएगी, और ऐस े प्ररूप में और ऐसी रकम के
संर्दाय पर जो ववठहत की जाए ऐसे व्यजक्तयों को सूची उपिब्ध करवाएगी ।
20ग. पररर्द्, फमों के रजजस् र से ककसी फम ष का नाम ह ाएगी,— फमों के
रजजस् र से
(क) जजसका ववघ न या पररसमापन हो गया है ; या
ननकािा जाना ।
(ि) जजससे उस आशय का अनुरोध प्राप् त हुआ है ; या
(ग) जजसे ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 के अधीन
ठर्दवालिया और शोधन अिम घोवर्त ककया गया है तथा जो अननुमोधचत
रहती है ; या
(घ) जजसे तत् समय प्रवत्तृ ककसी ववधध के अधीन या ककसी सिम
न्द्य ायािय द्वारा व् यवसायरत कंपनी सधचव की ववृत्त स े संबंधधत ककसी
कक्रयाकिाप या कक्रयाकिापों को करने से वजजतष ककया है; या
(ङ) जजसके संबंध में इस अधधननयम के अधीन ह ाए जाने का आर्देश
पाररत ककया गया है ।
20घ. (1) रजजस् रीकरण को अस् वीकृत करने के ववननश् चय से व् यधथत कोई पररर्द् के समि
पुनवविष ोकन ।
फम,ष ऐसे अस् वीकार करने की तारीि स े एक मास के भीतर पररर्द् के समि
पुनवविष ोकन के लिए आवेर्दन कर सकेगी ।
(2) पररर्द्, पुनवविष ोकन आवेर्दन पर ववचार करने के पश् चात ् इस प्रकार ककए
गए ववननश् चय की पुजष्ट् कर सकेगी या अपास् त कर सकेगी या ऐसा आर्देश पाररत
कर सकेगी, जो वह उधचत समझे ।’’।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
703
धारा 21 का 89. मूि अधधननयम की धारा 21 के स् थान पर ननम् नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस् थापन । अथाषत ् :—
अनुशासननक ‘‘21. (1) पररर्द्, अधधसूचना द्वारा, स्वप्रेरणा से या ऐस े प्ररूप में ऐसे फीस
ननर्देशािय ।
के साथ जो ववठहत की जाए, ककसी सूचना या लशकायत की प्राजप्त पर अन्द्वेर्ण
करने के लिए संस्थान के ननर्देशक (अनुशासन), कम स े कम र्दो संयुक् त ननर्देशकों
(अनुशासन) जो संस्थान के उप सधचव की पंजक्त के नीचे के न हों और धारा 16
के अधीन ननयुक्त ऐसे अन्द् य कमचष ाररयों से लमिकर बने अनुशासननक ननर्देशािय
की स्थापना करेगी ।
(2) ककसी सूचना या पररवार्द की प्राजप्त के तीस ठर्दन के भीतर, ननर्देशक
(अनुशासन) चाहे पररवार्द या सूचना अनयु ोज्य है या गैर-अनुयोज्य के रूप में बन्द्र्द
ककए जाने के लिए र्दायी है, ऐसी रीनत में ववननश्चय करेगा जो ववननठर्दषष्ट् की
जाए :
परंतु ननर्देशक (अनुशासन), यथाजस्थनत, पररवार्दी या सूचनाकताष से ववननश्चय
करने के पूव ष पंरह ठर्दन का समय र्देकर कक क्या मामिा अनुयोज्य है या गैर-
अनुयोज्य है, अनतररक्त सूचना मांग सकेगा :
परन्द्तु यह और कक अनुयोज्य पररवार्द या सूचना पर ननर्देशक (अनुशासन) की
लसफाररशें इसकी प्राजप्त के साि ठर्दन के भीतर अनुशासन बोर् ष को प्रस्तुत की
जाएगी और अनुशासन बोर् ष इसके गुणागुण को र्देिने के पश्चात ् ऐसे पररवार्द या
सूचना को और अन्द्वेर्ण करने के लिए ननर्देशक (अनुशासन) को ननठर्दषष्ट् करेगा ।
(3) ककसी मामिे में अन्द्वेर्ण करते समय, जो अनुयोज्य पाया जाता है,
ननर्देशक (अनुशासन) यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष को इक्कीस ठर्दन के भीतर
लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर प्रर्दान करेगा, उसके लिए कारण िेिबद्ध
करत े हुए अनतररक्त इक्कीस ठर्दन के लिए ववस्ताररत ककया जा सकेगा ।
(4) उपधारा (3) के अधीन लिखित कथन की प्राजप्त पर, यठर्द कोई हो,
ननर्देशक (अनुशासन) उसकी एक प्रनत लशकायतकताष या सूचनाकताष को भेजेगा तथा,
यथाजस्थनत, लशकायतकताष या सूचनाकताष ऐसे लिखित कथन की प्राजप्त के इक्कीस
ठर्दन के भीतर प्रत्युत्तर प्रस्तुत करेगा ।
(5) उपधारा (3) के अधीन लिखित कथन तथा उपधारा (4) के अधीन
प्रत्युत्तर की प्राजप्त पर ननर्देशक (अनुशासन), यठर्द यथाजस्थनत, ककसी सर्दस्य या
फम ष के ववरुद्ध प्रथमदृष्ट्ट्या मामिा बनता है तो तीस ठर्दन के भीतर प्रारजम्भक
जांच ररपो ष प्रस्तुत करेगा ।
(6) पहिी अनुसूची में उजल्िखित ककसी व्यवसानयक या अन्द्य अवचार का
यठर्द प्रथमदृष्ट् या मामिा बनता है तो ननर्देशक (अनुशासन), ननर्देशक बोर् ष को एक
आरंलभक जांच ररपो ष प्रस्तुत करेगा तथा जहां र्दसू री अनुसूची में या पहिी और
र्दसू री अनुसूची, र्दोनों में, उजल्िखित व्यवसानयक या अन्द्य अवचार का प्रथमदृष्ट् या
मामिा बनता है तो वह एक प्रारंलभक जांच ररपो ष अनुशासननक सलमनत को प्रस्तुत
करेगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
704
परंतु केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के ककसी प्राधधकृत अधधकारी या
ककसी कानूनी प्राधधकारी द्वारा समथनष कारी साक्ष्य के साथ जांच ररपो ष या जांच
ररपो ष का सुसंगत सार द्वारा समधथतष ककसी लशकायत या सूचना को फाइि ककए
जाने पर उसे प्रारंलभक जांच ररपो ष समझा जाएगा :
परंतु यह और कक, जहां सर्दस्य या फम ष के ववरुद्ध प्रथमदृष्ट्ट्या मामिा नहीं
बनता, ननर्देशक (अनुशासन) सुसंगत र्दस्तावेजों के साथ ऐसी सूचना या पररवार्द को
अनुशासन बोर् ष को प्रस्तुत करेगा और अनुशासन बोर्,ष यठर्द वह ननर्देशक
(अनुशासन) के ननष्ट्कर्ों से सहमत है, मामिे को बन्द्र्द कर र्देगा या असहमनत की
जस्थनत में, स्वयं आगे कायवष ाही करेगा या मामिे को अनुशासननक सलमनत को
ननठर्दषष्ट् करेगा अथवा ननर्देशक (अनुशासन) को मामिे का और अन्द्वेर्ण करने की
सिाह र्देगा ।
(7) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन अन्द्वेर्णों के प्रयोजनों के लिए,
अनुशासनात्मक ननर्देशािय ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगा जो ववननठर्दषष्ट् की
जाए ।
(8) अनुशासनात्मक ननर्देशािय के समि फाइि ककया गया पररवार्द ककन्द्हीं
भी पररजस्थनतयों में वापस नहीं लिया जाएगा ।
(9) अनुशासनात्मक ननर्देशािय, अनुशासन बोर् ष और अनुशासननक सलमनतयों
के साथ िंत्रबत कारषवाई योग्य सूचना और पररवार्दों की प्राजस्थनत तथा धारा 21क
के अधीन अनुशासन बोर् ष द्वारा तथा धारा 21ि के अधीन अनुशासननक सलमनतयों
द्वारा पाररत आर्देश, ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए अनुशासनात्मक ननर्देशािय
द्वारा पजब्िक र्ोमेन में उपिब्ध करवाए जाएंगे ।”।
90. मूि अधधननयम की धारा 21क के स्थान पर ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 21क का
अथाषत ् :— प्रनतस्थापन ।
“21क. (1) पररर्द् अधधसूचना द्वारा ननम्नलिखित से लमिकर बनने वाि े अनुशासन बोर् ष ।
एक या अधधक अनुशासन बोर्ों का गिन करेगी—
(क) कोई व्यजक्त जो संस्थान का सर्दस्य नहीं हो, जजसके पास ववधध
का अनुभव हो तथा अनुशासनात्मक मामिों का और ववृत्त का ज्ञान हो, ऐसी
रीनत में जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और प्रर्दत्त
व्यजक्तयों के पैनि से इसके पीिासीन अधधकारी के रूप में केन्द्रीय सरकार
द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ि) एक सर्दस्य जो ववधध, अथशष ास्त्र, कारबार, ववत्त या िेिांकन के
िेत्र में ख्यानतप्राप्त व्यजक्त हो, और संस्थान का सर्दस्य न हो, ऐसी रीनत में
जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और प्रर्दत्त व्यजक्तयों के
पैनि से केन्द्रीय सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(ग) एक सर्दस्य जो ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा
तैयार ककए सर्दस्यों के पैनि से पररर्द् द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(घ) उप सधचव से अन्द्यून पंजक्त का, संस्थान का एक अधधकारीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
705
अनुशासन बोर् ष के सधचव के रूप में काय ष करेगा :
परन्द्तु िंर् (क) के अधीन नामननठर्दषष्ट् पीिासीन अधधकारी तथा िंर् (ि) के
अधीन नामननठर्दषष्ट् सर्दस्य, इस उपधारा के अधीन गठित प्रत्येक अनुशासन बोर् ष के
लिए समान होगा ।
(2) अनुशासन बोर् ष उसके समि रिे गए मामिों पर ववचार करते समय
ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगा, जो ववननठर्दषष्ट् की जाए जजसके अन्द्तगषत फेस
िेस कायवष ाठहयां तथा आभासी सुनवाईयां भी हैं ।
(3) अनुशासन बोर्,ष ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक परीिा ररपो ष की
प्राजप्त पर, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष से, जजसके ववरुद्ध ऐसी प्रारंलभक परीिा
ररपो ष फाइि की गई है, इक्कीस ठर्दन के भीतर लिखित कथन प्रस्तुत करने की
अपेिा करेगा, जजसे आपवाठर्दक पररजस्थनतयों में िेिबद्ध ककए जाने वािे कारणों
से इक्कीस ठर्दन के लिए और बढाया जा सकेगा ।
(4) अनुशासन बोर्,ष ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक जांच ररपो ष प्राप्त होने
के नब्बे ठर्दन के भीतर अपनी जांच पूरी करेगा ।
(5) जांच करने पर यठर्द अनशु ासन बोर् ष यह पाता है कक ऐसा सर्दस्य पहिी
अनुसूची में वखणतष व्यवसानयक या अन्द्य अवचार का र्दोर्ी है तो वह सर्दस्य को
ऐसे ननष्ट्कर् ष से तीस ठर्दन के भीतर सुने जाने का अवसर प्रर्दान करने के पश्चात ्
ननम्नलिखित कारषवाईयों में स े कोई एक या अधधक कारषवाई ककए जाने का आर्देश
पाररत कर सकेगा, अथाषत ् :—
(क) सर्दस्यों को धधग्र्दंडर्त और सर्दस्यों के रजजस् र में इस े
अलभलिखित करने का ;
(ि) सर्दस्य के नाम को सर्दस्यों के रजजस् र से छह मास की
कािावधध तक के लिए ह ाने का ;
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करने का, जो वह िीक समझे, जो र्दो
िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(6) जहां अलभिेि पर िाए गए साक्ष्य के आधार पर या ककसी सर्दस्य स े
संबंधधत जांच के अनुक्रम के र्दौरान, अनुशासन बोर् ष यह राय बनाता है कक ऐसा
कोई सर्दस्य, जो ककसी फम ष का भागीर्दार या स्वामी है, वपछिे पांच वर् ष के र्दौरान
पहिी अनुसूची के अधीन अवचार का िगातार र्दोर्ी पाया गया है तो ऐसी फम ष के
ववरुद्ध ननम्नलिखित कारषवाई भी की जा सकेगी, अथाषत ् :—
(क) एक वर् ष स े अनधधक ऐसी अवधध के लिए व्यवसायरत ककसी
कम्पनी सधचव की ववृत्त से संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप या कक्रयाकिापों को
करने से फम ष को प्रनतवर्द्ध करना, या
(ि) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना जो पच्चीस िाि रुपए तक हो
सकेगा ।
(7) जहां कोई सर्दस्य उपधारा (5) या उपधारा (6) के अधीन अधधरोवपत
जुमाषने को ऐसे समय के भीतर जो ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, संर्दाय करने में असफिअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
706
रहता है तो पररर्द् ऐसी अवधध के लिए, जो वह िीक समझे, यथाजस्थनत, सर्दस्यों
के रजजस् र या फमों के रजजस् र से ऐसे सर्दस्य या फम ष का नाम ह ा र्देगी ।
(8) पीिासीन अधधकारी और अनुशासन बोर् ष के सर्दस्यों को ऐसे भत्तों का
संर्दाय ककया जाएगा, जो ववठहत ककए जाएं ।”।
91. मूि अधधननयम की धारा 21ि के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 21ि का
अथाषत ् :— संशोधन ।
“21ि. (1) पररर्द्, अधधसूचना द्वारा, एक या अधधक अनुशासन सलमनतयों अनुशासननक
का गिन करेगी, जजनमें से प्रत्येक ननम्नलिखित से लमिकर बनेगी— सलमनत ।
(क) कोई व्यजक्त जो संस्थान का सर्दस्य नहीं हो, जजसके पास ववधध
का अनुभव हो तथा अनुशासनात्मक मामिों का और ववृत्त का ज्ञान हो, ऐसी
रीनत में जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा तैयार ककए गए और प्रर्दत्त
व्यजक्तयों के पैनि स े इसके पीिासीन अधधकारी के रूप में नामननठर्दषष्ट् ककया
जाए ;
(ि) र्दो सर्दस्य जो अथशष ास्त्र, कारबार, ववत्त या िेिांकन के िेत्र में
ख्यानतप्राप्त व्यजक्त हों और जो संस्थान का सर्दस्य नहीं है पररर्द् द्वारा
तैयार ककए गए और उपिब्ध कराए गए व्यजक्तयों के पैनि से केन्द्रीय
सरकार द्वारा ऐसी रीनत में जो ववठहत की जाए नामननठर्दषष्ट् ककए जाएं ;
(ग) र्दो सर्दस्य जो ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, पररर्द् द्वारा
तैयार ककए गए सर्दस्यों के पनै ि से पररर्द् द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाएं :
परन्द्तु िंर् (क) के अधीन नामननठर्दषष्ट् पीिासीन अधधकारी तथा िंर्
(ि) के अधीन नामननठर्दषष्ट् सर्दस्य, इस उपधारा के अधीन गठित प्रत्येक
अनुशासन सलमनत के लिए एक समान होंगे ।
(2) अनुशासननक सलमनत, उसके समि रिे गए मामिों पर ववचार करते
समय ऐसी प्रकक्रया का अनुसरण करेगी, जो ववननठर्दषष्ट् की जाए, जजसके अन्द्तगषत
फेस िेस कायवष ाठहयां तथा आभासी सुनवाइयां भी हैं ।”।
(3). अनुशासननक सलमनत, ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारंलभक परीिा ररपो ष
की प्राजप्त पर, यथाजस्थनत, सर्दस्य या फम ष से, जजसके ववरुद्ध ऐसी प्रारंलभक
परीिा ररपो ष फाइि की गई है, इक्कीस ठर्दन के भीतर लिखित कथन प्रस्तुत करने
की अपेिा करेगी, जजसे आपवाठर्दक पररजस्थनतयों में िेिबद्ध ककए जाने वािे
कारणों से इक्कीस ठर्दन के लिए और बढाया जा सकेगा ।
(4) अनुशासननक सलमनत, ननर्देशक (अनुशासन) से प्रारजम्भक परीिा ररपो ष
की प्राजप्त के एक सौ अस्सी ठर्दनों के भीतर अपनी जांच समाप्त करेगी ।
(5) जांच करने पर, यठर्द अनुशासननक सलमनत द्वारा यह पाया जाता है कक
कोई सर्दस्य र्दसू री अनुसूची या पहिी अनुसूची और र्दसू री अनुसूची र्दोनों में
उजल्िखित ववृत्तक या अन्द्य अवचार का र्दोर्ी है, तो वह ननम्नलिखित एक या
अधधक कारषवाइयां करते हुए, सर्दस्य को सुनवाई का एक अवसर र्देने के पश्चात,्अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
707
ऐसे ननष्ट्कर् ष के तीस ठर्दन के भीतर एक आर्देश पाररत कर सकेगीं, अथाषत ् :—
(क) सर्दस्य को धधग्र्दंर् र्देगी और इसे सर्दस्यों के रजजस् र में
अलभलिखित करेगी ; या
(ि) सर्दस्य के नाम को स्थायी रूप से या ऐसी अवधध के लिए, जो
वह िीक समझे, रजजस् र से ह ाना ; या
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना जो वह िीक समझे, जो र्दस िाि
रूपए तक का हो सकेगा ।
(6) जहां अनुशासननक सलमनत, अलभिेि पर िाए गए या संस्थान के सर्दस्य
से संबंधधत जांच के क्रम के र्दौरान, साक्ष्य के आधार पर यह राय बनाती है कक
कोई सर्दस्य, जो फम ष का भागीर्दार या स्वामी हैं, वपछिे पांच वर् ष के र्दौरान र्दसू री
अनुसूची या पहिी अनुसूची और र्दसू री अनुसूची र्दोनों में उजल्िखित अवचार का
बारम्बार र्दोर्ी पाया गया है, तो ऐसी फम ष के ववरुद्ध ननम्नलिखित कारषवाइयां भी
की जा सकेंगी, अथाषत ् :—
(क) फम ष को र्दो वर् ष से अनधधक ऐसी अवधध के लिए चा षर् ष अकाउं ें
व्यवसाय की ववृत्त से संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप या कक्रयाकिापों को करने स े
प्रनतवर्द्ध करना ; या
(ि) फम ष के रजजस्रीकरण को ननिंत्रबत या रद्र्द करना और इसका
नाम फम ष के रजजस् र स े स्थायी रूप स े या ऐसी अवधध के लिए, जैसा वह
उधचत समझे, ह ाना ; या
(ग) ऐसा जुमाषना अधधरोवपत करना, जैसा वह उधचत समझे, जो पचास
िाि रुपए तक का हो सकेगा ।
(7) जहां कोई सर्दस्य या फम ष उपधारा (5) या उपधारा (6) के अधीन ऐसे
समय के भीतर जो ववठहत ककया जाए, अधधरोवपत ककए गए जुमाषने का संर्दाय
करने में ववफि रहता है तो पररर्द् ऐसे सर्दस्य या फम ष का नाम ऐसी अवधध या
ऐसी और अवधध, जो वह उधचत समझे, के लिए, यथाजस्थनत, सर्दस्यों के रजजस् र
या फम ष का रजजस् र से ह ा र्देगी ।
(8) पीिासीन अधधकारी तथा अनुशासननक सलमनत के सर्दस्यों को ऐसे भत्तों
का संर्दाय ककया जाएगा, जो ववठहत ककए जाएं ।”।
धारा 21ग का 92. मूि अधधननयम की धारा 21ग में, स्पष्ट् ीकरण का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 21घ का 93. मूि अधधननयम की धारा 21घ के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
प्रनतस्थापन । अथाषत ् :—
संक्रमणकािीन “21घ. चा षर् ष अकाउं े , िागत और संकम ष िेिापाि, कंपनी सधचव
उपबंध ।
(संशोधन) अधधननयम, 2021 के प्रारम्भ के पूव ष अनुशासन बोर् ष या अनुशासननक
सलमनत के समि िजम्बत सभी लशकायतें या कोई जांच अथवा अपीि प्राधधकरणअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
708
या उच्च न्द्यायािय के समि कोई ननर्देश या फाइि की गई अपीि, इस
अधधननयम के उपबंधों द्वारा शालसत ककए जाते रहेगें, मानो यह अधधननयम चा षर् ष
अकाउं े , िागत और संकम ष िेिापाि और कंपनी सधचव (संशोधन) अधधननयम,
2021 द्वारा संशोधधत नहीं ककया गया हो ।”।
94. मूि अधधननयम की धारा 22 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 22 का
अथाषत ् :— प्रनतस्थापन ।
‘22. इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए, “ववृत्तक या अन्द्य अवचार” पर्द के पररभावर्त ककया
गया ववृत्तक
अन्द्तगषत संस्थान के ककसी सर्दस्य की ओर से या तो अपनी व्यजक्तगत हैलसयत में
या अन्द्य
या ककन्द्हीं अनुसूधचयों में यथाउजल्िखित फम ष के भागीर्दार या स्वामी के रूप में
कर्दाचरण ।
कोई कृत्य या िोप भी सजम्मलित समझा जाएगा, ककन्द्तु इस धारा की ककसी बात
का अथाषन्द्वयन ककन्द्हीं अन्द्य पररजस्थनतयों के अधीन ऐसे सर्दस्य या फम ष के
आचरण की जांच करने के लिए धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन ननर्देशक
(अनुशासन) को प्रर्दत्त कोई शजक्त या अधधरोवपत कतव्ष य को सीलमत या न्द्यून करने
वािा नहीं होगा ।’।
95. मूि अधधननयम की धारा 22ङ में,— धारा 22ङ का
संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में,—
(क) “संस्थान का कोई सर्दस्य” शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई फम”ष शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) “कोई शाजस्त उस पर” शब्र्दों के स्थान पर, “कोई शाजस्त ऐस े
सर्दस्य या फम ष पर” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ग) “धारा 21क की उपधारा (3) और धारा 21ि की उपधारा (3)”
शब्र्दों, अंकों, अिरों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “,यथाजस्थनत, धारा 21क की
उपधारा (5) या उपधारा (6) तथा धारा 21ि की उपधारा (5) या उपधारा
(6)” शब्र्द, अंक, अिर और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(घ) “उस े संसूधचत” शब्र्दों के स्थान पर, “ऐस े सर्दस्य या फम ष को
संसूधचत” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) “धारा 21क की उपधारा (3) और धारा 21ि की उपधारा (3)” शब्र्दों,
अंकों, अिरों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “धारा 21क की उपधारा (5) या उपधारा
(6) तथा धारा 21ि की उपधारा (3क) या उपधारा (3ि)” शब्र्द, अंक, अिर और
कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(iii) उपधारा (2) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा और स्पष्ट् ीकरण
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
‘(3) प्राधधकरण के ककसी आर्देश या काय ष या कायवष ाही को प्राधधकरण
के गिन में केवि मात्र ककसी त्रुठ या आकजस्मक ररजक्त या एक या र्दो
सर्दस्यों की अनुपजस्थनत के आधार पर ककसी रीनत में प्रश्नगत नहीं ककया
जाएगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
709
स्पष्ट्टीकरर् 1—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,—
(अ) “संस्थान का सर्दस्य” के अन्द्तगषत वह व्यजक्त है जो
अलभकधथत अवचार की तारीि को सस्ं थान का सर्दस्य था, यद्यवप वह
जांच के समय संस्थान का सर्दस्य नहीं था;
(आ) संस्थान में रजजस्रीकृत “फम”ष भी ककसी सर्दस्य के अवचार
के लिए र्दायी िहरायी जाएगी जो अलभकधथत अवचार की तारीि को
इसका भागीर्दार या स्वामी था, यद्यवप वह जांच के समय ऐसा
भागीर्दार या स्वामी नहीं था ।
स्पष्ट्टीकरर् 2—इस अध्याय के उपबंधों के अधीन की गई कोई
कारषवाई ककसी केन्द्रीय सरकार के ववभाग या राज्य सरकार या ककसी कानूनी
प्राधधकारी अथवा ववननयामक ननकाय को तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध के
अधीन संस्थान में रजजस्रीकृत ककसी सर्दस्य या फम ष के ववरुद्ध कारषवाई
करने से नहीं रोकेगी ।’।
धारा 24 का 96. मूि अधधननयम की धारा 24 में,—
संशोधन ।
(क) “एक हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “एक िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(ि) “पांच हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ।
धारा 25 का 97. मूि अधधननयम की धारा 25 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) “जुमाषने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर,
“कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषन े से, जो एक िाि रुपए
से कम नहीं होगा ककंतु पांच िाि रुपए तक का हो सकेगा या र्दोनों स”े शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ii) “जो छह मास तक का हो सकेगा या जुमाषने से, जो पांच हजार रुपए तक
का हो सकेगा” शब्र्दों के स्थान पर, “जो एक वर् ष तक का हो सकेगा या जुमाषने से,
जो र्दो िाि रुपए से कम नहीं होगा ककंतु र्दस िाि रुपए तक का हो सकेगा” शब्र्द
रिे जाएंगे ।
धारा 26 का 98. मूि अधधननयम की धारा 26 की उपधारा (2) के स्थान पर ननम्नलिखित
संशोधन । उपधारा रिी जाएगी,—
“(2) उपधारा (1) के उपबंधों का उल्िंघन करने वािी कोई कम्पनी पहिे
उल्िंघन पर जुमाषने से र्दंर्नीय होगी जो र्दो िाि रुपए स े कम नहीं होगा ककन्द्तु
जो र्दस िाि रुपए तक हो सकेगा, तथा ककसी पश्चातवती उल्िंघन पर जुमाषन े स े
र्दंर्नीय होगी जो चार िाि रुपए से कम नहीं होगा ककन्द्तु जो बीस िाि रुपए तक
हो सकेगा ।”।
धारा 27 का 99. मूि अधधननयम की धारा 27 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(क) “पांच हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “एक िाि रुपए” शब्र्द रिेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
710
जाएंगे ;
(ि) “एक िाि रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(ग) “र्दस हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दो िाि रुपए” शब्र्द रिे
जाएंगे ;
(घ) “र्दो िाि रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दस िाि रुपए” शब्र्द रि े
जाएंगे ।
100. मूि अधधननयम की धारा 29ि में, िंर् (ग) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् धारा 29ि का
अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(घ) संस्थान या फमों के सर्दस्यों द्वारा ववलभन्द्न कानूनी और ववननयामक
अपेिाओं के अननुपािन के मामिों, जो उसके द्वारा उनके पुनवविष ोकन के र्दौरान
ध्यान में आए हों, को इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन उनकी परीिा के लिए
अनुशासन ननर्देशािय को अग्रेवर्त करना ।”।
101. मूि अधधननयम की धारा 34 के स् थान पर, ननम् नलिखित धारा रिी जाएगी, धारा 34 का
अथाषत ् :— संशोधन ।
1949 का 38 ‘‘34. चा षर् ष अकाउं ें अधधननयम, 1949 की धारा 9क के अधीन गठित समन्द् वयन
सलमनत।
समन्द्व यन सलमनत इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए समन्द्व यन सलमनत समझी
जाएगी ।’’।
102. मूि अधधननयम की धारा 38 की उपधारा (2) में, ‘‘रजजस् र’’ शब् र्द के स् थान धारा 38 का
संशोधन ।
पर, ‘‘सर्दस् यों के रजजस् र’’ शब्र्द रिे जाएंगे ।
103. मूि अधधननयम की धारा 38क की उपधारा (2) में, िंर् (ग) और िंर् (घ) के धारा 38क का
स् थान पर ननम् नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :— संशोधन ।
‘‘(ग) धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन कोई सूचना या पररवार्द फाइि
करने का प्ररूप, रीनत और फीस उपधारा (2) के अधीन ककसी जानकारी या
लशकायत या कारषवाई योग्य के होने या कारषवाई योग्य न होने के रूप में ववननश्चय
करने की रीनत और उपधारा (7) के अधीन अन्द्वेर्ण की प्रकक्रया ;
(घ) धारा 21क की उपधारा (2) के अधीन अनुशासन बोर् ष द्वारा मामिों पर
ववचार करते समय प्रकक्रया, उपधारा (7) के अधीन शाजस् त के संर्दाय की
समयसीमा ;
(घक) धारा 21ि की उपधारा (2) के अधीन अनुशासन सलमनत द्वारा
मामिों पर ववचार करते समय प्रकक्रया, उपधारा (7) के अधीन शाजस् त के संर्दाय की
समयसीमा ;’’।
104. मूि अधधननयम की धारा 39 की उपधारा (2) में,— धारा 39 का
संशोधन ।
(i) ‘‘रजजस् र’’, शब्र्द के स्थान पर, जहां-जहां वह आता है, ‘‘सर्दस् यों के
रजजस् र’’, शब्र्द रिे जाएंगे ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
711
(ii) िंर् (च) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘(चक) धारा 6 की उपधारा (3) के अधीन वे पररजस्थनतयां जजनके
अधीन व्यवसाय प्रमाणपत्र रद्र्द ककए जा सकेंगे ;
(चि) धारा 12 की उपधारा (2ि) के अधीन पररर्द् के अध्यि और
उपाध्यि की शजक्तयां, कतव्ष य और कृत्य ;’’;
(iii) िंर् (ज) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘(जक) धारा 15 की उपधारा (2) के िंर् (ङ) के अधीन व्यवसाय
प्रमाणपत्र अनुर्दत्त या अस्वीकृत करने के लिए मागर्दष शी लसद्धान्द्त ;’’;’
(iv) िंर् ( ) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘( क) धारा 16 की उपधारा (2) के िंर् (ग) के अधीन पररर्द् के
सधचव और अन्द्य अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों की ननयुजक्त की रीनत,
शजक् तयां, कतव्ष य, कृत् य, वेतन, फीस, भत्ते और सेवा के अन्द्य ननबंधन और
शतें ;’’;
(v) िंर् (र्) के पश् चात,् ननम् नलिखित िंर् अंत:स् थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘‘(र्क) धारा 18 की उपधारा (3) के अधीन िेिों का अनुरिण, उपधारा
(4) के अधीन वावर्कष वववरण तैयार करने की रीनत और उपधारा (5) के
अधीन पररर्द् के वावर्कष िेिों को तैयार करने की रीनत ;’’;
(vi) िंर् (त) के स्थान पर ननम् नलिखित िंर् रि े जाएंगे, अथाषत ् :—
(त) धारा 20क के अधीन ककसी फम ष को रजजस्रीकरण अनुर्दत्त करने के
लिए आवेर्दन करने की रीनत और ऐसे रजजस्रीकरण के ननबंधन और शतें ;
(तक) फमों के रजजस् र और अन्द्य ववलशजष्ट् यां अनुरक्षित करने की
रीनत जजसके अन्द्तगतष धारा 20ि की उपधारा (1) और उपधारा (2) के
अधीन कारषवाई योग्य सूचना या पररवार्द या ककसी फम ष के ववरुद्ध
अधधरोवपत ककसी शाजस्त के अधधरोपण के ब्यौरे, और वह रीनत जजसमें
उपधारा (3) के अधीन संस्थान में रजजस्रीकृत फमों की वावर्कष सूची
प्रकालशत की जाएगी ;
(ति) धारा 21 की उपधारा (9) के अधीन अनुयोज्य सूचना तथा
पररवार्दों की प्राजस्थनत और पाररत आर्देश उपिब्ध करवाने की रीनत ;
(तग) धारा 21क की उपधारा (1) के िंर् (क), िंर् (ि) और िंर् (ग)
के अधीन व्यजक्तयों का पैनि तैयार करने की रीनत और धारा 21क की
उपधारा (8) के अधीन अनुशासन बोर् ष के पीिासीन अधधकाररयों और सर्दस्यों
को संर्देय भत्ते ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
712
(तघ) धारा 21ि की उपधारा (1) के िंर् (क) िंर् (ि) और िंर् (ग)
के अधीन व्यजक्तयों का पैनि तैयार करने की रीनत और उपधारा (8) के
अधीन अनुशासन बोर् ष के तथा धारा 21ि की उपधारा (4) के अधीन
अनुशासननक सलमनतयों के पीिासीन अधधकाररयों तथा सर्दस्यों को संर्देय
भत्ते ।’’।
(तङ) धारा 22 घ की उपधारा (2) के अधीन प्राधधकरण के अधधकाररयों
और कमचष ाररवंर्दृ के वेतन और भत्ते तथा सेवा की शतें ;
105. मूि अधधननयम की पहिी अनुसूची के शीर् ष में, ‘‘धारा 21(3), धारा 21क(3)’’, पहिी अनुसूची
का संशोधन ।
शब्र्दों, अंकों, कोष्ट्िकों और अिर के स्थान पर, ‘‘धारा 21(6), धारा 21क(5) और (6),
धारा 21ि (5) और (6)’’, शब्र्द, अंक, कोष्ट्िक और अिर रिे जाएंगे ।
106. मूि अधधननयम की र्दसू री अनुसूची में,— र्दसू री अनुसूची
का संशोधन ।
(i) ‘‘धारा 21(3), धारा 21क(3)’’, शब्र्दों, अंकों, कोष्ट्िकों और अिर के स्थान
पर, ‘‘धारा 21(6), धारा 21ि (5) और (6)’’, शब्र्द, अंक, कोष्ट्िक और अिर रि े
जाएंगे ;
(ii) भाग 1 के मर्द (3) में, ‘‘यह ववश् वास हो जाए कक वह’’ शब् र्दों के स् थान
पर, ‘‘यह ववश् वास हो जाए कक वह या उसकी फमष’’ शब् र्द रिे जाएंगे ।
__________अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
713
संर्विाि (अिसु ूधित जानतया ं और अिुसूधित
जिजानतया)ं आदेि (दसू रा संिोिि)
अधिनियम, 2022
(2022 का अधिनियम संखयांक 20)
[24 हदसम्बर, 2022]
संर्विाि (अिुसूधित जानतया)ं आदेि, 1950 और संर्विाि
(अिुसूधित जिजानतयां) (उिर प्रदेि) आदेि, 1967
का और सिं ोिि
करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के नतहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
1. इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम संववधान (अनुसूधचत जानतयां और अनुसूधचत संक्षिप्त नाम ।
जनजानतयां) आर्देश (र्दसू रा सशं ोधन) अधधननयम, 2022 है ।
2. इस अधधननयम में, जब तक कक संर्दभ ष से अन्द्यथा अपेक्षित न हो,— पररभार्ाएं ।
(क) “अनुसूधचत जानतयां आर्देश” से संववधान (अनुसूधचत जानतयां)
स0 आ0 19 आर्देश, 1950 अलभप्रेत है;
(ि) “अनुसूधचत जनजानतयां आर्देश” से संववधान (अनुसूधचत जनजानतयां) (उत्तर
सं0 आ0 78
प्रर्देश) आर्देश, 1967 अलभप्रेत है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
714
अनुसूधचत जानतयां 3. अनुसूधचत जानतयां आर्देश का पहिी अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में और
आर्देश का
पररमाण तक संशोधन ककया जाता है ।
संशोधन ।
अनुसूधचत 4. अनुसूधचत जनजानतयां आर्देश का र्दसू री अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में और
जनजानतयां आर्देश
पररमाण तक संशोधन ककया जाता है ।
का सशं ोधन ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
715
पहिी अनुसूची
(िारा 3 देखखए)
संववधान (अनुसूधचत जानतयां) आर्देश, 1950 (सं.आ.19) की अनुसूची के भाग 18—
उत्तर प्रर्देश की प्रववजष्ट् 36 में, “लमजाषपुर और सोनभर” शब्र्दों के स्थान पर “लमजाषपुर,
सोनभर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, चंर्दौिी और भर्दोही” शब्र्द रिे जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
716
र्दसू री अनुसूची
(िारा 4 देखखए)
संववधान (अनुसूधचत जनजानतयां) (उत्तर प्रर्देश) आर्देश, 1967 (सं.आ. 78) की
अनुसूची की प्रववजष्ट् 6 में, “लमजाषपुर और सोनभर” शब्र्दों के स्थान पर “लमजापष ुर,
सोनभर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, चंर्दौिी और भर्दोही” शब्र्द रिे जाएंगे ।
__________अ नुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
717
िई हदल िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् कें द्र
(संिोिि) अधिनियम, 2022
(2022 का अधिनियम संखयांक 23)
[30 हदसम्बर, 2022]
िई हदल िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंद्र
अधिनियम, 2019 का संिोिि
करि े के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के नतहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् संक्षिप्त नाम और
प्रारम्भ ।
केंर (संशोधन) अधधननयम, 2022 है ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्तृ होगा, जो केंरीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना
द्वारा, ननयत करे ।अ नुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
718
वहृ त्त नाम का 2. नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर अधधननयम, 2019 (जजसे इसमें 2019 का 17
संशोधन । इसके पश् चात ् मूि अधधननयम कहा गया है) के वहृ त ् नाम में, “नई ठर्दल् िी
अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के स् थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, “भारत
अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ।
उद्र्देलशका का 3. मूि अधधननयम की उद्र्देलशका में, “नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर”
संशोधन । शब् र्दों के स् थान पर, र्दोनों स् थानों पर, जहां वे आते हैं, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ्
केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 1 का 4. मूि अधधननयम की धारा 1 की उपधारा (1) में, “नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय
संशोधन । माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के स् थान पर, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्द रिे
जाएंगे ।
धारा 2 का 5. मूि अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (1) के िंर् (क) में, “नई ठर्दल् िी
संशोधन । अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के स् थान पर, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ्
केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ।
अध् याय शीर् ष का 6. मूि अधधननयम के अध् याय 2 के अध् याय शीर् ष में, “नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय
संशोधन । माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के स् थान पर, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्द रिे
जाएंगे ।
धारा 3 का 7. मूि अधधननयम की धारा 3 में,—
संशोधन ।
(i) पाश् व ष शीर् ष में, “नई ठर्दल्ि ी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के
स् थान पर, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1) में, “नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के
स् थान पर, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 4 का 8. मूि अधधननयम की धारा 4 में,—
संशोधन ।
(i) पाश् व ष शीर् ष में, “नई ठर्दल्ि ी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के
स् थान पर, “भारत अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1) में, “नई ठर्दल् िी अंतरराष्ट् रीय माध् यस् थम ् केंर” शब् र्दों के
स् थान पर, र्दोनों स् थानों पर, जहां वे आते हैं, “भारत अतं रराष्ट् रीय माध् यस् थम ्
केंर” शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 15 का 9. मूि अधधननयम की धारा 15 में, िंर् (क) के स् थान पर, ननम् नलिखित िंर्
संशोधन । रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(क) अंतरराष्ट् रीय और घरेिू र्दोनों, माध् य1स् थम ् और अन्द् य प्रकार के
ववकल् पी वववार्द समाधान तंत्रों के संचािन ऐसी रीनत में, जो ववननयमों द्वारा
ववननठर्दषष्ट् की जाए, को सुकर बनाने ;”।
धारा 20 का 10. मूि अधधननयम की धारा 20 की उपधारा (5) के परन्द्तुक में, “आवेर्दन”
संशोधन । शब्र्द, र्दोनों स्थानों पर, जहां-जहां वह आता है, के स्थान पर “प्रश्न” शब्र्द रिा
जाएगा ।
धारा 23 का 11. मूि अधधननयम की धारा 23 की उपधारा (1) के िंर् (क) में, “केन्द्र”
संशोधन । शब्र्द के स्थान पर “सधचवािय” शब्र्द रिा जाएगा ।अ नुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
719
12. मूि अधधननयम की धारा 25 की उपधारा (3) में, “ननधध का उपयोग धारा 25 का
सर्दस् यों” शब् र्दों के पश्च ात,् “, रजजस् रार, परामशी और केंरीय सरकार के अन्द्य संशोधन ।
अधधकाररयों तथा कमचष ाररयों” शब् र्द अंत:स् थावपत ककए जाएंगे ।
13. मूि अधधननयम की धारा 28 की उपधारा (1) में, “केंर एक माध् यस् थम ् धारा 28 का
चैंबर की स् थापना करेगा, जो मध् यस् थों के एक स् थायी पैनि को बनाए रिने के लिए संशोधन ।
मध् यस् थों को पैनिबद्ध करेगा और साथ ही ववख् यात मध् यस् थों के पैनि में प्रववजष्ट्
हेतु आवेर्दनों की संवीिा करेगा ।” शब् र्दों के स् थान पर, “केंर, मध् यस् थों के एक स् थायी
पैनि को बनाए रिने के लिए मध् यस् थों का पैनि बनाने और साथ ही ववख् यात
मध् यस् थों के पैनि में प्रववजष्ट् हेतु आवेर्दनों की संवीिा करने के लिए एक माध् यस् थम ्
चैंबर की स्थ ापना करेगा ।” शब् र्द रिे जाएंगे ।
14. मूि अधधननयम की धारा 31 की उपधारा (2) में, िंर् (क) के स्थान पर धारा 31 का
ननम् नलिखित िंर् रिे जाएंगे, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(क) धारा 15 के िंर् (क) के अधीन, माध्यस्थम ् और अन्द्य प्रकार के
ववकल्पी वववार्द समाधान तंत्र के संचािन की रीनत ;
(कक) समय और स्थान तथा बैिकों में सलमनत के काय ष संचािन के
संबंध में अनुपािन की जाने वािी प्रकक्रया के ननयम जजसके अन्द्तगतष धारा 19
की उपधारा (3) के अधीन गणपूनत ष भी है ;”।
15. मूि अधधननयम की धारा 34 की उपधारा (1) के परंतुक में, “र्दो वर्”ष शब् र्दों धारा 34 का
के स् थान पर, “पांच वर्”ष शब् र्द रिे जाएंगे । संशोधन ।
__________अ नुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
720अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
721
संर्विाि (अिसु ूधित जिजानतयां) आदेि
(दसू रा संिोिि) अधिनियम, 2022
(2023 का अधिनियम संखयांक 1)
[2 जिवरी, 2023]
तसमििार्ु राज् य में अिुसूधित जिजानतयों की सूिी को उपातं ररत
करिे के सिए संर्विाि (अिुसूधित जिजानतयां)
आदेि,1950 का और संिोिि
करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के नतहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
1. इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम संववधान (अनुसूधचत जनजानतया)ं आर्देश संक्षिप्त नाम ।
(र्दसू रा संशोधन) अधधननयम, 2022 है ।
सं0 आ0 22 2. संववधान (अनुसूधचत जनजानतयां) आर्देश, 1950 की अनुसूची के भाग 14— संववधान
(अनुसूधचत
तलमिनार्ु में, प्रववजष्ट् 36 के पश्चात,् ननम्नलिखित प्रववजष्ट् अंतःस्थावपत की जाएगी,
जनजानतयां)
अथाषत ् :—
आर्देश, 1950 का
“37. नररकुरवन, कुरुववक्कारन ।” संशोधन ।
__________अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
722अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण 723
संर्विाि (अिसु ूधित जिजानतयां) आदेि (िौथा
संिोिि) अधिनियम, 2022
(2023 का अधिनियम संखयांक 2)
[2 जिवरी, 2023]
किािटक राज् य के संबंि में अिुसूधित जिजानतयों की सूिी को
उपांतररत करिे के सिए संर्विाि (अिुसूधित जिजानतयां)
आदेि, 1950 का और संिोिि
करिे के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के नतहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
1. इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम संववधान (अनुसूधचत जनजानतयां) आर्देश संक्षिप्त नाम।
(चौथा संशोधन) अधधननयम, 2022 है ।
सं0 आ0 22 2. संववधान (अनुसूधचत जनजानतयां) आर्देश, 1950 की अनुसूची के भाग 6— संववधान
कनाष क में, प्रववजष्ट् 16 के स्थान पर, ननम्नलिखित प्रववजष्ट् रिी जाएगी, अथाषत ् :— (अनुसूधचत
जनजानतयां)
“16. कार्ू कुरुबा, बेट् ा-कुरुबा ।” आर्देश, 1950
का संशोधन ।
__________अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
724अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
725
र्वि अधिनियम, 2023
(2023 का अधिनियम संखयांक 8)
[31 माि,ि 2023]
र्विीय वष ि 2023-2024 के सिए केन्द्रीय सरकार
की र्विीय प्रस्थापिाओं को प्रभावी
करि े के सिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
अध्याय 1
प्रारंसभक
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम ववत्त अधधननयम, 2023 है । संक्षिप्त नाम
और प्रारंभ ।
—
(2) इस अधधननयम में अन्द्यथा उपबंधधत के लसवाय,
(क) धारा 2 स े धारा 127, 1 अप्रैि, 2023 को प्रवत्तृ होंगी ;
(ि) धारा 128 स े धारा 163, उस तारीि को प्रवत्तृ होंगी, जो केंरीय सरकार
राजपत्र में अधधसूचना द्वारा, ननयत करे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
726
अध्याय 2
आय-कर की दरें
आय-कर । 2. (1) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहत े हुए, 1 अप्रैि,
2023 को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष के लिए आय-कर, पहिी अनुसूची के भाग 1 में
ववननठर्दषष्ट् र्दरों से प्रभाररत ककया जाएगा और ऐसे कर में, प्रत्येक र्दशा में, उसमें उपबंधधत
रीनत से, पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा ।
(2) उन र्दशाओं में, जजनमें पहिी अनुसूची के भाग 1 का पैरा क िागू होता है, जहां
ननधाषररती की, पूववष र् ष में, कुि आय के अनतररक्त, पांच हजार रुपए से अधधक कोई शुद्ध
कृवर्-आय है, और कुि आय र्दो िाि पचास हजार रुपए स े अधधक हो जाती है वहां,—
(क) शद्ु ध कृवर्-आय को, कुि आय के सबं ंध में केवि आय-कर प्रभाररत करन े
के प्रयोजन के लिए, िंर् (ि) में उपबंधधत रीनत से ठहसाब में लिया जाएगा, (अथाषत ्
मानो शुद्ध कृवर्-आय कुि आय के प्रथम र्दो िाि पचास हजार रुपए के पश्चात ्
कुि आय में समाववष्ट् हो, ककंत ु कर के र्दानयत्वाधीन न हो) ; और
(ि) प्रभाय ष आय-कर ननम्नानुसार संगखणत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
(i) कुि आय और शुद्ध कृवर्-आय संकलित की जाएगी और आय-कर
की रकम, उक्त पैरा क में ववननठर्दषष्ट् र्दर पर संकलित आय के संबंध में ऐसे
अवधाररत की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुि आय थी ;
(ii) शुद्ध कृवर्-आय में र्दो िाि पचास हजार रुपए की रालश बढा र्दी
जाएगी और इस प्रकार बढाई गई शुद्ध कृवर्-आय के संबधं में आय-कर की
रकम, उक्त पैरा क में ववननठर्दषष्ट् र्दरों स े ऐस े अवधाररत की जाएगी, मानो इस
प्रकार बढाई गई शुद्ध कृवर्-आय कुि आय हो ;
(iii) उपिंर् (i) के अनुसार अवधाररत आय-कर की रकम में से उपिंर्
(ii) के अनुसार अवधाररत आय-कर की रकम घ ा र्दी जाएगी और इस प्रकार
प्राप्त रालश, कुि आय के संबधं में आय-कर होगी :
परन्द्तु पहिी अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मर्द (ii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक व्यजष्ट्
की र्दशा में, जो भारत में ननवासी है और पूववष र् ष के र्दौरान ककसी समय साि वर् ष का या
उसस े अधधक, ककंतु अस्सी वर् ष से कम आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार
प्रभावी होंगे, मानो “र्दो िाि पचास हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “तीन िाि रुपए”
शब्र्द रि े गए हों :
परन्द्तु यह और कक पहिी अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मर्द (iii) में ननठर्दषष्ट् ,
प्रत्येक व्यजष्ट् की र्दशा में, जो भारत में ननवासी है और पूववष र् ष के र्दौरान ककसी समय
अस्सी वर् ष या अधधक आयु का है, इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो
“र्दो िाि पचास हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रि े गए हों ।
(3) उन र्दशाओं में, जजनमें आय-कर अधधननयम, 1961 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् 1961 का 43
आय-कर अधधननयम कहा गया है) के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञि या
धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चि या धारा 161 की उपधारा (1क) या
धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ि के उपबंध िाग ू होत े हैं, प्रभाय ष कर का
अवधारण, उस अध्याय या उस धारा में यथाउपबंधधत रीनत से, और, यथाजस्थनत, उपधारा
(1) द्वारा अधधरोवपत र्दरों के या उस अध्याय या उस धारा में ववननठर्दषष्ट् र्दरों के प्रनत
ननर्देश से ककया जाएगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
727
परन्द्तु आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या धारा 112क के
उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, पहिी अनुसूची के भाग 1 के,
यथाजस्थनत, पैरा क, पैरा ि, पैरा ग, पैरा घ और पैरा ङ में यथाउपबंधधत अधधभार, संघ के
प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा, लसवाय उस र्देशी कंपनी की र्दशा में, जजसकी आय,
आय-कर अधधननयम की धारा 115िकक या धारा 115िकि के अधीन कर से प्रभाय ष है
या उस सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी आय, आय-कर अधधननयम की
धारा 115िकघ के अधीन कर से प्रभाय ष है :
परन्द्तु यह और कक ककसी ऐसी आय के संबंध में, जो आय-कर अधधननयम की
धारा 115क, धारा 115कि, धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ि,
धारा 115िक, धारा 115िि, धारा 115ििक, धारा 115ििग, धारा 115ििच,
धारा 115ििछ, धारा 115ििज, धारा 115ििझ, धारा 115ङ, धारा 115ञि या
धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष है, इस उपधारा के अधीन संगखणत आय-कर की
रकम में,—
(क) प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहर्दं ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्तयों का संगम, ऐस े
व्यजक्तयों के संगम के मामि े के लसवाय जो उसके सर्दस्य के रूप में केवि कंपननयों
से लमिकर बना है या व्यजष्ट् ननकाय, चाहे ननगलमत हो या न हो, या आय-कर
अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम
ववधधक व्यजक्त, जजसकी आय-कर अधधननयम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय
नहीं है, की र्दशा में, जहां,—
(i) कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के र्दस प्रनतशत की र्दर स े ;
(ii) कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(iii) कुि आय र्दो करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए स े
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ; और
(iv) कुि आय पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के
सतैं ीस प्रनतशत की र्दर से ;
(ि) प्रत्येक व्यजष्ट् या व्यजक्तयों का संगम, ऐसे व्यजक्तयों का संगम के
मामिे के लसवाय, जो उसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों से लमिकर बना है
या व्यजष्ट् -ननकाय, चाहे वह ननगलमत हो या न हो, या आय-कर अधधननयम की
धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जजसकी आय-कर अधधननयम की धारा 115कघ के अधीन आय है,—
(i) कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के र्दस प्रनतशत की र्दर स े ;
(ii) कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(iii) कुि आय (िाभांश के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की आय को
छोड़कर) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ; औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
728
(iv) कुि आय (िाभाशं के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की आय को
छोड़कर) पांच करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसे आय-कर के सतैं ीस प्रनतशत की
र्दर से ; और
(v) कुि आय (जजसमें िाभाशं के रूप में आय या आय-कर अधधननयम
की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की आय
सजम्मलित है) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु जो उपिंर् (iii) और
उपिंर् (iv) के अधीन नहीं आती है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से,
संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु उस र्दशा में, जहां कुि आय में, जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रभाय ष आय
सजम्मलित है, आय के उस भाग के संबंध में संगखणत आय-कर की रकम पर अधधभार की
र्दर पन्द्रह प्रनतशत से अधधक नहीं होगी ;
(ग) व्यजक्तयों का संगम जो इसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों से
लमिकर बना है, की र्दशा में,—
(i) जहां कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए
से अनधधक है, वहां ऐसे आय-कर के र्दस प्रनतशत की र्दर स;े
(ii) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, वहां ऐसी आय के
पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से, संगखणत ककया जाएगा;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी, लसवाय ऐसी सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में,
जजसकी आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115िकघ के अधीन कर से प्रभायष
है,—
(i) जहा ं कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है ककंतु र्दस करोड़ रुपए स े
अनधधक है, वहां ऐसे आय-कर के सात प्रनतशत की र्दर से;
(ii) जहां कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है वहां ऐसे आय-कर के
बारह प्रनतशत की र्दर से;
(ङ) प्रत्येक फम ष या स्थानीय प्राधधकारी की र्दशा में जहां कुि आय एक करोड़
रुपए से अधधक है वहां ऐसे आय-कर के बारह प्रनतशत की र्दर से;
(च) प्रत्येक र्देशी कंपनी की र्दशा में, लसवाय ऐसी र्देशी कंपनी के, जजसकी आय,
आय-कर अधधननयम की धारा 115िकक या धारा 115िकि के अधीन कर से
प्रभाय ष है,—
(i) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए
से अनधधक है, ऐसे आय-कर के सात प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के
बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(छ) र्देशी कंपनी से लभन्द्न, प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(i) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपएअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
729
से अनधधक है, ऐसे आय-कर के र्दो प्रनतशत की र्दर स े ;
(ii) जहां कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के पांच
प्रनतशत की र्दर से,
संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु यह भी कक उपरोक्त (क) और (ि) में वखणतष व्यजक्तयों की र्दशा में, जजसकी
कुि आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष है और ऐसी
आय,—
(i) पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम,
पचास िाि रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में संर्देय उस रकम से अधधक
नहीं होगी, जो पचास िाि रुपए से अधधक है ;
(ii) एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है, ऐसी
आय पर आय-कर और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़
रुपए की कुि आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, आय की
उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है ;
(iii) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, र्दो करोड़
रुपए की कुि आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय रकम, आय की उस
रकम से अधधक नहीं होगी, जो र्दो करोड़ रुपए से अधधक है ;
(iv) पांच करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर
अधधभार के रूप में सर्दं ेय कुि रकम पांच करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर
और अधधभार के रूप में संर्देय उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो पांच करोड़ रुपए
से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक उपरोक्त (ग) में वखणतष व्यजक्तयों के संगम की र्दशा में, जजनकी
कुि आय आय-कर अधधननयम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष है,—
(i) पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम
