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EXTRAORDINARY
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PART II—Section 1A
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PUBLISHED BY AUTHORITY
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No. 4 NEW DELHI, MONDAY, SEPTEMBER 9, 2024/BHADRA 18, 1946 (SAKA) VOL. LX
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Separate paging is given to this Part in order that it may be filed as a separate compilation.
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MINISTRY OF LAW AND JUSTICE
(Legislative Department)
New Delhi, September 9, 2024/Bhadra 8, 1946 (Saka)
The Translation in Hindi of the following, namely:—The Constitution (Scheduled
Tribes) Order (Amendment) Act, 2023; (2) The Constitution (Scheduled Tribes) Order
(Second Amendment) Act, 2023; (3) The Forest (Conservation) Amendment Act, 2023;
(4) The Digital Personal Data Protection Act, 2023; (5) The Constitution (Scheduled
Castes) Order (Amendment) Act, 2023; (6) The Pharmacy (Amendment) Act, 2023; (7) The
Central Goods and Services Tax (Amendment) Act, 2023; (8) The Integrated Goods and
Services Tax (Amendment) Act, 2023; (9) The Repealing and Amending Act, 2023;
(10) The Central Goods and Services Tax (Second Amendment) Act, 2023; (11) The
Provisional Collection of Taxes Act, 2023; (12) The Public Examinations (Preventation of
Unfair Means) Act, 2024 and (13) The Water (Prevention and Control of Pollution)
Amendment Act, 2024 are hereby published under the authority of the President and
shall be deemed to be the authoritative texts thereof in Hindi under clause (a) of
sub-section (1) of section 5 of the Official Languages Act, 1963 (19 of 1963):—i`"B
lafo/kku ¼vuqlwfpr tutkfr;ka½ vkns'k ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 13½ - - - - - 861
The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Amendment) Act, 2023
lafo/kku ¼vuqlwfpr tutkfr;ka½ vkns'k ¼nwljk la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 14½ - 863
The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Second Amendment) Act, 2023
ou ¼laj{k.k½ la'kks/ku vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 15½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 865
The Forest (Conservation) Amendment Act, 2023
fMftVy o;S fÙkd MkVk lja {k.k vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e l[a ;kda 22½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - 871
The Digital Personal Data Protection Act, 2023
lafo/kku ¼vuqlwfpr tkfr;ka½ vkns'k ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 24½ - - - - - - - 899
The Constitution (Scheduled Castes) Order (Amendment) Act, 2023
Hks"kth ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 29½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 901
The Pharmacy (Amendment) Act 2023
dsUnzh; eky vkSj lsok dj ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 30½ - - - - - - - - - - - - - 903
The Central Goods and Services Tax (Amendment) Act, 2023
,dhd`r eky vkSj lsok dj ¼la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 31½ - - - - - - - - - - - - - 907
The Integrated Goods and Services Tax (Amendment) Act, 2023
fujlu vkSj la'kks/ku vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 37½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 911
The Repealing and Amending Act, 2023
dsUnzh; eky vkSj lsok dj ¼nwljk la'kks/ku½ vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 48½ - - - - - - - - - - 919
The Central Goods and Services Tax (Second Amendment) Act, 2023
vuafre dj laxzg.k vf/kfu;e] 2023 ¼2023 dk vf/kfu;e la[;kad 50½ - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - 921
The Provisional Collection of Taxes Act, 2023
yksd ijh{kk ¼vuqfpr lk/ku fuokj.k½ vf/kfu;e] 2024 ¼2024 dk vf/kfu;e la[;kad 1½ - - - - - - - - - - - - - 923
The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024
ty ¼iznw"k.k fuokj.k vkSj fu;a=.k½ la'kks/ku vf/kfu;e] 2024 ¼2024 dk vf/kfu;e la[;kad 5½ - - - - - - - - - - 933
The Water (Prevention and Control of Pollution) Amendment Act, 2024अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण
861
सं�वधान (अनसु ू�चत जनजा�तयां) आदेश
(संशोधन) अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 13)
[4 अगस्त, 2023]
छत्तीसगढ़ राज् य के संबंध में अनुसू�चत जनजा�तयों क� सूची में क�तपय
समुदायों को सिम्म�लत करने के �लए सं�वधान
(अनुसू�चत जनजा�तयां) आदेश, 1950
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम सं�वधान (अनुसू�चत जनजा�तयां) आदेश सं�क्षप्त नाम ।
(संशोधन) अ�ध�नयम, 2023 है ।
सं.आ. 22 2. सं�वधान (अनुसू�चत जनजा�तयां) आदेश, 1950 क� अनुसूची के भाग 20— सं�वधान
छत्तीसगढ़ में,—
(अनुसू�चत
जनजा�तयां)
(i) प्र�विष्ट 5 के स्थान पर, �नम्न�ल�खत प्र�विष्ट रखी जाएगी, अथार्त ् :— आदेश, 1950 के
“5. भा�रया भू�मया, भुईंहार भू�मया, भू�मया, भ�रया, भूईंया, भूईयाँ, भाग 20 का
संशोधन ।
भूया,ं पा�लहा, पांडो या पंडो या पन्डो या पण्डो”;
(ii) प्र�विष्ट 14 में, “धनवार” के पश्चात,् “धनुहार, धनुवार” अंत:स्था�पत
करें ;
2000 का 28 (iii) मध्य प्रदेश पुनगठर् न अ�ध�नयम, 2000 क� चौथी अनुसूची द्वारा यथा
संशो�धत उक्त अ�ध�नयम के �हदं � पाठ में व�णतर् प्र�विष्ट 15 के स्थान पर
�नम्न�ल�खत रखा जाएगा, अथार्त ् :—
“15. गडाबा या गदबा, गडबा या गदबा”;862 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
(iv) मध्य प्रदेश पुनगठर् न अ�ध�नयम, 2000 क� चौथी अनुसूची द्वारा 2000 का 28
यथा संशो�धत, उक्त अ�ध�नयम के �हदं � पाठ में व�णतर् प्र�विष्ट 16 के स्थान
पर �नम्न�ल�खत रखा जाएगा, अथार्त ् :—
“16. गोंड या गोंड़, अरख, आरख, अग�रया, असुर, अबूझ मा�रया,
बड़ी मा�रया, बड़ा मा�रया, भटोला, भीम्म ा, भूता, कोइलाभतु ा, को�लयाभुती,
भार, बायसनहान र् मा�रया, छोटा मा�रया, दंडामी मा�रया, धुरू, धुरवा, धोबा,
धु�लया, डोरला, गायक�, गट्टा, गट्टी, गेटा, गोंड गोवार�, �हल मा�रया, कंडरा,
कलंगा, खटोला, कोईतर, कोया, �खरवार, �खरवारा, कुच मा�रया, कुचाक�
मा�रया, मा�डया, मा�रया, माना, मन् नवे ार, मोघ्या, मो�गया, मोंघ् या, मु�डया,
मु�रया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राज, सोन् झार�, झरेका, था�टया, थोट्या,
वाडेमा�रया, वडेमा�रया, दरोई”;
(v) प्र�विष्ट 23 में, “कोंध” के स्थान पर, “कोंद, कोंध” रखे ;
(vi) मध्य प्रदेश पुनगठर् न अ�ध�नयम, 2000 क� चौथी अनुसूची द्वारा यथा 2000 का 28
संशो�धत, उक्त अ�ध�नयम के �हदं � पाठ में व�णतर् प्र�विष्ट 27 के स्थान पर,
“कोडाकू” के स्थान पर, “कोडाकू या कोड़ाकू” रखें ;
(vii) प्र�विष्ट 32 में, “नागा�सया” के पश्चात,् “�कसान” अंत:स्था�पत करें ;
(viii) मध्य प्रदेश पुनगठर् न अ�ध�नयम, 2000 क� चौथी अनुसूची द्वारा 2000 का 28
यथा संशो�धत, उक्त अ�ध�नयम के �हदं � पाठ में व�णतर् प्र�विष्ट 33 के स्थान
पर, �नम्न�ल�खत रखा जाएगा, अथार्त ् :—
“33. उरांव, धानका, धांगड़”;
(ix) प्र�विष्ट 41 में, “सवरा” के पश्चात,् “सौंरा, संवरा” अंत:स्था�पत करें ;
(x) प्र�विष्ट 42 के पश्चात,् �नम्न�ल�खत प्र�विष्ट अंत:स्था�पत क� जाएगी,
अथार्त ् :—
“43. �ब�ंझया”।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण
863
सं�वधान (अनसु ू�चत जनजा�तयां) आदेश (दसू रा
संशोधन) अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 14)
[4 अगस्त, 2023]
�हमाचल प्रदेश राज् य के संबंध में अनुसू�चत जनजा�तयों क� सूची में
क�तपय समुदायों को सिम्म�लत करने का उपबंध करने के �लए
सं�वधान (अनुसू�चत जनजा�तयां) आदेश, 1950
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
0
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम सं�वधान (अनुसू�चत जनजा�तयां) आदेश सं�क्षप्त नाम ।
(दसू रा संशोधन) अ�ध�नयम, 2023 है ।
सं�वधान 2. सं�वधान (अनुसू�चत जनजा�तयां) आदेश, 1950 क� अनुसूची के भाग 5 - सं.आ. 22
(अनुसू�चत864 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
जनजा�तयां) �हमाचल प्रदेश में, प्र�विष्ट 10 के पश्चात,् �नम्न�ल�खत प्र�विष्ट अंतःस्था�पत क�
आदेश, 1950 का जाएगी, अथार्त ् :—
संशोधन ।
“11. �सरमौर िजल े के ट्रांस �ग�र क्षेत्र का हाट�” ।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 865
वन (संरक्षण) संशोधन अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 15)
[4 अगस्त, 2023]
वन (संरक्षण) अ�ध�नयम, 1980
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. (1) इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम वन (संरक्षण) संशोधन सं�क्षप्त नाम और
अ�ध�नयम, 2023 है ।
प्रारम्भ ।
(2) यह उस तार�ख को प्रवत्ृ त होगा जो केन्द्र�य सरकार, राजपत्र में अ�धसूचना
द्वारा �नयत करे ।866 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
उद्दे�शका का 2. वन (संरक्षण) अ�ध�नयम, 1980 (िजसे इसमें इसके पश् चात ् मूल अ�ध�नयम 1980 का 69
अंत:स् थापन ।
कहा गया है) में द�घ र् शीष र् के पश्चात ् और अ�ध�नय�म�त सूत्र से पूव र् �नम्न�ल�खत
उद्दे�शका अंत:स्था�पत क� जाएगी, अथार्त ्:—
“वष र् 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सजनर् के राष्ट्र�य ल�यों को प्राप्त करने में
समथ र् होने के �लए और पा�रिस्थ�तक�य रूप से संतु�लत संधारणीय �वकास के
माध्यम से वन काबनर् स्टॉक को बनाए रखने या उसमें व�ृद्ध करने के �लए वनों
के महत्व को प�रणत प्राप्त करना है ;
और देश के राष्ट्र�य रूप स े अवधा�रत योगदान ल�य वष र् 2030 तक
2.5 से 3.0 �ब�लयन टन (काबनर् डाईआक्साइड) के समतुल्य अ�त�रक्त काबनर्
�सकं सिृजत करने क� प�रकल्पना करते हैं ;
और देश अपने भू�म क्षेत्र के एक-�तहाई तक वन और वक्षृ आच्छादन में
व�ृद्ध करने क� प�रकल्पना करता है, िजसे बढ़� हुई व�ृद्ध प्रक्षेप-पथ के साथ बल
प्रदान �कया जाना है ;
और भारत के वनों और उनक� जैव-�व�वधता को संर�क्षत करने क� समद्धृ
परंपरा रह� है और इस�लए वन आधा�रत आ�थकर् , सामािजक और पयार्वरणीय
फायदों में व�ृद्ध क� जा रह� है िजसके अंतगतर् वनों पर �नभरर् समुदायों के
जीवनयापन में सुधार क� प�रकल्पना भी सिम्म�लत क� गई है ;
और इस�लए, वनों के संरक्षण प्रबंधन और पुन: बहाल� से संबं�धत उपबंधों
का उपबधं करने, पा�रिस्थ�तक�य सुरक्षा, संधारणीय संस्कृ�त और वनों के
पारंप�रक महता का अनुरक्षण करने तथा आ�थकर् आवश्यकताओं और काबनर्
तटस्थता को बनाए रखने क� आवश्यकता है ।”।
धारा 1 का 3. मूल अ�ध�नयम क� धारा 1 क� उपधारा (1) में, “वन (संरक्षण) अ�ध�नयम”
संशोधन ।
शब्दों और कोष्ठकों के स्थान पर, “वन (संरक्षण एवं संवधनर् ) अ�ध�नयम” शब्द और
कोष्ठक रखे जाएंगे ।
नई धारा 1क का 4. मूल अ�ध�नयम क� धारा 1 के पश्चात,् �नम्न�ल�खत धारा अंत:स्था�पत क�
अंत:स्थापन । जाएगी, अथार्त ् :—
क�तपय भू�म का ‘1क. (1) इस अ�ध�नयम के उपबंधों के अधीन �नम् न�ल�खत भू�म
समावेश करने के समावे�शत होगी, अथार्त ् :—
�लए अ�ध�नयम ।
(क) वह भू�म, िजसे भारतीय वन अ�ध�नयम, 1927 या तत् समय 1927 का 16
प्रवत्ृ त �कसी अन् य �व�ध के उपबंधों के अनुसार वन के रूप में घो�षत या
अ�धसू�चत �कया गया है ;
(ख) वह भू�म, जो खंड (क) के अधीन नह�ं आती है, �कंतु
25 अक् तूबर, 1980 को या उसके पश् चात ् �कसी सरकार� अ�भलेख में वन
के रूप में दज र् क� गई है:
परंतु इस खंड के उपबधं , ऐसी भू�म पर लागू नह�ं होंगे, िजसे �कसी राज्य
सरकार या �कसी संघ राज् यक्षेत्र प्रशासन द्वारा इस �न�मत्त प्रा�धकृत �कसी
प्रा�धकार� द्वारा जार� �कए गए आदेश के अनुसरण में 12 �दसंबर, 1996 को याअनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 867
उससे पहले वन से गैर-वन प्रयोजन के �लए उपयोग करने हेतु प�रव�ततर् कर
�दया गया है ।
स् पष् ट�करण—इस उपधारा के प्रयोजनों के �लए, “सरकार� अ�भलेख” पद से
राज् य सरकार या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के राजस् व �वभाग या वन �वभाग अथवा
राज् य सरकार या संघ राज् यक्षेत्र प्रशासन द्वारा मान् यताप्राप् त �कसी प्रा�धकार�,
स् थानीय �नकाय, समुदाय या प�रषद् द्वारा धा�रत अ�भलेख अ�भप्रेत है ।
(2) इस अ�ध�नयम के उपबधं ों के अधीन �नम् न�ल�खत प्रवग� क� भू�म
समावे�शत नह�ं होगी, अथार्त ् :—
(क) सरकार द्वारा अनुर�क्षत रेल लाइन या सावजर् �नक सड़क, के
साथ अविस् थत ऐसी वन भू�म जो आवास या रेल या सड़क के �कनारे
प्रत् येक मामले में सुख-सु�वधाओं के �लए, अ�धकतम 0.10 हेक् टेयर माप
तक पहुंच प्रदान करती है;
(ख) भू�म पर ऐसे वक्षृ , वक्षृ ारोपण या वनरोपण जो उपधारा (1) के
खंड (क) या खंड (ख) में �व�न�दर्ष् ट नह�ं है; और
(ग) ऐसी वन भू�म,—
(i) जो राष्ट्र�य महत्व क� साम�रक रेखीय प�रयोजना और जो
राष्ट्र�य सुरक्षा से संबं�धत है, के स�ं नमार्ण के �लए उपयोग �कए जाने
के प्रयोजन हेतु, यथािस् थ�त, अंतरराष् ट्र�य सीमाओं या �नयंत्रण रेखा
या वास्त�वक �नयंत्रण रेखा के साथ सौ �कलोमीटर क� दरू � के भीतर
अविस् थत है; या
(ii) जो सुरक्षा संबंधी अवसंरचना के सं�नमार्ण के �लए उपयोग
�कए जान े हेतु प्रस् ता�वत दस हेक् टेयर तक है ; या
(iii) जो रक्षा संबंधी प�रयोजना या अद्धर्सै�नक बलों के �लए
�श�वर या लोकोपयोगी प�रयोजनाओं के सं�नमार्ण के �लए उपयोग
�कए जाने हेतु जैसा केन् द्र�य सरकार द्वारा �व�न�दर्ष् ट �कया जाए,
प्रस् ता�वत है जो वामपंथी चरमवाद स े प्रभा�वत क्षत्रे में जसै ा केन् द्र�य
सरकार द्वारा अ�धसू�चत �कया जाए, पांच हेक्टेयर से अ�धक नह�ं
है ।
(3) उपधारा (2) के अधीन उपबं�धत छूट, ऐसे �नबंधनों और शत� िजसके
अंतगतर् भू�म से पेड़ों क� कटाई के प्र�तकर के �लए वक्षृ ारोपण क� शत र् भी है,
जैसा केन् द्र�य सरकार मागदर् शकर् �सद्धांतों द्वारा �व�न�दर्ष् ट करे, के अध् यधीन रहते
हुए होगी ।’।
5. मूल अ�ध�नयम क� धारा 2 को उसक� उपधारा (1) के रूप में पुन:संख् यां�कत धारा 2 का
�कया जाएगा और—
संशोधन ।
(क) इस प्रकार पुन:संख् या�ं कत उपधारा (1) में,—868 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
(i) खंड (iii) में, “जो सरकार के स्वा�मत्व, प्रबंध या �नयंत्रण के अधीन
नह�ं है” शब्दों के स्थान पर, “ऐसे �नबंधनों और शत� के अधीन रहते हुए,
जो केंद्र�य सरकार आदेश द्वारा �व�न�दर्ष्ट करे” शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) स् पष् ट�करण में खंड (ख) के पश्चात ् आने वाल� द�घ र् पंिक्त के
स् थान पर �नम् न�ल�खत द�घ र् पंिक्त रखी जाएगी, अथार्त ् :—
“�कंतु इसके अंतगतर् वनों और वन्य जीवों के संरक्षण, �वकास
और प्रबंधन से संबं�धत कोई काय र् जैसे �क—
(i) वन संवधनर् अ�भयान िजसके अंतगतर् iqu#n~/kkj
अ�भयान भी है;
(ii) सीमावत� वन कमचर् ा�रवंदृ के �लए चैक-पोस् ट और
अवसंरचना क� स् थापना;
(iii) अिग्न रेखाओं क� स् थापना और अनुरक्षण;
(iv) बेतार संचार;
(v) बाड़, सीमा �चह्नों या स् तंभों, पुलों और पु�लयाओं,
चैक बांधों, जल-गढ्ढों, खाइयों और पाइपलाइनों का सं�नमार्ण;
(vi) संर�क्षत क्षेत्रों मे �भन्न वन क्षेत्रों में सरकार या
�कसी प्रा�धकरण के स्वा�मत्व में वन्य जीव (संरक्षण)
अ�ध�नयम, 1972 में �न�दर्ष्ट
fpfM+;k?kj
या सफार� क� 1972 का 53
स्थापना;
(vii) वन कायकर् रण योजना या वन् य जीव प्रबंधन योजना
या बाघ संरक्षण योजना या उस क्षत्रे क� कायकर् रण योजना में
सिम् म�लत पा�रिस्थ �तक� पयटर् न सु�वधाएं ; और
(viii) कोई अन् य सदृश प्रयोजन, िजसे केन् द्र�य सरकार
आदेश द्वारा �व�न�दर्ष् ट करे,
सिम् म�लत नह�ं है ।”;
(ख) इस प्रकार पुन: संख् या�ं कत उपधारा (1) के पश् चात,् �नम् न�ल�खत
उपधारा अंत:स् था�पत क� जाएगी, अथार्त ् :—
“(2) केंद्र�य सरकार आदेश द्वारा ऐसे �नबंधनों और शत� को
�व�न�दर्ष्ट कर सकेगी, िजनके अधीन रहते हुए कोई सव�क्षण, जैसे टोह
लेना, पूव�क्षण, खोज या पर�क्षण, िजसके अंतगतर् भूकंप सव�क्षण है, को गैर-
वन प्रयोजन नह�ं माना जाएगा ।”।
नई धारा 3ग का 6. मूल अ�ध�नयम क� धारा 3ख के पश्चात ् �नम्न�ल�खत धारा अंत:स्था�पत क�
अंत:स्थापन ।
जाएगी, अथार्त ् :—
केन् द्र�य सरकार “3ग. केन् द्र�य सरकार, समय-समय पर केंद्र�य सरकार, राज् य सरकार या
क� �नदेश जार� संघ राज् यक्षेत्र प्रशासन के अधीन �कसी प्रा�धकार� को या केंद्र�य सरकार, राज् य
करने क� शिक्त ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 869
सरकार या संघ राज् यक्षेत्र प्रशासन द्वारा मान् यताप्राप् त �कसी संगठन, अिस्तत्व
या �नकाय को ऐसे �नदेश जार� कर सकेगी, जो इस अ�ध�नयम के कायार्न्वयन
के �लए आवश् यक समझे ।”।
__________
.अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 871
डिजिटल वैयजतिक िाटा संरक्षण
अधिनियम, 2023
(2023 का अधिनियम संखयांक 22)
[11 अगस्ि, 2023]
डिजिटल वैयजतिक िाटा का ऐसी रीनि में प्रक्रमण करिे के ललए, िो व्यजटटकों के
उिके वैयजतिक िाटा का संरक्षण करिे के अधिकार और ववधिपूण ण प्रयोििों
के ललए ऐसे वैयजतिक िाटा का प्रक्रमण करि े की आवश्यकिा दोिों को
मान्यिा प्रदाि करिा है और उससे संबंधिि या
उसके आिुषंधगक ववषयों का उपबंि
करिे के ललए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर् ष में संसद् द्वारा ननम्नलिखित रूप में यह
अधधननयलमत हो :—
अध्याय 1
प्रारंलिक
1. (1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम डिजजटि वैयजततक िाटा संरिण संक्षिप्त नाम
अधधननयम, 2023 है ।
और प्रारंभ ।
(2) यह उस तारीि को प्रवत्ृ त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधधसूचना द्वारा
ननयत करे और इस अधधननयम के लभन्द्न-लभन्द्न उपबंधों के लिए लभन्द्न-लभन्द्न तारीिें ननयत
की जा सकेंगी और ऐसे ककसी उपबंध में इस अधधननयम के प्रारंभ के प्रनत ककसी ननर्देश का यह
अर् ष िगाया जाएगा कक वह उस उपबंध के प्रवत्ृ त होने के प्रनतननर्देश है ।872 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
पररभार्ाएं । 2. इस अधधननयम में, जब तक कक संर्दभ ष से अन्द्यर्ा अपेक्षित न हो,—
(क) “अपीि अधधकरण” से भारतीय र्दरू -संचार ववननयामक प्राधधकरण
अधधननयम, 1997 की धारा 14 के अधीन स्र्ावपत र्दरू -संचार वववार्द ननपटान और 1997 का 24
अपीि अधधकरण अलभप्रेत है ;
(ि) “स्वचालित” से िाटा प्रक्रमण के प्रयोजन के लिए दर्दए गए अनुर्देशों या
