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भारत सरकार
नागर विमानन मत्रं ालय
राज्य सभा
वलवित प्रश्न सख्ं या : 181
सोमिार, 2 फरिरी, 2026 (13 माघ, 1947 (शक)) को दिया जान े िाला उत्तर
उडान योजना के अतं गतग विस्तार
181. श्री बाबभू ाई जसे गं भाई िसे ाईः
क्या नागर विमानन मंत्री यह बताने की कृपा करेंग े दकः
(क) क्या सरकार ने उडान योजना के अंतगगत क्षत्रे ीय हिाई संपकग विस्तार का मूलयांकन दकया
ह,ै जैसा दक मंत्रालय के िार्षगक प्रवतिेिन, 2025 में उललेि दकया गया ह;ै
(ि) िषग 2024-25 के िौरान प्रचावलत दकए गए नए मागों, विमानपत्तनों और हले ीपोर्टों
की संख्या दकतनी-दकतनी ह;ै
(ग) वित्तीय संधारणीयता, यावत्रयों के वलए िहनीयता और सुरक्षा मानकों को सुवनवित करन े
के वलए क्या उपाय दकए गए ह;ैं और
(घ) िषग 2025-26 में विमानपत्तन अिसंरचना और हिाई यातायात प्रबंधन को सुिढ़ृ करन े
के वलए क्या किम प्रस्तावित ह?ैं
उत्तर
नागर विमानन मत्रं ालय में राज्य मंत्री (श्री मरु लीधर मोहोल)
(क) और (ि): दिनांक 20.01.2026 तक, ‘उडान’ योजना के तहत 73 असेवित और
20 अलपसेवित हिाईअड्डों सवहत 93 हिाईअड्डों को विकवसत और प्रचालनरत दकया गया ह,ै
वजसमें 15 हले ीपोर्टग और 2 िॉर्टर एयरोड्रोम शावमल ह।ैं िषग 2024-25 के िौरान कुल 66
मागों और 6 हिाईअड्डों/हले ीपोर्टों को प्रचालनरत दकया गया।
(ग) और (घ): क्षेत्रीय हिाई यात्रा को दकफायती बनाए रिने के वलए, आरसीएस-उडान
योजना के तहत एयरलाइनों को केंद्रीय/राज्य सरकार के माध्यम से प्रोत्सावहत दकया जाता ह ै
और लागत-राजस्ि अंतर को कम करने के वलए हिाईअड्डा प्रचालक को व्यिहायगता अंतर
वित्तपोषण (िीजीएफ) सवहत ररयायत ें प्रिान की जाती ह।ैं िीजीएफ सहायता-प्राप्त आरसीएस
सीर्टों के वलए हिाई दकरायों को त्रैमावसक सूचकांक सवहत सवससडी िरों पर सीवमत रिा
जाता ह।ै य े उपाय िहनीयता, पहचं और यात्री सुविधा को बढ़ाते ह,ैं क्षेत्रीय संपकग और
आर्थगक विकास में सहयोग प्रिान करते ह।ैं डीजीसीए (नागर विमानन महावनिशे ालय) वनयवमत
वनगरानी, औचक जांच और ऑवडर्ट सवहत सुिढ़ृ वनरीक्षण प्रणाली के माध्यम स े विमानन
संरक्षा सुवनवित करता ह।ै यह वनरीक्षण के वलए िार्षगक वनगरानी योजना (एएसपी) का
अनुपालन करता ह ै और यह सुवनवित करता ह ै दक ऑवडर्ट वनष्कषों पर सत्यावपत सुधारात्मक
कारगिाई की जाए।हिाईअड्डों पर अिसंरचना सुविधाओं/यात्री सुविधाओं का उन्नयन एक सतत प्रदिया ह,ै जो
भारतीय विमानपत्तन प्रावधकरण (एएआई) या हिाईअड्डा प्रचालकों द्वारा, राज्य सरकारों के
समन्िय से, प्रचालन आिश्यकताओं, यातायात, मांग, िावणवज्यक व्यिहायगता, आदि के
आधार पर की जाती ह।ै
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