पचास िाि रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में संर्देय उस रकम से अधधक
नहीं होगी, जो पचास िाि रुपए से अधधक है ;
(ii) एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर
अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर
और अधधभार के रूप में संर्देय रकम, आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो
एक करोड़ रुपए से अधधक है :
परंतु यह भी कक उपरोक्त (घ) में वखणतष सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी
आय-कर अधधननयम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी
आय,—
(i) एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय या आय-कर और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़
रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में संर्देय रकम से अधधक नहीं होगी, जो
एक करोड़ रुपए से अधधक है ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
730
(ii) र्दस करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर
अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, र्दस करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर
और अधधभार के रूप में संर्देय रकम, आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो
र्दस करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक उपरोक्त (ङ) में वखणतष व्यजक्तयों की र्दशा में, जजसकी कुि आय,
आय-कर अधधननयम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष है और ऐसी आय,
एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसी आय और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम
एक करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में संर्देय उस रकम से अधधक नहीं
होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक प्रत्येक ऐसी कंपनी की र्दशा में, जजसकी कुि आय आय-कर
अधधननयम की धारा 115ञि के अधीन कर स े प्रभाय ष है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए
से अधधक है, ककंतु र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर
अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में
संर्देय उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक प्रत्येक ऐसी कंपनी की र्दशा में, जजसकी कुि आय, आय-कर
अधधननयम की धारा 115ञि के अधीन कर से प्रभाय ष है और ऐसी आय र्दस करोड़ रुपए
से अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और उस पर अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम
र्दस करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम आय
की उस रकम स े अधधक नहीं होगी, जो र्दस करोड़ रुपए स े अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 115ििङ की उपधारा (1) के
िंर् (i) के अधीन कर से प्रभाय ष ककसी आय के संबंध में, इस उपधारा के अधीन संगखणत
आय-कर की रकम को ऐसे कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से पररकलित अधधभार संघ के
प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु यह भी कक ऐसी प्रत्येक र्देशी कंपनी की र्दशा में, जजसकी आय, आय-कर
अधधननयम की धारा 115िकक या धारा 115िकि के अधीन कर से प्रभाय ष है, इस
उपधारा के अधीन संगखणत आय-कर की रकम को ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर स े
पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु यह भी कक ऐसे प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहर्दं ू अववभक्त कु ुंब की र्दशा में, जजसकी
आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग के अधीन कर से प्रभाय ष है, इस उपधारा के
अधीन संगखणत आय-कर की रकम को, पहिी अनुसूची के भाग 1 के पैरा क में यथा
उपबंधधत रीनत से पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु यह भी कक ऐसी प्रत्येक ननवासी सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी आय,
आय-कर अधधननयम की धारा 115िकघ के अधीन कर से प्रभाय ष है, इस उपधारा के
अधीन संगखणत आय-कर की रकम को ऐसे आय-कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से पररकलित
अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा ।
(4) उन र्दशाओ ं में, जजनमें कर, आय-कर अधधननयम की धारा 92गङ की
उपधारा (2क) या धारा 115थक या धारा 115नघ के अधीन प्रभाररत और संर्दत्त ककया
जाना है, कर उन धाराओं में यथा ववननठर्दषष्ट् र्दर से प्रभाररत और संर्दत्त ककया जाएगा और
उसमें ऐस े कर के बारह प्रनतशत की र्दर से पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए
बढा ठर्दया जाएगा ।
(5) उन र्दशाओं में, जजनमें कर, आय-कर अधधननयम की धारा 193, धारा 194क,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
731
धारा 194ि, धारा 194िक, धारा 194िि, धारा 194घ, धारा 194ििक,
धारा 194ििि, धारा 194ििग और धारा 195 के अधीन, प्रवत्तृ र्दरों से का ा जाना है,
उनमें क ौनतयां पहिी अनुसूची के भाग 2 में ववननठर्दषष्ट् र्दरों स े की जाएगी और उन
मामिों में, जहां कहीं ववठहत ककया गया हो, उसमें उपबंधधत रीनत से पररकलित अधधभार
संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा ।
(6) उन र्दशाओं में, जजनमें कर, आय-कर अधधननयम की धारा 192क, धारा 194,
धारा 194ग, धारा 194घक, धारा 194ङ, धारा 194ङङ, धारा 194च, धारा 194छ,
धारा 194ज, धारा 194झ, धारा 194झक, धारा 194झि, धारा 194झग, धारा 194ञ,
धारा 194िक, धारा 194िि, धारा 194ििक, धारा 194ििि, धारा 194ििग,
धारा 194िग, धारा 194िघ, धारा 194 , धारा 194र्, धारा 194ढ, धारा 194ण,
धारा 194थ, धारा 194र्द, धारा 194ध, धारा 196क, धारा 196ि, धारा 196ग और
धारा 196घ के अधीन का ा जाना है, क ौनतयां उन धाराओं में ववननठर्दषष्ट् र्दरों से की
जाएगी और उसमें,—
(क) प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम, इसके सर्दस्यों
के रूप में केवि कंपनी स े लमिकर बने व्यजक्तयों के संगम की र्दशा के लसवाय, या
व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की
धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जो अननवासी है, इस अधधननयम की धारा 196घ के अधीन िाभांश के रूप
में आय की क ौती की र्दशा के लसवाय,—
(i) जहां संर्दत्त या सर्दं त्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए, पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु
एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां सर्दं त्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु
र्दो करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के पंरह प्रनतशत की र्दर स े ;
(iii) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु
पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से;
(iv) जहां सर्दं त्त या सर्दं त्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे
कर के सतैं ीस प्रनतशत की र्दर से :
परंतु जहां ऐसे व्यजक्त की आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग की
उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभाय ष है, वहां अधधभार की र्दर पच्चीस प्रनतशत से अधधक
नहीं होगी ;
(ि) प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम, उसके सर्दस्यों
के रूप में केवि कंपननयों स े लमिकर बने व्यजक्तयों के संगम की र्दशा के लसवाय,
या व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की
धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जो अननवासी है, आय-कर अधधननयम की धारा 196घ के अधीन िाभांश के
रूप में आय की क ौती की र्दशा में,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
732
(i) जहां संर्दत्त या सर्दं त्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए, पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु
एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे
कर के पंरह प्रनतशत की र्दर से ;
(ग) उसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों से लमिकर बने व्यजक्तयों के
संगम की र्दशा में, जो अननवासी है,—
(i) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए, पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु
एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे
कर के पंरह प्रनतशत की र्दर से ;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी, जो अननवासी है, की र्दशा में,—
(i) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहत े हुए एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककन्द्तु
र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के सात प्रनतशत की र्दर से;
(ii) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहते हुए र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, वहां
ऐसे कर के बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(ङ) प्रत्येक फम ष की र्दशा में, जो अननवासी है, जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने
के लिए सभं ाववत आय या ऐसी आय का योग और क ौती के अधीन रहते हुए एक
करोड़ रुपए स े अधधक है, वहां ऐस े कर के बारह प्रनतशत की र्दर से पररकलित की
जाएगी ;
(च) र्देशी कंपनी स े लभन्द्न प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(i) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु
र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे कर के र्दो प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां संर्दत्त या संर्दत्त ककए जाने के लिए संभाववत आय या ऐसी आय
का योग और क ौती के अधीन रहते हुए र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे
कर के पांच प्रनतशत की र्दर से,
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा ।
(7) उन र्दशाओं में, जजनमें कर का संग्रहण, आय-कर अधधननयम की धारा 194ि के
परन्द्तुक के अधीन ककया जाना है, ऐसा संग्रहण, पहिी अनुसूची के भाग 2 में ववननठर्दषष्ट्
र्दरों से ककया जाएगा और उन र्दशाओं में, जहां कहीं ववठहत ककया गया हो, उसमें उपबंधधत
रीनत से पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा ।
(8) उन र्दशाओ ं में, जजनमें कर का संग्रहण, आय-कर अधधननयम की धारा 206ग के
अधीन ककया जाना है, ऐसा संग्रहण, उस धारा में ववननठर्दषष्ट् र्दरों स े ककया जाएगा और
उसमें,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
733
(क) प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब या उसके सर्दस्यों के रूप में
केवि कंपननयों से लमिकर बने व्यजक्तयों के संगम की र्दशा के लसवाय व्यजक्त-संगम
या व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की
धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जो अननवासी है, जहां,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है, ऐसे
कर के पंरह प्रनतशत की र्दर से ;
(iii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, र्दो करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है, ऐस े
कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ;
(iv) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे कर के सतैं ीस प्रनतशत की र्दर से :
परंतु जहां ऐसे व्यजक्त की आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग की
उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभाय ष है, वहां अधधभार की र्दर पच्चीस प्रनतशत से अधधक
नहीं होगी ;
(ि) व्यजक्तयों के संगम जो उसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों स े
लमिकर बना है, संगम की र्दशा में, जो अननवासी है,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(ग) प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी, जो अननवासी है, की र्दशा में,—
(i) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसे कर के सात प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया
है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और सग्रं हण के अधीन रहते
हुए, र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे कर के बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(घ) प्रत्येक फम ष की र्दशा में, जो अननवासी है, जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमोंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
734
का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया गया है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है
और संग्रहण के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे कर के
बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(ङ) र्देशी कंपनी से लभन्द्न, प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(i) जहा ं ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया
गया है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और संग्रहण के
अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए स े
अधधक नहीं है, ऐसे कर के र्दो प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां ऐसी रकम या ऐसी रकमों का योग, जजन्द्हें संगहृ ीत ककया
गया है या जजनके संगहृ ीत ककए जाने की संभावना है और संग्रहण के
अधीन रहते हुए, र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे कर के पांच प्रनतशत
की र्दर से,
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा ।
(9) उपधारा (10) के उपबंधों के अधीन रहत े हुए, उन र्दशाओं में, जजनमें आय-कर,
प्रवत्तृ र्दर या र्दरों से, आय-कर अधधननयम की धारा 172 की उपधारा (4) या धारा 174 की
उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन
प्रभाररत ककया जाना है या उक्त अधधननयम की धारा 192 के अधीन “वेतन” शीर् ष के
अधीन प्रभाय ष आय में से का ा जाना है, या उस पर संर्दत्त ककया जाना है या उक्त
अधधननयम की धारा 194त के अधीन क ौती की जानी है अथवा उक्त अधधननयम के
अध्याय 17ग के अधीन संर्देय “अधग्रम कर” की संगणना की जानी है, यथाजस्थनत, ऐसा
आय-कर या “अधग्रम कर”, पहिी अनुसूची के भाग 3 में ववननठर्दषष्ट् र्दर या र्दरों स े इस
प्रकार प्रभाररत ककया जाएगा, का ा जाएगा या संगखणत ककया जाएगा और ऐस े कर में,
प्रत्येक र्दशा में, उसमें उपबंधधत रीनत से, पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए,
बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु उन र्दशाओं में, जजनमें आय-कर अधधननयम के अध्याय 12 या अध्याय 12क
या धारा 115ञि या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चि या धारा 161
की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ि के उपबंध िागू होत े हैं,
“अधग्रम कर” की संगणना, यथाजस्थनत, इस उपधारा द्वारा अधधरोवपत र्दरों के या उस
अध्याय या धारा में ववननठर्दषष्ट् र्दरों के प्रनत ननर्देश स े की जाएगी :
परन्द्तु यह और कक आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत “अधग्रम कर” की रकम में, पहिी अनुसूची के
भाग 3 के, यथाजस्थनत, पैरा क, पैरा ि, पैरा ग, पैरा घ और पैरा ङ में यथा उपबंधधत
अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा, लसवाय ककसी र्देशी कंपनी की र्दशा
में, जजसकी आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115िकक या धारा 115िकि के अधीन
कर से प्रभाय ष है, ककसी व्यजष्ट् या अववभक्त ठहर्दं ू कु ुंब या व्यजक्तयों के संगम या
व्यजष्ट् यों के ननकाय, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की धारा 2
के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की र्दशा में, जजसकी आय
आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभाय ष है, या
ककसी ननवासी सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी आय, आय-कर अधधननयम की
धारा 115िकघ के अधीन या धारा 115िकङ के अधीन कर से प्रभाय ष है :
परन्द्तु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 115क, धारा 115कि,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
735
धारा 115कग, धारा 115कगक, धारा 115कघ, धारा 115ि, धारा 115िक,
धारा 115िि, धारा 115ििक, धारा 115ििग, धारा 115ििच, धारा 115ििछ,
धारा 115ििज, धारा 115ििझ, 115ििञ, धारा 115ङ, धारा 115ञि या
धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष ककसी आय के संबंध में पहिे परन्द्तुक के अधीन
संगखणत “अधग्रम कर” में,—
(क) प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -
ननकाय की, उसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों से लमिकर बने व्यजक्तयों के
संगम की र्दशा में, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की
धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जजसकी आय आय-कर अधधननयम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय
नहीं है और जजसकी कोई ऐसी आय नहीं है जो धारा 115िकग की उपधारा (1क) के
अधीन कर से प्रभाय ष है, जहां,—
(i) जहां कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु र्दो करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(iii) जहां कुि आय र्दो करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु पाचं करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ;
(iv) जहां कुि आय पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर” के
सतैं ीस प्रनतशत की र्दर से ;
(ि) प्रत्येक व्यजष्ट् या उसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों से लमिकर
बने व्यजक्तयों के संगम की र्दशा में के लसवाय, या व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह
ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के
उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की र्दशा में, जजसकी आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ के अधीन कोई आय है और जजसकी कोई ऐसी आय
नहीं है जो धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभाय ष है, जहां,—
(i) जहां कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु र्दो करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(iii) जहां कुि आय (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत
की आय सजम्मलित नहीं है) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़
रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ;
(iv) जहां कुि आय (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत
की आय सजम्मलित नहीं है) पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर”
के सतैं ीस प्रनतशत की र्दर स े ;
(v) जहां कुि आय (जजसमें िाभाशं के रूप में आय या आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत
की आय सजम्मलित है) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु जो उपिंर् (iii) औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
736
उपिंर् (iv) के अंतगतष नहीं आती है, ऐसे “अधग्रम कर” के पन्द्रह प्रनतशत की
र्दर से,
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु उस र्दशा में, जहां कुि आय में िाभांश के रूप में आय या आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की आय
सजम्मलित है, वहां आय के उस भाग पर संगखणत अधग्रम कर पर अधधभार की र्दर पन्द्रह
प्रनतशत से अधधक नहीं होगी :
परंतु यह और कक ककसी व्यजक्त की कुि आय जो आय-कर अधधननयम की धारा 10
के िंर् (4घ) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ग) में ननठर्दषष्ट् ववननठर्दषष्ट् ननधध है, जजसमें आय-कर
अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन कोई आय सजम्मलित
है, आय के उस भाग पर संगखणत अधग्रम कर को ककसी अधधभार द्वारा नहीं बढाया
जाएगा ;
(ग) उसके सर्दस्यों के रूप में केवि कंपननयों से लमिकर बने व्यजक्तयों के
संगम की र्दशा में,—
(i) जहां कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर” के
पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(घ) प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी, ऐसी सहकारी सोसाइ ी के लसवाय, जजसकी
आय, आय-कर अधधननयम की धारा 115िकघ और धारा 115िकङ के अधीन कर
से प्रभाय ष है, की र्दशा में,—
(i) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के सात प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर” के
बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(ङ) प्रत्येक फम ष या स्थानीय प्राधधकारी की र्दशा में, जहां कुि आय एक करोड़
रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर” के बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(च) प्रत्येक र्देशी कंपनी, ऐसी र्देशी कंपनी के लसवाय, जजसकी आय, आय-कर
अधधननयम की धारा 115िकक या धारा 115िकि के अधीन कर से प्रभाय ष है, की
र्दशा में,—
(i) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के सात प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) जहां कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर” के
बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(छ) र्देशी कंपनी से लभन्द्न, प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(i) जहां कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए
से अधधक नहीं है, ऐसे “अधग्रम कर” के र्दो प्रनतशत की र्दर से ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
737
(ii) जहां कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे “अधग्रम कर” के
पांच प्रनतशत की र्दर से,
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु यह भी कक उपरोक्त (क) और (ि) में वखणतष व्यजक्तयों की र्दशा में, जजसकी
आय-कर अधधननयम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी
आय,—
(क) पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम पचास िाि रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम
पर आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो पचास िाि रुपए से अधधक है ;
(ि) एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु र्दो करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर
आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है ;
(ग) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम र्दो करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर
आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो र्दो करोड़ रुपए से अधधक है ;
(घ) पांच करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में
संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की रकम पांच करोड़ रुपए की कुि आय पर
“अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर आय की उस रकम स े अधधक नहीं
होगी, जो पांच करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु उपरोक्त (ग) में वखणतष व्यजक्तयों की र्दशा में, जजसकी आय-कर अधधननयम
की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी आय,—
(क) पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम पचास िाि रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम
पर आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो पचास िाि रुपए से अधधक है ;
(ि) एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में
संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर
“अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर आय की उस रकम स े अधधक नहीं
होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु उपरोक्त (घ) में वखणषत व्यजक्तयों की र्दशा में, जजनकी आय-कर अधधननयम
की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी आय,—
(क) एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर
आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है ;
(ि) र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय
कुि रकम और उस पर अधधभार की रकम र्दस करोड़ रुपए की कुि आय परअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
738
“अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर आय की उस रकम स े अधधक नहीं
होगी, जो र्दस करोड़ रुपए स े अधधक है ;
परन्द्तु उपरोक्त (ङ) में वखणषत व्यजक्तयों की र्दशा में, जजसकी आय-कर अधधननयम
की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए स े
अधधक है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार
की रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर
आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक ऐसी प्रत्येक कंपनी की र्दशा में, जजसकी आय-कर अधधननयम की
धारा 115ञि के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से
अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में
संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर
“अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर आय की उस रकम स े अधधक नहीं होगी, जो
एक करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक ऐसी प्रत्येक कंपनी की र्दशा में, जजसकी आय-कर अधधननयम की
धारा 115ञि के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय है और ऐसी आय र्दस करोड़ रुपए स े
अधधक है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार
की रकम र्दस करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर
आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो र्दस करोड़ रुपए से अधधक है :
परन्द्तु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 115ििङ की उपधारा (1) के
िंर् (i) के अधीन कर स े प्रभाय ष पहिे परन्द्तुक के अधीन संगखणत “अधग्रम कर” को ऐस े
कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया
जाएगा :
परन्द्तु यह भी कक ऐसी प्रत्येक र्देशी कंपनी की र्दशा में, जजसकी आय, आय-कर
अधधननयम की धारा 115िकक या धारा 115िकि के अधीन कर से प्रभाय ष है, पहिे
परन्द्तुक के अधीन संगखणत “अधग्रम कर को” ऐस े “अधग्रम कर” के र्दस प्रनतशत की र्दर से
पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा :
परंतु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग की उपधारा (1क) के
अधीन कर से प्रभाय ष आय के संबंध में, पहिे परंतुक के अनुसार संगखणत “अधग्रम कर”,
संघ के प्रयोजनों के लिए व्यजष्ट् या ठहर्दं ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्तयों के संगम या
व्यजष्ट् यों के ननकाय, चाहे ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर अधधननयम की धारा 2 के
िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की र्दशा में संगखणत
अधधभार द्वारा बढा ठर्दया जाएगा,—
(i) पांच िाि रुपए स े अधधक ककंतु एक करोड़ रुपए से अनधधक कुि आय
वािे, (आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों
के अधीन िाभांश या आय के माध्यम से आय सठहत), “ऐसे अधग्रम कर के
र्दस प्रनतशत की र्दर पर” ;
(ii) एक करोड़ रुपए से अधधक ककंतु र्दो करोड़ रुपए से अनधधक कुि आय
वािे, (आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों
के अधीन िाभांश या आय के माध्यम से आय सठहत), “ऐसे अधग्रम कर के
पन्द्रह प्रनतशत की र्दर पर” ;
(iii) र्दो करोड़ रुपए से अधधक कुि आय वािे, (आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन िाभांश या आय के
माध्यम से आय को छोड़कर), “ऐसे अधग्रम कर के बीस प्रनतशत की र्दर पर” ; औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
739
(iv) र्दो करोड़ रुपए से अधधक कुि आय वािे, ककंतु ऊपर िंर् (iii) के अंतगतष
नहीं आने वािे (आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क
के उपबंधों के अधीन िाभांश या आय के माध्यम से आय सठहत), “ऐसे अधग्रम कर
के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर पर” :
परंतु यह भी कक जहां धारा 115िकग की उपधारा (1क) के उपबंध िागू होने की
र्दशा में तथा कुि आय के अंतगतष आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और
धारा 112क के उपबंधों के अधीन प्रभाय ष िाभांश या आय के माध्यम से कोई आय भी है,
आय के उस भाग के संबंध में “अधग्रम कर” पर अधधभार की र्दर है, पन्द्रह प्रनतशत से
अधधक नहीं होगा :
परंतु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 10 के िंर् (4घ) के स्पष्ट् ीकरण के
िंर् (ग) में ननठर्दषष्ट् ककसी ववननठर्दषष्ट् ननधध की र्दशा में, जजसकी आय, धारा 115िकग की
उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभाय ष है और जहां ऐसी आय में आय-कर अधधननयम की
धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन कोई आय सजम्मलित है, आय के
उस भाग पर संगखणत अधग्रम कर को ककसी अधधभार द्वारा नहीं बढाया जाएगा :
परंतु यह भी कक केवि कंपननयों के इसके सर्दस्यों से लमिकर बने व्यजक्तयों के
संगम की र्दशा में तथा धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन प्रभाय ष आय पर,
“अधग्रम कर” पर अधधभार की र्दर भी है, पन्द्रह प्रनतशत से अधधक नहीं होगा :
परन्द्तु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में
ननठर्दषष्ट् ऐसे प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहर्दं ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्तयों के संगम या व्यजष्ट् यों
के ननकाय, चाहे ननगलमत हो या नहीं, या प्रत्येक कृत्रत्रम न्द्यानयक व्यजक्त की र्दशा में,
जजसकी आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग के अधीन कर से प्रभाय ष कुि आय
ननम्नलिखित से अधधक है,—
(क) पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंत ु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम पचास िाि रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम
पर आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो पचास िाि रुपए से अधधक है ;
(ि) एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंत ु र्दो करोड़ रुपए से अधधक नहीं है,
ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम और उस पर अधधभार की
रकम एक करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर
आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधधक है ;
(ग) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसी आय पर “अधग्रम कर” के रूप में संर्देय
कुि रकम और उस पर अधधभार की रकम र्दो करोड़ रुपए की कुि आय पर “अधग्रम
कर” के रूप में संर्देय कुि रकम पर आय की उस रकम से अधधक नहीं होगी, जो
र्दो करोड़ रुपए से अधधक है ;
परन्द्तु यह भी कक ऐसी प्रत्येक ननवासी सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी आय,
आय-कर अधधननयम की धारा 115िकघ या धारा 115िकङ के अधीन कर से प्रभायष है,
पहिे परंतुक के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम को ऐसे “अधग्रम कर” के र्दस प्रनतशत
की र्दर से पररकलित अधधभार संघ के प्रयोजनों के लिए बढा ठर्दया जाएगा ।
(10) उन र्दशाओं में, जजनमें पहिी अनुसूची के भाग 3 का पैरा ‘क’ िागू होता है या
आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िर्ं (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् ककसी व्यजक्त याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
740
ठहर्दं ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्तयों के संगम या व्यजष्ट् यों के ननकाय, चाहे ननगलमत हो या
नहीं या प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त, जो एक ननवासी है, की र्दशा में, जजसकी आय
आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभाय ष है,
जहां ननधाषररती ने पूववष र् ष में या, यठर्द आय-कर अधधननयम के ककसी उपबंध के आधार पर
आय-कर पूववष र् ष से लभन्द्न ककसी अवधध की आय के संबंध में प्रभाररत ककया जाना है, ऐसी
अन्द्य अवधध में कुि आय के अनतररक्त पांच हजार रुपए से अधधक कोई शुद्ध कृवर्-आय
भी है और कुि आय र्दो िाि पचास हजार रुपए से अधधक है, वहां प्रवत्तृ र्दर या र्दरों से,
उक्त अधधननयम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या
धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन आय-कर प्रभाररत करन े में अथवा उक्त अधधननयम
के अध्याय 17ग के अधीन संर्देय “अधग्रम कर” की संगणना करन े में,—
(क) शुद्ध कृवर्-आय को, कुि आय के संबंध में, केवि यथाजस्थनत, ऐसा आय-
कर या “अधग्रम कर” प्रभाररत या संगखणत करन े के प्रयोजन के लिए, िंर् (ि) में
उपबंधधत रीनत से ठहसाब में लिया जाएगा, मानो शुद्ध कृवर्-आय कुि आय के प्रथम
र्दो िाि पचास हजार रुपए के पश्चात ् कुि आय में समाववष्ट् हो, ककंतु कर के
र्दानयत्वाधीन न हो ; और
(ि) यथाजस्थनत, ऐसा आय-कर या “अधग्रम कर” ननम्नलिखित रीनत से प्रभाररत
या संगखणत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
(i) कुि आय और शुद्ध कृवर्-आय को संकलित ककया जाएगा और
संकलित आय के संबंध में आय-कर या “अधग्रम कर” की रकम, उक्त पैरा क
या धारा 115िकग की उपधारा (1क) में ववननठर्दषष्ट् र्दरों स े ऐसे अवधाररत की
जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुि आय हो ;
(ii) शुद्ध कृवर्-आय में र्दो िाि पचास हजार रुपए की रालश बढा र्दी
जाएगी और इस प्रकार बढाई गई शुद्ध कृवर्-आय के सबं ंध में आय-कर या
“अधग्रम कर” की रकम, उक्त पैरा क या धारा 115िकग की उपधारा (1क) में
ववननठर्दषष्ट् र्दरों से ऐस े अवधाररत की जाएगी, मानो शुद्ध कृवर्-आय, कुि आय
हो ;
(iii) उपिंर् (i) के अनुसार अवधाररत आय-कर या “अधग्रम कर” की
रकम में से उपिंर् (ii) के अनुसार अवधाररत, यथाजस्थनत, आय-कर या
“अधग्रम कर” की रकम घ ा र्दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त रालश, कुि आय
के संबंध में, यथाजस्थनत, आय-कर या “अधग्रम कर” होगी :
परन्द्तु ऐसे प्रत्येक व्यजष्ट् की र्दशा में, जो पहिी अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की
मर्द (II) में ननठर्दषष्ट् भारत में ननवासी है और पूववष र् ष के र्दौरान ककसी समय साि वर् ष या
उसस े अधधक, ककंतु अस्सी वर् ष स े कम की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐस े प्रभावी
होंगे मानो “र्दो िाि पचास हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “तीन िाि रुपए” शब्र्द रि े
गए हों :
परन्द्तु यह और कक ऐसे प्रत्येक व्यजष्ट् की र्दशा में, जो पहिी अनुसूची के भाग 3 के
पैरा क की मर्द (III) में ननठर्दषष्ट् भारत में ननवासी है और पूववष र् ष के र्दौरान ककसी समय
अस्सी वर् ष या उससे अधधक की आय ु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो
“र्दो िाि पचास हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पांच िाि रुपए” शब्र्द रि े गए हों :
परन्द्तु यह भी कक आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) मेंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
741
ननठर्दषष्ट् प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहर्दं ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्तयों के संगम या व्यजष्ट् यों के
ननकाय, चाहे ननगलमत हो या नहीं या प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त, की र्दशा में जो
ननवासी है, जजसकी आय आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग की उपधारा (1क) के
अधीन कर से प्रभाय ष है, इस उपधारा के उपबंधों का वैस े ही प्रभाव होगा मानो “र्दो िाि
पचास हजार रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “तीन िाि रुपए” शब्र्द रि ठर्दए गए हों :
परंतु यह भी कक इस प्रकार सकं लित आय-कर या “अधग्रम कर” की रकम पर, प्रत्येक
र्दशा में पररकलित अधधभार इस धारा में उपबंधधत रीनत में, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा
ठर्दया जाएगा ;
(11) उपधारा (1) से उपधारा (3) में यथा ववननठर्दषष्ट् और उसमें उपबंधधत रीनत स े
पररकलित, संघ के प्रयोजनों के लिए, अधधभार द्वारा बढाई गई आय-कर की रकम को,
ऐसे आय-कर और अधधभार पर चार प्रनतशत की र्दर से पररकलित “आय-कर पर स्वास््य
और लशिा उपकर” नाम से ज्ञात, अनतररक्त अधधभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और
बढा ठर्दया जाएगा, जजसस े सावत्रषत्रक स्तर की क्वालि ी की स्वास््य सेवाओं तथा बुननयार्दी
लशिा और माध्यलमक और उच्चतर लशिा उपिब्ध और उसका ववत्तपोर्ण करन े की सरकार
की प्रनतबद्धता को पूरा ककया जा सके ।
(12) उपधारा (4) से उपधारा (10) में यथा ववननठर्दषष्ट् और उसमें उपबंधधत रीनत से
पररकलित, संघ के प्रयोजनों के लिए, अधधभार द्वारा बढाई गई आय-कर की रकम को,
ऐसे आय-कर और अधधभार पर चार प्रनतशत की र्दर से पररकलित “आय-कर पर स्वास््य
और लशिा उपकर” नाम से ज्ञात, अनतररक्त अधधभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और
बढा ठर्दया जाएगा, जजससे सावत्रषत्रक स्तर की क्वालि ी की स्वास््य सेवाओं और बुननयार्दी
लशिा और माध्यलमक और उच्चतर लशिा उपिब्ध कराने और उसका ववत्तपोर्ण करन े की
सरकार की प्रनतबद्धता को पूरा ककया जा सके :
परन्द्तु इस उपधारा की कोई बात, उन र्दशाओं में िागू नहीं होगी, जजनमें
उपधारा (5), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8) में उजल्िखित आय-कर
अधधननयम की धाराओं के अधीन कर की क ौती या संग्रहण ककया जाना है, यठर्द स्रोत पर
कर की क ौती या स्रोत पर कर के संग्रहण के अधीन रहत े हुए आय को र्देशी कंपनी और
ककसी अन्द्य व्यजक्त को, जो भारत में ननवासी है, संर्दत्त ककया जाता है :
परंतु यह और कक इस उपधारा में अंतववष्ट्ष कोई बात, आय-कर अधधननयम की
धारा 10 के िंर् (4घ) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ग) में ननठर्दषष्ट् ककसी ववननठर्दषष्ट् ननधध के
आय-कर की बाबत जैसा कक उपधारा (9) में ववननठर्दषष्ट् ककया गया है, जजसकी संगणना
आय-कर अधधननयम की धारा 115कघ की उपधारा (1) के िंर् (क) में ननठर्दषष्ट् आय पर
की गई है, िागू नहीं होगी ।
(13) इस धारा और पहिी अनुसूची के प्रयोजनों के लिए,—
(क) “र्देशी कंपनी” से कोई भारतीय कंपनी या कोई अन्द्य ऐसी कंपनी अलभप्रेत
है, जजसने 1 अप्रैि, 2023 को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष के लिए, आय-कर
अधधननयम के अधीन आय-कर के र्दानयत्वाधीन अपनी आय के संबंध में ऐसी आय
में से संर्देय िाभांशों (जजनके अंतगतष अधधमानी शेयरों पर िाभांश भी हैं) की घोर्णा
और भारत में उनके संर्दाय के लिए इंतजाम कर लिए हैं ;
(ि) “बीमा कमीशन” से बीमा कारबार (जजसके अन्द्तगतष बीमा पालिलसयों को
जारी रिन,े उनका नवीकरण या उन्द्हें पुनरुज्जीववत करने से संबंधधत कारबार है) कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
742
याचना करने या उस े उपाप्त करन े के लिए कमीशन के रूप में या अन्द्यथा कोई
पाररश्रलमक या इनाम अलभप्रेत है ;
(ग) ककसी व्यजक्त के संबंध में, “शुद्ध कृवर्-आय” से, पहिी अनूसूची के भाग
4 में अंतववष्ट्ष ननयमों के अनुसार संगखणत, उस व्यजक्त की ककसी भी स्रोत स े
व्युत्पन्द्न कृवर्-आय की कुि रकम अलभप्रेत है ;
(घ) अन्द्य सभी शब्र्दों या पर्दों के, जो इस धारा में या पहिी अनुसूची में
प्रयुक्त हैं, ककन्द्त ु इस उपधारा में पररभावर्त नहीं हैं और आय-कर अधधननयम में
पररभावर्त हैं, वही अथ ष होंगे, जो उनके उस अधधननयम में हैं ।
अध्याय 3
प्रत्यक्ष कर
आय-कर
धारा 2 का 3. आय-कर अधधननयम की धारा 2 में,—
संशोधन ।
(क) िंर् (19ि) में “या आय-कर अपर आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों
का िोप ककया जाएगा ;
(ि) िंर् (24) में, उपिंर् (xviiि) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपिंर् 1 अप्रैि,
2024 से अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“(xviiग) धारा 56 की उपधारा (2) के िंर् (xii) में ननठर्दषष्ट् कोई रालश ;
“(xviiघ) धारा 56 की उपधारा (2) के िंर् (xiii) में ननठर्दषष्ट् कोई
रालश ;”;
(ग) उपधारा (28ग) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(28गक) “संयुक्त आयुक्त (अपीि)” से ऐसा व्यजक्त अलभप्रेत है, जजस े
धारा 117 की उपधारा (1) के अधीन आय-कर संयुक्त आयुक्त (अपीि) या
आय-कर अपर आयुक्त (अपीि) के रूप में ननयुक्त ककया गया है ;’;
(घ) िंर् (37क) के उपिंर् (ii)में, “194ि” अंकों और अिर के पश्चात ्
“194िक” अंक और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(ङ) िंर् (42क) के स्पष्ट् ीकरण 1 के िंर् (i) में, उपिंर् (जज) के पश्चात,्
ननम्नलिखित उपिंर्, 1 अप्रैि, 2024 से अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(जझ) ककसी ऐसी पूंजी आजस्त की र्दशा में,—
(क) जो धारा 47 के िंर् (viiघ) में यथाननठर्दषष्ट् जमा ककए गए
स्वण ष के संबंध में जारी कोई इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त है, उसमें उस
अवधध को सजम्मलित ककया जाएगा, जजसके लिए ऐसे स्वण ष को
ननधाषररती द्वारा उसके इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त के रूप में संपररवतनष से
पूव ष धाररत ककया गया था ;
(ि) जो धारा 47 के िंर् (viiघ) में यथाननठर्दषष्ट् इिैक्राननक स्वणष
प्राजप्त के संबंध में जारी ककया गया स्वण ष है, उसमें उस अवधध को
सजम्मलित ककया जाएगा, जजसके लिए ऐसी इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त को
ननधाषररती द्वारा उसके स्वण ष में संपररवतनष से पूव ष धाररत ककया गया
था ।”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
743
धारा 9 का 4. आय-कर अधधननयम की धारा 9 की उपधारा (1) के िंर् (viii) के स्थान पर,
संशोधन । ननम्नलिखित िंर् 1 अप्रैि, 2024 से रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(viii) भारत स े बाहर उर्दभूत होने वािी कोई आय, जो धारा 2 के िंर् (24)
के उपिंर् (xviiक) में ननठर्दषष्ट् कोई धनरालश है, जजसे भारत में ननवासी ककसी व्यजक्त
द्वारा,—
(क) 5 जुिाई, 2019 को या उसके पश्चात ् ककसी अननवासी को, जो
कंपनी नहीं है या ककसी ववर्देशी कंपनी को ; या
(ि) जजसे 1 अप्रैि, 2023 को या उसके पश्चात ् ककसी ऐस े व्यजक्त को,
जो धारा 6 के िंर् (6) के अथांतगषत भारत में मामूिी तौर पर ननवासी नही ं
है,
संर्दत्त ककया गया है ।”।
5. आय-कर अधधननयम की धारा 10 में,— धारा 10 का
संशोधन ।
(क) िंर् (4घ) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ग) के उपिंर् (i) की मर्द (I) में, “जो
1992 का 15 भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष अधधननयम, 1992 या अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा
केंर प्राधधकरण अधधननयम, 2019 के अधीन बनाए गए भारतीय प्रनतभूनत और
2019 का 50
ववननमय बोर् ष (वैकजल्पक ववननधान ननधध) ववननयम, 2012 के अधीन” शब्र्दों,
अंकों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “जो भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष
1992 का 15 अधधननयम, 1992 के अधीन बनाए गए भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष
(वैकजल्पक ववननधान ननधध) ववननयम, 2012 या अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर
2019 का 50 प्राधधकरण अधधननयम, 2019 के अधीन बनाए गए अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर
प्राधधकरण (ननधध प्रबंध) ववननयम, 2022 के अधीन ववननयलमत” शब्र्द, अंक और
कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ि) िंर् (4ङ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर्, 1 अप्रैि, 2024 से रिा
जाएगा, अथाषत ् :—
“(4ङ) ननम्नलिखित के पररणामस्वरूप ककसी अननवासी भारतीय को
उद्भूत हुई या प्राप्त कोई आय,—
(i) अपररर्देय अधग्रम संववर्दाओं या अपत ीय व्युत्पन्द्न लिितों या
ओवर-र्द-काउं र व्युत्पन्द्नीय के अंतरण ; या
(ii) अपत ीय व्युत्पन्द्न लिितों के ववतरण,
जो ककसी धारा 80िक की उपधारा (1क) में ननठर्दषष्ट् ककसी अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय
सेवा केंर की अपत ीय बकैं कारी यूनन के साथ ककया गया है, जो यथाववठहत
शतों को पूरा करता है ;
(ग) िंर् (4छ) के स्थान पर, 1 अप्रैि, 2024 से ननम्नलिखित िंर् रिे
जाएंगे, अथाषत ् :—
‘(4छ) ककसी अननवासी द्वारा ननम्नलिखित से प्राप्त कोई आय,—
(i) प्रनतभूनत पो षफोलियो या ववत्तीय उत्पार्द या ऐसे अननवासी के
ननलमत्त ककसी पो षफोलियो प्रबंधक द्वारा प्रबंध की गई या प्रशालसत
ननधधयों ; या
(ii) ऐसे व्यजक्त द्वारा ककए जा रहे ऐसे कायषकिापों, जो केंरीयअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
744
सरकार द्वारा राजपत्र में अधधसूधचत ककए जांए,
के ककसी अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर, जैसा कक धारा 80िक की
उपधारा (1क) में ननठर्दषष्ट् है, द्वारा ककसी अपत ीय बकैं कारी इकाई के पास
रिे गए िेिे, उस सीमा तक, जजस तक ऐसी आय भारत से बाहर उर्दभूत या
उत्पन्द्न होती है और जजसे भारत में उर्दभूत या उत्पन्द्न हुई नहीं समझा गया है ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “पो षफोलियो प्रबंधक” का
वही अथ ष होगा, जो उसका अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण
अधधननयम, 2019 के अधीन बनाए गए अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण 2019 का 50
(पूंजी बाजार मध्यवती) ववननयम, 2021 के ववननयम 2 के उपववननयम (1) के
िंर् (य) में है ;
(4ज) ककसी अननवासी या धारा 80िक की उपधारा (1क) में ननठर्दषष्ट्
अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर, जो ककसी वायुयान को पट् े पर र्देने के मुख्य
कारबार में िगा हुआ है, जो धारा 80िक की उपधारा (1क) में ननठर्दषष्ट्
अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर की ककसी इकाई की र्देशी कंपनी है, जो मुख्यत:
ककसी वायुयान को पट् े पर र्देने के कारबार में िगी हुई है, जजसने 31 माच,ष
2026 को या उससे पूव ष अपने प्रचािन प्रारंभ ककए हैं, के साम्य शेयरों के
अंतरण से उद्भूत पूंजी िाभ के माध्यम से कोई आय :
परंतु इस िंर् के उपबंध ऐसी र्देशी कंपनी के ननम्नलिखित के भीतर
आने वािे ककसी ननधाषरण वर्ष से सुसंगत ककसी पूव ष वर् ष में साम्या शेयरों के
अंतरण से उद्भूत पूंजी अलभिाभ को िागू होंगे,—
(क) उस पवू ष वर् ष स े सुसंगत ननधाषरण वर् ष से प्रारंभ होने वािे र्दस
ननधाषरण वर् ष की अवधध, जजसमें र्देशी कंपनी ने अपने प्रचािन आरंभ
ककए हैं ; या
(ि) 1 अप्रैि, 2024 को आरंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से आरंभ
होने वािे र्दस ननधाषरण वर्ष, जहां िंर् (क) में ननठर्दषष्ट् अवधध 1 अप्रैि,
2034 से पूव ष समाप्त हो जाती है ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “वायुयान” से कोई वायुयान
या हैिीकाप् र या ककसी वायुयान या हैिीकाप् र का कोई इंजन या उसका कोई
भाग, अलभप्रेत है ;’।
(घ) िंर् (10घ) में,—
(i) र्दसू रे परंतुक में, “यथाजस्थनत, धारा 80ग की उपधारा (3क) या
धारा 88 की उपधारा (2क) के स्पष्ट् ीकरण” शब्र्दों, अंकों, अिरों और कोष्ट्िकों
के स्थान पर, “धारा 80ग की उपधारा (3क)” शब्र्द, अंक, अिर और कोष्ट्िक
रिे जाएंगे ;
(ii) छिवें परंतुक के स्थान पर, ननम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैि, 2024 से,
अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“परंतु यह भी कक इस िंर् में अंतववष्ट्ष कोई बात, 1 अप्रैि, 2023
को या उसके पश्चात ् जारी ककसी यूनन संबद्ध बीमा पालिसी स े लभन्द्न
ककसी जीवन बीमा पालिसी के संबंध में िागू नहीं होगी, यठर्द ऐसी
पालिसी की अवधध के र्दौरान ककसी पूववष र् ष के लिए संर्देय प्रीलमयम कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
745
रकम पांच िाि रुपए से अधधक है :
परंतु यह भी कक यठर्द 1 अप्रैि, 2023 को या उसके पश्चात ् जारी
यूनन संबद्ध बीमा पालिसी से लभन्द्न एक से अधधक जीवन बीमा
पालिसी के लिए ककसी व्यजक्त द्वारा प्रीलमयम संर्देय है, तो इस िंर् के
उपबंध यूनन संबद्ध बीमा पालिलसयों से लभन्द्न केवि उन जीवन बीमा
पालिलसयों के संबंध में िाग ू होंगे, जहां प्रीलमयम की समग्र रकम उन
पालिलसयों में स े ककसी की अवधध के र्दौरान ककन्द्हीं पूववष र्ों में छिवें
परंतुक में ननठर्दषष्ट् रकम से अधधक नहीं होती है :
परंतु यह भी कक चौथे, पांचवें, छिवें और सातवें परंतुकों के उपबंध
ककसी व्यजक्त की मत्ृ यु पर प्राप्त ककसी रालश को िागू नहीं होंगे :”;
(ङ) िंर् (12ि) के पश्चात,् ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(12ग) अजग्नपथ स्कीम के अधीन अभ्यावेलशत ककसी व्यजक्त या उसके
नामननर्देलशती को अजग्नवीर समग्र ननधध से कोई संर्दाय ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “अजग्नवीर समग्र ननधध” और
“अजग्नपथ स्कीम” का वही अथ ष होगा, जो धारा 80गगज में क्रमश: उनका
है ;’;
(च) िंर् (22ि) में, तीसरे परंतुक के पश्चात ् ननम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैि,
2024 से अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह भी कक इस िंर् में अंतववष्ट्ष कोई बात, 1 अप्रैि, 2024 को
या उसके पश्चात ् प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष की समाचार
एजेंसी की ककसी आय को िागू नहीं होगी ;”;
(छ) िंर् (23ििच) का िोप ककया जाएगा ;
(ज) िंर् (23ग) में,—
(I) 1 अक्तूबर, 2023 से,—
(i) पहिे परंतुक में, िंर् (iv) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपिंर्
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(iv) ककसी अन्द्य र्दशा में, जहां ककसी ननधध या न्द्यास या
संस्था या ववश्वववद्यािय या अन्द्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताि
या अन्द्य आयुववज्ञष ान संस्था के कक्रयाकिाप,—
(अ) ऐसे ननधाषरण वर् ष से, जजसमें उक्त अनुमोर्दन की
ईप्सा की गई है, सुसंगत पूववष र् ष के प्रारंभ के कम स े कम
एक मास पूव ष आरंभ नहीं हुए है ;
(आ) आरंभ हो गए हैं और ऐसे कक्रयाकिापों के प्रारंभ
के पश्चात ् ककसी भी समय ऐसे िाग ू होने की तारीि को
या उसके पूव ष समाप्त होने वािे ककसी पूववष र् ष के लिए
उपिंर् (iv) या उपिंर् (v) या उपिंर् (vi) अथवा
उपिंर् (viक) या धारा 11 या धारा 12 के िागू होने के
कारण कुि आय से उक्त ननधध या न्द्यास या संस्था या
ववश्वववद्यािय या अन्द्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताि याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
746
अन्द्य आयुववषज्ञान संस्था की कोई आय या उसका भाग
अपवजजतष नहीं ककया गया है,”;
(ii) र्दसू रे परंतुक में,—
(क) िंर् (ii) में,—
(अ) आरंलभक भाग में, “िंर् (iii)”, शब्र्द, कोष्ट्िकों और
अंकों के पश्चात,् “या िंर् (iv) का उपिंर् (आ)” शब्र्द,
कोष्ट्िक, अंक और अिर अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(आ) उपिंर् (ि) में, मर्द (आ) के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(आ) यठर्द उसका समाधान नहीं होता है तो
वह,—
(I) पहिे परंतुक के िंर् (ii) या िंर् (iii)
में ननठर्दषष्ट् र्दशा में ऐसे आवेर्दन को नामंजूर करते
हुए तथा अपना अनुमोर्दन भी रद्र्द करते हुए ;
(II) पहिे परंतुक के िंर् (iv) के
उपिंर् (आ) में ननठर्दषष्ट् र्दशा में, ऐसा आवेर्दन
नामंजूर करते हुए,
उसे सुनवाई का एक युजक्तयुक्त अवसर प्रर्दान करने के
पश्चात ् लिखित में आर्देश पाररत करेगा ;”;
(ि) िंर् (iii) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“(iii) जहां आवेर्दन उक्त परंतुक के िंर् (iv) के उपिंर्
(अ) या आवेर्दन उक्त परंतुक के िंर् (iv) के अधीन, जैसा
वह ववत्त अधधननयम, 2023 द्वारा इसके संशोधन के पूव ष था,
ककया जाता है, तो वह उस ननधाषरण वर् ष के, जजससे
अनुमोर्दन की ईप्सा की गई है, तीन वर् ष की अवधध के लिए
अनंनतम रूप से इसका अनुमोर्दन करते हुए लिखित में आर्देश
पाररत करेगा, और ऐसे आर्देश की एक प्रनत ननधध या न्द्यास
या संस्था या ववश्वववद्यािय या अन्द्य शैक्षिक संस्था अथवा
अस्पताि या अन्द्य आयुववषज्ञान संस्था को भेजेगा :”;
(II) तीसरे परंतुक में,—
(i) स्पष्ट् ीकरण 2 में,—
(क) िंर् (i) में,—
(अ) परंतुक में, “और”, शब्र्द का िोप ककया जाएगा ;
(आ) परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक पहिे परंतुक के उपबंध केवि
तभी िागू होंगे, यठर्द समग्र ननधध से उपयोजन के
समय इस िंर् के बारहवें, तेरहवें और इक्कीसवेंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
747
परंतुकों तथा स्पष्ट् ीकरण 2 और स्पष्ट् ीकरण 3 में
ववननठर्दषष्ट् शतों का कोई अनतक्रमण न हुआ हो :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक के अधीन
ववननधान की गई या वापस जमा की गई रकम को पूत ष
या धालमकष प्रयोजनों के लिए उपयोजन नहीं माना
जाएगा जब तक ऐसा ववननधान या जमा, ऐसे पूववष र् ष
के अंत से, जजसके र्दौरान समग्र ननधध से ऐसे
उपयोजन के रूप में ककया गया था, पांच वर् ष की
अवधध के भीतर नहीं ककया जाता :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक में अंतववष्ट्ष कोई
बात िागू नहीं होगी जहां 31 माच,ष 2021 को या
उसके पूव ष समग्र ननधध से उपयोजन ककया जाता है ;”;
(ि) िंर् (ii) में, परंतुक के पश्चात ् ननम्नलिखित परंतुक
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक पहिे परंतुक के उपबंध केवि तभी
िागू होंगे यठर्द ऋण या उधार से ऐसे उपयोजन के र्दौरान
इस िंर् के बारहवें, तेरहवें और इक्कीसवें परंतुकों तथा
स्पष्ट् ीकरण 2 और स्पष्ट् ीकरण 3 में ववननठर्दषष्ट् शतों का
कोई अनतक्रमण न हुआ हो :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक के अधीन पूत ष या
धालमकष प्रयोजनों के लिए पुनः संर्दत्त रकम को उपयोजन नहीं
माना जाएगा जब तक ऐसा पुनः संर्दाय ऐस े पूववष र् ष के अतं
से, जजसके र्दौरान ऐसा उपयोजन ऋण या उधार से ककया
गया था, पांच वर् ष की अवधध के भीतर नहीं ककया जाता :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक में अंतववष्ट्ष कोई बात
वहां िागू नहीं होगी, जहां समग्र ननधध से उपयोजन
31 माच,ष 2021 को या उसके पूव ष ककया जाता है ; और”;
(ग) िंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् 1 अप्रैि, 2024
से अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(iii) यथाजस्थनत, उपिंर् (iv), उपिंर् (v) या
उपिंर् (vi) अथवा उपिंर् (viक) में ननठर्दषष्ट् ननधध या न्द्यास
या संस्था या ववश्वववद्यािय या अन्द्य शैक्षिक संस्था अथवा
अस्पताि या अन्द्य आयुववज्ञष ान संस्था अथवा धारा 12कि के
अधीन रजजस्रीकृत न्द्यास या संस्था को, बारहवें परंतुक में
ननठर्दषष्ट् रकम से लभन्द्न, उपिंर् (iv), उपिंर् (v) या
उपिंर् (vi) अथवा उपिंर् (viक) में ननठर्दषष्ट् ननधध या न्द्यास
या संस्था या ववश्वववद्यािय या अन्द्य शैक्षिक संस्था अथवा
अस्पताि या अन्द्य आयुववज्ञष ान संस्था की आय स े प्रत्यय की
गई या संर्दत्त कोई रकम, ऐसी प्रत्यय की गई या संर्दत्त रकम
के केवि पचासी प्रनतशत की सीमा तक केवि पूत ष या
धालमकष प्रयोजनों के लिए उपयोजन मानी जाएगी ।”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
748
(ii) स्पष्ट् ीकरण 3 में, िंर् (ग) में, “को या उसके पूव”ष शब्र्दों के
स्थान पर, “से कम से कम र्दो मास पूव”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(III) पंरहवें परंतुक के स्पष्ट् ीकरण 2 में,—
(अ) िंर् (घ) में, “अंनतम रूप प्रर्दान कर ठर्दया गया है ;” शब्र्दों के
स्थान पर, “अंनतम रूप प्रर्दान कर ठर्दया गया है ; या” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(आ) िंर् (घ) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“(ङ) इस िंर् के पहिे परंतुक में ननठर्दषष्ट् आवेर्दन पूण ष नहीं
है या इसमें लम्या या गित सूचना अंतववष्ट्ष है ।”;
(IV) उन्द्नीसवें परंतुक के स्पष्ट् ीकरण में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
(क) “िंर् (46) के अधीन अधधसूधचत” शब्र्दों, कोष्ट्िक और अंकों के
स्थान पर, “िंर् (46) या िंर् (46क) के अधीन अधधसूधचत” शब्र्द,
कोष्ट्िक और अंक रिे जाएंगे ;
(ि) “िंर् (46) के अधीन” शब्र्दों, कोष्ट्िक और अंकों के स्थान पर,
“यथाजस्थनत, िंर् (46) या िंर् (46क) के अधीन” शब्र्द, कोष्ट्िक और
अंक रिे जाएंगे ;
(V) बीसवें परंतुक में, “उस धारा के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर”
शब्र्दों के स्थान पर, “उस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन
अनुज्ञात समय के भीतर” शब्र्द, कोष्ट्िक और अंक रिे जाएंगे ;
(झ) िंर् (23ङि) का िोप ककया जाएगा ;
(ञ) िंर् (23चङ) में प्रारंलभक पैरा में, “ब्याज” शब्र्द के स्थान पर 1 अप्रैि,
2024 से, “ब्याज, धारा 56 की उपधारा (2) के िंर् (xii) में ननठर्दषष्ट् कोई रालश”
शब्र्द, अंक, कोष्ट्िक और अिर रिे जाएंगे ;
( ) िंर् (26क) का िोप ककया जाएगा ;
(ि) िंर् (26ककक) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिे जाएंगे और 1 अप्रैि,
1990 से रिे गए समझे जाएगं े, अथाषत ् :—
‘(26ककक) ककसी व्यजष्ट् की र्दशा में, जो लसजक्कमी है,—
(क) जजसे लसजक्कम राज्य में ककसी स्रोत से ; या
(ि) प्रनतभूनतयों पर िाभांश या ब्याज के माध्यम से,
कोई आय उद्भूत या उत्पन्द्न होती है ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “लसजक्कमी” स—े
(i) कोई व्यजष्ट् , जजसके नाम को 26 अप्रैि, 1975 के तरु ंत पूव ष
लसजक्कम प्रजा ननयम, 1961 के साथ पठित लसजक्कम प्रजा
ववननयम, 1961 के अधीन रिे गए रजजस् र (जजसे इसमें इसके पश्चात ्
“लसजक्कम प्रजा रजजस् र” कहा गया है) में अलभलिखित ककया गया है ;
या
(ii) कोई व्यजष्ट् , जजसके नाम को तारीि 7 अगस्त, 1990 के
भारत सरकार के आर्देश सं. 26030/36/90-आई.सी.आई. और तारीिअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
749
8 अप्रैि, 1991 के समसंख्यक आर्देश के आधार पर लसजक्कम प्रजा के
रजजस् र में सजम्मलित ककया गया है ; या
(iii) कोई अन्द्य व्यजष्ट् , जजसका नाम लसजक्कम प्रजा के रजजस् र में
नहीं है ककंतु यह संर्देह से परे सात्रबत कर ठर्दया गया है कक ऐसे व्यजष्ट्
के वपता या पनत या वपतामह या उसी वपता स े भाई का नाम उस
रजजस् र में अलभलिखित ककया गया है ; या
(iv) कोई अन्द्य व्यजष्ट् , जजसका नाम लसजक्कम प्रजा के रजजस् र में
नहीं है ककंतु यह सात्रबत कर ठर्दया जाता है कक ऐसा व्यजष्ट् 26 अप्रैि,
1975 को या उसस े पूव ष लसजक्कम में अधधवास कर रहा था ; या
(v) कोई अन्द्य व्यजष्ट् , जो 26 अप्रैि, 1975 को या उससे पवू ष
लसजक्कम में अधधवास नहीं कर रहा था ककंतु यह संर्देह से परे सात्रबत कर
ठर्दया गया है कक ऐसे व्यजष्ट् के वपता या पनत या वपतामह या उसी वपता
से भाई 26 अप्रैि, 1975 को या उसस े पूव ष लसजक्कम में अधधवास कर
रहा था,
अलभप्रेत होगा ;
(र्) िंर् (34क) के पश्चात,्1 अप्रैि, 2024 से ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(34ि) ककसी अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर की कोई इकाई, जो मुख्यत:
ककसी वायुयान को पट् े पर र्देने के कारबार में िगी हुई है, की ककसी कंपनी
की, जो ककसी अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर की कोई इकाई है, जो मुख्यत:
ककसी वायुयान को पट् े पर र्देने के कारबार में िगी हुई है, की िाभांश के
माध्यम से कोई आय ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए “अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर”
2005 का 28 का वही अथ ष होगा, जो उसका ववशेर् आधथकष जोन अधधननयम, 2005 की धारा
2 के िंर् (थ) में है ;”।
(ढ) िंर् (41) का िोप ककया जाएगा ;
(ण) िंर् (46) में, “या उसके ककसी वग”ष र्दोनों स्थानों पर, जहां-जहां वे आते
हैं, शब्र्दों के स्थान पर, “िंर् (46क) के अधीन आने वािों से लभन्द्न या उसके ककसी
वग”ष कोष्ट्िक, शब्र्द, अंक और अिर 1 अप्रैि, 2024 से रिे जाएंगे ;
(त) िंर् (46) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् 1 अप्रैि, 2024 से अंत:स्थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(46क) ककसी ननकाय या प्राधधकरण या बोर् ष या न्द्यास या आयोग जो
कंपनी नहीं है, जजसे—
(क) ननम्नलिखित एक या अधधक प्रयोजनों के लिए ककसी केंरीय
अधधननयम या राज्य अधधननयम द्वारा स्थावपत या गठित ककया गया है,
अथाषत ् :—
(i) जो गहृ आवासन की आवश्यकता से संबंधधत है और
उसको पूरा करना ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
750
(ii) शहरों, नगरों और ग्रामों की योजना, ववकास या सुधार ;
(iii) जन साधारण के फायर्दे के लिए ककसी कायकष िाप का
ववननयमन या ववननयमन और ववकास ; या
(iv) उस उद्र्देश्य, जजसके लिए उसका सजृ न ककया गया है,
के कारण उर्दभूत होने वािे जन साधारण के फायर्दे के लिए ककसी
मामिे का ववननयमन,
को प्रोद्भूत होने वािी कोई आय ; और
(ि) जजसे इस िंर् के प्रयोजनों के लिए केंरीय सरकार द्वारा
राजपत्र में अधधसूधचत ककया गया है ;
(46ि) ननम्नलिखित को उद्भूत या उत्पन्द्न कोई आय,—
(i) राष्ट्रीय प्रत्यय प्रनतभूनत न्द्यासी कंपनी लिलम ेर्, जो केंरीय
सरकार द्वारा स्थावपत और पूणतष या ववत्तपोवर्त प्रत्यय प्रनतभूनत ननधधयों
के प्रचािन के प्रयोजनों के लिए केंरीय सरकार द्वारा स्थावपत और
पूणतष या ववत्तपोवर्त कंपनी है ; या
(ii) केंरीय सरकार द्वारा स्थावपत और पूणषतया ववत्तपोवर्त और
कोई प्रत्यय प्रनतभूनत ननधध, जजनका प्रबंधन राष्ट्रीय प्रत्यय प्रनतभूनत
न्द्यासी कंपनी लिलम ेर् द्वारा ककया जाता है ; या
(iii) सूक्ष्म और िघु उपक्रमों के लिए प्रत्यय प्रनतभूनत ननधध न्द्यास,
जो भारत सरकार और भारतीय िघु उद्योग ववकास बकैं
अधधननयम, 1989 की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थावपत 1989 का 39
भारतीय िघु उद्योग ववकास बकैं द्वारा सजृजत न्द्यास है ;”;
(थ) िंर् (49) का िोप ककया जाएगा ।
धारा 10कक का 6. आय-कर अधधननयम की धारा 10कक में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में, िंर् (ii) के पश्चात ् और स्पष्ट् ीकरण से पहिे
ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु ऐसी कोई क ौती ककसी ननधाषररती को अनुज्ञात नहीं की जाएगी,
जो धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् ननयत तारीि को या
उसके पूव ष आय की वववरणी प्रस्तुत नहीं करता है ।”;
(ि) उपधारा (4) के पश्चात,् ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(4क) यह धारा ऐसी ककसी इकाई को िागू होती है, यठर्द माि के ववक्रय
या सेवाओं के उपबंध से प्राप्त आगम ननधाषररती द्वारा भारत में संपररवतनष ीय
ववर्देशी मुरा में, पूववष र् ष के अतं से छह मास की अवधध के भीतर या ऐसी और
अवधध के भीतर, जो सिम प्राधधकारी इस ननलमत्त अनुज्ञात करे, प्राप्त होते हैं
या िाए जाते हैं ।
स्पष्ट्टीकरर् 1—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “सिम प्राधधकारी” पर्द
से भारतीय ररजव ष बकैं या ऐसा प्राधधकारी अलभप्रेत है, जो ववर्देशी मुरा में
संर्दायों और व्यौहारों का ववननयमन करने के लिए तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध
के अधीन प्राधधकृत है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
751
स्पष्ट्टीकरर् 2—माि का ववक्रय या सेवाओं का उपबंध उस समय भारत
में प्राप्त ककया गया समझा जाएगा, जहां ऐसी ननयाषत आवत ष भारतीय ररजवष
बकैं के अनुमोर्दन से भारत के बाहर ककसी बकैं में ननधाषररती द्वारा इस
प्रयोजन के लिए रिे गए ककसी पथृ क् िाते में जमा की जाती है ।’;
(ग) स्पष्ट् ीकरण 1 के िंर् (i) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(i) “संपररवतनष ीय ववर्देशी मुरा” का वही अथ ष होगा, जो धारा 10क के
स्पष्ट् ीकरण 2 के िंर् (ii) में उसका है ;
(iक) “ननयाषत आवत”ष स े ननधाषररती द्वारा उपधारा (4क) के उपबंधों के
अनुसार संपररवतनष ीय ववर्देशी मुरा में भारत में प्राप्त की गई या िाई गई
वस्तुओं या चीजों या सेवाओं के उपक्रम द्वारा, जो यूनन है, ननयाषत के संबंध
में प्रनतफि अलभप्रेत है, ककंतु इसके अंतगषत भारत से बाहर वस्तुओं या चीजों
के पररर्दान के कारण माने जा सकने वािे भाड़ा, र्दरू -संचार प्रभार या बीमा या
भारत से बाहर सेवाएं (जजसमें कंप्यू र साफ् वेयर भी है) प्रर्दान करने में ववर्देशी
मुरा में उपगत व्यय, यठर्द कोई हो, सजम्मलित नहीं है ;’।
7. आय-कर अधधननयम की धारा 11 में,— धारा 11 का
संशोधन ।
(अ) उपधारा (1) में,—
(क) स्पष्ट् ीकरण 1 के िंर् (2) के उपिंर् (ii) की र्दीघ ष पंजक्त में,
“अनुज्ञात समय की समाजप्त के पूव”ष शब्र्दों के स्थान पर, “ननयत ववननठर्दषष्ट्
तारीि से कम से कम र्दो मास पूव”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) स्पष्ट् ीकरण 4 में,—
(I) िंर् (i) में, —
(क) परंतुक में, “माना जाएगा ; और” शब्र्दों के स्थान पर,
“माना जाएगा :” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत
ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक पहिे परंतुक के उपबंध केवि तभी
िागू होंगे,—
(क) जब इस उपधारा के, िंर् (ग) में ;
(ि) इस उपधारा के स्पष्ट् ीकरण 2, स्पष्ट् ीकरण
3 और स्पष्ट् ीकरण 5 में ;
(ग) इस धारा के स्पष्ट् ीकरण में ; और
(घ) धारा 13 की उपधारा (1) के िंर् (ग) में,
समग्र ननधध से उपयोजन ककए जाने के समय यठर्द ववननठर्दषष्ट्
शतों का कोई अनतक्रमण नहीं ककया गया था :
परंतु यह भी कक ववननधान की गई या पुन: जमा की
गई रकम को पहिे परंतुक के अधीन पूत ष या धालमकष
प्रयोजनों के लिए उपयोजन के रूप में तब तक नहीं माना
जाएगा जब तक ऐसा ववननधान या जमा उस पूववष र्,ष जजसमेंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
752
समग्र ननधध से ऐसा उपयोजन ककया गया था, के अंत स े
पांच वर् ष की अवधध के भीतर नहीं ककया जाता है :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक में अंतववष्ट्ष कोई बात
वहां िागू नहीं होगी, जहां समग्र ननधध से उपयोजन
31 माच,ष 2021 को या उसस े पूव ष ककया जाता है :”;
(II) िंर् (ii) में, परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक पहिे परंतुक के उपबंध केवि तभी िागू
होंगे,—
(क) जब इस उपधारा के िंर् (ग) में ;
(ि) इस उपधारा के स्पष्ट् ीकरण 2, स्पष्ट् ीकरण 3
और स्पष्ट् ीकरण 5 में ;
(ग) इस धारा के स्पष्ट् ीकरण में ; और
(घ) धारा 13 की उपधारा (1) के िंर् (ग) में,
ऋण या उधार से उपयोजन ककए जाने के समय यठर्द ववननठर्दषष्ट्
शतों का कोई अनतक्रमण नहीं ककया गया था :
परंतु यह भी कक प्रनतसंर्दत्त रकम को पहिे परंतुक के अधीन
पूत ष या धालमकष प्रयोजनों के लिए उपयोजन के रूप में तब तक
नहीं माना जाएगा, जब तक ऐसा प्रनतसंर्दाय उस पूववष र्,ष जजसमें
ऋण या उधार से ऐसा उपयोजन ककया गया था, के अंत स े
पांच वर् ष की अवधध के भीतर नहीं ककया जाता है :
परंतु यह भी कक पहिे परंतुक में अंतववष्ट्ष कोई बात वहां
िागू नहीं होगी, जहां कोई ऋण या उधार से उपयोजन 31 माचष,
2021 को या उसस े पूव ष ककया जाता है ; और”;
(III) िंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् 1 अप्रैि, 2024 से,
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(iii) यथाजस्थनत, धारा 10 के िंर् (23ग) के उपिंर् (iv) या
उपिंर् (v) या उपिंर् (vi) या उपिंर् (viक) में ननठर्दषष्ट् ककसी
ननधध या न्द्यास या संस्था या ककसी ववश्वववद्यािय या अन्द्य
शैिखणक संस्था या ककसी अस्पताि या अन्द्य आयुववज्ञष ान संस्था
या धारा 12कि के अधीन रजजस्रीकृत अन्द्य न्द्यास या संस्था में,
स्पष्ट् ीकरण 2 में ननठर्दषष्ट् रकम स े लभन्द्न, जमा या संर्दत्त ककसी
रकम को ऐसी जमा की गई या संर्दत्त रकम के पचासी प्रनतशत की
सीमा तक ही पूत ष या धालमकष प्रयोजनों के लिए उपयोजन के रूप
में माना जाएगा ।”;
(आ) उपधारा (2) के िंर् (ग) में, “को या उससे पहिे” शब्र्दों के स्थान पर, “स े
कम से कम र्दो मास पूव”ष शब्र्द रिे जाएंगे ;
(इ) उपधारा (7) में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
(क) “और िंर् (46) से लभन्द्न” शब्र्दों, कोष्ट्िकों, अंकों और अिर के
स्थान पर, “िंर् (23ङग), िंर् (46) और िंर् (46क) से लभन्द्न” शब्र्द, कोष्ट्िक,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
753
अंक और अिर रिे जाएंगे ;
(ि) पहिे परंतुक में, “िंर् (46) के अधीन” शब्र्दों, कोष्ट्िक और अंकों के
स्थान पर, “िंर् (23ङग) या िंर् (46) या िंर् (46क) के अधीन” शब्र्द,
कोष्ट्िक और अंक रिे जाएंगे ;
(ग) र्दसू रे परंतुक में, “िंर् (46) के अधीन” शब्र्दों, कोष्ट्िक और अंकों के
स्थान पर, “िंर् (23ङग) या िंर् (46) या िंर् (46क) के अधीन” शब्र्द,
कोष्ट्िक और अंक रिे जाएंगे ।
8. आय-कर अधधननयम की धारा 12क में,— धारा 12क का
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में,—
(I) िंर् (कग) के उपिंर् (vi) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपिंर्
1 अक्तूबर, 2023 से रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(vi) ककसी अन्द्य र्दशा में, जहां न्द्यास या संस्था के कक्रयाकिाप,—
(अ) ऐसे ननधाषरण वर् ष से, जजसमें उक्त रजजस्रीकरण की
ईप्सा की गई है, सुसंगत पवू वष र् ष के प्रारंभ के कम स े कम एक
मास पूव ष आरंभ नहीं हुए हैं ;
(आ) आरंभ हो गए है और ऐसे कक्रयाकिापों के प्रारंभ के
पश्चात ् ककसी भी समय ऐस े िाग ू होने की तारीि को या उसके
पूव ष समाप्त होने वाि े ककसी पूववष र् ष के लिए धारा 10 के
िंर् (23ग) के उपिंर् (iv) या उपिंर् (v) या उपिंर् (vi) अथवा
उपिंर् (viक) या धारा 11 या धारा 12 के िागू होने के कारण
कुि आय से उक्त न्द्यास या संस्था की कोई आय या उसका भाग
अपवजजतष नहीं ककया गया है,”;
(II) िंर् (िक) में, “उस धारा के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर”, शब्र्दों
के स्थान पर, “उस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन अनुज्ञात
समय के भीतर”, शब्र्द, कोष्ट्िक और अंक रिे जाएंगे ;
(ि) उपधारा (2) में, र्दसू रे, तीसरे और चौथे परंतुकों का िोप ककया जाएगा ।
9. आय-कर अधधननयम की धारा 12कि में,— धारा 12कि
का संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में, 1 अक्तूबर, 2023 से,—
(अ) िंर् (ि) में,—
(क) आरंलभक भाग में, “उपिंर् (v)” शब्र्द, कोष्ट्िकों और अंक के
पश्चात,् “उपिंर् (vi) की मर्द (आ)” शब्र्द, कोष्ट्िक, अंक और अिर रिे
जाएंगे ;
(ि) उपिंर् (ii) में, मर्द (आ) के स्थान पर, ननम्नलिखित मर्द रिी
जाएगी, अथाषत ् :—
“(आ) यठर्द उसका इस प्रकार समाधान नहीं होता है तो वह
सुनवाई का युजक्तयुक्त अवसर र्देने के पश्चात,्—
(I) धारा 12क की उपधारा (1) के िंर् (कग) के
उपिंर् (ii) या उपिंर् (iii) या उपिंर् (v) में ननठर्दषष्ट् ककसी
मामिे में ऐसे आवेर्दन को नामंजूर करते हुए और साथ हीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
754
उसके रजजस्रीकरण को रद्र्द करते हुए लिखित आर्देश पाररत
करेगा ;
(II) धारा 12क की उपधारा (1) के उपिंर् (iv) या
उपिंर् (vi) की मर्द (आ) में ननठर्दषष्ट् ककसी मामिे में ऐसे
आवेर्दन को नामंजूर करते हुए लिखित आर्देश पाररत
करेगा ;”;
(आ) िंर् (ग) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“(ग) जहां कोई आवेर्दन उक्त िंर् के उपिंर् (vi) की मर्द (अ) के
अधीन ककया जाता है या आवेर्दन उक्त िंर् के उपिंर् (vi) के अधीन,
जैसा कक वह ववत्त अधधननयम, 2023 द्वारा उसके संशोधन से िीक पूव ष
ववद्यमान था, ककया जाता है तो वह उस ननधाषरण वर् ष से, जजससे
रजजस्रीकरण की ईप्सा की गई है, तीन वर् ष की अवधध के लिए न्द्यास या
संस्था को अनजन्द्तम रूप से रजजस्रीकृत करते हुए लिखित आर्देश पाररत
करेगा,”;
(ि) उपधारा (4) में, स्पष्ट् ीकरण के िंर् (च) में, “या उसे अंनतम रूप ठर्दया
गया है ।” शब्र्दों के स्थान पर, “या उस े अंनतम रूप ठर्दया गया है ; या” शब्र्द रि े
जाएंग े ;
(ग) िंर् (च) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(छ) धारा 12क की उपधारा (1) के िंर् (कग) में ननठर्दषष्ट् आवेर्दन पूणष
नहीं है, या उसमें कोई लम्या या गित सूचना अंतववष्ट्ष है ।”।
धारा 17 का 10. आय-कर अधधननयम की धारा 17 में,—
संशोधन ।
(i) िंर् (1) में, उपिंर् (viii) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपिंर् अंत:स्थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“(ix) केंरीय सरकार द्वारा पूववष र् ष में धारा 80गगज में ननठर्दषष्ट् अजग्नपथ
स्कीम में अभ्यावेलशत ककसी व्यजष्ट् के अजग्नवीर समग्र ननधध िाते में ककया
गया अलभर्दाय ;”;
(ii) िंर् (2) में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
(क) उपिंर् (i) में, “वास-सुववधा का” शब्र्दों के पश्चात,् “ऐसी रीनत में,
जो ववठहत की जाए, संगखणत” शब्र्द अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) उपिंर् (ii) और उसके स्पष्ट् ीकरण 1 से स्पष्ट् ीकरण 4 के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(ii) ननधाषररती को उसके ननयोजक द्वारा ररयायती र्दर पर प्रर्दान
की गई ककसी वास-सुववधा का मूल्य ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस उपिंर् के प्रयोजनों के लिए, यह स्पष्ट् ककया
जाता है कक वास-सुववधा ररयायती र्दर पर प्रर्दान की गई समझी जाएगी,
यठर्द वास-सुववधा का संगखणत मूल्य, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए,
ननधाषररती से वसूिनीय या उसके द्वारा सर्दं ेय ककराए से अधधक है ;”।
धारा 28 का 11. आय-कर अधधननयम की धारा 28 के िंर् (iv) के स्थान पर, 1 अप्रैि, 2024 सेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
755
संशोधन । ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(iv) ककसी कारबार या ककसी ववृत्त के प्रयोग स े उर्दभूत होने वािे ककसी फायर्दे
या पररिजब्ध का मूल्य, चाहे—
(क) वह धन में संपररवतनष ीय हो या न हो ; या
(ि) नकर्द रूप में या वस्तु रूप में या भागत: नकर्द रूप में और भागत:
वस्तु रूप में हो ;”।
12. आय-कर अधधननयम की धारा 35घ की उपधारा (2) के िंर् (क) में, परंतुक के धारा 35घ का
स्थान पर, ननम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैि, 2024 स े रिा जाएगा, अथाषत ् :— संशोधन ।
“परंतु ननधाषररती, ऐसे आय-कर प्राधधकारी को ऐसी अवधध के भीतर ऐसे प्ररूप
और ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, इस िंर् में ववननठर्दषष्ट् व्यय की ववलशजष्ट् या ं
अंतववष्ट्ष करने वािा एक वववरण प्रस्तुत करेगा ।”।
13. आय-कर अधधननयम की धारा 43ि में, 1 अप्रैि, 2024 से,— धारा 43ि का
संशोधन ।
(i) िंर् (घक) में, “ककसी ननिेप िेने वािी गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी या
ककसी सुव्यवजस्थत रूप से महत्वपूण ष ननिेप न िेने वािी गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी”
शब्र्दों के स्थान पर, “गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपननयों का ऐसा वगष, जो केंरीय सरकार
द्वारा इस ननलमत्त राजपत्र में अधधसूधचत ककया जाए,” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) िंर् (छ) में, “रालश,” शब्र्दों के स्थान पर, “रालश या” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(iii) िंर् (छ) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
2006 का 27 “(ज) सूक्ष्म, िघ ु और मध्यम उद्यम ववकास अधधननयम, 2006 की
धारा 15 में ववननठर्दषष्ट् समय-सीमा स े परे ककसी सक्ष्ू म या िघु उद्यम को
ननधाषररती द्वारा संर्देय कोई रालश ।”;
(iv) परंतुक में, “इस धारा की कोई बात” शब्र्दों के पश्चात,् “[िंर् (ज) के
उपबंधों के लसवाय]” कोष्ट्िक, शब्र्द और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(v) स्पष्ट् ीकरण 4 में,--
(I) िंर् (ङ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(ङ) “सूक्ष्म उद्यम” का वही अथ ष होगा, जो सूक्ष्म, िघु और
2006 का 27 मध्यम उद्यम ववकास अधधननयम, 2006 की धारा 2 के िंर् (ज) में
उसका है ;’;
(II) िंर् (छ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(छ) “िघ ु उद्यम” का वही अथ ष होगा, जो सूक्ष्म, िघु और मध्यम
2006 का 27 उद्यम ववकास अधधननयम, 2006 की धारा 2 के िंर् (र्) में उसका
है ।’।
14. आय-कर अधधननयम की धारा 43घ में, 1 अप्रैि, 2024 से,— धारा 43घ का
संशोधन ।
(i) िंर् (क) में, “ननिेप िेने वािी गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी या सुव्यवजस्थत
रूप से महत्वपूण ष ननिेप न िेने वािी गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी” शब्र्दों के स्थान
पर, “गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपननयों का ऐसा वगष, जो केंरीय सरकार द्वारा राजपत्र में
इस ननलमत्त अधधसूधचत ककया जाए” शब्र्द रिे जाएंग े ;
(ii) र्दीघ ष पंजक्त में, “ननिेप िेने वािी गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
756
सुव्यवजस्थत रूप से महत्वपूणष ननिेप न िेने वािी गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी” शब्र्दों
के स्थान पर, “गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपननयों का ऐसा वगष, जो केंरीय सरकार द्वारा
राजपत्र में इस ननलमत्त अधधसूधचत ककया जाए” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(iii) स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ज) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“(ज) “गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी” पर्द का वही अथ ष होगा, जो उसका
धारा 36 की उपधारा (1) के िंर् (viiक) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (vii) में है ।”।
धारा 44कि का 15. आय-कर अधधननयम की धारा 44कि में, पहिे परंतुक के स्थान पर,
संशोधन । ननम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैि, 2024 से रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह धारा ऐसे व्यजक्त को िाग ू नहीं होगी, जो धारा 44कघ की
उपधारा (1) या धारा 44कघक की उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार पूववष र् ष के लिए
िाभों और अलभिाभों की घोर्णा करता है :”।
धारा 44कघ का 16. आय-कर अधधननयम की धारा 44कघ के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ि) के उपिंर् (ii)
संशोधन । के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैि, 2024 स े अंत:स्थावपत ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
‘परंतु जहां पूववष र् ष के र्दौरान नकर्द रूप में प्राप्त की गई रकम या रकमों का
योग, ऐसे पूववष र् ष के कुि आवत ष या सकि प्राजप्तयों का पाचं प्रनतशत से अधधक नहीं
है, वहां इस उपिंर् का इस प्रकार प्रभाव होगा, मानो “र्दो करोड़ रुपए” शब्र्दों के
स्थान पर, “तीन करोड़ रुपए” शब्र्द रिे गए हों :
परंतु यह और कक पहिे परंतुक के प्रयोजनों के लिए ककसी बकैं के नाम र्देय
चेक या बकैं ड्राफ् द्वारा रकम या रकमों के योग की प्राजप्त, जो पान े वाि े के िात े
में र्देय नहीं है, नकर्द प्राजप्त के रूप में समझी जाएगी ।’।
धारा 44कघक 17. आय-कर अधधननयम की धारा 44कघक की उपधारा (1) के पश्चात,् 1 अप्रैि,
का संशोधन । 2024 से ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘परंतु ककसी ऐसे ननधाषररती के मामि े में, जहां पूववष र् ष के र्दौरान प्राप्त की गई
रकम या रकम का योग, नकर्द रूप में ऐसे पवू वष र् ष की सकि प्राजप्तयों के
पांच प्रनतशत से अधधक नहीं है, वहां इस उपधारा का इस प्रकार प्रभाव होगा, मानो
“पचास िाि रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “पचहत्तर िाि रुपए” रिे गए हों :
परंतु यह और कक पहिे परंतुक के प्रयोजनों के लिए, ककसी बकैं के नाम र्देय
चेक या बकैं ड्राफ् द्वारा रकम या रकमों के योग की प्राजप्त, जो पान े वाि े के िात े
में र्देय नहीं है, नकर्द प्राजप्त के रूप में समझी जाएगी ।’।
धारा 44िि का 18. आय-कर अधधननयम की धारा 44िि की उपधारा (3) के पश्चात ् और
संशोधन ।
स्पष्ट् ीकरण के पूव,ष ननम्नलिखित उपधारा 1 अप्रैि, 2024 से अंत:स्थावपत की जाएगी,
अथाषत ् :—
“(4) धारा 32 की उपधारा (2) और धारा 72 की उपधारा (1) में अंतववष्ट्ष
ककसी बात के होते हुए भी, जहां कोई ननधाषररती उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार
ककसी पूववष र् ष के लिए कारबार के िाभों और अलभिाभों की घोर्णा करता है, तो शेर्
अवियण और अग्रसररत हानन का कोई मुजरा ऐसे पूववष र् ष के लिए ननधाषररती को
अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा ।”।
धारा 44ििि 19. आय-कर अधधननयम की धारा 44ििि की उपधारा (2) के पश्चात,्
का संशोधन । ननम्नलिखित उपधारा 1 अप्रैि, 2024 से अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(3) धारा 32 की उपधारा (2) और धारा 72 की उपधारा (1) में अंतववष्ट्षअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
757
ककसी बात के होते हुए भी, जहां कोई ननधाषररती उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार
ककसी पूववष र् ष के लिए कारबार के िाभों और अलभिाभों की घोर्णा करता है, वहां शेर्
अवियण और अग्रनीत हानन का कोई मुजरा ऐसे पूववष र् ष के लिए ननधाषररती को
अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा ।”।
20. आय-कर अधधननयम की धारा 45 की उपधारा (5क) में, “नकर्द रूप में प्रनतफि, धारा 45 का
संशोधन ।
यठर्द कोई हो,” शब्र्दों के स्थान पर, “नकर्द रूप में या ककसी चैक या ड्राफ् या ककसी अन्द्य
पद्धनत से प्राप्त प्रनतफि, यठर्द कोई हो,” शब्र्द 1 अप्रैि, 2024 से रिे जाएंगे ।
21. आय-कर अधधननयम की धारा 47 में,— धारा 47 का
संशोधन ।
(क) िंर् (viiकघ) के स्पष्ट् ीकरण में,—
“(i) िंर् (क) के स्थान पर ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(क) “मूि ननधध” से—
(अ) भारत से बाहर स्थावपत या ननगलमत या रजजस्रीकृत
कोई ननधध अलभप्रेत है, जो अपने सर्दस्यों स े उनके फायर्दे के लिए,
ववननधान करने के लिए, ननधधयां एकत्रत्रत करती है और जो
ननम्नलिखित शतों को पूरा करती है, अथाषत ् :—
(i) ननधध, भारत में ननवासी कोई व्यजक्त नहीं है ;
(ii) ननधध, ककसी र्देश या ककसी ववननठर्दषष्ट् राज्यिेत्र की
ननवासी है, जजसके साथ धारा 90 की उपधारा (1) या
धारा 90क की उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् करार ककया गया है ;
या जजसे इस ननलमत्त केंरीय सरकार द्वारा अधधसूधचत ककसी
र्देश या ववननठर्दषष्ट् राज्यिेत्र में स्थावपत या ननगलमत या
रजजस्रीकृत ककया गया है ;
(iii) ननधध और उसके कायकष िाप र्देश में या ववननठर्दषष्ट्
राज्यिेत्र, जहां उसकी स्थापना या ननगमन ककया गया है या
जहां की वह ननवासी है, को िागू ववननधान संरिण ववननयमों
के अधीन है ; और
(iv) ऐसी अन्द्य शतों को पूरा करती है, जो ववठहत की
जाएं ;
(आ) कोई ववननधान यान, जजसमें आबू धाबी इन्द्वेस् में
अथारर ी प्रत्यित: या अप्रत्यित: शेयर धारक या यूनन धारक या
फायर्दाग्राही या ठहतधारक है और ऐसा ववननधान यान पूणषतया आबू
धाबी इन्द्वेस् में अथारर ीया आबू धाबी सरकार के स्वालमत्वाधीन
और ननयंत्रणाधीन है ; या
(इ) केंरीय सरकार द्वारा इस ननलमत्त ववननठर्दषष्ट् शतों के
अधीन रहते हुए राजपत्र में अधधसूधचत कोई ननधध ;’।”।
(ii) िंर् (ि) में, “2023” अंकों के स्थान पर, “2025” अंक रिे जाएंगे ;
(iii) िंर् (ग) के उपिंर् (i) में, “जो भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष
1992 का 15 अधधननयम, 1992 या अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण अधधननयम,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
758
2019 का 50 2019 के अधीन बनाए गए भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष (वैकजल्पक
ववननधान ननधध) ववननयम, 2012 के अधीन” शब्र्दों, अंकों और कोष्ट्िकों के
1992 का 15
स्थान पर, “जो भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष अधधननयम, 1992 के
अधीन बनाए गए भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष (वैकजल्पक ववननधान
ननधध) ववननयम, 2012 या अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण अधधननयम,
2019 के अधीन बनाए गए अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण (ननधध 2019 का 50
प्रबंध) ववननयम, 2022 के अधीन ववननयलमत” शब्र्द, अंक और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ;
(ि) िंर् (viiग) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् 1 अप्रैि, 2024 से अंत:स्थावपत
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘(viiघ) ककसी पूंजी आजस्त का, जो ककसी वाल् प्रबंधक द्वारा जारी स्वण ष
का इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त में संपररवतनष या इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त का
स्वण ष में संपररवतनष है, का कोई अंतरण ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “इिैजक्रक स्वण ष प्राजप्त” और
“वाल् प्रबंधक” पर्द के वही अथ ष होंगे, जो भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष
अधधननयम, 1992 के अधीन बनाए गए भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष 1992 का 15
(वाल् प्रबंधक) ववननयम, 2021 के ववननयम 2 के उपववननयम (1) के
िंर् (ज) और िंर् (ि) में क्रमश: उनके हैं ।’;
(ग) िंर् (xix) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(xx) उस र्दसू रे र्देश की ववधधयों के अनुसार, र्दसू रे र्देश की सरकार द्वारा
भारत के बाहर ननगलमत, ककसी कंपनी के शेयरों के ववननमय में, ककसी पजब्िक
सेक् र कंपनी द्वारा धाररत पजूं ी आजस्त का कोई अंतरण, जो संयुक्त उपक्रम
में कोई ठहत है ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “संयुक्त उपक्रम” से वह
कारबार अजस्तत्व अलभप्रेत होगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में
अधधसूधचत ककया जाए ।’।
धारा 48 का 22. आय-कर अधधननयम की धारा 48 में, िंर् (ii) में, 1 अप्रैि, 2024 से
संशोधन । ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परन्द्तु आजस्त के अजषन की िागत या उसके सुधार की िागत में धारा 24 के
िंर् (ि) के अधीन या अध्याय 6क के उपबंधों के अधीन ब्याज की रकम पर
क ौती ककए र्दावे शालमत नहीं होंगे ।
स्पष्ट्टीकरर् 1—संर्देह को र्दरू करने के लिए, यह स्पष्ट् ककया जाता है कक
ककसी कारबार न्द्यास की यूनन के अजनष की िागत कम कर र्दी जाएगी और सर्दैव
के लिए ऐसी रकम से कम कर र्दी गई समझी जाएगी जो ऐसी यूनन के संबंध में
कारबार न्द्यास से यूनन धारक द्वारा प्राप्त की जाती है, जो धारा 10 के
िंर् (23चग) या िंर् (23चगक) में यथाननठर्दषष्ट् आय की प्रकृनत की नहीं है और जो
धारा 56 की उपधारा (2) के िंर् (xii)के अधीन और धारा 115पक की उपधारा (2)
के अधीन कर से प्रभाय ष नहीं है ।
स्पष्ट्टीकरर् 2—स्पष्ट् ीकरण 1 के प्रयोजनों के लिए, यह स्पष्ट् ककया जाता हैअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
759
कक जहां धारा 47 के अधीन ककसी यूनन के अंतरण के संव्यवहार को अंतरण के रूप
में नहीं माना जाता और धारा 49 के अधीन ऐसी यूनन के अजषन की िागत
अवधाररत की जाती है, ऐसे अंतरण के पूव ष के साथ-साथ ऐसे अंतरण के पश्चात ् ऐसी
यूनन के संबंध में प्राप्त रालश उक्त स्पष्ट् ीकरण के अधीन अजनष की िागत से घ ा
र्दी जाएगी।”।
23. आय-कर अधधननयम की धारा 49 में,— धारा 49 का
संशोधन ।
(क) उपधारा (2कज) के पश्चात ् ननम्नलिखित उपधारा अंतःस्थावपत की जाएगी,
अथाषत ् :—
“(2कझ) जहां पूंजी आजस्त, जो धारा 47 के िंर् (xx) में यथाननठर्दषष्ट्
शेयर है, ननधाषररती की संपवत्त हो जाती है, ऐसी आजस्त के अजनष की िागत
उक्त िंर् में ननठर्दषष्ट् संयुक्त उपक्रम में ठहत के अजनष की िागत समझी
जाएगी ।”;
(ि) उपधारा (9) के पश्चात ् 1 अप्रैि, 2024 से ननम्नलिखित उपधारा
अंतःस्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(10) जहां पूंजी आजस्त, जो,—
(i) धारा 47 के िंर् (viiघ) में ननठर्दषष्ट् ककसी वाल् प्रबंधक द्वारा
जारी कोई इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त है, वहां उक्त अंतरण के प्रयोजन के
लिए आजस्त के अजषन की िागत को, उस व्यजक्त के पास, जजसके नाम
पर इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त जारी की गई है, ऐसे स्वणष की िागत के
रूप में माना जाएगा ;
(ii) इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त के लिए जारी स्वण ष है और धारा 47
के िंर् (viiघ) में ननठर्दषष्ट् अंतरण के लिए प्रनतफि के रूप में उस
व्यजक्त की संपवत्त हो जाती है, वहां उक्त अंतरण के प्रयोजन के लिए
आजस्त के अजषन की िागत को, उस व्यजक्त के पास, जजसके नाम पर
इिैक्राननक स्वण ष प्राजप्त जारी की गई है, ऐसे स्वण ष की िागत के रूप
में माना जाएगा ।”।
24. आय-कर अधधननयम की धारा 50क के पश्चात ् 1 अप्रैि, 2024 से ननम्नलिखित नई धारा 50कक
धारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— का अंत:स्थापन ।
‘50कक. धारा 2 के िंर् (42क) या धारा 48 में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होत े बाजार संबद्ध
डर्बेंचरों की
हुए भी, जहां पूंजी आजस्त, 1 अप्रैि, 2023 को या उसके पश्चात ् अजजतष ककसी
र्दशा में पूंजी
ववननठर्दषष्ट् पारस्पररक ननधध की यूनन या बाजार संबद्ध डर्बेंचर है, ऐसे डर्बेंचर या
अलभिाभ की
यूनन के अंतरण या मोचन या पररपक्वता के पररणामस्वरूप प्राप्त या प्रोर्दभूत संगणना के
प्रनतफि के पूण ष मूल्य को,— लिए ववशेर्
उपबंध ।
(i) डर्बेंचर या यूनन के अजनष की िागत ;
(ii) ऐसे अंतरण या मोचन या पररपक्वता के संबंध में पूणतष या और
ववलशष्ट् तया उपगत व्यय से,
घ ा ठर्दया जाएगा, उसे अल्पकालिक पूंजी आजस्त के अंतरण से उर्दभूत पूंजी
अलभिाभ समझा जाएगा :
2004 का 23 परंतु ववत्त (संख्यांक 2) अधधननयम, 2004 के अध्याय 7 के उपबंधों के अधीन
प्रनतभूनत संव्यवहार कर के मद्र्दे संर्दत्त ककसी रालश के संबधं में “पूंजी अलभिाभ” शीर् षअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
760
के अधीन प्रभाय ष आय की संगणना करने में कोई क ौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) “बाजार संबद्ध डर्बेंचर” से ककसी भी नाम से ज्ञात कोई प्रनतभूनत
अलभप्रेत है, जो ऋण सुरिा के रूप में अंतननठष हत मूि घ क रिती है और
जहां रर न ष अन्द्य अंतननठषहत प्रनतभूनतयों पर बाजार रर न ष या सूचकों से संबद्ध
हैं तथा इसके अंतगषत भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष द्वारा बाजार
संबद्ध डर्बेंचर के रूप में वगीकृत या ववननयलमत कोई प्रनतभूनत भी है ;
(ii) “ववननठर्दषष्ट् पारस्पररक ननधध” से ककसी भी नाम से ज्ञात कोई
पारस्पररक ननधध अलभप्रेत है, जहां इसके कुि आगमों का पतैं ीस प्रनतशत स े
अनधधक घरेिू कंपननयों के साम्या शेयरों में ववननधान ककया जाता है :
परंतु यह कक ववननठर्दषष्ट् पारस्पररक ननधध के संबंध में धतृ साम्या शेयर धनृत
की प्रनतशतता की संगणना र्दैननक बंर्द होने वािी संख्या के औसत को ननठर्दषष्ट् करत े
हुए की जाएगी ।’।
धारा 54 का 25. आय-कर अधधननयम की धारा 54 में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में, र्दसू रे परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह भी कक जहां नई आजस्त की िागत र्दस करोड़ रुपए स े अधधक
हो जाती है, वहां र्दस करोड़ रुपए स े अधधक की रकम, इस उपधारा के प्रयोजन
के लिए ठहसाब में नहीं िी जाएगी ।”;
(ि) उपधारा (2) में,—
(i) “इस प्रकार ननक्षिप्त रकम सठहत नई आजस्त”, शब्र्दों के पश्चात,्
“उपधारा (1) के तीसरे परंतुक के अधीन रहते हुए,” शब्र्द अंत:स्थावपत ककए
जाएंगे ;
(ii) परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए र्दस करोड़
रुपए से अधधक पूंजीगत िाभ ठहसाब में नहीं लिए जाएंगे ।”।
धारा 54ङक का 26. आय-कर अधधननयम की धारा 54ङक की उपधारा (3) का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 54ङि का 27. आय-कर अधधननयम की धारा 54ङि की उपधारा (3) का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 54ङग का 28. आय-कर अधधननयम की धारा 54ङग की उपधारा (3) के िंर् (क) का िोप
संशोधन ।
ककया जाएगा ।
धारा 54ङघ का 29. आय-कर अधधननयम की धारा 54ङघ की उपधारा (3) के िंर् (क) का िोप
संशोधन ।
ककया जाएगा ।
धारा 54च का 30. आय-कर अधधननयम की धारा 54च में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में, पहिे परंतुक के पश्चात ् और स्पष्ट् ीकरण से पूव,ष
ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक जहां नई आजस्त की िागत र्दस करोड़ रुपए स ेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
761
अधधक हो जाती है, वहां र्दस करोड़ रुपए से अधधक की रकम को इस उपधारा
के प्रयोजन के लिए ठहसाब में नहीं लिया जाएगा ।”;
(ि) उपधारा (4) में,—
(i) “इस प्रकार ननक्षिप्त रकम सठहत नई आजस्त” शब्र्दों के पश्चात,्
“उपधारा (1) के र्दसू रे परंतुक के अधीन रहते हुए” शब्र्द, कोष्ट्िक और अंक
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए र्दस करोड़
रुपए से अधधक शुद्ध प्रनतफि को ठहसाब में नहीं लिया जाएगा ।”।
31. आय-कर अधधननयम की धारा 55 में, 1 अप्रैि, 2024 से,— धारा 55 का
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) के िंर् (ि) के उपिंर् (1) में,—
(i) “गुर्ववि”, शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई अन्द्य अमूत ष आजस्त” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) “प्रकक्रया का अधधकार”, शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई अन्द्य अधधकार”
शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) उपधारा (2) के िंर् (क) में,—
(i) “ककसी कारबार या ववृत्त”, शब्र्दों के पश्चात,् “या ककसी अन्द्य अमूतष
आजस्त” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) “करघा घं े”, शब्र्दों के पश्चात,् “या कोई अन्द्य अधधकार” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ।
32. आय-कर अधधननयम की धारा 56 की उपधारा (2) में,— धारा 56 का
संशोधन ।
(क) िंर् (viiि) में,—
(i) “जो ननवासी है” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ii) स्पष्ट् ीकरण में, िंर् (कक) में, “भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष
1992 का 15 अधधननयम, 1992 द्वारा ववननयलमत” शब्र्दों, कोष्ट्िक और अंकों के पश्चात ्
“अंतरराष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केन्द्र प्राधधकरण अधधननयम, 2019 के अधीन बनाए
गए अंतरराष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केन्द्र प्राधधकरण, (ननधध प्रबंधन)
ववननयम, 2022 द्वारा ववननयलमत” शब्र्द, अंक और कोष्ट्िक अंतःस्थावपत ककए
जाएंगे;
(ि) िंर् (xi) के पश्चात ् 1 अप्रैि, 2024 स े ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत
ककए जाएंगे, अथाषत ् :—
“(xii) पवू वष र् ष के र्दौरान ककसी भी समय ककसी यूनन धारक द्वारा धाररत
यूनन के संबंध में पूववष र् ष के र्दौरान कारबार ननधध स े उसके द्वारा प्राप्त कोई
ववननठर्दषष्ट् रालश ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “ववननठर्दषष्ट् रालश” की
संगणना ननम्नलिखित सूत्र के अनुसार की जाएगी, अथाषत ् :—
ववननठर्दषष्ट् रालश = क-ि-ग (जजसे शून्द्य समझा जाएगा, यठर्द ि और ग
रालशयां क से अधधक हैं), जहां—
क = पूववष र् ष के र्दौरान या ककसी पूववष ती पूव ष वर् ष या वर्ों के र्दौरान ऐस ेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
762
यूनन धारक को ऐसी यूनन के संबंध में कारबार न्द्यास द्वारा ववतररत रालश
या कुि योग है, जो रालश के ववतरण की तारीि को ऐसी यूनन धारण करता
है या ककसी अन्द्य यूनन धारक को, रालश का कुि योग है, जो ऐसे ववतरण की
तारीि से पूव ष ककसी भी समय ऐसी यूनन को धारण करता था, जो,—
(क) धारा 10 के िंर् (23चग) या िंर् (23चगक) में ननठर्दषष्ट् आय
की प्रकृनत की नहीं है ; और
(ि) धारा 115पक की उपधारा (2) के अधीन कर से प्रभाय ष नहीं है;
ि = रकम, जजस पर ऐसी यूनन , कारबार न्द्यास द्वारा जारी
की गई ; और
ग = ककसी पवू वष ती पूव ष वर् ष में इस िंर् के अधीन कर स े
प्रभाररत रकम ;’।’।
(xiii) जहां ककसी पूववष र् ष के र्दौरान ककसी भी समय ककसी जीवन बीमा
पालिसी के अधीन बोनस के माध्यम से आबंठ त रकम सठहत कोई रालश प्राप्त
की जाती है, जो—
(क) ककसी यूनन संबद्ध बीमा पालिसी के अधीन प्राप्त रालश ; या
(ि) िंर् (iv) में ननठर्दषष्ट् आय,
से लभन्द्न रालश है, जो धारा 10 के िंर् (10घ) के उपबंधों के अनुसार पूववष र् ष
की कुि आय से अपवजजतष नहीं की जानी है, तो इस प्रकार प्राप्त रालश को,
जो ऐसी जीवन बीमा पालिसी की अवधध के र्दौरान संर्दत्त प्रीलमयम के समग्र स े
अधधक है तथा जजसका इस अधधननयम के ककसी अन्द्य उपबंध के अधीन
क ौती के रूप में र्दावा नहीं ककया जाता है, ऐसी रीनत में संगखणत ककया
जाएगा, जो ववठहत की जाए ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “यूनन संबद्ध बीमा पालिसी”
का वही अथ ष होगा, जो धारा 10 के िंर् (10घ) के स्पष्ट् ीकरण 3 में उसका है।’।
धारा 72क का 33. आय-कर अधधननयम की धारा 72क की उपधारा (1) के िंर् (घ) के स्पष्ट् ीकरण
संशोधन । में, िंर् (iii) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(iii) “सामररक ववननवेश” स े केंरीय सरकार या ककसी राज्य सरकार द्वारा या
ककसी पजब्िक सेक् र कंपनी द्वारा ककसी पजब्िक सेक् र कंपनी या ककसी कंपनी में
उसकी शेयर धनृत का ऐसा ववक्रय अलभप्रेत है, जजसके पररणामस्वरूप—
(क) उसकी शेयर धनृत इक्यावन प्रनतशत से कम रह जाती है ; और
(ि) ननयंत्रण क्रेता को अंतररत हो जाता है :
परंतु उपिंर् (क) में अधधकधथत शत ष केवि ऐसी र्दशा में िागू होगी, जहां
केंरीय सरकार या राज्य सरकार या पजब्िक सेक् र की शेयर धनृत, ऐसी शेयर
धनृत के ऐसे ववक्रय से पूव ष इक्यावन प्रनतशत से अधधक थी :
परंतु यह और कक उपिंर् (ि) में ननठर्दषष्ट् ननयंत्रण के अंतरण संबंधी
अपेिा केंरीय सरकार या राज्य सरकार या पजब्िक सेक् र कंपनी या उनमें स े
ककन्द्हीं र्दो या सभी द्वारा पूरी की जा सकेगी ।’।
धारा 72कक का 34. आय-कर अधधननयम की धारा 72कक में,—
संशोधन ।
(क) िंर् (i) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
763
“(i) ननम्नलिखित के साथ एक या अधधक बकैं कारी कंपनी,—
(क) केंरीय सरकार द्वारा बकैं कारी ववननयमन अधधननयम, 1949 1949 का 10
की धारा 45 की उपधारा (7) के अधीन मंजूर की गई और प्रवतनष में
िाई गई ककसी स्कीम के अधीन ककसी अन्द्य बकैं कारी संस्था ; या
(ि) ककसी सामररक ववननवशे के पररणामस्वरूप ककसी अन्द्य
बकैं कारी संस्था या ककसी कंपनी, जजसमें उस पूव ष वर्,ष जजसके र्दौरान
सामररक ववननवेश ककया जाता है, के अंत से पांच वर् ष की अवधध के
भीतर समामेिन ककया जाता है ; या” ;
(ि) र्दीघ ष पंजक्त में, “ऐसी बकैं कारी संस्था या” शब्र्दों के पश्चात ् “कंपनी या”
शब्र्द अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(ग) स्पष्ट् ीकरण में, िंर् (vi) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
‘(viक) “सामररक ववननवेश” पर्द का वही अथ ष होगा, जो धारा 72क की
उपधारा (1) के िंर् (घ) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (iii) में उसका है ;’।
35. आय-कर अधधननयम की धारा 79 की उपधारा (1) के परंतुक में, “सात” शब्र्द के धारा 79 का
संशोधन ।
स्थान पर, “र्दस” शब्र्द रिा जाएगा ।
36. आय-कर अधधननयम की धारा 80ग की उपधारा (7) का िोप ककया जाएगा । धारा 80ग का
संशोधन ।
37. आय-कर अधधननयम की धारा 80गगग की उपधारा (3) के िंर् (क) का िोप धारा 80गगग
का संशोधन ।
ककया जाएगा ।
38. आय-कर अधधननयम की धारा 80गगघ की उपधारा (4) के िंर् (क) का िोप धारा 80गगघ
का संशोधन ।
ककया जाएगा ।
39. आय-कर अधधननयम की धारा 80गगछ के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा नई धारा
अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— 80गगज का
अंत:स्थापन ।
“80गगज. (1) जहां ककसी ननधाषररती ने, जो अजग्नपथ स्कीम में अभ्यावेलशत अजग्नपथ
स्कीम में
व्यजष्ट् है और 1 नवंबर, 2022 को या उसके पश्चात ् अजग्नवीर समग्र ननधध में