अन्द्यर्ा के उत्तर में स्वचालित रूप से प्रचािन करने में सिम कोई डिजजटि
प्रकक्रया अलभप्रेत है ;
(ग) “बोि”ष से धारा 18 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा स्र्ावपत भारतीय िाटा
संरिण बोि ष अलभप्रेत है ;
(घ) “कनतपय ववधधसम्मत उपयोग” से धारा 7 में ननदर्दषष्ट उपयोग अलभप्रेत हैं ;
(ङ) “अध्यि” से बोि ष का अध्यि अलभप्रेत है ;
(च) “लशशु” स े ऐसा कोई व्यजष्ट अलभप्रेत है जजसने अठारह वर् ष की आयु पूरी
नहीं की है ;
(छ) “सहमनत प्रबंधक” से बोि ष में रजजस्रीकृत ऐसा व्यजतत अलभप्रेत है, जो
ककसी पहुंच योग्य, पारर्दशी और प्रिेप्य प्िेटफाम ष के माध्यम से अपनी सहमनत र्देने,
उसका प्रबंध करने, पुनवविष ोकन करने और उसे वापस िेने के लिए िाटा स्वामी को
समर् ष बनाने के लिए एकि संपकष बबन्द्र्द ु के रूप में काय ष करता है;
(ज) “िाटा” से मानव या स्वचालित साधनों द्वारा संचार, ननवचष न या प्रक्रमण
के लिए उपयुतत रीनत में सूचना, तथ्यों, अवधारणाओं, अलभमतों या अनुर्देशों का
व्यपर्देशन अलभप्रेत है;
(झ) “िाटा न्द्यासी” से ऐसा कोई व्यजतत अलभप्रेत है जो अकेिे या अन्द्य
व्यजततयों के सार् लमिकर वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के प्रयोजन और साधनों को
अवधाररत करता है ;
(ञ) “िाटा स्वामी” से ऐसा कोई व्यजष्ट अलभप्रेत है जजससे वैयजततक िाटा
संबंधधत है और जहां ऐसा व्यजष्ट—
(i) कोई लशशु है, जजसके अंतगतष ऐसे लशशु के माता-वपता या ववधधपूणष
संरिक भी सजम्मलित हैं ;
(ii) कोई दर्दव्यांगजन है, जजसके अंतगतष उसका कोई ववधधपूण ष संरिक
सजम्मलित है, जो उसकी ओर से काय ष कर रहा है ;
(ट) “िाटा प्रक्रमणक” से ऐसा कोई व्यजतत अलभप्रेत है जो िाटा न्द्यासी की
ओर से वैयजततक िाटा का प्रक्रमण करता है ;
(ठ) “िाटा संरिण अधधकारी” से धारा 10 की उपधारा (2) के िंि (क) के
अधीन महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी द्वारा ननयुतत कोई व्यजष्ट अलभप्रेत है ;
(ि) “डिजजटि कायाषिय” से ऐसा कोई कायाषिय अलभप्रेत है जो ककसी ऐस े
ऑनिाइन तंत्र को अंगीकृत करता है, जजसमें यर्ाजस्र्नत, ककसी सूचना या पररवार्द
या ननर्देश या अपीि की प्राजप्त से िेकर उनके ननपटान तक की कायवष ादहयां
ऑनिाइन या डिजजटि ढंग से संचालित की जाती हैं ;अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 873
(ढ) “डिजजटि वैयजततक िाटा” से डिजजटि प्ररूप में वैयजततक िाटा अलभप्रेत
है ;
(ण) “अलभिाभ” से अलभप्रेत है—
(i) संपजत्त में अलभिाभ या सेवाओं की पूनत,ष चाहे वह अस्र्ायी हो या
स्र्ायी ; या
(ii) पाररश्रलमक या अधधक पाररश्रलमक अजजतष करने या ववधधसम्मत
पाररश्रलमक से अन्द्यर्ा लभन्द्न कोई ववत्तीय िाभ प्राप्त करने के लिए कोई
अवसर ;
(त) “हानन” से अलभप्रेत है—
(i) संपजत्त में हानन या सेवाओं की पूनत ष में व्यवधान, चाहे अस्र्ायी हो
या स्र्ायी; या
(ii) पाररश्रलमक या अधधक पाररश्रलमक या ववधधसम्मत पाररश्रलमक से
अन्द्यर्ा लभन्द्न कोई ववत्तीय िाभ प्राप्त करने के लिए ककसी अवसर की
हानन ;
(र्) “सर्दस्य” से बोि ष का कोई सर्दस्य अलभप्रेत है और इसके अंतगतष अध्यि
भी सजम्मलित है ;
(र्द) “अधधसूचना” से राजपत्र में प्रकालशत अधधसूचना अलभप्रेत है और
“अधधसूधचत करना” तर्ा “अधधसूधचत” पर्द का अर् ष तर्दनुसार िगाया जाएगा ;
(ध) “व्यजतत” के अंतगषत सजम्मलित है—
(i) व्यजष्ट ;
(ii) दहर्दं ू अववभतत कुटुंब ;
(iii) कंपनी ;
(iv) फम ष ;
(v) व्यजततयों का संगम या व्यजष्टयों का ननकाय, चाहे वह ननगलमत हो
या नहीं ;
(vi) राज्य ; और
(vii) प्रत्येक कृबत्रम ववधधक व्यजतत, जो पूववष ती उपिंिों में से ककसी भी
उपिंि के अन्द्तगतष नहीं आता है ;
(न) “वैयजततक िाटा” स े ककसी व्यजष्ट के बारे में ऐसा कोई िाटा अलभप्रेत है,
जो ऐसे िाटा के द्वारा या उसके संबंध में पहचान की जा सके ;
(प) “वैयजततक िाटा भंग” से वैयजततक िाटा का कोई अप्राधधकृत प्रक्रमण,
आकजस्मक प्रकटन, अजनष , सहभाजन, उपयोग, पररवतषन, उस वैयजततक िाटा तक पहुंच
का नाश या उसका गुम होना अलभप्रेत है जो वैयजततक िाटा की गोपनीयता, अिंिता
या उपिब्धता को संकट में िािता है ;
(फ) “ववदहत” से इस अधधननयम के अधीन बनाए गए ननयमों द्वारा ववदहत
अलभप्रेत है ;
(ब) “कायवष ाही” स े इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन बोि ष द्वारा की गई
कोई कारषवाई अलभप्रेत है ;874 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
(भ) वैयजततक िाटा के संबंध में “प्रक्रमण” से डिजजटि वैयजततक िाटा पर की
गई कोई पूणषतः या भागतः स्वचालित संकक्रया या संकक्रयाओं का सेट अलभप्रेत है और
इसके अंतगषत पारेर्ण, प्रसार, संग्रहण, अलभिेिन, संगठन, संरचना, भंिारण,
अनुकूिन, पुनः प्राजप्त, उपयोग, संरेिण या संयोजन, सूचीकरण, सहभाजन, प्रकटन
या अन्द्यर्ा द्वारा उपिब्ध कराना, ननबन्द्ष धन, लमटाना या नष्ट करना जैसी संकक्रयाएं
आती हैं;
(म) ककसी स्त्रीलिगं वाचक व्यजष्ट के संबंध में “वह” के अंतगतष उसके लिगं
पर ध्यान दर्दए बबना ऐसे व्यजष्ट के प्रनतननर्देश सजम्मलित है ;
(य) “महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी” से ऐसा कोई िाटा न्द्यासी या िाटा न्द्यालसयों का
वग,ष जो धारा 10 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधधसूधचत ककया जाए, अलभप्रेत
है ;
(यक) “ववननदर्दषष्ट प्रयोजन” से िाटा स्वामी को िाटा न्द्यासी द्वारा इस
अधधननयम और उसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के अनुसार र्दी गई
सूचना में वखणतष प्रयोजन अलभप्रेत है ; और
(यि) “राज्य” से संववधान के अनुच्छेर्द 12 के अधीन यर्ापररभावर्त राज्य
अलभप्रेत है ।
अधधननयम का 3. इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यह अधधननयम—
िागू होना ।
(क) भारत के राज्यिेत्र के भीतर डिजजटि वैयजततक िाटा के प्रक्रमण को िाग ू
होगा, जहां वैयजततक िाटा का—
(i) डिजजटि प्ररूप में संग्रहण हुआ है ; या
(ii) गैर-डिजजटि प्ररूप में संग्रहण हुआ है और जजसे तत्पश्चात ् डिजजटि
बनाया गया है ;
(ि) भारत के राज्यिेत्र से बाहर डिजजटि वैयजततक िाटा के प्रक्रमण को भी
िागू होगा, यदर्द ऐसा प्रक्रमण भारत के राज्यिेत्र में िाटा स्वालमयों को माि या
सेवाओं की प्रस्र्ापना करने से संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप के संबंध में ककया जाता
है ;
(ग) यह अधधननयम—
(i) ककसी व्यजष्ट द्वारा ककसी वैयजततक या घरेिू प्रयोजन के लिए
प्रक्रमण ककया गया वैयजततक िाटा ; और
(ii) वैयजततक िाटा, जजस े सावजष ननक रूप से उपिब्ध कराया जाता है या
उपिब्ध करवाया जाता है,—
(अ) िाटा स्वामी द्वारा, जजससे ऐसा वैयजततक िाटा संबंधधत है ;
या
(आ) ककसी अन्द्य व्यजतत को, जो भारत में तत्समय प्रवत्ृ त ककसी
ववधध के अधीन ऐसे वैयजततक िाटा को सावजष ननक रूप से उपिब्ध
कराने के लिए बाध्यताधीन है,
को िागू नहीं होगा ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 875
टटांि
कोई व्यजष्ट ि, जो अपने ववचारों की ब्िॉधगगं करते समय, अपन े वैयजततक िाटा को सोशि
मीडिया पर सावजष ननक रूप स े उपिब्ध करवाती है । ऐसी र्दशा में, इस अधधननयम के उपबंध िागू
नहीं होंग े ।
अध्याय 2
िाटा न्यासी की बाध्यिाएं
4. (1) कोई व्यजतत ककसी िाटा स्वामी के वैयजततक िाटा का प्रक्रमण केवि इस वैयजततक िाटा
के प्रक्रमण के
अधधननयम के उपबंधों के अनुसार और ऐस े ननम्नलिखित ववधधपूण ष प्रयोजन के लिए ही
लिए आधार ।
कर सकेगा,—
(क) जजसके लिए िाटा स्वामी ने अपनी सहमनत र्दी है ; या
(ि) कनतपय ववधधसम्मत उपयोगों के लिए ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “ववधधसम्मत प्रयोजन” पर्द से ऐसा कोई प्रयोजन
अलभप्रेत है, जजसका ववधध द्वारा अलभव्यतत रूप से ननर्ेध नहीं ककया गया है ।
5. (1) धारा 6 के अधीन सहमनत के लिए िाटा स्वामी को ककए गए प्रत्येक अनुरोध सूचना ।
के सार् िाटा न्द्यासी द्वारा िाटा स्वामी को र्दी गई ननम्नलिखित सूचना के सार् ऐसी
रीनत में, जो ववदहत की जाए, संिग्न ककया जाएगा या उसस े पहिे ककया जाएगा,—
(i) वैयजततक िाटा और प्रयोजन, जजसके लिए उसका प्रक्रमण प्रस्ताववत ककया
जाना है ;
(ii) वह रीनत, जजसमें वह धारा 6 की उपधारा (4) और धारा 13 के अधीन
अपने अधधकारों का प्रयोग कर सकेगी ; और
(iii) वह रीनत, जजसमें िाटा स्वामी बोि ष को लशकायत कर सकेगा ।
टटांि
कोई व्यजष्ट ि, जो एक बकैं म के मोबाइि ऐप या वेबसाइट का उपयोग करत े हुए एक बकैं
िाता िोिती है । बकैं िाता िोिने के लिए ववधध के अधीन अपने ग्राहक की अपेिाओं को जाननए,
को पूरा करन े के लिए, ि अपन े वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के लिए म, िाइव में वीडियो आधाररत
ग्राहक पहचान प्रकक्रया का ववकल्प चुनती है । म, ि को सूचना के सार् वैयजततक िाटा के लिए
वैयजततक िाटा और इसके प्रक्रमण के प्रयोजन का वणनष करत े हुए अनुरोध संिग्न करेगी या उसस े
पहिे अनुरोध करेगी ।
(2) जहां िाटा स्वामी ने इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि से पूव ष अपने वैयजततक
िाटा के प्रक्रमण के लिए अपनी सहमनत र्दे र्दी है, वहां—
(क) िाटा न्द्यासी, यर्ाशीघ्र यजुततयुतत रूप से साध्य हो, िाटा स्वामी को उस े
ननम्नलिखित की सूचना र्देते हुए, ऐसी रीनत में और जो ववदहत की जाए, नोदटस
र्देगा,—
(i) वैयजततक िाटा और वह प्रयोजन, जजसके लिए उसका प्रक्रमण ककया
गया है ;876 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
(ii) वह रीनत, जजसमें वह धारा 6 की उपधारा (4) और धारा 13 के
अधीन अपने अधधकारों का प्रयोग कर सकेगा ; और
(iii) वह रीनत, जजसमें िाटा स्वामी बोि ष को लशकायत कर सकेगा ।
(ि) िाटा न्द्यासी, वैयजततक िाटा का तब तक प्रक्रमण कर सकेगा जब तक
िाटा स्वामी अपनी सहमनत वापस नहीं िे िेता है ।
टटांि
कोई व्यजष्ट ि, म द्वारा, जो एक ई-कामस ष सेवा प्रर्दाता है, प्रचालित ककसी ऑनिाइन शॉवपगं
ऐप या वेबसाइट पर इस अधधननयम के प्रारंभ स े पूव ष अपन े वयै जततक िाटा के प्रक्रमण के लिए
सहमनत र्दी र्ी । इस अधधननयम के प्रारंभ होने पर, म यर्ासाध्य ि को वैयजततक िाटा और उसके
प्रक्रमण के प्रयोजन का वणनष करते हुए ई-मेि, ऐप में अधधसूचना या अन्द्य प्रभावी ढंग से सूचना
र्देगा ।
(3) िाटा न्द्यासी, िाटा स्वामी को उपधारा (1) और उपधारा (2) में ननदर्दषष्ट सूचना
की अंतवस्ष तु तक पहुंच का अंग्रेजी भार्ा में या संववधान की आठवीं अनुसूची में ववननदर्दषष्ट
ककसी भार्ा में ववकल्प प्रर्दान करेगा ।
सहमनत । 6. (1) िाटा स्वामी द्वारा र्दी गई सहमनत नन:शुल्क, ववननदर्दषष्ट, सूधचत, अशत ष और
स्पष्ट सकारात्मक कारषवाई सदहत असंदर्दग्ध होगी और वह ववननदर्दषष्ट प्रयोजन के लिए
उसके वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के करार को र्दशाषएगी तर्ा ऐसे वैयजततक िाटा तक
सीलमत होगी, जो ऐसे ववननदर्दषष्ट प्रयोजन के लिए आवश्यक हो ।
टटांि
कोई व्यजष्ट ि, ककसी टेिीमेडिलसन ऐप म को िाउनिोि करती है । म (i) टेिीमेडिलसन सेवा
उपिब्ध कराने के लिए उसके वयै जततक िाटा के प्रक्रमण, और (ii) उसके मोबाइि फोन की संपकष
सूची तक पहुंच बनान े के लिए ि की सहमनत के लिए अनुरोध करता है और ि र्दोनों के लिए
अपनी सहमनत र्देती है । अत:, टेिीमेडिलसन सेवा उपिब्ध करान े के लिए फोन संपकष सूची आवश्यक
नहीं है, टेिीमेडिलसन सेवा उपिब्ध कराने के लिए उसकी सहमनत उसके वैयजततक िाटा के प्रक्रमण
तक ही सीलमत होगी ।
(2) उपधारा (1) में ननदर्दषष्ट सहमनत का कोई भाग, जो इस अधधननयम या इसके
अधीन बनाए गए ननयमों या तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के उपबंधों का उल्िंघन करता
है, ऐसे अनतिंघन के ववस्तार तक अववधधमान्द्य होगा ।
टटांि
कोई व्यजष्ट ि, बीमाकताष म के मोबाइि ऐप या वेबसाइट का उपयोग करते हुए कोई बीमा
पालिसी क्रय करती है । वह (i) पालिसी को जारी करन े के प्रयोजन के लिए म द्वारा अपने
वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के लिए, और (ii) भारतीय िाटा संरिण बोि ष को ककसी पररवार्द को फाइि
करने के अपन े अधधकार को छोड़ने के लिए म को सहमनत र्देती है । सहमनत का भाग (ii) पररवार्द
फाइि करने के उसके अधधकार के अधधत्याग के संबंध में अववधधमान्द्य होगा ।
(3) इस अधधननयम के या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के अधीन
सहमनत के लिए प्रत्येक अनुरोध, स्पष्ट और सरि भार्ा में अंग्रेजी में या संववधान की
आठवीं अनुसूची में ववननदर्दषष्ट ककसी भार्ा में, ऐस े अनुरोध तक पहुंच का उस े ववकल्प र्देते
हुए और िाटा संरिण अधधकारी को, जहां िाग ू हो, या इस अधधननयम के उपबंधों केअनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 877
अधीन उसके अधधकारों के प्रयोग के प्रयोजन के लिए िाटा स्वामी स े ककसी संसूचना का
उत्तर र्देने के लिए िाटा न्द्यासी द्वारा प्राधधकृत ककसी अन्द्य व्यजतत का संपकष ब्यौरा प्रर्दान
करते हुए, िाटा स्वामी को प्रस्तुत ककया जाएगा ।
(4) जहां िाटा स्वामी द्वारा र्दी गई सहमनत, वैयजततक िाटा के प्रक्रमण का आधार
है, वहां ऐसे िाटा स्वामी को ककसी भी समय अपनी सहमनत उतने ही काय ष करने में
सहजता के सार् वापस िेने का अधधकार होगा, जजतना उस सहजता के तुल्य हो, जजसके
सार् ऐसी सहमनत र्दी गई र्ी ।
(5) उपधारा (4) में ननदर्दषष्ट वापसी के पररणाम को िाटा स्वामी द्वारा वहन ककया
जाएगा और ऐसी वापसी, उसके वापसी ककए जाने से पूव ष सहमनत के आधार पर वैयजततक
िाटा के प्रक्रमण की ववधधमान्द्यता को प्रभाववत नहीं करेगी ।
टटांि
कोई व्यजष्ट ि, ककसी ई-वाखणज्य सेवा प्रर्दाता म द्वारा प्रचालित ऑनिाइन िरीर्दारी ऐप या
वेबसाइट का उपभोतता है । ि अपने आपूनत ष आर्देश को पूरा करने के प्रयोजन के लिए और माि की
आपूनत ष के लिए ककए गए आर्देश के लिए भुगतान करत े समय, म द्वारा अपन े वैयजततक िाटा के
प्रक्रमण के लिए सहमनत र्देती है । यदर्द ि अपनी सहमनत वापस िेती है, तो म आर्देश र्देन े के लिए
ऐप या वेबसाइट का उपयोग करने के लिए ि को समर् ष बनने स े रोक सकेगा, ककन्द्त ु ि द्वारा माि
की आपूनत ष के लिए पहिे से दर्दए गए आर्देश और ककए गए भुगतान के प्रक्रमण को नहीं रोक
सकेगा ।
(6) यदर्द िाटा स्वामी, उपधारा (5) के अधीन वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के लिए
अपनी सहमनत को वापस िे िेती है, तो िाटा न्द्यासी, युजततयुतत समय के भीतर, प्रक्रमण
को रोक र्देगा और ऐसे िाटा स्वामी के वैयजततक िाटा के प्रक्रमण को रोकने के लिए इसके
िाटा प्रक्रमणकों को तब तक रोकेगा या तब तक रुकवाएगा, जब तक उसकी सहमनत के
बबना ऐसा प्रक्रमण इस अधधननयम या तद्धीन बनाए गए ननयमों या भारत में तत्समय
प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध के उपबंधों के अधीन अपेक्षित या प्राधधकृत न हो ।
टटांि
ि एक र्दरू -संचार सेवा प्रर्दाता है, जो ि के ग्राहकों के टेलिफोन बबिों को ई-मेि करन े के लिए
एक िाटा प्रक्रमणक म के सार् संववर्दा करता है । य जो ि का ग्राहक है जजसन े बबिों को ई-मिे
करने के लिए अपने वैयजततक िाटा का प्रक्रमण करने के लिए ि को अपनी सहमनत पहिे स े र्दी
र्ी, ि मोबाइि ऐप को िाउनिोि करता है और केवि ऐप पर बबिों को प्राप्त करने का ववकल्प
चुनता है । ि स्वयं बबिों को ई-मेि करने के लिए य के वैयजततक िाटा के प्रक्रमण को रोक र्देगा
और म से भी रुकवाएगा ।
(7) िाटा स्वामी, ककसी सहमनत प्रबंधक के माध्यम से िाटा न्द्यासी को अपनी
सहमनत र्दे सकेगा, उसका प्रबधं , पुनवविष ोकन कर सकेगा या उसे वापस ि े सकेगा ।
(8) सहमनत प्रबंधक, िाटा स्वामी के प्रनत उत्तरर्दायी होगा और ऐसी रीनत तर्ा ऐसी
बाध्यताओं के अधीन रहते हुए, जो ववदहत की जाएं, उसकी ओर से काय ष करेगा ।
(9) प्रत्येक सहमनत प्रबंधक, ऐसी रीनत में और ऐसी तकनीकी, संकक्रयात्मक, ववत्तीय
और अन्द्य शतों के अध्यधीन, जो ववदहत की जाएं, बोि ष के सार् रजजस्रीकृत ककया
जाएगा ।
(10) जहां िाटा स्वामी द्वारा र्दी गई सहमनत, वैयजततक िाटा के प्रक्रमण का आधार
है और ककसी कायवष ाही में, इस संबंध में कोई प्रश्न उठता है, वहां िाटा न्द्यासी यह साबबत878 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
करने के लिए आबद्धकर होगा कक िाटा स्वामी को उसके द्वारा नोदटस दर्दया गया र्ा तर्ा
इस अधधननयम और इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के अनुसार, िाटा न्द्यासी
को ऐसे िाटा स्वामी द्वारा सहमनत र्दी गई र्ी ।
कनतपय
7. िाटा न्द्यासी, ननम्नलिखित उपयोगों में स े ककसी भी उपयोग के लिए ककसी िाटा
ववधधसम्मत
—
स्वामी के वैयजततक िाटा का प्रक्रमण कर सकेगा, अर्ाषत ् :
उपयोग ।
(क) उस ववननदर्दषष्ट प्रयोजन, जजसके लिए िाटा स्वामी, िाटा न्द्यासी को अपना
वैयजततक िाटा स्वेच्छापूवकष उपिब्ध कराता है और जजसके संबंध में उसने िाटा
न्द्यासी को यह नहीं बताया है कक उसने अपने वैयजततक िाटा के उपयोग के लिए
सहमनत नहीं र्दी है ।
टटांि
(I) एक व्यजष्ट ि, एक फामेसी म स े कुछ क्रय करती है । वह स्वेच्छापूवकष अपना
वैयजततक िाटा म को प्रर्दान करती है और म से अपन े मोबाइि फोन पर संर्देश भेज कर क्रय
के लिए ककए गए भुगतान की अलभस्वीकृनत रसीर्द के लिए अनरु ोध करती है । म रसीर्द के
भेजने के प्रयोजन के लिए ि के वैयजततक िाटा का प्रक्रमण कर सकेगा ।
(II) कोई व्यजष्ट ि, एक भू-संपर्दा र्दिाि म को इिैतराननक रूप स े संर्देश भजे ती है
जजसमें म स े अपन े लिए उपयुतत ककराए पर लिए गए आवास की पहचान में सहायता करन े
के लिए अनुरोध करती है और इस प्रयोजन के लिए अपना वैयजततक िाटा साझा करती है ।
म पहचान करने के लिए उसके वैयजततक िाटा का प्रक्रमण कर सकेगा और ककराए पर
उपिब्ध आवास के ब्यौरे उसको सूधचत कर सकेगा । तत्पश्चात ् ि, म को सूधचत करती है
कक ि को म स े कोई और सहायता की आवश्यकता नही ं है । ि के वैयजततक िाटा के प्रक्रमण
को म रोक र्देगा ;
(ि) राज्य और उसके ककसी भी करणत्व के संबंध में, िाटा स्वामी को ऐसी
सहायकी, िाभ, सेवा, प्रमाणपत्र, अनुज्ञजप्त या अनुमनत प्रर्दान करना या जारी करना,
—
जो ववदहत ककया जाए, जहां
(i) उसने ककसी सहायकी, िाभ, सेवा, प्रमाणपत्र, अनुज्ञजप्त या अनुमनत
के लिए राज्य या उनके ककसी करणत्व द्वारा उसके वैयजततक िाटा के
प्रक्रमण के लिए पूव ष सहमनत र्दे र्दी है ; या
(ii) ऐसा वैयजततक िाटा डिजजटि प्ररूप में या गैर-डिजजटि प्ररूप में
उपिब्ध है और जजसका तत्पश्चात ् ककसी िाटाबेस, रजजस्टर, बही या अन्द्य
र्दस्तावेज, जो राज्य या उसके ककसी करणत्वों में स े ककसी करणत्व द्वारा
सुरक्षित रिे गए हैं, का डिजजटीकरण ककया गया है,
वहां केन्द्रीय सरकार या वैयजततक िाटा के शासन के लिए तत्समय प्रवत्ृ त ककसी
अन्द्य ववधध द्वारा जारी की गई नीनत के अनुसार, प्रक्रमण के लिए पािन ककए गए
मानकों के अध्यधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधधसूधचत ककया गया है ।
टटांि
एक गभवष ती मदहिा ि, जो फायर्दों का िाभ िेने के प्रयोजन के लिए अपना वैयजततक
िाटा उपिब्ध कराने की सहमनत र्देते हुए स्वय ं को सरकार के मातत्ृ व िाभ कायक्रष म का िाभअनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 879
