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Official Transcriptसंख्या-38/2026/604/22-2-2026-7(296)/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ,टिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- जिला कारागार, मेरठ में निरूद्ध सिद्धदोष sect फारूख पुत्र श्री इब्राहिम, निवासी जनपद-मेरठ की फार्म-ए/ल्राईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के...
संख्या-38/2026/604/22-2-2026-7(296)/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ,टिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- जिला कारागार, मेरठ में निरूद्ध सिद्धदोष sect फारूख पुत्र श्री इब्राहिम, निवासी जनपद-मेरठ की फार्म-ए/ल्राईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में। महोदय, उपर्युक्त विषयक वरिष्ठ अधीक्षक(मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उ0प्र0, लखनऊ के पत्र संख्या-0576/प्रोवेशन-3-फार्म-ए/(एम-09.03.2026) दिनांक-23.03.2026 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें। 2- उक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार जिला कारागार, मेरठ मेँ निरूद्ध सिद्धदोष gc] फारूख पुत्र श्री इब्राहिम, जो अकबरपुर शादत, थाना-बहसूमा, जनपद-मेरठ का निवासी है। गल्नत सम्बंध होने की रंजिश को लेकर बंदी ने दिनांक 05.02.2006 को अपने 06 सहअभियुक्कतों के साथ मिलकर शराफत व सोनी नामक 02 लोगों की हत्या कर दी। उक्त अपराध हेतु बन्दी को एस०्टी० नं0- 358/2006, भाग्द०वि० की emt-47, 302/449 में माननीय न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश अष्टाचार निवारण, मेरठ के आदेश दिनांक 08.07.20i3 द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के आदेश दिनांक 07.04.2025 द्वारा बंदी की अपील निर्णीत करते हुये आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा गया है। बन्दी द्वारा दिनांक 0.0.2025 तक अपरिहार i5 वर्ष, 04 माह, 22 दिन तथा सपरिहार i8 वर्ष, 00 माह, 22 दिन की सजा भोगी गयी है। 3- जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुत्रिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ द्वारा शासनादेश संख्या 658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो AFA ARAL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एल० sto 47 A Alo उच्चतम नयायात्रय द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। उक्त आख्या में बंदी द्वारा किया गया अपराध समाज को प्रभावित करने एवं समाज A भय व्याप्त करने की श्रेणी में आने, भविष्य में अपराध करने की संभावना से इंकार नही किये जा सकने, जेल A flea रहेगा तो समाज मेँ शांति बनी रहेगी व समाज के लिये हितकारी होने के इष्टिगत समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गई है। 4- प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में गलत सम्बंध होने की रंजिश को लेकर बंदी ने दिनांक
05.02.2006 को अपने 06 सहअभियुकतों के साथ मिल्रकर शराफत व सोनी नामक 02 लोगों की हत्या करने का जघन्य अपराध कारित किया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा स्थानीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों का सम्यक परीक्षण कर माननीय उच्चतम FAs द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या A समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिल्रक्षित नही है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिला मजिस्ट्रेट की आख्या / संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन Vac-938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी फारूख पुत्र श्री इब्राहिम को फार्म-ए/ल्राईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |5-. अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि जिला कारागार, मेरठ में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी फारूख (बन्दी संख्या-434/2025) पुत्र श्री इब्राहिम, निवासी जनपद-मेरठ को यू०पी० प्रिजनर्स रिल्रीज आंन प्रोबेशन एक्ट, 938 की धारा-2 के प्राविधानों के अन्तर्गत फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त sect की फार्म-ए/लाइसेंस पर मुक्ति सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए पर शासन के आदेश अंकित करके एतददवारा वापस ब्रौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें। संल्रग्नक: यथोपरि। (बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त are सहित) भवदीय, कमलेश कुमार उप सचिव। FAT-38/2026/604()/22-2-2026 तददिनांक...
प्रतित्रेषि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- - जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ। 2- वरिष्ठ अधीक्षक, जिला कारागार, मेरठ। 3- निजी सचिव, AO Fal, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 को AIO मंत्री जी के सूचनार्थ। 4- निजी सचिव, AIO राज्य मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 को AO AAT जी के सूचनार्थ। 5- गार्ड फाईलत। आज्ञा से, अभय कुमार त्रिपाठी अनु सचिव | l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश HAT-738/2026/604/22-2-2026-7(296)/2026 दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 का संलग्नक सरकार के आदेश जिला कारागार, मेरठ मैं निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी फारूख पुत्र श्री इब्राहिम, जो अकबरपुर शादत, थाना-बहसूमा, जनपद-मेरठ का निवासी है। गत्रत सम्बंध होने की रंजिश को लेकर बंदी ने दिनांक
05.02.2006 को अपने 06 सहअभियुक्तों के साथ मिल्रकर शराफत व सोनी नामक 02 लोगों की हत्या कर दी। उक्त अपराध हेतु Feel को एसण्टी० नं0- 358/2006, भा०्द०्वि० की UNT-I47, 302/i49 A माननीय न्यायात्रय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, मेरठ के आदेश दिनांक 08.04.203 द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के आदेश दिनांक 07.04.2025 द्वारा बंदी की अपील निर्णीत करते हुये आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा गया है। बन्दी GANT दिनांक (0.0.2025 तक अपरिहार 5 वर्ष, 04 माह, 22 दिन तथा सपरिहार i8 वर्ष, 00 माह, 22 दिन की सजा भोगी गयी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, मेरठ द्वारा शासनादेश संख्या 658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण ARAL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रिग्एल० sto 447 A Alo उच्चतम raed द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। उक्त आख्या में बंदी द्वारा किया गया अपराध समाज को प्रभावित करने एवं समाज A भय व्याप्त करने की श्रेणी में आने, भविष्य में अपराध करने की संभावना से इंकार नही किये जा सकने, जेल में निरूद्ध रहेगा तो समाज मेँ शांति बनी रहेगी व समाज के लिये हितकारी होने के इष्टिगत समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गई है। प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में गलत सम्बंध होने की रंजिश को लेकर बंदी ने दिनांक
05.02.2006 को अपने 06 सहअभियुकतों के साथ मिल्रकर शराफत व सोनी नामक 02 लोगों की हत्या करने का जघन्य अपराध कारित किया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा स्थानीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों का सम्यक परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायात्रय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या A समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिल्रक्षित नहीं है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिला मजिस्ट्रेट की आख्या / संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन Vec-938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी फारूख पुत्र श्री इब्राहिम को फार्म-ए/ल्ाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। उक्त के दृष्टिगत सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा बन्दी की फार्म-ए/लाइसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है। कमलेश कुमार उप सचिव। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |