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Date: 2026-02-24 Category: Not Applicable State: Maharashtra Country: India

PART VIII EXT. No. 5, L. A. BILL No. II OF 2026 A BILL further to amend the Maharashtra Zilla Parishads and Panchayat Samitis Act, 1961. Tuesday, 24th February 2026.

Issued by CENTRAL SECTION · Not Applicable

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Executive Summary & Key Takeaways

**Executive Summary** This document presents the Maharashtra Zilla Parishads and Panchayat Samitis (Amendment) Act, 2026, to amend the Maharashtra Zilla Parishads and Panchayat Samitis Act, 1961. The act, published on February 24, 2026, aims to incorporate changes addressing the State Election Commission's concerns regarding pending appeals in various courts. It repeals the Maharashtra Zilla Parishad and Panchayat Samiti (Amendment) Ordinance, 2025, effective from December 26, 2025. **Key Points / Main Content** * **Amendment of Section 14 of the Maharashtra Zilla Parishads and Panchayat Samitis Act, 1961:** * Replaces sub-section (2) of Section 14 with a new provision stating that the State Government will formulate rules for conducting elections and will conduct elections following those rules. * Adds a provision stating that the Election Officer's decision on accepting or rejecting nomination forms will be final and cannot be challenged in any court. * **Repeal and Saving Clause:** * Repeals the Maharashtra Zilla Parishad and Panchayat Samiti (Amendment) Ordinance, 2025. * Ensures that any actions taken or proceedings initiated under the original Act, as amended by the repealed Ordinance, will be considered to have been done under the corresponding provisions of the amended Act. **Impact Analysis** **Stakeholder: State Government** * **Impact:** The State Government is responsible for formulating rules for conducting elections for Zilla Parishads and Panchayat Samitis. * **Action Required:** Formulate and implement new rules for conducting these elections. **Stakeholder: Election Officer** * **Impact:** The Election Officer's decision on accepting or rejecting nomination papers is final and not subject to judicial review. * **Action Required:** To act as the sole decision-maker. **Stakeholder: Judiciary** * **Impact:** District Courts are no longer able to review the decision on accepting or rejecting nominations. * **Action Required:** Cease to hear appeals related to the acceptance or rejection of nomination papers. **Stakeholder: State Election Commission** * **Impact:** The State Election Commission has been informed that appeals are no longer an issue. * **Action Required:** Proceed to conduct elections.