िेने के लिए ककसी ऐप या वेबसाइट पर स्वय ं को नामांककत करती है । सरकार, ि के
वैयजततक िाटा को सरकार से ककसी अन्द्य ववदहत फायर्दे को प्राप्त करने के लिए उसकी
पात्रता अवधाररत करने के लिए प्रक्रमण की प्रकक्रया कर सकेगी ;
(ग) भारत में तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के अधीन या भारत की संप्रभुता
और अिंिता या राज्य की सरु िा के दहत में, ककसी कृत्य का राज्य या उसके ककसी
करणत्व द्वारा ननष्पार्दन के लिए ;
(घ) तत्समय प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध में ऐसी सूचना के प्रकटन के संबंध में
उपबंधों के अनुसार ऐसा प्रक्रमण होने के अध्यधीन राज्य या उसके ककसी करणत्व
को ऐसी सूचना के प्रकटन के लिए ककसी व्यजतत पर, भारत में तत्समय प्रवत्ृ त
ककसी ववधध के अधीन ककसी बाध्यता को पूरा करने के लिए ;
(ङ) भारत में तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के अधीन, ककसी ननणयष या डिक्री
या जारी ककए गए आर्देश अर्वा भारत के बाहर तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के
अधीन संववर्दात्मक या लसववि प्रकृनत के र्दावों स े संबंधधत ककसी ननणयष या आर्देश
का अनुपािन करने के लिए ;
(च) ककसी धचककत्सीय आपात, जजसमें िाटा स्वामी या ककसी अन्द्य व्यजष्ट के
जीवन के लिए ितरा या स्वास्थ्य के लिए तत्काि ितरा अन्द्तवलषित है, के प्रनत
जवाब र्देने के लिए ;
(छ) ककसी महामारी, बीमारी का प्रकोप या जनस्वास्थ्य के ककसी अन्द्य ितरे
के र्दौरान, ककसी व्यजष्ट को धचककत्सीय उपचार या स्वास्थ्य सेवाएं उपिब्ध कराने
हेतु उपाय करने के लिए ;
(ज) ककसी आपर्दा या ककसी िोक व्यवस्र्ा के िराब होने के र्दौरान, ककसी
व्यजष्ट की सुरिा सुननजश्चत करने या उसे सहायता र्देने या सेवा उपिब्ध कराने हेत ु
उपाय करने के लिए ।
स्पटटीकरण—
इस िंि के प्रयोजन के लिए, “आपर्दा” पर्द का वही अर् ष होगा,
2005 का 53 जो आपर्दा प्रबंधन अधधननयम, 2005 की धारा 2 के िंि (घ) में उसका है ; या
(झ) ननयोजन के प्रयोजनों के लिए या उन प्रयोजनों के लिए, जो ननयोजक की
कारपोरेट जासूसी की रोकर्ाम, व्यापार रहस्यों की गोपनीयता को बनाए रिना,
बौवद्धक संपर्दा, वगीकृत सूचना या ककसी सेवा का उपबंध या ऐसे िाटा स्वामी, जो
कमचष ारी है, द्वारा मांगा गया फायर्दा जैस े हानन या र्दानयत्व स े ननयोजक की सुरिा
से संबंधधत हैं ।
8. (1) कोई िाटा न्द्यासी, इस अधधननयम के अधीन उपबंधधत कतव्ष यों का पािन िाटा न्द्यासी की
साधारण
करने के लिए िाटा स्वामी के प्रनतकूि ककसी करार या ववफिता पर ववचार ककए बबना,
बाध्यताएं ।
िाटा प्रक्रमणक द्वारा या उसकी ओर से ककए गए ककसी प्रक्रमण के संबंध में इस
अधधननयम और इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के अनुपािन के लिए
उत्तरर्दायी होगा ।
(2) िाटा न्द्यासी, ककसी ववधधमान्द्य संववर्दा के अधीन केवि िाटा स्वामी को माि या
सेवाओं की प्रस्र्ापना करने से संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप के लिए उसकी ओर से
वैयजततक िाटा का प्रक्रमण के लिए ककसी िाटा प्रक्रमणक को िगा सकेगा, ननयुतत कर880 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
सकेगा, उपयोग कर सकेगा या अन्द्यर्ा सजम्मलित कर सकेगा ।
—
(3) जहां वैयजततक िाटा का, ककसी िाटा न्द्यासी द्वारा प्रक्रमण ककया जाता है
(क) वहां इसका ऐसे ववननश्चय करने के लिए उपयोग ककए जाने की संभावना
है, जो िाटा स्वामी को प्रभाववत करता है ; या
(ि) ककसी अन्द्य िाटा न्द्यासी के लिए प्रकट ककए जाने की संभावना है, वहां
िाटा न्द्यासी जो ऐस े वैयजततक िाटा का प्रक्रमण करता है इसकी संपूणतष ा, यर्ार्तष ा
और संगतता को सुननजश्चत करेगा ।
(4) कोई िाटा न्द्यासी, इस अधधननयम और इसके अधीन बनाए गए ननयमों के
उपबंधों के प्रभावी पािन को सुननजश्चत करने के लिए समुधचत तकनीकी और संगठनात्मक
उपायों को कायाषजन्द्वत करेगा ।
(5) कोई िाटा न्द्यासी, अपने कब्जे में या अपने ननयंत्रण के अधीन वैयजततक िाटा
का संरिण करेगा, जजसके अतं गतष उसके द्वारा या िाटा प्रक्रमणक द्वारा उसकी ओर से
ककए गए प्रक्रमण के संबंध में वैयजततक िाटा का उल्िंघन रोकने के लिए युजततयुतत
सुरिोपाय करना भी शालमि है ।
(6) ककसी वैयजततक िाटा भगं की र्दशा में, बोि ष और प्रत्येक प्रभाववत िाटा स्वामी
को ऐसे प्ररूप और ऐसी रीनत में, जो ववदहत की जाए, िाटा न्द्यासी ऐसे भंग की सूचना
र्देगा ।
(7) कोई िाटा न्द्यासी, जब तक कक तत्समय प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध के अनुपािन
—
के लिए प्रनतधारण आवश्यक न हो,
(क) िाटा स्वामी द्वारा अपनी सहमनत वापस िेने पर या जैसे ही यह मान
िेना युजततयुतत हो कक ववननदर्दषष्ट प्रयोजन और अधधक पूरा नहीं ककया जा रहा है,
इनमें से जो भी पहिे हो, वैयजततक िाटा लमटा र्देगा; और
(ि) अपने िाटा प्रक्रमणक से ककसी वैयजततक िाटा को लमटवाएगा, जो ऐस े
िाटा प्रक्रमणक के प्रक्रमण के लिए िाटा न्द्यासी द्वारा उपिब्ध कराया गया र्ा ।
टटांि
(I) कोई व्यजष्ट ि, ई-कॉमस ष सवे ा प्रर्दाता म द्वारा प्रचालित ऑनिाइन बाजार स्र्ि
पर स्वयं को रजजस्रीकृत कराती है । ि अपनी उपयोग की गई कार को बचे ने के लिए अपन े
वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के लिए म को अपनी सहमनत र्देती है । ऑनिाइन बाजार स्र्ि,
ववक्रय का समापन करन े में सहायता करता है । म अब उसका वयै जततक िाटा अधधक समय
तक नही ं रिेगा ।
(II) कोई व्यजष्ट ि, एक बकैं म के सार् अपना बचत िाता बंर्द कराने का ववननश्चय
करती है । म स े अपन े ग्राहकों की पहचान का अलभिेि िातों के बंर्द होने के पश्चात,् बकैं ों
को िागू ववधध द्वारा र्दस वर् ष की अवधध के लिए अनुरक्षित ककया जाना अपेक्षित है । चूंकक
ववधध के अनुपािन के लिए, प्रनतधारण आवश्यक है, अतः, म उतत अवधध के लिए ि के
वैयजततक िाटा को बनाए रिेगा ।
(8) उपधारा (7) के िंि (क) में ननदर्दषष्ट प्रयोजन पूरा ककया गया नहीं समझाअनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 881
—
जाएगा, यदर्द िाटा स्वामी, ऐसी समयावधध के लिए, जो ववदहत की जाए
(क) ववननदर्दषष्ट प्रयोजन के पािन के लिए िाटा न्द्यासी तक नहीं पहुंचता है;
और
(ि) ऐसे प्रक्रमण के संबंध में अपने ककन्द्हीं अधधकारों का प्रयोग नहीं करती है,
और लभन्द्न-लभन्द्न िाटा न्द्यालसयों के वगों और लभन्द्न-लभन्द्न प्रयोजनों के लिए लभन्द्न-लभन्द्न
कािावधधयां ववदहत की जा सकेंगी ।
(9) िाटा न्द्यासी, ऐसी रीनत में, जो ववदहत की जाए, िाटा संरिण अधधकारी, यदर्द
िागू हो, या उस व्यजतत का, जो िाटा न्द्यासी की ओर से, िाटा स्वामी द्वारा उसके
वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के बारे में पूछे गए प्रश्नों, यदर्द कोई हों, का उत्तर र्देने में
समर् ष है, की कारबार संपकष सचू ना को प्रकालशत करेगा ।
(10) िाटा न्द्यासी, िाटा स्वालमयों की लशकायतों के ननवारण के लिए एक प्रभावी तंत्र
की स्र्ापना करेगा ।
(11) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, यह स्पष्ट ककया जाता है कक िाटा स्वामी न े
ककसी ऐसी अवधध में, जजसके र्दौरान उसने वैयजततक रूप से या इिैतराननक संसूचना के
माध्यम से या शारीररक रूप से ऐसे पािन के लिए िाटा न्द्यासी के सार् संपकष आरंभ नहीं
ककया है, ववननदर्दषष्ट प्रयोजन के पािन के लिए िाटा न्द्यासी से संपकष नहीं ककया गया
माना जाएगा ।
9. (1) िाटा न्द्यासी, ककसी लशशु या दर्दव्यांगजन के, जजसका कोई ववधधपूण ष संरिक लशशुओ ं के
वैयजततक िाटा
है, ककसी वैयजततक िाटा का प्रक्रमण करने से पूव,ष यर्ाजस्र्नत, ऐसे लशशु के माता-वपता
का प्रक्रमण ।
या ववधधपूण ष संरिक की, ऐसी रीनत में, जो ववदहत की जाए, सत्यापनीय सहमनत प्राप्त
करेगा ।
—
स्पटटीकरण इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, “माता-वपता की सहमनत” पर्द के
अन्द्तगषत ववधधपूण ष संरिक की सहमनत, जहां कहीं िागू हो, आती है ।
(2) िाटा न्द्यासी, वैयजततक िाटा का ऐसा प्रक्रमण नहीं करेगा जजससे ककसी लशश ु के
कल्याण पर कोई हाननकारक प्रभाव काररत होने की संभावना हो ।
(3) िाटा न्द्यासी, लशशु की िोज संबंधी या व्यवहार संबंधी मानीटरी अर्वा लशशुओं
पर ननर्देलशत िक्षित ववज्ञापन नहीं करेगा ।
(4) उपधारा (1) और उपधारा (3) के उपबंध, िाटा न्द्यालसयों के ऐसे वगों द्वारा
ककसी लशशु के वैयजततक िाटा के प्रक्रमण को या ऐसे प्रयोजनों के लिए और ऐसी शतों के
अधीन रहते हुए, जो ववदहत की जाएं, िागू नहीं होंगे ।
(5) केन्द्रीय सरकार, यदर्द उसका यह समाधान हो जाता है कक िाटा न्द्यासी ने यह
सुननजश्चत ककया है कक लशशुओं के वैयजततक िाटा का प्रक्रमण ऐसी रीनत में ककया जाता है
जो सत्यापनीय रूप स े सुरक्षित है, ऐस े िाटा न्द्यासी द्वारा ऐस े प्रक्रमण के लिए उस आयु
को अधधसूधचत कर सकेगी, जजससे अधधक वह िाटा न्द्यासी उपधारा (1) और उपधारा (3)
के अधीन उस िाटा न्द्यासी द्वारा प्रक्रमण के संबंध में सभी या ककन्द्हीं बाध्यताओं के िाग ू
होने से छूट प्राप्त होगा, जैसा अधधसूचना में ववननदर्दषष्ट ककया जाए ।882 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
महत्वपूण ष िाटा
10. (1) केन्द्रीय सरकार, ककसी िाटा न्द्यासी या िाटा न्द्यालसयों के वग ष को ऐस े
न्द्यासी की
अनतररतत सुसंगत कारकों के ननधाषरण के आधार पर, जो वह अवधाररत करे, महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी
बाध्यताएं । के रूप में अधधसूधचत कर सकेगी, जजसके अंतगतष ननम्नलिखित हैं,—
(क) प्रक्रमखणत वैयजततक िाटा की मात्रा और संवेर्दनशीिता;
(ि) िाटा स्वामी के अधधकारों के लिए जोखिम;
(ग) भारत की संप्रभुता और अिंिता पर संभाववत प्रभाव;
(घ) ननवाषचन िोकतंत्र के लिए जोखिम ;
(ङ) राज्य की सुरिा; और
(च) िोक व्यवस्र्ा ।
—
(2) महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी
—
(क) एक िाटा संरिण अधधकारी ननयुतत करेगा, जो
(i) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी का
प्रनतननधधत्व करेगा ;
(ii) भारत में जस्र्त होगा ;
(iii) ऐसा व्यजष्ट होगा जो ननर्देशक बोि ष या महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी के
सदृश शासी ननकाय के प्रनत उत्तरर्दायी हो ; और
(iv) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन लशकायत ननवारण तंत्र के लिए
संपकष का स्र्ि होगा ;
(ि) िाटा संपरीिा करने के लिए एक स्वतंत्र िाटा संपरीिक की ननयुजतत
करेगा, जो इस अधधननयम के उपबंधों के अनुसार महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी के
अनपु ािन का मूल्यांकन करेगा; और
—
(ग) ननम्नलिखित अन्द्य उपाय करेगा, अर्ाषत:्
(i) आवधधक िाटा संरिण समाघात ननधाषरण, जो एक ऐसी प्रकक्रया होगी,
जजसमें िाटा स्वालमयों के अधधकारों का वणनष और उनके वैयजततक िाटा के
प्रक्रमण का प्रयोजन, िाटा स्वालमयों के अधधकारों के जोखिम का ननधाषरण और
प्रबंधन तर्ा ऐसी प्रकक्रया के बारे में ऐसे अन्द्य मामिे, जो ववदहत ककए जाएं,
सजम्मलित होंगे;
(ii) आवधधक संपरीिा; और
(iii) इस अधधननयम के उपबंधों से संगत ऐसे अन्द्य उपाय जो ववदहत
ककए जाएं ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 883
अध्याय 3
िाटा स्वामी के अधिकार और किव्ण य
11. (1) िाटा स्वामी को, िाटा न्द्यासी (जजसे इसमें इसके पश्चात ् उतत िाटा न्द्यासी वैयजततक िाटा
के बारे में
कहा गया है) से, जजसको उसने पूव ष में सहमनत र्दी है, जजसके अंतगतष धारा 7 के िंि (क)
सूचना तक पहुंच
में यर्ा ननदर्दषष्ट सहमनत भी है, उसे ऐसी रीनत में, जो ववदहत की जाए, उसके अनुरोध पर
का अधधकार ।
—
वैयजततक िाटा के प्रक्रमण के लिए,
(क) वैयजततक िाटा, जजसका ऐसे िाटा न्द्यासी द्वारा प्रक्रमण ककया जा रहा है
और ऐसे वैयजततक िाटा के संबंध में उस िाटा न्द्यासी द्वारा ककए गए प्रक्रमण
संबंधी कक्रयाकिाप का सार ;
(ि) सभी अन्द्य िाटा न्द्यालसयों और िाटा प्रक्रमणकों की पहचान, जजनके सार्
ऐसे िाटा न्द्यासी द्वारा इस प्रकार साझा ककए गए वैयजततक िाटा के वणनष के सार्,
वैयजततक िाटा साझा ककया गया है ; और
(ग) ऐसे िाटा स्वामी के वैयजततक िाटा और उसके प्रक्रमण से संबंधधत ऐसी
कोई अन्द्य सूचना, जो ववदहत की जाए,
अलभप्राप्त करने का अधधकार होगा ।
(2) उपधारा (1) के िंि (ि) या िंि (ग) में अंतववष्ष ट कोई बात, उतत िाटा न्द्यासी
द्वारा ककसी वैयजततक िाटा को, ऐसा वैयजततक िाटा अलभप्राप्त करने के लिए ववधध द्वारा
प्राधधकृत ककसी अन्द्य िाटा न्द्यासी के सार् साझा करने के संबंध में िागू नहीं होगी, जहां
ऐसा सहभाजन अपराधों या साइबर घटनाओं के ननवारण या पता िगाने या अन्द्वेर्ण के
प्रयोजनार् ष या अपराधों के अलभयोजन या र्दंि हेत ु ऐसे अन्द्य िाटा न्द्यासी द्वारा लिखित में
ककए गए अनुरोध के अनुसरण में ककया जाता है ।
12. (1) ककसी िाटा स्वामी को, तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के अधीन, ककसी वैयजततक िाटा
को सुधारने और
अपेिा या प्रकक्रया के अनुसार, अपने वैयजततक िाटा को सुधारने, पूरा करने, अद्यतन
लमटाने का
करने और लमटाने का अधधकार होगा, जजसके प्रक्रमण के लिए उसन े पूव ष में सहमनत र्दी
अधधकार ।
है, जजसके अंतगतष धारा 7 के िंि (क) में यर्ा ननदर्दषष्ट सहमनत भी है ।
(2) िाटा न्द्यासी, िाटा स्वामी स े सुधार, समापन या अद्यतन के लिए अनुरोध
—
प्राप्त होने पर,
(क) गित या भ्रामक वैयजततक िाटा को सही करेगा ;
(ि) अपूण ष वैयजततक िाटा को पूरा करेगा ; और
(ग) वैयजततक िाटा को अद्यतन करेगा ।
(3) िाटा स्वामी, अपने वैयजततक िाटा के वविोपन के लिए िाटा न्द्यासी को ऐसी
रीनत में, जो ववदहत की जाए, अनुरोध करेगा और ऐसा अनुरोध प्राप्त होने पर, िाटा
न्द्यासी उसके वैयजततक िाटा का वविोपन कर र्देगा, जब तक कक उसे ववननदर्दषष्ट प्रयोजन
के लिए या तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के अनुपािन के लिए बनाए रिना आवश्यक न
हो ।884 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
लशकायत ननवारण 13. (1) िाटा स्वामी को, ऐसे िाटा स्वामी के वैयजततक िाटा के संबंध में अपनी
का अधधकार ।
बाध्यताओं के पािन या इस अधधननयम के और इसके अधीन बनाए गए ननयमों के
उपबंधों के अधीन अपने अधधकारों के प्रयोग के बारे में ऐस े िाटा न्द्यासी या सहमनत
प्रबंधक के ककसी काय ष या िोप के संबंध में, ककसी िाटा न्द्यासी या सहमनत प्रबंधक द्वारा
उपिब्ध कराए गए लशकायत ननवारण के तुरन्द्त उपिब्ध साधनों को प्राप्त करने का
अधधकार होगा ।
(2) िाटा न्द्यासी या सहमनत प्रबंधक, उपधारा (1) में ननदर्दषष्ट ककसी लशकायत का
िाटा न्द्यालसयों के सभी या ककसी वग ष के लिए उसकी प्राजप्त की तारीि से, ऐसी
अवधध के भीतर र्देगा, जो ववदहत की जाए ।
(3) िाटा स्वामी, बोि ष से संपकष करने से पहिे, इस धारा के अधीन अपनी लशकायत
के ननवारण के अवसर का उपयोग करेगा ।
नामननर्देशन का 14. (1) िाटा स्वामी को, ककसी अन्द्य व्यजष्ट को ऐसी रीनत में, जो ववदहत की जाए,
अधधकार ।
नामननर्देलशत करने का अधधकार होगा, जो िाटा स्वामी की मत्ृ यु या असमर्तष ा की र्दशा
में, इस अधधननयम और उसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के अनुसार िाटा
स्वामी के अधधकारों का प्रयोग करेगा ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “असमर्तष ा” पर्द से या शारीररक
शैधर्ल्य के कारण इस अधधननयम के या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के
अधीन िाटा स्वामी के अधधकारों का प्रयोग करने में असमर्तष ा अलभप्रेत है ।
िाटा स्वामी के 15. िाटा स्वामी, ननम्नलिखित कतव्ष यों का पािन करेगा, अर्ाषत:्—
कतव्ष य ।
(क) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन अधधकारों का प्रयोग करते समय
तत्समय प्रवत्ृ त सभी िागू ववधधयों के उपबंधों का अनुपािन करना;
(ि) यह सुननजश्चत करना कक ववननदर्दषष्ट प्रयोजन के लिए अपना वैयजततक
िाटा प्रर्दान करते समय ककसी अन्द्य व्यजतत का प्रनतरूपण न ककया जाए;
(ग) यह सुननजश्चत करना कक राज्य या उसके ककन्द्हीं करणत्वों द्वारा जारी
ककए गए ककसी र्दस्तावेज, ववलशष्ट पहचानकताष, पहचान के सबूत या पते के सबूत
के लिए अपना वैयजततक िाटा प्रर्दान करते समय ककसी ताजत्त्वक सूचना को न
छुपाया जाए ;
(घ) यह सुननजश्चत करना कक िाटा न्द्यासी या बोि ष के पास कोई झूठी या
तुच्छ लशकायत या पररवार्द रजजस्टर न ककया जाए ;
(ङ) इस अधधननयम के या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों के
अधीन सुधार या वविोपन के अधधकार का प्रयोग करते समय केवि ऐसी जानकारी
प्रस्तुत की जाए, जो सत्यापनीय रूप से अधधप्रमाखणत हो ।
अध्याय 4
ववशेष उपबंि
भारत के बाहर
16. (1) केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा, भारत के बाहर ऐसे र्देश या राज्यिेत्र
वैयजततक िाटा का
प्रक्रमण ।
तक, जो इस प्रकार अधधसूधचत ककया जाए, प्रक्रमण के लिए ककसी िाटा न्द्यासी द्वारा
वैयजततक िाटा के अंतरण को ननबधंधत कर सकेगी ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 885
(2) इस धारा में अंतववष्ष ट कोई बात, भारत में तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ऐसी ववधध के
िागू होने को ननबधंधत नहीं करेगी जो ककसी वैयजततक िाटा या िाटा न्द्यासी या उसके
ककसी वग ष के संबंध में भारत के बाहर ककसी िाटा न्द्यासी द्वारा वैयजततक िाटा के
अंतरण के लिए उच्चतर डिग्री के संरिण या उस पर ननबधं न का उपबंध करती है ।
17. (1) धारा 8 की उपधारा (1) और उपधारा (5) के लसवाय, अध्याय 2 के छूट ।
—
उपबंध और अध्याय 3 तर्ा धारा 16 के उपबंध, वहां िाग ू नहीं होंग,े जहां
(क) ककसी ववधधक अधधकार या र्दावे के प्रवतनष के लिए वैयजततक िाटा का
प्रक्रमण आवश्यक है ;
(ि) भारत में ककसी न्द्यायािय या अधधकरण या ककसी अन्द्य ननकाय द्वारा
वैयजततक िाटा का प्रक्रमण, जो ककसी न्द्यानयक या न्द्यानयककल्प या ववननयामक या
पयवष ेिणीय कृत्य के पािन के सार् ववधध द्वारा वहां न्द्यस्त ककया जाता है, जहां
ऐसा प्रक्रमण ऐसे कृत्यों के पािन के लिए आवश्यक है ;
(ग) ऐसे व्यजततगत िाटा का प्रक्रमण, भारत में ककसी अपराध या तत्समय
प्रवत्ृ त ककसी ववधध के अनतक्रमण की रोकर्ाम, पता िगाने, अन्द्वेर्ण या अलभयोजन
के दहत में ककया जाता है ;
(घ) िाटा स्वालमयों के, जो भारत के राज्यिेत्र में नहीं है, वैयजततक िाटा का,
भारत में जस्र्त ककसी व्यजतत द्वारा भारत के राज्यिेत्र स े बाहर ककसी व्यजतत के
सार् की गई ककसी संववर्दा के अनुसरण में, प्रक्रमण ककया जाता है ;
(ङ) र्दो या र्दो से अधधक कंपननयों के समझौते या व्यवस्र्ा या वविय या
समामेिन या ककसी कंपनी के ननवविष यन या अन्द्यर्ा के माध्यम से पुनननमष ाण या
एक या अधधक कंपनी के उपक्रम का, ककसी र्दसू री कंपनी को अंतरण या एक या
अधधक कंपननयों के ववभाजन को अन्द्तवलषित करने वािी स्कीम के लिए प्रक्रमण
आवश्यक है जो न्द्यायािय या अधधकरण या तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध द्वारा ऐसा
करने के लिए सिम अन्द्य प्राधधकारी द्वारा अनुमोदर्दत ककया जाता है; और