अलभर्दाय के
अलभर्दाय कर रहा है, उक्त ननधध में अपने िाते में पूववष र् ष में कोई रकम संर्दत्त की है
संबंध में
या जमा की है, वहां उस े इस प्रकार संर्दत्त या जमा की गई संपूण ष रकम को उसकी क ौती ।
कुि आय की संगणना में क ौती के लिए अनुज्ञात ककया जाएगा ।
(2) जहां केंरीय सरकार, उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् अजग्नवीर समग्र ननधध में
ननधाषररती के िाते में कोई अलभर्दाय करती है, वहां ननधाषररती को इस प्रकार अलभर्दाय
की गई संपूण ष रकम को उसकी कुि आय की संगणना में क ौती के लिए अनुज्ञात
ककया जाएगा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए—
(क) “अजग्नपथ स्कीम” स े रिा मंत्रािय, भारत सरकार के पत्र
सं0 1(23)2022/र्ी(वेतन/सेवा), तारीि 29 ठर्दसंबर, 2022 के द्वारा आरंभ की
गई भारतीय सशस्त्र बिों में अभ्यावेशन के लिए स्कीम अलभप्रेत है ;
(ि) “अजग्नवीर समग्र ननधध” से ऐसी कोई ननधध अलभप्रेत है, जजसमें सभी
अजग्नवीरों के अलभर्दाय और केंरीय सरकार के समरूप अलभर्दाय इन र्दोनोंअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
764
अलभर्दायों पर ब्याज सठहत समेककत हैं ।”।
धारा 80छ का 40. आय-कर अधधननयम की धारा 80छ में,—
संशोधन ।
(I) उपधारा (2) के िंर् (क) में उपिंर् (ii), उपिंर् (iiiग) और उपिंर् (iiiघ)
का 1 अप्रैि, 2024 से िोप ककया जाएगा ;
(II) उपधारा (5) में,—
(अ) 1 अक्तूबर, 2023 से,—
(i) पहिे परंतुक में, िंर् (iv) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा
जाएगा, अथाषत ् :—
“(iv) ककसी अन्द्य र्दशा में, जहां संस्था या ननधध ने,—
(अ) उस ननधाषरण वर्,ष जजससे उक्त अनुमोर्दन की
ईप्सा की गई है, से सुसंगत पूव ष वर् ष के आरंभ से कम स े
कम एक मास पूव ष कायकष िाप आरंभ नहीं ककया है ;
(आ) कायकष िाप आरंभ कर ठर्दया है और जहां उक्त
संस्था या ननधध की ककसी आय या उसके ककसी भाग को,
ऐसे कायकष िाप आरंभ करने के पश्चात ् ककसी समय ऐसे
आवेर्दन की तारीि को या उससे पूव ष समाप्त होने वािे ककसी
पूव ष वर् ष के लिए धारा 10 के िंर् (23ग) के उपिंर् (iv) या
उपिंर् (v) या उपिंर् (vi) या उपिंर् (viक) या धारा 11 या
धारा 12 के िागू होने के कारण कुि आय से अपवजजषत
ककया गया है :”;
(ii) र्दसू रे परंतुक में,—
(क) िंर् (ii) में,—
(1) प्रारंलभक भाग में “िंर् (iii)” शब्र्द, कोष्ट्िक और
अिरों के पश्चात,् “या िंर् (iv) का उपिंर् (ि)” शब्र्द,
कोष्ट्िक और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(2) उपिंर् (ि) में, मर्द (आ) के स्थान पर,
ननम्नलिखित मर्द रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(आ) यठर्द उसका समाधान नहीं होता है तो वह
सुनवाई का युजक्तयुक्त अवसर ठर्दए जाने के पश्चात,्—
(I) पहिे परंतुक के िंर् (ii) या िंर् (iii)
में ननठर्दषष्ट् ककसी मामि े में ऐस े आवेर्दन को
नामंजूर करते हुए और साथ ही उसके अनुमोर्दन
को रद्र्द करते हुए लिखित आर्देश पाररत करेगा ;
या
(II) पहि े परंतुक के िंर् (iv) के उपिंर्
(आ) में ननठर्दषष्ट् ककसी मामि े में ऐस े आवेर्दन को
नामंजूर करते हुए लिखित आर्देश पाररत
करेगा ;”;
(ि) िंर् (iii) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
765
अथाषत ् :—
“(iii) जहां आवेर्दन उक्त परंतुक के िंर् (iv) के
उपिंर् (अ) के अधीन ककया गया है या आवेर्दन उक्त परंतुक
के िंर् (iv), जैसा कक वह ववत्त अधधननयम, 2023 द्वारा
उसके संशोधन से िीक पूवष यथाववद्यमान था, के अधीन
ककया गया है, वहां वह उस ननधाषरण वर्ष, जजससे अनुमोर्दन
की ईप्सा की गई है, से तीन वर् ष की अवधध के लिए अनंनतम
रूप से अनुमोर्दन मंजूर करते हुए लिखित आर्देश पाररत
करेगा,”;
(आ) तीसरे परंतुक में, “पहिे परंतुक” शब्र्दों के स्थान पर, “र्दसू रे परंतुक”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
41. आय-कर अधधननयम की धारा 80झकग के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ii) के धारा 80झकग
का संशोधन ।
उपिंर् (क) में, “2023” अंकों के स्थान पर, “2024” अंक रिे जाएंगे ।
42. आय-कर अधधननयम की धारा 80िक की उपधारा (1) में, िंर् (ि) के पश्चात ् धारा 80िक
का संशोधन ।
ननम्नलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु 1 अप्रैि, 2023 को या उसके पश्चात ् आरंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष के
लिए, इस िंर् के अधीन क ौती ऐसी आय की एक सौ प्रनतशत होगी ।”।
43. आय-कर अधधननयम की धारा 87 में,— धारा 87 का
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में, “या धारा 88 या धारा 88क या धारा 88ि या धारा 88ग
या धारा 88घ” शब्र्दों, अंकों और अिरों का िोप ककया जाएगा ;
(ि) उपधारा (2) में, “या धारा 88 या धारा 88क या धारा 88ि या धारा 88ग
या धारा 88घ” शब्र्दों, अंकों और अिरों का िोप ककया जाएगा ।
44. आय-कर अधधननयम की धारा 87क में, ननम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैि, 2024 स े धारा 87क का
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— संशोधन ।
“परंतु जहां ननधाषररती की कुि आय धारा 115िकग की उपधारा (1क) के
अधीन कर से प्रभाय ष है, और कुि आय—
(क) सात िाि रुपए स े अधधक नहीं है, तो ननधाषररती (इस अध्याय के
अधीन क ौनतयों के लिए अनुज्ञात करने के पूव ष यथासंगखणत) उसकी कुि आय
पर आय-कर की रकम से क ौती का हकर्दार होगा जजसके लिए वह ककसी
ननधाषरण वर् ष के लिए ऐस े आय-कर के सौ प्रनतशत के बराबर रकम या पच्चीस
हजार रुपए की रकम, जो भी कम हों, से प्रभाय ष है ;
(ि) सात िाि रुपए स े अधधक है तथा ऐसी कुि आय पर संर्देय आय-
कर ऐसी रकम स े अधधक है जजसके द्वारा कुि आय सात िाि रुपए स े
अधधक है, तो ननधाषररती (इस अध्याय के अधीन क ौनतयों के लिए अनुज्ञात
करने के पूव ष यथासंगखणत) उसकी कुि आय पर उस रकम के बराबर रकम पर
क ौती का हकर्दार होगा जजसके द्वारा ऐसी कुि आय पर संर्देय आय-कर उस
रकम स े अधधक है जजसके द्वारा कुि आय सात िाि रुपए स े अधधक होती
है ।”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
766
45. आय-कर अधधननयम की धारा 88 का िोप ककया जाएगा । धारा 88 का
िोप ।
धारा 92िक का 46. आय-कर अधधननयम की धारा 92िक में, िंर् (vक) के पश्चात ् ननम्नलिखित
संशोधन । िंर् 1 अप्रैि, 2024 से अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत,्—
“(vि) धारा 115िकङ की उपधारा (4) में यथाननठर्दषष्ट् ननधाषररती और अन्द्य
व्यजक्त के बीच संव्यवहार ककया गया कोई कारबार”;
धारा 92घ का 47. आय-कर अधधननयम की धारा 92घ की उपधारा (3) में “तीस ठर्दन की अवधध”
संशोधन ।
शब्र्दों के स्थान पर, “र्दस ठर्दन की अवधध” र्दोनों स्थानों पर, जहां-जहां वे आते हैं, शब्र्द रिे
जाएंगे ।
धारा 94ि का 48. आय-कर अधधननयम की धारा 94ि में, 1 अप्रैि, 2024 से,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (3) में, “भारतीय कंपनी या ववर्देशी कंपनी के स्थायी” शब्र्दों के
स्थान पर, “भारतीय कंपनी या ववर्देशी कंपनी या गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपननयों के
ऐसे वग,ष जजन्द्हें केंरीय सरकार द्वारा इस ननलमत्त राजपत्र में अधधसूधचत ककया जाए,
के स्थायी” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (5) में, िंर् (ii) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
‘(iiक) “गैर-बकैं कारी ववत्तीय कंपनी” का वही अथ ष होगा, जो धारा 36 की
उपधारा (1) के िंर् (viiक) के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (vii) में उसका है ;’।
धारा 111क का 49. आय-कर अधधननयम की धारा 111क की उपधारा (3) का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 112 का 50. आय-कर अधधननयम की धारा 112 की उपधारा (3) का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 115क का 51. आय-कर अधधननयम की धारा 115क की उपधारा (1) में 1 अप्रैि, 2024 से,—
संशोधन ।
(i) िंर् (क) के उपिंर् (अ) में, ननम्नलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् : —
“परंतु धारा 80िक की उपधारा (1क) में यथाननठर्दषष्ट् ककसी अंतरराष्ट्रीय
ववत्तीय सेवा केन्द्र में ककसी यूनन से प्राप्त िाभांश के माध्यम से आय की
रकम पर संगखणत आय-कर की रकम, र्दस प्रनतशत होगी ;”;
(ii) िंर् (ि) के उपिंर् (अ) और उपिंर् (आ) में, “र्दस” शब्र्द के स्थान पर
“बीस” शब्र्द रिा जाएगा ।’।
धारा 115िकग 52. आय-कर अधधननयम की धारा 115िकग में,—
का संशोधन ।
(अ) 1 अप्रैि, 2024 से—
(क) पाश्व ष शीर् ष में “ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब” शब्र्दों के स्थान पर, “ठहन्द्र्द ू
अववभक्त कु ुंब और अन्द्य” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) उपधारा (1) में, “1 अप्रिै , 2021” अंकों और शब्र्द के स्थान पर,
“1 अप्रैि, 2021 ककंतु 1 अप्रिै , 2024 से पूव”ष अंक और शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) उपधारा (1) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
767
जाएगी, अथाषत ् :—
“(1क) इस अधधननयम में ककसी बात के होते हुए भी, ककंत ु अध्याय
के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ककसी व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब
या व्यजक्त संगम (ककसी सहकारी सोसाइ ी स े लभन्द्न) या व्यजष्ट् ननकाय,
चाहे ननगलमत हो या नहीं या धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में
ननठर्दषष्ट् ककसी व्यजक्त से लभन्द्न, जो उपधारा (6) के अधीन ककसी
ववकल्प का प्रयोग करता है, ककसी कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की कुि आय
के संबंध में 1 अप्रैि, 2024 को या उसके पश्चात ् प्रारंभ होने वाि े
ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कुि आय के संबंध में संर्देय
आय-कर की संगणना ननम्नलिखित सारणी में र्दी गई र्दर पर की जाएगी,
अथाषत ् :—
सारर्ी
िम सं. कुि आय कर की दर
(1) (2) (3)
1. 3,00,000 रुपए तक शून्द्य
2. 3,00,001 रुपए से 6,00,000 रुपए 5 प्रनतशत
तक
3. 6,00,001 रुपए से 9,00,000 रुपए 10 प्रनतशत
तक
4. 900,001 रुपए से 12,00,000 रुपए 15 प्रनतशत
तक
5. 12,00,001 रुपए से 15,00,000 रुपए 20 प्रनतशत
तक
6. 15,00,001 रुपए स े अधधक 30 प्रनतशत”;
(आ) 1 अप्रैि, 2023 से, उपधारा (2) के िंर् (i) में, “धारा 80गगघ की
उपधारा (2) या” शब्र्दों, अंकों और अिरों के पश्चात,् “धारा 80गगज की उपधारा (2)
या” शब्र्द, कोष्ट्िक, अंक और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(इ) 1 अप्रैि, 2024 से,—
(क) उपधारा (2) में, प्रारंलभक पंजक्त और िंर् (i) के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(2) उपधारा (1क) के प्रयोजनों के लिए, इसमें ननठर्दषष्ट् व्यजक्त की
कुि आय की संगणना,—
(i) धारा 10 के िंर् (5) या िंर् (13क) के अधीन या
िंर् (14) (ऐस े प्रयोजन स े लभन्द्न, जो इस प्रयोजन के लिए ववठहत
ककए जाएं) या िंर् (17) या िंर् (32) या धारा 10कक या
धारा 16 के िंर् (ii) या िंर् (iii) या धारा 24 के िंर् (ि)
[धारा 23 की उपधारा (2) में ननठर्दषष्ट् संपवत्त की बाबत] या
धारा 32 की उपधारा (1) के िंर् (iiक) या धारा 32कि या
धारा 32किक या धारा 32कघ या धारा 35 की उपधारा (1) के
िंर् (ii) या िंर् (iiक) या िंर् (iii) या उपधारा (2कक) याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
768
धारा 35कघ या धारा 35गगग या धारा 80गगघ की उपधारा (2)
या धारा 80गगज की उपधारा (2) या धारा 80ञञकक के उपबंधों
से लभन्द्न अध्याय 7क के ककसी भी उपबंध के अधीन ककसी छू
या क ौती के त्रबना की जाएगी ;”;
(ि) उपधारा (3) के परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक—
(i) ऐसी र्दशा में, जहा ं ननधाषररती ने 1 अप्रैि, 2023 को या
उससे पूव ष प्रारंभ होने वाि े ककसी ननधाषरण वर् ष से सुसंगत ककसी
पूववष र् ष के लिए उपधारा (5) के अधीन ककसी ववकल्प का उपयोग
नहीं ककया है ;
(ii) ननधाषररती की कुि आय पर आय-कर की संगणना
उपधारा (1क) के अधीन की गई है ; और
(iii) आजस्तयों के ककसी िंर् की बाबत अवियण मोक है,
जजसको 1 अप्रैि, 2024 को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष स े पूव ष
पूण ष रूप से प्रभावी नहीं ककया गया है,
तत्स्थानी समायोजन ऐसी आजस्त िंर् के अवलिखित मूल्य पर,
1 अप्रैि, 2023 की जस्थनत के अनुसार यथाववठहत रीनत में ककया
जाएगा ।”;
(ग) उपधारा (4) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी,
अथाषत ् :—
‘(4) ऐसे व्यजक्त की र्दशा में, जजसके पास धारा 80िक की
उपधारा (1क) में यथाननठर्दषष्ट् अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर की कोई
यूनन है,—
(i) जजसने 1 अप्रैि, 2021 को या उसके पश्चात ् प्रारंभ होने
वािे ककसी ननधाषरण वर् ष से सुसंगत, पूववष र् ष के लिए ककंतु 1 अप्रैि,
2024 से पूव ष उपधारा (5) के अधीन ववकल्प का उपयोग ककया है;
(ii) जजसकी कुि आय की सगं णना उपधारा (1क) के अधीन
की गई है,
उपधारा (2) में अंतववष्ट्ष शतों को उस पररमाण तक उपांतररत ककया
जाएगा कक धारा 80िक के अधीन क ौती ऐसी यूनन को उक्त धारा में
अंतववष्ट्ष शतों के पूरा होने के अधीन रहते हुए उपिब्ध होगी ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “यूनन ” पर्द का
वही अथ ष होगा, जो उसका ववशेर् आधथकष जोन अधधननयम, 2005 की 2005 का 28
धारा 2 के िंर् (यग) में है’;
(घ) उपधारा (5) में, परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक इस उपधारा के उपबंध 1 अप्रैि, 2024 को या
उसके पश्चात ् आरंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष स े सुसंगत ककसी पूववष र् ष को
िागू नहीं होंगे ।”;
(ङ) उपधारा (5) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंतःस्थावपत कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
769
जाएगी, अथाषत ् :—
“(6) उपधारा (1क) में अंतववष्ट्ष कोई बात, उस व्यजक्त को िागू
नहीं होगी जहां ककसी ननधाषरण वर् ष के लिए यथाववठहत रीनत में, ऐसे
व्यजक्त द्वारा ववकल्प का प्रयोग ककया जाता है और ऐसा ववकल्प,—
(i) कारबार या ववृत्त से आय वािे व्यजक्त की र्दशा में ऐस े
ननधाषरण वर् ष के लिए आय की वववरणी प्रस्तुत करने के लिए
धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन ववननठर्दषष्ट् ननयत तारीि को
या उसके पूव ष प्रयोग ककया जाएगा, और एक बार प्रयोग करने पर
ऐसा ववकल्प पश्चात्वती ननधाषरण वर्ों के लिए िागू होगा ; या
(ii) िंर् (i) में ननठर्दषष्ट् आय न रिने वािे व्यजक्त की र्दशा
में, ऐसे ननधाषरण वर् ष के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन
प्रस्तुत की जाने वािी आय की वववरणी के साथ प्रयोग ककया
जाएगा :
परंतु िंर् (i) के अधीन ववकल्प ककसी पूववष र् ष के लिए एक बार
प्रयोग होने पर उस वर् ष से लभन्द्न जजसमें इसे प्रयोग ककया गया था, एक
पूववष र् ष के लिए केवि एक बार वापस लिया जा सकेगा और तत्पश्चात,
लसवाय जहां ऐसा व्यजक्त कारबार या ववृत्त से कोई आय नहीं रिता है,
इस उपधारा के अधीन ववकल्प के प्रयोग के लिए कभी भी पात्र नही ं
होगा, उस र्दशा में िंर् (ii) के अधीन ववकल्प उपिब्ध रहेगा ।’।
53. आय-कर अधधननयम की धारा 115िकघ की उपधारा (1) में, “ककंतु” शब्र्द के धारा
115िकघ का
पश्चात,् “धारा 115िकङ के अधीन उजल्िखित उपबंधों से लभन्द्न” शब्र्द 1 अप्रैि, 2024 से
संशोधन ।
अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ।
54. आय-कर अधधननयम की धारा 115िकघ के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा न ई धारा
1 अप्रैि, 2024 से, अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— 115िकङ का
अंतःस्थापन ।
“115िकङ (1) इस अधधननयम में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, ककंतु कनतपय नई
ववननमाषता
धारा 115िकघ के अधीन उजल्िखित उपबंधों से लभन्द्न इस अध्याय के उपबंधों के
सहकारी
अधीन रहते हुए, 1 अप्रैि, 2024 को या उसके पश्चात ् आरंभ होने वािे ननधाषरण वर्ष
सोसाइठ यों की
से सुसंगत ककसी पूववष र् ष के लिए ननधाषररती, जो भारत में ननवासी सहकारी सोसाइ ी आय पर कर ।
है, की कुि आय के संबंध में संर्देय आय-कर, ऐसे ननधाषररती के ववकल्प पर
पंरह प्रनतशत की र्दर पर संगखणत ककया जाएगा, यठर्द उपधारा (2) में अंतववष्ट्ष शतों
को पूरा ककया जाता है :
परंतु जहां ननधाषररती की कुि आय के अंतगतष कोई ऐसी आय सजम्मलित है जो
ककसी वस्तु या चीज के ववननमाषण या उत्पार्दन से न तो व्युत्पन्द्न है न ही उसके
आनुर्ंधगक है तथा जजसके संबंध में इस अध्याय के अधीन पथृ क् रूप से कर की
ककसी ववननठर्दषष्ट् र्दर का उपबधं नहीं ककया गया है, तो ऐसी आय बाईस प्रनतशत की
र्दर पर कर योग्य होगी तथा ऐसी आय की संगणना में ककए गए ककसी व्यय या भत्त े
के संबंध में कोई क ौती या मोक नहीं ककया जाएगा :
परंतु यह और कक उपधारा (4) के र्दसू रे परंतुक के अधीन ऐसी समझी गयी
ननधाषररती की आय के संबंध में संर्देय आय-कर, तीस प्रनतशत की र्दर पर संगखणत
ककया जाएगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
770
परंतु यह भी कक पूंजी आजस्त के अंतरण से व्युत्पन्द्न अल्प अवधध पूंजी
अलभिाभों से आय, जजस पर अधधननयम के अधीन कोई अवियण अनुज्ञेय नहीं है,
के संबंध में संर्देय आय-कर बाईस प्रनतशत की र्दर पर संगखणत ककया जाएगा :
परंतु यह भी कक जहां ककसी पूववष र् ष में उपधारा (2) में अंतववष्ट्ष शतों को पूरा
करने में ननधाषररती असफि रहता है तो उस पूव ष वर् ष तथा पश्चात्वती ननधाषरण वर्ों
से सुसंगत ननधाषरण वर् ष के सबं ंध में ववकल्प अववधधमान्द्य हो जाएगा तथा ननधाषररती
को अधधननयम के अन्द्य उपबंध िागू होंगे मानो उस पूव ष वर् ष तथा पश्चात्वती
ननधाषरण वर्ों स े सुसंगत ननधाषरण वर् ष के लिए ववकल्प का प्रयोग नहीं ककया गया
था ।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, ननम्नलिखित शतें िागू होंगी,
अथाषत ् :—
(क) सहकारी सोसाइ ी का गिन और रजजस्रीकरण 1 अप्रिै , 2023 को
या उसके पश्चात ् ककया गया है तथा उसमें 31 माच,ष 2024 को या उसके पूव ष
ककसी वस्तु या चीज का ववननमाषण या उत्पार्दन आरंभ कर ठर्दया है तथा,—
(i) कारबार, पहिे स े ही ववद्यमान कारबार को बां कर या पुनः
ननलमतष करके नहीं ककया गया है ;
(ii) ककसी प्रयोजन के लिए पहिे से ही प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र
का उपयोग नहीं करता है ।
स्पष्ट्टीकरर् 1—उपिंर् (ii) के प्रयोजनों के लिए, कोई मशीनरी या संयंत्र,
जजसका उपयोग ककसी अन्द्य व्यजक्त द्वारा भारत के बाहर ककया गया था,
ककसी प्रयोजन के लिए पहि े स े प्रयुक्त मशीनरी या संयत्रं नहीं माना जाएगा
यठर्द ननम्नलिखित शतें पूरी की जाती है, अथाषत ् :—
(अ) ऐसी मशीनरी या संयंत्र संस्थावपत करने की तारीि से पहि े
ककसी भी समय भारत में प्रयक्ु त नहीं हुई थी ;
(आ) ऐसी मशीनरी या संयंत्र भारत के बाहर ककसी र्देश से भारत में
आयानतत की गई थी ; और
(इ) व्यजक्त द्वारा मशीनरी या संयंत्र को संस्थावपत करने की
तारीि से पूव ष ककसी भी अवधध के लिए ककसी व्यजक्त की कुि आय की
संगणना करने में इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन ऐसी मशीनरी या
संयंत्र के संबंध में अवियण के मद्र्दे कोई क ौती अनुज्ञात नहीं की गई
है या अनुज्ञेय नहीं है ।
स्पष्ट्टीकरर् 2—जहां ककसी प्रयोजन के लिए पूव ष में प्रयुक्त कोई मशीनरी
या संयंत्र या उसका कोई भाग, ननधाषररती द्वारा प्रयोग के लिए रिा जाता है
और ऐसी मशीनरी या संयंत्र या उसके भाग का कोई मल्ू य ननधाषररती द्वारा
प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र के कुि मूल्य के बीस प्रनतशत स े अनधधक है, तो
उपिंर् (ii) के प्रयोजनों के लिए उसमें ववननठर्दषष्ट् शतों का पािन ककया गया
समझा जाएगा ;
(ि) ननधाषररती ककसी वस्तु या चीज के ववननमाषण या उत्पार्दन के कारबार
और इसके द्वारा ववननलमतष या उत्पाठर्दत ऐसी वस्तु या चीज के संबंध में
अनुसंधान या उसके ववतरण से लभन्द्न ककसी अन्द्य कारबार में नहीं िगा है।
स्पष्ट्टीकरर्—शंकाओं को र्दरू करने के लिए, यह स्पष्ट् ककया जाता हैअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
771
कक ककसी वस्तु या चीज के ववननमाषण या उत्पार्दन के कारबार के अंतगतष
ववद्युत के उत्पार्दन का कारबार भी सजम्मलित होगा, ककंतु ननम्नलिखित का
कारबार सजम्मलित नहीं होगा,—
(i) ककसी भी रूप में या ककसी माध्यम में कंप्यू र साफ् वेयर का
ववकास ;
(ii) िनन ;
(iii) संगमरमर िंर्ों या वैसी ही चीजों को पट्ठ यों में पररवनततष
करना ;
(iv) लसिेंर्र में गैस भरना ;
(v) पुस्तकों का मरु ण या लसनेमे ोग्राफ कफल्म का ननमाषण ; या
(vi) कोई अन्द्य कारबार, जजसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस ननलमत्त
अधधसूधचत ककया जाए ;
(ग) ननधाषररती की कुि आय,—
(i) धारा 10कक या धारा 32 की उपधारा (1) के िंर् (iiक) या
धारा 33कि अथवा धारा 33किक या धारा 35 की उपधारा (1) के
उपिंर् (ii), उपिंर् (iiक) या उपिंर् (iii) या उपधारा (2कक) या
धारा 35कघ अथवा धारा 35गगग के उपबंधों के अधीन या धारा
80ञञकक के उपबंधों से लभन्द्न अध्याय 6क के ककन्द्हीं उपबंधों के अधीन
ककसी क ौती के त्रबना ;
(ii) अग्रणीत ककसी हानन के मुजरा या ककसी पूववष ती ननधाषरण वर् ष
से अवियण के त्रबना, यठर्द ऐसी हानन या अवियण िंर् (i) में ननठर्दषष्ट्
ककन्द्हीं क ौनतयों के कारण हुआ माना जा सकता है ; और
(iii) उक्त धारा की उपधारा (1) के िंर् (iiक) स े लभन्द्न, धारा 32
के अधीन ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, अवधाररत अवियण का
र्दावा करके, यठर्द कोई हों,
की संगणना की गई है ।
(3) उपधारा (2) के िंर् (ग) के उपिंर् (ii) में ननठर्दषष्ट् हानन और अवियण
पूण ष रूप से प्रभावी ककया गया समझा जाएगा तथा ऐसी हानन के लिए कोई और
क ौती ककसी पश्चात्वती वर् ष के लिए अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(4) जहां ननधाषरण अधधकारी को ऐसा प्रतीत होता है कक ननधाषररती जजसको यह
धारा िागू होती है तथा ककसी अन्द्य व्यजक्त के बीच कोई ननक संबंध होने के
कारण या ककसी अन्द्य कारण से उनके बीच कारबार का अनुक्रम इस प्रकार
व्यवजस्थत है कक उनके बीच संव्यवहार ककया गया कारबार ननधाषररती को साधारण
िाभों, जजनकी ऐसे कारबार में उद्भूत होने की प्रत्याशा है, से अधधक िाभ प्रर्दान
करता है, तो ननधाषरण अधधकारी इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे कारबार से िाभों
और अलभिाभों की गणना करने में िाभों की ऐसी रकम संगणना में िेगा, जो
युजक्तयुक्त रूप से उससे व्युत्पन्द्न प्रतीत हों :
परंतु उस र्दशा में, जहां धारा 92िक में ननठर्दषष्ट् ककसी ववननठर्दषष्ट् र्देशी
संव्यवहार पूवोक्त िहराव में अंतवलषित है, तो ऐसे संव्यवहार से िाभ की रकम
धारा 92च के िंर् (ii) में यथा पररभावर्त सजन्द्नक कीमत का ध्यान रिते हुए
अवधाररत की जाएगी :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
772
परंतु यह और भी कक ननधाषरण अधधकारी द्वारा अवधाररत िाभ की रकम स े
अधधक िाभ की रकम, ननधाषररती की आय समझी जाएगी ।
(5) इस धारा में अंतववष्ट्ष कोई बात िागू नहीं होगी, यठर्द 1 अप्रैि, 2024 को
या उसके पश्चात ् आरंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत ककसी पूव ष वर् ष के लिए
आय की पहिी वववरणी प्रस्तुत करने के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन
ववननठर्दषष्ट् ननयत तारीि को या उसके पूव ष ववठहत रीनत में, व्यजक्त द्वारा ववकल्प का
प्रयोग नहीं ककया जाता है :
परंतु ककसी पूववष र् ष के लिए ववकल्प का प्रयोग हो जान े पर, इसे उसी या ककसी
अन्द्य पूववष र् ष के लिए तत्पश्चात ् वापस नहीं लिया जा सकता ।”।
धारा 115िि 55. आय-कर अधधननयम की धारा 115िि में, स्पष्ट् ीकरण के स्थान पर, 1 अप्रैि,
का संशोधन । 2024 से, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘परंतु इस धारा में अंतववष्ट्ष कोई बात, 1 अप्रैि, 2024 को या उसके पश्चात ्
प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर्ष के लिए ककसी आनिाइन िेि से जीत के माध्यम से
आय पर िागू नहीं होगी ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) “घुड़र्दौड़” का वही अथ ष होगा, जो धारा 74क में उसका है ;
(ii) “आनिाइन िेि” का वही अथ ष होगा, जो धारा 115ििञ में उसका
है ।’।
नई धारा 56. आय-कर अधधननयम की धारा 115ििझ के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा
115ििञ का 1 अप्रैि, 2024 स े अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
अंत:स्थापन ।
आनिाइन िेि ‘115ििञ. (1) इस अधधननयम के ककन्द्हीं अन्द्य उपबंधों में अंतववष्ट्ष ककसी
से जीत पर
बात के होते हुए भी, जहां ककसी ननधाषररती की कुि आय के अंतगतष ककसी
कर ।
आनिाइन िेि से जीत के माध्यम से आय भी है, संर्देय आय-कर ननम्नलिखित का
कुि योग होगा—
(i) पूववष र् ष के र्दौरान ऐस े आनिाइन िेिों से शद्ु ध जीतों पर संगखणत
आय-कर की रकम, उस रीनत में, जो ववठहत की जाए, सगं खणत तीस प्रनतशत
की र्दर पर होगी ; और
(ii) आय-कर की रकम, जो ननधाषररती पर प्रभाय ष होती यठर्द उसकी कुि
आय, िंर् (i) में ननठर्दषष्ट् शुद्ध जीतों से घ ा र्दी गई होती ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) “कंप्यू र संसाधन” का वही अथ ष होगा, जो धारा 144ि के
स्पष्ट् ीकरण के िंर् (ङ) में उसका है ;
(ii) “इं रने ” स े अंतर-संबंधधत ववश्वव्यापी कंप्यू र ने वकष से लमिकर
बनी कंप्यू र सुववधाओं और इिेक्रो-मैग्नेठ क पारेर्ण मीडर्या तथा संबंधधत
उपस्कर और साफ् वेयर का संयोजन अलभप्रेत है, जो ऐस े पारेर्ण का ननयंत्रण
करने के लिए प्रो ोकाि के आधार पर सूचना का पारेर्ण करता है ;
(iii) “आनिाइन िेि” से वह िेि अलभप्रेत है, जजसे इं रने पर
प्रस्ताववत ककया जाता है और वह ककसी उपयोक्ता द्वारा कंप्यू र संसाधन के
माध्यम से पहुंच योग्य है, जजसके अंतगतष कोई र्दरू संचार युजक्त भी है ।’।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
773
धारा 115ञग का 57. आय-कर अधधननयम की धारा 115ञग में, उपधारा (5) के स्थान पर, 1 अप्रैि,
संशोधन । 2024 से, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(5) इस धारा के उपबंध ऐसे ककसी व्यजक्त को िागू नहीं होंगे, जहां,—
(i) ऐस े व्यजक्त ने धारा 115िकग की उपधारा (5) या धारा 115िकघ
की उपधारा (5) या धारा 115िकङ की उपधारा (5) में ननठर्दषष्ट् ववकल्प का
प्रयोग ककया है ; या
(ii) ऐस े व्यजक्त की कुि आय के संबंध में संर्देय आय-कर,
धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन संगखणत ककया जाता है ।”।
58. आय-कर अधधननयम की धारा 115ञघ में, उपधारा (7) के स्थान पर, 1 अप्रैि, धारा 115ञघ
2024 से, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :— का संशोधन ।
“(7) इस धारा के उपबंध ऐसे ककसी व्यजक्त को िागू नहीं होंगे, जहां,—
(i) ऐस े व्यजक्त ने धारा 115िकग की उपधारा (5) या धारा 115िकघ
की उपधारा (5) या धारा 115िकङ की उपधारा (5) में ननठर्दषष्ट् ववकल्प का
प्रयोग ककया है ; या
(ii) ऐस े व्यजक्त की कुि आय के संबंध में संर्देय आय-कर,
धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन संगखणत ककया जाता है ।”।
59. आय-कर अधधननयम की धारा 115नघ में,— धारा 115नघ
का संशोधन ।
(i) उपधारा (3) में,—
(क) िंर् (ii) के उपिंर् (ि) में, “अस्वीकार कर ठर्दया गया है ।” शब्र्दों
के स्थान पर, “अस्वीकार कर ठर्दया गया है ; या” रिे जाएंगे ;
(ि) िंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
(iii) वह, धारा 10 के िंर् (23ग) के पहिे परंतुक के िंर् (i) या
िंर् (ii) या िंर् (iii) या धारा 12क की उपधारा (1) के िंर् (कग) के
उपिंर् (i) या उपिंर् (ii) या उपिंर् (iii) के उपबंधों के अनुसार,
यथाजस्थनत, उक्त िंर्ों या उपिंर्ों में ववननठर्दषष्ट् अवधध के भीतर, जो
उक्त पूववष र् ष में समाप्त हो गई है, आवेर्दन करने में असफि रहता है ।”;
(ii) उपधारा (5) के िंर् (ii) में, “िंर् (ii) के उपिंर् (क)” शब्र्द, कोष्ट्िकों और
अंकों के पश्चात,् “िंर् (ii) या िंर् (iii)” शब्र्द, कोष्ट्िक और अंक अंतःस्थावपत ककए
जाएंगे ;
(iii) स्पष्ट् ीकरण के िंर् (i) में,—
(क) उपिंर् (ि) में, “उपांतररत करने की तारीि ;” शब्र्दों के स्थान पर,
“उपांतररत करने की तारीि ; या” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) उपिंर् (ि) के पश्चात ् ननम्नलिखित उपिंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“(ग) उपधारा (3) के िंर् (iii) में ननठर्दषष्ट् ककसी मामिे में,
यथाजस्थनत, धारा 12क की उपधारा (1) के िंर् (कग) के उपिंर् (i) या
उपिंर् (ii) या उपिंर् (iii) के अधीन रजजस्रीकरण हेतु आवेर्दन करने या
धारा 10 के िंर् (23ग) के पहिे परंतुक के िंर् (i) या िंर् (ii) याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
774
िंर् (iii) के अधीन अनुमोर्दन हेतु आवेर्दन करने की अंनतम तारीि ;”।
60. आय-कर अधधननयम की धारा 115पक में, उपधारा (3) के पश्चात ् 1 अप्रैि, धारा 115पक
2024 से ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— का संशोधन ।
“(3क) उपधारा (1) के उपबधं ककसी कारबार न्द्यास से ककसी यूनन धारक
द्वारा प्राप्त की गई ऐसी ककसी रालश के संबंध में िागू नहीं होंगे, जजसे धारा 56 की
उपधारा (2) के िंर् (xii) में ननठर्दषष्ट् ककया गया है ।”।
धारा 115पि का 61. आय-कर अधधननयम की धारा 115पि के स्पष्ट् ीकरण 1 के िंर् (क) में, “जजस े
संशोधन ।
भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष अधधननयम, 1992 या अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर 1992 का 15
प्राधधकरण अधधननयम, 2019 के अधीन बनाए गए भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष 2019 का 50
(आनुकजल्पक ववननधान ननधध) ववननयम, 2012 के अधीन” शब्र्दों, अंकों और कोष्ट्िकों के
स्थान पर, “जजसे भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष अधधननयम, 1992 के अधीन बनाए 1992 का 15
गए भारतीय प्रनतभूनत और ववननमय बोर् ष (आनुकजल्पक ववननधान ननधध) ववननयम, 2012
या अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण अधधननयम, 2019 के अधीन बनाए गए 2019 का 50
अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण (ननधध प्रबंध) ववननयम, 2022 के अधीन
ववननयलमत” शब्र्द, अंक और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 115फत का 62. आय-कर अधधननयम की धारा 115फत में,—
संशोधन ।
(i) उपधारा (2) में परंतुक के पश्चात ् ननम्नलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक ककसी अंतरराष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केन्द्र की कोई यूनन ,
जजसने धारा 80िक के अधीन क ौती प्राप्त की है, उस तारीि से जजसको ऐसी
क ौती रुक जाती है, तीन मास के भीतर आवेर्दन कर सकेगी ।”;
(ii) उपधारा (5) के पश्चात ् ननम्नलिखित स्पष्ट् ीकरण अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
‘स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “अंतरराष्ट्रीय ववत्तीय सेवा
केन्द्र” का वही अथ ष होगा, जो उसका ववशेर् आधथकष जोन अधधननयम, 2005 2005 का 28
की धारा 2 के िंर् (थ) में है ।’।
धारा 116 का 63. आय-कर अधधननयम की धारा 116 के िंर् (गगक) में, “आय-कर संयुक्त
संशोधन ।
आयुक्त” शब्र्दों के पश्चात,् “या आय-कर संयुक्त आयुक्त (अपीि)” शब्र्द अंत:स्थावपत ककए
जाएंगे ।
धारा 119 का 64. आय-कर अधधननयम की धारा 119 में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों
संशोधन ।
के स्थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 131 का 65. आय-कर अधधननयम की धारा 131 में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों
संशोधन ।
के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ।
धारा 132 का 66. आय-कर अधधननयम की धारा 132 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (2) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(2) प्राधधकृत अधधकारी, उपधारा (1) या उपधारा (1क) में ववननठर्दषष्ट्
सभी या ककन्द्हीं प्रयोजनों में अपनी सहायता के लिए, ननम्नलिखित की सेवाओं
की अध्यपेिा कर सकेगा—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
775
(i) ककसी पुलिस अधधकारी या केंरीय सरकार के ककसी अधधकारी,
या र्दोनों ; या
(ii) ककसी अन्द्य व्यजक्त या इकाई, जैसा इस संबंध में ऐसी प्रकक्रया
के अनुसार, जो ववठहत की जाए, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य
आयुक्त, प्रधान महाननर्देशक या महाननर्देशक द्वारा अनुमोठर्दत ककया
जाए,
और ऐसे प्रत्येक अधधकारी या व्यजक्त या इकाई का यह कतव्ष य होगा कक वह
ऐसी अध्यपेिा का अनुपािन करे ।”;
(ि) उपधारा (9घ) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी,
अथाषत ् :—
“(9घ) प्राधधकृत अधधकारी, तिाशी या अलभग्रहण के र्दौरान या उस
तारीि से, जजसको तिाशी के लिए अंनतम प्राधधकारों का ननष्ट्पार्दन ककया गया
था, साि ठर्दन की अवधध के भीतर,—
(i) धारा 142क में ननठर्दषष्ट् मल्ू यांकन अधधकारी को, या
(ii) तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध के द्वारा या अधीन ककसी अन्द्य
व्यजक्त या इकाई या ककसी रजजस्रीकृत मूल्यांकक को जैसा कक प्रधान
मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महाननर्देशक या महाननर्देशक
द्वारा इस संबंध में ऐसी प्रकक्रया के अनुसार, जो ववठहत की जाए,
अनुमोठर्दत ककया जाए,
ननर्देश कर सकेगा, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की जाए, संपवत्त के उधचत बाजार
मूल्य का प्राक्किन करेगा तथा, यथाजस्थनत, प्राधधकृत अधधकारी या ननधाषरण
अधधकारी को प्राक्किन की ररपो ष ऐसे ननर्देश की प्राजप्त की तारीि से
साि ठर्दन की अवधध के भीतर प्रस्तुत करेगा ।”।
(ग) स्पष्ट् ीकरण 1 के स्थान पर, ननम्नलिखित स्पष्ट् ीकरण रिा जाएगा और
1 अप्रैि, 2022 स े रिा गया समझा जाएगा, अथाषत ् :—
‘स्पष्ट्टीकरर् 1—उपधारा (9क), उपधारा (9ि) और उपधारा (9घ) के
प्रयोजनों के लिए, “तिाशी के लिए अंनतम प्राधधकार” को,—
(क) तिाशी के मामि े में, ऐसे ककसी व्यजक्त के संबंध में, जजसके
मामिे में प्राधधकार का वारं जारी ककया जा चुका है, तैयार अंनतम
पंचनामे में यथा अलभलिखित तिाशी के पूण ष होने पर ; या
(ि) धारा 132क के अधीन अध्यपेिा के मामिे में, प्राधधकृत
अधधकारी द्वारा िेिा बठहयों या अन्द्य र्दस्तावेजों या आजस्तयों की
वास्तववक प्राजप्त पर,
ननष्ट्पाठर्दत ककया गया समझा जाएगा ।’।
67. आय-कर अधधननयम की धारा 133 में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों धारा 133 का
संशोधन ।
के स्थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
68. आय-कर अधधननयम की धारा 134 में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों धारा 134 का
संशोधन ।
के स्थान पर, र्दोनों स्थानों पर, जहां कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) याअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
776
आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
69. आय-कर अधधननयम की धारा 135क की उपधारा (2) में, परंतुक के पश्चात,् धारा 135क
का संशोधन ।
ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा और 1 अप्रैि, 2022 से अंत:स्थावपत
ककया गया समझा जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक केंरीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना द्वारा, इस उपधारा
के अधीन 31 माच,ष 2022 को या उसके पूव ष जारी ककसी ननर्देश का संशोधन कर
सकेगी।”।
धारा 140ि का 70. आय-कर अधधननयम की धारा 140ि की उपधारा (4) में, 1 अप्रैि, 2022
संशोधन । से,—
(i) प्रारंलभक भाग में, “यथाजस्थनत, जो ननधाषररत कर के बराबर है, रकम पर की
जाएगी या उतनी रकम पर, जजतनी से संर्दत्त अधग्रम कर ननधाषररती कर से कम पड़
जाता है” शब्र्दों के स्थान पर, “जो ननधाषररत कर के बराबर है, रकम पर की जाएगी”
शब्र्द रिे जाएंगे और रिे गए समझे जाएंगे ;
(ii) िंर् (क) के उपिंर् (i) में, “पूवतष र वववरणी” शब्र्दों के पश्चात,् “, यठर्द कोई
हो,” शब्र्द अंत:स्थावपत ककए जाएंगे और अंत:स्थावपत ककए गए समझे जाएंगे ।
धारा 142 का 71. आय-कर अधधननयम की धारा 142 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (2क) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी,
अथाषत ् :—
“(2क) यठर्द ननधाषरण अधधकारी के समि कायवष ाठहयों के ककसी प्रक्रम पर,
उसकी िेिाओं की प्रकृनत और जठ िता, िेिाओं की मात्रा, िेिाओं के सही
होने के बारे में संर्देहों, िेिाओं में संव्यवहारों की बहुिता या ननधाषररती के
कारबार कक्रयाकिाप की ववशेर्ीकृत प्रकृनत को ध्यान में रिते हुए तथा राजस्व
के ठहत में, यह राय है कक ऐसा करना आवश्यक है तो वह प्रधान मुख्य
आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त के पूव ष अनुमोर्दन से
ननधाषररती को ननम्नलिखित एक या र्दोनों, अथाषत ् :—
(i) प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या
आयुक्त द्वारा इस ननलमत्त नामननर्देलशत, धारा 288 की उपधारा (2) के
नीचे स्पष्ट् ीकरण में यथा पररभावर्त ककसी िेिाकार द्वारा िेिाओं की
संपरीिा करवाने तथा ऐसे िेिाकार द्वारा सम्यक् रूप से हस्तािररत
तथा सत्यावपत ववठहत प्ररूप में ऐसी ववलशजष्ट् यां संिग्न करते हुए, जो
ववठहत की जाएं तथा ऐसी अन्द्य ववलशजष्ट् यां, जजनकी ननधाषरण अधधकारी
अपेिा करे, ऐसी संपरीिा की ररपो ष प्रस्तुत करने ;
(ii) प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या
आयुक्त द्वारा इस ननलमत्त नामननर्देलशत िागत िेिाकार द्वारा तालिका
का मूल्यांकन करवाने तथा ऐसे िागत िेिाकार द्वारा सम्यक् रूप से
हस्तािररत तथा सत्यावपत ववठहत प्ररूप में ऐसी ववलशजष्ट् यां संिग्न करते
हुए, जो ववठहत की जाएं तथा ऐसी अन्द्य ववलशजष्ट् यां, जजनकी ननधाषरण
अधधकारी अपेिा करे, ऐसी सपं रीिा की ररपो ष प्रस्तुत करने,
के लिए ननर्देलशत कर सकेगा :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
777
परंतु ननधाषरण अधधकारी ननधाषररती को िेिा इस प्रकार संपरीक्षित करवाने या
तालिका का इस प्रकार मूल्याकं न करवाने के लिए ननर्देलशत नहीं करेगा, यठर्द
ननधाषररती को सुनवाई का एक युजक्तयुक्त अवसर प्रर्दान नहीं ककया गया है;”;
(ि) उपधारा (2घ) में,—
(i) “ककसी संपरीिा के व्यय तथा उसके आनुर्ंधगक व्यय (जजनके अंतगतष
िेिापाि का पाररश्रलमक भी है)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “ककसी
संपरीिा या ककसी तालिका मूल्यांकन, जजनके अंतगषत, यथाजस्थनत, िेिापाि
या िागत िेिापाि का पाररश्रलमक भी है” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ii) परंतुक में,—
(I) “ककसी ऐसी संपरीिा के” शब्र्दों के स्थान पर, “ककसी ऐसी
संपरीिा या ककसी ऐसी तालिका मूल्यांकन के” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(II) “ककसी ऐसी सपं रीिा के और उसके आनुर्ंधगक व्यय (जजनके
अंतगतष िेिापाि का पाररश्रलमक भी है)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान
पर, “ककसी ऐसी संपरीिा या ककसी ऐसी तालिका मूल्याकं न (जजनके
अंतगतष , यथाजस्थनत, िेिापाि या िागत िेिापाि का पाररश्रलमक भी
है)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ग) उपधारा (3) में, “संपरीिा” शब्र्द के पश्चात ् “या तालिका मूल्यांकन”, शब्र्द
रिे जाएंगे ;
(घ) उपधारा (4) के पश्चात,् ननम्नलिखित स्पष्ट् ीकरण अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
‘स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “िागत िेिापाि” स े िागत
1959 का 23 और संकम ष िेिापाि अधधननयम, 1959 की धारा 2 की उपधारा (1) के
िंर् (ि) में यथापररभावर्त िागत िेिापाि अलभप्रेत है और जो उक्त
अधधननयम की धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन व्यवसाय करने का
ववधधमान्द्य प्रमाणपत्र धारण करता है ।’।
72. आय-कर अधधननयम की धारा 148 में,— धारा 148 का
संशोधन ।
(क) “ऐसी अवधध के भीतर, जो ऐसी सूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाए”, शब्र्दों के
स्थान पर, “उस मास के अंत से, जजसमें सूचना जारी की जाए, से तीन मास की
अवधध के भीतर, या ऐसी और अवधध, जो ननधाषररती द्वारा इस संबंध में ककए गए
आवेर्दन के आधार पर ननधाषरण अधधकारी द्वारा अनुज्ञात की जाए”, शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(ि) र्दसू रे परंतुक के पश्चात ् और स्पष्ट् ीकरण 1 स े पूव,ष ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह भी कक आय की कोई वववरणी, जजसका ककसी ननधाषररती द्वारा
इस धारा के अधीन प्रस्तुत ककया जाना अपेक्षित है और जजसे अनुज्ञात अवधध
से परे प्रस्तुत ककया गया है, को धारा 139 के अधीन वववरणी नहीं समझा
जाएगा ।”।
73. आय-कर अधधननयम की धारा 149 की उपधारा (1) में,— धारा 149 का
संशोधन ।
(I) र्दसू रे परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककए जाएंगे,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
778
अथाषत ् :—
“परंतु यह भी कक धारा 148 के स्पष्ट् ीकरण 2 के िंर् (i), िंर् (iii) और
िंर् (iv) में ननठर्दषष्ट् मामिों के लिए, जहां ककसी ववत्तीय वर् ष की 15 माच ष के
पश्चात,्—
(क) धारा 132 के अधीन कोई तिाशी आरंभ की जाती है ; या
(ि) धारा 132 के अधीन कोई तिाशी, जजसके लिए अंनतम
प्राधधकार का ननष्ट्पार्दन ककया गया है ; या
(ग) धारा 132क के अधीन कोई अध्यपेिा की गई है,
और धारा 148 के अधीन सूचना जारी करने की अवधध ऐस े ववत्तीय वर् ष की 31
माच ष को समाप्त हो रही है, वहां इस धारा के अनुसार पररसीमा की अवधध की
संगणना के प्रयोजन के लिए पन्द्रह ठर्दन की अवधध को अपवजजतष ककया
जाएगा और ऐसे ककसी मामिे में धारा 148 के अधीन जारी सूचना को ऐसे
ववत्तीय वर् ष की 31 माच ष को जारी ककया गया समझा जाएगा :
परंतु यह भी कक जहां धारा 148 के स्पष्ट् ीकरण 1 में यथाननठर्दषष्ट्
जानकारी, यथाजस्थनत, धारा 131 या धारा 133क के अधीन िेिबद्ध ककए
गए ककसी कथन या जब्त ककए गए र्दस्तावेजों स े ननम्नलिखित के
पररणामस्वरूप ककसी ववत्तीय वर् ष की 31 माच ष को या उससे पूव ष आती है और
जहां ककसी ववत्तीय वर् ष की 15 माच ष के पश्चात,्—
(क) कोई तिाशी, जो धारा 132 के अधीन आरंभ की जाती है ;
या
(ि) कोई तिाशी, जजसके लिए धारा 132 के अधीन अंनतम
प्राधधकार का ननष्ट्पार्दन ककया गया है ; या
(ग) कोई अध्यपेिा, जो धारा 132क के अधीन की गई है,
वहां इस धारा के अनुसार पररसीमा की अवधध की संगणना के प्रयोजन के लिए
पन्द्रह ठर्दन की अवधध को अपवजजतष ककया जाएगा और ऐसे ककसी मामिे में
धारा 148क के िंर् (ि) के अधीन जारी सूचना को ऐसे ववत्तीय वर् ष कर
31 माच ष को जारी ककया गया समझा जाएगा :”;
(II) छिवें परंतुक में, “पररसीमा की अवधध सात ठर्दन से कम है” शब्र्दों के
स्थान पर, “पररसीमा की अवधध सात ठर्दन से अधधक नहीं होती है” शब्र्द रिे
जाएंगे ।
धारा 151 का 74. आय-कर अधधननयम की धारा 151 में,—
संशोधन ।
(क) िंर् (ii) में “जहां कोई प्रधान मुख्य आयुक्त या प्रधान महाननर्देशक नहीं है
वहां” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ि) िंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“परंतुक िंर् (i) के प्रयोजनों के लिए, तीन वर् ष की अवधध की संगणना
धारा 149 की उपधारा (1) के तीसरे परंतुक या चौथे परंतुक या पांचवें परंतुक
द्वारा यथा अपवजजतष या छिवें परंतुक द्वारा बढाई गई पररसीमा अवधध को
ठहसाब में िेने के पश्चात,् की जाएगी ।”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
779
धारा 153 का 75. आय-कर अधधननयम की धारा 153 में,—
संशोधन ।
(I) उपधारा (1) में,—
(क) तीसरे परंतुक में, “या उसके पश्चात”् शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ि) तीसरे परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह भी कक 1 अप्रैि, 2022 को या उसके पश्चात ् आरंभ होने
वािे ननधाषरण वर् ष से संबंधधत ननधाषरण के आर्देश के संबंध में इस
उपधारा के उपबंधों का वैसे ही प्रभाव होगा, मानो “इक्कीस मास” शब्र्दों
के स्थान पर, “बारह मास” शब्र्द रि ठर्दए गए हों ।”;
(II) उपधारा (1क) में, “नौ मास” शब्र्दों के स्थान पर, “बारह मास” शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(III) उपधारा (3) में,—
(क) “उपधारा (1) और उपधारा (2)” शब्र्दों, कोष्ट्िकों और अकं ों के स्थान
पर, “उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)” शब्र्द, कोष्ट्िक और अंक
रिे जाएंगे ;
(ि) “प्रधान आयुक्त या आयुक्त” शब्र्दों और अंकों के स्थान पर, उन
र्दोनों स्थानों पर, जहां वे आते हैं, “यथाजस्थनत, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य
आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(IV) उपधारा (3) के पश्चात ् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी,
अथाषत ् :—
“(3क) उपधारा (1), उपधारा (1क), उपधारा (2) और उपधारा (3) में
ककसी बात के होते हुए भी, जहां ननधाषरण या पुन: ननधाषरण धारा 132 के
अधीन तिाशी आरंभ ककए जाने की या धारा 132क के अधीन अध्यपेिा करने
की तारीि को िंत्रबत है, वहा ं उक्त उपधाराओं के अधीन, यथाजस्थनत, ननधाषरण
या पुन: ननधाषरण के पूरा ककए जाने के लिए उपिब्ध अवधध—
(क) उस मामि े में, जहां ऐसी तिाशी धारा 132 के अधीन आरंभ
की जाती है या ऐसी अध्यपेिा धारा 132क के अधीन की जाती है ;
(ि) ऐसे ननधाषररती के मामिे में, जजससे अलभगहृ ीत या अध्यपेक्षित
कोई धन, बुलियन, आभूर्ण या अन्द्य मूल्यवान वस्तु या चीज संबंधधत
है ;
(ग) ऐस े ननधाषररती के मामि े में, जजससे अलभगहृ ीत या अध्यपेक्षित
कोई िेिाबठहयां या र्दस्तावेज संबंधधत है या उनमें अंतववष्ट्ष कोई सूचना
उससे संबंधधत है,
बारह मास तक बढा र्दी जाएगी ।”;
(V) उपधारा (4) में, “उपधारा (1), उपधारा (2) और उपधारा (3)” शब्र्दों,
कोष्ट्िकों और अंकों के स्थान पर, उन र्दोनों स्थानों पर, जहां व े आते हैं,
“उपधारा (1), उपधारा (1क), उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (3क)” शब्र्द,
कोष्ट्िक, अंक और अिर रिे जाएंगे ;
(VI) उपधारा (5) में, “प्रधान आयुक्त या आयुक्त” शब्र्दों और अंकों के स्थानअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
780
पर, “यथाजस्थनत, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या
आयुक्त” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(VII) उपधारा (6) में,—
(क) आरंलभक भाग में, “उपधारा (1) और उपधारा (2)” शब्र्दों, कोष्ट्िकों
और अंकों के स्थान पर, “उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)” शब्र्द,
कोष्ट्िक, अंक और अिर रिे जाएंगे ;
(ि) िंर् (i) में, “यथाजस्थनत,” शब्र्द के पश्चात ् “प्रधान मुख्य आयुक्त या
मुख्य आयुक्त या” शब्र्द अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(VIII) स्पष्ट् ीकरण 1 में,—
(क) िंर् (iv) में,—
(i) आरंलभक भाग में, “सपं रीिा” शब्र्दों के पश्चात,् “या तालिका
मूल्यांकन” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) उपिंर् (क) में, “ऐसी संपरीिा” शब्र्दों के पश्चात,् “या तालिका
मूल्यांकन” शब्र्द अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) पहिे परंतुक में, “उपधारा (1), उपधारा (2),” शब्र्दों, कोष्ट्िकों और
अंकों के स्थान पर, “उपधारा (1), उपधारा (1क), उपधारा (2),” शब्र्द, कोष्ट्िक,
अंक और अिर रिे जाएंगे ।
धारा 154 का 76. आय-कर अधधननयम की धारा 154 में, उपधारा (2) में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों
संशोधन ।
और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और
कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 155 का 77. आय-कर अधधननयम की धारा 155 में,—
संशोधन ।
(क) िंर् (11क) में, “धारा 10क या” शब्र्दों, अंकों और अिर के पश्चात,् र्दोनों
स्थानों पर, जहां वे आते हैं, “धारा 10कक या” शब्र्द, अंक और अिर, 1 अप्रैि,
2024 से अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) उपधारा (18) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी,
अथाषत ् :—
“(19) जहां ककसी ननधाषररती द्वारा, जो चीनी के ववननमाषण के कारबार में
ननयोजजत एक सहकारी सलमनत है, द्वारा गन्द्ने के क्रय के लिए उपगत ककसी
व्यय की बाबत ककसी क ौती का र्दावा ककया गया है और ऐसी क ौती को
1 अप्रैि, 2014 को या उससे पूव ष प्रारंभ होने वािे ककसी पूववष र् ष में पूण ष रूप से
या आंलशक रूप से अननुज्ञात कर ठर्दया गया है, तो ननधाषरण अधधकारी, इस
संबंध में ऐसे ननधाषररती द्वारा ककए गए ककसी आवेर्दन के आधार पर उस
ववस्तार तक कक ऐसा व्यय उस कीमत पर उपगत ककया जाता है, जो उस
पूववष र् ष के लिए सरकार द्वारा ननयत या अनुमोठर्दत कीमत के समतुल्य है या
उससे कम है, ऐसी क ौती को अनुज्ञात करने के पश्चात ् ऐसे पूववष र् ष के लिए
ऐसे ननधाषररती की कुि आय की पुन:संगणना करेगा और धारा 154 के उपबंध,
जहां तक हो सके, उस पर िागू होंगे तथा उस धारा की उपधारा (7) में
ववननठर्दषष्ट् चार वर्ों की अवधध को 1 अप्रैि, 2022 को प्रारंभ होने वािे पूववष र् ष
की समाजप्त से गणना में लिया जाएगा ।”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
781
(ग) उपधारा (19) के पश्चात ् और स्पष्ट् ीकरण से पूव,ष ननम्नलिखित उपधारा,
1 अक्तूबर, 2023 से, अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
‘(20) जहां ननधाषररती द्वारा, धारा 139 के अधीन ककसी ननधाषरण वर् ष
(जजसे इसमें “सुसंगत ननधाषरण वर्”ष कहा गया है) के लिए प्रस्तुत आय की
वववरणी में कोई आय सजम्मलित की गई है और ऐसी आय पर स्रोत से कर
की क ौती की गई है और पश्चात्वती ववत्तीय वर् ष में अध्याय 17ि के उपबंधों
के अनुसार केंरीय सरकार के िाते में संर्दत्त की गई है, ननधाषरण अधधकारी, उस
ववत्तीय वर्,ष जजसमें स्रोत पर ऐसे कर की क ौती की गई थी, की समाजप्त स े
र्दो वर् ष के भीतर ऐस े प्ररूप में, जो ववठहत ककया जाए, ननधाषररती द्वारा ककए
गए आवेर्दन पर ननधाषरण के आर्देश या सुसंगत ननधाषरण वर् ष में स्रोत पर
