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Official TranscriptHEAM-362/2026/6 6/22-2-2026-7(587)/2024 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ टदिनांक 06 अक्टूबर 2026 विषय:- केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी सत्यवीर पुत्र श्री सरनामी, निवासी जनपद-आगरा की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के संबंध...
HEAM-362/2026/6 6/22-2-2026-7(587)/2024 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ टदिनांक 06 अक्टूबर 2026 विषय:- केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी सत्यवीर पुत्र श्री सरनामी, निवासी जनपद-आगरा की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के संबंध में। महोदय, उपर्युक्त विषयक वरिष्ठ अधीक्षक (मु0) के पत्र संख्या-0576/प्रोवेशन-3-फार्म-ए/(एम-09.03.2026) दिनांक-23.03.2026 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें। 2- उक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये WAN केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी सत्यवीर पुत्र श्री सरनामी, ग्राम-बुर्ज पैंत खेडा,थाना-चन्दौली, जनपद-आगरा का निवासी है। दिनांक 08.05.2003 को लगभग 2:00 बजे लाखन सिंह अपने पिता कारे व काका विरम सिंह के साथ अपने बाड़े में मौजूद था, तभी अचानक सत्यवीर सहित लगभग एक दर्जन हमलावर आग्नेयास्त्रों से सुसज्जित होकर उसके बाड़े में घुस आये तथा ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर कारे व विरम सिंह को बाड़े में मार दिया था। लाखन सिंह ने बाड़े में ही बने कमरे में घुसकर अन्दर से किवाड़ बंद कर लिये थे तो हमलावरों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर लाखन सिंह सहित 03 व्यक्तियों की हत्या कर दी, उक्त अपराध हेतु बन्दी को सत्र परीक्षण संख्या- 529/2003 में भा0द0वि0 की धारा- 48, 452, 302/49, 307/49 के अन्तर्गत मा0 न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट AeA-0l, आगरा के आदेश feeih-07.2.2004 द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया गया। मा0 उच्च न्यायालय के आदेश Metr-27.07.2008 को sect की अपील को निर्णीत करते हुए आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा गया। मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक-03.08.2009 को बन्दी की अपील को निर्णीत करते हुए आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा गया, बंदी द्वारा दिनांक (8.47.2025 तक अपरिहार 2 वर्ष 4 माह 29 दिन तथा सपरिहार 27 वर्ष (/ माह 8 दिन की सजा भोगी गयी है। 3- जिला प्रोबेशन अधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट, आगरा द्वारा शासनादेश संख्या 658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण नास्कर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एल० sto 47 A Alo उच्चतम न्यायालय cant किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। Sea आख्या में बंदी द्वारा किया गया अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करने, भविष्य में अपराध करने से इंकार नहीं किये जाने, पुनः अपराध करने में अशक््त नहीं होने, जेल में और निरुद्ध करने का सार्थक प्रयोजन होने, बंदी की समाजिक आर्थिक दशा समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नहीं होने के दृष्टिगत समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। जिला मजिस्ट्रेट, आगरा द्वारा बंदी का अभिभावक उपयुक्त पाया गया है, किन्तु समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गई है। 4- प्रोवेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में दिनांक 08.05.2003 को लगभग 2:00 बजे लाखन सिंह अपने पिता कारे व काका विरम सिंह के साथ अपने बाड़े में मौजूद था, तभी अचानक सत्यवीर सहित लगभग एक दर्जन हमलावर आग्नेयास्त्रौ से सुसज्जित होकर उसके बाड़े में घुस आये तथा ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर कारे व विरम सिंह को बाड़े में मार दिया था। लाखन सिंह ने बाड़े में ही बने कमरे में घुसकर अन्दर से किवाड़ बंद कर लिये थे तो हमलावरों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर लाखन सिंह सहित 03 व्यक्तियों की हत्या करने जैसा अपराध कारित किया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट, द्वारा स्थानीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों का सम्यक परीक्षण कर माननीय उच्चतम sarees द्वारा निर्दिष्ट 05 विन्दुओं की आख्या 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |में समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से संबंधित ऐसा कोई तथ्य aes नहीं है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट, की आख्या/संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। बन्दी के अपराध की गम्भीरता एवं जधन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेसन एक्ट 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदीष ddl सत्यवीर पुत्र सरनामी को फार्म-ए लाइसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। 5- उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ केन्द्रीय SAVIN, आगरा में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी सत्यवीर (sect संख्या-20642) पुत्र श्री सरनामी, निवासी जनपद-आगरा के फार्म-ए/लाईसेंस पर यू0पी0 प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन VFC,938 की धारा-2 के प्राविधानों के अन्तर्गत सम्यक् विचारोपरान्त उसे मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त बन््दी की लाइसेन्स पर मुक्ति श्री राज्यपाल द्वारा sedan कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए/लाईसैंस पर शासन के आदेश अंकित करके एतददवारा वापस लौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें। संलग्नक: यथोपरि। (बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त पत्रादि सहित) भवदीय, कमलेश कुमार उप सचिव। EEA-362/2026/66/22-2-2026 तददिनांक प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- |- जिला मजिस्ट्रेट, आगरा। 2- वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार, आगरा। 3- निजी सचिव, AIO Aa, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को माए मंत्री जी के सूचनाथ। 4- निजी सचिव, माए राज्यमंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को माए राज्यमंत्री जी के सूचनाथ। 5- गार्ड Wisc आज्ञा से, अभय कुमार त्रिपाठी अनु सचिव। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश ALAT- 362/2026/6(6/22-2-2026-7(587)/2027 दिनांक 06 अक्टूबर, 2026 का संलग्नक सरकार के आदेश केन्द्रीय कारागार, आगरा में निरूदध सिद्धदोष बंदी सत्यवीर पुत्र श्री सरनामी, ग्राम-बुर्ज पैंत खेडा,थाना- चन्दौली, जनपद-आगरा का निवासी है। दिनांक 08.05.2003 को लगभग 2:00 बजे लाखन सिंह अपने पिता कारे व काका विरम सिंह के साथ अपने बाड़े में मौजूद था, तभी अचानक सत्यवीर सहित लगभग एक दर्जन हमलावर आग्नेयास्त्रों से सुसज्जित होकर उसके बाड़े में घुस आये तथा ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर कारे व विरम सिंह को बाड़े में मार दिया था। लाखन सिंह ने बाड़े में ही बने कमरे में घुसकर अन्दर से किवाड़ बंद कर लिये थे तो हमलावरों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर लाखन सिंह सहित 03 व्यक्तियों की हत्या कर दी, उक्त अपराध हेतु sect को सत्र परीक्षण संख्या- 529/2003 में भा0द0वि0 की em-48, 452, 302/449, 307/49 के अन्तर्गत मा0 न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-0।, आगरा के आदेश feaiH-07.42.2004 द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया गया। AO उच्च न्यायालय के आदेश fecth-27.0.2008 को acct की अपील को निर्णीत करते हुए आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा गया। मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक-
03.08.2009 को seat की अपील को निर्णीत करते हुए आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा गया, बंदी द्वारा दिनांक 8.4.2025 तक अपरिहार 2 वर्ष माह 29 दिन तथा सपरिहार 27 वर्ष ( माह 8 दिन की सजा भोगी गयी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट, आगरा द्वारा शासनादेश संख्या 7658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण AL बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एल० sto 47 A Alo उच्चतम न्यायालय cant किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। Sea आख्या A बंदी द्वारा किया गया अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करने, भविष्य में अपराध करने से इंकार नहीं किये जाने, पुनः अपराध करने में अशक्त नहीं होने, जेल में और निरुद्ध करने का सार्थक प्रयोजन होने, बंदी की समाजिक आर्थिक दशा समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नहीं होने के दृष्टिगत समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। जिला मजिस्ट्रेट, आगरा द्वारा बंदी का अभिभावक उपयुक्त पाया गया है, किन्तु समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गई है। प्रोवेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में दिनांक 08.05.2003 को लगभग 2:00 बजे लाखन सिंह अपने पिता कारे व काका विरम सिंह के साथ अपने बाड़े में मौजूद था, तभी अचानक सत्यवीर सहित लगभग एक दर्जन हमलावर आग्नेयास्त्रौ से सुसज्जित होकर उसके बाड़े में घुस आये तथा ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर कारे व विरम सिंह को बाड़े में मार दिया था। लाखन सिंह ने बाड़े में ही बने कमरे में घुसकर अन्दर से किवाड़ बंद कर लिये थे तो हमलावरों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर लाखन सिंह सहित 03 व्यक्तियों की हत्या करने जैसा अपराध कारित किया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट, दवारा स्थानीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों का सम्यक परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्टिष्ट 05 विन्दुओं की आख्या में समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से संबंधित ऐसा कोई तथ्य परिल्क्षित नहीं है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट, की आख्या/संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। बन्दी के अपराध की गम्भीरता एवं जधन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेसन एक्ट 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदीष ddl सत्यवीर पुत्र सरनामी को फार्म-ए लाइसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। उक्त के दृष्टिगत सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा बंदी की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है। कमलेश कुमार उप सचिव। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |