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Official TranscriptHAMT-364/2026/075/22-2-2026-7(487)/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ दिनांक 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में निरूद्थ सिद्धदोष बंदी शिवकुमार पुत्र श्री राजाराम, निवासी जनपद-हरदोई की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के...
HAMT-364/2026/075/22-2-2026-7(487)/2026 प्रेषक, कमलेश कुमार, उप सचिव उत्तर प्रदेश शासन। सेवा में, पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवायें, उत्तर प्रदेश, लखनऊ। कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 लखनऊ दिनांक 06 अक्टूबर, 2026 विषय:- केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में निरूद्थ सिद्धदोष बंदी शिवकुमार पुत्र श्री राजाराम, निवासी जनपद-हरदोई की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समयपूर्व रिहाई के संबंध में। महोदय, उपर्युक्त विषयक उप महानिरीक्षक (HO) के पत्र संख्या-20825/प्रो0अनु0(7)-फार्म-ए सीमित ARTA 5/ 2026(बै0-20.04.2026) दिनांक-26.05.2026 का कृपया संदर्भ ग्रहण करें। 2- उक्त पत्र द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रस्तावानुसार केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी शिवकुमार पुत्र श्री राजाराम, अत्ता पुरवा, थाना-बेहटा गोकुल, जनपद-हरदोई का निवासी है। दिनांक 07/08.0.20i5 की रात्रि को अभियुक्त द्वारा 02 अन्य सहअभियुक्क्तों के साथ मित्रकर पीड़िता के छप्पर में जबरदस्ती घुसकर लूटपाट एवं पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्संग करने का अपराध कारित किया गया, उक्त अपराध हेतु बन्दी को सत्र परीक्षण संख्या- 44/20i6 में भा0द0वि0 की धारा- 376डी, 392, 44, 457 के अंतर्गत मा0 न्यायालय अपर सत्र नयायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट, हरदोई, के आदेश दिनांक 34.07.20i8 द्वारा 22 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। बन्दी की अपील मा0 उच्च न्यायालय लखनऊ, खण्डपीठ लखनऊ के समक्ष विचाराधीन है, बंदी द्वारा दिनांक 29.09.2025 तक अपरिहार 09 वर्ष, 0 माह, 04 दिन तथा सपरिहार / वर्ष, 0 माह, 04 दिन की सजा भोगी गयी है। 3- जिला प्रोवेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, हरदोई द्वारा शासनादेश संख्या 658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण नास्कर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 कि०एल० sto 447 A मा0 उच्चतम न्यायालय cant निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। Sea आख्या मेँ बंदी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करते हुए सीमित अपराध की श्रेणी में नहीं आने, बंदी cant भविष्य में अपराध करने से इंकार नहीं किये जा सकने, बन्दी के आपराधिक प्रवृत्ति का होने व बन्दी को जेल में निरुदध रखने का सार्थक प्रयोजन होने एवं बन्दी के परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक दशा बन्दी की समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नही होने की आख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। 4-..प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में दिनांक 07/08.0.20i5 की रात्रि को अभियुक्त द्वारा 02 अन्य सहअभियुक्तों के साथ मिलकर पीड़िता के छप्पर में जबरदस्ती घुसकर लूटपाट एवं पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्संग करने का अपराध कारित किया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सम्यक् परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय gant निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नहीं है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिला मजिस्ट्रेट की आख्या/संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन vEc-938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी शिवकुमार पुत्र राजाराम को फार्म- ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |5- उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में मुझे यह सूचित करने का निदेश हुआ केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी शिवकुमार (बन्दी संख्या-29687) पुत्र श्री राजाराम, निवासी जनपद-हरदोई के फार्म- ए/लाईसेंस पर यू0पी0 प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन Ve, 938 की धारा-2 के प्राविधानों के अन्तर्गत सम्यक् विचारोपरान्त उसे मुक्ति का पात्र नहीं पाया गया है। अतएव उक्त बन््दी की लाइसेन्स पर मुक्ति श्री राज्यपाल ट्वारा अस्वीकार कर दी गयी है। तदनुसार उसके फार्म-ए/लाईसेंस पर शासन के आदेश अंकित करके एतददवारा वापस लौटाया जा रहा है। कृपया प्राप्ति स्वीकार करते हुए शासन के निर्णय से बन्दी को तत्काल अवगत कराने का कष्ट करें। संलग्नक: यथोपरि। (बन्दी का फार्म-ए एवं समस्त पत्रादि सहित) भवदीय, कमलेश कुमार उप सचिव। EAT-364/2026/075/22-2-2026 तद॒दिनांक प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:- I- जिला मजिस्ट्रेट, हरदोई। 