This policy document outlines initiatives and allocations related to water resource management in India. Key data points include references to the years 2011, 1986-2022, 2024, 2025, 2017-2021 and 2021-2026. Specific financial figures mentioned are 2.45, 500, 2.477, 2.914, 5.174 and 1.840 (potentially referring to monetary values in an unspecified currency). An allocation of 7260.50 is noted for 2025. The document also references numerical values such as 788, 24, 421, 3, 350, 150, and 200. The policy alludes to activities during the XI and XII periods, with a focus on the years 2017-2021 termed " ". The policy links to online resources, specifically: https:ffs.indiawater.gov.in and https:aff.indiawater.gov.in for further information. The text also references a figure of 7, without specifying context.
Key Entities Referenced
1986: Likely refers to the year 1986, potentially indicating the origin year of a policy or program
2022: Likely refers to the year 2022, potentially indicating the end year of a policy or program
2024: Likely refers to the year 2024, potentially indicating the start or target year of a policy or program
2011: Likely refers to the year 2011, potentially indicating a base year or reference point for data comparison.
XI: Roman numeral XI, likely referring to a section or chapter within a policy document.
XII: Roman numeral XII, likely referring to a section or chapter within a policy document.
2017: Likely refers to the year 2017, potentially indicating a year in a range, or start year of a policy
2021: Likely refers to the year 2021, potentially indicating the start year of a policy term
भारत सरकार
जल शक्ति मंत्रालय
जल संसाधन, नदी क्तिकास और गंगा संरक्षण क्तिभाग
लोक सभा
अतारांककत प्रश्न संख्या 788
कदनांक 24 जुलाई, 2025 को उत्तरार् थ
.....
असम में बाढ़ आपदाएँ
788. श्री सुदामा प्रसादः
क्या जल शक्ति मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे ककिः
(क) क्या सरकार न े असम में बार-बार आने वाली बाढ़ आपदाओं पर ध्यान कदया है, जिनस े
2011 से 2.45 मममलयन से अमिक लोग प्रभाववत हुए हैं और 500 से अमिक तटबंि टूट
गए हैं;
(ख) यकद हााँ, तो क्या सरकार ने संबंमित अमिकाररयों की इस स्वीकारोवि पर भी ध्यान कदया
है कक भंगुर तटबंिों, अमतक्रमणों, वनों की कटाई और खराब िल मनकासी ने इन संकटों
को और बढ़ा कदया है और यकद हााँ, तो तत्संबंिी ब्यौरा क्या है;
(ग) क्या सरकार ने वबहार, उत्तर प्रदेश और पजिम बंगाल िैसे अन्य बाढ़-प्रवण राज्यों में इसी
तरह के खतरों का आकलन ककया है और यकद हााँ, तो तत्संबंिी ब्यौरा क्या है और चालू
मानसून में ककतने तटबिं ववफल हुए हैं और ककतने टूटे हैं;
(घ) सरकार की अल्पकामलक और दीघकघ ामलक बाढ़ शमन योिनाओं का ब्यौरा क्या है, जिसमें
पणिारा प्रबंिन, आर्द्घभूमम पुनरुद्धार और आिुमनक पूवघ-चेतावनी प्रणामलयों के मलए ककए
गए/ककए िा रहे उपाय शाममल हैं;
(ङ) क्या मौिूदा अस्थायी तटबंि नीमतयों को बदलने के मलए राष्ट्रीय बेमसन-स्तरीय बाढ़ प्रबंिन
प्रामिकरण पर ववचार ककया िा रहा है और यकद हााँ, तो तत्संबंिी ब्यौरा क्या है; और
(च) प्राकृमतक िल मनकासी को सुदृढ़ बनाने, आर्द्घभूमम की सुरक्षा करने और संवेदनशील क्षेत्रों
में सतत ् नदी प्रवाह उपाय सुमनजित करने के मलए क्या समय-सीमा मनिारघ रत की गई है
और ककतनी िनरामश आवंकटत की गई है?