Key Entities Referenced

Maharashtra Zilla Parishads and Panchayat Samitis Act, 1961: The primary act being amended by the bill. Maharashtra Zilla Parishad and Panchayat Samiti (Amendment) Ordinance, 2025: Ordinance being replaced by the act. State Election Commission: Mentioned as informing the state government that appeals are pending and that an appeal to the district court on an election officer’s acceptance or rejection of a nomination is preventing the election commission from completing the election in a timely manner.
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RNI No. MAHBIL /2009/31730 मांहाारााष्ट्रट शोासन राा�पत्र असाधााराण भााग सात �षष १२, अ�का २(३)] मां�गळ�ारा, फेेब्रुु�ाराी २४, २०२६/फेाल्गुन ५, शोकाे १९४७ [पष्ृठे े३, विकांमांत : रुपय े४७.०० असाधााराण क्रमांा�का ५ प्रााविधाकाृत प्राकााशोन अध्यादेशो, वि�धाेयकाे � अविधाविनयमां या�चाा विहा�दी अनु�ाद (दे�नागराी विलापी). मांहाारााष्ट्र वि�धाानमां�डळ सविचा�ालाय मंहींारााष्ट्र वि�धाानसाभाा मंं विदोनांके २४ फेरा�राी, २०२६ ई. केो. पाुरा:�थााविपात विनम्न वि�धाेयके मंहींारााष्ट्र वि�धाानसाभाा विनयमं ११७ केे अधाीन प्रकेावि�त विकेया �ाता हींै :- L. A. BILL No. II OF 2026. A BILL further to amend the Maharashtra Zilla Parishads and Panchayat Samitis Act, 1961. वि�धाानसभाा काा वि�धाेयका क्रमांा�का २ सन् २०२६। मांहाारााष्ट्र वि�लाा परिराषद तथाा प�चाायत सविमांवित अविधाविनयमां, १९६१ मांं अविधाकातरा स�शोोधान काराने स�बं�विधा वि�धाेयका। क्यंविका रााज्य वि�धाानमंंडल केे दोोनं सादोनं केा सात्र नहींं चल राहींा थाा ; औरा क्यंविका मंहींारााष्ट्र केे रााज्यपााल केा यहीं सामंाधाान हींो चुकेा थाा विके, ऐसाी पारिरास्थि�थावितया� वि�द्यमंान सान् २०२५ केा मंहींा. १९६२ केा थां, वि�नकेे केाराण उन्हींं, इसामंं आगे दोवि�ित प्रयो�नं केे विलए, मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित अध्या. १४ | मंहींा. ५। अविधाविनयमं, १९६१ मंं अविधाकेतरा सां�ोधान केराने केे विलए साद्य केायि�ाहींी केराना आ�श्यके हींुआ थाा ; औरा (१) भााग साात-५-१2 मांहाारााष्ट्रट शोासन राा�पत्र असाधााराण भााग सात, फेेब्रुु�ाराी २४, २०२६/फेाल्गुन ५, शोकाे १९४७ इसाविलए, मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित (सां�ोधान) अध्यादोे�, २०२५,२६ विदोसाम्बरा २०२५ केो प्रख्याविपात हींुआ थाा ; औरा क्यंविका, उक्त अध्यादोे� केो रााज्य वि�धाानमंडं ल के ेअविधाविनयमं मं ंबदोलना इष्टकेरा हीं ै; अत: भाारात गणरााज्य केे सातहींत्तरा�े �षि मंं, एतद् द्वााराा, विनम्न अविधाविनयमं अविधाविनयविमंत विकेया �ाता हींै :— सांवि�प्त नामं, १. (१) यहीं अविधाविनयमं मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित (सां�ोधान) अविधाविनयमं, औरा प्राराम्भाण। २०२६ केहींलाए। (२) यहीं २६ विदोसाम्बरा २०२५ केो प्र�ृत्त हींुआ सामंझाा �ायेगा। १९६२ केा मंहींा. २. मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित अविधाविनयमं, १९६१ (वि�साे इसामंं आगे, “मंूल ५ केी धााराा १४ मंं अविधाविनयमं” केहींा गया हींै) केी धााराा १४ केी, उपा-धााराा (२) केे �थाान मंं विनम्न उपा-धााराा राखीी �ायेगी, १९६२ केा सां�ोधान। मंहींा. ५ | अथााित :— “(२) रााज्य साराकेारा ऐसा ेविन�ािचनं केा आयो�न केरान ेके ेविलए विनयमं बनाएगी औरा उसा विनयमंं केे अनुसाराण मंं विन�ािचन केराेगी। (३) नामंविनदोे�न प्रपात्र ��ीकेृत या अ��ीकेृत केराने केा अंवितमं विनणिय विन�ािचन अविधाकेाराी केा हींोगा औरा उसाे विकेसाी न्यायालय मंं प्रश्नगत नहींं विकेया �ाएगा। ”। सान् २०२५ केा ३. (१) मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित (सां�ोधान) अध्यादोे�, २०२५, एतद् द्वााराा, सान् २०२५ मंहींा. अध्या. क्र. विनराविसात विकेया �ाता हीं।ै केा मंहींा. १४ केा विनरासान अध्या. क्र. औरा व्या�ृवित्त। (२) ऐसाे विनरासान केे हींोते हींुए भाी, उक्त अध्यादोे� द्वााराा यथाा सां�ोविधात मंूल अविधाविनयमं केे १४ । तत्�थाानी उपाबंधां केे अधाीन केृत केोई बात या केी गई केोई केायि�ाहींी (�ाराी विकेसाी अविधासाूचना, विनयमंं या आदोे� सामंेत) इसा अविधाविनयमं द्वााराा यथाा सां�ोविधान मंूल अविधाविनयमं केे तत्�थाानी उपाबंधां केे अधाीन केृत, केी गई, या यथाास्थि�थावित, �ाराी केी गई सामंझाी �ायेगी।