(च) यह प्रक्रमण, ककसी ऐसे व् यजत त की जानकारी और आजस् तयों तर्ा
र्दानयत्वों को अलभननजश् चत करने के प्रयोजन के लिए है, जजसने ककसी संस् र्ा
से लिए गए ककसी ऋण या अधग्रम के कारण र्देय का संर्दाय करने में, ऐसे प्रक्रमण
के अध् यधीन, जो तत् समय प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध में जानकारी या िाटा के प्रकटन
के संबंध में उपबंधों के अनुसार है, व् यनतक्रम ककया है ।
स् पट टीकरण—इस िंि के प्रयोजनों के लिए, “व् यनतक्रम” और “ संस् र्ा” पर्दों
2016 का 31 का वही अर् ष होगा, जो दर्दवािा और शोधन अिमता संदहता, 2016 की धारा 3 की
उपधारा (12) और उपधारा (14) में उनका है ।
टटांि
कोई व्य जष्ट ि, जो ककसी बकैं म स े ऋण िेती है । ि, अपन े मालसक ऋण की ककस्त का
प्रनतसंर्दाय, उस तारीि को जजसको यह र्देय है, करन े में व्य नतक्रम करती है । म, उसकी
जानकारी और आजस्त यों तर्ा र्दानयत्वों को अलभननजश्च त करने के लिए ि के वैयजत तक िाटा का
प्रक्रमण कर सकेगा ।886 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
(2) इस अधधननयम के उपबंध, वैयजत तक िाटा का प्रक्रमण करने के संबंध में
—
ननम् नलिखित को िागू नहीं होंगे, जहां
(क) राज् य के ऐस े करणत्व द्वारा, जो केन्द्रीय सरकार, भारत की संप्रभुता और
अिंिता, राज्य की सुरिा, ववर्देशी राज्यों के सार् मैत्रीपणू ष संबंधों, िोक व्यवस्र्ा
बनाए रिने या इनमें स े ककसी के संबंध में ककसी संज्ञेय अपराध के प्रनत उद्दीपन को
रोकन े के दहत में अधधसूधचत करे और ककसी वैयजत तक िाटा का केन्द्रीय सरकार
द्वारा प्रक्रमण ककया जाना, जजसे ऐसा करणत्व उसे प्रस्तुत करे ; और
(ि) अनुसंधान, पुरािेिीकरण या सांज यकी संबंधी प्रयोजनों के लिए आवश् यक
हो, यदर्द वैयजत तक िाटा, िाटा स्वामी के ककसी ववननदर्दषष्ट ववननश् चय िेने के लिए
उपयोग नहीं ककया जाना है और ऐसा प्रक्रमण ऐस े मानकों के अनुसार ककया जाता
है, जो ववदहत ककया जाए ।
(3) केन्द्रीय सरकार प्रक्रलमत वैयजत तक िाटा के पररमाण और प्रकृनत को ध् यान में
रिते हुए, कनतपय िाटा न्द्यालसयों या िाटा न्द्यालसयों के वग,ष जजसके अंतगतष स्टाटष-अप भी
हैं, को िाटा न्द्यालसयों के रूप में अधधसूधचत कर सकेगी, जजन्द्ह ें धारा 5, धारा 8 की
उपधारा (3) और उपधारा (7) तर्ा धारा 10 और धारा 11 के उपबंध िागू नहीं होंगे ।
स् पट टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “स् टाटष-अप” पर्द से कोई प्राइवेट
लिलमटेि कंपनी या भागीर्दारी फम ष या भारत में ननगलमत कोई सीलमत र्दानयत् व भागीर्दारी
अलभप्रेत है, जो ऐसे ववभाग द्वारा अधधसूधचत मानर्दंिों और प्रकक्रया के अनुसार, उस रूप
में पात्र होने के लिए और उस रूप में मान्द्य ताप्राप् त है जजसे केन्द्रीय सरकार में स् टाटष-अप
से संबंधधत ववर्य आबंदटत ककए जाते हैं ।
(4) धारा 8 की उपधारा (7) और धारा 12 की उपधारा (3) के उपबंध, राज् य या
राज् य के ककसी करणत्व द्वारा प्रक्रमण करने के संबंध में और जहां ऐसा प्रक्रमण ऐस े
प्रयोजन के लिए है, जजसमें कोई ऐसा ववननश् चय करना सजम् मलित नहीं है, जो िाटा स्वामी
को प्रभाववत करे, वहां धारा 12 की उपधारा (2) िाग ू नहीं होगी ।
(5) केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि स े पांच वर् ष की अवधध की
समाजप् त स े पूव,ष अधधसूचना द्वारा, यह घोर्णा कर सकेगी कक इस अधधननयम का कोई
उपबंध, ऐसे िाटा न्द्यासी या िाटा न्द्यालसयों के वगों को, ऐसी अवधध के लिए िागू नहीं
होगा, जो अधधसूचना में ववननदर्दषष् ट की जाए ।
अध् याय 5
िारिीय िाटा संरक्षण बोि ण
बोि ष की स् र्ापना । 18. (1) ऐसी तारीि से, जो केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा ननयत करे, इस
अधधननयम के प्रयोजनों के लिए एक बोि ष की स् र्ापना की जाएगी, जजसे भारतीय िाटा
संरिण बोि ष कहा जाएगा ।
(2) बोि,ष पूवोतत नाम से एक ननगलमत ननकाय होगा, जजसका शाश्वत उत्तराधधकार
और सामान्द्य मुरा होगी और जजसे इस अधधननयम के उपबंधोँ के अधीन रहते हुए, चि
और अचि र्दोनों प्रकार की संपजत्त का अजषन, धारण और व्ययन करने की और संववर्दा
करने की शजतत होगी तर्ा वह उतत नाम से वार्द िाएगा और उस पर वार्द िाया
जाएगा ।
(3) बोि ष का मुयािय ऐसे स्र्ान पर होगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधधसूधचत
ककया जाए ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 887
19. (1) बोि,ष एक अध्यि और ऐसे अन्द्य सर्दस् यों से लमिकर बनेगा, जो केन्द्रीय संरचना तर्ा
अध्यि और
सरकार अधधसूधचत करे ।
सर्दस्यों की
(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा, अध्यि और अन्द्य सर्दस्यों की ननयुजतत ऐसी रीनत में की ननयुजतत के लिए
जाएगी, जो ववदहत की जाए । अहषताएं ।
(3) अध्यि और अन्द्य सर्दस्य योग्यता, सत्यननष्ठा और प्रनतष्ठा वािे ऐसे व्यजतत
होंगे जजन्द्हें िाटा शासन, सामाजजक या उपभोतता संरिण से संबंधधत ववधधयों के प्रशासन
या कायाषन्द्वयन, वववार्द समाधान, सूचना और संचार प्रौद्योधगकी, डिजजटि अर्व्ष यवस्र्ा,
ववधध, ववननयमन या प्रौद्योधगकी-ववननयमन या ककसी ऐसे अन्द्य िेत्र में ववशेर् ज्ञान या
व्यवहाररक अनुभव हो, जो केन्द्रीय सरकार की राय में बोि ष के लिए उपयोगी हो सके और
उनमें से कम से कम एक सर्दस् य ववधध के िेत्र में ववशेर्ज्ञ होगा ।
20. (1) अध्यि और अन्द्य सर्दस्यों का वेतन, भत्त े और उनकी सेवा के अन्द्य उनको संर्देय
ननबंधन और शतें वे होंगी, जो ववदहत की जाए ं तर्ा उनकी ननयुजत त के पश् चात,् उनमें वेतन,
HkÙks
और
अिाभकारी कोई पररवतनष नहीं ककया जाएगा ।
पर्दावधध ।
(2) अध्यि और अन्द्य सर्दस्य र्दो वर् ष की अवधध के लिए पर्द धारण करेंगे और
पुनननयष ुजत त के लिए पात्र होंगे ।
21. (1) कोई व् यजत त, अध् यि या ककसी सर्दस् य के रूप में ननयुत त ककए जाने या बोि ष के अध् यि
बने रहने के लिए ननरदहतष होगा, यदर्द— और सर्दस् यों के
रूप में ननयुजतत
(क) उसे दर्दवालिया न्द्यायननणीत ककया गया है ;
और बने रहने के
(ि) उसे ककसी ऐसे अपराध के लिए लसद्धर्दोर् ठहराया गया है जजसमें केन्द्रीय
लिए ननहषताए ं ।
सरकार की राय में नैनतक अधमता अन्द्तवलषित है ;
(ग) वह सर्दस्य के रूप में काय ष करने के लिए शारीररक या मानलसक रूप स े
असमर् ष हो गया है ;
(घ) उसने ऐसा या अन्द्य दहत अजजतष कर लिया है जजससे सर्दस्य के
रूप में उसके कृत्यों पर प्रनतकूि प्रभाव पड़ने की संभावना है ; या
(ङ) उसने अपने पर्द का इस प्रकार र्दरुु पयोग ककया है जजससे उसका पर्द पर
बने रहना िोकदहत पर प्रनतकूि प्रभाव िािने वािा है ।
(2) अध्यि या सर्दस्य को, केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके पर्द स े तब तक नहीं हटाया
जाएगा, जब तक कक उस े मामिे में सुनवाई का एक युजततयुतत अवसर प्रर्दान न कर दर्दया
गया हो ।
22. (1) अध् यि या कोई अन्द्य सर्दस् य अपने पर्द स े त् यागपत्र की सूचना केन्द्रीय सर्दस् यों द्वारा
त् यागपत्र और
सरकार को लिखित में र्दे सकेगा और ऐसा त् यागपत्र उस तारीि से, जजसको केन्द्रीय
ररजत त का भरा
सरकार उसे उसका पर्द त् याग करने के लिए अनुज्ञात करती है या ऐसी सूचना की प्राजप् त
जाना ।
की तारीि से तीन मास की अवधध की समाजप् त पर या उसके पर्द पर सम् यक् रूप स े
ननयुत त ककए जाने तक या उसकी पर्दावधध की समाजप् त पर, इनमें जो भी पहि े
हो, प्रभावी होगा ।
(2) अध् यि या ककसी अन्द्य सर्दस् य द्वारा त् यागपत्र दर्दए जाने या हटाए जाने या
मत्ृ यु या अन्द् यर्ा द्वारा उत्पन्द्न हुई ररजत त को, इस अधधननयम के उपबंधों के अनुसार,
नई ननयुजत त द्वारा भरा जाएगा ।888 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
(3) अध् यि और कोई अन्द्य सर्दस् य, केन्द्रीय सरकार के पवू ष अनुमोर्दन स े ही, उस
तारीि से जजसको वह ऐसा पर्द धारण नहीं करता है, एक वर् ष की अवधध के लिए, कोई
ननयोजन स् वीकार करेगा, अन्द्यर्ा नहीं और केन्द्रीय सरकार को ऐस े ककसी िाटा न्द्यासी के
सार् जजसके ववरुद्ध कायवष ादहयां ऐस े अध् यि या अन्द्य सर्दस् य द्वारा या उसके समि प्रारंभ
की गई र्ीं, ननयोजन की कोई पश् चातवती स्व ीकृनत का भी प्रकटीकरण करेगा ।
बोि ष की 23. (1) बोि,ष अपनी बैठकों के आयोजन और उनमें कारबार का संव् यवहार करने के
कायवष ादहयां । संबंध में, जजसके अंतगतष डिजजटि साधनों द्वारा संव्यवहार भी है, ऐसी प्रकक्रया का पािन
करेगा तर्ा अपने आर्देशों, ननर्देशों और लिितों का अधधप्रमाणन ऐसी रीनत में करेगा, जो
ववदहत की जाए ।
(2) बोि ष का कोई काय ष या कायवष ाही, केवि ननम् नलिखित कारण से अववधधमान्द् य
नहीं होगी—
(क) बोि ष में ककसी ररजत त या उसके गठन में कोई त्रुदट होना ;
(ि) बोि ष के अध् यि या अन्द्य सर्दस् य के रूप में कायष करने वािे ककसी
व् यजतत की ननयुजत त में कोई त्रुदट होना ; या
(ग) बोि ष की प्रकक्रया में कोई अननयलमतता होना, जजसका मामि े के गुणागुण
पर कोई प्रभाव न पड़ता हो ।
(3) जब अध् यि, अनुपजस् र्नत, बीमारी या ककसी अन्द्य कारण से अपने कृत्यों का
ननवहष न करने में असमर् ष है तब वररष् ठतम सर्दस् य, अध् यि के कृत् यों का, उस तारीि तक,
जजसको अध् यि अपने कतव्ष यों को पुनः संभािता है, ननवहष न करेगा ।
बोि ष के अधधकारी 24. बोि,ष केन्द्रीय सरकार के पूव ष अनुमोर्दन से, उतने अधधकारी और कमचष ारी
और कमचष ारी । ननयुत त कर सकेगा जजतने वह इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन, ननयुजत त और सेवा
के ऐसे ननबंधनों तर्ा शतों पर, जो ववदहत की जाएं, अपने कृत् यों के र्दि ननवहष न के लिए
आवश् यक समझे ।
सर्दस् यों और 25. बोि ष के अध् यि, सर्दस् य, अधधकारी और कमषचारी, जब वे इस अधधननयम के
अधधकाररयों का उपबंधों के अनुसरण में कायष कर रहे हैं या उनका कायष ककया जाना तात्पनयषत है, यह
िोक सेवक होना । समझा जाएगा कक वे भारतीय र्दंि संदहता की धारा 21 के अर् ष के अन्द्तगतष िोक सेवक
1860 का 45
हैं ।
अध् यि की 26. अध् यि, ननम् नलिखित शजत तयों का प्रयोग करेगा, अर्ाषत ् :—
शजत तया ं ।
(क) बोि ष के सभी प्रशासननक मामिों के संबंध में साधारण अधीिण और
ननर्देश र्देना ;
(ि) बोि ष को संबोधधत ककसी सूचना, लशकायत, ननर्देश या पत्राचार की संवीिा
करने के लिए बोि ष के ककसी अधधकारी को प्राधधकृत करना ; और
(ग) ककसी व् यजष् टक सर्दस् य या सर्दस् यों के समूह द्वारा बोि ष के ककन्द् हीं कृत् यों
के पािन को प्राधधकृत करना और उसकी ककन्द्ह ीं कायवष ादहयों को संचालित करना
और उनके बीच कायवष ादहयां आबंदटत करना ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 889
अध् याय 6
बोि ण की शजत ियां, कृत् य और उसके द्वारा पालि की िािे वाली प्रक्रक्रया
27. (1) बोि,ष ननम् नलिखित शजत तयों का प्रयोग करेगा और कृत् यों का पािन करेगा, बोि ष की शजतत या ं
अर्ाषत ्
:— और कृत् य ।
(क) धारा 8 की उपधारा (6) के अधीन वैयजत तक िाटा भंग की ककसी सूचना
की प्राजप् त पर, ककसी वैयजत तक िाटा भंग की र्दशा में, कोई अत्यावश्यक उपचारी या
न्द्यूनीकरण उपायों का ननर्देश र्देना, और ऐसे वैयजत तक िाटा भंग की जांच करना
तर्ा इस अधधननयम में यर्ा उपबंधधत शाजस् त अधधरोवपत करना ;
(ि) ककसी वैयजत तक िाटा भंग के संबंध में ककसी िाटा स्वामी द्वारा की गई
लशकायत पर या ककसी िाटा न्द्यासी द्वारा उसके वैयजत तक िाटा के संबंध में अपनी
बाध् यताओं के पािन के भंग पर या इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन अपने
अधधकारों का प्रयोग करने पर या केन्द्रीय सरकार या राज् य सरकार द्वारा उसको ककए
गए ककसी ननर्देश पर या ककसी न्द्य ायािय के ननर्देशों का अनुपािन करने पर, ऐसे भंग
की जांच करना और इस अधधननयम में यर्ा उपबंधधत शाजस् त अधधरोवपत करना ;
(ग) सहमनत प्रबंधक द्वारा अपनी बाध्यताओं के अनुपािन में ककसी भंग के
संबंध में िाटा स्वामी द्वारा की गई लशकायत पर, उसके वैयजततक िाटा के संबंध में
ऐसे भंग की जांच करना और इस अधधननयम में यर्ा उपबंधधत शाजस्त अधधरोवपत
करना ;
(घ) सहमनत प्रबंधक के रजजस्रीकरण की ककसी शत ष के भंग की सूचना की
प्राजप्त पर ऐस े भंग की जांच करना और इस अधधननयम में यर्ा उपबंधधत शाजस्त
अधधरोवपत करना ;
(ङ) ककसी मध्यवती द्वारा धारा 37 की उपधारा (2) के उपबंधों के पािन में
भंग के संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा दर्दए गए ननर्देश पर, ऐसे भंग की जांच
करना और इस अधधननयम में यर्ा उपबंधधत शाजस्त अधधरोवपत करना ।
(2) बोि,ष संबद्ध व्यजतत को सुनवाई का अवसर प्रर्दान करने के पश्चात ् और कारणों
को िेिबद्ध करने के पश्चात,् इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन अपने कृत्यों के प्रभावी
ननवहष न के लिए, ऐसे ननर्देश जारी कर सकेगा जो वह ऐसे व्यजतत के लिए आवश्यक
समझे, जो उसके अनुपािन करने के लिए आबद्धकर होगा ।
(3) बोि,ष उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन जारी ककसी ननर्देश से प्रभाववत
ककसी व्यजतत द्वारा ककए गए अभ्यावेर्दन पर, या केन्द्रीय सरकार द्वारा ककए गए ननर्देश
पर, ऐसे ननर्देश को उपांतररत, ननिंबबत, वापस या रद्द कर सकेगा और ऐसा करते समय,
ऐसी शत ें अधधरोवपत कर सकेगा जो वह ठीक समझे, जजनके अधीन रहते हुए उपांतरण,
ननिंबन, वापसी या रद्दकरण प्रभावी होगा ।
28. (1) बोि,ष स्वतंत्र ननकाय के रूप में काय ष करेगा और, यर्ासाध्य, डिजजटि बोि ष द्वारा
पािन की जान े
कायाषिय के रूप में काय ष करेगा जजसमें डिजाइन द्वारा उसके डिजजटि होने के संबंध में
वािी प्रकक्रया ।
लशकायतों की प्राजप्त और आबंटन, ववननश्चयों की सुनवाई तर्ा उनकी उद्घोर्णा भी है
और ऐसी प्रौद्योधगकी-ववधधक उपायों को अंगीकृत करेगा, जो ववदहत ककए जाएं ।890 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
(2) बोि,ष धारा 27 की उपधारा (1) में यर्ा ननदर्दषष्ट सूचना या लशकायत या ननर्देश
या ननर्देशों की प्राजप्त पर, इस अधधननयम या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों
के अनुसार कारषवाई कर सकेगा ।
(3) बोि,ष यह अवधाररत करेगा कक तया ककसी जांच में अग्रसर होने के लिए पयाषप्त
आधार हैं ।
(4) यदर्द बोि,ष यह अवधाररत करता है कक अपयाषप्त आधार हैं तो वह उन कारणों के
लिए जो िेिबद्ध ककए जाएं, कायवष ादहयों को बंर्द कर सकेगा ।
(5) यदर्द बोि ष यह अवधाररत करता है कक जांच में अग्रसर होने के लिए पयाषप्त
आधार हैं, तो वह उन कारणों के लिए जो िेिबद्ध ककए जाएं, यह अलभननजश्चत करने के
लिए ककसी व्यजतत के मामिों की जांच कर सकेगा कक तया ऐसा व्यजतत इस अधधननयम
के उपबंधों का अनपु ािन कर रहा है या उसने उनका अनपु ािन ककया है ।
(6) बोि,ष प्राकृनतक न्द्याय के लसद्धांतों का पािन करते हुए ऐसी जांच करेगा और
ऐसी जांच के र्दौरान उसकी कारषवाइयों के लिए कारणों को अलभलिखित करेगा ।
(7) बोि ष को, इस अधधननयम के अधीन अपने कृत्यों के ननवहष न के प्रयोजनों के
लिए, वही शजततयां प्राप्त होंगी जो ननम्नलिखित मामिों से संबंधधत, लसववि प्रकक्रया
संदहता, 1908 के अधीन ककसी लसववि न्द्यायािय में ननदहत होती हैं— 1908 का 5
(क) ककसी व्यजतत को समन करना और उस े उपजस्र्त कराना तर्ा उसकी
शपर् पर परीिा करना ;
(ि) र्दस्तावेजों के प्रकटीकरण और प्रस्तुत ककए जाने की अपेिा करते हुए
शपर्पत्र पर साक्ष्य ग्रहण करना ;
(ग) ककसी िाटा, पुस्तक, र्दस्तावेज, रजजस्टर, िेिा बही या अन्द्य र्दस्तावेज का
ननरीिण करना ; और
(घ) ऐसे अन्द्य ववर्य, जो ववदहत ककए जाएं ।
(8) बोि ष या उसके अधधकारी ककसी पररसर तक पहुंच से ननवाररत नहीं करेंगे या
ककसी ऐसे उपस्कर या ककसी ऐसी मर्द को अलभरिा में नहीं िेंगे, जो ककसी व्यजतत के
दर्दन प्रनतदर्दन के कायकष रण पर प्रनतकूि प्रभाव िािती हो ।
(9) बोि,ष इस धारा के प्रयोजनों के लिए, अपनी सहायता के लिए केन्द्रीय सरकार या
राज्य सरकार के ककसी पुलिस अधधकारी या ककसी अधधकारी की सेवाओं की अपेिा कर
सकेगा और ऐस े प्रत्येक अधधकारी का यह कतव्ष य होगा कक वह ऐसी अध्यपेिा का
अनुपािन करे ।
(10) जांच के र्दौरान, यदर्द बोि ष यह आवश्यक समझता है तो वह उन कारणों के
लिए जो िेिबद्ध ककए जाएं, संबद्ध व्यजतत को सुनवाई का अवसर प्रर्दान करने के पश्चात,्
अंतररम आर्देश जारी कर सकेगा ।
(11) जांच पूरी हो जाने पर और संबंधधत व्यजतत को सुनवाई का अवसर दर्दए जाने
के पश्चात,् बोि,ष उन कारणों के लिए जो िेिबद्ध ककए जाएं, धारा 33 के अनुसार या तो
कायवष ादहयों को बन्द्र्द कर सकेगा या कायवष ाही करने के लिए अग्रसर हो सकेगा ।
(12) ककसी लशकायत की प्राजप्त के पश्चात,् ककसी भी प्रक्रम पर, यदर्द बोि ष की यह
राय है कक लशकायत झूठी या तुच्छ है, तो बोि,ष पररवार्दी को चेतावनी जारी कर सकेगा या
उस पर िच ष अधधरोवपत कर सकेगा ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 891
अध्याय 7
अपील और वैकजपपक वववाद समािाि
29. (1) इस अधधननयम के अधीन बोि ष द्वारा ककए गए ककसी आर्देश या ननर्देश अपीि अधधकरण
को अपीि ।
द्वारा व्यधर्त कोई व्यजतत अपीि अधधकरण के समि अपीि कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपीि, उस आर्देश या ननर्देश की प्राजप्त की
तारीि से, जजसके ववरुद्ध अपीि की गई है, साठ दर्दन की अवधध के भीतर फाइि की
जाएगी और वह ऐसे प्ररूप और रीनत में होगी और उसके सार् ऐसी फीस संिग्न होगी, जो
ववदहत की जाए ।
(3) अपीि अधधकरण, उपधारा (2) में ववननदर्दषष्ट अवधध की समाजप्त के पश्चात ्
ककसी अपीि को ग्रहण कर सकेगा, यदर्द उसका यह समाधान हो जाता है कक उस अवधध
के भीतर अपीि नहीं करने के लिए पयाषप्त कारण र्ा ।
(4) उपधारा (1) के अधीन ककसी अपीि की प्राजप्त पर, अपीि अधधकरण, अपीि के
पिकारों को सुनवाई का अवसर र्देने के पश्चात,् ऐसे आर्देश की, जजसके ववरुद्ध अपीि की
गई है, पुजष्ट करने वािा, उस े उपांतररत करने वािा या अपास्त करने वािा उस पर ऐसा
आर्देश पाररत कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।
(5) अपीि अधधकरण, बोि ष को और अपीि के पिकारों को, उसके द्वारा ककए गए
प्रत्येक आर्देश की प्रनत भेजेगा ।
(6) उपधारा (1) के अधीन अपीि अधधकरण के समि फाइि की गई अपीि पर
यर्ासंभव शीघ्रता के सार् उसके द्वारा कारषवाई की जाएगी तर्ा उस तारीि से, जब
अपीि उस े प्रस्तुत की गई है, छह मास की अवधध के भीतर अजन्द्तम रूप से अपीि का
ननपटान करने का प्रयास ककया जाएगा ।
(7) जहां उपधारा (6) के अधीन ककसी अपीि का छह मास की अवधध के भीतर
ननपटान नहीं ककया जा सकता है, वहां अपीि अधधकरण उस अवधध के भीतर अपीि के
ननपटान नहीं ककए जाने वािे कारणों को िेिबद्ध करेगा ।
1997 का 24 (8) भारतीय र्दरू -संचार ववननयामक प्राधधकरण अधधननयम, 1997 की धारा 14क और
धारा 16 के उपबंधों पर प्रनतकूि प्रभाव िािे बबना, अपीि अधधकरण, ऐसी प्रकक्रया के
अनुसार, जो ववदहत की जाए, इस धारा के अधीन अपीि का ननपटारा करेगा ।
(9) जहां कोई अपीि इस अधधननयम के अधीन अपीि अधधकरण के आर्देशों के
ववरुद्ध फाइि की जाती है, वहां भारतीय र्दरू -संचार ववननयामक प्राधधकरण
1997 का 24 अधधननयम, 1997 की धारा 18 के उपबंध िागू होंगे ।