क ौती ककए गए ऐस े कर के प्रत्यय को अनुज्ञात करते हुए ककसी सूचना का
संशोधन करेगा और धारा 154 के उपबंध जहां तक हो सके, उस पर िाग ू होंगे
और उस धारा की उपधारा (7) में ववननठर्दषष्ट् चार वर्ों की अवधध को ववत्त वर् ष
के अंत से जजसमें ऐसे कर की क ौती की गई है, गणना में लिया जाएगा :
परंतु स्रोत पर क ौती ककए गए ऐसे कर के प्रत्यय को ककसी अन्द्य
ननधाषरण वर् ष में अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा ।’।
78. आय-कर अधधननयम की धारा 158क में, स्पष्ट् ीकरण में, “आयुक्त (अपीि)” धारा 158क
का संशोधन ।
शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या
आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
79. आय-कर अधधननयम की धारा 158कि में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और धारा 158कि
का संशोधन ।
कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहा ं कहीं व े आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त
(अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
80. आय-कर अधधननयम की धारा 170क के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, धारा 170क के
अथाषत ् :— स्थान पर नई
धारा का
प्रनतस्थापन ।
‘170क. (1) धारा 139 में अंतववष्ट्ष तत्प्रनतकूि ककसी बात के होते हुए भी, ककसी कारबार
पुनगिष न के
कारबार पुनगिष न की र्दशा में, जहां, यथाजस्थनत, उच्च न्द्यायािय या अधधकरण या
संबंध में
2016 का 31 ठर्दवािा और शोधन अिमता संठहता, 2016 की धारा 5 के िंर् (1) में
अधधकरण या
यथापररभावर्त न्द्यायननणषयन प्राधधकारी के आर्देश (जजसे इसमें इसके पश्चात ् कारबार न्द्यायािय के
पुनगिष न के संबंध में आर्देश कहा गया है) की तारीि स े पूव,ष उस पूववष र्,ष जजसको ककसी आर्देश
का प्रभाव ।
ऐसा आर्देश िागू होता है, से सुसंगत ककसी ननधाषरण वर् ष के लिए धारा 139 के
उपबंधों के अधीन इकाई द्वारा आय की कोई वववरणी प्रस्तुत की गई है, तो ऐसा
उत्तराधधकारी, उस मास, जजसमें उक्त आर्देश जारी ककया गया था, के अंनतम ठर्दन से
छह मास की अवधध के भीतर, उक्त आर्देश के अनुसार और उस तक सीलमत, ऐस े
प्ररूप और रीनत में, जो ववठहत की जाए, उपांतररत वववरणी प्रस्तुत करेगा ।
(2) जहां उस पूववष र् ष से, जजसको कारबार पुनगिष न के सबं ंध में आर्देश िागू
होता है, सुसंगत ककसी ननधाषरण वर् ष के लिए ननधाषरण या पुन:ननधाषरण
कायवष ाठहयां, —
(क) उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार उपांतररत वववरणी प्रस्तुत करने
की तारीि को पूण ष हो गई हैं, तो ननधाषरण अधधकारी, ऐसे आर्देश के अनुसार
और इस प्रकार प्रस्तुत उपांतररत वववरणी को ध्यान में रिते हुए, ऐसे ननधाषरणअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
782
या पुन:ननधाषरण में अवधाररत सुसंगत ननधाषरण वर् ष की कुि आय को उपांतररत
करने वािा कोई आर्देश पाररत करेगा ;
(ि) उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, उपांतररत वववरणी प्रस्तुत करने
की तारीि को िंत्रबत हैं, वहा ं ननधाषरण अधधकारी, कारबार पुनगिष न के आर्देश
के अनुसार और इस प्रकार प्रस्तुत उपांतररत वववरणी को ध्यान में रिते हुए,
सुसंगत ननधाषरण वर् ष की कुि आय का ननधाषरण या पुन: ननधाषरण करने वािा
आर्देश पाररत करेगा ।
(3) इस धारा में यथा उपबंधधत के लसवाय, इस धारा के अधीन ककसी ननधाषरण
वर् ष के संबंध में ककए गए ककसी ननधाषरण या पुन: ननधाषरण में इस अधधननयम के
अन्द्य सभी उपबंध िाग ू होंगे तथा ऐसे ननधाषरण वर् ष को यथा िागू र्दर या र्दरों पर
कर प्रभाय ष होंगे ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा में,—
(i) “कारबार पुनगिष न” पर्द से एक या अधधक व्यजक्तयों के कारबार का
समामेिन या ननवविष यन या ववियन अंतवलषित करने वािा कारबार का
पुनगिष न अलभप्रेत है ;
(ii) “उत्तराधधकारी” पर्द से ककसी कारबार पुनगिष न में सभी पररणामी
कंपननयां अलभप्रेत है, चाहे वह कंपनी ऐस े कारबार पुनगिष न के पूव ष अजस्तत्व में
थी या नहीं ।’।
धारा 177 का 81. आय-कर अधधननयम की धारा 177 में, उपधारा (2) में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों
संशोधन ।
और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और
कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 189 का 82. आय-कर अधधननयम की धारा 189 में, उपधारा (2) में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों
संशोधन ।
और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और
कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 192क का 83. आय-कर अधधननयम की धारा 192क के र्दसू रे परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
संशोधन ।
धारा 193 का 84. आय-कर अधधननयम की धारा 193 के परंतुक में िंर् (ix) के स्थान पर
संशोधन ।
ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(ix) धारा 10 के िंर् (23चग) के स्पष्ट् ीकरण में ननठर्दषष्ट् ककसी ववशर्े
प्रयोजन यान द्वारा ककन्द्हीं प्रनतभूनतयों के संबंध में, धारा 2 के िंर् (13क) में
यथापररभावर्त, “कारबार न्द्यास” को संर्देय कोई ब्याज ।’।
धारा 194ि का 85. आय-कर अधधननयम की धारा 194ि में,—
संशोधन ।
(i) पाश्व ष शीर् ष के स्थान पर, ननम्नलिखित पाश्व ष शीर् ष रिा जाएगा, अथाषत:्—
“िा री या वग ष पहेिी, आठर्द से जीत ।”;
(ii) र्दीघ ष पंजक्त में, “र्दस हजार रुपए से अधधक रकम” शब्र्दों के स्थान पर,
“या जुआ से या ककसी प्रकार के या ककसी भी प्रकृनत का र्दांव िगाने से, जो ऐसी
रकम या रकमों का योग है जो ववत्तीय वर् ष के र्दौरान र्दस हजार रुपए से अधधक है”
शब्र्द रिे जाएंगे ;
(iii) परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
783
‘परंतु यह और कक इस धारा में अंतववष्ट्ष कोई बात, 1 अप्रैि, 2023 को
या उसके पश्चात ् ककसी आनिाइन िेि से जीत पर आय-कर की क ौती को
िागू नहीं होगी ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “आनिाइन िेि” का वही
अथ ष होगा, जो धारा 115ििञ के स्पष्ट् ीकरण के िंर् (iii) में उसका है ।’।
86. आय-कर अधधननयम की धारा 194ि के पश्चात ् ननम्नलिखित धारा नई धारा
अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— 194िक का
अंत:स्थापन ।
‘194िक. (1) इस अधधननयम के ककसी अन्द्य उपबंध में अंतववष्ट्ष ककसी बात आनिाइन िेि
से जीत ।
के होते हुए भी, ववत्तीय वर् ष के र्दौरान ककसी आनिाइन िेि स े जीत के माध्यम स े
ककसी आय को ककसी व्यजक्त को संर्दत्त करने के लिए उत्तरर्दायी कोई व्यजक्त, प्रवत्तृ
र्दरों पर ववत्तीय वर् ष की समाजप्त पर, ववठहत रीनत में संगखणत उसके उपयोक्ता िाते
में शुद्ध जीत पर आय-कर की क ौती करेगा :
परंतु उस मामिे में, जहां ववत्तीय वर् ष के र्दौरान उपयोक्ता िाते से रकम
ननकािी जाती है, तो आय-कर, ऐसी ननकासी से लमिकर बनी शुद्ध जीत के साथ-
साथ उपयोक्ता िाते में शुद्ध जीत की शेर् रकम पर ऐसी ननकासी के समय ववत्तीय
वर् ष की समाजप्त पर उस रीनत में, जो ववठहत की जाए, संगखणत ककया जाएगा ।
(2) उस मामिे में, जहां शद्ु ध जीत पूणतष : वस्तु रूप में है अथवा भागत:
नकर्द रूप में और भागत: वस्तु रूप में है ककन्द्तु नकर्दी का भाग संपूण ष जीत की
बाबत कर की क ौती के र्दानयत्व को पूरा करने के लिए पयाषप्त नहीं हैं, वहां ऐसा
संर्दाय करने के लिए उत्तरर्दायी व्यजक्त जीत का ननगमष करने के पूव ष यह सुननजश्चत
करेगा कक ऐसी शुद्ध जीत की बाबत कर का संर्दाय कर ठर्दया गया है ।
(3) यठर्द इस धारा के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्द्न होती
है, तो बोर्,ष केंरीय सरकार के पूवाषनुमोर्दन स े कठिनाई को र्दरू करने के प्रयोजनों के
लिए मागर्दष शकष लसद्धांत जारी करेगा ।
(4) उपधारा (3) के अधीन बोर् ष द्वारा जारी ककया गया प्रत्येक मागर्दष शकष
लसद्धांत, इसे जारी करने के पश्चात ् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिा
जाएगा, और आय-कर प्राधधकाररयों तथा आय-कर की क ौती करने के लिए र्दायी
व्यजक्त पर बाध्यकारी होगा ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) “कंप्यू र संसाधन”, “इं रने ” और “आनिाइन िेि” के वही अथष
होंगे, जो क्रमश: धारा 115ििञ में उनके हैं ;
(ि) “आनिाइन िेि मध्यवती” से कोई मध्यवती अलभप्रेत है, जो एक
या एक से अधधक आनिाइन िेि का प्रस्ताव करता है ;
(ग) “उपयोक्ता” से कोई व्यजक्त अलभप्रेत है, जो आनिाइन िेि
मध्यवती के ककसी कंप्यू र संसाधन तक पहुंचता है या उसका उपयोग करता
है ;
(घ) “उपयोक्ता िाता” से ककसी आनिाइन िेि मध्यवती के साथ
रजजस्रीकृत ककसी उपयोक्ता का िाता अलभप्रेत है ।’।
87. आय-कर अधधननयम की धारा 194िि में “र्दस हजार रुपए से अधधक रकम धारा 194ििअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
784
की”, शब्र्दों के स्थान पर, “ववत्तीय वर् ष के र्दौरान र्दस हजार रुपए से अधधक की रकम या का संशोधन ।
रकमों के योग की” शब्र्द रिे जाएंगे ।
88. आय-कर अधधननयम की धारा 194िग में, 1 जुिाई, 2023 से,— धारा 194िग
का संशोधन ।
(i) उपधारा (1) में परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक उपधारा (2) के िंर् (iग) में ननठर्दषष्ट् ब्याज के
माध्यम से ककसी आय की र्दशा में, आय-कर नौ प्रनतशत की र्दर से क ौती
ककया जाएगा ।”;
(ii) उपधारा (2) में, —
(I) िंर् (iि) में, “और” शब्र्द के स्थान पर,“या” शब्र्द रिा जाएगा ;
(II) िंर् (iि) के पश्चात ् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् : —
“(iग) 1 जुिाई, 2023 को या उसके पश्चात ् इसके द्वारा भारत स े
बाहर ककसी स्रोत से कोई र्दीघ ष अवधध बंधपत्र या रुपए मूल्यांककत बंधपत्र
जारी करके उधार लिए गए धन के संबंध में, जो ककसी अंतरराष्ट्रीय
ववत्तीय सेवा केन्द्र में अवजस्थत केवि ककसी मान्द्यताप्राप्त स् ाक
एक्सचेंज पर सूचीबद्ध है ; और ”।’।
धारा 194ढ का 89. आय-कर अधधननयम की धारा 194ढ में, र्दसू रे परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित
संशोधन । परंतुक, 1 अप्रैि, 2023 से अतं ःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘परंतु यह भी कक जहां प्राजप्तकताष कोई सहकारी सोसाइ ी है, वहां इस धारा के
उपबंधों का वैसे ही प्रभाव होगा, मानो “एक करोड़ रुपए” शब्र्दों के स्थान पर, “तीन
करोड़ रुपए” शब्र्द रि ठर्दए गए हों ।’।
धारा 194र्द का 90. आय-कर अधधननयम की धारा 194र्द में, स्पष्ट् ीकरण को उसके स्पष्ट् ीकरण 1
संशोधन ।
के रूप में संख्यांककत ककया जाएगा और इस प्रकार संख्यांककत स्पष्ट् ीकरण 1 के पश्चात ्
ननम्नलिखित स्पष्ट् ीकरण अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“स्पष्ट्टीकरर् 2—शंकाओं को र्दरू करने के लिए, यह स्पष्ट् ककया जाता है कक
उपधारा (1) के उपबंध ककसी फायर्दे या पररिजब्ध को िागू होंगे, चाहे वह नकर्द रूप
में या वस्तु रूप में या भागत: नकर्द रूप में और भागत: वस्तु रूप में हो ।”।
धारा 196क का 91. आय-कर अधधननयम की धारा 196क की उपधारा (1) में, ननम्नलिखित परंतुक
संशोधन । अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु जहां धारा 90 की उपधारा (1) या धारा 90क की उपधारा (1) में
ननठर्दषष्ट् कोई करार पाने वाि े को िाग ू होता है और यठर्द पाने वाि े ने, यथाजस्थनत,
धारा 90 की उपधारा (4) या धारा 90क की उपधारा (4) में ननठर्दषष्ट् प्रमाणपत्र
प्रस्तुत कर ठर्दया है, तब, उस पर आय-कर की, बीस प्रनतशत की र्दर पर या ऐस े
करार में ऐसी आय के लिए उपबंधधत आय-कर की र्दर पर या र्दरों पर, जो भी
ननम्नतर हो, क ौती की जाएगी ।”।
धारा 197 का 92. आय-कर अधधननयम की धारा 197 की उपधारा (1) में, “धारा 194िक” शब्र्द,
संशोधन ।
अंकों और अिरों के पश्चात,् “, धारा 194ििक” शब्र्द, अंक और अिर अंत:स्थावपत ककए
जाएंगे ।
धारा 206कि 93. आय-कर अधधननयम की धारा 206कि में,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
785
का संशोधन । (i) उपधारा (1) में, “194ि” अंकों और अिर के पश्चात,् “194िक” अंक और
अिर अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) उपधारा (3) में, परंतुक के स्थान पर ननम्नलिखित परंतुक रिा जाएगा,—
“परंतु यह कक ववननठर्दषष्ट् व्यजक्त में ननम्नलिखित व्यजक्त सजम्मलित नहीं
होगा,—
(i) कोई अननवासी व्यजक्त, जजसका भारत में स्थायी स्थापन नहीं
है ; या
(ii) ऐसा व्यजक्त, जजससे उक्त पूववष र् ष से सुसंगत ननधाषरण वर् ष के
लिए आय की वववरणी प्रस्तुत करने की अपेिा नहीं की जाती है और
जजसे केंरीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस ननलमत्त अधधसूधचत ककया गया
है ।”।
94. आय-कर अधधननयम की धारा 206ग की उपधारा (1छ) में, 1 जुिाई, 2023 धारा 206ग
से,— का संशोधन ।
(i) िंर् (क) में, “भारत के बाहर”, शब्र्दों का, र्दोनों स्थानों पर, जहां वे आते है,
िोप ककया जाएगा ;
(ii) र्दीघ ष पंजक्त में, “पांच”, शब्र्द के स्थान पर, “बीस” शब्र्द रिा जाएगा ;
(iii) पहि े परंतुक में, “तथा वह ववर्देशी पय ष न कायक्रष म पैकेज के क्रय स े
प्रयोजन के लिए लभन्द्न है” शब्र्दों के स्थान पर, “तथा वह लशिा या धचककत्सा उपचार
के प्रयोजनों के लिए है” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(iv) र्दसू रे परंतुक में, “ववर्देशी पय ष न कायक्रष म पैकेज के क्रय से लभन्द्न प्रयोजन
के लिए है” शब्र्दों के स्थान पर, “लशिा या धचककत्सा उपचार के प्रयोजनों के लिए हैं”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
95. आय-कर अधधननयम की धारा 206गग की उपधारा (1) में, ननम्नलिखित परंतुक धारा 206गग
का संशोधन ।
1 जुिाई, 2023 से अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु इस धारा के अधीन स्रोत पर कर संग्रहण की र्दर बीस प्रनतशत से अधधक
नहीं होगी ।”।
96. आय-कर अधधननयम की धारा 206गगक में,— धारा
206गगक का
(i) उपधारा (1) में ननम्नलिखित परंतुक 1 जुिाई, 2023 से अंतःस्थावपत
संशोधन ।
ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु इस धारा के अधीन स्रोत पर कर संग्रहण की र्दर बीस प्रनतशत से
अधधक नहीं होगी ।”;
(ii) उपधारा (3) में परंतुक के स्थान पर, ननम्नलिखित परंतुक रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“परंतु यह कक ववननठर्दषष्ट् व्यजक्त में ननम्नलिखित व्यजक्त सजम्मलित नहीं
होगा,—
(i) कोई अननवासी व्यजक्त, जजसका भारत में स्थायी स्थापन नहीं
है ; या
(ii) ऐसा व्यजक्त, जजससे उक्त पूववष र् ष से सुसंगत ननधाषरण वर् ष केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
786
लिए आय की वववरणी प्रस्तुत करने की अपेिा नहीं की जाती है और
जजसे केंरीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस ननलमत्त अधधसूधचत ककया गया
है ।”।
धारा 241क का 97. आय-कर अधधननयम की धारा 241क में, ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत
संशोधन । ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु इस धारा के उपबंध 1 अप्रैि, 2023 से िागू नहीं होंगे ।”।
धारा 244क का 98. आय-कर अधधननयम की धारा 244क में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) के िंर् (क) में, उपिंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक
1 अक्तूबर, 2023 से अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु जहां ननधाषररती द्वारा धारा 155 की उपधारा (20) के अधीन ककए
गए आवेर्दन के पररणामस्वरूप, ननधाषरण अधधकारी द्वारा पाररत ककसी आर्देश
के पररणामस्वरूप प्रनतर्दाय उद्भूत होता है, वहां ऐसे ब्याज को, ऐसे आवेर्दन
की तारीि स े उस तारीि तक, जजसको प्रनतर्दाय प्रर्दान ककया जाता है, की
अवधध में समाववष्ट् प्रत्येक मास या मास के ककसी भाग के लिए आधा
प्रनतशत की र्दर से संगखणत ककया जाएगा ।”;
(ि) उपधारा (1क) के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु ककसी ननधाषररती की र्दशा में, जहां ननधाषरण या पुनननषधाषरण के
लिए कायवष ाठहयां िंत्रबत हैं, वहां इस उपधारा के अधीन ऐसे ननधाषररती को संर्देय
अनतररक्त ब्याज का अवधारण करने के लिए अवधध की सगं णना करने में उस
तारीि से आरंभ होने वािी अवधध, जजसको धारा 245 की उपधारा (2) के
उपबंधों के अनुसार और उसके अधीन रहते हुए, उस तारीि तक ऐसे प्रनतर्दाय
को ननधाषरण अधधकारी द्वारा रोक कर रिा जाता है, जजसको ऐसे मामिे में
ऐसा ननधाषरण या पुनननधष ाषरण ककया जाता है, अपवजजतष की जाएगी ।”।
धारा 245 के 99. आय-कर अधधननयम की धारा 245 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी
स्थान पर, नई जाएगी, अथाषत ् :—
धारा का
प्रनतस्थापन ।
कनतपय मामिों “245. (1) जहां इस अधधननयम के उपबंधों में स े ककसी उपबंध के अधीन
में प्रनतर्दायों का
ककसी व्यजक्त को कोई प्रनतर्दाय र्देय हो जाता है या र्देय होना पाया जाता है, वहां,
मुजरा ककया
यथाजस्थनत, ननधाषरण अधधकारी या आयुक्त या प्रधान आयुक्त या मुख्य आयुक्त या
जाना और उनको
रोके रिना । प्रधान मुख्य आयुक्त, प्रनतर्दाय के संर्दाय के बर्दि े में, उस रकम का या उस रकम के
ककसी भाग का, जो प्रनतर्दत्त की जानी है, मुजरा ऐसी रालश के प्रनत, यठर्द कोई हो,
इस अधधननयम के अधीन उस व्यजक्त द्वारा संर्दत्त की जानी बाकी है, जजस े प्रनतर्दाय
र्देय है, इस उपधारा के अधीन ककए जाने के लिए प्रस्ताववत कारषवाई ऐसे व्यजक्त को
लिखित प्रज्ञापना र्देने के पश्चात ् कर सकेगा ।
(2) जहां उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन प्रनतर्दाय के ककसी भाग का मुजरा
ककया गया है या जहां ऐसी ककसी रकम का मुजरा नहीं ककया गया है और प्रनतर्दाय
ककसी व्यजक्त को र्देय हो जाता है, वहां ननधाषरण अधधकारी की, इस त्य को ध्यान
में रिते हुए कक इस ननधाषरण या पुन: ननधाषरण के लिए कायवष ाठहयां ऐसे व्यजक्त की
र्दशा में िंत्रबत हैं, यह राय है कक प्रनतर्दाय की मंजूरी से राजस्व पर प्रनतकूि प्रभावअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
787
पड़ने की संभावना है, वहां वह उन कारणों से, जो िेिबद्ध ककए जाएं, और
यथाजस्थनत, प्रधान आयुक्त या आयुक्त के पूव ष अनुमोर्दन से उस तारीि तक,
जजसको ऐसा ननधाषरण या पुनननधष ाषरण ककया जाता है, प्रनतर्दाय को रोक सकेगा ।”।
100. आय-कर अधधननयम की धारा 245घ की उपधारा (9) में, िंर् (iv) के स्थान धारा 245घ
का संशोधन ।
पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा और 1 फरवरी, 2021 स े रिा गया समझा जाएगा,
अथाषत ् :—
“(iv) जहां उपधारा (6ि) के अधीन ककसी आर्देश को संशोधधत करने या उसमें
सुधार के लिए कोई आवेर्दन फाइि करने की समय-सीमा 1 फरवरी, 2021 को या
उसके पश्चात,् ककंतु 1 फरवरी, 2022 के पूव ष समाप्त होती है, तो ऐसी समय-सीमा
का 30 लसतंबर, 2023 तक ववस्तार ककया जाएगा ।”।
101. आय-कर अधधननयम की धारा 245र्क की उपधारा (4) में, परंतुक के पश्चात ् धारा 245र्क
ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— का संशोधन ।
“परंतु यह और कक केंरीय सरकार, इस उपधारा के अधीन 31 माचष, 2023 को
या उसके पूव ष जारी ककसी ननर्देश का, राजपत्र में अधधसचू ना द्वारा, संशोधन कर
सकेगी ।”।
102. आय-कर अधधननयम की धारा 245र्द की उपधारा (10) में, परंतुक के पश्चात ् धारा 245र्द का
ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :— संशोधन ।
“परंतु यह और कक केंरीय सरकार, इस उपधारा के अधीन 31 माचष, 2023 को
या उसके पूव ष जारी ककसी ननर्देश का, राजपत्र में अधधसचू ना द्वारा, संशोधन कर
सकेगी ।”।
103. आय-कर अधधननयम के अध्याय 20 में,— अध्याय 20
का संशोधन ।
(क) उपशीर् ष “क. उपायुक्त (अपीि) और आयुक्त (अपीि) को अपीिें” के स्थान
पर, “क. संयुक्त आयुक्त (अपीि) और आयुक्त (अपीि) को अपीिें” उपशीर् ष रिा
जाएगा ;
(ि) धारा 246 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“246. (1) ककसी ननधाषरण अधधकारी (संयुक्त आयुक्त की पंजक्त से नीचे) संयुक्त
के ककसी भी ननम्नलिखित आर्देश से व्यधथत कोई ननधाषररती— आयुक्त
(अपीि) के
(क) धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन संसूचना का कोई आर्देश, समि अपीि
जहां ननधाषररती कोई समायोजन करने के ववरुद्ध आिेप करता है या योग्य आर्देश ।
धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन ननधाषरण का कोई
आर्देश, जहां ननधाषररती, ननधाषररत की गई आय की रकम के प्रनत आिेप
करता है या अवधाररत कर की रकम या संगखणत हानन की रकम या
प्राजस्थनत, जजसके अधीन उसका ननधाषरण ककया गया है, के ककसी आर्देश ;
(ि) धारा 147 के अधीन ननधाषरण, पुन:ननधाषरण या पुन:संगणना
के ककसी आर्देश ;
(ग) धारा 200क की उपधारा (1) के अधीन संसूचना के ककसी
आर्देश ;
(घ) धारा 201 के अधीन ककसी आर्देश ;
(ङ) धारा 206ग की उपधारा (6क) के अधीन संसूचना के ककसी
आर्देश ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
788
(च) धारा 206गि की उपधारा (1) के अधीन ककसी आर्देश ;
(छ) अध्याय 21 के अधीन शाजस्त अधधरोवपत करने के आर्देश ;
(ज) धारा 154 या धारा 155 के अधीन पूवोक्त (क) स े (छ) में
उजल्िखित ककसी भी आर्देश को संशोधधत करने के ककसी आर्देश,
के ववरुद्ध संयुक्त आयुक्त (अपीि) को अपीि कर सकेगा :
परंतु संयुक्त आयुक्त (अपीि) के ववरुद्ध कोई अपीि फाइि नहीं की
जाएगी, यठर्द इस उपधारा में ननठर्दषष्ट् कोई आर्देश, उपायुक्त की पंजक्त से ऊपर
के ककसी आय-कर प्राधधकारी द्वारा या उसके पूवाषनुमोर्दन से पाररत ककया गया
है ।
(2) जहां उपधारा (1) में ननठर्दषष्ट् ककसी आर्देश के ववरुद्ध फाइि की गई
कोई अपीि आयुक्त (अपीि) के समि िंत्रबत है, बोर् ष या आय-कर प्राधधकारी,
जजसे इस संबंध में बोर् ष द्वारा प्राधधकृत ककया गया है, ऐसी अपीि और उससे
उर्दभूत ककसी मामिे को या ऐसी अपीि के साथ संबद्ध मामिे को, जो िंत्रबत
है, संयुक्त आयुक्त (अपीि) को अंतररत कर सकेगा, जो ऐसी अपीि या मामि े
में उस प्रक्रम स े अग्रसर हो सकेगा, जजस पर वह उसे अतं ररत ककए जाने स े
पूव ष था ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए
भी बोर् ष या इस प्रकार बोर् ष द्वारा इस संबंध में प्राधधकृत आय-कर प्राधधकारी
ककसी अपीि को, जो संयुक्त आयुक्त (अपीि) के समि िंत्रबत है और उससे
उर्दभूत या ऐसी अपीि स े सबं ंधधत मामिे को और जो िंत्रबत है, को आयुक्त
(अपीि) को अंतररत कर सकेगा, जो ऐसी अपीि या मामिे में उस प्रक्रम स े
अग्रसर होगा, जजस पर वह उसे अंतररत ककए जाने से पूव ष था ।
(4) जब ककसी अपीि को उपधारा (2) या उपधारा (3) के उपबंधों के
अधीन अंतररत ककया जाता है, अपीिाथी को सुने जाने का अवसर प्रर्दान ककया
जाएगा ।
(5) केंरीय सरकार, संयुक्त आयुक्त (अपीि) द्वारा ककसी अपीि का
ननप ारा करने के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधधसूचना द्वारा एक स्कीम
बना सकेगी, जजससे अपीिों का त्वररत रीनत में पारर्दलशतष ा और जवाबर्देही
सठहत संयुक्त आयुक्त (अपीि) और अपीिाथी के बीच अपीि कायवष ाठहयों के
अनुक्रम में अंतरापष्ट्ृ ि का ननरसन करके प्रौद्योधगकीय रूप से साध्य पररमाण
तक ननप ान ककया जा सके और यह ननर्देश र्दे सकेगी कक संयुक्त आयुक्त
(अपीि) द्वारा अपीिों के ननप ान के लिए िेत्राधधकार और प्रकक्रया से संबंधधत
इस अधधननयम के उपबंध िागू नहीं होंगे या ऐसे अपवार्दों, उपांतरणों और
अनुकूिनों के साथ िागू होंगे, जो अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं ।
(6) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, बोर् ष यह ववननठर्दषष्ट् कर सकेगा कक
उस उपधारा के उपबंध ककसी मामिे या मामिों के ककसी वग ष को िागू नहीं
होंगे ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “प्राजस्थनत” से वह श्रेणी
अलभप्रेत है, जजसके अधीन ननधाषररती को “व्यजष्ट् ”, “ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब” और
वैसे ही ननधाषररत ककया गया है ।”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
789
धारा 249 का 104. आय-कर अधधननयम की धारा 249 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) के आरंलभक भाग में, “1 अक्तूबर, 1998 को या उसके
पश्चात ् आयुक्त (अपीि) को की गई”, अंकों, शब्र्दों और कोष्ट्िकों के पश्चात,् “या
1 अप्रैि, 2023 को या उसके पश्चात ् संयुक्त आयुक्त (अपीि) को की गई” शब्र्द,
अंक और कोष्ट्िक अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(ि) उपधारा (3) में, “आयुक्त (अपीि)”, शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर,
“संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)”, शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ग) उपधारा (4) के परंतुक में, “आयुक्त (अपीि)”, शब्र्दों और कोष्ट्िकों के
स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)”, शब्र्द और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ।
105. आय-कर अधधननयम की धारा 250 में,— धारा 250 का
संशोधन ।
(क) उपधारा (1), उपधारा (3), उपधारा (4), उपधारा (5), उपधारा (6) और
उपधारा (7) में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों, जहां कहीं वे आते हैं, के
स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ;
(ि) उपधारा (6क) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी,
अथाषत ् :—
“(6क) प्रत्येक अपीि में, जहां यह संभव हो, संयुक्त आयुक्त (अपीि) या
आयुक्त (अपीि) उस ववत्तीय वर् ष जजसमें, यथाजस्थनत, धारा 246 की
उपधारा (1) के अधीन उसके समि ऐसी अपीि फाइि की गई थी या
उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन उसे अंतररत की गई थी या
धारा 246क की उपधारा (1) के अधीन उसके समि फाइि की गई थी, की
समाजप्त से एक वर् ष की अवधध के भीतर ऐसी अपीि की सुनवाई और उसका
ववननश्चय कर सकेगा ।”;
(ग) उपधारा (6ग) में, परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत
ककया जाएगा और 1 अप्रैि, 2022 स े अंत:स्थावपत ककया गया समझा जाएगा,
अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक केंरीय सरकार, इस उपधारा के अधीन 31 माचष,
2022 को या उसके पूव ष जारी ककसी ननर्देश का, राजपत्र में अधधसूचना द्वारा,
संशोधन कर सकेगी ।”।
106. आय-कर अधधननयम की धारा 251 में,— धारा 251 का
संशोधन ।
(i) पाश्व ष शीर् ष में, “उपायुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर,
“संयुक्त आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी,
अथाषत ् :—
“(1क) ककसी अपीि का ननप ारा करते समय, संयुक्त आयुक्त (अपीि)
के पास ननम्नलिखित शजक्तयां होंगी,—
(क) ककसी ननधाषरण आर्देश के ववरुद्ध ककसी अपीि में वह ककसी
ननधाषरण की पुजष्ट् , उसमें कमी, उसमें वद्ृ धध या उसे रद्र्द कर सकेगा ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
790
(ि) शाजस्त अधधरोवपत करने वाि े ककसी आर्देश के ववरुद्ध ककसी
अपीि में वह ऐसे ककसी आर्देश की पुजष्ट् या उसे रद्र्द कर सकेगा या
उसे इस प्रकार पररवनततष कर सकेगा कक उसके द्वारा िगाई गई शाजस्त
में या तो वद्ृ धध या उसमें कमी कर सकेगा ;
(ग) ककसी अन्द्य मामि े में, वह अपीि में ऐसा आर्देश पाररत कर
सकेगा जजसे वह उधचत समझे ।”;
(iii) उपधारा (2) में, “आयुक्त (अपीि)”, शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर,
“यथाजस्थनत, संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)”, शब्र्द और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ;
(iv) स्पष्ट् ीकरण में,—
(क) आरंलभक भाग में, “आयुक्त (अपीि)”, शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान
पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)”, शब्र्द और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ;
(ि) “उपायुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के
स्थान पर, “उपायुक्त (अपीि) या संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त
(अपीि)”, शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 253 का 107. आय-कर अधधननयम की धारा 253 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में,—
(अ) िंर् (क) में, “धारा 271क,” शब्र्द, अंकों और अिर के पश्चात ्
“धारा 271ककि, धारा 271ककग, धारा 271ककघ,” शब्र्द, अंक और अिर
अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ;
(आ) िंर् (क) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(कक) धारा 154, धारा 250, धारा 270क, धारा 271,
धारा 271क, धारा 271ककग, धारा 271ककघ या धारा 271ञ के अधीन
संयुक्त आयुक्त (अपीि) द्वारा पाररत कोई आर्देश ; या”;
(इ) िंर् (ग) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(ग) ननम्नलिखित द्वारा पाररत कोई आर्देश,—
(i) धारा 12कक या धारा 12कि के अधीन या धारा 80छ
की उपधारा (5) के िंर् (vi) के अधीन या धारा 263 के अधीन या
धारा 270क के अधीन या धारा 271 के अधीन या धारा 272क के
अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त या उसके द्वारा ऐसे ककसी
आर्देश का संशोधन करने वािा धारा 154 के अधीन पाररत कोई
आर्देश ; या
(ii) धारा 263 या धारा 272क के अधीन ककसी प्रधान मख्ु य
आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महाननर्देशक या महाननर्देशक
या प्रधान ननर्देशक या ननर्देशक या उसके द्वारा ककसी ऐसे आर्देश
का संशोधन करने वािा धारा 154 के अधीन पाररत कोई आर्देश ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
791
या”;
(ि) उपधारा (2) में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों, जहां कहीं व े आते
हैं, के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक
रिे जाएंगे ;
(ग) उपधारा (4) में,—
(i) “आयुक्त (अपीि) के आर्देश के ववरुद्ध” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान
पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि) के आर्देश के ववरुद्ध” शब्र्द
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ii) “आयुक्त (अपीि) के आर्देश के ककसी भाग” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के
स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि) के ऐसे आर्देश के
ककसी भाग” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
108. आय-कर अधधननयम की धारा 264 में, उपधारा (4) में, “आयुक्त (अपीि)” धारा 264 का
संशोधन ।
शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या
आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
109. आय-कर अधधननयम की धारा 267 में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों धारा 267 का
संशोधन ।
के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे
जाएंगे ।
110. आय-कर अधधननयम की धारा 269धध में,— धारा 269धध
का संशोधन ।
(क) र्दसू रे परंतुक के पश्चात ् और स्पष्ट् ीकरण से पहिे, ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘परंतु यह भी कक ककसी ननिेप या उधार की उस र्दशा में जहां,—
(क) ककसी प्राथलमक कृवर् प्रत्यय सोसाइ ी या ककसी प्राथलमक
सहकारी कृवर् और ग्रामीण ववकास बकैं द्वारा अपने सर्दस्य से ऐसे
ननिेप स्वीकार ककए जाते हैं ; या
(ि) जहां ऐसा उधार ककसी प्राथलमक कृवर् प्रत्यय सोसाइ ी या
ककसी प्राथलमक सहकारी कृवर् और ग्रामीण ववकास बकैं से उसके सर्दस्य
द्वारा लिया जाता है,
वहां इस धारा के उपबंधों का वहीं प्रभाव होगा मानो “बीस हजार रुपए” के
स्थान पर “र्दो िाि रुपए” रिे गए हों ।’;
(ि) स्पष्ट् ीकरण में, िंर् (ii) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(ii) “सहकारी बकैं ”, “प्राथलमक कृवर् प्रत्यय सोसाइ ी”, “प्राथलमक सहकारी
कृवर् और ग्रामीण ववकास बकैं ” का वही अथ ष होगा, जो धारा 80त की उपधारा
(4) के स्पष्ट् ीकरण में क्रमशः उनका हैं ;’।
111. आय-कर अधधननयम की धारा 269न में,— धारा 269न
का संशोधन ।
(क) र्दसू रे परंतुक के पश्चात ् और स्पष्ट् ीकरण से पहिे, ननम्नलिखित परंतुक
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
792
“परंतु यह भी कक ककसी ननिेप या उधार की उस र्दशा में जहां,—
(क) ककसी प्राथलमक कृवर् प्रत्यय सोसाइ ी या ककसी प्राथलमक
सहकारी कृवर् और ग्रामीण ववकास बकैं द्वारा अपने सर्दस्य को ऐसा
ननिेप संर्दत्त ककया जाता है ; या
(ि) जहां ऐसा उधार ककसी प्राथलमक कृवर् प्रत्यय सोसाइ ी या
ककसी प्राथलमक सहकारी कृवर् और ग्रामीण ववकास बकैं को उसके सर्दस्य
द्वारा प्रनतसंर्दत्त ककया जाता है,
वहां इस धारा के उपबंधों का वहीं प्रभाव होगा मानो “बीस हजार रुपए” के
स्थान पर “र्दो िाि रुपए” रिे गए हों ।’;
(ि) स्पष्ट् ीकरण में िंर् (ii) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
‘(ii) “सहकारी बकैं ”, “प्राथलमक कृवर् प्रत्यय सोसाइ ी”, “प्राथलमक सहकारी
कृवर् और ग्रामीण ववकास बकैं ” का वही अथ ष होगा, जो धारा 80त की
उपधारा (4) के स्पष्ट् ीकरण में क्रमशः उनका हैं ;’।
धारा 270क का 112. आय-कर अधधननयम की धारा 270क में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और
संशोधन ।
कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहा ं कहीं व े आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त
(अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 270कक का 113. आय-कर अधधननयम की धारा 270कक की उपधारा (6) में, “वहां धारा 246क
संशोधन ।
के अधीन कोई अपीि” शब्र्दों, अंकों और अिर के स्थान पर, “वहां धारा 246 या
धारा 246क के अधीन कोई अपीि” शब्र्द, अंक और अिर रिे जाएंगे ।
धारा 271 का 114. आय-कर अधधननयम की धारा 271 में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों
संशोधन ।
के स्थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 271क का 115. आय-कर अधधननयम की धारा 271क में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और
संशोधन ।
कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक
रिे जाएंगे ।
धारा 271ककग 116. आय-कर अधधननयम की धारा 271ककग में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और
का संशोधन ।
कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक
रिे जाएंगे ।
धारा 271ककघ 117. आय-कर अधधननयम की धारा 271ककघ में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और
का संशोधन ।
कोष्ट्िकों के स्थान पर, र्दोनों स्थानों पर जहां व े आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या
आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 271ग का 118. आय-कर अधधननयम की धारा 271ग की उपधारा (1) में,—
संशोधन ।
(अ) िंर् (ि) में,—
(I) “संपूण ष कर या उसके भाग का संर्दाय करने में” शब्र्दों के स्थान पर,
“संपूण ष कर या उसके भाग का संर्दाय करने या संर्दाय सुननजश्चत करने में” शब्र्द
रिे जाएंगे ;
(II) उपिंर् (i) में, “या” शब्र्द का िोप ककया जाएगा ;
(III) उपिंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपिंर् अंत:स्थावपत ककएअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
793
जाएंगे, अथाषत ् :—
“(iii) धारा 194र्द की उपधारा (1) का पहिा परंतुक ; या
(iv) धारा 194ध की उपधारा (1) के परंतुक ;”;
(IV) ववत्त अधधननयम, 2023 द्वारा यथा अंत:स्थावपत उपिंर् (iv) के
पश्चात,् ननम्नलिखित उपिंर्, 1 जुिाई, 2023 से अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(v) धारा 194िक की उपधारा (2) ;”;
(आ) र्दीघ ष पंजक्त में, “क ौती करने में या उसका संर्दाय” शब्र्दों के स्थान पर,
“क ौती करने में या उसका सर्दं ाय करने में या संर्दाय सुननजश्चत करने में” शब्र्द रिे
जाएंगे ।
119. (1) आय-कर अधधननयम की धारा 271चकक को उसकी उपधारा (1) के रूप में धारा 271चकक
का संशोधन ।
पुन:संख्यांककत ककया जाएगा और इस प्रकार पुन:संख्यांककत उपधारा (1) की र्दीघ ष पंजक्त के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“वहां, धारा 285िक की उपधारा (1) के अधीन ववठहत आय-कर प्राधधकारी यह
ननर्देश र्दे सकेगा कक ऐसा व्यजक्त शाजस्त के रूप में पचास हजार रुपए की रालश का
संर्दाय करेगा ।
(2) जहां, धारा 285िक की उपधारा (1) के िंर् ( ) में ननठर्दषष्ट् व्यजक्त की
र्दशा में, जजसस े उस धारा के अधीन वववरण प्रस्तुत करने की अपेिा है, (जजसे इसमें
इसके पश्चात ् ररपो षकारी ववत्तीय संस्था के रूप में ननठर्दषष्ट् ककया गया है), वववरण में
गित सूचना प्रर्दान करता है और ऐसे वववरण में गिती सुसंगत ररपो ष योग्य िेिे
या िेिाओं के धारक या धारकों द्वारा प्रस्तुत लम्या या गित सूचना के
पररणामस्वरूप है, धारा 285िक की उपधारा (1) में ववठहत आय-कर प्राधधकारी यह
ननर्देश र्देगा कक ररपो षकारी ववत्तीय संस्था शाजस्त के माध्यम से प्रत्येक ररपो ष योग्य
गित िाते के लिए उपधारा (1) के अधीन शाजस्त, यठर्द कोई हो, के अनतररक्त, पांच
हजार रुपए की रालश का सर्दं ाय करेगी और ररपो षकारी ववत्तीय संस्था, ऐसे ररपो ष
योग्य िाताधारक के ननलमत्त इस प्रकार संर्दत्त धनरालश को वसूि करने की या उसके
कब्जे में की, ककन्द्हीं धनरालशयों को या जो उसे ऐसे प्रत्येक ररपो ष योग्य िाताधारक
से प्राप्त हो, इस प्रकार संर्दत्त धनरालश के समतुल्य रकम को प्रनतधाररत करने की
हकर्दार होगी ।”।
120. आय-कर अधधननयम की धारा 271ञ में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और धारा 271ञ
का संशोधन ।
कोष्ट्िकों के स्थान पर, र्दोनों स्थानों पर जहां व े आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या
आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
121. आय-कर अधधननयम की धारा 274 की उपधारा (2ि) में, परंतुक के पश्चात,् धारा 274 का
संशोधन ।
ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा और 1 अप्रैि, 2022 से अंत:स्थावपत
ककया गया समझा जाएगा, अथाषत ् :--
“परंतु यह और कक केंरीय सरकार, इस उपधारा के अधीन 31 माचष, 2022 को
या उसके पूव ष जारी ककसी ननर्देश का, राजपत्र में अधधसचू ना द्वारा, संशोधन कर
सकेगी ।”।
122. आय-कर अधधननयम की धारा 275 में,-- धारा 275 का
संशोधन ।
(क) “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहां कहीं वे आतेअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
794
हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ;
(ि) “आयुक्त (अपीि) को” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहां कहीं व े
आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि) को” शब्र्द और कोष्ट्िक रि े
जाएंगे ।
धारा 276क का 123. आय-कर अधधननयम की धारा 276क में परंतुक के पश्चात,् ननम्नलिखित
संशोधन । परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक इस धारा के अधीन 1 अप्रैि, 2023 को या उसके पश्चात ्
कोई कायवष ाही आरंभ नहीं की जाएगी ।”।
धारा 276ि का 124. आय-कर अधधननयम की धारा 276ि में,—
संशोधन ।
(अ) आरंलभक भाग में, “केंरीय सरकार के जमा िाते में” शब्र्दों का िोप ककया
जाएगा;
(आ) िंर् (क) में, “क ौती ककए गए कर” शब्र्दों के स्थान पर, “क ौती ककए
गए कर का केन्द्रीय सरकार के जमा िाते में” शब्र्द रिे जाएंगे;
(इ) िंर् (ि) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत:्—
‘(ि) केंरीय सरकार के जमा िाते में,—
(i) धारा 115ण की उपधारा (2) ;
(ii) धारा 194ि के परंतुक ;
(iii) धारा 194र्द की उपधारा (1) के पहिे परंतुक ;
(iv) धारा 194ध की उपधारा (1) के परंतुक; या,
की अपेिानुसार या उसके अधीन केंरीय सरकार के जमा िाते में कर का
संर्दाय करने या कर का संर्दाय सुननजश्चत करने ,’;
(ई) ववत्त अधधननयम, 2023 द्वारा प्रनतस्थावपत िंर् (ि) के उपिंर् (iv) के
पश्चात,् ननम्नलिखित उपिंर्, 1 जुिाई, 2023 से अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“(v) धारा 194िक की उपधारा (2) ;”।
धारा 279 का 125. आय-कर अधधननयम की धारा 279 की उपधारा (1) में, “आयुक्त (अपीि)”
संशोधन ।
शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 287 का 126. आय-कर अधधननयम की धारा 287 में, उपधारा (2) में, “आयुक्त (अपीि)”
संशोधन ।
शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द
और कोष्ट्िक रिे जाएंगे ।
धारा 295 का 127. आय-कर अधधननयम की धारा 295 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) िंर् (ङङग) में, “िेिापरीिा” शब्र्द के पश्चात,् “या तालिका मूल्यांकन” शब्र्द
अंतःस्थावपत ककए जाएंगे ;
(ii) िंर् (र्र्) में, “आयुक्त (अपीि)” शब्र्दों और कोष्ट्िकों के स्थान पर, जहा ं
कहीं वे आते हैं, “संयुक्त आयुक्त (अपीि) या आयुक्त (अपीि)” शब्र्द और कोष्ट्िक
रिे जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
795
अध्याय 4
अप्रत्यक्ष कर
सीमािुलक
1962 का 52 128. सीमाशुल्क अधधननयम, 1962 (जजस े इसमें इसके पश्चात ् सीमाशुल्क धारा 25 का
संशोधन ।
अधधननयम कहा गया है) की धारा 25 की उपधारा (4क) में, परंतुक के पश्चात,्
ननम्नलिखित परंतुक अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“परंतु यह और कक इस धारा में अंतववष्ट्ष कोई बात, ननम्नलिखित को या
उसके संबंध में प्रर्दान की गई ऐसी ककसी छू को िाग ू नहीं होगी,—
(क) बहुपिीय या द्ववपिीय व्यापार करार ;
(ि) अंतराषष्ट्रीय करारों, संधधयों या अलभसमयों के अधीन बाध्यताएं या
ऐसी अन्द्य बाध्यताएं जजनके अंतगतष संयुक्त राष्ट्र अलभकरणों, राजननयकों,
अंतराषष्ट्रीय संगिनों के संबंध में बाध्यताएं भी हैं ;
(ग) सांववधाननक प्राधधकाररयों के ववशेर्ाधधकार ;
(घ) ववर्देशी व्यापार नीनत के अधीन स्कीमें ;
(ङ) केंरीय सरकार की ऐसी स्कीमें, जजनकी र्दो वर् ष से अधधक
ववधधमान्द्यता है ;
(च) उपहार या वैयजक्तक सामान के रूप में पुनःआयात ककए गए माि,
अस्थायी आयात या आयानतत माि ;
(छ) तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध के अधीन कोई सीमाशुल्क, जजसके
1975 का 51 अंतगतष सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम, 1975 की धारा 12 के अधीन
उद्ग्रहणीय सीमाशुल्क से लभन्द्न, धारा 3 की उपधारा (7) के अधीन उद्ग्रहणीय
एकीकृत कर सजम्मलित है ।”।
129. सीमाशुल्क अधधननयम की धारा 65 की उपधारा (1) में, ‘‘ऐसी शतों के अधीन धारा 65
का संशोधन ।
रहते हुए’’ शब्र्दों के स्थान पर, ‘‘धारा 65क के उपबंधों तथा ऐसी शतों के अधीन रहते
हुए’’शब्र्द रिे जाएंगे ।
130. सीमाशुल्क अधधननयम की धारा 65 के पश्चात,् ननम्नलिखित धारा नई धारा 65क
का अन्द्तःस्थापन।
अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
‘‘65क. (1) इस अधधननयम या सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम, 1975 के ककसी भांर्ागार में
संकक्रयाओं के
उपबंध में तत्प्रनतकूि ककसी बात के अंतववष्ट्ष होते हुए भी, ननम्नलिखित उपबंध ऐसी
लिए िाए गए
तारीि से, जो केंरीय सरकार द्वारा अधधसूधचत की जाए, ऐसे माि के संबंध में िाग ू मािों को
होंगे, जजन पर धारा 65 के ननबंधनों में कोई ववननमाणष कारी प्रकक्रया या अन्द्य सामान्द्यतया
कनतपय कर संर्दत्त
संकक्रयाएं की गई हैं, अथाषत ् :—
करना ।
(अ) शुल्क्य माि, जो भांर्ागार में जमा ककए जाते हैं, ऐसे माि होंगे, जजन पर
1975 का 51 उपधारा (7) के अधीन एकीकृत कर और सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम, 1975 की
धारा 3 की उपधारा (9) के अधीन सेवा कर प्रनतकर उपकर संर्दत्त ककए गए हैं और
केवि संर्देय शुल्क के प्रयोजन के लिए, जो उक्त कर और संर्दत्त उपकर स े लभन्द्न हैं,
ऐसे शुल्क्य माि भांर्ागार माि होंगे ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
796
(आ) भांर्ागार में जमा ककए जाने के प्रयोजन के लिए शुल्क्य माि वहां
ह ाए जाने के लिए अनुज्ञात ककए जाएंगे, जहां—
(i) माि के संबंध में, उसकी कोई प्रववजष्ट् सीमाशुल्क स्वचालित
प्रणािी पर इिैक्राननक रूप से प्रस्तुत की गई हो, धारा 46 के अधीन
घरेिू िपत के लिए प्रवेशपत्र और यथाजस्थनत, धारा 17 या धारा 18 के
अधीन धारा 15 की उपधारा (1) के िंर् (क) के अनुसार शुल्क के लिए
माि का ननधाषरण ककया गया हो ;
(ii) उपधारा (7) के अधीन एकीकृत कर और सीमाशुल्क ैररफ
अधधननयम, 1975 की धारा 3 की उपधारा (9) के अधीन माि और सेवा 1975 का 51
कर प्रनतकर उपकर धारा 47 के अनुसार संर्दत्त ककए गए हों ;
(iii) धारा 67 के ननबंधनों के अनुसार, अन्द्य भांर्ागार स े माि के
ह ाए जाने पर धारा 68 के िंर् (क) के अधीन घरेिू िपत के लिए
प्रवेशपत्र पेश ककया गया हो और उस अन्द्य भांर्ागार से माि को इस
प्रकार ह ाए जाने से पूव ष धारा 7 के अधीन एकीकृत कर तथा सीमाशुल्क
ैररफ अधधननयम, 1975 की धारा 3 की उपधारा (9) के अधीन माि 1975 का 51
और सेवा कर प्रनतकर उपकर, संर्दत्त कर ठर्दए गए हों ;
(iv) धारा 59 के उपबंधों का, उसमें के ननम्नलिखित उपांतरणों के
अध्यधीन रहते हुए, अनुपािन ककया गया है, अथाषत ् :—
(क) ‘‘भांर्ागारण के लिए प्रवेशपत्र’’ शब्र्दों के स्थान पर,
‘‘घरेिू िपत के लिए प्रवेशपत्र’’ शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) ‘‘ननधाषररत शुल्क की रकम’’शब्र्दों के स्थान पर,
‘‘ननधाषररत शुल्क की रकम ककन्द्तु जजसे संर्दत्त नहीं ककया गया है,’’
शब्र्द रिे जाएंगे ।
(इ) िंर् (अ) में ननठर्दषष्ट् भार्ं ागार माि के संबंध में संर्देय शुल्क, उस
ववस्तार तक असंर्दत्त, माि को संर्दत्त ककए गए हैं, भांर्ागार से ऐसी रीनत में जो
ववठहत ककया जाए ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध, उस उपधारा के अधीन अधधसूधचत तारीि के पूव ष
धारा 65 के ननबंधनों के अनुसार ववननमाषण प्रकक्रया या अन्द्य संकक्रयाओं के लिए
भांर्ागार में जमा करने या भार्ं ागार में पहिे स े जमा ककए जाने के प्रयोजन के लिए
ह ाए जाने के लिए पहिे से अनुज्ञात शुल्क्य माि के संबधं में िागू नहीं होंगे ।
(3) केंरीय सरकार, ककसी एक या अधधक मानर्दंर्, जजसमें माि की प्रकृनत या
वग ष या प्रवग ष या आयातकों या ननयाषतकतों का वग ष या औद्योधगक िेत्र सजम्मलित
है, ककन्द्तु उस तक ही सीलमत नहीं है, जो आवश्यक या समीचीन हों, अधधसूचना
द्वारा ऐसे माि के लिए, जजसके संबंध में धारा 65 के ननबंधनों में कोई
ववननमाषणकारी प्रकक्रया या अन्द्य संकक्रयाएं की गई है, जसै ा कक इस अधधसूचना में
ववननठर्दषष्ट् ककया जाए, इस धारा के िागू होने से छू प्रर्दान कर सकेगी ।’’।
धारा 127ग का 131. सीमाशुल्क अधधननयम की धारा 127ग में, उपधारा (8) के पश्चात,्
संशोधन । ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(8क) उपधारा (5) के अधीन कोई आर्देश उस मास, जजसमें धारा 127ि के
अधीन कोई आवेर्दन ककया जाता है, के अंनतम ठर्दन से नौ मास की अवधध के भीतर
पाररत ककया जाएगा, और यठर्द उक्त अवधध के भीतर कोई आर्देश पाररत नहीं ककयाअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
797
जाता है, तो समझौता कायवष ाठहयों का उपशमन हो जाएगा तथा ऐसा न्द्यायननणषयन
प्राधधकारी, जजसके समि आवेर्दन करने के समय कायवष ाही िंत्रबत थी, इस
अधधननयम के उपबंधों के अनुसार आवेर्दन का ऐस े ननप ारा करेगा, मानो उक्त धारा
के अधीन कोई आवेर्दन नहीं ककया गया था :
परंतु इस उपधारा के अधीन ववननठर्दषष्ट् अवधध, उन कारणों के लिए, जो
िेिबद्ध ककए जाएं, तीन मास स े अनधधक की और अवधध के लिए समझौता
आयोग द्वारा बढायी जा सकेगी :
परंतु यह और कक उस तारीि को, जजसको ववत्त ववधेयक, 2023 को राष्ट्रपनत
की अनुमनत प्राप्त होती है, उपधारा (5) के अधीन िंत्रबत ककसी आवेर्दन के संबंध में
नौ मास की उक्त अवधध की गणना उस तारीि से की जाएगी, जजसको उक्त ववत्त
ववधेयक पर राष्ट्रपनत की अनुमनत प्राप्त होती है ।”।
132. सीमाशल्ु क अधधननयम की धारा 157 की उपधारा (2) के िंर् (ग) के पश्चात ् धारा 157 का
संशोधन ।
ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘‘(गक) धारा 65क की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन शुल्क के संर्दाय तथा
माि को ह ाए जाने की रीनत और शतें”।
133. सीमाशुल्क अधधननयम की धारा 159 में, ‘‘43’’ अंक के पश्चात ् ‘‘65क’’ अंक धारा 159 का
संशोधन ।
और अिर अंत:स्थावपत ककए जाएंगे ।
सीमािुलक टैररफ
1975 का 51 134. सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम, 1975 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् सीमाशुल्क धारा 9, धारा
ैररफ अधधननयम कहा गया है) में, 1 जनवरी, 1995 से,— 9क और धारा
9ग का
(i) धारा 9 में,— संशोधन ।
(क) उपधारा (6) के पहिे परंतुक में, “ककसी पुनवविष ोकन में” शब्र्दों के
स्थान पर, “ककसी पुनवविष ोकन पर ववचार ककए जाने पर” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) उपधारा (7) में, “और अवधाररत” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ii) धारा 9क में,—
(क) उपधारा (5) के पहिे परंतुक में, “ककसी पुनवविष ोकन में” शब्र्दों के
स्थान पर, “ककसी पुनवविष ोकन पर ववचार ककए जाने पर” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) उपधारा (6) में, “और अवधाररत” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(iii) धारा 9ग में,—
(क) उपधारा (1) में, “के आर्देश” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ि) उपधारा (2) में, ‘‘आर्देश’’ शब्र्द के स्थान पर, ‘‘अवधारण या
पुनवविष ोकन’’ शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) उपधारा (3) में, ‘‘आर्देश’’ शब्र्द के स्थान पर, ‘‘अवधारण या
पुनवविष ोकन’’ शब्र्द रिे जाएंगे ;
(घ) उपधारा (5) के पश्चात,् ननम्नलिखित स्पष्ट् ीकरण अंतःस्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
‘स्पष्ट्टीकरर्—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “अवधारण” या
“पुनवविष ोकन” से अधधननयम की धारा 8ि, धारा 9, धारा 9क औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
798
धारा 9ि के अधीन बनाए गए ननयमों में ववननठर्दषष्ट् रीनत में ककया गया
अवधारण या पुनवविष ोकन अलभप्रेत है ।’।
पहिी अनुसूची 135. सीमाशल्ु क ैररफ अधधननयम की पहिी अनुसूची का,—
का संशोधन ।
(क) र्दसू री अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में संशोधन ककया जाएगा ;
(ि) तीसरी अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में भी संशोधन ककया जाएगा ;
(ग) 1 मई, 2023 से चौथी अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में भी संशोधन ककया