मांहाारााष्ट्रट शोासन राा�पत्र असाधााराण भााग सात, फेेब्रुु�ाराी २४, २०२६/फेाल्गुन ५, शोकाे १९४७ 3 उद्देेश्यं औरा कााराणं काा �क्तव्य। भाारातीय सांवि�धाान केे अनुच्छेेदो २४३ट औरा मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित अविधाविनयमं, १९६१ (सान् १९६२ केा मंहींा. ५) केी धााराा ९के यहीं उपाबंधा केराती हींै विके, वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवितयं केे साभाी विन�ािचन केराने केे विलए विन�ािचके नामंा�ली तैयारा केराने औरा वि�ला पारिराषदो तथाा पांचायत साविमंवितयं केे विन�ािचन लेने केे विलए अधाी�ण, विनदोे�न औरा विनयंत्रण रााज्य विन�ािचन आयोग मंं विनविहींत हींोगा । २. उक्त अविधाविनयमं केी धााराा १४ (२) यहीं उपाबंधा केराती हींै विके, रााज्य साराकेारा, नामंविनदोे�न प्रपात्र केी ��ीकेृवित या अ��ीकेृत केराने केे विन�ािचन अविधाकेाराी केे वि�विनणिय केे वि�रुद्ध वि�ला न्यायालय मंं अपाील केराने सामंेत ऐसाे विन�ािचनं केा आयो�न केराने केे विलए विनयमं बनाएगी । तद्नुसाारा, मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदों (विन�ािचके �ेत्र औरा विन�ािचन केा आयो�न) विनयमं, १९६२ केा विनयमं २० औरा मंहींारााष्ट्र पांचायत साविमंवित (विन�ािचके गण औरा विन�ािचन केा आयो�न) विनयमं, १९६२ केा विनयमं १९के मंं, नामंविनदोे�न प्रपात्र केी ��ीकेृवित या अ��ीकेृवित केे विन�ािचन अविधाकेाराी केे वि�विनणिय केे वि�रुद्ध वि�ला न्यायालय केे सामं� अपाील दोाविखील केराने केे बाराे मंं औरा वि�ला न्यायालय ने, ऐसाे अपाीलं केी साुन�ाई विदोन प्रवितविदोन केराने केे आधाारापारा केरानी हींोगी औरा यथाा सांभा� �ीघ्र उनकेा विनपाटाराा केराने केे विलए उपाबंधा केराती हींै। ३. रााज्य विन�ािचन आयोग ने रााज्य साराकेारा केो यहीं सांसाूविचत विकेया हींै विके, ऐसाे अपाील वि�विभान्न न्यायालयं मंं अलग-अलग अ�विधा केे विलए �ेष प्रलंविबत राहींे हींं औरा यहीं भाी विनस्थिश्चत नहींं विकेया हींै विके ऐसाे अपाीलं केा विनपाटान केब हींोगा। आयोग ने यहीं भाी सांसाूविचत विकेया हींै विके, सांवि�धाान केे अनुच्छेेदो २४३ण विन�ािचके मंामंलं मंं न्यायालयं द्वााराा हीं�त�ेपा केराने पारा राोके लगाने केा भाी उपाबंधा केराता हींै। इसाविलए, आयोग ने सामंयबद्धराीत्या विन�ािचनं केो पाूराा केराने केी दोृस्थिष्ट साे, ऐसाे अपाीलं साे सांबंविधात उपाबंधां केा अपामंा�िन केराने केे विलए उपायुिक्त विनदोेवि�त विनयमंं मंं यथाोविचत सां�ोधान केराने केा प्र�ता� रााज्य साराकेारा केो अग्रेेविषत विकेया हींै। इसाविलए, उक्त अविधाविनयमं केी धााराा १४ मंं यथाोविचत सां�ोधान केराना इष्टकेरा हींै। ४. चू�विके रााज्य वि�धाानमंंडल केे दोोनं सादोनं केा सात्र नहींं चल राहींा थाा औरा मंहींारााष्ट्र केे रााज्यपााल केा यहीं सामंाधाान हींो चुकेा थाा विके, ऐसाी पारिरास्थि�थावितया� वि�द्यमंान थाी वि�नकेे केाराण उन्हींं उपायुिक्त प्रयो�नं केे विलए, मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित अविधाविनयमं, १९६१ मंं अविधाकेतरा सां�ोधान केराने केे विलए, साद्य केायि�ाहींी केराना आ�श्यके हींुआ थाा; अतः मंहींारााष्ट्र केे रााज्यपााल द्वााराा मंहींारााष्ट्र वि�ला पारिराषदो औरा पांचायत साविमंवित सां�ोधान अध्यादोे�, २०२५ (सान् २०२५ केा मंहींा. अध्या. १४) २६ विदोसाम्बरा २०२५ केो प्रख्याविपात हींुआ थाा । ५. प्र�तुत वि�धाेयके केा आ�य उक्त अध्यादोे� केो रााज्य वि�धाानमंंडळ केे अविधाविनयमं मंं बदोलना हींै । मंुंबई, विदोनांविकेत १७ फरा�राी, २०२६। �यकाुमांारा गोराे, ग्रेामंवि�केासा मंंत्री | (यथााथाि अनु�ादो), श्रीी. अरुण कामांळाबंाई �ाळू विगते, प्रभााराी भााषा सांचालके, मंहींारााष्ट्र रााज्य। वि�धाान भा�न, वि�तंद्र भाोळे, मंुंबई, साविच�-१, विदोनांविकेत २४ फरा�राी, २०२६। मंहींारााष्ट्र वि�धाानसाभाा। ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.

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