(10) इस अधधननयम के उपबंधों के अधीन फाइि की गई अपीिों के संबंध में,
अपीि अधधकरण, यर्ासाध्य, डिजजटि कायाषिय के रूप में काय ष करेगा, जजसमें अपीि की
प्राजप्त, सुनवाई और डिजाइन द्वारा उसके डिजजटि होने के संबंध में ववननश्चयों की
उद्घोर्णा भी है ।
अपीि अधधकरण 30. (1) इस अधधननयम के अधीन अपीि अधधकरण द्वारा पाररत कोई आर्देश का
द्वारा पाररत
इसके द्वारा लसववि न्द्यायािय की डिक्री के रूप में ननष्पार्दनीय होगा, और इस प्रयोजन के
आर्देश को डिक्री के
लिए, अपीि अधधकरण को लसववि न्द्यायािय की सभी शजततयां प्राप्त होंगी ।
रूप में ननष्पार्दनीय
होना ।892 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
(2) उपधारा (1) में अंतववष्ष ट ककसी बात के होते हुए भी, अपीि अधधकरण अपने
द्वारा ककए गए ककसी आर्देश को स्र्ानीय अधधकाररता रिने वािे लसववि न्द्यायािय को
पारेवर्त कर सकेगा और ऐसा लसववि न्द्यायािय इस प्रकार आर्देश ननष्पादर्दत करेगा मानो
वह उस न्द्यायािय द्वारा की गई डिक्री हो ।
वैकजल्पक वववार्द 31. यदर्द बोि ष की यह राय है कक मध्यकता द्वारा ककसी लशकायत का समाधान
समाधान ।
ककया जा सकता है, तो वह ऐसे मध्यस्र् द्वारा ऐसी मध्यस्र्ता के माध्यम से वववार्द के
समाधान का प्रयास करने के लिए संबद्ध पिकारों को ऐसे ननर्देश र्दे सकेगा जैसे पिकार
पारस्पररक रूप से सहमत हों या जैसा भारत में तत्समय प्रवत्ृ त ककसी ववधध के अधीन
उपबंध ककया गया हो ।
स्वैजच्छक 32. (1) बोि,ष धारा 28 के अधीन कायवष ाही के ककसी प्रक्रम पर ककसी व्यजतत से
वचनबंध ।
इस अधधननयम के उपबंधों के पािन से संबंधधत ककसी मामिे के संबंध में कोई स्वैजच्छक
वचनबंध स्वीकार कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) में ननदर्दषष्ट स्वैजच्छक वचनबंध में ऐसे समय के भीतर, जो बोि ष
द्वारा अवधाररत ककया जाए, ऐसी कारषवाई करने के लिए कोई वचनबंध सजम्मलित हो
सकेगा, अर्वा ऐसी कारषवाई करने से, और ऐसे वचनबंध को ववज्ञावपत करने से र्दरू रह
सकेगा ।
(3) बोि,ष स्वैजच्छक वचनबंध स्वीकार करने के पश्चात ् और ऐस े व्यजतत की सहमनत
से, जजसने स्वैजच्छक वचनबंध दर्दया र्ा, स्वैजच्छक वचनबंध में सजम्मलित ननबंधनों में
पररवतनष कर सकेगा ।
(4) बोि ष द्वारा स्वैजच्छक वचनबंध की स्वीकृनत, उपधारा (5) के अन्द्तगतष आने वाि े
मामिों के लसवाय, जहां तक स्वैजच्छक वचनबंध की अंतवस्ष तु का संबंध है, इस अधधननयम
के उपबंधों के अधीन कायवष ादहयों का वजनष होगी ।
(5) जहां कोई व्यजतत बोि ष द्वारा स्वीकार ककए गए स्वैजच्छक वचनबंध के ककसी
ननबंधन का पािन करने में ववफि रहता है, वहां ऐसा भंग इस अधधननयम के उपबंधों का
भंग समझा जाएगा और बोि,ष ऐस े व्यजतत को सुनवाई का अवसर प्रर्दान करने के पश्चात,्
धारा 33 के उपबंधों के अनुसार कायवष ाही करेगा ।
अध्याय 8
शाजस्ियां और न्यायनिणयण ि
शाजस्तयां । 33. (1) यदर्द बोि ष ककसी जाचं की समाजप्त पर, यह अवधाररत करता है कक ककसी
व्यजतत द्वारा इस अधधननयम या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों का भंग
महत्वपूण ष है, तो वह ककसी व्यजतत को सुनवाई का अवसर दर्दए जाने के पश्चात,् अनुसूची
में ववननदर्दषष्ट ऐसी धनीय शाजस्त अधधरोवपत कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अधधरोवपत की जाने वािी धनीय शाजस्त की रकम को
अवधाररत करते समय, बोि ष ननम्नलिखित मामिों को ध्यान में रिेगा, अर्ाषत ् :—
(क) भंग की प्रकृनत, गंभीरता और अवधध ;
(ि) भंग से प्रभाववत वैयजततक िाटा का प्रकार और प्रकृनत ;
(ग) भंग की आवनृतमूिक प्रकृनत ;
(घ) तया ककसी व्यजतत ने, भंग के पररणामस्वरूप िाभ प्राप्त ककया है या
ककसी हानन से बच गया है ;अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 893
(ङ) तया ककसी व्यजतत ने भंग के प्रभावों और पररणामों को न्द्यनू ीकृत करने के
लिए कोई कारषवाई की और ऐसी कारषवाई की सामनयकता तर्ा प्रभावकाररता तया
है ;
(च) तया इस अधधननयम के उपबंधों का सुरक्षित रूप स े पािन करन े और
उनके भयोपरत भंग करने की आवश्यकता को ध्यान में रिते हुए, अधधरोवपत की
जाने वािी धनीय शाजस्त समानुपाती और प्रभावी है ; और
(छ) व्यजतत पर धनीय शाजस्त के अधधरोपण का संभाव्य प्रभाव ।
34. इस अधधननयम के अधीन बोि ष द्वारा अधधरोवपत शाजस्तयों के रूप में प्राप्त शाजस्तयों के रूप
में वसूि की गई
सभी रालशयां भारत की संधचत ननधध में जमा की जाएंगी ।
रालशयों को भारत
की संधचत ननधध
में जमा ककया
जाना ।
अध्याय 9
प्रकीण ण
35. इस अधधननयम के या बनाए गए ननयमों के उपबंधों के अधीन
ln~HkkoiwoZd
की
गई कारषवाई के
की गई या ककए जाने के लिए आशनयत ककसी बात, कोई वार्द, अलभयोजन,
लिए संरिण ।
या अन्द्य ववधधक कायवष ादहयां केन्द्रीय सरकार, बोि,ष इसके अध्यि और ककसी सर्दस्य,
अधधकारी या कमचष ारी के ववरुद्ध नहीं होगी ।
36. केन्द्रीय सरकार, इस अधधननयम के प्रयोजनों के लिए, बोि ष और ककसी िाटा सूचना मांगन े की
शजतत ।
न्द्यासी या मध्यवती से यह अपेिा कर सकेगी कक वह ऐसी सूचना प्रस्तुत करे जजसकी वह
मांग करे ।
37. (1) केन्द्रीय सरकार या इसके द्वारा इस ननलमत्त ववशेर् रूप स े प्राधधकृत ननर्देश जारी
अधधकाररयों में से कोई अधधकारी, बोि ष से लिखित में ननम्नलिखित ननर्देश की प्राजप्त पर— करने की केन्द्रीय
सरकार की
(क) जो ककसी िाटा न्द्यासी पर र्दो या अधधक वार्दों में बोि ष द्वारा धनीय शाजस्त शजतत ।
के अधधरोपण की सूचना र्देता है ; और
(ि) जो जनसाधारण के दहत में, ककसी ऐसे कंप्यूटर स्रोत में सजृजत, पारेवर्त,
प्राप्त, भंिाररत या परपोवर्त ककसी सूचना तक जनता द्वारा पहुंच के लिए अवरुद्ध
करने की सिाह र्देता है, जो ऐसे िाटा न्द्यासी को भारत के राज्यिेत्र के भीतर िाटा
स्वालमयों को माि या सेवाओ ं की प्रस्र्ापना से संबंधधत ककसी कक्रयाकिाप को करने में
समर् ष बनाता है,
उस िाटा न्द्यासी को सुनवाई का अवसर र्देने के पश्चात,् यह समाधान हो जाने पर कक
जनसाधारण के दहत में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, उन कारणों से जो िेिबद्ध
ककए जाएं, आर्देश द्वारा, केन्द्रीय सरकार के ककसी अलभकरण या ककसी मध्यवती को ऐसी
ककसी सूचना को जनता द्वारा पहुंच के लिए अवरुद्ध करने या जनता द्वारा पहुंच के लिए
अवरुद्ध करवाने का ननर्देश र्दे सकेगी ।
(2) प्रत्येक मध्यवती, जो उपधारा (1) के अधीन जारी ककया गया ननर्देश प्राप्त
करता है, उसका अनुपािन करने के लिए आबद्धकर होगा ।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “कंप्यूटर स्रोत”, “सूचना” और “मध्यवती” पर्दों के894 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
वही अर् ष होंगे, जो क्रमश: सूचना प्रौद्योधगकी अधधननयम, 2000 में उनके हैं । 2000 का 21
अन्द्य ववधधयों स े 38. (1) इस अधधननयम के उपबंध तत्समय प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध के अनतररतत
संगतता ।
होंगे न कक उसके अल्पीकरण में ।
(2) इस अधधननयम के उपबंध और तत्समय प्रवत्ृ त ककसी अन्द्य ववधध के उपबंध के
बीच ववरोध की र्दशा में, इस अधधननयम के उपबंध ऐसे ववरोध की सीमा तक अलभभावी
होंगे ।
अधधकाररता का 39. ककसी लसववि न्द्यायािय को ऐसे ककसी ववर्य के संबंध में ककसी वार्द या
वजनष ।
कायवष ाही को ग्रहण करने की अधधकाररता नहीं होगी, जजसके लिए इस अधधननयम के
उपबंधों के अधीन बोि ष को सशतत ककया गया है और इस अधधननयम के उपबंधों के
अधीन, ककसी शजतत के अनुसरण में की गई या की जाने वािी ककसी कारषवाई के संबंध में
ककसी न्द्यायािय या अन्द्य प्राधधकारी द्वारा कोई व्यार्देश नहीं दर्दया जाएगा ।
ननयम बनाने की 40. (1) केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा और पूव ष प्रकाशन की शत ष के अधीन
शजतत ।
रहते हुए, इस अधधननयम के प्रयोजनों को कायाषजन्द्वत करने के लिए ऐसे ननयम बना
सकेगी, जो इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हो ।
(2) ववलशष्टतया और पूवगष ामी शजतत की व्यापकता पर प्रनतकूि प्रभाव िािे बबना,
ऐसे ननयम ननम्नलिखित सभी या ककन्द्हीं ववर्यों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्ाषत ् :—
(क) वह रीनत, जजसमें धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन िाटा न्द्यासी द्वारा
िाटा स्वामी को दर्दया गया नोदटस उसे सूधचत करेगा ;
(ि) वह रीनत, जजसमें धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन िाटा न्द्यासी द्वारा
िाटा स्वामी को दर्दया गया नोदटस उसे सूधचत करेगा ;
(ग) धारा 6 की उपधारा (8) के अधीन, जवाबर्देही की रीनत और सहमनत
प्रबंधक की बाध्यताएं ;
(घ) धारा 6 की उपधारा (9) के अधीन सहमनत प्रबंधक के रजजस्रीकरण की
रीनत और उससे संबंधधत शतें ;
(ङ) आधर्कष सहायता, फायर्दा, सेवा, प्रमाणपत्र, प्रबंध या ननगमष के लिए
अनुज्ञजप्त या अनुज्ञापत्र, जजसका धारा 7 के िंि (ि) के अधीन व्यजततगत िाटा
प्रक्रलमत ककया जा सकेगा ;
(च) धारा 8 की उपधारा (6) के अधीन बोि ष को व्यजततगत िाटा भंग की
सूचना र्देने का प्ररूप और रीनत ;
(छ) धारा 8 की उपधारा (8) के अधीन ववननदर्दषष्ट प्रयोजन जजसका पूरा न
ककया जाना समझा जाए, के लिए समयावधध ;
(ज) धारा 8 की उपधारा (9) के अधीन िाटा संरिा अधधकारी की कारबार
संपकष सूचना प्रकालशत करने की रीनत ;
(झ) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन सत्यापनीय सहमनत अलभप्राप्त करने
की रीनत ;
(ञ) धारा 9 की उपधारा (4) के अधीन िाटा न्द्यालसयों के वगष, लशश ु के
वैयजततक िाटा का प्रक्रमण करने के प्रयोजन और उससे संबंधधत शतें ;अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 895
(ट) ऐस े अन्द्य ववर्य, जजनमें धारा 10 की उपधारा (2) के िंि (ग) के उपिंि
(i) के अधीन िाटा संरिा समाघात ननधाषरण की प्रकक्रया भी है ;
(ठ) ऐसे अन्द्य उपाय, जजन्द्हें महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी, धारा 10 की उपधारा (2)
के िंि (ग) के उपिंि (iii) के अधीन करेगा ;
(ि) वह रीनत, जजसमें धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन कोई िाटा स्वामी
िाटा न्द्यासी को, सूचना और ऐसे िाटा स्वामी के वैयजततक िाटा से संबंधधत कोई
अन्द्य सूचना प्राप्त करने के लिए तर्ा इसके प्रक्रमण के लिए अनुरोध करेगा ;
(ढ) वह रीनत, जजसमें धारा 12 की उपधारा (3) के अधीन कोई िाटा स्वामी,
िाटा न्द्यासी को उसके व्यजततगत िाटा वविोपन के लिए अनुरोध करेगा ;
(ण) वह अवधध, जजसके भीतर धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन िाटा
न्द्यासी ककन्द्हीं लशकायतों का र्देगा ;
(त) धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन िाटा स्वामी द्वारा ककसी अन्द्य
व्यजष्टक को नामननर्देशन करने की रीनत ;
(र्) धारा 17 की उपधारा (2) के िंि (ि) के अधीन छूट के लिए वैयजततक
िाटा प्रक्रलमत करने के मानक ;
(र्द) धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन बोि ष के अध्यि और अन्द्य सर्दस्यों
की ननयुजतत की रीनत ;
(ध) धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन, बोि ष के अध्यि और अन्द्य सर्दस्यों
के वेतन, और सेवा के अन्द्य ननबंधन तर्ा शतें ;
(न) धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन आर्देशों, ननर्देशों और लिितों के
अधधप्रमाणन की रीनत ;
(प) धारा 24 के अधीन बोि ष के अधधकाररयों और कमषचाररयों की ननयुजतत तर्ा
सेवा के ननबंधन और शतें ;
(फ) धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन बोि ष द्वारा अंगीकृत ककए जाने वाि े
प्रौद्योधगकी–ववधधक उपाय ;
(ब) धारा 28 की उपधारा (7) के िंि (घ) के अधीन अन्द्य ववर्य ;
(भ) धारा 29 की उपधारा (2) के अधीन अपीि फाइि करने के लिए प्ररूप,
रीनत और फीस ;
(म) धारा 29 की उपधारा (8) के अधीन अपीि पर कारषवाई करने के लिए
प्रकक्रया ;
(य) कोई अन्द्य ववर्य, जो ववदहत ककया जाना है या ववदहत ककया जाए या
जजसके संबंध में ननयमों द्वारा उपबंध ककए जाने हैं या ककए जाएं ।
41. इस अधधननयम की धारा 16 और धारा 42 के अधीन बनाया गया प्रत्येक ननयमों और
कनतपय
ननयम तर्ा जारी की गई प्रत्येक अधधसूचना, उसे बनाए जाने के तुरन्द्त पश्चात,् संसद् के
अधधसूचनाओं का
प्रत्येक सर्दन के समि, जब वह सत्र में हो, कुि तीस दर्दन की अवधध के लिए रिा
रिा जाना ।
जाएगा । यह अवधध एक सत्र में या र्दो या अधधक आनुक्रलमक सत्रों में पूरी हो सकेगी896 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
और यदर्द उस सत्र के या पूवोतत आनुक्रलमक सत्रों के ठीक बार्द के सत्र के अवसान के पूव ष
र्दोनों सर्दन, यर्ाजस्र्नत, ननयम या अधधसूचना में कोई उपांतरण करने पर सहमत हो जात े
हैं या र्दोनों सर्दन इस बात के लिए सहमत हो जाते हैं कक, यर्ाजस्र्नत, ऐसे ननयम को
नहीं बनाया जाना चादहए या अधधसूचना जारी नहीं की जानी चादहए तो, यर्ाजस्र्नत, ऐसा
ननयम या अधधसूचना केवि ऐसे उपांतररत रूप में ही प्रभावी होगा या प्रभावी नहीं रहेगा,
तर्ावप, ऐसा कोई उपांतरण या रद्दकरण, उस ननयम या अधधसूचना के अधीन पूव् ष में की
गई ककसी बात की ववधधमान्द्यता पर प्रनतकूि प्रभाव नहीं िािेगा ।
अनुसूची का
42. (1) केन्द्रीय सरकार, अधधसूचना द्वारा, इस ननबधं न के अधीन रहते हुए
अनुसूची का संशोधन कर सकेगी कक ककसी अधधसूचना का प्रभाव इसमें ववननदर्दषष्ट शाजस्त
संशोधन करने की
को, उस शाजस्त के र्दगु ुने से अधधक बढाने वािी नहीं होगी, जो इस अधधननयम के मूि
शजतत ।
रूप से अधधननयलमत होने के समय इसमें ववननदर्दषष्ट र्ी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अधधसूधचत ककसी संशोधन का ऐसा प्रभाव होगा मानो
वह इस अधधननयम में अधधननयलमत ककया गया हो और अधधसूचना की तारीि को
होगा ।
कदठनाईयों को र्दरू
43. (1) यदर्द इस अधधननयम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कदठनाई उत्पन्द्न
होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकालशत आर्देश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी जो
करने की शजतत ।
इस अधधननयम के उपबंधों से असंगत न हों और जो कदठनाई को र्दरू करने के लिए उस े
आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो ।
(2) उपधारा (1) में यर्ाननदर्दषष्ट कोई आर्देश, इस अधधननयम के प्रारंभ की तारीि स े
तीन वर् ष की अवधध की समाजप्त के पश्चात ् नहीं ककया जाएगा ।
(3) इस धारा के अधीन ककया गया प्रत्येक आर्देश, इसके बनाए जाने के पश्चात,्
यर्ाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सर्दन के समि रिा जाएगा ।
कनतपय
44. (1) भारतीय र्दरू -संचार ववननयामक प्राधधकरण अधधननयम, 1997 की धारा 14
1997 का 24
के िंि (ग) में, उपिंि (i) और उपिंि (ii) के स्र्ान पर ननम्नलिखित उपिंि रिे जाएंगे,
अधधननयमों के
अर्ाषत ् :—
संशोधन ।
“(i) सूचना प्रौद्योधगकी अधधननयम, 2000 के अधीन अपीि अधधकरण ;
2000 का 21
(ii) भारतीय ववमानपत्तन आधर्कष ववननयामक प्राधधकरण अधधननयम, 2008
2008 का 27
के अधीन अपीि अधधकरण ; और
(iii) डिजजटि वैयजततक िाटा संरिण अधधननयम, 2023 के अधीन अपीि
2023 का 22
अधधकरण ।”।
(2) सूचना प्रौद्योधगकी अधधननयम, 2000 का ननम्नलिखित रीनत में संशोधन ककया 2000 का 21
जाएगा, अर्ाषत ् :—
(क) धारा 43क का िोप ककया जाएगा ;
(ि) धारा 81 के परंतुक में “पेटेंट अधधननयम, 1970” शब्र्दों और अंकों के 1970 का 39
पश्चात,् “या डिजजटि वैयजततक िाटा संरिण अधधननयम, 2023” शब्र्द और अंक 2023 का 22
रिे जाएंगे;अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 897
(ग) धारा 87 की उपधारा (2) में िंि (णि) का िोप ककया जाएगा ।
2005 का 22 (3) सूचना का अधधकार अधधननयम, 2005 की धारा 8 की उपधारा (1) के िंि (ञ)
के स्र्ान पर ननम्नलिखित िंि रिा जाएगा, अर्ाषत ् :—
“(ञ) सूचना, जो वैयजततक सूचना से संबंधधत है ;”।898 भारत का राजपत्र असाधारण [ भाग 2—
अनुसूची
[िारा 33(1) देखिए]
क्र.स.ं इस अधधननयम या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के उपबंधों का भंग शाजस्त
(1) (2) (3)
1. धारा 8 की उपधारा (5) के अधीन वैयजततक िाटा भंग को रोकने के र्दो अरब पचास करोड़
लिए युजततयुतत सुरिा रिोपाय करने हेतु िाटा न्द्यासी की रुपए तक हो सकेगी ।
बाध्यताओं का पािन करने में भंग ।
2. धारा 8 की उपधारा (6) के अधीन वैयजततक िाटा भंग का नोदटस र्दो अरब रुपए तक हो
बोि ष या प्रभाववत िाटा स्वामी को र्देन े की बाध्यता का पािन करने सकेगी ।
में भंग ।
3. धारा 9 के अधीन लशशुओं के संबंध में अनतररतत बाध्यताओं के र्दो अरब रुपए तक हो
पािन करने में भंग । सकेगी ।
4. धारा 10 के अधीन महत्वपूण ष िाटा न्द्यासी की अनतररतत एक अरब पचास करोड़
बाध्यताओं के पािन करने में भंग । रुपए तक हो सकेगी ।
5. धारा 15 के अधीन कतव्ष यों के पािन करने में भंग । र्दस हजार रुपए तक
हो सकेगी ।
6. धारा 32 के अधीन बोि ष द्वारा स्वीकृत ककसी स्वैजच्छक वचनबंध के भंग के लिए िागू
ककसी ननबंधन का भंग । सीमा तक, जजसके
संबंध में धारा 28 के
अधीन कायवष ादहयां
संजस्र्त की गई र्ीं ।
7. इस अधधननयम या इसके अधीन बनाए गए ननयमों के ककसी अन्द्य पचास करोड़ रुपए तक
उपबंध का भंग । हो सकेगी ।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 899
सं�वधान (अनसु ू�चत जा�तयां) आदेश (संशोधन)
अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 24)
[12 अगस्त, 2023]
छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसू�चत जा�तयों क� सूची को उपांत�रत
करने हेतु स�ं वधान (अनुसू�चत जा�तयां) आदेश, 1950
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो
:—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम सं�वधान (अनुसू�चत जा�तयां) आदेश सं�क्षप्त नाम ।
(संशोधन) अ�ध�नयम, 2023 है ।900 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
सं�वधान 2. सं�वधान (अनुसू�चत जा�तयां) आदेश, 1950 क� अनुसूची में, भाग 23- सं.आ. 19
(अनुसू�चत
छत्तीसगढ़ में, प्र�विष्ट 33 के स्थान पर �नम्न�ल�खत प्र�विष्ट रखी जाएगी,
जा�तयां) आदेश,
—
अथार्त ् :
1950 का
संशोधन ।
“33. महार, माहरा, महरा, मेहर, मेहरा” ।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 901
भेषजी (संशोधन) अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 29)
[15 अगस्त, 2023]
भेषजी अ�ध�नयम, 1948
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम भेषजी (संशोधन) अ�ध�नयम, 2023 है । सं�क्षप्त नाम ।
1948 का 8 2. भेषजी अ�ध�नयम, 1948 क� धारा 32ख के पश्चात,् �नम्न�ल�खत धारा नई धारा 32ग
का अंत:स्थापन ।
अंत:स्था�पत क� जाएगी, अथार्त ् :—902 भारत का राज पत्र असाधारण [भाग
2—
जम्म-ूकश्मीर “32ग. धारा 32 में अंत�वष्र् ट �कसी बात के होते हुए भी कोई व्यिक्त,
भेषजी अ�ध�नयम,
िजसका नाम जम्मू-कश्मीर भषे जी अ�ध�नयम, 2011 के अधीन रखे गए भेषजज्ञों 2011 का जम्मू-
2011 के अधीन
के रिजस्टर में दज र् �कया गया है या उक्त अ�ध�नयम के अधीन �व�हत अहर्ता कश्मीर अ�ध�नयम
रिजस्ट्र�कृत या
सं0 53 (1955
अ�हतर् व्यिक्तयों (�च�कत्सा सहायक/भेषजज्ञ) रखता है, को इस अ�ध�नयम के अध्याय 4 के
ए.डी.)