जाएगा ;
(घ) 1 अप्रैि, 2023 से सातवीं अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में भी संशोधन
ककया जाएगा ।
र्दसू री अनुसूची 136. सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम की र्दसू री अनुसूची में 1 मई, 2023 से पांचवी ं
का संशोधन ।
अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् रीनत में संशोधन ककया जाएगा ।
केंद्रीय माि और सेवा कर अधिनियम
धारा 10 का 137. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम, 2017 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् 2017 का 12
संशोधन । केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम कहा गया है) की धारा 10 में,—
(क) उपधारा (2) के िंर् (घ) में, “माि या” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ;
(ि) उपधारा (2क) के िंर् (ग) में, “माि या” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ।
धारा 16 का 138. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 16 में, उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(i) र्दसू रे परंतुक में, “उस पर के ब्याज के साथ, ऐसी रीनत में, जो ववठहत
की जाए, उसके आउ पु कर र्दानयत्व में जोड़ ठर्दया जाएगा” शब्र्दों के स्थान
पर, “धारा 50 के अधीन संर्देय ब्याज के साथ, ऐसी रीनत में, जो ववठहत की
जाए, उसके द्वारा संर्दत्त ककया जाएगा” शब्र्द और अंक रिे जाएंगे ;
(ii) तीसरे परंतुक में, “उसके द्वारा ककए गए संर्दाय” शब्र्दों के स्थान पर,
“उसके द्वारा आपूनतकष ताष को ककए गए संर्दाय” शब्र्द रि े जाएंगे ।
धारा 17 का 139. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 17 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (3) के स्पष्ट् ीकरण में, “अनुसूची 3 के पैरा 5 में ववननठर्दषष्ट् के
लसवाय उस अनुसूची में ववननठर्दषष्ट् कायकष िापों या संव्यवहारों का मूल्य सजम्मलित
नहीं होगा ।” शब्र्दों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“ननम्नलिखित के लसवाय, अनुसूची 3 में ववननठर्दषष्ट् कायकष िापों या
संव्यवहारों का मूल्य सजम्मलित नहीं होगा,—
(i) उक्त अनुसूची के पैरा 5 में ववननठर्दषष्ट् कायकष िापों या
संव्यवहारों का मूल्य ; और
(ii) उक्त अनुसूची के पैरा 8 के िंर् (क) के संबंध में ऐसे
कायकष िापों या संव्यवहारों का मूल्य, जो ववठहत ककए जाएं”;
(ि) उपधारा (5) के िंर् (च) के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“(चक) ककसी कराधेय व्यजक्त द्वारा प्राप्त ककए गए माि या सेवाओ ं
या र्दोनों का, कंपनी अधधननयम, 2013 की धारा 135 में ननठर्दषष्ट् ननगम 2013 का 18
सामाजजक उत्तरर्दानयत्व के अधीन उसकी बाध्यताओं स े सबं ंधधत कायकष िापों केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
799
लिए उपयोग ककए जाते हैं या उपयोग ककए जाने के लिए आशनयत हैं ;”।
धारा 23 का 140. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 23 की उपधारा (2) के स्थान
संशोधन ।
पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी जाएगी और 1 जुिाई, 2017 से रिी गई समझी जाएगी,
अथाषत ् :—
‘(2) धारा 22 की उपधारा (1) या धारा 24 में अंतववष्ट्ष प्रनतकूि ककसी बात के
होते हुए भी, केंरीय सरकार, पररर्द् की लसफाररशों पर, अधधसूचना द्वारा, ऐसी शतों
और ननबंधनों के अध्यधीन, जो उसमें ववननठर्दषष्ट् ककए जाएं, ऐसे व्यजक्तयों का वग,ष
जजन्द्हें इस अधधननयम के अधीन रजजस्रीकरण प्राप्त करने से छू र्दी जा सकती है,
ववननठर्दषष्ट् कर सकेगी ।’।
141. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 30 की उपधारा (1) में,— धारा 30 का
संशोधन ।
(क) ‘‘रद्र्दकरण आर्देश की तामीि की तारीि से तीस ठर्दन के भीतर ऐसे
अधधकारी को ववठहत रीनत में’’ शब्र्दों के स्थान पर, ‘‘ऐसी रीनत में, ऐसे समय के
भीतर और ऐसी शतों और ननबंधनों के अध्यधीन, जो ववठहत ककए जाएं, ऐस े
अधधकारी को’’ शब्र्द रिे जाएंगे ।
(ि) परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
142. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 37 की उपधारा (4) के धारा 37 का
पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(5) ककसी रजजस्रीकृत व्यजक्त को उक्त ब्यौरे प्रस्तुत करने की ननयत तारीि
से तीन वर् ष की अवधध के अवसान के पश्चात,् कर अवधध के लिए उपधारा (1) के
अधीन जावक पूनतयष ों के ब्यौरे प्रस्तुत करना अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा :
परंतु सरकार, पररर्द् की लसफाररशों पर, अधधसूचना द्वारा, ऐसी शतों और
ननबधं नों के अधीन रहते हुए, जो उस अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाएं, ककसी
रजजस्रीकृत व्यजक्त या रजजस्रीकृत व्यजक्तयों के वग ष को उपधारा (1) के अधीन कर
अवधध के लिए जावक पूनतयष ों के ब्यौरे प्रस्तुत करने के लिए उक्त ब्यौरों को प्रस्तुत करने
की ननयत तारीि से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात ् भी अनुज्ञात कर सकेगी ।”।
143. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 39 की उपधारा (10) के धारा 39 का
पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
“(11) ककसी रजजस्रीकृत व्यजक्त को, ककसी कर अवधध के लिए वववरणी प्रस्तुत
करने की ननयत तारीि से तीन वर् ष के अवसान के पश्चात,् उक्त वववरणी प्रस्तुत
करने के लिए अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा :
परंतु सरकार, पररर्द् की लसफाररशों पर, अधधसूचना द्वारा, ऐसी शतों और
ननबधं नों के अधीन रहते हुए, जो उस अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाएं, ककसी
रजजस्रीकृत व्यजक्त या रजजस्रीकृत व्यजक्तयों के वग ष को, ककसी अवधध के लिए
वववरणी प्रस्तुत करने के लिए, उक्त वववरणी को प्रस्तुत करने की ननयत तारीि स े
तीन वर् ष के अवसान के पश्चात ् भी अनुज्ञात कर सकेगी ।”।
144. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 44 को उसकी उपधारा (1) के धारा 44 का
संशोधन ।
रूप में पुन:संख्यांककत ककया जाएगा और इस प्रकार पुन:संख्यांककत उपधारा (1) के पश्चात,्
ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(2) ककसी रजजस्रीकृत व्यजक्त को उपधारा (1) के अधीन ककसी ववत्तीय वर् ष के
लिए उक्त वावर्षक वववरणी प्रस्तुत करने की ननयत तारीि से तीन वर्ष के अवसान केअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
800
पश्चात ् वावर्षक वववरणी प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा:
परंतु सरकार, पररर्द् की लसफाररशों पर, अधधसूचना द्वारा, ऐसी शतों और
ननबधं नों के अधीन रहते हुए, जो उस अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाएं, ककसी
रजजस्रीकृत व्यजक्त या रजजस्रीकृत व्यजक्तयों के वग ष को, उपधारा (1) के अधीन ववत्तीय
वर् ष के लिए वावर्कष वववरणी प्रस्तुत करने के लिए उक्त वावर्कष वववरणी को प्रस्तुत करन े
की ननयत तारीि से तीन वर् ष के अवसान के पश्चात ् भी अनुज्ञात कर सकेगी ।”।
धारा 52 का 145. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 52 की उपधारा (14) के
संशोधन । पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(15) ककसी प्रचािक को, उपधारा (4) के अधीन वववरण प्रस्तुत करने की
ननयत तारीि से तीन वर् ष के अवसान के पश्चात ् उक्त वववरण प्रस्तुत करने के लिए
अनुज्ञात नहीं ककया जाएगा :
परंतु सरकार, पररर्द् की लसफाररशों पर, अधधसूचना द्वारा, ऐसी शतों और
ननबधं नों के अधीन रहते हुए, जो उस अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाएं, ककसी
प्रचािक या प्रचािकों के वगष को उपधारा (4) के अधीन उक्त वववरण प्रस्तुत करने
के लिए ननयत तारीि से उक्त तीन वर् ष की अवधध के अवसान के पश्चात ् भी
अनुज्ञात कर सकेगी ।”।
धारा 54 का 146. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 54 की उपधारा (6) में,
संशोधन ।
“जजसके अंतगतष अंनतमत: स्वीकृत इनपु कर प्रत्यय की रकम नहीं है,” शब्र्दों का िोप
ककया जाएगा ।
धारा 56 का 147. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 56 में, “आवेर्दन की प्राजप्त की
संशोधन ।
तारीि से साि ठर्दन के अवसान के पश्चात ् की तारीि स े ऐसे कर का प्रनतर्दाय करने की
तारीि तक” शब्र्दों के स्थान पर, “ऐसी शतों तथा ननबधं नों के अधीन रहते हुए, जो ववठहत
की जाएं, तथा ऐसी रीनत में संगखणत ककए जाने वािे, ऐसे आवेर्दन के प्राजप्त की तारीि से
ऐसे कर के प्रनतर्दाय की तारीि तक, साि ठर्दन स े परे वविंब की ऐसी अवधध के लिए”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
धारा 62 का 148. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 62 की उपधारा (2) में,—
संशोधन ।
(क) ‘‘तीस ठर्दन’’ शब्र्दों के स्थान पर, ‘‘साि ठर्दन’’ शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) ननम्नलिखित परंतुक अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘‘परंतु जहां रजजस्रीकृत व्यजक्त उपधारा (1) के अधीन ननधाषरण आर्देश
की तामीि के साि ठर्दन के भीतर ववधधमान्द्य वववरणी प्रस्तुत करने में असफि
रहता है, वहां वह साि ठर्दन की अनतररक्त अवधध के भीतर उक्त ननधाषरण
आर्देश की तामीि के साि ठर्दन से परे वविंब के प्रत्येक ठर्दन के लिए एक सौ
रुपए अनतररक्त वविंब शुल्क के संर्दाय पर कर सकेगा और यठर्द वह ऐसी
ववस्ताररत अवधध के भीतर ववधधमान्द्य वववरणी प्रस्तुत करता है तो उक्त
ननधाषरण आर्देश का प्रनतसंहरण ककया गया समझा जाएगा, ककन्द्तु धारा 50 की
उपधारा (1) के अधीन ब्याज के संर्दाय का या धारा 47 के अधीन वविंब फीस
के संर्दाय का र्दानयत्व बना रहेगा ।’’।
धारा 109 का 149. केंरीय माि और सवे ा कर अधधननयम की धारा 109 के स्थान पर,
प्रनतस्थापन ।
ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
801
अपीि अधधकरण ‘‘109. (1) सरकार, अधधसूचना द्वारा पररर्द् की लसफाररशों पर अपीि
और उसकी
प्राधधकारी या पुनरीिण प्राधधकारी द्वारा पाररत आर्देशों के ववरुद्ध अपीिों की
न्द्यायपीिों का
सुनवाई के लिए माि और सवे ा कर अपीि अधधकरण के नाम से ज्ञात एक अपीि
गिन ।
अधधकरण ऐसी तारीि से, जो उसमें ववननठर्दषष्ट् की जाए, स्थावपत करेगी ।
(2) अपीि अधधकरण को प्रर्दत्त अधधकाररता, शजक्तयों और प्राधधकार का प्रयोग
उपधारा (3) और उपधारा (4) के अधीन गठित प्रधान न्द्यायपीि और राज्य
न्द्यायपीिों द्वारा ककया जाएगा ।
(3) सरकार, अधधसूचना द्वारा, अपीि अधधकरण की नई ठर्दल्िी में प्रधान
न्द्यायापीि का गिन करेगी, जो अध्यि, एक न्द्यानयक सर्दस्य, एक तकनीकी सर्दस्य
(केंरीय) और एक तकनीकी सर्दस्य (राज्य) से लमिकर बनेगी ।
(4) सरकार, राज्य के अनुरोध पर, अधधसूचना द्वारा उतनी संख्या में, ऐस े
स्थानों पर और ऐसी अधधकाररता के साथ, जजतनी पररर्द् द्वारा लसफाररश की जाए,
राज्य न्द्यायपीिों का गिन कर सकेगी, जो र्दो न्द्यानयक सर्दस्यों, एक तकनीकी
सर्दस्य (केंरीय) और एक तकनीकी सर्दस्य (राज्य) से लमिकर बनेगी ।
(5) प्रधान न्द्यायपीि और राज्य न्द्यायपीि, अपीि प्राधधकरण या पुनरीिण
प्राधधकरण द्वारा पाररत आर्देशों के ववरुद्ध अपीिों की सुनवाई करेंगी :
परंतु ऐसे मामिे, जजनमें से कोई एक मुद्र्दा आपूनत ष के स्थान से संबंधधत है,
की सुनवाई प्रधान न्द्यायपीि द्वारा की जाएगी ।
(6) अध्यि, समय-समय पर, साधारण या ववशेर् आर्देश द्वारा, न्द्यायपीिों के
बीच अपीि अधधकरण के कारबार का ववतरण करेगा और एक न्द्यायपीि से र्दसू री
न्द्यायपीि में मामिों का अंतरण कर सकेगा ।
(7) राज्य न्द्यायपीिों के भीतर ज्येष्ट्ितम न्द्यानयक सर्दस्य, जो अधधसूधचत
ककया जाए, ऐसी राज्य न्द्यायपीिों के लिए उपाध्यि से रूप में काय ष करेगा और वह
अध्यि की ऐसी शजक्तयों का प्रयोग करेगा, जो ववठहत की जाएं, ककन्द्तु सभी अन्द्य
प्रयोजनों के लिए उसे एक सर्दस्य ही समझा जाएगा ।
(8) अपीिें, जजसमें अंतवलषित कर या इनपु कर प्रत्यय या जुमाषने, फीस या
ककसी आर्देश, जजसके ववरुद्ध अपीि की गई है, में अवधाररत शाजस्त की रकम
पचास िाि रुपए से अधधक नहीं है और जजसमें ववधध का कोई प्रश्न अंतवलषित नहीं
है, अध्यि के अनुमोर्दन से और ऐसी शतों के अध्यधीन रहते हुए, जो पररर्द् की
लसफाररशों पर ववठहत की जाएं, एकि सर्दस्य द्वारा सुनी जा सकेंगी और अन्द्य सभी
मामिों में, एक न्द्यानयक सर्दस्य और एक तकनीकी सर्दस्य द्वारा एक साथ सुनी
जाएगी ।
(9) मामिे की सुनवाई के पश्चात,् यठर्द सर्दस्यों की राय में ककसी त्रबन्द्र्द ु या
ककन्द्हीं त्रबन्द्र्दओु ं पर लभन्द्नता है तो ऐस े सर्दस्य ऐसे त्रबन्द्र्द ु या त्रबन्द्र्दओु ं का कथन
करेंगे, जजन पर वे मत लभन्द्नता रिते हैं और अध्यि ऐसे मामिे को सुनवाई के
लिए,—
(क) जहां अपीि की ककसी राज्य न्द्यायपीि के सर्दस्यों द्वारा मूित:
सुनवाई की गई थी वहां राज्य के भीतर ककसी राज्य न्द्यायपीि के ककसी र्दसू रे
सर्दस्य द्वारा वहां राज्य के भीतर कोई र्दसू री राज्य न्द्यायपीि उपिब्ध नहीं है,अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
802
अन्द्य राज्य में ककसी राज्य न्द्यायपीि के ककसी सर्दस्य को ननठर्दषष्ट् की जाएगी;
(ि) जहां अपीि की सुनवाई मूित: प्रधान न्द्यायपीि के सर्दस्यों द्वारा
की गई थी, वहां प्रधान न्द्यायपीि के ककसी अन्द्य सर्दस्य को या जहां ऐसा
अन्द्य सर्दस्य उपिब्ध नहीं है, ककसी राज्य न्द्यायपीि के सर्दस्य को,
ननठर्दषष्ट् की जाएगी और ऐस े त्रबर्दं ु या त्रबर्दं ओु ं का बहुमत के अनुसार ववननश्चय ककया
जाएगा, जजसके अंतगतष उन सर्दस्यों, जजन्द्होंने मामिे को प्रथम बार सुना था, की
राय भी सजम्मलित है ।
(10) सरकार, अध्यि के परामश ष से, प्रशासननक र्दिता के लिए, सर्दस्यों को
एक न्द्यायपीि से र्दसू री न्द्यायपीि को अंतररत कर सकेगी :
परंतु राज्य न्द्यायपीि के ककसी तकनीकी सर्दस्य (राज्य) को केवि उसी राज्य
में, जजसमें वह मूित: ननयुक्त ककया गया था, राज्य सरकार के परामश ष से, राज्य
न्द्यायपीि में अंतररत ककया जा सकेगा ।
(11) अपीि अधधकरण का कोई कृत्य या कायवष ाठहयां, अपीि अधधकरण के
गिन में ककसी ररजक्त या त्रुठ की ववद्यमानता के आधार पर प्रश्नगत नहीं की
जाएंगी या अववधधमान्द्य नहीं मानी जाएंगी ।’’।
धारा 110 के 150. केंरीय माि और सवे ा कर अधधननयम की धारा 110 के स्थान पर
स्थान पर नई धारा ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी, अथाषत ् :—
का प्रनतस्थापन ।
अपीि अधधकरण ‘‘110. (1) कोई व्यजक्त ननम्नलिखित की ननयुजक्त के लिए अहष नहीं होगा—
के अध्यि और
(क) अध्यि के लिए, जब तक कक वह उच्चतम न्द्यायािय का
सर्दस्य, उनकी
अहषता, ननयुजक्त, न्द्यायाधीश न रहा हो, या ककसी उच्च न्द्यायािय का मुख्य न्द्यायमूनत ष न हो या
सेवा की शतें, न रहा हो ;
आठर्द ।
(ि) न्द्यानयक सर्दस्य के लिए, जब तक कक वह—
(i) उच्च न्द्यायािय का न्द्यायाधीश न रहा हो ; या
(ii) र्दस वर् ष की संयुक्त अवधध के लिए जजिा न्द्यायाधीश या
अनतररक्त जजिा न्द्यायाधीश न रहा हो;
(ग) एक तकनीकी सर्दस् य (केन्द्र ीय), जब तक वह केंरीय सरकार में
ववद्यमान ववधध या माि और सेवा कर के प्रशासन में कम से कम तीन वर् ष
के अनुभव के साथ भारतीय राजस् व (सीमाशुल् क और अप्रत् यि कर) सेवा,
समूह क या अखिि भारतीय सेवा का सर्दस् य नहीं हो या नहीं रहा हो और
उसने समूह क में कम से कम पच् चीस वर् ष की सेवा पूण ष नहीं की हो ;
(घ) एक तकनीकी सर्दस् य (राज् य), जब तक वह मूल् य संवधधतष कर या
राज् य माि और सेवा कर के अनतररक् त आयुक् त या ऐसी पंजक् त, जो प्रथम
अपीि प्राधधकारी, जैसा संबंद्ध राज् य सरकार द्वारा, पररर्द् की लसफाररशों पर,
अधधसूधचत ककया जाए, से अन्द् यनू पंजक् त का राज् य सरकार का अधधकारी या
अखिि भारतीय सेवा का अधधकारी नहीं है या नहीं रहा है और उसन े
ववद्यमान ववधध या माि और सेवा कर अथवा राज् य सरकार में ववत्त और
कराधान के िेत्र में प्रशासन में कम से कम तीन वर् ष के अनुभव के साथ समूह
क या समतुल् य सेवा में पच्च ीस वर् ष की सेवा पूण ष नहीं की हो :
परंतु राज् य सरकार, पररर्द् की लसफाररश पर, अधधसूचना द्वारा, समूह क या
समतुल् य सेवा में पच् चीस वर् ष की सेवा पूण ष करने की अपेिा, ऐसे राज् य, जहां ककसीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
803
व् यजक् त ने समूह क या समतुल् य में पच् चीस वर् ष की सेवा पूण ष नहीं की हो,परंतु उसने
सरकार में पच्चीस वर् ष की सेवा पूण ष कर िी हो, के अधधकाररयों की बाबत ऐसी शतों
के अध् यधीन रहते हुए और ऐसी अवधध तक, जो अधधसूचना में ववननठर्दषष्ट् की जाए,
लशधथि कर सकेगी।
(2) अध् यि, न्द्य ानयक सर्दस् य, तकनीकी सर्दस् य (केन्द्र ीय) और तकनीकी सर्दस् य
(राज् य), सरकार द्वारा, उपधारा (4) के अधीन गठित िोज-सह-चयन सलमनत की
लसफाररशों पर ननयुक् त या पुन:ननयुक्त ककए जाएंगे :
परंतु अध् यि के पर्द पर, उसकी मत्ृ यु, त् यागपत्र या अन्द्य था कारण से हुई
ककसी ररजक् त की र्दशा में, प्रधान न्द्यायपीि का न्द्य ानयक सर्दस् य या, उसकी
अनुपजस् थनत में, ज् येष्ट् ितम तकनीकी सर्दस् य, अध् यि के पर्द पर उस तारीि तक
काय ष करेगा, जजस तारीि तक, ऐसी ररजक् त को भरने के लिए इस अधधननयम के
उपबंधों के अनुसार ननयुक् त, कोई नया अध् यि अपना पर्द ग्रहण नहीं कर िेता है :
परंतु यह और कक जहां अध् यि, अनुपजस् थनत, बीमारी या ककसी अन्द्य कारण से
अपने कृत् यों का ननवहष न करने में असमथ ष है, वहां प्रधान न्द्यायपीि का न्द् यानयक
सर्दस् य या, उसकी अनुपजस् थनत में, ज् येष्ट् ितम तकनीकी सर्दस् य, उस तारीि तक
अध् यि के कृत् यों का ननवहष न करेगा, जजस तारीि तक अध् यि अपने कृत् यों को कफर
से संभाि िेता है ।
(3) ककसी राज् य न्द्य ायपीि के तकनीकी सर्दस् य (राज् य) का चयन करते समय,
ऐसे अधधकाररयों को पहिी प्राथलमकता र्दी जाएगी, जजन्द्ह ोंने उस राज् य की राज् य
सरकार में काय ष ककया है, जजस पर न्द्य ायपीि की अधधकाररता का ववस् तार है ।
(4) (क) राज् य न्द्य ायपीि के लिए तकनीकी सर्दस् य (राज् य) के लिए िोज-सह-
चयन सलमनत, ननम् नलिखित सर्दस् यों से लमिकर बनेगी, अथाषत ् :—
(i) उच् च न्द्य ायािय का मुख् य न्द्य ायमूनत,ष जजसकी अधधकाररता में राज् य
न्द्य ायपीि अवजस् थत है, सलमनत का अध् यि होगा ;
(ii) उस राज् य का ज् येष्ट् ितम न्द्य ानयक सर्दस् य और जहां कोई न्द्य ानयक
सर्दस् य उपिब् ध नहीं है, वहां उच् च न्द्य ायािय का कोई सेवाननवजृत् त न्द् यायाधीश,
जजसकी अधधकाररता में राज् य न्द्य ायपीि अवजस् थत है, जजसे उस न्द्य ायािय के
मुख् य न्द्य ायमूनत ष द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ;
(iii) उस राज् य का मुख् य सधचव, जजसकी अधधकाररता में राज् य न्द् यायपीि
अवजस् थत है ;
(iv) उस राज् य, जजसकी अधधकाररता में राज् य न्द्य ायपीि अवजस् थत है, का
एक अपर मुख् य सधचव या प्रधान सधचव या सधचव, जो राज् य कर के प्रशासन
के लिए उत् तरर्दानयत् व ववभाग का भारसाधक नहीं है, जजसे ऐसी राज् य सरकार
द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया जाए ; और
(v) उस राज् य, जजसकी अधधकाररता में राज् य न्द्य ायपीि अवजस् थत है, के
राज् य कर के प्रशासन के लिए उत् तरर्दानयत् व ववभाग का एक अपर मुख् य सधचव
या प्रधान सधचव या सधचव, जजसे ऐसी राज् य सरकार द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककया
जाए ; और
(ि) अन्द्य सभी मामिों के लिए िोज-सह-चयन सलमनत, ननम् नलिखित सर्दस् यों
से लमिकर बनेगी, अथाषत ् :—
(i) भारत का मुख् य न्द्य ायमूनत ष या उसके द्वारा नामननठर्दषष्ट् उच् चतमअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
804
न्द्य ायािय का कोई न्द् यायाधीश, सलमनत का अध्य ि होगा ;
(ii) मंत्रत्रमंर्ि सधचव द्वारा नामननठर्दषष्ट् केंरीय सरकार का सधचव–
सर्दस् य;
(iii) पररर्द् द्वारा नामननठर्दषष्ट् ककए जाने वािा राज् य का मुख्य सधचव–
सर्दस् य;
(iv) एक सर्दस् य, जो,—
(अ) अधधकरण के अध् यि की ननयुजक् त की र्दशा में, अधधकरण का
पर्द छोड़ने वािा अध् यि होगा ; या
(आ) अधधकरण के सर्दस् य की ननयुजक् त की र्दशा में, अधधकरण का
पीिासीन अध् यि ; या
(इ) पुनननयष ुजक् त चाहने वािे अध् यि की र्दशा में या जहां पर्द छोड़ने
वािा अध् यि अनुपिब् ध है या जहां अध् यि के ह ाए जाने पर ववचार
ककया जा रहा है, उच् चतम न्द्य ायािय का सेवाननवत्ृ त न्द्य ायाधीश या
भारत के मुख् य न्द्य ायमूनत ष द्वारा नामननठर्दषष्ट् उच् च न्द्य ायािय का
सेवाननवत्ृ त मुख् य न्द्य ायमूनत ष होगा ; और
(v) केंरीय सरकार के ववत्त मंत्रािय के राजस् व ववभाग का सधचव –
सर्दस् य सधचव ।
(5) अध् यि का ननणाषयक मत होगा और सर्दस् य सधचव का मत नहीं होगा ।
(6) ककसी न्द्यायािय के ककसी ननणयष , आर्देश या डर्क्री या तत्समय प्रवत्तृ
ककसी ववधध में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी सलमनत, यथाजस् थनत, अध् यि
या सर्दस् य के पर्द पर ननयुजक् त या पुनननयष ुजक् त के लिए र्दो नामों के पैनि की
लसफाररश करेगी ।
(7) अपीि अधधकरण के सर्दस् यों की ननयुजक् त या पुनननयष ुजक् त केवि इस
कारण से अववधधमान्द्य नहीं हो जाएगी कक िोज-सह-चयन सलमनत में कोई ररजक् त है
या उसके गिन में कोई त्रुठ है ।
(8) ककसी न्द्यायािय के ककसी ननणयष , आर्देश या डर्क्री या तत्समय प्रवत्तृ
ककसी ववधध में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, अपीि अधधकरण के अध् यि
और सर्दस् यों का वेतन ऐसा होगा, जो ववठहत ककया जाए और उनके भत्ते तथा सेवा
के अन्द्य ननबंधन और शतें ऐसी होंगी, जो केंरीय सरकार के समान वेतनधारी
अधधकाररयों को िागू होती हैं :
परंतु अपीि अधधकरण के अध् यि या सर्दस् यों की ननयुजक् त के पश् चात,् न तो
उनके वेतन और भत् तों में और न ही अन्द्य ननबंधनों और शतों में कोई अिाभकारी
पररवतनष ककया जाएगा :
परंतु यह और कक यठर्द अध् यि या सर्दस् य कोई घर ककराए पर िेता है, उस े
ऐसी सीमाओं और शतों, जो ववठहत की जाए, के अध् यधीन रहते हुए, समान
वेतनधारी पर्दों को धारण करने वािे केंरीय सरकार के अधधकाररयों को अनुज्ञेय
मकान ककराया भत्ते से अधधक मकान ककराए की प्रनतपूनत ष की जा सकेगी ।
(9) ककसी न्द्यायािय के ककसी ननणयष , आर्देश या डर्क्री या तत्समय प्रवत्तृ
ककसी ववधध में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, अपीि अधधकरण का कोई
अध् यि, उस तारीि से, जजसको वह अपना पर्द ग्रहण करता है, चार वर् ष की अवधधअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
805
के लिए या सर्सि वर् ष की आयु प्राप् त होने तक, इनमें से जो भी पहिे हो, पर्द
धारण करेगा और र्दो वर् ष से अनधधक की अवधध के लिए पुनननयष ुजक् त का पात्र
होगा ।
(10) ककसी न्द्यायािय के ककसी ननणयष , आर्देश या डर्क्री या तत्समय प्रवत्तृ
ककसी ववधध में अन्द्तववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, अपीि अधधकरण का कोई
न्द्य ानयक सर्दस्य , तकनीकी सर्दस् य (केंरीय) या तकनीकी सर्दस् य (राज् य), उस तारीि
से, जजसको वह अपना पर्द ग्रहण करता है, चार वर् ष की अवधध के लिए या पसैं ि वर् ष
की आयु प्राप् त होने तक, इनमें स े जो भी पहिे हो, पर्द धारण करेगा और र्दो वर् ष स े
अनधधक की अवधध के लिए पुनननयष ुजक् त का पात्र होगा ।
(11) अध् यि या कोई सर्दस् य, सरकार को संबोधधत करते हुए, लिखित नोठ स
द्वारा, अपने पर्द स े त्यागपत्र र्दे सकेगा :
परंतु अध् यि या सर्दस् य, सरकार द्वारा ऐसे नोठ स की प्राजप् त की तारीि से
तीन मास की अवधध के अवसान तक या उसके उत् तराधधकारी के रूप में सम् यक् रूप
से ननयुक् त व् यजक् त के पर्द धारण करने तक या उसकी पर्दावधध की समाजप् त तक, जो
भी पहिे हो, पर्द पर बना रहेगा ।
(12) सरकार, िोज-सह-चयन सलमनत की लसफाररशों पर, अध् यि या ककसी
सर्दस् य को उसके पर्द से ह ा सकेगी, जो,—
(क) ठर्दवालिया न्द्यायननणीत ककया गया है ; या
(ि) ककसी ऐसे अपराध के लिए र्दोर्लसद्ध िहराया गया है जजसमें नैनतक
अधमता अन्द्तवलषित है ; या
(ग) जो ऐस े अध् यि या सर्दस्य के रूप में काय ष करने में शारीररक रूप स े
या मानलसक रूप से अिम हो गया है ; या
(घ) जजसने ऐसे ववत्तीय या अन्द्य ठहत अजजतष ककए हैं, जजससे उसके ऐस े
अध् यि या सर्दस् य के रूप में कृत्यों पर प्रनतकूि प्रभाव पड़ने की संभावना है;
या
(ङ) उसने अपने पर्द का इस प्रकार र्दरूु पयोग ककया है, जजसके कारण
उसका पर्द पर बने रहना िोकठहत के प्रनतकूि है :
परन्द्तु ककसी अध् यि या सर्दस्य को, िंर् (घ) और िंर् (ङ) में ववननठर्दषष्ट्
ककसी आधार पर तब तक नहीं ह ाया जाएगा, जब तक उसे उसके ववरुद्ध िगाए
गए आरोपों की सूचना नहीं र्दे र्दी गई हो और सुनवाई का अवसर न र्दे ठर्दया गया
हो ।
(13) सरकार, िोज-सह-चयन सलमनत की लसफाररशों पर, अध् यि या ककसी
न्द्य ानयक या तकनीकी सर्दस् य को, जजसके संबंध में उपधारा (12) के अधीन
कायवष ाठहयां आरंभ की गई हैं, उसके पर्द से ननिंत्रबत कर सकेगी ।
(14) संववधान के अनुच् छेर्द 220 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अध् यि या
कोई अन्द्य सर्दस् य, उसके पर्द पर नहीं बने रहने पर, प्रधान न्द्य ायपीि या राज् य
न्द्य ायपीि, जजसमें वह, यथाजस् थनत, अध् यि या कोई सर्दस् य था, के समि उपजस् थत
होने, काय ष करने या अलभवचन करने का पात्र नहीं होगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
806
151. केंरीय माि और सवे ा कर अधधननयम की धारा 114 के स् थान पर, धारा 114 के
ननम् नलिखित धारा रिी जाएगी, अथाषत ् : — स्थान पर नई
धारा का
प्रनतस् थापन ।
“114. अध् यि, अपीि अधधकरण पर ऐसी ववत्त ीय और प्रशासननक शजक् तयों अध् यि की
ववत् तीय और
का प्रयोग करेगा, जो ववठहत की जाए ।”।
प्रशासननक
शजक् तया ं ।
धारा 117 का 152. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 117 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में, “राज् य न्द्य ायपीि या अपीि अधधकरण की िेत्रीय
न्द्य ायपीिों” शब् र्दों के स् थान पर, “अपीि अधधकरण की राज् य न्द् यायपीिों” शब् र्द रिे
जाएंगे ;
(ि) उपधारा (5) के िंर् (क) और िंर् (ि) में, “राज् य न्द्य ायपीि या िेत्रीय
न्द्य ायपीिों” शब् र्दों के स् थान पर, “राज् य न्द्य ायपीिों” शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 118 का 153. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 118 की उपधारा (1) के िंर्
संशोधन ।
(क) में, “राष्ट् रीय न्द्य ायपीि या अपीि अधधकरण की प्रार्देलशक न्द्य ायपीिों” शब् र्दों के स् थान
पर, “अपीि अधधकरण की प्रधान न्द्य ायपीि” शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 119 का 154. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 119 में, —
संशोधन ।
(क) “राष्ट् रीय या प्रार्देलशक न्द्य ायपीिों” शब् र्दों के स् थान पर, “प्रधान न्द् यायपीि”
शब् र्द रिे जाएंगे ;
(ि) “राज् य न्द्य ायपीिों या िेत्रीय न्द्य ायपीिों” शब् र्दों के स् थान पर, “राज् य
न्द्य ायपीिों” शब् र्द रिे जाएंगे ।
धारा 122 का 155. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 122 में, उपधारा (1क) के
संशोधन । पश्चात,् ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :—
“(1ि) कोई इिैक्राननक वाखणज्य प्रचािक, जो—
(i) इस अधधननयम के अधीन जारी अधधसूचना द्वारा रजजस्रीकरण स े
छू प्राप्त व्यजक्त से लभन्द्न, ककसी अरजजस्रीकृत व्यजक्त द्वारा इसके माध्यम
से माि या सेवाओं या र्दोनों की पूनत ष ऐसी पूनत ष करने के लिए अनुज्ञात करता
है ;
(ii) इसके माध्यम स े ककसी ऐसे व्यजक्त द्वारा माि या सेवाओं या र्दोनों
की अंतराषजज्यक पूनत ष अनुज्ञात करता है, जो ऐसी अंतराषजज्यक पूनत ष करने के
लिए पात्र नहीं है ; या
(iii) इस अधधननयम के अधीन रजजस्रीकरण अलभप्राप्त करने से छू
प्राप्त ककसी व्यजक्त द्वारा इसके माध्यम से की गई माि की ककसी जावक
पूनत ष के धारा 52 की उपधारा (4) के अधीन प्रस्तुत ककए जाने वािे वववरण में
सही ब्यौरे प्रस्तुत करने में असफि रहता है,
धारा 10 के अधीन कर संर्दाय करने वािे व्यजक्त से लभन्द्न, यठर्द ऐसी पूनत ष ककसी
रजजस्रीकृत व्यजक्त द्वारा की गई होती, तो र्दस हजार रुपए या अंतवलषित कर की
रकम के समतुल्य रकम, जो भी उच्चतर हो की शाजस्त का संर्दाय करने का र्दायी
होगा ।”।
धारा 132 का 156. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 132 की उपधारा (1) में,—
संशोधन ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
807
(क) िंर् (छ), िंर् (ञ) और िंर् ( ) का िोप ककया जाएगा ;
(ि) िंर् (ि) में, “िंर् (क) से िंर् ( )” शब्र्दों, कोष्ट्िकों और अिरों के स्थान
पर, “िंर् (क) से िंर् (च) और िंर् (ज) से िंर् (झ)” शब्र्द, कोष्ट्िक और अिर रि े
जाएंगे ;
(ग) िंर् (iii) में, “जहां कर अपवंचन” शब्र्दों के स्थान पर, “िंर् (ि) में
ववननठर्दषष्ट् ककसी अपराध की र्दशा में, जहां कर अपवंचन” शब्र्द, कोष्ट्िक और अिर
रिे जाएंगे ;
(घ) िंर् (iv) में, “या िंर् (छ) या िंर् (ञ)” शब्र्दों, कोष्ट्िकों और अिरों का
िोप ककया जाएगा ।
धारा 138 का
157. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 138 में,—
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) के पहिे परंतुक में,—
(i) िंर् (क) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(क) ककसी व्यजक्त, जजसे धारा 132 की उपधारा (1) के िंर् (क)
से िंर् (च), िंर् (ज), िंर् (झ) तथा िंर् (ि) में ववननठर्दषष्ट् अपराधों में
से ककन्द्हीं के संबंध में एक बार शमन के लिए अनुज्ञात ककया गया है;”;
(ii) िंर् (ि) का िोप ककया जाएगा ;
(iii) िंर् (ग) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(ग) कोई व्यजक्त, जो धारा 132 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के
अधीन कोई अपराध करने का अलभयुक्त रहा है ;”;
(iv) िंर् (ङ) का िोप ककया जाएगा ;
(ि) उपधारा (2) में “न्द्यूनतम र्दस हजार रुपए या अंतवलषित कर के पचास
प्रनतशत से, इनमें स े जो भी उच्चतर हों, के अधीन रहते हुए और अधधकतम रकम
तीस हजार रुपए या कर के एक सौ पचास प्रनतशत, इनमें स े जो भी उच्चतर हो,”
शब्र्दों के स्थान पर “अंतवलषित कर के पच्चीस प्रनतशत और अधधकतम रकम
अंतवलषित कर के सौ प्रनतशत से अनधधक” शब्र्द रिे जाएंगे ।
158. केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 158 के पश्चात,् ननम्नलिखित नई धारा
धारा अंतःस्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— 158क का
अंतःस्थापन ।
“158क. (1) धारा 133, धारा 152 और धारा 158 में अंतववष्ट्ष ककसी बात के कराधेय
व्यजक्त द्वारा
होते हुए भी, ककसी रजजस्रीकृत व्यजक्त द्वारा प्रस्तुत ननम्नलिखित ब्यौरों को,
प्रस्तुत की गई
उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, केंरीय सरकार द्वारा, पररर्द् की
सूचना को
लसफाररशों पर, ऐसी रीनत में और ऐसी शतों के अधीन रहते हुए, जो ववठहत की जाए,ं सम्मनत के
ऐसी अन्द्य प्रणालियों के साथ, अधधसूधचत सामान्द्य पो षि द्वारा साझा ककया जा आधार पर
सकेगा, अथाषत:्— साझा करना ।
(क) धारा 25 के अधीन रजजस्रीकरण के लिए आवेर्दन में प्रस्तुत
ववलशजष्ट् यां या धारा 39 या धारा 44 के अधीन फाइि की गई वववरणी में
प्रस्तुत ककए गए ब्यौरे ;
(ि) बीजक तैयार करने के लिए सामान्द्य पो षि पर अपिोर् की गई
ववलशजष्ट् यां, धारा 37 के अधीन प्रस्तुत जावक पूनतयष ों के ब्यौरे और धारा 68
के अधीन र्दस्तावेजों के सजृ न के लिए सामान्द्य पो षि पर अपिोर् की गईअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
808
ववलशजष्ट् यां ;
(ग) ऐसे अन्द्य ब्यौरे, जो ववठहत ककए जाएं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन ब्यौरों को साझा करने के प्रयोजनों के लिए,—
(क) उपधारा (1) के िंर् (क), िंर् (ि) और िंर् (ग) के अधीन प्रस्तुत
ब्यौरों के संबंध में प्रर्दायकताष की सहमनत ; और
(ि) उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन और उपधारा (1) के िंर् (ग) के
अधीन प्रस्तुत ब्यौरों के संबंध में प्राजप्तकताष की सहमनत, केवि जहां ऐसे
ब्यौरों के अंतगतष प्राजप्तकताष की पहचान संबंधी जानकारी भी सजम्मलित है,
ऐसे प्ररूप और रीनत में अलभप्राप्त की जाएगी, जो ववठहत की जाए ।
(3) तत्समय प्रवत्तृ ककसी ववधध में अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, इस
धारा के अधीन साझा की गई जानकारी के पाररणालमक उद्भूत होने वािे ककसी
र्दानयत्व के संबंध में सरकार या सामान्द्य पो षि के ववरुद्ध कोई कारषवाई नहीं की
जाएगी तथा सुसंगत पूनत ष पर या सुसंगत वववरणी के अनुसार कर संर्दाय करने के
र्दानयत्व पर कोई प्रभाव नहीं होगा ।”।
केंरीय माि और 159. (1) केंरीय माि और सेवा कर अधधननयम की अनुसूची 3 के पैरा 7 और
सेवा कर
पैरा 8 तथा उसके स्पष्ट् ीकरण 2 (2018 का अधधननयम सं. 31) की धारा 32 द्वारा यथा
अधधननयम की
अंत:स्थावपत) को 1 जुिाई, 2017 से प्रभावी रूप से उसमें अंत:स्थावपत ककया गया समझा
अनुसूची 3 में
कनतपय जाएगा ।
कक्रयाकिापों और
(2) ऐसे सभी कर का कोई प्रनतर्दाय नहीं ककया जाएगा, जजसे संग्रठहत ककया गया है
संव्यवहारों के
ककंतु जजसे संग्रठहत नहीं ककया गया होता यठर्द उपधारा (1) सभी ताजववक समयों पर प्रवत्तृ
लिए भतू ििी
छू । हुई होती ।
एकीकृत माि और सेवा कर
धारा 2 का 160. एकीकृत माि और सवे ा कर अधधननयम, 2017 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् 2017 का 13
संशोधन । एकीकृत माि और सेवा कर अधधननयम कहा गया है) की धारा 2 में,—
(क) िंर् (16) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर् रिा जाएगा, अथाषत ् :—
‘(16) “गैर-कराधये ऑनिाइन प्राजप्तकताष” से ऐसा कोई अरजजस्रीकृत
व्यजक्त अलभप्रेत है, जो कराधये राज्यिेत्र में अवजस्थत ऑनिाइन सूचना और
र्ा ाबेस पहुंच या पुनःप्राप्य सेवाओं को प्राप्त करता है ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “अरजजस्रीकृत व्यजक्त” पर्द
के अंतगतष ऐसा कोई व्यजक्त भी सजम्मलित है, जो केंरीय माि और सेवा कर
अधधननयम, 2017 की धारा 24 के िंर् (vi) के ननबंधनानुसार एकमात्र रूप स े 2017 का 12
रजजस्रीकृत है ।’;
(ि) िंर् (17) में, “आवश्यक रूप से स्वचालित कर र्देती है और जजसमें
न्द्यूनतम मानव मध्यिेप है और जजसे” शब्र्दों का िोप ककया जाएगा ।
धारा 12 का 161. एकीकृत माि और सवे ा कर अधधननयम की धारा 12 की उपधारा (8) के
संशोधन ।
परंतुक का िोप ककया जाएगा ।
धारा 13 का 162. एकीकृत माि और सेवा कर अधधननयम की धारा 13 में, उपधारा (9) का िोपअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
809
संशोधन । ककया जाएगा ।
माि और सेवा कर (राज् यों को प्रनतकर) अधिनियम
अनुसूची का 163. माि और सेवा कर अधधननयम (राज् यों को प्रनतकर) अधधननयम, 2017 की 2017 का 15
संशोधन । अनुसूची में,—
(क) क्रम सं0 1 में, ैररफ मर्द 2106 90 20 के सामने आने वािे स् तंभ (4)
में की प्रववजष्ट् के स् थान पर, “प्रनत इकाई िुर्दरा ववक्रय मूल् य का इक् यावन प्रनतशत”
प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ि) क्रम सं0 2 में, अध् याय 24 के सामने आने वािे स् तंभ (4) में की प्रववजष्ट्
के स् थान पर, “चार हजार एक सौ सत् तर रुपए प्रनत हजार यजष्ट् या मूल् यानुसार
र्दो सौ नब् बे प्रनतशत या उसका समुच् चय, ककन्द्तु मूल् यानुसार चार हजार एक सौ
सत् तर रुपए प्रनत हजार यजष्ट् जमा र्दो सौ नब् बे प्रनतशत या प्रनत इकाई िुर्दरा
ववक्रय कीमत के सौ प्रनतशत से अधधक नहीं” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ग) अंत में ननम् नलिखित स् पष्ट् ीकरण अंत:स् थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘स् पष्ट् टीकरर्—इस अनुसूची के प्रयोजनों के लिए,—
(i) “िुर्दरा ववक्रय कीमत” से वह अधधकतम ववक्रय कीमत अलभप्रेत
है, जजस पर पैक की गई अवस् था में संबद्ं ध माि को अंनतम उपभोक् ता
को ववक्रय ककया जा सके और उसमें सभी कर, स् थानीय या अन्द्य था,
भाड़ा, पररवहन प्रभार, व् यौहाररयों को संर्देय कमीशन, और ववज्ञापन,
पररर्दान, पैक करने, अग्रेवर्त करने के लिए और ऐस े समान सभी प्रभार
सजम् मलित हैं तथा ऐसे ववक्रय के लिए कीमत एकमात्र प्रनतफि है :
परंतु जहां ववधधक मापववज्ञान अधधननयम, 2009 के उपबंधों या
उसके अधीन बनाए गए ननयमों या तत् समय प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध के
अधीन, पैकेज के ऊपर ककन्द् हीं करों, स् थानीय या अन्द् यथा के लसवाय,
िुर्दरा ववक्रय कीमत घोवर्त करना अपेक्षित हो, वहां िुर्दरा ववक्रय कीमत
का तर्दनुसार अथ ष िगाया जाएगा ;
(ii) जहां ककसी संबद्ध माि के पैकेज पर एक स े अधधक िुर्दरा
ववक्रय कीमत घोवर्त की जाती है, वहां ऐसी िुर्दरा ववक्रय कीमतों के
अधधकतम को, िुर्दरा ववक्रय कीमत समझा जाएगा ;
(iii) जहां ककसी संबद्ध माि के पैकेज पर ववननमाषण स् थि से
उसकी ननकासी के समय घोवर्त िुर्दरा ववक्रय कीमत को िुर्दरा ववक्रय
कीमत बढाने के लिए पररवनततष ककया जाता है, वहां ऐसी पररवनततष
िुर्दरा ववक्रय कीमत को, िुर्दरा ववक्रय कीमत समझा जाएगा ;
(iv) जहां ववलभन्द्न िेत्रों में पैक की गई अवस् था में ककसी संबद्ध
माि के ववक्रय के लिए लभन्द्न -लभन्द् न पैकेजों पर लभन्द्न -लभन्द्न िुर्दरा
ववक्रय कीमत घोवर्त की जाती है, वहां प्रत् येक ऐसी िुर्दरा ववक्रय कीमत,
उस िेत्र, जजसस े िुर्दरा ववक्रय कीमत संबद्ध है, में ववक्रय ककए जाने के
लिए आशनयत उक् त माि के लिए उपकर की र्दर के अवधारण के
प्रयोजनों के लिए िुर्दरा ववक्रय कीमत समझी जाएगी ।’।
अध्याय 5
प्रकीर् िअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
810
भाग 1
सरकारी बित संवद्ििि अधिनियम, 1873 का सिं ोिि
164. इस भाग के उपबंध ऐसी तारीि को प्रवत्तृ होंगे, जो केंरीय सरकार, राजपत्र में इस भाग का
प्रारंभ ।
अधधसूचना द्वारा, ननयत करे ।
165. सरकारी बचत संवद्षधन अधधननयम, 1873 में,— 1873 के
अधधननयम सं0
(क) धारा 4क में, उपधारा (4) के स्थान पर, ननम्नलिखित उपधारा रिी
5 का संशोधन ।
जाएगी, अथाषत ् :—
“(4) यठर्द ककसी जमाकता ष की मत्ृ यु हो जाती है और उसकी मत्ृ यु के
समय कोई नामननर्देशन प्रवत्तृ नहीं है तथा उसकी ववि का प्रोबे या संपर्दा का
प्रशासन पत्र या भारतीय उत्तराधधकार अधधननयम, 1925 के अधीन अनुर्दत्त 1925 का 39
उत्तराधधकार-प्रमाणपत्र या अधधकाररता रिन े वािे तहसीिर्दार स े अन्द्यून रैंक के
राजस्व प्राधधकारी द्वारा जारी ककया गया ववधधक उत्तराधधकारी प्रमाणपत्र,
प्राधधकृत अधधकारी को जमाकताष की मत्ृ यु होने की तारीि से छह मास के
भीतर प्रस्तुत नहीं ककया जाता है, तो जहां पात्र अनतशेर् ऐसी सीमा से, जो
ववठहत की जाए, अधधक नही है, तो प्राधधकृत अधधकारी ऐसे कारणों से, जो
अलभलिखित ककए जाएं, पात्र अनतशेर् का ऐसे ककसी व्यजक्त को ऐसी प्रकक्रया
और रीनत के अनुसार, जो ववठहत की जाए, संर्दाय कर सकेगा, जो उसको प्राप्त
करने के लिए या मतृ क की संपर्दा का प्रशासन करने के लिए ववधधक रूप से
हकर्दार हो ।”;
(ि) धारा 15 की उपधारा (2) में, िंर् (झ) के स्थान पर, ननम्नलिखित िंर्
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“(i) धारा 4क की उपधारा (4) के अधीन सीमा, प्रकक्रया और रीनत ;”;
(ग) अनुसूची के भाग क में, क्रम संख्यांक 7 और 8 तथा उनसे संबंधधत
प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“7. िोक भववष्ट्य ननधध स्कीम
8. राष्ट्रीय बचत पत्र (आिवां इश्यू) स्कीम, 2019
9. ककसान ववकास पत्र स्कीम, 2019
10. बािकों के लिए पीएम केयस ष स्कीम, 2021”।
भाग 2
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 का संिोिि
1899 के 166. भारतीय स् ाम्प अधधननयम, 1899 की अनुसूची 1 के अनुच्छेर्द 47 के प्रभाग
अधधननयम स0ं
घ में, “छू ” शीर् ष के अधीन “र्ाक ववभाग महाननर्देशािय” से प्रारंभ होने वाि े और “बीमा
2 का संशोधन ।
के ननयमों के अनुसार ननगलमत की गई है ।” पर समाप्त होने वािे भाग के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“जीवन बीमा पालिलसयां—
(क) केंरीय सरकार के प्राधधकार के अधीन र्ाकघर महाननर्देशक द्वारा
जारी र्ाक जीवन बीमा ननयमों के अनुसार अनुर्दत्त ; और
(ि) प्रधानमंत्री जीवन ज्योनत बीमा योजना (पीएमजजे ेबीवाई) के
अधीन ।”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
811
भाग 3
प्रनतभूनत संर्वदा (र्वनियमि) अधिनियम, 1956 का संिोिि
1956 के 167. प्रनतभूनत संववर्दा (ववननयमन) अधधननयम, 1956 की धारा 18क के िंर् (ि)
अधधननयम स0ं के पश्चात,् ननम्नलिखित िंर् अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
42 का संशोधन ।
‘(िक) अंतराषष्ट्रीय़ ववत्तीय सेवा केंर में, अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर प्राधधकरण 2019 का 50
अधधननयम, 2019 की धारा 4 के अधीन स्थावपत अंतराषष्ट्रीय ववत्तीय सेवा केंर
प्राधधकरण द्वारा ववननयलमत और ववर्देशी पो षफोलियो ववननधानकताष द्वारा जारी ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस िंर् के प्रयोजनों के लिए, “ववर्देशी पो षफोलियो ववननधानकताष”
1999 का 42 पर्द का वही अथ ष होगा, जो इसका ववर्देशी मुरा प्रबंध अधधननयम, 1999 की धारा 46
के अधीन बनाए गए ववर्देशी मुरा प्रबंध (गैर-ऋण लिित) ननयम, 2019 के ननयम 2
के िंर् (प) में है ;’।
भाग 4
केंद्रीय र्विय कर अधिनियम, 1956 का संिोिि
1956 का 74 168. केंरीय ववक्रय कर अधधननयम, 1956 (जजसे इसमें इसके पश्चात ् केंरीय ववक्रय धारा 19 के
स्थान पर नई
कर अधधननयम कहा गया है) की धारा 19 के स्थान पर, ननम्नलिखित धारा रिी जाएगी,
धारा का
अथाषत ् :— प्रनतस्थापन ।
‘‘19. इस अधधननयम या तत्समय प्रवत्तृ ककसी अन्द्य ववधध में प्रनतकूि इस अधधननयम
के अधीन
1962 का 52 अंतववष्ट्ष ककसी बात के होते हुए भी, सीमाशुल्क अधधननयम, 1962 की धारा 129
सीमाशुल्क,
के अधीन गठित सीमाशुल्क, उत्पार्द-शुल्क और सेवा कर अपीि अधधकरण इस उत्पार्द-शुल्क
और सेवा कर
अधधननयम के अधीन धारा 6क और धारा 9 के अधीन आने वािे अंतरराज्यीय
अपीि अधधकरण
वववार्दों का ननप ारा करने के लिए प्राधधकरण होगा ।’’।
के प्राधधकारी के
रूप में काय ष
करना ।
169. केंरीय ववक्रय कर अधधननयम की धारा 24 का िोप ककया जाएगा । धारा 24 का
िोप ।
170. केंरीय ववक्रय कर अधधननयम की धारा 25 में, उपधारा (2) के पश्चात,् धारा 25 का
ननम्नलिखित उपधारा अंत:स्थावपत की जाएगी, अथाषत ् :— संशोधन ।
‘‘(3) धारा 20 के अधीन फाइि की गई तथा तत्कािीन अधग्रम ववननणयष
प्राधधकारी के समि उस तारीि को िंत्रबत सभी अपीिें, जजसको ववत्त
ववधेयक, 2023 को राष्ट्रपनत की अनुमनत प्राप्त होती है, धारा 19 में ननठर्दषष्ट्
प्राधधकरण को अंतररत हो जाएंगी ।’’।
भाग 5
बेिामी संपर्ि संव्यवहार प्रनतषेि अधिनियम, 1988 का संिोिि
171. बेनामी संपवत्त संव्यवहार प्रनतर्ेध अधधननयम, 1988 में, 1 अप्रैि, 2023 से,— 1988 के
अधधननयम
(क) धारा 2 के िंर् (18) में,—
सं0 45 का
(I) उपिंर् (i) के अंत में आने वािे “और” शब्र्द का िोप ककया जाएगा; संशोधन ।
(II) उपिंर् (ii) के अंत में, “और” शब्र्द अंत:स्थावपत ककया जाएगा ;
(III) उपिंर् (ii) के पश्चात,् ननम्नलिखित उपिंर् अंत:स्थावपत ककया
जाएगा, अथाषत ् :—
“(iii) वह उच्च न्द्यायािय, जजसकी अधधकाररता के भीतर प्रारंभकअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
812
अधधकारी का कायाषिय अवजस्थत है,—
(क) जहां व्यधथत पिकार ककसी उच्च न्द्यायािय की
अधधकाररता के भीतर मामूिी तौर से ननवास नहीं करता है या
कारबार नहीं करता है या अलभिाभ के लिए व्यजक्तगत रूप स े
काय ष नहीं करता है ;
(ि) जहां सरकार एक व्यधथत पिकार है और प्रत्यधथषयों में
से कोई भी प्रत्यथी ककसी उच्च न्द्यायािय की अधधकाररता के
भीतर मामूिी तौर से ननवास नहीं करता है या कारबार नही ं करता
है या अलभिाभ के लिए व्यजक्तगत रूप से काय ष नहीं करता है ;”;
(ि) धारा 46 में,—
(i) उपधारा (1) में, “उस आर्देश की तारीि से” शब्र्दों के स्थान पर, “उस
तारीि से, जजसको ऐसा आर्देश प्रारंभक अधधकारी या ऐस े व्यजक्त द्वारा प्राप्त
ककया जाता है” शब्र्द रिे जाएगं े ;
(ii) उपधारा (1क) में, “उस आर्देश की तारीि से” शब्र्दों के स्थान पर,
“उस तारीि से, जजसको ऐसा आर्देश ऐसे व्यजक्त द्वारा प्राप्त ककया जाता है,”
शब्र्द रिे जाएंगे ।
भाग 6
र्वि अधिनियम, 2001 का संिोिि
2001 के 172. ववत्त अधधननयम, 2001 की सातवी ं अनुसूची का, छिी अनुसूची में ववननठर्दषष्ट्
अधधननयम स0ं
रीनत में संशोधन ककया जाएगा ।
14 की सातवी ं
अनुसूची का
संशोधन ।
भाग 7
भारतीय यूनिट रस्ट (उपिम का अंतरर् और निरसि) अधिनियम, 2002
का संिोिि
2002 के अधधननयम 173. भारतीय यूनन रस् (उपक्रम का अंतरण और ननरसन) अधधननयम, 2002 में,
संख्यांक सं0 58 का
1 अप्रैि, 2023 से,—
संशोधन ।
(क) धारा 8 की उपधारा (1) में, “ववननधानकताषओं को संपूण ष रकम का सर्दं ाय
हो जाने पर” शब्र्दों के स्थान पर, “ववननधानकताषओं को संपूण ष रकम का संर्दाय हो
जाने पर या ऐसी तारीि से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधधसूधचत की
जाए, इनमें से जो भी पूवतष र हों” शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) धारा 13 की उपधारा (1) में, “31 माच,ष 2023” अंकों और शब्र्द के स्थान
पर, “31 माच,ष 2025” अंक और शब्र्द रिे जाएंगे ।
भाग 8
र्वि (सं. 2) अधिनियम, 2004 का संिोिि
धारा 98 का 174. ववत्त (संख्यांक 2) अधधननयम, 2004 की धारा 98 की सारणी की क्रम सं. 4 2004 का 23
संशोधन । के स्तंभ (2) में—
(i) प्रववजष्ट् (क) के सामने, स्तंभ (3) में, “प्रववजष्ट् ” के स्थान पर, “0.021
प्रनतशत” अंक और शब्र्द रिे जाएंगे ; औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
813
(ii) प्रववजष्ट् (ग) के सामने, स्तंभ (3) में, “प्रववजष्ट् ” के स्थान पर, “0.0125
प्रनतशत”अंक और शब्र्द रिे जाएंगे ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
814
पहिी अनुसूची
(िारा 2 देखखए)
भाग 1
आय-कर
पैरा क
(I) इस पैरा की मर्द (II) और मर्द (III) में ननठर्दषष्ट् व्यजष्ट् से लभन्द्न प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू
अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं, या आय-कर
अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जो ऐसी र्दशा नहीं है, जजसमें इस भाग का कोई अन्द्य पैरा िागू होता है,—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 2,50,000 रुपए से कुछ नहीं ;
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 2,50,000 रुपए से उस रकम का 5 प्रनतशत, जजससे कुि आय
अधधक है ककंत ु 5,00,000 रुपए से अधधक 2,50,000 रुपए स े अधधक हो जाती है ;
नहीं है
(3) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से 12,500 रुपए धन उस रकम का 20 प्रनतशत,
अधधक है ककंतु 10,00,000 रुपए से अधधक जजससे कुि आय 5,00,000 रुपए से अधधक हो
नहीं है जाती है ;
(4) जहां कुि आय 10,00,000 रुपए से 1,12,500 रुपए धन उस रकम का 30 प्रनतशत,
अधधक है जजससे कुि आय 10,00,000 रुपए से अधधक
हो जाती है ।
(II) प्रत्येक ऐसे व्यजष्ट् की र्दशा में, जो भारत में ननवासी है और जो पूववष र् ष के र्दौरान ककसी समय
साि वर् ष या अधधक, ककंतु अस्सी वर् ष स े कम आय ु का है—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 3,00,000 रुपए से कुछ नहीं ;
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 3,00,000 रुपए से उस रकम का 5 प्रनतशत, जजससे कुि आय
अधधक है ककंत ु 5,00,000 रुपए से अधधक नहीं 3,00,000 रुपए स े अधधक हो जाती है ;
है
(3) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से 10,000 रुपए धन उस रकम का 20 प्रनतशत,
अधधक है ककंत ु 10,00,000 रुपए से अधधक नहीं जजससे कुि आय 5,00,000 रुपए से अधधक हो
है जाती है ;
(4) जहां कुि आय 10,00,000 रुपए से 1,10,000 रुपए धन उस रकम का 30 प्रनतशत,
अधधक है जजससे कुि आय 10,00,000 रुपए से अधधक
हो जाती है ।
(III) प्रत्येक ऐसे व्यजष्ट् की र्दशा में, जो भारत में ननवासी है और जो पूववष र् ष के र्दौरान ककसीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
815
समय अस्सी वर् ष या अधधक आयु का है—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से कुछ नहीं ;
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से उस रकम का 20 प्रनतशत, जजससे कुि आय
अधधक है ककंतु 10,00,000 रुपए से अधधक 5,00,000 रुपए स े अधधक हो जाती है ;
नहीं है
(3) जहां कुि आय 10,00,000 रुपए से 1,00,000 रुपए िि उस रकम का 30 प्रनतशत,
अधधक है । जजससे कुि आय 10,00,000 रुपए से अधधक
हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पवू वष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों या धारा 115िकग के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में,
ऐसे प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह
ननगलमत हो या नहीं या आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट्
प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय (जजसमें आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और
धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या िाभांश के रूप में आय सजम्मलित है) पचास िाि
रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के र्दस प्रनतशत की
र्दर से ;
(ि) जजसकी कुि आय (जजसमें आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और
धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या िाभांश के रूप में आय सजम्मलित है) एक करोड़
रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के पन्द्रह प्रनतशत
की र्दर से ;
(ग) जजसकी कुि आय (जजसमें आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और
धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या िाभांश के रूप में आय सजम्मलित नहीं है)
र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के
पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ;
(घ) जजसकी कुि आय (जजसमें आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और
धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या िाभांश के रूप में आय सजम्मलित नहीं है)
पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के पतैं ीस प्रनतशत की र्दर से ; और
(ङ) जजसकी कुि आय (जजसमें आय-कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और
धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय या िाभांश के रूप में आय सजम्मलित है) र्दो करोड़
रुपए से अधधक है, ककंतु वह िंर् (ग) और िंर् (घ) के अंतगतष नहीं आती है, ऐसे आय-कर
के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से,
संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु उस र्दशा में, जहां कुि आय में िाभांश के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन आय सजम्मलित है, वहां आय के
उस भाग के संबंध में संगखणत आय-कर की रकम पर अधधभार की र्दर पन्द्रह प्रनतशत से अधधकअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
816
नहीं होगी :
परंतु यह और कक व्यजक्तयों के संगम की र्दशा में, जो केवि कंपननयों से उसके सर्दस्यों के
रूप में लमिकर बनी है, आय-कर की रकम पर अधधभार की र्दर पन्द्रह प्रनतशत से अधधक नहीं
होगी:
परन्द्तु यह भी कक ऊपर उजल्िखित व्यजक्तयों की र्दशा में,—
(क) जजनकी कुि आय पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से अधधक
नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, पचास िाि रुपए
की कुि आय पर, आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम स े अधधक नहीं होगी, जो आय
की उस रकम के पचास िाि रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ;
(ि) जजनकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से अधधक
नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़ रुपए की
कुि आय पर, आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम स े अधधक नहीं होगी, जो आय की
उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ;
(ग) जजनकी कुि आय र्दो करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए से अधधक
नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में सर्दं ेय कुि रकम, र्दो करोड़ रुपए की
कुि आय पर, आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम स े अधधक नहीं होगी, जो आय की
उस रकम के र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ; और
(घ) जजनकी कुि आय पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और
अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, पांच करोड़ रुपए की कुि आय पर, आय-कर के रूप में
संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पांच करोड़ रुपए स े
अधधक है, आधधक्य में है ।
पैरा ख
प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में,—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 10,000 रुपए से अधधक कुि आय का 10 प्रनतशत ;
नहीं है
(2) जहां कुि आय 10,000 रुपए से अधधक है 1,000 रुपए िि उस रकम का 20 प्रनतशत
ककंत ु 20,000 रुपए से अधधक नहीं है जजससे कुि आय 10,000 रुपए से अधधक हो
जाती है ;
(3) जहां कुि आय 20,000 रुपए से अधधक है 3,000 रुपए िि उस रकम का 30 प्रनतशत
जजससे कुि आय 20,000 रुपए से अधधक हो
जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूववष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी
की र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दस करोड़ रुपए से अधधकअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
817
नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रनतशत की र्दर से;
(ि) जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रनतशत की
र्दर से;
संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है,
ककंतु र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि
रकम, एक करोड़ रुपए की कुि रकम पर, आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं
होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है :
परंतु यह और कक प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए से
अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, उस आय की रकम,
जो एक करोड़ रुपए से अधधक है से अधधक एक करोड़ रुपए की रकम पर, आय-कर के रूप में
संर्देय कुि रकम से अधधक नहीं होगी ।
पैरा ग
प्रत्येक फम ष की र्दशा में,—
आय-कर की दर
संपूण ष कुि आय पर 30 प्रनतशत ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पवू वष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक फम ष की र्दशा में,
जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐस े आय-कर के बारह प्रनतशत की र्दर स े
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु ऊपर उजल्िखित प्रत्येक फम ष की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक
है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, उस आय की रकम, जो एक
करोड़ रुपए से अधधक है से अधधक एक करोड़ रुपए की रकम पर, आय-कर के रूप में संर्देय कुि
रकम से अधधक नहीं होगी ।
पैरा र्
प्रत्येक स्थानीय प्राधधकारी की र्दशा में,—
आय-कर की दर
संपूण ष कुि आय पर 30 प्रनतशत ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पवू वष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, ऐस े प्रत्येक स्थानीय प्राधधकारी
की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रनतशत की र्दर
स े संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु ऊपर उजल्िखित प्रत्येक स्थानीय प्राधधकारी की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़
रुपए से अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़
रुपए की कुि रकम पर, आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आयअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
818
की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ।
पैरा ङ
ककसी कंपनी की र्दशा में,—
आय-कर की दरें
I. र्देशी कंपनी की र्दशा में,—
(i) जहां पूववष र् ष 2020-2021 में इसका कुि आवत ष या कुि प्राजप्तया ं कुि आय का 25
चार अरब रुपए से अधधक न हो प्रनतशत ;
(ii) मर्द (i) में ननठर्दषष्ट् के लसवाय कुि आय का 30
प्रनतशत ।
II. र्देशी कंपनी स े लभन्द्न कंपनी की र्दशा में,—
(i) कुि आय के उतने भाग पर, जो ननम्नलिखित के रूप में है,—
(क) 31 माच,ष 1961 के पश्चात,् ककंत ु 1 अप्रैि, 1976 के
पूव ष उसके द्वारा सरकार या ककसी भारतीय समुत्थान के साथ ककए
गए ककसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान
से प्राप्त स्वालमस्व ; या
(ि) 29 फरवरी, 1964 के पश्चात,् ककंत ु 1 अप्रैि, 1976 के
पूव ष उसके द्वारा सरकार या ककसी भारतीय समुत्थान के साथ ककए
गए ककसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान
से तकनीकी सेवाएं र्देने के लिए प्राप्त फीसें,
और जहां, र्दोनों में से ककसी भी र्दशा में, ऐसा करार केंरीय सरकार द्वारा
अनुमोठर्दत कर ठर्दया गया है 50 प्रनतशत ;
(ii) कुि आय के अनतशेर् पर, यठर्द कोई हो 40 प्रनतशत ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पवू वष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में ननम्नलिखित र्दर से,—
(i) प्रत्येक र्देशी कंपनी की र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए स े
अनधधक है, ऐसे आय-कर के सात प्रनतशत की र्दर से ; और
(ि) जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसे आय-कर के
बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) र्देशी कंपनी से लभन्द्न प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंत ु र्दस करोड़ रुपए स े
अनधधक है, ऐसे आय-कर के र्दो प्रनतशत की र्दर स े ; और
(ि) जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसे आय-कर के
पांच प्रनतशत की र्दर से,
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु प्रत्येक ऐसी कंपनी की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतुअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
819
र्दस करोड़ रुपए से अनधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम,
एक करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में सर्दं ेय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी,
जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है :
परन्द्तु यह और कक प्रत्येक ऐसी कंपनी की र्दशा में, जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए स े
अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, र्दस करोड़ रुपए की
कुि आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय उस रकम से, उस कुि रकम से अधधक नहीं
होगी, जो आय की उस रकम के र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ।
भाग 2
कनतपय दिाओं में स्रोत पर कर की कटौती की दरें
ऐसी प्रत्येक र्दशा में, जजसमें आय-कर अधधननयम की धारा 193, धारा 194क, धारा 194ि,
धारा 194िक, धारा 194िि, धारा 194घ, धारा 194ििक, धारा 194ििि, धारा 194ििग और
धारा 195 के उपबंधों के अधीन कर की क ौती प्रवत्तृ र्दरों से की जानी है, आय में से क ौती
ननम्नलिखित र्दरों पर क ौती के अधीन रहत े हुए की जाएगी:—
आय-कर की र्दर
1. कंपनी से लभन्द्न व्यजक्त की र्दशा में,—
(क) जहां व्यजक्त भारत में ननवासी है,—
(i) “प्रनतभूनतयों पर ब्याज” से लभन्द्न ब्याज के रूप में आय 10 प्रनतशत ;
पर
(ii) िा री, वग ष पहेिी, ताश के िेि और ककसी प्रकार के
अन्द्य िेि से जीत (आनिाइन िेि से जीत से लभन्द्न) के रूप में 30 प्रनतशत ;
आय पर
(iii) घुड़र्दौड़ से जीत के रूप में आय पर 30 प्रनतशत ;
(iv) आनिाइन िेिों से जीत के रूप में आय 30 प्रनतशत ;
(v) बीमा कमीशन के रूप में आय पर 5 प्रनतशत ;
(vi) ननम्नलिखित पर संर्देय ब्याज के रूप में आय पर— 10 प्रनतशत ;
(अ) ककसी केंरीय, राज्य या प्रांतीय अधधननयम द्वारा
स्थावपत ककसी स्थानीय प्राधधकरण या ननगम द्वारा या उसकी
ओर से धन के लिए पुरोधतृ ककए गए कोई डर्बेंचर या
प्रनतभूनतयां ;
(आ) ककसी कंपनी द्वारा पुरोधतृ ककए गए कोई डर्बेंचर,
जहां ऐसे डर्बेंचर, भारत में मान्द्यताप्राप्त ककसी स् ाक
एक्सचेंज में प्रनतभूनत संववर्दा (ववननयमन) अधधननयम, 1956
(1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए ककन्द्हीं ननयमों
के अनुसार सूचीबद्ध हैं ;
(इ) केंरीय या राज्य सरकार की कोई प्रनतभूनत ;
(vii) ककसी अन्द्य आय पर 10 प्रनतशत ;
(ि) जहां व्यजक्त भारत में ननवासी नहीं है,—
(i) ककसी अननवासी भारतीय की र्दशा में,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
820
(अ) ववननधान से ककसी आय पर 20 प्रनतशत ;
(आ) धारा 115ङ या धारा 112 की उपधारा (1) के 10 प्रनतशत ;
िंर् (ग) के उपिंर् (iii) में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी
अलभिाभों के रूप में आय पर
(इ) धारा 112क में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों 10 प्रनतशत ;
के रूप में एक िाि रुपए से अधधक आय पर
(ई) र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों [जो धारा 10 के 20 प्रनतशत ;
िंर् (33) और िंर् (36) में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी
अलभिाभ नहीं हैं] के रूप में अन्द्य आय पर
(उ) धारा 111क में ननठर्दषष्ट् अल्पकालिक पूंजी 15 प्रनतशत ;
अलभिाभों के रूप में आय पर
(ऊ) सरकार या ककसी भारतीय समुत्थान द्वारा ववर्देशी 20 प्रनतशत ;
करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या
ककसी भारतीय समुत्थान द्वारा संर्देय ब्याज के रूप में आय
पर (जो धारा 194िि या धारा 194िग में ननठर्दषष्ट् ब्याज के
रूप में आय नहीं है)
(ऋ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ 20 प्रनतशत ;
ककए गए ककसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या
भारतीय समुत्थान द्वारा संर्देय स्वालमस्व के रूप में आय पर,
जहां ऐसा स्वालमस्व, भारतीय समुत्थान को आय-कर
अधधननयम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहिे
परन्द्तुक में ननठर्दषष्ट् ककसी ववर्य की ककसी पुस्तक में
प्रनतलिप्यधधकार के संबंध में अथवा भारत में ननवासी ककसी
व्यजक्त को आय-कर अधधननयम की धारा 115क की
उपधारा (1क) के र्दसू रे परन्द्तुक में ननठर्दषष्ट् ककसी कम्प्यू र
साफ् वेयर के संबंध में सभी या ककन्द्हीं अधधकारों के (जजनके
अंतगतष अनुज्ञजप्त र्देना है) अंतरण के प्रनतफि के रूप में है
(ए) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ 20 प्रनतशत ;
ककए गए ककसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार
ककसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंरीय
सरकार द्वारा अनुमोठर्दत कर ठर्दया गया है या जहां वह भारत
सरकार की तत्समय प्रवत्तृ औद्योधगक नीनत में सजम्मलित
ककसी ववर्य से संबंधधत है, वहां वह करार उस नीनत के
अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संर्देय
स्वालमस्व के रूप में [जो उपमर्द (ि)(i)(ऋ) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत
का स्वालमस्व नहीं है], आय पर
(ऐ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ 20 प्रनतशत
ककए गए ककसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार
ककसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंरीय
सरकार द्वारा अनुमोठर्दत कर ठर्दया गया है या जहां वह भारतअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
821
सरकार की तत्समय प्रवत्तृ औद्योधगक नीनत में सजम्मलित
ककसी ववर्य से संबंधधत है, वहां वह करार उस नीनत के
अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी
सेवाओं के लिए संर्देय फीस के रूप में आय पर
(ओ) िा री, वग ष पहेिी, ताश के िेि और ककसी प्रकार 30 प्रनतशत ;
के िेिों से जीत (आनिाइन िेिों से जीत से लभन्द्न) के रूप
में आय पर
(औ) घुड़र्दौड़ से जीत के रूप में आय पर 30 प्रनतशत ;
(अ)ं आनिाइन िेिों से जीत से आय पर 30 प्रनतशत ;
(अ:) धारा 115क की उपधारा (1) के िंर् (क) के 10 प्रनतशत ;
उपिंर् (अ) के परंतुक में ननठर्दषष्ट् िाभांश के माध्यम से आय
पर
(ऑ) उपमर्द (ि)(i)(अ:) में ननठर्दषष्ट् आय से लभन्द्न 20 प्रनतशत ;
िाभांश के माध्यम से आय पर
(ि) अन्द्य संपूण ष आय 30 प्रनतशत ;
(ii) अन्द्य व्यजक्त की र्दशा में,—
(अ) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा ववर्देशी करेंसी में 20 प्रनतशत ;
उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय
समुत्थान द्वारा संर्देय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194िि
या धारा 194िग में ननठर्दषष्ट् ब्याज के रूप में आय नहीं है)
(आ) सरकार या भारतीय समत्ु थान के साथ उसके द्वारा ककए 20 प्रनतशत ;
गए ककसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या भारतीय समुत्थान
द्वारा संर्देय स्वालमस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वालमस्व,
भारतीय समुत्थान को आय-कर अधधननयम की धारा 115क की
उपधारा (1क) के पहिे परन्द्तुक में ननठर्दषष्ट् ककसी ववर्य की ककसी
पुस्तक में प्रनतलिप्यधधकार के संबंध में अथवा भारत में ननवासी
ककसी व्यजक्त को आय-कर अधधननयम की धारा 115क की
उपधारा (1क) के र्दसू रे परन्द्तुक में ननठर्दषष्ट् ककसी कम्प्यू र
साफ् वेयर के संबंध में सभी या ककन्द्हीं अधधकारों के (जजनके अंतगतष
अनुज्ञजप्त र्देना है) अंतरण के प्रनतफि के रूप में है
(इ) सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ उसके द्वारा ककए 20 प्रनतशत ;
गए ककसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार ककसी
भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां करार केंरीय सरकार द्वारा
अनुमोठर्दत है या जहां यह भारत सरकार की तत्समय प्रवत्तृ
औद्योधगक नीनत में सजम्मलित ककसी ववर्य स े संबंधधत है, वहां वह
करार उस नीनत के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा
संर्देय स्वालमस्व के रूप में [जो उपमर्द (ि)(ii)(आ) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत
का स्वालमस्व नहीं है], आय पर
(ई) सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ उसके द्वारा ककए 20 प्रनतशत ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
822
गए ककसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार ककसी
भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंरीय सरकार द्वारा
अनुमोठर्दत कर ठर्दया गया है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय
प्रवत्तृ औद्योधगक नीनत में सजम्मलित ककसी ववर्य से संबंधधत है,
वहां वह करार उस नीनत के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय
समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संर्देय फीस के रूप में
आय पर
(उ) िा री, वग ष पहेिी, ताश के िेि और ककसी प्रकार के 30 प्रनतशत ;
अन्द्य िेिों से जीत (आनिाइन िेिों से जीत से लभन्द्न) के रूप में
आय पर
(ऊ) घुड़र्दौड़ से जीत के रूप में आय पर 30 प्रनतशत ;
(ऋ) आनिाइन िेि से जीत के रूप में आय 30 प्रनतशत ;
(ए) धारा 111क में ननठर्दषष्ट् अल्पकालिक पूंजी अलभिाभों के 15 प्रनतशत ;
रूप में आय पर
(ऐ) धारा 112 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के उपिंर् (iii) में 10 प्रनतशत ;
ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों के रूप में आय पर
(ओ) धारा 112क में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों के 10 प्रनतशत ;
रूप में एक िाि रुपए स े अधधक अन्द्य आय पर
(औ) अन्द्य र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों के रूप में आय पर 20 प्रनतशत ;
[जो धारा 10 के िंर् (33) और िंर् (36) में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक
पूंजी अलभिाभ नहीं है]
(अं) धारा 115क की उपधारा (1) के िंर् (क) के उपिंर् (अ) 10 प्रनतशत ;
के परंतुक में ननठर्दषष्ट् िाभांश के माध्यम से आय पर
(अः) उपमर्द (ि)(ii)(अं) में ननठर्दषष्ट् आय से लभन्द्न िाभांश के 20 प्रनतशत ;
माध्यम से आय पर
(ऑ) अन्द्य संपूण ष आय 30 प्रनतशत ;
2. कंपनी की र्दशा में,—
(क) जहां कंपनी र्देशी कंपनी है,—
(i) “प्रनतभूनतयों पर ब्याज” से लभन्द्न ब्याज के रूप में आय 10 प्रनतशत ;
पर
(ii) िा री, वग ष पहेिी, ताश के िेि और अन्द्य प्रकार के 30 प्रनतशत ;
अन्द्य िेिों से जीत (आनिाइन िेिों से जीत से लभन्द्न) के रूप में
आय पर
(iii) घुड़र्दौड़ से जीत के रूप में आय पर 30 प्रनतशत ;
(iv) आनिाइन िेिों से जीत के रूप में आय 30 प्रनतशत ;
(v) ककसी अन्द्य आय पर 10 प्रनतशत ;
(ि) जहां कंपनी र्देशी कंपनी नहीं है,—
(i) िा री, वग ष पहेिी, ताश के िेि और ककसी प्रकार के अन्द्य 30 प्रनतशत ;
िेिों से जीत (आनिाइन िेिों से जीत स े लभन्द्न) के रूप में आय पर
;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
823
(ii) घुड़र्दौड़ से जीत के रूप में आय पर 30 प्रनतशत ;
(iii) आनिाइन िेिों से जीत के रूप में आय 30 प्रनतशत ;
(iv) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा ककसी ववर्देशी 20 प्रनतशत ;
करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या
ककसी भारतीय समुत्थान द्वारा संर्देय ब्याज के रूप में आय
पर (जो धारा 194िि या धारा 194िग में ननठर्दषष्ट् ब्याज के
रूप में आय नहीं है)
(v) उसके द्वारा 31 माच,ष 1976 के पश्चात ् सरकार या 20 प्रनतशत ;
भारतीय समुत्थान के साथ ककए गए ककसी करार के अनुसरण
में उस सरकार या ककसी भारतीय समुत्थान द्वारा संर्देय
स्वालमस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वालमस्व, भारतीय
समुत्थान को आय-कर अधधननयम की धारा 115क की
उपधारा (1क) के पहिे परन्द्तुक में ननठर्दषष्ट् ववर्य की ककसी
पुस्तक में प्रनतलिप्यधधकार के संबंध में अथवा भारत में
ननवासी ककसी व्यजक्त को आय-कर अधधननयम की
धारा 115क की उपधारा (1क) के र्दसू रे परन्द्तुक में ननठर्दषष्ट्
ककसी कंप्यू र साफ् वेयर के संबंध में सभी या ककन्द्हीं
अधधकारों के (जजनके अंतगतष अनुज्ञजप्त र्देना है) अंतरण के
प्रनतफि के रूप में है
(vi) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ
ककए गए ककसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार
ककसी भारतीय समुत्थान के साथ है वहां वह करार केंरीय
सरकार द्वारा अनुमोठर्दत है अथवा जहां वह भारत सरकार की
तत्समय प्रवत्तृ औद्योधगक नीनत में सजम्मलित ववर्य से
संबंधधत है, वहां वह करार उस नीनत के अनुसरण में है,
सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संर्देय स्वालमस्व के रूप
में आय पर [जो उपमर्द (ि)(iv) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत का
स्वालमस्व नहीं है]—
(अ) जहां करार 31 माच,ष 1961 के पश्चात,् ककंतु 50 प्रनतशत ;
1 अप्रैि, 1976 के पूव ष ककया गया है
(आ) जहां करार 31 माच,ष 1976 के पश्चात ् ककया 20 प्रनतशत ;
गया है
(vii) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ
ककए गए ककसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार
ककसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंरीय
सरकार द्वारा अनुमोठर्दत है अथवा जहां वह भारत सरकार की
तत्समय प्रवत्तृ औद्योधगक नीनत में सजम्मलित ववर्य से
संबंधधत है, वहां वह करार उस नीनत के अनुसार है, उस
सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा, तकनीकी सेवाओ ं के
लिए, संर्देय फीस के रूप में आय पर,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
824
(अ) जहां करार 29 फरवरी, 1964 के पश्चात ् ककंत ु 50 प्रनतशत ;
1 अप्रैि, 1976 के पूव ष ककया गया है
(आ) जहां करार 31 माच,ष 1976 के पश्चात ् ककया गया 20 प्रनतशत ;
है
(viii) धारा 111क में ननठर्दषष्ट् अल्पकालिक पूंजी अलभिाभों 15 प्रनतशत ;
के रूप में आय पर
(ix) धारा 112 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के उपिंर् 10 प्रनतशत ;
(iii) में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों के रूप में आय
पर
(x) धारा 112क में ननठर्दषष्ट् र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों 10 प्रनतशत ;
के रूप में एक िाि रुपए से अधधक आय पर
(xi) अन्द्य र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभों के रूप में आय पर 20 प्रनतशत ;
[जो धारा 10 के िंर् (33) और िंर् (36) में ननठर्दषष्ट्
र्दीघकष ालिक पूंजी अलभिाभ नहीं है]
(xii) धारा 115क की उपधारा (1) के िंर् (क) के उपिंर् 10 प्रनतशत ;
(अ) के परंतुक में ननठर्दषष्ट् िाभांश के माध्यम से आय पर
(xiii) उपमर्द (ि)(xii) में ननठर्दषष्ट् आय से लभन्द्न िाभांश 20 प्रनतशत ;
के माध्यम से आय पर
(xiv) ककसी अन्द्य आय पर 30 प्रनतशत ।
स्पष्ट्टीकरर्—इस भाग की मर्द 1(ि)(i) के प्रयोजनों के लिए, “ववननधान से आय” और
“अननवासी भारतीय” के वही अथ ष हैं, जो आय-कर अधधननयम के अध्याय 12क में उनके हैं ।
आय-कर पर अधिभार
उस आय-कर की रकम में जजसकी,—
(i) इस भाग की मर्द 1 के उपबंधों के अनुसार क ौती की गई हो, संघ के प्रयोजनों के
लिए,—
(क) प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय,
चाहे वह ननगलमत हो या नहीं या आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के
उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की र्दशा में, जो अननवासी है,—
I. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौनतयों के अधीन रहते हुए (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-
कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन
कोई आय सजम्मलित है) पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे कर के र्दस प्रनतशत की र्दर से ;
II. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौनतयों के अधीन रहते हुए (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-
कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीनअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
825
कोई आय सजम्मलित है) एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
III. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौनतयों के अधीन रहते हुए (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-
कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन
कोई आय सजम्मलित नहीं है) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु
पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ;
IV. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौनतयों के अधीन रहते हुए (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-
कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन
कोई आय सजम्मलित नहीं है) पांच करोड़ रुपए स े अधधक है, ऐसे कर के सतैं ीस
प्रनतशत की र्दर से ; और
V. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौनतयों के अधीन रहते हुए (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-
कर अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन
कोई आय सजम्मलित है) र्दो करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु वह उपिंर् III और
उपिंर् IV के अंतगषत नहीं आती है, ऐसे कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से :
परन्द्तु उस र्दशा में, जजसमें कुि आय में िाभांश के रूप में आय या आय-कर
अधधननयम की धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई
आय सजम्मलित है, आय के उस भाग के संबंध में अधधभार की र्दर पन्द्रह प्रनतशत से
अधधक नहीं होगी :
परंतु यह और कक जहां ऐसे व्यजक्त की आय आय-कर अधधननयम की
धारा 115िकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभायष है, अधधभार की र्दर पच्चीस
प्रनतशत से अधधक नहीं होगी ;
(ि) प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी, जो अननवासी है, की र्दशा में,—
I. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु
र्दस करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, वहां ऐसे कर के सात प्रनतशत की र्दर से ;
II. जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का
योग और क ौती के अधीन रहते हुए, र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, वहां ऐसे कर
के बारह प्रनतशत की र्दर से,
(ग) प्रत्येक फम,ष जो अननवासी है, की र्दशा में जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के
लिए संभाव्य आय या ऐसी आयों का योग और क ौती के अधीन रहते हुए, एक करोड़
रुपए से अधधक है, वहां ऐसे कर के बारह प्रनतशत की र्दर से,
(ii) इस भाग की मर्द 2 के उपबंधों के अनुसार, संघ के प्रयोजनों के लिए, ककसी र्देशी
कंपनी से लभन्द्न प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(क) जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य और क ौती के अधीन रहते
हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग, एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु र्दस करोड़
रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के र्दो प्रनतशत की र्दर से ;
(ि) जहां संर्दत्त या संर्दाय ककए जाने के लिए संभाव्य और क ौती के अधीन रहते
हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के
पांच प्रनतशत की र्दर से,
संगखणत अधधभार, बढा ठर्दया जाएगा ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
826
भाग 3
कनतपय दिाओं में आय-कर के प्रभारर्, “वेति” िीष ि के अिीि प्रभाय ि आय से
आय-कर की कटौती और “अधग्रम कर” की संगर्िा के सिए दरें
उन र्दशाओं में, जजनमें आय-कर, प्रवत्तृ र्दर या र्दरों से, आय-कर अधधननयम की धारा 172 की
उपधारा (4) या उक्त अधधननयम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या
धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभाररत ककया जाना है अथवा “वेतन” शीर् ष के अधीन प्रभाय ष
आय में से उक्त अधधननयम की धारा 192 के अधीन का ा जाना है या उस पर संर्दाय ककया जाना
है या उक्त अधधननयम की धारा 194त के अधीन का ा जाना है अथवा जजसमें उक्त अधधननयम के
अध्याय 17ग के अधीन संर्देय “अधग्रम कर” की संगणना की जानी है, यथाजस्थनत, ऐसा आय-कर या
“अधग्रम कर” [आय-कर अधधननयम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञि या
धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चि या धारा 161 की उपधारा (1क) या
धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ि के अधीन, उस अध्याय या धारा में ववननठर्दषष्ट् र्दरों पर
कर से प्रभाय ष ककसी आय के संबंध में “अधग्रम कर” नहीं है या धारा 115क या धारा 115कि या
धारा 115कग या धारा 115कगक या धारा 115कघ या धारा 115ि या धारा 115िक या
धारा 115िकक या धारा 115िकि या धारा 115िकग या धारा 115िकघ या धारा 115िकङ या
धारा 115िि या धारा 115ििक या धारा 115ििग या धारा 115ििङ या धारा 115ििच या
धारा 115ििछ या धारा 115ििज या धारा 115ििझ या धारा 115ििञ या धारा 115ङ या
धारा 115ञि या धारा 115ञग के अधीन कर स े प्रभाय ष ककसी आय के सबं ंध में ऐसे “अधग्रम कर”
पर अधधभार नहीं है] ननम्नलिखित र्दर या र्दरों से, प्रभाररत ककया जाएगा, का ा जाएगा या संगखणत
ककया जाएगा :—
पैरा क
(I) इस पैरा की मर्द (II) और मर्द (III) में ननठर्दषष्ट् व्यजष्ट् से लभन्द्न प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू
अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय की, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं या आय-कर
अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में, जो ऐसी र्दशा नहीं है, जजसे इस भाग का कोई अन्द्य पैरा िागू होता है,—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 2,50,000 रुपए स े कुछ नहीं ;
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 2,50,000 रुपए से अधधक उस रकम का 5 प्रनतशत, जजससे कुि आय
है ककंतु 5,00,000 रुपए से अधधक नहीं है 2,50,000 रुपए स े अधधक हो जाती है ;
(3) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से अधधक 12,500 रुपए धन उस रकम का 20
है ककंतु 10,00,000 रुपए से अधधक नहीं है प्रनतशत, जजससे कुि आय 5,00,000 रुपए
से अधधक हो जाती है ;
(4) जहां कुि आय 10,00,000 रुपए स े 1,12,500 रुपए धन उस रकम का 30
अधधक है प्रनतशत, जजससे कुि आय 10,00,000
रुपए से अधधक हो जाती है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
827
(II) प्रत्येक ऐस े व्यजष्ट् की र्दशा में, जो भारत में ननवासी है और जो पूववष र् ष के र्दौरान ककसी
समय साि वर् ष या अधधक, ककंतु अस्सी वर् ष से कम आयु का है—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 3,00,000 रुपए स े कुछ नहीं ;
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 3,00,000 रुपए स े उस रकम का 5 प्रनतशत, जजससे कुि आय
अधधक है ककंत ु 5,00,000 रुपए से अधधक नहीं है 3,00,000 रुपए स े अधधक हो जाती है ;
(3) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए स े 10,000 रुपए िि उस रकम का 20
अधधक है ककंतु 10,00,000 रुपए से अधधक नहीं प्रनतशत, जजससे कुि आय 5,00,000 रुपए
है से अधधक हो जाती है ;
(4) जहां कुि आय 10,00,000 रुपए स े 1,10,000 रुपए िि उस रकम का 30
अधधक है प्रनतशत, जजससे कुि आय 10,00,000
रुपए से अधधक हो जाती है ।
(III) प्रत्येक ऐसे व्यजष्ट् की र्दशा में, जो भारत में ननवासी है और जो पूववष र् ष के र्दौरान ककसी
समय अस्सी वर् ष या अधधक आयु का है—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से कुछ नहीं ;
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 5,00,000 रुपए से उस रकम का 20 प्रनतशत, जजससे कुि आय
अधधक है ककंत ु 10,00,000 रुपए से अधधक नहीं है 5,00,000 रुपए स े अधधक हो जाती है ;
(3) जहां कुि आय 10,00,000 रुपए से 1,00,000 रुपए िि उस रकम का 30
अधधक है प्रनतशत, जजससे कुि आय 10,00,000 रुपए
से अधधक हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पवू वष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक व्यजष्ट् या ठहन्द्र्द ू
अववभक्त कु ुंब या व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय, चाहे वह ननगलमत हो या नहीं या आय-कर
अधधननयम की धारा 2 के िंर् (31) के उपिंर् (vii) में ननठर्दषष्ट् प्रत्येक कृत्रत्रम ववधधक व्यजक्त की
र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सजम्मलित है)
पचास िाि रुपए से अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के र्दस
प्रनतशत की र्दर से ;
(ि) जजसकी कुि आय (जजसमें िाभाशं के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सजम्मलित है) एक
करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के
पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से ;
(ग) जजसकी कुि आय (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-कर अधधननयम कीअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
828
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सजम्मलित नहीं है)
र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के
पच्चीस प्रनतशत की र्दर से ;
(घ) जजसकी कुि आय (जजसमें िाभाशं के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सजम्मलित नहीं है)
पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के सतैं ीस प्रनतशत की र्दर से ;
(ङ) जजसकी कुि आय (जजसमें िाभांश के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सजम्मलित है) र्दो
करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु वह िंर् (ग) और िंर् (घ) के अंतगतष नहीं आती है, ऐसे
आय-कर के पन्द्रह प्रनतशत की र्दर से,
संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु उस र्दशा में, जजसमें कुि आय में िाभांश के रूप में आय या आय-कर अधधननयम की
धारा 111क, धारा 112 और धारा 112क के उपबंधों के अधीन कोई आय सजम्मलित है, आय के
उस भाग के संबंध में संगखणत आय-कर की रकम पर अधधभार की र्दर पन्द्रह प्रनतशत से अधधक
नहीं होगी :
परंतु यह और कक व्यजक्तयों के संगम की र्दशा में, जो केवि कंपननयों से उसके सर्दस्यों के
रूप में लमिकर बनी है, आय-कर की रकम पर अधधभार की र्दर पन्द्रह प्रनतशत से अधधक नहीं
होगी :
परन्द्तु यह भी कक ऊपर उजल्िखित व्यजक्तयों की र्दशा में, जजनकी कुि आय,—
(क) पचास िाि रुपए स े अधधक है, ककंतु एक करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसी आय
पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, पचास िाि रुपए की कुि आय पर,
आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के
पचास िाि रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ;
(ि) एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दो करोड़ रुपए से अधधक नहीं है, ऐसी आय
पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़ रुपए की कुि आय पर,
आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम स े अधधक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक
करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ;
(ग) र्दो करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु पांच करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है, ऐसी आय
पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, र्दो करोड़ रुपए की कुि आय पर,
आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के र्दो
करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ; और
(घ) जजसकी कुि आय पांच करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और
अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, पांच करोड़ रुपए की कुि आय पर, आय-कर के रूप में
संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के पांच करोड़ रुपए स े
अधधक है, आधधक्य में है ।
पैरा ख
प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में,—
आय-कर की दरें
(1) जहां कुि आय 10,000 रुपए स े कुि आय का 10 प्रनतशत ;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
829
अधधक नहीं है
(2) जहां कुि आय 10,000 रुपए स े 1,000 रुपए िि उस रकम का 20 प्रनतशत,
अधधक है ककंत ु 20,000 रुपए से अधधक नहीं है जजससे कुि आय 10,000 रुपए से अधधक
हो जाती है ;
(3) जहां कुि आय 20,000 रुपए स े 3,000 रुपए िि उस रकम का 30 प्रनतशत,
अधधक है जजससे कुि आय 20,000 रुपए से अधधक
हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूववष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइ ी
की र्दशा में,—
क. जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए स े अधधक है, ककंतु र्दस करोड़ रुपए से अधधक
नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रनतशत की र्दर से ;
ि. जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रनतशत की
र्दर से,
पररकलित अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु प्रत्येक ऐसी सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से
अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़ रुपए की
कुि रकम पर आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस
रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है :
परन्द्तु यह और कक प्रत्येक ऐसी सहकारी सोसाइ ी की र्दशा में, जजसकी कुि आय र्दस करोड़
रुपए स े अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, र्दस करोड़
रुपए की कुि रकम पर आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम स े अधधक नहीं होगी, जो आय की
उस रकम के र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ।
पैरा ग
प्रत्येक फम ष की र्दशा में,—
आय-कर की दर
संपूण ष कुि आय पर 30 प्रनतशत ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूववष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम को, ऐसी प्रत्येक फम ष की र्दशा में,
जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रनतशत की र्दर से संगखणत
अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु ऊपर उजल्िखित फम ष की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है,
ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़ रुपए की कुि रकम
पर आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के
एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
830
पैरा र्
प्रत्येक स्थानीय प्राधधकारी की र्दशा में,—
आय-कर की दर
संपूण ष कुि आय पर 30 प्रनतशत ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूववष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में, ऐस े प्रत्येक स्थानीय प्राधधकारी
की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रनतशत की र्दर
स े संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु ऊपर उजल्िखित स्थानीय प्राधधकारी की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए स े
अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, एक करोड़ रुपए की
कुि रकम पर आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय की उस
रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ।
पैरा ङ
कंपनी की र्दशा में,—
आय-कर की दरें
I. र्देशी कंपनी की र्दशा में,—
(i) जहां पूववष र् ष 2021-2022 में उसका कुि आवत ष या सकि कुि आय का 25
प्राजप्तयां चार सौ करोड़ रुपए से अधधक नहीं है प्रनतशत ;
(ii) मर्द (i) में ननठर्दषष्ट् से लभन्द्न कुि आय का 30
प्रनतशत ;
II. र्देशी कंपनी स े लभन्द्न कंपनी की र्दशा में,—
(i) कुि आय के उतने भाग पर, जो ननम्नलिखित के रूप में 50 प्रनतशत ;
है,—
(क) उसके द्वारा 31 माच,ष 1961 के पश्चात,् ककंतु 1
अप्रैि, 1976 के पूव ष सरकार या ककसी भारतीय समुत्थान से
ककए गए ककसी करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय
समुत्थान से प्राप्त स्वालमस्व ; या
(ि) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात,् ककंतु
1 अप्रैि, 1976 के पूव ष सरकार या ककसी भारतीय समुत्थान
से ककए गए ककसी करार के अनुसरण में तकनीकी सेवाएं
प्रर्दान करने के लिए सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त
फीस,
और जहां, ऐसा करार र्दोनों में से प्रत्येक र्दशा में, केंरीय सरकार द्वारा
अनुमोठर्दत कर ठर्दया गया है
(ii) कुि आय के अनतशेर् पर, यठर्द कोई हो 40 प्रनतशत ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
831
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूववष ती उपबंधों या आय-कर अधधननयम की धारा 111क या धारा 112 या
धारा 112क के उपबंधों के अनुसार संगखणत आय-कर की रकम में ननम्नलिखित र्दर से,—
(i) प्रत्येक र्देशी कंपनी की र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दस करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रनतशत की र्दर से ; और
(ि) जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के
बारह प्रनतशत की र्दर से ;
(ii) र्देशी कंपनी से लभन्द्न प्रत्येक कंपनी की र्दशा में,—
(क) जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु र्दस करोड़ रुपए से
अधधक नहीं है, ऐसे आय-कर के र्दो प्रनतशत की र्दर स े ; और
(ि) जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, ऐसे आय-कर के
पांच प्रनतशत की र्दर से,
संगखणत अधधभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढा ठर्दया जाएगा :
परन्द्तु प्रत्येक ऐसी कंपनी की र्दशा में, जजसकी कुि आय एक करोड़ रुपए से अधधक है, ककंतु
र्दस करोड़ रुपए स े अधधक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि
रकम, एक करोड़ रुपए की कुि आय पर आय-कर के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं
होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है :
परन्द्तु यह और कक प्रत्येक ऐसी कंपनी की र्दशा में, जजसकी कुि आय र्दस करोड़ रुपए से
अधधक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय कुि रकम, र्दस करोड़ रुपए की
कुि आय पर आय-कर और अधधभार के रूप में संर्देय उस कुि रकम से अधधक नहीं होगी, जो आय
की उस रकम के र्दस करोड़ रुपए से अधधक है, आधधक्य में है ।
भाग 4
[िारा 2(13)(ग) देखखए]
िुद्ि कृर्ष-आय की संगर्िा के नियम
नियम 1—आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (1क) के उपिंर् (क) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की
कृवर्-आय इस प्रकार संगखणत की जाएगी मानो वह उस अधधननयम के अधीन “अन्द्य स्रोतों से आय”
शीर् ष के अधीन आय-कर स े प्रभाय ष आय हो और उस अधधननयम की धारा 57 स े धारा 59 के
उपबंध, जहां तक हो सके, तद्नुसार िागू होंगे :
परन्द्तु धारा 58 की उपधारा (2) इस उपांतरण के साथ िागू होगी कक उसमें धारा 40क के प्रनत
ननर्देश का यह अथ ष िगाया जाएगा कक उसके अंतगतष धारा 40क की उपधारा (3), उपधारा (3क)
और उपधारा (4) के प्रनत ननर्देश नहीं हैं ।
नियम 2—आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (1क) के उपिंर् (ि) या उपिंर् (ग) में
ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की कृवर्-आय [जो ऐसी आय से लभन्द्न है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्द्न होती है,
जजसकी उक्त उपिंर् (ग) में ननठर्दषष्ट् भा क या आमर्दनी के पाने वािे को या िेनतहर को या वस्तु
रूप में भा क के पाने वािे को ननवास-गहृ के रूप में आवश्यकता हो] इस प्रकार संगखणत की जाएगी
मानो वह उस अधधननयम के अधीन “कारबार या ववृत्त के िाभ और अलभिाभ” शीर् ष के अधीन आय-
कर स े प्रभाय ष आय हो और आय-कर अधधननयम की धारा 30, धारा 31, धारा 32, धारा 36, धारा
37, धारा 38, धारा 40, धारा 40क [उसकी उपधारा (3), उपधारा (3क) और उपधारा (4) से लभन्द्न]अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
832
धारा 41, धारा 43, धारा 43क, धारा 43ि और धारा 43ग के उपबंध, जहां तक हो सके, तद्नुसार
िाग ू होंगे ।
नियम 3—आय-कर अधधननयम की धारा 2 के िंर् (1क) के उपिंर् (ग) में ननठर्दषष्ट् प्रकृनत की
कृवर्-आय, जो ऐसी आय है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्द्न होती है, जजसकी उक्त उपिंर् (ग) में
ननठर्दषष्ट् भा क या आमर्दनी के पाने वािे को या िेनतहर को या वस्तु रूप में भा क के पाने वािे
को ननवास-गहृ के रूप में आवश्यकता हो, इस प्रकार संगखणत की जाएगी मानो वह उस अधधननयम
के अधीन “गहृ -संपवत्त से आय” शीर् ष के अधीन आय-कर स े प्रभाय ष आय हो और उस अधधननयम की
धारा 23 से धारा 27 के उपबधं , जहां तक हो सके, तद्नुसार िागू होंगे ।
नियम 4—इन ननयमों के ककन्द्हीं अन्द्य उपबंधों में ककसी बात के होत े हुए भी, उस र्दशा में—
(क) जहां ननधाषररती को भारत में उसके द्वारा ऊपजाई गई और ववननलमतष चाय के
ववक्रय से आय व्युत्पन्द्न होती है, ऐसी आय, आय-कर ननयम, 1962 के ननयम 8 के अनुसार
संगखणत की जाएगी और ऐसी आय के साि प्रनतशत भाग को, ननधाषररती की कृवर्-आय समझा
जाएगा ;
(ि) जहां ननधाषररती को, भारत में उसके द्वारा उगाए गए रबड़ के पौधों से उसके द्वारा
ववननलमतष या प्रसंस्कृत तकनीकी रूप से ववननठर्दषष्ट् ब्िाक रबड़ के सेंरीफ्यूज िे ेक्स या
लसनेक्स या क्रेप्स पर आधाररत िे ेक्स (जैसे पेि िे ेक्स क्रेप) या ब्राउन क्रेप (जैसे एस् े
ब्राउन क्रेप, ररलमल्र् क्रेप, स्माक्र् ब्िेन्द्के क्रेप या फ्िे बाकष क्रेप) के ववक्रय स े आय
व्युत्पन्द्न होती है, ऐसी आय, आय-कर ननयम, 1962 के ननयम 7क के अनुसार संगखणत की
जाएगी और ऐसी आय के पसैं ि प्रनतशत भाग को, ननधाषररती की कृवर्-आय समझा जाएगा ;
(ग) जहां ननधाषररती को भारत में उसके द्वारा उपजाई गई और ववननलमतष कॉफी के
ववक्रय से आय व्युत्पन्द्न होती है, ऐसी आय, आय-कर ननयम, 1962 के ननयम 7ि के
अनुसार संगखणत की जाएगी और ऐसी आय के, यथाजस्थनत, साि प्रनतशत या पचहत्तर प्रनतशत
भाग को, ननधाषररती की कृवर्-आय समझा जाएगा ।
नियम 5—जहां ननधाषररती ककसी ऐस े व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय (ठहन्द्र्द ू अववभक्त कु ुंब,
कंपनी या फम ष से लभन्द्न) का सर्दस्य है, जजसकी पूववष र् ष में आय-कर अधधननयम के अधीन कर से
प्रभाय ष या तो कोई आय नहीं है या जजसकी कुि आय ककसी व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय (ठहर्दं ू
अववभक्त कु ुंब, कंपनी या फम ष स े लभन्द्न) की र्दशा में कर स े प्रभाय ष न होने वािी अधधकतम रकम
स े अधधक नहीं है ककंतु जजसकी कोई कृवर्-आय भी है वहां उस संगम या ननकाय की कृवर्-आय या
हानन, इन ननयमों के अनुसार संगखणत की जाएगी और इस प्रकार संगखणत कृवर्-आय या हानन में
ननधाषररती के अंश को, ननधाषररती की कृवर्-आय या हानन समझा जाएगा ।
नियम 6—जहां कृवर्-आय के ककसी स्रोत के संबंध में पूववष र् ष के लिए संगणना का पररणाम
हानन है, वहां ऐसी हानन, कृवर्-आय के ककसी अन्द्य स्रोत से उस पूववष र् ष के लिए ननधाषररती की आय
के प्रनत, यठर्द कोई हो, मुजरा की जाएगी :
परन्द्तु जहां ननधाषररती ककसी व्यजक्त-संगम या व्यजष्ट् -ननकाय का सर्दस्य है और, यथाजस्थनत,
संगम या ननकाय की कृवर्-आय में ननधाषररती का अंश हानन है, वहां ऐसी हानन, कृवर्-आय के ककसी
अन्द्य स्रोत से ननधाषररती की ककसी आय के प्रनत मुजरा नहीं की जाएगी ।
नियम 7—राज्य सरकार द्वारा कृवर्-आय पर उद्गहृ ीत ककसी कर ननधाषररती द्वारा संर्देय रालश
की, कृवर्-आय की संगणना करन े में, क ौती की जाएगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
833
नियम 8—(1) जहां ननधाषररती की, 2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण
वर् ष स े सुसंगत पूववष र् ष में कोई कृवर्-आय है और 2015 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2016 के अप्रैि
के प्रथम ठर्दन या 2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2019 के
अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022
के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर्ों से सुसंगत पूववष र्ों में से ककसी एक या
अधधक के लिए ननधाषररती की कृवर्-आय की संगणना का शुद्ध पररणाम हानन है, वहां इस
अधधननयम की धारा 2 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए,—
(i) 2015 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2016 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2018 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि
के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत
पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(ii) 2016 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र्ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2019 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि
के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष स े सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत
मुजरा नहीं की गई है ;
(iii) 2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े
ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(iv) 2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के
लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(v) 2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा
नहीं की गई है ;
(vi) 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण
वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(vii) 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र्ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हाननअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
834
2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए
कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(viii) 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन,
2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए
ननधाषररती की कृवर्-आय के प्रनत मुजरा की जाएगी ।