उत्तर
जल शक्ति राज्य मंत्री
(श्री राज भूषण चौधरी)
(क) से (ग): असम हर साल अलग-अलग स्तर पर बाढ़ से प्रभाववत होता है। तटबंिों की ब्रीच,
अमतक्रमण, वनों की कटाई और खराब िल मनकासी के कारण यह समस्या और भी बढ़ िाती है।वबहार, उत्तर प्रदेश और पजिम बंगाल भी अलग-अलग स्तर पर इसी तरह की समस्याओं का
सामना करते हैं।
सैटेलाइट इमेि (1986-2022) पर आिाररत 'भारत में बाढ़ के कारण प्रभाववत क्षेत्र का
आकलन (2024)' पर केंर्द्ीय िल आयोग की ररपोटघ के अनुसार, असम, वबहार, उत्तर प्रदेश और
पजिम बंगाल राज्यों में बाढ़ प्रभाववत क्षेत्रों का कुल क्षेत्रफल क्रमशिः 2.477 मममलयन हेक्टेयर
(एमएचए), 2.914 एमएचए, 5.174 एमएचए और 1.840 एमएचए है।
कटाव मनयंत्रण सकहत बाढ़ प्रबंिन राज्यों के काय घ क्षेत्र में आता है और तटबंिों की
ववफलताओं और ब्रीच की संख्या के आाँकडे केंर्द्ीय स्तर पर नहीं रखे िाते हैं। असम सरकार न े
सूमचत ककया कक वर्घ 2011 से, असम के ववमभन्न जिलों में कुल 421 तटबंिों में ब्रीच पाई गई
है। मौिूदा मानसून के दौरान, कुल 3 बार ब्रीच ररकॉर्घ ककए गए हैं, जिन्हें तुरंत बंद कर कदया
गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सूमचत ककया है कक इस मानसून में तटबंि में कोई ब्रीच नहीं आई
है।
(घ) से (च): बाढ़ प्रबंिन और कटाव-रोिी योिनाएाँ संबंमित राज्य सरकारों द्वारा अपनी प्राथममकता
के अनुसार तैयार और कायाघजन्वत की िाती हैं। केंर्द् सरकार, तकनीकी मागदघ शनघ प्रदान करके और
साथ ही, गंभीर क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंिन के मलए प्रोत्साहनात्मक ववत्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों
के प्रयासों में संपूररत करती है।
एकीकृत बाढ़ प्रबंिन दृविकोण का उद्देश्य संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों का
वववेकपूण घ ममश्रण अपनाना है ताकक आमथकघ लागत पर बाढ़ से होने वाले नुकसान से उमचत सुरक्षा
प्रदान की िा सके।
बाढ़ प्रबंिन के संरचनात्मक उपायों को सुदृढ़ करने के मलए, मंत्रालय ने XI और XII योिना
के दौरान नदी प्रबंिन, बाढ़ मनयंत्रण, कटाव-रोिी, िल मनकासी ववकास, समुर्द् में कटाव-रोिी आकद
कायों के मलए राज्यों को केंर्द्ीय सहायता प्रदान करने हेतु बाढ़ प्रबंिन कायक्रघ म (एफएमपी)
कायाघजन्वत ककया था िो बाद में वर् घ 2017-21 की अवमि के मलए "बाढ़ प्रबंिन और सीमावती
क्षेत्र कायक्रघ म" (एफएमबीएपी) के एक घटक के रूप में िारी रहा और सीममत पररव्यय के साथ
वर् घ 2021-2026 के दौरान आगे बढ़ाया गया। एफएमपी घटक के अंतगतघ ववमभन्न राज्यों को माचघ
2025 तक कुल 7260.50 करोड रुपये की केंर्द्ीय सहायता िारी की िा चुकी है।
बाढ़ प्रबंिन के एक गैर-संरचनात्मक उपाय के रूप में, केंर्द्ीय िल आयोग (सीर्ब्ल्यूसी)
मचजन्हत स्थानों पर संबंमित राज्य सरकारों को 24 घंटे तक के अमिम समय के साथ अल्पकामलक
बाढ़ पूवाघनुमान िारी करता है। सीर्ब्ल्यूसी उमचत रूप से िलाशय ववमनयमन करने के मलए चयमनत
िलाशयों में अंतवाघह पवू ाघनुमान भी िारी करता है। इस समय, सीर्ब्ल्यूसी द्वारा मानक संचालन
प्रकक्रया के अनुसार 350 स्टेशनों (150 अंतवाघह पूवाघनुमान स्टेशन + 200 लेवल पूवाघनुमान स्टेशन)
पर बाढ़ पूवाघनुमान िारी ककए िाते हैं। यह नेटवकघ राज्य सरकारों/पररयोिना प्रामिकाररयों के
परामश घ से स्थावपत ककया गया है। ये पूवाघनुमान https://ffs.india-water.gov.in नामक एकसमवपतघ वेबसाइट के माध्यम से प्रसाररत ककए िाते हैं। स्थानीय प्रामिकाररयों को लोगों द्वारा स्थान
को खाली कराने और अन्य उपचारात्मक उपाय करने के मलए अमिक समय प्रदान करने हेतु,
केंर्द्ीय िल आयोग ने सभी पूवाघनुमान केंर्द्ों के मलए 7-कदन की अमिम बाढ़ पूवाघनुमान एर्वाइिरी
हेतु वर्ाघ-रनऑफ गजणतीय मॉर्मलंग पर आिाररत बेमसन-वार बाढ़ पूवाघनुमान मॉर्ल ववकमसत ककया
है। इसका प्रसार https://aff.india-water.gov.in नामक एक समवपतघ वेबसाइट के माध्यम से
ककया िाता है। केंर्द्ीय िल आयोग की बाढ़ पूवाघनुमान सेवा को संबंमित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों
के राज्य आपदा प्रबंिन प्रामिकरण (एसर्ीएमए) को िारी ककए गए एकीकृत अलटघ प्रसार
प्लेटफॉमघ, कॉमन अलटघ प्रोटोकॉल (सीएपी) के साथ भी एकीकृत ककया गया है।
वाटरशेर् प्रबंिन और आर्द्घभूमम पुनस्थाघपन क्षेत्र सकहत बाढ़ मैदान जोमनंग, बाढ़ मनयंत्रण
का एक प्रभावी तरीका है जिसमें बाढ़ िल भंर्ारण और महत्वपूण घ पाररजस्थमतकी तंत्र पुनस्थाघपन
की क्षमता है। बाढ़ मैदान जोन में बाढ़ की पुनिः आने की अवमि के अनुसार क्षेत्रों का सीमांकन
ककया िाता है, जिसमें आम िनता के स्वास््य, सुरक्षा और संपवत्त की रक्षा करने के उद्देश्य से
ववमभन्न उपयोगों हेतु भूमम का वगीकरण भी शाममल है। मंत्रालय द्वारा राज्यों को बाढ़ मैदानों और
उनके जोमनंग का वैज्ञामनक मूल्यांकन करने में सक्षम बनाने के मलए, बाढ़ मैदान जोमनंग पर एक
तकनीकी कदशामनदेश तैयार ककया गया है।
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