से संब�ंधत �वशेष अधीन तैयार �कए गए और रखे गए भेषजज्ञ रिजस्टर में इस शत र् के अध्यधीन
उपबंध ।
दज र् �कया गया समझा जाएगा �क भेषजी (संशोधन) अ�ध�नयम, 2023 के प्रारंभ
क� तार�ख से एक वष र् क� अव�ध के भीतर इस �न�मत्त कोई आवेदन ऐसी फ�स
के संदाय पर और ऐसी र��त में, जो जम्मू-कश्मीर संघ राज्यक्षेत्र सरकार और
लद्दाख संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा �व�हत क� जाए, �कया गया है ।”।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 903
के न्द्र�य माल और सेवा कर (संशोधन)
अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 30)
[18 अगस्त, 2023]
केन्द्र�य माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. (1) इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम केन्द्र�य माल और सेवा कर (संशोधन) सं�क्षप्त नाम
अ�ध�नयम, 2023 है । और प्रारंभ ।
(2) यह उस तार�ख को प्रवत्ृ त होगा, जो केन्द्र�य सरकार, राजपत्र में अ�धसूचना द्वारा
�नयत करे :
परन्तु इस अ�ध�नयम के �भन्न-�भन्न उपबंधों के �लए �भन्न-�भन्न तार�खें �नयत
क� जा सकेंगी और ऐसे �कसी उपबंध में इस अ�ध�नयम के प्रारंभ के प्र�त �कसी �नद�श
का यह अथ र् लगाया जाएगा �क वह उस उपबंध के प्रारंभ के प्र�त �नद�श है ।904 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
धारा 2 का 2. केन्द्र�य माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017 (िजस े इसमें इसके पश्चात ् मलू 2017 का 12
संशोधन । अ�ध�नयम कहा गया है) क� धारा 2 में,—
(क) खंड (80) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत खंड अंत:स्था�पत �कए जाएंगे,
अथार्त ् :—
‘(80क) “ऑनलाइन गेम खेलना” से इंटरनेट या �कसी इलैक्ट्रॉ�नक नेटवकर्
पर गेम क� प्रस्थापना अ�भप्रते है और इसके अंतगतर् ऑनलाइन धनीय गेम
खेलना भी है ;
(80ख) “ऑनलाइन धनीय गेम खेलना” से ऐसा ऑनलाइन गेम खेलना
अ�भप्रेत है, िजसमें �खलाड़ी, �कसी आयोजन में, िजसमें गेम, स्क�म, प्र�तस्पधार्
या कोई अन्य �क्रयाकलाप या प्र�क्रया भी सिम्म�लत है, धन या धन के मूल्य,
िजसके अंतगतर् आभासी �डिजटल आिस्तयां भी है, को जीतने क� प्रत्याशा में,
धन या धन के मूल्य का सदं ाय करता है या जमा करता है, िजसके अंतगतर्
आभासी �डिजटल आिस्तयां भी है, चाहे इसका प�रणाम या �नष्पादन कौशल,
अवसर या दोनों पर आधा�रत है या नह�,ं तथा चाहे वह तत्समय प्रवत्ृ त �कसी
अन्य �व�ध के अधीन अनुज्ञेय है या नह� ं ;’;
(ख) खंड (102) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत खंड अंत:स्था�पत �कया जाएगा,
अथार्त ् :—
‘(102क) “�व�न�दर्ष्ट अनुयोज्य दावा” से,—
(i) दांव लगाने ;
(ii) कै�सनो ;
(iii) द्यूतक्र�ड़ा ;
(iv) घुड़दौड़ ;
(v) लाटर� ; या
(vi) ऑनलाइन धनीय गेम खेलन,े
में अंतव�र्लत या उनके माध्यम से अनुयोज्य दावा अ�भप्रेत है ;’;
(ग) खंड (105) के अंत में, �नम्न�ल�खत परंतुक अंत:स्था�पत �कया जाएगा,
अथार्त ् :—
“परंतु कोई व्यिक्त, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप स,े �व�न�दर्ष्ट अनुयोज्य
दावों क� पू�त र् का आयोजन या व्यवस्था करता है, िजसके अतं गतर् वह व्यिक्त भी
है, जो ऐसी पू�त र् के �लए �डिजटल या इलैक्ट्रॉ�नक प्लेटफाम र् का स्वामी है या
उसका प्रचालन या प्रबंधन करता है, ऐसे अनुयोज्य दावों का पू�तकर् ार समझा
जाएगा, चाहे ऐसे अनुयोज्य दावे, उसके द्वारा या उसके माध्यम से पू�त र् �कए
गए हों और चाहे ऐस े अनुयोज्य दावों क� पू�त र् के �लए धन या धन के मूल्य,
िजसके अंतगतर् आभासी �डिजटल आिस्तयां भी है, में उसको या उसके माध्यम
से प्र�तफल संदत्त �कया जाता है या पहुंचाया जाता है या �कसी भी र��त में
उसको �दए जात े हैं, और इस अ�ध�नयम के सभी उपबंध �व�न�दर्ष्ट अनुयोज्य
दावों के ऐसे पू�तकर् ार को लाग ू होंगे, मानो वह ऐसे अनुयोज्य दावों क� पू�त र् करने
के संबंध में कर का संदाय करने के �लए दायी पू�तकर् ार हो;”;
(घ) खंड (117) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत खंड अंत:स्था�पत �कया जाएगा,
अथार्त ् :—अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 905
‘(117क) “आभासी �डिजटल आिस्त” का वह� अथ र् होगा, जो आय-कर
1961 का 43 अ�ध�नयम, 1961 क� धारा 2 के खंड (47क) में उसका है ;’।
3. मूल अ�ध�नयम क� धारा 24 में,— धारा 24 का
संशोधन ।
(क) खंड (xi) के, अंत में आने वाला “और” शब्द का लोप �कया जाएगा ;
(ख) खंड (xi) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत खंड अंत:स्था�पत �कया जाएगा,
अथार्त ् :—
“(xiक) भारत से बाहर �कसी स्थान से भारत में �कसी व्यिक्त को
ऑनलाइन धनीय गेम खेलन े क� पू�त र् करने वाला प्रत्येक व्यिक्त ; और”।
4. मूल अ�ध�नयम क� अनुसूची 3 के पैरा 6 में, “लाटर�, दांव और द्यूत” शब्दों के अनुसूची 3 का
संशोधन ।
स्थान पर, “�व�न�दर्ष्ट अनुयोज्य दावों” शब्द रखे जाएंगे ।
5. इस अ�ध�नयम के अधीन �कए गए संशोधन, दांव लगाने, कै�सनो, द्यूतक्र�ड़ा, संक्रमणकाल�न
घुड़दौड़, लाटर� या ऑनलाइन गेम खेलने को प्र�त�षद्ध, �नब��धत या �व�नय�मत करने के �लए उपबंध ।
उपबंध करने वाल� तत्समय प्रवत्ृ त �कसी अन्य �व�ध के उपबंधों पर प्र�तकूल प्रभाव नह�ं
डालेंगे ।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 907
एक�कृ त माल और सेवा कर (संशोधन)
अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 31)
[18 अगस्त, 2023]
एक�कृत माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. (1) इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम एक�कृत माल और सेवा कर (संशोधन) सं�क्षप्त नाम
और प्रारंभ ।
अ�ध�नयम, 2023 है ।
(2) यह उस तार�ख को प्रवत्ृ त होगा, जो केन्द्र�य सरकार, राजपत्र में अ�धसूचना
द्वारा, �नयत करे ।908 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
धारा 2 का 2. एक�कृत माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017 (िजस े इसमें इसके पश्चात ् 2017 का 13
संशोधन । मूल अ�ध�नयम कहा गया है) क� धारा 2 के खंड (17) के उपखंड (vii) के स्थान पर
�नम्न�ल�खत उपखंड रखा जाएगा, अथार्त ् :—
“(vii) केन्द्र�य माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017 क� धारा 2 के 2017 का 12
खंड (80ख) में यथाप�रभा�षत ऑनलाइन धनीय गेम खेलने को छोड़कर,
ऑनलाइन गेम खेलना ;”।
धारा 5 का 3. मूल अ�ध�नयम क� धारा 5 क� उपधारा (1) के परंतुक में, “परंत”ु शब्द के
संशोधन । पश्चात ् “, प�रषद् क� �सफा�रशों पर सरकार द्वारा यथा अ�धसू�चत से �भन्न” शब्द
अंतःस्था�पत �कए जाएंगे ।
धारा 10 का 4. मूल अ�ध�नयम क� धारा 10 क� उपधारा (1) के खंड (ग) के पश्चात,्
संशोधन । �नम्न�ल�खत खंड अंतःस्था�पत �कया जाएगा, अथार्त ् :—
“(गक) जहा ं माल क� पू�त र् रिजस्ट्र�कृत व्यिक्त से �भन्न �कसी व्यिक्त को
क� जाती है, पू�त र् का स्थान, खंड (क) या खंड (ग) में अतं�वष्र् ट तत्प्र�तकूल
�कसी बात के होते हुए भी, उक्त पू�त र् के संबंध में जार� बीजक में अ�भ�ल�खत
उक्त व्यिक्त के पते के अनसु ार अविस्थ�त और पू�तकर् ार क� अविस्थ�त होगी
जहा ं उक्त व्यिक्त का पता बीजक में अ�भ�ल�खत नह�ं है ।
स्पष्ट�करण—इस खंड के प्रयोजनों के �लए, बीजक में उक्त व्यिक्त के
राज्य के नाम के अ�भलेखन को उक्त व्यिक्त के पते का अ�भलेखन समझा
जाएगा ;”।
नई धारा 14क 5. मूल अ�ध�नयम क� धारा 14 के पश्चात,् �नम्न�ल�खत धारा अंतःस्था�पत क�
का अंतःस्थापन । जाएगी, अथार्त ् :—
कराधेय राज्यक्षेत्र “14क. (1) केन्द्र�य माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017 क� धारा 2 के 2017 का 12
से बाहर
खंड (80ख) में यथाप�रभा�षत ऑनलाइन धनीय गेम खेलने का पू�तकर् ार, जो
अविस्थत व्यिक्त
कराधेय राज्यक्षेत्र में अविस्थत नह�ं है, उसके द्वारा कराधेय राज्यक्षेत्र में व्यिक्त
द्वारा पू�त र् �कए
गए �व�न�दर्ष्ट को ऑनलाइन धनीय गेम खेलने क� पू�त र् के संबंध में ऐसी पू�त र् पर एक�कृत
अनुयोज्य दावों कर का संदाय करने का दायी होगा ।
के �लए �वशेष
उपबंध । (2) उपधारा (1) के उपबंधों का अनुपालन करने के प्रयोजनों के �लए,
ऑनलाइन धनीय गेम खेलने वाला पू�तकर् ार इस अ�ध�नयम क� धारा 14 क�
उपधारा (2) में �न�दर्ष्ट सरल�कृत रिजस्ट्र�कृत स्क�म के अधीन एकल
रिजस्ट्र�करण अ�भप्राप्त करेगा :
परंतु कराधेय राज्यक्षेत्र में �कसी भी प्रयोजन के �लए ऐसे पू�तकर् ार का
प्र�त�न�धत्व करने वाला कराधेय राज्यक्षेत्र में अविस्थत व्यिक्त रिजस्ट्र�करण
करेगा और ऐसे पू�तकर् ार के �न�मत्त एक�कृत कर का संदाय करेगा :
परंतु यह और �क य�द ऐसे पू�तकर् ार क� कराधेय राज्यक्षेत्र में भौ�तक
उपिस्थ�त नह�ं है या �कसी भी प्रयोजन के �लए उसका कोई प्र�त�न�ध नह�ं है,
तो वह एक�कृत कर का सदं ाय करने के प्रयोजन के �लए कराधेय राज्यक्षेत्र म ें
�कसी व्यिक्त क� �नयुिक्त करेगा और ऐसा व्यिक्त ऐसे कर का संदाय करने का
दायी होगा ।अनुभाग 1क] भारत का राज पत्र असाधारण 909
(3) ऑनलाइन धनीय गेम खेलने का पू�तकर् ार या ऐसे पू�तकर् ार द्वारा
�नयुक्त व्यिक्त या दोनों के द्वारा उपधारा (1) या उपधारा (2) के उपबंधों का
2000 का 21 अनुपालन करने में असफलता क� दशा में, सूचना प्रौद्यो�गक� अ�ध�नयम, 2000
क� धारा 69क में अंत�वष्र् ट �कसी बात के होते हुए भी, ऐसे पू�तकर् ार द्वारा
ऑनलाइन धनीय गेम खेलने क� पू�त र् में उपयोग �कए गए �कसी कंप्यूटर
संसाधन पर सिृजत, पारे�षत, प्राप्त या रखी गई �कसी जानकार� के �लए
पिब्लक द्वारा पहुंच को बंद �कए जाने के �लए उक्त अ�ध�नयम में यथा
�व�न�दर्ष्ट र��त में दायी होगा ।”।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 911
�नरसन और संशोधन अ�ध�नयम, 2023
0
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 37)
[17 �दसम्बर, 2023]
क�तपय अ�ध�नय�म�तयों का �नरसन करने
1
और �कसी अ�ध�नय�म�त का संशोधन
2
करने के �लए
3
अ�ध�नयम
4
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम �नरसन और सशं ोधन अ�ध�नयम, 2023 है । सं�क्षप्त नाम ।
2. पहल� अनुसूची और दसू र� अनुसूची में �व�न�दर्ष्ट अ�ध�नय�म�तयों को �नर�सत क�तपय
�कया जाता है ।
अ�ध�नय�म�तयों
का �नरसन ।
3. तीसर� अनुसूची में �व�न�दर्ष्ट अ�ध�नय�म�त को उसके चौथ े स्तंभ में �व�न�दर्ष्ट अ�ध�नय�म�त
�वस् तार तक और र��त से संशो�धत �कया जाता है ।
का संशोधन ।912 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
व्याविृत्त । 4. �कसी अ�ध�नय�म�त का इस अ�ध�नयम द्वारा �नर�सत �कया जाना, �कसी
अन्य ऐसी अ�ध�नय�म�त को प्रभा�वत नह�ं करेगा, िजसमें �नर�सत अ�ध�नय�म�त को
लागू, सिम्म�लत या �न�दर्ष्ट �कया गया है ;
और इस अ�ध�नयम का प्रभाव, पहले क� गई या सहन क� गई �कसी बात या
izksn~Hkwr
पहले से अिजतर् , या उपगत �कसी अ�धकार, हक, बाध्यता या दा�यत्व अथवा
उसके संबंध में �कसी उपचार या कायवर् ाह� या �कसी ऋण, शािस्त, बाध्यता, दा�यत्व,
दावे या मांग के या उसस े कोई �नम�चन या उन्मोचन या पहले से अऩुदत्त �कसी
क्ष�तपू�त र् या �कसी पूव र् काय र् या बात के सबूत क� �व�धमान्यता, अ�व�धमान्यता, उसके
प्रभाव या प�रणामों पर, नह�ं पड़ेगा ;
और न ह�, इस अ�ध�नयम का प्रभाव �व�ध के �कसी �सद्धान्त या �नयम या
स्था�पत अ�धका�रता, अ�भवचन के प्ररूप या अनुक्रम, पद्ध�त या प्र�क्रया, या �वद्यमान
प्रथा, रू�ढ़, �वशेषा�धकार, �नबध� न, छूट, पद या �नयुिक्त पर इस बात के होते हुए भी
पड़ेगा �क वह, इसके द्वारा �नर�सत �कसी अ�ध�नय�म�त द्वारा, उसमें या उससे �कसी
र��त से क्रमशः पुष्ट या मान्य या व्युत्पन्न हुआ है ;
और न ह�, इस अ�ध�नयम द्वारा �कसी अ�ध�नय�म�त के, जो अब �वद्यमान या
प्रवत्ृ त नह�ं है, �नरसन स े कोई अ�धका�रता, पद, रू�ढ़, दा�यत्व, अ�धकार, हक,
�वशेषा�धकार, �नब�धन, छूट, प्रथा, पद्ध�त, प्र�क्रया या अन्य �वषय या बात पुनरुज्जी�वत
या प्रत्याव�ततर् होगी ।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 913
पहल� अनुसूची
(धारा 2 दे�खए)
�नरसन
वष र् अ�ध�नयम संख्यांक सं�क्षप्त नाम
1 2 3
1850 18 न्या�यक अ�धकार� सरं क्षण अ�ध�नयम, 1850
1855 28 सूदखोर� �व�ध �नरसन अ�ध�नयम, 1855
1857 5 ओ�रयन्टल गैस कंपनी अ�ध�नयम, 1857
1867 11 ओ�रयन्टल गैस कंपनी अ�ध�नयम, 1867
1871 4 कोरोनर अ�ध�नयम, 1871
1881 16 नाव्य जलपथ बाधा अ�ध�नयम, 1881
1885 18 भू�म अजनर् (खान) अ�ध�नयम, 1885
1912 13 �दल्ल� �व�ध अ�ध�नयम, 1912
1915 7 �दल्ल� �व�ध अ�ध�नयम, 1915
1922 22 पु�लस (द्रोह-उद्दीपन) अ�ध�नयम, 1922
1923 6 छावनी (गहृ आवास) अ�ध�नयम, 1923
1934 15 गन्ना अ�ध�नयम, 1934
1941 12 �दल्ल� भू�म उपयोग �नबध� न अ�ध�नयम, 1941
1950 74 तारयंत्र संबंधी तार (�व�ध�वरुद्ध कब् जा) अ�ध�नयम, 1950
1965 44 मेटल कारपोरेशन ऑफ इं�डया (एक्वीजीशन ऑफ अंडरटे�कंग)
ऐक्ट, 1965
1974 28 कोयला खान (संरक्षण और �वकास) अ�ध�नयम, 1974
1976 100 मेटल कारपोरेशन (राष् ट्र�करण तथा प्रक�ण र् उपबंध)
अ�ध�नयम, 1976
1982 71 आन् ध्र साइं�ट�फक कंपनी �ल�मटेड (उपक्रमों का अजनर् और
अंतरण) अ�ध�नयम, 1982
1983 17 �दल्ल� मोटर यान कराधान (संशोधन) अ�ध�नयम, 1983
1994 13 वायु �नगम (उपक्रमों का अंतरण और �नरसन) अ�ध�नयम, 1994
2018 1 कंपनी (संशोधन) अ�ध�नयम, 2017
2018 8 �दवाला और शोधन अक्षमता सं�हता (संशोधन) अ�ध�नयम, 2018
2018 21 स्थावर संपित्त अ�धग्रहण और अजनर् (संशोधन) अ�ध�नयम,
2018
2018 23 होम्योपैथी केन्द्र�य प�रषद् (संशोधन) अ�ध�नयम, 2018
2018 26 �दवाला और शोधन अक्षमता सं�हता (दसू रा संशोधन) अ�ध�नयम, 2018
2018 27 अनुसू�चत जा�तयां और अनुसू�चत जनजा�तयां (अत्याचार
�नवारण) संशोधन अ�ध�नयम, 2018
2019 6 स्वीय �व�ध (संशोधन) अ�ध�नयम, 2019914 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
1 2 3
2019 8 �वशेष आ�थकर् जोन (संशोधन) अ�ध�नयम, 2019
2019 11 होम्योपैथी केन्द्र�य प�रषद् (संशोधन) अ�ध�नयम, 2019
2019 14 आधार और अन्य �व�धयां (संशोधन) अ�ध�नयम, 2019
2019 24 सूचना का अ�धकार (संशोधन) अ�ध�नयम, 2019
2019 26 �दवाला और शोधन अक्षमता सं�हता (संशोधन) अ�ध�नयम, 2019
2019 36 सरकार� स्थान (अप्रा�धकृत अ�धभो�गयों क� बेदखल�) संशोधन
अ�ध�नयम, 2019
2019 37 उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अ�ध�नयम,
2019
2020 19 संसद् सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन (संशोधन) अ�ध�नयम,
2020अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 915
दसू र� अनुसूची
(धारा 2 दे�खए)
�नरसन
वष र् अ�ध�नयम संख्यांक सं�क्षप्त नाम
1 2 3
2013 5 �व�नयोग (रेल) लेखानुदान अ�ध�नयम, 2013
2013 6 �व�नयोग (रेल) अ�ध�नयम, 2013
2013 7 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 2 अ�ध�नयम, 2013
2013 8 �व�नयोग (लेखानुदान) अ�ध�नयम, 2013
2013 9 �व�नयोग अ�ध�नयम, 2013
2013 10 �व�नयोग (संख्यांक 2) अ�ध�नयम, 2013
2013 15 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 3 अ�ध�नयम, 2013
2013 16 �व�नयोग (संख्यांक 3) अ�ध�नयम, 2013
2013 21 �व�नयोग (संख्यांक 4) अ�ध�नयम, 2013
2014 2 �व�नयोग (संख्यांक 5) अ�ध�नयम, 2013
2014 3 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 4 अ�ध�नयम, 2013
2014 4 �व�नयोग (रेल) लेखानुदान अ�ध�नयम, 2014
2014 5 �व�नयोग (रेल) अ�ध�नयम, 2014
2014 12 �व�नयोग (लेखानुदान) अ�ध�नयम, 2014
2014 13 �व�नयोग अ�ध�नयम, 2014
2014 21 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 2 अ�ध�नयम, 2014
2014 22 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 3 अ�ध�नयम, 2014
2014 23 �व�नयोग (संख्यांक 2) अ�ध�नयम, 2014
2014 24 �व�नयोग (संख्यांक 3) अ�ध�नयम, 2014
2014 38 �व�नयोग (संख्यांक 4) अ�ध�नयम, 2014
2015 6 �व�नयोग (रेल) लेखानुदान अ�ध�नयम, 2015
2015 7 �व�नयोग (रेल) अ�ध�नयम, 2015
2015 8 �व�नयोग (लेखानुदान) अ�ध�नयम, 2015
2015 9 �व�नयोग अ�ध�नयम, 2015
2015 13 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 2 अ�ध�नयम, 2015
2015 15 �व�नयोग (संख्यांक 2) अ�ध�नयम, 2015
2015 24 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 3 अ�ध�नयम, 2015
2015 25 �व�नयोग (संख्यांक 3) अ�ध�नयम, 2015
2016 7 �व�नयोग (संख्यांक 4) अ�ध�नयम, 2015916 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
1 2 3
2016 8 �व�नयोग (संख्यांक 5) अ�ध�नयम, 2015
2016 14 �व�नयोग (रेल) लेखानुदान अ�ध�नयम, 2016
2016 15 �व�नयोग (रेल) अ�ध�नयम, 2016
2016 19 �व�नयोग (लेखानुदान) अ�ध�नयम, 2016
2016 20 �व�नयोग अ�ध�नयम, 2016
2016 26 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 2 अ�ध�नयम, 2016
2016 29 �व�नयोग (संख्यांक 2) अ�ध�नयम, 2016
2016 46 �व�नयोग (संख्यांक 3) अ�ध�नयम, 2016
2016 50 �व�नयोग (संख्यांक 4) अ�ध�नयम, 2016
2016 51 �व�नयोग (संख्यांक 5) अ�ध�नयम, 2016
2017 8 �व�नयोग (रेल) अ�ध�नयम, 2017
2017 9 �व�नयोग (रेल) संख्यांक 2 अ�ध�नयम, 2017अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 917
तीसर� अनुसूची
(धारा 3 दे�खए)
संशोधन
वष र् अ�ध�नयम संख्यांक सं�क्षप्त नाम संशोधन
1 2 3 4
2012 12 फैक्टर �व�नयमन धारा 31क क� उपधारा (3) में “और
अ�ध�नयम, 2011 केन्द्र�य सरकार” शब्दों के स्थान पर
“और सरकार” शब्द रखे जाएगं े ।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 919
के न्द्र�य माल और सेवा कर (दसू रा
संशोधन) अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 48)
[28 �दसम्बर, 2023]
केन्द्र�य माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम केन्द्र�य माल और सेवा कर (दसू रा सं�क्षप्त नाम ।
संशोधन) अ�ध�नयम, 2023 है ।
2017 का 12 2. केन्द्र�य माल और सेवा कर अ�ध�नयम, 2017 क� धारा 110 में,— धारा 110 का
संशोधन ।
(क) उपधारा (1) में,—
(I) खंड (ख) के उपखंड (ii) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत उपखंड
अन्त:स्था�पत �कया जाएगा, अथार्त ् :—
“(iii) अपील अ�धकरण, सीमाशुल्क, उत्पाद-शुल्क और सेवा920 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
कर अपील अ�धकरण, राज्य मूल्यव�धतर् कर अ�धकरण, चाहे
�कसी भी नाम से ज्ञात हो, उच्च न्यायालय या उच्चतम
न्यायालय में अप्रत्यक्ष करों स े संबं�धत मामलों के मुकदमेबाजी में
सारवान ् अनुभव के साथ दस वष र् तक अ�धवक्ता रहा हो ;”;
(II) �नम्न�ल�खत परंतुक अन्त:स्था�पत �कया जाएगा, अथार्त ् :—
"परंतु कोई व्यिक्त, िजसने पचास वष र् क� आयु पूर� नह�ं
क� हो, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में �नयुिक्त के �लए पात्र नह�ं
होगा ।”;
(ख) उपधारा (9) में, "सड़सठ वष र् क� आयु प्राप्त होने तक, इनमें से
जो भी पहले हो, पद धारण करेगा और दो वष र् स े अन�धक क� अव�ध के
�लए पुन�नयर् ुिक्त का पात्र होगा" शब्दों के स्थान पर, "सत्तर वष र् क� आयु
प्राप्त होन े तक, जो भी पहले हो, पद धारण करेगा और वह पूव�क्त
�व�न�दर्ष्ट आयु सीमा के अधीन रहते हुए दो वष र् से अन�धक क� अव�ध के
�लए पुन�नयर् ुिक्त का पात्र होगा" शब्द रखे जाएंगे ;
(ग) उपधारा (10) में, "पसैं ठ वष र् क� आयु प्राप्त होने तक, जो भी
पहले हो, पद धारण करेगा और दो वष र् स े अन�धक क� अव�ध के �लए
पुन�नयर् ुिक्त का पात्र होगा" शब्दों के स्थान पर, "सड़सठ वष र् क� आयु प्राप्त
होने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करेगा और वह पूव�क्त �व�न�दर्ष्ट आयु
सीमा के अधीन रहते हुए दो वष र् से अन�धक क� अव�ध के �लए पुन�नयर् ुिक्त
का पात्र होगा" शब्द रखे जाएगं े ।
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 921
अनं�तम कर संग्रहण अ�ध�नयम, 2023
(2023 का अ�ध�नयम संख्यांक 50)
[28 �दसम्बर, 2023]
सीमाशुल्क या उत्पाद-शुल्क के अ�धरोपण या उसमें व�ृद्ध से
संबं�धत �वधेयकों के उपबंधों को सी�मत अव�ध के �लए
तुरंत प्रभावी करने का उपबंध
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :—
1. इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम अनं�तम कर सग्रं हण अ�ध�नयम, 2023 है । सं�क्षप्त नाम ।
2. इस अ�ध�नयम में, “घो�षत उपबंध” से �कसी ऐसे �वधेयक का उपबंध अ�भप्रेत प�रभाषा ।
है, िजसके संबंध में धारा 3 के अधीन कोई घोषणा क� गई है ।
3. जहां सरकार क� ओर स े संसद् में पुर:स्था�पत �कया जाने वाला कोई �वधेयक, केन्द्र�य सरकार
क� घोषणा करने
टै�रफ वग�करण में प�रवतनर् स�हत या उसके �बना सीमाशुल्क या उत्पाद-शल्ु क के
क� शिक्त ।
अ�धरोपण या उसमें व�ृद्ध के �लए उपबंध करता है वहां केन्द्र�य सरकार, उस �वधेयक में
यह घोषणा अंत:स्था�पत करा सकेगी �क लोक �हत में यह समीचीन है �क ऐसे
अ�धरोपण या व�ृद्ध से संबं�धत �वधेयक का कोई उपबंध, इस अ�ध�नयम के अधीन तुरंत
प्रभावी होगा ।922 भार त का राज पत्र असाधारण [भाग
2—
इस अ�ध�नयम 4. (1) �कसी घो�षत उपबंध को, उस �दन क� समािप्त पर ह� तुरंत �व�ध का बल
के अधीन क� प्राप्त हो जाएगा, िजस �दन इसे अन्त�वष्र् ट करने वाला �वधेयक पुर:स्था�पत कर �दया
घोषणाओं का
जाता है ।
प्रभाव और उनक�
अव�ध । (2) इस अ�ध�नयम के उपबधं ों के अधीन, �कसी घो�षत उपबंध का �व�ध का बल
तब समाप्त हो जाएगा,—
(क) जब वह संशोधन स�हत या र�हत �कसी अ�ध�नय�म�त के रूप में प्रवत्ृ त
हो जाता है ; या
(ख) जब केन्द्र�य सरकार, संसद् द्वारा पा�रत �कसी प्रस्ताव के अनुसरण में,
राजपत्र में अ�धसूचना द्वारा, यह �नदेश दे �क उसका �व�ध का बल समाप्त हो
जाएगा ; या
(ग) य�द खंड (क) या खंड (ख) के अधीन उसका �व�ध का बल पहले ह�
समाप्त नह�ं हुआ है, तब उस �दन के पश्चात,् पचहत्तरवें �दन क� समािप्त पर,
िजस �दन इसे अन्त�वष्र् ट करने वाला �वधेयक पुर:स्था�पत �कया गया था ।
क�तपय मामलों 5. (1) जहां कोई घो�षत उपबंध, उस �दन के पश् चात,् िजस �दन इसे अन्त�वष्र् ट
में वापस �कया करने वाला �वधेयक पुर:स् था�पत �कया गया था, पचहत्तरवें �दन क� समािप् त के पवू र्
जाना ।
संशो�धत होकर �कसी अ�ध�नय�म�त के रूप में प्रवतनर् में आता है, वहां सभी ऐस े
संगहृ �त शुल् क वापस कर �दए जाएंगे, जो य�द अ�ध�नय�म�त में अंगीकृत उपबंध,
घो�षत उपबधं होता, तो संगहृ �त नह�ं �कए जाते :
परन् तु वह दर, िजस पर इस उपधारा के अधीन कोई शुल् क वापस �कया जाए,
घो�षत उपबधं में प्रस् ता�वत ऐसे शुल् क क� दर और �वधेयक पुर:स् था�पत करने के समय
प्रवत्ृ त ऐसे शुल् क क� दर के बीच के अन् तर से अ�धक नह�ं होगी ।
(2) जहां धारा 4 क� उपधारा (2) के खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन �कसी घो�षत
उपबंध का �व�ध का बल समाप् त हो गया है वहां सभी ऐसे संगहृ �त शुल् क वापस कर
�दए जाएंगे, जो य�द उस उपबंध के बारे में घोषणा न क� गई होती तो, संगहृ �त नह� ं
�कए जाते ।
�नरसन । 6. अनं�तम कर सग्रं हण अ�ध�नयम, 1931 का �नरसन �कया जाता है । 1931 का 16
__________अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 923
लोक पर�क्षा (अनु�चत साधन �नवारण)
अ�ध�नयम, 2024
(2024 का अ�ध�नयम संख्यांक 1)
[12 फरवर�, 2024]
लोक पर�क्षाओं में अनु�चत साधनों के �नवारण और उनसे संबं�धत
तथा आनुषं�गक �वषयों का उपबंध
करने के �लए
अ�ध�नयम
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :––
अध्याय 1
प्रारं�भक
1. (1) इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम लोक पर�क्षा (अनु�चत साधन सं�क्षप्त नाम और
�नवारण) अ�ध�नयम, 2024 है ।
प्रारंभ ।
(2) यह उस तार�ख को प्रवत्ृ त होगा, जो केंद्र�य सरकार, राजपत्र में अ�धसूचना
द्वारा, �नयत करे ।924 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
प�रभाषाएं । 2. (1) इस अ�ध�नयम में, जब तक �क संदभ र् से अन्यथा अपे�क्षत न हो,––
(क) “अभ्यथ�” से ऐसा व्यिक्त अ�भप्रेत है िजसे लोक पर�क्षा में उपिस्थत
होने के �लए लोक पर�क्षा प्रा�धकरण द्वारा अनुम�त प्रदान क� गई है और
इसके अंतगतर् लोक पर�क्षा में उसक� ओर से लेखक के रूप में काय र् करने के
�लए कोई प्रा�धकृत व्यिक्त भी सिम्म�लत है;
(ख) “संचार �डवाइस” का वह� अथ र् होगा, जो सूचना प्रौद्यो�गक�
अ�ध�नयम, 2000 क� धारा 2 क� उपधारा (1) के खंड (जक) में उसका है; 2000 का 21
(ग) “सक्षम प्रा�धकरण” से केन्द्र�य सरकार का ऐसा मंत्रालय या �वभाग
अ�भप्रेत है, जो लोक पर�क्षा प्रा�धकरण के साथ प्रशास�नक रूप से संबद्ध है;
(घ) “कंप्यूटर नेटवकर्”, “कंप्यूटर संसाधन”, “कंप्यूटर प्रणाल�” का वह� अथर्
होगा, जो सूचना प्रौद्यो�गक� अ�ध�नयम, 2000 क� धारा 2 क� उपधारा (1) 2000 का 21
के खंड (ञ), खंड (ट) और खडं (ठ) में क्रमशः उनका है;
(ङ) “लोक पर�क्षा का संचालन” के अंतगर्त लोक पर�क्षा का संचालन
कराने हेतु अपनाई जाने वाल� सभी प्र�क्रयाएं, आदे�शकाए ं और �क्रयाकलाप, जो
�व�हत �कए जाएं, सिम्म�लत होंगे ;
(च) “संस्था” से लोक पर�क्षा प्रा�धकरण और ऐस े प्रा�धकरण द्वारा
�नयुक्त सेवा प्रदाता से �भन्न कोई अ�भकरण, संगठन, �नकाय, व्यिक्तयों का
संगम, कारबार इकाई, कंपनी, भागीदार� या एकल स्वा�मत्व फम,र् चाहे �कसी
भी नाम से ज्ञात हो, अ�भप्रेत है ।
स्पष्ट�करण––इस खंड के प्रयोजनों के �लए, यह स्पष्ट �कया जाता है
�क “कंपनी” के अंतगतर् कंपनी अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 2 के खंड (20) में 2013 का 18
यथा प�रभा�षत कोई कंपनी या सी�मत दा�यत्व भागीदार� अ�ध�नयम, 2008 2009 का 7
क� धारा 2 क� उपधारा (1) के खंड (ढ) में यथा प�रभा�षत कोई सी�मत
दा�यत्व भागीदार� फम र् भी सिम्म�लत है ;
(छ) “अ�धसूचना” से राजपत्र में प्रका�शत अ�धसूचना अ�भप्रेत है और
“अ�धसू�चत” पद का अथ र् तद्नुसार लगाया जाएगा;
(ज) “संग�ठत अपराध” से लोक पर�क्षा के सबं ंध में सदोष अ�भलाभ के
�लए साझे �हत को आगे बढ़ाने या उसका संवधनर् करने के �लए दस्ु सं�ध और
M~
ष यंत्रपूवकर् अनु�चत साधनों से �लप्त रहने वाले �कसी व्यिक्त या व्यिक्तयों
के समूह द्वारा का�रत कोई �व�ध�वरुद्ध �क्रयाकलाप अ�भप्रेत है ;
(झ) “सेवा प्रदाता से सहबद्ध व्यिक्त” से ऐसा व्यिक्त अ�भप्रेत है जो ऐसे
सेवा प्रदाता के �लए या उसक� ओर से सेवा प्रदान करे चाहे ऐसा व्यिक्त,
यथािस्थ�त, ऐसे सेवा प्रदाता का कोई कमचर् ार� या अ�भकतार् या सहायक हो ;
(ञ) “�व�हत” से इस अ�ध�नयम के अधीन बनाए गए �नयमों द्वारा
�व�हत अ�भप्रेत है ;
(ट) “लोक पर�क्षा” से अनुसूची में यथा �व�न�दर्ष्ट लोक पर�क्षा प्रा�धकरण
द्वारा या केन्द्र�य सरकार द्वारा यथा अ�धसू�चत ऐसे अन्य प्रा�धकरण द्वारा
संचा�लत कोई पर�क्षा अ�भप्रेत है ;
(ठ) “लोक पर�क्षा प्रा�धकरण” से लोक पर�क्षाओं को संचा�लत करने हेतु
केन्द्र�य सरकार द्वारा समय-समय पर अ�धसूचना द्वारा यथा �व�न�दर्ष्ट कोई
प्रा�धकरण अ�भप्रेत है ;अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 925
(ड) “लोक पर�क्षा केन्द्र” से ऐसे प�रसर अ�भप्रेत हैं, िजनका लोक पर�क्षा
संचा�लत कराने के �लए उपयोग �कए जान े हेतु सेवा प्रदाता द्वारा या अन्यथा,
लोक सेवा प्रा�धकरण द्वारा चयन �कया जाता है और िजसके अंतगतर् अन्य के
साथ, कोई �वद्यालय, कंप्यूटर केन्द्र, संस्था, कोई भवन या उसका कोई भाग
भी सिम्म�लत हो सकेगा और इसके अंतगतर् उसक� संपूणर् प�र�ध तथा उसस े
संलग्न भू�म भी सिम्म�लत होगी िजनका प्रयोग लोक पर�क्षाओं के संचालन
हेतु सुरक्षा और अन्य संबं�धत कारणों हेतु �कया जा सकेगा; और
(ढ) “सेवा प्रदाता” से कोई अ�भकरण, संगठन, �नकाय, व्यिक्तयों का
संगम, कारबार इकाई, कंपनी, भागीदार� या एकल स्वा�मत्व फम र् अ�भप्रेत है,
िजसके अंतगतर् �कसी कंप्यूटर संसाधन या �कसी सामग्री, चाहे �कसी भी नाम
से ज्ञात हो, क� सहायता प्रदान करने हेतु इसके सहयुक्त, उप-ठेकेदार और
प्रदाता भी सिम्म�लत हैं, जो लोक पर�क्षा के संचालन हेतु लोक पर�क्षा
प्रा�धकरण द्वारा �नयोिजत �कए गए हैं ।
(2) उन शब् दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक् त हैं, �कन् तु प�रभा�षत नह�ं हैं और
तत् समय प्रवत्ृ त �कसी अन्य �व�ध के अधीन प�रभा�षत हैं वह� अथ र् होंगे जो उन
�व�धयों में हैं।
अध् याय 2
अनु�चत साधन और अपराध
3. �कसी लोक पर�क्षा के सचं ालन से सबं ं�धत अनु�चत साधनों के अन्तगतर् अनु�चत साधन ।
�कसी भी व्यिक्त या व्यिक्तयों के समूह या संस्थानों द्वारा �कया गया या कराए
जाने वाला कोई कृत्य या लोप भी सिम्म�लत होगा और िजसमें धनीय या सदोष
अ�भलाभ के �लए �नम्न�ल�खत कृत्यों में से कोई कृत्य सिम्म�लत होगा, परंतु केवल
इन्ह�ं तक �नब�� धत नह�ं होगा––
(i) प्रश्नपत्र या उत्तर कंुजी या उसके �कसी भाग को प्रकट करना;
(ii) प्रश्नपत्र या उत्तर कंुजी को प्रकट करवाने के �लए दसू रों के साथ
दस्ु स�ं ध करके भागीदार� करना;
(iii) प्रा�धकार के �बना प्रश्नपत्र या ऑिप्टकल माकर् �रकिग्नशन
(ओ.एम.आर.) �रस्पांस शीट तक पहुंचना या उसे अपने कब्जे में लेना;
(iv) लोक पर�क्षा के दौरान �कसी अन�धकृत व्यिक्त द्वारा एक या
अ�धक प्रश्नों के हल का प्रबंध करना;
(v) लोक पर�क्षा में �कसी अन�धकृत र��त से अभ्यथ� क� प्रत्यक्ष या
अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करना;
(vi) उत्तर पुिस्तकाओ ं के साथ छेड़छाड़ करना, िजसमें आिप्टकल
माकर् �रकिग्नशन (ओ.एम.आर.) �रस्पांस शीटें भी हैं;
(vii) �कसी वास्त�वक त्रु�ट को सुधारने के �सवाय, �बना �कसी
प्रा�धकार के मूल्यांकन में प�रवतनर् करना;
(viii) लोक पर�क्षा को स्वयं या अपन े अ�भकरण के माध्यम स े
संचा�लत कराने के �लए केंद्र�य सरकार द्वारा स्था�पत मानदंडों या मानकों
का जानबूझकर अ�तक्रमण करना;926 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
(ix) �कसी लोक पर�क्षा में अभ्य�थयर् ों का लघ ु सूचीयन करने या �कसी
अभ्यथ� क� मे�रट या रैंक को अ�ं तम रूप �दए जाने के �लए �कसी आवश्यक
दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ करना;
(x) �कसी लोक पर�क्षा के सचं ालन में अनु�चत साधनों को सुकर
बनाने के �लए सुरक्षा उपायों का जानबूझकर उल्लंघन करना;
(xi) कम्प्यूटर नेटवकर् या �कसी कम्प्यूटर संसाधन या कम्प्यूटर
प्रणाल� के साथ छेड़छाड़ करना;
(xii) पर�क्षा में अनु�चत साधनों के अंगीकरण करने को सुकर बनाने के
�लए अभ्य�थयर् ों के बैठने क� व्यवस्था करना, तार�खों और पा�लयों के
आबंटन में हेर-फेर करना;
(xiii) लोक पर�क्षा प्रा�धकरण या सेवा प्रदाता या सरकार के �कसी
प्रा�धकृत अ�भकरण से संबद्ध व् यिक्तयों के जीवन, स् वतंत्रता को खतरे में
डालना या सदोष प�ररोध करना; या लोक पर�क्षा के संचालन में बाधा डालना;
(xiv) धोखा देने या धनीय लाभ के �लए जाल� वेबसाइट बनाना; और
(xv) धोखा देने या धनीय लाभ के �लए जाल� पर�क्षा संचा�लत करना,
जाल� प्रवेश पत्र या प्रस् ताव पत्र जार� करना ।
अनु�चत साधनों के 4. कोई व्यिक्त या व्यिक्तयों का समूह या संस्थाएं, ऐस े �कन्ह�ं भी अनु�चत
�लए षड्यंत्र ।
साधनों में सं�लप्तता को बढ़ावा देने के �लए �मल�भगत या षड्यंत्र नह�ं करेंगी ।
लोक पर�क्षा 5. (1) ऐसा कोई व्यिक्त, िजसे लोक पर�क्षा से संबं�धत कोई काय र् या लोक
संचालन को भंग
पर�क्षा को संचा�लत करवाने का कोई काय र् सौंपा नह�ं गया है या उसमें नह�ं लगाया
करना ।
गया है या जो अभ्यथ� नह�ं है, वह लोक पर�क्षा के संचालन को भंग करने के
आशय से पर�क्षा केंद्र के प�रसर में प्रवेश नह�ं करेगा ।
(2) लोक पर�क्षा संचा�लत करवाने के अपने कत्तव्र् यों के आधार पर प्रा�धकृत,
लगा हुआ या न्यस्त कोई व्यिक्त, प्रश्नपत्रों को खोलने और �वत�रत करने के �लए
�नयत समय से पूव–र् –
(क) धनीय या सदोष अ�भलाभ के �लए अन�धकृत र��त में प्रश्नपत्रों को
नह�ं खोलेगा, प्रकट नह�ं करेगा या अपने पास नह�ं रखेगा या पहुंच नह�ं
बनाएगा या हल नह�ं करेगा या ऐसे प्रश्नपत्र या इसके �कसी भाग या इसक�
प्र�त को हल करने में �कसी क� सहायता नह�ं लेगा;
(ख) �कसी व्यिक्त को कोई गोपनीय सूचना नह�ं देगा या ऐसी गोपनीय
सूचना देने का वचन नह�ं देगा, जहां ऐसी गोपनीय सूचना धनीय या सदोष
अ�भलाभ के �लए ऐस े प्रश्नपत्र से संबं�धत या उसके संदभ र् में हो ।
(3) कोई व्यिक्त, जो लोक पर�क्षा से संबं�धत काय र् में न्यस्त हो या लगाया
गया हो, �सवाय जहां उसे अपने कत्तव्र् यों के आधार पर ऐसा करने हेतु प्रा�धकृत
�कया गया है, ऐसी �कसी भी सूचना या उसके �कसी भाग को, जो उस े इस प्रकार
सौंपे जा रहे काय र् के नाते उसक� जानकार� में आई है, अनु�चत लाभ या सदोष
अ�भलाभ के �लए �कसी अन्य व्यिक्त के समक्ष न तो प्रकट करेगा, न ह� प्रकट
करवाएगा और न ह� इसका पता लगन े देगा ।
अन्य अपराध । 6. धारा 3, धारा 4 और धारा 5 के अधीन य�द कोई व् यिक्त या व् यिक्तयों का
समूह या संस् था �कन्ह�ं अनु�चत साधनों का प्रयोग करता है या अपराध करता है,अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 927
तो सेवा प्रदाता तत् काल संबद्ध पु�लस प्रा�धका�रयों को अपराध क� सूचना देगा तथा
लोक पर�क्षा प्रा�धकरण को भी सू�चत करेगा :
परंतु य�द सेवा प्रदाता अनु�चत साधनों का सहारा लेता है और अपराध करता
है या अपराध सुकर बनाने में सं�लप् त होता है, तो लोक पर�क्षा प्रा�धकरण संबद्ध
पु�लस प्रा�धका�रयों को भी उसक� �रपोटर् करेगा ।
7. लोक पर�क्षा प्रा�धकरण के �ल�खत अनमु ोदन के �बना लोक पर�क्षा लोक पर�क्षा के
�लए पर�क्षा केंद्र
आयोिजत करने के प्रयोजन के �लए वैकिल्पक रूप स े लोक पर�क्षा प्रा�धकरण द्वारा
से �भन्न �कन्ह�ं
प्रा�धकृत पर�क्षा केंद्र से �भन्न, �कसी अन् य प�रसर का प्रयोग का�रत करना, सेवा
अन् य प�रसरों का
प्रदाता या सेवा प्रदाता स े सहबद्ध �कसी अन् य व् यिक्त के �लए अपराध होगा : उपयोग नह�ं
�कया जाएगा ।
परंतु इस धारा में अंत�वष्र् ट कोई बात अपराध नह�ं होगी, जहां �कसी अ�नवाय र्
बाध् यता के कारण लोक पर�क्षा प्रा�धकरण क� पूव र् सहम�त के �बना पर�क्षा केंद्र में
कोई प�रवतनर् �कया जाता है ।
8. (1) �कसी व्यिक्त के सबंध में, िजसके अंतगर्त �कसी सेवा प्रदाता स े सेवा प्रदाताओं
और अन्य
सहबद्ध व्यिक्त भी है, यह माना जाएगा �क उसने कोई अपराध �कया है य�द वह
व्यिक्तयों के
व् यिष्टक रूप से या �कसी अन्य व्यिक्त के साथ या व्यिक्तयों के समूह के साथ या
संबंध में
संस्थाओं के साथ दस्ु सं�ध से �कसी व्यिक्त या व्यिक्तयों के समूह या संस्थाओ ं क� अपराध ।
�कसी लोक पर�क्षा के संचालन में �कसी अप्रा�धकृत र��त में सहायता करता है ।
(2) सेवा प्रदाता या उसके साथ सहबद्ध �कसी व्यिक्त के �वषय में यह माना
जाएगा �क उसने कोई अपराध �कया है, य�द वह �कसी अनु�चत साधन या �कसी
अपराध का�रत करने क� घटना क� �रपोटर् करने में असफल रहता है।
(3) जब कोई अपराध �कसी सेवा प्रदाता द्वारा �कया जाता है और अन्वेषण
के दौरान प्रथमदृष्टया यह सा�बत कर �दया जाता है �क वह �कसी �नदेशक, प्रबंधक,
स�चव या ऐसे सेवा प्रदाता के अन्य अ�धकार� क� सहम�त या मौनानुकूलता के साथ
�कया गया है, तो ऐसा व्यिक्त भी उसके
fo#)
कायवर् ाह� �कए जाने का दायी
होगा :
परंतु इस उपधारा में अन्त�वष्र् ट कोई भी बात, �कसी ऐसे व्यिक्त को इस
अ�ध�नयम के अधीन �कसी दंड का भागी नह�ं बनाएगी, य�द वह सा�बत कर देता है
�क अपराध उसक� जानकार� के �बना �कया गया था और उसने ऐसे अपराध का
�नवारण करने के �लए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
अध्याय 3
अपराधों के �लए दंड
9. इस अ�ध�नयम के अधीन सभी अपराध संज्ञेय, अजमानतीय और अशमनीय संज्ञेय अपराध ।
होंगे ।
10. (1) इस अ�ध�नयम के अधीन अनु�चत साधनों और अपराधों में सं�लप्त कोई इस अ�ध�नयम के
अधीन अपराधों के
व् यिक्त ऐसे कारावास से िजसक� अव�ध तीन वष र् से कम क� नह�ं होगी, �कंतु जो पांच वष र्
�लए दंड ।
तक क� हो सकेगी और जुमार्न े से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दं�डत �कया
जाएगा । जुमार्ने के संदाय में व्य�तक्रम क� दशा में कारावास क� अ�त�रक्त अव�ध,
2023 का 45 भारतीय न्याय सं�हता, 2023 के उपबंधों के अनुसार अ�धरो�पत क� जाएगी :
2023 का 45 परंतु जब तक भारतीय न्याय सं�हता, 2023 प्रवत्ृ त नह�ं कर द� जाती है,
1860 का 45 भारतीय दंड सं�हता के उपबंध उक्त अ�ध�नयम के स्थान पर लागू होंगे ।928 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
(2) सेवा प्रदाता एक करोड़ रुपए तक के जुमार्ने के अ�धरोपण से भी दंडनीय
होगा और पर�क्षा क� समानपु ा�तक लागत को भी ऐसे सेवा प्रदाता स े वसूल �कया
जाएगा और वह कोई लोक पर�क्षा संचा�लत करने के �लए �कसी उत्तरदा�यत्व को
सौंपे जाने से चार वष र् क� अव�ध के �लए रोक �दया जाएगा ।
(3) जहां अन्वेषण के दौरान यह सा�बत कर �दया जाता है �क इस अ�ध�नयम
के अधीन कोई अपराध सेवा प्रदाता के �कसी �नदेशक, ज्येष्ठ प्रबंधन या उसके
भारसाधक व्यिक्तयों क� सहम�त या मौनानुकूलता स े का�रत �कया गया है, तब वह
ऐसे कारावास स,े िजसक� अव�ध तीन वष र् से कम क� नह�ं होगी, �कंतु जो दस वष र्
तक क� हो सकेगी और एक करोड़ रुपए के जुमार्ने का भी दायी होगा। जुमार्ने के
संदाय में, व्य�तक्रम क� दशा में कारावास क� अ�त�रक्त अव�ध भारतीय न्याय
सं�हता, 2023 के उपबंधों के अनुसार अ�धरो�पत क� जाएगी : 2023 का 45
परंतु जब तक भारतीय न्याय सं�हता, 2023 प्रवत्ृ त नह�ं कर द� जाती, 2023 का 45
भारतीय दंड सं�हता के उपबंध उक्त अ�ध�नयम के स्थान पर लागू होंगे ।
1860 का 45
(4) इस धारा में अंत�वष्र् ट कोई बात, �कसी ऐसे व्यिक्त को अ�ध�नयम के
अधीन �कसी दंड का दायी नह�ं ठहराएगी य�द वह सा�बत कर देता है �क अपराध
उसक� जानकार� के �बना का�रत �कया गया था और उसने ऐसे अपराध को का�रत
होने से �नवा�रत करने के �लए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
संग�ठत अपराध । 11. (1) य�द कोई व्यिक्त या व्यिक्तयों का समूह, िजसके अंतगतर् पर�क्षा
प्रा�धकरण या सेवा प्रदाता या कोई अन्य संस्था भी है, कोई संग�ठत अपराध का�रत
करता है तो वह ऐसे कारावास से, िजसक� अव�ध पांच वष र् से कम नह�ं होगी, �कंत ु
जो दस वष र् तक क� हो सकेगी और जुमार्ने से, जो एक करोड़ रुपए से कम का नह� ं
होगा, दं�डत �कया जाएगा । जुमार्ने के संदाय में व्य�तक्रम क� दशा में, कारावास क�
अ�त�रक्त अव�ध भारतीय न्याय सं�हता, 2023 के उपबधं ों के अनुसार अ�धरो�पत 2023 का 45
क� जाएगी :
परंतु जब तक भारतीय न्याय सं�हता, 2023 प्रवत्ृ त नह�ं कर द� जाती, 2023 का 45
भारतीय दंड सं�हता के उपबंध उक्त अ�ध�नयम के स्थान पर लागू होंगे ।
1860 का 45
(2) य�द कोई संस्था �कसी संग�ठत अपराध को का�रत करने में अंतव�र्लत
पाई जाती है तो उसक� संपित्त कुक� और जब्ती के अधीन होगी तथा उससे पर�क्षा
क� समानुपा�तक लागत भी वसूल क� जाएगी ।
अध्याय 4
जांच और अन्वेषण
अन्वेषण के �लए 12. (1) इस अ�ध�नयम के अधीन �कसी अपराध का अन्वेषण पु�लस उप-
सशक्त अ�धकार� ।
अधीक्षक या पु�लस सहायक आयुक्त से अन्यून पंिक्त का अ�धकार� करेगा।
(2) उपधारा (1) में अंत�वष्र् ट �कसी बात के होते हुए भी, केंद्र�य सरकार को
अन्वेषण को �कसी केंद्र�य अन्वेषण अ�भकरण को �न�दर्ष्ट करने क� शिक्तयां होंगी ।
अध्याय 5
प्रक�ण र्
लोक पर�क्षा प्रा�धकरण 13. लोक पर�क्षा प्रा�धकरण का अध्यक्ष, सदस्यों, अ�धका�रयों और अन्य कमचर् ा�रयों
के सदस्यों,
को, जब वह इस अ�ध�नयम के �कसी भी उपबधं के अनुसरण में काय र् कर रहे हैं या काय र्
अ�धका�रयों और
करने के �लए तात्प�यर्त हैं, भारतीय न्याय सं�हता, 2023 के अथार्न्तगर्त लोक सेवक 2023 का 45
कमचर् ा�रयों का लोक
सेवक होना । समझा जाएगा :अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 929
2023 का 45 परंतु जब तक भारतीय न्याय सं�हता, 2023 प्रवत्ृ त नह�ं कर द� जाती,
1860 का 45 भारतीय दंड सं�हता के उपबंध उक्त अ�ध�नयम के स्थान पर लागू होंगे ।
14. इस अ�ध�नयम के �कसी उपबंध के अनुसरण में सद्भावपूवकर् क� गई या �कसी लोक सेवक
द्वारा सद्भावपूवकर्
क� जाने के �लए आश�यत �कसी बात के �लए कोई वाद, अ�भयोजन या अन्य
�कए गए काय र् स े
�व�धक कायवर् ाह� �कसी लोक सेवक के �वरुद्ध नह�ं होगी :
संरक्षण ।
परंतु �कसी लोक पर�क्षा प्रा�धकरण क� सेवा में लोक सेवक ऐसे लोक पर�क्षा
प्रा�धकरण के सेवा �नयमों के �नबंधनों में प्रशास�नक कारर्वाई के अधीन होंगे :
परंतु यह और �क कोई भी बात ऐस े लोक सवे कों के �वरुद्ध कायवर् ाह� करने का
�नवारण नह�ं करेगी, जहां प्रथमदृष्टया इस अ�ध�नयम के अधीन कोई अपराध
का�रत करन े का मामला �वद्यमान है ।
15. इस अ�ध�नयम के उपबंध तत्समय प्रवत्ृ त �कसी अन्य �व�ध के अ�त�रक्त इस अ�ध�नयम
होंगे, न �क उसके अल्पीकरण में : के उपबंधों का
अन्य �व�धयों के
परंतु इस अ�ध�नयम के उपबंधों का तत्समय प्रवत्ृ त �कसी अन्य �व�ध या
अ�त�रक्त होना ।
�कसी �लखत िजसका �व�ध का बल होने के नाते प्रभाव है, में अंत�वष्र् ट �कसी
असंगत बात के होते हुए भी प्रभाव होगा ।
16. (1) केंद्र�य सरकार, राजपत्र में अ�धसूचना द्वारा, इस अ�ध�नयम के उपबंधों �नयम बनाने क�
शिक्त ।
को कायार्िन्वत करने के �लए �नयम बना सकेगी ।
(2) �व�शष्टतया और पूवगर् ामी शिक्त क� व्यापकता पर प्र�तकूल प्रभाव डाले