(2) जहां ननधाषररती की, 2024 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से
सुसंगत पूववष र् ष में या, यठर्द आय-कर अधधननयम के ककसी उपबंध के आधार पर, आय-कर उस
पूववष र् ष से लभन्द्न ककसी अवधध की आय के संबंध में प्रभाररत ककया जाना है तो, ऐसी अन्द्य अवधध
में, कोई कृवर्-आय है और 2016 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या
2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन
या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2023 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर्ों से सुसंगत पूववष र्ों में से ककसी एक या अधधक के लिए
ननधाषररती की कृवर्-आय की संगणना का शुद्ध पररणाम हानन है, वहां इस अधधननयम की धारा 2
की उपधारा (10) के प्रयोजनों के लिए,—
(i) 2016 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2019 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि
के प्रथम ठर्दन या 2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत
पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(ii) 2017 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष स े सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2023 के अप्रैि
के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष स े सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत
मुजरा नहीं की गई है ;
(iii) 2018 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े
ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(iv) 2019 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम
ठर्दन या 2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के
लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(v) 2020 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2023 के अप्रैि के प्रथमअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
835
ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा
नहीं की गई है ;
(vi) 2021 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन या 2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वाि े ननधाषरण
वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(vii) 2022 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र्ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन, उस पररमाण तक, यठर्द कोई हो, जजस तक ऐसी हानन
2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए
कृवर्-आय के प्रनत मुजरा नहीं की गई है ;
(viii) 2023 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष
के लिए इस प्रकार संगखणत हानन,
2024 के अप्रैि के प्रथम ठर्दन को प्रारंभ होने वािे ननधाषरण वर् ष से सुसंगत पूववष र् ष के लिए
ननधाषररती की कृवर्-आय के प्रनत मुजरा की जाएगी ।
(3) जहां ककसी स्रोत से कृवर्-आय प्राप्त करने वािे व्यजक्त का, कोई अन्द्य व्यजक्त, ववरासत
स े लभन्द्न रीनत से, उसी हैलसयत में उत्तराधधकारी हो गया है, वहां उपननयम (1) या उपननयम (2) की
कोई बात, हानन उिाने वािे व्यजक्त स े लभन्द्न ककसी व्यजक्त को, यथाजस्थनत, उपननयम (1) या
उपननयम (2) के अधीन मुजरा कराने का हकर्दार नहीं बनाएगी ।
(4) इस ननयम में ककसी बात के होत े हुए भी, ऐसी हानन, जजसे ननधाषरण अधधकारी द्वारा
इन ननयमों के या ववत्त अधधननयम, 2015 (2015 का 20) की पहिी अनुसूची या ववत्त अधधननयम,
2016 (2016 का 28) की पहिी अनुसूची या ववत्त अधधननयम, 2017 (2017 का 7) की पहिी
अनुसूची या ववत्त अधधननयम, 2018 (2018 का 13) की पहिी अनुसूची या ववत्त (संख्यांक 2)
अधधननयम, 2019 (2019 का 23) की पहिी अनुसूची या ववत्त अधधननयम, 2020 (2020 का 12)
की पहिी अनुसूची या ववत्त अधधननयम, 2021 (2021 का 13) की पहिी अनुसचू ी या ववत्त
अधधननयम, 2022 (2022 का 6) की पहिी अनसु ूची में अंतववष्ट्ष ननयमों के उपबंधों के अधीन
अवधाररत नहीं ककया गया है, यथाजस्थनत, उपननयम (1) या उपननयम (2) के अधीन मुजरा नहीं की
जाएगी ।
नियम 9—जहां इन ननयमों के अनुसार की गई संगणना का अंनतम पररणाम हानन है, वहां इस
प्रकार संगखणत हानन पर ध्यान नहीं ठर्दया जाएगा और शुद्ध कृवर्-आय को शून्द्य समझा जाएगा ।
नियम 10—आय-कर अधधननयम के ननधाषरण की प्रकक्रया से संबंधधत उपबंध (जजनके अंतगतष
आय के पूणांकन से संबंधधत धारा 288क के उपबंध भी हैं) आवश्यक उपांतरणों सठहत, ननधाषररती
की शुद्ध कृवर्-आय की संगणना के संबंध में उसी प्रकार िागू होंगे, जैसे व े कुि आय के ननधाषरण
के संबंध में िागू होत े हैं ।
नियम 11—ननधाषररती की शद्ु ध कृवर्-आय की संगणना करन े के प्रयोजनों के लिए, ननधाषरण
अधधकारी को वही शजक्तयां होंगी, जो उस े कुि आय के ननधाषरण के प्रयोजनों के लिए आय-कर
अधधननयम के अधीन हैं ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
836
र्दसू री अनुसूची
[िारा 135(क) देखखए]
सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम की पहिी अनुसूची में,—
ैररफ मर्द माि का वणनष इकाई शुल्क की र्दर
मानक अधधमानी
(1) (2) (3) (4) (5)
(1) अध्याय 29 में,—
(i) ैररफ मर्द 2902 50 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर, “2.5%”
प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ii) ैररफ मर्द 2903 21 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर, “2.5%”
प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(2) अध्याय 40 में, शीर् ष 4005 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, “25% या 30 रु. प्रनत ककिोग्राम, जो भी कम हो” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(3) अध्याय 71 में,—
(i) शीर् ष 7113 और शीर् ष 7114 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की
प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, “25%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ii) शीर् ष 7117 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
“25% या 600 रु. प्रनत ककिोग्राम, जो भी कम हो” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(4) अध्याय 84 में, ैररफ मर्द 8414 60 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
“15%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी;
(5) अध्याय 87 में, ैररफ मर्द 8712 00 10 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
“35%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी;
(6) अध्याय 95 में, शीर् ष 9503 की सभी ैररफ मर्दों सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् यों के
स्थान पर, “70%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
837
तीसरी अनुसूची
[िारा 135(ख) देखखए]
सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम की पहिी अनुसूची में,—
(1) अध्याय 40 में, ैररफ मर्द 4011 30 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, “2.5%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(2) अध्याय 71 में,—
(i) शीर् ष 7106 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, “10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ii) ैररफ मर्द 7107 00 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
“10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(iii) शीर् ष 7108 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, “10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(iv) ैररफ मर्द 7109 00 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
“10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(v) ैररफ मर्द 7110 11 00, 71101120, 71101900, 7110 21 00, 7110 29 00, 7110
41 00 और 7110 49 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर, “10%”
प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(vi) ैररफ मर्द 711100 00 के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
“10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(vii) शीर् ष 7112 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, “10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(viii) शीर् ष 7118 की सभी ैररफ मर्दों के सामने आने वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, “10%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(3) अध्याय 88 में, ैररफ मर्द 8802 20 00, 8802 30 00 और 8802 40 00 के सामने आने
वािी स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर, “2.5%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(4) अध्याय 98 में,—
(क) ैररफ मर्द 9801 के स्तभं (2) में,—
(i) मर्द 3 के स्थान पर ननम्नलिखित मर्द रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(3) सौर ववद्युत संयंत्र या सौर ववद्युत पररयोजना से लभन्द्न ववद्युत पररयोजना”;
(ii) मर्द (6) में, “ऐसी अन्द्य पररयोजनाएं जजन्द्हें केंरीय सरकार इस ननलमत्त राजपत्र में
र्देश के आधथकष ववकास को ध्यान में रिते हुए अधधसूधचत करे” शब्र्दों के स्थान पर, “सौर
ववद्युत संयंत्र या सौर ववद्युत पररयोजना से लभन्द्न ऐसी अन्द्य पररयोजनाएं जजन्द्हें केंरीय
सरकार इस ननलमत्त राजपत्र में र्देश के आधथकष ववकास को ध्यान में रिते हुए अधधसूधचत करे”
शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ि) उपशीर् ष 9801 00 के स्तंभ (2) में,—
(i) मर्द 3 के स्थान पर, ननम्नलिखित मर्द रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“(3) सौर ववद्युत संयंत्र या सौर ववद्युत पररयोजना से लभन्द्न ववद्युत पररयोजना”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
838
(ii) मर्द (6) में, “ऐसी अन्द्य पररयोजनाएं जजन्द्हें केंरीय सरकार इस ननलमत्त राजपत्र में
र्देश के आधथकष ववकास को ध्यान में रिते हुए अधधसूधचत करे” शब्र्दों के स्थान पर, “सौर
ववद्युत संयंत्र या सौर ववद्युत पररयोजना से लभन्द्न ऐसी अन्द्य पररयोजनाएं जजन्द्हें केंरीय
सरकार इस ननलमत्त राजपत्र में र्देश के आधथकष ववकास को ध्यान में रिते हुए अधधसूधचत करे”
शब्र्द रिे जाएंगे ;
(ग) ैररफ मर्द 9801 00 13 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर
ननम्नलिखित प्रववजष्ट् रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“….. सौर ववद्युत संयंत्र या सौर ववद्युत पररयोजना से लभन्द्न ववद्युत पररयोजना के
लिए ”;
(घ) ैररफ मर्द 9801 00 19 के सामने आने वाि े स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर
ननम्नलिखित प्रववजष्ट् रिी जाएगी, अथाषत ् :—
“….. सौर ववद्युत संयंत्र या सौर ववद्युत पररयोजना से लभन्द्न ववद्युत पररयोजना के लिए”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
839
चौथी अनुसूची
[िारा 135(ग) देखखए]
सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम की पहिी अनुसूची में,—
(1) साधारण स्पष्ट् ीकारक ठ प्पणों के पैरा 1 में, ‘‘जहां ककसी वस्तु या वस्तुओं के समूह का
वणनष ’’शब्र्दों से आरंभ होने वािे भाग और वस्तु या वस्तु के समूह, जो “-” या “--” है ।’शब्र्दों के साथ
समाप्त होता है,के पश्चात,् ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
‘जहां ककसी वस्तु या वस्तुओं के समूह का वणनष “----” से पहिे आता है, “-” या “--” का
उपवगीकरण होने के अनतररक्त्त, उक्त वस्तु या वस्तुओं के समूह को ऐसी वस्त ु या वस्तुओं के
समूह से िीक पहिे के उपवगीकरण के रूप में भी माना जा सकेगा है, जो “---” रिता है ।’;
(2) प्रयुक्त संिेपािरों की सूची के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत:्—
‘‘प्रयुक्त संक्षेपाक्षरों की सिू ी
संक्षेपाक्षर िब्द
“एसी से अलभप्रेत है प्रत्यावती धारा
एएमपीएस से अलभप्रेत है एजम्पयर
एएस ीएम से अलभप्रेत है अमेररकन सोसाइ ी फॉर ेजस् ंग मैठ ररयल्स
बीक्यू से अलभप्रेत है बेक्करेि (बेक्करेल्स)
बीक्यू/जी से अलभप्रेत है प्रनत ग्राम बेक्करेि (बेक्करेल्स)
°सी से अलभप्रेत है डर्ग्री सेजल्सयस
सीसी से अलभप्रेत है घन सें ीमी र
सीजी से अलभप्रेत है सें ीग्राम
सीआई/जी से अलभप्रेत है क्यूरी प्रनत ग्राम
सीआईएफ से अलभप्रेत है िागत, बीमा और माि भाड़ा
सी/के से अलभप्रेत है कैरे (1 लमठरक कैरे = 2x10-4 ककिोग्राम)
सीएम से अलभप्रेत है सें ीमी र
सीएम² से अलभप्रेत है वग ष सें ीमी र
सीएम3 से अलभप्रेत है घन सें ीमी र
सीएन से अलभप्रेत है सें ीन्द्यू न
र्ीसी से अलभप्रेत है ठर्दष्ट् धारा
र्ीवाईएनई/सीएम से अलभप्रेत है र्ायन प्रनत सें ीमी र
जी से अलभप्रेत है ग्राम
जी/सीएम3 से अलभप्रेत है ग्राम प्रनत घन सें ीमी र
जी/एम2 से अलभप्रेत है ग्राम प्रनत वग ष मी र
जीआई/एफएस से अलभप्रेत है कफसाइि आइसो ोप का ग्राम
जीवीर्ब्ल्यू से अलभप्रेत है सकि यान भार
जीवाई से अलभप्रेत है ग्र े
एचपी से अलभप्रेत है अश्व शजक्त
एचजेर् से अलभप्रेत है हट्षज
आईआर से अलभप्रेत है इन्द्रा-रेर्अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
840
के से अलभप्रेत है केजल्वन
केसीएएि से अलभप्रेत है ककिोकैिोरी
केसीएएि/ केजी से अलभप्रेत है ककिो कैिोरी प्रनत ककिोग्राम
केजीएफ से अलभप्रेत है ककिोग्राम बि
केएन से अलभप्रेत है ककिोन्द्यू न
केएन/एम से अलभप्रेत है ककिोन्द्यू न प्रनत मी र
केपीए से अलभप्रेत है ककिो पास्कि
केपीए.एम2/जी से अलभप्रेत है प्रनत ग्राम ककिो पास्कि वग ष मी र
केवी से अलभप्रेत है ककिोवोल्
केवीए से अलभप्रेत है ककिोवोल् -एजम्पयर
केवीएआर से अलभप्रेत है ककिोवोल् -एजम्पयर – प्रनत कक्रयाशीि
केर्ब्ल्यू से अलभप्रेत है ककिोवा
केर्ब्ल्युएच से अलभप्रेत है ककिोवा घं े
एि से अलभप्रेत है िी र
एम से अलभप्रेत है मी र
एम- से अलभप्रेत है मे ा-
एम2 से अलभप्रेत है वगमष ी र
एम3 से अलभप्रेत है घन मी र
एम³/एच से अलभप्रेत है घनमी र प्रनतघं ा
µसीआई से अलभप्रेत है माइक्रोक्यूरी
एमएम से अलभप्रेत है लमिीमी र
एमएन से अलभप्रेत है लमिीन्द्यू न
एमपीए से अलभप्रेत है लमिीपास्कि
एम ी से अलभप्रेत है लमठरक न
एमर्ब्ल्यू से अलभप्रेत है मेगावा
एन से अलभप्रेत है न्द्यू न
एन/एम से अलभप्रेत है न्द्यू न प्रनत मी र
एनओ. से अलभप्रेत है संख्या
ओ- से अलभप्रेत है आथो-
पी- से अलभप्रेत है पैरा-
पीए से अलभप्रेत है जोड़ों की संख्या
आरएर्ी से अलभप्रेत है अवशोवर्त ववककरण िुराक
आरएस. से अलभप्रेत है रुपया
एसक्यू. से अलभप्रेत है वग ष
एसर्ब्ल्यूजी से अलभप्रेत है मानक वायर गेज
ी से अलभप्रेत है न
ीयू से अलभप्रेत है हजार की संख्या में
यू से अलभप्रेत है संख्या
यूएस$ से अलभप्रेत है अमेररकी र्ािर
यूवी से अलभप्रेत है परा-बगैं नी
वी से अलभप्रेत है वोल्अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
841
वीओएि. से अलभप्रेत है वाल्यूम
र्ब्ल्यू से अलभप्रेत है वा
% से अलभप्रेत है प्रनतशत
x° से अलभप्रेत है एक्स डर्ग्री
1000 केर्ब्ल्यूएच से अलभप्रेत है 1000 ककिोवा घं े”;
ैररफ मर्द माि का वणनष इकाई शुल्क की र्दर
मानक अधधमानी
(1) (2) (3) (4) (5)
(3) अध्याय 3 में,—
(i) शीर् ष 0302 में,—
(क) उपशीर् ष 0302 91, ैररफ मर्द 0302 91 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“0302 91 00 -- यकृत, मत्स्यांर् और मत्स्यशुक्र कक.ग्रा. 30% -”;
(ि) उपशीर् ष 0302 92, ैररफ मर्द 0302 92 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“0302 92 00 -- शाकष मीनपि कक.ग्रा. 30% -”;
(ii) शीर् ष 0303 में, उपशीर् ष 0303 92, ैररफ मर्द 0303 92 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों
के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“0303 92 00 -- शाकष मीनपि कक.ग्रा. 30% -”;
(iii) शीर् ष 0307 में, ैररफ मर्द 0308 4330 और उसस े संबधंधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“0307 43 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(iv) शीर् ष 0308 में, ैररफ मर्द 0308 30 20 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“0308 30 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(4) अध्याय 4 के शीर् ष 0406 में, ैररफ मर्द 0406 10 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“0406 10 - ताजा (अपक्व या असंसाधधत) पनीर,
जजसके अंतगतष छेना पानी पनीर और र्दही
है
0406 10 10 --- मोजरैिा पनीर कक.ग्रा. 30% -
0406 10 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(5) अध्याय 9 के शीर् ष 0910 में, ैररफ मर्द 0910 99 29 से ैररफ मर्द 0910 99 39 और उनसे
संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“0910 99 29 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -
0910 99 30 --- भूसी कक.ग्रा. 30% -”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
842
(6) अध्याय 10 के शीर् ष 1008 में,—
(i) ैररफ मर्द 1008 21 30 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“1008 21 40 --- सांवां (एककनोक्िोवा एस्कुिेन्द् ा (एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 21 50 --- प्रोसो(पैननकमलमलिएलसयम(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 21 60 --- बांर्दा(से ेररयाइ ेलिका(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 21 70 --- कोर्दो(पासपेिमस्क्रोत्रबकोिे म(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 21 80 --- कु की(पैननकमसुमात्रेन्द्सी(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
--- अन्द्य:
1008 21 91 ---- चौिाई(एमेरेंथस(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 21 99 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 50% -”;
(ii) ैररफ मर्द 1008 29 30 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंतःस्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“1008 29 40 --- सांवां (एककनोक्िोवा एस्कुिेन्द् ा (एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 29 50 --- प्रोसो (पैननकमलमलिएलसयम(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 29 60 --- बांर्दा (स े ेररयाइ ेलिका(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 29 70 --- कोर्दो (पासपेिमस्क्रोत्रबकोिे म(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 29 80 --- कु की (पैननकमसुमात्रेन्द्सी(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
--- अन्द्य:
1008 29 91 ---- चौिाई (एमेरेंथस(एि.)) कक.ग्रा. 50% -
1008 29 99 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 50% -”;
(7) अध्याय 12 में, शीर् ष 1211 के उपशीर् ष 1211 90, ैररफ मर्द 1211 90 11 to 1211 90 99
और उनसे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“1211 90 - अन्द्य :
--- बीज, धगरी, बीजकवच, फि, फिावरण,
फि नछिका, एंर्ोस्पम,ष मीजोकाप,ष
एन्द्र्ोकाप ष :
1211 90 11 ---- मुश्कर्दानाबीज कक.ग्रा. 30% -
1211 90 12 ---- नक्सवोलमका, सूिे पके बीज कक.ग्रा. 30% -
1211 90 13 ---- इसबगोिबीज (इसबगोि) कक.ग्रा. 30% -
1211 90 14 ---- नीम बीज कक.ग्रा. 30% -
1211 90 15 ---- जोजोबा बीज कक.ग्रा. 30% -
1211 90 16 ---- गासीननया कक.ग्रा. 30% -
1211 90 19 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -
--- पवत्तयां, पत्ती की किी, विृ व्रण, पुष्ट्प,
पुष्ट्पक्रम, फूि मंजरी, पुष्ट्पकिी, स् ाइिअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
843
और जस् ग्मा, स् ेमेन और फलिया ं :
1211 90 21 ---- बेिार्ोना पवत्तयां कक.ग्रा. 30% -
1211 90 22 ---- सेना पवत्तयां और फलियां कक.ग्रा. 30% -
1211 90 23 ---- नीम पवत्तयां कक.ग्रा. 30% -
1211 90 24 ---- जजम्नेमा कक.ग्रा. 30% -
1211 90 25 ---- क्यूबेब कक.ग्रा. 30% -
1211 90 26 ---- पाइरेथ्रम कक.ग्रा. 30% -
1211 90 29 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -
--- छाि, भूसी और नछिका :
1211 90 31 ---- कैसकारा सैग्रार्ा छाि कक.ग्रा. 30% -
1211 90 32 ---- इसबगोि भूसी (इसबगोि भसू ी) कक.ग्रा. 30% -
1211 90 33 ---- कांबोज फि नछिका कक.ग्रा. 30% -
1211 90 34 ---- अशोक (सैरेका असोका.) कक.ग्रा. 30% -
1211 90 35 ---- अजुनष ( लमनष ेलिया अजुनष ) कक.ग्रा. 30% -
1211 90 39 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -
--- जड़,ें जड़ वंतृ , बल्व, कान,ष ट्यूबर, स् ोिन
और राइजोम :
1211 90 41 ---- बेिार्ोना जड़ें कक.ग्रा. 30% -
1211 90 42 ---- गिनगि राइजोम और जड़ें कक.ग्रा. 30% -
1211 90 43 ---- इपेकाक सूिे राइजोम और जड़ें कक.ग्रा. 30% -
1211 90 44 ---- सपगष ंधा जड़ें (राउवाजल्फया सरपेंठ ना और कक.ग्रा. 30% -
अन्द्य राउवाजल्फया की अन्द्य प्रजानतयां)
1211 90 45 ---- जेर्ोवरी जड़ें कक.ग्रा. 30% -
1211 90 46 ---- कुथ जड़ें कक.ग्रा. 30% -
1211 90 47 ---- सारासेपररल्िा जड़ें कक.ग्रा. 30% -
1211 90 48 ---- स्वी फ्िै राइजो कक.ग्रा. 30% -
1211 90 49 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -
--- पूण ष पौधा, वायुवीयर भाग, तना, हनी और
काष्ट्ि :
1211 90 51 ---- चंर्दन धचप्स और बारीक चूणष कक.ग्रा. 30% -
1211 90 52 ---- ववन्द्का रोजजया शाक कक.ग्रा. 30% -
1211 90 53 ---- पुर्दीना कक.ग्रा. 30% -
1211 90 54 ---- अगरवुर् कक.ग्रा. 30% -
1211 90 55 ---- धचरायता कक.ग्रा. 30% -
1211 90 56 ---- बेलसि, पाइसोप, रोजमैरी, सेज और सेवरी कक.ग्रा. 30% -अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
844
1211 90 57 ---- अश्वगंधा (ववर्दननया सोम्नीफेरा) कक.ग्रा. 30% -
1211 90 58 ---- धगिोय (ठ नोस्फोराकाडर्फष ोलिया) कक.ग्रा. 30% -
1211 90 59 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -
1211 90 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(8) अध्याय 13 में,—
(i) अध्याय ठ प्पण के िंर् (छ) में, “(शीर् ष 3006)”, कोष्ट्िकों, शब्र्द और अंकों के स्थान पर,
“(शीर् ष 3822)” कोष्ट्िक, शब्र्द और अंक रिे जाएंगे;
(ii)शीर् ष 1302 में,—
(क) ैररफ मर्द 1302 32 30 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- ग्वारगम:
1302 32 31 ---- रासायननक रूप से उपचाररत कक.ग्रा. 30% -
1302 32 39 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(ि) ैररफ मर्द 1302 32 40 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों का िोप ककया जाएगा;
(ग) ैररफ मर्द 1302 39 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“1302 39 -- अन्द्य :
1302 39 10 --- इमिीधगरीचूण ष कक.ग्रा. 30% -
1302 39 20 --- कप्पा कैरागीनन कक.ग्रा. 30% -
1302 39 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(9) अध्याय 19 में, शीर् ष में 1904, ैररफ मर्द 1904 20 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“1904 20 - न भुने गए धान्द्य च्यूड़े या न भुने गए
घान्द्य च् यूड़े और भुने गए धान्द्य च् यूड़े या
भुना हुआ अनाज के लमश्रण से अलभप्राप् त
तैयार िाद़़्य
1904 20 10 --- 15% या अधधक वजन वािे मो े अनाज कक.ग्रा. 30% -
अंतवस्ष तु के साथ
1904 20 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 30% -”;
(10) अध्याय 27 में, शीर् ष 2701, ैररफ मर्द 2701 12 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“2701 12 -- त्रब ुमनी कोयिा :
2701 12 10 --- कुककंग कोयिा कक.ग्रा. 5% -
2701 12 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 5% -”;
(11) अध्याय 29 में,—
(i) शीर् ष 2916 में, ैररफ मर्द 2916 20 10 और उसस े संबधंधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
845
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2916 20 20 --- त्रबफैजन्द्थ्रन (आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(ii) शीर् ष 2924 में, ैररफ मर्द 2924 29 60 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2924 29 70 --- प्रैठ िाक्िोर(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(iii) शीर् ष 2930 में,—
(क) ैररफ मर्द 2930 20 00 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“2930 20 - थायोकाबाषमेट्स और र्ाइथायोकामाषबमेट्स :
2930 20 10 --- कैर ैप हाइड्रोक्िोराइर्(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -
2930 20 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 7.5% -”;
(ि) ैररफ मर्द 2930 90 91 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2930 90 92 ---- एसीफे (आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(iv) शीर् ष 2931 में, ैररफ मर्द 2931 49 20 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2931 49 30 --- ग्िाइफोसे (आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(v) शीर् ष 2932 में, ैररफ मर्द 2932 99 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2932 99 20 --- एमामैक् ेनबेन्द्जोए (आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(vi) शीर् ष 2933 में,—
(क) ैररफ मर्द 2933 29 50 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2933 29 60 --- इलमर्ैक्िोवप्रर्(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(ि) ैररफ मर्द 2933 39 16 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2933 39 17 ---- क्िोरैंरैनीलिप्रोि(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(ग) ैररफ मर्द 2933 39 19 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“2933 39 21 ---- एसी ैलमवप्रर्(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -
2933 39 22 ---- इमाजैथापायर(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -
2933 39 29 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 7.5% -”;
(घ) ैररफ मर्द 2933 59 40 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2933 59 50 --- त्रबस्पायरीबैक-सोडर्यम(आइएसओ) कक.ग्रा. 10% -”;
(ङ) ैररफ मर्द 2933 99 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखितअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
846
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2933 99 20 --- काबैन्द्र्ाजजम(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(vii) शीर् ष 2934 में, ैररफ मर्द 2934 99 20 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,्
ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“2934 99 30 --- ब्यूप्रोफैजजन(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -”;
(viii) शीर् ष 2935 में, ैररफ मर्द 2935 50 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“2935 50 - अन्द्य परफ्िूओरोआक् ेनसल्फोनामाइड्स:
2935 50 10 --- फ्िूबैजन्द्र्यामाइर्(आइएसओ) कक.ग्रा. 7.5% -
2935 50 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 7.5% -”;
(12) अध्याय 31 में,—
(i) ठ प्पण 6 के पश्चात,् ननम्नलिखित अनुपूरक ठ प्पण अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“अनुपूरक ठ प्पण :
(I) इस अध्याय में, भारतीय मानक ब्यूरो के ककसी मानक के प्रनतननर्देश उस मानक
के अंनतम प्रकालशत संस्करण के प्रनतननर्देश है ।
उदाहरर् : आईएस 1459 से आईएस 1459: 2018 ननठर्दषष्ट् है और आईएस 1459:
1974 नहीं ।”;
(ii) शीर् ष 3102 में, ैररफ मर्द 3102 10 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“3102 10 - यूररया चाहे जिीय ववियन में हो या
नहीं :
3102 10 10 --- आईएस मानक 5406 के अनुरूप उवरष क कक.ग्रा. 10% -
श्रेणी
3102 10 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 10% -”;
(13) अध्याय 38 में,—
(i) उपशीर् ष ठ प्पण 4 के पश्चात,् ननम्नलिखित अनुपूरक ठ प्पण अंत:स्थावपत ककए जाएंगे,
अथाषत ् :—
“अनुपूरक ठ प्पण:
1. ैररफ मर्द 3808 91 41 के अंतगषत उपशीर् ष 3808 91 के ननम्नलिखित माि
हैं : आईएस-12915 के अनुरूप ऐसीफे (आइएसओ); आईएस-14159 के अनुरूप का ेप
हाइड्रोक्िोराइर् (आइएसओ); आईएस-15443 के अनुरूप इलमर्ैक्िोवप्रर् (आइएसओ);
आईएस-15981 के अनुरूप एसी ैमीवप्रर् (आइएसओ) ।
2. ैररफ मर्द 3808 91 42 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 91 के 90% से अधधक
वजन की अंतवस्ष तु वािे ननम्नलिखित माि हैं : क्िोरैनरैनीिीप्रौि(आइएसओ); ब्यूप्रोफैजजन
(आइएसओ); फ्िूबैजन्द्र्यामाइर्(आइएसओ); एमामैक् ेन बेन्द्जोए (आइएसओ) ।
3. ैररफ मर्द 3808 91 51 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 91 के माि के केवि लमश्रणअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
847
और ननलमनषतयां है, जजसमें ननम्नलिखित में स े एक या अधधक है : आईएस-12916 के
अनुरूप ऐसीफे (आइएसओ); आईएस-14183 के अनुरूप का ेप हाइड्रोक्िोराइर्
(आइएसओ); आईएस-15335 के अनुरूप इलमर्ैक्िोवप्रर् (आइएसओ); आईएस-16328 के
अनुरूप एसी ैमीवप्रर् (आइएसओ) ।
4. ैररफ मर्द 3808 91 52 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 91 के माि के 90% स े
अधधक वजन की अंतवस्ष तु वािे, केवि लमश्रण और ननलमनष तयां है, जजसमें ननम्नलिखित में
से एक या अधधक है: क्िोरैनरैनीिीप्रौि (आइएसओ); ब्यूप्रोफैजजन (आइएसओ);
फ्िूबैजन्द्र्यामाइर् (आइएसओ); एमामैक् ेन बेन्द्जोए (आइएसओ) ।
5 . ैररफ मर्द 3808 92 60 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 92 के ननम्नलिखित कोई
माि हैं : आईएस-8445 के अनुरूप काबैन्द्र्ाजजम (आइएसओ) ।
6. ैररफ मर्द 3808 92 70 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 92 के माि के केवि लमश्रण
और ननलमनषतयां हैं जजसमें ननम्नलिखित में से एक या अधधक है: आईएस-8446 के अनुरूप
काबैन्द्र्ाजजम (आइएसओ) ।
7. ैररफ मर्द 3808 93 61 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 93 के ननम्नलिखित कोई
माि हैं : आईएस-15158 के अनुरूप प्रेठ िाक्िोर (आइएसओ); आईएस-12502 के अनुरूप
ग्िाइफोसे (आइएसओ)।
8. ैररफ मर्द 3808 93 62 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 93 वािे 90% से अधधक
वजन की अंतवस्ष तु के साथ ननम्नलिखित माि हैं : त्रबस्पायरीबैक सोडर्य म(आइएसओ);
इमैजैथापायर(आइएसओ) ।
9. ैररफ मर्द 3808 93 71 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 93 के जजसमें ननम्नलिखित
में से एक या अधधक है एक या अधधक को अंतववष्ट्ष करने वािे लमश्रण और ननलमनषतयां
हैं : आईएस-15160 के अनुरूप प्रेठ िाक्िोर (आइएसओ)।
10. ैररफ मर्द 3808 93 72 के अंतगतष उपशीर् ष 3808 93 वािे 90% से अधधक
वजन की अंतवस्ष तु के साथ केवि ननम्नलिखित लमश्रण और ननलमनषतयां है : त्रबस्पायरी
बैकसोडर्यम (आइएसओ); इमैजैथापायर (आइएसओ) ।”
(ii) शीर् ष 3808 में,—
(क) ैररफ मर्द 3808 91 37 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“--- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 1 और 2
में ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 91 41 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 1 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 91 42 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 2 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :
--- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 3 और 4
में ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 91 51 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 3 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
848
3808 91 52 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 4 में कक.ग्रा. 10% -”;
ववननठर्दषष्ट् माि :
(ि) ैररफ मर्द 3808 92 50 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“3808 92 60 --- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 5 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 92 70 --- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 6 में कक.ग्रा. 10% -”;
ववननठर्दषष्ट् माि :
(ग) ैररफ मर्द 3808 93 50 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के पश्चात,् ननम्नलिखित
अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“--- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 7 और 8
में ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 93 61 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 7 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 93 62 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 8 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :
--- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 9 और
10 में ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 93 71 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 9 में कक.ग्रा. 10% -
ववननठर्दषष्ट् माि :
3808 93 72 ---- इस अध्याय के अनुपूरक ठ प्पण 10 में कक.ग्रा. 10% -”;
ववननठर्दषष्ट् माि :
(14) अध्याय 39 में, शीर् ष 3915 में, ैररफ मर्द 3915 90 75 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के
पश्चात,् ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“3915 90 79 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 7.5% -”;
(15) अध्याय 48 में, शीर् ष 4811 में, ैररफ मर्द 4811 90 94 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“4811 90 94 ---- जंबो रोिों में (1 मी र और उससे ऊपर की कक.ग्रा. 10% -
चौड़ाई तथा 5000 मी र और उससे ऊपर
की िंबाई में) थमिष कागज
4811 90 95 ---- जंबो रोिों में (1 मी र और उससे ऊपर की कक.ग्रा. 10% -
चौड़ाई तथा 5000 मी र और उससे कम
की िंबाई में) थमिष कागज
4811 90 96 ---- एक मी र से कम की चौड़ाई में रोिों में कक.ग्रा. 10% -”;
थमिष कागज
(16) अध्याय 52 में, शीर् ष 5201 में, ैररफ मर्द 5201 00 20 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
849
“--- अन्द्य:
5201 00 21 ---- 20.0 लममी स े अनधधक स् ेपि िंबाई का कक.ग्रा. 5% -
5201 00 22 ---- 20.0 लममी स े अधधक ककंतु 24.5 लममी स े कक.ग्रा. 5% -
अनधधक स् ेपि िंबाई का
5201 00 23 ---- 24.5 लममी स े अधधक ककंतु 27.0 लममी स े कक.ग्रा. 5% -
अनधधक स् ेपि िंबाई का
5201 00 24 ---- 27.0 लममी स े अधधक ककंतु 32.0 लममी स े कक.ग्रा. 5% -
अनधधक स् ेपि िंबाई का
5201 00 25 ---- 32.0 लममी स े अधधक स् ेपि िंबाई का कक.ग्रा. 5% -”;
(17) अध्याय 54 में, शीर् ष 5402 में,—
(i) ैररफ मर्द 5402 11 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा
जाएगा, अथाषत ् :—
“5402 11 00 -- एरामाइर् के कक.ग्रा. 5% -”;
(ii) उपशीर् ष 5402 59, ैररफ मर्द 5402 59 90 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“5402 59 00 -- अन्द्य कक.ग्रा. 5% -”;
(18) अध्याय 57 में, शीर् ष 5702 में, ैररफ मर्द 5702 39 20 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के
पश्चात,् ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“5702 39 90 --- अन्द्य वग ष 20% -”;
मी र
(19) अध्याय 61 में, शीर् ष 6115 में, उपशीर् ष 6115 21 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“- अन्द्य प ैं ी होज और ाइट्स :”;
(20) अध्याय 62 में,—
(i) शीर् ष 6213 में,—
(क) उपशीर् ष 6213 90 के सामने आने वाि े स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“- अन्द्य ैक्स ाइि सामधग्रयों के :”;
(ि) ैररफ मर्द 6213 90 90 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- अन्द्य” ;
(ii) शीर् ष 6217 में,—
(क) ैररफ मर्द 6217 10 10 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
850
“--- सूत के वस्त्रों की वस्तुओं के लिए”;
(ि) ैररफ मर्द 6217 10 20 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- कृत्रत्रम फाइबर के वस्त्रों की वस्तुओं के
लिए”;
(ग) ैररफ मर्द 6217 10 30 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- ऊन के वस्त्रों की वस्तुओं के लिए”;
(घ) ैररफ मर्द 6217 10 40 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- रेशम के वस्त्रों की वस्तुओं के लिए”;
(ङ) ैररफ मर्द 6217 10 50 के सामने आने वाि े स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- पुन: जननत फाइबर के वस्त्रों की वस्तुओं
के लिए”;
(च) ैररफ मर्द 6217 10 60 के सामने आने वाि े स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- अन्द्य फाइबर के वस्त्रों की वस्तुओं के
लिए”;
(छ) ैररफ मर्द 6217 10 70 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- सूत की स् ाककंग, जुराबें, साके और वैसी
ही वस्तुएं”;
(21) अध्याय 63 में,—
(i) शीर् ष 6301 में, ैररफ मर्द 6301 20 00 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“- ऊन या सूक्ष्म प्राणी रोम के कंबि (ववद्युत
कंबिों से लभन्द्न) और यात्रा रग”;
(ii) शीर् ष 6304 में, ैररफ मर्द 6304 20 00 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“- इस अध्याय के उपशीर् ष के ठ प्पण 1 में
ववननठर्दषष्ट् बेर् ने ”;
(iii) शीर् ष 6310 में, ैररफ मर्द 6310 10 90 से 6310 90 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों
के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“6310 10 90 --- अन्द्य कक.ग्रा. 20% -
6310 90 - अन्द्य:
6310 90 10 --- ऊनी रग कक.ग्रा. 20% -”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
851
(22) अध्याय 69 में,—
(i) ठ प्पण 1 के आरंलभक भाग में, “आकार र्देने” शब्र्दों के स्थान पर “आकार र्देने” शब्र्द रि े
जाएंगे ;
(ii) शीर् ष 6907 में, उपशीर् ष 6907 30, ैररफ मर्द 6907 30 10, उपशीर् ष 6907 40, ैररफ
मर्द 6907 40 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा,
अथाषत ् :—
“6907 30 00 - उपशीर् ष 6907 40 में स े लभन्द्न मोजाइक व.मी. 15% -
क्यूबें और वैसी ही वस्तुएं
6907 40 00 - चीनी लमट् ी के उत् पार्दों का पररष्ट् करण व.मी. 15% -”;
(23) अध्याय 71 में,—
(i) उपशीर् ष ठ प्पण 3 के पश्चात,् ननम्नलिखित अनुपूरक ठ प्पण अंत:स्थावपत ककया जाएगा,
अथाषत ् :—
“अनुपूरक ठ प्पण :
शीर् ष 7104 के प्रयोजनों के लिए, “हीरक” से,—
(क) रसायननक रूप से उत्पाठर्दत ऐसे रत्न अलभप्रेत हैं, जजनमें आवश्यक रूप
से वही रसायननक संयोजन और कक्रस् ि संरचना है जैसी कक ववलशष्ट् प्राकृनतक
हीरक में होती है । इन्द्हें ववलभन्द्न पद्धनतयों का उपयोग करके उत्पाठर्दत ककया जाता
है, जजनके अंतगतष उच्च र्दाब, उच्च ताप पद्धनत (एचपीएच ी) और रसायननक वाष्ट्प
ननिेप पद्धनत (सीबीर्ी) भी है ; या
(ि) ववलभन्द्न साधनों द्वारा कृत्रत्रम रूप स े प्राप्त रत्न अथाषत ् संपीडड़त करके,
र्दाब करया (प्रानयकत: धमन पाइप की सहायता से) प्राकृनतक हीरकों के ऐस े ुकड़ों
के साथ संगलित करके, जजन्द्हें साधारणतया चूण ष के रूप में बनाया गया है ।’’;
(ii) शीर् ष 7104 में,-
(क) ैररफ मर्द 7104 21 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“7104 21 -- हीरक :
7104 21 10 --- औद्योधगक सी/के 10% -
7104 21 20 --- गैर-औद्योधगक सी/के 10% -”;
(ि) ैररफ मर्द 7104 91 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित
रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“7104 91 -- हीरक :
7104 91 10 --- औद्योधगक सी/के 10% -
7104 91 20 --- गैर-औद्योधगक सी/के 10% -”;
(iii) शीर् ष 7105 में, ैररफ मर्द 7105 10 00 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“7105 10 - हीरक का:
7105 10 10 --- शीर् ष 7102 का सी/के 10% -अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
852
7105 10 20 --- शीर् ष 7104 का सी/के 10% -”;
(iv) शीर् ष 7113 में,—
(क) ैररफ मर्द 7113 11 20 और 7113 11 30 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- अन्द्य आभूर्ण :
7113 11 41 ---- त्रबना जड़ा हुआ कक.ग्रा. 25% -
7113 11 42 ---- मोती जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 11 43 ---- शीर् ष 7102 के हीरक जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 11 44 ---- शीर् ष 7104 के हीरक जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 11 45 ---- अन्द्य बहुमूल्य और अध ष बहुमूल्य रत्न कक.ग्रा. 25% -
जडड़त
7113 11 49 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 25% -”;
(ि) ैररफ मर्द 7113 19 10 से 7113 19 50 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- स्वण ष का :
7113 19 11 ---- त्रबना जड़ा हुआ कक.ग्रा. 25% -
7113 19 12 ---- मोती जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 19 13 ---- शीर् ष 7102 के हीरक जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 19 14 ---- शीर् ष 7104 के हीरक जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 19 15 ---- अन्द्य बहुमूल्य और अध ष बहुमूल्य रत्न कक.ग्रा. 25% -
जडड़त
7113 19 19 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 25% -
--- प्िेठ नम का :
7113 19 21 ---- त्रबना जड़ा हुआ कक.ग्रा. 25% -
7113 19 22 ---- मोती जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 19 23 ---- शीर् ष 7102 के हीरक जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 19 24 ---- शीर् ष 7104 के हीरक जडड़त कक.ग्रा. 25% -
7113 19 25 ---- अन्द्य बहुमूल्य और अध ष बहुमूल्य रत्न कक.ग्रा. 25% -
जडड़त
7113 19 29 ---- अन्द्य कक.ग्रा. 25% -”;
(24) अध्याय 84 में,—
(i) शीर् ष 8414 में, ैररफ मर्द 8414 10 00 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“8414 10 - ननवाषत पम्प :
8414 10 10 --- जजनकी अधधकतम प्रभाव र्दर 5 एम³/एच इ 7.5% -
(मानक तापमान (273 के (0 °से)) औरअनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
853
र्दाब (101.3 केपीए) र्दशा) के अधीन
8414 10 90 --- अन्द्य इ 7.5% -”;
(ii) शीर् ष 8419 में,—
(क) ैररफ मर्द 8419 50 10 से 8419 50 90 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- 0.15 मी² से अधधक और 20 मी² से कम
के ताप अंतरण सतह िेत्र सठहत :
8419 50 11 ---- शेि और ट्यूब प्रकार के इ 7.5% -
8419 50 12 ---- प्िे प्रकार के इ 7.5% -
8419 50 13 ---- स्पाइरि प्रकार के इ 7.5% -
8419 50 19 ---- अन्द्य इ 7.5% -
--- अन्द्य :
8419 50 91 ---- शेि और ट्यूब प्रकार के इ 7.5% -
8419 50 92 ---- प्िे प्रकार के इ 7.5% -
8419 50 93 ---- स्पाइरि प्रकार के इ 7.5% -
8419 50 99 ---- अन्द्य इ 7.5% -”;
(ि) ैररफ मर्द 8419 89 10 और उसस े संबंधधत प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा
जाएगा, अथाषत ् :—
“--- र्दाब वािे बतनष , ररएक् स,ष कािम्स या
ावस ष या रासायननक भंर्ारण ैंक :
8419 89 11 ---- र्दाब जियान इ 10% -
8419 89 12 ---- 0.1 मी³ (100 िी) स े अधधक और 20 मी³ इ 10% -
(20000 िी) से कम के कुि आंतररक
(ज्यालमनत) आयतन वािे ररएक् सष
8419 89 13 ---- अन्द्य ररएक् सष इ 10% -
8419 89 14 ---- 0.1 मी स े अधधक आंतररक अध ष ब्यास के इ 10% -
आसवन या अवशोधन कािम
8419 89 15 ---- अन्द्य आसवन या अवशोधन कािम इ 10% -
8419 89 16 ---- 0.1 मी³ (100 िी) स े अधधक कुि इ 10% -
आंतररक (ज्यालमनत) आयतन वािे
रासायननक भंर्ारण ैंक
8419 89 17 ---- अन्द्य रासायननक भंर्ारण ैंक इ 10% -
8419 89 19 ---- अन्द्य इ 10% -”;
(25) अध्याय 85 में,—
(i) शीर् ष 8517 में,—अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
854
(क) ैररफ मर्द 8517 62 30 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान
पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- वायरिाइन ेिीफोनी आधाररत
एक्सर्ीएसएि के लिए मोर्ेम (मोर्ुिे र-
डर्मोर्ुिे र)”;
(ि) ैररफ मर्द 8517 62 40 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों का िोप ककया जाएगा ;
(ग) ैररफ मर्द 8517 62 70के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर,
ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- पीर्ीएच आधाररत वायरिाइन ेिीफोनी के
लिए बहुसंकेतक, सांजख्यकीय बहुसंकेतक”;
(घ) उपशीर् ष 8517 69 में,—
(अ) ैररफ मर्द 8517 69 50 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों का िोप ककया
जाएगा;
(आ) ैररफ मर्द 8517 69 60 के सामने आने वािे स्तंभ (2) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“--- वायरिाइन ेिीफोनी के लिए इं रने तक
पहुंच प्राप्त करने हेतु से ाप बाक्स”;
(ii) शीर् ष 8524, ैररफ मर्द 8524 11 00 से ैररफ मर्द 8524 99 00 और उससे संबंधधत
प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित रिा जाएगा, अथाषत ् :—
“8524 फ्िै पैनि डर्सप्िे मोड्यूि, जजनमें चाहे च-
सेन्द्सठ व स्क्रीन समाववष्ट् हैं या नहीं
- ड्राइवर या ननयंत्रण पररपथ रठहत :
8524 11 -- तरि कक्रस् ि के:
8524 11 10 --- उपशीर् ष 8471 30 या 8471 41 के माि के इ 15% -
लिए
8524 11 20 --- उपशीर् ष 8517 13 या 8517 14 के माि के इ 15% -
लिए
8524 11 30 --- उपशीर् ष 8528 72 या 8528 73 के माि के इ 15% -
लिए
8524 11 90 --- अन्द्य इ 15% -
8524 12 -- काबनषनक प्रकाश-उत्सजकष र्ायोर् (ओएिईर्ी) :
8524 12 10 --- उपशीर् ष 8471 30 या 8471 41 के माि के इ 15% -
लिए
8524 12 20 --- उपशीर् ष 8517 13 या 8517 14 के माि के इ 15% -
लिए
8524 12 30 --- उपशीर् ष 8528 72 या 8528 73 के माि के इ 15% -
लिए
8524 12 90 --- अन्द्य इ 15% -अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
855
8524 19 -- अन्द्य :
8524 19 10 --- उपशीर् ष 8471 30 या 8471 41 के माि के इ 15% -
लिए
8524 19 20 --- उपशीर् ष 8517 13 या 8517 14 के माि के इ 15% -
लिए
8524 19 30 --- उपशीर् ष 8528 72 या 8528 73 के माि के इ 15% -
लिए
8524 19 90 --- अन्द्य इ 15% -
- अन्द्य :
8524 91 -- तरि कक्रस् ि के :
8524 91 10 --- उपशीर् ष 8471 30 या 8471 41 के माि के इ 15% -
लिए
8524 91 20 --- उपशीर् ष 8517 13 या 8517 14 के माि के इ 15% -
लिए
8524 91 30 --- उपशीर् ष 8528 72 या 8528 73 के माि के इ 15% -
लिए
8524 91 90 --- अन्द्य इ 15% -
8524 92 -- काबनषनक प्रकाश-उत्सजकष र्ायोर् (ओएिईर्ी):
8524 92 10 --- उपशीर् ष 8471 30 या 8471 41 के माि के इ 15% -
लिए
8524 92 20 --- उपशीर् ष 8517 13 या 8517 14 के माि के इ 15% -
लिए
8524 92 30 --- उपशीर् ष 8528 72 या 8528 73 के माि के इ 15% -
लिए
8524 92 90 --- अन्द्य इ 15% -
8524 99 -- अन्द्य :
8524 99 10 --- उपशीर् ष 8471 30 या 8471 41 के माि के इ 15% -
लिए
8524 99 20 --- उपशीर् ष 8517 13 या 8517 14 के माि के इ 15% -
लिए
8524 99 30 --- उपशीर् ष 8528 72 या 8528 73 के माि के इ 15% -
लिए
8524 99 90 --- अन्द्य इ 15% -”;
(26) अध्याय 87 में, शीर् ष 8704 में, ैररफ मर्द 8704 10 10 और उससे संबंधधत प्रववजष्ट् यों के
पश्चात,् ननम्नलिखित अंत:स्थावपत ककया जाएगा, अथाषत ् :—
“8704 10 90 --- अन्द्य इ 40% -”;अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
856
पांचवी अनुसूची
[िारा 136 देखखए]
सीमाशुल्क ैररफ अधधननयम की र्दसू री अनुसूची में, क्रम संख्यांक 8 और 9 तथा उससे संबंधधत
प्रववजष्ट् यों के स्थान पर, ननम्नलिखित क्रम संख्यांक और प्रववजष्ट् यां रिी जाएंगी, अथाषत ् :—
क्र. सं. अध्याय/शीर्/षउप माि का वववरण शुल्क की र्दर
शीर्/ष ैररफ मर्द
(1) (2) (3) (4)
“8. “1202 41 मूंगफिी कवचयुक्त 1,125 रुपए प्रनत न
9. 1202 42 मूंगफिी धगरी 1,500 रुपए प्रनत न”।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
857
छिवीं अनुसूची
(िारा 171 देखखए)
ववत्त अधधननयम, 2001 की सातवीं अनुसूची में,—
(i) ैररफ मर्द 2402 20 10 के सामने आने वािे स्तंभ (4) में की
प्रववजष्ट् के स्थान पर, “230 रु. प्रनत हजार” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ii) ैररफ मर्द 2402 20 20 के सामने आने वाि े स्तंभ (4) में की
प्रववजष्ट् के स्थान पर, “290 रु. प्रनत हजार” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(iii) ैररफ मर्द 2402 20 30 और 2402 20 40 के सामने आने
वािे स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के स्थान पर, “510 रु. प्रनत हजार”
प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(iv) ैररफ मर्द 2402 20 50 के सामने आने वािे स्तंभ (4) में की
प्रववजष्ट् के स्थान पर, “630 रु. प्रनत हजार” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(v) ैररफ मर्द 2402 20 90 के सामने आने वािे स्तंभ (4) में की
प्रववजष्ट् के स्थान पर, “850 रु. प्रनत हजार” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(vi) ैररफ मर्द 2402 90 10 के सामने आने वािे स्तंभ (4) में की
प्रववजष्ट् के स्थान पर, “690 रु. प्रनत हजार” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ।अनुभाग
1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
858
“सातवीं अनुसूची
[िारा 135(र्) देखखए]
सीमाशुल् क ैररफ अधधननयम की पहिी अनुसूची के अध्याय 90 में,—
(i) ैररफ मर्द 9022 14 10 के सामने आने वािे स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, “15%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(ii) ैररफ मर्द 9022 14 20 के सामन े आने वािे स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, “15%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ;
(iii) ैररफ मर्द 9022 14 90 के सामने आने वािे स्तंभ (4) में की प्रववजष्ट् के
स्थान पर, “15%” प्रववजष्ट् रिी जाएगी ।”।
__________
MkWñ jktho ef.k]
सचिव, Hkkjr ljdkj
UPLOADED BY THE MANAGER, GOVERNMENT OF INDIA PRESS, MINTO ROAD, NEW DELHI–110002
AND PUBLISHED BY THE CONTROLLER OF PUBLICATIONS, DELHI–110054.
MGIPMRND—172GI(S3)—17-10-2024.