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Date: 2026-01-28 Category: Not Applicable State: Uttar Pradesh Country: India

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 528 क्षमता का पुरुष छात्रावास निर्माण संबंधी परियोजना की मूल्यांकित लागत के सापेक्ष निविदा मूल्य पर पुनरीक्षित लागत का प्रशासकीय एवं वित्तीय अनुमोदन प्रदान किये जाने के संबंध में ।

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Executive Summary & Key Takeaways

**कार्यकारी सारांश** यह दस्तावेज़ मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 528 क्षमता वाले पुरुष छात्रावास के निर्माण से संबंधित परियोजना के लिए मूल्यांकित लागत के विरुद्ध पुनरीक्षित लागत के लिए प्रशासनिक और वित्तीय अनुमोदन प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश सरकार यह स्वीकृति विश्वविद्यालय द्वारा निविदा मूल्य के लिए किए गए अनुरोध के जवाब में जारी करती है, जो मूल अनुमानित लागत से भिन्न है। व्यय वित्त समिति ने रुपये की कम लागत को मंजूरी दी। 4484.21 लाख और यह आदेश अंततः रुपये की संशोधित लागत को मंजूरी देता है। 4458.22 लाख कुछ शर्तों के अधीन। **मुख्य बातें** * **परियोजना अनुमोदन:** * 528 क्षमता वाले पुरुष छात्रावास के निर्माण के लिए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर को पुनरीक्षित लागत के लिए प्रशासनिक और वित्तीय अनुमोदन। * **वित्तीय विवरण:** * व्यय वित्त समिति ने पहले परियोजना लागत को रुपये पर मंजूरी दी। 4484.21 लाख। * स्वीकृत निविदा मूल्य अब रुपये पर निर्धारित किया गया है। 4458.22 लाख, कुछ नियमों और प्रतिबंधों के अधीन। * **अनुपालन आवश्यकताएं:** * वित्त (आय-व्यय) अनुभाग-1 द्वारा दिए गए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करें, जो 27.03.2025 को प्रकाशित हुए थे। * अनुमोदित परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का गठन करें और निर्धारित लागत के 10% से अधिक विचलन होने पर व्यय वित्त समिति से अनुमोदन प्राप्त करें। * परियोजना के लिए लागत का आकलन केवल प्रशासनिक/वित्तीय अनुमोदन और बजट आवंटन के उद्देश्यों के लिए किया गया है। तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद निर्माण शुरू होना चाहिए। * सुनिश्चित करें कि प्रशासनिक विभाग डुप्लिकेसी को रोकने के लिए किसी भी मौजूदा योजना के तहत परियोजना को पहले मंजूरी नहीं देता है। * **निविदा और लागत प्रबंधन:** * परियोजना के वित्तीय अनुमोदन और पहले किश्त वितरण को अनुमानित लागत के आधार पर जारी किया जाना चाहिए, लेकिन बाद में किश्तें संशोधित निविदा लागत के आधार पर जारी की जानी चाहिए। * यदि निविदा के बाद कार्यों की लागत में कमी आती है, तो बचाई गई धनराशि को राजकोष में जमा किया जाना चाहिए। * डीजी सेट और लिफ्ट की लागत बाजार कीमतों का उपयोग करके सत्यापित होनी चाहिए और इन वस्तुओं की खरीद वित्तीय नियमों के अनुपालन में की जानी चाहिए। * **विशेष आवश्यकताएं:** * यह सुनिश्चित करें कि दिव्यांगजनों के अनुकूल आवास के लिए harmonized दिशानिर्देशों और मानकों का पालन किया जाए। * परियोजना में 18% की दर से जीएसटी शामिल है, सामग्री खपत में GST का समन्वय करना सुनिश्चित करें। * डाइनिंग हॉल, जिम और डिजिटल रूम के लिए स्प्लिट एसी (2 टन के 25 नग) की अनुमति है। * **अतिरिक्त शर्तें:** * आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करें। * परियोजना में मात्राओं का मूल्यांकन अपरिवर्तित रखा गया है, जिनकी सटीक सटीकता की जिम्मेदारी संस्थान/एजेंसी की है। * परियोजना पर सभी कार्यों की मानक और गुणवत्ता के लिए संस्थान/एजेंसी जिम्मेदार है। * सरकारी धनराशि का उपयोग केवल उसी कार्य के लिए किया जाए जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई है और उस पर अर्जित कोई भी ब्याज राजकोष में जमा किया जाए। * उचित अनुमोदन के बिना उच्च विनिर्देशों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। **प्रभाव विश्लेषण** **प्रमुख हितधारक: मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर** **प्रभाव:** विश्वविद्यालय को अपने पुरुष छात्रावास निर्माण परियोजना के लिए वित्त प्राप्त है। **आवश्यक कार्रवाई:** विश्वविद्यालय को ऊपर उल्लिखित नियमों और शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए, निर्माण के लिए आवंटित धनराशि का कुशल और प्रभावी ढंग से उपयोग करना चाहिए, और परियोजना के वित्तीय और प्रगति संबंधी सभी विवरणों को समय पर प्रस्तुत करना चाहिए। **प्रमुख हितधारक: कार्यदायी संस्था (सी.ए.डी.एस. जल निगम)** **प्रभाव:** परियोजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार। **आवश्यक कार्रवाई:** कार्यदायी संस्था को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो जाए और सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन हो। इसके अतिरिक्त, उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वीकृत अनुमान में निर्धारित सीमा के भीतर ही सेंटेज प्रभार लिए जाएं। **प्रमुख हितधारक: उत्तर प्रदेश सरकार (प्राविधिक शिक्षा अनुभाग-1)** **प्रभाव:** परियोजनाओं को मंजूरी देकर और निधि जारी करके प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विकास की निगरानी करना और सुनिश्चित करना। **आवश्यक कार्रवाई:** अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को परियोजना की प्रगति और वित्तीय उपयोग की निगरानी करनी चाहिए और आवश्यक होने पर सुधारात्मक उपाय करने चाहिए। **प्रमुख हितधारक: महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज** **प्रभाव:** सरकारी धन के लिए लेखांकन रिकॉर्ड और लेखापरीक्षा रखना। **आवश्यक कार्रवाई:** परियोजना निधियों के सभी संवितरणों को विधिवत दर्ज करना और लेखापरीक्षा के माध्यम से वित्तीय अनुपालन और सटीकता सुनिश्चित करना। **प्रमुख हितधारक: जिलाधिकारी, गोरखपुर** **प्रभाव:** जिले के भीतर परियोजनाओं के समन्वय और निगरानी में शामिल। **आवश्यक कार्रवाई:** मिट्टी भरने से संबंधित आवश्यक तकनीकी समिति की संस्तुति सुनिश्चित करना, यदि आवश्यक हो, तो यह सुनिश्चित करना कि निर्माण गतिविधियों का उचित समन्वय किया जाए।

Key Entities Referenced

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर: गोरखपुर स्थित एक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जहाँ 528 क्षमता के पुरुष छात्रावास के निर्माण परियोजना से संबंधित यह दस्तावेज़ है। वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार का विभाग जो इस परियोजना के वित्तीय पहलुओं का प्रबंधन करता है और दिशा-निर्देश जारी करता है (उदाहरण के लिए, शासनादेश दिनांक 17 मई, 2023). सी.एण्ड.डी.एस जल निगम: शासन द्वारा नामित कार्यदायी संस्था जो इस परियोजना के विस्तृत आगणन और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है। व्यय वित्त समिति: एक समिति जो परियोजना की लागत का मूल्यांकन और अनुमोदन करती है। उत्तर प्रदेश शासन: राज्य सरकार जो नीतिगत निर्णय लेती है और परियोजना को मंजूरी देती है (उ0प्र0 शासन)
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WeAI-_06/2026/208649/2026/ 004 76 002 099 4 2024 प्रेषक, प्रभाकर चन्द्र मिश्र, संयुक्त सचिव उ0प्र0 शासन। सेवा में, कुल सचिव, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर | प्राविधिक शिक्षा अनुभाग-] लखनऊ : दिनांक- 2 जनवरी, 2026 विषय:- मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 528 क्षमता का पुरुष छात्रावास निर्माण संबंधी परियोजना की मूल्यांकित लागत के सापेक्ष निविदा मूल्य पर पुनरीक्षित लागत का प्रशासकीय एवं वित्तीय अनुमोदन प्रदान किये जाने के संबंध में। महोदय, उपर्युक्त विषयक अपने पत्र संख्या-मा०प्रोण्वि०/अधि० नियोजन/404/2025, fectH-76.42.2025 एवं अनुपूरक आख्या संबंधी पत्र संख्या-मा०प्रो०गवि०/अधि० नियोजन/404/2025, दिनांक-6.2.2025 का कृपया संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके द्वारा वित्त विभाग के शासनादेश दिनांक 7, मई 2023 मैं वर्णित व्यवस्था के आत्रोक में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 528 क्षमता का पुरुष छात्रावास निर्माण संबंधी परियोजना की मूल्यांकित त्रागत (प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति) के सापेक्ष निविदा मूल्य पर पुनरीक्षित लागत की प्रशासकीय एवं वितीय अनुमोदन प्रदान किये जाने के संबंध में शासन से अनुरोध किया गया है। 2. अवगत कराना है कि विश्वविद्यालय के पत्र दिनांक 05.03.2025 cant उपरोक्त परियोजना हेतु शासन द्वारा नामित कार्यदायी संस्था सी.एण्ड.डी.एस जल निगम से परियोजना का विस्तृत आगणन अनुमानित लागत रू0 4797.98 लाख उपलब्ध कराते हुए परियोजना की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति एवं परियोजना हेतु धनराशि अवमुक्त किये जाने का अनुरोध किया गया। परियोजना के विस्तृत आगणन का परीक्षण/मूल्यांकन (अप्रेजल) हेतु वित्त विभाग के माध्यम से व्यय वित्त वित्त समिति को संदर्भित किया गया, जिसे व्यय वित्त समिति की बैठक दिनांक 2-03-2025 A प्रस्तुत किया गया। समिति द्वारा प्रायोजना की प्रस्तावित लागत BO 4797.98 लाख के सापेक्ष Fo 4484.2 लाख की लागत अनुमोदित की गयी | 3. यह भी अवगत कराना है कि शासन के आदेश AKA-23/2025/954448/2025/00 6 002 099 4 2024, दिनांक 06 मई 2025 द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 528 क्षमता के पुरुष छात्रावास के निर्माण संबंधी परियोजना की व्यय वित्त समिति द्वारा मूल्यांकित लागत रू0 4484.24 लाख (रु० चबालीस करोड चौरासी लाख इककीस हजार मात्र) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति निर्गत की गयी है। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |4. अतएव इस के सम्बंध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि वित्त विभाग के शासनादेश AeAMT-0 /2023/8-2-60/E8-2023-7(4)/75/, दिनांक 47 मई, 2023 में वर्णित व्यवसथा के आलोक में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 528 क्षमता का पुरुष छात्रावास निर्माण संबंधी परियोजना की मूल्यांकित लागत BO 4484.24 are (रु० चवालीस करोड चौरासी लाख इक्कीस हजार मात्र) की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष कार्यदायी संस्था दूवारा संपादित निविदा प्रक्रिया के पश्चात निविदा मूल्य धनराशि रू0 4458.22 (रू० चवालीस करोड अटठावन लाख बाईस हजार मात्र) पर पुनरीक्षित लागत की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति निम्न लिखित नियम व शर्तें प्रतिबन्धों के अधीन निर्गत किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करती हैं :- नियमव शर्ते / प्रतिबन्धों (।) वित्त (आय-व्ययक) अनुभाग-, उ०प्र० शासन, दिनांक-27.03.2025 में दी गयी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। (2) वित्त विभाग के शासनादेश WO-0/202/sit-2-96/4a-202-0/99 दिनांक 22 मार्च, 202] के अनुसार अनुमोदित प्रायोजना की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के उपरान्त इसकी डी०पी०आर० गठित करने के उपरान्त ही तकनीकी स्वीकृति निर्गत की जाय। यदि इस प्रकिया A यह परिलक्षित होता है की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष तकनीकी स्वीकृति की लागत 0 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो रही है, तो प्रायोजना का पुनरीक्षित आगणन का गठन करते हुए 3 माह के भीतर पुनरीक्षित आगणन पर व्यय वित्त समिति का अनुमोदन प्राप्त किया जाय, अन्यथा की स्थिति में पुनरीक्षित प्रायोजना पर व्यय वित्त समिति cant विचार नहीं किया जायेगा | (3) वित्त विभाग के शासनादेश सं0-04/2023/ए-2-60/दस- 2023-7(4)/75, दिनांक 47 मई, 2023 के अनुसार परियोजना की वित्तीय स्वीकृति व प्रथम किश्त मूल्यांकित लागत पर जारी की जाये, किन्तु ट्वितीय fred जारी करने से पूर्व परियोजना की ल्रागत को निविदा में प्राप्त मूल्य (टेण्डर कॉस्ट) के अनुसार विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए पुनरीक्षित करा लिया जाये। परियोजना की अनुवर्ती किश्तें पुनरीक्षित लागत के आधार पर ही जारी की जायें ताकि कार्यदायी संस्था को कार्य की वास्तविक लागत से अधिक धनराशि अवमुक्त न हो सके। यदि निविदा के बाद कार्यों की लागत में कमी आती है तो बचत की धनराशि को सुसंगत वित्तीय नियमों के अन्तर्गत राजकोष में जमा किया जाये। (4) दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग GANT शासनादेश WO-5/202(/HIsa =0-65-203/2/209- 2, दिनांक (5 जनवरी, 202 के अनुपालन के क्रम में दिव्यांगजन हेतु भवनों को दिव्यांगजन हितैषी / बाधारहित बनाये जाने के लिए भारत सरकार द्वारा निर्गत "Harmonized guidelines and standards for universal accessibility in india, 202(" दिये गये प्रावधानों के अनुसार प्रशासकीय विभाग / कार्यदायी संस्था द्वारा भवन का निर्माण कराया जाना सुनिश्चित किया जाये। (5) प्रायोजनान्तर्गत 78 प्रतिशत की दर से जी०एसण्टी० की धनराशि सम्मिलित की गयी है। प्रायोजनान्तर्गत विभिन्‍न कार्यमदों से सम्बन्धित सामग्री की लागत प्रायोजना में उपभोग (CONSUMED) की गयी सामग्री यथा-सीमेन्ट, स्टील इत्यादि की मात्राओं का अनुपातिक मिल्रान करते हुए जी०एस०टी० भुगतान किया जाये। (6) प्रायोजनान्तर्गत डायनिंग हाल, जिम, डिजिटल रूम हेतु स्पिलिट ए०्सी०-2 टन (25 नग) अनुमन्य किया गया है। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(7) प्रायोजना प्रस्ताव/आगणन में प्रस्तावित डी०जी० सेट व लिफ्ट की ल्रागत को इंडीकेटिव दरें मानते हुए ल्रागत का परीक्षण किया गया है। अतः क्रियान्वयन से पूर्व कार्यदायी संस्था इस हेतु यथा सम्भव निर्माताओं से प्रतिस्पर्धा के आधार पर ल्रागत at प्राप्त करें। प्रशासकीय विभाग द्वारा निर्माण के समय इनका क्रय एवं स्थापना सुसंगत वित्तीय नियमों के आधार पर सुनिश्चित कराया जाय। (8) प्रायोजनान्तर्गत मिट॒टी भराई मद में रू0 30.00 लाख की धनराशि प्रस्तावित की गई है, Wed जिलाधिकारी द्वारा गठित तकनीकी समिति की संस्तुति न होने के कारण इस मद A फिलहाल मिट्टी भराई हेतु रू0 5.00 लाख की धनराशि अनुमन्य की गई है। अवशेष मिट्टी भराई की धनराशि जिलाधिकारी द्वारा गठित तकनीकी समिति की संस्तुति के उपरान्त देय होगी। (9) समस्त यथा आवश्यक वैधानिक अनापत्तियों एवं पर्यावरणीय क्ल्रियरेन्स सक्षम स्तर से प्राप्त करके ही निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया जाय। ((0) प्रायोजनान्तर्गत प्रस्तावित कार्यों की मात्राओं को यथावत मानते हुए मात्र दरों का परीक्षण किया गया है। मात्राओं को निर्माण के समय सुनिश्चित किये जाने का पूर्ण उत्तरदायित्व कार्यदायी संस्था / संस्थान का होगा। (2) प्रायोजना की लागत का आंकलन प्रशासकीय / वित्तीय अनुमोदन तथा बजट आवंटन के उद्देश्य से किया गया Sl प्रभाग का मत है कि प्रायोजना पर सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात्‌ ही निर्माण प्रारम्भ कराया जाय। (3) प्रायोजना प्रस्ताव/आगणन में प्रस्तावित विशिष्टियों एवं कार्य प्रावधानों को यथावत्‌ मानते हुए लागत का आंकलन किया गया है, जिनमें कोई उल्लेखनीय परिवर्तन जैसे-नये कार्य बढ़ाना एवं अन्य उच्च विशिष्टियाँ इस्तेमाल करना इत्यादि, व्यय वित्त समिति का पूर्व अनुमोदन प्राप्त किये बिना नहीं किया जायेगा। प्रशासकीय विभाग द्वारा इस आशय का उल्लेख सम्बन्धित स्वीकृति आदेश में सम्मिल्रित किया जायेगा। (।4) प्रायोजनान्तर्गत प्रस्तावित कार्यों की दविरावृत्ति (डृप्लीकेसी) को रोकने की दृष्टि से प्रायोजना की स्वीकृति से पूर्व प्रशासकीय विभाग द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा कि यह कार्य पूर्व मैं किसी अन्य योजना / कार्यक्रम के अन्तर्गत न तो स्वीकृत है और न वर्तमान में किसी अन्य योजना/कार्यक्रम में आच्छादित किया जाना प्रस्तावित है। ((5) परियोजना में नियमानुसार समस्त आवश्यक वैधानिक अनापत्तियाँ एवं पर्यावरणीय क्लियरैंस/वन विभाग की अनापत्ति सक्षम स्तर से प्राप्त कर एवं कार्यदायी संस्था के साथ एम0ओ0यू0 कराकर ही निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जायेगा | ((6) प्रायोजना का कार्य अनुमादन लागत मेँ ही यथाशीघ्र पूर्ण कराये जाना सुनिश्चित किया जाए। भविष्य में योजना का कोई भी पुनरीक्षण स्वीकार नहीं होगा | (47) प्रश्नगत निर्माण कार्य की विशिष्टियां मानक व गुणवत्ता की जिम्मेदारी संस्थान/कार्यदायी संस्था की होगी तथा वह यह सुनिश्चित Hist कि कार्य निर्धारित समय अवधि में ही पूर्ण कर लिया जाय | (48) यह सुनिश्चित किया जाये कि प्रायोजना के कार्यदायी संस्था द्वारा आगणन A अनुमोदित सीमा तक ही सेंटेज चार्ज लिया जाय। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(49) कार्यदायी संस्थाओं CANT निर्गत शासकीय धनराशि को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया/ राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही रखा जाएगा और यदि शासकीय धन पर कोई ब्याज अर्जित किया गया है तो उसे राजकोष में जमा कराना सुनिश्चित किया जाये। (20) प्रश्तनगत धनराशि का उपयोग उसी कार्य/मद में किया जायेगा जिस मद/कार्य के लिए धनराशि स्वीकृत की जा रही है। (2) आगणन मैं वर्णित लेबर सेस की कुल धनराशि इस शर्त के अधीन है कि श्रम विभाग को SFA धनराशि का भुगतान किया जाए। (22) sara धनराशि में से निर्माण कार्य हेतु वित्त विभाग के संगत शासनादेशानुसार आवश्यकता के अनुसार धनराशि कोषागार से आहरित कर कार्यदायी संस्था को उपलब्ध करायी जायेगी। (23) स्वीकृत की जा रही धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। (24) प्रायोजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व मानचित्रों को स्थालीय विकास प्रधिकरण/ सक्षम लोकल अथारिटी से स्वीकृत कराया जाये। (25) प्रायोजनान्तर्गत जी०एस०्टी० की धनराशि सम्मिलित है। कार्यदायी संस्था द्वारा अपने स्तर से सुनिश्चित किया जाए कि प्रायोजनान्तर्गत विभिन्‍न कार्य मर्दों में जी०एस०्टी० सम्मिलित न हो। (26) बजट प्रावधान के सापेक्ष धनराशि की उपलब्धता का दायित्व निदेशालय का होगा। वित्तीय स्वीकृति का आदेश विभाग द्वारा बजट प्राविधान के सापेक्ष अवशेष धनराशि की उपलब्ध्ता की स्थिति मेँ निर्गत किया जाए। (27) प्रायोजना प्रस्ताव आगणन मेँ पूर्ण किये जाने के कार्यो की मात्रायें एवं इनकी प्राप्त भौतिक प्रगति का समस्त उत्तरदायित्व प्रशासकीय विभाग/ कार्यदायी संस्था का होगा। (28) निर्माण A संगत वित्तीय शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाय | (29) निष्प्रयोज्य होने वाले उपकरणों/सामग्री से प्राप्त धनराशि राजकोष में जमा कराना सुनिश्चित किया जायेगा। 5- यह आदेश कंप्यूटर TANT उत्पन्न ALA <E-7-332-x-2025-26>, feelh-27.07.2926 FA प्राप्त वित्त विभाग की सहमति से निर्गत किये जा रहे है। भवदीय, प्रभाकर चन्द्र मिश्र, संयुक्त सचिव। WSAT-_06/2025/208649/2026/00-6 7002 099 4 2024 , aq दिनांक। 06/2025/208649/2026/00-6 4002 099 4 2024 , aq | प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- (]) महालेखाकार (लेखा Ud हकदारी), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज। (2) महालेखाकार, आडिट प्रथम, उ0प्र0, प्रयागराज। (3) जिलाधिकारी, गोरखपुर | (4) मुख्य/वरिष्ठ कोषाधिकारी, गोरखपुर | (5) निदेशक, स्थानीय लेखा परीक्षा, उ0प्र0, प्रयागराज। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |(6) प्रबंध निदेशक, सी.एण्ड.डी.एस जल निगम, लखनऊ। (7) नोडल अधिकारी, बजट एल्राटमेंट सिस्टम, उ0प्र0 शासन। (8) परियोजना प्रबंधक, सी.एण्ड.डी.एस ae निगम | (9) वित्त(व्यय नियंत्रण) HeTeTaT-4, उ0प्र0 शासन। (0) वित्त (आय-व्यियक) अनुभाग-, उ0प्र0 शासन। (4) निदेशक/वित्त नियंत्रक, प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, कानपुर। (2) प्राविधिक शिक्षा अनुभाग-3, उ0प्र0 शासन। (43) गार्ड फाइल्र। आज्ञा से, प्रभाकर चन्द्र मिश्र, संयुक्त सचिव। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |

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