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Official TranscriptEAT-377/2026/034/22-2-2026-7(59 )/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ,दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- जिला PRR, बुलन्दशहर A freq सिद्धदोष बन्दी प्रेम शंकर पुत्र श्री सूरजपात्र, निवासी जनपद- बुलन्दशहर की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के...
EAT-377/2026/034/22-2-2026-7(59 )/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव, उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ,दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- जिला PRR, बुलन्दशहर A freq सिद्धदोष बन्दी प्रेम शंकर पुत्र श्री सूरजपात्र, निवासी जनपद- बुलन्दशहर की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के सम्बन्ध में। महोदय, उपर्युक्त विषयक उप महानिरीक्षक(मु0), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उ0प्र0, लखनऊ के पत्र संख्या-20825/प्रो०अनु ०(7)-फार्म-ए सीमित PRTANA5/2026 (बैठक दिनांक-20.04.2026) दिनांक-26-05- 2026 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें। 2- उक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार जिला कारागार, बुलन्दशहर में निरूद्ध सिद्धदोष बन््दी प्रेम शंकर पुत्र श्री Woes, जो ग्राम- रूपवास पचगई, थाना-खुर्जा देहात, जनपद- बुलन्दशहर का निवासी है। दहेज में Aegl कार व 05 लाख रूपये की अतिरिक्त मांग पूरी न होने पर दिनांक-27.03.209 को अभियुक्त द्वारा अपने 02 सहअभियुक्तों के साथ मिलकर अपनी पत्नी की मार पीटकर गला दबाकर हत्या करने का अपराध कारित किया गया। उक्त अपराध हेतु बन्दी को एस०्टी० नं0- 346/209, भाग्द०्वि० की धारा- 304बी, 498ए व 4 डी०पी०एक्ट A Alo न््यायात्रय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायात्रय कोर्ट सं0-02 बुलन्दशहर के आदेश feeih-47.04.2023 cant i4 ay के कारावास से दण्डित किया गया। बन्दी द्वारा दिनांक 37.08.2025 तक अपरिहार 06 वर्ष, 04 माह, 28 दिन तथा सपरिहार 07 वर्ष, 00 माह, 74 दिन की सजा भोगी गयी है। 3- जिल्रा प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर द्वारा शासनादेश संख्या 658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण नास्कर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एल०जे0 447 A Alo उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर sear प्रेषित की गई है। उक्त आख्या A बन्दी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किये बिना व्यक्ति विशेष तक सीमित अपराध की श्रेणी में नही आने, बंदी द्वारा भविष्य में अपराध करने का अवसर होने, बन्दी द्वारा पुनः अपराध करने में AMF नही होने, बन्दी को जेल A flea रखने का सार्थक प्रयोजन होने, बन्दी के परिवार की सामाजिक आर्थिक दशा बन्दी की समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नही होने, की आख्या अंकित करते हुए समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |4- प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में दहेज में सेन्ट्रो कार व 05 लाख रूपये की अतिरिक्त मांग पूरी न होने पर feeth-27.03.209 को अभियुक्त द्वारा अपने 02 सहअभियुक्क्तों के साथ मित्रकर अपनी पत्नी की मार Went गला दबाकर हत्या करने का अपराध कारित किया al जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, द्वारा सम्यक् परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नहीं है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुत्रिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, की आख्या/संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार sect cant किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन एक्ट- 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष प्रेम शंकर पुत्र श्री सूरजपात्र को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। 5-. अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ है कि जिल्ला कारागार, बुलन्दशहर में निरूद्थ सिद्धदोष बन्दी प्रेम शंकर (बन्दी WEAT-250(/2023) पुत्र श्री सूरजपाल, निवासी जनपद- बुल्न्दशहर को Boro प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन vec, (938 की धारा-2 के प्राविधानों के अन्तर्गत फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त बन्दी की फार्म-ए/लाइसेंस पर मुक्ति सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल द्वारा sedan कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए पर शासन के आदेश अंकित करके एतददवारा वापस ल्रौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें।
Hosa: यथोपरि। (बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त are सहित) भवदीय, कमलेश कुमार उप सचिव। PAT-377/2026/034()/22-2-2026 तटदिनांक... प्रतित्रेषि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- I- जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर। 2- अधीक्षक, जिला कारागार, बुल्न्दशहर। 3- निजी सचिव, AIO Aa, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 को मा0 मंत्री जी के सूचनार्थ। 4- निजी सचिव, AIO राज्य मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 को AIO AAT जी के सूचनार्थ। 5- गार्ड फाईल्। आज्ञा से, अभय कुमार त्रिपाठी अनु सचिव। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश AEAT-7377/2026/034/22-2-2026-7(59)/2026 दिनांक: 06 अक्टूबर, 2026 का संलग्नक सरकार के आदेश जिला कारागार, बुलन्दशहर में निरूद्ध सिद्धदोष बन्दी प्रेम शंकर पुत्र श्री सूरजपाल, जो ग्राम- रूपवास पचगई, थाना-खुर्जा देहात, जनपद-बुलन्दशहर का निवासी है। दहेज में सेन्ट्रो कार व 05 लाख रूपये की अतिरिक्त मांग पूरी न होने पर fecth-27.03.209 को अभियुकत द्वारा अपने 02 सहअभियुक्कतों के साथ मिलकर अपनी पत्नी की मार पीटकर गला दबाकर हत्या करने का अपराध कारित किया TA] SFA अपराध हेतु Teel को एस०्टी० नं0- 346/209, भा०्ठ०वि० की धारा- 304बी, 498ए व 4 डी०्पी०एक्ट मेँ Alo न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न््यायात्रय कोर्ट सं0-02 बुलन्दशहर के आदेश feateh-7.04.2023 cant 4 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। बन्दी cant दिनांक
37.08.2025 तक अपरिहार 06 वर्ष, 04 माह, 28 दिन तथा सपरिहार 07 वर्ष, 00 माह, 4 दिन की सजा भोगी गयी है। जिला प्रोवेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, बुलन्दशहर GANT शासनादेश संख्या 7658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण नास्कर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 क्रि०एलण्जे0 47 A Alo उच्चतम न्यायात्रय द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। उक्त आख्या में बन्दी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित किये बिना व्यक्ति विशेष तक सीमित अपराध की श्रेणी में नही आने, बंदी द्वारा भविष्य A अपराध करने का अवसर होने, बन्दी द्वारा पुनः अपराध करने में AMF नही होने, बन्दी को जेल A flea रखने का सार्थक प्रयोजन होने, बन्दी के परिवार की सामाजिक आर्थिक दशा बन्दी की समयपूर्व रिहाई हैतु उपयुक्त नहीं होने, की आख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में दहेज में सेन्ट्रो कार व 05 लाख रूपये की अतिरिक्त मांग पूरी न होने पर feeih-27.03.20I9 को अभियुक्त द्वारा अपने 02 सहअभियुक्तों के साथ मिलकर अपनी पत्नी की मार पीटकर गला दबाकर हत्या करने का अपराध कारित किया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, द्वारा सम्यक् परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या मेँ समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिल्क्षित नहीं है, जिसके आधार पर जिल्रा Weert अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, की आख्या/संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार sect द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन एक्ट- 938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष प्रेम शंकर पुत्र श्री सूरजपात्र को फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। उक्त के दृष्टिगत सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपात्र द्वारा बन्दी की फार्म-ए/लाइसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है। कमलेश कुमार उप सचिव। l- यह शासनादेशइलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http: //shasanadesh.up.gov.ine सत्यापित की जा सकती है |