�बना, ऐसे �नयम, �नम्न�ल�खत सभी या �कन्ह�ं �वषयों के �लए उपबंध कर सकेंगे,
अथार्त ् :––
(क) लोक पर�क्षा का संचालन करन े के �लए अंगीकृत �कए जाने के �लए
प्र�क्रयाएं, आदे�शकाए,ं �क्रयाकलाप अ�धक�थत करना ;
(ख) कोई अन्य �वषय, जो �व�हत �कया गया है या �व�हत �कया जाए ।
17. इस अ�ध�नयम के अधीन बनाया गया प्रत्येक �नयम, उसके बनाए जाने के �नयमों का रखा
पश्चात ् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस �दन जाना ।
क� अव�ध के �लए रखा जाएगा, यह अव�ध एक सत्र में या दो या अ�धक
आनुक्र�मक सत्रों में पूर� हो सकेगी, य�द उस सत्र के या पवू �क्त आनुक्र�मक सत्रों के
ठ�क बाद के सत्र के अवसान के पूव र् दोनों सदन उस �नयम में कोई प�रवतनर् करने
के �लए सहमत हो जाए ं तो तत्पश्चात ् वह ऐसे प�रव�ततर् रूप में ह� प्रभावी होगा,
य�द उक्त अवसान के पूव र् दोनों सदन सहमत हो जाएं �क वह �नयम नह�ं बनाया
जाना चा�हए तो तत्पश्चात ् वह �नयम ऐसे प�रव�ततर् रूप में ह� प्रभावी होगा या
�नष्प्रभावी हो जाएगा, �कंतु �नयम के इस प्रकार प�रव�ततर् या �नष्प्रभावी होने से
उसके अधीन पहले क� गई �कसी बात क� �व�धमान्यता पर प्र�तकूल प्रभाव नह�ं
पड़ेगा ।
18. (1) य�द इस अ�ध�नयम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई क�ठनाई क�ठनाइयों को दरू
उत्पन्न होती है तो केंद्र�य सरकार, राजपत्र में प्रका�शत आदेश द्वारा तीन वष र् के करने क� शिक्त ।
भीतर ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अ�ध�नयम के उपबधं ों से असंगत न हो, जो
उस क�ठनाई को दरू करने के �लए उसे आवश्यक प्रतीत हो ।
(2) इस धारा के अधीन �कया गया प्रत्येक आदेश, �कए जाने के पश्चात,्
यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।930 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
अध्याय 6
आपरा�धक �व�ध (संशोधन) अध्यादेश, 1944 का संशोधन
1944 के अध्यादेश 19. आपरा�धक �व�ध (संशोधन) अध्यादेश, 1944 क� अनुसूची में, क्रम
संख्यांक 38 का
संख्यांक 5 और उसस े संबं�धत प्र�विष्टयों के पश्चात,् �नम्न�ल�खत क्रम संख्यांक
संशोधन ।
और प्र�विष्टयां अन्तःस्था�पत क� जाएंगी, अथार्त ् :––
“6. लोक पर�क्षा (अनु�चत साधन �नवारण) अ�ध�नयम, 2024 के अधीन
दंडनीय कोई अपराध ।”।अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 931
अनुसूची
[धारा 2(ट) दे�खए]
�नम्न�ल�खत द्वारा संचा�लत कोई पर�क्षा,––
1. संघ लोक सेवा आयोग ।
2. कमचर् ार� चयन आयोग ।
3. रेलवे भत� बोड र् ।
4. ब�ैंकंग कमचर् ार� चयन संस्थान ।
5. कमचर् ा�रवन्ृ द क� भत� करने के �लए केंद्र�य सरकार के मंत्रालय या
�वभाग और उनके सबं द्ध तथा अधीनस्थ कायार्लय ।
6. राष्ट्र�य पर�क्षा एजेंसी ।
7. ऐसे अन्य प्रा�धकरण, जो केंद्र�य सरकार द्वारा अ�धसू�चत �कए
जाएं ।
__________अनुभाग 1क] भारत का र ाजपत्र असाधारण 933
जल (प्रदषू ण �नवारण और �नयंत्रण)
संशोधन अ�ध�नयम, 2024
(2024 का अ�ध�नयम संख्यांक 5)
[15 फरवर�, 2024]
जल (प्रदषू ण �नवारण और �नयंत्रण) अ�ध�नयम, 1974
का और संशोधन
करने के �लए
अ�ध�नयम
सं�वधान के अनुच्छेद 252 के खंड (1) के अनुसरण में, जल (प्रदषू ण �नवारण और
1974 का 6 �नयंत्रण) अ�ध�नयम, 1974 को संसद् द्वारा पा�रत �कया गया था ;
और जीवन�नवार्ह तथा कारबार करने में सुगमता के �लए �वश्वास आधा�रत शासन
में और व�ृद्ध करने के �लए छोटे अपराधों को अपराध क� श्रेणी से हटाने और उनका
सुव्यवस्थीकरण करने के �लए उसमें क�तपय संशोधन करना आवश्यक समझा गया है ;
और सं�वधान के अनुच्छेद 252 के खंड (2) के साथ प�ठत उसके खंड (1) के
अनुसरण में, �हमाचल प्रदेश तथा राजस्थान राज्यों क� �वधान सभाओं द्वारा इस प्रभाव
के संकल्प पा�रत �कए गए हैं �क उक्त अ�ध�नयम को इसमें इसके पश्चात ् �दए गए
प्रयोजनों के �लए संसद् के अ�ध�नयम द्वारा संशो�धत �कया जाना चा�हए ;934 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वष र् में संसद् द्वारा �नम्न�ल�खत रूप में यह
अ�ध�नय�मत हो :––
सं�क्षप्त नाम, लाग ू 1. (1) इस अ�ध�नयम का सं�क्षप्त नाम जल (प्रदषू ण �नवारण और �नयंत्रण)
होना और प्रारंभ ।
संशोधन अ�ध�नयम, 2024 है ।
(2) यह सवप्रर् थम संपूण र् �हमाचल प्रदेश और राजस्थान राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्रों
को लाग ू होता है ; और यह ऐस े अन्य राज्यों को भी लाग ू होगा, जो सं�वधान के
अनुच्छेद 252 के खंड (2) के साथ प�ठत उसके खंड (1) के अधीन इस �न�मत्त पा�रत
संकल्प द्वारा इस अ�ध�नयम को अंगीकार करते हैं ।
(3) यह �हमाचल प्रदेश और राजस्थान राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में, तथा ऐस े
�कसी अन्य राज्य में जो इस अ�ध�नयम को सं�वधान के अनुच्छेद 252 के खंड (2) के
साथ प�ठत उसके खंड (1) के अधीन अंगीकार करता है, ऐसे अंगीकरण क� तार�ख को
तुरन्त प्रवत्ृ त होगा ।
धारा 4 का 2. जल (प्रदषू ण �नवारण और �नयंत्रण) अ�ध�नयम, 1974 (िजसे इसमें इसके 1974 का 6
संशोधन ।
पश्चात ् मूल अ�ध�नयम कहा गया है) क� धारा 4 क� उपधारा (2) के खंड (क) में “राज्य
सरकार द्वारा” शब्दों के पश्चात ् “ऐसी र��त में, जो केंद्र�य सरकार द्वारा �व�हत क� जाए”
शब्द अतं :स्था�पत �कए जाएंग े ।
धारा 5 का 3. मूल अ�ध�नयम क� धारा 5 क� उपधारा (9) में “ऐसी होंगी” शब्दों के पश्चात ्
संशोधन । “जो केंद्र�य सरकार द्वारा �व�हत क� जाएं,” शब्द अतं :स्था�पत �कए जाएंग े ।
धारा 25 का 4. मूल अ�ध�नयम क� धारा 25 क� उपधारा (1) के परंतुक के स्थान पर
संशोधन । �नम्न�ल�खत परंतुक रखा जाएगा, अथार्त ् :––
“परंतु केन्द्र�य सरकार, केन्द्र�य बोड र् के साथ परामश र् करके राजपत्र में
अ�धसूचना द्वारा, औद्यो�गक संयंत्रों के क�तपय प्रवग� को इस उपधारा के उपबंधों
से छूट प्रदान कर सकेगी ।”।
नई धारा 27क का 5. मूल अ�ध�नयम क� धारा 27 के पश्चात,् �नम्न�ल�खत धारा अंतःस्था�पत क�
अंतःस्थापन । जाएगी, अथार्त ् :––
�दशा�नद�श जार� “27क. (1) इस अ�ध�नयम में �कसी बात के होते हुए भी, केन्द्र�य सरकार,
करने क� शिक्त ।
केन्द्र�य बोड र् से परामश र् करके, अ�धसूचना द्वारा राजपत्र में, �कसी उद्योग क�
स्थापना, उसके प्रचालन या प्र�क्रया या उपचार और �नपटान प्रणाल� के �लए �कसी
राज्य बोड र् क� सहम�त प्रदान करने, उससे इंकार करने या उसे रद्द करने या �कसी
नए या प�रव�ततर् आउटलेट, िजसमें धारा 25 के अधीन �कए गए आवेदन का
समयबद्ध �नपटान संबंधी तंत्र भी है या ऐसी सहम�त क� �व�धमान्यता क� अव�ध
से संबं�धत �वषयों पर मागदर् श� �सद्धान्त जार� कर सकेगी ।
(2) प्रत्येक राज्य बोड,र् धारा 25 या धारा 27 के अधीन सहम�त प्रदान करने,
उससे इंकार करने या रद्द करने के प्रयोजनों के �लए अपने कृत्यों का �नवर्हन करते
हुए उपधारा (1) के अधीन जार� �दशा�नद�शों के अनुसार काय र् करेगा ।”।अनुभाग 1क] भारत का र ाजपत्र असाधारण 935
6. मूल अ�ध�नयम क� धारा 41 के स्थान पर, �नम्न�ल�खत धाराएं रखी जाएंगी, धारा 41 के
अथार्त ् :–– स्थान पर नई
धारा 41 और
धारा 41क का
रखा जाना ।
“41. (1) जो कोई धारा 20 क� उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन �दए धारा 20 के
गए �नदेशों का ऐस े समय के भीतर, जो �नदेश में �व�न�दर्ष्ट �कया जाए, उल्लंघन उपबंधों का
अनुपालन करने
करता है या अनुपालन नह�ं करता है, तो वह ऐस े प्रत्येक उल्लंघन या अननुपालन
या उसके अधीन
के संबंध में शािस्त का, जो दस हजार रुपए से कम क� नह�ं होगी, �कंतु जो पंद्रह
जार� अनुदेशों का
लाख रुपए तक क� हो सकेगी, संदाय करने का दायी होगा । अनुपालन करने
में असफलता ।
(2) जहां कोई व्यिक्त, उपधारा (1) के अधीन उल्लंघन या अननुपालन जार�
रखता है वहां वह दस हजार रुपए प्र�त�दन क� अ�त�रक्त शािस्त का संदाय करने
का दायी होगा िजसके दौरान ऐसा उल्लंघन जार� रहता है ।
41क. (1) जो कोई, धारा 32 क� उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन जार� धारा 32 के
�कसी आदेश या �नदेश या धारा 33 क� उपधारा (2) के अधीन �कसी न्यायालय उपबंधों या धारा
33 या धारा
द्वारा जार� �कसी �नदेश या धारा 33क के अधीन जार� �कसी �नदेश का उल्लंघन
33क के अधीन
करता है या अनुपालन नह�ं करता है, तो वह ऐस े प्रत्येक उल्लंघन या अननुपालन
जार� अनुदेशों का
के �लए, ऐसी शािस्त का, जो दस हजार रुपए से कम क� नह�ं होगी �कंतु जो पंद्रह अनुपालन करने
लाख रुपए तक क� हो सकेगी, संदाय करने का दायी होगा । में असफलता ।
(2) जहां कोई व्यिक्त, उपधारा (1) के अधीन उल्लंघन या अननुपालन जार�
रखता है वहां वह ऐसे प्रत्येक �दन के �लए, िजसके दौरान ऐसा उल्लंघन जार�
रहता है, दस हजार रुपए क� अ�त�रक्त शािस्त का संदाय करने का दायी होगा ।”।
7. मूल अ�ध�नयम क� धारा 42 में,–– धारा 42 का
संशोधन।
(क) उपधारा (1) में द�घ र् पंिक्त के स्थान पर, �नम्न�ल�खत द�घ र् पंिक्त रखी
जाएगी, अथार्त ् :––
“ऐसी शािस्त का संदाय करने का दायी होगा, जो दस हजार रुपए स े
कम क� नह�ं होगी �कंतु जो पंद्रह लाख रुपए तक क� हो सकेगी ।” ;
(ख) उपधारा (2) के स्थान पर, �नम्न�ल�खत उपधारा रखी जाएगी,
अथार्त ् :––
“(2) जहां कोई व्यिक्त, उपधारा (1) के अधीन उल्लंघन या अननुपालन
जार� रखता है, वहा ं वह ऐसे प्रत्येक �दन के �लए िजसके दौरान ऐसा
उल्लंघन जार� रहता है, दस हजार रुपए क� अ�त�रक्त शािस्त का संदाय
करने का दायी होगा ।”।
8. मूल अ�ध�नयम क� धारा 43 और धारा 44 के स्थान पर, �नम्न�ल�खत धाराएं धारा 43 और
रखी जाएंगी, अथार्त ् :–– धारा 44 के
स्थान पर नई
धाराओ ं का
प्र�तस्थापन ।
“43. जो कोई, धारा 24 के उपबंधों का उल्लंघन करता है, वह ऐसी शािस्त धारा 24 के
का संदाय करने का दायी होगा, जो दस हजार रुपए से कम क� नह�ं होगी �कंतु उपबंधों के
उल्लंघन के �लए
पंद्रह लाख रुपए तक क� हो सकेगी और जहां ऐसा उल्लघं न जार� रहता है, वहा ं
शािस्त ।
वह ऐसे प्रत्येक �दन के �लए िजसके दौरान ऐसा उल्लंघन जार� रहता है, दस हजार
रुपए क� अ�त�रक्त शािस्त का संदाय करने का दायी होगा ।936 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
धारा 25 या धारा 44. जहा ं धारा 25 या धारा 26 के उपबंधों के अनुसरण में, सहम�त देने के
26 के उल्लंघन के
प्रयोजन के �लए, �कसी मीटर या प्रमापी या अन्य मापने या मानीटर करन े क�
�लए शािस्त ।
�डवाइस का उपयोग अपे�क्षत है और ऐसी �डवाइस का उपयोग, उन उपबंधों के
प्रयोजनों के �लए �कया जाता है, वहां कोई व्यिक्त, जो यह जानते हुए या
जानबूझकर ऐसी �डवाइस को प�रव�ततर् करता है या उसके साथ छेड़-छाड़ करता है
ता�क वह उसको सह� ढंग स े मानीटर करने या मापने से �नवा�रत कर सके, तो
वह ऐसी शािस्त का, जो दस हजार रुपए से कम क� नह�ं होगी �कंतु पंद्रह लाख
रुपए तक क� हो सकेगी, संदाय करने का दायी होगा ।”।
धारा 45 का 9. मूल अ�ध�नयम क� धारा 45 का लोप �कया जाएगा ।
लोप ।
धारा 45क के स्थान 10. मूल अ�ध�नयम क� धारा 45क के स्थान पर, �नम्न�ल�खत धाराएं रखी
पर नई धारा 45क जाएगी, अथार्त ् :––
से धारा 45ङ तक
का प्र�तस्थापन ।
अ�ध�नयम के ‘45क. य�द कोई व्यिक्त, इस अ�ध�नयम के �कन्ह�ं उपबंधों का या तद्धीन
क�तपय उपबंधों के
जार� �कए गए ऐसे �कसी आदेश या �नदेशों का उल्लंघन करता है िजसके �लए इस
उल्लंघन के �लए
अ�ध�नयम में �कसी शािस्त का उपबंध नह�ं �कया गया है, तो वह ऐसी शािस्त का
शािस्त ।
जो दस हजार रुपए स े कम क� नह�ं होगी �कंतु जो पद्रं ह लाख रुपए तक क� हो
सकेगी संदाय करने का दायी होगा और जहां ऐसा उल्लंघन जार� रहता है, वहां वह
ऐसे प्रत्येक �दन के �लए िजसके दौरान ऐसा उल्लंघन जार� रहता है, दस हजार
रुपए क� अ�त�रक्त शािस्त का संदाय करने का दायी होगा ।
न्याय�नणार्यक 45ख. (1) केन्द्र�य सरकार, इस अ�ध�नयम के उपबंधों के अधीन शािस्तयों
अ�धकार� ।
का अवधारण करने के प्रयोजनों के �लए, भारत सरकार के संयुक्त स�चव या राज्य
सरकार के स�चव क� पिं क्त से अन्यून �कसी अ�धकार� को, ऐसी र��त में जांच
करने और शािस्त अ�धरो�पत करने के �लए, जो �व�हत क� जाए, न्याय�नणार्यक
अ�धकार� के रूप में �नयुिक्त करेगी :
परंतु केन्द्र�य सरकार, उतने न्याय�नणार्यक अ�धकार� �नयुक्त कर सकेगी
िजतने अपे�क्षत हों ।
(2) न्याय�नणार्यक अ�धकार� सा�य देने के �लए या दस्तावेज को प्रस्तुत
करने के �लए मामल े के तथ्यों और प�रिस्थ�तयों से प�र�चत �कसी ऐस े व्यिक्त
को समन कर सकेगा और उसे उपिस्थत करा सकेगा या जो न्याय�नणार्यक
अ�धकार� क� राय में, जांच क� �वषय-वस्तु के �लए उपयोगी या सुसंगत हो सके
और य�द ऐसी जांच करने पर उसका यह समाधान हो जाता है �क संबं�धत व्यिक्त
ने इस अ�ध�नयम के उपबंधों का उल्लंघन �कया है, तो वह ऐसी शािस्त अवधा�रत
कर सकेगा जो इस अ�ध�नयम के उपबंधों के अधीन वह ठ�क समझे :
परंतु ऐसी कोई शािस्त संबं�धत व्यिक्त को उस मामले में सुनवाई का अवसर
प्रदान �कए �बना अ�धरो�पत नह�ं क� जाएगी ।
(3) धारा 41. धारा 41क, धारा 42, धारा 43, धारा 44, धारा 45क और
धारा 48 के उपबंधों के अधीन अ�धरो�पत शािस्त क� रकम, राष्ट्र�य ह�रत
अ�धकरण अ�ध�नयम, 2010 क� धारा 17 के साथ प�ठत धारा 15 के अधीन 2010 का 19
अनुतोष या प्र�तकर का संदाय करने के दा�यत्व के अ�त�रक्त होगी ।अनुभाग 1क] भारत का र ाजपत्र असाधारण 937
45ग. (1) धारा 45ख के अधीन न्याय�नणार्यक अ�धकार� द्वारा पा�रत �कसी अपील ।
2010 का 19 आदेश स े व्य�थत व्यिक्त, राष्ट्र�य ह�रत अ�धकरण अ�ध�नयम, 2010 क� धारा 3
के अधीन स्था�पत राष्ट्र�य ह�रत अ�धकरण को अपील प्रस्तुत कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक अपील, उस तार�ख से, िजसको
न्याय�नणार्यक अ�धकार� द्वारा �कए गए आदेश क� प्र�त व्य�थत व्यिक्त द्वारा
प्राप्त क� जाती है, साठ �दन के भीतर फाइल क� जाएगी ।
(3) राष्ट्र�य ह�रत अ�धकरण, अपील के पक्षकारों को सनु वाई का अवसर
प्रदान करने के पश्चात,् उस आदेश को, िजसके �वरुद्ध अपील क� गई है, पुष्ट
करते हुए, उपांत�रत करते हुए या अपास्त करत े हुए, ऐसा आदेश पा�रत करेगा, जो
वह ठ�क समझे ।
(4) जहां उपधारा (1) के अधीन न्याय�नणार्यक अ�धकार� के �कसी आदेश के
�वरुद्ध कोई अपील क� जाती है, वहां ऐसी अपील को अ�धकरण द्वारा तब तक
ग्रहण नह�ं �कया जाएगा, जब तक ऐसा व्यिक्त न्याय�नणार्यक अ�धकार� द्वारा
अ�धरो�पत शािस्त क� रकम का दस प्र�तशत अ�धकरण के पास जमा नह�ं कर
देता है ।
45घ. जहां न्याय�नणार्यक अ�धकार�, इस अ�ध�नयम के उपबंधों के अधीन, शािस्त क� रकम
यथािस्थ�त, शािस्त या अ�त�रक्त शािस्त अ�धरो�पत करता है, वहां ऐसी शािस्त क�
का पयार्वरण
संरक्षण �न�ध में
1986 का 29 रकम को पयावर् रण (संरक्षण) अ�ध�नयम, 1986 क� धारा 16 के अधीन स्था�पत
जमा �कया
पयार्वरण संरक्षण �न�ध में जमा �कया जाएगा । जाना ।
45ङ. (1) जो कोई, धारा 25 या धारा 26 के उपबंधों का अनुपालन करने में धारा 25 या धारा
26 के उपबंधों
असफल रहता है, ऐसी प्रत्येक असफलता के संबंध में वह कारावास से, िजसक�
का अनुपालन
अव�ध डेढ़ वष र् से कम क� नह�ं होगी, �कंतु जो छह वष र् तक क� हो सकेगी और
करने में
जुमार्ने से भी दंडनीय होगा और असफलता के जार� रहने क� दशा में, ऐस े असफलता और
अ�त�रक्त जुमार्ने से, जो ऐस े प्रत्येक �दन, िजसके दौरान ऐसी पहल� असफलता के शािस्त संदाय
करने में
�लए दोष�स�द्ध के पश्चात,् ऐसी असफलता जार� रहती है, पचास हजार रुपए तक
असफलता के
हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
अपराध ।
(2) य�द उपधारा (1) में �न�दर्ष्ट असफलता दोष�स�द्ध क� तार�ख के पश्चात,्
एक वष र् क� अव�ध स े परे जार� रहती है, तो वह अपराधी कारावास से, िजसक�
अव�ध दो वष र् से कम नह�ं होगी �कंतु जो सात वष र् तक क� हो सकेगी और जुमार्ने
से भी दंडनीय होगा ।
(3) जहा ं कोई व्यिक्त, इस अ�ध�नयम के उपबंधों के अधीन, यथािस्थ�त,
अ�धरो�पत शािस्त या अ�त�रक्त शािस्त का, ऐसे अ�धरोपण के नब्बे �दन के भीतर
भुगतान करने में असफल रहता है, वहां वह कारावास से, िजसक� अव�ध तीन वष र्
तक क� हो सकेगी या जुमार्न े स,े जो अ�धरो�पत शािस्त या अ�त�रक्त शािस्त क�
रकम का दगु ना हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा ।
(4) जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन �कसी
कंपनी द्वारा कोई अपराध �कया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यिक्त, जो उस अपराध
के �कए जान े के समय, उस कंपनी के कारबार के संचालन के �लए उस कंपनी का
प्रत्यक्ष रूप से भारसाधक था और उसके प्र�त उत्तरदायी था और साथ ह� वह
कंपनी भी, उस अपराध के दोषी समझी जाएगी और तद्नुसार, अपने �वरुद्ध
कायवर् ाह� �कए जाने और दं�डत �कए जाने के दायी होंगे :938 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग
2—
परंतु इस उपधारा में क� कोई बात, ऐस े �कसी व्यिक्त को उपधारा (1) या
उपधारा (2) या उपधारा (3) में उपबं�धत �कसी दंड का दायी नह�ं बनाएगी, य�द
वह यह सा�बत कर देता है �क वह अपराध उसक� जानकार� के �बना �कया गया
था या उसने ऐसे अपराध के �कए जाने का �नवारण करने के �लए सब सम्यक्
तत्परता बरती थी ।
(5) उपधारा (4) में क� �कसी बात के होते हुए भी, जहां �कसी कंपनी द्वारा
कोई अपराध �कया गया है और यह सा�बत हो जाता है �क वह अपराध कंपनी के
�कसी �नदेशक, प्रबंधक, स�चव या अन्य अ�धकार� क� सहम�त या मौनानुकूलता से
�कया गया है या उस अपराध का �कया जाना उसक� �कसी उपेक्षा के कारण माना
जा सकता है, वहां ऐसा �नदेशक, प्रबंधक, स�चव या अन्य अ�धकार� भी उस अपराध
का दोषी समझा जाएगा और तद्नसु ार अपने �वरुद्ध कायवर् ाह� �कए जाने और दं�डत
�कए जाने का दायी होगा ।
स्पष्ट�करण––इस धारा के प्रयोजनों के �लए,––
(क) “कंपनी” से कोई �नग�मत �नकाय अ�भप्रेत है और इसके अंतगतर्
फम र् या अन्य व्यिष्ट-संगम भी है ;
(ख) �नदेशक के अंतगर्त, यथािस्थ�त, कंपनी का �नदेशक, फम र् का
भागीदार, सोसाइट� के सदस्य या न्यास या व्यिक्तयों के �कसी संगम के
सदस्य आत े हैं ।’।
धारा 47 का 11. मूल अ�ध�नयम क� धारा 47 का लोप �कया जाएगा ।
लोप ।
धारा 48 के स्थान 12. मूल अ�ध�नयम क� धारा 48 के स्थान पर, �नम्न�ल�खत धारा रखी जाएगी,
पर नई धारा का
अथार्त ् :––
प्र�तस्थापन ।
सरकार� �वभाग “48. (1) जहां इस अ�ध�नयम के �कसी उपबंध का उल्लंघन केन्द्र�य सरकार
द्वारा उल्लंघन के
या राज्य सरकार के �कसी �वभाग द्वारा �कया गया है, वहां �वभागाध्यक्ष अपने
�लए शािस्त ।
एक मास के मूल वेतन के समतुल्य शािस्त का भुगतान करने का दायी होगा :
परंतु ऐसा �वभागाध्यक्ष ऐसे उल्लंघन के �लए दायी नह�ं होगा, य�द वह यह
सा�बत कर देता है �क उल्लंघन उसक� जानकार� या उसके अनुदेशों के �बना �कया
गया था या उसने ऐसे उल्लंघन को रोकने के �लए सभी सम्यक् तत्परता बरती
थी ।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन �कसी उल्लंघन का �कया जाना �वभागाध्यक्ष
से �भन्न �कसी अन्य अ�धकार� क� �कसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है,
वहां ऐसा अ�धकार� अपने एक मास के मूल वेतन के समतुल्य शािस्त का भुगतान
करने का दायी होगा :
परंतु ऐसा अ�धकार� ऐसे उल्लंघन के �लए दायी नह�ं होगा, य�द वह यह
सा�बत कर देता है �क उसने ऐसे उल्लंघन से बचन े के �लए सभी सम्यक् तत्परता
बरती थी ।”।
धारा 49 का 13. मूल अ�ध�नयम क� धारा 49 क� उपधारा (1) के खंड (क) के पश्चात,् ।
संशोधन �नम्न�ल�खत खंड अंतःस्था�पत �कया जाएगा, अथार्त ् :––
“(कक) न्याय�नणार्यक अ�धकार� या उसके द्वारा इस �न�मत्त प्रा�धकृत कोई
अ�धकार� ; या” ।अनुभाग 1क] भारत का र ाजपत्र असाधारण 939
14. मूल अ�ध�नयम क� धारा 63 क� उपधारा (2) में,–– धारा 63 का
संशोधन ।
(i) खंड (क) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत खंड अंतःस्था�पत �कया जाएगा,
अथार्त ् :––
“(कक) धारा 4 क� उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन राज्य बोड र् के
अध्यक्ष के नाम�नद�शन क� र��त और धारा 5 क� उपधारा (9) के अधीन
राज्य बोड र् के अध्यक्ष क� सेवा के �नबंधन और शत� ;”;
(ii) खंड (ड) के पश्चात,् �नम्न�ल�खत खंड अंतःस्था�पत �कया जाएगा,
अथार्त ् :––
“(डक) धारा 45ख के अधीन न्याय�नणार्यक अ�धकार� द्वारा जांच
करने और शािस्तयां अ�धरो�पत करने क� र��त ;”।
15. मूल अ�ध�नयम क� धारा 64 क� उपधारा (2) के खडं (ङ) में, “धारा 5 क� धारा 64 का
उपधारा (9) के अधीन राज्य बोड र् का अध्यक्ष और सदस्य-स�चव” शब्दों, अंकों और संशोधन ।
कोष्ठकों के स्थान पर, “राज्य बोड र् का सदस्य-स�चव” शब्द रखे जाएंगे ।
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