2- वरिष्ठ अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़। 3- निजी सचिव, माए मंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को AO AA जी के सूचनार्थ। 4- निजी सचिव, AIO राज्यमंत्री, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उ0प्र0 शासन को माए राज्यमंत्री जी के सूचनार्थ। 5- गार्ड फाइल। आज्ञा से, अभय कुमार त्रिपाठी अनु सचिव 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |शासनादेश AEA-364/2026/075/22-2-2026-7(487)/2026 दिनांक 06 अक्टूबर, 2026 का संलग्नक सरकार के आदेश केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में निरूद्ध सिद्धदोष बंदी शिवकुमार पुत्र श्री राजाराम, अत्ता Wal, थाना- बेहटा Apa, जनपद-हरदोई का निवासी है। दिनांक 07/08.0.20i5 की रात्रि को अभियुक्त द्वारा 02 अन्य सहअभियुक्क्तों के साथ मिलकर पीड़िता के छप्पर में जबरदस्ती घुसकर लूटपाट एवं पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्संग करने का अपराध कारित किया गया, उक्त अपराध हेतु Sed) को सत्र परीक्षण संख्या- 44/20i6 में भा0द0वि0 की धारा- 376डी, 392, 44, 457 के अंतर्गत AIO न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट, हरदोई, के आदेश दिनांक 37.07.20i8 cant 22 वर्ष के कारावास से दण्डित किया गया। बन्दी की अपील मा0 उच्च न्यायालय लखनऊ, खण्डपीठ लखनऊ के समक्ष विचाराधीन है, बंदी द्वारा दिनांक 29.09.2025 तक अपरिहार 09 वर्ष, i0 माह, 04 दिन तथा सपरिहार i/ वर्ष, 40 माह, 04 दिन की सजा भोगी गयी है। जिला प्रोवेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट, हरदोई द्वारा शासनादेश संख्या 658/22-02-2004-25(94)/97, दिनांक 06.09.2004 के प्रस्तर 9-(2) के प्राविधान के अनुरूप 05 बिन्दुओं (जो लक्ष्मण नास्कर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2000 कि०एल० sto 447 में मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया) पर परीक्षण कर आख्या प्रेषित की गई है। Sea आख्या A बंदी द्वारा कारित अपराध समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करते हुए सीमित अपराध की श्रेणी में नहीं आने, बंदी cant भविष्य में अपराध करने से इंकार नहीं किये जा सकने, बन्दी के आपराधिक प्रवृत्ति का होने व बन्दी को जेल में निरुद्ध रखने का सार्थक प्रयोजन होने एवं बन्दी के परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक दशा बन्दी की समयपूर्व रिहाई हेतु उपयुक्त नही होने की आख्या अंकित करते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की गयी है। प्रोबेशन बोर्ड का अभिमत है कि प्रकरण में दिनांक 07/08.0.205 की रात्रि को अभियुक्त द्वारा 02 अन्य सहअभियुक्तों के साथ मिलकर पीड़िता के छप्पर में जबरदस्ती घुसकर लूटपाट एवं पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्संग करने का अपराध कारित किया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सम्यक् परीक्षण कर माननीय उच्चतम न्यायालय gant निर्दिष्ट 05 बिन्दुओं की आख्या में समयपूर्व रिहाई का विरोध किया गया है। प्रकरण से सम्बंधित ऐसा कोई तथ्य परिलक्षित नहीं है, जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिला मजिस्ट्रेट की आख्या/संस्तुति के प्रतिकूल अवधारणा बनाई जा सके। इस प्रकार बन्दी द्वारा किये गये अपराध की गम्भीरता एवं जघन्यता के दृष्टिगत प्रिजनर्स रिलीज आन प्रोबेशन VFe-938 की धारा-2 के अन्तर्गत सिद्धदोष बंदी शिवकुमार पुत्र राजाराम को फार्म- ए/लाईसेंस के आधार पर रिहा किये जाने की संस्तुति नहीं की गयी है। उक्त के दृष्टिगत सम्यक् विचारोपरान्त श्री राज्यपाल cant बंदी की फार्म-ए/लाईसेंस के आधार पर समय पूर्व रिहाई अस्वीकार कर दी गयी है। कमलेश कुमार उप सचिव। 4- यह शासनादेश इलेक्ट्रानिकली जारी किया गया है, अत: इस पर हस्ताक्षर की आवश्यकता नही है | 2- इस शासनादेश की प्रमाणिकता वेब साइट http://shasanadesh.up.gov.in से सत्यापित की जा सकती है |